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आज का मौसम: मॉनसून की रफ्तार तेज, देश के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी

तिरुवनन्तपुरम दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के केरल में दस्तक देते ही उत्तर भारत का मौसम भी करवट लेने लगा है। मौसम विभाग ने 5 जून को यूपी, बिहार, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, पंजाब और हरियाणा में बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं मॉनसून केरल के बाद अब कर्नाटक, तमिलनाडु के इलाकों की ओर आगे बढ़ रहा है। मौसम विभाग का कहना है कि प्री मॉनसून का असर उत्तर और पश्चिमी भारत में दिखाई देगा। अगले 24 घंटे में कम से कम 16 राज्यों में भारी बारिश हो सकती है। इसकेसाथ ही 60 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है। केरल और कर्नाटक में भारी बारिश मौसम विभाग के मुताबिक एक सप्ताह के दौरान केरल और कर्नाटक के बड़े इलाके में मूसलाधार बारिश हो सकती है। वहीं तमिलनाडु के भी बड़े क्षेत्र में बारिश का अनुमान है। पूर्वोत्तर के राज्यों में भी एक सप्ताह भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में 50 से 60 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। मछुआरों को सलाह दी गई है कि कम से कम 9 जून तक वे बंगाल की खाड़ी में ना उतरें। इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट मौम विभाग ने कहा है कि 5 जून को दक्षिण में केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना में भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा पूर्वोत्तर के असम, अरुणाचल, मेघालय, नागालैंड, और सिक्किम में बारिश का अनुमान है। उत्तर भारत की बात करें तो पंजाब. हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत कम से कम 16 राज्यों में आंधी-तूफान के साथ बारिश की संभावना है। दिल्ली का मौसम राजधानी दिल्ली में 4 जून को भी गरज-चमक के साथ बारिश हुई। वहीं मौसम विभाग का अनुमान है कि 5 और 6 जून को भी ादल छाए रहेंगे। हवा की गति 40 से 60 किमी प्रति घंटा रह सकती है। इसके अलावा 5 जून को दोपहर में कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है। बारिश और हवा की वजह से तापमान में 1 से 2 डिग्री की गिरावट दर्ज की जाएगी। यूपी का मौसम पूर्वी उत्तर प्रदेश में 5 ओर 6 जून को आंधी के साथ बारिश का अलर्ट जारी कया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक लखनऊ,वाराणसी, गोरखपुर, अयोध्या, बलिया, जौनपुर और गाजीपुर में 5 जून को बारिश हो सकती है। इसके अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, गाजियाबाद, बागपत, अलीगढ़, आगरा और मथुरा में भी मध्यम बारिश का अनुमान है। हवाओं की गति 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रह सकती है। पूर्वी यूपी में 7 से 10 जून तक हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है। बिहार का मौसम बिहार के भागलपुर, बांका, मुंगेर और जमुई में आंधी के साथ बारिश का अनुमान लगाया गया है। इसके अलावा राजस्थान के बड़े इलाके में आंधी के साथ बारिश की संभावना है। पहाड़ी इलाकों का मौसम हिमाचल प्रदेश के मंडी, शिमला, कांगड़ा. चंबा, कुल्लू, सोलन और सिरमौर जिलों में गरज-चमक के साथ बौछार पड़ सकती है। इसके अलावा हवाओँ की रफ्तार 40 से 60 किमी प्रतिघंटे की रहने की संभावना है। उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग, चोमील, नैनीताल, हरिद्वार, देहरादून, पिथौरागढ़. उत्तर काशी और टिहरी जिलों में मध्यम बारिश की संभावा है। 5 जून को कई जगहों पर ओलावृष्टि भी हो सकती है।

कहा गुणवत्ता और समय-सीमा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता, सभी कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित कर समय पर पूरा करें काम

रायपुर उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने अपने चार दिवसीय बस्तर प्रवास के पहले दिन आज कई कार्यों का निरीक्षण कर आवश्यक निर्देश दिए। वे इस दौरान कांकेर के कोटतरा में सुशासन तिहार के तहत आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में भी शामिल हुए। उन्होंने इस दौरान ग्राम पंचायत के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण किया। उन्होंने विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को चेक, सामग्री और प्रमाण पत्र भी वितरित किए।  साव आगामी चार दिनों तक बस्तर में रहकर निर्माण कार्यों और योजनाओं के मैदानी स्तर पर क्रियान्वयन का निरीक्षण करेंगे। वे इस दौरान बस्तर संभाग के सभी जिलों के अधिकारियों की बैठक लेकर कार्यों की प्रगति की समीक्षा भी करेंगे। वे आज अपने बस्तर प्रवास के पहले दिन कांकेर पहुंचे, जहां उन्होंने चारामा विकासखण्ड के ग्राम बड़ेगौरी में जल जीवन मिशन के कार्यों का जायजा लिया। जल जीवन मिशन के तहत यहां दो करोड़ 49 लाख रुपए की लागत से पानी टंकी का निर्माण और रेट्रोफिटिंग कर 391 घरों में स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति की जा रही है।  साव ने घरों में जाकर जल आपूर्ति भी देखी। वे वहां जल अर्पण कार्यक्रम में भी शामिल हुए। उप मुख्यमंत्री  साव ने कांकेर में निर्माणाधीन 250 सीटर नालंदा परिसर के कार्यों का निरीक्षण किया। चार करोड़ 71 लाख रुपए की लागत से इसका निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कार्यों में तेजी लाते हुए आगामी अक्टूबर माह तक इसका निर्माण पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने मुख्य नगर पालिका अधिकारी को कांकेर में जिला मुख्यालय के अनुरूप साफ-सफाई की व्यवस्था और जनसुविधाएं विकसित करने के निर्देश दिए।  साव ने अमोड़ा-नरहरपुर सड़क के निर्माण कार्य का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कार्य की धीमी प्रगति पर नाराजगी जाहिर करते हुए ठेकेदार और कार्यपालन अभियंता को इसमें तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता और समय-सीमा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इनमें किसी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने वर्क-फोर्स और मशीनरी बढ़ाकर कार्यों को गति देने के निर्देश दिए। 40 करोड़ 23 लाख रुपए की लागत से 16 किमी इस टू-लेन सड़क का निर्माण किया जा रहा है। कांकेर के विधायक  आशाराम नेताम भी सभी कार्यों के निरीक्षण के दौरान मौजूद थे।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार के सुशासन का 13वां वर्ष आरंभ

