samacharsecretary.com

PM मोदी के कार्यकाल में केंद्रीय कर्मचारियों से जुड़े 5 अहम फैसले, वेतन-पेंशन पर पड़ा असर

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। अपने 12 साल के कार्यकाल में बतौर प्रधानमंत्री उन्होंने कई ऐसे फैसले लिए हैं जिसका फायदा बड़े वर्ग को मिला है। पीएम मोदी ने अपने कार्यकाल के दौरान केंद्रीय कर्मचारियों के हित में भी कई अहम फैसले लिए। इन फैसलों की वजह से ना सिर्फ केंद्रीय कर्मचारियों के सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव आया बल्कि फ्यूचर प्लानिंग को लेकर भी एक नया विकल्प मिला। आइए पीएम मोदी के 5 बड़े फैसले के बारे में जान लेते हैं। वेतन आयोग का गठन पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने 8वें वेतन आयोग का गठन किया। यह वेतन आयोग अपनी सिफारिशें अगले साल की पहली छमाही तक सरकार को सौंप देगा। इसके बाद सरकार सिफारिशों को लागू करेगी। बता दें कि सातवें वेतन आयोग को लागू भी मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में ही किया गया था। हालांकि, इसका गठन यूपीए (UPA) सरकार द्वारा 28 फरवरी 2014 को किया गया था। तब डॉ. मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री थे। UPS यानी यूनिफाइड पेंशन स्कीम सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों को यूनिफाइड पेंशन स्कीम का विकल्प दिया। साल 2024 में मंजूर UPS को 1 अप्रैल 2025 से लागू किया गया। यह नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के अंतर्गत ही एक विकल्प के रूप में लाया गया है। इस स्कीम के तहत 25 साल की न्यूनतम अर्हक सेवा पूरी करने वाले कर्मचारी को रिटायरमेंट से पहले के आखिरी 12 महीनों के औसत मूल वेतन का 50 फीसदी सुनिश्चित पेंशन के रूप में मिलेगा। वहीं, कम से कम 10 साल की सेवा पूरी करने पर न्यूनतम पेंशन ₹10,000 प्रति माह तय की गई है। कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को उसकी पेंशन का 60 फीसदी पारिवारिक पेंशन मिलेगी। इसके अलावा सुनिश्चित पेंशन, पारिवारिक पेंशन और न्यूनतम पेंशन पर महंगाई राहत (DR) भी दी जाएगी। रिटायरमेंट के समय ग्रेच्युटी के अलावा शर्तों के साथ एक एकमुश्त भुगतान भी मिलेगा। HRA में बदलाव मोदी सरकार के कार्यकाल में केंद्रीय कर्मचारियों के हाउस रेंट अलाउंस(HRA) की दरों में भी बदलाव किया गया। 7वें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत शहरों को X, Y और Z कैटेगरी में बांटा गया और HRA की शुरुआती दरें क्रमशः 24%, 16% और 8% तय की गईं। बाद में महंगाई भत्ता (DA) बढ़ने के साथ HRA की दरों में भी बढ़ोतरी का प्रावधान रखा गया। जब DA 25% हुआ, तो HRA की दरें बढ़कर 27%, 18% और 9% हो गईं। इसके बाद DA 50% पहुंचने पर HRA बढ़कर 30%, 20% और 10% हो गया। बता दें कि वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों का डीए 60 पर्सेंट है। NPS कर्मचारियों के लिए बढ़ाया योगदान केंद्र सरकार के NPS कर्मचारियों के लिए सरकार का योगदान 10% से बढ़ाकर 14% किया गया। बता दें कि केंद्रीय कर्मचारियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम को साल 2004 में ही बंद कर दिया गया था। CGHS में बदलाव पिछले 12 वर्षों में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना यानी CGHS में कई अहम बदलाव हुए हैं। 7वें वेतन आयोग के बाद CGHS के मासिक योगदान और अस्पताल में वार्ड की पात्रता को वेतन स्तर से जोड़ा गया। इमरजेंसी की स्थिति में CGHS से जुड़े अस्पतालों में इलाज की सुविधा को भी व्यवस्थित किया गया है।

टाटा संस में बड़ा फैसला, चंद्रशेखरन का कार्यकाल 5 साल बढ़ा; IPO की तैयारी तेज

मुंबई  टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के बोर्ड ने गुरुवार को एन. चंद्रशेखरन को एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर पांच साल का नया कार्यकाल देने को मंजूरी दे दी। मनीकंट्रोल की एक खबर के मुताबिक बोर्ड मीटिंग के दौरान टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा अकेले ऐसे सदस्य थे जिन्होंने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया। बता दें कि बीते अगस्त महीने में टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने फरवरी, 2027 में मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद अगले कार्यकाल की मांग नहीं करने का फैसला लिया था। बहरहाल, चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति की खबरों के बीच टाटा ग्रुप की कंपनियों के शेयर गुलजार हो गए। क्यों लिस्टिंग की संभावना ? टाटा संस बोर्ड ने कंपनी को लिस्ट करने के मुद्दे पर भी विचार किया, लेकिन कोई प्रस्ताव पास नहीं हुआ। दरअसल, बीते सप्ताह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने टाटा संस के प्रमुख निवेश कंपनी के रूप में एनबीएफसी रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने के आवेदन को खारिज कर दिया था। इससे टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के लिए शेयर बाजार में लिस्ट होना जरूरी हो सकता है। अपर-लेयर एनबीएफसी है टाटा संस आरबीआई ने सितंबर 2022 में टाटा संस को 'अपर-लेयर' की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के रूप में वर्गीकृत किया था और ऐसी संस्थाओं के लिए तीन साल के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य किया गया था। टाटा संस के लिए मूल समयसीमा 30 सितंबर, 2025 रखी गई थी। टाटा संस ने इस दायित्व से बचने के लिए 2024 में 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज चुकाया और एनबीएफसी रजिस्ट्रेशन वापस लेने का आवेदन किया था। आरबीआई ने आवेदन पर फैसला लंबित रखा और बाद में भी टाटा संस को अपर-लेयर एनबीएफसी की सूचियों में शामिल करता रहा। जून, 2026 से लागू संशोधित आरबीआई नियमों के तहत एक लाख करोड़ रुपये या उससे अधिक की एसेट वाली कोई भी एनबीएफसी अपने-आप अपर-लेयर श्रेणी में आ जाती है। मार्च, 2026 तक टाटा संस की एसेट दो लाख करोड़ रुपये से अधिक बताई गई हैं। अगस्त में जारी अपर-लेयर सूची में टाटा संस 17 संस्थाओं में एकमात्र नॉन-लिस्टेड कंपनी थी। इस सूची में आरईसी, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन और भारतीय रेलवे वित्त निगम जैसी सरकारी एनबीएफसी भी शामिल हैं, जिन्हें सूचीबद्धता की अनिवार्यता से छूट हासिल है। शेयरधारकों में दो फाड़ टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर शेयरधारकों के बीच भी मतभेद की खबरें आई हैं। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो नोएल टाटा के नेतृत्व वाला टाटा ट्रस्ट्स (गैर-लाभकारी संस्थाओं का समूह जिसके पास टाटा संस की 65 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है) लिस्टिंग के पक्ष में नहीं है जबकि लगभग 18 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला इसका सबसे बड़ा निजी शेयरधारक शापूरजी पालोनजी समूह सार्वजनिक रूप से सूचीबद्धता की मांग कर रहा है। टाटा संस टाटा समूह की शीर्ष होल्डिंग कंपनी है और उसकी आईटी, ऑटो, स्टील, कंज्यूमर, एयरलाइल, हॉस्पिटैलिटी और फाइनेंशियल सर्विसेज समेत अलग-अलग कारोबारों में हिस्सेदारी है। शेयर बाजार में लिस्टिंग से कंपनी के फाइनेंस, पूंजी आवंटन और निवेश संबंधी फैसलों में अधिक सार्वजनिक निगरानी और खुलासे की जरूरत बढ़ सकती है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले- श्रीनिवास तिवारी के विधानसभा संचालन के प्रसंग आज भी प्रेरणादायी

