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PM ओली के बाद राष्ट्रपति ने भी दिया इस्तीफा, काठमांडू में प्रदर्शनकारियों की जीत परेड

काठमांडू  नेपाल में बीते 30 घंटे के समय में सब कुछ बदल चुका है. युवाओं के प्रदर्शन के सामने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति तक ने घुटने टेक दिए और इस्तीफा देने को मजबूर हुए. सोशल मीडिया बैन के ख़िलाफ़ युवाओं के आक्रोश से ज्यादातर शहरों में हिंसा हुई. प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति से लेकर गृहमंत्री के घर तक जला दिए. नेपाल में हिंसक प्रदर्शनों से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन में आग लगा दी। इसके अलावा, पीएम ओली, राष्ट्रपति, गृहमंत्री के निजी आवास पर तोड़फोड़ के बाद आगजनी की।प्रदर्शनकारियों ने पूर्व पीएम शेर बहादुर देउबा को घर में घुसकर पीटा। वहीं, वित्त मंत्री विष्णु पोडौल को काठमांडू में उनके घर के नजदीक दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। इसका वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें एक प्रदर्शनकारी उनके सीने पर लात मारता दिख रहा है। इन हिंसक घटनाओं के बीच प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया है। उन्हें सेना हेलिकॉप्टर से अ‍ज्ञात स्थान पर ले गई है। इस हिंसा में अब तक 22 लोग मारे जा चुके हैं, जबकि 400 से ज्यादा लोग घायल हैं।प्रदर्शनकारियों ने पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड, शेर बहादुर देउबा और संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग के निजी आवासों को भी आग के हवाले कर दिया। इस्तीफे के बाद भी क्यों शांत नहीं हो रहा है नेपाल? नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का इस्तीफा तक राष्ट्रपति की ओर से स्वीकार कर लिया गया है. हालांकि, राजधानी काठमांडू समेत कई शहरों में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. इस्तीफे के बाद भी प्रदर्शनकारी शांत क्यों नहीं हो रहे हैं.  दिल्ली में नेपाल दूतावास की बढ़ाई गई सुरक्षा नेपाल में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. प्रदर्शनकारियों और विपक्षी दलों की ओर से बालेन शाह को प्रधानमंत्री बनाए जाने की मांग तेज होते जा रही है. इस बीच भारत में नेपाल दूतावास की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. दिल्ली में नेपाल का दूतावास बाराखंभा रोड पर स्थित है.  चार साल में भारत के 4 पड़ोसी देशों में 'तख्तापलट' बीते चार सालों में भारत के कई पड़ोसी मुल्कों में तख्तापलट हुआ है. इनमें अफगानिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश के बाद अब नेपाल भी शामिल हो गया है. पड़ोसी मुल्कों की तख्तापलट की कहानी आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं – भारत के चार पड़ोसी देशों में जन आक्रोश के आगे झुकी सरकार  बीरगंज में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगाया गया बिहार में पूर्वी चंपारण के रक्सौल शहर से सटे नेपाल के बीरगंज में आज सुबह से ही प्रदर्शनकारियों ने जबरदस्त प्रदर्शन किया. स्थिति तनावपूर्ण बना हुआ है. प्रशासन ने हिंसक प्रदर्शन पर लगाम लगाने के लिए पूरे शहर में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया. काठमांडू ने प्रदर्शनकारियों ने निकाला जुलूस मार्च नेपाल में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है. राजधानी काठमांडू समेत कई शहरों में अभी भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं.  राजधानी काठमांडू की सड़कों पर प्रदर्शनकारियों का कब्जा है. पुतलीसडक में जुलूस मार्च निकाला गया. प्रदर्शनकारी पुलिस के दंगा निरोधक उपकरण के साथ मार्च करते नज़र आए. युवाओं के आंदोलन की 7 प्रमुख वजहें 1. नेपोटिज्म: जेन-जी को भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी ने निराश किया। भाई-भतीजावाद (नेपोटिज्म) और चहेतों को कुर्सी पर बैठाने से नेताओं के बच्चों की विदेशी यात्राएं, ब्रांडेड सामान, शानो शौकत की पार्टियां सोशल मीडिया पर चर्चित होने लगीं। 2. सोशल मीडिया बैन: लोगों को लगा कि उनकी आवाज दबा दी गई है। कई युवा इसके जरिए कमाई भी कर रहे थे। इससे गुस्सा भड़का। 3. तीन बड़े घोटाले: 4 साल में 3 बड़े घोटाले सामने आए। 2021 में 54,600 करोड़ रुपए का गिरी बंधु भूमि स्वैप घोटाला, 2023 में 13,600 करोड़ रुपए का ओरिएंटल कोऑपरेटिव घोटाला और 2024 में 69,600 करोड़ रुपए का कोऑपरेटिव घोटाला। इससे युवाओं में सरकार के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा था। 4. सियासी अस्थिरता: 5 साल में 3 सरकारें आईं। जुलाई 2021 में शेर बहादुर देउबा पीएम। दिसंबर 2022 में प्रचंड पीएम बने। जुलाई 2024 से ओली आए। 5. बेरोजगारी-आर्थिक असमानता: बेरोजगारी दर 2019 में 10.39% थी, अभी 10.71% है। महंगाई दर 2019 में 4.6% थी। अब 5.2% है। आर्थिक असमानता हावी। 20% लोगों के पास 56% संपत्ति। 6. विदेशी दबाव: ओली सत्ता में आए तो चीन की ओर झुकाव बढ़ा। पहले सरकारों ने कई फैसले अमेरिकी प्रभाव में लिए। सोशल मीडिया बैन के बीच सिर्फ चीनी ऐप टिक-टॉक चलता रहा। युवाओं को लगता है कि बड़े देशों के दबाव में नेपाल मोहरे जैसा इस्तेमाल हो रहा है। 7. भारत से बढ़ती दूरी: ओली पीएम बने तो लिपुलेख दर्रे को नेपाल के नक्शे में दिखाया। चीन से नजदीकी बढ़ाई। दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण हुए तो नेपाल पर आर्थिक दबाव पड़ा। इससे भी युवाओं में बेचैनी।

