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मध्यप्रदेश सर्वाधिक उद्योग अनुकूल राज्य है, यहां आएं और निवेश करें

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश ऐसा एकमात्र राज्य है, जहां उद्योगों की स्थापना के लिए अनेक तरह की अनुकूलताएं मौजूद हैं। जनवरी 2026 में भोपाल में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के 30 प्रतिशत निवेश प्रस्ताव जमीन पर उतारे जा चुके हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि मध्यप्रदेश उद्योग, व्यापार और व्यवसाय को बढ़ाने के लिए सर्वाधिक अनुकूल राज्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुम्बई में 'इंटरेक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज इन मध्यप्रदेश' सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फार्मा और मेडिकल डिवाइस सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के लिए उद्योगपतियों और निवेशकों को मध्यप्रदेश आने का आमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी उद्योगपतियों को जनवरी-2027 में भोपाल में होने जा रही ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में पधारने के लिए भी आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र का संबंध एक मां की दो संतानों की तरह है। जहां मुंबई, निवेश और वित्त क्षेत्र की सबसे अच्छी समझ रखने वाला महानगर है, वहीं मध्यप्रदेश निवेश की संभावनाओं वाला राज्य है। एक बार कोई निवेशक मध्यप्रदेश आता है तो उसे भूल नहीं पाता है। मध्यप्रदेश भारत में औद्योगिक निवेश का सबसे तेजी से बढ़ता और सबसे पसंदीदा गंतव्य स्थल बनता जा रहा है। महाराष्ट्र के बड़े औद्योगिक घरानों ने मध्यप्रदेश को अपना निवेश स्थान बनाया है। प्रधानमंत्री मोदी ने जनसेवा के साथ स्वाभिमान के साथ जीना सिखाया है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस सत्र में वेलस्पन ग्रुप, सनफार्मा और अन्य संस्थानों के प्रतिनिधि मौजूद हैं। उद्योग और कार्पोरेट जगत की लगभग सभी हस्तियां उपस्थित हैं, जो बदलते दौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की क्षमताओं को जानती हैं। देश के साथ सभी राज्य आगे बढ़ रहे हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने बताया कि राज्यों के बीच सौहार्द्र पूर्ण संबंधों के आधार पर कैसे आगे बढ़ा जा सकता है। मध्यप्रदेश और गुजरात की सीमा पर बना सरदार सरोवर बांध इसी का उदाहरण है। इससे न सिर्फ मध्यप्रदेश और गुजरात दोनों राज्यों को पर्याप्त जल मिला बल्कि राजस्थान के हितों का भी ध्यान रखा गया। राज्यों के मध्य उन्होंने सौहार्द्रपूर्ण संबंध स्थापित करने का कार्य किया। उन्होंने सकारात्मक दृष्टि के साथ कार्य किया है। वर्तमान समय में दुनिया के सामने भारत की पहचान एक ऐसे देश की बन रही है, जहां वैश्विक स्तर के नेता हैं। बदलते दौर में भारत दुनिया की सशक्त अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने जनसेवा के साथ देश को स्वाभिमान से जीना सिखाया है। आज हमारा पासपोर्ट भी दुनिया में मजबूत हुआ है। वर्ष 2014 के पहले भारत कहां था, सभी जानते हैं। गत 12 वर्ष में कितना बदलाव आ सकता है, वो आज सबके सामने है। देश में जीएसटी से लेकर व्यापार-व्यवसाय की सभी व्यवस्थाएं की गई हैं। जी20 के वैश्विक समूह में भारत अपने टारगेट पूरा करते हुए तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत बहुत जल्द दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा। वी विल डू इट का नया मंत्र, आत्मविश्वास का नया परिचायक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 'वी विल डू इट' का मंत्र दिया है। हम दुनिया में सब कुछ कर सकते हैं। उन्होंने कठिनाइयों से निकलकर एक आदर्श जीवन जीया है। आजादी के बाद पहली बार 2015-25 के बीच एक दशक में कृषि क्षेत्र में तेजी से प्रगति हुई है। भारत की निर्माण, नवाचार, नेतृत्व और प्रतिभा की शक्ति दुनिया के सामने है। भारत मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, ड्रोन, ईवी, बैटरी, सोलर हमारी पहचान बन चुके हैं। खेल क्षेत्र की बात करें तो हमारे खिलाड़ी अब वैश्विक खेल प्रतियोगिताओं में पदक जीत रहे हैं। हाल ही में एशियन गेम्स में भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा है। एशियाड हो या ओलम्पिक भारत कहीं भी सफलता प्राप्त कर सकता है। भारत के विदेश मंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका के साथ डील होगी, लेकिन इसमें भारतीय नागरिकों के आत्मसम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यह भारत के स्वाभिमान के साथ वैश्विक संबंधों के निर्वहन का प्रमाण है। मध्यप्रदेश जहां एक नहीं, अनेक अनुकूलताएं हैं, निवेशकों को हर प्रकार की सुविधा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसी राज्य में निवेश तभी आ सकता है। जब प्रदेश में स्थाई नेतृत्व हो, नीतियां स्पष्ट हों, पर्याप्त लैंड बैंक हो, उद्योग अनुकूल वातावरण हो, प्रदेश में छोटे-बड़े सभी निवेशकों का पूरा सम्मान है। मध्यप्रदेश की केन्द्रीय भौगोलिक स्थिति है। यहां प्रत्येक निवेशक को लाभ मिलता है। राज्य सरकार ने जीआईएस, रोडशो और अनेक रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के माध्यम से अपार निवेश पाया है। हम सभी निवेशकों को उनके हक की प्रोत्साहन राशि समय पर दे रहे हैं। मध्यप्रदेश में 5 लाख किलोमीटर का रोड नेटवर्क है। एक लाख एकड़ का लैंड बैंक मौजूद है। खनिज, वन, ऊर्जा सहित सभी तरह के छोटे-बड़े और मध्यम श्रेणी के उद्योगों की स्थापना हमारी प्राथमिकता है। फाइलों की बजाए फैसलों पर जोर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सरलीकृत 25 नीतियां लागू की गईं, जो उद्योगों की स्थापना में मददगार बन रही हैं। फाइलों की बजाए फैसलों पर जोर दिया गया है। भोपाल से दिल्ली, मुम्बई, कलकत्ता, रायपुर, बैंगलोर और अन्य नगरों के लिए सीधी विमान सेवाएं हैं। मध्यप्रदेश एविएशन पॉलिसी के अंतर्गत वीजीएफ प्रदान करता है। प्रदेश में हेलीकॉप्टर और हवाई सेवाओं को प्रोत्साहन मिल रहा है। मध्यप्रदेश से खाड़ी देशों के लिए सीधी हवाई सेवा की शुरुआत की गई है। धार जिले में विकसित हो रहे पीएम मित्र पार्क में विभिन्न इकाइयों को 4 रूपए यूनिट बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। मुम्बई में ढाई वर्ष में यह आठवीं यात्रा है, जिसमें उद्योगपति मित्रों से भेंट हो रही है। आज हुई मुलाकातों के फलस्वरूप 90 हजार करोड़ रूपए के निवेश का आश्वासन भी मिला है, यह हमारे प्रयासों की सफलता है। निवेशकों की जरूरत के अनुसार कस्टमाइज्ड पैकेज और औद्योगिक सुविधाएं देगा मध्यप्रदेश अपर मुख्य सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन नीरज मंडलोई ने कहा कि मध्यप्रदेश में उद्योगों के लिए पर्याप्त भूमि, जल, बिजली, प्राकृतिक संसाधन, कुशल श्रमबल और बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध है। प्रदेश के भौगोलिक केंद्र में होने से बड़े उपभोक्ता बाजारों तक आसान पहुंच है। राज्य में 8 … Read more

