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नर चीतल के अवैध शिकार का भंडाफोड़, 7 आरोपी गिरफ्तार; कोर्ट ने भेजा जेल

वन्यजीव संरक्षण में बड़ी सफलता नर चीतल के अवैध शिकार का खुलासा, सात आरोपी गिरफ्तार, न्यायालय ने भेजा जेल सरकार की सख्ती से वन्यजीव अपराधों पर लग रहा अंकुश, वन्यजीव संरक्षण को मिल रही मजबूती रायपुर,   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार वन, वन्यजीव और जैव विविधता के संरक्षण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वन विभाग और छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम द्वारा अवैध शिकार के विरुद्ध विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। इसी क्रम में कवर्धा परियोजना मंडल ने नर चीतल के अवैध शिकार के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों को न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने के बाद जेल भेज दिया गया। मुखबिर की सूचना पर योजनाबद्ध कार्रवाई वन विकास निगम के बोड़ला परियोजना परिक्षेत्र के भलपहरी बीट स्थित जंगल में शिकारियों ने जाल बिछाकर लगभग तीन वर्ष के नर चीतल का शिकार किया। इसके बाद उसके मांस को पकाकर आपस में बांटने की तैयारी की जा रही थी। मुखबिर से मिली सूचना पर वन विकास निगम की टीम ने तत्काल योजनाबद्ध तरीके से घेराबंदी कर दबिश दी और सभी सात आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। शिकार में प्रयुक्त सामग्री और चीतल का मांस जब्त कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से लगभग 500 ग्राम पका हुआ चीतल का मांस, नायलॉन की रस्सी, तीन कुल्हाड़ियां, स्टील के तार एवं लकड़ी से बने फंदे तथा खून से सना थैला बरामद कर जब्त किया गया। आरोपियों के विरुद्ध वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की गई। सघन निगरानी और गश्त से मिल रही सफलता वन विभाग और वन विकास निगम द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त, सूचना तंत्र को मजबूत करने तथा विशेष निगरानी अभियान चलाने के कारण वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो रहा है। विभाग की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से अवैध शिकार करने वालों के विरुद्ध लगातार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। वन्यजीव संरक्षण के लिए सरकार की स्पष्ट नीति मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्राकृतिक संसाधनों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार वन विभाग आधुनिक निगरानी व्यवस्था, नियमित गश्त और प्रभावी सूचना तंत्र के माध्यम से वन्यजीव अपराधों पर अंकुश लगाने का कार्य कर रहा है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि वन्यजीवों का अवैध शिकार करने या प्राकृतिक संपदा को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।  वन मंत्री कश्यप ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वन्यजीवों के संरक्षण में अपनी भागीदारी निभाएं। यदि कहीं भी अवैध शिकार या वन अपराध की जानकारी मिले तो उसकी सूचना तत्काल वन विभाग को दें, ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई कर प्रदेश की समृद्ध वन्यजीव संपदा और जैव विविधता का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

सीएम योगी ने किया डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी के नवीन परिसर का लोकार्पण

यूपी की नौकरशाही पॉलिसी पैरालिसिस की शिकार नहीं: सीएम योगी  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी के नवीन परिसर का लोकार्पण 464 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 22 एकड़ में तैयार अत्याधुनिक परिसर बनेगा भारत का अग्रणी स्कूल ऑफ पब्लिक लीडरशिप राजनीतिक नेतृत्व विजन देता है, इसे लागू करने की ताकत प्रशासन के पास: मुख्यमंत्री लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश की नौकरशाही अब पॉलिसी पैरालिसिस का शिकार नहीं है, बल्कि पूरी तेजी के साथ विकसित उत्तर प्रदेश के लक्ष्य को हासिल करने के लिए दौड़ने को तैयार है। विकसित भारत की आधारशिला उत्तर प्रदेश बनेगा और इसके लिए प्रदेश के प्रत्येक गांव, कस्बे और वार्ड को आत्मनिर्भर बनाना होगा। राजनीतिक नेतृत्व केवल विजन दे सकता है, लेकिन उसे धरातल पर उतारने की पूरी ताकत प्रशासनिक मशीनरी के पास होती है। इसलिए प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और सकारात्मक कार्यसंस्कृति बेहद जरूरी है। मुख्यमंत्री शुक्रवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी के 464 करोड़ रुपये से अधिक लागत से 22 एकड़ से ज्यादा क्षेत्रफल में निर्मित अत्याधुनिक नवीन परिसर का लोकार्पण करने के उपरांत प्रशासनिक अधिकारियों और प्रशिक्षुओं को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भवन का उद्घाटन किया और परिसर का निरीक्षण कर विभिन्न सुविधाओं व व्यवस्थाओं की जानकारी ली। टीमवर्क व सकारात्मक सोच ही सफलता का आधार सीएम ने कहा कि इस अकादमी को भारत के अग्रणी स्कूल ऑफ पब्लिक लीडरशिप के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। नॉलेज टू डेवलपमेंट, डेवलपमेंट टू पब्लिक ट्रस्ट और पब्लिक ट्रस्ट टू नेशन बिल्डिंग की संकल्पना को साकार करने में यह संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसी उद्देश्य से आधुनिक सुविधाओं से युक्त अकादमी का निर्माण कराया गया है। एकला चलो की सोच या टीम को कमजोर करने की मानसिकता से अच्छे परिणाम नहीं मिल सकते। टीमवर्क, सकारात्मक सोच और नवाचार ही सफलता का आधार हैं। प्रशासनिक अधिकारियों को लगातार सीखते रहने, तकनीक आधारित सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और नवाचार को अपनाने की आवश्यकता है। नौ वर्षों में बदली उत्तर प्रदेश की पहचान मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की पिछले नौ वर्षों की विकास यात्रा स्वयं बहुत कुछ कहती है। शासन व आमजन के बीच प्रशासनिक अधिकारी सबसे महत्वपूर्ण सेतु होते हैं। यदि यह सेतु मजबूत होगा तो सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा और जनता की धारणा भी सकारात्मक बनेगी। वर्ष 2017 से पहले दो-तीन दशकों तक उत्तर प्रदेश की छवि बेहद नकारात्मक हो गई थी। लोग मानने लगे थे कि देश की कोई भी योजना उत्तर प्रदेश में सफल नहीं हो सकती। इसके लिए केवल प्रशासनिक अधिकारी ही नहीं, बल्कि राजनीतिक नेतृत्व भी जिम्मेदार था। अब पहचान का संकट नहीं, टॉप-3 अर्थव्यवस्था में यूपी मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने अपनी नई पहचान बनाई है। आज प्रदेश देश की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बना चुका है। सुरक्षा, सुशासन, क्राउड मैनेजमेंट, टेक्नोलॉजी आधारित सुधार और प्रशासनिक कार्यप्रणाली के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। अब यहां किसी के सामने पहचान का संकट नहीं है। अब कोई इसे बीमारू राज्य नहीं कह सकता। प्रदेश लगातार छह वर्षों से रेवेन्यू सरप्लस स्टेट बना हुआ है। भारत सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में प्रदेश लगातार पहले या दूसरे स्थान पर रहता है। मिशन कर्मयोगी और आई-गॉट प्लेटफॉर्म पर भी यूपी नंबर-1 मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के मिशन कर्मयोगी के तहत आई-गॉट प्लेटफॉर्म पर क्षमता निर्माण के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश पहले काफी पीछे था, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रयासों से अब देश में पहले स्थान पर है। यह हमारे प्रशासनिक तंत्र की कार्यक्षमता का प्रमाण है। विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश के विजन को लेकर प्रदेशभर में व्यापक संवाद अभियान चलाया गया। विधानमंडल से लेकर गांवों की चौपाल तक चर्चा हुई। 300 वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षाविदों और पूर्व अधिकारियों ने विभिन्न वर्गों के बीच जाकर संवाद किया। प्रदेश सरकार के पोर्टल पर 98 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए, जिनके आधार पर विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया गया। तकनीक ने खत्म किया भ्रष्टाचार, गरीब को मिला अधिकार मुख्यमंत्री ने कहा कि टेक्नोलॉजी आधारित सुधारों ने आमजन के जीवन में बड़ा बदलाव किया है। राशन वितरण में ई-पॉस मशीनें लागू होने से शिकायतें समाप्त हो गईं और गरीबों को उनका पूरा अधिकार मिलने लगा। पहले राशन व्यवस्था में भ्रष्टाचार होता था, लेकिन अब पारदर्शिता आई है और जनता संतुष्ट है। गन्ना किसानों को पहले पर्ची, ब्लैक मार्केटिंग और घटतौली जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। अब मोबाइल पर ही पूरी जानकारी उपलब्ध हो जाती है। डीबीटी व्यवस्था लागू होने से पेंशन और अन्य योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों के खाते में पहुंच रहा है और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है। इन्फ्रास्ट्रक्चर में यूपी बना देश का अग्रणी राज्य मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश में सबसे बड़े एक्सप्रेसवे नेटवर्क वाला राज्य है। देश के लगभग 60 प्रतिशत एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश में हैं। फोर लेन और सिक्स लेन सड़क नेटवर्क तेजी से विकसित हुआ है। मेट्रो, एयरपोर्ट, रैपिड रेल, इनलैंड वॉटरवे जैसी परियोजनाएं उत्तर प्रदेश की नई पहचान बन चुकी हैं और यह सब डबल इंजन सरकार की ताकत का परिणाम है। इस अवसर पर वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, मुख्य सचिव एसपी गोयल, पूर्व मुख्य सचिव आर. रमणी, अतुल गुप्ता, आलोक रंजन, अनूप चंद्र पांडेय, दुर्गा शंकर मिश्र, मनोज कुमार सिंह समेत बड़ी संख्या में प्रदेश के सेवारत एवं सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी और प्रशिक्षु अधिकारी मौजूद रहे।

