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अटल पेंशन योजना को बड़ा झटका? RTI रिपोर्ट में सामने आया 1.49 करोड़ एग्जिट का आंकड़ा

नई दिल्ली सरकारी पेंशन स्कीम 'अटल पेंशन योजना' की खूब चर्चा होती है. अटल पेंशन योजना (APY) की शुरुआत साल 2015 में हुई थी. दरअसल, देश के असंगठित क्षेत्र के कामगारों को बुढ़ापे में वित्तीय सुरक्षा देने के उद्देश्य से इस स्कीम की शुरुआत की गई है. RTI के जरिये APY को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है।   सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में पता चला है कि साल 2015 में योजना की शुरुआत से लेकर अब तक लगभग 1.49 करोड़ लोग इस स्कीम से बाहर हो चुके हैं. पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) के आंकड़ों के मुताबिक योजना में हर साल रिकॉर्ड रजिस्ट्रेशन हो रहे हैं. लेकिन साथ ही समय से पहले खाता बंद करने या मृत्यु के कारण स्कीम से बाहर होने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।  RTI से मिले आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च 2026 तक अटल पेंशन योजना के तहत कुल रजिस्ट्रेशन 8.96 करोड़ तक पहुंच चुका था. लेकिन इनमें से केवल 7.45 करोड़ सब्सक्राइबर ही फिलहाल एक्टिव हैं. इसका सीधा मतलब यह है कि एक बहुत बड़ा हिस्सा अब इस योजना का सक्रिय रूप से लाभ नहीं उठा रहा है।  साल-दर-साल बढ़ता एग्जिट का ग्राफ योजना के शुरुआती साल 2015-16 के दौरान केवल 2 लोगों ने स्कीम छोड़ी थी. लेकिन हालिया वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा सालाना 30.24 लाख से अधिक को पार कर गया. एक तरफ जहां एग्जिट करने वालों की संख्या बढ़ी है, वहीं दूसरी तरफ नए रजिस्ट्रेशन के मामले में योजना ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. अकेले वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1.35 करोड़ से अधिक नए सब्सक्राइबर्स इस योजना से जुड़े, जो इसके लॉन्च के बाद से किसी भी एक साल में सबसे बड़ी संख्या है।  जब RTI के जरिए यह पूछा गया कि कितने सब्सक्राइबर्स ने रजिस्ट्रेशन के 1 साल, 3 साल या 5 साल के भीतर योगदान देना बंद कर दिया, तो PFRDA ने साफ कर दिया कि अटल पेंशन योजना के तहत 'डिसकंटिन्यूएशन' जैसी कोई अवधारणा नहीं है. इसलिए अगर किसी कारणवश कोई सब्सक्राइबर योगदान देना बंद कर देता है, तो वह बाद में बकाया ब्याज और देरी से किए गए योगदान का भुगतान करके अपने खाते को फिर से चालू कर सकता है।  क्या है अटल पेंशन योजना? अटल पेंशन योजना (APY) की शुरुआत साल 2015 में विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों जैसे रेहड़ी-पटरी वाले, मजदूर, कारपेंटर, घरेलू सहायक   के लिए की गई थी. इसके तहत 18 से 40 वर्ष की आयु के भारतीय नागरिक निवेश कर सकते हैं. 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद सब्सक्राइबर्स को उनके योगदान के आधार पर 1,000 रुपये से लेकर 5,000 रुपये प्रति माह तक पेंशन मिलती है। 

रक्षा सौदे में नया मोड़: भारत के रुख से फ्रांस को लग सकता है झटका, मित्र देश ने दिया नया ऑफर

