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11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि शुरू, घटस्थापना में कलश रखते समय इन गलतियों से बचें

Sharadiya Navratri:शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से है। पहले दिन ही मां दुर्गा की पूजा के साथ-साथ घटस्थापना की परंपरा निभाई जाती है। नवरात्रि में पहले दिन ही कलश की स्थापना करते हुए अगले नौ दिन तक मां दुर्गा की पूर्जा अर्चना की जाती है। मान्यता है कि कलश में देवती-देवता वास करते हैं और इसकी स्थापना में किसी भी तरह की चूक करने से बचना चाहिए। तमाम लोगों को ये कन्फ्यूजन होता है कि कलश की स्थापना कैसे करना है और कौन सा स्टेप पहले शुरू करना है। वहीं इस बात को लेकर बहुत कन्फ्यूजन होता है कि कलश को सीधे जमीन पर रखना है या फिर इसके नीचे कोई अनाज रखना है। अगर अनाज रखना है तो फिर कौन सा अनाज रखना है? चलिए जानते हैं कि कलसश के नीचे क्या रखना चाहिए? साथ ही जानेंगे के घटस्थापना के वक्त किन गलतियों को करने से बचना है? कलश के नीचे कौन सा अनाज रखें? नवरात्रि की कलश स्थापना में कुछ नियमों का ध्यान रखना जरूरी है। पूजा के कलश को सीधे जमीन पर नहीं रखा जाता है। ना ही इसे सीधे तौर पर चौकी पर रखना चाहिए। इसके लिए सबसे पहले अनाजों की वेदी बनाते हैं और इसी पर कलश को रखना शुभ मानते हैं। इस दौरान सात तरह के अनाजों का इस्तेमाल करना शुभ माना जाता है। इसे सप्तधान्य भी कहा जाता है। इसमें आप चावल, गेंहू, तिल और बाजरा समेत कई चीजें मिला सकते हैं। सबसे पहले अनाज को साफ कर लें और फिर इसकी वेदी बना दें और इसी पर कलश को रखें। नवरात्रि घटस्थापना में ना करें ये गलतियां 1. कलश पर रखे जाने वाले नारियल को गलत दिशा में कभी भी ना रखें। इसकी सही दिशा का ध्यान जरूर दें। धार्मिक मान्यता के हिसाब से जब आप पूजा करें तो नारियल की दिशा पूजा करने वाले की साइड होना चाहिए। इसे कहीं पर भी ऊपर या फिर अपने पीछे की ओर ना रखें। 2. नवरात्रि की घटस्थापना में अक्षत का इस्तेमाल होता है। ऐसे में इस दौरान कोशिश करें कि चावल टूटे हुए ना हो। कलश स्थापना के वक्त चावल का इस्तेमाल करते वक्त इस बात का ध्यान जरूर रखें। साथ ही ध्यान रखें कि पूजा में इस्तेमाल होने वाले चावल साफ हो। 3. नियम के अनुसार घटस्थापना वाले कलश को गलत जगह ना रखें। इसके लिए घर के ईशान कोण को चुनें। ज्योतिष वास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व दिशा को ईशान कोण कहा जाता है। अगर यहां जगह संभव नहीं है तो पूर्व दिशा में भी कलश रख सकते हैं। बस इतना ध्यान रखें कि जहां भी पूजा हो रही है वो जगह साफ हो। बार-बार यहां पर किसी का हाथ नहीं लगना चाहिए।

राज्यसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर, 16 अक्टूबर को नहीं पड़ेगा एक भी वोट; सभी 10 उम्मीदवार निर्विरोध विजयी

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाला चुनाव अब नहीं होगा. राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 12 उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किये थे. लेकिन आज नामांकन पत्रों की जांच के दौरान दो निर्दलीय उम्मीदवारों के पर्चे खारिज होने के बाद BJP के 8 और समाजवादी पार्टी (सपा) के 2 उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया है. यानी अब इन 10 सीटों के लिए मतदान की जरूरत नहीं पड़ेगी. दरअसल, उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है. इसे देखते हुए भारत निर्वाचन आयोग ने इन सीटों पर 16 अक्टूबर को द्विवार्षिक चुनाव कराने का कार्यक्रम घोषित किया था।  10 सीटों के लिए कुल 12 उम्मीदवारों ने दाखिल किया था नामांकन चुनाव प्रक्रिया के तहत 29 सितंबर से 6 अक्टूबर तक नामांकन की अंतिम तारीख निर्धारित की गई थी. 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच तथा 9 अक्टूबर तक नाम वापसी की समयसीमा तय है. जिसके तहत 10 सीटों के लिए कुल 12 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था।  सबसे पहले नामांकन कर बैकफुट पर आई सपा नामांकन प्रक्रिया के दौरान सबसे पहले सपा की ओर से प्रो. राम गोपाल यादव और धनराज नाथवानी ने 30 सितंबर को नामांकन दाखिल किया. वहीं 1 अक्टूबर को कांते सयन्ना ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरा. हालांकि इस दौरान सपा ने जल्द ही अपना तीसरा उम्मीदवार भी उतारने का ऐलान कर दिया था. हालांकि बीते 6 अक्टूबर को नामांकन के अंतिम दिन सपा मुखिया अखिलेश यादव ने X पर “अब हमारी निगाह तीन पर नहीं, चार सौ तीन पर है।” पोस्ट कर अपना तीसरा उम्मीदवार ना उतारने का ऐलान कर BJP और सपा के सभी उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचन तय कर दिया था।  BJP के आत्मविश्वास से बैकफुट पर आये विपक्षी इस दौरान BJP ने अपने 8 उम्मीदवारो के नाम का ऐलान कर दिया था. जिसमें 7 को जिताने के लिए BJP के पास पर्याप्त संख्या थी. जबकि BJP ने अपना 8 वां उम्मीदवार विपक्षी विधायकों के समर्थन के भरोसेमंद मैदान में उतारा था. जिसके बाद एक ओर जहाँ विपक्ष बैकफुट पर नज़र आया. तो वही BJP पूरे आत्माविश्वास के साथ CM योगी आदित्यनाथ और दोनों डिप्टी CM के साथ संगठन के शीर्ष नेतृत्व के साथ BJP ने अपने सभी 8 उम्मीदवारों के नामांकन दाखिल कराते हुए नज़र आई. जिसमें धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, राम प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह और श्रुति गंगवार शामिल रही. हालांकि इस दौरान ओमकार नाथ चौरसिया ने भी बिना आवश्यक 10 प्रस्तावको के ही निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया. जिससे 10 सीटों के लिए 12 उम्मीदवारों के नामांकन हो गए।  दो निर्दलीय उम्मीदवारों के पर्चे खारिज 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच के दौरान निर्वाचन अधिकारी ने कांते सयन्ना और ओमकार नाथ चौरसिया के नामांकन पत्र खारिज कर दिए. मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के मुताबिक दोनों निर्दलीय उम्मीदवार आवश्यक 10 प्रस्तावकों की अनिवार्य शर्त पूरी नहीं कर सके थे. जिसके चलते बिना 10 प्रस्तावको के ही नामांकन पत्र दाखिल कर देने के आधार पर इन दोनों निर्दलीय उम्मीदवारो का नामांकन ख़ारिज कर दिया गया है. अब राज्यसभा की 10 सीटों के लिए मैदान में केवल BJP के 8 और सपा के 2 उम्मीदवार रह गए हैं. ऐसे में इन सभी उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन तय माना जा रहा है।  9 को नाम वापसी की समय सीमा खत्म होने के बाद मिलेगा सर्टिफिकेट अब 9 अक्टूबर तक नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होगी. यदि कोई उम्मीदवार नाम वापस नहीं लेता है. तो इसके बाद सभी 10 उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी. और सभी उम्मीदवारों को निर्वाचन का सर्टिफिकेट भी दें दिया जायेगा. और फिर उसके बाद बिना मतदान ही राज्यसभा चुनाव की समस्त प्रक्रियाओ को संपन्न करने की औपचारिकताओ को भी पूरा कर दिया जायेगा।  इन राज्यसभा सदस्यों का 25 नवंबर को खत्म होगा कार्यकाल उत्तर प्रदेश से जिन राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है, उनमें अरुण सिंह, गीता उर्फ चंद्रप्रभा, नीरज शेखर, बृजलाल, प्रो. राम गोपाल यादव, रामजी, बी.एल. वर्मा, सीमा और हरदीप सिंह पुरी शामिल हैं. वहीं डॉ. दिनेश शर्मा को बीते दिनों अंडमान निकोबार का उप राज्यपाल बना दिया गया है. जिसके चलते राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफे जाने के चलते उनकी सीट बीते 11 सितंबर 2026 से रिक्त है। 