‘सीनियर नेताओं को किया जा रहा इग्नोर’… पंजाब कांग्रेस में रंधावा का बड़ा हमला, हाईकमान पर साधा निशाना

चंडीगढ़  पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक नियुक्तियों और 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर शुरू हुआ विवाद फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने मौजूदा हालात पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर तीन-चार दौर की बैठकों के बावजूद पार्टी में डैमेज कंट्रोल क्यों नहीं हो पा रहा है और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। रंधावा ने कहा कि कांग्रेस के पास अनुभवी और वरिष्ठ नेताओं की कोई कमी नहीं है, इसके बावजूद पार्टी के भीतर लगातार बढ़ रहे मतभेद चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि देश के लोग आज भी इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के दौर की कांग्रेस को पसंद करते हैं, इसलिए पार्टी नेतृत्व को मौजूदा हालात पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। दरअसल, विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत कांग्रेस हाईकमान ने ऑब्जर्वर टीम गठित की थी। इसके बाद दिल्ली में दो से तीन दौर की बैठकों में पंजाब के लगभग सभी वरिष्ठ नेताओं से फीडबैक लिया गया। चन्नी के करीबी सोर्स के मुताबिक नेता ने भरोसा दिलाया कि राहुल गांधी 7 जुलाई को विदेश से लौट आएंगे, उसके बाद चन्नी की उनसे मीटिंग करा दी जाएगी। दूसरी तरफ कल शुक्रवार को दिल्ली में अमित शाह से मिलकर आए गुरदासपुर सांसद सुखजिंदर रंधावा ने हाईकमान पर ही सवाल खड़े किए। एक इंटरव्यू में रंधावा ने कहा- लीडरशिप को देखना चाहिए कि ऐसी बातें क्यों हो रही हैं। इतने पदाधिकारियों के बावजूद डैमेज कंट्रोल क्यों नहीं हो रहा। 3-4 मीटिंग के बाद भी ऐसा होना, यह किसका फेलियर है। इंदिरा गांधी-राजीव गांधी के वक्त 3 जनरल सेक्रेटरी होते थे, अब पता नहीं कितने हैं। सीनियर कांग्रेसियों को नजरअंदाज किया जाता है, इसलिए ऐसी बातें होती हैं। वहीं पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल भी इसको लेकर हरकत में आ गए हैं। वह आज या फिर अगले कुछ ही दिनों में चंडीगढ़ पहुंचकर मौजूदा प्रधान सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व CM सांसद चरणजीत चन्नी से मुलाकात कर सकते हैं। वहीं शुक्रवार को सांसद अमरिंदर राजा वड़िंग को प्रधान बनाए रखने पर पूर्व CM चरणजीत चन्नी ने कांग्रेस हाईकमान को तीखे तेवर दिखाए। शुक्रवार को अपने घर मोरिंडा में 50 से ज्यादा नेता इकट्‌ठे कर हाईकमान का फैसला रिजेक्ट कर दिया। चन्नी गुट ने कहा कि एक हफ्ते के बाद वह हाईकमान से मुलाकात करेंगे और अपना विरोध दर्ज कराएंगे। चन्नी इस वक्त ठीक उसी स्टाइल में पार्टी हाईकमान पर प्रेशर बना रहे हैं, जैसे नवजोत सिद्धू ने प्रधान रहते 2021 में कैप्टन अमरिंदर सिंह को CM की कुर्सी से हटवा दिया था। हालांकि उसके बाद सिद्धू की जगह चन्नी सीएम बन गए। पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि चन्नी के इस स्टैप से कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी सड़क पर आ गई है। अब वह हाईकमान पर प्रेशर बनाने में कामयाब होते हैं या नहीं, लेकिन इसका खामियाजा कांग्रेस को विधानसभा चुनाव 2027 में झेलना ही पड़ेगा। इसे देखते हुए कांग्रेस के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल भी आज चंडीगढ़ आ सकते हैं। 3 पॉलिटिकल एक्सपर्ट से जानिए, चन्नी के फैसले से कांग्रेस को क्या फायदा और नुकसान होगा… राजा वड़िंग को लेकर बहस तेज इसके बावजूद प्रदेश इकाई में असंतोष कम होने के बजाय और खुलकर सामने आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक संगठनात्मक फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के नेतृत्व को लेकर भी बहस तेज हो गई है। पार्टी के भीतर यह चर्चा भी है कि पंजाब कांग्रेस में मौजूदा स्थिति पहले सामने आए कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के टकराव जैसी बनती जा रही है। अब चन्नी और वड़िंग समर्थकों के बीच बढ़ती खींचतान ने हाईकमान की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि कांग्रेस के भीतर यह भी माना जा रहा है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में अब तक लिए गए बड़े संगठनात्मक फैसलों को वापस लेने की परंपरा नहीं रही है। ऐसे में हाल ही में घोषित संगठनात्मक सूची में बड़े बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है। पार्टी नेताओं का तर्क है कि इस स्तर पर बदलाव करने से विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। सात जुलाई को विदेश दौरे पर लौटेंगे राहुल गांधी सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी 7 जुलाई को विदेश दौरे से लौटने के बाद पंजाब कांग्रेस के हालात की समीक्षा कर सकते हैं। इसके साथ ही संभावना जताई जा रही है कि कांग्रेस हाईकमान कुछ वरिष्ठ नेताओं को चंडीगढ़ भेज सकता है। प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल और सह-प्रभारियों की चन्नी तथा वड़िंग गुट के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठक कर संगठन में बढ़ते विवाद को शांत करने और डैमेज कंट्रोल की कोशिश की जा सकती है। पंजाब मामलों के सह प्रभारी सूरज ठाकुर चरणजीत चन्नी से मुलाकात के लिए चंडीगढ़ आ सकते हैं।  

