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उत्तराखंड में भारी तबाही: चमोली में बादल फटा, रुद्रप्रयाग में अलकनंदा रिवर डेंजर लेवल पार

चमोली  उत्तराखंड में तबाही का दौर खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. चमोली जिले में एक बार फिर बादल फटा है. ये घटना तहसील देवाल के मोपाटा में हुई है, जिसमें दो लोगों के लापता होने की खबर है. प्रशासन ने राहत-बचाव कार्य शुरू कर दिया है. वहीं केदारघाटी के लवारा गांव में पुल बहने से छेनागाड़ क्षेत्र में स्थिति गंभीर हो गई है. इसके अलावा रुद्रप्रयाग जिले में अलकनंदा और मंदाकिनी भी उफान पर हैं, इनका पानी घरों में घुस कर तबाही मचा रहा है. बताया जा रहा है कि आवास के पास मौजूद गौशाला मलबे में दब गई है, जिसमें लगभग 15 से 20 जानवर दबने की सूचना है. प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी एक्स पर इसकी जानकारी दी. उन्होंने लिखा, जनपद रुद्रप्रयाग के बसुकेदार क्षेत्र के बड़ेथ डुंगर तोक और चमोली जिले के देवाल क्षेत्र में बादल फटने से मलबा आया है. इसकी वजह से कुछ परिवार फंस गए हैं. स्थानीय प्रशासन राहत और बचाव कार्य तेजी से कर रहा है. मैं लगातार अधिकारियों से संपर्क में हूं और आपदा सचिव व जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बचाव कार्य सही तरीके से और तेजी से किए जाएं." रुद्रप्रयाग जिले में अलकनंदा और मंदाकिनी के संगम पर जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. अलकनंदा नदी खतरे के निशान को पार कर गई है, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है. नदी का पानी आवासीय घरों तक पहुंच गया, जिसके चलते प्रशासन ने प्रभावित घरों को खाली कराया है. हालात इतने गंभीर हैं कि रुद्रप्रयाग का हनुमान मंदिर भी नदी में डूब गया है. वहीं, केदारघाटी के लवारा गांव में मोटरमार्ग पर बना पुल तेज बहाव में बह गया है. छेनागाड़ क्षेत्र में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है. मंदाकिनी नदी का जलस्तर 2013 जैसी भयावह स्थिति की याद दिला रहा है. आजतक से फ़ोन पर हुई बातचीत में जिलाधिकारी प्रतीक जैन का कहना है कि बसु केदार क्षेत्र में अतिव्रष्टि के बाद 4 घर बहने की सूचना है, सभी को सुरक्षित निकाल लिया गया है और स्थिति पर नज़र बनाये हुए हैं. भारी बारिश को देखते हुए रुद्रपरायग, बागेश्वर, चमोली, हरिद्वार और पिथौरागढ़ जिलों में आज स्कूलों की छुट्टी की गई है. हरिद्वार में भी भारी बारिश का दौर जारी है. यहां जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने भारी बारिश को देखते हुए सभी स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्रों में आज बंद रखने के निर्देश दिए है. पिथौरागढ़ जनपद में लगातार हो रही भारी वर्षा एवं खराब मौसम की स्थिति को देखते हुए विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए, जिलाधिकारी विनोद गोस्वामी द्वारा जनपद के समस्त शासकीय, अशासकीय एवं निजी विद्यालयों (कक्षा नर्सरी से कक्षा 12 तक) तथा आंगनबाड़ी केन्द्रों में दिनांक 29 अगस्त 2025 को अवकाश घोषित किया गया है. बता दें कि उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश से पर्वतीय जिलों में भूस्खलन और जलभराव की घटनाएं तेज़ी से बढ़ रही हैं. चमोली जिले में भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाला मलारी राष्ट्रीय राजमार्ग लाता गांव के पास अचानक पहाड़ी टूटने से बंद हो गया, जिससे एक दर्जन से अधिक गांवों का संपर्क तहसील मुख्यालय से कट गया है. यहां सड़क को खोलने का काम जारी है. मौसम विभाग ने 29 अगस्त के लिए देहरादून, बागेश्वर, नैनीताल, पिथौरागढ़ में तेज बारिश के मद्देनजर ऑरेंज अलर्ट घोषित किया है. वहीं बाकी क्षेत्रों के लिए येलो अलर्ट घोषित किया है. उत्तराखंड में अगले दो दिन अलग-अलग क्षेत्रों में भारी बारिश को देखते हुए पूरे प्रदेश को येलो अलर्ट पर रखा हुआ.

मोटापा इलाज के लिए MP में खुल रहा पहला सरकारी ओबेसिटी क्लीनिक

इंदौर एमवाय अस्पताल में ओबेसिटी क्लीनिक की स्थापना की जा रही है। यह प्रदेश का पहला सरकारी अस्पताल होगा, जहां मोटापे से पीड़ित लोगों को आधुनिक चिकित्सा और परामर्श की सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। यह क्लीनिक एक माह के अंदर ओपीडी बिल्डिंग की तल मंजिल पर प्रारंभ होगा। इसके लिए सभी आवश्यक योजनाएं तैयार कर ली गई हैं। ओबेसिटी क्लीनिक में पेट रोग विशेषज्ञ, गैस्ट्रो सर्जन, एंडोक्रेनोलाजिस्ट, एमडी मेडिसिन जैसे विशेषज्ञ उपस्थित रहेंगे। वर्तमान में मरीजों को बैरिएट्रिक सर्जरी के लिए निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है, जहां लाखों रुपये का खर्च आता है। सरकारी अस्पताल में यह सुविधा उपलब्ध होगी।   मरीजों को किया जाएगा जागरूक इलाज के साथ ही मरीजों को मोटापे से बचाव के लिए जागरूक किया जाएगा। डाइटीशियन और फिजियोथेरेपिस्ट भी इस टीम का हिस्सा होंगे। मरीजों को डाइट चार्ट, व्यायाम की विधियां और जीवनशैली सुधार के बारे में नियमित जानकारी दी जाएगी। प्रति सोमवार ओपीडी अधिकारियों ने बताया कि ओबेसिटी क्लीनिक में प्रति सोमवार को ओपीडी लगाई जाएगी। अन्य विभागों से मोटापे से ग्रस्त मरीजों को भी यहां भेजा जाएगा। मरीजों का बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स) जांचा जाएगा। साथ ही बीपी, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच के बाद उचित इलाज किया जाएगा। बच्चे और युवा भी हो रहे प्रभावित विशेषज्ञों के अनुसार, मोटापा केवल दिखावे तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, जैसे मधुमेह, रक्तचाप, हृदय रोग, हड्डियों की कमजोरी, स्लीप एपनिया और कैंसर। प्रदेश की लगभग 50 प्रतिशत आबादी किसी न किसी स्तर पर मोटापे से प्रभावित है, जिसमें बच्चों और युवाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। तेजी से बढ़ रही मोटापे की समस्या को देखते हुए एमवाय अस्पताल की ओपीडी बिल्डिंग में ओबेसिटी क्लीनिक की स्थापना की जा रही है। मरीजों को यहां जांच से लेकर सर्जरी की सुविधा फ्री मिलेगी। – डा. अरविंद घनघोरिया, डीन, एमजीएम मेडिकल कॉलेज।