श्रीयुत श्रीनिवास तिवारी के विधानसभा संचालन संबंधी अनेक प्रसंग आज भी प्रेरणादायी है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष की जयंती पर किया नमन विधानसभा के सेन्ट्रल हॉल में की पुष्पांजलि अर्पित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. श्रीनिवास तिवारी की जयंती पर मध्यप्रदेश विधानसभा के सेन्ट्रल हॉल में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रद्धेय श्रीनिवास तिवारी का स्मरण करते हुए कहा कि श्री तिवारी ने विद्यार्थी जीवन में स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया। सन् 1952 में वे समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के रूप में विंध्य प्रदेश विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। मध्यप्रदेश राज्य की राजनीति में उनका लंबा कार्यकाल रहा। श्री तिवारी 1993 से 2003 तक मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष रहे। इससे पहले मुख्यमंत्री श्री अर्जुन सिंह मंत्रिमण्डल में भी उन्होंने मंत्री पद के दायित्व का निर्वाहन किया। श्री तिवारी 'सफेद शेर' के नाम से प्रसिद्ध रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधानसभा परिसर में मीडिया से चर्चा में यह विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सर्वोच्च स्थान विधानसभा का है। श्री तिवारी ने अपनी प्रशासनिक दक्षता, लोकतांत्रिक परम्पराओं और विधायिनी प्रक्रियाओं के ज्ञान के आधार पर विधानसभा के मान-सम्मान का विशेष ध्यान रखा। विधानसभा संचालन से संबंधित उनके अनेक प्रसंग आज भी प्रेरणादायी है। ऐसे नेता का स्मरण कर हम सब गौरवान्वित हैं। इस अवसर पर विधायक श्री भगवानदास सबनानी, पूर्व मंत्री श्री पीसी शर्मा, श्रद्धेय श्री तिवारी के परिजन, जनप्रतिनिधि तथा विधानसभा के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।  

प्रधानमंत्री मोदी के 76वें जन्मदिन पर वाराणसी में सेवा संकल्प अभियान का शुभारंभ, काशी-वडनगर के बीच हो रही यात्रा

