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8वें वेतन आयोग में ₹69,000 न्यूनतम वेतन की चर्चा, 4.4 फैमिली यूनिट और HRA बढ़ाने की मांग क्यों?

नई दिल्ली 8वें वित्त आयोग के पास कर्मचारी और पेंशनर्स से जुड़े संगठन लगातार सुझाव दे रहे हैं। संगठनों की तरफ से जो प्रमुख मांगें अधिक फिटमेंट फैक्टर के अलावा है वो एचआरए, फैमिली काउंच, डीए और टीटीपीए को बढ़ाना है। इन संगठनों का कहना है कि लेवल 1 और 2 के कर्मचारियों को दिल्ली जैसे शहर में मौजूदा पे स्केल पर अपनी जरूरतों को पूरा करने में काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। आइए जानते हैं कि क्या मांग की जा रही है? क्या कहना है फेडरेशन का? (8th Pay Commission demands) इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार आल इंडिया एनपीएस एप्लॉयीज फेडरेशन के प्रेसीडेंट मनजीत सिंह पटेल का कहना है कि मौजूदा समय में एंट्री लेवल पर बेसिक पे 18000 रुपये का है। इसमें एचआरए 5400 (दिल्ली जैसे शहरों के लिए) है। और टीटीपीए 2800 रुपये (जिसमें 60 प्रतिशत डीए बढ़ोतरी) मिल रहा है। मनजीत सिंह पटेल का कहना है कि मौजूदा 5400 रुपये एचआरए और 2800 रुपये टीटीपीए दिल्ली जैसे शहर के लिए पर्याप्त नहीं है। यही वजह है कि संगठन लगातार फैमिली यूनिट को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। 8th pay commission: फिटमेंट फैक्टर्स भी बढ़ाने पर है जोर 36% HRA की मांग (8th Pay Commission HRA) पटेल का कहना है कि मौजूदा खर्च को देखते हुए कर्मचारियों का एचआरए कम से कम 36 प्रतिशत कर देना चाहिए। वहीं, फैमिली काउंट 4.4 होना चाहिए। इसके अलावा 8वें वित्त आयोग से लेवल एक कर्मचारी के लिए कम से कम 9000 रुपये टीपीटीए की मांग की गई है। उनका कहना है कि 2.1 फिटमेंट फैक्टर रखने पर सैलरी में कम से कम 65 प्रतिशत का इजाफा होगा। 25 प्रतिशत डीए होने पर बेसिक पे के साथ विलय (8th Pay Commission DA) AINPSEF ने पे कमीशन से डीए के 25 प्रतिशत होने पर बेसिक पे के साथ मर्जर की डिमांड की है। इसके अलावा इस संगठन ने 8वें पे कमीशन से फैमिली यूनिट को बढ़ाकर 5 करने की डिमांड की है। अगर ऐसा हुआ तो बेसिक कर्मचारियों का कम से कम 69000 रुपये का हो जाएगा। बता दें, लगभग सभी संगठनों की तरफ से 8वें वित्त आयोग से फैमिली काउंट को बढ़ाने की मांग हुई है। मौजूदा समय में 3 है फैमिली काउंट (8th Pay Commission family Count) 7वें वित्त आयोग ने सेंट्रल गवर्नमेंट के कर्मचारियों के लिए फैमिली काउंट को तीन रखा था। इसमें कर्मचारी के लिए 1.0, पत्नी के लिए 0.8 और दो बच्चों के लिए 0.6-0.6 यूनिट था। AINPSEF ने फैमिली यूनिट को 4.4 करने की मांग की गई है। इसमें माता-पिता के लिए भी 0.7-0.7 यूनिट जोड़ने की डिमांड की गई है। फैमिली यूनिट बढ़ने से क्या लाभ अगर फैमिली यूनिट को 8वें पे कमीशन की तरफ से 4.4 किया गया तब की स्थिति में कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 2.05 गुना बढ़ेगी। कैसे HRA बढ़ने पर बढ़ जाएगी सैलरी? मौजूदा समय में बेसिक सैलरी 18000 रुपये है। डीए 58 प्रतिशत जोकि 10800 रुपये होता है। एचआरए 30 प्रतिशत जोकि 5400 रुपये होता है। टीपीटीए 1800 + 58% = 1800 + 1800 =2880 रुपये होता है। AINPSEF ने 2.1 फिटमेंट फैक्टर रहने की स्थिति में 37800 रुपये बेसिक पे की बात कही है। इसमें 2 प्रतिशत डीए को जोड़ ले तो 756 रुपये महंगाई भत्ता होता है। एचआरए को अगर 36 प्रतिशत जोड़ लिया जाए तो यह 13608 रुपये होगा। बता दें, टीपीटीएए 9000 रुपये + 2% = 9180 रुपये होगा। यानी कर्मचारियों की सैलरी 37800 रुपये से बढ़कर 8वें वित्त आयोग के लागू होने के बाद 61344 रुपये तक पहुंच सकती है। यानी ओवर आल कुल 65 प्रतिशत का इजाफा हो जाएगा।

RBI ने Crypto को लेकर जताई चिंता, संसदीय समिति से कानूनी मान्यता नहीं देने की सिफारिश