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी सनातन संस्कृति में पर्यावरण संरक्षण की मूल अवधारणा नीहित है। पांच तत्वों से बनी सृष्टि के संरक्षण के लिए हर तत्व का महत्व हमारे पूजा पाठ-भोजन और भजन की पद्धति में विद्यमान है। सनातन संस्कृति में एक पेड़ को 10 पुत्रों के बराबर माना गया है। हमारी जीवन पद्धति में पर्यावरण संरक्षण प्रकट होता है। राज्य सरकार प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पर्यावरण संरक्षण के लिए सभी कार्य पूर्ण प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत प्रदेश में नदी, कुओं, बावड़ियों और तालाबों के संरक्षण के लिए पवित्र भाव से कार्य जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्व पर्यावरण दिवस पर "एक पेड़ मां के नाम 2.0" अभियान के राज्य स्तरीय समारोह के शुभारंभ अवसर पर यह विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री  दिलीप अहिरवार, अपर मुख्य सचिव वन एवं पर्यावरण  अशोक बर्णवाल विशेष रूप से उपस्थित थे। राज्य स्तरीय पुरस्कार किये प्रदान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार मे दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इससे पहले, सभागार परिसर में स्वर्ण चंपा, सीता अशोक, रामफल और आंवला का पौधा रोपा। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कार्यक्रम में 8 श्रेणियों में 11 राज्य स्तरीय पर्यावरण पुरस्कार प्रदान किये। पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और सतत् विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली औद्योगिक इकाइयों, शैक्षणिक संस्थाओं, सामाजिक संगठनों तथा व्यक्तियों को वर्ष 2024-25 के लिसे पुरस्कार प्रदान किए। 16 जिलों की 500 बावड़ियों के प्रलेखन दस्तावेजों का किया गया विमोचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सर्कुलर इकॉनॉमी से संबंधित 5 कोर्स मॉड्यूल्स और एप्को तथा इन्टैक द्वारा प्रदेश में संचालित जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत 16 जिलों की 500 बावड़ियों के प्रलेखन दस्तावेजों का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नवाचारों, सर्कुलर इकोनॉमी तथा जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों पर केंद्रित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। प्रधानमंत्री  मोदी देश में सबसे लंबे समय तक कार्य करने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार के सुशासन का 13वाँ वर्ष आरंभ हो चुका है। प्रधानमंत्री  मोदी देश में सबसे लंबे समय तक कार्य करने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री होंगे। गर्व का विषय है कि प्रधानमंत्री  मोदी सतत निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में रिकॉर्ड बनाएंगे। प्रधानमंत्री का पद उनके आसीन होने से गौरवान्वित हुआ है। परमात्मा ने प्रधानमंत्री  मोदी को यश प्रदान किया है। भारत रत्न से सम्मानित पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने 24 दलों के गठबंधन की सरकार चलाई थी। उन्होंने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी अनेक सौगातें देश को दी और पूर्ण बहुमत की सरकार की कामना की। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी की कामना वर्ष 2014 में पूर्ण हुई। सुशासन और विरासत से विकास के मार्ग पर चलते हुए भारत सशक्त हुआ। वर्तमान समय में देश आतंकवाद और नक्सलवाद से मुक्त है। भारतीय प्रतिभाएं अंतरिक्ष विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा खेल सहित सभी क्षेत्रों में विश्व में अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन कर रही हैं। प्रधानमंत्री  मोदी ने हर परिस्थिति में खिलाड़ियों और वैज्ञानिकों का उत्साहवर्धन किया है। भारत पूरी मजबूती के साथ ऊर्जा संकट से बाहर निकल रहा है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान समय में मौसम के लिए अलनीनो और पश्चिम एशिया में विषम परिस्थियों के कारण दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल और गैस सहित ऊर्जा का संकट है। प्रधानमंत्री  मोदी के कुशल नेतृत्व में हमारा देश पूरी मजबूती के साथ ऊर्जा संकट से बाहर निकल रहा है। गैस त्रासदी प्रकृति से खिलवाड़ का सबसे बड़ा उदाहरण थी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल गैस त्रासदी आम नागरिकों और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली सबसे भयावह घटना है। राज्य सरकार ने यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में पड़ा कचरा 40 साल बाद सफलतापूर्वक निष्पादित करवाया है। इस तरह से भोपाल की धरती से गैस त्रासदी के कलंक को मिटाया है। अब राज्य सरकार यूनियन कार्बाइड की भूमि का समुचित प्रबंधन करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। प्रदेश में क्लीन-ग्रीन एनर्जी को प्रोत्साहित करने के लिए किए जा रहे है अनेक कार्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में क्लीन-ग्रीन एनर्जी को प्रोत्साहित करने के लिए अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। प्रदेश में ग्रीन एनर्जी के लिए सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बॉयोमास और जल विद्युत परियोनाएं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। सांची, खजुराहो सहित अन्य स्थानों पर ग्रीन एनर्जी के लिए बड़े प्रोजेक्ट्स पर कार्य जारी है। मध्यप्रदेश वन्य प्राणियों के संरक्षण के साथ सहअस्तित्व के सर्वश्रेष्ठ उदाहरण कर रहा है प्रस्तुत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण और वन्य जीवों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश में चीतों के पुनर्वास के अलावा असम से जंगली भैंसे भी लाए गए हैं। मध्यप्रदेश वन्य प्राणियों के संरक्षण के साथ सहअस्तित्व के साथ सर्वश्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। हमीदिया हॉस्पिटल भोपाल पुरुस्कृत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए मे. विसाग बॉयो फ्यूल प्राइवेट लिमिटेड बारासिवनी बालाघाट, आर.सी.सी.पी.एल. सीमेंट मैहर, टैफे मोटर्स एंड ट्रैक्टर्स लिमिटेड मंडीदीप जिला रायसेन, रामरमा मैंगनीज और माइन्स बारासिवनी बालाघाट, केसर एग्रोटेक बारासिवनी बालाघाट, नगर पालिका परिषद सिवनी मालवा, हमीदिया हॉस्पिटल भोपाल, विजेश लूनावत स्मृति फाउण्डेशन भोपाल, एक्रोपॉलिस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च इंदौर, डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल सूर्य विहार सिंगरौली को पुरस्कृत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह पहल प्रदेश की अन्य औद्योगिक इकाइयों और संस्थाओं को प्रदूषण नियंत्रण एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करेगी। "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान ने जन सहभागिता से नए आयाम स्थापित किए राज्यमंत्री  अहिरवार ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए हवा, पानी और पेड़ बचाना आवश्यक है। प्रधानमंत्री  मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान सफल हुआ है। इस अभियान में जन सहभागिता के नए आयाम स्थापित हुए हैं। अपर मुख्य सचिव  अशोक बर्णवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने लाइफ स्टाइल फॉर एन्वायरमेंट का नारा दिया, जो विश्व में प्रसिद्ध हुआ। भारत सरकार का मिशन लाइफ, पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करें राज्यमंत्री  अहिरवार ने कहा कि हमें प्राकृतिक … Read more