प्रभारी सचिव बाढ़ प्रभावित जिलों का भ्रमण कर राहत कार्यों का करें निरीक्षण – मुख्यमंत्री साय

रायपुर : बस्तर बाढ़ प्रभावितों की हर संभव मदद करें सुनिश्चित – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय प्रभारी सचिव बाढ़ प्रभावित जिलों का भ्रमण कर राहत कार्यों का करें निरीक्षण –  मुख्यमंत्री साय  मुख्यमंत्री साय ने बाढ़ प्रभावित जिलों की समीक्षा  के दौरान दिए दिशानिर्देश रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर संभाग के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के प्रत्येक बाढ़ प्रभावित परिवार तक हर संभव मदद उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित परिवारों की पीड़ा को शीघ्र कम करना प्रशासन की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि लोगों को यह महसूस होना चाहिए कि संकट की इस घड़ी में प्रशासन उनके साथ मजबूती से खड़ा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बस्तर संभाग के बाढ़ प्रभावित जिलों—बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा के कलेक्टरों व वरिष्ठ अधिकारियों से राहत एवं पुनर्वास कार्यों की विस्तृत समीक्षा के दौरान यह निर्देश दिए। मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को निर्देशित किया  कि बाढ़ से हुई जनहानि और पशुहानि प्रभावित परिवारों को राहत राशि बिना विलंब के उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त आवासों के सुधार हेतु तिरपाल, बाँस-बल्ली और राहत राशि का वितरण प्राथमिकता से किया जाए। मुख्यमंत्री ने  कहा कि बाढ़ प्रभावित जिलों के प्रभारी सचिव अपने-अपने जिलों का भ्रमण करें और राहत कार्यों का सतत पर्यवेक्षण सुनिश्चित करें।  मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि प्रभावित गाँवों से सड़क संपर्क बहाल करने, क्षतिग्रस्त पुल-पुलियों की मरम्मत और बिजली आपूर्ति पुनर्स्थापना का कार्य युद्धस्तर पर किया जाए। उन्होंने कहा कि बस्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की शीघ्र बहाली राहत कार्यों की सफलता की कुंजी है। समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव अमिताभ जैन और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह भी उपस्थित थे। मुख्य सचिव जैन ने कलेक्टरों से कहा कि यदि उन्हें  शासन स्तर से अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता हो तो वे तुरंत प्रस्ताव भेजें, ताकि शासन स्तर पर शीघ्र निर्णय लिया जा सके। मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह ने कलेक्टरों को निर्देश दिया कि राहत शिविरों में भोजन, कपड़े और सूखा राशन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही, उन्होंने कहा कि राहत शिविरों और प्रभावित गाँवों में स्वास्थ्य शिविर और शुद्ध पेयजल की उपलब्धता भी अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए। बैठक के प्रारंभ में राजस्व सचिव श्रीमती रीना बाबासाहेब कंगाले ने मुख्यमंत्री को बस्तर में बाढ़ की स्थिति और अब तक किए गए राहत कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सभी बाढ़ प्रभावित जिलों को अतिरिक्त राशन का आबंटन भी कर दिया गया है और सामग्री प्रभावित परिवारों तक पहुँचाई जा रही है। इसके उपरान्त मुख्यमंत्री साय ने चारों जिलों के कलेक्टरों से सीधे संवाद कर उनके-अपने जिलों में चल रहे राहत एवं पुनर्वास कार्यों की प्रगति के बारे में जानकारी ली। कलेक्टरों ने बताया कि अब अधिकांश बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में पानी उतरने लगा है और स्थिति नियंत्रण में है। समीक्षा बैठक में बताया गया कि वर्तमान में प्रशासन का पूरा ध्यान राहत और पुनर्वास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने पर केंद्रित है।  समीक्षा बैठक में लोक निर्माण विभाग के सचिव कमलप्रीत सिंह, बस्तर संभाग के आयुक्त डोमन सिंह और पुलिस महानिरीक्षक पी. सुन्दरराज उपस्थित थे।

