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महमंत्री पद की होड़: भाजपा नगर कार्यकारिणी में 15 दिग्गजों की चुनौती, किसका होगा दबदबा?

भोपाल   भाजपा की नगर कार्यकारिणी के महत्वपूर्ण पदों पर प्रदेश संगठन ही फैसला करेगा। महामंत्री के 3 पदों के लिए करीब 15 नेता कतार में हैं, समर्थकों के लिए बड़े नेता जोर आजमाइश कर रहे हैं। पदों पर नियुक्ति इस सप्ताह संभव है। अंतिम दौर की जोर आजमाइश चल रही है। पदों के लिए बड़े नेताओं से समर्थकों के नाम बंद लिफाफे में लिए गए थे। पिछले महीने अध्यक्ष को भोपालबुलाकर लिफाफे खोले गए। शहर अध्यक्ष सुमित मिश्रा को कार्यकारिणी को अंतिम रूप देकर लिस्ट भेजने के लिए कहा था। सबका जोर महामंत्री पद को लेकर नगर कार्यकारिणी में सबका जोर महामंत्री पद को लेकर है। 3 महामंत्री बनाए जाना हैं, जो अलग-अलग वर्ग के होंगे। सुमित मिश्रा भी रजामंदी से नियुक्ति के प्रयास में हैं, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई है। विधायक महेंद्र हार्डिया समर्थक को यह पद जा सकता है। विधानसभा 2 से सुधीर कोल्हे का नाम है। चार नंबर से विधायक मालिनी गौड़ ने वीरेंद्र शेंडगे का नाम दिया है। महापौर ने भरत पारिख का नाम बढ़ाया तो सांसद ने विशाल का। राऊ से निलेश चौधरी का नाम भी है। अन्य नामों में हरप्रीत बख्शी, देवेश जाजोरिया, भूपेंद्र केसरी, माधुरी जायसवाल हैं। 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक सेवा पखवाड़ा मनाने की तैयारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस से लेकर गांधी जयंती तक प्रदेशभाजपा ‘सेवा पखवाड़ा’ मनाएगी। भाजपा कार्यालय पर आयोजनों को लेकर बैठक की गई। इसमें संभाग सहप्रभारी तेजबहादुर सिंह, नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, प्रताप करोसिया, सुदर्शन गुप्ता, प्रदेश प्रवक्ता आलोक दुबे, प्रदेश मीडिया सहप्रभारी दीपक जैन आदि शामिल हुए। अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने कहा, सेवा पखवाड़े के अंतर्गत पीएम मोदी के कार्यों को सेवा के माध्यम से जनता तक पहुंचाने का कार्य किया जाएगा।

यात्रियों को मिलेगा जाम से निजात: एबी रोड पर 622 करोड़ से बनेंगे 9 फ्लायओवर

इंदौर  प्राधिकरण द्वारा कराए गए सर्वे के आधार पर कलेक्टर ने प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग को पत्र भेजा है। इसमें जिलास्तरीय यातायात समिति की रिपोर्ट भी संलग्न की गई है। पत्र में एबी रोड पर 9 फ्लायओवरों के निर्माण को मंजूरी देने का अनुरोध किया गया है। कुल 622 करोड़ रुपए की लागत से इन फ्लायओवरों का निर्माण प्रस्तावित है। नीरंजनपुर से लेकर राजीव गांधी चौराहा तक इनका निर्माण होगा। बीआरटीएस हटाने की कवायद के बीच फ्लायओवर योजना वर्तमान में एबी रोड पर बीआरटीएस को हटाने का कार्य शुरू हो चुका है। निगम ने लगभग ढाई करोड़ रुपए के टेंडर को मंजूरी दी है और ठेकेदार फर्म द्वारा रेलिंग हटाने का कार्य प्रारंभ किया जा सकता है। साथ ही लगभग 13 करोड़ रुपए की राशि डिवाइडर निर्माण के लिए भी स्वीकृत कर दी गई है। ऐसे में फ्लायओवर योजना को लेकर प्राधिकरण का सर्वे और कलेक्टर का पत्र नई दिशा देता है। अधूरे एलिवेटेड कॉरिडोर पर भी सवाल नीरंजनपुर और सत्यसांई चौराहे पर एमपीआरडीसी द्वारा फ्लायओवर निर्माण का कार्य पहले से ही जारी है। वहीं एलआईजी से नवलखा तक एलिवेटेड कॉरिडोर का टेंडर लोक निर्माण विभाग ने कुछ वर्ष पूर्व मंजूर किया था, लेकिन काम अब तक शुरू नहीं हो पाया। मुख्यमंत्री और अन्य जनप्रतिनिधियों ने इस परियोजना से असहमति जताई, जिसके चलते यह अधर में है। हाईकोर्ट के आदेश पर बीआरटीएस को हटाया जा रहा है और अब एबी रोड के प्रमुख चौराहों पर फ्लायओवर बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। 622 करोड़ में होगा 9 फ्लायओवरों का निर्माण कलेक्टर ने पहले चरण में एलआईजी चौराहा, शिवाजी वाटिका और गीता भवन चौराहा पर फ्लायओवर बनाने का अनुरोध किया है। इन तीन फ्लायओवरों की अनुमानित लागत 283.56 करोड़ रुपए बताई गई है। इसके अलावा अन्य 11 चौराहों में से पांच फ्लायओवर—जंजीरवाला चौराहा, टॉवर, चाणक्यपुरी, गौपुर और अग्रसेन चौराहा पर निर्माण प्रस्तावित है, जिन पर 380 करोड़ रुपए की लागत आएगी। इस तरह कुल 9 फ्लायओवरों पर 622 करोड़ रुपए खर्च होंगे। 