तेजस निर्माण में आई तेजी, भारत को मिले 4 F404 इंजन; धड़ाधड़ बनेंगे स्वदेशी लड़ाकू विमान

बेंगलुरु   भारत के तेजस फाइटर जेट प्रोग्राम को नई रफ्तार मिली है. अमेरिकी विमान निर्माता कंपनी ने देसी राफेल फाइटर जेट के नाम से मशहूर तेजस लड़ाकू विमान के लिए 4 F404 इंजन भेजा है. बता दें कि इंजन की आपूर्ति में देरी की वजह से तेजस फाइटर जेट प्रोग्राम पर प्रतिकूल असर पड़ा और यह प्रोग्राम तय समय से काफी पीछे चल रहा है. अब इसके रफ्तार पकड़ने की संभावना बढ़ गई है. अमेरिकी कंपनी ने तेजस फाइटर जेट प्रोग्राम के लिए इंजन की आपूर्ति शुरू कर दी है. सितंबर महीने में 4 F404 भेजे गए. बताया जा रहा है कि ऐसे 20 जेट इंजनों की सप्‍लाई का प्‍लान ट्रैक पर है।  जानकारी के अनुसार, अमेरिकी कंपनी GE Aerospace ने भारत के स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस कार्यक्रम के लिए सितंबर 2026 में 4 F404-IN20 इंजन हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को भेजे हैं. कंपनी के प्रवक्ता ने न्‍यूज एजेंसी ANI को यह जानकारी दी है. इसके साथ ही जून से दिसंबर 2026 के बीच 20 इंजनों की आपूर्ति के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में कंपनी की प्रगति जारी है. GE Aerospace के प्रवक्ता ने आगे बताया कि कंपनी भारत के तेजस लड़ाकू विमानों को शक्ति देने के लिए आवश्यक इंजनों की आपूर्ति पर ध्यान केंद्रित किए हुए है. कंपनी ने HAL और भारतीय वायुसेना के साथ अपनी साझेदारी पर भी जोर दिया. सितंबर की खेप से पहले अगस्त में तीन इंजन HAL को भेजे गए थे।  2021 में 99 F404-IN20 इंजन का ऑर्डर पूर्व HAL चेयरमैन डीके सुनील ने अप्रैल में ANI को बताया था कि GE ने जून से दिसंबर 2026 के बीच 20 F404 इंजन की आपूर्ति का आश्वासन दिया है. HAL ने तेजस Mk1A कार्यक्रम के लिए 2021 में GE से 99 F404-IN20 इंजन का ऑर्डर दिया था. इस ऑर्डर के तहत पहला इंजन 25 मार्च 2025 को भारत पहुंचा था. GE के मुताबिक, अतिरिक्त ऑर्डर मिलने के समय F404-IN20 इंजन की उत्पादन लाइन करीब 5 वर्षों से बंद थी. कंपनी को उत्पादन दोबारा शुरू करने के साथ वैश्विक सप्लाई चेन को भी फिर से सक्रिय करना पड़ा. GE के कॉम्बैट एंड ट्रेनर इंजन कारोबार के महाप्रबंधक शॉन वॉरेन ने बताया था कि कोविड-19 महामारी के कारण यह प्रक्रिया और चुनौतीपूर्ण हो गई थी। 

