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450 साल पुराने नक्शे में बदलाव की तैयारी, अफ्रीका का असली आकार आएगा सामने; भारत ने किया समर्थन

न्यूयॉर्क दुनिया को देखने और समझने के तरीके में बड़ा बदलाव आने वाला है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक नए वर्ल्ड मैप को अपनाने के पक्ष में मतदान किया है। इस नक्शे में अफ्रीका का आकार पहले के मुकाबले बड़ा दिखाई देगा, जबकि उत्तरी अमेरिका और यूरोप छोटे नजर आएंगे। नए नक्शे को ‘इक्वल अर्थ कार्टोग्राफिक प्रोजेक्शन’ कहा जाता है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक इसका मकसद दुनिया के महाद्वीपों के भू-भाग को ज्यादा सटीक तरीके से दिखाना है। प्रस्ताव के पक्ष में भारत समेत 164 देशों ने वोट किया, जबकि अकेले अमेरिका ने इसके खिलाफ मतदान किया। छह देशों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। क्यों बदला जा रहा है दुनिया का पुराना नक्शा? अब तक दुनिया में व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाला मर्केटर प्रोजेक्शन 1569 में फ्लेमिश कार्टोग्राफर जेरार्डस मर्केटर ने तैयार किया था। इसे मुख्य रूप से समुद्री नौवहन के लिए डिजाइन किया गया था। इस नक्शे की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसमें धरती के ध्रुवों के पास मौजूद इलाके अपने वास्तविक आकार से काफी बड़े दिखाई देते हैं, जबकि भूमध्य रेखा के आसपास के इलाके अपेक्षाकृत छोटे नजर आते हैं। नए इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन का उद्देश्य इस विकृति को कम करना और महाद्वीपों के आकार को ज्यादा सटीक तरीके से दिखाना है। 164 देशों ने किया समर्थन, अमेरिका ने किया विरोध UN महासभा में नए नक्शे से जुड़े प्रस्ताव को 164 देशों का समर्थन मिला। अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया, जबकि छह देश मतदान से अलग रहे। हालांकि यह प्रस्ताव कानूनी तौर पर बाध्यकारी नहीं है। इसका मकसद सदस्य देशों को शिक्षा, संस्थानों और दूसरी जगहों पर ज्यादा सटीक वर्ल्ड मैप इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना है। भारत ने UN के "नक्शे को सही करने" वाले प्रस्ताव का स्वागत किया है। भारतीय राजनयिक रघु पुरी ने यूएन में कहा, "समान क्षेत्रफल वाले प्रोजेक्शन इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे महाद्वीपीय या क्षेत्रीय भू-भागों के सापेक्ष आकार और क्षेत्रफल को बनाए रखते हैं।" क्या अब मर्केटर मैप पूरी तरह खत्म हो जाएगा? नहीं। UN के प्रस्ताव का मतलब यह नहीं है कि मर्केटर प्रोजेक्शन पर तत्काल रोक लग गई है। नया प्रस्ताव सदस्य देशों से पारंपरिक मर्केटर नक्शे की जगह इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन को अपनाने का आग्रह करता है, ताकि दुनिया के भू-भाग का ज्यादा सटीक प्रतिनिधित्व हो सके। यानी आने वाले समय में स्कूलों, संस्थानों और दूसरी जगहों पर दुनिया का नक्शा पहले से अलग नजर आ सकता है। अफ्रीका को लेकर क्यों है इतनी चर्चा? नए नक्शे में अफ्रीका का आकार पहले इस्तेमाल किए जाने वाले मार्केटर प्रोजेक्शन की तुलना में ज्यादा बड़ा दिखाई देता है। इसी वजह से यह बदलाव खास तौर पर चर्चा में है। नए नक्शे का उद्देश्य केवल अफ्रीका को बड़ा दिखाना नहीं, बल्कि दुनिया के अलग-अलग महाद्वीपों के वास्तविक भू-भाग को अधिक सटीक तरीके से प्रस्तुत करना है।

BRICS समिट में जिनपिंग की मौजूदगी तय, बांग्लादेशी PM का दौरा रद्द; सुरक्षा तैयारियां तेज

नई दिल्ली  भारत की अध्यक्षता में 12-13 सितंबर को हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग दिल्ली आएंगे। सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति जिनपिंग की यात्रा का आधिकारिक कार्यक्रम अभी नहीं आया है लेकिन उनके दौरे को अंतिम रूप दिया जा रहा है। वे एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आ रहे हैं। जिनपिंग की भारत यात्रा करीब सात सालों के बाद हो रही है। इससे पहले वे अक्तूबर 2019 में द्विपक्षीय वार्ता के लिए भारत आए थे। सूत्रों ने कहा कि जिनपिंग की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों में द्विपक्षीय वार्ता भी होगी जिसमें सीमा से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा होगी। ब्रिक्स में प्रमुख हस्तियों में जिनपिंग के अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन होंगे। चुनाव के चलते ब्राजील के राष्ट्रपति लूला हिस्सा नहीं लेंगे। उसके भी विदेश मंत्री आएंगे। जबकि ईरान, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के हिस्सा लेने की संभावना है। बांग्लादेशी पीएम के आने की संभावना नहीं बिम्स्टेक के अध्यक्ष के रूप में ब्रिक्स में आमंत्रित बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सम्मेलन में आने के आसार नही हैं। संभावना है कि विदेश मंत्री बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। आपको बता दें कि बांग्लादेश शेख हसीना को वापस भेजने की मांग कर रहा है। इस वजह से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर तनाव बढ़ा है। तारिक रहमान की यात्रा को लेकर राष्ट्रपति भवन ने एक बार बयान भी जारी कर दिया था जिसे बाद में वापस लेना पड़ा। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि तारिक रहमान की यात्रा के लिए अनुकूल माहौल बनाने की जरूरत है। इस दौरे के रद्द होने के बाद कहा जा रहा था कि रहमान ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारत आ सकते हैं।हालांकि वह ब्रिक्स शिखऱ सम्मेलन में हिस्सा लेने भी नहीं आ रहे हैं। ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीशों की बैठक शुरू ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीश मंच की बैठक को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने वाणिज्यिक विवादों को सुलझाने के लिए मध्यस्थता एवं सुलह के लिए एक साझा मंच बनाने का प्रस्ताव भी रखा। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को यहां ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीश मंच की बैठक का आयोजन किया। इसमें ब्रिक्स के सदस्य देशों और सहयोगी देशों के प्रधान न्यायाधीश, शीर्ष अदालतों के प्रमुख और वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी शामिल हुए। ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीश मंच की बैठक के उद्घाटन के दिन प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने न्यायिक प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों के साथ कई द्विपक्षीय बैठकें कीं।सीजेआई ने तीन दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन रूस, चीन, मिस्र, इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), बेलारूस, कजाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका, ईरान और उज्बेकिस्तान के न्यायिक प्रमुखों से मुलाकात की।