गुयाना, सोमालिया और अफ्रीका के देशों में बालाघाट चावल का क्रेज, सेहत के लिए भी रामबाण

बालाघाट  वे लोग जो चावल खाने के शौकीन हैं लेकिन बीमारियों की वजह से नहीं खा पाते उनके लिए खास तरह का पारबॉइल्ड चावल बेहद कारगर होता है. खास बात यह है कि मध्य प्रदेश के बालाघाट के किसान इसको अपने खेतों में उगा रहे हैं, जिसकी डिमांड दुनिया भर के कई देशों में हो रही है. आइए जानते हैं इस खास किस्म में चावल की क्या हैं खासियतें- मध्य प्रदेश में धान का कटोरा, विदेशों में चावल की माँग बालाघाट जिसे घाटों वाला जिला भी कहा जाता है यहां पैदा होने वाले चावल की मांग भारत के अलावा विदेशों में भी बढ़ी है. जिले का पारबॉइल्ड चावल अफ्रीकी और खाड़ी देशों में विशेष रूप से पसंद किया जाता है. IR-64 किस्म के धान से बने चावल की गुयाना, सोमालिया, बेनिन, टोगो जैसे अफ्रीकी देशों में काफी डिमांड है. क्या होता है पारबॉइल्ड चावल बालाघाट राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मोनू भगत ने बताया "पारबॉइल्ड चावल ऐसे चावल होते हैं जो आंशिक रूप से चावल के भूसे के अंदर ही उबाल दिए जाते हैं. इसके तीन मेन स्टेप्स में इन्हें धोना, स्टीम करना और ड्राई करना शामिल होता है. मोटे पारबॉइल्ड चावल की सबसे ज्यादा डिमांड विदेशों में है जो IR-64 और IR-36 धान से बनता है." मप्र में धान का कटोरा है बालघाट बालाघाट के उपसंचालक कृषि फूल सिंह मालवीय ने बताया "बालाघाट में 2.67 लाख हेक्टेयर भूमि पर धान का उत्पादन होता है, जिसमें लगभग 82,77,000 क्विंटल धान पैदा होती है. बालाघाट को "प्रदेश का धान का कटोरा" भी कहा जाता है और यहां की अर्थव्यवस्था धान की खेती पर ही निर्भर है. किसानों से यहां की राइस मिल के व्यापारी और मप्र सरकार धान की खरीदी करती है. फिर से मिलों के ज़रिए चावल बनाकर तैयार किया जाता है." मप्र में चिन्नौर धान को मिला है जीआई टैग केंद्र सरकार की "एक जिला, एक उत्पाद" योजना में शामिल होने वाली चिन्नौर धान मध्य प्रदेश से जीआई टैग प्राप्त करने वाली पहली चावल की किस्म है. जीआई टैग से इसका अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रचार हो रहा है. इसे 14 सितंबर 2021 को भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री द्वारा मान्यता दी गई थी. यह मध्य प्रदेश का पहला चावल है जिसे जीआई टैग मिला और इसने बालाघाट को पहचान दी. 