निवेश-अनुकूल नीतियों से उद्योगों के लिए फेवरेट डेस्टिनेशन बना मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश को नई गति देने के लिये मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरूवार मुंबई में देश के प्रमुख उद्योग समूहों के शीर्ष नेतत्व के साथ वन-टू-वन बैठकें की। फार्मा, टेक्सटाइल, सेमीकंडक्टर, औद्योगिक गैस, ट्रांसमिशन, टायर, आईटी और अधोसंरचना जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर हुई इन बैठकों में उद्योग समूहों ने मध्यप्रदेश में नई इकाईयाँ स्थापित करने और मौजूदा निवेश के विस्तार में रूचि दिखाई। कार्यक्रम में विभिन्न औद्योगिक समूहों द्वारा नवकरणीय ऊर्जा, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, सूचना प्रौद्योगिकी, ऑटोमोबाइल, रियल एस्टेट, केमिकल तथा अन्य क्षेत्रों में लगभग 90 हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए। इन प्रस्तावों से प्रदेश में 14,375 रोजगार सृजित होने की संभावना है। निवेश प्रस्तावों में नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में 71 हजार 289 करोड़, टेक्सटाइल्स में 5 हजार करोड़, फार्मास्यूटिकल्स में 2 हजार 280 करोड़, रियल एस्टेट एक हजार करोड़, सूचना प्रौद्योगिकी में 200 करोड़, केमिकल उद्योग के क्षेत्र में 400 करोड़ का निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की केंद्रीय भौगोलिक स्थिति, औद्योगिक भूमि की उपलब्धता, विकसित हो रही अधोसंरचना और कुशल कार्यबल उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं। सरकार का प्रयास है कि निवेशकों को भूमि, बिजली, पानी, सड़क, ऊर्जा और अन्य आवश्यक सुविधाएं सुगमता से उपलब्ध हों। निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारकर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने उद्योग जगत को मध्यप्रदेश में नए निवेश और विस्तार के लिए आमंत्रित करते हुए आश्वस्त किया कि उन्हें इकाइयाँ लगाने में पूरा सहयोग प्रदान किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुंबई में आयोजित ‘मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर संवाद’ कार्यक्रम अंतर्गत आरपीजी, वेलस्पन, आईनॉक्स, भिलोसा, इप्का और सन फार्मा के प्रमुखों से वन-टू-वन चर्चा की। बैठकों में विभिन्न क्षेत्रों की निवेश योजनाओं, संभावित स्थलों, परियोजनाओं के क्रियान्वयन, औद्योगिक सुविधाओं और आवश्यक प्रोत्साहनों पर विचार-विमर्श हुआ। आरपीजी समूह ने ट्रांसमिशन, टायर और आईटी क्षेत्र में दर्शाई रुचि मुख्यमंत्री डॉ. यादव से आरपीजी समूह के अध्यक्ष हर्ष गोयनका की मुलाकात में विद्युत पारेषण, टायर निर्माण और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। गोयनका ने जबलपुर में विद्युत पारेषण क्षेत्र में निवेश करने की इच्छा व्यक्त की। प्रदेश की औद्योगिक अवसंरचना, भौगोलिक स्थिति और निवेश-अनुकूल नीतियों के आधार पर नई इकाइयों की स्थापना की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। टायर निर्माण इकाई के लिए रतलाम, सागर और जबलपुर संभावित स्थलों के रूप में चर्चा में आए। समूह ने इन स्थानों पर उपलब्ध औद्योगिक सुविधाओं और आवश्यकताओं का आंकलन करने में रुचि दिखाई। उज्जैन के आईटी बिल्ट-अप पार्क की प्लग-एंड-प्ले सुविधाओं के उपयोग तथा संभावित निवेश स्थलों का दौरा कर व्यावसायिक संभावनाओं का आंकलन करने पर भी संवाद हुआ। समूह की प्रमुख कंपनियों में केईसी इंटरनेशनल, सिएट और जेनसार टेक्नोलॉजीज शामिल हैं। आरपीजी समूह का मध्यप्रदेश से पुराना जुड़ाव है और केईसी इंटरनेशनल ने प्रदेश की विद्युत पारेषण अधोसंरचना के विकास में योगदान दिया है। वेलस्पन समूह टेक्निकल टेक्सटाइल पार्क में निवेश की संभावनाएं तलाशेगा वेलस्पन एंटरप्राइजेज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक संदीप गर्ग से चर्चा में पाइप निर्माण, टेक्निकल टेक्सटाइल और अधोसंरचनात्मक क्षेत्र की निवेश योजनाओं पर विचार-विमर्श हुआ। समूह ने मिल की भूमि पर टेक्निकल टेक्सटाइल पार्क विकसित करने में निवेश तथा प्रस्तावित पार्क में एंकर यूनिट स्थापित करने की इच्छा व्यक्त की। स्थल का निरीक्षण करने के लिए समूह अपनी टीम भेजेगा। बैठक में वेलस्पन कॉर्प के एमएस लाइन पाइप क्षेत्र में 150 करोड़ रूपये के निवेश और सिंटेक्स के 700 करोड़ रूपये के प्रगतिरत निवेश पर भी चर्चा हुई। समूह की रायसेन और देवास में उपस्थिति तथा पाइप निर्माण एवं टेक्सटाइल गतिविधियों पर संवाद हुआ। वेलस्पन समूह प्रदेश में सड़क एवं राजमार्ग निर्माण सहित अन्य अधोसंरचना परियोजनाओं से भी जुड़ेगा। जल और अपशिष्ट जल प्रबंधन परियोजनाओं में समूह की सहभागिता की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। अति उच्च शुद्धता वाला सेमीकंडक्टर – ग्रेड सिलेन गैस संयंत्र करेगा स्थापित आईनॉक्स एयर प्रोडक्ट्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक सिद्धार्थ जैन से औद्योगिक गैस एवं सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश पर चर्चा हुई। कंपनी के प्रस्ताव के अनुसार मध्यप्रदेश में 1,260 करोड़ रूपये के निवेश से देश का पहला अति-उच्च शुद्धता वाला सेमीकंडक्टर-ग्रेड सिलेन गैस संयंत्र स्थापित करने की योजना है। अप्रैल 2029 से उत्पादन प्रारंभ करना प्रस्तावित है। परियोजना से लगभग 350 करोड़ रूपये के आयात प्रतिस्थापन और 320 से अधिक स्थानीय रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। संवाद में नवीनतम तकनीक से सेमीकंडक्टर उद्योग में उपयोग होने वाली विशेष गैसों के उत्पादन के लिए लगभग 1,200 करोड़ रूपये के संभावित निवेश पर भी चर्चा हुई। इसके लिए लगभग 40 एकड़ भूमि की आवश्यकता जताई गई। प्राकृतिक गैस की उपलब्धता और गेल के आपूर्ति नेटवर्क के माध्यम से गैस की आपूर्ति से जुड़े विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया। निवेश प्रोत्साहन, वित्तीय सहायता, ब्याज अनुदान, प्रति यूनिट 2 रूपये की बिजली सब्सिडी, विद्युत शुल्क में छूट, अनुकूलित प्रोत्साहन पैकेज और समयबद्ध स्वीकृतियों जैसे विषय चर्चा में रहे। कंपनी वर्ष 2000 से इंदौर और भोपाल में कार्यरत है। जून 2023 में प्रदेश में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन संयंत्र स्थापित करने के साथ कंपनी नई ऑन-साइट गैस उत्पादन इकाइयों और नर्मदापुरम में सौर ऊर्जा से जुड़ी नाइट्रोजन पाइपलाइन की दिशा में भी कार्य कर रही है। भिलोसा ने 7,500 करोड़ रूपये के चरणबद्ध निवेश की प्रस्तुत की योजना प्रबंध निदेशक भिलोसा इंडस्ट्रीज संदीप जैन ने पीएम मित्र पार्क, धार को केंद्र में रखते हुए मध्यप्रदेश में चरणबद्ध रूप से कुल 7,500 करोड़ रूपये के निवेश और करीब 3,750 रोजगार के अवसरों की योजना प्रस्तुत की। कंपनी ने प्रारंभिक रूप से लगभग 2,500 करोड़ रूपये के पूंजीगत निवेश से कार्य शुरू करने तथा समग्र निवेश को चरणबद्ध रूप से आगे बढ़ाने की जानकारी दी। पीएम मित्र पार्क में टेक्सटाइल निर्माण के लिए 200 एकड़ और सहायक इकाइयों के लिए अतिरिक्त 100 एकड़ भूमि के संबंध में चर्चा हुई। भूमि के चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में बताई गई। कंपनी ने वर्ष 2028 से उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य रखा है। धार–इंदौर क्षेत्र में पॉलिस्टर यार्न, फायबर, निटेड फैब्रिक और मैन-मेड फायबर आधारित नॉन-गारमेंट फैब्रिक के एकीकृत विनिर्माण तथा सूक्ष्म एवं लघु सहायक इकाइयों के विकास की संभावनाओं पर भी … Read more

