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मध्य प्रदेश में युवाओं के लिए खुशखबरी, सीएम मोहन यादव बोले- पुलिस भर्ती प्रक्रिया होगी नियमित

भोपाल. मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने कहा है कि पूरी कोशिश है कि पुलिस के स्वीकृत पदों में एक भी रिक्त नहीं रहे। राज्य सरकार हर साल भर्ती करने के लिए सभी आवश्यक प्रबंधन कर रही है। अब तक पुलिस विभाग में 22 हजार अलग-अलग पदों पर भर्ती की जा चुकी है। हां, पुलिस अपनी पूरी क्षमता से सुशासन और प्रदेशवासियों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए कार्य करे। उन्होंने यह भी कहा कि संभागीय स्तर पर कानून-व्यवस्था की समीक्षा बैठकें होंगी, जिनमें वह खुद भी उपस्थित रहेंगे। पुलिस मुख्यालय में शनिवार को आईजी कांफ्रेंस में उन्होंने यह बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा, थानों में शुचिता का माहौल रहे। पेट्रोलिंग के लिए छोटी और तंग गलियों में उपयुक्त व्यवस्था हो, गश्त बढ़ाएं। देखें कि पेट्रोलिंग में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आए। वरिष्ठ अधिकारी आकस्मिक निरीक्षण करें और निगरानी भी करें। वर्षाकाल से पहले नगरीय निकायों के सहयोग से खतरनाक बिल्डिंगों को चिन्हित कर आवश्यक कार्यवाही की जाए। यह देखा जाए कि कोई भी बाजार देर रात तक संचालित न हो। सिंहस्थ-2028, करोड़ों श्रद्धालुओं का आस्था पर्व है। इस आयोजन में संवेदनशीलता, सक्रियता, सतर्कता और सेवा भाव से पुलिस, आदर्श व्यवस्था का उदाहरण देश-दुनिया में प्रस्तुत करे। कार्यक्रम में डीजीपी कैलाश मकवाणा ने कहा कि पुलिस मुख्यालय द्वारा मैदानी पुलिस कार्यों की त्रैमासिक समीक्षा की नई व्यवस्था प्रारंभ की गई है, जिससे शासन की प्राथमिकताओं और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप पुलिस कार्यों की नियमित निगरानी होगी। बैठक में पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, समस्त जोनल पुलिस महानिरीक्षक, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। साइबर अपराधों की रोकथाम को दें सर्वोच्च प्राथमिकता- सीएम सीएम ने आगे कहा कि साइबर अपराधों की रोकथाम और जनजागरुकता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने, नशामुक्ति, मानव तस्करी पर नियंत्रण, महिला और बच्चों की सुरक्षा को अधिक सुदृढ़ बनाने तथा धार्मिक स्थलों पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों के संबंध में न्यायालयों द्वारा दिए गए निर्देशों का प्रभावी पालन कराया जाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में साइबर अपराध, संगठित अपराध, माफिया गतिविधियां, भूमि संबंधी अपराध, सामाजिक चुनौतियों के नए स्वरूप सामने आ रहे हैं। इनसे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पुलिस को तकनीकी दक्षता, संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई के साथ कार्य करना होगा। प्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए पुलिस, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और आमजन की सहभागिता से व्यापक जनजागरण अभियान संचालित किए जाने चाहिए। सांप्रदायिक ताकतों पर नियंत्रण के लिए निरंतर सजग रहना जरूरी मुख्यमंत्री ने कहा, धार में भोजशाला से संबंधित न्यायालय के निर्णय को प्रदेश पुलिस ने जिला प्रशासन के साथ मिलकर लागू कराया। भोजशाला में वसंत पंचमी के अवसर पर शांति पूर्ण स्थिति कायम रखने में भी पुलिस की अहम भूमिका रही। सांप्रदायिक ताकतों को नियंत्रण में रखने के लिए पुलिस को निरंतर सजग रहना होगा।

राजघराना गोलीकांड में नया मोड़: बाबा राजा ने सुनीता सिंह से रिश्ते पर तोड़ी चुप्पी, बताई सच्चाई