जेन नेक्स्ट संवाद में जेन-जी और जेन-अल्फा से रूबरू हुए मुख्यमंत्री

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे युवा देश है और यही युवा शक्ति विकसित एवं सशक्त भारत के निर्माण की सबसे बड़ी ताकत बनेगी। उन्होंने युवाओं से बड़े सपने देखने, अपनी रुचि के अनुरूप लक्ष्य तय करने और पूरी मेहनत एवं समर्पण के साथ उन्हें हासिल करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में सफलता के लिए समय का सदुपयोग, निरंतर परिश्रम और अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प सबसे महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री  साय आज शाम राजधानी रायपुर के सड्डू में न्यूज 24 और लल्लूराम डॉट कॉम द्वारा आयोजित ‘जेन नेक्स्ट संवाद 'यंग माइंड्स, मीनिंगफुल कन्वर्सेशंस’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री जेन-जी और जेन-अल्फा के विद्यार्थियों से रूबरू हुए। विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री से उनके जीवन के संघर्ष, राजनीति, शिक्षा, राज्य के आर्थिक विकास, प्रतियोगी परीक्षाओं और जल संरक्षण सहित विभिन्न विषयों पर सवाल किए। मुख्यमंत्री  साय ने सहज और आत्मीय अंदाज में युवाओं के सवालों के जवाब दिए और अपने जीवन के अनुभव भी साझा किए। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में दुनिया में बढ़ा भारत का मान-सम्मान मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री के रूप में जनता की सेवा करते हुए प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने 25 वर्ष पूरे किए हैं। इस अवसर पर पूरे देश में सेवा संकल्प अभियान मनाया जा रहा है।  मुख्यमंत्री  साय ने स्वच्छ भारत मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने जब लाल किले की प्राचीर से स्वच्छता का आह्वान किया था, तब इसे लेकर सवाल भी उठाए गए थे। आज स्वच्छता जन-जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। घर-घर शौचालय के निर्माण से माताओं-बहनों के सम्मान और स्वास्थ्य की रक्षा हुई तथा गांवों को खुले में शौच से मुक्ति मिली। स्वच्छ भारत मिशन ने स्वच्छता के प्रति सोच और व्यवहार दोनों में बड़ा बदलाव लाया है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में भारत निरंतर सशक्त और समृद्ध राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ रहा है। सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को भारत के सामर्थ्य और दृढ़ इच्छाशक्ति से परिचित कराया है। उन्होंने कहा कि आर्थिक दृष्टि से भी भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है।  प्रधानमंत्री  मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लिया है और आज पूरी दुनिया में भारत का मान-सम्मान बढ़ा है। मुख्यमंत्री  साय ने अपने हालिया सिंगापुर प्रवास का उल्लेख करते हुए कहा कि चार दिनों के प्रवास के दौरान उनकी अनेक प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों से चर्चा हुई। वहां उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भी प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा का उल्लेख किया। अपना बचपन याद कर मुख्यमंत्री ने बताया – कितना बदल गया है शिक्षा का परिदृश्य युवाओं से संवाद के दौरान मुख्यमंत्री  साय ने अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियां भी साझा कीं। उन्होंने कहा कि आप सभी से चर्चा करते हुए मुझे अपना बचपन याद आ रहा है। जब मैं बगिया गांव के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ता था, तब हमारे स्कूल में पांचवीं बोर्ड की परीक्षा देने की व्यवस्था तक नहीं थी। परीक्षा देने के लिए कई किलोमीटर दूर दूसरे गांव जाना पड़ा और वहां पांच दिनों तक रुककर परीक्षा दी। उस समय स्कूल भवन भी कच्चे होते थे और बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता था। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। छत्तीसगढ़ में शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से विस्तार हुआ है और उच्च शिक्षा की विभिन्न संस्थाएं प्रदेश में उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि पहले राज्य में केवल एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज 15 मेडिकल कॉलेज हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आज उन्हें शिक्षा के जो अवसर और सुविधाएं मिल रही हैं, उनका भरपूर सदुपयोग करें और अपने उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करें। “कभी नहीं सोचा था सरपंच भी बनूंगा, ईश्वर ने मुख्यमंत्री तक पहुंचा दिया” बीबीए के छात्र अश्मित शिंदे ने मुख्यमंत्री से पूछा कि उन्हें मुख्यमंत्री बनने की प्रेरणा कैसे मिली। सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री  साय ने अपने जीवन के संघर्षपूर्ण दौर को याद किया। उन्होंने कहा कि मैं जशपुर के बगिया जैसे छोटे से गांव में पला-बढ़ा हूं। जब मैं लगभग 10 वर्ष का था, तब मेरे पिता का आकस्मिक निधन हो गया। भाइयों में सबसे बड़ा होने के कारण छोटी उम्र में ही छोटे भाइयों, मां और दादी की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर आ गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने पढ़ाई के साथ खेती-बाड़ी संभाली और छोटे भाइयों को सक्षम बनाने का प्रयास किया। उस समय कभी यह कल्पना भी नहीं की थी कि गांव का सरपंच बनूंगा। सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़ते हुए सरपंच से विधायक, सांसद, केंद्रीय राज्यमंत्री और आज मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की सेवा करने का अवसर मिला। मुख्यमंत्री  साय ने युवाओं से कहा कि उन्होंने हमेशा ‘कर्म ही पूजा है’ के सिद्धांत को जीवन में अपनाया। जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि यदि हम अच्छे उद्देश्य से पूरी निष्ठा के साथ काम करते हैं तो ईश्वर भी हमारा साथ देता है। शायद ईश्वर को मेरे हाथों से लोगों की सेवा करानी थी, इसलिए एक छोटे से गांव के सरपंच को मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने का अवसर मिला। समय की कीमत समझें, अपनी रुचि को बनाएं लक्ष्य छात्र करण भोसले ने मुख्यमंत्री से उनके जीवन का मूल मंत्र पूछा। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को समय की कीमत समझनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि अभी उनका समय अध्ययन और अपने भविष्य की मजबूत नींव तैयार करने का है। इस समय का जितना अधिक सदुपयोग करेंगे, भविष्य उतना ही बेहतर होगा। सपने हमें मेहनत करने की प्रेरणा देते हैं। हर युवा को अपनी रुचि पहचाननी चाहिए, उसी के अनुरूप लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए और उसे हासिल करने के लिए पूरी ऊर्जा से प्रयास करना चाहिए। “जल है तो कल है”—जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान कक्षा नवमीं के छात्र आदित्य राज तिवारी ने मुख्यमंत्री  साय से पूछा कि स्कूली विद्यार्थी जल संरक्षण में किस प्रकार योगदान दे सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि “जल है तो कल है।” जलस्तर लगातार नीचे जा … Read more

मुंबई में उद्योग प्रतिनिधियों से वन-टू-वन चर्चा, नए निवेश और औद्योगिक विस्तार पर हुआ सार्थक संवाद