प्राथमिकता : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राज्य स्तरीय रोजगार मेले का उत्साहपूर्ण समापन, दो दिनों में 13 हजार से अधिक युवाओं की सहभागिता

रायपुर   मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर कौशल प्रशिक्षण और उनकी योग्यता के अनुरूप रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। हमारा प्रयास है कि छत्तीसगढ़ के बेटे-बेटियों को शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर अपने ही प्रदेश में मिलें, वे अपने कौशल और प्रतिभा के बल पर आत्मनिर्भर बनें तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनें। मुख्यमंत्री  साय आज राजधानी रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय रोजगार मेला–2026 के समापन अवसर पर युवाओं को संबोधित कर रहे थे।  इस अवसर पर उन्होंने चयनित युवाओं को ऑफर लेटर प्रदान किए और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मुख्यमंत्री के करकमलों से लगभग 1,100 चयनित युवाओं को ऑफर लेटर प्रदान किए गए। 7 एवं 8 अक्टूबर को आयोजित दो दिवसीय रोजगार मेले में प्रदेशभर से 13 हजार से अधिक युवाओं ने सहभागिता की। विभिन्न कंपनियों द्वारा आयोजित चयन प्रक्रियाओं के बाद 5 हजार से अधिक अभ्यर्थियों का अंतिम चयन हुआ। प्रदेश के सभी जिलों के साथ दूरस्थ एवं जनजातीय अंचलों से भी बड़ी संख्या में युवा मेले में पहुंचे और अपनी शैक्षणिक योग्यता एवं कौशल के अनुरूप रोजगार के लिए चयन प्रक्रिया में शामिल हुए। मुख्यमंत्री  साय ने चयनित युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि रोजगार का यह अवसर उनके जीवन में नई शुरुआत है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि युवा अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के बल पर अपने परिवार के साथ प्रदेश और देश का नाम रोशन करेंगे। युवाओं के सपनों को अवसरों से जोड़ रही सरकार मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। पिछले ढाई वर्षों में प्रदेशभर में 925 रोजगार मेलों का आयोजन किया गया है, जिनके माध्यम से 25 हजार 845 से अधिक युवाओं को रोजगार मिला है। राज्य स्तरीय रोजगार मेले की सफलता इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों को और गति देने वाली है। उन्होंने कहा कि आज के समय में शिक्षा के साथ व्यावहारिक कौशल और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण भी आवश्यक है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार युवाओं को शिक्षा से कौशल और कौशल से रोजगार तक जोड़ने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा की सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। प्रदेश में आईआईटी, आईआईएम, ट्रिपल आईटी, एम्स और विधि विश्वविद्यालय जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थान संचालित हैं। प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ‘प्रयास’ जैसी संस्थाओं के माध्यम से भी अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक कौशल और बेहतर भविष्य के लिए अधिक से अधिक अवसर छत्तीसगढ़ में ही उपलब्ध हों। इसके लिए शैक्षणिक और तकनीकी संस्थानों को उद्योगों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। 95 से अधिक नियोक्ता संस्थानों ने युवाओं को दिए रोजगार के अवसर राज्य स्तरीय रोजगार मेले में 95 से अधिक पंजीकृत नियोक्ता संस्थानों के साथ अन्य कंपनियों ने भी सहभागिता की। आयोजन स्थल पर लगभग 50 स्टॉल स्थापित किए गए, जहां विभिन्न औद्योगिक एवं सेवा क्षेत्रों की कंपनियों द्वारा अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन, साक्षात्कार और चयन किया गया। मेले में आईटीआई, डिप्लोमा, इंजीनियरिंग, स्नातक सहित विभिन्न शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योग्यता वाले युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए। रोजगार विभाग के साथ औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों, तकनीकी शिक्षा विभाग, पॉलिटेक्निक एवं इंजीनियरिंग महाविद्यालयों तथा छत्तीसगढ़ राज्य कौशल विकास प्राधिकरण की भी आयोजन में सक्रिय सहभागिता रही। कौशल विकास कार्यक्रमों के अंतर्गत प्रशिक्षित युवाओं ने भी बड़ी संख्या में रोजगार मेले में हिस्सा लिया। इस तरह रोजगार मेला केवल नियुक्तियों का माध्यम नहीं, बल्कि युवाओं, उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सीधे संवाद और समन्वय का प्रभावी मंच भी बना। ई-रोजगार पोर्टल बनेगा ‘स्किल मार्केट’ रोजगार मेले में अभ्यर्थियों के पंजीयन, आवेदन, उपस्थिति और चयन संबंधी प्रक्रियाओं को ई-रोजगार पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन संचालित किया गया। इससे चयन प्रक्रिया को अधिक सरल, व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने में सहायता मिली। राज्य सरकार द्वारा ई-रोजगार पोर्टल को आगे ‘स्किल मार्केट’ के रूप में विकसित करने की योजना है। इस एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उद्योगों की आवश्यकताओं और उपलब्ध रिक्त पदों के साथ रोजगार के इच्छुक युवाओं की शैक्षणिक योग्यता एवं कौशल की जानकारी उपलब्ध होगी। इससे एक ओर युवाओं को अपनी योग्यता के अनुरूप अवसर खोजने में आसानी होगी, वहीं दूसरी ओर उद्योगों को उनकी आवश्यकता के अनुसार कुशल मानव संसाधन उपलब्ध हो सकेगा। जिन्हें आज अवसर नहीं मिला, उनके लिए आगे भी खुलेंगे रोजगार के द्वार मुख्यमंत्री  साय ने रोजगार मेले में शामिल उन युवाओं का भी उत्साहवर्धन किया, जिन्हें इस बार रोजगार का अवसर नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा कि उन्हें निराश होने की आवश्यकता नहीं है। राज्य सरकार आगे भी रोजगार मेलों, कौशल विकास कार्यक्रमों और उद्योगों के साथ समन्वय के माध्यम से युवाओं के लिए नए अवसर सृजित करती रहेगी। मुख्यमंत्री ने रोजगार मेले के सफल आयोजन के लिए तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब, विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों, शैक्षणिक संस्थानों तथा प्रदेश एवं अन्य राज्यों से आए औद्योगिक प्रतिष्ठानों और कंपनियों के प्रतिनिधियों को बधाई दी। तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। सरकार का उद्देश्य युवाओं को केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि उनके हुनर को रोजगार और आजीविका के वास्तविक अवसरों से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि रोजगार मेले में प्रदेशभर से युवाओं की व्यापक भागीदारी उनके उत्साह और बेहतर भविष्य की आकांक्षा को दर्शाती है। उद्योगों की वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें रोजगार के लिए सक्षम बनाया जा रहा है। पॉलिटेक्निक संस्थानों की गुणवत्ता सुधार के लिए मूल्यांकन रिपोर्ट का विमोचन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की उपस्थिति में प्रदेश के पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों में शिक्षा एवं प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्य से क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा तैयार थर्ड … Read more