भारत का बड़ा फैसला: पाकिस्तान में छिपे 23 आतंकियों को आतंकी घोषित, आतंक के खिलाफ सख्त संदेश

  नई दिल्ली केंद्र सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है. गृह मंत्रालय ने एक गजट नोटिफिकेशन जारी करके 23 आतंकियों को गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून यानी UAPA के तहत आतंकवादी घोषित कर दिया है. इन सभी 23 नामों को UAPA की चौथी अनुसूची में शामिल किया गया है. इनमें से ज्यादातर आतंकी जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हैं और पाकिस्तान या पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में रह रहे हैं।   इस लिस्ट में मसूद इलियास कश्मीरी, मोहम्मद मुसादिक, मुफ्ती मोहम्मद असगर खान और हाफिज अब्दुल शकूर जैसे नाम शामिल हैं, जो 2016 में नगरोटा स्थित भारतीय सेना शिविर पर हुए हमले और 2022 में जम्मू के सुंजवां में सुरक्षा बलों पर हुए हमले से जुड़े बताए गए हैं।  लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े अब्दुल रऊफ और हाफिज खालिद वलीद को हाफिज मोहम्मद सईद के करीबी सहयोगी के रूप में बताया गया है. सबसे चौंकाने वाला नाम मोहम्मद शहीद फैसल उर्फ उस्ताद उर्फ जाकिर का है. गजट के मुताबिक उसका स्थायी पता बेंगलुरु, कर्नाटक का है, जबकि वह अभी पाकिस्तान के रावलपिंडी में रह रहा है।  सरकार का कहना है कि वह लश्कर-ए-तैयबा, अल-कायदा और ISIS से जुड़े मॉड्यूल से संबंध रखता है. उस पर सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को भर्ती करने, हथियारों की ट्रेनिंग दिलवाने और आतंकी गतिविधियों के लिए पैसा जुटाने का आरोप है।  गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, केंद्र सरकार का मानना है कि संबंधित व्यक्ति आतंकवाद में शामिल है. इसी आधार पर UAPA की धारा 35 के तहत उसका नाम कानून की चौथी अनुसूची में शामिल किया गया है।  इस सूची में शामिल होने के बाद इन आतंकियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता आसान हो जाता है. यह अधिसूचना गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव राकेश राठी ने जारी की है।  पाकिस्तान के इन खूंखार आतंकियों का नाम साल 2016 में नगरोटा में आर्मी कैंप पर हुए हमले का मास्टरमाइंड हाफिज मोहम्मद सईद ही था। इसके अलावा सुजवान मिलिटरी स्टेशन पर हमले में भी उसका नाम आया था। गृह मंत्रालय के नोटिफिकेशन में इनका नाम अब्दुर रऊफ, हाफिज खालिद वलीद उर्फ और राणा इफ्तिकार बताया गया है। राणा इफ्तिकार जिहादी संगठनों की बागडोर संभालता है। इसके अलावा युवाओं को भटकाकर आतंक के रास्ते पर लाता था। इसके अलावा अब्दुल रऊफ लश्कर और जमात-उद-दवा का सदस्य है। वह आतंकी गतिविधियों की योजना बनाने, फंड इकट्ठा करने का काम करता है। 51 साल का हाफिज खालिद वलीद हाफिज सईद के अंडर में ही काम करता है और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देता है। इसके अलावा इस लिस्ट में मसूद इलियास कश्मीरी का नाम है जिसे मुफ्ती मसूद इलियास के नाम से भी जानते हैं। वह पीओके के रावलकोट में रहता है और जैश-ए-मोहम्मद में नियुक्तियां करता है। इसके अलावा भारत में आतंकियों की घुसपैठ कराता है। भारत में हुए आतंकी हमले में भी उसका नाम शामिल है। नोटिफिकेशन के मुताबिक मोहम्मद मुसादिक उर्फ हमजा पाकिस्तान के नारोवाल जिले के शकारगढ़ में रहता है और कश्मीर में घुसपैठ खरने वाले जैश-ए-मोहम्मद के गुट की मदद करता है। वह सीमा पार ड्रोन के जरिए हथियार भी भेजता है और जैश के लिए साइबर हेड का भी काम करता है। वह ऑनलाइन माध्मय से भी युवाओं को आतंकी गतिविधियों की ओर आकर्षित करता है। अबू साद के नाम से जाना जाने वाला मुफ्ती मोहम्मद असगरर खान अब्बासपुर में रहता है और नगरोटा में सेना के कैंप पर हुए हमले में शामिल था। इसके अलावा 56 साल के हाफिज अब्दुल शकूर का भी इस लिस्ट में नाम है। नोटिफिकेशन में क्या कहा गया? गृह मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन में सईद के करीबी साथियों के तौर पर अब्दुल रऊफ, हाफिज खालिद वलीद और राणा इफ्तिखार की पहचान की है। दस्तावेज में कहा गया है, "54 साल के राणा इफ्तिखार जिहाद-विरोधी संगठनों के बीच तालमेल बिठाता है, युवाओं को आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए उकसाता है और हाफिज सईद का करीबी साथी है।" इसमें आगे बताया गया, "52 साल का अब्दुल रऊफ लश्कर और जमात-उद-दावा से जुड़ा है। वह आतंकवादी गतिविधियों की योजना बनाने और उनमें तालमेल बिठाने तथा फंड इकट्ठा करने के काम में शामिल है। वह हाफिज सईद की सीधी कमान में लश्कर के मुख्य आतंकवादियों में से एक है।" इसमें आगे कहा गया है, "51 साल का हाफिज खालिद वलीद, हाफिज सईद की सुरक्षा में रहकर आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के इरादे से काम करता है और कई आतंकवादी घटनाओं का मास्टरमाइंड है।" एनआईए को मिलेगी ताकत सूची में आतंकवादियों के नाम शामिल होने से नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) को उनके फंड को रोकने, हथियारों की बिक्री पर रोक लगाने और उनकी संपत्ति जब्त करने की शक्ति मिलेगी। 2019 में आतंकवाद-रोधी कानून में संशोधन करके व्यक्तिगत आतंकवादियों को भी सूची में शामिल करने का प्रावधान किया गया था। संशोधन से पहले केवल समूहों को ही आतंकवादी संगठनों के रूप में सूचीबद्ध किया जा सकता था। 80 आतंकवादियों की लिस्ट शनिवार को पाकिस्तान में रहने वाले 23 आतंकवादियों को सूची में जोड़ा गया, जिनमें जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों पर हुए हमलों में शामिल लोग भी शामिल हैं। इसके साथ ही सूची में शामिल आतंकवादियों की कुल संख्या 80 हो गई है। केंद्र सरकार ने जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों मसूद इलियास कश्मीरी, मोहम्मद मुसादिक उर्फ डॉक्टर, मुफ्ती मुहम्मद असगर खान उर्फ अबू साद, हाफिज अब्दुल शकूर उर्फ कारी जर्रार, अब्दुल्ला जिहादी, गुलाम फरीद, मौलाना इमदाद उल्लाह मक्की और वसीम नूर जट को सूची में शामिल किया है। लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों फिरदौस अहमद भट, हारून रशीद गनई, बिलाल अहमद मीर, आबिद कय्यूम लोन, नजीर अहमद गुज्जर, अब्दुल रऊफ उर्फ हाफिज अब्दुल रऊफ, अशफाक अहमद, हाफिज खालिद वलीद, मौलाना सैफुल्ला खालिद, मोहम्मद याकूब, मौलाना यूसुफ तैबी, ओवैस फारूक, कारी याकूब शेख, राणा इफ्तिखार, मोहम्मद शाहिद फैसल (जो अल-कायदा और ISIS से भी जुड़ा है) को भी सूची में शामिल किया गया है।