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सरकार को आगाह किया है कि क्रिप्टोकरेंसी जैसी वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा हैं. आरबीआई का मानना है कि भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था में डिजिटल करेंसी को कानूनी मान्यता बिल्कुल नहीं दी जानी चाहिए. बीजेपी सांसद भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली संसद की वित्त मामलों की स्थायी समिति के सामने आरबीआई ने यह बात मजबूती से रखी है।  देश की सुरक्षा को बड़ा खतरा समिति की बैठक में 'वर्चुअल डिजिटल एसेट और आगे की राह' विषय पर चर्चा हुई. इस दौरान आरबीआई के अधिकारियों ने साफ किया कि क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल देश की सुरक्षा और आर्थिक स्थिति को नुकसान पहुंचा सकता है. केंद्रीय बैंक ने चिंता जताई कि इस डिजिटल पैसे का उपयोग आतंकवाद को बढ़ावा देने (टेरर फंडिंग) और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे खतरनाक और गैरकानूनी कामों में आसानी से किया जा सकता है।  विदेशी कंपनियों पर लगाम कसना मुश्किल आरबीआई ने इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह बताया कि क्रिप्टो करेंसी का व्यापार ज्यादातर भारत के बाहर सक्रिय विदेशी कंपनियों (ऑफशोर एंटिटीज) के जरिए होता है. इन बाहरी कंपनियों पर भारतीय रेगुलेटरी संस्थाओं के लिए नजर रखना और उन पर नियंत्रण पाना बेहद मुश्किल है. अपनी बात को मजबूत करने के लिए आरबीआई ने वैश्विक स्तर के उदाहरण भी दिए. केंद्रीय बैंक ने बताया कि चीन और कतर जैसे देशों ने इस तरह की सभी वित्तीय गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है, जबकि यूरोपीय देशों ने इसे बहुत ही कड़े नियमों के दायरे में रखा हुआ है।  आईसीएआई (ICAI) ने दिया कानून का समर्थन इसी संसदीय समिति के सामने देश की सबसे बड़ी चार्टर्ड अकाउंटेंट संस्था, 'इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया' (ICAI) ने भी अपनी रिपोर्ट सौंपी. आईसीएआई ने कहा कि वह वर्चुअल डिजिटल एसेट के लिए एक मजबूत और स्पष्ट कानून बनाने के पक्ष में है. संस्था ने भरोसा दिया कि वे सरकार और निवेशकों की मदद के लिए एक खास वित्तीय और अकाउंटिंग फ्रेमवर्क तैयार कर सकते हैं।  पारदर्शिता बढ़ाने पर ज़ोर आईसीएआई ने सुझाव दिया कि वे विभिन्न प्रकार की डिजिटल एसेट्स के आर्थिक व्यवहार पर गहन रिसर्च कर सकते हैं. इस रिसर्च के आधार पर वे ऐसा गाइडेंस नोट या नियम तैयार करेंगे, जिससे कंपनियों की बैलेंस शीट और वित्तीय रिपोर्ट में क्रिप्टोकरेंसी के लेन-देन को पारदर्शिता से दिखाया जा सके. इससे देश में टैक्स चोरी रुकेगी और डिजिटल संपत्ति का सही लेखा-जोखा मिल सकेगा।  संसदीय समिति के अध्यक्ष भर्तृहरि महताब ने बैठक के बाद पुष्टि की कि रिजर्व बैंक देश में क्रिप्टोकरेंसी को कानूनी दर्जा देने के पूरी तरह खिलाफ है. उन्होंने यह भी बताया कि समिति फिलहाल आयकर कानून के तहत डिजिटल एसेट्स के ऑडिट और टैक्स से जुड़े पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है। 

क्या पनामा नहर बनेगी दूसरा होर्मुज? चीन की बढ़ती गतिविधियों पर ट्रंप का बड़ा अलर्ट

