samacharsecretary.com

UP में 455 लेखपालों की पदोन्नति, योगी सरकार ने राजस्व निरीक्षक के पद पर दी तरक्की

योगी सरकार ने 455 लेखपालों को दी पदोन्नति, बने राजस्व निरीक्षक – राजस्व परिषद ने ऑनलाइन डीपीसी से पूरी की प्रक्रिया, जल्द जारी होंगे तैनाती के आदेश राजस्व निरीक्षक बनने से तहसील स्तर पर मजबूत होगा राजस्व कार्यों का पर्यवेक्षण लखनऊ योगी सरकार ने प्रदेश में राजस्व प्रशासन को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सीएम योगी के निर्देश पर उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद बोर्ड ने चयन वर्ष 2025-26 के तहत ऑनलाइन विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की प्रक्रिया पूरी करते हुए प्रदेश के 455 लेखपालों को राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) के पद पर पदोन्नति प्रदान की है। पदोन्नत कार्मिकों की तैनाती के आदेश जल्द जारी किए जाएंगे। तहसील और क्षेत्रीय स्तर पर राजस्व कार्यों की निगरानी एवं पर्यवेक्षण और होगा प्रभावी उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद बोर्ड के चेयरमैन बीएल मीणा ने बताया कि पदोन्नति की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से संपन्न कराई गई। निर्धारित पात्रता मानकों और सेवा अभिलेखों के आधार पर कार्मिकों का परीक्षण किया गया। परीक्षण के बाद 455 लेखपालों को पदोन्नति के लिए उपयुक्त पाया गया। ऑनलाइन डीपीसी के माध्यम से प्रक्रिया पूरी होने से विभागीय पदोन्नति में पारदर्शिता के साथ ही समयबद्धता को भी बढ़ावा मिला है। पदोन्नति से राजस्व निरीक्षक संवर्ग में रिक्त पदों को भरने में मदद मिलेगी। इससे तहसील और क्षेत्रीय स्तर पर राजस्व कार्यों की निगरानी एवं पर्यवेक्षण और प्रभावी होगा। वहीं, भूमि संबंधी मामलों, पैमाइश, राजस्व अभिलेखों और अन्य राजस्व कार्यों के निस्तारण में भी तेजी आने की उम्मीद है। राजस्व मामलों के निस्तारण पर जोर बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार राजस्व मामलों के त्वरित और न्यायसंगत निस्तारण के साथ प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तकनीक के अधिकतम इस्तेमाल पर जोर दे रहे हैं। इसी क्रम में ऑनलाइन डीपीसी को कार्मिक प्रबंधन में पारदर्शिता, निष्पक्षता और तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

न्यू मार्केट में आग बुझाने में देरी, 400 रेहड़ियों के अतिक्रमण से दमकल का रास्ता रुका

भोपाल  बालाजी छोले-भटूरे की दुकान से शुरू हुई आग ऊपर तक पहुंची और देखते ही देखते पास की 5-6 चार मंजिला दुकानों को चपेट में ले लिया। मोबाइल, कुर्ता-पजामा, बर्तन और रेडीमेड गारमेंट्स की दुकानों में रखा दीवाली का स्टॉक जल गया।इनके आसपास लगी 10-12 रेहड़ियां भी पूरी तरह खाक हो गईं। दुकानदारों के मुताबिक नुकसान 4 से 5 करोड़ रुपए तक है। घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल आग की वजह से ज्यादा न्यू मार्केट की तैयारी और पहुंच को लेकर है। प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक छोले-भटूरे बनाते समय भट्ठी से आग भड़की और ऊपर लगे बैनर तक पहुंची। दुकान में 2-3 गैस सिलेंडर रखे थे। सिलेंडर फटे या नहीं, इसकी पुष्टि फायर विभाग अभी नहीं कर रहा है। दूसरी तरफ आग बुझाने पहुंची दमकलों को संकरी सड़क, रेहड़ियों और अतिक्रमण के बीच रास्ता बनाकर घटना स्थल तक पहुंचना पड़ा। दुकानदार के मुताबिक इसमें 25 से 30 मिनट लग गए। जहां से आग शुरू हुई, वहीं सबसे बड़ा सवाल सिलेंडर को लेकर बालाजी छोले-भटूरे की दुकान में बाहर की तरफ ही भट्ठी लगी है। प्रत्यक्षदर्शी नीलेश पाटिल के मुताबिक दोपहर में भटूरे बनाते समय अचानक आग भड़की। दुकान में उस समय करीब 50-60 लोग मौजूद थे। आग लगते ही सभी बाहर भागे। नीलेश के मुताबिक दुकान में 2-3 गैस सिलेंडर भी रखे थे और धमाके हुए। हालांकि, नगर निगम के फायर ऑफिसर सौरभ पटेल ने सिलेंडर रखे होने की बात तो कही है, लेकिन इनके ब्लास्ट होने की पुष्टि नहीं की है। उनका कहना है कि दुकान पूरी तरह तहस-नहस हो गई है और यह भी जांचा जा रहा है कि सिलेंडर ब्लास्ट हुए थे या नहीं। मंदिर तक पहुंच सकती थी आग, दीवार ने बचाया आग की चपेट में दुकान से सटा खेड़ापति हनुमान मंदिर भी आ सकता था। हालांकि मंदिर की दीवार के कारण आग वहां तक नहीं पहुंच सकी और मंदिर सुरक्षित रहा। अतिक्रमण ने बढ़ाई दमकल की परेशानी इस घटना के बाद न्यू मार्केट में अतिक्रमण का मुद्दा भी सामने आया। बाजार में दुकान के बाहर और आसपास काफी अतिक्रमण होने के कारण दमकल वाहनों को अंदर पहुंचने में परेशानी हुई आग तेजी से फैल रही थी, जबकि फायर ब्रिगेड को मौके तक पहुंचने के लिए सीमित जगह में काम करना पड़ा। इससे आग पर काबू पाने में चुनौती बढ़ गई। विधायक सबनानी ने कहा कि घटना से सबक लेते हुए न्यू मार्केट को जल्द अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। उनका कहना है कि भविष्य में ऐसी आपात स्थिति में दमकल और राहत वाहनों को आसानी से रास्ता मिलना जरूरी है। 25 फीट की लपटों ने ऐसे पकड़ीं एक के बाद एक दुकानें छोले-भटूरे की दुकान से उठी आग ऊपर की मंजिलों तक पहुंची। दुकान के अंदर फर्नीचर और पर्दे थे, जबकि ऊपरी हिस्से में फ्लैक्स और पोस्टर लगे थे। यही आग फैलने का जरिया बने। इसके बाद पास की मोबाइल, कुर्ता-पजामा, बर्तन और रेडीमेड गारमेंट्स की दुकानों तक आग पहुंच गई। दुकानदार संजय कुमार जैन के मुताबिक इन दुकानों में दीवाली का स्टॉक भरा था, जो पूरी तरह जल गया। सजावटी सामान, मोबाइल एक्सेसरीज और खाने-पीने की रेहड़ियां भी आसपास थीं। इनमें से 10-12 रेहड़ियां पूरी तरह जल गईं। दुकानदारों के अनुसार कुल नुकसान 4 से 5 करोड़ रुपए तक है। इसकी अंतिम पुष्टि नुकसान के आकलन के बाद होगी। दमकल को आधा घंटा क्यों लगा, जबकि फायर स्टेशन करीब 1 किमी दूर? न्यू मार्केट के अंदर आने-जाने के करीब 10 रास्ते हैं। टीटी नगर थाने की ओर से दो और क्वॉलिटी रेस्टॉरेंट की ओर से एक प्रमुख रास्ते से वाहन आते-जाते हैं। आग वाली दुकानें टीटी नगर थाने के सामने वाले रास्ते की तरफ हैं। दुकानदार संजय कुमार के मुताबिक फायर कंट्रोल रूम पर सूचना देने के बाद कर्मचारियों को घटना स्थल की लोकेशन समझाने में भी समय लगा। इसके बाद जब दमकलें अंदर पहुंचीं तो रास्ते में लगी रेहड़ियां और संकरी सड़क बड़ी बाधा बनीं। दुकानदार के मुताबिक दमकल को मौके तक पहुंचने में 25 से 30 मिनट लग गए। माता मंदिर फायर स्टेशन यहां से करीब एक किलोमीटर दूर है। सामने आया अहम सवाल – अगर फायर स्टेशन करीब एक किलोमीटर दूर है और न्यू मार्केट में कई प्रवेश मार्ग हैं तो दमकल को घटना स्थल तक पहुंचने में इतना समय क्यों लगा? क्या अतिक्रमण और रेहड़ियां सिर्फ रास्ते में थीं या पार्किंग और संकरी सड़क भी उतनी ही बड़ी बाधा बनी? न्यू मार्केट में 900 दुकानें, करीब 400 रेहड़ियां न्यू मार्केट में करीब 900 रजिस्टर्ड दुकानें हैं। इसके अलावा करीब 400 रेहड़ियां लगती हैं। खेड़ापति हनुमान मंदिर के सामने शाम के समय इतना अतिक्रमण रहता है कि पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है। आग वाली जगह के पास और सामने भी रेहड़ियां लगी थीं। आग में 10-12 रेहड़ियां पूरी तरह जल गईं। हादसे के दौरान इन्हीं रास्तों से दमकलों को अंदर लाने के लिए पुलिस और अन्य टीमों को लगातार रास्ता खाली कराना पड़ा। न्यू मार्केट व्यापार संरक्षण समिति के उपाध्यक्ष अजय देवनानी का कहना है कि हॉकर्स के अतिक्रमण के कारण दमकलों को अतिरिक्त समय लगा। उनके मुताबिक मल्टी लेवल पार्किंग पर एक स्टैंडिंग फायर ब्रिगेड रहती है, लेकिन न्यू मार्केट में दोपहिया फायर फाइटर की अतिरिक्त व्यवस्था भी होनी चाहिए। फायर सेफ्टी की तैयारी कितनी? न्यू मार्केट में कपड़े, सजावटी सामान, ज्वेलरी समेत कई तरह की दुकानें हैं। आग वाली लाइन में 10-12 छोले-भटूरे की दुकानें और रेस्टॉरेंट हैं। इनमें कई जगह भट्ठियां बाहर की तरफ लगी हैं। फायर ऑफिसर सौरभ पटेल के मुताबिक दुकानदारों को फायर सेफ्टी नियमों के पालन के लिए कहा जाता है और विभाग की टीमें निरीक्षण भी करती हैं, लेकिन हादसे ने अब यह सवाल खड़ा किया है कि सिर्फ निरीक्षण और नोटिस से आगे बाजार में वास्तविक सुरक्षा व्यवस्था कितनी है। जिस दुकान से आग शुरू हुई, उस पर पहले भी अतिक्रमण की कार्रवाई हादसे के बाद अतिक्रमण का मुद्दा अचानक सामने नहीं आया है। जिस बालाजी छोले-भटूरे की दुकान से आग शुरू हुई, उसके संचालक के खिलाफ करीब आठ महीने पहले अतिक्रमण अधिकारी शैलेंद्र सिंह भदौरिया ने थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। अतिक्रमण हटाने के दौरान दुकानदार से विवाद होने की बात भी सामने आई है। भवन अनुज्ञा शाखा की … Read more