सतना. नागौद राजघराने की परसमनिया गढ़ी में 11 जून को हुए चर्चित गोलीकांड में नया मोड़ आ गया है। घटना के चार दिन बाद रूपेंद्र सिंह उर्फ बाबा राजा पहली बार मीडिया के सामने आकर इस पूरे घटनाक्रम में अपना पक्ष रखा। रुपेन्द्र सिंह ने बताया कि सुनीता को बार-बार मेरी दूसरी पत्नी व प्रेमिका बताया जा रहा है जबकि ऐसा नहीं है वह न तो मेरी दूसरी पत्नी है न ही प्रेमिका। बल्कि सुनीता सिंह केवल उनकी वर्किंग पार्टनर व पेट्रेाल पम्प की बतौर मैनेजर कार्यरत है। सुनीता ने डिफेंस में चलाई गोली- बाबा राजा रुपेन्द्र सिंह उर्फ बाबा राजा ने दावा किया कि घटना के दौरान उनके साथ पत्नी योगिता सिंह, साले और अन्य लोगों ने मारपीट की। उनके अनुसार दोपहर करीब 3:30 बजे विवाद शुरू हुआ, जिसमें उन्हें धक्का देकर गिराया गया, चश्मा टूट गया और फोटो फ्रेम लगने से वे घायल हो गए। रूपेंद्र सिंह ने कहा कि सुनीता सिंह उनके पेट्रोल पंप की मैनेजर और बिजनेस पार्टनर हैं। उनके मुताबिक मारपीट और धमकियों के बीच सुनीता ने आत्मरक्षा में दीवार की ओर फायरिंग की। उनका दावा है कि दीवार से टकराकर निकली गोली योगिता सिंह को लगी। उन्होंने कहा कि किसी को नुकसान पहुंचाने का इरादा नहीं था। बाबा राजा ने अपनी सास के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि वे घटना स्थल पर मौजूद नहीं थीं। धारा नौ के तहत दायर है तलाक का प्रकरण रूपेंद्र सिंह ने यह भी बताया कि वैवाहिक संबंधों को बचाने के लिए उन्होंने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9 के तहत न्यायालय में मामला दायर किया था। उनका आरोप है कि पत्नी और ससुराल पक्ष की नजर उनकी संपत्ति पर है।

एमटी सेलेस्टियल जहाज पर भारतीय क्रू मेंबर की मेडिकल वजहों से मौत

 नई दिल्ली मस्कट में भारतीय दूतावास ने शनिवार देर रात बताया कि ओमान के डुक्म पोर्ट पर खड़े जहाज 'एमटी सेलेस्टियल' पर एक भारतीय नागरिक की मेडिकल दिक्कतों के कारण मौत हो गई। दूतावास ने मृतक की पहचान निशांत उर्थनाथन के तौर पर की है। दूतावास ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "मृतक के शव को जल्द से जल्द भारत वापस लाने के लिए जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं।" साथ ही यह भी बताया गया कि उनका शव अभी डुक्म पोर्ट पर मौजूद जहाज पर ही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया भर के शिपिंग बेड़े में 3,00,000 से ज्यादा भारतीय नाविक काम करते हैं। देश के शिपिंग मंत्रालय के एक अधिकारी ने पिछले हफ्ते बताया था कि मिडिल ईस्ट में 18,000 से ज्यादा भारतीय नाविक काम कर रहे हैं। अमेरिकी हमले में मारे गए थे तीन भारतीय नाविक यह मौत ऐसे समय में हुई है जब कुछ दिन पहले ही ओमान के पास एक टैंकर पर अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविक मारे गए थे, जिसकी वजह से जनता और विपक्षी पार्टियों ने आलोचना की थी। विपक्षी पार्टियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि वे इस हफ्ते के आखिर में होने वाले 'ग्रुप ऑफ सेवन' (G7) शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के सामने यह मुद्दा उठाएं। विदेश मंत्रालय ने क्या बताया? भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसने "नागरिक शिपिंग के खिलाफ घातक बल के इस्तेमाल पर अपनी गहरी चिंता" जाहिर करने के लिए अमेरिका के 'चार्ज डी'अफेयर्स' (राजनयिक प्रतिनिधि) को तलब किया था। 'फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया' ने शनिवार को सोशल मीडिया पर बताया कि 35 वर्षीय निशांत उर्थनाथन की 11 जून को मौत हो गई थी। उनका शव बिना सही रेफ्रिजरेशन के दो दिन से ज्यादा समय तक जहाज पर ही रखा रहा। यूनियन ने कहा, "क्रू सदस्य शव को सड़ने से बचाने की कोशिश में ठंडे पानी की बोतलों का इस्तेमाल कर रहे हैं यह एक डरावनी और स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरी स्थिति है।"