इंदौर में चूहों द्वारा नवजात काटने की घटना, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई – उप मुख्यमंत्री शुक्ल

स्वास्थ्य संस्थानों में प्रभावी उपायों के दिए निर्देश भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय, भोपाल में इंदौर में घटित चूहे काटने की घटना पर की गई कार्रवाई की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि पूरी कार्यवाही निष्पक्षता, पारदर्शिता एवं तथ्यों के आधार पर की जाए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएँ स्वास्थ्य सेवाओं की छवि को धूमिल करती हैं, दोषी व्यक्तियों की पहचान कर कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिये कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी रोकथाम उपाय तुरंत लागू किए जाएँ। अस्पताल अधीक्षक डॉ. अशोक यादव, प्रो. एवं विभागाध्यक्ष डॉ. बृजेश लाहोटी, प्रो. डॉ. मनोज जोशी एवं सहायक प्रभारी नर्सिंग अधिकारी श्रीमती कलावती भलावी को उक्त घटना के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। सहायक अधीक्षक एवं भवन प्रभारी डॉ. मुकेश जायसवाल, प्रभारी नर्सिंग अधिकारी सुप्रवीणा सिंह, नर्सिंग अधिकारी सुआकांक्षा बेंजामिन एवं सुश्वेता चौहान को निलंबित किया गया है। नर्सिंग अधीक्षक श्रीमती मार्गरेट जोसफ को पद से हटाया गया है तथा नर्सिंग अधिकारी श्रीमती प्रेमलता राठौर का स्थानांतरण मानसिक चिकित्सालय में किया गया है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि अस्पताल परिसरों की स्वच्छता, सुरक्षा और मरीजों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संदीप यादव, आयुक्त तरुण राठी, तथा एम.डी. एम.पी. पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड मयंक अग्रवाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