जेन नेक्स्ट संवाद में जेन-जी और जेन-अल्फा से रूबरू हुए मुख्यमंत्री

युवा शक्ति ही करेगी विकसित और सशक्त भारत का निर्माण : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जेन नेक्स्ट संवाद में जेन-जी और जेन-अल्फा से रूबरू हुए मुख्यमंत्री युवाओं से कहा – बड़े सपने देखें, लक्ष्य तय करें और मेहनत से उन्हें साकार करें मुख्यमंत्री ने युवाओं से साझा किए अपने जीवन के संघर्ष और सफलता के अनुभव विद्यार्थियों के सवालों के दिए सहज और रोचक जवाब, शिक्षा, रोजगार, जल संरक्षण और छत्तीसगढ़ के भविष्य पर खुलकर की चर्चा रायपुर   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे युवा देश है और यही युवा शक्ति विकसित एवं सशक्त भारत के निर्माण की सबसे बड़ी ताकत बनेगी। उन्होंने युवाओं से बड़े सपने देखने, अपनी रुचि के अनुरूप लक्ष्य तय करने और पूरी मेहनत एवं समर्पण के साथ उन्हें हासिल करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में सफलता के लिए समय का सदुपयोग, निरंतर परिश्रम और अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प सबसे महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री साय आज शाम राजधानी रायपुर के सड्डू में न्यूज 24 और लल्लूराम डॉट कॉम द्वारा आयोजित ‘जेन नेक्स्ट संवाद 'यंग माइंड्स, मीनिंगफुल कन्वर्सेशंस’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री जेन-जी और जेन-अल्फा के विद्यार्थियों से रूबरू हुए। विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री से उनके जीवन के संघर्ष, राजनीति, शिक्षा, राज्य के आर्थिक विकास, प्रतियोगी परीक्षाओं और जल संरक्षण सहित विभिन्न विषयों पर सवाल किए। मुख्यमंत्री साय ने सहज और आत्मीय अंदाज में युवाओं के सवालों के जवाब दिए और अपने जीवन के अनुभव भी साझा किए। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में दुनिया में बढ़ा भारत का मान-सम्मान मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री के रूप में जनता की सेवा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 वर्ष पूरे किए हैं। इस अवसर पर पूरे देश में सेवा संकल्प अभियान मनाया जा रहा है।  मुख्यमंत्री साय ने स्वच्छ भारत मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने जब लाल किले की प्राचीर से स्वच्छता का आह्वान किया था, तब इसे लेकर सवाल भी उठाए गए थे। आज स्वच्छता जन-जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। घर-घर शौचालय के निर्माण से माताओं-बहनों के सम्मान और स्वास्थ्य की रक्षा हुई तथा गांवों को खुले में शौच से मुक्ति मिली। स्वच्छ भारत मिशन ने स्वच्छता के प्रति सोच और व्यवहार दोनों में बड़ा बदलाव लाया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत निरंतर सशक्त और समृद्ध राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ रहा है। सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को भारत के सामर्थ्य और दृढ़ इच्छाशक्ति से परिचित कराया है। उन्होंने कहा कि आर्थिक दृष्टि से भी भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है।  प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लिया है और आज पूरी दुनिया में भारत का मान-सम्मान बढ़ा है। मुख्यमंत्री साय ने अपने हालिया सिंगापुर प्रवास का उल्लेख करते हुए कहा कि चार दिनों के प्रवास के दौरान उनकी अनेक प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों से चर्चा हुई। वहां उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा का उल्लेख किया। अपना बचपन याद कर मुख्यमंत्री ने बताया – कितना बदल गया है शिक्षा का परिदृश्य युवाओं से संवाद के दौरान मुख्यमंत्री साय ने अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियां भी साझा कीं। उन्होंने कहा कि आप सभी से चर्चा करते हुए मुझे अपना बचपन याद आ रहा है। जब मैं बगिया गांव के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ता था, तब हमारे स्कूल में पांचवीं बोर्ड की परीक्षा देने की व्यवस्था तक नहीं थी। परीक्षा देने के लिए कई किलोमीटर दूर दूसरे गांव जाना पड़ा और वहां पांच दिनों तक रुककर परीक्षा दी। उस समय स्कूल भवन भी कच्चे होते थे और बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता था। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। छत्तीसगढ़ में शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से विस्तार हुआ है और उच्च शिक्षा की विभिन्न संस्थाएं प्रदेश में उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि पहले राज्य में केवल एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज 15 मेडिकल कॉलेज हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आज उन्हें शिक्षा के जो अवसर और सुविधाएं मिल रही हैं, उनका भरपूर सदुपयोग करें और अपने उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करें। “कभी नहीं सोचा था सरपंच भी बनूंगा, ईश्वर ने मुख्यमंत्री तक पहुंचा दिया” बीबीए के छात्र अश्मित शिंदे ने मुख्यमंत्री से पूछा कि उन्हें मुख्यमंत्री बनने की प्रेरणा कैसे मिली। सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री साय ने अपने जीवन के संघर्षपूर्ण दौर को याद किया। उन्होंने कहा कि मैं जशपुर के बगिया जैसे छोटे से गांव में पला-बढ़ा हूं। जब मैं लगभग 10 वर्ष का था, तब मेरे पिता का आकस्मिक निधन हो गया। भाइयों में सबसे बड़ा होने के कारण छोटी उम्र में ही छोटे भाइयों, मां और दादी की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर आ गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने पढ़ाई के साथ खेती-बाड़ी संभाली और छोटे भाइयों को सक्षम बनाने का प्रयास किया। उस समय कभी यह कल्पना भी नहीं की थी कि गांव का सरपंच बनूंगा। सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़ते हुए सरपंच से विधायक, सांसद, केंद्रीय राज्यमंत्री और आज मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की सेवा