नई दिल्ली भारत फाइटर जेट स्क्वाड्रन की घटती संख्या को मेंटेन करने के लिए फ्रांस के साथ 114 राफेल जेट की डील पर बातचीत कर रहा है. यह करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की डील है. इसको लेकर इंडियन एयर फोर्स चीफ एपी सिंह एक दिन पहले तक फ्रांस में थे. लेकिन, अभी तक इस डील का सबसे बड़ा पेच नहीं सुलझा है. भारत चाहता है कि फ्रांस इस जेट का सोर्स कोड नहीं तो कम से कम इंटरफेस डॉक्यूमेंट साझा करे जिससे कि भारत इस जेट में देसी ब्रह्मोस जैसी घातक मिसाइलें लगा सके. लेकिन, फ्रांस इंटरफेस डॉक्यूमेंट भी नहीं देना चाहता है. उसकी चिंता है कि अगर वह भारत के साथ यह डॉक्यूमेंट साझा करेगा तो उसकी पूरी गोपनीयता भारत के हाथ लग जाएगी. फिर ये गोपनीय जानकारी भारत के जरिए उसके दुश्मन देश यानी रूस तक पहुंच जाएगी. इसी कारण वह फिलहाल राफेल का इंटरफेस डॉक्यूमेंट नहीं देना चाहता है।  भारत के लिए सुखद ऑफर इस बीच भारत के लिए एक सुखद खबर आई है. राफेल को लेकर बनी भ्रम की स्थिति के बीच पुराने दोस्त रूस ने बड़ा ऑफर दिया है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने खुद एक बड़ी पेशकश कर दी है. उन्होंने इंटरनेशनल प्रेस मीट में कहा कि रूस पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट Su-57 से लेकर एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम तक हर स्तर पर भारत का सहयोग करने के लिए तैयार है. पुतिन का स्पष्ट रूप से यह कहना दुनिया खासकर फ्रांस के लिए एक बड़ा संदेश है. भारत रूस से एसयू-57 खरीदने की भी योजना पर काम कर रहा है. ऐसे में भारत कितनी संख्या में यह जेट खरीदेगा यह काफी हद तक राफेल डील पर निर्भर करेगा।  दरअसल, एसयू-57 पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट है. अभी तक दुनिया में केवल तीन देश ही पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स इस्तेमाल कर रहे हैं. इसमें एक अमेरिका, दूसरा चीन और तीसरा देश रूस है. हालांकि रूसी पांचवीं पीढ़ी के जेट एसयू-57 को लेकर एक्सपर्ट कई सवाल भी उठाते रहे हैं लेकिन, रूस की ओर से पूरा सोर्स कोड़ साझा करने, भारत में इस जेट को बनाने और भारत की जरूरत के हिसाब से इस जेट में बदलाव करने जैसे ऑफर को आसानी से खारिज नहीं किया जा सकता है. सामरिक मामलों के एक्सपर्ट यहां तक कह रहे हैं कि भारत की योजना राफेल के साथ-साथ सुखोई-57 के कम से कम तीन स्क्वाड्रन लेने की है. इससे भारत पांचवीं पीढ़ी की अपनी तात्कालिक जरूरत को पूरा कर लेगा. इसके बाद 2035 तक भारत का अपना 5+ पीढ़ी का जेट एम्का तैयार हो जाएगा. भारत एम्का प्रोजेक्ट पर तेजी से काम कर रहा है।  फ्रांस को संदेश रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का ऑफर भारत के नजरिए से काफी अहम है. पुतिन इंटरनेशनल प्रेस के सामने यह बात कही है. ऐसे में पुतिन का यह बयान काफी कुछ कहता है. इसमें यह संदेश छिपा है कि अगर फ्रांस भारत के साथ इंटरफेर डॉक्यूमेंट नहीं साझा करता है तो भारत के विकल्प खुले हैं. भारत पहले ही से रूस का एक बड़ा सैन्य पार्टनर रहा है. इस वक्त भी भारतीय एयरफोर्स की रीढ़ सुखोई-30 एमके जेट हैं. ये चौथी पीढ़ी के जेट हैं और भारत के पास इसके 250 से अधिक यूनिट हैं. इनको भारत में ही असेंबल किया गया है. रूस ने सुखोई-30एमकेई के प्लांट में ही सुखोई-57 को असेंबल करने का ऑफर दिया है. इससे भारत के लिए खर्च में काफी कमी आ जाएगी. इसके साथ ही रूसी विमानों में किसी भी भारतीय मिसाइल को जोड़ना आसान रहेगा. ऐसे में पुतिन का संदेश केवल भारत के लिए नहीं है बल्कि फ्रांस के लिए भी है। 

सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी या इंतजार? 8वें वेतन आयोग को लेकर नई चर्चा