राजीव स्मृति वन में बरगद का पौधा लगाकर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

रायपुर   मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर  राजधानी रायपुर स्थित राजीव स्मृति वन में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान 2026-27 का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री  साय ने कृष्ण वट (बरगद) का पौधा रोपित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर वन मंत्री  केदार कश्यप ने भी बेल का पौधा लगाकर अभियान में सहभागिता निभाई। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव  साय ने कहा कि प्रकृति और मानव जीवन का संबंध अभिन्न है। अनियंत्रित वृक्ष कटाई और पर्यावरणीय असंतुलन पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। ऐसे समय में प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किया गया ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की दिशा में एक प्रेरक और भावनात्मक पहल है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि गत वर्ष प्रदेश में ढाई करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन जनसहभागिता और विभागीय प्रयासों से साढ़े तीन करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस वर्ष भी प्रदेशवासी निर्धारित लक्ष्य से कहीं अधिक पौधारोपण कर नया कीर्तिमान स्थापित करेंगे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल है जहां लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनाच्छादित है। राज्य सरकार और वन विभाग के सतत प्रयासों से वन क्षेत्र का संरक्षण और विस्तार निरंतर जारी है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपने घर, खेत, आंगन और मेड़ों में अपनी माता के नाम एक पौधा लगाने का आग्रह करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने आदिवासी समाज की प्रकृति संरक्षण परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जनजातीय समुदाय सदियों से जंगलों को अपनी संस्कृति और जीवन का अभिन्न हिस्सा मानकर उनकी रक्षा करता आया है। सरना स्थलों में वृक्षों को देवतुल्य मानकर पूजा जाना प्रकृति के प्रति हमारी सांस्कृतिक आस्था और संरक्षण की भावना का जीवंत उदाहरण है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने समाज सेवा एवं जनकल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पद्म सम्मानित व्यक्तित्व  पंडी राम मंडावी,  जागेश्वर यादव तथा डॉ. रामचंद्र गोडबोले का सम्मान किया। उन्होंने कहा कि इन विभूतियों का जीवन समाजसेवा, समर्पण और जनहित का प्रेरणादायी उदाहरण है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा प्रकाशित पुस्तकों—‘द बैगा’, ‘वेटलैंड्स ऑफ छत्तीसगढ़’, ‘फ्लोरल डायवर्सिटी ऑफ बीजापुर डिवीजन’, ‘मैमल्स ऑफ छत्तीसगढ़’ तथा ‘उत्तरी छत्तीसगढ़ के अनूठे पर्यटन स्थल और उनकी विविधता’—का विमोचन भी किया। वन मंत्री  केदार कश्यप ने कहा कि ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान प्रकृति और मातृत्व के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक अनूठा माध्यम है। उन्होंने प्रदेशवासियों से इस अभियान को जन-जन का आंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने बिलासपुर जिले के कोपरा जलाशय को रामसर साइट का दर्जा मिलने पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए इसे छत्तीसगढ़ के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया। कार्यक्रम में भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम सिलीबहार की सु चन्दनबती कोला ने स्व-सहायता समूहों द्वारा जंगल संरक्षण और जैविक खेती के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि गांव में 138 एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक एवं जैविक खेती की जा रही है, जिससे युवाओं का पलायन पूरी तरह रुक गया है तथा पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा मिली है। कार्यक्रम को अपर मुख्य सचिव  मनोज पिंगुआ तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक  अरुण कुमार पाण्डेय ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष  रामसेवक पैकरा, आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परम्परा एवं औषधि पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष  अंजय शुक्ला, विधायक  मोतीलाल साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष  नवीन अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