करने का अवसर मिला। मुख्यमंत्री साय ने युवाओं से कहा कि उन्होंने हमेशा ‘कर्म ही पूजा है’ के सिद्धांत को जीवन में अपनाया। जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि यदि हम अच्छे उद्देश्य से पूरी निष्ठा के साथ काम करते हैं तो ईश्वर भी हमारा साथ देता है। शायद ईश्वर को मेरे हाथों से लोगों की सेवा करानी थी, इसलिए एक छोटे से गांव के सरपंच को मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने का अवसर मिला। समय की कीमत समझें, अपनी रुचि को बनाएं लक्ष्य छात्र करण भोसले ने मुख्यमंत्री से उनके जीवन का मूल मंत्र पूछा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को समय की कीमत समझनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि अभी उनका समय अध्ययन और अपने भविष्य की मजबूत नींव तैयार करने का है। इस समय का जितना अधिक सदुपयोग करेंगे, भविष्य उतना ही बेहतर होगा। सपने हमें मेहनत करने की प्रेरणा … Read more

लखनऊ के बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्य तेज, जरूरतमंदों को दो वक्त मिल रहा भोजन

योगी सरकार के निर्देश पर लखनऊ के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य युद्धस्तर पर जारी बाढ़ प्रभावितों तक लगातार पहुंचाए जा रहे भोजन के पैकेट, जरूरतमंदों को दोनों समय मिल रहा भोजन महापौर सुषमा खर्कवाल ने नाव से प्रभावित क्षेत्रों में जाकर नागरिकों से किया संवाद, जानीं समस्याएं बाढ़ पीड़ितों को भोजन, पेयजल और दवाएं उपलब्ध कराने के दिए निर्देश एलडीए ने 26 पंपिंग सेट से तेज की जल निकासी एलडीए ने राहत कार्यों के लिए मैनपावर बढ़ाया, अधिकारी तीन शिफ्ट में कर रहे 24×7 निगरानी लखनऊ  बाढ़ प्रभावित नागरिकों को राहत और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए योगी सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन, नगर निगम, एलडीए, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पुलिस प्रशासन की टीमें लगातार राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं। इसी क्रम में महापौर सुषमा खर्कवाल ने नगर आयुक्त गौरव कुमार के साथ विभिन्न बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर राहत कार्यों की स्थिति का जायजा लिया। महापौर सुषमा खर्कवाल ने जोन-3 के लोहरामऊ, फैजुल्लागंज, दाउद नगर और मिल्लत नगर सहित विभिन्न क्षेत्रों का निरीक्षण किया। इसके अलावा जोन-6 के हयात नगर, सेहठा गांव और गुल्मी खेड़ा में नाव के माध्यम से पहुंचकर प्रभावित नागरिकों से संवाद किया और उनकी समस्याओं एवं जरूरतों की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने प्रभावित लोगों को भोजन के पैकेट, पेयजल और आवश्यक दवाएं वितरित की। साथ ही अधिकारियों को राहत सामग्री की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। दाऊद नगर, मामा कॉलोनी और लोहरामऊ में 800 भोजन के पैकेट वितरित नगर निगम प्रशासन द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जरूरतमंद नागरिकों तक भोजन के पैकेट पहुंचाने का कार्य लगातार किया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार दाऊद नगर, मामा कॉलोनी और लोहरामऊ में लगभग 800 भोजन के पैकेट वितरित किए गए। इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रभावित बस्तियों एवं गलियों में दिन के दोनों पहरों में 1450 से अधिक भोजन के पैकेट वितरित किए गए। प्रथम पहर में गृह निर्माण संस्था क्षेत्र में करीब 250 पैकेट, दौलत खेड़ा एवं मुन्नू खेड़ा में 180, हयात नगर एवं लक्ष्मी हॉस्पिटल वाली गली में 150, तांड खेड़ा में 185, बरावन कला एवं एमसी सक्सेना के पीछे वाली गली में करीब 50 तथा हयात नगर के अन्य हिस्सों में 80 भोजन के पैकेट वितरित किए गए। वहीं, दूसरे पहर में करीब 650 भोजन के पैकेट वितरित किए गए। आवश्यकता और मांग के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में दिन में दो समय भोजन के पैकेट उपलब्ध कराए जा रहे हैं। हेल्थ कैंप में व्यवस्थाओं की जांच निरीक्षण के दौरान महापौर ने प्रभावित क्षेत्र में स्थापित हेल्थ कैंप का भी निरीक्षण कर दवाओं और स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने डॉक्टरों एवं स्वास्थ्य टीम से फीडबैक लेते हुए निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित नागरिकों को समय पर उपचार और दवाएं उपलब्ध कराई जाएं। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने को भी कहा गया। इस दौरान बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए स्थापित कंट्रोल रूम का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों से नागरिकों की ओर से प्राप्त सूचनाओं और राहत कार्यों की स्थिति की जानकारी ली। साथ ही उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि लोगों को स्वच्छ, गुणवत्तापूर्ण और पौष्टिक भोजन के पैकेट तीनों समय नियमित रूप से उपलब्ध कराए जाएं। एलडीए ने 26 पंपिंग सेट लगाए वहीं गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से इकाना स्टेडियम, प्लासियो मॉल और आसपास के क्षेत्रों में हुए जलभराव से निपटने के लिए एलडीए ने राहत अभियान तेज कर दिया है। जिस स्थान से गोमती का पानी योजना क्षेत्र में प्रवेश कर रहा था, वहां बोल्डर और मिट्टी डालकर मजबूत अस्थायी अवरोध बनाया गया है। जल निकासी के लिए 26 पंपिंग सेट लगाए गए हैं, जिससे गुरुवार शाम पांच बजे तक जलभराव की स्थिति में काफी सुधार दर्ज किया गया। लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार और सचिव सुशील प्रताप सिंह ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। इसके बाद अलग-अलग पॉकेट में मैनपावर में डेढ़ गुना वृद्धि की गई है। निगरानी और आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए एलडीए के अधिकारी, अभियंता और कर्मचारी तीन शिफ्ट में 24 घंटे ड्यूटी कर रहे हैं। सुरक्षा के मद्देनजर सीजी सिटी अर्बन वेटलैंड और नौसेना शौर्य वाटिका को अग्रिम आदेशों तक आगंतुकों के लिए बंद कर दिया गया है।