विश्वास सारंग का ऐलान, मध्यप्रदेश की हर पैक्स बनेगी WDRA की सदस्य

मध्यप्रदेश की सभी पैक्स डब्ल्यू.डी.आर.ए. की सदस्य बनेंगी – विश्वास सारंग सहकारी संस्थाओं के व्यवसाय विविधीकरण पर राज्य स्तरीय कार्यशाला सम्पन्न भोपाल अपेक्स बैंक के समन्वय भवन में भांडागारण विकास और विनियामक प्राधिकरण (डब्ल्यू.डी. आर.ए.) के माध्यम से सहकारी संस्थाओं के व्यवसाय विविधीकरण पर अपेक्स बैंक, सहकारिता विभाग एवं विनियामक प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में एक राज्य स्तरीय कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए मध्य प्रदेश के सहकारिता तथा खेलकूद एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि हमारी अर्थव्यवस्था से गांव व किसान को जोड़ने की दिशा में माननीय प्रधानमंत्री जी ने जो जन-धन योजना भारत में लागू किया था, उसका मुख्य उद्देश्य गाॅंव व किसान को देश की अर्थव्यवस्था से जोड़ना था, जिसके सकारात्मक परिणाम आज सामने आ रहे हैं और हमारा देश माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में एवं केन्द्रीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी के मार्गदर्शन में निरन्तर ’’सहकार से समृद्धि’’ के मूल-मंत्र को साकार करने की दिशा में अग्रसर है ।  इसका अनुसरण करते हुये मध्यप्रदेश में हम स्वर्णिम मध्यप्रदेश के संकल्प के साथ मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव जी के नेतृत्व में भी नवाचार के विभिन्न माध्यमों का प्रयोग करते हुये प्रदेश की प्रगति के लिये काम कर रहे हैं ।  श्री सारंग ने कहा कि मेरा मानना है कि जब तक अर्थव्यवस्था आम आदमी के दरवाजे से नहीं निकलेगी, तब तक मजबूत नहीं होगी ।  इसलिये यदि हम किसानों को सुदृढ़ करना चाहते हैं तो पहले हमें पैक्स (प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों) को समृद्ध बनाने की दिशा में प्रयास करना होंगे और आज की यह कार्यशाला निश्चित रूप से ’’मील का पत्थर’’ साबित होगी ।  मैं आज अत्यन्त आभारी हॅूं डब्ल्यू.आर.डी.ए. के सदस्य श्री अनूप श्रीवास्तव का, आयुक्त सहकारिता श्री मनोज पुष्प का, स्टेट वेयर हाउसिंग के प्रबंध संचालक श्री अनुराग वर्मा का और सेंट्रल वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन के क्षेत्रीय प्रबंधक श्री राम कुमार का, जिनके अथक प्रयासों से आज सहकारिता के शीर्ष सभागार में मध्यप्रदेश के सहकारी आन्दोलन से जुड़ा प्रत्येक अधिकारी व सदस्य लाभान्वित हुआ है।   श्री सारंग ने कहा कि मैं उपस्थित जिला बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों से अपेक्षा करता हॅूं कि वे मध्यप्रदेश की प्रत्येक पैक्स को डब्ल्यू.आर.डी.ए. (भांडागारण विकास और विनियामक प्राधिकरण) का सदस्य बनाने के प्रयास आज से ही प्रयास आरंभ कर दें, जिससे कि आगे चलकर प्रदेश के किसानों को दूरदराज अंचलों में परेशान न होना पड़े व अपने नजदीकी डब्ल्यू.आर.डी.ए. के सदस्य वेयर हाउस में अपनी उत्पाद को सुरक्षित रख लाभान्वित हों, क्योंकि जब तक भण्डारण व्यवस्थित नहीं होगी, तब तक किसानों को उसका फायदा नहीं मिल सकेगा ।  कार्यशाला में श्री सारंग ने अपेक्स बैंक द्वारा प्रकाशित मानक परिचालन प्रक्रिया वेयर हाउसिंग डेव्हलेपमेंट एण्ड रेग्यूलेटरी अथाॅरिटी की योजनान्तर्गत वेयर हाउस पंजीकरण की पुस्तक का विमोचन भी किया तथा प्रदेश में गोदाम बनाने की योजना पर कार्य करने हेतु स्टेट वेयर हाउसिंग प्रबंध संचालक श्री अनुराग वर्मा, म.प्र.राज्य सहकारी संघ के प्रबंध संचालक श्री रितुराज रंजन तथा सहकारिता विभाग के नवाचार प्रकोष्ठ के संयुक्त आयुक्त श्री महेन्द्र दीक्षित को अधिकृत किया। आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक श्री मनोज पुष्प ने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के दौरान हम किसानों को प्रशिक्षित करें कि वे अपने उत्पाद को कैसे बेहतर ढंग से रख सकते हैं और डिजीटली किस प्रकार बेच सकते हैं, आज की यह कार्यशाला एग्रो प्रोसेसिंग व मार्केंटिंग की दिशा में अत्यन्त उपयोगी है । उन्होंने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो इस प्रकार की कार्यशाला हम संभाग व जिला स्तर पर भी आयोजित करेंगे । कार्यशाला में श्री अरूण कुमार श्रीवास्तव, सदस्य, डब्ल्यू.डी. आर.ए. ने कहा कि 2051 तक हमारे देश की जनसंख्या 170 करोड़ हो जायेगी व मध्यप्रदेश की लगभग 12 करोड़, जो देश का लगभग 6.3 होगी ।  म.प्र. का खाद्यान्न उत्पादन लगभग 338 लाख मी.टन है, जो भारत के खाद्यान्न उत्पादन का लगभग 12.10 प्रतिषत है ।  भारत 2051 तक दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जायेगा ।  मैं अनुरोध करना चाहता हॅूं कि इस मान से प्रदेश में वेयर हाउस के गोदामों के लिये एक सुनियोजित योजना बनाने की दिशा में प्रयास किये जायें । श्री रामकुमार, क्षेत्रीय प्रबंधक, सी.डब्ल्यू.सी. ने बताया कि यदि केन्द्रीय वेयर हाउसिंग में डब्ल्यू.डी.आर.ए. के अन्तर्गत देश के 50 हजार गोदाम यदि रजिस्टर्ड हो जायें तो किसान आपके द्वार तक आ जायेंगे । इससे आपकी साख भी बढ़ेगी और किसान के साथ आप भी हमारी योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे, क्योंकि हमारा उद्देश्य वेयर हाउस केन्द्रों को लाभ का केन्द्र बनाना है ।  इससे किसानों के उत्पाद सुरक्षित होंगे और किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी से भी बचा जा सकता है । कार्यशाला में श्री विनीत गुप्ता, नेषनल ई-रिपोजिटरी लिमिटेड, श्री जसवीर गोदारा, एवीपी सीसीआरएल, श्री संजय अग्रवाल, अपना गोदाम ने अपनी डिजीटल व्यवसाय प्रणाली पर विचार व्यक्त किये ।  कार्यशाला का संचालन अपेक्स बैंक के प्राचार्य श्री पी.एस.तिवारी एवं श्री महेन्द्र दीक्षित, संयुक्त आयुक्त ने किया एवं आभार प्रदर्शन अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक श्री मनोज गुप्ता ने किया ।  कार्यशाला मध्यप्रदेश के सहकारिता विभाग के संयुक्त/उप/सहायक आयुक्तगण, जिला बैंकों के मुख्य कार्यपालन अधिकारीगण, वेयर हाउस व एफपीओ के प्रतिनिधिगण के साथ विभिन्न सहकारी संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित हुए