New York AI Ban: बच्चों की पढ़ाई में AI पर लगा ब्रेक, सरकारी स्कूलों में 8वीं कक्षा तक इस्तेमाल प्रतिबंधित

न्यूयॉर्क आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) को लेकर हर तरफ चर्चा है, अधिकतर लोग मानने लगे हैं कि अब इसके बिना कुछ भी संभव नहीं है, लेकिन अमेरिका के न्यूयॉर्क सिटी के अधिकारियों ने प्राइमरी स्कूलों में AI के इस्तेमाल पर रोक लगाने का ऐलान कर दिया है।  न्यूयॉर्क सिटी के अधिकारियों ने सार्वजनिक प्राथमिक और मिडिल स्कूलों के लिए बड़ा ऐलान कर दिया है. अब स्टूडेंट आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) के इस्तेमाल पर इस्तेमाल पर एक साल के लिए रोक का ऐलान कर दिया है।  अमेरिका में स्कूलों को लेकर AI के संबंध में लिया गया है, यह अब तक का सबसे बड़ा और सख्त फैसला माना जा रहा है. अब लॉस एंजिल्स समेत कई अन्य शहरों के स्कूलों में AI के नियमों का दोबारा रिव्यू किया जा रहा है।  40 एजुकेशन AI टूल को किया है बैन न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने बुधवार को बताया है कि शहर के स्कूलों की क्लासेस में फिलहाल इस्तेमाल किए जा रहे हैं 40 एजुकेशन AI टूल्स के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है।  स्टूडेंट को टीचर चाहिए और उनसे जुड़ाव चाहिए मेयर ने कहा है कि बच्चों को सीखने और बढ़ने के लिए टीचर चाहिए और उनसे जुड़ाव चाहिए. स्टूडेंट को साथियों के साथ मिलकर कौशल सीखने चाहिए और टीचर्स से नई-नई चीजों को सीखना चाहिए।  बच्चों के लिए एआई टूल्स पर क्यों लगी पाबंदी?     यह पाबंदी प्री-किंडरगार्टन से लेकर आठवीं कक्षा तक के छात्रों पर लागू की गई है। मेयर ममदानी और स्कूल्स चांसलर कामर सैमुअल्स द्वारा जारी इस निर्देश का मुख्य उद्देश्य बच्चों में क्रिटिकल थिंकिंग यानी खुद से सोचने-समझने की क्षमता को बचाना और शिक्षकों व छात्रों के बीच संवाद को बनाए रखना है।     इस नए नियम के तहत शिक्षा अधिकारी 38 से अधिक क्लासरूम प्रोग्राम्स के स्वचालित (ऑटोमेटेड) फीचर्स को पूरी तरह बंद कर देंगे। इसके अलावा चैटजीपीटी और क्लॉड जैसे पब्लिक चैटबॉट सभी स्तर के स्कूलों में पूरी तरह से ब्लॉक रहेंगे। न्यूयॉर्क ने साल 2023 में भी चैटजीपीटी पर बैन लगाया था, लेकिन बाद में इसे हटा लिया गया था। अब प्रशासन ने पिछली नीतियों में बदलाव करते हुए दो-तिहाई छात्रों के लिए सख्त नियम लागू कर दिए हैं। चैटबॉट्स के इस्तेमाल से बच्चों को क्या हैं नुकसान? क्रिटिकल थिंकिंग की कमी: एआई चैटबॉट्स से बच्चों को हर जटिल सवाल का बना-बनाया जवाब सेकंडों में मिल जाता है, इससे वे खुद से तर्क करना, समस्याओं का विश्लेषण करना और दिमागी कसरत करना छोड़ देते हैं। इससे उनकी सोचने समझने की क्षमता प्रभावित होती है। रचनात्मकता और मौलिकता की कमी: निबंध, कविताएं या प्रोजेक्ट खुद तैयार करने के बजाय बच्चे एआई का सहारा लेते हैं। इससे उनकी भाषा शैली, कल्पनाशीलता और खुद को अभिव्यक्त करने की प्राकृतिक कला धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी। गलत सूचनाओं का असर: चैटबॉट्स अक्सर गलत या भ्रामक तथ्यों को बहुत ही प्रामाणिक और आत्मविश्वास भरे ढंग से पेश करते हैं। कच्ची उम्र के बच्चे इन जानकारियों को पूरी तरह सच मान लेते हैं, जिससे उनके बुनियादी ज्ञान की नींव ही गलत तथ्यों पर खड़ी हो सकती है। मानवीय और सामाजिक कौशल में गिरावट: कक्षा में दोस्तों के साथ ग्रुप डिस्कशन करने या शिक्षकों से सवाल पूछने की बजाय स्क्रीन देखते रहने के कारण बच्चों के संवाद और सामाजिक कौशल का विकास रुक जाता है। शिक्षक-छात्र संबंधों में दूरी: एक शिक्षक बच्चे की मानसिक स्थिति, उसकी कमजोरी और मजबूती को समझकर व्यक्तिगत मार्गदर्शन देता है। हर समस्या के लिए मशीनों पर निर्भरता इस भावनात्मक जुड़ाव और जरूरी मार्गदर्शन को पूरी तरह खत्म कर देती है। स्क्रीन टाइम लिमिट कम करने पर जोर     इस पाबंदी से हाई स्कूल के छात्रों को थोड़ी राहत दी गई है। उन्हें साल में दो बार एआई साक्षरता की कक्षाएं दी जाएंगी और कड़ी निगरानी में कुछ चुनिंदा एआई प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करने की छूट मिलेगी। दूसरी ओर शिक्षकों को लेसन प्लानिंग और प्रशासनिक कार्यों के लिए एआई टूल्स का उपयोग करने की अनुमति दी गई है।     हालांकि, कॉपियां जांचने (ग्रेडिंग) या छात्रों के किसी भी तरह के औपचारिक मूल्यांकन के लिए एआई का इस्तेमाल पूरी तरह वर्जित रहेगा। प्रशासन ने बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम की लिमिट भी तय कर दी है। इसके तहत तीसरी से पांचवीं कक्षा के बच्चों के लिए 30 मिनट और छठी से आठवीं कक्षा के लिए 45 मिनट की अधिकतम सीमा निर्धारित की गई है। हालांकि, दिव्यांग छात्रों और अंग्रेजी भाषा सीखने वाले बच्चों को इन नियमों में विशेष छूट दी जाएगी। टेक कंपनियों के दावों पर मेयर का पलटवार प्रेस ब्रीफिंग के दौरान शहर के अधिकारियों ने टेक इंडस्ट्री की उस सोच को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें एआई को शिक्षा के लिए जरूरी बताया जाता है। मेयर जोहरान ममदानी ने कड़े शब्दों में कहा कि टेक कंपनियां हमें यह विश्वास दिलाना चाहती हैं कि शुरुआती शिक्षा में एआई जरूरी है, लेकिन हम ऐसा बिल्कुल नहीं मानते। उन्होंने तर्क दिया कि स्कूलों का काम बच्चों को सवाल पूछना और चीजों को परखना सिखाना है, इसलिए यह अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे व्यावसायिक सॉफ्टवेयर की आंख मूंदकर अनुमति देने के बजाय उसकी कड़ी निगरानी करें। फैसले पर उठ रहे सवाल     इस बड़े फैसले पर शिक्षा जगत से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। यूनाइटेड फेडरेशन ऑफ टीचर्स के अध्यक्ष माइकल मुलग्रू ने स्क्रीन टाइम लिमिट और विशेष बच्चों को दी गई छूट का स्वागत किया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि स्कूलों पर जिम्मेदारी डालने के बजाय टेक कंपनियों और सप्लायर्स से सीधे तौर पर सुरक्षा मानकों की मांग की जानी चाहिए।     वहीं फेयरप्ले के कार्यकारी निदेशक जॉश गोलिन ने चिंता जताई कि एआई के लंबे समय तक पड़ने वाले दुष्प्रभावों को समझने के लिए एक साल का समय काफी नहीं है। इसके अलावा सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बच्चे स्कूल के बाद घर जाकर अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर होमवर्क के लिए एआई का इस्तेमाल कर सकते हैं।     चांसलर कामर सैमुअल्स ने भी माना कि घर पर बच्चों की डिजिटल आदतों पर नजर रखने के लिए स्कूल के साथ-साथ अभिभावकों की भी मदद लेनी होगी। इस पूरी प्रक्रिया और इसके प्रभाव पर नजर रखने … Read more