वाहन चालकों के लिए बड़ा बदलाव, मध्यप्रदेश में बिना OTP नहीं मिलेगा PUC सर्टिफिकेट

भोपाल. मध्यप्रदेश में अब पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (पीयूसी) सर्टिफिकेट बनवाने के लिए मोबाइल ओटीपी सत्यापन अनिवार्य (OTP Verification) कर दिया गया है। भोपाल सहित पूरे प्रदेश में नई व्यवस्था लागू होने के बाद बिना ओटीपी सत्यापन के किसी भी वाहन का पीयूसी प्रमाण पत्र (PUC Certificate) जारी नहीं किया जाएगा। नई प्रणाली लागू होने से उन वाहन मालिकों की परेशानी बढ़ सकती है, जिनके वाहन रिकॉर्ड में पुराना, गलत या बंद मोबाइल नंबर दर्ज है। ऐसे वाहन मालिकों को पहले परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में मोबाइल नंबर अपडेट कराना होगा। केंद्र सरकार के निर्देश पर लागू हुई व्यवस्था सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के निर्देश पर नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) ने यह नई व्यवस्था लागू की है। डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर किरण शर्मा के अनुसार, जैसे ही किसी पीयूसी केंद्र पर वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज किया जाएगा, सिस्टम वाहन डेटाबेस से वाहन मालिक का मोबाइल नंबर प्राप्त करेगा। इसके बाद उसी नंबर पर ओटीपी भेजा जाएगा। वाहन प्रदूषण जांच में पास होने के बाद ओटीपी सत्यापन पूरा होने पर ही पीयूसी प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। फर्जी पीयूसी पर लगेगी रोक परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अब तक कई मामलों में एक ही मोबाइल नंबर का उपयोग कर कई वाहनों के पीयूसी सर्टिफिकेट बनाए जा रहे थे। वास्तविक वाहन मालिक की पहचान और मोबाइल सत्यापन नहीं होने के कारण रिकॉर्ड की शुद्धता पर सवाल उठते थे। नई व्यवस्था में वाहन के पंजीयन रिकॉर्ड में दर्ज मोबाइल नंबर पर ही ओटीपी जाएगा। इससे गलत जानकारी देकर या किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर पीयूसी बनवाना आसान नहीं होगा। वाहन मालिकों के लिए क्या बदलेगा? पीयूसी बनवाने के लिए मोबाइल ओटीपी अनिवार्य होगा। वाहन रिकॉर्ड में सही मोबाइल नंबर दर्ज होना जरूरी रहेगा। ओटीपी सत्यापन नहीं होने पर सर्टिफिकेट जारी नहीं होगा। गलत या पुराना नंबर होने पर रिकॉर्ड अपडेट कराना पड़ेगा। भविष्य में पीयूसी एक्सपायर होने से पहले मोबाइल अलर्ट मिलेगा। फर्जी जानकारी के आधार पर पीयूसी बनवाने पर रोक लगेगी। भोपाल में रोज 2500 पीयूसी सर्टिफिकेट भोपाल आरटीओ डॉ. जितेंद्र शर्मा के अनुसार, राजधानी में लगभग 60 पीयूसी केंद्र संचालित हो रहे हैं। यहां प्रतिदिन करीब 2500 पीयूसी सर्टिफिकेट जारी किए जाते हैं। पूरे मध्यप्रदेश में 550 से 600 पीयूसी केंद्रों के माध्यम से रोजाना 22 हजार से 25 हजार तक पीयूसी प्रमाण पत्र बनाए जाते हैं। प्रदेश में कुल वाहनों की संख्या लगभग 2.5 करोड़ बताई जा रही है, जबकि भोपाल में 20 लाख से अधिक वाहन पंजीकृत हैं। वाहन मालिकों को मिलेगा एक्सपायरी अलर्ट परिवहन विभाग भविष्य में ऐसी व्यवस्था भी शुरू करने की तैयारी कर रहा है, जिसके तहत पीयूसी की वैधता समाप्त होने से पहले वाहन मालिकों को मोबाइल संदेश भेजा जाएगा। इससे वाहन मालिक समय रहते सर्टिफिकेट का नवीनीकरण करा सकेंगे और नियम उल्लंघन से बच पाएंगे।

