samacharsecretary.com

क्या क्रिकेट का सिस्टम तैयार है ऐसे हादसों के लिए? पंत की चोट ने किया खुलासा, विवादों में घिरा सब्स्टीट्यूट नियम

मैनचेस्टर भारत और इंग्लैंड के बीच मैनचेस्टर के ओल ट्रैफर्ड में खेले जा रहे टेस्ट मैच में विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत को गंभीर चोट लगी. ऋषभ पंत को यह चोट पहले दिन के खेल के दौरान दाएं पैर के अंगूठे में लगी थी, तब वो क्रिस वोक्स की गेंद पर रिवर्स स्वीप मारने की कोशिश कर रहे थे. ऋषभ काफी दर्द में दिखे और उन्हें रिटायर्ड हर्ट होना पड़ा. हालांकि ऋषभ पंत ने अगले दिन फिर से बल्लेबाजी की और अर्धशतक जड़ने भी कामयाब रहे. हालांकि पंत इस मैच में विकेटकीपिंग करने की हालत में नहीं हैं. ऐसे में उनकी जगह विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी ध्रुव जुरेल निभा रहे हैं. एक बात गौर करने वाली है कि जुरेल सिर्फ कीपिंग कर सकते हैं, वो आईसीसी (इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल) के नियमानुसार बल्लेबाजी या गेंदबाजी नहीं कर पाएंगे. मौजूदा नियमों के तहत अगर कोई खिलाड़ी चोटिल हो जाए तो उसकी जगह आने वाला सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी सिर्फ फील्डिंग कर सकता है, लेकिन वो खिलाड़ी बैटिंग या बॉलिंग नहीं कर सकता. लेकिन यदि खिलाड़ी को सिर या आंख में चोट लगती है और वो कन्कशन टेस्ट में फेल हो जाता है, तो कन्कशन सब्स्टीट्यूट का इस्तेमाल किया जा सकता है. कन्कशन सब्स्टीट्यूट गेंदबाजी, बल्लेबाजी या फील्डिंग कर सकता है. पंत की चोट ने खोल दी क्रिकेट के सिस्टम की पोल, सब्स्टीट्यूट रूल बना व‍िवाद  भारत के विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत ने इंग्लैंड के खिलाफ चौथे टेस्ट में टूटे पैर के साथ बल्लेबाजी कर अद्भुत साहस दिखाया और अर्धशतक पूरा किया. इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन का मानना है कि टेस्ट क्रिकेट में मेडिकल सब्स्टीट्यूट (चोटिल खिलाड़ियों की जगह किसी और को लाने की अनुमति) की इजाजत न देना दिखाता है कि क्रिकेट अब भी पुराने जमाने के नियमों में फंसा है. दरअसल, मैनचेस्टर टेस्ट मैच में ऋषभ पंत ने टूटे पैर के साथ बहादुरी दिखाते हुए बल्लेबाजी की. पहले दिन चोटिल होकर रिटायर होने के बाद अगले दिन वह फिर मैदान पर उतरे… 37 रनों से अपनी पारी आगे बढ़ाई और अर्धशतक पूरा किया. उन्होंने इस दौरान 28 गेंदों का सामना किया और 17 रन बनाए. वॉन ने ‘द टेलीग्राफ’ में अपने कॉलम में लिखा, 'टूटा पैर लेकर बल्लेबाजी करते देखना जबरदस्त था. उन्होंने हिम्मत और स्किल दोनों दिखाई, लेकिन वे ठीक नहीं थे. दौड़ नहीं पा रहे थे, और इससे उनकी चोट और बढ़ सकती थी.' उन्होंने कहा कि विकेटकीपर की जगह तो सब्स्टीट्यूट खेलने आता है, लेकिन बैटिंग या बॉलिंग के लिए नहीं- यह नियम बिल्कुल अजीब और गलत है. क्रिकेट ही अकेला खेल है जिसमें ऐसी स्थिति में खिलाड़ी नहीं बदला जा सकता. इससे यह पता चलता है कि क्रिकेट अब भी अंधकार युग में जी रहा है. वॉन का मानना है कि चोट लगने पर खिलाड़ी को हटाकर किसी समान स्तर के खिलाड़ी को लाने की अनुमति मिलनी चाहिए- जैसे बल्लेबाज के बदले बल्लेबाज या स्पिनर के बदले स्पिनर.अगर किसी खिलाड़ी को हड्डी टूटने जैसी गंभीर चोट लगे और डॉक्टर या स्कैन से वह साबित हो जाए, तो उस खिलाड़ी की जगह किसी और को आने देना चाहिए.' उन्होंने सुझाव दिया कि मैच से पहले हर खिलाड़ी के लिए एक बैकअप प्लेयर तय कर लिया जाए. दोनों टीमें उसे मंजूरी दें. मैच रेफरी इसकी निगरानी करे. वॉन ने यह भी कहा, 'कंन्कशन (सिर की चोट) के लिए तो सब्स्टीट्यूट मिल जाता है, लेकिन बाकी चोटों के लिए नहीं- यह समझ से बाहर है.'  उनका मानना है कि पुराने नियमों पर अड़े रहने से जानबूझकर खेल का प्रभाव कम किया जा रहा है क्योंकि एक टीम को इसके कारण मैच के चार दिनों तक 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ रहा है.' वॉन ने पंत के पहले दिन क्रिस वोक्स के खिलाफ खेले गए रिवर्स स्वीप शॉट को 'मूर्खतापूर्ण' बताया, और कहा कि पंत को इसे अधिक पारंपरिक ढंग से खेलना चाहिए था. वॉन ने कहा, 'पंत जैसा खिलाड़ी कभी देखा नहीं गया. वे अलग हैं. चोट खुद की गलती हो सकती है, लेकिन फिर भी उन्होंने जो साहस दिखाया, वो काबिल-ए-तारीफ था.वे लंगड़ाते हुए मैदान पर आए, उनका एक जूता बड़ा और मोटा था, फिर भी उन्होंने बेन स्टोक्स की तेज गेंदबाजी में बल्लेबाजी की- आम खिलाड़ी ऐसा करने से डर जाते. इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर टेस्ट के दूसरे दिन, टूटी हुई पैर की हड्डी (फ्रैक्चर) के बावजूद ऋषभ पंत ने जो जुझारू पारी खेली, उसने पूरे क्रिकेट जगत को भावुक कर दिया. उनके इस जज्बे की रवि शास्त्री, चेतेश्वर पुजारा, दिनेश कार्तिक समेत कई पूर्व खिलाड़ियों ने खुलकर सराहना की. रवि शास्त्री (पूर्व कोच) – ऐसा करने के लिए सिर्फ जज्बा नहीं, उससे कहीं ज्यादा हिम्मत चाहिए. जिसने कभी सोचा कि पंत 'टीम मैन' नहीं हैं, उन्हें अब जवाब मिल गया है. चेतेश्वर पुजारा (पूर्व बल्लेबाज) – इतना दर्द सहकर भी पंत ने जो साहस दिखाया, वह असाधारण है. हमें ऐसे खिलाड़ी चाहिए जो कठिन समय में आगे आएं. दिनेश कार्तिक (पूर्व विकेटकीपर) – जब वह मैदान पर थे, लगा कि यह लम्हा हमेशा के लिए यादगार बन गया. इंग्लैंड को पंत से लगाव है और अब वजह भी है. इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर नासिर हुसैन ने 'स्काई स्पोर्ट्स' पर कहा, ‘उन्होंने बहुत जोखिम उठाया. उनमें प्रतिभा तो है ही, साथ ही उनका दिल भी बहुत बड़ा है.’ इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल आथर्टन ने कहा, ‘पंत ने इस सीरीज में बहुत कुछ दिया है. लीड्स में दो शतक, शानदार जश्न, लेग साइड में शॉट लगाने के लिए बल्ला फेंकना और अब एक पैर में फ्रैक्चर होने के बावजूद अर्धशतक बनाना. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वह किसी उद्देश्य के साथ बल्लेबाजी कर रहे थे.’ आईसीसी करेगी नियमों में बदलाव? अब ऋषभ पंत की इंजरी के बाद आईसीसी सब्स्टीट्यूट नियमों में बदलाव कर सकता है. TOI की रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले समय में बाहरी चोटों के लिए भी टीमों को रिप्लेसमेंट की अनुमति दी जा सकती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि आईसीसी इसे लेकर पहले से ही चर्चा कर रहा है. आईसीसी की क्रिकेट समिति की अगली बैठक में इस पर मुहर लग सकती है. आईसीसी के एक सूत्र ने कहा, 'इस बात की संभावना है कि गंभीर बाहरी चोटों लगने की स्थिति में टीमों … Read more