मध्यप्रदेश में बारिश का कहर: हरदा के कई गांवों का संपर्क टूटा, आष्टा के घरों में घुसा पानी, हाईवे बंद

भोपाल  आष्टा क्षेत्र में पार्वती और तप नदी का जलस्तर बढ़ने से कई गांवों के घरों में पानी घुस गया। वहीं हरदा में भी नदियां उफान पर हैं, जिससे कई गांवों का संपर्क टूट गया है। मध्य प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश से कई जिलों में हालात बिगड़ गए हैं। नदियां और नदी-नाले उफान पर हैं, जिससे कई गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। कई इलाकों में घरों और खेतों में पानी भर गया है, जबकि कई सड़कों और पुलों पर पानी बहने से सम्पर्क टुटा।  हरदा में तेज बारिश के कारण कई गांवों का संपर्क कट गया है। ग्राम मांदला के पास कालीमाचक नदी का पानी पुल से करीब तीन फीट ऊपर बह रहा है, जिससे नर्मदापुरम-खंडवा स्टेट हाईवे बंद हो गया है। खंडवा में नाले में बाढ़, आवागमन पूरी तरह बंद खंडवा में पिछले कई घंटों से झमाझम बारिश जारी है। रेड अलर्ट के बीच यहां चार इंच तक बारिश होने का अनुमान है। लगातार हो रही तेज बारिश के चलते खंडवा जिले के किल्लौद ब्लॉक के ग्राम गरबड़ी स्थित नाले में बाढ़ आ गई। उफनते नाले के कारण खिरकिया मार्ग पर आवागमन पूरी तरह बंद हो गया। इससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि पानी का बहाव कम होने तक नाले को पार करने की कोशिश न करें और सुरक्षित स्थानों पर ही रुकें। लगातार बारिश के कारण क्षेत्र के कई निचले इलाकों में भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन हालात पर लगातार नजर रखे हुए है। आष्टा में पार्वती, पपनास और नेवज नदी का जलस्तर बढ़ा आष्टा ब्लॉक में शुक्रवार रात से लगातार मूसलाधार बारिश हो रही है। पार्वती, पपनास और नेवज नदी का जलस्तर बढ़ गया है। खाचरोद, मेहतवाड़ा, मैना, कोठरी, भंवरा, बागैर, सिंगारचोरी, हराजखेड़ी, ढकनी और मुगली समेत कई गांवों में घरों में पानी घुस गया है। लगातार बारिश से खेत भी तालाब जैसे नजर आने लगे हैं। वहीं, ग्राम पंचायत बड़घाटी-रामापुरा में बाढ़ का पानी खेतों तक पहुंचने से किसानों की सोयाबीन फसल को नुकसान हुआ है। सीहोर के अमलाहा-गोलूखेड़ी मार्ग पर अजनाल नदी का पानी पुल के ऊपर से बह रहा है, जिससे आवागमन प्रभावित हो गया है। बता दें, इंदौर-उज्जैन समेत प्रदेश के 19 जिलों में शनिवार को अति भारी या भारी बारिश की संभावना है। तापमान में भारी गिरावट, हवाओं में 100% तक नमी पूर्व मौसम वैज्ञानिक और मौसम–पर्यावरण विश्लेषक शैलेन्द्र कुमार नायक के अनुसार, राज्य के अधिकांश भागों में व्यापक बादल छाए रहने और उच्च नमी के कारण दिन के तापमान में सामान्य से 2 से 6 डिग्री सेल्सियस तक की उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। सुबह के समय अधिकांश जिलों में सापेक्ष आर्द्रता 90% या उससे अधिक रही। जबकि मंडला में यह 100%, जबलपुर में 98%, तथा भोपाल एवं इंदौर में 92% दर्ज की गई।     खंडवा और हरदा में भारी से अति भारी बारिश का रेड अलर्ट।     19 जिलों में ऑरेंज और कई जिलों में येलो अलर्ट जारी।     40-50 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना।     गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने का खतरा।     अगले 72 घंटे तक प्रदेश में मानसून सक्रिय रहने के संकेत। पिछले 24 घंटों में कहां कितनी हुई बारिश? एमपी के कुछ इलाकों में भारी बारिश दर्ज की गई है। सबसे अधिक बारिश राजगढ़ जिले के पचोर में दर्ज की गई है। यहां 24 घंटे में 168 मिली मीटर अर्थात 6.6 इंच से अधिक बारिश हुई है। इसी प्रकार बालाघाट में 143.8 एमएम, किरनापुर में 140.6 एमएम, लालबर्रा में 138.2 एमएम, खातेगांव में 120 एमएम, केवलारी में 105.2 एमएम बारिश दर्ज की गई हैं उत्तर भारत पहुंचा मॉनसून, दिल्ली-यूपी-बिहार से लेकर पंजाब-हरियाणा तक कैसी होगी बरसात? जम्मू-कश्मीर और हिमाचल में बादल फटा जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में दो अलग-अलग जगहों पर बादल फटने से भारी नुकसान हुआ है। वहीं, हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में दो और चंबा में एक स्थान पर बादल फटने से फसलें, सड़कें और संपर्क मार्ग पूरी तरह तबाह हो गए हैं। मंडी जिले में पहाड़ी से गिरे पत्थर की चपेट में आने से एक महिला की मौत भी हो गई है। राज्य में फिलहाल 35 सड़कें बंद हैं और 127 बिजली ट्रांसफार्मर ठप हैं। प्रमुूख शहरों में बारिश के आंकड़े     पूर्वी मध्य प्रदेश जिसमें नरसिंहपुर में सर्वाधिक 83.0 मिमी, सिवनी में 67.8 मिमी, टीकमगढ़ में 45.0 मिमी, उमरिया में 40.2 मिमी और दमोह में 38.0 मिमी वर्षा दर्ज की गई।     पश्चिमी मध्य प्रदेश जिनमें राजगढ़ में 48.0 मिमी, खंडवा में 43.0 मिमी, रतलाम में 37.0 मिमी, उज्जैन में 32.4 मिमी और राजधानी भोपाल में 17.8 मिमी बारिश हुई। जिलों के अनुसार मौसम विभाग का अलर्ट खंडवा, हरदा और देवास जिलों में अति भारी बारिश का रेड अलर्ट दिया गया है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के भीतर खंडवा, हरदा और देवास जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में 4 से 8 इंच तक भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है। एमपी के 19 जिलों में अति भारी बारिश का ओरेंज अलर्ट प्रदेश के 19 जिलों में ओरेंज अलर्ट जारी है। इनमें धार, बड़वानी, खरगोन, देवास, बुरहानपुर और बैतूल में अति भारी बारिश हो सकती है। इसके साथ ही रतलाम, उज्जैन, राजगढ़, रायसेन, नर्मदापुरम, सागर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, डिंडौरी और अनूपपुर में भी गरज-चमक के साथ भारी बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है। राजधानी सहित प्रदेश के इन इलाकों में यलो अलर्ट भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, इंदौर, आगर, भिंड, मंदसौर, नीमच, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, दतिया, मुरैना, सतना, श्योपुरकलां, शहडोल, सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, उमरिया, विदिशा, पन्ना, दमोह, शाजापुर, मंडला, कटनी, छतरपुर, निवाड़ी, टीकमगढ़ और मैहर समेत कई जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन इलाकों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। खरीफ फसलों के लिए वरदान, पर सावधानी जरूरी बंगाल की खाड़ी से आ रही प्रचुर नमी और निम्न दाब प्रणाली के कारण यह मानसूनी सक्रियता बनी हुई है। यदि यही स्थिति अगले कुछ दिनों … Read more

मध्यप्रदेश में तबादला एक्सप्रेस: 9 IPS अफसरों के ट्रांसफर, जानें किसे मिली कौन-सी नई जिम्मेदारी