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की निवेश-अनुकूल नीतियां, पारदर्शी प्रक्रियाएं और औद्योगिक सुविधाएं प्रदेश को निवेश के लिए फेवरेट डेस्टिनेशन बनाती हैं। राज्य सरकार नए उद्योगों की स्थापना और मौजूदा इकाइयों के विस्तार के लिए आवश्यक सहयोग एवं अनुमतियां समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की केंद्रीय भौगोलिक स्थिति, औद्योगिक भूमि, अधोसंरचनात्मक और कुशल कार्यबल निवेशकों को महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं। निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारकर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करना सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुंबई में आयोजित ‘मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर संवाद’ कार्यक्रम में विभिन्न सेक्टर्स के निवेशकों से भी मुलाकात की। उन्होंने निवेश योजनाओं और औद्योगिक विस्तार पर चर्चा करते हुए प्रतिनिधियों को ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट : 2027 में सहभागिता के लिए आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मुम्बई रोड शो में विभिन्न उद्योग समूहों और निवेशकों के साथ दिनभर हुई बैठकों में मध्यप्रदेश को लगभग 90 हजार करोड़ रूपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। जेएसडब्ल्यू समूह ने सीमेंट, पेंट और अन्य व्यवसायों के विस्तार में दिखाई रुचि मुख्यमंत्री डॉ. यादव से जेएसडब्ल्यू समूह के श्री पार्थ जिंदल ने प्रदेश में समूह की मौजूदा औद्योगिक उपस्थिति और विस्तार योजनाओं पर चर्चा की। समूह की गतिविधियों में ग्वालियर में पेंट, धार में इस्पात, पन्ना में चूना पत्थर खनन तथा दमोह के गैसाबाद और हटा में सीमेंट से जुड़े कार्य शामिल हैं। बैठक में सीमेंट, पेंट और अन्य व्यवसायों के विस्तार, प्रगतिरत परियोजनाओं के शीघ्र क्रियान्वयन तथा भविष्य के रणनीतिक निवेश अवसरों पर विचार-विमर्श हुआ। समूह ने परियोजनाओं को गति देने के लिए राज्य सरकार के सहयोग की अपेक्षा व्यक्त की। अक्षय ऊर्जा और भंडारण में अवादा का 22,156 करोड़ रूपये का निवेश प्रस्ताव अध्यक्ष अवादा समूह श्री प्रशांत चौबे ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से सौर, पवन, नियमित उपलब्धता वाली नवकरणीय ऊर्जा और बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं पर चर्चा की। समूह वर्ष 2013-14 से मध्यप्रदेश में कार्यरत है। नीमच में 151 मेगावाट और आगर सोलर पार्क में 280 मेगावाट की सौर परियोजनाएं इसकी मौजूदा उपस्थिति का हिस्सा हैं। समूह ने कुल 2,362 मेगावॉट क्षमता की परियोजनाओं के लिए 22,156 करोड़ रूपयेका प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इसमें पचोरा में 6,616 करोड़ रूपये, ईशानगर में 3,250 करोड़ रूपये और नीमच में 12,290 करोड़ रूपये का निवेश शामिल है। बैठक में परियोजनाओं के शीघ्र पंजीकरण, समूह की कंपनियों एवं विशेष प्रयोजन संस्थाओं द्वारा पंजीकरण के उपयोग, शासकीय भूमि आवंटन और भूमि अधिकारों के पट्टे अथवा हस्तांतरण की अनुमति पर चर्चा हुई। आगर मालवा में पवन ऊर्जा पंजीकरण को 201.3 मेगावाट से बढ़ाकर 264 मेगावॉट करने तथा समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए एकल-खिड़की सहयोग की अपेक्षा की गई। पीथमपुर में एनक्यूब एथिकल्स का 1,200 करोड़ रूपये से अधिक का निवेश प्रस्ताव मुख्यमंत्री डॉ. यादव से एनक्यूब एथिकल्स प्रायवेट लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री मेहुल मधुसूदन शाह ने फार्मास्यूटिकल विनिर्माण के विस्तार पर चर्चा की। कंपनी की मध्यप्रदेश में स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क, पीथमपुर में इकाई है। कंपनी ने 2 फार्मा परियोजनाओं के लिए 1,200 करोड़ रूपये से अधिक का निवेश प्रस्ताव दिया, जिनसे 800 से अधिक रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। इनमें मौजूदा पीथमपुर इकाई का द्वितीय चरण का विस्तार और समीपवर्ती 20 एकड़ से अधिक भूमि पर स्टेराइल ऑफ्थैल्मिक अर्थात आंखों की दवाओं की नई विनिर्माण सुविधा शामिल है। नई इकाई के लिए भूमि आवंटित है। परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन में राज्य सरकार के सहयोग और मध्यप्रदेश को कंपनी के विनिर्माण एवं निर्यात आधार के रूप में विस्तार देने पर विचार-विमर्श हुआ। छिंदवाड़ा में हिंदुस्तान यूनिलीवर का 800 रूपये से 1,000 करोड़ रूपये का विस्तार प्रस्ताव हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक, सप्लाई चेन, दक्षिण एशिया, श्री योगेश मिश्रा ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से छिंदवाड़ा की लहगडुआ स्थित इकाई के विस्तार पर चर्चा की। दैनिक उपयोग की उपभोक्ता वस्तुओं के क्षेत्र की कंपनी की यह इकाई देश में उसके बड़े विनिर्माण संयंत्रों में शामिल है। कंपनी ने सर्फ एक्सेल और व्हील के लिए नई स्प्रे-ड्राइड डिटर्जेंट विनिर्माण सुविधा में भूमि की लागत को छोड़कर 800 से 1,000 करोड़ रूपये के निवेश का प्रस्ताव दिया। वर्ष 2027 से 2030 के बीच चरणबद्ध विकास और 5 से 8 लाख टन वार्षिक उत्पादन क्षमता प्रस्तावित है। इससे लगभग 700 प्रत्यक्ष और 1,500 अप्रत्यक्ष रोजगार अवसरों के सृजित होने की संभावना है। परियोजना के लिए 35 से 40 एकड़ भूमि, प्रतिदिन 1,000 किलोलीटर पानी और 5,000 केवीए विद्युत क्षमता की आवश्यकता बताई गई। शून्य तरल अपशिष्ट निर्वहन पद्धति अपनाने तथा मध्यप्रदेश निवेश प्रोत्साहन योजना : 2025 के अंतर्गत अनुकूलित प्रोत्साहन पैकेज और विस्तार में सहयोग पर भी चर्चा हुई। ग्वालियर में 200 करोड़ रूपये की दूरसंचार उपकरण इकाई का प्रस्ताव, महिला रोजगार पर विशेष जोर मुख्यमंत्री डॉ. यादव से स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री चंद्रा शेखर ने दूरसंचार उपकरण एवं सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निवेश पर चर्चा की। कंपनी ने ग्वालियर के टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन में 200 करोड़ रूपये की एआई-संचालित, निर्यातोन्मुख दूरसंचार उपकरण विनिर्माण सुविधा स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। प्रस्तावित इकाई का 75 प्रतिशत से अधिक उत्पादन निर्यात के लिए निर्धारित करने की योजना है। लगभग 1,000 रोजगार अवसरों के साथ कार्यबल में 70 प्रतिशत महिलाओं और 10 प्रतिशत दिव्यांगजन की भागीदारी रखी गई है। बैठक में इकाई की स्थापना के लिए भूमि आवंटन पर विचार-विमर्श हुआ। ब्लैक स्टोन और वनराज रियल्टी ने लॉजिस्टिक्स एवं रियल एस्टेट में तलाशीं निवेश की संभावनाएं ब्लैक स्टोन के प्रबंध निदेशक श्री आलोक जैन और वनराज रियल्टी एलएलपी के श्री राजीव अजमेरा ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से लॉजिस्टिक्स, रियल एस्टेट और अन्य क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की। ब्लैक स्टोन की प्रदेश में अभी उपस्थिति नहीं है। लगभग 500 से 1,000 करोड़ रूपये के संभावित निवेश के संदर्भ में प्रमुख स्थानों पर उपयुक्त राजस्व भूमि उपलब्ध कराने, प्रोत्साहन प्रक्रिया की स्पष्टता तथा आवश्यक अनुमतियों और स्वीकृतियों के शीघ्र निराकरण पर विचार-विमर्श हुआ। सिफी ने मध्यप्रदेश में हाइपरस्केल और एआई-रेडी डेटा सेंटर में दिखाई रुचि मुख्यमंत्री डॉ. यादव से सिफी टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के डेटा सेंटर व्यवसाय के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री शरद अग्रवाल ने प्रदेश में डेटा सेंटर अवसंरचना विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा की। कंपनी … Read more