हर पात्र परिवार को योजनाओं का लाभ मिले, केवल चिन्हांकन तक सीमित न रहे जीरो पावर्टी अभियान: मुख्यमंत्री

औद्योगिक और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को प्राथमिकता के साथ तेजी से पूरा कराएं: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हर पात्र परिवार को योजनाओं का लाभ मिले, केवल चिन्हांकन तक सीमित न रहे जीरो पावर्टी अभियान: मुख्यमंत्री मंडियों में किसानों को बेहतर सुविधाएं मिलें, साफ-सफाई और जलभराव की समस्या न हो: मुख्यमंत्री अतिवृष्टि के बाद जहां बिजली आपूर्ति बाधित है, उसे शीघ्र बहाल करें, 24×7 सक्रिय रहे टोल फ्री नंबर: मुख्यमंत्री कामकाजी महिला छात्रावासों के निर्माण में तेजी के निर्देश, संचालन के लिए बनेगी नीति स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन की 8वीं बैठक में मुख्यमंत्री ने की प्रदेश में संचालित परियोजनाओं की समीक्षा लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को 'सीएम-समीक्षा' की 8वीं उच्चस्तरीय बैठक में विकास परियोजनाओं, औद्योगिक निवेश, ऊर्जा, कौशल विकास, श्रमिक कल्याण और जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में चल रही बड़ी परियोजनाओं को केवल प्रक्रियाओं तक सीमित न रखा जाए, उन्हें समयबद्ध ढंग से धरातल पर उतारा जाए। उन्होंने कहा कि अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी हों या फील्ड में तैनात अधिकारी, औद्योगिक और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की परियोजनाओं को प्राथमिकता के साथ तेजी से पूरा कराएं। भूमि अधिग्रहण, स्वीकृति, निविदा और अंतरविभागीय समन्वय से जुड़ी बाधाओं का तत्काल समाधान किया जाए। एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की समीक्षा में बताया गया कि चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के लिए चार निविदाएं प्राप्त हो चुकी हैं और अक्टूबर में निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। फर्रुखाबाद, आगरा-लखनऊ-पूर्वांचल लिंक, झांसी और जेवर लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 80 से 91 प्रतिशत तक भूमि उपलब्ध हो चुकी है। मेरठ-हरिद्वार, विंध्य और विंध्य-पूर्वांचल स्पर एक्सप्रेसवे के लिए सत्यापन कार्य पूरा हो चुका है और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। मुख्यमंत्री ने संबंधित जिलाधिकारियों से अद्यतन स्थिति की जानकारी लेते हुए शेष भूमि संबंधी कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। बैठक में ग्रेटर नोएडा के मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब की भी समीक्षा हुई। यहां 323 हेक्टेयर में से 301 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा प्राप्त हो चुका है। मुख्यमंत्री ने औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक परियोजनाओं में आवश्यक प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा कराने के निर्देश दिए। महिला श्रम सहभागिता बढ़ाने के लिए कामकाजी महिला छात्रावासों की प्रगति की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने इनके निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि छात्रावासों के निर्माण के साथ उनके प्रभावी संचालन के लिए भी अच्छी और उपयोगी नीति तैयार की जाए। जीरो पावर्टी अभियान की समीक्षा में बताया गया कि चिन्हित 12.50 लाख परिवारों में से करीब 9 लाख आवास के पात्र पाए गए हैं। मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत 30,725 आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं। अभियान के तहत पात्र परिवारों को श्रमिक पंजीकरण, आयुष्मान कार्ड, अंत्योदय कार्ड, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने का कार्य चल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान में केवल पात्र परिवारों का चिन्हांकन पर्याप्त नहीं है, प्रत्येक पात्र परिवार को संबंधित योजनाओं का लाभ दिलाना सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने मंडियों में किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मंडियों में साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था हो, जलभराव की स्थिति न बने और किसानों को अपनी उपज के साथ किसी प्रकार की असुविधा न हो। मंडी परिसरों की नियमित निगरानी और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। हाल के दिनों में कई क्षेत्रों में हुई अतिवृष्टि को देखते हुए मुख्यमंत्री ने बिजली आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि जहां कहीं भी बिजली आपूर्ति बाधित है, उसे शीघ्र बहाल किया जाए। उपभोक्ताओं की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए टोल फ्री नंबर 24×7 सक्रिय रखा जाए। प्रत्येक उपभोक्ता को सही और समय पर बिजली बिल उपलब्ध हो, यह सुनिश्चित किया जाए। बिजली चोरी और लाइन लॉस पर प्रभावी नियंत्रण के लिए फीडरवार ऑडिट कर वास्तविक स्थिति सामने लाने के निर्देश दिए गए। अग्नि सुरक्षा की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और होटलों में वैध फायर एनओसी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने एनओसी की अवधि समाप्त होने से पहले नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी कराने और अग्नि सुरक्षा मानकों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा। लोक निर्माण विभाग की ₹50 करोड़ से अधिक लागत वाली 279 परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने अनुबंध के अनुसार सभी कार्य समय से पूरा कराने के निर्देश दिए। ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी की प्रगति की समीक्षा में बताया गया कि ₹454 करोड़ से 11,350 ग्राम पंचायतों में लाइब्रेरी स्थापित की जा रही हैं। इनमें शत-प्रतिशत एनबीटी पुस्तकें और 96 प्रतिशत फर्नीचर पहुंच चुका है तथा 99 प्रतिशत लाइब्रेरी में पठन-पाठन शुरू हो चुका है। मुख्यमंत्री ने शेष हार्डवेयर आपूर्ति में तेजी लाने और रियल टाइम डैशबोर्ड के माध्यम से नियमित निगरानी के निर्देश दिए।