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर सख्त तेवर दिखाते हुए कहा है कि चीन पनामा नहर पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अमेरिका इसे किसी भी कीमत पर नहीं होने देगा. ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही साफ कर दिया था कि वे अमेरिका को सर्वोपरि रखते हैं और वो इसके लिए कोई भी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं. इस बार उन्होंने अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी चीन को वॉर्निंग दी है, वो भी दुनिया के कुछ अहम जलमार्गों में से एक पनामा नहर को लेकर।  ट्रंप ने पनामा नहर को दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग बताते हुए चेतावनी दी कि यह अमेरिका-चीन के बीच नया तनाव का केंद्र बन सकता है. डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में नॉर्थ डकोटा में एक कार्यक्रम में चीन पर निशाना साधते हुए कहा – ‘चीन पनामा नहर पर कब्जा करने की फिराक में है।. हम इसे कभी नहीं होने देंगे. यह हमारा बनाया हुआ है और हम इसे वापस लेंगे अगर जरूरी हुआ.’ डोनाल्ड ट्रंप ने पनामा नहर को दुनिया की सबसे महंगी और सबसे ज्यादा मुनाफा देने वाली संपत्तियों में से एक बताया।  पनामा नहर क्यों इतनी महत्वपूर्ण?     पनामा नहर अटलांटिक और प्रशांत महासागर को जोड़ने वाला 82 किलोमीटर लंबा जलमार्ग है. हर साल हजारों जहाज इसके रास्ते गुजरते हैं, जिसमें वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा शामिल है. यह मार्ग जहाजों को हजारों मील की दूरी बचाता है. अमेरिका इसका सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है, जबकि चीन दूसरा सबसे बड़ा।      अगर चीन इसका नियंत्रण हासिल कर लेता है तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर उसका दबदबा बढ़ जाएगा. ट्रंप का कहना है कि चीनी कंपनियां नहर के दोनों छोर पर बंदरगाहों का संचालन कर रही हैं, जो रणनीतिक खतरा है. अमेरिका इसे अपने पश्चिमी गोलार्द्ध में चीनी घुसपैठ मानता है।  ट्रंप वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई को परफेक्ट मानते हैं, जहां उन्होंने निकोलस मादुरो की सरकार को उखाड़ फेंकने में सफलता पाई. अब वे ईरान पर भी इसी तरह दबाव बनाने की रणनीति अपना रहे हैं. ट्रंप ने इसी वजह से चीन पर निशाना साधा है. उन्होंने ईरान पर भी तंज कसा और कहा-     ‘ईरान कुछ-कुछ वेनेजुएला जैसा हो रहा है, जो पहले मुनाफे वाली थी. हमने वेनेजुएला को काबू में कर लिया और ईरान के साथ भी वैसा ही कर रहे हैं।  क्या पनामा नहर बन रहा नया होर्मुज? अगर ये मामला गर्माया तो पनामा नहर होर्मुज की खाड़ी की तरह नया संघर्ष का केंद्र बन सकता है. होर्मुज से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल गुजरता है, जहां ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच तनाव हमेशा रहता है. पनामा नहर भी वैश्विक व्यापार का चोकप्वाइंट है. अगर यहां अमेरिका-चीन की टक्कर बढ़ी तो व्यापारिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है, कीमतें बढ़ सकती हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था को झटका लग सकता है।  ट्रंप का आक्रामक रुख दिखाता है कि अमेरिका अपने पारंपरिक प्रभाव क्षेत्र में किसी भी विदेशी शक्ति को बर्दाश्त नहीं करेगा. हालांकि चीन के खिलाफ सीधे लड़ना या उसे उकसाना अमेरिका के लिए इतना आसान नहीं होगा लेकिन ट्रंप के पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए कुछ कहा नहीं जा सकता है।  इस नहर का सीधा समंदर से कनेक्‍शन नहीं है, बल्कि गाटुन लॉक में जहाजों को पानी भरकर 26 मीटर तक ऊंचा उठाया जाता है और फिर उसे दूसरी तरफ समंदर में उतारा जाता है. इस नहर से जहाजों को तीन चरण में रास्‍ता पार कराया जाता है. अटलांटिक और प्रशांत महासागर को जोड़ने वाली इस नहर को इंजीनियरिंग का कमाल कहा जाता है. इसमें 3 लॉक बनाए गए हैं, जिससे जहाज को गुजारा जाता है और प्रशांत महासागर से निकालकर अटलांटिक महासागर में भेजा जाता है।  पनामा नहर पर अमेरिका ने कैसे किया कब्जा?     पनामा नहर की कहानी 20वीं सदी की शुरुआत से जुड़ी है. 1901 से 1909 के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति रहे थियोडोर रूजवेल्ट ने इसे अमेरिका की बड़ी महत्वाकांक्षा बनाया. फ्रांस पहले इसकी असफल कोशिश कर चुका था।      1903 में रूजवेल्ट ने कोलंबिया (जिसका हिस्सा पनामा था) से समझौता करने की कोशिश की, लेकिन कोलंबिया ने मना कर दिया. तब रूजवेल्ट ने पनामा के स्वतंत्रता आंदोलन का समर्थन किया. अमेरिकी युद्धपोतों की मौजूदगी में पनामा अलग हो गया।      नई पनामा सरकार से हाए बुनाउ वरीला संधि (Hay-Bunau-Varilla Treaty) के तहत अमेरिका को 10 मील चौड़ी पट्टी मिल गई. अमेरिका ने 10 मिलियन डॉलर एकमुश्त और सालाना किराया दिया. 1904 से 1914 तक निर्माण चला. रूजवेल्ट खुद 1906 में साइट पर गए और खुदाई मशीन पर खड़े होकर तस्वीर खिंचवाई।      1914 में पनामा नहर खुली और रूजवेल्ट ने गर्व से कहा था कि मैंने नहर बनवाई. अमेरिका ने साल 1999 तक नहर पर पूर्ण नियंत्रण रखा. जिम्मी कार्टर के समय टॉरिजोस कार्टर ट्रीटी के तहत पनामा को सौंप दिया गया, लेकिन न्यूट्रैलिटी की गारंटी ली गई।  ट्रंप का दावा ऐतिहासिक अमेरिकी गौरव और वर्तमान परिस्थितियों पर टिका है. वे कहते हैं कि अमेरिका ने नहर बनाई, उसमें खून-पसीना बहाया, इसलिए उसका हक भी अमेरिका का है. चीन की बढ़ती मौजूदगी को वे आर्थिक और रणनीतिक खतरा मानते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि पनामा नहर पर अमेरिका-चीन टकराव बढ़ सकता है, हालांकि इसे कूटनीति से ठीक किया जा सकता है. अगर तनाव बढ़ा तो वैश्विक व्यापार, तेल और सामान की कीमतों पर असर पड़ेगा. ट्रंप का यह बयान न सिर्फ पनामा बल्कि पूरे लैटिन अमेरिका में अमेरिकी प्रभाव बहाल करने की उनकी बड़ी रणनीति का हिस्सा लगता है। 

आईआईएम रायपुर में होगा आयोजन: विकसित छत्तीसगढ़ के विज़न, सुशासन और भविष्य की रणनीति पर होगा मंथन