किसान आंदोलन का पंजाब की सियासत पर असर, BJP-AAP को नुकसान तो कांग्रेस-अकाली-वारिस पंजाब दे को फायदा?

 पटियाला विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में एक बार फिर किसान आंदोलन गर्मा गया है। एमएसपी की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी, अमेरिका के साथ व्यापार समझौता रद्द करने और ग्रामीण मजदूरों के लिए पेंशन समेत कई मांगों को लेकर किसान मोहाली-चंडीगढ़ सीमा पर धरना दे रहे हैं। आंदोलन का सीधा असर भाजपा पर पड़ सकता है लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी भी इससे अछूती नहीं है। कांग्रेस और अकाली दल के लिए यह किसानों के बीच खोई जमीन वापस पाने का मौका बन सकता है। भाजपा के लिए ग्रामीण पंजाब में स्वीकार्यता की परीक्षा 2020-21 के किसान आंदोलन की राजनीतिक छाया पंजाब में भाजपा पर लंबे समय तक रही। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन में किसान संगठनों ने भाजपा के विरोध में अभियान चलाया था। 2022 के विधानसभा चुनाव में संयुक्त किसान मोर्चा ने भी भाजपा के खिलाफ वोट की अपील की थी। अब भाजपा पंजाब में अपना आधार बढ़ाने में जुटी है। पार्टी 2027 में सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की बात कह रही है। ऐसे में ग्रामीण पंजाब में स्वीकार्यता बढ़ाना उसके लिए बड़ी चुनौती है। अगर आंदोलन के कारण केंद्र और भाजपा के खिलाफ माहौल फिर मजबूत हुआ तो मालवा और दोआबा की ग्रामीण सीटों पर असर पड़ सकता है। किसान संगठनों की सक्रियता वाले इलाकों में भाजपा उम्मीदवारों को विरोध और सवालों का सामना करना पड़ सकता है। चुनौती सिर्फ किसान वोट की नहीं बल्कि पूरे ग्रामीण माहौल की है।  आप को नाराजगी दूर करने और कांग्रेस-अकाली दल को जमीन मजबूत करने का मौका 2020-21 में आप ने किसान आंदोलन का समर्थन किया था। 2022 में पार्टी ने 92 सीटें जीतकर सरकार बनाई। अब किसान शंभू और खनौरी मोर्चों पर मार्च 2025 में हुई पुलिस कार्रवाई और मांगें पूरी न होने को लेकर मान सरकार से नाराज हैं। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर का आरोप है कि मोर्चों से गायब ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य सामान का मुआवजा पंजाब सरकार ने नहीं दिया। एमएसपी कर्ज मुआवजा फसल विविधीकरण और कृषि लागत से जुड़ी मांगों का संबंध राज्य की नीतियों से भी है। ऐसे में आप विधायकों को गांवों में सवालों का सामना करना पड़ सकता है। कांग्रेस के लिए आंदोलन केंद्र की भाजपा सरकार और पंजाब की आप सरकार दोनों को घेरने का अवसर है। हालांकि केवल समर्थन का बयान पर्याप्त नहीं होगा। किसानों के बीच प्रभाव बढ़ाने के लिए उसे मांगों को मजबूती से उठाना होगा। कृषि कानूनों के मुद्दे पर भाजपा से गठबंधन तोड़ने वाला अकाली दल भी किसानों के बीच अपनी पुरानी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर सकता है। आंदोलन लंबा खिंचा तो उसे ग्रामीण पंजाब में वापसी का अवसर मिल सकता है। राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ प्रोफेसर बलविंदर सिंह टिवाणा के अनुसार किसान आंदोलन का असर भाजपा और आप पर पड़ सकता है क्योंकि किसानों की मांगें केंद्र और राज्य दोनों सरकारों से जुड़ी हैं। मांगें पूरी न होने से दोनों के खिलाफ नाराजगी है। कांग्रेस और अकाली दल सक्रियता से किसानों के समर्थन में आते हैं और उनकी मांगों को उठाते हैं तो दोनों पार्टियां किसानों के बीच अपनी पैठ दोबारा मजबूत कर सकती हैं।  किसान आंदोलन कैसे बिगाड़ सकते हैं भाजपा-AAP का गणित, एक्सपर्ट से जानिए… 1. केंद्र और राज्य के खिलाफ एक साथ मोर्चा: पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप सिंह का कहना है कि किसान संगठनों ने केंद्र और पंजाब सरकार दोनों के खिलाफ एक साथ मोर्चा खोला है। शंभू और खनौरी बॉर्डरों पर पिछले समय में हुए घटनाक्रमों, पुलिस कार्रवाई और किसान मोर्चों से गायब हुई ट्रैक्टर-ट्रॉलियों व अन्य सामान के मुआवजे का मुद्दा अब तूल पकड़ चुका है। किसान नेताओं का आरोप है कि राज्य सरकार ने न केवल आंदोलनकारियों की सुरक्षा व सहायता में ढिलाई बरती, बल्कि वादे के मुताबिक नुकसान की भरपाई भी नहीं की। उन्होंने कहा कि गांवों में अब आम आदमी पार्टी के विधायकों और नेताओं के खिलाफ पोस्टर-होर्डिंग्स लगाकर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। कृषि लागत, फसल विविधीकरण और राज्य-स्तरीय मुआवजे से जुड़े मुद्दों के कारण सत्तारूढ़ दल को ग्रामीण क्षेत्रों में भारी जन-असंतोष का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार से एमएसपी की कानूनी गारंटी और ट्रेड डील रद्द करने की मांग को लेकर किसान अड़े हुए हैं। 2. आप के सामने अपना गढ़ बचाने की चुनौती: पवनदीप शर्मा का कहना है कि 2020-21 के आंदोलन में आम आदमी पार्टी ने किसानों का खुलकर समर्थन किया था, जिसका सीधा फायदा उसे 2022 के चुनाव में 92 सीटें जीतकर मिला था। लेकिन सरकार बनने के बाद अब समीकरण बदल चुके हैं। शंभू और खनौरी मोर्चों पर हुई पुलिस कार्रवाई, किसान आंदोलनों के प्रति ढुलमुल रवैये का आरोप और स्थानीय कृषि समस्याओं के हल न होने से ग्रामीण क्षेत्रों में भगवंत मान सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ी है। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर के अनुसार, मोर्चों के दौरान हुए नुकसान और गायब हुई गाड़ियों के मुआवजे पर राज्य सरकार का वादा अधूरा रहा। ग्रामीण पंजाब, जो आप का सबसे मजबूत चुनावी स्तंभ माना जाता था, वहां से वोट बैंक छिटकने का सीधा खतरा पैदा हो गया है। यदि मान सरकार जल्द ही किसान संगठनों को संतुष्ट करने में विफल रहती है, तो आगामी चुनावों में उसके विधायकों को गांवों में प्रवेश करते समय भारी जन-आक्रोश का सामना करना पड़ सकता है। 3. ग्रामीण वोट होगा बैंक प्रभावित: पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रमोद बातिश का कहना है कि 2020-21 के कृषि कानून विरोधी आंदोलन का असर भाजपा अब तक झेल रही है। किसान आंदोलन के कारण 2022 के विधानसभा चुनाव में संयुक्त किसान मोर्चा की अपीलों के चलते भाजपा को ग्रामीण इलाकों में भारी राजनीतिक विरोध सहना पड़ा। स्थिति यहां तक पहुंच गई थी कि कई ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी को अपने चुनावी बूथ तक लगाने की अनुमति नहीं मिली थी। उन्होंने कहा कि भाजपा ने स्पष्ट रूप से घोषणा की है कि वह 2027 के विधानसभा चुनाव में राज्य की सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। ऐसे में मालवा और दोआबा जैसे विशाल ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी स्वीकार्यता बढ़ाना पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। 4. किसानों के प्रति भाजपा ने बदली रणनीति: पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रमोद बातिश का कहना है कि किसानों के लगातार विरोध के बीच … Read more