क्या क्रिकेट का सिस्टम तैयार है ऐसे हादसों के लिए? पंत की चोट ने किया खुलासा, विवादों में घिरा सब्स्टीट्यूट नियम

मैनचेस्टर भारत और इंग्लैंड के बीच मैनचेस्टर के ओल ट्रैफर्ड में खेले जा रहे टेस्ट मैच में विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत को गंभीर चोट लगी. ऋषभ पंत को यह चोट पहले दिन के खेल के दौरान दाएं पैर के अंगूठे में लगी थी, तब वो क्रिस वोक्स की गेंद पर रिवर्स स्वीप मारने की कोशिश कर रहे थे. ऋषभ काफी दर्द में दिखे और उन्हें रिटायर्ड हर्ट होना पड़ा. हालांकि ऋषभ पंत ने अगले दिन फिर से बल्लेबाजी की और अर्धशतक जड़ने भी कामयाब रहे. हालांकि पंत इस मैच में विकेटकीपिंग करने की हालत में नहीं हैं. ऐसे में उनकी जगह विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी ध्रुव जुरेल निभा रहे हैं. एक बात गौर करने वाली है कि जुरेल सिर्फ कीपिंग कर सकते हैं, वो आईसीसी (इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल) के नियमानुसार बल्लेबाजी या गेंदबाजी नहीं कर पाएंगे. मौजूदा नियमों के तहत अगर कोई खिलाड़ी चोटिल हो जाए तो उसकी जगह आने वाला सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी सिर्फ फील्डिंग कर सकता है, लेकिन वो खिलाड़ी बैटिंग या बॉलिंग नहीं कर सकता. लेकिन यदि खिलाड़ी को सिर या आंख में चोट लगती है और वो कन्कशन टेस्ट में फेल हो जाता है, तो कन्कशन सब्स्टीट्यूट का इस्तेमाल किया जा सकता है. कन्कशन सब्स्टीट्यूट गेंदबाजी, बल्लेबाजी या फील्डिंग कर सकता है. पंत की चोट ने खोल दी क्रिकेट के सिस्टम की पोल, सब्स्टीट्यूट रूल बना व‍िवाद  भारत के विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत ने इंग्लैंड के खिलाफ चौथे टेस्ट में टूटे पैर के साथ बल्लेबाजी कर अद्भुत साहस दिखाया और अर्धशतक पूरा किया. इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन का मानना है कि टेस्ट क्रिकेट में मेडिकल सब्स्टीट्यूट (चोटिल खिलाड़ियों की जगह किसी और को लाने की अनुमति) की इजाजत न देना दिखाता है कि क्रिकेट अब भी पुराने जमाने के नियमों में फंसा है. दरअसल, मैनचेस्टर टेस्ट मैच में ऋषभ पंत ने टूटे पैर के साथ बहादुरी दिखाते हुए बल्लेबाजी की. पहले दिन चोटिल होकर रिटायर होने के बाद अगले दिन वह फिर मैदान पर उतरे… 37 रनों से अपनी पारी आगे बढ़ाई और अर्धशतक पूरा किया. उन्होंने इस दौरान 28 गेंदों का सामना किया और 17 रन बनाए. वॉन ने ‘द टेलीग्राफ’ में अपने कॉलम में लिखा, 'टूटा पैर लेकर बल्लेबाजी करते देखना जबरदस्त था. उन्होंने हिम्मत और स्किल दोनों दिखाई, लेकिन वे ठीक नहीं थे. दौड़ नहीं पा रहे थे, और इससे उनकी चोट और बढ़ सकती थी.' उन्होंने कहा कि विकेटकीपर की जगह तो सब्स्टीट्यूट खेलने आता है, लेकिन बैटिंग या बॉलिंग के लिए नहीं- यह नियम बिल्कुल अजीब और गलत है. क्रिकेट ही अकेला खेल है जिसमें ऐसी स्थिति में खिलाड़ी नहीं बदला जा सकता. इससे यह पता चलता है कि क्रिकेट अब भी अंधकार युग में जी रहा है. वॉन का मानना है कि चोट लगने पर खिलाड़ी को हटाकर किसी समान स्तर के खिलाड़ी को लाने की अनुमति मिलनी चाहिए- जैसे बल्लेबाज के बदले बल्लेबाज या स्पिनर के बदले स्पिनर.अगर किसी खिलाड़ी को हड्डी टूटने जैसी गंभीर चोट लगे और डॉक्टर या स्कैन से वह साबित हो जाए, तो उस खिलाड़ी की जगह किसी और को आने देना चाहिए.' उन्होंने सुझाव दिया कि मैच से पहले हर खिलाड़ी के लिए एक बैकअप प्लेयर तय कर लिया जाए. दोनों टीमें उसे मंजूरी दें. मैच रेफरी इसकी निगरानी करे. वॉन ने यह भी कहा, 'कंन्कशन (सिर की चोट) के लिए तो सब्स्टीट्यूट मिल जाता है, लेकिन बाकी चोटों के लिए नहीं- यह समझ से बाहर है.'  उनका मानना है कि पुराने नियमों पर अड़े रहने से जानबूझकर खेल का प्रभाव कम किया जा रहा है क्योंकि एक टीम को इसके कारण मैच के चार दिनों तक 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ रहा है.' वॉन ने पंत के पहले दिन क्रिस वोक्स के खिलाफ खेले गए रिवर्स स्वीप शॉट को 'मूर्खतापूर्ण' बताया, और कहा कि पंत को इसे अधिक पारंपरिक ढंग से खेलना चाहिए था. वॉन ने कहा, 'पंत जैसा खिलाड़ी कभी देखा नहीं गया. वे अलग हैं. चोट खुद की गलती हो सकती है, लेकिन फिर भी उन्होंने जो साहस दिखाया, वो काबिल-ए-तारीफ था.वे लंगड़ाते हुए मैदान पर आए, उनका एक जूता बड़ा और मोटा था, फिर भी उन्होंने बेन स्टोक्स की तेज गेंदबाजी में बल्लेबाजी की- आम खिलाड़ी ऐसा करने से डर जाते. इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर टेस्ट के दूसरे दिन, टूटी हुई पैर की हड्डी (फ्रैक्चर) के बावजूद ऋषभ पंत ने जो जुझारू पारी खेली, उसने पूरे क्रिकेट जगत को भावुक कर दिया. उनके इस जज्बे की रवि शास्त्री, चेतेश्वर पुजारा, दिनेश कार्तिक समेत कई पूर्व खिलाड़ियों ने खुलकर सराहना की. रवि शास्त्री (पूर्व कोच) – ऐसा करने के लिए सिर्फ जज्बा नहीं, उससे कहीं ज्यादा हिम्मत चाहिए. जिसने कभी सोचा कि पंत 'टीम मैन' नहीं हैं, उन्हें अब जवाब मिल गया है. चेतेश्वर पुजारा (पूर्व बल्लेबाज) – इतना दर्द सहकर भी पंत ने जो साहस दिखाया, वह असाधारण है. हमें ऐसे खिलाड़ी चाहिए जो कठिन समय में आगे आएं. दिनेश कार्तिक (पूर्व विकेटकीपर) – जब वह मैदान पर थे, लगा कि यह लम्हा हमेशा के लिए यादगार बन गया. इंग्लैंड को पंत से लगाव है और अब वजह भी है. इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर नासिर हुसैन ने 'स्काई स्पोर्ट्स' पर कहा, ‘उन्होंने बहुत जोखिम उठाया. उनमें प्रतिभा तो है ही, साथ ही उनका दिल भी बहुत बड़ा है.’ इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल आथर्टन ने कहा, ‘पंत ने इस सीरीज में बहुत कुछ दिया है. लीड्स में दो शतक, शानदार जश्न, लेग साइड में शॉट लगाने के लिए बल्ला फेंकना और अब एक पैर में फ्रैक्चर होने के बावजूद अर्धशतक बनाना. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वह किसी उद्देश्य के साथ बल्लेबाजी कर रहे थे.’ आईसीसी करेगी नियमों में बदलाव? अब ऋषभ पंत की इंजरी के बाद आईसीसी सब्स्टीट्यूट नियमों में बदलाव कर सकता है. TOI की रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले समय में बाहरी चोटों के लिए भी टीमों को रिप्लेसमेंट की अनुमति दी जा सकती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि आईसीसी इसे लेकर पहले से ही चर्चा कर रहा है. आईसीसी की क्रिकेट समिति की अगली बैठक में इस पर मुहर लग सकती है. आईसीसी के एक सूत्र ने कहा, 'इस बात की संभावना है कि गंभीर बाहरी चोटों लगने की स्थिति में टीमों … Read more