पुरुषों में प्रजनन समस्या बढ़ी, WHO ने बताया आपकी इन आदतों और गलतियों की वजह

नई दिल्ली परिवार शुरू करने का सपना हर कपल का होता है, लेकिन हर किसी की ये राह आसान नहीं होती. हाल ही में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) और कई मेडिकल स्टडीज ने खुलासा किया है कि दुनियाभर में करीब हर 6 में से 1 पुरुष (1 in 6 men) को बांझपन यानी Infertility की समस्या का सामना करना पड़ रहा है. यानी, अगर आप सोचते हैं कि प्रेग्नेंसी में दिक्कत सिर्फ महिलाओं से जुड़ी समस्या है, तो यह गलतफहमी है. रिसर्च साफ कहती है कि पुरुष भी उतनी ही बड़ी वजह बनते हैं. रिसर्च क्या कहती है? WHO और कई अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल्स के अनुसार, infertility सिर्फ महिलाओं तक सीमित नहीं है. 40से 50 प्रतिशत मामलों में पुरुषों की वजह से गर्भधारण नहीं हो पाता. इसके पीछे कई कारण हैं. लाइफस्टाइल , खानपान की गलतियां, शराब-सिगरेट का सेवन, तनाव और समय पर टेस्टिंग न कराना. पुरुषों में Infertility की बड़ी वजह     धूम्रपान और शराब: ये आदतें स्पर्म की क्वालिटी और संख्या दोनों को कम कर देती हैं.     पोषण की कमी: विटामिन D, जिंक और फॉलिक एसिड की कमी से भी स्पर्म प्रोडक्शन पर असर पड़ता है.     तनाव और नींद की कमी: लगातार स्ट्रेस से हार्मोनल असंतुलन होता है, जिससे fertility घट जाती है.     ओवरवेट या मोटापा: रिसर्च बताती है कि मोटापा टेस्टोस्टेरोन लेवल को कम कर देता है.     टेस्टिंग से परहेज: कई पुरुष शर्म या झिझक की वजह से टेस्टिंग नहीं कराते, जिससे इलाज देर से शुरू होता है. क्यों जरूरी है फर्टिलिटी टेस्ट? डॉक्टरों के अनुसार, अगर 1 साल तक प्रेग्नेंसी की कोशिश के बाद भी सफलता नहीं मिल रही है, तो पुरुष और महिला दोनों को फर्टिलिटी टेस्टिंग ज़रूर करानी चाहिए. इससे जल्दी समस्या पकड़ी जाती है और IVF, IUI जैसी एडवांस तकनीकों के जरिए इलाज की संभावना बढ़ जाती है. सपोर्ट और जागरूकता की जरूरत Infertility से जूझ रहे कपल्स अक्सर खुद को अकेला महसूस करते हैं. ऐसे में परिवार और दोस्तों का सपोर्ट बहुत मायने रखता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि infertility को लेकर जो सामाजिक स्टिग्मा (कलंक) है, उसे तोड़ना बेहद ज़रूरी है. खुलकर बातचीत करने और समय रहते डॉक्टर से सलाह लेने से समस्या का समाधान संभव है. एक्सपर्ट की राय एम्स, नई दिल्ली के एंड्रोलॉजिस्ट डॉ. प्रशांत सिंह कहते हैं, "आज हर 6 में से एक पुरुष infertility की समस्या से जूझ रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह गलत lifestyle है. लेकिन अच्छी बात ये है कि समय पर टेस्टिंग, सही इलाज और स्वस्थ दिनचर्या से ज्यादातर मामलों में इलाज संभव है." पुरुष बांझपन क्या है? बांझपन पुरुष और महिला दोनों को प्रभावित कर सकता है। विशेष रूप से, पुरुष बांझपन एक ऐसी स्थिति है जो पुरुषों को प्रभावित करती है। यह उनकी प्रजनन प्रणाली की महिला को गर्भवती करने की क्षमता में बाधा उत्पन्न करता है। यदि कोई पुरुष बांझ हो तो क्या होगा? यदि आप पुरुष बांझपन से पीड़ित हैं, तो इसका मतलब है कि आपने एक वर्ष से अधिक समय तक बार-बार असुरक्षित यौन संबंध बनाए हैं, लेकिन आपकी महिला साथी गर्भवती नहीं हुई है। पुरुष बांझपन कितना आम है? दुनिया भर में 18.6 करोड़ लोग बांझपन से प्रभावित हैं, और लगभग आधे मामलों में इसका कारण पुरुष साथी होता है। कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि संयुक्त राज्य अमेरिका में गर्भधारण करने की कोशिश कर रहे लगभग 10% से 15% पुरुष बांझपन से प्रभावित हैं। क्या गर्भधारण करना आसान है? नहीं, गर्भधारण करना आसान नहीं है। मानव प्रजाति को कम प्रजनन क्षमता वाली प्रजाति माना जाता है। एक उपजाऊ और युवा जोड़े के, हर महीने मुक्त संभोग करने पर, गर्भधारण की संभावना केवल 20-25% होती है। गर्भधारण एक जटिल प्रक्रिया है जो पुरुष और महिला प्रजनन प्रणाली के कई कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें शामिल हैं:     स्वस्थ पुरुष प्रजनन कोशिकाओं (शुक्राणु) और स्वस्थ महिला प्रजनन कोशिका (अंडाणु) का उत्पादन करना।     अवरुद्ध फैलोपियन ट्यूब जो शुक्राणु को अंडे तक पहुंचने की अनुमति देती है।     जब शुक्राणु अंडे से मिलते हैं तो उन्हें निषेचित करने की उनकी क्षमता।     निषेचित अंडे (भ्रूण) की गर्भाशय में प्रत्यारोपित करने की क्षमता । गर्भावस्था को पूर्ण अवधि (39 से 40 सप्ताह और छह दिन) तक जारी रखने के लिए, भ्रूण का स्वस्थ होना ज़रूरी है, और भ्रूण के विकास के लिए महिला का हार्मोनल वातावरण पर्याप्त होना चाहिए। अगर इनमें से किसी एक कारक पर भी कोई असर पड़ता है, तो बांझपन हो सकता है। लक्षण और कारण अस्वस्थ शुक्राणु के लक्षण क्या हैं? पुरुष बांझपन का मुख्य लक्षण जैविक संतान पैदा न कर पाना है। लेकिन पुरुष बांझपन कई मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक लक्षणों को भी जन्म दे सकता है, जिनमें शामिल हैं:     अवसाद ।     नुकसान।     दु: ख।     अपर्याप्तता.     असफलता। यदि आप या आपका साथी इनमें से किसी भी भावना का अनुभव करते हैं, तो किसी मनोचिकित्सक या मनोचिकित्सक से बात करना अच्छा विचार है । कभी-कभी, पुरुष बांझपन अंडकोषों में टेस्टोस्टेरोन के कम उत्पादन से जुड़ा हो सकता है। ऐसे में, थकान, नपुंसकता, अवसाद, वज़न बढ़ना और उदासीनता जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। अगर आपको या आपके साथी को ये लक्षण दिखाई देते हैं, तो पुरुष बांझपन के विशेषज्ञ किसी मूत्र रोग विशेषज्ञ या प्रजनन एंडोक्रिनोलॉजिस्ट से बात करने से मदद मिल सकती है।  पुरुष बांझपन का क्या कारण है? कई जैविक और पर्यावरणीय कारक पुरुष बांझपन का कारण बन सकते हैं। इनमें शामिल हैं:     शुक्राणु संबंधी समस्याएं, जिनमें विकृत शुक्राणु, कम शुक्राणु संख्या ( ओलिगोस्पर्मिया ) और आपके वीर्य में शुक्राणु की अनुपस्थिति ( एज़ोस्पर्मिया ) शामिल हैं।     आनुवंशिक विकार , जिसमें क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम और मायोटोनिक डिस्ट्रोफी शामिल हैं ।     कुछ चिकित्सीय स्थितियां, जिनमें मधुमेह , कुछ स्वप्रतिरक्षी रोग जो आपके शुक्राणुओं पर हमला करते हैं और सिस्टिक फाइब्रोसिस शामिल हैं ।     संक्रमण, जिसमें एपिडीडिमाइटिस , ऑर्काइटिस और यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) शामिल हैं, जिसमें गोनोरिया या एचआईवी शामिल हैं ।     आपके अंडकोष में सूजी हुई नसें ( वैरिकोसील्स )।     कैंसर उपचार, जिसमें कीमोथेरेपी , विकिरण चिकित्सा … Read more