तबाही के बाद राहत शिविरों में बदहाल जिंदगी, नेपाल की पीड़ित महिलाओं ने बताई दर्दनाक मुश्किलें

काठमांडू  नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने हजारों लोगों की जिंदगी तबाह कर दी है. घर उजड़ गए, सामान बह गया और बड़ी संख्या में लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं. लेकिन बाढ़ से बच निकलने के बाद भी महिलाओं की मुश्किलें खत्म नहीं हुई हैं।  AFP की ग्राउंड रिपोर्ट में नेपाल के राहत शिविरों में रह रही महिलाओं की ऐसी परेशानियां सामने आई हैं, जिन पर आमतौर पर आपदा के दौरान कम बात होती है. महिलाओं के लिए पीरियड्स, साफ पानी, टॉयलेट, कपड़े और प्राइवेसी जैसी रोजमर्रा की जरूरतें भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।  ‘पैड तो मिल रहे हैं, लेकिन अंडरवियर नहीं’ AFP की रिपोर्ट के मुताबिक, राहत शिविर में रह रही कुछ महिलाओं ने बताया कि उन्हें सैनिटरी पैड मिल रहे हैं, लेकिन पहनने के लिए अंडरगारमेंट्स जैसी जरूरी चीजें आसानी से उपलब्ध नहीं हैं।  बाढ़ में घर और सामान खो चुकी महिलाओं के लिए यह समस्या और बड़ी हो गई है. पीरियड्स के दौरान सिर्फ पैड मिलना ही काफी नहीं होता. साफ पानी, टॉयलेट, कपड़े बदलने की जगह और निजी स्वच्छता के लिए जरूरी सुविधाएं भी चाहिए होती हैं।  400 से ज्यादा लोगों के लिए सिर्फ तीन टॉयलेट AFP की रिपोर्ट में राहत शिविरों में सैनिटेशन की स्थिति भी सामने आई है. एक शिविर में 400 से ज्यादा लोगों के लिए सिर्फ तीन टॉयलेट होने की बात बताई गई है।  महिलाओं के लिए परेशानी इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि उन्हें टॉयलेट के साथ-साथ नहाने और कपड़े बदलने के लिए भी पर्याप्त प्राइवेसी चाहिए. लेकिन आपदा के बाद बनाए गए अस्थायी शिविरों में ये सुविधाएं अक्सर सीमित होती हैं।  बाढ़ ने छीन ली सिर्फ छत नहीं, निजी जिंदगी भी घर उजड़ने के बाद राहत शिविर में पहुंचना किसी परिवार के लिए राहत की शुरुआत हो सकती है, लेकिन महिलाओं की जिंदगी में कई निजी मुश्किलें वहीं से शुरू होती हैं।  घर में जिन चीजों को लेकर कभी सोचना नहीं पड़ता था, वही चीजें अब जरूरत बन जाती हैं- साफ कपड़े, अंडरगारमेंट्स, सैनिटरी पैड, साफ पानी और ऐसी जगह जहां वे बिना किसी झिझक के अपनी निजी जरूरतें पूरी कर सकें।  AFP की रिपोर्ट इस बात को सामने लाती है कि आपदा राहत सिर्फ खाना, पानी और टेंट उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं हो सकती. महिलाओं की गरिमा और स्वच्छता से जुड़ी जरूरतों को भी राहत व्यवस्था का अहम हिस्सा बनाना जरूरी है।  जिंदगी बच गई, लेकिन सामान्य जिंदगी कब लौटेगी? बाढ़ से बच जाना निश्चित तौर पर सबसे बड़ी राहत है. लेकिन जिन लोगों ने अपना घर और सामान खो दिया है, उनके लिए सामान्य जिंदगी में लौटना लंबा सफर है।  राहत शिविरों में रह रही महिलाओं की बातें इसी संघर्ष को सामने लाती हैं. उनके लिए सवाल सिर्फ यह नहीं है कि आज खाना मिलेगा या नहीं. सवाल यह भी है कि वे कब फिर से अपने घर जैसी सुरक्षा, प्राइवेसी और सम्मान के साथ जिंदगी जी पाएंगी।  AFP की रिपोर्ट के जरिए सामने आई ये तस्वीर बताती है कि किसी आपदा का असर पानी उतरने के बाद भी लंबे समय तक लोगों की जिंदगी में बना रहता है। 