28 जुलाई की रात 12 बजे खुलेंगे नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट, 24 घंटे होंगे दर्शन, , ऑनलाइन मिलेंगे शीघ्र दर्शन टिकट

उज्जैन ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में 29 जुलाई को मनाए जाने वाले नागपंचमी महापर्व को लेकर तैयारी शुरू हो गई है। लालपुल के समीप स्थित मंदिर प्रवेश मार्ग के मुहाने पर कर्कराज पार्किंग व भील समाज की धर्मशाला में श्रद्धालुओं की सुविधा के इंतजाम जुटाए जा रहे हैं। देशभर से आने वाले दर्शनार्थी यहीं से दर्शन की कतार में लगेंगे। नागपंमी पर भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए आम दर्शनार्थियों को करीब चार किलोमीटर पैदल चलना पड़ेगा। भक्तों को कर्कराज पार्किंग से भील समाज की धर्मशाला, गौंड बस्ती के रास्ते चारधाम मंदिर पार्किंग, होते हुए महाकाल मंदिर की ओर प्रवेश दिया जाएगा। शासन, प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के इंतजाम किए जा रहे हैं। बता दें 28 जुलाई की रात 12 बजे महाकाल मंदिर के शीर्ष पर स्थित भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट खुलेंगे। इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से पूजा अर्चना की जाएगी। इसके बाद आम दर्शन का सिलसिला शुरू होगा, जो 29 जुलाई की रात 12 बजे तक निरंतर जारी रहेगा। ऑनलाइन मिलेंगे शीघ्र दर्शन टिकट नागपंचमी पर कम समय में सुविधापूर्वक भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन करने के लिए 250 रुपये की शीघ्र दर्शन टिकट सुविधा उपलब्ध रहेगी। भक्त मंदिर की वेबसाइट पर ऑनलाइन अग्रिम बुकिंग कराकर नागचंद्रेश्वर के दर्शन कर सकते हैं। शीघ्र दर्शन टिकट वाले दर्शनार्थियों को कम पैदल चलना पड़ेगा और सुविधा से दर्शन होंगे। बता दें पूर्व में नागपंचमी पर भक्त आफलाइन शीघ्र दर्शन टिकट खरीद सकते थे। मंदिर समिति द्वारा इसके लिए विभिन्न स्थानों पर टिकट काउंटर लगाए जाते थे। कैश लाने ले जाने की परेशानी, काउंटरों पर रसीद कट्टों की उपलब्धता सुनिश्चित करना, कर्मचारियों को सुरक्षा आदि परेशानी के चलते इस बार यह व्यवस्था सिर्फ आनलाइन रखी जा रही है। पांच किलोमीटर क्षेत्र में सूचना संकेतक बोर्ड महाकाल मंदिर समिति व जिला प्रशासन द्वारा नागपंचमी पर शहर के आसपास पांच किलोमीटर दूर से सूचना संकेतक बोर्ड लगाए जा रहे हैं। इस व्यवस्था से बाहर से आने वाले दर्शनार्थियों को आसानी से मंदिर पहुंच मार्ग के साथ उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी मिल सकेगी। विभिन्न स्थानों पर पूछताछ व खोयापाया केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे।

बांग्लादेश : महिला कर्मचारियों का पहनावा तय करने वाले निर्देश के खिलाफ बवाल, वापस ली ‘तालिबानी’ ड्रेस पॉलिसी