17 सितंबर को मध्यप्रदेश दौरे पर पीएम मोदी, राज्य को मिलेंगी दो बड़ी गिफ्ट्स

भोपाल  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने 75वें जन्मदिन के मौके पर एक बड़ी सौगात देने मध्यप्रदेश दौरे पर आ रहे हैं. पीएम मोदी 17 सितंबर को धार जिले के भैंसोला में देश के पहले पीएम मित्रा पार्क का शिलांन्यास करेंगे. इसके अलावा स्वस्थ्य नारी सशक्त परिवार अभियान का भी शुभारंभ उनके द्वारा किया जाएगा. ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि प्रधानमंत्री अपने 75वें जन्मदिन पर मध्य प्रदेश को करोड़ों के गिफ्ट देने आ रहे हैं. मील का पत्थर साबित होगी पीएम की यात्रा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मध्यप्रदेश यात्रा को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा, '' 17 सितंबर को पीएम मोदी पीएम मित्रा पार्क का शिलांन्यास करने के लिए आ रहे हैं. धार जिले के आदिवासी अंचल को एक बड़ी सौगात मिलने जा रही है. खासतौर से किसानों के लिए यह एक बड़ी सौगात रहेगी. धार, झाबुआ, उज्जैन, खंडवा, खरगौन बड़वानी कपास आधारित क्षेत्र हैं. कॉटन पर आधारित यह बड़ा इंडस्ट्रियल पार्क विकसित होने से प्रदेश के 1 लाख युवाओं को प्रत्यक्ष और 2 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे. यह सभी मध्यप्रदेश के लिए गौरव की बात है. हम सभी प्रयास कर रहे हैं कि पीएम का यह दौर मध्यप्रदेश और देश के लिए मील का पत्थर साबित हो.'' पीएम मित्र पार्क बदलेगा एमपी की तस्वीर धार जिले के भैसोला में 2177 एकड़ में तैयार हो रहा पीएम मित्र पार्क मध्यप्रदेश के लिए बड़ी सौगात माना जा रहा है. प्रधानमंत्री मोदी के मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड एपेरल पार्क को पीएम के 5 एफ विजन फार्म टू फाइवर टू, फैशन टू, फॉरेन के तहत डेवलप किया जा रहा है. इस पर 2050 करोड़ रुपए की राशि खर्च होगी. पहले चरण के लिए केन्द्र सरकार 773 करोड़ के टेंडर जारी कर चुका है. पीएम मित्र पार्क में निवेश के लिए मध्यप्रदेश सरकार को कई निवेशकों द्वारा निवेश प्रस्ताव भी दिए गए हैं. 75 वर्ष के हो जाएंगे मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वर्ष 17 सितंबर को अपना 75वां जन्मदिन मनाएंगे. पीएम मोदी के जन्मदिन के अवसर पर पूरे देशभर में कार्यक्रम रखे गए हैं. 17 सितंबर से 2 अक्टूबर गांधी जयंती तक पूरे देश में बीजेपी द्वारा 'सेवा पखवाड़ा' मनाया जाएगा. सेवा पखवाड़ा में रक्तदान शिविर से लेकर स्वच्छता अभियान जैसे कई आयोजन होंगे. वहीं, पीएम मोदी इस दिन मध्य प्रदेश के भी दौरे पर होंगे.  