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल का दो दिवसीय 'चिंतन शिविर 3.0' का आयोजन 4 एवं 5 जुलाई को भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), रायपुर में किया जाएगा। छत्तीसगढ़ शासन के सुशासन एवं अभिसरण विभाग द्वारा आईआईएम रायपुर के सहयोग से आयोजित इस शिविर का उद्देश्य शासन की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी, नवाचार आधारित तथा परिणामोन्मुख बनाते हुए विकसित छत्तीसगढ़ के विज़न को नई गति देना है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बदलते समय की चुनौतियों और अवसरों के अनुरूप शासन को भी निरंतर सीखना, स्वयं का मूल्यांकन करना और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार करना चाहिए। इसी सोच के अनुरूप आयोजित यह चिंतन शिविर मंत्रिमंडल और विभिन्न क्षेत्रों के राष्ट्रीय विशेषज्ञों के बीच संवाद, अनुभव-साझाकरण तथा नीति-निर्माण का महत्वपूर्ण मंच बनेगा। शिविर में प्रदेश के समग्र, संतुलित और समावेशी विकास से जुड़े विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा। कृषि, ग्रामीण विकास, उद्योग, निवेश, पर्यटन, खेल, नवाचार, उभरती प्रौद्योगिकी, सुशासन, संस्थागत सुधार, नेतृत्व विकास तथा प्रभावी जनसेवा जैसे विषयों पर विस्तृत सत्र आयोजित होंगे। इन चर्चाओं के आधार पर शासन की प्राथमिकताओं, विभागीय समन्वय और जनहितकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए भावी रणनीति तैयार की जाएगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा है कि सुशासन केवल योजनाएँ बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि समय की मांग के अनुरूप स्वयं को निरंतर बेहतर बनाते हुए जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना भी है। चिंतन शिविर इसी सतत सुधार की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य ऐसी कार्यसंस्कृति विकसित करना है जो पारदर्शी, उत्तरदायी, संवेदनशील और परिणाम आधारित हो तथा जिसका प्रत्यक्ष लाभ प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक पहुँचे। उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण केवल संसाधनों के बेहतर उपयोग से नहीं, बल्कि दूरदर्शी नीति, नवाचार, प्रभावी नेतृत्व और विभागों के बीच बेहतर समन्वय से संभव होगा। चिंतन शिविर में होने वाला मंथन आने वाले वर्षों की विकास यात्रा को नई दिशा देगा। राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ साझा करेंगे अनुभव चिंतन शिविर के प्रथम दिवस की शुरुआत आध्यात्मिक गुरु एवं मोटिवेशनल स्पीकर गौर गोपाल दास के नेतृत्व एवं जीवन मूल्यों पर व्याख्यान से होगी। इसके बाद अभय करंदीकर उभरती प्रौद्योगिकियों एवं भविष्य की शासन व्यवस्था में उनकी भूमिका पर अपने विचार रखेंगे। डॉ. रमेश चंद कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और भविष्य की कृषि रणनीतियों पर विशेष व्याख्यान देंगे। द्वितीय दिवस की शुरुआत योग सत्र से होगी। इसके पश्चात सुमन बिल्ला पर्यटन एवं सेवा क्षेत्र की संभावनाओं, शशांक मणि त्रिपाठी सार्वजनिक नीति एवं विकास, ओलंपिक पदक विजेता गगन नारंग उत्कृष्टता, नेतृत्व और प्रदर्शन की संस्कृति तथा डॉ. विनय सहस्रबुद्धे सुशासन, नेतृत्व और जनकेंद्रित प्रशासन पर अपने विचार साझा करेंगे। सुशासन की नई कार्यसंस्कृति को मिलेगा बल चिंतन शिविर का प्रमुख उद्देश्य शासन व्यवस्था में नवाचार को बढ़ावा देना, विभागों के बीच अभिसरण एवं समन्वय को मजबूत करना, निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना तथा परिणामोन्मुखी प्रशासनिक संस्कृति को प्रोत्साहित करना है। साथ ही शासन में प्रौद्योगिकी के बेहतर उपयोग, नवाचार आधारित समाधान और नागरिक-केंद्रित सेवाओं को लेकर भी विस्तृत चर्चा होगी।

राज्य में 30 जून की स्थिति में 13.16 लाख मीट्रिक टन से अधिक खाद का भण्डारण

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को समय पर कृषि आदान उपलब्ध कराने के अपने संकल्प पर लगातार प्रभावी ढंग से कार्य कर रही है। खरीफ वर्ष 2026 के लिए 30 जून तक की स्थिति में 13 लाख 16 हजार 506 मीट्रिक टन उर्वरकों का भण्डारण किया जा चुका है। यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री की पहल पर छत्तीसगढ़ को माह जुलाई में 46,500 टन डीएपी सप्लाई की आपूर्ति प्राप्त हुई है, जो सामान्य से अधिक है। इससे अब किसानों के लिए पर्याप्त डीएपी उपलब्ध हो सकेगा। बता दें कि अब तक भंडारित कुल रासायनिक खाद पिछले साल इसी अवधि में भंडारित रासायनिक खाद की तुलना में 1.08 लाख मीट्रिक टन अधिक है।    वहीं प्रदेश में रासायनिक उर्वरकों के भण्डारण और वितरण की स्थिति यह दर्शाती है कि सरकार ने खेती के मौसम से पहले ही किसानों की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने की मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित की है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण खाद उपलब्ध कराना केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि किसान परिवारों की समृद्धि और प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।  बता दें कि केन्द्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के लिए खरीफ वर्ष 2026 में 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके विरुद्ध 30 जून की स्थिति में 13 लाख 16 हजार 506 मीट्रिक टन उर्वरकों का भण्डारण किया जा चुका है। इनमें यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी तथा एसएसपी जैसे सभी प्रमुख उर्वरक शामिल हैं। यह स्थिति इस बात का प्रमाण है कि किसानों को बुआई के दौरान खाद की उपलब्धता में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए सरकार ने पहले से व्यापक तैयारी की है।  उल्लेखनीय है कि प्रदेश के किसानों को अभी तक 7 लाख 27 हजार 833 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया जा चुका है। यह वितरण किसानों की वास्तविक मांग के अनुरूप लगातार किया जा रहा है। साथ ही प्रदेश में 5 लाख 88 हजार 673 मीट्रिक टन उर्वरकों का शेष भण्डार उपलब्ध है, जिससे आगामी दिनों में भी किसानों को निर्बाध रूप से खाद उपलब्ध कराई जा सकेगी। यदि गत वर्ष की समान अवधि से तुलना करें तो इस वर्ष की उपलब्धियां और भी उत्साहजनक हैं। 30 जून 2025 तक प्रदेश में 12 लाख 25 हजार 929 मीट्रिक टन उर्वरकों का भण्डारण हुआ था, जबकि इस वर्ष यह बढ़कर 13 लाख 16 हजार 506 मीट्रिक टन हो गया है। अर्थात लगभग 90 हजार 577 मीट्रिक टन अधिक खाद का भण्डारण सुनिश्चित किया गया है। इसी प्रकार, गत वर्ष 30 जून तक 7 लाख 66 हजार 161 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया गया था। इस वर्ष अब तक लगभग 7.28 लाख मीट्रिक टन खाद किसानों तक पहुंच चुकी है। प्रदेश में वर्तमान में उपलब्ध 5.88 लाख मीट्रिक टन से अधिक का शेष भण्डार आगामी मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है और यह सरकार की दूरदर्शी योजना एवं मजबूत आपूर्ति प्रबंधन का परिचायक है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के किसी भी किसान को खाद के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। यही कारण है कि राज्य सरकार खाद की उपलब्धता, भण्डारण, परिवहन एवं वितरण की सतत निगरानी कर रही है, जिससे खरीफ सीजन में किसानों को समय पर आवश्यक उर्वरक उपलब्ध हो रहे हैं।