पिछले 18 महीनों में फार्मा क्षेत्र के 54 निवेश प्रस्ताव, लगभग 19,477 करोड़ रुपए के प्रस्तावित निवेश और 18,646 रोजगार सृजन की संभावना

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश फार्मा, बायोटेक और मेडिकल डिवाइस क्षेत्र में निवेश के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध करा रहा है। प्रदेश में दवा निर्माण, सक्रिय औषधीय घटक (एपीआई), अनुसंधान, परीक्षण और चिकित्सा उपकरणों के उत्पादन की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला विकसित करना राज्य सरकार का लक्ष्य है। मध्यप्रदेश की केंद्रीय भौगोलिक स्थिति, विकसित औद्योगिक क्लस्टर, कुशल मानव संसाधन और निवेश प्रोत्साहन इस दिशा में मजबूत आधार प्रदान करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुंबई में फार्मा सेक्टर की राउंड टेबल चर्चा में प्रमुख उद्योग प्रतिनिधियों से संवाद किया। चर्चा में प्रदेश में फार्मा विनिर्माण, अनुसंधान एवं विकास, निर्यात और नई तकनीक पर आधारित निवेश की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ। भारत की फार्मा विकास यात्रा में मध्यप्रदेश की मजबूत भागीदारी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत आज “फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड” के रूप में पहचाना जाता है। भारतीय दवाएं 200 से अधिक वैश्विक बाजारों तक पहुंच रही हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का फार्मा निर्यात 30.47 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। इस राष्ट्रीय विकास यात्रा में मध्यप्रदेश एक मजबूत, भरोसेमंद और तेजी से उभरता हुआ भागीदार है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में निर्मित फार्मा उत्पाद 160 से अधिक देशों तक पहुंचते हैं। वर्ष 2023-24 में प्रदेश से लगभग 11,889 करोड़ रुपए के फार्मा उत्पादों का निर्यात दर्ज किया गया। प्रदेश का मौजूदा विनिर्माण आधार और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से जुड़ाव नई निवेश परियोजनाओं के लिए अवसर उपलब्ध कराता है। प्रदेश में 300 से अधिक फार्मा कंपनियां, विकसित क्लस्टर और कुशल मानव संसाधन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में 300 से अधिक फार्मा कंपनियां और 30 से अधिक एपीआई एवं बल्क ड्रग विनिर्माता हैं। इंदौर, पीथमपुर-धार, भोपाल-रायसेन, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, देवास, भिंड और मुरैना में फार्मा उद्योग का आधार विकसित हुआ है। इंदौर क्लस्टर में 96 से अधिक, पीथमपुर-धार में 57 से अधिक और भोपाल-रायसेन में 36 से अधिक फार्मा इकाइयां दर्ज हैं। प्रदेश में 40 मेडिकल कॉलेज, 200 से अधिक फार्मेसी कॉलेज और 140 से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेज उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश निवेशकों को भूमि के साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन, परिवहन संपर्क और बाजार तक पहुंच की सुविधाएं भी उपलब्ध कराता है। यह औद्योगिक परिवेश विनिर्माण के साथ अनुसंधान और तकनीक आधारित गतिविधियों के विस्तार में सहायक है। निवेश प्रस्तावों से उत्पादन तक आगे बढ़ती औद्योगिक गतिविधियां मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि पिछले 18 महीनों में फार्मा क्षेत्र के 54 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें लगभग 19,477 करोड़ रुपए का प्रस्तावित निवेश और लगभग 18,646 रोजगार सृजन के अवसरों की संभावना है। इनमें से 34 इकाइयों के लगभग 12,306 करोड़  रुपए के निवेश प्रस्तावों के लिए भूमि आवंटित की जा चुकी है। इन परियोजनाओं से लगभग 10,298 रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। इसी अवधि में 14 इकाइयों ने उत्पादन प्रारंभ किया है। इंदौर , देवास, उज्जैन, भोपाल, धार, रायसेन, सीहोर, ग्वालियर और भिंड जैसे जिलों में नई फार्मा एवं लाइफ साइंस इकाइयों की गतिविधियों से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को गति मिल रही है। निवेश, अनुसंधान और गुणवत्ता के लिए नीतिगत प्रोत्साहन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योग संवर्धन नीति-2025 में फार्मा, बायोटेक और मेडिकल डिवाइस को फोकस सेक्टर बनाया गया है। पात्र स्थायी पूंजी निवेश पर 40 प्रतिशत तक मूल निवेश प्रोत्साहन सहायता (बीआईपीए) का प्रावधान है। एपीआई, बल्क ड्रग और मेडिकल डिवाइस के लिए 1.3 गुना गुणक का प्रावधान भी किया गया है। कंपनी के अपने अनुसंधान एवं विकास कार्यों के व्यय पर 50 प्रतिशत सहायता तथा परीक्षण प्रयोगशालाओं और गुणवत्ता प्रमाणन के लिए अलग-अलग 1 करोड़ रुपए तक सहायता उपलब्ध है। स्वतंत्र अनुसंधान एवं विकास केंद्रों के लिए स्थायी पूंजी निवेश की 25 प्रतिशत सहायता, अधिकतम 25 करोड़  रुपए तक देने का प्रावधान है। निर्यातोन्मुख इकाइयों के लिए माल परिवहन लागत की 50 प्रतिशत सहायता 5 वर्षों तक, अधिकतम 2 करोड़ रुपए की सीमा तक उपलब्ध है। इन प्रावधानों से फार्मा उद्योग में निवेश, अनुसंधान, गुणवत्ता और निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा। पर्यावरण अनुकूल विनिर्माण और आधुनिक तकनीक को प्रोत्साहन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि पर्यावरण अनुकूल विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए अपशिष्ट प्रबंधन पर 5 करोड़ रुपए तक और शून्य तरल अपशिष्ट निर्वहन व्यवस्था पर 10 करोड़ रुपए तक सहायता का प्रावधान है। निजी भूमि पर अधोसंरचना विकास के लिए 5 करोड़ रुपए तक तथा तकनीक हस्तांतरण के लिए एक करोड़ रूपये तक सहयोग उपलब्ध कराया जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में फार्मा उद्योग के विस्तार के साथ अनुसंधान, गुणवत्ता और पर्यावरण अनुकूल उत्पादन को भी प्राथमिकता दी जा रही है। इन सुविधाओं से उद्योगों को आधुनिक उत्पादन प्रक्रियाएं अपनाने और अपनी तकनीकी क्षमताएं बढ़ाने में सहायता मिलेगी। विक्रम उद्योगपुरी का मेडिकल डिवाइस पार्क में बढ़ रहे निवेश के अवसर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि उज्जैन की विक्रम उद्योगपुरी स्थित मेडिकल डिवाइस पार्क में 57 इकाइयों को आवंटन दिया गया है और 17 इकाइयों ने उत्पादन प्रारंभ कर दिया है। इस क्षेत्र में लगभग 2,374.86 करोड़ रुपए के निवेश और लगभग 9,625 रोजगार अवसरों की संभावना है। मेडिकल डिवाइस पार्क प्रदेश में चिकित्सा उपकरण विनिर्माण के विस्तार का महत्वपूर्ण आधार बन रहा है। फार्मा और चिकित्सा उपकरण उद्योग का विकास उत्पादन, तकनीकी सेवाओं और स्थानीय रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराएगा। रतलाम में मेगा इंडस्ट्रियल पार्क, नई पीढ़ी के फार्मा निवेश पर जोर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि रतलाम में 1,666.3 हेक्टेयर क्षेत्र में मेगा इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किया जा रहा है। यहां फार्मा, बायोटेक और केमिकल क्षेत्र के निवेश को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एपीआई और तैयार दवाओं के साथ टीके, इंजेक्टेबल दवाएं, जैव प्रौद्योगिकी, कोशिका एवं जीन आधारित उपचार, चिकित्सा उपकरण, परीक्षण, अनुसंधान एवं विकास और अनुबंध आधारित विनिर्माण की संपूर्ण मूल्य शृंखला मध्यप्रदेश में विकसित करना चाहती है। इससे प्रदेश में उच्च कौशल आधारित रोजगार और वैश्विक बाजारों के लिए उत्पादन की संभावनाओं का विस्तार होगा। प्रमुख फार्मा निवेशकों की भागीदारी, दवा निर्माण और अनुसंधान में व्यापक विशेषज्ञता राउंड टेबल मीटिंग में फार्मा उद्योग प्रतिनिधियों में दवा निर्माण, एपीआई, ब्रांडेड एवं जेनेरिक दवाओं, विशेष औषधियों और अनुसंधान के क्षेत्र में कार्यरत प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल रहे। उपस्थित फार्मा सेक्टर के निवेशकों ने … Read more