सीमा पर बढ़ी सख्ती: घुसपैठियों की वापसी को लेकर BSF-BGB के बीच विवाद की स्थिति

कलकत्ता भारत में बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ सख्ती के बाद सीमा पर टकराव की नौबत है. बांग्लादेश गार्ड बॉर्डर (BGB) अपने ही नागरिकों को अपने देश में एंट्री नहीं दे रहा है. भारत-बांग्लादेश सीमा पर कई दिनों से सैकड़ों बांग्लादेशी घर वापसी के लिए इंतजार कर रहे हैं. लेकिन BGB इन्हें बांग्लादेशी मानती ही नहीं है।  BGB ने लालमोनिरहाट में तीन बॉर्डर पॉइंट्स पर अपने 33 लोगों को बांग्लादेश में घुसने नहीं दिया. बांग्लादेश के अखबार द डेली स्टार ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि BGB ने लालमोनिरहाट में तीन बार्डर पॉइंट्स से 33 लोगों को अंदर भेजने की बीएसएफ की कोशिश को सफल नहीं होने दिया।  अखबार ने लिखा है, "BGB अधिकारियों के अनुसार आज सुबह-सुबह भारत के बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स ने लालमोनिरहाट में तीन बॉर्डर पॉइंट्स से 33 लोगों को बांग्लादेश में भेजने की कोशिश की, जिसे बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) ने रोक दिया. BGB-16 और 61 बटालियन के अधिकारियों ने बताया कि ये घटनाएं सुबह करीब 5:00 बजे बॉर्डर पर अलग-अलग जगहों पर हुईं।  BGB-15 लालमोनिरहाट बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल मेहदी इमाम ने दावा किया कि सभी लोगों को ज़ीरो लाइन पर रोक दिया गया. उन्होंने कहा कि बॉर्डर पर कड़ी नज़र रखी जा रही है और BGB हाई अलर्ट पर है; साथ ही इस घटना को लेकर BSF के साथ बातचीत भी चल रही है।  BGB मीडिया सेल ने दावा किया कि सबसे पहले BGB-61 तीस्ता बटालियन के तहत बाराखाटा बॉर्डर आउटपोस्ट (BOP) इलाके से 11 लोगों को बांग्लादेश की तरफ पुश-इन करते हुए देखा गया. आगे BGB ने दावा किया कि फिर उसी समय पैशात्तीबारी BOP इलाके से भी 10 और लोगों को अंदर धकेला जा रहा था।  जानकारी मिलने के बाद BGB की पेट्रोलिंग टीमें तुरंत दोनों जगहों पर पहुंचीं और स्थिति को काबू में किया. BGB ने उन लोगों को बॉर्डर पर ही रोक दिया गया और वे भारतीय सीमा में ही रहे।  पश्चिम बंगाल में अवैध रुप से घुसे बांग्लादेशियों के खिलाफ जबर्दस्त अभियान चलाया जा रहा है. इसके बाद देश में अवैध रूप से घुसे कई बांग्लादेशी स्वेच्छा से वापस बांग्लादेश जाना चाहते हैं, लेकिन बांग्लादेश सरकार और सेना इन लोगों को अपना नागरिक मानने से ही इनकार कर रही है।  अखबार के अनुसार दुर्गापुर और दिघलतारी BOP की BGB KR पेट्रोलिंग टीमों ने भारतीय सीमा की तरफ से बॉर्डर पिलर 925 और 927 के पास 12 लोगों बांग्लादेश में घुसने से रोक दिया।  बांग्लादेश के अखबार प्रथम आलो ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उन्होंने बंगाबाडी बॉर्डर इलाके में 28 लोगों बांग्लादेश घुसने रोक दिया।  इस मामले को लेकर गुरुवार दोपहर BGB और BSF के बीच एक फ्लैग मीटिंग हुई. बंगाबाड़ी बॉर्डर पर हुई इस मीटिंग में BSF ने BGB को बताया कि वे इस मुद्दे पर अपने सीनियर अधिकारियों से बात करेंगे और इसका समाधान निकालेंगे।  भारत में इस समय सिर्फ पश्चिम बंगाल ही नहीं बल्कि दिल्ली, अहमदाबाद, गुरुग्राम बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ पुलिस/प्रशासनिक अभियान चलाये जा रहे हैं. ये अभियान अवैध घुसपैठ, फर्जी दस्तावेजों और सुरक्षा मुद्दों पर केंद्रित हैं। 

समाज और मानवता के प्रति नए दायित्वों के निर्वहन का संकल्प लेने का अवसर है दीक्षांत समारोह : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और ‘पॉपकॉर्न मेंटल स्टेटस’ से बाहर निकलने की आवश्यकता : राज्यपाल रमेन डेका समाज और मानवता के प्रति नए दायित्वों के निर्वहन का संकल्प लेने का अवसर है दीक्षांत समारोह : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में 9 हजार 194 विद्यार्थियों को प्रदान की गई उपाधियां रायपुर राज्यपाल रमेन डेका ने कहा है कि डिजिटल एडिक्शन वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनती जा रही है। इसका प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक जीवन पर भी पड़ रहा है। नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और ‘पॉपकॉर्न मेंटल स्टेटस’ से बाहर निकलने की आवश्यकता है, क्योंकि यह सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित कर केवल कृत्रिम संतुष्टि प्रदान करता है। राज्यपाल डेका आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। दीक्षांत समारोह में मेडिकल, डेंटल, आयुर्वेद, होम्योपैथी, मेडिकल बायोटेक्नोलॉजी, फिजियोथेरेपी, नर्सिंग, बीएएसएलपी सहित विभिन्न संकायों के कुल 9 हजार 194 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 7 हजार 545 स्नातक, 1 हजार 645 स्नातकोत्तर तथा 5 सुपर स्पेशियलिटी उपाधिधारी शामिल हैं। विभिन्न संकायों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण पदकों से भी सम्मानित किया