नई दिल्ली केंद्रीय कर्मचारियों के लिए गठित आठवां वेतन आयोग एक्शन मोड में आ चुका है। वेतन आयोग अलग-अलग कर्मचारी संगठनों के साथ बैठक भी कर रहा है। इस दौरान वेतन आयोग कर्मचारी संगठनों की सुझाव और सिफारिशों पर मंथन भी कर रहा है। वेतन आयोग ने केंद्रीय कर्मचारियों और कर्मचारी संगठनों को राहत देते हुए सुझाव और मेमोरेंडम जमा करने की अंतिम तिथि को भी बढ़ा दिया है। आयोग ने अब यह समयसीमा 15 जून 2026 तक कर दी है। यह तीसरी बार है जब मेमोरेंडम जमा करने की तारीख बढ़ाई गई है। इस फैसले के बाद एक बार फिर से ये सवाल उठने लगे हैं कि क्या वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने में देरी होगी। बता दें कि वेतन आयोग को उसके गठन के बाद सिफारिशों को सौंपने के लिए 18 महीने का समय मिला है। बैकडेट से लागू होने की उम्मीद वेतन आयोग की सिफारिशों में देरी का असर कर्मचारियों और सरकार दोनों पर पड़ सकता है। दरअसल, वेतन आयोग की सिफारिशें बैकडेट यानी 1 जनवरी 2026 से लागू होने की उम्मीद है। अगर सिफारिशों के लागू होने में देरी होती है तो कर्मचारियों का एरियर बढ़ जाएगा। वहीं, नई वेतन संरचना लागू होने पर सरकार को एकमुश्त भुगतान करना होगा। इससे सरकारी खजाने का बोझ बढ़ जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार केंद्रीय कर्मचारियों का बेसिक सैलरी का एरियर मिल सकता है लेकिन हाउस रेंट अलाउंस (HRA) जैसे कुछ भत्तों का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा। बता दें कि HRA का भुगतान आमतौर पर पूर्व प्रभाव से नहीं किया जाता। ऐसे में वेतन आयोग की रिपोर्ट जितनी देर से आएगी, कर्मचारियों की कुछ संभावित वित्तीय लाभों पर उतना ही असर पड़ सकता है। वेतन आयोग ने मेमोरेंडम जमा करने की प्रक्रिया 5 मार्च 2026 को शुरू हुई थी। शुरुआत में इसकी अंतिम तिथि 30 अप्रैल तय की गई थी, जिसे बाद में 31 मई तक बढ़ाया गया। अब इसे 15 जून तक बढ़ा दिया गया है। मेमोरेंडम केवल वेतन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट 8cpc.gov.in के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। ईमेल, पीडीएफ या हार्ड कॉपी के रूप में भेजे गए सुझावों पर विचार नहीं किया जाएगा। बता दें कि पिछले साल जनवरी महीने में सरकार ने पहली बार आठवें वेतन आयोग के गठन का ऐलान किया था। हालांकि, इसकी घोषणा नवंबर महीने में की गई। वेतन आयोग के गठन के बाद फरवरी 2026 में वेबसाइट को लॉन्च किया गया। वेतन आयोग की इस वेबसाइट पर सुझाव दिए जा सकते हैं।

पुतिन का बड़ा दांव! Admiral Nakhimov की वापसी से बदला समुद्री शक्ति संतुलन

मॉस्को  समंदर के रास्ते एक ऐसी खौफनाक खबर आ रही है, जिसने अमेरिकी जैसे सुपरपावर की रातों की नींद उड़ा दी है. रूस ने करीब 30 साल बाद अपने एक ‘दैत्य’ को समंदर में उतार दिया है, जो अकेले ही अमेरिकी नेवी के पूरे बेड़े को पलक झपकते ही तबाह कर सकता है. रूस ने दुनिया के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा से चलने वाले जंगी जहाज ‘एडमिरल नाखिमोव’ को अपने फाइनल सी-ट्रायल के लिए रवाना कर दिया है. समंदर का ये सुल्तान इतना खतरनाक है कि इसके सामने आने के बाद दुश्मन देश के जहाजों को संभलने या भागने के लिए सिर्फ एक सेकेंड का वक्त मिलेगा और फिर सब कुछ खाक हो जाएगा! समंदर में लौटा पुतिन का 28,000 टन का महादानव! रूस का ये कीरोव-क्लास क्रूजर (Kirov-class cruiser) कोई आम जहाज नहीं है. ये दुनिया का इकलौता और सबसे बड़ा न्यूक्लियर पावर्ड कॉम्बैट शिप है. इसका वजन करीब 28,000 टन है. आकार का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि ये अकेला जहाज अमेरिका के तीन सबसे मॉडर्न ‘अर्ली बर्क क्लास डिस्ट्रॉयर’ (Arleigh Burke-class destroyers) जहाजों से भी बड़ा और भारी है।  सोवियत संघ के जमाने का ये दैत्य पिछले 30 सालों से अपग्रेड होने के लिए रुका हुआ था लेकिन अगस्त 2025 में इसने पहली बार अपनी खुद की ताकत से समंदर की लहरों को चीरना शुरू किया और अब 2026 में ये अपनी अंतिम परीक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।  रूस की 176 मिसाइलों का जाल, जिरकॉन काल! इस महाविनाशक जहाज के अंदर हथियारों का ऐसा गोदाम है कि कोई दुश्मन इसके करीब आने की सोच भी नहीं सकता. इस जहाज में कुल 176 मिसाइल लॉन्च सेल्स लगाए गए हैं. इनमें से करीब 100 सेल्स में रूस के सबसे खतरनाक एयर डिफेंस सिस्टम S-400 का नेवल वर्जन तैनात है, जो जमीन पर मौजूद S-400 की तीन पूरी बटालियन के बराबर आसमान से आने वाली हर आफत को रोक सकता है।  इसके अलावा, बाकी सेल्स में रूस की सबसे घातक ‘जिरकॉन हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलें’ (Zircon Hypersonic Cruise Missile) भरी गई हैं. ये मिसाइल साउंड की रफ्तार से 9 गुना तेजी (Mach 9) से उड़ती है और 1,000 किलोमीटर दूर बैठे दुश्मन को संभलने का एक सेकेंड का मौका भी नहीं देती।  रूस का ‘तख्त’ और बदलती कूटनीति का दांव सेवेर्नोए डिजाइन ब्यूरो के सीईओ आंद्रेई द्याचकोव के मुताबिक, इस जहाज को इस तरह अपग्रेड किया गया है कि ये आज की तारीख में दुनिया का सबसे ताकतवर कॉम्बैट शिप बन चुका है. हालांकि, रूस के लिए इस दैत्य को जिंदा करना आसान नहीं था।  यूक्रेन के साथ जारी भीषण युद्ध के कारण लगे प्रतिबंधों और भारी बजट संकट की वजह से रूस को इसके जुड़वां जहाज ‘प्योत्र वेलिकी’ को समय से पहले ही रिटायर करना पड़ा, क्योंकि दोनों जहाजों को मेंटेन रखना रूस की इकॉनमी पर भारी पड़ रहा था. सोवियत संघ के टूटने के बाद से रूस ने कोई नया बड़ा जहाज नहीं बनाया है, इसलिए अपनी धाक जमाए रखने के लिए उसने अपनी पूरी ताकत एडमिरल नाखिमोव को चमकाने में झोंक दी।  रूस धोएगा पुराने घाव साल 2022 में यूक्रेन के मामूली मिसाइल हमले में रूस का ‘मोस्कवा’ जहाज डूब गया था, जिससे रूसी नौसेना की साख पर बट्टा लगा था. इसके बाद रूस ने अपना पूरा ध्यान गुपचुप तरीके से हमला करने वाली यासेन-एम क्लास पनडुब्बियों पर लगा दिया था. अब एडमिरल नाखिमोव को सीधे रूस के आर्कटिक बेड़े में शामिल किया जा रहा है।  दरअसल, अमेरिका और नाटो (NATO) देश लगातार आर्कटिक क्षेत्र में रूस के व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में रूस का ये न्यूक्लियर पावर्ड दैत्य समंदर के उस बेहद ठंडे रास्ते की पहरेदारी करेगा और अमेरिका को उसकी हद में रहने की सख्त चेतावनी देगा। 

यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी, इंदौर मेट्रो का दायरा बढ़ा; रेडिसन चौराहा होगा नया स्टेशन

इंदौर इंदौर में लंबे इंतजार के बाद अब मेट्रो का सफर बढ़ेगा और यात्री भी। अभी तक मेट्रो ट्रेन सात किलोमीटर तक चलती थी, लेकिन अब 17 किलोमीटर तक मेट्रो का संचालन होगा। मेट्रो को हरी झंडी केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर दिखाएंगे। दो माह पहले मेट्रो के कमर्शियल रन की मंजूरी मिल चुकी थी, लेकिन संचालन अब शुरू होगा।  एक साल के इंतजार के बाद अब मेट्रो सुपर कॉरिडोर से आगे बढ़कर रेडिसन चौराहे पर यात्रियों के साथ पहुंचेगी। इंदौर में 18 जून से सुपर कॉरिडोर के गांधी नगर स्टेशन से रेडिसन चौराहे तक मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू होगा। मेट्रो प्रोजेक्ट की समीक्षा बैठक में यह फैसला लिया गया। फिलहाल मेट्रो ट्रेन के किराए की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन अधिकतम 80 रुपये तक किराया होगा। बढ़ेगी यात्री संख्या अभी मेट्रो जिस हिस्से में चलती है, वह आबादी क्षेत्र नहीं है। इस कारण मेट्रो को काफी कम यात्री मिलते थे, लेकिन गांधी नगर से रेडिसन चौराहा तक मेट्रो का संचालन होने के बाद यात्रियों की संख्या बढ़ेगी, क्योंकि सुपर कॉरिडोर की आईटी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारी और कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थी इसका ज्यादा उपयोग करेंगे। इसके अलावा एयरपोर्ट तक जाने वाले यात्री भी इसका उपयोग कर सकेंगे, हालांकि उन्हें गांधी नगर से फिर ऑटो रिक्शा या अन्य विकल्प अपनाकर एयरपोर्ट तक जाना होगा।गांधी नगर मेट्रो स्टेशन से रेडिसन चौराहा तक पांच मेट्रो स्टेशन भी बनकर तैयार हो चुके हैं। इसके अलावा अलग-अलग स्पीड में मेट्रो का ट्रायल रन भी कई बार हो चुका है। 80 की स्पीड से चलेगी मेट्रो ट्रेन 17 किलोमीटर लंबे रूट पर 80 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से मेट्रो चलेगी। गांधी नगर से रेडिसन चौराहे तक आने में मेट्रो को 20 मिनट का समय लगेगा। पहले चरण में मेट्रो ट्रेन का संचालन खजराना चौराहा तक होगा। उसके बाद मेट्रो ट्रेन अंडरग्राउंड होगी। उसका काम भी अभी शुरू नहीं हो पाया है। फिलहाल मेट्रो का संचालन सात किलोमीटर हिस्से में हो रहा है। यहां मेट्रो का किराया अधिकतम 30 रुपये है। 17 किलोमीटर तक के संचालन में अधिकतम किराया 80 रुपये तक होगा। जब 30 किलोमीटर हिस्से में मेट्रो ट्रैक का काम पूरा होगा, तो हर 30 मिनट के अंतराल पर मेट्रो ट्रेन चलेगी। शहर में कुल 28 स्टेशनों से ट्रेन गुजरेगी। 20 से ज्यादा मेट्रो ट्रेनों का संचालन होगा। एक ट्रेन में साढ़े चार सौ यात्री सवार हो सकेंगे। बैठने के अलावा खड़े रहकर सफर करने में भी आसानी होगी। ट्रेन के भीतर लगे पोल में चार ग्रिप दी गई हैं, जिन्हें यात्री पकड़कर सफर कर सकते हैं। मेट्रो ट्रेन बाहरी और आंतरिक रूप से सीसीटीवी कैमरों से लैस होगी।  