योगी सरकार ने ताइवान की टेक कंपनियों को दिया यूपी में निवेश का न्योता, टेक सेक्टर में बड़े अवसर

योगी सरकार ने ताइवान की टेक कंपनियों को दिया यूपी में निवेश का न्योता ताइपे में आयोजित ‘सेमिकॉन 2026’ में सेमीकंडक्टर और उन्नत प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम का किया प्रदर्शन प्रदेश में डाटा सेंटर परियोजनाओं के लिए उत्तर प्रदेश ने पेश किए निवेश के अवसर ताइवान कंपनियों के समक्ष नीतिगत प्रोत्साहनों, बुनियादी ढांचे और कुशल प्रतिभा को किया प्रस्तुत ताइपे/लखनऊ । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य को सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत प्रौद्योगिकी के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश ने ताइपे में 2 से 4 सितंबर तक आयोजित ‘सेमिकॉन 2026’ में प्रमुख ताइवानी टेक कंपनियों के समक्ष राज्य में निवेश की संभावनाओं को प्रस्तुत किया और उन्हें सेमीकंडक्टर, डाटा सेंटर तथा इलेक्ट्रॉनिक्स परियोजनाओं में निवेश के लिए आमंत्रित किया। ताइवान की कंपनियों के सामने यूपी का निवेश मॉडल योगी सरकार की निवेश-अनुकूल नीतियों, तैयार औद्योगिक बुनियादी ढांचे, कुशल मानव संसाधन और तेजी से विकसित हो रहे इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम को ताइवानी कंपनियों के सामने प्रमुख ताकत के रूप में रखा गया। राज्य ने चिप निर्माण, सेंसर, डाटा सेंटर और सप्लाई चेन के स्थानीयकरण आदि क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी और निवेश के अवसरों पर जोर दिया। प्रमुख ताइवानी कंपनियों से हुई चर्चा प्रमुख सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी आलोक कुमार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने इंडिया-ताइवान सेमीकंडक्टर फोरम में भाग लिया। प्रतिनिधिमंडल में इन्वेस्ट यूपी की अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी प्रेरणा शर्मा और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी मनीष मीना शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल ने क्रिएटिव सेंसर्स इंक के चेयरमैन यूजीन हुआंग और कंपनी के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ बैठक कर भारत में कंपनी के विस्तार की योजनाओं पर चर्चा की। इसके अलावा मीडियाटेक, एडीएटीए टेक्नोलॉजी और टीआईबीए बिजनेस एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ भी निवेश, संयुक्त उपक्रम और दीर्घकालिक सहयोग की संभावनाओं पर बातचीत हुई। सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में कदम आलोक कुमार ने उत्तर प्रदेश में सेमीकंडक्टर क्षेत्र की संभावनाओं को रेखांकित करते हुए राज्य के औद्योगिक बुनियादी ढांचे, प्रगतिशील प्रोत्साहन नीतियों, कुशल कार्यबल और मजबूत टेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम विकसित करने की योजनाओं की जानकारी दी। ताइवानी कंपनियों को सेंसर मॉड्यूल, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, एप्लीकेशन इंजीनियरिंग, परीक्षण और सप्लाई चेन के व्यापक स्थानीयकरण में निवेश के अवसरों से अवगत कराया गया। राष्ट्रीय योजनाओं के साथ कदमताल योगी सरकार राज्य की रणनीति को आईएसएम 2.0, ईसीएमएस और एमपीएमएस जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों के साथ उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2024 और उत्तर प्रदेश एफडीआई नीति-2023 के अनुरूप आगे बढ़ा रही है। इन्वेस्ट यूपी, यीडा तथा आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग निवेशकों को औद्योगिक बुनियादी ढांचे, नीतिगत प्रोत्साहनों और सरल अनुमोदन प्रक्रियाओं के माध्यम से सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। एनसीआर की निकटता और मजबूत सप्लायर नेटवर्क बना आकर्षण निवेशकों के सामने उत्तर प्रदेश के बड़े लैंड बैंक, एनसीआर से निकटता, कुशल कार्यबल, मजबूत आपूर्तिकर्ता आधार और तेजी से विस्तार कर रहे इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम को प्रमुख निवेश लाभ के रूप में प्रस्तुत किया गया। सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को सेमीकंडक्टर और उन्नत प्रौद्योगिकी क्षेत्र में देश के प्रमुख निवेश केंद्रों में स्थापित करना है।

लद्दाख में सिंधु नदी पर भारत की बड़ी तैयारी, रॉक डैम से 4 करोड़ लीटर पानी होगा स्टोर