गया। राज्यपाल डेका ने कहा कि यदि दृढ़ संकल्प के साथ प्रयास किया जाए तो 30 दिनों के भीतर डिजिटल एडिक्शन से काफी हद तक मुक्ति पाई जा सकती है। बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखते हुए खेल-कूद और अन्य बाहरी गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे सीमित दायरे में रह रहे हैं, जिससे उनकी प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित हो रही है। राज्यपाल ने नवस्नातक चिकित्सकों को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का माध्यम है। जिस प्रकार वे राज्यपाल के रूप में प्रदेश की जनता के हितों के प्रति उत्तरदायी हैं, उसी प्रकार चिकित्सकों का दायित्व मरीजों के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति समर्पित रहना है। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों के सफेद कोट पर कभी कोई दाग नहीं आना चाहिए और मरीज का हित सदैव सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ‘नेबरहुड डॉक्टर’ और पारिवारिक चिकित्सक की अवधारणा को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी मरीज के लिए ‘गोल्डन ऑवर’ अत्यंत महत्वपूर्ण होता है और ऐसे समय में चिकित्सक की त्वरित निर्णय क्षमता जीवन बचाने में निर्णायक भूमिका निभाती है। राज्यपाल ने कहा कि आज के विद्यार्थी इंटरनेट युग के छात्र हैं। विज्ञान निरंतर प्रगति कर रहा है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) चिकित्सा क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल रही है। टेलीमेडिसिन जैसी तकनीकों के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकती हैं। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्यपाल ने सभी विद्यार्थियों और नागरिकों से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मानव, पशु और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों, शिक्षकों तथा विश्वविद्यालय परिवार को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज का दिन केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि समाज और मानवता के प्रति नए दायित्वों के निर्वहन का संकल्प लेने का भी अवसर है। विद्यार्थियों को प्राप्त उपाधियां और सम्मान उनकी मेहनत, अनुशासन और समर्पण का परिणाम हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि समाज को नवस्नातक चिकित्सकों से बड़ी अपेक्षाएं हैं और वे प्रदेश के स्वास्थ्य प्रहरी हैं। विशेष रूप से जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने विद्यार्थियों से करुणा, नवाचार, संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों के साथ चिकित्सा सेवा प्रदान करने का आह्वान करते हुए कहा कि राज्य सरकार हर कदम पर उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ केवल खनिज और कृषि आधारित राज्य के रूप में ही नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान स्थापित करे, यह हम सबका लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की प्रगति और विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा से भी जुड़ी हुई है। प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री साय ने बताया कि नया रायपुर में 100 एकड़ क्षेत्र में अत्याधुनिक मेडिसिटी विकसित की जा रही है, जिसमें 5 हजार से अधिक बिस्तरों की व्यवस्था होगी। यह परियोजना प्रदेशवासियों को उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रमुख केंद्र बनेगी। इसके अतिरिक्त रायगढ़ और सरगुजा संभाग में भी नए अस्पतालों की स्थापना की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेशवासियों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं अपने ही राज्य में उपलब्ध हों, ताकि उन्हें उपचार के लिए बाहर न जाना पड़े। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर में 240 बिस्तरों वाला सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल प्रारंभ हो चुका है, जिससे लंबे समय तक विकास से वंचित रहे क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री साय ने बस्तर में नक्सलवाद के विरुद्ध मिली सफलताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और बस्तरवासियों के सहयोग से नक्सल उन्मूलन की दिशा में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई है। इसके परिणामस्वरूप बस्तर में विकास कार्यों को नई गति मिली है। उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों में सुरक्षा शिविर स्थापित किए गए थे, वहां अब ‘सेवा डेरा’ विकसित कर लोगों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं तथा ‘अग्रणी बस्तर योजना’ के तहत अधिकारी गांवों में रुककर समस्याओं का त्वरित समाधान कर रहे हैं। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में कार्य करना सेवा का सर्वोत्तम अवसर और बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र … Read more