ढाका  बांग्लादेश में तालिबान की तरह मोरल पुलिसिंग करने की मोहम्मद यूनुस सरकार की कोशिश मुंह के बल गिरी है. बांग्लादेश के सेंट्रल बैंक ने ऑर्डर जारी कर कहा था कि दफ्तर महिला अधिकारियों को शॉर्ट ड्रेस, शॉर्ट स्लीव और लेगिंग्स पहनने की अनुमति नहीं होगी. बांग्लादेश के केंद्रीय बैंक ने तीन दिन पहले महिला कर्मचारियों को 'शालीन और पेशेवर' कपड़े पहनकर दफ्तर आने कहा था. बांग्लादेश बैंक के मानव संसाधन विभाग ने यह भी चेतावनी दी थी कि आदेश का पालन न करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है. लेकिन सोशल मीडिया में तूफान उठ खड़ा हुआ. लोग बांग्लादेश बैंक मैनेजमेंट को फेसबुक और एक्स पर 'शालीन और पेशेवर' की परिभाषा बताने लगे. बात इतनी बढ़ी कि फिलहाल बांग्लादेश बैंक ने आदेश वापस ले लिया है. कई लोगों ने इस आदेश की तुलना तालिबानी ऑर्डर की.  रद्द किए गए आदेश के तहत पुरुष कर्मचारियों को लंबी या आधी बाजू वाली औपचारिक शर्ट, औपचारिक पैंट और जूते पहनने का निर्देश दिया गया था, जबकि जींस और फैंसी पजामे पहनने की अनुमति नहीं थी.  महिलाओं के लिए जारी निर्देश में सभी महिलाओं को साड़ी, सलवार-कमीज, कोई अन्य सादा, शालीन, पेशेवर परिधान, साधारण हेडस्कार्फ़ अथवा हिजाब पहनने के लिए कहा गया था. इस आदेश के तहत उन्हें औपचारिक सैंडल या जूते पहनने की अनुमति दी. केंद्रीय बैंक के आदेश में महिलाओं को छोटी बाजू के कपड़े या लंबे ढीले पोशाक और लेगिंग पहनने से मना किया गया था.  निर्देश में कहा गया था कि, "सभी स्तरों के अधिकारियों और कर्मचारियों को देश के सामाजिक मानदंडों के अनुरूप शालीन और पेशेवर ढंग से कपड़े पहनने चाहिए." इस आदेश का विरोध करते हुए एक्स पर एक यूजर ने लिखा कि इस्लामिक एजेंडे के तहत बांग्लादेश बैंक ने महिला अधिकारियों को शॉर्ट स्लीव और लैंगिंग्स नहीं पहनने को कहा है. लेकिन बांग्लादेश बैंक के गवर्नर की बेटी अपनी इच्छा के अनुसार कुछ भी पहनती है. इसके अलावा सभी विभागों को ड्रेस कोड दिशानिर्देशों के अनुपालन की निगरानी के लिए एक अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था.  कुछ लोगों ने इस आदेश की तुलना अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान शासन के आदेशों से भी की जिसमें सभी महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर सिर से पांव तक कपड़े पहनने का आदेश दिया गया है. एक यूजर ने ट्वीट किया, "नए तालिबानी युग में एक सतर्क तानाशाह का शासन." बांग्लादेश महिला परिषद की अध्यक्ष फ़ौजिया मुस्लिम ने स्थानीय मीडिया को बताया कि बांग्लादेश में ऐसा निर्देश अभूतपूर्व है. उन्होंने कहा, "एक खास सांस्कृतिक माहौल को आकार दिया जा रहा है, और यह निर्देश उसी प्रयास को दर्शाता है." सोशल मीडिया पर मचे बवाल के बीच बांग्लादेश बैंक ने गुरुवार को यह निर्देश वापस ले लिया. प्रवक्ता आरिफ़ हुसैन खान ने कहा कि, "यह सर्कुलर पूरी तरह से एक सलाह है. हिजाब या बुर्का पहनने के संबंध में कोई बाध्यता नहीं लगाई गई है." वहीं इस विवाद के बीच बुधवार रात पारित एक अध्यादेश ने नागरिकों को और भी ज्यादा नाराज कर दिया है. इसमें सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई का प्रस्ताव है. बांग्लादेश में बढ़ता तालिबानी असर गौरतलब है कि बांग्लादेश में हाल के कुछ महीनों में कट्टरपंथी तत्वों का उभार हुआ है. यहां तालिबानी विचारधारा का फुटप्रिंट भी बढ़ा है. रिपोर्ट के अनुसार बांग्लादेश में इस्लामिक विचारधारा का प्रभाव इतना बढ़ा है कि युवा अब तालिबान और TTP की ओर आकर्षित हो रहे हैं. बांग्लादेश से कम से कम दो पाकिस्तानी तालिबानी सदस्यों के पाकिस्तान होते हुए अफ़ग़ानिस्तान जाने के सबूत मिले हैं. उनमें से एक अप्रैल में वज़ीरिस्तान में पाकिस्तानी सेना के साथ मुठभेड़ में मारा गया था. यह घटना ऐसे समय में हुई है जब मलेशिया ने जून में 36 बांग्लादेशी नागरिकों को आतंकवादी नेटवर्क से कथित संबंधों के आरोप में हिरासत में लिया था. 

राहुल गांधी का हमला – ‘PM मोदी को मीडिया ने किया ओवरहाइप

नई दिल्ली लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से कई बार मिल चुके हैं और उनमें कोई दम नहीं है। उन्होंने कांग्रेस 'ओबीसी भागीदारी न्याय सम्मेलन' में यह टिप्पणी की। राहुल गांधी ने अपने भाषण के दौरान जब यह सवाल किया कि देश में सबसे बड़ी समस्या क्या हैं तो वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने प्रधानमंत्री का नाम लिया। इस पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ''नरेन्द्र मोदी कोई बड़ी समस्या नहीं हैं। मीडिया वालों ने सिर्फ गुब्बारा बना रखा है। मैं उनसे मिल चुका हूं, उनके साथ कमरे में बैठा हूं। बस ‘शो’ हैं, कोई दम नहीं है।'' उन्होंने आगे कहा कि पहले मैं उनसे नहीं मिला था, लेकिन अब मैं उनसे 2-3 बार मिल चुका हूं। अब मुझे समझ आ गया है कि कुछ भी नहीं है – वे सिर्फ दिखावा हैं, कोई दम नहीं। आप उनसे नहीं मिले हैं, मैं मिला हूं। जनसभा को संबोधित करते हुए, राहुल गांधी ने ओबीसी युवाओं से अपनी ताकत पहचानने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ओबीसी युवाओं से मेरी सबसे बड़ी शिकायत यह है कि वे अपनी ताकत नहीं समझते। एक बार जब वे अपनी ताकत समझ जाएंगे, तो पूरा परिदृश्य बदल जाएगा। राहुल गांधी ने कहा, ''आप मेरी बहन प्रियंका से पूछिएगा कि अगर राहुल ने किसी काम के लिए मन बना लिया तो उस बात को वो छोड़ेगा या नहीं? मैं नहीं छोड़ने वाला। जातिगत जनगणना तो पहला कदम है, मेरा लक्ष्य है कि आपके काम को हिंदुस्तान में सम्मान और भागीदारी मिले।'' कांग्रेस सांसद ने अंग्रेजी भाषा को लेकर भी बीजेपी पर हमला बोला। उन्होंने कहा, ''बीजेपी के नेता कहते हैं कि अंग्रेजी को देश से मिटा देंगे। लेकिन आप उनसे पूछिए कि अंग्रेजी मिटाना चाहते हैं, आपके बच्चे कहां पढ़ते हैं। हिंदी मीडियम में पढ़ते हैं या अंग्रेजी मीडियम में पढ़ते हैं। लंदन, अमेरिका में क्या वे हिंदी में पढ़ते हैं, नहीं, क्षेत्रीय भाषा, हिंदी-तमिल, पंजाबी, कन्नड़ सब जरूरी हैं, लेकिन उसके साइड में अंग्रेजी भी जरूरी है।''