परंपरागत ऊर्जा के घटते भंडार का सबसे बेहतर विकल्प: इलेक्ट्रिक व्हीकल

परंपरागत ऊर्जा के घटते भंडार का सबसे बेहतर विकल्प इलेक्ट्रिक व्हीकल एसीएस मनु श्रीवास्तव मेनिट के कार्यक्रम में हुए शामिल भोपाल विश्व इलेक्ट्रिक व्हीकल दिवस दुनिया में जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण और परंपरागत ऊर्जा के घटते भंडार के बेहतर उपायों में से इलेक्ट्रिक व्हीकल एक है। केन्द्र और राज्यों की सरकारें जनता में इलेक्ट्रिक व्हीकल को लोकप्रिय बनाने के लिये कई तरह की सब्सिडी दे रही है। अनेक मोटर कंपनियां इलेक्ट्रिक व्हीकल में सुधार के लिये निरंतर रिसर्च कर रही हैं। हम सबके सामूहिक प्रयासों से इलेक्ट्रिक व्हीकल को आम जनता का विश्वस्नीय विकल्प बनाया जा सकता है। यह विचार अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मनु श्रीवास्तव ने मंगलवार को मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान – मेनिट में ईव्ही वर्कशॉप विद्युत-25 में व्यक्त किये। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि कोयला ऊर्जा 6 रूपये प्रति यूनिट और सोलर पॉवर 2 रूपये 15 पैसे प्रति यूनिट आये हैं। यह इस बात को साबित करता है कि हम सबको नवकरणीय ऊर्जा की तरफ तेजी से बढ़ने की आवश्यकता है। सोलर पॉवर की एक विशेषता यह भी है कि इसको स्टोर कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर इसका उपयोग किया जा सकता है। कार्यक्रम में अपर आयुक्त पारिक्षित झाड़े ने मध्यप्रदेश की नवीन ईव्ही पॉलिसी के प्रावधानों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस पॉलिसी को आगामी 5 वर्षों के लिये जारी किया गया है। पॉलिसी में उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिये अनेक प्रकार से सब्सिडी दी गई है। समूह चर्चा इेलेक्ट्रिक व्हीकल को जनसामान्य में लोकप्रिय बनाने के लिये विशेषज्ञों ने समूह चर्चा भी की। चर्चा में बताया गया कि इलेक्ट्रिक व्हीकल की कीमत में कमी लाने पर अभी और रिसर्च की जरूरत है। इसी के साथ इलेक्ट्रिक व्हीकल को एक चार्जिंग में अधिकतम दूरी तय करने की क्षमता विकसित करने पर भी तेजी से कार्य किये जाने की जरूरत है। समूह चर्चा में यह भी बताया गया कि कार्मशियल व्हीकल को इलेक्ट्रिक व्हीकल के रूप में अधिक से अधिक उपयोग किये जाने पर हम ऊर्जा में काफी बचत कर सकते हैं। चर्चा में सर्वरणधीर सिंह, ऋषि टंडन, चंद्रशेखर भिड़े ने प्रमुख रूप से विचार व्यक्त किये। मेनिट के डायरेक्टर शैलेन्द्र जैन ने विश्व इलेक्ट्रिक व्हीकल दिवस के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम के संयोजक छात्र अक्षत अग्रवाल ने बताया कि कॉलेज में इलेक्ट्रिक व्हीकल को लेकर विद्यार्थियों के बीच अनुसंधान को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस मौके पर इलेक्ट्रिक ऑटो एक्सपो में नवीनतम फोर व्हीलर, टू व्हीलर और कर्मशियल इलेक्ट्रिक व्हीकल का भी प्रदर्शन किया गया।  

बड़ा बदलाव: राजधानी में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम पर काम शुरू, बनी 7 अफसरों की समिति

रायपुर रायपुर में एक नवंबर से लागू होने वाले पुलिस कमिश्नरेट पर काम शुरू हो गया है. इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए सरकार के निर्देश पर डीजीपी अरुणदेव गौतम ने सीनियर एडीजी प्रदीप गुप्ता के नेतृत्व में सात आईपीएस अधिकारियों की कमेटी बनाई है, जिसने ड्राफ्ट पर काम प्रारंभ कर दिया है. एडीजी प्रदीप गुप्ता के नेतृत्व में बनाई गई समिति में पुलिस महानिरीक्षक (नारकोटिक्स) अजय यादव, पुलिस महानिरीक्षक, रायपुर रेंज अमरेश मिश्रा, पुलिस महानिरीक्षक (अअवि) ध्रुव गुप्ता, उप पुलिस महानिरीक्षक (दूरसंचार) अभिषेक मीणा, उप पुलिस महानिरीक्षक (सीसीटीएनएस) संतोष सिंह और , पुलिस अधीक्षक (विआशा) प्रभात कुमार बतौर सदस्य शामिल किए गए हैं. इसके अतिरिक्त वैधानिक पहलुओं के संबंध में आवश्यकता पड़ने पर लोक अभियोजन संचालनालय में संयुक्त संचालक मुकुला शर्मा को टीम में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया गया है. कमेटी इस बात पर मंथन करेगी कि पुलिस कमिश्नर सिस्टम को छत्तीसगढ़ पुलिस एक्ट 2007 के प्रावधानों के अनुसार बनाया जाए या फिर इसके लिए अलग से एक्ट बनाया जाए. सरकार अगर अलग से एक्ट बनाना चाहेगी तो फिर इसके लिए दो रास्ते हैं. पहला विधानसभा से अधिनियम पारित कराया जाए. या फिर राज्यपाल से अध्यादेश जारी कराना. चूंकि राज्योत्सव के मौके पर रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली की शुरुआत होनी है, ऐसे में कई राज्यों के सिस्टम का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में बेस्ट ड्राफ्ट बनाने का प्रयास किया जा रहा है. क्या है पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली? पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम पहले से दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, भोपाल, इंदौर जैसे बड़े महा नगरों में लागू है. इसमें शहर की कमान किसी वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को दी जाती है, जो आमतौर पर डीजी, एडीजी या आईजी रैंक के हो सकते हैं. कौन-सा अधिकारी बैठेगा, यह राज्य सरकार तय करती है और यह शहर की जनसंख्या व क्राइम रिकॉर्ड पर निर्भर करता है. पुलिस आयुक्त के अधिकार और जिम्मेदारियां कमिश्नर के पास ऐसे कई अधिकार होंगे जो वर्तमान में कलेक्टर या मजिस्ट्रेट के पास होते हैं, जैसे- धारा 144 या कर्फ्यू लगाने का निर्णय धरना-प्रदर्शन की अनुमति देना आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई बड़े सार्वजनिक आयोजनों की अनुमति जिला बदर और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई का आदेश इससे पुलिस को किसी भी स्थिति में त्वरित निर्णय लेने की शक्ति मिलेगी और कलेक्टर पर निर्भरता खत्म हो जाएगी. कलेक्टर के अधिकार हो जाएंगे सीमित कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद कलेक्टर के अधिकार भी सीमित हो जाएंगे. वह सिर्फ रेवेन्यू का काम देखेंगे, जबकि अन्य अनुमति संबंधी कार्य कमिश्नर के हाथों में होंगे. एसपी और आईजी का क्या होगा? कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद जिले में लॉ एंड ऑर्डर की जिम्मेदारी कमिश्नर के हाथों में होगी. यदि सरकार चाहेगी तो, ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग से एसपी (रूरल) की नियुक्ति हो सकती है. अगर पूरा जिला कमिश्नरेट के तहत आता है तो एसपी रैंक के अधिकारियों को डीसीपी बनाया जा सकता है. फिलहाल, सीएम विष्णुदेव साय ने केवल इसकी घोषणा की है. अधिकारों का दायरा और तैनाती की प्रक्रिया आने वाले दिनों में तय होगी. रायपुर का पहला पुलिस कमिश्नर कौन होगा, इस पर भी सबकी निगाहें टिकी हुई है.