वाराणसी  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भविष्य में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विरासत लिखी जाएगी तो उसमें यह भी लिखा जाएगा कि उन्होंने देश को नक्सलवाद से कैसे मुक्ति दिलाई, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 कैसे समाप्त किया, करोड़ों लोगों को गरीबी से कैसे बाहर निकाला, संसद में महिलाओं को बराबर की भागीदारी कैसे दिलाई और नौजवानों के सपनों को कैसे पंख दिए। एक महान नेता लोगों को स्वावलंबी बनाता है और प्रधानमंत्री मोदी ने यही किया है।   प्रधानमंत्री मोदी के 76वें जन्मदिन पर वाराणसी में सेवा संकल्प अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम में राजनाथ सिंह ने कहा कि काशी और वडनगर को जोड़ने वाली यात्रा प्रधानमंत्री की जन्मभूमि को कर्मभूमि से जोड़ने की यात्रा है। एक ओर काशी है, जहां से उनके सार्वजनिक जीवन को नई ऊर्जा मिली और दूसरी ओर वडनगर है, जहां उन्हें मां हीराबेन का आशीर्वाद और संस्कार मिले। उन्होंने इसे सेवा, संस्कार और साधना की संगम यात्रा बताया।   पहले सरकारों को कुर्सी बचाने की रहती थी चिंता राजनाथ सिंह ने पूर्ववर्ती सरकारों पर हमला करते हुए कहा कि 2014 से पहले भारत के हाथ से अवसर निकल जाते थे। पहले की सरकारें सोती रहती थीं या उन्हें अपनी कुर्सी बचाने की चिंता रहती थी। उन्होंने सेमीकंडक्टर उद्योग का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया की बड़ी चिप निर्माता कंपनी भारत में फैक्ट्री लगाना चाहती थी, लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने उसे दो बार अनुमति नहीं दी और देश ने रोजगार का बड़ा अवसर खो दिया।   भारत जो बोलता है उसे पूरी दुनिया कान खोलकर सुनती रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने सेमीकंडक्टर को बढ़ावा देने की पहल की तो सवाल उठाए गए कि भारत में इसकी इंडस्ट्री कैसे लग सकती है। पीएम मोदी को अभी दशकों तक देश की सेवा करनी है। पहले 13 वर्षों तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे और पिछले 12 वर्षों से देश के प्रधानमंत्री के रूप में अपनी योग्यता का निर्वाहन कर रहे हैं। 25 वर्षों तक उन्होंने अनवरत जन सेवा का काम किया है। पीएम ने भारत को ऐसे स्थिति में पहुंचाया है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर आज भारत जो बोलता है उसे पूरी दुनिया कान खोलकर सुनती है कि भारत बोल क्या रहा है। पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जब भारत बोलता था उसे जितना गंभीरता से लिया जाना चाहिए था वो नहीं होता था। दो हजार साल पुराना काशी-वडनगर का रिश्ता रक्षा मंत्री ने कहा कि वडनगर और काशी का रिश्ता बहुत पुराना है। करीब दो हजार साल पहले बौद्ध भिक्षुओं ने सारनाथ से वडनगर की यात्रा की थी। उस समय उद्देश्य ज्ञान और अध्यात्म को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना था। आज उसी प्राचीन परंपरा को नए रूप में सेवा यात्रा के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है। राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री के द्वारा गुजरात में लिए गए कार्यों की चर्चा करते हुए कहा कि क्रिकेट में टेस्ट मैच की गति से चलने वाले विकास कार्य को उन्होंने वन-डे मैच में बदलने का काम किया।   मोबाइल की टॉर्च जलवाकर पीएम मोदी को जन्मदिन की बधाई दिलाई रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी की स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि वह दुनिया के बड़े नेताओं से मिलते समय उन्हें भारत में बनी वस्तुएं उपहार में देते हैं। उन्होंने अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन को वाराणसी की गुलाबी मीनाकारी से बना पिकॉक ब्रोच दिए जाने का भी जिक्र किया। कार्यक्रम में राजनाथ सिंह ने उपस्थित लोगों से मोबाइल की टॉर्च जलवाकर प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन की बधाई दिलाई।   250 बाइक से वडनगर जाएंगे 500 यात्रीः पंकज चौधरी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि काशी से 250 बाइक पर सवार 500 यात्री गंगाजल लेकर वडनगर जा रहे हैं। इसी तरह 250 बाइक पर 500 यात्री गुजरात की पवित्र नदियों का जल लेकर वडनगर से काशी आ रहे हैं। सात अक्तूबर को वडनगर में बाबा हाटकेश्वर को जल अर्पित किया जाएगा और काशी में बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक कर यात्रा पूर्ण होगी।   प्रतिदिन 60 से 80 स्थानों पर कार्यक्रम होंगे पंकज चौधरी ने कहा कि हजारों किलोमीटर की यह यात्रा 10 राज्यों के 193 जिलों और 1,159 गांवों से होकर गुजरेगी। उत्तर प्रदेश के 50 जिले यात्रा के मार्ग में आएंगे। प्रतिदिन 60 से 80 स्थानों पर कार्यक्रम होंगे। यात्रा के दौरान वृक्षारोपण, जल संरक्षण, नशामुक्ति और प्लास्टिक मुक्त भारत का संकल्प दिलाया जाएगा। प्रत्येक पड़ाव पर 15 मिनट की डॉक्यूमेंट्री दिखाई जाएगी, स्थानीय नेताओं से संवाद होगा और स्वच्छता कर्मियों का सम्मान किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी के निरोगी जीवन की कामना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में भारत का मान-सम्मान वैश्विक स्तर पर बढ़ा है। काशी के सांसद के रूप में वह काशी के कोने-कोने को विकसित कर रहे हैं।   नरेंद्र मोदी भारत के सम्मान और गौरव का नामः चिराग पासवान केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि पूर्व में भी सरकारें रही हैं, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को देश और विदेश में नई पहचान दिलाने का काम किया है। पिछले 12 वर्षों में उन्होंने हर दिशा में अपनी सोच को स्थापित किया है और आज पूरी दुनिया की नजर भारत पर है। नरेंद्र मोदी केवल देश के प्रधानमंत्री का नाम नहीं, भारत के सम्मान और गौरव का नाम है। यदि देश का प्रत्येक युवा उनके व्यक्तित्व का अंश भर भी अपने जीवन में उतार ले तो देश का भविष्य और बेहतर होगा।   काशी की धरती पर खड़ा होना गर्व का क्षणः चंद्रबाबू नायडू आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि काशी की धरती पर खड़ा होना उनके लिए गर्व का क्षण है। काशी सबसे प्राचीन नगरी है और नई सोच देती है। वडनगर से काशी तक प्रधानमंत्री मोदी ने सेवा की यात्रा दिखाई है। आज देश बदल रहा है और आगे बढ़ रहा है। अन्नदाता मजबूत होगा तो देश मजबूत होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की तकनीक की समझ का उल्लेख करते हुए कहा कि वह युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहे हैं। यही नया और आत्मनिर्भर भारत है। उन्होंने वाराणसी में बड़ी संख्या में लोगों के आने का जिक्र करते हुए यहां बालाजी … Read more