‘इंडी गठबंधन की बैठक में अखिलेश को बुलाया तक नहीं गया’, कांग्रेस-सपा की कलह पर सुभाष यदुवंश का तंज

'चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए हैं दोनों राजकुमार', बीजेपी MLC सुभाष यदुवंश का अखिलेश-राहुल पर हमला 'इंडी गठबंधन की बैठक में अखिलेश को बुलाया तक नहीं गया', कांग्रेस-सपा की कलह पर सुभाष यदुवंश का तंज 'इनको वोट देना अपने बच्चों का भविष्य बर्बाद करना है’, सुभाष यदुवंश का अखिलेश-राहुल पर हमला ‘राजतंत्र और परिवारतंत्र में विश्वास करते हैं राहुल और अखिलेश’, सुभाष यदुवंश ने साधा निशाना सुभाष यदुवंश का अखिलेश-राहुल पर हमला, बोले- ‘दोनों राजकुमार एक-दूसरे को बर्दाश्त नहीं कर सकते’ 'अखिलेश को यूपी की सत्ता मिली तो उन्होंने प्रदेश को सिरफुटौव्वल का अड्डा बना दिया था', बीजेपी MLC का सपा पर हमला लखनऊ बीजेपी के विधान परिषद सदस्य (MLC) सुभाष यदुवंश ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। दिल्ली में बुधवार को कांग्रेस की ओर से आयोजित इंडी गठबंधन की बैठक में अखिलेश यादव को नहीं बुलाए जाने का जिक्र करते हुए यदुवंश ने दोनों नेताओं को ‘राजकुमार’ बताया और कहा कि वे एक-दूसरे को बर्दाश्त नहीं कर सकते। 'अखिलेश को बुलाया ही नहीं गया' सुभाष यदुवंश ने कहा, 'इंडी गठबंधन की बैठक में अखिलेश यादव जी को बुलाया ही नहीं गया।' उन्होंने कहा कि जब अखिलेश यादव लखनऊ आ गए, तब राहुल गांधी के किसी ‘शिष्य’ का फोन उनके पास आया। यदुवंश ने कहा कि कुछ दिन पहले अखिलेश यादव के इशारे पर ही एक सपाई सांसद ने कहा कि कांग्रेस की हैसियत तो 10 सीटों की भी नहीं है।  'चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए दोनों राजकुमार' यदुवंश ने अखिलेश यादव और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, 'ये जो चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए दोनों राजकुमार हैं, ये सत्ता के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।' यदुवंश ने कहा कि इन दोनों नेताओं में अनुशासन नहीं है, टीम भावना नहीं है और समन्वय नहीं है। अखिलेश और राहुल दोनों ही किसी व्यवस्था को चला नहीं सकते। 'डेढ़ साल मंच पर पूरा परिवार लड़ता रहा' अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए सुभाष यदुवंश ने कहा कि जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के ‘युवराज’ को सत्ता मिली, तो डेढ़ साल तक मंच पर पूरा परिवार लड़ता रहा। उन्होंने कहा कि इस दौरान उत्तर प्रदेश को 'सिरफुटौव्वल का अड्डा' बना दिया गया। 'राजतंत्र पर भरोसा करते हैं राहुल गांधी' राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए यदुवंश ने कहा कि जब कांग्रेस के ‘युवराज’ को सत्ता मिली थी, तब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का तैयार किया हुआ मसौदा राहुल गांधी ने फाड़ दिया था। उन्होंने कहा, 'युवराज ने मसौदा फाड़ करके बताया कि देखो, मैं राजतंत्र में बिलीव करता हूं, संविधान मानता नहीं हूं, संविधान को जेब में रख करके चलता हूं।' बता दें कि 2013 में मनमोहन सिंह सरकार द्वारा दोषी सांसदों-विधायकों को तत्काल अयोग्यता से बचाने के लिए लाए गए जनप्रतिनिधित्व संशोधन अध्यादेश को राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘पूरी तरह बकवास’ बताते हुए सार्वजनिक रूप से फाड़ दिया था। अखिलेश यादव और राहुल गांधी पर हमला करते हुए सुभाष यदुवंश ने कहा कि इन पर भरोसा करना, इनको वोट देना अपने बच्चों का भविष्य बर्बाद करना है। ये दोनों परिवारतंत्र पर भरोसा करने वाले नेता हैं।

प्रदीप मिश्रा की 350 करोड़ की FD की चर्चा पर दिग्विजय सिंह ने उठाए सवाल, बोले- इतनी संपत्ति कैसे?