स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा कदम: सिंहस्थ से पहले शुरू होगी MP की पहली मेडिसिटी, मंडला-राजगढ़ मेडिकल कॉलेज भी अगले साल से

उज्जैन  उज्जैन में सिंहस्थ-2028 से पहले मेडिकल कालेज प्रारंभ करने की तैयारी है। सरकार इसे प्रदेश की पहली मेडिसिटी के तौर पर विकसित कर रही है। विधानसभा चुनाव के पहले भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में भी एक मेडिसिटी बनाने की घोषणा की थी। अगला विधानसभा चुनाव 2028 के अंत में संभावित हैं, इसके पहले सरकार मेडिसिटी प्रारंभ करने की तैयारी कर रही है। शैक्षणिक सत्र 2027-28 से मेडिकल कॉलेज शुरू करने के लिए अगले वर्ष नेशनल मेडिकल कमीशन को चिकित्सा शिक्षा संचालनालय (डीएमई) द्वारा प्रस्ताव भेजा जाएगा। यहां एमबीबीएस 150 सीटें होंगी। उज्जैन के साथ मंडला और राजगढ़ में भी मेडिकल कॉलेज प्रारंभ करने की तैयारी चल रही है। वर्ष 2026 में बुधनी, दमोह और छतरपुर मेडिकल कॉलेज प्रारंभ करने के लिए डीएमई की तरफ से एनएमसी को आवेदन किया जा चुका है। एमबीबीएस सीटें 3450 पहुंच जाएंगी दो वर्ष में छह नए कालेज खुलने से प्रदेश में 25 शासकीय कॉलेज हो जाएंगे, जिनमें एमबीबीएस की कम से कम 3450 सीटें हो जाएंगी। इसी तरह से पीपीपी माडल सहित 13 नए निजी मेडिकल कॉलेज भी खुलने की स्थिति में हैं। इनमें 1300 सीटें होंगी। इस प्रकार शासकीय और निजी मिलाकर 1900 सीटें बढ़ जाएंगी। अभी प्रदेश के 19 शासकीय कालेजों में एमबीबीएस की 2850 और 14 निजी कॉलेजों में 2700 सीटें मिलाकर कुल 5550 सीटें हैं। 2028 तक यह 7450 हो जाएंगी। सब कुछ योजना के अनुरूप चला तो वर्ष 2033 तक हर साल 7450 डाक्टर तैयार होने लगेंगे। क्या-क्या सुविधा रहेगी उज्जैन की मेडिसिटी में     एमबीबीएस की 150 सीट वाला अत्याधुनिक मेडिकल कॉलेज होगा। इससे संबद्ध 550 बिस्तरों का अस्पताल होगा, जिसमें सुपरस्पेशियलिटी सेवाएं भी होंगी।     ऐसा डायग्नोस्टिक सेंटर बनाया जा रहा है जिसमें सभी पैथोलाजिकल, माइक्रोबायोलॉजिकल, रेडियोडायग्नोसिस की जांचें एक जगह पर हो सकेंगी।     एकीकृत स्वास्थ्य के अंतर्गत आयुष की पैथियों में उपचार की सुविधा और वेलनेस सेंटर बनेंगे। वेलनेस सेंटर बनाने का उद्देश्य बीमारी से बचाव (प्रिवेंशन) को लेकर है, जिसमें योग-ध्यान भी कराया जाएगा।     मेडिसिटी के माध्यम से स्वास्थ्य पर्यटन को आकर्षित करने की योजना है।     डॉक्टर व अन्य कर्मचारियों के लिए आवास की सुविधा भी रहेगी। सीएम केयर योजना : वर्ष 2028 से मिलने लगेगा लाभ सरकार ने इसी वर्ष सीएम केयर योजना प्रारंभ करने का निर्णय लिया है, जिसे कैबिनेट से स्वीकृति मिल गई है। इसके अंतर्गत पांच वर्ष में 3628 करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी है। योजना के अंतर्गत सुपरस्पेशियलिटी सेवाओं पर फोकस है। कैंसर में मेडिकल आंकोलॉजी, सर्जिकल आंकोलॉजी, रेडिएशन आंकोलॉजी, कार्डियोलॉजी, कार्डियक सर्जरी, आर्गन ट्रांसप्लांट जैसी सुविधाएं चरणबद्ध तरीके से विकसित की जानी हैं। साथ ही सुपरस्पेशियलिटी सेवाओं का प्रदेशस्तरीय अस्पताल भी भोपाल या उज्जैन में बनाने पर विचार चल रहा है। बता दें, लगभग 50 प्रतिशत कॉलेजों में अभी भी यह सेवाएं मिल रही हैं, पर कुछ जगह अलग से विभाग तक नहीं हैं। संसाधनों की बहुत अधिक कमी है। सीएम केयर में आने के बाद संबंधित कॉलेजों में अलग सुपर स्पेशियलिटी ब्लाक बनेगा। अलग से बजट होगा। दूसरा बड़ा लाभ यह होगा कि सुपरस्पेशियलिटी सीटें भी बढ़ जाएंगी।  