अल्प वर्षा की हर चुनौती से निपटने के लिए सरकार पूरी तरह तैयार : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में खरीफ सीजन-2026 के दौरान संभावित अल्प वर्षा की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग तथा विकसित भारत-बीवी-जी राम जी योजना की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा की। बैठक में मौसम की संभावित स्थिति, खाद एवं बीज की उपलब्धता, जल संरक्षण, सिंचाई प्रबंधन, वैज्ञानिक खेती तथा ग्रामीण रोजगार से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसानों के हित सर्वोपरि हैं और किसी भी परिस्थिति में उन्हें खाद, बीज, तकनीकी मार्गदर्शन अथवा आवश्यक संसाधनों की कमी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विभाग समन्वित रूप से कार्य करते हुए प्रत्येक जिले के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कार्ययोजना तैयार रखें। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा से उन्होंने छत्तीसगढ़ के किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप अतिरिक्त डीएपी उर्वरक उपलब्ध कराने का आग्रह किया था। इसके सकारात्मक परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ को 46 हजार टन से अधिक डीएपी (DAP) की आपूर्ति प्राप्त हुई है, जो सामान्य से अधिक है। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध होगा तथा खरीफ सीजन की तैयारियों में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि धान की फसल के लिए आवश्यक सिंचाई जल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। विशेष रूप से वर्षा आधारित क्षेत्रों में जल स्रोतों का वैज्ञानिक प्रबंधन किया जाए ताकि आवश्यकता पड़ने पर किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। उन्होंने कृषि विभाग को निर्देशित किया कि किसानों को कम एवं मध्यम अवधि में पकने वाली धान की किस्मों, डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर), कतार पद्धति से बुवाई, बीज उपचार, नमी संरक्षण तथा वैज्ञानिक खेती की आधुनिक तकनीकों के प्रति व्यापक रूप से जागरूक किया जाए। साथ ही उच्च भूमि वाले क्षेत्रों में दलहन एवं तिलहन फसलों का रकबा बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, जिससे किसानों को बेहतर आय के अवसर प्राप्त हों और कृषि जोखिम कम हो। मुख्यमंत्री साय ने किसानों से अपील की कि वे कृषि संबंधी किसी भी प्रकार की समस्या अथवा तकनीकी सलाह के लिए कृषि महाविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों, अनुसंधान संस्थानों तथा कृषि विभाग के विशेषज्ञों से संपर्क करें और वैज्ञानिक खेती को अपनाएं। उन्होंने अमानक बीज एवं उर्वरकों की बिक्री तथा कालाबाजारी पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश देते हुए कहा कि किसानों के साथ किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में बताया गया कि राज्य में खाद एवं बीज का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है तथा सभी जिलों में समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं कर ली गई हैं। बैठक में बताया गया कि अर्ली वेरायटी के धान बीज बीज निगम के माध्यम से किसानों को उपलब्ध कराने की संपूर्ण तैयारी पूरी कर ली गई है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि संभावित अल्प वर्षा जैसी परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए जल संरक्षण को जनभागीदारी का अभियान बनाया जाएगा। उन्होंने 'मोर गांव मोर पानी' अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश देते हुए वर्षा जल संरक्षण, खेत तालाब, जल संरचनाओं के निर्माण तथा भूजल संवर्धन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने को कहा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आकाशीय बिजली जैसी प्राकृतिक आपदाओं से किसानों की सुरक्षा के लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा विकसित 'सचेत', 'दामिनी' और 'मेघदूत' मोबाइल एप का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि समय पर मौसम संबंधी जानकारी किसानों तक पहुंच सके। साथ ही सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को उचित दर पर खरपतवारनाशक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, जिससे उत्पादन लागत कम हो और फसल सुरक्षित रह सके। वीबी-जी राम जी योजना बनेगी जल सुरक्षा और ग्रामीण समृद्धि का मजबूत आधार बैठक में बताया गया कि 1 जुलाई 2026 से योजना का क्रियान्वयन प्रारंभ हो चुका है। योजना के अंतर्गत अब ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों के स्थान पर 125 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। मजदूरी दर 300 रुपये प्रतिदिन निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत जल संरक्षण, जल सुरक्षा, जल संरचनाओं के निर्माण तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने निर्देश दिए कि वीबी-जी राम जी योजना के माध्यम से ऐसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाए, जिनसे एक ओर ग्रामीणों को निरंतर रोजगार प्राप्त हो और दूसरी ओर प्रदेश की जल सुरक्षा मजबूत हो। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण में किया गया प्रत्येक प्रयास आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा का आधार बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों और ग्रामीण परिवारों के हितों की रक्षा, कृषि उत्पादन को सुरक्षित रखने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। संभावित परिस्थितियों से निपटने के लिए सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर समयबद्ध एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कृषि विश्वविद्यालय द्वारा नियमित रूप से जारी किए जाने वाले बुलेटिनों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए।  उन्होंने कहा कि इसके लिए एक प्रभावी जनजागरूकता अभियान तैयार किया जाए, ताकि यह जानकारी किसानों तक जमीनी स्तर पर पहुँचे। साथ ही सोशल मीडिया एवं पारंपरिक मीडिया के माध्यम से भी इनका व्यापक प्रसार सुनिश्चित किया जाए। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल परदेशी, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, कृषि संचालक राहुल देव, विकसित भारत वीबी – जीरामजी योजना के आयुक्त तारणप्रकाश सिन्हा, भारत मौसम विज्ञान विभाग की विशेषज्ञ श्रीमती गायत्री वानी, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधान सेवाओं के निदेशक विवेक कुमार त्रिपाठी सहित कृषि, मौसम एवं संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