रबी सीजन से पहले MP Transco ने बढ़ाई रिएक्टिव पावर कंपनसेशन क्षमता, ऊर्जा मंत्री तोमर ने दी जानकारी

रबी सीजन के पहले एमपी ट्रांसको ने बढ़ाई रिएक्टिव पावर कंपनसेशन क्षमता : ऊर्जा मंत्री तोमर ईएचवी सबस्टेशनों में कैपेसिटर बैंको की संख्या पहुंची 750: वोल्टेज प्रोफाइल में हुआ उल्लेखनीय सुधार भोपाल ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने रबी सीजन के ठीक पहले अपने ट्रांसमिशन नेटवर्क की रिएक्टिव पावर कंपन सेशन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की है। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश के एक्स्ट्रा हाई टेंशन (ईएचवी) सबस्टेशनों मे 750 कैपेसिटर बैंको के संचालन से वोल्टेज प्रोफाइल बेहतर हुआ है तथा कृषि उपभोक्ताओं सहित सभी उपभोक्ताओं को अधिक स्थिर, गुणवत्तापूर्ण और मानक वोल्टेज पर विद्युत आपूर्ति मिल रही है। मंत्री तोमर ने बताया कि एमपी ट्रांसको द्वारा पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 और  वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 में अभी तक 29 नए कैपेसिटर बैंकों की स्थापना कर उन्हें सफलतापूर्वक ऊर्जीकृत किया  है। वर्तमान में प्रदेश में कुल 750 कैपेसिटर बैंक क्रियाशील हैं, जिनकी संयुक्त स्थापित क्षमता 9383.5 एमवीएआर हो गई है। यह क्षमता प्रदेश की अब तक की अधिकतम रिएक्टिव पावर मांग 6776 एमवीएआर से लगभग 38 प्रतिशत अधिक है, जिससे भविष्य की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भी पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध है। विद्युत गुणवत्ता और वोल्टेज स्थिरता में सुधार ऊर्जा मंत्री तोमर ने कहा कि राज्य शासन की मंशानुरूप उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एमपी ट्रांसको  जरुरत के हिसाब से अपने  ईएचवी सबस्टेशनों में कैपेसिटर बैंक स्थापित कर चुकी है। कंपनी के 418 सबस्टेशनों में से अधिकांश में विभिन्न क्षमताओं के कैपेसिटर बैंक संचालित हैं। इसके अतिरिक्त पुराने सबस्टेशनों में भी आवश्यकता के अनुसार नए कैपेसिटर बैंक स्थापित किए जा रहे हैं तथा मौजूदा क्षमता में वृद्धि की जा रही है। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे पूरे प्रदेश में विद्युत गुणवत्ता और वोल्टेज स्थिरता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। 9383.5 एमवीएआर की स्थापित क्षमता वर्तमान में एमपी ट्रांसको के 220 केवी सबस्टेशनों पर 132  केवी सिस्टम के लिए 33 कैपेसिटर बैंक तथा 132 केवी सबस्टेशनों पर 33 केवी  सिस्टम पर    717 कैपेसिटर बैंक क्रियाशील हैं। कुल मिलाकर 750 कैपेसिटर बैंकों के माध्यम से 9383.5 एमवीएआर की स्थापित क्षमता उपलब्ध है, जिसमें 132 केवी की 1073 एम वी ए आर तथा 33 केवी की 8310.5 एमवीएआर शामिल है,जो प्रदेश की विद्युत प्रणाली को मजबूत आधार प्रदान कर रही है। 52 पुराने कैपेसिटर बैंकों की क्षमता बढ़ाई गई एमपी ट्रांसको के मुख्य अभियंता टेस्टिंग एम वाय मंसूरी ने  जानकारी दी कि कंपनी ने ऐसे 52 पुराने कैपेसिटर बैंकों की पहचान की थी, जिनकी उपयोगी आयु पूर्ण हो चुकी थी और जो अपेक्षित कैपेसिटिव सपोर्ट प्रदान नहीं कर पा रहे थे। इन स्थानों पर अधिक क्षमता वाले नए कैपेसिटर बैंकों की स्थापना एवं पुराने उपकरणों के प्रतिस्थापन का अभियान चलाया गया इससे सबस्टेशनों की रिएक्टिव पावर कंपनसेशन क्षमता में अभी तक 309 एमवीएआर की बढोत्तरी हुई और उपभोक्ताओं को बेहतर वोल्टेज पर विद्युत आपूर्ति की जा रही है। कैपेसिटर बैंक से होता है यह लाभ मंसूरी ने जानकारी दी कि ट्रांसमिशन प्रणाली में सिंचाई पंप, औद्योगिक मोटरें तथा अन्य विद्युत उपकरण प्रायः इंडक्टिव लोड उत्पन्न करते हैं, जिससे वोल्टेज में गिरावट और पावर फैक्टर में कमी आती है। कैपेसिटर बैंक इस इंडक्टिव प्रभाव की भरपाई कर रिएक्टिव पावर उपलब्ध कराते हैं। इससे एक्स्ट्रा हाईटेंशन सबस्टेशन में वोल्टेज प्रोफाइल में सुधार होता है, पावर फैक्टर बेहतर होता है, ट्रांसमिशन प्रणाली की दक्षता बढ़ती है तथा उपभोक्ताओं को मानक वोल्टेज पर विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति प्राप्त होती है।  