बिना टैरिफ के व्यापार, 2025 में भारत का 24 देशों के साथ आर्थिक दांव

नई दिल्‍ली.  अमेरिका की ओर से भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाए जाने से हुए नुकसान की भरपाई एक झटके में करने की तैयारी है. भारत के हाथ ऐसा दांव लगने वाला है, जिससे टैरिफ से हुए नुकसान की सारी भरपाई हो जाएगी. यह काम पूरा होने पर भारत को 135 अरब डॉलर का व्‍यापार बिना किसी टैक्‍स के करने का मौका मिलेगा. इस पर बातचीत भी काफी तेजी से आगे बढ़ रही है और माना जा रहा है कि इसी साल करीब 2 दर्जन देशों के साथ बिना टैक्‍स के व्‍यापार का रास्‍ता खुल जाएगा. मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि भारत और यूरोपीय संघ अपने महत्वाकांक्षी मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को जल्द अंतिम रूप देने के लिए अगले एक महीने में दो दौर की महत्वपूर्ण वार्ता करेंगे. इस दौरान उत्पत्ति के नियमों, बाजार पहुंच और वाइन तथा डेयरी उत्पादों पर शुल्क के क्षेत्रों में मतभेदों को दूर करने की कोशिश की जाएगी. इन पर सहमति बनती है तो इसी साल यह डील पूरी होने की संभावना है. दिसंबर हो जाएगी एफटीए डील यूरोपीय आयोग के कृषि आयुक्त क्रिस्टोफ हैनसेन और व्यापार प्रमुख मारोस सेफ्कोविक इस सप्ताह अपने भारतीय वार्ताकारों के साथ बातचीत करने के लिए भारत का दौरा कर रहे हैं. दोनों पक्ष इस साल के अंत तक एफटीए पर हस्ताक्षर करना चाहते हैं. यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जिसका वित्तवर्ष 2023-24 में द्विपक्षीय वस्तु व्यापार 135 अरब डॉलर था. यह आंकड़ा चीन और अमेरिका से भी ज्‍यादा है. जाहिर है कि एफटीए डील पक्‍की होने पर भारत को इसका बड़ा लाभ मिलेगा. 17 सितंबर को बड़ा दिन व्यापार समझौते के अलावा, भारत और यूरोपीय संघ कई परिवर्तनकारी पहलों को भी आगे बढ़ाने की प्रक्रिया में हैं, जिनमें एक नया राजनीतिक-रणनीतिक नजरिया और रक्षा संबंधों का विस्तार शामिल हैं. ये कदम बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता के मद्देनजर उठाए गए हैं. गौरतलब है कि यूरोपीय संघ 17 सितंबर को भारत के साथ संबंधों के लिए अपने नए रणनीतिक नजरिये को जारी करेगा. नए उपायों को भारत-यूरोपीय संघ वार्षिक शिखर सम्मेलन में जारी करने की उम्मीद है. 27 देशों से एकसाथ बातचीत भारत और ईयू दोनों पक्ष अगले तीन महीनों में कई उच्च-स्तरीय बैठकें और वार्ताएं भी करेंगे, जिनमें यूरोपीय संघ की राजनीतिक और सुरक्षा समिति का भारत दौरा भी शामिल है. इसमें यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों के दूत शामिल होंगे. इसका मतलब है कि भारत एकसाथ 27 देशों से एफटीए पर बातचीत करेगा और यह पूरा होता है तो भारत को 27 देशों के साथ मुक्‍त व्‍यापार समझौता कराने का अवसर मिलेगा.