सीहोर  प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर सीहोर के प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा को लेकर तंज कसा है। दिग्विजय सिंह ने बच्चों की पढ़ाई और परीक्षा को लेकर कथावाचक द्वारा बताए जाने वाले उपायों पर सवाल उठाते हुए उनकी संपत्ति और वित्तीय स्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए। वीडियो में दिग्विजय सिंह कहते नजर आ रहे हैं कि आजकल धार्मिक गुरु और कथावाचकों की खूब चल रही है। उन्होंने सीहोर वाले कहावाचक का जिक्र छेड़ा और कहा कि वे बच्चों से कहते थे कि तुम्हें पढ़ाई करने की जरूरत नहीं, भगवान शिव को शहद लगाकर बेल पत्र चढ़ा दो और तुम पास हो जाओगे। दिग्विजय यहीं नहीं रुके। उन्होंने कथावाचक पर चुटकी लेते हुए कहा कि सुनने में आया है कि उनका बेटा ही परीक्षा में फेल हो गया। 350 करोड़ की एफडी का जिक्र दिग्विजय सिंह ने सीहोर के कथावाचक की पिछले कुछ सालों में उपजी आर्थिक संपन्नता को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सीहोर के स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा है कि महज दो साल में उनके (पं. प्रदीप मिश्राा) पास करीब 350 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट हो गई है। इसी को लेकर उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि देखना चाहिए कि पिछले दो साल में वे क्या से क्या हो गए। हालांकि, दिग्विजय सिंह ने यह स्पष्ट किया कि 350 करोड़ रुपये की एफडी होने का दावा वे स्वयं नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे केवल सीहोर के स्थानीय लोगों द्वारा कही जा रही बातों का उल्लेख कर रहे हैं। दिग्विजय सिंह की इस टिप्पणी के बाद पंडित प्रदीप मिश्रा की संपत्ति, आय और वित्तीय स्थिति को लेकर इंटरनेट मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, 350 करोड़ रुपये की एफडी संबंधी दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। बयान की सोशल मीडिया में चर्चा दिग्विजय सिंह की इस टिप्पणी के बाद पंडित प्रदीप मिश्रा की संपत्ति, आय और वित्तीय स्थिति को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, 350 करोड़ रुपये की एफडी संबंधी दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।   

मुंबई में 7 देशों के काउंसल जनरल एवं राजनयिक प्रतिनिधियों के साथ राउंडटेबल बैठक

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जनवरी 2027 में भोपाल में आयोजित होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर समिट (जीआईएस–2027) में सात देशों को ‘साझेदार देश’ के रूप में जुड़ने का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश विभिन्न देशों के साथ निवेश और व्यापारिक साझेदारी को ठोस परियोजनाओं के माध्यम से आगे बढ़ाना चाहता है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की सफलता की कसौटी निवेश प्रस्तावों का धरातल पर क्रियान्वयन होगी।मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुंबई में आयोजित राउंड टेबल बैठक में जापान, मेक्सिको,रूस,कोरिया गणराज्य, थाईलैंड,मिस्र अरब गणराज्य एवं साउथ अफ्रीका के काउंसल जनरल एवं राजनयिक प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रतिनिधियों के विचारों को सुनते हुए कहा, “आपकी बातें मेरे साथ भोपाल जाएँगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि जनवरी 2027 में भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट   का नौवाँ संस्करण आयोजित होगा। उन्होंने कहा कि साझेदार देश (पार्टनर कंट्री) के रूप में आने वाले देशों के प्रतिनिधिमंडलों के साथ वे स्वयं बैठक करेंगे। प्रतिनिधिमंडल उनके साथ भोज में भी शामिल होंगे। उनकी रुचि के अनुरूप पीथमपुर की औद्योगिक संभावनाओं से लेकर साँची की सांस्कृतिक विरासत तक प्रदेश के विविध पहलुओं से परिचित कराया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि वर्ष 2025 की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट   के बाद से मध्यप्रदेश में 8.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश धरातल पर उतर चुका है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में भी यही सुनिश्चित करने पर जोर होगा कि जो कहा जाए, वह धरातल पर उतरे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पिछले वर्ष अक्टूबर में मुंबई में कई राजनयिक प्रतिनिधियों के साथ हुए संवाद का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने विभिन्न देशों के साथ मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाया है और आने वाले वर्ष में इस साझेदारी को और विस्तार देना चाहता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ब्रिटेन की कंपनी हेलियॉन के निवेश निर्णय का उल्लेख करते हुए बताया कि कंपनी ने जून में पीथमपुर में लगभग 2,000 करोड़ रुपये के निवेश से कारखाना स्थापित करने का निर्णय लिया। परियोजना के लिए 40 एकड़ से अधिक भूमि का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि कंपनी के वैश्विक मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्वयं मध्यप्रदेश आए थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विभिन्न विकल्पों के बीच पीथमपुर का चयन प्रदेश के प्रति कंपनी के भरोसे को दर्शाता है।उन्होंने बताया कि जापान के सौ वर्ष से अधिक पुराने टोप्पन समूह ने भी अपनी नई इकाई के लिए पीथमपुर को चुना है। लगभग 950 करोड़ रुपये की इस परियोजना का पूरा निवेश विदेश से होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कोरिया की ई.सी.डी.एस. के प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए बताया कि कंपनी ने भारत में अपनी पहली इकाई के लिए उज्जैन में लगभग 780 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा है। इस इकाई में कैंसर की जाँच के किट बनाए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा, “मध्यप्रदेश में जो बात मेज़ पर होती है, वह धरातल पर उतरती है।” मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जून में इंदौर में आयोजित ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों की बैठक और लैटिन अमेरिका के 15 देशों के साथ व्यापार एवं निवेश मंच का भी उल्लेख किया। उन्होंने इन आयोजनों को अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और व्यापारिक संबंधों के विस्तार के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राजनयिक प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे अपने देशों की राजधानियों तक यह संदेश पहुँचाएँ कि मध्यप्रदेश , जीआईएस–2027 में उनके देश को साझेदार देश के रूप में देखना चाहता है।उन्होंने संबंधित देशों के द्विपक्षीय चैंबरों से मध्यप्रदेश को जोड़ने और उनकी वार्षिक आम सभा भोपाल में आयोजित करने के लिए प्रोत्साहित करने का आग्रह भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि कई चैंबर इसके लिए सहमत हो चुके हैं और प्रदेश की टीम उनके संपर्क में है। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधियों को मध्यप्रदेश आने का आत्मीय निमंत्रण देते हुए कहा कि वे प्रदेश के अतिथि होंगे। उन्होंने कहा, “मध्यप्रदेश भारत का हृदय प्रदेश है। और हृदय का स्वभाव है, सबको जोड़ना। हम आपके देशों से इसी भाव से जुड़ना चाहते हैं।” मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि वर्ष 2028 में उज्जैन में सिंहस्थ का आयोजन होगा, जिसमें करोड़ों श्रद्धालु आएंगे। उन्होंने राजनयिक प्रतिनिधियों को सिंहस्थ में आने का भी निमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह व्यापारिक साझेदारी के साथ भारत की आत्मा को निकट से देखने का अवसर होगा। महावाणिज्य दूतों ने सराहीं मध्यप्रदेश की निवेश संभावनाएं, सहयोग के अवसरों पर हुआ सकारात्मक संवाद राउंड टेबल बैठक में जापान की महावाणिज्य दूत सुश्री हितोमी सातो ने मध्यप्रदेश की औद्योगिक क्षमता और निवेश की संभावनाओं की सराहना की। उनके साथ जापान और मध्यप्रदेश के बीच निवेश एवं औद्योगिक सहयोग के अवसरों पर सकारात्मक चर्चा हुई। मेक्सिको के प्रमुख वाणिज्य दूत अदोल्फो गार्सिया एस्त्रादा ने मध्यप्रदेश में व्यापार एवं निवेश के अवसरों को उत्साहजनक बताया। उनसे आर्थिक सहयोग और व्यापारिक संबंधों के विस्तार की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। रूस के महावाणिज्य दूत इवान वाई. फेतिसोव ने मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास और निवेश प्रोत्साहन के प्रयासों की सराहना की। उनके साथ विभिन्न एग्रीकल्चर,फ़ूड प्रोसेसिंग एवं एनर्जी क्षेत्रों में निवेश एवं व्यापारिक सहयोग की संभावनाओं पर सकारात्मक संवाद हुआ। कोरिया गणराज्य के महावाणिज्य दूत डोंगवान यू ने मध्यप्रदेश के निवेश-अनुकूल वातावरण और औद्योगिक संभावनाओं को सराहा। बैठक में कोरिया गणराज्य और मध्यप्रदेश के बीच निवेश एवं व्यापारिक सहयोग के अवसरों पर चर्चा की गई। थाईलैंड की महावाणिज्य दूत सुश्री सिरिपोर्न सुपानिमितविसेतकुल ने मध्यप्रदेश की विकास संभावनाओं और निवेशकों के साथ संवाद की पहल की सराहना की। उनके साथ व्यापार एवं निवेश संबंधों के विस्तार के अवसरों पर विचार-विमर्श हुआ। मिस्र अरब गणराज्य की महावाणिज्य दूतमती डालिया तवाकोल ने मध्यप्रदेश में निवेश के अवसरों और राज्य सरकार के निवेश प्रोत्साहन प्रयासों की सराहना की। उनसे आपसी आर्थिक सहयोग की संभावनाओं पर सकारात्मक चर्चा हुई। दक्षिण अफ्रीका के महावाणिज्य दूत जेडोन लेबाने ने मध्यप्रदेश की औद्योगिक क्षमता और व्यापार की संभावनाओं को सराहा। उनके साथ निवेश एवं व्यापारिक सहयोग के अवसरों पर विचार-विमर्श हुआ। बैठक में संबंधित देशों की जीआईएस–2027 में ‘साझेदार देश’ के रूप में संभावित सहभागिता तथा मध्यप्रदेश के साथ सहयोग के अवसरों पर चर्चा की गई। 