दशहरा-नवरात्रि पर पुलिसकर्मियों को नहीं मिलेगी छुट्टी, भोपाल में 11 से 25 अक्टूबर तक अवकाश रद्द

भोपाल  दुर्गा उत्सव और दशहरे के दौरान प्रदेश में कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के सामान्य अवकाश पर रोक लगा दी है। डीजीपी के निर्देश पर विशेष शाखा ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। आदेश के मुताबिक 11 से 25 अक्टूबर तक प्रदेशभर में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों का सामान्य अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा। यह आदेश सभी स्पेशल डीजी, एडीजी, जोनल आईजी, भोपाल और इंदौर पुलिस कमिश्नर, जिला पुलिस अधीक्षकों, सेनानियों और रेल पुलिस अधीक्षकों को भेजा गया है। आपात स्थिति में सीमित अवधि की छुट्टी पुलिस मुख्यालय के निर्देश के अनुसार किसी आपात स्थिति में संबंधित एसपी या आईजी सीमित अवधि के लिए अवकाश स्वीकृत कर सकेंगे। वहीं वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अवकाश के लिए डीजीपी की अनुमति अनिवार्य होगी। नवरात्र से दशहरे तक बढ़ेगी सुरक्षा नवरात्र के दौरान प्रदेशभर में बड़ी संख्या में देवी पंडाल, गरबा और अन्य धार्मिक आयोजन होते हैं। इनमें देर रात तक बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रहती है। इसके अलावा दशहरे पर रावण दहन, चल समारोह और प्रतिमा विसर्जन के दौरान भीड़ बढ़ने से कानून-व्यवस्था और यातायात प्रबंधन की चुनौती बढ़ जाती है। इसी को देखते हुए पुलिस थानों में पर्याप्त बल उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में फ्लैग मार्च, पैदल गश्त और लगातार निगरानी बढ़ाई जाएगी।  सोशल मीडिया और साइबर गतिविधियों पर भी नजर त्योहारों के दौरान अफवाह, भड़काऊ सामग्री और असामाजिक गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल, साइबर विंग और स्थानीय खुफिया इकाइयों को अलर्ट मोड पर रखा जाएगा। किसी भी आपत्तिजनक या संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। ड्यूटी के बाद मिलेगा क्षतिपूर्ति अवकाश त्योहारों के दौरान लगातार ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों को बाद में रोटेशन के आधार पर क्षतिपूर्ति अवकाश दिया जाएगा। ड्यूटी पॉइंट पर जवानों के लिए भोजन, पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। पुलिस मुख्यालय के अनुसार  त्योहारों के दौरान पर्याप्त पुलिस बल की उपलब्धता से संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

Jio ने 6G की ओर बढ़ाया बड़ा कदम, प्री-6G टेक्नोलॉजी के पेटेंट किए फाइल; सैटेलाइट कनेक्टिविटी पर फोकस