‘पधारो म्हारे देश’ की धुन पर जापान में पीएम मोदी का अभिनंदन, देखें वीडियो

टोक्यो  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जापान की दो दिवसीय यात्रा पर शुक्रवार को तोक्यो पहुंचे हैं। एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत किया गया। राजस्थानी वेशभूषा में मौजूद जापान की महिलाओं ने हाथ जोड़कर उनका अभिवादन किया। उन्होंने 'पधारो मारे देश' बोलकर वेलकम करने के बाद राजस्थानी गीत भी सुनाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह जापान यात्रा अमेरिका से टैरिफ वॉर के बीच बेहद अहम मानी जा रही है। विदेश मंत्रालय ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जापान के तोक्यो पहुंच गए हैं। प्रधानमंत्री भारत-जापान साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा के साथ शाम को व्यापक चर्चा करेंगे।’अपने प्रस्थान वक्तव्य में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनकी जापान यात्रा दोनों देशों के बीच सभ्यतागत संबंधों और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने का एक अवसर प्रदान करेगी। शिगेरू इशिबा से मिलेंगे PM मोदी पीएम मोदी 29-30 अगस्त को जापान यात्रा के दौरान जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा के साथ वार्षिक शिखर वार्ता करेंगे। पीएम मोदी की जापान और चीन की यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार और शुल्क नीतियों के कारण भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव पैदा हो गया है। चार दिवसीय यात्रा पर रवाना होने से पहले पीएम मोदी ने कहा, "मुझे विश्वास है कि जापान और चीन की मेरी यात्राएं हमारे राष्ट्रीय हितों और प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाएंगी तथा क्षेत्रीय और वैश्विक शांति, सुरक्षा और सतत विकास को आगे बढ़ाने में सार्थक सहयोग के निर्माण में योगदान देंगी।" पीएम मोदी ने जापान यात्रा पर कहा, ‘‘हम अपनी विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी के अगले चरण को आकार देने पर ध्यान केंद्रित करेंगे। दोनों देशों के बीच साझेदारी ने पिछले 11 वर्षों में लगातार और महत्वपूर्ण प्रगति की है।’’ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा भारत', बोले पीएम मोदी प्रधानमंत्री मोदी ने टोक्यो में इंडिया-जापान इकोनॉमिक फोरम में कहा, 'आज भारत में राजनीतिक स्थिरता है, आर्थिक स्थिरता है, नीतियों में पारदर्शिता है और फैसलों में पूर्वानुमान की क्षमता है. आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई बड़ी अर्थव्यवस्था है और बहुत जल्द भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है.' 'भारत में पूंजी सिर्फ बढ़ती ही नहीं, बल्कि कई गुना हो जाती है', बोले पीएम मोदी टोक्यो में पीएम मोदी ने कहा कि भारत निवेश के लिए सबसे प्रॉमिसिंग डेस्टिनेशन है. 80 प्रतिशत कंपनियां भारत में विस्तार करना चाहती हैं और 75 प्रतिशत पहले से मुनाफे में हैं. इसका मतलब है कि भारत में पूंजी सिर्फ बढ़ती ही नहीं है बल्कि कई गुना हो जाती है. 'हर क्षेत्र में भारत-जापान की पार्टनरशिप भरोसे का प्रतीक', इकोनॉमिक फोरम में बोले पीएम मोदी टोक्यो में भारत-जापान इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, 'भारत की विकास यात्रा में जापान हमेशा एक अहम पार्टनर रहा है. मेट्रो से मैन्युफैक्चरिंग तक, सेमीकंडक्टर से स्टार्टअप तक हमारी पार्टनरशिप आपसी विश्वास का प्रतीक बनी है और जापानी कंपनियों ने भारत में 40 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है.' टोक्यो में भारतीय समुदाय से मिले PM मोदी, शेयर की तस्वीरें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि टोक्यो में भारतीय समुदाय की गर्मजोशी और स्नेह से वह बेहद अभिभूत हुए. उन्होंने सराहना की कि कैसे भारतीय लोग जापान में रहते हुए समाज में अहम योगदान दे रहे हैं और साथ ही अपनी सांस्कृतिक जड़ों को संजोए हुए हैं. पीएम मोदी ने आगे बताया कि कुछ ही घंटों में वह जापान के बिजनेस लीडर्स के साथ मुलाकात करेंगे, जहां भारत-जापान के व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा होगी. जानें क्यों अहम है PM मोदी का जापान दौरा जापान पीएम मोदी के दौरे के दौरान भारत में अगले दस साल के लिए 10 ट्रिलियन येन (लगभग दोगुना) निजी निवेश की घोषणा कर सकता है. यह 2022 में तय किए गए 5 ट्रिलियन येन के लक्ष्य से कहीं बड़ा कदम होगा. जापान, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत का बड़ा समर्थक है और मारुति सुजुकी अब भारत से इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्यात भी शुरू कर रही है. अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन जैसी बड़ी परियोजना दोनों देशों की साझेदारी का उदाहरण है. इसके अलावा, भारत और जापान सेमीकंडक्टर, दुर्लभ खनिज और स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति को लेकर एक नया आर्थिक सुरक्षा ढांचा तैयार करने पर सहमत हो सकते हैं, जिससे भारत की चीन पर निर्भरता कम होगी. गायत्री मंत्र, राजस्थानी पोशाक… जापान के लोगों ने कुछ इस तरह किया पीएम मोदी का वेलकम भारतीय प्रवासी समुदाय ने प्रधानमंत्री मोदी का जापान पहुंचने पर गर्मजोशी से स्वागत किया. जापानी समुदाय के लोगों ने पीएम मोदी का स्वागत गायत्री मंत्र और अन्य मंत्रों का पाठ करके किया. राजस्थानी पोशाक पहने जापानी लोगों ने प्रधानमंत्री के स्वागत में राजस्थानी लोकगीत गाए. टोक्यो के हानेडा एयरपोर्ट पर पीएम मोदी का स्वागत पीएम मोदी ने एक्स पर टोक्यो के हानेडा एयरपोर्ट की तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा कि भारत और जापान अपने विकासात्मक सहयोग को लगातार मजबूत कर रहे हैं और इस यात्रा के दौरान वह प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा समेत अन्य नेताओं से मुलाकात करने को उत्सुक हैं. मोदी ने उम्मीद जताई कि यह दौरा दोनों देशों के बीच मौजूदा साझेदारी को और गहरा करेगा और सहयोग के नए अवसर खोलेगा. मोदी 29-30 अगस्त को जापान यात्रा के दौरान जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा के साथ वार्षिक शिखर वार्ता करेंगे। प्रधानमंत्री ने जापान यात्रा पर कहा, ‘हम अपनी विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी के अगले चरण को आकार देने पर ध्यान केंद्रित करेंगे। दोनों देशों के बीच साझेदारी ने पिछले 11 वर्षों में लगातार और महत्वपूर्ण प्रगति की है।’ उन्होंने कहा, ‘हम अपने सहयोग को नयी उड़ान देने, आर्थिक व निवेश संबंधों के दायरे एवं महत्वाकांक्षाओं का विस्तार करने, कृत्रिम मेधा (एआई) व सेमीकंडक्टर सहित नयी और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग को आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे।’ जापान से मोदी 31 अगस्त से दो दिवसीय यात्रा पर चीन के शहर तियानजिन जाएंगे। रविवार को प्रधानमंत्री चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ वार्ता करेंगे, जिसमें पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद के बाद द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के लिए आगे के कदमों पर ध्यान केंद्रित करने की संभावना है। पीएम मोदी एससीओ सम्मेलन से इतर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी … Read more