ट्रंप के फैसले का बाजार पर नहीं दिखा असर, TCS-Infosys समेत IT शेयरों में उछाल

मुंबई       अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा TCS, इंफोसिस, विप्रो और HCLTech समेत आठ बड़ी आईटी कंपनियों को ग्रीन कार्ड से जुड़े PERM प्रोग्राम से सस्पेंड किए जाने के बावजूद शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में आईटी शेयरों में तेजी देखने को मिली. 9 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत तेजी के साथ हुई. मार्केट खुलते ही सेंसेक्स 700 अंकों से ज्यादा चढ़ गया, जबकि निफ्टी में 200 से अधिक अंकों की बढ़त दर्ज की गई. वहीं, रुपये में भी डॉलर के मुकाबले मजबूती देखने को मिली. रुपया 4 पैसे मजबूत होकर 96.74 प्रति डॉलर पर खुला. गुरुवार को कारोबार बंद होने के समय यह 96.78 प्रति डॉलर पर था।  शुरुआती कारोबार में TCS, इंफोसिस, HCLTech समेत प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयर ग्रीन जोन में कारोबार करते नजर आए. शुरुआती कारोबार में इंफोसिस के शेयरों में 2.62%, टीसीएस के शेयरों में 3.39%, एचसीएल के शेयरों में 2.53% और विप्रो के शेयरों में 2.47% की तेजी देखने को मिली. अमेरिकी कार्रवाई के बीच विदेशी बाजारों में भी आईटी कंपनियों के शेयरों में मिलाजुला रुख देखने को मिला. नैस्डैक (Nasdaq) पर माइक्रोसॉफ्ट के शेयर 1.35% तक लुढ़क गए, जबकि कॉग्निजेंट के शेयरों में 5.15% की तेजी दर्ज की गई. वहीं, पेरिस स्टॉक एक्सचेंज में कैपजेमिनी के शेयर 0.045% की मामूली बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे. नैस्डैक पर एडोबी के शेयरों में भी 3.56% का उछाल दर्ज किया गया।  8 IT कंपनियों पर अमेरिकी एक्शन अमेरिकी सरकार की ओर से TCS, इंफोसिस, विप्रो, HCLTech समेत आठ बड़ी आईटी कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम से सस्पेंड किए जाने के बाद माना जा रहा था कि इन कंपनियों के शेयरों पर दबाव देखने को मिल सकता है. वजह यह है कि प्रोग्राम इलेक्ट्रॉनिक रिव्यू मैनेजमेंट (PERM) अमेरिका में रोजगार के आधार पर विदेशी कर्मचारियों के ग्रीन कार्ड पाने की प्रक्रिया का अहम हिस्सा है. इस पर रोक से प्रभावित कंपनियों के जरिए स्थायी निवास पाने की तैयारी कर रहे विदेशी कर्मचारियों के मामले अटक सकते हैं. इससे कंपनियों की रिक्रूटमेंट स्ट्रैटेजी और कारोबार पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर भी सवाल उठ रहे थे।  हालांकि, शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआती चाल इसके उलट रही. भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ खुला और प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयर हरे निशान में कारोबार करते दिखे. इससे संकेत मिला कि निवेशकों ने फिलहाल अमेरिकी फैसले को लेकर तत्काल बड़ी बिकवाली नहीं की. हालांकि, केवल शुरुआती तेजी के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि इस कार्रवाई का कंपनियों के कारोबार या शेयरों पर आगे कोई असर नहीं पड़ेगा. आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर कंपनियों के बयानों, अमेरिकी प्रशासन के अगले कदम और इस फैसले के वास्तविक कारोबारी असर पर रहेगी।  इस पूरे मामले में एक अहम बात यह है कि PERM से सस्पेंशन और कंपनियों के रोजमर्रा के कारोबार पर असर, दोनों अलग-अलग पहलू हैं. PERM मुख्य रूप से रोजगार के आधार पर ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया से जुड़ा है. इस पर रोक लगने का मतलब यह नहीं है कि कंपनियां अमेरिका में कारोबार नहीं कर सकेंगी या वहां काम कर रहे सभी विदेशी कर्मचारियों के वीजा रद्द हो जाएंगे. यही वजह है कि इस फैसले का बाजार पर तत्काल असर नहीं दिखा. इसके साथ-साथ कंपनियों के कारोबार पर इसके वास्तविक प्रभाव को अगले कुछ कारोबारी सत्रों में देखना अहम रहेगा।  एक्शन पर IT कंपनियों ने दी प्रतिक्रया भारत में सॉफ्टवेयर और आईटी सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों के संगठन नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विस कंपनीज (NASSCOM) ने कहा है कि अमेरिकी सरकार की ओर से आईटी कंपनियों को PERM कार्यक्रम से निलंबित करने का फैसला ग्रीन कार्ड पाने के एक खास रास्ते को प्रभावित करता है, न कि H-1B वीजा कार्यक्रम को. संगठन ने यह भी कहा कि भारतीय आईटी कंपनियों ने H-1B वीजा पर अपनी निर्भरता कम की है और अमेरिका में स्थानीय स्तर पर भर्तियां बढ़ाई हैं. ये कंपनियां अमेरिकी कारोबारों को सहयोग देने के साथ वहां जॉब क्रिएशन में भी योगदान दे रही हैं।  वहीं, TCS ने साफ किया है कि इस कार्रवाई से उसकी अमेरिकी भर्ती रणनीति पर खास असर पड़ने की आशंका नहीं है. कंपनी अगले पांच साल में अमेरिका में 15,000 लोगों को नौकरी देने की योजना पर कायम है. TCS के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में उसके PERM आवेदन एक अंक में रहे हैं और अमेरिका में उसकी भर्ती रणनीति स्थानीय प्रतिभाओं को रोजगार देने पर केंद्रित है. माइक्रोसॉफ्ट ने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में उसने करीब 6,000 H-1B वीजा आवेदन किए थे।  इनमें से 80 फीसदी आवेदन पहले से कंपनी में काम कर रहे कर्मचारियों के वीजा की अवधि बढ़ाने या उनकी वीजा स्थिति में बदलाव के लिए थे, न कि नए लोगों को नौकरी देने के लिए. माइक्रोसॉफ्ट के मुताबिक, नए कर्मचारियों के लिए किए गए बाकी आवेदन उन लोगों के थे, जो पहले से कानूनी रूप से अमेरिका में रह रहे थे और कंपनी में नौकरी करने का फैसला लिया था. कंपनी ने कहा कि ये आवेदन अमेरिका में उसके कुल कर्मचारियों की संख्या का महज एक फीसदी थे।   