UK के बाजार में बढ़ेगी भारतीय उत्पादों की मांग, FTA से भारत को मिलेगा बड़ा फायदा

नई दिल्ली भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच द्विपक्षीय व्यापर को लेकर फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर साइन हो चुकी है. इस समझौते के बाद UK का बड़ा बाजार भारतीय प्रोडक्ट्स के लिए खुल जाएंगे, जबकि ब्रिटिश प्रोडक्ट्स की भारत में मौजूदगी और बिक्री दोनों बढ़ जाएगी. लेकिन अब अनुमान ये लगाया जा रहा है कि इस डील से किस देश को ज्यादा फायदा होने वाला है, जबकि अभी तो केवल दस्तावेजों पर ही साइन हुए हैं. दरअसल, UK के बीच यह समझौता दोनों देशों के लिए 'Win-Win' वाला सिचुएशन है. लेकिन भारत को दीर्घकालिक लाभ अधिक हो सकता है, क्योंकि इसके एक्सपोर्ट सेक्टर में खासकर MSME और कृषि को वैश्विक बाजार में मजबूती मिलेगी. साथ ही भारतीय प्रोफेशनल के लिए ब्रिटेन में अवसर बढ़ेंगे. अगर यूके की बात करें तो उसे तत्काल आर्थिक राहत और भारतीय बाजार में पहुंच का फायदा होने वाला है. दोनों देशों का लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 120 अरब डॉलर तक बढ़ाना है, जो इस समझौते का पहला टारगेट है. ब्रिटेन पहले से ही भारत में 36 अरब डॉलर का निवेशक है. इस समझौते से मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में और निवेश की संभावना है.  दोनों देशों के बीच व्यापार टारगेट बता दें, दोनों देशों के बीच साल 2023-24 में व्यापार 4.74 लाख करोड़ रुपये (लगभग 60 अरब डॉलर) का था, और इस समझौते से भारत का निर्यात 60% तक बढ़ सकता है. अनुमान है कि अगले 5 साल में भारतीय गारमेंट्स, चमड़ा, रत्न-आभूषण, समुद्री उत्पाद और ऑटोमोबाइल पार्ट्स जैसे क्षेत्रों में ब्रिटेन को निर्यात में भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.  ब्रिटेन में खूब बिकेंगे ये प्रोडक्ट्स इस समझौते से 95% से अधिक कृषि और इससे जुड़े खाद्य प्रोडक्ट्स पर शून्य शुल्क लगेगा, जिससे कृषि निर्यात बढ़ेगा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ताकत मिलेगी. अगले तीन वर्षों में कृषि निर्यात में 20% से अधिक की बढ़ोतरी का अनुमान है, जो 2030 तक भारत के 100 अरब डालर के कृषि-निर्यात के लक्ष्य को पूरा करने में योगदान देगा. ब्रिटेन के 90% उत्पादों पर भारत में शुल्क हटाया जाएगा या कम किया जाएगा. ब्रिटेन में भारतीय मसाले, फल-सब्जियां, और हस्तशिल्प सस्ते और अधिक उपलब्ध होंगे. स्कॉच व्हिस्की (150% से 75%, फिर 10 वर्षों में 40%), कारें (100% से 10%), कॉस्मेटिक्स, चॉकलेट, बिस्किट, सैल्मन मछली, और मेडिकल डिवाइसेज जैसे उत्पाद भारत में सस्ते होंगे.   किसान के लिए बड़े मौके इससे भारतीय किसानों के लिए प्रीमियम ब्रिटिश बाजार के दरवाजे खुलेंगे, जो जर्मनी, नीदरलैंड और अन्य यूरोपीय संघ के देशों को मिलने वाले फायदे के बराबर या उससे भी अधिक होगा. हल्दी, काली मिर्च, इलायची, अचार और दालों को भी शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी. जबकि ब्रिटेन का भारत को निर्यात (व्हिस्की, कारें, मेडिकल उपकरण) भी 60% तक बढ़ सकता है. लक्ष्य ये भी है कि दोनों देशों के बीच व्यापार प्रक्रियाओं को सरल और डिजिटल बनाए, जिससे व्यापार लागत कम होगी. इस डील एक हिस्सा ये भी है कि भारत में कपड़ा, चमड़ा, और रत्न-आभूषण जैसे उद्योगों नौकरिकों के अवसर बढ़ेंगे. MSME सेक्टर विशेष रूप से क्षेत्रीय हस्तशिल्प जैसे कोल्हापुरी चप्पल और बनारसी साड़ी, को ब्रिटेन के बाजार में बढ़त मिलेगी. ब्रिटेन में भी हजारों नौकरियां पैदा होंगी, खासकर व्हिस्की, ऑटोमोबाइल, और चिकित्सा उपकरण सेक्टर में.  भारत के 99% निर्यात पर ब्रिटेन में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जिसपर फिलहाल 4-16% शुल्क लिए जाते हैं. इससे वस्त्र, चमड़ा, जूते, रत्न-आभूषण, समुद्री उत्पाद, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे क्षेत्रों को बड़ा फायदा होगा. विशेष रूप से कृषि और समुद्री उत्पादों (जैसे झींगा, टूना, मसाले, हल्दी, कटहल, बाजरा) पर 95% से अधिक शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जिससे अगले 5 वर्षों में कृषि निर्यात में 20% की वृद्धि की उम्मीद है.  मेक इन इंडिया की ताकत उम्मीद की जा रही है कि 5 साल के बाद यह समझौता भारत में 'मेक इन इंडिया' और महिला उद्यमिता को मजबूती देगा, क्योंकि समझौते में लैंगिक समानता और श्रम अधिकारों पर जोर दिया गया है. डील के तहत भारतीय प्रोफेशनल (जैसे आईटी, हेल्थ, योग प्रशिक्षक) को ब्रिटेन में अस्थायी वीजा और सामाजिक सुरक्षा अंशदान में तीन साल की छूट से लाभ होगा. जबकि 5 साल के बाद करीब 100 अतिरिक्त वार्षिक वीजा और बढ़ी हुई श्रम गतिशीलता से भारतीय युवाओं को ब्रिटेन में अधिक अवसर मिलेंगे. 60,000 से अधिक आईटी पेशेवरों को ब्रिटेन में अस्थायी वीजा के माध्यम से काम करने में आसानी होगी. आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी का विस्तार यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा. साल 2030 तक यानी 5 साल के बाद भारत और ब्रिटेन 'UK-India Vision 2035' के तहत रक्षा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, जलवायु, और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे. हालांकि फिलहाल ये यह कहना कि किसे ज्यादा फायदा होगा, ये जटिल है, क्योंकि दोनों देशों को अलग-अलग क्षेत्रों में महत्वपूर्ण लाभ मिलेंगे. 