ट्रंप सहयोगी का बेतुका बयान: यूक्रेन में शांति का रास्ता भारत से होकर जाता है

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बिजनेस सलाहकार पीटर नवारो ने भारत को अहंकारी कहने के बाद एक बार फिर से भारत को लेकर अनर्गल आरोप लगाए हैं. नवारो ने यूक्रेन वॉर को सीधे भारत की रूस से कच्चे तेल की खरीद से जोड़ दिया है. नवारो ने कहा है कि यूक्रेन में शांति का रास्ता नई दिल्ली से होकर गुजरता है.  बुधवार को ब्लूमबर्ग टीवी से बातचीत में नवारो ने कहा था कि 'भारतीय इस मामले में काफी घमंडी हैं और वे कहते हैं कि ये हमारी संप्रभुता का मामला है, हम जब चाहें किसी से भी तेल खरीद सकते हैं.' नवारो ने एक्स पर एक लंबे ट्विटर थ्रेड में एकतरफा तर्कों से अमेरिकी टैरिफ को सही ठहराने की कोशिश की है और भारत पर कई आरोप लगाए हैं.  नवारो ने कहा कि यह केवल भारत के अनुचित व्यापार के बारे में नहीं है, यह पुतिन की युद्ध मशीन को भारत द्वारा दी गई वित्तीय लाइफलाइन को काटने के बारे में है. नवारो ने लिखा है कि अमेरिकी उपभोक्ता भारत का सामान खरीदते हैं, जबकि भारत हाई टैरिफ लगाकर और दूसरे उपायों से अमेरिका से सामानों का आयात नहीं करता है. भारत हमारे डॉलर से रूस का सस्ता तेल खरीदता है.  भारतीय रिफाइनरियों पर नवारो के आरोप भारतीय रिफाइनरियां अपने प्रमुख रूसी साझेदारों के साथ मिलकर रिफाइनरी चलाती हैं और कालाबाजारी में तेल को बेचकर अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बड़ा मुनाफा कमाती हैं. इस तरह से रूस यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के लिए धन जुटाने हेतु भारी मात्रा में नकदी जुटाता है. भारत की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखे बिना बेबुनियाद आरोप लगाते हुए ट्रंप के ट्रेड सलाहकार नवारो ने दावा किया कि यूक्रेन पर रूस के आक्रमण से पहले भारत के आयात में रूसी तेल का हिस्सा 1% से भी कम था. लेकिन आज ये 30 प्रतिशत से भी ज्यादा हो गया है. भारत प्रतिदिन 15 लाख बैरल से भी ज़्यादा तेल मंगाता है.  उन्होंने कहा कि यह उछाल घरेलू मांग से प्रेरित नहीं है. नवारो का दावा है कि यह भारतीय मुनाफाखोरों द्वारा संचालित है और इसके लिए यूक्रेन में खून-खराबे और तबाही की अतिरिक्त कीमत चुकानी पड़ रही है. अपने अगले ट्वीट में नवारो ने लिखा है कि भारत की बड़ी तेल लॉबी ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को क्रेमलिन के लिए एक विशाल रिफाइनिंग केंद्र और तेल मनी लॉन्ड्रोमैट में बदल दिया है. भारतीय रिफाइनर सस्ते रूसी तेल खरीदते हैं, उसे प्रोसेस करते हैं और यूरोप, अफ्रीका और एशिया को ईंधन निर्यात करते हैं. जबकि तटस्थता के नाम पर वे प्रतिबंधों से सुरक्षित रहते हैं.  '10 लाख बैरल तेल का निर्यात करता है भारत' नवारो का दावा है कि भारत अब प्रतिदिन 10 लाख बैरल से ज्यादा रिफाइंड पेट्रोलियम का निर्यात करता है. ये मात्रा उसके द्वारा आयातित रूसी कच्चे तेल की मात्रा के आधे से भी ज़्यादा है. इससे होने वाली आय भारत के राजनीतिक रूप से जुड़े एनर्जी दिग्गजों को जाती है. और सीधे पुतिन के वॉर फंड में. जहां अमेरिका यूक्रेन को हथियार देने के लिए भुगतान करता है, वहीं भारत रूस को वित्तीय मदद देता है, जबकि वह अमेरिकी वस्तुओं पर दुनिया के कुछ सबसे ऊंचे टैरिफ लगाता है, जिससे अमेरिकी निर्यातकों को नुकसान होता है. भारत के साथ हमारा 50 अरब डॉलर का व्यापार घाटा है. और वे हमारे डॉलर का इस्तेमाल रूसी तेल खरीदने के लिए कर रहे हैं. यूक्रेन युद्ध में महात्वाकांक्षाओं के टकराव, नाटो का रोल, और अमेरिकी पॉलिटिकल गेम को इनकार करते हुए नवारो ने भू-राजनीतिक सच्चाइयों को झूठलाने की कोशिश की है. 'भारत खूब पैसा कमाता है, यूक्रेन के लोग मरते हैं' नवारो ने भारत पर आरोप लगाया है कि वे रूसी तेल से खूब पैसा कमाते हैं और यूक्रेनवासी मरते हैं. नवारो ने भारत के खिला सख्त शब्दों का इस्तेमाल करते हुए लिखा है कि यह यहीं नहीं रुकता. भारत रूसी हथियार खरीदना जारी रखता है और साथ ही यह मांग करता है कि अमेरिकी कंपनियां संवेदनशील सैन्य तकनीक हस्तांतरित करें और भारत में संयंत्र स्थापित करें. यह एक रणनीतिक मुफ़्तखोरी है. उन्होंने आगे कहा बाइडेन प्रशासन ने इस पागलपन को ज़्यादातर नज़रअंदाज़ किया है. राष्ट्रपति ट्रंप इसका सामना कर रहे हैं. भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाना, जिसमें 25 प्रतिशत अनुचित व्यापार के लिए और 25% राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए है.  अगर दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत चाहता है कि उसके साथ अमेरिका के रणनीतिक साझेदार जैसा व्यवहार किया जाए, तो उसे वैसा ही व्यवहार करना होगा. यूक्रेन में शांति का रास्ता नई दिल्ली से होकर जाता है.  बता दें कि 27 अगस्त से भारत पर 50 फीसदी अमेरिकी टैरिफ लागू हो गया है. कई संगठनों ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी टैरिफ से भारत के 48 अरब डॉलर के निर्यात प्रभावित हो सकते हैं.    