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की GBC@5.0 की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा, परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन और निवेशकों को हर सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश

जीबीसी@5.0 के लिए ₹7.55 लाख करोड़ की 7000 परियोजनाएं तैयार, सभी 75 जिलों को मिलेगा लाभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की GBC@5.0 की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा, परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन और निवेशकों को हर सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश लगभग 7,000 परियोजनाओं में निवेश, पश्चिमांचल से बुंदेलखंड तक औद्योगिक विकास का विस्तार निवेशकों को प्रोत्साहन राशि के भुगतान में अनावश्यक विलंब न हो, तय समयसीमा में पूरी हो प्रक्रिया: मुख्यमंत्री हालिया सड़क हादसों पर मुख्यमंत्री ने जताया दु:ख, एक्सप्रेसवे पर 24×7 निगरानी और निजी क्षेत्र के सहयोग से ट्रॉमा सेंटर विकसित करने के निर्देश लखनऊ  उत्तर प्रदेश में निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने की दिशा में ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी@5.0 की तैयारियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  उच्चस्तरीय बैठक में समारोह की तैयारियों के साथ प्रस्तावित निवेश परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। वर्तमान स्थिति के अनुसार जीबीसी@5.0 के माध्यम से प्रदेश के सभी 75 जिलों में लगभग 7,000 परियोजनाओं के जरिए ₹7.55 लाख करोड़ से अधिक का निवेश धरातल पर उतरने को तैयार हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं से जुड़ी स्वीकृतियों, भूमि, आधारभूत सुविधाओं और अन्य प्रक्रियाओं को समयबद्ध ढंग से पूरा कराया जाए, ताकि निवेश प्रस्तावों के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की बाधा न आए। इन्वेस्ट यूपी की ओर से बैठक में बताया गया कि प्रस्तावित परियोजनाओं में विभागों के माध्यम से लगभग साढ़े तीन हजार परियोजनाएं, जिलों के स्तर पर निवेश सारथी पोर्टल से जुड़ी साढ़े तीन हजार से अधिक परियोजनाएं तथा इन्वेस्ट यूपी के माध्यम से 100 से अधिक बड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। क्षेत्रीय स्तर पर पश्चिमांचल में करीब पौने पांच लाख करोड़ रुपये, पूर्वांचल में 1.2 लाख करोड़ रुपये से अधिक, मध्यांचल में 80 हजार करोड़ रुपये से अधिक और बुंदेलखंड में 60 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है। बड़ी परियोजनाओं में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली करीब 90 परियोजनाएं शामिल हैं, जिनमें लगभग पौने पांच लाख करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। सेक्टरवार निवेश में डेटा सेंटर, ऊर्जा, रियल एस्टेट, बुनियादी ढांचा, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य प्रसंस्करण, इस्पात एवं सीमेंट, फार्मा एवं रसायन, वस्त्र एवं परिधान, ऑटोमोबाइल और पर्यटन प्रमुख हैं। डेटा सेंटर क्षेत्र में करीब ₹1.8 लाख करोड़, ऊर्जा क्षेत्र में ₹1.15 लाख करोड़ से अधिक और रियल एस्टेट में ₹75 हजार करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव हैं। विनिर्माण क्षेत्र में करीब पौने तीन लाख करोड़ रुपये तथा बुनियादी ढांचे से जुड़े क्षेत्रों में लगभग डेढ़ लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव शामिल हैं।  बैठक में ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के पहले से चौथे संस्करण तक की प्रगति की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि जीबीसी 1 से 4 के माध्यम से 16 हजार से अधिक परियोजनाओं में 8 हजार से अधिक परियोजनाएं वाणिज्यिक संचालन में आ चुकी हैं, जबकि 8 हजार से अधिक परियोजनाएं क्रियान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं।  मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी केवल निवेश परियोजनाओं को प्रारंभ करने का अवसर नहीं है, यह प्रदेश में रोजगार, उत्पादन और आर्थिक गतिविधियों को गति देने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन परियोजनाओं को जीबीसी@5.0 में शामिल किया जा रहा है, उनकी तैयारियों और आवश्यक अनुमतियों की विभागवार निगरानी की जाए। निवेशकों के साथ नियमित संवाद रखते हुए उनकी समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाए। निवेशकों को मिलने वाले वित्तीय प्रोत्साहनों के भुगतान की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि किसी भी निवेशक को स्वीकृत प्रोत्साहन राशि के लिए अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध हो तथा पात्र निवेशकों को निर्धारित समयसीमा में प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराई जाए। बैठक में निवेश प्रोत्साहन के लिए स्वीकृत बजट, अब तक किए गए भुगतान और आगामी अवधि में होने वाले वितरण की भी समीक्षा की गई।  बैठक में प्रदेश के विभिन्न एक्सप्रेसवे पर हाल के दिनों में हुई सड़क दुर्घटनाओं की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने दुर्घटनाओं पर दु:ख व्यक्त करते हुए इनके कारणों की तकनीकी और व्यावहारिक समीक्षा के निर्देश दिए। उन्होंने ब्लैक स्पॉट की पहचान, ओवरस्पीडिंग पर प्रभावी नियंत्रण, कोहरे के दौरान दृश्यता प्रबंधन, सुरक्षा कैमरों और रडार की निगरानी तथा टोल प्लाजा पर वाहनों की फिटनेस और चालकों की सतर्कता की जांच को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। यूपीडा, परिवहन विभाग और पुलिस को समन्वित सुरक्षा व्यवस्था तैयार करने तथा निजी क्षेत्र के सहयोग से एक्सप्रेसवे के आसपास ट्रॉमा सेंटर विकसित करने की कार्ययोजना पर भी काम करने को कहा गया।

8th Pay Commission: रिपोर्ट आने के बाद भी वेतन बढ़ोतरी में लगेगा समय, जानें क्यों