उज्जैन के महाकाल मंदिर की AI तकनीक बनी मिसाल, ‘त्रिनेत्र’ को राष्ट्रीय सम्मान

उज्जैन उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए विकसित की गई कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित वीडियो सर्विलांस प्रणाली ‘त्रिनेत्र’ को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय द्वारा घोषित 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कारों की सूची में महाकाल मंदिर की इस अत्याधुनिक प्रणाली का चयन किया गया है। यह सम्मान मंदिर प्रबंधन द्वारा तकनीक के माध्यम से सुरक्षा, निगरानी और व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में किए गए नवाचारों की महत्वपूर्ण पहचान माना जा रहा है। बढ़ती श्रद्धालु संख्या के बीच बना सुरक्षा का मजबूत कवच अक्टूबर 2022 में श्रीमहाकाल महालोक के लोकार्पण के बाद उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान में प्रतिदिन 80 हजार से लेकर एक लाख तक श्रद्धालु महाकाल मंदिर पहुंच रहे हैं। वहीं श्रावण मास, पर्व-त्योहारों, विशेष तिथियों और अवकाश के दिनों में यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। इतनी बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुचारु दर्शन व्यवस्था सुनिश्चित करना मंदिर प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया था। इसी चुनौती से निपटने के लिए मंदिर प्रबंध समिति ने आधुनिक तकनीक का सहारा लेते हुए एआई आधारित वीडियो सर्विलांस सिस्टम विकसित किया, जिसे ‘त्रिनेत्र’ नाम दिया गया। AI तकनीक से हो रही हर गतिविधि की निगरानी ‘त्रिनेत्र’ प्रणाली मंदिर परिसर में स्थापित कैमरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक की मदद से भीड़ के मूवमेंट, सुरक्षा संबंधी गतिविधियों और संभावित जोखिमों पर लगातार नजर रखती है। इससे भीड़ नियंत्रण, आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया और सुरक्षा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया गया है। मंदिर प्रशासन का मानना है कि इस तकनीक ने न केवल श्रद्धालुओं की सुरक्षा को मजबूत किया है, बल्कि व्यवस्थाओं को भी अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डिजिटल नवाचार का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस अवार्ड के लिए चयन महाकाल मंदिर में लागू डिजिटल नवाचारों की सफलता का प्रमाण माना जा रहा है। यह उपलब्धि न केवल मंदिर प्रशासन के लिए गौरव का विषय है, बल्कि धार्मिक स्थलों पर तकनीक आधारित प्रबंधन मॉडल को भी नई पहचान दिलाने वाली है। ऐसे काम करता है सिस्टम     इसके तहत ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर और श्री महाकाल महालोक परिसर में 600 से अधिक एडवांस एआइ आधारित कैमरे लगाए गए हैं।     सभी कैमरों को खास कंट्रोल रूम से जोड़ा गया है। यहां से सुरक्षाकर्मी और अधिकारी रियल-टाइम मॉनिटरिंग करते हैं।     यह सिस्टम श्रद्धालुओं की संख्या की सटीक जानकारी, भीड़ वाले क्षेत्र और प्रतिबंधित क्षेत्रों में हो रही गतिविधियों का पता लगाता है।     सिस्टम से प्राप्त सटीक जानकारी से अधिकारी भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के लिए बेहतर कदम उठा पाते हैं।  

सरकारी भर्ती के लिए सख्त होंगे मानदंड, नैतिक पतन से जुड़े मामलों को भी किया जाएगा शामिल