ट्रंप टैरिफ विवाद के बीच PM मोदी और जिनपिंग आमने-सामने, बड़ी बैठक तय

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच रविवार को द्विपक्षीय बैठक होने जा रही। यह बैठक शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सम्मेलन के इतर होगी। प्रधानमंत्री मोदी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चीन के तियानजिन में होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। यह बीते सात वर्षों में प्रधानमंत्री की पहली चीन यात्रा है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब भारत और चीन के बीच सीमा विवाद पर तनाव कम हुआ है। दोनों देशों ने देपसांग मैदानी क्षेत्र और डेमचोक क्षेत्र में गश्त के अधिकार को लेकर सहमति जताई है। वहीं, अमेरिका के साथ टैरिफ को लेकर रिश्ते काफी बिगड़ चुके हैं। दोनों नेताओं की आखिरी मुलाकात 23 अक्टूबर, 2024 को रूस के कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने आखिरी बार 2018 में चीन की यात्रा की थी। पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर मई 2020 में चीनी घुसपैठ के बाद शुरू हुए सैन्य गतिरोध के बाद भारत और चीन के राजनयिक संबंधों में खटास आ गई थी। तब से, दोनों देशों ने संबंधों को सुधारने की कोशिश की है। मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू किया है। चीनी पर्यटकों के लिए वीजा जारी किए हैं और सीधी उड़ानें फिर से शुरू करने पर विचार कर रहे हैं। मई में इन प्रयासों को फिर से झटका लगा जब भारत को ऑपरेशन सिंदूर के बाद हुई शत्रुता के दौरान पाकिस्तानी सेना को चीन की सक्रिय सहायता के सबूत मिले।  

वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण 2023-24 के नतीजों में कारखानों से लेकर जीवीए तक हर मोर्चे पर यूपी नंबर वन