नई दिल्ली केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि नई सैलरी का फायदा आखिर कब से मिलना शुरू होगा। वेतन आयोग (Pay Commission) की प्रक्रिया सिर्फ रिपोर्ट तैयार होने तक सीमित नहीं है। आयोग को अपनी रिकमेंडेशन देने के बाद भी सरकार की समीक्षा, मंजूरी और नोटिफिकेशन जैसी कई प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। इसलिए रिपोर्ट जमा होने और सैलरी में वास्तविक बदलाव दिखने के बीच कुछ महीनों का अंतर हो सकता है। आइए इसको जरा विस्तार से समझते हैं। 8th पे कमीशन को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए कुल 18 महीने का समय दिया गया है। इस अवधि में करीब 11 महीने पूरे हो चुके हैं और आयोग फिलहाल एम्पलायी व पेंशनर्स संगठन के साथ बातचीत कर रहा है। अब तक देश के कई शहरों में बैठकें हो चुकी हैं। अगली मीटिंग बेंगलुरु में 7-8 अक्टूबर और इसके बाद मुंबई में 22-23 अक्टूबर को प्रस्तावित हैं। आयोग ने दिल्ली, कोलकाता, भुवनेश्वर, लखनऊ, श्रीनगर, हैदराबाद, पुणे, देहरादून, चेन्नई, जयपुर, पुडुचेरी और चंडीगढ़ समेत कई स्थानों पर स्टेकहोल्डर्स से चर्चा की है। हालांकि, रिपोर्ट कब जमा होगी, इसकी आधिकारिक तारीख अभी तय नहीं है। कुछ एक्सपर्ट का अनुमान है कि बातचीत नवंबर तक पूरे होने पर रिपोर्ट फरवरी या मार्च 2027 में आ सकती है, जबकि एक अन्य अनुमान के मुताबिक आयोग अपनी रिपोर्ट मई 2027 की डेडलाइन तक जमा कर सकता है। कर्मचारियों को यह समझना जरूरी है कि पे कमीशन की रिपोर्ट सबमिट होने का मतलब यह नहीं है कि अगले ही महीने सैलरी बढ़ जाएगी। रिपोर्ट में दी गई रिकमेंडेशन को पहले सरकार की तरफ से एग्जामिन किया जाएगा। इसके लिए सरकार की ओर से गठित मिनिस्टर्स का ग्रुप रिपोर्ट की समीक्षा कर सकता है और जरूरत पड़ने पर आयोग से क्लेरिफिकेशन या बदलाव की मांग भी की जा सकती है। इसके बाद सरकार रिकमेंडेशन पर अंतिम फैसला लेगी और उन्हें लागू करने के लिए नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। यही वजह है कि रिपोर्ट सबमिशन और एक्चुअल इंप्लीमेंटेशन के बीच कई महीनों का गैप हो सकता है। इंप्लीमेंटेशन की अवधि को लेकर भी अलग-अलग अनुमान सामने आए हैं। ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन के सी. श्रीकुमार के मुताबिक सरकार रिकमेंडेशन लागू करने में करीब 3 से 4 महीने ले सकती है। वहीं, केंद्रीय सरकारी कर्मचारी और कामगार परिसंघ (Confederation of Central Government Employees & Workers) के एसबी यादव का अनुमान है कि रिव्यू और फाइनल डिसीजन की प्रक्रिया में करीब 4 से 6 महीने लग सकते हैं। इस हिसाब से अगर 8th पे कमीशन अपनी रिपोर्ट मई 2027 तक जमा करता है, तो सैलरी रिवीजन का एक्चुअल इंपैक्ट 2027 के दूसरे हिस्से या साल के अंत में देखने को मिल सकता है। हालांकि, अंतिम टाइमलाइन पूरी तरह सरकार के फैसले पर निर्भर करेगी। 8th पे कमीशन की नई पे स्केल को 1 जनवरी 2026 से प्रभावी किए जाने की उम्मीद बताई जा रही है, लेकिन एक्च्युअल इंप्लीमेंटेशन बाद में हो सकता है। ऐसी स्थिति में इफेक्टिव डेट और इंप्लीमेंटेशन डेट के बीच की अवधि के लिए कर्मचारियों और पेंशनर्स को एरियर मिल सकते हैं। हालांकि, एरियर की अवधि और भुगतान को लेकर अंतिम फैसला सरकार की नोटिफिकेशन के बाद ही स्पष्ट होगा। पुराने पे कमीशन को देखें तो रिकमंडेशन तैयार करने में अलग-अलग समय लगा है। 7th पे कमीशन का गठन फरवरी 2014 में हुआ था और उसने नवंबर 2015 में अपनी रिपोर्ट जमा की थी। वहीं, 6th पे कमीशन अक्टूबर 2006 में गठित हुआ और मार्च 2008 में report दी। इससे साफ है कि पे कमीशन की पूरी प्रक्रिया में काफी समय लग सकता है। इसलिए 8th CPC के मामले में भी कर्मचारियों को रिपोर्ट, सरकार अप्रूवल और नोटिफिकेशन तीनों चरणों को ध्यान में रखकर सैलरी हाइक की टाइमलाइन समझनी चाहिए।

UPI यूजर्स और कारोबारियों के लिए अहम खबर, 15 अक्टूबर से 0.4% MDR लागू होगा या टलेगा फैसला?