Punjab Land Pooling Policy: किसानों के हित में बदलाव, जानिए नई नीति से क्या होंगे फायदे

 चंडीगढ़ पंजाब में मान सरकार ने लैंड पूलिंग पॉलिसी में बदलाव कर दिए हैं। जमीन मालिकों की चिंताओं को दूर करने और जमीन अधिग्रहण के दौरान किसानों को अधिक फायदा देने के उद्देश्य से बड़ा फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में पंजाब कैबिनेट ने जमीन मालिकों के लाभों से संबंधित मौजूदा नीति में संशोधनों को मंजूरी दे दी है तथा राहत के लिए कई अन्य कदमों की भी शुरुआत की है। लैंड पूलिंग पॉलिसी से क्या होंगे बदलाव? संशोधित नियमों के अनुसार, लैंड पूलिंग में आवासीय व व्यावसायिक श्रेणी चुनने वाले जमीन मालिकों को प्रति एकड़ 1,000 वर्ग गज के आवासीय प्लॉट मिलते रहेंगे। कमर्शियल जगह को 200 वर्ग गज से बढ़ा 210 वर्ग गज प्रति एकड़ कर दिया गया है। जो सिर्फ आवासीय श्रेणी चुनेंगे, उन्हें अब 1,600 की जगह 1,630 वर्ग गज प्रति एकड़ मिलेगा। व्यावसायिक जगह 800 वर्ग गज से 840 वर्ग गज कर दी है। आउस्टी पॉलिसी में संशोधन के तहत वह जमीन मालिक जिनकी एक एकड़ जमीन अधिग्रहित की जाती है, वे 200 वर्ग गज प्लाट के हकदार होंगे। 1-2.5 एकड़ तक के मालिकों को 300 वर्ग गज प्लाट मिलेगा 12.5 एकड़ से अधिक पर 500 वर्ग गज प्लॉट मिलेगा। छोटे किसानों के लिए विशेष लेटर आफ इंटेंट की व्यवस्था। 'सुविधा सर्टिफिकेट' अवधि दो साल से बढ़ा चार साल कर दी है। विकसित प्लाट लेने वाले असली मालिकों को स्टांप ड्यूटी या अन्य खर्च नहीं देने पड़ेंगे। वे कहीं भी स्टांप ड्यूटी छूट का लाभले सकते हैं। ट्यूबवेल कनेक्शन भी मिलेगा। किसान प्राथमिक स्थानों पर प्लाट आबंटन के योग्य होंगे। कमर्शियल जगह को 200 वर्ग गज से बढ़ाकर 210 किया संशोधित नियमों के अनुसार लैंड पूलिंग के तहत रिहायशी और कमर्शियल कैटेगरी चुनने वाले जमीन मालिकों को प्रति एकड़ 1,000 वर्ग गज के रिहायशी प्लॉट मिलते रहेंगे, जबकि कमर्शियल जगह को 200 वर्ग गज से बढ़ाकर 210 वर्ग गज प्रति एकड़ कर दिया गया है। जो लोग केवल रिहायशी कैटेगरी चुनते हैं, उन्हें अब 1,600 वर्ग गज की जगह 1,630 वर्ग गज प्रति एकड़ मिलेगा, जबकि कमर्शियल कैटेगरी के प्रोजेक्ट्स के लिए कमर्शियल जगह 800 वर्ग गज से बढ़ाकर 840 वर्ग गज प्रति एकड़ कर दी गई है। आउस्टी पॉलिसी में संशोधनों को भी मंजूरी कैबिनेट ने आउस्टी पॉलिसी में संशोधनों को भी मंजूरी दी है, जिसके तहत वह जमीन मालिक जिनकी 1 एकड़ जमीन अधिग्रहित की जाती है, वे 200 वर्ग गज के प्लॉट के हकदार होंगे। जिनकी अधिग्रहित जमीन 1 एकड़ से अधिक और 2.5 एकड़ तक है, उन्हें 300 वर्ग गज का प्लॉट मिलेगा। वहीं जिनकी अधिग्रहित जमीन 2.5 एकड़ से अधिक है, वे 500 वर्ग गज के प्लॉट के हकदार होंगे। किसानों के लेटर ऑफ इंटेंट की व्यवस्था कैबिनेट ने छोटे किसानों के लिए विशेष लेटर ऑफ इंटेंट की व्यवस्था को भी मंजूरी दी है और 'सुविधा सर्टिफिकेट' की अवधि दो साल से बढ़ाकर चार साल कर दी है। इसके अलावा इस नीति के तहत विकसित प्लॉट लेने वाले असली जमीन मालिकों को रजिस्ट्रेशन या कन्वेयंस डीड के समय स्टांप ड्यूटी या अन्य खर्च नहीं देने पड़ेंगे। वैकल्पिक रूप से वे अधिग्रहित जमीन के कलेक्टर रेट पर गणना किए गए मूल्य तक पंजाब में कहीं भी जमीन खरीदते समय स्टांप ड्यूटी की छूट का लाभ ले सकते हैं। योग्य जमीन मालिकों को एक तरजीही ट्यूबवेल कनेक्शन भी मिलेगा, जबकि इस नीति में भाग लेने वाले किसान प्राथमिक स्थानों पर प्लॉटों की आबंटन के योग्य होंगे। संशोधित लैंड पूलिंग नीति का विरोध शिरोमणि अकाली दल ने पंजाब सरकार की संशोधित लैंड पूलिंग नीति को किसानों की जमीन हड़पने की साजिश करार दिया है। शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल ने कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार चुनाव नजदीक आते देख अपने राजनीतिक हितों को साधने में जुटी है। सरकार उन लोगों को लाभ पहुंचाने की कोशिश कर रही है, जिनसे पहले कथित तौर पर विभिन्न प्रकार के समझौते किए गए थे। किसानों के अधिकारों की रक्षा करना हमारी प्राथमिकता सुखबीर ने कहा कि पंजाब की उपजाऊ जमीन और किसानों के अधिकारों की रक्षा करना उनकी प्राथमिकता है। पहले भी किसानों की जमीनों को लेकर की गई ऐसी कोशिशों का विरोध किया गया था और आगे भी किसानों के हितों के खिलाफ किसी भी कदम को सफल नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों और उनकी जमीनों की सुरक्षा के लिए पूरे पंजाब में व्यापक जन आंदोलन और संघर्ष चलाया जाएगा। इसके तहत किसानों को जागरूक करने और सरकार की नीति के विरोध में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