सड़क और परिवहन नेटवर्क के साथ हरित विकास पर भी फोकस: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रदेश में सड़क एवं परिवहन नेटवर्क निर्माण के साथ हरित विकास को दिया जा रहा बढ़ावा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सड़क निर्माण में पर्यावरण संरक्षण के लिये 7,871 वृक्षों के स्थान पर 80 हजार पौधों का होगा रोपण अयोध्या बायपास के दोनों ओर लगाये जायेंगे 10 हजार पौधे मुख्यमंत्री के विजन को साकार करेगा अयोध्या बायपास परियोजना का ग्रीन मॉडल मुख्य सचिव जैन ने की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा, समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन के दिये निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में अधोसंरचना विकास को पर्यावर्णीय संवेदनशीलता और दीर्घकालिक सतत विकास की अवधारणा के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रदेश सरकार की प्राथमिकता आधुनिक सड़क एवं परिवहन नेटवर्क के निर्माण के साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और हरित विकास को बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अयोध्या बायपास परियोजना इस सोच का उदाहरण है, जहाँ विकास और पर्यावरण संरक्षण को समान महत्व दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि परियोजना के दौरान 7,871 वृक्षों की कटाई की प्रतिपूर्ति के लिये लगभग 10 गुना अधिक अर्थात 80 हजार पौधों का रोपण किया जाएगा। अयोध्या बायपास के दोनों ओर लगभग 10 हजार पौधे लगाकर इसे एक हरित कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पहल पर्यावर्णीय संतुलन को सुदृढ़ करने के साथ क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को भी नया आयाम प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल बेहतर सड़क अधोसंरचना का निर्माण करना नहीं है, बल्कि ऐसी विकास परियोजनाओं को बढ़ावा देना है जो आर्थिक प्रगति के साथ पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्यों को भी पूरा करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अयोध्या बायपास परियोजना प्रदेश में सतत एवं समावेशी विकास के मॉडल के रूप में स्थापित होगी तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और हरित पर्यावरण सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के इस विजन को धरातल पर उतारने के लिए राज्य शासन द्वारा परियोजना के विभिन्न पहलुओं की नियमित समीक्षा की जा रही है। इसी क्रम में मुख्य सचिव अनुराग जैन ने शुक्रवार को मुख्य सचिव कार्यालय में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रदेश की प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव जैन ने राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण, उन्नयन एवं विस्तार कार्यों की स्थिति की समीक्षा करते हुए परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूर्ण करने के निर्देश दिए। समीक्षा के दौरान भोपाल की महत्वपूर्ण अयोध्या बायपास चौड़ीकरण परियोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में अयोध्या बायपास की डिज़ाइन क्षमता लगभग 40 हजार वाहन प्रतिदिन की है, जबकि इस मार्ग पर प्रतिदिन लगभग 45 हजार वाहनों का आवागमन हो रहा है। भोपाल के तेजी से हो रहे शहरीकरण और आसपास विकसित हो रहे नए आवासीय क्षेत्रों के कारण यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसी स्थिति में बायपास का चौड़ीकरण न केवल यातायात प्रबंधन और सड़क सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक है, बल्कि यह राजधानी क्षेत्र की भावी आवश्यकताओं को भी पूरा करेगा। विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण का संतुलित मॉडल मुख्यमंत्री डॉ. यादव के विजन को मूर्त रूप देते हुए अयोध्या बायपास परियोजना के अंतर्गत व्यापक पौधरोपण एवं हरित विकास योजना तैयार की गई है। परियोजना के दौरान 7,871 वृक्षों की कटाई की प्रतिपूर्ति के लिये लगभग 10 गुना अधिक अर्थात 80 हजार पौधों का रोपण किया जाएगा। इनमें से लगभग 10 हजार पौधे अयोध्या बायपास के दोनों ओर लगाए जाएंगे, जिससे यह मार्ग भविष्य में एक आकर्षक और पर्यावरण-अनुकूल ग्रीन कॉरिडोर के रूप में विकसित होगा। इसके अतिरिक्त झिरनिया एवं झगरिया खुर्द क्षेत्रों में लगभग 70 हजार पौधों के रोपण की तैयारी पूर्ण कर ली गई है। आगामी मानसून में प्रस्तावित यह व्यापक पौधरोपण अभियान भोपाल क्षेत्र में हरित आवरण के विस्तार और पर्यावरणीय संतुलन को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। पौधों के संरक्षण, देखभाल एवं अनुरक्षण की जिम्मेदारी आगामी 15 वर्षों तक एनएचएआई द्वारा वहन की जाएगी। इसके लिए लगभग 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह पहल इस बात का उदाहरण है कि आधुनिक अधोसंरचना निर्माण और पर्यावरणीय दायित्व एक-दूसरे के पूरक बन सकते हैं। नागरिक सुविधाओं को प्राथमिकता मुख्य सचिव जैन ने अयोध्या बायपास परियोजना में भोपाल की पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को निर्बाध बनाए रखने के लिए की जा रही तैयारियों की भी समीक्षा की। मुख्य सचिव जैन को अवगत कराया गया कि एनएचएआई और भोपाल नगर निगम के बीच निरंतर समन्वय स्थापित कर कार्य योजना तैयार की गई है। इसमें पाइप लाइन शिफ्टिंग सहित सभी तकनीकी कार्य चरणबद्ध तरीके से किए जाएंगे। नगर निगम के तकनीकी अधिकारियों की निगरानी में कार्य संपादित किए जाने से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान नागरिकों को पेयजल आपूर्ति संबंधी किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। बैठक में बताया गया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा एनएचएआई द्वारा प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से क्षेत्रीय संपर्क, आर्थिक गतिविधियों, निवेश, पर्यटन तथा औद्योगिक विकास को नई गति प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन अधोसंरचना के निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।  