BCCI को जल्द मिलेगा नया चीफ सेलेक्टर, अगरकर के बाद इन 2 नामों पर नजर

नई दिल्ली  बीसीसीआई ने मेंस की नेशनल सेलेक्शन कमिटी के नए अध्यक्ष की तलाश शुरू कर दी है. मौजूदा मुख्य चयनकर्ता और पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज अजीत आगरकर का अनुबंध 4 अक्टूबर को समाप्त हो रहा है और. उनके कार्यकाल को बढ़ाने की संभावना बेहद कम है. अगरकर को जुलाई 2023 में इस पद पर नियुक्त किया गया था. माना जा रहा था कि उन्हें 2027 के वनडे विश्व कप तक पद पर बनाए रखा जा सकता है, लेकिन हालिया घटनाओं और बोर्ड के साथ मतभेदों के बाद इस निर्णय में बदलाव आया है।  मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस प्रशासनिक उथल-पुथल के बीच नए अध्यक्ष के रूप में दो प्रमुख नाम सामने आ रहे हैं. बीसीसीआई पूर्व भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज पार्थिव पटेल (Parthiv Patel) और पूर्व स्पिनर प्रज्ञान ओझा (Pragyan Ojha) के नाम पर गंभीरता से विचार कर रहा है. प्रज्ञान ओझा फिलहाल मौजूदा चयन पैनल के सदस्य भी हैं।  रोहित शर्मा की कप्तानी और चयनकर्ताओं का फैसला विवाद का मुख्य कारण भारतीय टीम के पूर्व कप्तान और अनुभवी बल्लेबाज रोहित शर्मा (Rohit Sharma) के भविष्य को लेकर बना गतिरोध है. रिपोर्टों के अनुसार, चयन समिति ने रोहित शर्मा से स्पष्ट कह दिया था कि वे भविष्य की योजनाओं में उन्हें शामिल नहीं देख रहे हैं. समिति का मुख्य लक्ष्य आगामी वनडे विश्व कप के लिए युवा खिलाड़ियों को लगातार अवसर देकर एक नई टीम तैयार करना है. हालांकि, चयनकर्ताओं ने टेस्ट और T20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से पहले ही संन्यास ले चुके रोहित शर्मा पर छोड़ दिया था कि वे अपने वनडे करियर का अंतिम फैसला खुद लें।  बीसीसीआई और चयन समिति में तनातनी चयनकर्ताओं के इस रुख से क्रिकेट जगत में हड़कंप मच गया, जिसके बाद बीसीसीआई के सचिव देवाजीत सैकिया (Devajit Saikia) को सार्वजनिक रूप से सफाई देनी पड़ी. सैकिया ने स्पष्ट किया कि बोर्ड की रोहित शर्मा को संन्यास के लिए मजबूर करने की कोई योजना नहीं है और जब तक वे चयन मानदंडों में फिट बैठते हैं, उन्हें टीम में चुना जाएगा. बोर्ड सचिव के इस बयान ने चयनकर्ताओं को असहज स्थिति में डाल दिया. सूत्रों के मुताबिक, चयन समिति ने रोहित शर्मा से बात करने से पहले ही बोर्ड को अपने फैसले से अवगत करा दिया था. इस तरह बोर्ड के रुख में आए अचानक बदलाव और सार्वजनिक बयानबाजी से अजीत आगरकर नाराज बताए जा रहे हैं. इसी खींचतान के बीच, आगरकर की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू वनडे और T20 सीरीज के लिए भारतीय टीम का ऐलान भी किया।  जीत से भरा रहा अजीत अगरकर का कार्यकाल अजीत अगरकर का कार्यकाल परिणाम और सफलताओं के लिहाज से बेहद शानदार माना जाएगा. जुलाई 2023 में पद संभालने के बाद से उनके नेतृत्व में चयन समिति ने कई ऐतिहासिक फैसले लिए, जिसका असर मैदान पर दिखा. अगरकर के दौर में भारतीय टीम ने लंबे समय से चले आ रहे आईसीसी ट्रॉफी के सूखे को समाप्त किया. भारत ने वर्ष 2024 में शानदार प्रदर्शन करते हुए T20 विश्व कप का खिताब अपने नाम किया. इसके बाद 2025 में टीम ने चैंपियंस ट्रॉफी जीतकर अपनी श्रेष्ठता साबित की. भारतीय क्रिकेट टीम का यह विजयी अभियान यहीं नहीं रुका. टीम ने 2026 के T20 विश्व कप में भी अपने खिताब का सफलतापूर्वक बचाव करते हुए एक बार फिर ट्रॉफी पर कब्जा जमाया. लगातार तीन बड़े आईसीसी टूर्नामेंट्स में मिली यह जीत अगरकर के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी। 

स्वरा भास्कर ने बताया पुराना किस्सा, राम जन्मभूमि फैसले के बाद शाहरुख-सलमान से मांगी थी माफी