राजा रघुवंशी हत्याकांड: सोनम रघुवंशी को SC से राहत, बहस में केतन और सिया पर क्या कहा गया?

इंदौर  इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि सोनम जमानत पर पहले ही रिहा हो चुकी है। अब इस मामले पर अगली सुनवाई 9 जुलाई को होगी।सुप्रीम कोर्ट ने इंदौर के राजा रघुवंशी हत्याकांड में आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी को मेघालय हाईकोर्ट से मिली जमानत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने कहा कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट के आदेश पर गंभीर सवाल उठते हैं, जिनकी आगे सुनवाई की आवश्यकता है। मेघालय सरकार का तर्क- सोनम के फरार होने का खतरा, सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सोनम पर लगे आरोप बेहद गंभीर हैं। पहले भी उनकी जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी थीं और यह मामला केवल गिरफ्तारी के दौरान हुई एक तकनीकी या क्लेरिकल गलती का नहीं है। मेघालय सरकार का तर्क है कि यदि सोनम बाहर रही तो उसके फरार होने का खतरा बना रहेगा। सोनम रघुवंशी की तरफ से पेश वकील ने कहा कि गिरफ्तारी के समय उन्हें न तो वकील मुहैया कराया गया और न ही गिरफ्तारी के स्पष्ट आधार बताए गए। उनका दावा था कि पुलिस ने सिर्फ एक खाली प्रोफॉर्मा दिया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि अगर यह मुद्दा इतना अहम था तो इसे पहले क्यों नहीं उठाया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर जमानत सिर्फ तकनीकी आधार पर दी गई है, तो क्या कानून पुलिस को दोबारा गिरफ्तारी से रोकता है? मेघालय सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश को दी थी चुनौती बता दें कि इंदौर के ट्रांसपोर्ट व्यापारी राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में मेघालय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में मेघालय हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें सोनम रघुवंशी को मिली जमानत को सही ठहराया गया था। सोनम पर मई 2025 में अपने पति राजा रघुवंशी की हनीमून के दौरान हत्या का मुख्य आरोपी होने का आरोप है। हाईकोर्ट से भी राज्य सरकार की अपील खारिज वहीं, मेघालय हाईकोर्ट ने 29 जून को शिलांग अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें राजा रघुवंशी मर्डर केस की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को जमानत दी गई थी। अदालत ने राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया था। जस्टिस डब्ल्यू. डिएंगडोह की एकल पीठ ने अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (न्यायिक) शिलांग के अप्रैल 2026 के आदेश को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की याचिका को खारिज कर दिया था। इस आदेश में गिरफ्तारी में गंभीर प्रक्रियात्मक खामियां पाए जाने के बाद सोनम को जमानत दी गई थी। हाईकोर्ट ने 10 जून को दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। शिलांग कोर्ट ने सोनम को जमानत देते समय कहा था कि जांच अधिकारियों ने गिरफ्तारी के आधार सही तरीके से नहीं बताए, जिससे आरोपी के बचाव के अधिकार पर असर पड़ा। सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा? सोनम रघुवंशी की तरफ से पेश वकील ने कहा कि गिरफ्तारी के समय उन्हें न तो वकील मुहैया कराया गया और न ही गिरफ्तारी के स्पष्ट आधार बताए गए. उनका दावा था कि पुलिस ने सिर्फ एक खाली प्रोफॉर्मा दिया था. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि अगर यह मुद्दा इतना अहम था तो इसे पहले क्यों नहीं उठाया गया. कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर जमानत सिर्फ तकनीकी आधार पर दी गई है, तो क्या कानून पुलिस को दोबारा गिरफ्तारी से रोकता है? सोनम अगली सुनवाई तक जमानत पर रहेंगी सोनम के वकील ने यह भी दलील दी कि मामले में अब कोई बरामदगी बाकी नहीं है. उन पर पहले से ही सख्त शर्तें लागू हैं और वह शिलॉन्ग में रह रही हैं, इसलिए सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका नहीं है।  सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह दोनों पक्षों के हितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है. अदालत ने यह भी माना कि सोनम लंबे समय से जेल में थीं और कानून का सिद्धांत है कि "जमानत नियम है और जेल अपवाद." हालांकि कोर्ट ने साफ किया कि मेघालय सरकार की जमानत रद्द करने की मांग पर अंतिम फैसला सुनवाई के बाद ही लिया जाएगा. फिलहाल सोनम की जमानत बरकरार रहेगी। 