नई दिल्ली भारत का पहला 'रॉक चेक डैम' सिंधु नदी पर लद्दाख में बना रहा है. जिससे किसानों को आसानी से पानी मिलेगा. यह डैम बिना सीमेंट के सिर्फ प्राकृतिक पत्थरों से बनाया गया है. ऐसे में यह कदम न सिर्फ स्थानीय किसानों के लिए संजीवनी है, बल्कि पाकिस्तान की तरफ पानी बहने से पहले अपने जल संसाधनों का भरपूर उपयोग करने की भारत की नई रणनीति को भी स्पष्ट रूप से दर्शाता है. भारत ने एक तरह से पाकिस्तान को भी क्लीयर संदेश दिया है कि सिंधु नदी को लेकर अब पूरी तरह से रणनीति स्पष्ट है कि पानी का उपयोग भारत पूरी तरह से करने के लिए तैयार है।  बिना सीमेंट का है पूरा डैम लद्दाख में बना भारत का पहला रॉक डैम बिना सीमेंट और चूने का बनाया गया है. बल्कि नदी के तल के भारी पत्थरों  को आपस में इंटरलॉक करके इसे खड़ा किया गया है. जिसका सबसे ज्यादा फायदा लद्दाख के किसानों को होगा. सालों से लद्दाख के किसान वसंत ऋतु में बुवाई के दौरान भारी जल संकट से जूझ रहे थे, सिंधु नदी का जलस्तर गहरी घाटियों में काफी नीचे चला जाता था, जिससे पंप से पानी खींचना बेहद मुश्किल था. पानी की इसी किल्लत ने खेती और किसानों की आर्थिक कमर तोड़ दी थी. लेकिन अब इस डैम के बनने से पानी का जलस्तर ऊंच रहेगा. सिंधु नदी का जलस्तर करीब 10 फीट तक चला गया है. डैम में 40 मिलियन यानि 4 करोड़ लीटर पानी जमा होगा. 'इगू फे' सिंचाई नहर के जरिए सूखे गांवों और खेतों की प्यास बुझा रहा है।  पाकिस्तान को कड़ा संदेश  एक तरफ लद्दाख में बना यह डैम किसानों को पानी उपलब्ध करा रहा है. तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के लिए एक सख्त रणनीतिक संदेश है. यह दिखाता है कि भारत अब सिंधु के पानी का इस्तेमाल अपने सीमावर्ती इलाकों के विकास के लिए पूरी तेजी से कर रहा है. बता दें कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को सस्पेंड कर दिया था. भारत ने साफ किया कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को पूरी तरह नहीं रोकता, तब तक यह समझौता बहाल नहीं होगा. अब इस पर भारत का सख्त मिजाज दिख रहा है।  लद्दाख में होगा पानी का इस्तेमाल  भारत ने लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में अपने जल अधिकारों का उपयोग तेज कर दिया. उपशी में पहले रॉक चेक डैम का पायलट प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक आगे बढ़ा और सिंधु नदी पर कई अन्य पनबिजली परियोजनाओं को भी गति दी गई . लद्दाख प्रशासन अब जल सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर काम कर रहा है. केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय को एक नया प्रस्ताव भेजा गया है जिसके तहत।  लद्दाख में ये 4 प्वाइंट अहम      लद्दाख में कुल 36 नए चेक डैम प्रोजेक्ट बनाए जाएंगे.     लेह इलाके में 7 हिमालयन रॉक चेक डैम बनेंगे.     कारगिल इलाके में 29 चेक डैम या वियर छोटी बांधनुमा संरचना का निर्माण होगा.     इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की अनुमानित लागत 56 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है. 

घर में दुकान या कॉम्प्लेक्स चलाना पड़ेगा भारी, भोपाल की 576 कॉलोनियां कार्रवाई के दायरे में

भोपाल मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में प्रशासनिक अधिकारियों व दूसरी एजेंसियों में रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई का मामला केवल नगर निगम पर छोड़ दिया है। जिन घरों में दुकान व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स चल रहे है, उनमें बड़ी हिस्सेदारी नजूल, बीडीए व हाउसिंग बोर्ड की भी है। अरेरा कॉलोनी से एमपी नगर, अशोका गार्डन से बैरागढ़ तक नजूल पट्टों की जमीन है। जिला प्रशासन के रेकॉर्ड के अनुसार, शहर में 576 कॉलोनियां नजूल जमीनों या गैर अनुमोदित ले आउट्स पर बसी है। बीडीए हाउसिंग के 50 प्रोजेक्ट है। यहां आवासीय में बड़े स्तर पर व्यावसायिक गतिविधियां व निर्माण है। इस स्थिति में कलेक्टर समेत बीडीए-हाउसिंग बोर्ड के अफसरों को मैदान में उतारने की जरूरत महसूस की जा रही है। सरकारी भूमि पर बनी कॉलोनियां पुराने भोपाल के शाहजहांनाबाद, बैरागढ़, सुल्तानिया रोड, लखेरापुरा, अशोका गार्डन, है, जबकि नया भोपाल अरेरा, टीटी नगर, एमपी नगर के बड़े हिस्से नजूल लीज-लैंड पर बसे है। ईदगाह हिल्स में 600 एकड़ जमीन मर्जर में है और रिकॉर्ड में सरकारी है। भोपाल शहर में प्रशासनिक अधिकारियों व दूसरी एजेंसियों में रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई का मामला केवल नगर निगम पर छोड़ दिया है। जिन घरों में दुकान व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स चल रहे है, उनमें बड़ी हिस्सेदारी नजूल, बीडीए व हाउसिंग बोर्ड की भी है। अरेरा कॉलोनी से एमपी नगर, अशोका गार्डन से बैरागढ़ तक नजूल पट्टों की जमीन है। जिला प्रशासन के रेकॉर्ड के अनुसार, शहर में 576 कॉलोनियां नजूल जमीनों या गैर अनुमोदित ले आउट्स पर बसी है। बीडीए हाउसिंग के 50 प्रोजेक्ट है। यहां आवासीय में बड़े स्तर पर व्यावसायिक गतिविधियां व निर्माण है। इस स्थिति में कलेक्टर समेत बीडीए-हाउसिंग बोर्ड के अफसरों को मैदान में उतारने की जरूरत महसूस की जा रही है। सरकारी भूमि पर बनी कॉलोनियां पुराने भोपाल के शाहजहांनाबाद, बैरागढ़, सुल्तानिया रोड, लखेरापुरा, अशोका गार्डन, है, जबकि नया भोपाल अरेरा, टीटी नगर, एमपी नगर के बड़े हिस्से नजूल लीज-लैंड पर बसे है। ईदगाह हिल्स में 600 एकड़ जमीन मर्जर में है और रिकॉर्ड में सरकारी है। हाउसिंग बोर्ड-बीडीए की स्थिति हाउसिंग बोर्ड ने भोपाल में 25 से अधिक बड़ी आवासीय कॉलोनियां व टाउनशिप विकसित की है। इनमें अयोध्या नगर क्षेत्र सबसे बड़ा आवासीय परिसर है। बीडीए की 13 से योजनाएं निगम को हस्तांतरित हो हो चुकी है, पर 7 की जिम्मेदारी उसी की है। निगम सीमा के तहत निगम कार्रवाई कर रहा है। नजूल, हाउसिंग बोर्ड, बीडीए के प्रोजेक्ट्स व क्षेत्र को लेकर समीक्षा कर ली जाएगी। कोर्ट के आदेश का पूरा पालन किया जाएगा।- कर्मवीर शर्मा, संभागायुक्त घर चार इमली में, अरेरा में बनाया व्यावसायिक भवन जब से नगर निगम द्वारा सीलिंग की कार्रवाई शुरू की गई है, मकान में कारोबार को लेकर पोल भी खुल रहे है। कई मामले ऐसे भी सामने आ रहे है, जिनमें भवन मालिक का असली पता किसी और इलाके का है और उसने किसी और रहवासी क्षेत्र में कारोबार के लिए भवन खड़ा किया है। ऐसा ही एक मामला अरेरा ई4/115 प्लॉट का है। इस पर हिंमाश चौरसिया और शुभम चौरसिया के नाम पर अप्रेल 2024 में मैं आवासीय निर्माण की अनुमति दी गई थी। लेकिन यहां कारोबारी भवन बना लिया गया है। अनुमति 0.75 एफएआर के आधार पर दी गई थी। यानी क्षेत्रफल से 75 फीसदी ही दो मंजिला निर्माण की मंजूरी है। लेकिन प्लॉट मालिक ने पूरा व्यावसायिक निर्माण कर लिया। ट्रैफिक पर पड़ेगा असर इमारत वंदेमातरम चौराहा से आगे 1100 क्वार्टर हनुमान मंदिर के बीच चार लेन रोड पर तैयार हो रही है। यहां अरेरा से लेकर कोलार, शाहपुरा, चुनाभट्टी और आसपास के ट्रैफिक गुजरता है। ऐसे में पीक ऑवर्स में चौराहे पर जाम की स्थिति बनेगी जिससे चौराहा भी प्रभावित होगा।