मुंबई  एक्टर स्वरा भास्कर ने विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जब साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि विवाद पर फैसला सुनाया था तब उन्हें हिंदू होने के नाते बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई थी। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने फैसले के आने के तुरंत बाद आमिर खान, शाहरुख खान और सलमान खान समेत अपने सभी मुस्लिम दोस्तों से माफी मांगी थी। पढ़िए स्वरा भास्कर का पूरा बयान। स्वरा भास्कर का पूरा बयान राम जन्मभूमि विवाद के बारे में बात करते हुए स्वरा ने 'द मिडनाइट आवर' पॉडकास्ट में कहा कि वह इस फैसले से परेशान थीं। उन्हें यह फैसला सही नहीं लगा और उन्हें लगा कि उनके मुस्लिम दोस्तों को पता होना चाहिए कि वह इस फैसले से सहमत नहीं हैं। इसलिए उन्होंने फैसले के तुरंत बाद आमिर खान, शाहरुख खान और सलमान खान समेत अपने सभी मुस्लिम दोस्तों से संपर्क किया और उनसे माफी मांगी। स्वरा ने शाहरुख-सलमान को क्या मैसेज भेजा? स्वरा ने सभी मुस्लिम दोस्तों को मैसेज में लिखा, ‘एक हिंदू होने के नाते, मैं बस इतना कहना चाहती हूं कि मुझे सच में बहुत खेद है, मुझे बहुत शर्मिंदगी महसूस हो रही है और मैं इस फैसले से सहमत नहीं हूं।’ सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस स्वरा भास्कर के बयान ने इंटरनेट पर बहस छेड़ दी है. एक पक्ष का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाना देश की न्याय प्रणाली का अपमान है. उनका कहना है कि राम जन्मभूमि का फैसला सबूतों और कानूनी आधार पर लिया गया था, इसलिए इस पर विवाद खड़ा करना गलत है. वहीं, दूसरी ओर, समर्थकों का तर्क है कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अभिव्यक्ति की आजादी है. उन्हें किसी भी फैसले पर अपनी व्यक्तिगत राय या असहमति जताने का अधिकार है, चाहे वह राय बहुसंख्यक वर्ग से अलग ही क्यों न हो।  2019 में क्या आया था फैसला? आपको बता दें कि अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2019 को फैसला सुनाया था. पांच जजों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से फैसला दिया था. अदालत ने विवादित 2.77 एकड़ जमीन रामलला विराजमान को देने का आदेश दिया था. साथ ही सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में मस्जिद के लिए 5 एकड़ वैकल्पिक जमीन देने का निर्देश दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में 1949 में मूर्तियां रखे जाने और 1992 में बाबरी मस्जिद गिराए जाने को कानून का उल्लंघन बताया था. वहीं, विवादित जमीन पर रामलला के अधिकार को स्वीकार किया था।  क्विक आंसर्स सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में स्वरा भास्कर ने बताया कि वह 2019 के राम जन्मभूमि फैसले से बहुत परेशान और निराश थीं। उन्होंने कहा कि एक हिंदू होने के नाते, उन्होंने अपने फोनबुक के सभी मुस्लिम लोगों को मैसेज भेजकर माफी मांगी थी और कहा था कि वह इस फैसले से असहमत और शर्मिंदा हैं। स्वरा भास्कर ने अपने फोनबुक में मौजूद सभी मुस्लिम संपर्कों को मैसेज भेजे थे, जिनमें आमिर खान, शाहरुख खान, सलमान खान और फहाद अहमद जैसे बड़े नाम शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने 9 नवंबर 2019 को सर्वसम्मति से फैसला सुनाया था। कोर्ट ने विवादित 2.77 एकड़ जमीन रामलला विराजमान को सौंपने और सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद निर्माण के लिए अयोध्या में ही 5 एकड़ वैकल्पिक जमीन देने का आदेश दिया था। सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रही हैं स्वरा स्वरा के इस बयान के सामने आने के बाद लोग उन्हें ट्रोल कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, ‘स्वरा भास्कर राम मंदिर के फैसले से परेशान थीं। कभी-कभी मुझे सच में उनके लिए बुरा लगता है। वह काम पाने की उम्मीद में दिन-रात बॉलीवुड की तारीफ करती रहती हैं, लेकिन किसी तरह उन्हें कभी काम नहीं मिलता।’ दूसरे ने लिखा, ‘सुर्खियों में रहने के लिए कुछ भी कहती हैं।’ तीसरे ने लिखा, ‘हमें भी शर्म आती है आपको हिंदू कहते हुए।’ क्या था सुप्रीम कोर्ट का फैसला? अयोध्या भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2019 को अपना फैसला सुनाया था। पांच जजों की संविधान पीठ ने विवादित भूमि पर राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट को जमीन सौंपने का आदेश दिया था। साथ ही सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को मस्जिद के निर्माण के लिए अयोध्या में पांच एकड़ वैकल्पिक जमीन देने का निर्देश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक फैसले में शीर्ष अदालत ने विवादित जमीन से जुड़े अलग-अलग दावों और मुकदमों की विस्तृत कानूनी समीक्षा की थी। पहले भी विवादों में रहा है बयान स्वरा भास्कर पहले भी अयोध्या मामले पर अपनी टिप्पणियों के कारण विवादों में रह चुकी हैं। 2020 में उनके पुराने बयान को लेकर उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की अनुमति मांगी गई थी। तत्कालीन अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने अनुमति देने से इनकार करते हुए कहा था कि बयान वक्ता की धारणा को दर्शाता है और इसे सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के रूप में नहीं माना जा सकता। अब पुराने वीडियो के दोबारा सामने आने के बाद अयोध्या फैसले को लेकर स्वरा भास्कर की राय फिर चर्चा में है। हालांकि वायरल वीडियो में कही गई बातें स्वरा का व्यक्तिगत नजरिया हैं और सोशल मीडिया पर उनके बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। 9 नवंबर 2019 को, सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से विवादित जमीन को राम मंदिर बनाने के लिए सौंप दिया था। कोर्ट ने सरकार को यह भी निर्देश दिया था कि वह सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को मस्जिद के लिए पांच एकड़ वैकल्पिक जमीन दें।

शहरों में बनेंगे सर्वसुविधायुक्त आधुनिक श्रमिक सुविधा केंद्र, पंजीकृत श्रमिकों के लिए शुरू होगी ई-बाइक सहायता योजना-मुख्यमंत्री