इंडियन नेवी की ताकत बढ़ी, आंख उठाकर भी नहीं देख पाएंगे चीन-पाकिस्तान के जहाज

नई दिल्ली भारत अपनी समुद्री ताकत को लगातार मजबूत और आधुनिक बना रहा है. बदलते हालात में समुद्री क्षेत्र की अहमियत और बढ़ गई है, इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय नौसेना का फोकस अब एक मज़बूत और नेटवर्क्ड ब्लू-वॉटर फोर्स बनाने पर है. लक्ष्य है कि वर्ष 2035 तक भारतीय नौसेना के पास 200 से अधिक युद्धपोत और पनडुब्बियां हों, ताकि समुद्री हितों की रक्षा की जा सके और चीन-पाकिस्तान से पैदा होने वाले किसी भी खतरों का मुकाबला किया जा सके. 55 युद्धपोतों पर चल रहा काम फिलहाल भारतीय शिपयार्ड में 55 बड़े और छोटे युद्धपोतों का निर्माण चल रहा है, जिसकी कुल लागत लगभग 99,500 करोड़ रुपये है. इसके अलावा नौसेना को 74 नए युद्धपोत और जहाज़ के स्वदेशी निर्माण के लिए 2.35 लाख करोड़ रुपये की शुरुआती मंजूरी मिल चुकी है. इनमें नौ डीज़ल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां, सात मल्टी-रोल स्टेल्थ फ्रिगेट, आठ एंटी-सबमरीन वॉरफेयर कोरवेट और 12 माइन काउंटरमेज़र पोत शामिल हैं. इसके साथ ही अगली पीढ़ी के चार विध्वंसक पोत और दूसरा स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर बनाने की योजना भी आगे बढ़ाई जा रही है, जो मौजूदा रूसी मूल के आईएनएस विक्रमादित्य की जगह लेगा. भारत के पास होंगे 230 युद्धपोत टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, नौसेना अधिकारियों का कहना है कि एक मज़बूत नौसेना रातों-रात नहीं बनाई जा सकती. इसके लिए वर्षों की योजना और निर्माण की आवश्यकता होती है. आज की तारीख में अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन के अलावा भारत ही ऐसा देश है, जो स्वदेशी स्तर पर एयरक्राफ्ट कैरियर और परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां बना और चला सकता है. इस वक्त नौसेना के पास कुल 140 युद्धपोत हैं, जिनमें 17 डीज़ल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां (ज्यादातर पुरानी) और दो परमाणु-संचालित एसएसबीएन शामिल हैं. इसके अलावा नौसेना के पास 250 से अधिक विमान और हेलिकॉप्टर हैं. पुरानी पनडुब्बियों और युद्धपोतों को चरणबद्ध तरीके से हटाते हुए नौसेना का लक्ष्य अगले दशक में 200 से अधिक युद्धपोतों और पनडुब्बियों के साथ 350 नौसैनिक विमान और हेलिकॉप्टरों की क्षमता विकसित करना है. 2037 तक यह संख्या 230 युद्धपोत तक पहुंच सकती है. पाकिस्तानी नौसेना की ताकत बढ़ा रहा चीन इधर, चीन दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना बनाकर (370 युद्धपोत और पनडुब्बियां) हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी पैठ लगातार बढ़ा रहा है. अफ्रीका के जिबूती, पाकिस्तान के कराची और ग्वादर, और कंबोडिया के रीम जैसे ठिकानों के बाद बीजिंग और भी विदेशी अड्डों की तलाश में है. चीन पाकिस्तान की नौसैनिक ताकत बढ़ाने में भी मदद कर रहा है. पाकिस्तान के पास फिलहाल पांच पुरानी अगोस्ता श्रेणी की पनडुब्बियां हैं, लेकिन अगले साल से उसे आठ नई युआन या हंगोर श्रेणी की डीज़ल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां मिलने लगेंगी, जिनमें एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक होगी और वे लंबे समय तक पानी के भीतर रह सकेंगी. इससे पाकिस्तान की समुद्र में लड़ने की क्षमता काफी बढ़ जाएगी. छह पनडुब्बियों के लिए भी चल रही बात भारत के लिए चिंता की बात यह है कि उसकी पारंपरिक पनडुब्बी क्षमता धीरे-धीरे घट रही है. इस कमी को पूरा करने के लिए मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) और जर्मन कंपनी थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) के बीच छह नई डीज़ल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों के निर्माण के लिए 70,000 करोड़ रुपये की बातचीत जारी है. इनमें एआईपी तकनीक और लैंड-अटैक क्रूज़ मिसाइलें होंगी. वहीं, फ्रांसीसी मूल की तीन और स्कॉर्पीन पनडुब्बियों का निर्माण 32,000 करोड़ रुपये की लागत से करने की योजना फिलहाल अटकी हुई है. मौजूदा समय में भारतीय नौसेना के पास छह स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के अलावा सात पुरानी रूसी किलो क्लास और चार जर्मन एचडीडब्ल्यू पनडुब्बियां हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि नई परियोजनाओं के समय पर पूरे होने और मौजूदा बेड़े के अपग्रेडेशन के बाद भारत अपनी समुद्री सीमाओं की रक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में चीन-पाकिस्तान की चुनौतियों का मजबूती से मुकाबला कर सकेगा.

सैनी सरकार का बड़ा तोहफा: दिवाली से पहले 25 हजार परिवारों को मिलेगा अपना प्लॉट

चंडीगढ़   हरियाणा के लोगों के लिए दिवाली से पहले एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार करीब 25,000 पात्र परिवारों को प्लॉट आवंटित करने जा रही है। ये प्लॉट उन लोगों को दिए जाएंगे जिनकी वार्षिक आय 1.80 लाख रुपये तक है। सूत्रों के अनुसार, इस योजना के तहत सरकार 17 अक्टूबर को राज्यस्तरीय कार्यक्रम आयोजित कर सकती है, जिसकी तैयारियां जोरों पर हैं। सभी जिलों से डीसी की रिपोर्ट भी सरकार को प्राप्त हो चुकी है, और आवंटन की प्रक्रिया पंचायत विभाग द्वारा पूरी की जाएगी। ड्रॉ पहले से हो चुका है, सूची तैयार जिन लाभार्थियों ने पहले आवेदन किया था, उन्हीं में से ड्रॉ के माध्यम से चयन किया गया है। राज्य सरकार ने 561 गांवों और 16 कस्बों की सूची तैयार की है, जहां यह प्लॉट दिए जाएंगे। ये प्लॉट करीब 50 गज क्षेत्रफल के होंगे। इस योजना के तहत 14 जिलों के 55 ब्लॉकों को शामिल किया गया है। यह कार्य चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा, यानी जैसे-जैसे ज़मीन उपलब्ध होगी, वैसे-वैसे प्लॉटों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। इस संबंध में सभी जिलों से डीसी की रिपोर्ट भी सरकार को मिल गई है। सभी तरह की कार्यवाही पंचायत विभाग की ओर से की जाएगी।  सभी के ड्रॉ पहले ही कर दिए जाएंगे। सरकार ने प्रदेश के 561 गांवों की सूची तैयार की है, जिनमें यह प्लॉट मुहैया कराए जाएंगे। इनके अलावा 16 अन्य कस्बों में भी 50 गज के प्लॉट दिए जाएंगे, यानी कुल मिलाकर आंकड़ा 25 हजार प्लॉट तक पहुंचेगा। 14 जिलों के 55 ब्लॉकों के गांवों में यह प्लाट मिलेंगे। जिनको ये मकान मिलेंगे, उन्होंने पहले से आवेदन किया है। आवेदनों में से ही ड्रॉ निकाले जाएंगे। हरियाणा में जिला के हिसाब से मिलेंगे प्लाट हरियाणा सरकार ने बीपीएल परिवारों को प्लाट देने की योजना बना ली है। जहां पर हर जिले के हिसाब से प्लाटों का निर्धारण कर लिया गया है। इसके तहत भिवानी 39 प्लाट, फरीदाबाद में 33 प्लाट, फतेहाबाद में 165 प्लाट, हिसार में 766 प्लाट,  कैथल में 87 प्लाट, करनाल में 2111 प्लाट, कुरुक्षेत्र में 1834 प्लाट, महेंद्रगढ में 313 प्लाट, नूंह में 449 प्लाट, पानीपत में 258 प्लाट, रोहतक में 252 प्लाट, सिरसा में 2398 प्लाट, सोनीपत में 784 प्लाट, यमुनानगर में 86 प्लाट दिए जाएंगे।  सरकार पंचायतों को देगी राशि सरकार की योजना है कि प्रति एकड़ पंचायत को राशि भी दी जाएगी। इसके तहत महाग्राम में प्रति एकड़ 50 लाख रुपए और अन्य गांवों में प्रति एकड़ 35 लाख रुपए की राशि पंचायत के खाते में जाएगी। इसके तहत चरण वाइज काम होगा। यानी जैसे-जैसे जमीन उपलब्ध होगी, प्लॉटों की संख्या बढ़ती जाएगी। जिला अनुसार प्लॉटों का आवंटन     भिवानी- 39 प्लाट     फरीदाबाद- 33 प्लाट     फतेहाबाद-165 प्लाट     हिसार- 766 प्लाट     कैथल- 87 प्लाट     करनाल- 2111 प्लाट     कुरुक्षेत्र- 1834 प्लाट     महेंद्रगढ़- 313 प्लाट     नूंह- 449 प्लाट     पानीपत- 258 प्लाट     रोहतक- 252 प्लाट     सिरसा- 2398 प्लाट     सोनीपत- 784 प्लाट     यमुनानगर- 86 प्लाट पंचायतों को मिलेगी वित्तीय सहायता इस योजना के तहत राज्य सरकार पंचायतों को प्रति एकड़ के हिसाब से वित्तीय सहायता भी देगी। महाग्रामों में: प्रति एकड़ ₹50 लाख अन्य गांवों में: प्रति एकड़ ₹35 लाख यह राशि पंचायतों के खातों में सीधे ट्रांसफर की जाएगी ताकि विकास कार्यों को गति मिल सके। 