भोपाल  राज्य सरकार 65 साल बाद सरकारी नौकरी के लिए सेवा की सामान्य शर्तें बदलने जा रही है। वर्ष 1961 की सेवा शर्तों में महिला अपराध में दोषी सिद्ध होने वाले व्यक्ति को सरकारी नौकरी के लिए अपात्र माना गया था लेकिन अब नैतिक पतन को इसमें शामिल किया गया है यानी हत्या, भ्रष्टाचार सहित अन्य गंभीर अपराध में दोष सिद्ध होने पर भी पात्रता नहीं रहेगी। परिवीक्षा अवधि और स्थायीकरण को लेकर बड़ा फैसला परिवीक्षा अवधि (प्रोबेशन) समाप्त करने को लेकर भी यह स्पष्ट कर दिया गया है कि निर्धारित अवधि समाप्त होने पर अधिकतम छह माह के भीतर निर्णय लेना होगा। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो यह मान लिया जाएगा कि कोई आपत्ति नहीं है और संबंधित को शासकीय सेवा में स्थायी कर दिया जाएगा। नियमों में स्पष्टता के लिए नया प्रारूप तैयार प्रदेश में शासकीय सेवा के लिए सामान्य सेवा शर्तें 1961 में निर्धारित की गई थीं। बीच-बीच में कुछ संशोधन हुए मगर विभागों को असमंजस रहता था और वे सामान्य प्रशासन विभाग से मार्गदर्शन मांगते थे। इस प्रक्रिया में अनावश्यक समय लगता था। इसे देखते हुए सरकार ने नियम में स्पष्टता के लिए नए सिरे से नियम बनाने का निर्णय लिया। विभाग के अपर सचिव अजय कटेसरिया ने प्रारूप तैयार करके 15 जून तक सुझाव मांगे हैं ताकि इन्हें जल्द ही अंतिम रूप दे दिया जाए। अपात्रता, स्वास्थ्य परीक्षण और दो बच्चों का नियम एक से अधिक जीवित जीवनसाथी होने पर सरकारी नौकरी के लिए अपात्रता रहेगी। हालांकि, विशेष कारण होने पर इसमें सरकार छूट दे सकती है। स्वास्थ्य परीक्षण में उत्तीर्ण होना अनिवार्य रहेगा। यदि किसी को स्वास्थ्य परीक्षण में अयोग्य घोषित कर दिया तो कोई भी इसकी अनदेखी नहीं कर सकेगा। इसमें किसी को विवेकाधिकार से निर्णय का अधिकार भी नहीं होगा। दो बच्चे से अधिक होने पर सेवा समाप्ति का प्रविधान यथावत रखा गया है।   वरिष्ठता और पदोन्नति का नया विन्यास वहीं, वरिष्ठता का निर्धारण चयन सूची में क्रम के अनुसार होगा न कि पदभार ग्रहण करने के आधार पर यानी जुलाई में यदि चयन होता है और कुछ अगस्त तो कुछ सितंबर में पदभार ग्रहण करते हैं तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। वरिष्ठता सह उपयुक्तता के आधार पर पदोन्नति के लिए उपयुक्त पाए गए व्यक्तियों की वरिष्ठता वही होगी जैसे उस संवर्ग में है, जिससे पदोन्नति की जाती है। परिवीक्षा अवधि को लेकर यह निर्धारित किया है कि जो अवधि शासन द्वारा निर्धारित की गई है, उसमें स्थायी करने या न करने को लेकर निर्णय लेना ही होगा।  

छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि  सिन्हा का संपूर्ण जीवन समाजसेवा, संगठन निर्माण और योग के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित रहा। उनका निधन न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक अपूरणीय क्षति है। मुख्यमंत्री  साय ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा एक कुशल संगठनकर्ता, सरल, सौम्य और मृदुभाषी व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने अपने व्यवहार, कार्यशैली और समर्पण से समाज के विभिन्न वर्गों के बीच विशेष पहचान बनाई थी। योग के प्रति उनकी निष्ठा और समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें विशिष्ट बनाती थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष का दायित्व संभालने के बाद  सिन्हा ने पूरे समर्पण और ऊर्जा के साथ योग आंदोलन को नई दिशा देने का कार्य किया। उन्होंने योग को केवल स्वास्थ्य का माध्यम नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा बनाने के लिए अनेक नवाचार किए। उनके प्रयासों से प्रदेश में योग गतिविधियों को नई पहचान और व्यापक जनस्वीकृति मिली। मुख्यमंत्री  साय ने स्वर्गीय  सिन्हा के साथ बिताए गए क्षणों को स्मरण करते हुए कहा कि उनसे नियमित मुलाकात होती थी और हर मुलाकात में वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए योग आधारित नए विचार साझा करते थे। उनकी सोच सदैव रचनात्मक और जनहितकारी होती थी। वे योग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर सक्रिय रहते थे और इसी उद्देश्य को अपने जीवन का मिशन बना चुके थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष जशपुर के रणजीता स्टेडियम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम की सफलता में  सिन्हा की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। सीमित समय में उन्होंने जिस कुशलता और प्रतिबद्धता के साथ उस आयोजन को भव्य स्वरूप दिया, वह उनकी संगठन क्षमता और कार्यकुशलता कावो उत्कृष्ट उदाहरण है। उस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता ने योग के प्रति जनजागरूकता को नई ऊंचाई प्रदान की थी। उनका जीवन समाज के प्रति समर्पण, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक था, जो आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरणा देता रहेगा। मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा परिजनों को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की। श्रद्धांजलि सभा में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, वन मंत्री  केदार कश्यप, स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल, स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेंद्र यादव, विधायक  अमर अग्रवाल, विधायक  धरमलाल कौशिक, विधायक  अजय चंद्राकर, महापौर मती मीनल चौबे,  रमेश बैस,  राम प्रताप,  पवन साय, डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना,  राम दत्त,  राजीव लोचन महाराज सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, योग साधक एवं योग जगत से जुड़े लोगों ने उपस्थित होकर स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा को श्रद्धासुमन अर्पित किया।