भोपाल  प्रदेश सरकार ने शुक्रवार देर रात नौ IPS अधिकारियों के तबादले कर दिए। रुचिवर्धन मिश्र पुलिस महानिरीक्षक भोपाल ग्रामीण जोन होंगी। वहीं, हरिनारायण चारी अब पुलिस मुख्यालय में एससीआरबी के स्थान पर प्रशासन का दायित्व संभालेंगे‌। शहडोल के पुलिस अधीक्षक रामजी श्रीवास्तव की जगह कुमार अग्रवाल और शाजापुर पुलिस अधीक्षक यशपाल सिंह राजपूत के स्थान पर प्रियंका शुक्ला को भेजा गया है।गृह विभाग द्वारा जारी किए गए आदेश के अनुसार चंद्रशेखर सोलंकी पुलिस महानिरीक्षक विशेष सत्र बल इंदौर रेंज को पुलिस महानिरीक्षक नर्मदापुरम जोन बनाया है। यशपाल सिंह राजपूत पुलिस अधीक्षक रेल इंदौर और रामजी श्रीवास्तव सहायक पुलिस महानिरीक्षक पुलिस अकादमी भौंरी होंगे। विशेष पुलिस महानिदेशक प्रशासन आदर्श कटियार को दूरसंचार का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। वहीं, अनुराग पुलिस महानिरीक्षक इंदौर ग्रामीण जोन के पास पुलिस महानिरीक्षक विशेष सशस्त्र बल और आइएपीटीसी इंदौर का अतिरिक्त प्रभार रहेगा। अरविंद कुमार तिवारी पुलिस अधीक्षक इंदौर रेल के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त होंगे। भोपाल के पूर्व पुलिस कमिश्नर को मिली नई जिम्मेदारी इस फेरबदल में सबसे बड़ा नाम भोपाल के पूर्व पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्र का है. उन्हें अब पुलिस मुख्यालय में आईजी के पद पर तैनात किया गया है. इसके साथ ही तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी रुचिवर्धन मिश्र को भोपाल (ग्रामीण) जोन की कमान सौंपी गई है. वह अपनी कार्यशैली के लिए भी प्रसिद्ध रहे हैं. चंद्रशेखर सोलंकी नर्मदापुरम जोन के आईजी बनाए गए हैं. वहीं सिमाला प्रसाद को खरगोन रेंज का डीआईजी नियुक्त किया गया है. इसके अलावा मिथिलेश शुक्ला को सागर जोन की कमान मिली है।  इन जिलों के बदले गए एसपी (SP) गृह विभाग द्वारा जारी लिस्ट के अनुसार शहडोल और शाजापुर जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) को बदल दिया गया है. प्रियंका शुक्ला को अब शाजापुर का नया एसपी नियुक्त किया गया है. इसके अलावा संजय कुमार अग्रवाल को शहडोल जिले के एसपी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।  किस IPS को मिली कौन-सी जिम्मेदारी शासन स्तर पर हुए बड़े फेरबदल को आगामी कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक तालमेल को बेहतर करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है. सभी अधिकारियों को जल्द से जल्द अपने नए पदों का कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं।  किसे मिली कौन-सी जिम्मेदारी: चंद्रशेखर सोलंकी: इन्हें आईजी, नर्मदापुरम ज़ोन की जिम्मेदारी दी गई है. मिथिलेश शुक्ला: इन्हें आईजी, सागर जोन का नया कमान संभाला गया है. सिमाला प्रसाद: इन्हें डीआईजी (DIG), खरगोन रेंज के पद पर नियुक्त किया गया है. भोपाल पुलिस कमिश्नर रहे हरिनारायण चारी मिश्र PHQ में IG (प्रशासन) बने हैं. रुचिवर्धन मिश्र को IG, भोपाल (ग्रामीण) जोन की जिम्मेदारी दी गई है. प्रियंका शुक्ला को एसपी, शाजापुर की जिम्मेदारी मिली है. संजय कुमार अग्रवाल एसपी, शहडोल बनाए गए हैं.

सिंधु जल विवाद में चीन की एंट्री क्यों? भारत के फैसले के बाद पाकिस्तान ने ड्रैगन का क्यों लिया सहारा

नई दिल्ली  पाकिस्तान दशकों से सिंधु से अपनी प्यास बुझा रहा था. सिंधु जल समझौते से फायदा उठा रहा था. मगर वह अपनी औकात भूल गया. उसे यह याद नहीं रहा कि सिंधु जल समझौते की चाबी भारत के पास है. पाकिस्तान ने पहलगाम अटैक करवाकर बहुत बड़ी गलती कर दी. इसके बाद भारत ने पाकिस्तान को दोतरफा मार मारी. पहले तो ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान को गहरे जख्म दिए. उसके बाद सिंधु जल समझौते को तोड़कर पाकिस्तान के होश ठिकाने लगा दिए. भारत ने जब से सिंधु का पानी रोका है, तब से पाकिस्तान की हालत खराब है. वह पानी के लिए तड़प रहा है. पाकिस्तानी नेताओं के बयान में बार-बार सिंदु का दर्द झलक रहा है. अलग-अलग मंचों पर सिंधु का राग अलाप रहा है. जब इन सबसे भारत पर कोई असर नहीं पड़ा तो पाकिस्तान अब चीन के पल्लू में जा छिपा है. पाकिस्तान ने अबकी बार सिंधु जल विवाद पर सीधे चीन को घसीट लिया है।  