रंग लाई मुख्यमंत्री की पहल, जशपुर मेेें शुरू हुई एयर स्कवाड्रन

मुख्यमंत्री साय के प्रयासों से मिली स्वीकृति स्थानीय युवाओं को कैरियर बनाने में मिलेगी मदद मुख्यमंत्री से एयर एनसीसी के छात्रों ने की मुलाकात  रायपुर, छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के युुवाओं को अब एनसीसी में एयर स्क्वाड्रन के जरिए अपना कैरियर बनाने के लिए मदद मिल पाएगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रयासों से जिले के पीएमश्री जवाहर नवोदय विद्यालय में एनसीसी की एयर स्क्वाड्रन शुरू करने की मंजूरी मिल गई है। यह छत्तीसगढ़ की 3 सीजी एनसीसी एयर स्क्वाड्रन होगी।  श्री साय के प्रयासों से यह  जिले के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जो स्थानीय युवाओं के भविष्य को नई ऊँचाइयाँ प्रदान करेगी।      मुख्यमंत्री ने विद्यालय में एयर एनसीसी के लिए चयनित 25 मेधावी विद्यार्थियों को एनसीसी कैडेट्स का बैच लगाकर पंजीयन की शुरुआत की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इनमें 13 बालिकाएं और 12 बालक शामिल हैं।  इस अवसर पर विंग कमांडर श्री विवेक कुमार साहू ने मुख्यमंत्री को प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान विधायक श्रीमती गोमती साय और श्रीमती रायमुनी भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष श्री अरविंद भगत, उपाध्यक्ष श्री यश प्रताप  सिंह जूदेव, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री शौर्य प्रताप सिंह जूदेव सहित जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।      उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री साय ने पिछले एनसीसी दिवस समारोह के दौरान रायपुर के समान राज्य के अन्य हवाई पट्टी वाले शहरों में भी एनसीसी की एयर स्कवाड्रन शुरू करने की इच्छा व्यक्त की थी। अभी तक छत्तीसगढ़ में केवल रायपुर में ही एयर एनसीसी और उड़ान का प्रशिक्षण दिया जाता है, जबकि जगदलपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर और जशपुर जैसे स्थानों पर भी हवाई पट्टियों की सुविधा उपलब्ध है। मुख्यमंत्री की इस पहल पर मार्च माह में जशपुर की आगडीह हवाई पट्टी को 3 सीजी एयर एनसीसी स्क्वाड्रन के लिए स्वीकृति प्रदान की गई और एक माइक्रोलाइट विमान को प्रशिक्षण हेतु जशपुर भेजा गया। इस दौरान लगभग 100 कैडेट्स को उड़ान का वास्तविक अनुभव प्रदान किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वयं हवाई पट्टी पहुंचकर प्रशिक्षण कार्यक्रम का निरीक्षण किया और कैडेट्स से संवाद किया। कैडेट्स ने उन्हें विमान से संबंधित तकनीकी जानकारियाँ भी साझा कीं। प्रशिक्षण प्राप्त कैडेट को रोजगार के बेहतर अवसर     वर्तमान में 3 सीजी एयर एनसीसी एयर स्क्वाड्रन, पूरे देश में एकमात्र एयर स्क्वाड्रन है जिसमें एम्स, एमबीबीएस और नर्सिंग के छात्र कैडेट के रूप में जुड़े हुए हैं। कैडेटों को  यूपीएससी और एसएसबी साक्षात्कार के माध्यम से सेना में 25 वैकेन्सी /पाठ्यक्रम के अवसर मिलते हैं, एसएससी के माध्यम से ऑफिसर्स ट्रेनिग अकादमी के लिए 50 वैकेंसी/पाठ्यक्रम के अवसर मिलते हैं जिसमें यूपीएससी परीक्षा की आवश्यकता नहीं होती है और केवल एसएसबी साक्षात्कार के माध्यम से चयन के अवसर मिलते है। 20 सीटें लडकियों के लिए आरक्षित होती हैं। वायु सेना के उड़ान प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों सहित सभी पाठ्यक्रमों में 10 प्रतिशत वेकेंसी होती है। जिसके लिए एएफसीएटी, यूपीएससी परीक्षा की आवश्यकता नहीं होती है। इसी तरह से पैरामिलिट्री फोर्स भर्ती में 2 से 10 बोनस अंक दिया जाता है।कई उद्योगों में भी एनसीसी सी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरियों में प्राथमिकता दी जाती है।