डेब्यू का मौका और नए संयोजन की तैयारी, अफगानिस्तान मुकाबले के लिए भारत की संभावित XI

 मुल्लांपुर अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाले एकमात्र टेस्ट मैच के साथ टीम इंडिया अपने 2026 के टेस्ट अभियान की शुरुआत करने जा रही है. 6 जून (शनिवार) से न्यू चंडीगढ़ के महाराजा यादविंद्र सिंह इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले जाने वाले इस मुकाबले में भारतीय टीम की प्लेइंग-11 क्या होगी, इस पर भी फैन्स की निगाहें हैं।  मैच से एक दिन पहले मुख्य कोच गौतम गंभीर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई अहम संकेत दिए, जिससे यह अंदाजा लगाना आसान हो गया कि अफगानिस्तान के खिलाफ भारत किस संयोजन के साथ उतर सकता है. खास बात यह है कि कुछ युवा खिलाड़ियों को मौका मिल सकता है, जबकि कुछ बड़े नाम अपनी जगह पक्की कर चुके हैं।  भारतीय बल्लेबाजी की शुरुआत एक बार फिर यशस्वी जायसवाल और केएल राहुल की जोड़ी करेगी. जायसवाल इस समय भारत के सबसे भरोसेमंद टेस्ट बल्लेबाजों में गिने जाते हैं, जबकि राहुल को इस मैच के लिए उपकप्तान भी बनाया गया है।  गंभीर देंगे सुदर्शन को भी मौका IPL (इंडियन प्रीमियर लीग) 2026 में बल्ले से धमाल मचाने वाले साई सुदर्शन को नंबर-3 पर मौका मिलना लगभग तय माना जा रहा है. गौतम गंभीर ने भी संकेत दिए हैं कि टीम मैनेजमेंट युवा बल्लेबाज को लंबी पारी खेलने की जिम्मेदारी सौंपने के मूड में है. साई ने IPL 2026 में 722 रन बनाए थे और अब वह उसी फॉर्म को टेस्ट क्रिकेट में भी जारी रखना चाहेंगे. साई के प्लेइंग-11 में जगह बनाने का मतलब यह है कि देवदत्त पडिक्कल को बाहर बैठना पड़ेगा।  गर्दन की चोट के कारण दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पिछला टेस्ट नहीं खेलने वाले शुभमन गिल अब पूरी तरह फिट हैं और नंबर-4 पर बल्लेबाजी करते नजर आएंगे. वहीं विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ के लिए यह मुकाबला बेहद खास रहने वाला है. पंत अपने करियर का 50वां टेस्ट मैच खेलने उतरेंगे और टीम उनसे बड़ी पारी की उम्मीद करेगी. नीतीश कुमार रेड्डी तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर की भूमिका में नजर आ सकते हैं. पिछले कुछ महीनों में उन्होंने बल्ले और गेंद दोनों से प्रभावित किया है।  इसके अलावा वॉशिंगटन सुंदर का खेलना भी तय माना जा रहा है. सुंदर टीम को स्पिन के साथ-साथ बल्लेबाजी में भी गहराई देंगे. कुलदीप यादव भारत के मुख्य स्पिनर होंगे. रवींद्र जडेजा की गैरमौजूदगी में कुलदीप पर बड़ी जिम्मेदारी होगी. वहीं घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करने वाले हर्ष दुबे को टेस्ट डेब्यू का मौका मिल सकता है।  हालांकि हाल के दिनों में मोहम्मद सिराज के वर्कलोड मैनेजमेंट को लेकर चर्चा हुई थी, लेकिन ताजा संकेतों के अनुसार वह प्लेइंग इलेवन का हिस्सा रह सकते हैं. सिराज वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप 2025-27 चक्र में भारत के सबसे सफल गेंदबाज रहे हैं और अफगानिस्तान के खिलाफ तेज आक्रमण की अगुआई करेंगे. उनका साथ देने के लिए प्रसिद्ध कृष्णा सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं. ऐसे में पंजाब के युवा तेज गेंदबाज गुरनूर बरार को डेब्यू के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है।  भारतीय टीम की संभावित प्लेइंग-11: यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल (उप कप्तान), साई सुदर्शन, शुभमन गिल (कप्तान), ऋषभ पंत (विकेटकीपर), नीतीश कुमार रेड्डी, वॉशिंगटन सुंदर, हर्ष दुबे, कुलदीप यादव, मोहम्मद सिराज और प्रसिद्ध कृष्णा।