नई दिल्ली यूपीआई के जरिए 2,000 रुपये से अधिक पेमेंट पर 0.4 फीसदी मर्चेंट डिस्काउंट रेट्स (MDR) लगाने की योजना 15 अक्टूबर से लागू होनी है। लेकिन बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसे 1 जनवरी तक टालने पर विचार किया जा रहा है। यानी फेस्टिव सीजन में इससे रिटेलर्स को राहत मिल सकती है। माना जा रहा है कि सरकार अगले कुछ दिनों में इस पर फैसला ले सकती है। इस रिपोर्ट से पेमेंट एग्रीगेटर्स पेटीएम के शेयर 10% गिर गए और कंपनी का मार्केट कैप 1 लाख करोड़ रुपये से नीचे चला गया। इसी तरह मोबिक्विक और पाइन लैब्स में 8% तक की गिरावट आई। पेटीएम के शेयर कुछ देर के लिए 1,558.80 रुपये के लोअर सर्किट पर पहुंच गए। मार्केट खुलने के कुछ ही मिनटों में कंपनी का मार्केट कैप करीब 10,972 करोड़ रुपये कम हो गया। पेटीएम शेयर पेटीएम का 52 हफ्ते का टॉप 1,856.50 रुपये है। मोबिक्विक के शेयर 8% से ज्यादा गिरकर 234.52 रुपये पर आ गए, जबकि पाइन लैब्स के शेयर 4% से ज्यादा फिसलकर 170.21 रुपये पर आ गए। मोबिक्विक का 52 हफ्ते का टॉप 290.35 रुपये है। इसी तरह पाइन लैब्स का 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 283.70 रुपये है। ट्रेडर्स और इंडस्ट्री एसोसिएशन के इस बात पर चिंता जताई थी कि त्योहारों की सेल के दौरान MDR शुरू करने से बिजनेस के लिए ट्रांजैक्शन कॉस्ट बढ़ जाएगी। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया (NPCI) की अगुवाई वाली UPI और सर्विस स्टीयरिंग कमेटी के सदस्य बुधवार को MDR टाइमिंग और दूसरी बातों पर चर्चा करने के लिए मिले। वित्त मंत्री से भी किया गया है आग्रह   एक बड़े व्‍यापारिक सूत्र ने बताया कि व्यापारी संगठनों ने वित्त मंत्री से  UPI लेनदेन पर MDR लगाने को टालने का आग्रह किया है. ट्रेडर्स ने वित्त मंत्री से अपील की है कि UPI के पर्सन-टू-मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR के प्रस्ताव को 6 हफ्ते के लिए टाल दिया जाए।  वित्त मंत्री को दिए एक लिखित मेमोरेंडम में व्यापारी संगठनों ने कहा है कि MDR को लेकर व्यापारियों में  संशय की स्थिति है. इसलिए इसे लागू करने की तारीख 15 अक्टूबर से बढ़ाकर 1 जनवरी 2027 किया जाए।  UPI-MDR चार्ज पर क्‍या है प्रस्‍ताव?  NPCI के मुताबिक, 2,000 रुपये से ऊपर के पर्सन टू मर्चेंट ट्रांजैक्‍शन पर 0.4 % का MDR चार्ज लागू किया जाना है.  इस हिसाब से 75,000 रुपये के लेनदेन पर चार्ज 300 रुपये बनते हैं.हालांकि एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन रखी गई है।  ऐसे में 75,000 रुपये से ऊपर के जो भी ट्रांजैक्‍शन होंगे, उनपर अधिकतम यानी 300 रुपये MDR चार्ज लिए जाने का प्रावधान है।  2,000 रुपये से ऊपर हर ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं? 2,000 रुपये से ज्यादा के सिर्फ तय Person-to-Merchant यानी P2M ट्रांजैक्शन पर MDR लागू होगा. सामान्य दर 0.4% होगी, जबकि 75,000 रुपये या उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर अधिकतम MDR 300 रुपये होगा।  रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे जरूरी सेक्टरों में 2,000 से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर सिर्फ 5 रुपये का फ्लैट MDR होगा।  अहम बात ये है कि ग्राहक से MDR नहीं लिया जाएगा. बैंकों को निर्देश दिया गया है कि व्यापारी इसका बोझ ग्राहकों पर न डालें।  96% UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं सरकार के मुताबिक, करीब 96% UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन MDR से प्रभावित नहीं होंगे. ₹2,000 तक के सभी UPI मर्चेंट पेमेंट पर MDR शून्य रहेगा।  इसके अलावा व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI पेमेंट किसी भी रकम पर फ्री रहेगा. छोटे व्यापारियों को UPI QR के जरिए महीने में 1 लाख तक मिलने वाली रकम पर भी MDR नहीं लगेगा. RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर भी MDR शून्य रहेगा।  नो यूपीआई डे इस महीने की शुरुआत में, होलसेल ट्रेडर्स और रिटेलर्स ने 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI पेमेंट पर MDR के प्रस्तावित लागू होने के विरोध में 'नो UPI डे' मनाया था। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि कमेटी 40 लाख रुपये तक के सालाना टर्नओवर वाले बिजनेस को MDR फीस से छूट देने पर भी विचार कर रही है। मौजूदा फ्रेमवर्क के तहत 1 लाख रुपये तक के मंथली टर्नओवर वाले बिजनेस को रोलआउट के तहत छूट दी जानी थी।  

8 या 9 नवंबर, कब है दिवाली? जानें 2026 की सही तारीख, लक्ष्मी पूजा मुहूर्त और पूजा विधि

 Diwali 2026 : दीपावली हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। रोशनी और खुशियों का यह पर्व हर साल कार्तिक अमावस्या के दिन मनाया जाता है। इस दिन घरों में दीप जलाने के साथ मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि दिवाली की रात विधि-विधान से लक्ष्मी पूजन करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। ऐसे में हर साल की तरह इस बार भी लोगों के बीच दिवाली की तारीख को लेकर उत्सुकता है। आइए जानते हैं 2026 में दिवाली किस दिन मनाई जाएगी और लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा। कब है दिवाली? हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 8 नवंबर 2026 को सुबह 11 बजकर 27 मिनट से शुरू होगी। वहीं, अमावस्या तिथि का समापन 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर होगा। प्रदोष काल में अमावस्या तिथि होने के कारण इस साल दीपावली का पर्व 8 नवंबर 2026, रविवार को मनाया जाएगा। दिवाली के दिन शाम के समय घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों में दीप जलाए जाते हैं। इसके बाद शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। कई परिवार इस दिन अपने घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल को दीपों और रंगोली से सजाते हैं। लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त दिवाली के दिन लक्ष्मी-गणेश पूजन के लिए शाम 5 बजकर 54 मिनट से शाम 7 बजकर 50 मिनट तक का समय शुभ रहेगा। इस दौरान श्रद्धालु विधि-विधान से मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा कर सकते हैं। पूजा स्थल को पहले अच्छी तरह साफ करके सजाएं। इसके बाद चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। पूजा के दौरान घर के सभी सदस्य एक साथ शामिल होकर देवी-देवताओं का ध्यान कर सकते हैं। दिवाली से जुड़े प्रमुख त्योहारों की तारीख धनतेरस: 6 नवंबर 2026, शुक्रवार छोटी दिवाली और नरक चतुर्दशी: 7 नवंबर 2026, शनिवार दीपावली: 8 नवंबर 2026, रविवार गोवर्धन पूजा: 10 नवंबर 2026, मंगलवार भाई दूज: 11 नवंबर 2026, बुधवार दीपावली की पूजा विधि     दिवाली की पूजा से पहले पूजा स्थल और पूरे घर की साफ-सफाई कर लें।     इसके बाद पूजा की चौकी पर भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।     पास में कलश रखें और उस पर रोली से तिलक करें।     इसके बाद कलश में जल भरकर उसमें आवश्यक पूजा सामग्री अर्पित करें।     पूजा की शुरुआत भगवान गणेश के ध्यान और पूजन से करें।     उन्हें रोली, चंदन, अक्षत, फूल और माला अर्पित करें। इसके बाद मां लक्ष्मी की पूजा करें।     देवी को फूल, अक्षत, फल, मिठाई और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें।     पूजा के दौरान मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का ध्यान करते हुए दीप जलाएं।     इसके बाद परिवार के सभी सदस्य मिलकर लक्ष्मी-गणेश की पूजा और कथा कर सकते हैं।     अंत में देवी-देवताओं की आरती करें और प्रसाद सभी लोगों में बांटें।     मान्यता के अनुसार, दिवाली की रात दीप जलाने और विधि-विधान से पूजा करने से घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है। दिवाली पर लक्ष्मी पूजा क्यों की जाती है? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपावली की रात मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में धन-धान्य, सुख और समृद्धि का वास होता है। यही वजह है कि लोग इस दिन अपने घर और पूजा स्थल को दीपों से सजाते हैं और मां लक्ष्मी से परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं। भगवान गणेश को शुभता और विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है। इसलिए दिवाली पर लक्ष्मी पूजा के साथ गणेश जी की आराधना करने की भी परंपरा है। दिवाली पर इन बातों का रखें ध्यान     दिवाली के दिन पूजा स्थल को साफ और व्यवस्थित रखना चाहिए।     पूजा के दौरान परिवार के सभी सदस्य श्रद्धा और शांत मन से शामिल हों।     लक्ष्मी पूजन के लिए शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।     घर में दीप जलाते समय उनकी सुरक्षित जगह का ध्यान रखें, ताकि त्योहार के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।