प्रधानमंत्री मोदी करेंगे देश के पहले पीएम मित्रा पार्क का उद्घाटन- मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जीएसटी सुधार, आम आदमी को सुविधा और समृद्धि देने वाला उपहार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी करेंगे देश के पहले पीएम मित्रा पार्क का उद्घाटन- मुख्यमंत्री डॉ. यादव दशहरे के बाद भोपाल में होगी दो दिवसीय कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस : मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वच्छता ही सेवा की थीम पर मनाया जाएगा सेवा पखवाड़ा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले किया मंत्रीगण को संबोधित स्वदेशी से समृद्धि के संकल्प के साथ मनेगी दीपावली भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में नये जनरेशन का जीएसटी रिफॉर्म लाकर जो सुधार किया है, वह आम आदमी, किसानों, एमएसएमई, मध्यम वर्ग, महिलाओं और युवाओं के जीवन को स्वावलंबी बनायेगा। यह आम आदमी के जीवन को सुविधा देने वाला उपहार है। अब की बार पूरा देश स्वदेशी से समृद्धि के संकल्प के साथ दीपावली मनाएगा। स्वदेशी से स्वावलंबन के दीप घर-घर जलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक के पहले मंत्रीगण को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण से कहा कि हम सब को जीएसटी सुधारों की जानकारी जन-जन तक पहुँचानी चाहिए। संचार के सभी माध्यमों से इसका प्रचार-प्रसार किया जाये। स्वस्थ नारी-सशक्त परिवार की थीम पर होगा कार्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेशवासियों के लिए गर्व और प्रसन्नता का विषय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 17 सितंबर को धार जिले के बदनावर में पीएम मित्र पार्क का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर स्वस्थ नारी-सशक्त परिवार, स्वदेशी, एक पेड़ मां के नाम, एक बगिया मां के नाम, पीएम-जनमन योजना, धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान और मिशन कर्मयोगी की थीम पर कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। अस्वच्छ क्षेत्रों का चिह्नांकन कर उन्हें स्वच्छ बनाने के लिए होंगी गतिविधियां मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक स्वच्छता ही सेवा की थीम पर सेवा पखवाड़ा मनाया जाएगा। स्वच्छोत्सव की थीम पर शहरी और ग्रामीण इलाकों में अस्वच्छ क्षेत्रों का चिह्नांकन कर उन्हें स्वच्छ बनाने के लिए गतिविधियां होंगी। पखवाड़े के अंतर्गत सफाई मित्र सुरक्षा शिविर भी आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन गतिविधियों में स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक संस्थाओं, धार्मिक संगठनों को भी सहभागी बनाया जाए। मंत्रीगण प्रशासनिक, अधिकारी और राजनीतिक पदाधिकारी का सहयोग लेते हुए अपने-अपने क्षेत्रों में स्वच्छता- सेवा गतिविधियों का अधिक से अधिक विस्तार करें। आगामी वर्षों की कार्य योजना और विजन डॉक्यूमेंट पर होगी चर्चा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दशहरे के बाद भोपाल में दो दिवसीय कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी। कॉन्फ्रेंस में कलेक्टर, एसपी, कमिश्नर, आईजी और पुलिस कमिश्नर भाग लेंगे। कॉन्फ्रेंस में आगामी वर्षों की कार्ययोजना और विजन डॉक्यूमेंट पर भी चर्चा होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को इससे पहले अपने-अपने विभागों की विस्तृत समीक्षा करने के निर्देश दिए।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल का निर्देश: जीएमसी भोपाल का प्लेटिनम जुबिली कार्यक्रम हो गरिमामय

भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) भोपाल देश की गौरवशाली धरोहर है। अब तक हजारों डॉक्टर और विशेषज्ञ तैयार हुए हैं और चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। कॉलेज की प्लेटिनम जुबिली एक ऐतिहासिक अवसर है, जिसका सुव्यवस्थित और गरिमामय आयोजन होना चाहिए। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यक्रम की संपूर्ण व्यवस्थाओं में हर स्तर पर आवश्यक सहयोग सुनिश्चित किया जाए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल से मंत्रालय में जीएमसी एल्यूमनी एसोसिएशन के प्रतिनिधि मंडल ने मंगलवार को सौजन्य भेंट की। प्रतिनिधि मंडल ने उप मुख्यमंत्री शुक्ल को प्लेटिनम जुबिली समारोह में आमंत्रित किया और इस अवसर पर आयोजित होने वाले प्रमुख कार्यक्रमों की जानकारी दी। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि शासन की ओर से हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पूर्व छात्र संस्थान की परिस्थितियों और जरूरतों से भली-भांति परिचित होते हैं, उनके सुझाव सशक्तिकरण में अत्यंत सहायक होंगे। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि एल्यूमनी एसोसिएशन के प्रतिनिधि को सामान्य सभा की बैठकों में शामिल किया जाए, जिससे उनके अनुभव और सुझावों का लाभ कॉलेज प्रशासन को निरंतर मिलता रहे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने जीएमसी भोपाल की प्लेटिनम जुबिली के लिए शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह आयोजन प्रदेश और देश भर के पूर्व छात्रों को जोड़ने का एक अवसर बनेगा और संस्थान की गौरवशाली परंपरा को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा। जीएमसी एल्यूमनी एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने कॉलेज परिसर में पूर्व छात्रों द्वारा किए जा रहे विकास कार्य और अन्य गतिविधियों से अवगत कराया। उन्होंने संस्थान की व्यवस्थाओं के उन्नयन, अधोसंरचना और सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए सुझाव भी रखे तथा शासन से सहयोग की अपेक्षा की। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संदीप यादव, आयुक्त तरुण राठी, एम.डी. एम.पी. पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड मयंक अग्रवाल सहित जीएमसी एल्यूमनी एसोसिएशन के प्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