विश्वकर्मा जयंती पर राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन में मुख्यमंत्री ने श्रमिक हित में की तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं शहरों में बनेंगे सर्वसुविधायुक्त आधुनिक श्रमिक सुविधा केंद्र, पंजीकृत श्रमिकों के लिए शुरू होगी ई-बाइक सहायता योजना-मुख्यमंत्री असंगठित क्षेत्र के रिक्शा चालकों को ई-रिक्शा खरीदी के लिए अब 50 हजार के स्थान पर एक लाख रुपए की मिलेगी सहायतामुख्यमंत्री 1.43 लाख से अधिक श्रमिकों के खातों में 51.32 करोड़ रुपए से अधिक की सहायता राशि अंतरित 100 श्रमिक दीदियों को मिली ई-रिक्शा की चाबी, मुख्यमंत्री ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना श्रमिक परिवार की प्रतिभावान बेटी मनिंदर कौर की इंजीनियरिंग की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाएगी सरकार श्रमिक बहनों के साथ मुख्यमंत्री ने किया दोपहर का भोजन, आत्मीय संवाद कर जाना परिवार का हाल-चाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर हजारों श्रमिकों के साथ मुख्यमंत्री ने प्रज्ज्वलित किया ‘आशीर्वाद का दीया’ रायपुर,   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के श्रमवीर अपने परिश्रम, पुरुषार्थ और पसीने से समृद्ध एवं विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की नई इबारत लिख रहे हैं। गांवों के खेत-खलिहानों से लेकर शहरों की ऊंची इमारतों तक, सड़कों और पुलों से लेकर सिंचाई परियोजनाओं, उद्योगों और अधोसंरचना के निर्माण तक प्रदेश की प्रगति की हर तस्वीर में हमारे श्रमिक भाई-बहनों की मेहनत समाहित है। छत्तीसगढ़ ने अपने गठन के 25 वर्षों में विकास के जो नए प्रतिमान स्थापित किए हैं, उनके पीछे हमारे मेहनतकश हाथों का बड़ा योगदान है। यही हाथ आने वाले वर्षों में विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को भी साकार करेंगे। मुख्यमंत्री साय आज राजधानी रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रदेशभर से आए हजारों श्रमिक भाई-बहनों को विश्वकर्मा जयंती की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं और भगवान विश्वकर्मा से छत्तीसगढ़ की सुख, शांति, समृद्धि और निरंतर प्रगति की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा निर्माण और सृजन के आराध्य हैं। वे हमें श्रम के सम्मान और अपने हुनर पर गर्व करने की प्रेरणा देते हैं। सही मायनों में हमारे श्रमिक भाई-बहन ही विकसित छत्तीसगढ़ के विश्वकर्मा हैं। राज्य सरकार श्रमिकों के परिश्रम का सम्मान करने के साथ उनके जीवन में सुरक्षा, सुविधा और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की सोच स्पष्ट है कि विकास का लाभ उस श्रमिक तक भी पहुंचे, जिसके श्रम से विकास की नींव तैयार होती है। श्रमिक को उसके परिश्रम का पूरा सम्मान मिले, उसे सामाजिक सुरक्षा का भरोसा मिले, परिवार आर्थिक रूप से सशक्त बने और उसके बच्चों को आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें – इसी उद्देश्य के साथ सरकार श्रमिक कल्याण की योजनाओं को लगातार विस्तार दे रही है। श्रमिक हित में मुख्यमंत्री की तीन बड़ी घोषणाएं मुख्यमंत्री साय ने राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन में श्रमिक भाई-बहनों की सुविधा, आवागमन और स्वरोजगार को ध्यान में रखते हुए तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने शहरों में रोजगार की तलाश में विभिन्न स्थानों पर एकत्र होने वाले श्रमिकों के लिए सर्वसुविधायुक्त आधुनिक श्रमिक सुविधा केंद्र स्थापित करने की घोषणा की। इन केंद्रों में श्रमिकों के बैठने की समुचित व्यवस्था के साथ स्वच्छ पेयजल, मोबाइल चार्जिंग और अन्य आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे काम की तलाश में शहर आने वाले श्रमिकों को सम्मानजनक और सुविधाजनक स्थान उपलब्ध होगा। मुख्यमंत्री ने पंजीकृत श्रमिकों के आवागमन को सुगम बनाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त करने के उद्देश्य से ई-बाइक सहायता योजना प्रारंभ करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि काम के लिए प्रतिदिन लंबी दूरी तय करने वाले श्रमिकों के लिए आवागमन की सुविधा सीधे तौर पर उनकी आजीविका और जीवन की सहजता से जुड़ी है। मुख्यमंत्री साय ने असंगठित क्षेत्र के रिक्शा चालकों को ई-रिक्शा खरीदने के लिए दी जाने वाली सहायता राशि को 50 हजार रुपए से बढ़ाकर एक लाख रुपए करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि इससे परंपरागत रिक्शा चालकों को आधुनिक साधन अपनाने, अपनी आय बढ़ाने और स्वरोजगार को अधिक मजबूत बनाने में सहायता मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि श्रमिकों और उनके परिवारों के जीवन में स्थायी सकारात्मक बदलाव लाना है। श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा, उनके बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, महिलाओं को आत्मनिर्भरता और युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराकर एक सशक्त श्रमिक परिवार का निर्माण करना सरकार की प्राथमिकता है। 1.43 लाख से अधिक श्रमिकों को 51.32 करोड़ रुपए से अधिक की सौगात महासम्मेलन में मुख्यमंत्री साय ने श्रम विभाग के विभिन्न मंडलों द्वारा संचालित 26 योजनाओं के अंतर्गत डीबीटी के माध्यम से 1 लाख 43 हजार से अधिक श्रमिकों के बैंक खातों में 51 करोड़ 32 लाख रुपए से अधिक की सहायता राशि अंतरित की। उन्होंने विभिन्न श्रमिक कल्याण योजनाओं के हितग्राहियों को सहायता राशि एवं सामग्री का वितरण भी किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में श्रम विभाग के तीन मंडलों के माध्यम से पंजीकृत श्रमिकों के लिए 67 प्रकार की कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा से लेकर उनके बच्चों की शिक्षा, विवाह सहायता और आर्थिक सशक्तीकरण तक जीवन के विभिन्न चरणों में ये योजनाएं श्रमिक परिवारों का संबल बन रही हैं। उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में राज्य सरकार द्वारा विभिन्न श्रमिक कल्याण योजनाओं के माध्यम से एक हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि श्रमिकों तक पहुंचाई गई है। उन्होंने प्रदेश के सभी पात्र श्रमिकों से श्रम विभाग में अपना पंजीयन कराने और योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की। ‘श्रमेव जयते’ के मूलमंत्र के साथ श्रमिक परिवारों के बच्चों के सपनों को नई उड़ान मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘श्रमेव जयते’ के मूलमंत्र को साकार करते हुए राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि संसाधनों की कमी किसी श्रमिक परिवार के प्रतिभावान बच्चे के सपनों की राह में बाधा न बने। श्रमिक का बच्चा भी देश के श्रेष्ठ विद्यालय में पढ़े, उच्च शिक्षा प्राप्त करे और अपनी प्रतिभा के बल पर जीवन में ऊंची उड़ान भरे – सरकार इसी संकल्प के साथ काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के अंतर्गत श्रमिक परिवारों के प्रतिभावान बच्चों को प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में … Read more

रक्तदान को लेकर CM डॉ. यादव की अपील, बोले- इससे बच सकती है किसी की जिंदगी

रक्तदान है जीवन का सबसे बड़ा दान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिवस पर सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत प्रदेश में 290 स्थानों पर रक्तदान शिविर आयोजित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सेवा मेरा योगदान कार्यक्रम के तहत रक्तदान शिविर का किया शुभारंभ भोपाल के शासकीय जयप्रकाश चिकित्सालय में हुआ आयोजन भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत शासकीय जयप्रकाश चिकित्सालय, भोपाल में आयोजित 'सेवा मेरा योगदान कार्यक्रम' के तहत रक्तदान शिविर का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रक्तदान करने वाले प्रतिभागियों की कुशलक्षेम पूछी तथा प्रमाण-पत्र भी प्रदान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रक्तदाताओं से भेंट कर उन्हें प्रोत्साहित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रसन्नता का विषय है कि प्रधानमंत्री मोदी की 25 वर्षों की सेवा यात्रा के सम्मान में मध्यप्रदेश में ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत 290 से अधिक स्थानों पर रक्तदान शिविर आयोजित किए गए हैं। शिविरों में अब तक 6 हजार 744 यूनिट रक्तदान किया जा चुका है। इस संख्या में शाम तक लगातार बढ़ोत्तरी होगी। रक्तदान जीवन का सबसे बड़ा दान है, जिससे जरूरतमंदों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध होती है और अनेक जीवन बचाए जा सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिवस पर उनके स्वस्थ और शतायु जीवन की बाबा महाकाल से कामना करते हुए कहा कि मोदी के नेतृत्व में देश के हर क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव आया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शासकीय शासकीय जयप्रकाश चिकित्सालय में मीडिया से चर्चा में यह जानकारी दी। इस अवसर पर भोपाल महापौर श्रीमती मालती राय, विधायक भगवानदास सबनानी, प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी, जनप्रतिनिधि, चिकित्सक, मेडिकल विद्यार्थी उपस्थित थे। 