उत्तर प्रदेश ने तोड़े सभी रिकार्ड, उद्योग वृद्धि में बना देश का चैम्पियन राज्य वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण 2023-24 के नतीजों में कारखानों से लेकर जीवीए तक हर मोर्चे पर यूपी नंबर वन प्रदेश के जीवीए में हुई 25.03% की ऐतिहासिक वृद्धि, अखिल भारतीय औसत से दोगुने से भी अधिक प्रदेश में कारखानों की संख्या में 15.91% की वृद्धि, राष्ट्रीय औसत से लगभग 7 गुना अधिक कार्यरत कर्मियों की संख्या में भी 9.37% की वृद्धि जो देश की औसत वृद्धि 5.9% से बेहतर योगी सरकार के विज़न के चलते यूपी में शुरू हुआ औद्योगिक क्रांति का युग सीएम योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश देश की नई औद्योगिक राजधानी बनने की ओर अग्रसर लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने औद्योगिक विकास के क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MOSPI) भारत सरकार द्वारा जारी वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (ASI) 2023-24 के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश ने कारखानों की संख्या, कार्यरत कर्मियों और सकल मूल्य संवर्धन (GVA) – तीनों ही मोर्चों पर देश के सभी बड़े औद्योगिक राज्यों को पछाड़ दिया है।  औद्योगिक विकास के इस रिकॉर्ड प्रदर्शन ने साबित कर दिया है कि योगी सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अब देश की नई औद्योगिक राजधानी बनने की ओर अग्रसर है। जीवीए वृद्धि दर में उत्तर प्रदेश ने तोड़ा रिकॉर्ड वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (ASI) 2023-24 रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश का सकल मूल्य संवर्धन (GVA) वर्ष 2022-23 के ₹1.34 लाख करोड़ से बढ़कर 2023-24 में ₹1.67 लाख करोड़ हो गया, यानी इसने 25.03% की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की है। यह दर अखिल भारतीय औसत (11.9%) से दोगुने से भी अधिक है। इस तरह उत्तर प्रदेश इस मामले में देश में प्रथम स्थान पर है। कारखानों और रोजगार की संख्या में अभूतपूर्व उछाल रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रदेश में कारखानों की संख्या 19,102 (2022-23) से बढ़कर 22,141 (2023-24) हो गई है, जो 15.91% की वृद्धि दर्शाती है। यह वृद्धि राष्ट्रीय औसत (2.7%) से लगभग 7 गुना अधिक है। इसी तरह, कार्यरत कर्मियों की संख्या भी 14.86 लाख से बढ़कर 16.26 लाख तक पहुंच गई है, यानी 9.37% की वृद्धि जो देश की औसत वृद्धि (5.9%) से बहुत आगे है। योगी सरकार के प्रयासों का असर उद्योग वृद्धि में उत्तर प्रदेश के इस उल्लेखनीय प्रदर्शन में योगी सरकार की औद्योगिक नीतियों, निवेश प्रोत्साहन और बेहतर कानून-व्यवस्था को मुख्य कारण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न के चलते उत्तर प्रदेश आज देश का औद्योगिक हब बनने की दिशा में तेज़ी से बढ़ रहा है। यह उपलब्धि निवेशकों के विश्वास, श्रमिकों की मेहनत और सरकार की पारदर्शी नीतियों का परिणाम है।  टेबल अन्य राज्यों से तुलना में यूपी सबसे आगे राज्य, कारखानों की संख्या, कुल कर्मियों की संख्या, जीवीए उत्तर प्रदेश 15.91% 9.37% 25.03% कर्नाटक 3.27% 1.36% 18.76%  तमिलनाडु 1.15% 7.55% 11.16% महाराष्ट्र 0.35% 6.79% 9.27% गुजरात 7.35% 9.63% 7.51% भारत 2.7% 5.9% 11.9%

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सतत मॉनीटरिंग के बाद प्रभारी मंत्रियों को सौंपी राहत कार्यों की कमान

यूपी में बाढ़ : इस साल 43 जनपदों पर नदियां हुईं नाराज़, योगी सरकार बनी ढाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सतत मॉनीटरिंग के बाद प्रभारी मंत्रियों को सौंपी राहत कार्यों की कमान   इस वर्ष यूपी के 43 जिले बाढ़ से रहे हैं प्रभावित, फिलहाल 18 जिलों में बाढ़ की स्थिति इस वर्ष 9.55 लाख से अधिक जनसंख्या आई बाढ़ की चपेट में, अब केवल 2.46 लाख जनता, जिनका सरकार रख रही पूरा ध्यान   1273 मेडिकल टीमों ने अबतक निभाई सक्रिय भूमिका, 1796 बाढ़ चौकियों ने पहुंचा प्रभावितों को राहत   3579 नावें और मोटरबोट ने बचाव कार्य में लगकर बचाई जिंदगियां   अबतक 43 जनपदों के लिए 1391 शरणालय बनाए गए थे, वर्तमान में 18 जनपदों के लिए 557 संचालित लखनऊ  बढ़ते जलवायु परिवर्तन के इस दौर में नदियों का कोप बढ़ने लगा है। इस वर्ष उत्तर प्रदेश में मानसून के दौरान बरसात और नदियों के प्रकोप ने प्रदेश के 43 जिलों को प्रभावित किया। बावजूद इसके योगी सरकार अपनी जनता के लिए ढाल की तरह खड़ी रही। राहत आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष अबतक 116 तहसीलें, 2673 ग्राम और 123 वार्ड जलभराव से प्रभावित हुए हैं। बाढ़ की चपेट में कुल 9,55,654 से अधिक लोग आए हैं। इस आपदा से निपटने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राहत और बचाव कार्य तेज़ी से संचालित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और अधिकारियों को लगातार निर्देशित कर रहे हैं। बीते दिन उन्होंने सभी प्रभारी मंत्रियों को आदेशित किया कि वे अपने-अपने जिलों में बाढ़ राहत कार्यों की कमान खुद संभालें। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि इस संकट की घड़ी में सरकार हर नागरिक के साथ खड़ी है। राहत आयुक्त भानु चंद्र गोस्वामी के मुताबिक अब तक प्रदेश में 1796 बाढ़ चौकियां स्थापित की गईं हैं और 1273 मेडिकल टीमों का गठन किया गया है। 3579 नाव एवं मोटरबोट बचाव कार्य में लगाए गए। वहीं, 1391 बाढ़ शरणालय बनाए गए जिनमें से 557 वर्तमान में संचालित हैं, जहां 79,958 लोग आश्रय लिए हुए हैं। अब तक 1,00,404 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है। सरकार ने प्रभावितों को राहत सामग्री उपलब्ध कराने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी है। अब तक 1,82,216 खाद्यान्न पैकेट और 10,30,534 लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। 774 मकान क्षतिग्रस्त हुए, जिनमें से 637 को सहायता राशि दी गई है, बाकियों को भी जल्द से जल्द सहायता राशि प्रदान करने की कवायद चल रही है। पशुओं के लिए 14,740 क्विंटल भूसा, पीने के पानी की शुद्धता के लिए 92,020 क्लोरीन टैबलेट और स्वास्थ्य की दृष्टि से 3,58,555 ओआरएस पैकेट वितरित किए गए हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में विषैले जीव-जंतुओं से बचाव के लिए एंटी स्नेक वैनम और एंटी रैबिज टीकों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि “आपदा की इस घड़ी में सरकार हर पीड़ित के साथ खड़ी है और किसी को भी चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।”  इस वर्ष बाढ़ प्रभावित जिलों में…  बलिया, बहराइच, बदायूं, चंदौली, फर्रुखाबाद, गोंडा, गाजीपुर, हरदोई, कानपुर नगर, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मेरठ, मीरजापुर, मुजफ्फरनगर, प्रयागराज, शाहजहांपुर, उन्नाव, वाराणसी, मऊ, औरैया, अमरोहा, बस्ती, बांदा, बाराबंकी, कन्नौज, हापुड़, बिजनौर, संभल, संत कबीर नगर, गौतमबुद्ध नगर, गोरखपुर, मुरादाबाद, कानपुर देहात, फतेहपुर, अयोध्या, जालौन, आगरा, इटावा, चित्रकूट, हमीरपुर, भदोही, मथुरा और श्रावस्ती समेत 43 जिले शामिल रहे। आज तक की स्थिति फिलहाल प्रदेश में बाढ़ प्रभावित जिलों की संख्या घटकर 18 रह गई है, इनमें- बलिया, बहराइच, बदायूं, चंदौली, फर्रुखाबाद, गोंडा, गाजीपुर, हरदोई, कानपुर नगर, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मेरठ, मीरजापुर, मुजफ्फरनगर, प्रयागराज, शाहजहांपुर, उन्नाव और वाराणसी शामिल हैं।  अब तक के आंकड़े साफ बताते हैं कि योगी सरकार ने हर स्तर पर तत्परता दिखाते हुए जन-जीवन की रक्षा की है।