डिजिटल गवर्नेंस को नई उड़ान, चंडीगढ़ में स्थापित होगा AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

चंडीगढ़. प्रशासन द्वारा आईटी पार्क में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर आफ एक्सीलेंस स्थापित करने की तैयारी की जा रही है । इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ आम नागरिकों को मिलेगा, क्योंकि इससे सरकारी सेवाएं अधिक तेज, पारदर्शी और प्रभावी बन सकेंगी। प्रशासन के अनुसार, एआई तकनीक के उपयोग से जन्म प्रमाणपत्र, शिकायत निवारण, ट्रैफिक प्रबंधन और नगर सेवाओं जैसी सुविधाओं में सुधार आएगा । शहरवासियों की शिकायतों का तेजी से समाधान होगा और विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली अधिक जवाबदेह बनेगी।ट्रैफिक जाम, सफाई व्यवस्था, पानी और बिजली जैसी सेवाओं की निगरानी भी बेहतर तरीके से की जा सकेगी। यह केंद्र युवाओं, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स के लिए भी नए अवसर लेकर आएगा। यहां एआई, साइबर सुरक्षा, ब्लाकचेन और अन्य उभरती तकनीकों पर शोध, प्रशिक्षण और नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि यह पहल चंडीगढ़ को देश के प्रमुख एआई और स्मार्ट गवर्नेंस हब के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। प्रशासन ने क्या कहा? प्रशासन के अनुसार, यह सेंटर इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की इंडिया एआई स्टार्टअप फाइनेंसिंग पिलर योजना के तहत स्थापित किया जाएगा। इसका उद्देश्य सरकारी विभागों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित समाधान लागू कर सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता और निर्णय प्रक्रिया को बेहतर बनाना है। यह केंद्र सरकार, शिक्षण संस्थानों और उद्योग जगत के बीच एक मजबूत सेतु की भूमिका निभाएगा। यहां शहरी और प्रशासनिक चुनौतियों के समाधान के लिए व्यावहारिक एआई आधारित तकनीकों का विकास किया जाएगा। साथ ही स्टार्टअप्स को को-वर्किंग स्पेस, इन्क्यूबेशन सपोर्ट, मेंटरशिप और निवेशकों से जुड़ने के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रस्ताव के अनुसार, सेंटर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अलावा ब्लॉकचेन, साइबर सुरक्षा, क्वांटम कंप्यूटिंग और इंटरनेट आफ थिंग्स जैसी अत्याधुनिक तकनीकों पर भी काम किया जाएगा। इसके लिए हाई-परफार्मेंस कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, उन्नत प्रयोगशालाएं और रिसर्च एवं प्रोडक्ट डेवलपमेंट के लिए विशेष सैंडबॉक्स वातावरण तैयार किए जाएंगे । साझा फंडिंग मॉडल पर बनेगा प्रोजेक्ट परियोजना के वित्तपोषण के लिए साझा मॉडल अपनाया जाएगा। इसमें लगभग 40 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार के इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालयद्वारा, 40 प्रतिशत चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा और शेष 20 प्रतिशत उद्योग एवं शैक्षणिक साझेदारों के सहयोग से जुटाई जाएगी। प्रशासन पहले शहर के विभिन्न विभागों में ऐसी समस्याओं और जरूरतों की पहचान करेगा, जिन्हें एआई आधारित समाधानों के माध्यम से दूर किया जा सकता है। अधिकारियों का मानना है कि यह पहल चंडीगढ़ को देश के अग्रणी एआई और टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।प्रशासन पहले से ही स्टार्टअप पालिसी के जरिए उद्यमियों और नवाचार को बढ़ावा दे रहा है।

धोखाधड़ी मामले के बाद बड़ा फैसला, खिलाड़ियों की कारतूस खरीद पर नजर; गन लाइसेंस पर लगी सीमा