ऋषभ पंत को बड़ा झटका, ODI टीम से बाहर; अब टेस्ट क्रिकेट पर टिकी उम्मीदें

 नई दिल्ली स्टार विकेटकीपर ऋषभ पंत सिर्फ टेस्ट क्रिकेटर बनकर रह गए हैं? टीम इंडिया के इस स्टार विकेटकीपर-बैटर को वेस्टइंडीज के खिलाफ 3 मैचों की ODI सीरीज के लिए नहीं चुना गया है. खास बात ये है कि पंत को इस सीरीज में मौका उस वक्त भी नहीं मिला, जब टीम के कुछ बड़े नाम एशियन गेम्स की वजह से उपलब्ध नहीं हैं।  पंत को अब ईरानी कप के लिए रेस्ट ऑफ इंडिया की कप्तानी सौंपी गई है. इस मुकाबले में रेस्ट ऑफ इंडिया का सामना रणजी ट्रॉफी चैंपियन जम्मू-कश्मीर से होगा. लेकिन टीम इंडिया की ODI टीम से बाहर रहने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि पंत के लिमिटेड ओवर्स करियर की दिशा आखिर क्या है? T20I के बाद ODI में भी नहीं मिली जगह पिछले करीब दो साल से पंत टीम इंडिया की T20I टीम का हिस्सा नहीं हैं. वहीं ODI क्रिकेट में भी उनकी स्थिति लगातार बदलती रही है. नवंबर 2025 तक वह साउथ अफ्रीका के खिलाफ ODI स्क्वॉड में शामिल थे, लेकिन प्लेइंग XI में मौका नहीं मिला।  2024 के श्रीलंका दौरे के बाद से पंत को T20I में भी जगह नहीं मिली. ODI में भी उनका आखिरी मैच अगस्त 2024 में श्रीलंका के खिलाफ आया था. इसके बाद से वह इस फॉर्मेट में टीम इंडिया की योजनाओं से बाहर ही दिखे हैं।  अब 16 सितंबर को वेस्टइंडीज के खिलाफ ODI सीरीज के लिए टीम का ऐलान हुआ तो पंत का नाम एक बार फिर गायब था. यहां एक और बात गौर करने वाली है. उसी समय भारतीय टीम को एशियन गेम्स में भी हिस्सा लेना है. ऐसे कई खिलाड़ी हैं, जो T20I और ODI दोनों टीमों का हिस्सा होते हैं और इस वजह से चयन के लिए उपलब्ध नहीं थे।  इसके बावजूद पंत बतौर बैकअप विकेटकीपर भी टीम में जगह नहीं बना सके. यानी टेस्ट क्रिकेट में भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल विकेटकीपर-बैटर में शामिल पंत फिलहाल सिर्फ एक फॉर्मेट के खिलाड़ी बनते नजर आ रहे हैं. ये सीरीज पंत के लिए क्यों थी बड़ा मौका? वेस्टइंडीज के खिलाफ ये सीरीज पंत के कमबैक के लिए एक अच्छा मौका मानी जा रही थी. लेकिन सेलेक्शन में ध्रुव जुरेल को बतौर बैकअप विकेटकीपर चुना गया. ईशान किशन इस सीरीज के लिए उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में विकेटकीपर-बैटर के तौर पर पंत के लिए जगह बन सकती थी. इतना ही नहीं, श्रेयस अय्यर भी टीम में नहीं हैं. यानी मिडिल ऑर्डर में भी एक जगह खाली थी.अक्षर पटेल भी इस सीरीज का हिस्सा नहीं हैं. इसका मतलब टीम के टॉप ऑर्डर और मिडिल ऑर्डर में एक लेफ्ट हैंडर की कमी भी नजर आती है.इसके बावजूद पंत को मौका नहीं मिला।  रोहित शर्मा इस सीरीज में टीम इंडिया के लिए ओपन करते दिखेंगे. वहीं रवींद्र जडेजा की वापसी का मतलब है कि वह नंबर-7 पर बल्लेबाजी कर सकते हैं. ऐसे में टॉप-6 में पंत के लिए जगह बनाई जा सकती थी।  पंत की अटैकिंग बैटिंग भी इस भूमिका में टीम के काम आ सकती थी. मिडिल ओवर्स में वह स्पिनर्स पर हमला करने, तेजी से बाउंड्री निकालने और अपनी अलग तरह की बल्लेबाजी से विपक्षी टीम की प्लानिंग बिगाड़ने की क्षमता रखते हैं। ODI क्रिकेट में उनके पास पारी को समय देने का भी विकल्प होता है. उन्हें पहली गेंद से ही हमला करने की जरूरत नहीं होती. वह पारी को आगे बढ़ाते हुए बाद के ओवर्स में गेंदबाजों पर दबाव बना सकते हैं. ODI में पंत का रिकॉर्ड कैसा है? ODI में पंत का करियर अभी बहुत लंबा नहीं रहा है. उन्होंने कुल 31 मुकाबले खेले हैं और 33.50 के औसत से 871 रन बनाए हैं. उनके ODI करियर की सबसे बड़ी पारी 2022 में मैनचेस्टर में इंग्लैंड के खिलाफ आई थी. नंबर-4 पर बल्लेबाजी करते हुए पंत ने 113 गेंदों पर 125 रन बनाए थे. इस पारी में उन्होंने 16 चौके और 2 छक्के लगाए. पंत की इसी पारी के दम पर भारत ने मुकाबला जीता था और ODI सीरीज भी अपने नाम की थी. यह इस फॉर्मेट में पंत का इकलौता शतक भी है. हालांकि दिसंबर 2022 के बाद से पंत ने सिर्फ एक ODI खेला है।  दिसंबर 2022 में हुए कार एक्सीडेंट के बाद वह करीब एक साल तक क्रिकेट से दूर रहे. 2024 IPL में उन्होंने वापसी की और इसके बाद पूरी तरह फिट होने के बावजूद ODI में उन्हें ज्यादा मौके नहीं मिले।  अब वापसी कितनी मुश्किल? पंत ने आखिरी ODI अगस्त 2024 में श्रीलंका के खिलाफ खेला था. इसके बाद से वह टीम से बाहर हैं. ऐसे में वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज को उनके लिए खुद को साबित करने का एक मौका माना जा रहा था. पर ध्रुव जुरेल को बैकअप विकेटकीपर की जिम्मेदारी दी गई. यही बात पंत के लिए टेंशन बढ़ाने वाली है. क्योंकि जब टीम के कुछ नियमित खिलाड़ी वापस आएंगे, तब कंपटीशन और बढ़ सकता. ऐसे में पंत के लिए टीम में वापसी की जगह निकालना आसान नहीं होगा।  हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि पंत का ODI करियर खत्म हो चुका है।  वह अभी सिर्फ 28 साल के हैं. उनके सामने वापसी का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं है. इंजरी से जुड़ी दिक्कतें, फॉर्म और वर्कलोड मैनेजमेंट जैसे फैक्टर आगे उनकी स्थिति बदल सकते हैं.सबसे अहम बात उनकी क्षमता है, जिस पर सवाल नहीं है. लेकिन इंटरनेशनल क्रिकेट में सिर्फ क्षमता काफी नहीं होती, मौके भी चाहिए होते हैं।  पंत के लिए मौका आएगा कहां से? वेस्टइंडीज के खिलाफ ODI सीरीज में टीम में जगह न मिलना निश्चित तौर पर उनके लिमिटेड ओवर्स फ्यूचर के लिए एक अहम संकेत है. अब पंत की नजर ईरानी कप पर होगी, जहां वह रेस्ट ऑफ इंडिया की कप्तानी करते नजर आएंगे।  वेस्टइंडीज सीरीज के लिए भारत की ODI टीम: शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, विराट कोहली, ऋतुराज गायकवाड़, केएल राहुल (उपकप्तान), ध्रुव जुरेल, नीतीश कुमार रेड्डी, रवींद्र जडेजा, कुलदीप यादव, प्रसिद्ध कृष्णा, गुरनूर बरार , मोहम्मद सिराज, आकिब नबी, यशस्वी जायसवाल, नमन धीर.  वेस्टइंडीज सीरीज के लिए भारत की T20I टीम: श्रेयस अय्यर (कप्तान), अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन (व‍िकेटकीपर), संजू सैमसन (विकेटकीपर), तिलक वर्मा (उपकप्तान), शिवम दुबे, कुलदीप यादव, अक्षर … Read more