चार साल में पड़ोसी देशों में उथल-पुथल, भारत के चार पड़ोसी देशों में हुए तख्तापलट

नई दिल्ली पिछले चार सालों में भारत के पड़ोसी देशों में राजनीतिक हलचल ने अस्थिरता की नई परिभाषा गढ़ दी है। पिछले चार सालों में भारत के पड़ोसी देशों में राजनीतिक हलचल ने ऐसा तूफान खड़ा किया है कि अफगानिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश और अब नेपाल—सबकी सत्ता हिल गई। काबुल में तालिबान का कब्जा, श्रीलंका के राष्ट्रपति भवन में प्रदर्शनकारियों का ‘स्विमिंग पूल पार्टी’, और नेपाल में युवा-जनरेशन का जबरदस्त Gen-Z क्रेज—ये सब घटनाएं साबित करती हैं कि सत्ता अब किसी के लिए भी सुरक्षित नहीं रही।    नेपाल में सोशल मीडिया पर लगे प्रतिबंध और भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शन इतने तेज़ी से फैल गए कि संसद और सुप्रीम कोर्ट तक आंदोलन की लहर पहुंच गई। पांच मंत्रियों के इस्तीफे, विपक्षी सांसदों की सामूहिक बगावत और राष्ट्रपति के घर तक प्रदर्शनकारियों का घेराव—प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का इस्तीफा महज एक शुरुआत थी; विरोध की आग अब भी धधक रही है। अफगानिस्तान: तालिबान की वापसी 2021 में अफगानिस्तान का राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह उलट-पुलट गया। अमेरिकी मदद से स्थापित अशरफ गनी सरकार धराशायी हो गई और तालिबान ने काबुल पर कब्जा कर लिया। अगस्त के महीने में शहर में दाखिल होते ही तालिबान ने राष्ट्रपति भवन पर नियंत्रण जमा लिया, जबकि एयरपोर्ट पर भगदड़ में 170 से अधिक लोग मारे गए। भ्रष्टाचार, कमजोर सेना और अमेरिकी सैनिकों की वापसी ने विद्रोह को हवा दी। आज भी तालिबान का शासन कायम है, महिलाओं के अधिकारों पर पाबंदियाँ हैं और पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद की धमक लगातार बनी हुई है। श्रीलंका: आर्थिक संकट से राजनीति तक अफगानिस्तान के संकट के ठीक एक साल बाद, 2022 में श्रीलंका आर्थिक तूफ़ान की चपेट में आ गया। महंगाई, ईंधन और दवाइयों की किल्लत ने राजधानी कोलंबो की सड़कों को जलते हुए अंगारों में बदल दिया। लाखों लोग प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतर आए, राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को रातोंरात देश छोड़ना पड़ा और प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने इस्तीफा देना पड़ा। विरोध इतना उग्र था कि राष्ट्रपति भवन और संसद तक प्रदर्शनकारियों के कदमों की आवाज गूंज उठी। बांग्लादेश: छात्र आंदोलन और सत्ता परिवर्तन 2024 में बांग्लादेश के छात्र आंदोलनों ने ऐसा तूफ़ान खड़ा कर दिया कि शेख हसीना की सरकार सत्ता की कुर्सी से खिसक गई। भ्रष्टाचार, मानवाधिकार उल्लंघन और आरक्षण नीति के खिलाफ सड़कों पर उतरे छात्रों ने पूरे देश की राजनीति हिला कर रख दी। हिंसक झड़पों और गोलीबारी में 300 से अधिक लोग अपनी जान गंवा बैठे। इसके बाद सेना ने अंतरिम सरकार बना दी, लेकिन आम चुनाव अब तक नहीं हो पाए हैं और देश में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल अब भी गरम है। बांग्लादेश आज भी संघर्ष और आंदोलन की ज्वाला में झुलस रहा है। पाकिस्तान में चार बार तख्तापलट पाकिस्तान में 1947 से ही सेना का हस्तक्षेप सत्ता में रहा है. पाकिस्तान ने एक दो नहीं बल्कि चार बार तख्तापलट का दंश झेला है. पहला तख्तापलट 1953-54 में हुआ. इसके बाद 1958 में सत्ता बदली जब पाकिस्तानी राष्ट्रपति मेजर जनरल इस्कंदर अली मिर्जा ने पाकिस्तान की संविधान सभा और तत्कालीन फिरोज खान नून की सरकार को बर्खास्त किया था. फिर आया 1977 का दौर. तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो पर भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के आरोप लगे. चुनावों में धांधली के विवाद के बीच सेना प्रमुख जिया उल हक ने तख्तापलट किया. 1999 में फिर वही कहानी दोहराई गई जब सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ ने सैन्य तख्तापलट कर नवाज शरीफ को सत्ता से बेदखल किया था.  अन्य पड़ोसी देश: पाकिस्तान और मालदीव पाकिस्तान में इमरान खान के हटने के बाद राजनीति का पारा लगातार उँचा है। इमरान समर्थकों की रैलियां, हिंसक झड़पें और देशभर में तनाव ने सरकारी तंत्र को हिला कर रख दिया है। वहीं, बलूचिस्तान में अलगाववादी गुट सत्ता के लिए लगातार चुनौती बने हुए हैं। दूसरी तरफ़ मालदीव में नव निर्वाचित राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू के ‘भारत विरोधी’ रुख़ और उनकी रूढ़िवादी नीतियों ने द्विपक्षीय संबंधों में खटास पैदा कर दी है। घरेलू स्तर पर भी उनका प्रशासन पिछली सरकार की तुलना में कड़ा और जुझारू नजर आ रहा है।  यहां लगा अमेरिका पर आरोप भारत का पड़ोसी देश बांग्लादेश भी 2024 में इसी तरह की आग में जल उठा था. शेख हसीना की सरकार पर भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और दमन के आरोप थे. जुलाई 2024 में सरकारी नौकरियों में 30% कोटा प्रणाली के खिलाफ छात्र आंदोलन शुरू हुआ. जल्दी ही यह आंदोलन व्यापक हो गया. सड़कों पर उतरे लाखों युवाओं ने शेख हसीना के खिलाफ नारे लगाए और देखते ही देखते बांग्लादेश में तख्तापलट की घटना घटी. बता दें कि बांग्लादेश में तख्तापलट की घटना से अमेरिका पर आरोप लगा था. शेख हसीना के बेटे ने तख्तापलट के लिए अमेरिका पर शक जताया था. श्रीलंका की घटना  इसके अलावा साल 2022 में श्रीलंका में भी तख्तापलट की घटन देखी गई. श्रीलंका की अर्थव्यवस्था चरम संकट में थी. ईंधन, दवा, भोजन की भारी किल्लत थी. श्रीलंका ऋणों के बोझ तले दबा था लोगों का मानना था कि राजपक्षे परिवार की भ्रष्ट शासन ने जनता को तंग कर दिया. भारी संख्या में परेशान जनता सड़क पर उतरी. राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री कार्यालय और संसद के बाहर डेरा डाला 'गोटा गो गोटा' यानी राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे सत्ता छोड़ो के नारे लगे. जुलाई 2022 तक आंदोलन इतना उफान मार गया कि गोटाबाया को देश छोड़कर भागना पड़ा.   अफगानिस्तान भी झेल चुका है तख्तापलट का दंश अफगानिस्तान में भी तख्तापलट की घटना घट चुकी है. अगस्त 2021 में अमेरिका की सेना हटने के बाद अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा हो गया. तालिबान ने 2021 में अफगानिस्तान की गनी सरकार का तख्तापलट किया था, जिसके बाद से यहां तालिबानी शासन है.