दरअसल, भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी के पानी को लेकर विवाद पुराना है. लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने साफ कर दिया है कि सीमा पार आतंकवाद जारी रहने तक सिंधु जल संधि पर पहले जैसी व्यवस्था नहीं चल सकती. इसके बाद पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है. अब पाकिस्तान ने इस पूरे विवाद में चीन का नाम भी जोड़ दिया है. पाकिस्तान का कहना है कि हिमालय से निकलने वाली नदियां सिर्फ भारत और पाकिस्तान की नहीं हैं, बल्कि चीन भी इनका बड़ा हितधारक है. सवाल यह है कि आखिर पाकिस्तान ने अचानक चीन को इस विवाद में क्यों घसीटा? पाकिस्तान की नई रणनीति क्या है? सबसे पहले जानते हैं कि पाकिस्तान ने अब चीन का नाम कैसे और क्यों लिया है. दरअसल, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि हिमालय से निकलने वाली नदियां कुदरत की देन हैं. ये नदियां सिंधु से लेकर मेकांग तक कई देशों को पानी देती हैं. उनका कहना है कि चीन से भी कई बड़ी नदियां निकलती हैं, इसलिए पानी का मुद्दा पूरी मानवता से जुड़ा है और चीन की भूमिका भी अहम है. यानी पाकिस्तान यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि यह सिर्फ भारत-पाकिस्तान का मामला नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र का मुद्दा है।  पाकिस्तान का पूरा बयान क्या है? पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा, ‘चीन के बारे में दो सवाल थे. सबसे पहले हिमालयी क्षेत्र से निकलने वाली नदियों का पानी कुदरत की एक बड़ी देन है. हिमालयी नदी प्रणाली अल्लाह की एक नेमत है, जो सिंधु से लेकर मेकांग तक कई देशों को पानी देती है. चीन की नदियां भी वहीं से निकलती हैं. इसलिए, यह पूरी इंसानियत की साझा विरासत है. पानी से जुड़े बड़े मुद्दों पर चीन का रवैया हमेशा सकारात्मक रहेगा, क्योंकि वह सिर्फ़ दक्षिण एशिया (भारत और पाकिस्तान) में बहने वाली नदियों के मामले में ही नहीं, बल्कि हिमालय से चीन और सुदूर पूर्व (हमारे पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों) की ओर बहने वाली विशाल नदी प्रणालियों के मामले में भी एक अहम पक्षकार है।  चीन का नाम क्यों लिया? अब सवाल है कि आखिर पाकिस्तान ने चीन का नाम क्यों लिया. तो इसका जवाब सिंपल है- प्रेशर यानी दबाव. जी हां, सिंधु जल पर पाकिस्तान छटपटा रहा है. भारत ने जब से पानी रोका है, तब से वह बिलबिला रहा है. वह हर कोशिश कर रहा है मगर सिंधु का एक कतरा तक नहीं मिल पा रहा है. भारत साफ कर चुका है, पहले आतंकाद रोको, तभी पानी मिलेगा. इसलिए पाकिस्तान इस समय कूटनीतिक दबाव में है. भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को कई मंचों पर घेरा है. ऐसे में पाकिस्तान चाहता है कि चीन खुलकर उसके पक्ष में बोले और भारत पर दबाव बने।  पाकिस्तान को चीन से क्या उम्मीद यह हकीकत है कि चीन बहुत समय से पाकिस्तान का सदाबहार दोस्त है. यूं कहिए कि वह पाकिस्तान का सबसे करीबी रणनीतिक साझेदार है. दोनों देशों के बीच चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) जैसी बड़ी परियोजनाएं चल रही हैं. इसलिए पाकिस्तान को उम्मीद है कि चीन उसके समर्थन में आवाज उठा सकता है. मगर बीते कुछ समय से भारत-चीन के रिश्ते भी बेहतर हुए हैं. अमेरिका की टैरिफ नीति के चलते भारत और चीन में नजदीकियां बढ़ी हैं. ऐसे में पाकिस्तान का चीन खुलकर साथ दे और भारत का विरोध करे, इसकी संभावना बहुत कम है. इसलिए यहां पाकिस्तान की दाल गलती नहीं दिख रही है।  चीन क्यों नहीं देगा दखल भारत-पाकिस्तान के इस सिंधु जल मसले पर चीन के न बोलने की एक और वजह है. भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल विवाद का आधार सिंधु जल संधि है. यह समझौता सिर्फ भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ था. इसमें चीन किसी भी रूप में पक्षकार नहीं है. इसलिए चीन चाहकर भी दो देशों के मसले में मौजूदा हालात में न बोलेगा और न दखल देगा. वैसे भी लीगली भी देखें तो सिंधु जल संधि में चीन की कोई भूमिका नहीं है।  पाकिस्तान को किस बात का डर? पाकिस्तान के लिए सिंधु का पानी संजीवनी से कम नहीं है. पाकिस्तान बहुत हद तक सिंधु के पानी पर जिंदा है. पाकिस्तान की खेती और पीने के पानी का बड़ा हिस्सा सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है. अगर भारत संधि के तहत मिले अपने अधिकारों का अधिकतम इस्तेमाल करता है या परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाता है, तो पाकिस्तान को भविष्य में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता हो सकती है. इस बार तो वैसे भी बाढ़ ने पाकिस्तान को बचा लिया. मगर बाढ़ नहीं आती तो पाकिस्तान में अभी त्राहिमाम-त्राहिमाम हो रहा होता।  सिंधु जल पर भारत का रुख क्या है? सिंधु जल समझौते पर भारत का रुश साफ है. भारत का कहना है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते. पाकिस्तान जब तक आतंकवाद का रास्ता नहीं छोड़ता, तब तक उसे एक बूंद भी सिंधु का पानी नहीं मिलेगा. भारत का तर्क है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद पर प्रभावी कार्रवाई नहीं करता, तब तक द्विपक्षीय संबंध सामान्य नहीं हो सकते. भारत यह भी कह … Read more