‘12 बजे तक अखिलेश करते हैं अली-अली, उसके बाद बजरंगबली’- सपा प्रमुख पर ओपी राजभर का बड़ा हमला

‘अखिलेश यादव को न राम प्यारे हैं, न कृष्ण’, सपा प्रमुख पर निशाना साधते हुए राजभर बोले- 2027 में हम जीतेंगे 350 सीट ‘12 बजे तक अखिलेश करते हैं अली-अली, उसके बाद बजरंगबली’- सपा प्रमुख पर ओपी राजभर का बड़ा हमला ‘इसलिए कर रहे प्रदर्शन ताकि बाद में वोट चोरी का आरोप लगा सकें’- विपक्ष के हंगामे पर ओपी राजभर का बयान 'अखिलेश यादव शिवपाल को फूटी आंख भी नहीं देखना चाहते'- राजभर 'सपा में शिवपाल की हालत झुनझुना बजाने वाले जैसी': अखिलेश पर ओपी राजभर का निशाना ओपी राजभर ने सपा को बताया डूबती नांव, 2027 को लेकर कहा- NDA के साथ लड़ेंगे चुनाव लखनऊ,  योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया कि 2027 के चुनाव में हम 350 सीट जीतने जा रहे हैं। वहीं अयोध्या में हो रही कथा में अखिलेश यादव के जाने को लेकर राजभर ने कहा, “उनको ना तो राम प्यारे हैं और ना ही कृष्ण प्यारे हैं, अखिलेश यादव खुद को कृष्ण का वशंज बताते हैं लेकिन वो मथुरा और अयोध्या नहीं जाते। उन्हें डर लगा रहता है कि मुस्लिम सपा का साथ न छोड़ दें।” राजभर ने कहा, “अखिलेश यादव 12 बजे तक अली-अली करते हैं। उसके बाद बजरंगबली करते हैं। अखिलेश यादव का हाल माया मिली ना राम वाला है।” उन्होंने कहा, “अखिलेश यादव कांग्रेस को चालू पार्टी बता चुके हैं। कांग्रेस सपा को भाजपा की बी टीम बता चुकी है। 2027 में कोई लड़ाई नहीं है।” वहीं सपा में शिवपाल यादव की स्थिति को लेकर ओपी राजभर ने कहा, “शिवपाल की स्थिति बैंड पार्टी में झुनझुना बजाने वाले जैसी हो गई है जिसे सुर-ताल से कोई मतलब नहीं होता। वही हाल उनका भी है।” उन्होंने कहा, “अखिलेश यादव शिवपाल यादव को फूटी आंख से भी नहीं देखना चाहते हैं। अभी उनको लोहिया ट्रस्ट से भी हटा दिया। अभी मैंने सुना कि अब कार्यालय में भी शिवपाल जाएंगे तो अखिलेश से पूछकर जाएंगे। यह सब अविश्वास ही तो है। अखिलेश यादव हमेशा शिवपाल यादव को अपमानित करने का काम करते हैं।” ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के प्रोटेस्ट पर राजभर का बयान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के प्रोटेस्ट पर ओपी राजभर ने कहा, “कांग्रेस-सपा को तो ज्ञानेश कुमार को धन्यवाद देना चाहिए कि निष्पक्ष चुनाव करवाया। जिसमें 37 सीट सपा को, 6 सीट कांग्रेस को मिली।” उन्होंने कहा, “अगर चोरी होती, तो 2019 में लोकसभा के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी 303 सीट जीती। चोरी करती, तो बढ़ता न। और 2024 में 240 ही आई। यह क्या साबित करता है?” राजभर ने कहा, “2014 के पहले पूरे देश के सिस्टम पर कब्जा कांग्रेस का था। चुनाव आयोग कांग्रेस का था। तो क्या कांग्रेस ने चुनाव आयोग से मिलकर के मोदी जी को प्रधानमंत्री बना दिया? 2012 से 2017 तक समाजवादी पार्टी का कब्जा उत्तर प्रदेश के सारे सिस्टम पर था। तो क्या अखिलेश जी ने योगी जी को मुख्यमंत्री बना दिया?” उन्होंने आगे कहा, “अब मोदी जी और योगी जी दोनों लोग मिलकर के जनता का काम करने लगे, तो जनता उन पर विश्वास करने लगी और राहुल-अखिलेश को छोड़ दिया। तो अब यह लोग सोच रहे हैं कि अब प्रदर्शन करें कि आगामी चुनाव के बाद जनता से हम लोग कह सकें कि भाई वोट चोरी हो गई। बस इसी नाते लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। और कोई बात नहीं है।” 2027 को लेकर क्या बोले राजभर? 2027 को लेकर ओम प्रकाश राजभर से सवाल हुआ कि क्या सुभासपा भाजपा के साथ रहेगी या कहीं जाएगी? इस पर राजभर ने कहा, “अखिलेश यादव भी तो 8 बार समझौता किए, बसपा से, आरएलडी से, कांग्रेस से, सुभासपा से। उनसे नहीं कोई पूछता है।” राजभर ने कहा कि हम लोग NDA के साथ हैं। समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हुए राजभर ने कहा, “सपा डूबती हुई नैया है, जिसे डूबना हो वही उस पार्टी में जाए।"

सचिन वाजे के पास थीं 5 लग्जरी गाड़ियां, BMW-मर्सिडीज से Land Cruiser Prado तक शामिल