आंगनबाड़ी सेविकाओं के खाते में आएंगे ₹9000, नीतीश कैबिनेट ने मंजूर किए 25 एजेंडों के फैसले

पटना नीतीश कैबिनेट की बैठक में मंगलवार को कुल 25 एजेंडों पर मुहर लगी. कैबिनेट की बैठक में बिहार सरकार ने जनकल्याण और विकास को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाओं को मंजूरी दी है. इनमें आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका के मानदेय में वृद्धि, राजस्व कर्मचारियों के अतिरिक्त पदों की स्वीकृति, ग्रामीण पेयजल योजना, जीविका मुख्यालय निर्माण, कन्या विवाह मंडप, सोलर स्ट्रीट लाइट और शवदाहगृह जैसी योजनाएं शामिल हैं. इन फैसलों से बिहार के लाखों लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है. बिहार सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए बड़ी राहत दी है. अब आंगनबाड़ी सेविका को 9,000 रुपये और सहायिका को 4,500 रुपये मासिक मानदेय मिलेगा. इस बढ़ोतरी के लिए सरकार ने 345 करोड़ 19 लाख रुपये की स्वीकृति दी है. यह कदम आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के जीवन स्तर को बेहतर बनाने और उनके कार्य को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है. राजस्व कर्मचारियों के 3303 अतिरिक्त पद स्वीकृत राजस्व और भूमि सुधार विभाग के तहत क्षेत्रीय कार्यालयों में 3,303 अतिरिक्त राजस्व कर्मचारियों के पदों को मंजूरी दी गई है। यह फैसला भूमि सुधार और प्रशासनिक कार्यों को और प्रभावी बनाने में मदद करेगा। ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना के लिए 594 करोड़ रुपये पंचायती राज विभाग के तहत मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना के बकाया विपत्रों के भुगतान के लिए 594 करोड़ 56 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी. जीविका मुख्यालय भवन के लिए 73 करोड़ रुपये पटना में जीविका मुख्यालय भवन के निर्माण के लिए 73 करोड़ 66 लाख रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है. यह भवन जीविका परियोजना के संचालन को और सुचारू बनाएगा, जो महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण है. कन्या विवाह मंडप योजना के लिए 50 करोड़ रुपये मुख्यमंत्री कन्या विवाह मंडप योजना के तहत राज्य के सभी 8,053 ग्राम पंचायतों में विवाह मंडप के निर्माण के लिए 50 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है. यह योजना सामाजिक समारोहों को सुगम बनाने में सहायक होगी. ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना के लिए 100 करोड़ रुपये मुख्यमंत्री ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा आधारित स्ट्रीट लाइट की स्थापना के लिए 100 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है. इससे ग्रामीण इलाकों में रात के समय सुरक्षा और सुविधा बढ़ेगी. एलपीजी आधारित शवदाहगृह के लिए मंजूरी नगर विकास एवं आवास विभाग ने पटना, गया, छपरा, सहरसा, भागलपुर, और बेगूसराय में एलपीजी गैस आधारित शवदाहगृह की स्थापना और संचालन के लिए ईशा फाउंडेशन को 1 रुपये की टोकन राशि पर 33 वर्षों के लिए एक-एक एकड़ भूमि देने की स्वीकृति दी है. यह पर्यावरण के अनुकूल शवदाह प्रक्रिया को बढ़ावा देगा.