मुंबई  रिलायंस जियो अब सिर्फ 5G नेटवर्क तक सीमित नहीं रहना चाहता. कंपनी अगली पीढ़ी की टेलीकॉम टेक्नोलॉजी यानी 6G की तैयारी में अभी से जुट गई है. रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड के चेयरमैन आकाश अंबानी ने गुरुवार को कहा कि कंपनी स्वदेशी सैटेलाइट टेक्नोलॉजी स्टैक विकसित करने पर काम कर रही है और प्री-6G टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में पेटेंट भी फाइल कर चुकी है।  आकाश अंबानी ने 10वें इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 के दौरान एएनआई से बातचीत में जियो की भविष्य की टेक्नोलॉजी योजनाओं की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि कंपनी का फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई आधारित वॉयस और डेटा सर्विस, सैटेलाइट कनेक्टिविटी और 6G जैसी नई तकनीकों पर है।  भारत की अपनी सैटेलाइट टेक्नोलॉजी तैयार कर रहा Jio आकाश अंबानी ने कहा कि जियो सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. कंपनी ऐसी स्वदेशी सैटेलाइट टेक्नोलॉजी विकसित करने पर काम कर रही है, जिसे भारत से बाहर भी इस्तेमाल किया जा सके।  इसका मतलब साफ है कि जियो आने वाले समय में सिर्फ मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सर्विस तक अपनी तकनीक को सीमित नहीं रखना चाहता. कंपनी सैटेलाइट कनेक्टिविटी जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्र में भी अपनी टेक्नोलॉजी विकसित करने की तैयारी कर रही है।  6G में भारत को आगे ले जाने की तैयारी आकाश अंबानी ने कहा कि भारत ने 6G टेक्नोलॉजी में वैश्विक नेतृत्व का लक्ष्य रखा है और जियो इस दिशा में रिसर्च, पेटेंट और अंतरराष्ट्रीय मानकों के विकास के जरिए योगदान देगा. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने 6G के मामले में भारत को दुनिया का नेतृत्व करने की बात कही है और भारत से आने वाले 6G पेटेंट में 10 फीसदी हिस्सेदारी का लक्ष्य रखा गया है. अंबानी के मुताबिक, जियो इस लक्ष्य में बड़ा योगदान देने की तैयारी कर रहा है।  6G लॉन्च होने से पहले ही पेटेंट पर काम जियो ने 6G के व्यावसायिक तौर पर इस्तेमाल में आने से पहले ही इससे जुड़ी टेक्नोलॉजी पर काम शुरू कर दिया है. आकाश अंबानी ने बताया कि कंपनी ने प्री-6G के दौर में ही पेटेंट के लिए आवेदन करना शुरू कर दिया है. यानी जियो का फोकस सिर्फ मौजूदा नेटवर्क को बेहतर बनाने पर नहीं है, बल्कि अगली पीढ़ी के नेटवर्क के लिए जरूरी तकनीक और बौद्धिक संपदा तैयार करने पर भी है।  AI से बदल सकती है मोबाइल की वॉयस और डेटा सर्विस आकाश अंबानी ने कहा कि जियो पारंपरिक टेलीकॉम सेवाओं को एआई की मदद से और बेहतर बनाने की संभावनाएं तलाश रहा है. कंपनी वॉयस और डेटा सेवाओं में एआई के इस्तेमाल पर काम कर रही है।  उनके मुताबिक, एआई की मदद से वॉयस और डेटा सर्विस में नए तरह के इनोवेशन किए जा सकते हैं, जिसका फायदा भारत के करोड़ों मोबाइल यूजर्स को मिल सकता है।  इंडिया मोबाइल कांग्रेस में दिखा Jio का अगला विजन 7 से 10 अक्टूबर तक नई दिल्ली में चल रहे 10वें इंडिया मोबाइल कांग्रेस में जियो अपनी डिजिटल टेक्नोलॉजी से जुड़े विजन को प्रदर्शित कर रहा है. इस आयोजन में 5G, 6G, एआई आधारित नेटवर्क और सैटेलाइट कम्युनिकेशन जैसी नई तकनीकों पर चर्चा हो रही है।  आकाश अंबानी के मुताबिक, जियो यहां अपने पूरे डिजिटल सोसाइटी विजन को सामने रखने की कोशिश कर रहा है. कंपनी का जोर आने वाले वर्षों में कनेक्टिविटी, एआई और सैटेलाइट टेक्नोलॉजी को जोड़कर नई डिजिटल सेवाएं तैयार करने पर है.

नमो भारत स्टेशनों का बदलेगा अंदाज, NCERT-IGNCA करार से यात्रियों को मिलेगी भारतीय विरासत की झलक

 नई दिल्ली  नमो भारत ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों को जल्द ही यात्रा के दौरान भारतीय इतिहास, कला और संस्कृति का अनूठा अनुभव मिलेगा।नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (एनसीआरटीसी) ने नमो भारत स्टेशनों के माध्यम से लोगों को देश की समृद्ध विरासत से जोड़ने के लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल के तहत नमो भारत स्टेशन प्रदर्शनियों, साहित्यिक कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और सांस्कृतिक आयोजनों के प्रमुख केंद्र बनेंगे। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को जोड़ने का प्रयास दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण दो शहरों को आपस में जोड़ता है। एक तरफ जहां राजधानी दिल्ली देश की राजनीतिक और सांस्कृतिक यात्रा का प्रमुख केंद्र रही है। वहीं, मेरठ मेंमहाभारतकालीन धरोहर के साथ-साथ 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की जननी रहा है। इस समृद्ध पृष्ठभूमि में एनसीआरटीसी और आईजीएनसीए के बीच हुआ यह समझौता यात्रियों को उनकी रोजमर्रा की यात्रा के दौरान देश की विविधता और सांस्कृतिक पहलुओं से रूबरू कराएगा। स्टेशन परिसरों में आयोजित होंगी कला प्रदर्शनियां और वर्कशॉप इस साझेदारी के तहत दोनों संस्थान नमो भारत स्टेशन परिसरों में सार्वजनिक जुड़ाव से जुड़ी कई गतिविधियों को बढ़ावा देंगे। इसमें विशेष कला और सांस्कृतिक प्रदर्शनियां, विरासत से जुड़ी झलकियां, साहित्यिक कार्यक्रम, व्याख्यान, कार्यशालाएं और जागरूकता अभियान शामिल होंगे। इसका मुख्य उद्देश्य भारत की कलात्मक और सांस्कृतिक परंपराओं को दैनिक आवाजाही के सार्वजनिक स्थानों तक लाकर आम जनमानस से सीधे जोड़ना है। रोजाना 1.1 लाख से अधिक यात्री कर रहे हैं सफर वर्तमान में नमो भारत कॉरिडोर पर दैनिक रूप से लगभग 1.1 लाख यात्री सफर कर रहे हैं, जबकि यह सेवा अब तक 4.5 करोड़ से अधिक 'कम्यूटर ट्रिप्स' का आंकड़ा पार कर चुकी है। यात्रियों की बढ़ती संख्या यह दर्शाती है कि नमो भारत स्टेशन अब केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक और सामाजिक केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। कलाकारों और छात्रों को मिलेगा नया मंच यह पहल छात्रों, युवा कलाकारों, सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और शिक्षण संस्थानों के लिए भी बड़े अवसर प्रदान करेगी। एनसीआरटीसी स्टेशनों को एक जीवंत 'सोशल हब' के रूप में विकसित कर रहा है। वहीं, आईजीएनसीए अपनी विशेषज्ञता के जरिए देश की कला और परंपराओं को व्यापक जनसमुदाय तक पहुंचाएगा। इस प्रयास से नमो भारत के स्टेशन भारतीय संस्कृति, परंपराओं और कलात्मक अभिव्यक्तियों के संवर्धन का एक प्रमुख जरिया बनेंगे।