 मुंबई एंटीलिया बम केस में बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे की जमानत रद्द करने की NIA की याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है. गुरुवार को सुनवाई के दौरान अदालत में जब सचिन वाजे द्वारा इस्तेमाल की जा रही महंगी और लग्जरी गाड़ियों का ब्योरा सामने आया, तो जजों की बेंच भी हैरान रह गई। मामले की सुनवाई जस्टिस जीएस कुलकर्णी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की बेंच कर रही थी. एनआईए की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह कोर्ट के सामने जांच के दौरान दर्ज किए गए गवाहों के बयान पढ़ रहे थे।  इन बयानों में साल 2021 की एक घटना का भी जिक्र था. गवाह ने बताया कि जब वाजे को लगा कि मामला बिगड़ सकता है और एनआईए जांच में आ सकती है, तब उसने अपने साथियों के साथ अपने मोबाइल फोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामान को नष्ट करने और उन्हें मीठी नदी में फेंकने की बात कही थी।  'काली मर्सिडीज में बैठा था वाजे' अनिल सिंह ने एक गवाह का बयान पढ़ते हुए बताया कि वाजे ने अपने साथियों को अपने साथ आने के लिए कहा. इसके बाद सभी लोग नीचे आए और एक काली मर्सिडीज में बैठे. गवाह के मुताबिक, कार में बैठने के बाद वाजे ने फिर सभी से अपने मोबाइल फोन बंद करने को कहा।  यह सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पूछा कि यह मर्सिडीज किसकी थी? क्या यह वाजे की अपनी कार थी? अनिल सिंह ने जवाब दिया कि हां, यह कार वाजे की थी।  इस पर कोर्ट ने पूछा कि क्या गाड़ी का रजिस्ट्रेशन भी वाजे के नाम पर था? बेंच ने कहा कि आमतौर पर असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों को मर्सिडीज चलाते हुए देखने को नहीं मिलता।  अनिल सिंह ने कहा कि ऐसे कई अधिकारी हैं. इस पर कोर्ट ने पूछा कि क्या किसी इंस्पेक्टर जनरल के पास मर्सिडीज है? उन्होंने जवाब दिया कि हो सकता है IG के पास भी न हो, यहां तक कि कमिश्नर के पास भी न हो, लेकिन असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर के पास मर्सिडीज हो सकती है. ऐसा कोई नियम नहीं है कि कमिश्नर के पास मर्सिडीज होनी ही चाहिए।  कोर्ट ने कहा कि यह ऐसी बात है जिस पर पुलिस कमिश्नर को भी ध्यान देना चाहिए. हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि पहले यह देखना जरूरी है कि कार वास्तव में वाजे की ही थी या नहीं।  बेंच ने कहा कि जब वर्दी में रहे किसी व्यक्ति पर किसी अपराध में शामिल होने का आरोप लगाया जाता है तो पूरे मामले को समझने के लिए उसकी पूरी स्थिति देखना जरूरी है. उसकी नौकरी के प्रति ईमानदारी, उसका काम, उसकी पोस्टिंग, उसने किस तरह काम किया और वर्दी में रहते हुए उसका व्यवहार कैसा रहा, इन सभी बातों को भी ध्यान में रखना होगा।  कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच के दौरान सामने आई ऐसी चीजों को समझना जरूरी है, क्योंकि रिकॉर्ड में बार-बार वाजे के इन महंगी गाड़ियों में घूमने की बात सामने आ रही है. बेंच ने पूछा कि आखिर ये गाड़ियां किसकी थीं और वाजे इनका इस्तेमाल क्यों कर रहा था।  CM के घर भी महंगी कार से जाता था वाजे कोर्ट के सामने रखे गए कई बयानों में बताया गया कि वाजे अपनी महंगी मर्सिडीज से पुलिस कमिश्नर के ऑफिस और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के सरकारी आवास 'वर्षा' भी जाता था. सुनवाई के दौरान अनिल सिंह ने यह भी बताया कि वाजे दक्षिण मुंबई के एक फाइव स्टार होटल में करीब 100 दिनों तक रहा था।  इस पर कोर्ट ने पूछा कि वह वहां इतने लंबे समय तक कैसे रह रहा था. बेंच ने यह भी पूछा कि उस समय वाजे की महीने की सैलरी कितनी थी. अनिल सिंह ने बताया कि फिलहाल उसकी सैलरी करीब 90 हजार रुपये महीना है।  BMW से लेकर लैंड क्रूजर तक, पांच महंगी गाड़ियां सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने वाजे के पास इस्तेमाल की गई पांच गाड़ियों की लिस्ट भी रखी गई. इसमें सफेद BMW, काली Volvo, सफेद Mercedes, सफेद Toyota Land Cruiser Prado और  काली Mercedes शामिल हैं. लिस्ट देखने के बाद कोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा, 'इसके पास 5 कारें हैं! अनिल सिंह ने बताया कि जांच के दौरान उन कार डीलरों के बयान भी दर्ज किए गए थे, जिन्होंने वाजे को ये गाड़ियां बेची थीं. इन गाड़ियों और उनके इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी भी जांच में सामने आई थी।  वाजे पर वसूली का भी मामला सचिन वाजे पर महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के साथ कथित वसूली के मामले में भी सीबीआई ने केस दर्ज किया था. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि जब जांच एजेंसी पूरे मामले को वसूली से जोड़ रही है तो वाजे की महंगी गाड़ियों, होटल में रहने और दूसरे खर्चों से जुड़ी जानकारी भी मामले को समझने के लिए अहम हो सकती है. सीबीआई के मामले में विशेष अदालत ने बाद में वाजे को सरकारी गवाह बनने के लिए माफी दे दी थी. हालांकि, प्रवर्तन निदेशालय की ओर से जांच किए जा रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले में वह अब भी आरोपी है। 

सर्वाधिक मतों से जिताकर बिहार की जनता ने दिया बड़ा सम्मान, रामविलास जी का मिशन बढ़ा रहे चिरागः सीएम