Monsoon Session 2026: 20 जुलाई से संसद सत्र की संभावना, PM-CM पद से जुड़े अहम विधेयक पर हो सकती है चर्चा

नई दिल्ली संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो सकता है। सूत्रों का कहना है कि इस बार मॉनसून सत्र तीन सप्ताह तक चल सकता है। हालांकि संसदीय कार्य संबंधी मंत्रिमंडलीय समिति में इसपर कोई फैसला नहीं किया गया है। आम तौर पर चार सप्ताह तक मॉनसून सत्र चलता है और इसमें 20 बैठकें होती हैं। हालांकि इस बार बैठकों की संख्या कम भी हो सकती है। बता दें कि पश्चिम बगाल, असम और पुदुच्चेरी में बीजेपी की जीत और कई पार्टियों में चल रही अंदरूनी कलह के बीच यह सत्र हो रहा है। ऐसे में सदन में कई मामलों को लेकर हंगमा होने के भी आसार हैं। टीएमसी के 20 सांसदों ने एनडीए को समर्थन करने का ऐलन कर दिया है। इसके अलावा शिवसेना यूबीटी के 9 में से 6 सांसद शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए हैं। आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा के साथ सात सांसद पहले ही बीजेपी के साथ आ गए हैं। अब एनसीपी (SP) में भी टूट के कयास लगाए जा रहे हैं। टीएमसी और शिवसेना सांसदों पर भी होगा फैसला लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को टीएमसी के 20 और शिवसेना यूबीटी के 6 सांसदों को लेकर भी फैसला करना है। इन सांसदों ने उन्हें अलग गुट की मान्यता देने का प्रस्ताव लोकसभा स्पीकर को दिया है। जानकारों का कहना है कि सत्र शुरू होने से पहले भी इसपर फैसला हो सकता है। राज्यसभा में सत्तापक्ष के समीकरण काफी मजबूत हो गए हैं। महिला आरक्षण विधेयक फिर पेश कर सकती है सरकार पिछले सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक गिर गया था। लोकसभा में संख्या कम होने की वजह से निचले सदन में ही विधेयक पारित नहीं हो पाए थे। हालांकि अगर इस बार मॉनसून सत्र से पहले ही स्पीकर फैसला करते हैं तो सत्तापक्ष दोनों सदनों में मजबूत हो सकता है। ऐसे में सरकार महिला आरक्षण संविधान संशोधन विधेयक 2029 को लोकसभा में पेश कर सकती है। जानकारी के मुताबिक सरकार इन विधेयकों का मसौदा फिर से तैयार कर रही है। इसमें सभी राज्यों की लोकसभा सीटों को 50 फीसदी बढ़ाने का फैसला किया जा सकता है। दक्षिण के राज्यों का कहना था कि जनसंख्या के आधार पर सीटों के निर्धारण से उनका प्रतिनिधित्व संसद में कमजोर हो जाएगा। इसी समस्या को टालने के लिए सीटों को 50 फीसदी बढ़ाने का विधेयक लाया जा सकता है। पीएम-सीएम जेल वाला बिल सरकार इस सत्र में पीएम और सीएम की कुर्सी छीनने वाला बिल भी ला सकती है। बताया जा रहा है कि संशोधन विधेयक के लिए ऐसे प्रावधान किए जा सकते हैं कि सजा होने पर सीएम और पीएम की कुर्सी छीन ली जाए। इसके अलावा कानून का दुरुपयोग रोकने के लिए अन्य सिफारिशें भी की जा सकती है। एक देश एक चुनाव बिल को पारित कराने के लिए भी सरकार जोर लगा सकती है। इसके अलावा विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल, एफसीआरए बिल, एंटी डोपिंग बिल भी पेश किया जा सकता है।