आपदा मित्रों को होमगार्ड स्वयंसेवकों के रूप में तैनाती देने के लिए जनपदवार कार्यवाही आगे बढ़ाई जाए: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने होमगार्डों के रिक्त पदों पर नए एनरोलमेंट की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए आपदा मित्रों को होमगार्ड स्वयंसेवकों के रूप में तैनाती देने के लिए जनपदवार कार्यवाही आगे बढ़ाई जाए: मुख्यमंत्री समयबद्ध, पारदर्शी और निष्पक्ष एनरोलमेंट के लिए पुलिस भर्ती एवं प्रशिक्षण बोर्ड की मदद से गठित होगा नया बोर्ड: मुख्यमंत्री एनरोलमेंट नियमों में बदलाव पर मुख्यमंत्री का जोर, अधिकतम आयु सीमा 30 वर्ष करने और लिखित परीक्षा की व्यवस्था पर बल आपदा प्रबंधन का अनुभव या प्रशिक्षण प्राप्त लोगों को होमगार्ड एनरोलमेंट में मिलेगी प्राथमिकता कानून व्यवस्था बनाये रखने, यातायात नियंत्रण तथा आपदा की स्थिति में होमगार्डों की कर्तव्य परायणता सराहनीय: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में होमगार्डों के रिक्त पदों पर नए एनरोलमेंट की प्रक्रिया तत्काल प्रारम्भ करने के निर्देश दिए हैं। बदलते समय और बढ़ते दायित्वों को देखते हुए होमगार्ड एनरोलमेंट से जुड़े नियमों में संशोधन पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने समयबद्ध, पारदर्शी और निष्पक्ष एनरोलमेंट सुनिश्चित करने के लिए पुलिस भर्ती एवं प्रशिक्षण बोर्ड के सहयोग से नया बोर्ड गठित करने के भी निर्देश दिए हैं। गुरुवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था, यातायात नियंत्रण तथा आपदा की परिस्थितियों में होमगार्ड स्वयंसेवकों की भूमिका की सराहना की। बैठक में अवगत कराया गया कि प्रदेश में वर्तमान में 1,18,348 स्वीकृत पदों के विरुद्ध 71,155 होमगार्ड सक्रिय हैं। अगले दस वर्षों में लगभग 38,000 स्वयंसेवक सेवानिवृत्त होंगे, जबकि मौजूदा बल में पचास वर्ष से अधिक आयु वर्ग के 51 प्रतिशत से अधिक स्वयंसेवक कार्यरत हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को अधिक अवसर देने और सेवा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए पात्रता, परीक्षा और चयन से संबंधित प्रावधानों में सुधार किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि बल को और अधिक युवा स्वरूप देने के लिए एनरोलमेंट की अधिकतम आयु 30 वर्ष हो। साथ ही, चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा अनिवार्य की जाए, पात्रता मानकों को समयानुकूल बनाया जाए और परीक्षण प्रणाली को सुदृढ़ किया जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आपदा प्रबंधन से संबंधित अनुभव या प्रशिक्षण प्राप्त लोगों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नई एनरोलमेंट व्यवस्था शीघ्र तैयार की जाए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि रिक्तियों की पूर्ति से उत्तर प्रदेश का होमगार्ड संगठन और अधिक प्रशिक्षित, सक्षम और जनसेवा के प्रति समर्पित स्वरूप में सामने आएगा। बैठक में विभागीय अधिकारियों ने बताया कि होमगार्ड्स की सेवाएं पुलिस प्रशासन, यातायात प्रबंधन, शैक्षणिक संस्थान, स्वास्थ्य विभाग, परिवहन, खनन, नगरीय निकायों, दूरदर्शन, आकाशवाणी, एफसीआई और विकास प्राधिकरणों सहित विभिन्न क्षेत्रों में ली जा रही हैं। हाल ही में हुए लोकसभा व विधानसभा चुनावों, विभिन्न राज्यों के निर्वाचन कार्य तथा महाकुंभ-2025 जैसे आयोजनों में भी होमगार्ड्स ने उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि विभाग की समस्त प्रक्रियाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जा रहा है। ड्यूटी आवंटन, भत्तों का भुगतान, अनुग्रह राशि और पेंशन जैसी व्यवस्थाएं अब पूरी तरह ऑनलाइन हो चुकी हैं। होमगार्ड मित्र ऐप जैसी पहल ने कार्यप्रणाली को और अधिक सरल व पारदर्शी बनाया है। प्रशिक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए एक केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान और 12 मंडलीय प्रशिक्षण केंद्र सक्रिय हैं, जहां प्रतिवर्ष 15,000 से अधिक स्वयंसेवकों को नियमित और उन्नत प्रशिक्षण दिया जाता है। मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि नई नामांकन व्यवस्था लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश का होमगार्ड बल और अधिक पेशेवर बनेगा तथा जनता की सेवा में पूर्ण समर्पण के साथ कार्य करेगा।