सीएम डॉ. यादव की अपील- मानसून सक्रिय रहने तक रहें बेहद सावधान, सुरक्षा को दें प्राथमिकता

मानसून सक्रिय रहने तक रहें बेहद सावधान – मुख्यमंत्री डॉ. यादव राहत एवं बचाव कार्यों में कोई कमी न रहें बाढ़ प्रभावितों को तत्काल दें खाना, कपड़ा और जरूरत का सूखा सामान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्टेट कमांड सेन्टर पहुंचकर वर्षाजनित परिस्थितियों की ली जानकारी राहत एवं बचाव कार्यों का लाइव निरीक्षण किया बीते एक माह में 2783 लोगों का किया गया है रेस्क्यू भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में अतिवृष्टि की वजह से कुछ क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई है। ऐसे में हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता नागरिकों की सुरक्षा है। कठिनाई की इस घड़ी में शासन, प्रशासन, तहसील का हर अधिकारी और कर्मचारी पूरी संवेदनशीलता, तत्परता और समन्वय के साथ राहत और बचाव कार्यों में सहयोग करें। किसी भी नागरिक को संकट में अकेला न छोड़ें। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, होमगार्ड, फील्ड अधिकारी, राहत एवं बचाव कार्य में जुटी एजेंसीज प्रदेश में मानसून सक्रिय रहने तक बेहद सजग रहें, सर्तक रहें, सावधान रहें और किसी भी परिस्थिति को हैंडल करने के लिए तैयार रहें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार को होमगार्ड कार्यालय के एसडीआरएफ स्टेट कमांड सेन्टर पहुंचकर प्रदेश के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों के साथ वीडियो कान्फ्रेंसिंग से बात की और सभी से उनके जिलों में वर्षा की स्थिति की जानकारी लेकर समीक्षा बैठक भी की। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कहीं बाढ़ का पानी घरों तक आ गया है तो प्रभावितों को तत्काल राहत शिविरों में पहुंचायें और सभी प्रभावितों को तत्काल खाना, कपड़ा और जरूरत का सूखा सामान उपलब्ध कराएं। साथ ही इन्हें शासन की ओर से नियमानुसार राहत राशि भी दिलायें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीसी के जरिए ही प्रदेश के कुछ जिलों में बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए चलायें जा रहे रेस्क्यू का लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने पन्ना, गुना, रीवा, सतना और पूर्वी मध्यप्रदेश के जिलों में अतिवृष्टि के कारण उपजी परिस्थतियों पर सीधे पुलिस अधीक्षकों, होमगार्ड और बचाव दल के अधिकारियों से बात की। बताया गया कि पन्ना की किलकिला नदी में आई बाढ़ के कारण यहां स्टेट डिसेस्टर इमरजेंसी रिस्पांस फोर्स (एसडीईआरएफ) द्वारा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। बैठक में मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव गृह विभाग संजय कुमार शुक्ल, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, एडीजी होमगार्ड सुप्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव, एडीजी इंटेलीजेंस अंशुमन यादव, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. सुदाम खाड़े, एसडीईआरएफ के स्टेट हेड सहित सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न जिलों में बारिश से उत्पन्न परिस्थितियों, प्रभावित क्षेत्रों में संचालित राहत एवं बचाव कार्यों तथा प्रशासन की तैयारियों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने रेस्क्यू ऑपरेशन और संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात टीमों की स्थिति की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और प्रशासनिक अमला पूरी मुस्तैदी के साथ कार्य करे तथा आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित लोगों तक तत्काल राहत एवं बचाव पहुंचाया जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रदेशवासियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आपदा प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाओं की निरंतर मॉनिटरिंग, विभागों के बीच बेहतर समन्वय और किसी भी आकस्मिक परिस्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा जिलों के अधिकारियों को वीसी से निर्देश देने के उपरांत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा में कहा कि प्रदेश में कमोबेश पूरे क्षेत्र में बारिश का दौर बना हुआ है। पश्चिमी मध्यप्रदेश को छोड़कर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश हुई है। इसके मद्देनजर एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें पूरी मुस्तैदी के साथ विभिन्न स्थानों पर तैनात हैं। बीते एक माह में आपदा प्रबंधन टीमों की मदद से 2,783 से अधिक लोगों का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर लिया गया है। फिलहाल अगले दो-चार दिनों में किसी बड़ी चुनौती की स्थिति नहीं है, लेकिन अचानक बाढ़ जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पहले से सुनिश्चित की गई हैं। हमारी इन्हीं तैयारियों का ही परिणाम है कि अब तक प्रदेश में जान-माल की कोई विशेष हानि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि हमारे पुलिस बल एवं राहत दलों ने भी पूरी दक्षता और मुस्तैदी के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया है। आगामी दिनों में बारिश की आशंका को देखते हुए हम लगातार सतर्क हैं और व्यवस्थाओं पर भी नजर बनाए हुए हैं। इसी क्रम में आज प्रदेश में बाढ़ आपदा प्रबंधन से संबंधित तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की है, ताकि किसी भी आकस्मिक परिस्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए प्रदेशवासियों के जान-माल-मवेशियों की सुरक्षा कायम रखी जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने सबसे संवाद कर अपनी तैयारियों को और बेहतर कर लिया है।  