GDP में शानदार उछाल: चौथी तिमाही के दम पर FY26 में 7.7% की वृद्धि, FY27 में 6.6% ग्रोथ का अनुमान

नई दिल्‍ली  भारत की वित्त वर्ष 2025-26 में ग्रोथ बढ़कर 7.7% हुई। मार्च तिमाही के आंकड़े पिछली तिमाही के मुकाबले कम रहे। शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत की आर्थिक विकास दर 2025-26 में बढ़कर 7.7% हो गई, जो एक साल पहले 7.1% थी। हालांकि, अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि बढ़ते वैश्विक और घरेलू जोखिमों के कारण इस रफ्तार को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। वित्त वर्ष 2026 की जनवरी-मार्च तिमाही में अर्थव्यवस्था 7.8% बढ़ी, जबकि पिछली तिमाही में यह 8% थी। भारत अब नई जीडीपी (GDP) सीरीज के तहत आंकड़े जारी कर रहा है। इसमें महंगाई मापने वाले बास्केट में हालिया बदलाव, 2022-23 को नया आधार वर्ष (बेस ईयर) बनाना और अपडेटेड बैक-सीरीज डेटा शामिल है। यह सब महामारी के बाद खपत के बदलते पैटर्न और डिजिटल अर्थव्यवस्था के तेज़ी से विस्तार को बेहतर ढंग से समझने की व्यापक कोशिश का हिस्सा है। मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन (MoSPI) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, साल की आखिरी तिमाही यानी जनवरी से मार्च 2026 के बीच भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.8% रही. हालांकि, यह इससे पिछली तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) के 8% के मुकाबले थोड़ी कम है. इसका मुख्य वजह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार में आई कमी रही. मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ जो तीसरी तिमाही में 12.8% पर थी, वह आखिरी तिमाही में गिरकर 7.3% पर आ गई।  फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में 7.9% रही GVA ग्रोथ ग्रॉस वैल्यू ऐडेड (GVA) की बात करें तो फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में इसकी ग्रोथ रेट 7.9% दर्ज की गई. चौथी तिमाही में भी जीवीए ग्रोथ 7.9% रही, जो आर्थिक गतिविधियों में मजबूती का संकेत देती है. बता दें कि जीवीए से पता चलता है कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों (जैसे खेती, उद्योग) में कुल कितनी असली कमाई या वैल्यू जुड़ी।  पूरे साल की यह ग्रोथ सरकार के फरवरी के दूसरे अनुमान 7.6% से भी ज्यादा है। वहीं पिछले साल यानी वित्त वर्ष 2024-25 में देश की रियल जीडीपी ग्रोथ 7.1% रही थी। नॉमिनल जीडीपी में 8.9 प्रतिशत की वृद्धि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, नॉमिनल जीडीपी (वर्तमान कीमतों पर) के मोर्चे पर भी अर्थव्यवस्था ने अपनी रफ्तार कायम रखी है। वित्त वर्ष 2025-26 में नॉमिनल जीडीपी के 346.36 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंचने का अनुमान है, जबकि इसके मुकाबले वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 318.07 लाख करोड़ रुपये पर दर्ज किया गया था। यह स्पष्ट रूप से 8.9 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर को रेखांकित करता है। जीडीपी के ये आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था सही दिशा में मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। 7.8 प्रतिशत की मजबूत तिमाही वृद्धि और 7.7 प्रतिशत की वार्षिक विकास दर न सिर्फ भारतीय बाजारों के लिए एक सकारात्मक संकेत है, बल्कि यह देश के लगातार बढ़ते आर्थिक परिदृश्य को भी मजबूती प्रदान करता है।  मैन्युफैक्चरिंग में दिखी सुस्ती     वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ 7.8% रही। यह तीसरी तिमाही की 8% की ग्रोथ के मुकाबले थोड़ी कम है।     तिमाही-दर-तिमाही आधार पर विकास दर में आई इस गिरावट की मुख्य वजह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में दर्ज की गई सुस्ती है।     मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ जहां तीसरी तिमाही में 12.8% के उच्च स्तर पर थी, वह चौथी तिमाही में घटकर 7.3% पर आ गई है। GVA ग्रोथ 7.9% रही, नॉमिनल जीडीपी की रफ्तार भी धीमी     आर्थिक विकास को करीब से दर्शाने वाली ग्रॉस वैल्यू ऐडेड (GVA) ग्रोथ पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 7.9% दर्ज की गई है। चौथी तिमाही में भी GVA की विकास दर ठीक इतनी ही यानी 7.9% रही।     दूसरी ओर, अगर मौजूदा बाजार भाव पर आधारित नॉमिनल जीडीपी की बात करें तो वित्त वर्ष 2025-26 में इसमें 8.9% की बढ़ोतरी हुई है। यह पिछले वित्त वर्ष-25 के 9.7% की नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ से कम है। भविष्य का अनुमान: वित्त वर्ष-27 में 6.6% रह सकती है ग्रोथ भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के जारी अनुमानों के मुताबिक, अगले वित्त वर्ष यानी 2026-27 में आर्थिक विकास की यह रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है। रिजर्व बैंक ने अनुमान लगाया है कि अगले साल देश की ग्रोथ रेट 110 बेसिस पॉइंट्स यानी 1.10% घटकर 6.6% पर आ सकती है। RBI ने GDP ग्रोथ का अनुमान घटाया भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की जीडीपी दर में कमी का अनुमान जताया है. आरबीआई के मुताबिक, मौजूदा फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के दौरान भारत की रियल जीडीपी ग्रोथ रेट 6.6 फीसदी रहने का अनुमान है. पहले आरबीआई ने रियल जीडीपी ग्रोथ रेट 6.9 फीसदी का अनुमान जारी किया था।  नए बेस ईयर 2022-23 के साथ जारी हुआ डेटा सांख्यिकी मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2025-26 के पूरे साल के जीडीपी आंकड़ों को एक नए बदलाव के साथ पेश किया है। इस बार पूरे साल के डेटा को नए बेस ईयर 2022-23 के पैमाने पर कैलकुलेट करके जारी किया गया है। नौकरों, ड्राइवर और ई-वाहन डेटा भी शामिल किया GDP की नई सीरीज में 2022-23 को बेस ईयर बनाया गया है। आर्थिक अनुमानों को ज्यादा सटीक बनाने के लिए इसमें अब जीएसटी नेटवर्क, ई-वाहन डेटाबेस और घरों में काम करने वाले कुक, ड्राइवर और घरेलू नौकरों की सेवाओं से जुड़ा डेटा भी शामिल किया गया है। आमतौर पर हर 5 साल में बदला जाता है बेस-ईयर समय के साथ अर्थव्यवस्था में आने वाले बड़े बदलावों को दर्ज करने के लिए समय-समय पर बेस ईयर बदला जाता है। आमतौर पर मंत्रालय हर पांच साल में डेटा सीरीज को अपडेट करता है, लेकिन कोविड महामारी और जीएसटी लागू होने की वजह से इस काम में देरी हुई। 1950 तक के नए आंकड़े दिसंबर 2026 तक आएंगे सरकार सिर्फ नए आंकड़े ही नहीं जारी करेगी, बल्कि पुराने आंकड़ों को भी नए बेस ईयर के हिसाब से दोबारा कैलकुलेट करेगी। मंत्रालय ने संकेत दिया है कि इस नए फ्रेमवर्क के तहत 'बैक-सीरीज' डेटा (1950-51 तक के आंकड़े) दिसंबर 2026 तक आने की उम्मीद है। नए माप से सटीकता बढ़ेगी; हर 5 से 10 साल में मानक बदलना चाहिए आखिर जीडीपी मापने का तरीका क्यों बदला गया? 2011-12 वाला पैमाना 14 साल पुराना हो गया था। तब यूपीआई, जोमैटो, ओटीटी, गिग … Read more