दोनों देशों की साझेदारी मजबूत करने में मध्यप्रदेश निभाएगा बड़ी भूमिका

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से शुक्रवार को जर्मनी के 4 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मंत्रालय में सौजन्य भेंट की। प्रतिनिधिमंडल द्वारा मुख्यमंत्री से मध्यप्रदेश में ऊर्जा क्षेत्र सहित विभिन्न क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाने के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिनिधिमंडल में जर्मनी के केएफडब्ल्यू डेवलपमेंट बैंक के कार्यकारी बोर्ड की सदस्या एवं बैंक की सीईओ सु क्रिस्टियाने लाईबेक, कंट्री डायरेक्टर  वूल्फन मूथ, जर्मन दूतावास के प्रतिनिधि  गॉटफ्रीड वॉन और अन्य सदस्य, प्रबंध संचालक म.प्र. औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड  चंद्रमौली शुक्ला,  विशेष गढ़पाले सहित केन्द्र सरकार के अधिकारी भी उपस्थित थे। मुख्यनमंत्री डॉ. यादव ने भारत एवं जर्मनी के बीच दशकों पुरानी मित्रता का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देश भाईयों की तरह हैं। इनमें आपसी साझेदारी को और अधिक प्रबल बनाने में मध्यप्रदेश बड़ी भूमिका निभाने जा रहा है। सरकार जर्मनी के उद्योगपतियों और निवेशकों से लगातार सम्पर्क में है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ऊर्जा क्षेत्र में केएफडब्ल्यू डेवलपमेंट बैंक के सहयोग की सराहना करते हुए आशा जताई कि हमारी साझेदारी दिन-ब-दिन और भी सुदृढ़ होगी। जर्मनी के सहयोग से हमारा मध्ययप्रदेश एक ऊर्जा दक्ष हरित और समृद्ध राज्य बनेगा। केएफडब्ल्यू बैंक के प्रतिनिधिमंडल द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव को अवगत कराया गया कि एनर्जी रिफार्म प्रोग्राम अन्तर्गत वितरण कंपनियों में स्मार्ट मीटर की स्थापना एवं फीडर विभक्तिकरण कार्य के लिए लगभग 1120 करोड़ रूपये का वित्त पोषण किया जा रहा है। बैंक द्वारा इस साझेदारी को आगे बढ़ाते हुए एनर्जी रिफार्म फेज-2 अंतर्गत प्रदेश में विद्युत वितरण अधोसंरचना निर्माण तथा सौर घंटों में कृषि फीडरों की आपूर्ति के लिये अधोसंरचनात्मक निर्माण कार्यों के लिए लगभग 200 मिलियन यूरो के वित्तीय सहयोग पर भी रूचि दिखाई है।  

डीएमएफ से 13 विकास कार्यों के लिए 35.77 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व तथा वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी के विशेष प्रयासों से रायगढ़ जिले के खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को लगातार गति मिल रही है। इसी क्रम में जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से 35 करोड़ 76 लाख 94 हजार रुपये की लागत के 13 महत्वपूर्ण विकास कार्यों को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इन कार्यों से धरमजयगढ़, लैलूंगा, घरघोड़ा और तमनार विकासखंडों में शिक्षा, कौशल विकास, कृषि अधोसंरचना तथा ग्रामीण संपर्क व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। डीएमएफ निधि के माध्यम से स्वीकृत इन परियोजनाओं का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों के विद्यार्थियों, युवाओं, किसानों और ग्रामीण परिवारों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इन विकास कार्यों से क्षेत्र में सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। ग्रामीण विद्यार्थियों को मिलेंगी आधुनिक अध्ययन सुविधाएं तमनार, घरघोड़ा, लैलूंगा एवं धरमजयगढ़ विकासखंडों में पुस्तकालय भवन निर्माण तथा अन्य संबंधित कार्यों के लिए 6 करोड़ 39 लाख 64 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई है। आधुनिक अध्ययन संसाधनों से युक्त इन पुस्तकालयों से ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को गुणवत्तापूर्ण अध्ययन का वातावरण मिलेगा। आईटीआई भवनों के उन्नयन से बढ़ेगा कौशल विकास स्थानीय युवाओं को बेहतर तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शासकीय आईटीआई घरघोड़ा के भवन के जीर्णोद्धार के लिए 1 करोड़ 56 लाख 30 हजार रुपये तथा शासकीय आईटीआई धरमजयगढ़ के भवन के उन्नयन हेतु 82 लाख 86 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे प्रशिक्षण सुविधाएं और अधिक सुदृढ़ होंगी तथा युवाओं के लिए रोजगारपरक कौशल विकास के नए अवसर उपलब्ध होंगे। कृषि अधोसंरचना को मिलेगा नया आधार तमनार विकासखंड में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 1 करोड़ 21 लाख 81 हजार रुपये की लागत से व्यावसायिक परिसर तथा 1 करोड़ 5 लाख 20 हजार रुपये की लागत से बाजार शेड यार्ड का निर्माण किया जाएगा। इन परियोजनाओं से किसानों को कृषि उत्पादों के भंडारण, विपणन और व्यापार के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। 24.73 करोड़ रुपये से मजबूत होगा ग्रामीण सड़क नेटवर्क धरमजयगढ़, लैलूंगा, घरघोड़ा एवं तमनार विकासखंडों में लगभग 24 करोड़ 73 लाख रुपये की लागत से आठ महत्वपूर्ण सड़क निर्माण कार्यों को स्वीकृति दी गई है। इनमें पीपराही-डीपापारा, सुबरा-कटकलिया, कोंडकेल-गेरूपानी, ढाप-भवानीपुर, किलकिला-उड़ीसा बॉर्डर, बरमुड़ा-उकारीपाली, टेरम-छिरभौंना तथा बाम्हनबहरी-पुलाईआंट मार्ग शामिल हैं। इन सड़कों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन सुगम होगा, कृषि उत्पादों के परिवहन में सुविधा मिलेगी तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच आसान होगी। इन सभी परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल एवं प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) को कार्य एजेंसी नियुक्त किया गया है। जिला प्रशासन ने सभी निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप 365 दिनों के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग एवं गुणवत्ता परीक्षण भी सुनिश्चित किया जाएगा।