PM मोदी के बाद कौन संभाल सकता है कमान? अमित शाह, योगी समेत कई नामों पर सर्वे

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साल 2014 से प्रधानमंत्री के तौर पर देश की कमान संभाल रहे हैं। हाल ही में वह इस पद पर सबसे लंबे समय तक बने रहने का रिकॉर्ड बनाया है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में यह हमेशा चर्चा का मुद्दा रहता है कि भारतीय जनता पार्टी में उनके बाद इस पद को कौन संभाल सकता है। हालांकि, भाजपा नेता पीएम मोदी के ही लगातार नेतृत्व की बात करते रहे हैं। हाल ही में उनके उत्तराधिकारी को लेकर एक पोल किया गया था। लाइव हिन्दुस्तान की तरफ से जून में पोल किया गया था, जिसमें पीएम मोदी के संभावित उम्मीदवार को लेकर जनता की राय पूछी गई थी। आंकड़े बताते हैं कि इस रेस में सबसे आगे उत्तर प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चल रहे हैं। पोल में शामिल आधे से ज्यादा प्रतिभागियों ने उनके नाम का चुनाव किया है। क्या रहे नतीजे पोल के मुताबिक, 58 फीसदी लोगों ने योगी आदित्यनाथ के नाम पर मुहर लगाई। जबकि, 22 प्रतिशत लोग केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के समर्थन में थे। 5 प्रतिशत लोगों ने नितिन गडकरी और 3 फीसदी लोगों ने कृषि मंत्री शिवराज सिंह के नाम का विकल्प चुना। जबकि, 9 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जिन्होंने किसी और नेता के विकल्प का चुनाव किया। PM मोदी के नाम रिकॉर्ड मोदी 10 जून को भारत के निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में लगातार सबसे लंबे समय तक पद पर बने रहने वाले व्यक्ति बन चुके हैं। वह लगातार 4,399 दिन से इस पद पर हैं और उन्होंने पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ दिया। नेहरू 13 मई 1952 से 27 मई 1964 तक प्रधानमंत्री रहे थे। मोदी मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में भी 9000 से भी अधिक दिन तक कार्य कर चुके हैं। उन्होंने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री के रूप में नौ जून 2024 को शपथ ली थी। बने रहेंगे पीएम बीते साल अप्रैल में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पीएम मोदी के रिटायरमेंट की अटकलों को खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था कि 2029 के लोकसभा चुनाव के बाद भी मोदी ही देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। उन्होंने कहा था, 'यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तराधिकारी के बारे में सोचने का सही समय नहीं है, क्योंकि 2029 में मोदी दोबारा प्रधानमंत्री बनेंगे।' योगी आदित्यनाथ का क्या था जवाब बीते साल पीटीआई से बातचीत में भावी पीएम उम्मीदवार को लेकर आदित्यनाथ से सवाल किया गया था। तब उन्होंने कहा था, 'देखिए, मैं एक राज्य का मुख्यमंत्री हूं। पार्टी ने मुझे उत्तर प्रदेश की जनता के लिए यहां लगाया है और राजनीति मेरा फुल टाइम जॉब नहीं है। फिलहाल, हम यहां काम कर रहे हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि मैं योगी हूं।'

राजनाथ सिंह के इस्तीफे की अटकलों के बीच सियासी हलचल, क्या अमित शाह को मिलेगी नई जिम्मेदारी?

नई दिल्ली केंद्र सरकार में कैबिनेट फेरबदल की अटकलें तेज हैं। हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर सरकार की तरफ से कुछ नहीं कहा गया है। उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में होने वाले चुनाव को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ बड़े फैसले ले सकते हैं। इस बात की संभावना जताई जा रही है कि इस नई कैबिनेट में अमित शाह गुट के नेताओं को अधिक जगह मिल सकती है। आधिकारिक तौर पर केंद्र सरकार में नंबर-2 की हैसियत रखने वाले राजनाथ सिंह के कैबिनेट से इस्तीफा देने की संभावना है। ऐसा इसलिए क्योंकि भाजपा की तरफ से वह अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार बनाए जा सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीजेपी की नई टीम लगभग तैयार है। कल रात केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बड़ी बैठक की है। अब सबकी नजरें संभावित कैबिनेट विस्तार और विभागों के बंटवारे पर टिकी हैं। यह भी चर्चा है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी सहित कुछ केंद्रीय मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं या उन्हें नई जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। राजनाथ सिंह को राष्ट्रपति बनाने की क्यों अटकलें? 2027 में मौजूदा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का कार्यकाल खत्म होने जा रहा है। इसी साल उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। यह राज्य भाजपा के लिए काफी अहम है। इसलिए बीजेपी देश के अगले राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर राजनाथ सिंह को आगे कर सकती है। राजनाथ सिंह को बीजेपी के सबसे अनुभवी और सर्वमान्य नेताओं में से एक माना जाता है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, केंद्रीय गृह मंत्री और मौजूदा रक्षा मंत्री तक का उनका राजनीतिक सफर उन्हें देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के लिए एक मजबूत दावेदार के तौर पर पेश करता है। लखनऊ सीट से कौन लड़ेगा चुनाव? राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि अगर राजनाथ सिंह राष्ट्रपति पद के लिए चुने जाते हैं, तो उनकी पारंपरिक लखनऊ लोकसभा सीट खाली हो सकती है। उनके बेटे नीरज सिंह के इस सीट से चुनाव लड़ने की संभावना पर भी चर्चा हो रही है। अमित शाह को भी मिलेगा प्रमोशन? कैबिनेट फेरबदल की संभावना के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर भी चर्चा तेज है। कुछ जानकारों का मानना ​​है कि आगामी फेरबदल में उन्हें उप-प्रधानमंत्री बनाया जा सकता है। अमित शाह अभी सरकार, संगठन और प्रशासनिक फैसलों में बहुत अहम भूमिका निभा रहे हैं। इसलिए उन्हें उप-प्रधानमंत्री बनाया जाए या नहीं, इससे उनपर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। हां, अगर अमित शाह को उप-प्रधानमंत्री बनाया जाता है तो इसे भविष्य के नेतृत्व को लेकर बीजेपी की तरफ से एक अहम राजनीतिक संकेत माना जाएगा।