श्रमिकों के बच्चे अब केवल श्रमिक नहीं, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासक बनेंगे : मुख्यमंत्री

कठिन परिस्थितियों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर श्रमिक परिवारों के बेटा-बेटियों ने प्रदेश का नाम किया रोशन : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय श्रमिकों के बच्चे अब केवल श्रमिक नहीं, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासक बनेंगे : मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के तहत 22 मेधावी विद्यार्थियों को दो-दो लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि 28 हजार 754 श्रमिक परिवारों को 7.79 करोड़ रुपये की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से अंतरित विश्व पर्यावरण दिवस पर "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत किया पौधारोपण, प्रदेशवासियों से भी किया आह्वान रायपुर, श्रमिक अपने श्रम, समर्पण और परिश्रम से समाज तथा देश के विकास की मजबूत नींव तैयार करते हैं। वे स्वयं कठिन परिस्थितियों में रहकर दूसरों को सुख-सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं, इसलिए श्रमिक वास्तव में देश के निर्माता हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाउस में श्रम विभाग द्वारा आयोजित मेधावी छात्र-छात्रा सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं एवं 12वीं बोर्ड परीक्षाओं की मेरिट सूची में टॉप-10 में स्थान प्राप्त करने वाले पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के 22 मेधावी छात्र-छात्राओं को मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के तहत दो-दो लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान कर सम्मानित किया। इनमें कक्षा 10वीं के 9 तथा कक्षा 12वीं के 13 विद्यार्थी शामिल हैं। ये विद्यार्थी रायपुर, महासमुंद, दुर्ग, गरियाबंद, सक्ती, बलौदाबाजार, रायगढ़ और कांकेर सहित विभिन्न जिलों से हैं। मुख्यमंत्री ने सम्मानित विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि श्रमिक परिवारों के संघर्ष, परिश्रम और संकल्प की प्रेरक कहानी है। उन्होंने कहा कि आज जिन श्रमिक परिवारों के बेटा-बेटियों को सम्मानित किया जा रहा है, उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे कभी भी स्वयं को किसी से कम न समझें। इतिहास इस बात का साक्षी है कि अनेक महान व्यक्तित्व साधारण परिवारों से निकलकर अपनी मेहनत, लगन और शिक्षा के बल पर उच्चतम शिखरों तक पहुंचे हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की मंशा है कि श्रमिकों के बच्चे केवल श्रमिक बनकर न रह जाएं, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासक, वैज्ञानिक और विभिन्न उच्च पदों पर पहुंचकर छत्तीसगढ़ महतारी तथा देश की सेवा करें। उन्होंने विद्यार्थियों से निरंतर अध्ययन, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण बनाए रखने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जन्म से लेकर मृत्यु तक श्रमिकों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक कल्याण के लिए लगभग 70 प्रकार की योजनाएं संचालित कर रही है। उन्होंने श्रमिक परिवारों से इन योजनाओं का अधिकाधिक लाभ लेने का आग्रह किया तथा उपस्थित हितग्राहियों से कहा कि वे उन श्रमिकों तक भी योजनाओं की जानकारी पहुंचाएं जो अभी इन सुविधाओं से वंचित हैं। अपने केंद्रीय श्रम राज्य मंत्री के रूप में कार्यकाल के अनुभव साझा करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रमिकों और मेहनतकश वर्ग के हितों के प्रति अत्यंत संवेदनशील हैं। वर्ष 2014 से 2019 के दौरान केंद्र सरकार में दायित्व निभाते समय उन्हें श्रम मंत्रालय के कार्यों को निकट से देखने तथा श्रमिकों के हित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णयों का हिस्सा बनने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि पहले अलग-अलग स्थानों पर कार्य करने के कारण श्रमिकों को भविष्य निधि (पीएफ) राशि प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इस समस्या के समाधान के लिए यूनिवर्सल पीएफ नंबर की व्यवस्था लागू की गई, जिससे अब एक ही पीएफ नंबर श्रमिक के पूरे कार्यकाल से जुड़ा रहता है। उन्होंने कहा कि न्यूनतम पेंशन व्यवस्था तथा श्रमिकों के स्वास्थ्य संरक्षण से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण कदम भी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में उठाए गए हैं। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने श्रमिक कल्याण योजनाओं के अंतर्गत 28 हजार 754 पंजीकृत निर्माण श्रमिकों एवं उनके परिवारों को कुल 7 करोड़ 79 लाख 52 हजार 370 रुपये की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की। यह राशि निःशुल्क गणवेश एवं पुस्तक सहायता, मिनीमाता महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना, मुख्यमंत्री नोनीलाल छात्रवृत्ति योजना, मुख्यमंत्री श्रमिक औजार सहायता योजना, मुख्यमंत्री साइकिल सहायता योजना, पेंशन सहायता योजना सहित विभिन्न श्रमिक हितैषी योजनाओं के तहत प्रदान की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के अंतर्गत मेधावी विद्यार्थियों को एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि तथा एक लाख रुपये दोपहिया वाहन क्रय करने के लिए प्रदान किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार श्रमिक परिवारों के सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रही है तथा बच्चों के लिए निःशुल्क कोचिंग, स्वास्थ्य परीक्षण और अन्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह ने कहा कि मंडल द्वारा श्रमिकों एवं उनके परिवारों के हित में अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना श्रमिक परिवारों के बच्चों को आगे बढ़ाने वाली एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के बच्चों को उच्च शिक्षा और स्वरोजगार के लिए भी विभिन्न प्रकार की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। कार्यक्रम में मेधावी विद्यार्थियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। विद्यार्थियों ने बताया कि उन्हें श्रम विभाग की योजनाओं का लाभ मिला है और वे इस राशि का उपयोग उच्च शिक्षा तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए करेंगे। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत पौधारोपण किया तथा प्रदेशवासियों से अपनी माताओं के नाम पर पौधे लगाने और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लोग अपने आंगन, खेत-खलिहान, मेढ़ अथवा उपलब्ध स्थानों पर पौधारोपण कर प्रकृति संरक्षण के इस अभियान को जनांदोलन का स्वरूप दें। इस अवसर पर श्रम विभाग के सचिव एवं श्रम आयुक्त हिमशिखर गुप्ता, कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह, जनप्रतिनिधिगण, विभागीय अधिकारी, श्रमिक संगठनों के पदाधिकारी, बड़ी … Read more

विदेशी निवेश नियमों में ढील का असर: डॉलर के मुकाबले रुपया उछला, बाजार में बढ़ी हलचल

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी निवेश के नियमों को आसान बनाने के बाद आज भारतीय रुपये में जबरदस्त मजबूती देखने को मिली. शुक्रवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 50 पैसे मजबूत होकर 95.24 के स्तर पर पहुंच गया. इससे पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 95.74 के स्तर पर बंद हुआ था।  निवेश नियमों में ढील से बढ़ा भरोसा रिजर्व बैंक ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए सरकारी बॉन्ड में निवेश करने के नियमों को काफी सरल कर दिया है. इसके साथ ही, अनिवासी भारतीयों (NRIs) और विदेशी भारतीय नागरिकों (OCIs) के लिए भी भारतीय शेयर बाजार (इक्विटी) में निवेश की सीमा को बढ़ा दिया गया है।  बाजार के जानकारों का मानना है कि आरबीआई के इन कदमों से देश में विदेशी डॉलर का प्रवाह बढ़ेगा. 'फुली एक्सेसिबल रूट' (FAR) का दायरा बढ़ने और विदेशी मुद्रा स्वैप जैसी खास सुविधाओं से रुपये को बड़ी ताकत मिली है. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भरोसा जताया कि भारत का 682 अरब डॉलर का विशाल विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी वैश्विक संकट से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम है।  ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी मौद्रिक नीति बैठक में आरबीआई ने ब्याज दरों (रेपो रेट) को 5.25 प्रतिशत पर ही बरकरार रखा है. केंद्रीय बैंक ने बाजार को लेकर अपना रुख 'न्यूट्रल' यानी तटस्थ रखा है, जिससे जरूरत पड़ने पर आगे कदम उठाए जा सकें।  महंगाई और विकास दर के नए अनुमान कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनाव को देखते हुए रिजर्व बैंक ने अपने आर्थिक अनुमानों में कुछ बड़े बदलाव किए हैं:     विकास दर (GDP): चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया गया है।      महंगाई (CPI): खुदरा महंगाई दर का अनुमान 4.6% से बढ़ाकर 5.1% किया गया है।  वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) आज करीब 1 फीसदी की तेजी के साथ 95.37 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है. तेल की यह बढ़ती कीमत भारत के आयात बिल के लिए एक चुनौती बनी हुई है, लेकिन आरबीआई के नए सुधारों ने फिलहाल बाजार के डर को दूर कर रुपये को बूम दे दिया है।