लद्दाख में हिमस्खलन की त्रासदी: तीन जवान शहीद, बचाव कार्य जोर-शोर से जारी

सियाचिन लद्दाख के सियाचिन ग्लेशियर में एक बड़ा हिमस्खलन आया, जिसमें भारतीय सेना के तीन जवान शहीद हो गए. यह दुनिया का सबसे ऊंचा युद्धक्षेत्र है, जहां सैनिक -60 डिग्री की ठंड, तेज हवाओं और बर्फीले खतरों का सामना करते हैं. अभी तक की जानकारी के मुताबिक जवान पेट्रोलिंग कर रहे थे, तभी हिमस्खलन की चपेट में आ गए. सेना की बचाव टीमें तुरंत काम पर लग गई हैं, जो लेह और उधमपुर से मदद ले रही हैं. सियाचिन में हिमस्खलन सर्दियों में आम हैं. 1984 के ऑपरेशन मेघदूत से अब तक 1,000 से ज्यादा सैनिक मौसम की वजह से शहीद हो चुके हैं. अभी और जानकारी का इंतजार है. सबसे ऊंचा युद्धक्षेत्र सियाचिन   सियाचिन ग्लेशियर, जो कराकोरम पर्वत श्रृंखला में 20,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. यह खबर दिल दहला देने वाली है, क्योंकि सियाचिन में पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं. सियाचिन को दुनिया का सबसे ऊंचा युद्धक्षेत्र कहा जाता है. यहां तापमान -60 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है. तेज हवाएं, बर्फीले तूफान और हिमस्खलन आम हैं. यह हिमस्खलन उत्तरी ग्लेशियर क्षेत्र में हुआ, जहां ऊंचाई 18,000 से 20,000 फीट है. इस इलाके में सैनिकों को न सिर्फ दुश्मन से, बल्कि प्रकृति की मार से भी लड़ना पड़ता है. 1984 में शुरू हुए ऑपरेशन मेघदूत के बाद से भारत ने सियाचिन पर कब्जा बनाए रखा है, लेकिन मौसम की वजह से 1,000 से ज्यादा जवान शहीद हो चुके हैं. बचाव कार्य और सेना की कोशिशें हिमस्खलन की खबर मिलते ही भारतीय सेना और वायुसेना ने तुरंत बचाव कार्य शुरू कर दिए. विशेषज्ञ अवलांच रेस्क्यू टीमें (ART) मौके पर पहुंचीं, जो बर्फ में दबे जवानों को निकालने की कोशिश कर रही हैं. ये टीमें लेह और उधमपुर से समन्वय कर रही हैं. सेना के हेलिकॉप्टर, जैसे चीता और Mi-17, घायलों को निकालने और अस्पताल पहुंचाने के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं. सियाचिन में ऐसी आपात स्थिति के लिए सेना हमेशा तैयार रहती है, लेकिन बर्फ और ठंड की वजह से बचाव कार्य बेहद मुश्किल है. पिछली घटनाओं से सबक लेते हुए, सेना ने सियाचिन में बुनियादी ढांचा मजबूत किया है. DRDO के ऑल-टेरेन व्हीकल (ATV) ब्रिज, डायनीमा रस्सियां और हेवी-लिफ्ट हेलिकॉप्टर जैसे चिनूक ने सप्लाई और बचाव को आसान किया है. ISRO के टेलीमेडिसिन नोड्स और HAPO चैंबर्स (हाई एल्टीट्यूड पल्मोनरी एडिमा) ने चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाई हैं. फिर भी, सियाचिन की कठिन परिस्थितियां हर ऑपरेशन को जोखिम भरा बनाती हैं. सियाचिन: एक रणनीतिक और खतरनाक क्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर 76 किलोमीटर लंबा है. कराकोरम रेंज में स्थित है. यह भारत और पाकिस्तान के बीच विवादित क्षेत्र है. 1949 के कराची समझौते में इसकी सीमा साफ नहीं थी, जिसके बाद 1984 में भारत ने ऑपरेशन मेघदूत शुरू कर सियाचिन पर कब्जा किया. यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह शक्सगाम घाटी (चीन को पाकिस्तान ने दी) और गिलगित-बाल्टिस्तान (पाकिस्तान के कब्जे में) के बीच एक दीवार की तरह है. अगर भारत सियाचिन छोड़ दे, तो पाकिस्तान और चीन लद्दाख को खतरे में डाल सकते हैं. लेकिन सियाचिन में सैनिकों का सबसे बड़ा दुश्मन मौसम है. 1984 से अब तक 870 से ज्यादा जवान मौसम, हिमस्खलन और अन्य कारणों से शहीद हुए हैं, जबकि युद्ध में कम नुकसान हुआ. 2016 में 10 जवान हिमस्खलन में दब गए थे, जिनमें लांस नायक हनुमंथप्पा कोप्पड़ 6 दिन बाद जिंदा निकाले गए, लेकिन बाद में उनकी मृत्यु हो गई. 2019 में चार जवान और दो पोर्टर एक हिमस्खलन में शहीद हुए थे. ये घटनाएं सियाचिन की खतरनाक सच्चाई को दर्शाती हैं.

बस्तर पर फोकस: यूनिफाइड कमांड बैठक में नक्सलवाद खत्म करने और विकास एजेंडे पर चर्चा

रायपुर। स्थित न्यू सर्किट हाउस में यूनिफाइड कमांड की बैठक हो रही है. बैठक में नक्सलवाद के खात्मे के लिए रणनीति बनाने के साथ बस्तर के विकास पर चर्चा होगी. बैठक में मुख्य सचिव अमिताभ जैन के अलावा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, आईटीबीपी, बीएसएफ, सीआईएसएफ, भारतीय वायु सेना और छत्तीसगढ़ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं. बैठक में नक्सलवाद और बस्तर विकास पर चर्चा करने के साथ इंटर स्टेट कोऑर्डिनेशन पर भी जोर दिया जाएगा. इसके अलावा नक्सली पुनर्वास नीति को लेकर भी बैठक में चर्चा होगी.