RTO ने कसा शिकंजा: कानपुर देहात में 1400 वाहन मालिकों पर नोटिस, बकाया रोड टैक्स ₹47 करोड़

कानपुर  कानपुर देहात आरटीओ विभाग ने रोड टैक्स बकाया वसूली को लेकर सख्त रुख अपनाया है. जिले में करीब 46 करोड़ रुपये का टैक्स बकाया होने की वजह से विभाग ने 1400 वाहन मालिको को नोटिस थमाया है. विभाग का कहना है कि यदि वाहन मालिक समय पर टैक्स नहीं जमा करेंगे तो उनकी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) निरस्त कर दी जाएगी. आरटीओ प्रशासन प्रशांत तिवारी ने बताया कि जिले में हजारों वाहन टैक्स बकाया सूची में हैं. इनकी नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है और नोटिस भेजने की प्रक्रिया को तेज किया गया है. उन्होंने कहा कि यदि बकाया जमा नहीं हुआ तो संबंधित वाहनों की आरसी को भू-राजस्व की भांति वसूली के लिए जिलाधिकारी को भेजा जाएगा. इस स्थिति में वाहन सीज करने या नीलामी की कार्रवाई भी की जा सकती है. टैक्स वसूली को लेकर आरटीओ विभाग हुआ सख्त विभाग ने वाहन मालिकों को सुविधा देने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प उपलब्ध कराए हैं. परिवहन विभाग की वेबसाइट पर वाहन नंबर डालकर ओटीपी और एसबीआई पेमेंट गेटवे से भुगतान किया जा सकता है. वहीं, विभागीय कार्यालयों में ऑफलाइन भुगतान की व्यवस्था भी की गई है. जिले में 1400 वाहन मालिको को नोटिस थमाया आरटीओ विभाग ने साफ कर दिया है कि अब बकाया टैक्स वालों के खिलाफ कड़ाई से कदम उठाए जाएंगे. इसके साथ ही नियमित चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है और वाहन मालिकों को समय-समय पर संदेश भेजकर जागरूक भी किया जा रहा है. विभाग का उद्देश्य न केवल राजस्व वसूली बढ़ाना है बल्कि सड़क पर चलने वाले वाहनों की वैधता सुनिश्चित करना भी है.