भोपाल. भोपाल की फिजाओं में शूटिंग रेंज से आने वाली गोलियों की गूंज अक्सर देश के लिए मेडल जीतने वाले होनहारों की कहानी बयां करती थी। लेकिन, इसी गूंज के पीछे एक ऐसा खौफनाक सच छिपा था, जिसने पूरे प्रशासनिक अमले को हिलाकर रख दिया। दरअसल स्पोर्ट्स कोटे के तहत मिलने वाले कारतूस, जो देश का मान बढ़ाने के लिए चलने चाहिए थे, वे चंद रुपयों के लालच में अपराधियों की बंदूकों की खुराक बन रहे थे। एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। जांच बैठी तो सच सामने आया कि कई ऐसे लोगों के नाम पर भी कारतूस जारी हो रहे थे, जिन्होंने कभी किसी प्रतियोगिता में हिस्सा तक नहीं लिया था। भोपाल के 135 शूटर्स की जांच हुई, जिसमें 69 के लाइसेंस रद और 10 के निलंबित कर दिए गए। इस बड़ी धोखाधड़ी के बाद भोपाल जिला प्रशासन ने 'ऑपरेशन क्लीन' शुरू करते हुए नियमों के पेंच कस दिए हैं। अब तक जो शूटर सालभर में 15 हजार से लेकर 1 लाख तक कारतूस आसानी से ले लेते थे, उनके लिए अब नियम कड़े कर दिए गए हैं। अब नए नियमों के तहत एक शूटर को एक बार में अधिकतम सिर्फ 500 और सालभर में केवल 1000 कारतूस ही जारी किए जाएंगे। अगर किसी खिलाड़ी को इससे ज्यादा की जरूरत होगी, तो उसे खेल संचालक से बाकायदा सत्यापन कराना होगा। यही नहीं, प्रशासन ने हथियारों की संख्या पर भी कैंची चला दी है। अब नेशनल और इंटरनेशनल लेवल के खिलाड़ी भी केवल दो गन के लाइसेंस रख सकेंगे, जबकि पहले उन्हें 8 से 10 बंदूकें रखने की छूट थी। प्रशासन अब हर एक गोली का हिसाब रखने की तैयारी में है। राज्य सरकार को एक प्रस्ताव भेजा गया है, जिसमें कानून बदलकर कारतूस के 'खोखों' (खाली शेल) का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य करने की सिफारिश की गई है। अब शूटर्स को यह भी लिखित में देना होगा कि कारतूस किस प्रतियोगिता के लिए खरीदे जा रहे हैं और उनका इस्तेमाल किस शूटिंग रेंज में होगा। 

डील से पहले ईरान में बढ़ता विरोध आखिर क्या संकेत दे रहा है?

तेहरान  अमेरिका से शांति समझौता करने के खिलाफ ईरानी लोगों का एक वर्ग सड़क पर उतर गया है। ईरान के कई शहरों में डील के खिलाफ प्रदर्शन हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ईरानी हितों के खिलाफ जाकर डील की जा रही है, जो नहीं होना चाहिए। प्रदर्शनकारियों के निशाने पर खासतौर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ हैं। अमेरिका से समझौते में ईरान की ओर से मुख्य वार्ताकार गालिबाफ और अराघची के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई है। तेहरान के इब्न सिना स्क्वायर में शनिवार को रैली हुई है। मशहद शहर में विदेश मंत्रालय के सामने भी दर्जनों लोग अब्बास अराघची के विरोध में जमा हुए। फार्स न्यूज एजेंसी ने वीडियो जारी किया है, जिसमें मशहद में प्रदर्शनकारी अराघची के खिलाफ नारे लगाते दिख रहे हैं। विरोध करने वालों का मानना है कि इससे होर्मुज स्ट्रेट में ईरान का प्रभाव कमजोर होगा। अराघची और गालिबाफ निशाने पर मशहद में महिलाओं को झंडे लहराते हुए और 'बेईमान घुसपैठिए अराघची मुर्दाबाद और अराघची हाय हाय' के नारे लगाते हुए देखा गया है। एक और वीडियो में प्रदर्शनकारी कह रहे हैं कि अराघची का समझौता ईरान को बेइज्जत करने वला है। उन्होंने उस समझौते में अमेरिका को बहुत ज्यादा और गैरजरूरी रियायतें दी हैं। ऐसे में गालिबाफ और अराघची इस्तीफा दें। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि समझौते से ईरान के हितों की रक्षा नहीं होगी और होर्मुज जलडमरूमध्य पर देश अपनी पकड़ खो देगा। शुक्रवार को एक इंटरव्यू में अराघची ने कहा था कि प्रस्तावित समझौते में ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने की बात कही गई है। साथ ही समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने का दावा भी किया जा रहा है। ईरान अमेरिका समझौता ईरान लोग ऐसे समय प्रदर्शन करने सड़कों पर उतरे हैं, जब अमेरिका से उनके देश का समझौता बेहद करीब है। ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते पर रविवार को दस्तखत हो सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मुख्य मध्यस्थ पाकिस्तान ने कहा है कि दोनों पक्ष रविवार को डील साइन कर सकते हैं। ईरानी नेताओं ने रविवार को समझौते पर दस्तखत होने की बात नहीं कही है लेकिन माना है कि अमेरिका के साथ समझौते पर बातचीत आगे बढ़ी है। ईरान ने संकेत दिया है कि डील में अभी कुछ समय लग सकता है। ईरानी पक्ष के बयानों से रविवार को समझौता होना मुश्किल नजर आ रहा है लेकिन जल्दी ही डील होने की उम्मीद है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि रविवार को समझौते पर हस्ताक्षर के तुरंत बाद होर्मुज जलडमरूमध्य सभी जहाजों के लिए पूरी तरह खुल जाएगा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शनिवार को कहा कि 24 घंटे के भीतर समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है। उन्होंने इशारा किया कि रविवार को दस्तखत हो सकते हैं।  