Zee के संस्थापक सुभाष चंद्रा पर CBI ने दर्ज किया केस, LIC Housing Finance से जुड़ा ₹1,322 करोड़ का मामला

नई दिल्ली  एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा की मुश्किलें एक बार फिर से बढ़ गई हैं। सीबीआई ने सुभाष चंद्रा और अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, CBI ने इस मामले में सुभाष चंद्रा के अलावा पंकज सुरोलिया, अमीश पांड्या और राजीव ढोलकिया को आरोपी बताते हुए केस दर्ज किया है। LICHFL ने लगाया ये आरोप उनके ऊपर 2018 से 2026 के बीच LIC हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के साथ 1,322 करोड़ रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी के आरोप हैं। LICHFL का दावा है कि 2018 में क्रेडिट फैसलिटीज लेते वक्त सुभाष चंद्रा की नेटवर्थ 59113 करोड़ रुपये की नेटवर्थ का सर्टिफिकेट दिया था, लेकिन उन्होंने 2024 में अपनी नेटवर्थ महज 31.79 करोड़ रुपये बताई थी। मीडिया कारोबारी सुभाष चंद्रा को लोन माफी से जुड़े विवाद के बाद एक और बड़ा झटका लगा है। दरअसल, जांच एजेंसी CBI ने एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा और अन्य लोगों के खिलाफ फ्रॉड का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि उन्होंने 2018 से 2026 के बीच LIC हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (LICHFL) के साथ ₹1322 करोड़ की धोखाधड़ी की। LICHFL का दावा है कि 2018 में क्रेडिट फैसलिटीज लेते समय सुभाष चंद्रा ने ₹59113 करोड़ का नेटवर्थ सर्टिफिकेट पेश किया था लेकिन 2024 में उन्होंने अपनी नेटवर्थ सिर्फ ₹31.79 करोड़ बताई। NCALT ने दिया है झटका एस्सेल समूह के चेयरमैन सुभाष चंद्रा के खिलाफ यह मामला ऐसे समय में दर्ज हुआ है जब राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCALT) ने व्यक्तिगत दिवाला मामले में एनसीएलटी के आदेश पर रोक लगा दी है। NCALT ने सुभाष चंद्रा को अपनी संपत्तियां बेचने या हस्तांतरित करने से रोक दिया। साथ ही उन्हें समूह की कंपनियों के कर्ज के लिए दी गई व्यक्तिगत गारंटी से जुड़े करीब 22,006 करोड़ रुपये के दावों का लगभग 6.5 करोड़ रुपये में निपटान करने की अनुमति देने वाले आदेश पर भी रोक लगा दी थी। NCALT के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अनूपिंदर सिंह ग्रेवाल की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय विशेष पीठ ने कहा कि री-पेमेंट योजना पर स्पष्ट बहुमत नहीं बना और इसलिए आदेश को प्रभावी नहीं किया जा सकता। क्या है विवाद? विवाद एक ऐसी री-पेमेंट योजना को लेकर है, जिसके तहत सुभाष चंद्रा को अपने समूह की कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज के लिए दी गई व्यक्तिगत गारंटी से जुड़े दावों का महज 6.5 करोड़ रुपये में सैटल करने की अनुमति दी गई थी। यह उनकी कंपनियों द्वारा चूक किए गए 22,006 करोड़ रुपये के मुकाबले 99.9 प्रतिशत की कटौती है। दस बैंकों और कर्जदाताओं ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था। एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस का विरोध हालांकि, एचडीएफसी बैंक, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस और केनरा बैंक समेत असहमत कर्जदाताओं ने इसका विरोध किया था। उनका कहना था कि इससे होने वाली वसूली बहुत कम होगी। असहमत कर्जदाताओं के पास 20 प्रतिशत से कम मताधिकार था। वहीं, सुभाष चंद्रा ने कहा है कि व्यापक रूप से बताई जा रही 22,006 करोड़ रुपये की राशि वह रकम नहीं है, जो उन्होंने व्यक्तिगत रूप से उधार ली थी। इसमें एस्सेल समूह की कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज के लिए उनके द्वारा दी गई गारंटी से जुड़े दावे शामिल हैं। उन्होंने व्यक्तिगत गारंटी से जुड़े दावों की राशि करीब 3,990 करोड़ रुपये बताई है और कहा है कि बड़ी राशि मूल रूप से कर्ज लेने वाली कंपनियों के खिलाफ दावों से संबंधित है। कितने करोड़ रुपये का था लोन? शिकायत के मुताबिक, LICHFL ने दो अलग-अलग लोन सुविधाओं के तहत कुल 980 करोड़ रुपये का मूल लोन मंजूर किया था। ब्याज और दूसरे शुल्क जुड़ने के बाद ये रकम बढ़कर करीब 1,322 करोड़ रुपये हो गई।  संपत्ति जांच की मांग हालांकि, असहमत कर्जदाताओं ने चंद्रा की घोषित कुल संपत्ति की और जांच की मांग की है। उनका कहना है कि गारंटी देने के लिए उनकी संपत्ति का विवरण एक प्रमुख आधार था। कर्जदाताओं के अनुसार, प्रमाणित आंकड़ों में 2018 में उनकी कुल संपत्ति करीब 40,600 करोड़ रुपये और 2017 में 45,900 करोड़ रुपये थी जबकि 2024 तक यह राशि काफी घट गई थी। कौन हैं सुभाष चंद्रा? सुभाष चंद्रा कभी भारत के प्रमुख कारोबारी चेहरों में शामिल थे। उन्होंने टेलीविजन, पैकेजिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और डायरेक्ट-टू-होम टेलीविजन सहित अलग-अलग क्षेत्रों में कारोबार खड़ा किया। वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के समर्थन से राज्यसभा सदस्य भी निर्वाचित हुए थे।