दलितों, वंचितों की प्रखर आवाज थे रामविलास पासवानः मुख्यमंत्री  राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की छठी पुण्यतिथि पर अर्पित की श्रद्धांजलि  रामविलास जी को जो सम्मान बिहार में मिला, वही यूपी में भी दिलाएंगेः मुख्यमंत्री सर्वाधिक मतों से जिताकर बिहार की जनता ने दिया बड़ा सम्मान, रामविलास जी का मिशन बढ़ा रहे चिरागः सीएम  लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान जुझारू तेवर वाले जननेता थे। उन्होंने अपने इस तेवर से सामाजिक चेतना को नया आयाम प्रदान किया। 50 वर्ष पहले बिहार में ऐसे युवा नेता का अभ्युदय हुआ था, जो उस समय दलितों, वंचितों की प्रखर आवाज बना। बिहार की जनता ने उस स्वर को बड़ा सम्मान दिया और रामविलास जी को सबसे अधिक मतों से जिताकर संसद भेजा। उन्होंने भारतीय राजनीति के माध्यम से अपना जीवन सामाजिक चेतना को जागरूक करने और बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के सपने का भारत बनाने के लिए समर्पित किया।  राज्यपाल आनंदी बेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की छठी पुण्यतिथि पर सुशांत गोल्फ सिटी में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में अपनी बातें रखीं। मुख्यमंत्री ने रामविलास पासवान के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर सभी ने भजनों का श्रवण करते हुए आध्यात्मिक गंगा में डुबकी लगाई। संसद में हमने साथ कार्य किया  मुख्यमंत्री ने कहा कि बतौर सांसद मुझे भी पासवान जी के साथ लंबे समय तक संसद में कार्य करने का अनुभव प्राप्त हुआ। उनके मन में भारत की परंपरा के प्रति सदैव श्रद्धा व सम्मान की भावना रही। दलित-वंचित को न्याय मिले, उन्हें समाज की मुख्य धारा में सम्मान व उचित स्थान मिले, अपने इस संकल्प को मंजिल तक पहुंचाने के लिए रामविलास जी ने निरंतर कार्य किया।  जो सम्मान बिहार में मिला, वही यूपी में दिलाएंगे सीएम ने बिहार सरकार का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि वहां उनकी पुण्यतिथि को राष्ट्रीय समारोह के रूप में आयोजित किया जा रहा है। सीएम ने रामविलास पासवान के दृढ़ संकल्प का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने जो बोला, उसके अनुरूप जीवन जिया। उत्तर प्रदेश में इस आयोजन के लिए सीएम ने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का आभार जताया और विश्वास दिलाया कि बिहार में जो सम्मान रामविलास पासवान को मिला है, वही सम्मान उत्तर प्रदेश में भी दिलाएंगे। रामविलास जी के मिशन को बढ़ा रहे चिराग  सीएम ने कहा कि रामविलास पासवान की अनुपस्थिति खलती है, लेकिन इस बात की संतुष्टि है कि चिराग पासवान उनके मिशन को बढ़ाने के लिए अनवरत कार्य कर रहे हैं। पीएम मोदी जी के सान्निध्य में केंद्रीय मंत्री के रूप में चिराग पासवान अपनी आवाज को हर मंच के माध्यम से बढ़ा रहे हैं।  रामविलास जी की सदाशयता हृदय छू लेती थी सीएम ने कहा कि रामविलास जी ने सामाजिक न्याय की लड़ाई को बिना भेदभाव आगे बढ़ाने का काम किया। श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी तथा नरेंद्र मोदी जी के मंत्रिमंडल में बतौर केंद्रीय मंत्री के रूप में, चुनावी जनसभाओं या अन्य अवसरों पर भी रामविलास जी की सहजता, स्नेह व सदाशयतापूर्ण व्यवहार हर किसी का हृदय छू लेता था।

भारत की ग्रोथ स्टोरी पर KKR का बड़ा अनुमान, 10 साल में $8 ट्रिलियन से आगे जा सकती है अर्थव्यवस्था

नई दिल्ली दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं इस समय कई तरह की चुनौतियों से जूझ रही हैं. कहीं महंगाई दबाव बना रही है, तो कहीं कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव आर्थिक रफ्तार के लिए चुनौती बने हुए हैं. इन सबके बीच भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी रफ्तार बनाए रखने में सफल रही है. ग्लोबल इन्वेस्टमेंट फर्म 'कोहलबर्ग क्राविस रॉबर्ट्स एंड कंपनी' (Kohlberg Kravis Roberts & Co. – KKR) का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था के आगे अभी लंबी ग्रोथ की गुंजाइश है और अगले 10 साल में यह 8 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा के स्तर तक पहुंच सकती है।  केकेआर ने अक्टूबर 2026 की अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत 4 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी का लेवल पार कर चुका है. अब यहां से अर्थव्यवस्था के फिर दोगुना होने की राह बनती दिख रही है. फर्म के मुताबिक, पिछले एक दशक में किए गए कई ढांचागत सुधारों, डिजिटलाइजेशन और लगातार बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश ने भारत की विकास क्षमता को मजबूत किया है।  सुधारों का असर अब दिख रहा केकेआर के मुताबिक, 2014 के बाद भारत में कई ऐसे बड़े बदलाव हुए, जिनका असर धीरे-धीरे अर्थव्यवस्था की बुनियाद पर पड़ा है. इनमें वस्तु एवं सेवा कर (GST), इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड और लेबर मार्केट का ज्यादा औपचारिक होना शामिल है. रिपोर्ट के मुताबिक, इन सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास क्षमता को बढ़ाया है. केकेआर का मानना है कि ऐसे ढांचागत सुधारों का असर किसी एक तिमाही में नहीं, बल्कि कई वर्षों में दिखाई देता है. फर्म के मुताबिक, ये बदलाव भारत के लिए 10-11% की नॉमिनल GDP ग्रोथ के रास्ते को सहारा दे सकते हैं।  अभी पूरी नहीं भारत की ग्रोथ स्टोरी केकेआर का कहना है कि भारत की आर्थिक कहानी अभी पूरी नहीं हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, आगे की ग्रोथ सिर्फ नए सुधारों से नहीं आएगी, बल्कि पहले से लागू किए गए सुधारों का पूरा असर सामने आने से भी अर्थव्यवस्था को फायदा मिल सकता है. फर्म के अनुसार, अर्थव्यवस्था के ज्यादा औपचारिक होने से कारोबार और कैश फ्लो से जुड़े जोखिमों में कमी आई है. इससे भारतीय अर्थव्यवस्था के लंबे समय के आउटलुक को मजबूती मिली है।  बढ़ती आय और खपत बड़ा सहारा भारत की बढ़ती आय और घरेलू खपत भी केकेआर की नजर में लंबी अवधि की बड़ी ताकत है. जैसे-जैसे लोगों की आय बढ़ती है, वैसे-वैसे सामान और सेवाओं पर खर्च भी बढ़ता है. इससे अर्थव्यवस्था में मांग बनी रहती है. हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी इस रफ्तार के लिए छोटी अवधि में चुनौती बन सकती है. रिपोर्ट में करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के कच्चे तेल की कीमत का जिक्र करते हुए कहा गया है कि इससे कुछ समय के लिए ग्रोथ धीमी हो सकती है. हालांकि, केकेआर के मुताबिक सरकारी नीतियों ने इस बार घरेलू परिवारों पर उतना बोझ नहीं डाला है, जितना पिछले तेल संकटों के दौरान देखने को मिला था।  सर्विसेज बनीं ग्रोथ की बड़ी ताकत भारत के लिए सर्विसेज सेक्टर भी आर्थिक विकास का एक अहम इंजन बनकर उभरा है. केकेआर के मुताबिक, सर्विसेज एक्सपोर्ट अब पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं. ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर यानी GCC भी पारंपरिक आईटी सर्विसेज के साथ-साथ ग्रोथ का बड़ा स्रोत बनते जा रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, सर्विसेज का योगदान भारत की रियल GDP ग्रोथ में आधे से ज्यादा है. आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इस क्षेत्र के विकास का अगला बड़ा चरण बन सकता है।  इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश भी अहम केकेआर ने भारत के लगातार बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को भी अर्थव्यवस्था की क्षमता बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण फैक्टर बताया है. सड़क, रेलवे, बंदरगाह, एयरपोर्ट और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश से न केवल आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं, बल्कि लंबे समय में कारोबार की लागत और समय को कम करने में भी मदद मिलती है. कुल मिलाकर, केकेआर की रिपोर्ट भारत की लंबी अवधि की आर्थिक संभावनाओं को लेकर सकारात्मक तस्वीर पेश करती है. हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों जैसी वैश्विक चुनौतियां बीच-बीच में रफ्तार पर असर डाल सकती हैं. इसके बावजूद केकेआर का अनुमान है कि अगले 10 साल में भारतीय अर्थव्यवस्था 8 ट्रिलियन डॉलर से आगे जाने की राह पर है।