अयोध्या में उठे सवाल, अब जांच के लिए मैदान में उतरी SIT

अयोध्या   अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी का मामला इन दिनों सुर्खियों में है. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के आरोपों के बाद यह विवाद राजनीतिक रंग ले चुका है. मामले में दो लोगों की गिरफ्तारी और उनके पास से लाखों रुपये बरामद होने के बाद जांच तेज कर दी गई है. उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरे प्रकरण की तह तक पहुंचने के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है. ऐसे में जानिए, इस विवाद की शुरुआत कैसे हुई और अब तक क्या-क्या घटनाक्रम सामने आए हैं? ऐसे हुई विवाद की शुरुआत जून की शुरुआत में अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा किए गए ऑडिट के दौरान दानपात्र से नकदी और अन्य वस्तुओं के गायब होने की आशंका सामने आई. इसके बाद मंदिर परिसर और दानपात्र के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की गई. फुटेज में एक कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध दिखाई दी, जिसके आधार पर आंतरिक स्तर पर जांच शुरू की गई. शुरुआत में मामले को गोपनीय रखा गया. 7 जून को अखिलेश यादव की एंट्री से सुर्खियों में आया मामला राम मंदिर चंदा चोरी मामले में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 7 जून को योगी सरकार पर हमला बोला. उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके का कि अयोध्या में मंदिर के चढ़ावे को लेकर जो जानकारी सामने आई है, वह गंभीर चिंता का विषय है. अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि यदि डबल इंजन सरकार की निगरानी व्यवस्था इतनी प्रभावी होती और दूरबीन व ड्रोन सही तरीके से काम कर रहे होते, तो विपक्ष को सवाल उठाने का मौका ही नहीं मिलता. उन्होंने कहा कि चढ़ावे में चोरी होगी तो उसकी शिकायत भी होगी. इसके बाद अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी के मामले को लेकर आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने भी योगी सरकार पर निशाना साधा. संजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर जैसे आस्था के केंद्र में दान राशि की कथित चोरी बेहद गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष व पारदर्शी जांच होनी चाहिए. उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए पूरे मामले की सच्चाई जनता के सामने लाने की बात कही. 10 जून को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कही जांच कराने की मांग अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी की बात बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने मानी. कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के तीन दिवसीय दौरे के दौरान पत्रकारों के सवाल पर उन्होंने कहा कि मामले की जांच सरकार करा रही है. सरकार इस मामले को लेकर पूरी तरह सतर्क है और जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं. उन्होंने कहा कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी.किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो. राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इससे जुड़े किसी भी मामले में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है. 13 जून को CM योगी के आदेश के बाद SIT गठित 13 जून को अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने शनिवार को अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के चंदे और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यों वाली स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई है. अधिकारियों के मुताबिक SIT का गठन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर किया गया. यह कदम 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' के अनुरोध पर उठाया गया, जिसने इसे "गलत जानकारी को रोकने और सच सामने लाने" के लिए ज़रूरी बताया और आरोप लगाया कि राम मंदिर की छवि खराब करने की कोशिशें की जा रही हैं. SIT में लखनऊ के डिविज़नल कमिश्नर IAS विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (IG) IPS किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं. राज्य सरकार के अनुसार मंदिर ट्रस्ट ने अयोध्या मंदिर परिसर में दान पेटियों से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की थी. 13 जून को मामले में हुई 2 कर्मचारियों की गिरफ्तारी जांच के दौरान 13 जून को मंदिर में चढ़ावे की राशि गिनने वाले कर्मचारी लवकुश मिश्रा के घर से करीब 10 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं. बताया जा रहा है कि कुछ रकम घर की आलमारी में रखी गई थी, जबकि कुछ नकदी गोबर के ढेर में दबाकर छिपाई गई थी. बरामद धनराशि के स्रोत को लेकर फिलहाल जांच जारी है और अधिकारियों ने इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है. मामले में एक और कर्मचारी को संदेह के आधार पर हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है. दोनों कर्मचारियों की जिम्मेदारी मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती और उससे जुड़े कार्यों की थी. बताया जा रहा है कि दोनों कर्मचारियों को प्रतिमाह लगभग 18 से 20 हजार रुपये वेतन मिलता था, लेकिन हाल के महीनों में उनकी संपत्तियों में असामान्य वृद्धि की चर्चा जांच एजेंसियों के रडार पर है. जानकारी के मुताबिक एक कर्मचारी ने लगभग डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य की भूमि खरीदी, जबकि दूसरे ने करीब 40 लाख रुपये का प्लॉट लिया है. 5 दिनों के भीतर दो बार अयोध्या पहुंचे नृपेंद्र मिश्र इधर, राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र भी पांच दिनों के भीतर दूसरी बार अयोध्या पहुंचे. हालांकि उन्होंने कथित धन गबन के मामले पर टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि उनकी जिम्मेदारी केवल मंदिर निर्माण कार्यों की निगरानी तक सीमित है. फिलहाल राम मंदिर की दान राशि से जुड़ा यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं और विश्वास से जुड़ा हुआ है. ऐसे में अब सभी की निगाहें संभावित SIT जांच और उसके निष्कर्षों पर टिकी हैं.