कंबोडिया vs थाईलैंड टकराव से बढ़ा संकट, पहले ही यूक्रेन-PAK-ईरान झेल चुके तबाही

बैंकॉक/नोम पेन्ह  थाईलैंड और कंबोडिया के बीच युद्ध भयानक होता जा रहा है। थाईलैंड की सेना ने अब कंबोडिया के खिलाफ 'ऑपरेशन युथा बोडिन' लॉन्च करने का ऐलान किया है। थाई सेना ने कहा है कि वो 'पवित्र भूमि के लिए युद्ध' शुरू कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक थाईलैंड की सेना ने ऑपरेशन लॉन्च करने की घोषणा करते हुए कहा है कि उसका मकसद 'थाई भूमि पर अतिक्रमण करने वालों को कुचलने' की है। कंबोडिया की सेना पर जबरदस्त हमला करते हुए थाईलैंड की सेना ने 'युथा बोडिन' नाम से जबरदस्त जमीनी और हवाई हमला शुरू कर दिया है। जिसके बाद सीमा पर जारी हिंसक झड़पों के दूसरे दिन थाईलैंड की सरकार ने 4 सीमावर्ती प्रांतों से एक लाख से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक अब तक 15 लोगों की मौत की रिपोर्ट दर्ज दी गई है, जिनमें 14 आम नागरिक हैं। आपको बता दें कि गुरुवार को सुबह सुबह दोनों देशों की सेनाओं के बीच एक विवादित इलाके में गोलीबारी शुरू होने के साथ युद्ध शुरू हो गई थी। जल्द ही यह झड़प भारी हथियारों और रॉकेट हमलों में तब्दील हो गई। थाई सेना ने बयान में कहा है कि कंबोडियाई सेना ने BM-21 ग्रैड रॉकेट सिस्टम और फील्ड आर्टिलरी का इस्तेमाल किया है। इसके अलावा थाईलैंड की सेना ने कहा है कि 'स्थिति के मुताबिक उचित कार्रवाई की जा रही है।' जबकि कंबोडिया ने दावा किया कि थाई सैनिकों ने बिना उकसावे के उनके इलाके में घुसपैठ की, जिसके जवाब में उन्होंने 'आत्मरक्षा के अधिकार' के तहत कार्रवाई की है। थाईलैंड का 'युथा बोडिन' ऑपरेशन कितना खतरनाक? आपको बता दें कि थाईलैंड की भाषा में 'युथा बोडिन' का मतलब "भूमि की रक्षा के लिए सर्वोच्च युद्ध" होता है। 'युथा' युद्ध का प्रतीक है, जबकि 'बोडिन' पवित्र भूमि को दर्शाता है। थाईलैंड के सैन्य अधिकारियों के मुताबिक यह नाम थाईलैंड की संप्रभुता का उल्लंघन करने की हिम्मत करने वाले किसी भी विरोधी के खिलाफ एक निर्णायक और वैध रणनीतिक प्रतिक्रिया को दर्शाता है। इसके अलावा थाईलैंड की सेना ने अपने अभियान में कहा है कि "थाई भूमि पर अतिक्रमण करने वाले सभी लोगों को कुचल दो, जमीन के लिए, लोगों के लिए, थाई सम्मान के लिए।" थाईलैंड की सेना ने शुक्रवार को उबोन रत्चथानी और सुरिन प्रांतों में झड़पों की सूचना दी है। इसने कहा है कि कंबोडिया ने तोपखाने और रूस के बने रॉकेट सिस्टम का इस्तेमाल किया है। थाई सेना ने एक बयान में कहा है कि "कंबोडियाई बलों ने भारी हथियारों, फील्ड आर्टिलरी और बीएम-21 रॉकेट सिस्टम का उपयोग करके लगातार बमबारी की है।" रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देशों के बीच की ये झड़प करीब 209 किलोमीटर के दायरे में हो रही है। जिसमें कम से कम 6 जगहों पर भारी गोलीबारी हो रही है। दोनों देशों के बीच 13 वर्षों में सबसे भीषण लड़ाई तब शुरू हुई, जब थाईलैंड ने बुधवार को नोम पेन्ह स्थित अपने राजदूत को वापस बुला लिया और कंबोडिया के दूत को निष्कासित कर दिया। यह घटना उस घटना के बाद हुई जिसमें एक अन्य थाई सैनिक बारूदी सुरंग हमले में घायल हो गया। बैंकॉक का आरोप है कि कंबोडिया ने ये बारूदी सुरंग बिछाया था। थाईलैंड के कार्यवाहक प्रधानमंत्री फुमथाम वेचायाचाई ने कहा है कि "हम शांति से समाधान चाहते हैं, लेकिन यह एक जानबूझकर उकसावे वाली कार्रवाई है। हमें अपनी सीमाओं की रक्षा करनी पड़ी।" कंबोडिया-थाईलैंड टकराव बना साल का छठा संघर्ष, यूक्रेन से PAK तक दुनिया में अशांति 2025 दुनिया के लिए युद्धों का साल बन गया है. कंबोडिया-थाईलैंड युद्ध इस साल का पांचवां बड़ा संघर्ष है, जो प्रीह विहार और ता मुएन थोम मंदिरों के पास सीमा विवाद से शुरू हुआ. इसके अलावा, भारत-पाकिस्तान युद्ध, यूक्रेन-रूस, इज़रायल-हमास, सूडान गृहयुद्ध और ईरान-पाकिस्तान तनाव ने दुनिया को हिलाकर रख दिया, इन युद्धों ने लाखों लोगों की जान ली, इमारतों को मलबे में बदला और हथियारों की बिक्री को आसमान पर पहुंचा दिया. आइए, इन पांच युद्धों की तबाही, मौतें, इमारतों का नुकसान और हथियारों की बिक्री को समझते हैं. 1. भारत-पाकिस्तान युद्ध (2025) क्या हुआ? 7 मई 2025 को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए. ये कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले (26 नागरिक मारे गए) के जवाब में थी. पाकिस्तान ने इसे युद्ध की कार्रवाई बताकर जवाबी हमले शुरू किए, जिसमें ड्रोन, मिसाइल और फाइटर जेट्स का इस्तेमाल हुआ. 10 मई को युद्धविराम हुआ.  तबाही और मौतें भारत मौतें: 16 नागरिक (पुंछ में 5 बच्चे शामिल).    नुकसान: जम्मू, श्रीनगर, पुंछ और राजौरी में गोलाबारी से घर, एक हिंदू मंदिर और बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त.  विस्थापन: हजारों लोग जम्मू-कश्मीर और पंजाब के सीमावर्ती इलाकों से भागे. पाकिस्तान मौतें: 40 नागरिक (7 महिलाएं, 15 बच्चे) और 11 सैनिक मारे गए. 100+ आतंकी मारे गए. नुकसान: मुरीदके, बहावलपुर, और 11 एयरबेस (सूरतगढ़, सिरसा, आदि) तबाह. विस्थापन: लाहौर और सियालकोट में लोग सुरक्षित ठिकानों पर गए. हथियारों की बिक्री भारत: राफेल जेट्स, ब्रह्मोस मिसाइल, S-400 डिफेंस सिस्टम और इज़रायल-भारत ड्रोन का इस्तेमाल.   पाकिस्तान: JF-17 जेट्स (चीन), शाहेद-136 ड्रोन (ईरान) और 122 मिमी रॉकेट।   विश्लेषण: इस युद्ध ने $5-10 बिलियन की हथियार खरीद को बढ़ावा दिया, खासकर ड्रोन और मिसाइल सिस्टम की मांग बढ़ी.   2. कंबोडिया-थाईलैंड युद्ध (2025) क्या हुआ? 24 जुलाई 2025 को थाईलैंड ने कंबोडिया के सैन्य ठिकानों पर F-16 जेट्स से हवाई हमले किए, क्योंकि कंबोडिया ने ड्रोन और रॉकेट से हमला किया था. ये विवाद प्रीह विहार और ता मुएन थोम मंदिरों के सीमा क्षेत्र को लेकर था.   तबाही और मौतें थाईलैंड मौतें: 14 लोग मारे गए (13 नागरिक, 1 सैनिक), 46 घायल.   नुकसान: सिसाकेट और सुरिन में गैस स्टेशन, अस्पताल और प्रीह विहार मंदिर को नुकसान.   विस्थापन: 40,000-1,00,000 लोग विस्थापित. कंबोडिया मौतें: 20 लोग मारे गए, दावे की पुष्टि नहीं.   नुकसान: ओड्डार मीनचे में सैन्य ठिकाने और पगोडा रोड नष्ट. हथियारों की बिक्री थाईलैंड: F-16 (अमेरिका) और SAAB ग्रिपेन.   कंबोडिया: BM-21 रॉकेट (चीन/रूस).   विश्लेषण: ड्रोन और रॉकेट सिस्टम की मांग बढ़ी. 3. यूक्रेन-रूस युद्ध (2022-2025) क्या हुआ? रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमला शुरू किया, जो 2025 … Read more