S-400 की ढाल और Su-57 का वार… भारत का घातक कॉम्बो पाकिस्तान पर पड़ेगा भारी

नई दिल्ली भारतीय वायुसेना (IAF) अपनी ताकत को और मजबूत करने की योजना बना रही है. अगर रूस के साथ चल रही Su-57E स्टील्थ फाइटर जेट की बातचीत सफल होती है, तो यह S-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम के साथ मिलकर दक्षिण एशिया में सबसे खतरनाक जोड़ी बन सकता है. यह जोड़ा पाकिस्तान वायुसेना (PAF) के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है.  S-400: भारत का आसमानी कवच भारत ने रूस से 5 S-400 ट्रायम्फ सिस्टम खरीदे हैं, जिनमें से तीन 2025 तक तैनात हो चुके हैं. यह सिस्टम 400 किलोमीटर की दूरी तक हवाई हमलों को रोक सकता है. यह विमान, ड्रोन, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल को ट्रैक और नष्ट कर सकता है. इसकी खासियत है…     लंबी रेंज: 600 किमी तक दुश्मन के विमान-मिसाइल को देख सकता है. 400 किमी तक नष्ट कर सकता है.     मल्टी-टारगेट: एक साथ 300 टारगेट ट्रैक और 36 को नष्ट कर सकता है.     मोबाइल सिस्टम: इसे फटाफट एक जगह से दूसरी पर ले जाया जा सकता है, जिससे दुश्मन के लिए निशाना बनाना मुश्किल है.  भारत ने इसे पाकिस्तान और चीन की सीमाओं पर तैनात किया है, जैसे पंजाब, राजस्थान और गुजरात में. इससे पाकिस्तान के F-16, JF-17 और नए J-10CE विमान भारतीय सीमा में घुसने से पहले ही पकड़े और नष्ट किए जा सकते हैं. S-400 को भारत में सुदर्शन चक्र नाम दिया गया है, जो इसका दमदार प्रभाव दर्शाता है.  Su-57E: भारत का स्टील्थ तलवार Su-57E रूस का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट है. अगर भारत इसे खरीदता है, तो यह IAF का सबसे ताकतवर हथियार बन सकता है. इसकी खासियतें…     स्टील्थ टेक्नोलॉजी: इसका रडार क्रॉस-सेक्शन कम है, यानी दुश्मन के रडार इसे आसानी से नहीं पकड़ सकते.     लंबी रेंज हथियार: यह हवा से हवा और हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल ले जा सकता है.     सुपर मैन्यूवरेबिलिटी: यह तेज और चुस्त है, जिससे युद्ध में बेहतर प्रदर्शन करता है.     एडवांस सेंसर: इसके सेंसर और नेटवर्क-सेंट्रिक सिस्टम IAF के अन्य हथियारों के साथ मिलकर काम कर सकते हैं. Su-57E दुश्मन के इलाके में घुसकर हमला कर सकता है, बिना पकड़े गए. यह पाकिस्तान के रडार और डिफेंस सिस्टम को चकमा दे सकता है. S-400 और Su-57E का जोड़ा क्यों है खतरनाक? S-400 और Su-57E मिलकर भारत को डिफेंस और ऑफेंस में बेजोड़ ताकत देते हैं. इसे इस तरह समझें… S-400: आसमानी ढाल S-400 भारत के आसमान को दुश्मन के विमान, ड्रोन और मिसाइल से बचाता है. यह पाकिस्तान के विमानों को भारतीय सीमा के पास आने से पहले ही नष्ट कर सकता है. इसकी रेंज इतनी है कि पाकिस्तान के कई एयरबेस इसके निशाने पर हैं. सरगोधा और कामरा जैसे बेस से उड़ान भरते ही PAF के विमान पकड़े जा सकते हैं. Su-57E: हमलावर कटार Su-57E स्टील्थ होने से पाकिस्तान के रडार से बचकर उनके इलाके में घुस सकता है. यह PAF के विमान, बेस या अन्य टारगेट पर सटीक हमला कर सकता है. इसके हथियार लंबी दूरी तक मार कर सकते हैं, जिससे PAF जवाब देने से पहले ही नुकसान उठाए. PAF की रणनीति बेकार पाकिस्तान अक्सर अपने JF-17 और J-10CE विमानों की संख्या बढ़ाकर IAF की तकनीकी बढ़त को कम करने की कोशिश करता है. लेकिन S-400 की लंबी रेंज और Su-57E की स्टील्थ क्षमता के सामने यह रणनीति फेल हो सकती है. PAF के विमान न तो भारत में घुस पाएंगे और न ही अपने बेस पर सुरक्षित रहेंगे. मनोवैज्ञानिक दबाव युद्ध में तकनीक के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी महत्वपूर्ण है. S-400 और Su-57E की मौजूदगी से PAF का आत्मविश्वास कमजोर हो सकता है. उन्हें पता होगा कि भारत का डिफेंस सिस्टम उनके हर हमले को रोक सकता है. Su-57E उनके बेस पर चुपके से हमला कर सकता है. इससे उनकी रणनीति सीमित हो जाएगी. पाकिस्तान के लिए चुनौती पाकिस्तान के पास अभी F-16, JF-17 और J-10CE जैसे विमान हैं, लेकिन ये S-400 की रडार रेंज और Su-57E की स्टील्थ क्षमता के सामने कमजोर पड़ते हैं. पाकिस्तान के पास चीनी HQ-9 डिफेंस सिस्टम है, जिसकी रेंज 250 किमी है, लेकिन यह S-400 से कमजोर है.  भारत की रणनीति IAF अपनी रणनीति को लेयर्ड डिफेंस (कई परतों वाला रक्षा तंत्र) पर बना रही है. S-400 के साथ भारत के पास अकाश, बराक-8 और स्पाइडर जैसे सिस्टम भी हैं. Su-57E के आने से IAF को स्टील्थ हमले की ताकत मिलेगी. भारत की स्वदेशी नेत्रा AEW&C और अकाशतीर सिस्टम S-400 और Su-57E के साथ मिलकर एक मजबूत नेटवर्क बनाएंगे. यह नेटवर्क दुश्मन के हर हमले को रोक सकता है. जवाबी हमला कर सकता है.