MP की लाड़ली बहनों को बड़ा तोहफा, CM मोहन यादव आज ट्रांसफर करेंगे 37वीं किस्त की रकम

भोपाल. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार, 14 जून को सागर जिले के देवरी विधानसभा क्षेत्र के केसली से राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना की 37वीं किस्त (Ladli Behna Yojana 37th Installment) जारी करेंगे। इस अवसर पर प्रदेश की सवा करोड़ से अधिक पात्र महिलाओं के बैंक खातों में सिंगल क्लिक के माध्यम से 1500 रुपये की राशि ट्रांसफर की जाएगी। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर क्षेत्र में प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी गई हैं। अधिकारियों के अनुसार कार्यक्रम स्थल पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी की जा रही हैं। 190.85 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने दौरे के दौरान केसली क्षेत्र में 190.85 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात भी देंगे। सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं से क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी और स्थानीय नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। महिलाओं को आर्थिक सहायता का लाभ लाड़ली बहना योजना (Ladli Behna Yojana) मध्यप्रदेश सरकार की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं में शामिल है। योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और घरेलू जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर सकें। 37वीं किस्त के अंतर्गत एक बार फिर 1.25 करोड़ से अधिक महिलाओं को सीधे उनके बैंक खातों में राशि प्राप्त होगी। क्या है लाड़ली बहना योजना? लाड़ली बहना योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, स्वास्थ्य और पोषण में सुधार के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। योजना का लाभ उन्हीं महिलाओं को मिलता है जो मध्यप्रदेश की स्थानीय निवासी हों। परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए। परिवार में कोई सरकारी कर्मचारी नहीं होना चाहिए और पांच एकड़ से अधिक भूमि या चारपहिया वाहन नहीं होना चाहिए। विवाहित, विधवा और तलाकशुदा महिलाएं, जिनकी आयु 21 से 60 वर्ष के बीच है, योजना के लिए पात्र हैं। ऐसे चेक करें किस्त का स्टेटस लाड़ली बहना योजना की किस्त का स्टेटस चेक करने के लिए महिलाएं आधिकारिक वेबसाइट cmladlibahna.mp.gov.in पर जाकर “आवेदन व भुगतान की स्थिति” विकल्प पर क्लिक कर सकती हैं। इसके बाद समग्र आईडी या रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज करना होगा। ओटीपी सत्यापन के बाद भुगतान की पूरी जानकारी स्क्रीन पर दिखाई देगी।