मालदीव के रक्षा मंत्रालय की बिल्डिंग पर पीएम मोदी का इतना बड़ा बैनर: मुइज्जू ने मोदी को ऐसे कहा शुक्रिया

नई दिल्ली मालदीव की राजधानी माले में हाल ही में बना रक्षा मंत्रालय भवन आज सुर्खियों में है. इस भवन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं. मालदीव में रक्षा मंत्रालय भवन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर का होना भारत-मालदीव संबंधों की मजबूती और आपसी सम्मान का प्रतीक है. 25 जुलाई 2025 को पीएम मोदी की दो दिवसीय यात्रा के दौरान, जब वे राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के निमंत्रण पर मालदीव पहुंचे, इस भवन पर उनकी तस्वीर लगाई गई, जो भारत की बढ़ती क्षेत्रीय प्रभावशक्ति और मालदीव के साथ रक्षा सहयोग को दर्शाती है. यह कदम हाल के तनावों के बाद संबंधों को फिर से मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है, खासकर जब मालदीव ने भारत को First Responder मानता है. कुछ लोग इसे भारत के प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश या चीन के बढ़ते हस्तक्षेप के जवाब के रूप में भी देखते हैं.   क्या है खास? इस बिल्डिंग में पर्यावरण का खास ख्याल रखा गया है. इसमें सौर पैनल और बादल संग्रहण प्रणाली लगाई गई है, जो इसे पर्यावरण-अनुकूल बनाती है. भवन में कमांड सेंटर, रक्षा संचालन कक्ष और प्रशिक्षण सुविधाएं हैं, जो मालदीव की सेना को आधुनिक तकनीक से लैस करेंगे. इसकी तीन मंजिलें और ग्लास फेसेड डिज़ाइन इसे भव्य बनाता है. क्यों बना यह भवन? मालदीव ने हाल के सालों में अपनी रक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया है, भारत-चीन प्रभाव के बीच. 2023 में मोहम्मद मुइज्जू की सरकार ने रक्षा बजट को दोगुना कर $50 मिलियन (लगभग 420 करोड़ रुपये) किया था. यह भवन उसी रणनीति का हिस्सा है, जो देश की समुद्री सीमाओं और पर्यटन को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी है. भारत के साथ रिश्ता भारत ने इस प्रोजेक्ट में तकनीकी सहायता दी है. 2024 में भारत-मालदीव रक्षा समझौते के तहत भारतीय विशेषज्ञों ने भवन की सुरक्षा और डिज़ाइन में मदद की. मालदीव के रक्षा मंत्री ने कहा कि यह भवन हमारे देश की संप्रभुता को मजबूत करेगा. हालांकि, कुछ लोग इसे चीन के बढ़ते प्रभाव के जवाब के तौर पर देख रहे हैं.

भर्ती के बाद मरीजों की सुध नहीं, हाई कोर्ट ने निजी अस्पतालों को बताया ‘ATM मशीन चलाने वाला

 इलाहाबाद निजी अस्पताल मरीजों का एटीएम की तरह इस्तेमाल करते हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक केस की सुनवाई के दौरान गुरुवार को यह टिप्पणी की। अदालत ने लापरवाही के एक मामले में डॉक्टर के खिलाफ आपराधिक केस हटाने की मांग को खारिज करते हुए यह बात कही। जस्टिस प्रशांत कुमार की बेंच ने पाया कि डॉ. अशोक कुमार ने एक गर्भवती महिला को सर्जरी के लिए एडमिट कर लिया था, जबकि उनके पास एनेस्थिटिस्ट की कमी थी। वह काफी देर से पहुंचा और तब तक गर्भ में पल रहे भ्रूण की मौत हो गई थी। अदालत ने कहा कि यह सामान्य हो गया है कि अस्पताल पहले मरीजों को भर्ती कर लेते हैं और फिर संबंधित डॉक्टर को बुलाया जाता है। अदालत ने कहा, 'यह एक सामान्य प्रैक्टिस देखी जा रही है कि निजी अस्पताल मरीजों को इलाज के लिए एडमिट कर लेते हैं। भले ही उनके पास संबंधित बीमारी के इलाज के लिए डॉक्टर न हो। मरीजों को भर्ती करने के बाद ही ये डॉक्टर को कॉल करते हैं। एक बार मरीज को एडमिट करने के बाद ये लोग डॉक्टरों को कॉल करना शुरू करते हैं। यह सामान्य धारणा बन गई है कि निजी अस्पतालों की ओर से मरीजों का इस्तेमाल एक एटीएम की तरह किया जाता है, जिनसे पैसों की उगाही होती है।' बेंच ने कहा कि ऐसे मेडिकल प्रोफेशनल्स को संरक्षण मिलना ही चाहिए, जो पूरी गंभीरता के साथ काम करते हैं। अदालत ने कहा कि ऐसे लोगों पर ऐक्शन जरूरी है, जो बिना पर्याप्त सुविधा के ही अस्पताल खोल लेते हैं। ऐसा सिर्फ इसलिए ताकि वे मरीजों से मनमाने पैसे कमा सकें। अदालत ने सुनवाई के दौरान डॉक्टर के उस दावे को खारिज कर दिया कि उस समय महिला के परिजन ऑपरेशन के लिए तैयार ही नहीं थे। बेंच ने कहा कि यह मामला पूरी तरह से लापरवाही और अवैध कमाई करने का है। अदालत ने कहा कि डॉक्टर ने महिला को एडमिट कर लिया। परिवार से यह मंजूरी मिल गई कि ऑपरेशन किया जाए, लेकिन उसे टाला जाता रहा क्योंकि सर्जरी के लिए डॉक्टर ही उपलब्ध नहीं था। परिजनों से परमिशन के बाद भी ऑपरेशन में हुई लेट, क्योंकि डॉक्टर नहीं था बेंच ने कहा कि डॉक्टर ने ऑपरेशन के लिए 12 बजे अनुमति ले ली थी। इसके बाद भी सर्जरी नहीं हो सकी क्योंकि असप्ताल में डॉक्टर ही नहीं था। अदालत ने कहा कि एक डॉक्टर का संरक्षण उसी स्थिति में किया जाना जरूरी है, जब वह पूरे मन से काम कर रहा हो। फिर भी गलती हो तो उसे ह्यूमन फैक्टर मानकर नजरअंदाज किया जा सकता है। लेकिन लापरवाही के ऐसे मामलों में इस चीज को स्वीकार नहीं किया जा सकता।