लोकभवन में लगा रक्तदान एवं स्वास्थ्य शिविर, राज्यपाल पटेल ने किया उद्घाटन

राज्यपाल पटेल ने रक्तदान स्वास्थ्य शिविर का लोकभवन में किया शुभारंभ लोक भवन में आयोजित शिविर में 370 लोगों ने लिया भाग भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस पर सेवा संकल्प अभियान के तहत लोकभवन में आयोजित स्वास्थ्य एवं रक्तदान शिविर का शुभारंभ किया। शिविर के विभिन्न काउन्टरों पर जाकर परामर्श जाँच एवं परीक्षण व्यवस्थाओं की समीक्षा की। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने अपनी बोन मिनरल डेनसिटी (बी.एम.डी.) जांच कराकर शिविर की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। दंत परीक्षण, फिजियोथेरेपी जाँच, बोन मिनरल डेनसिटी (बी.एम.डी.) जांच एवं नि:शुल्क स्वास्थ्य परामर्श एवं औषधि वितरण व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। उन्होंने रक्तदाताओं को फलो की टोकरी भेंट कर, उनके सेवा संकल्प की सराहना की। रक्तदान करने आए छात्र-छात्राओं से चर्चा की। उनका उत्साहवर्धन किया। राज्यपाल ने प्रारंभ में लोक भवन में आयोजित नि:शुल्क परामर्श, जाँच और रक्तदान शिविर का दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया। रक्तदान एवं स्वास्थ्य शिविर का आयोजन गुरुवार को सुबह 10 बजे से एक बजे तक लोक भवन के सांदीपनि सभागार में किया गया था। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी उपस्थित थे। शिविर में रेडक्रॉस सोसाइटी के चेयरमैन श्याम सिंह कुमरे एवं जनरल सेक्रेटरी रामेंद्र सिंह सहित चिकित्सक, विशेषज्ञ एवं अन्य संबंधित जन उपस्थित रहे। लोक भवन में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में 370 आमजन शामिल हुए। रक्तदान के लिए 109 रक्तदाताओं ने पंजीयन कराया, जिनमें चिकित्सकीय परामर्श के बाद 77 रक्तदाताओं ने रक्तदान किया। दंत परीक्षण शिविर में 74 व्यक्तियों ने जांच कराई। उन्हें उपचार संबंधी परामर्श और आवश्यक औषधियां प्रदान की गई। बी.एम.डी. जाँच शिविर 125 आमजन ने जांच कराई। जांच में 77 आमजन की हड्डियों की स्थिति सामान्य पाई गई, जबकि 45 व्यक्तियों में हड्डियों की मामूली कमजोरी ऑस्टियोपेनिया तथा 3 व्यक्तियों में ऑस्टियोपोरोसिस पाया गया। सभी को चिकित्सकीय परामर्श एवं आवश्यक औषधियां प्रदान की गईं। फिजियोथेरेपी जाँच शिविर में 62 व्यक्तियों ने भाग लिया। उनकी फिजियोथेरेपी से संबंधित समस्याओं के संबंध में चिकित्सकों द्वारा आवश्यक परामर्श एवं व्यायाम बताए गए।