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अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया एक जुलाई से पहले पूरी कर ली जाए सभी स्कूलों में बनाई जाए बाउण्ड्री वॉल्स

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सम्राट विक्रमादित्य की जीवनी को स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाये। गुरू सांदीपनि के जीवन पर भी रोचक पुस्तक तैयार की जाए। स्कूली शिक्षा में कक्षा 8 से 12 में कृ‍त्रिम बुद्धिमता (एआई) के कौशल को कैसे जोड़ा जाए, इस पर भी एक कार्य योजना तैयार की जाए। निजी विद्यालय खोलने के लिए सामाजिक संस्थाओं और संगठनों को प्रोत्साहन दिया जाए। अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया एक जुलाई से पहले पूरी कर ली जाए। सत्र प्रारंभ होने से पहले स्कूलों में सभी पूर्व तैयारियां कर ली जाएं। प्रदेश की सभी आंशिक जीर्ण-शीर्ण शालाओं की तत्काल मरम्मत करा ली जाए। सभी स्कूलों में बाउण्ड्री वॉल्स बनाई जाए। एक जुलाई से गुरू पूर्णिमा (29 जुलाई) तक "शिक्षक वंदना कार्यक्रम", अभिभावकों एवं जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में आयोजित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को मंत्रालय में स्कूल शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं और अन्य गतिविधियों की समीक्षा की। बैठक में स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश को विकसित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए हमारी सरकार सांदीपनि विद्यालय जैसी अत्याधुनिक शालाओं में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराकर प्रदेश की नींव मजबूत कर रही है। प्रदेश के हर विद्यार्थी तक उत्कृष्ट शैक्षणिक सुविधाएं और संसाधन समय पर पहुंचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। विभागीय गतिविधियों में तेजी लाएं और 16 जून से प्रारंभ हो रहे शैक्षणिक सत्र से पहले सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्कूलों में पूर्व छात्र-छात्रा सम्मेलन कराए जाएं, ताकि ऐसे विद्यार्थी जो अपने विद्यालय से भावनात्मक रूप से जुड़े हैं, वे उस विद्यालय के विकास-विस्तार में कुछ योगदान भी कर सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने परीक्षा परिणामों को और अधिक बेहतर बनाने के लिए शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने, नियमित मॉनीटरिंग, तकनीक और नवाचार आधारित शिक्षण पद्धति अपनाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जिन शालाओं में शत-प्रतिशत रिजल्ट आया है, उनके शिक्षकों का सार्वजनिक सम्मान किया जाएगा। बैठक में बताया गया कि प्रदेश की 26 शालाएं ऐसी हैं, जहां शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम आया है। यहां के सारे विद्यार्थी उत्तीर्ण हो गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन शालाओं के अतिरिक्त 90 या 95 प्रतिशत से अधिक रिजल्ट देने वाली शालाओं को भी सम्मानित किया जाए। उन्होंने कहा कि सांदीपनि विद्यालय की अवधारणा/योजना को जन-जन तक पहुंचाने के लिए एक विस्तृत कार्य योजना भी तैयार की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को ऐसे जिलों को चिन्हित करने को कहा, जहां सभी शालाओं में सभी प्रकार की व्यवस्थाएं उपलब्ध हों, साथ ही भौतिक एवं मानव संसाधन की कमी वाले जिलों की भी अलग श्रेणी तैयार की जाए। इससे सरकार को इन्हीं जिलों पर फोकस करने में आसानी होगी। कमी वाले जिलों पर इसी साल से काम प्रारंभ किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारी स्थानीय विधायक के साथ बैठकर पूरी विधानसभा क्षेत्र के स्कूलों में व्यवस्थाओं की बेहतरी के लिए प्रयास करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उनके द्वारा समय-समय पर की गई सभी घोषणाओं का जल्द से जल्द पालन करायें। एक वर्ष से पुरानी कोई भी घोषणा लंबित न रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वर्तमान में स्कूल शिक्षा विभाग की संचालित 14 विभागीय योजनाओं को निरंतर रखने की सहमति दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के बेहतरी के लिए सरकार हर जरूरी प्रयास करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि छोटे बच्चों की शिक्षा के लिए प्रारंभ से ही माहौल बनाया जाए। महिला बाल विकास विभाग भी इसमें योगदान दें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर अब प्रदेश के इतिहास में पहली बार स्कूल शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग बच्चों की गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई के लिए एक साथ मिलकर काम करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिन हाईस्कूलों के आस-पास हायर सेकेण्डरी स्कूल उपलब्ध नहीं हैं, ऐसे हाईस्कूलों को चिन्हित कर उन्हें हायर सेकेण्डरी स्कूलों में प्रोन्नत करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाए। शालाओं में दिया जाए व्यावसायिक प्रशिक्षण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की शालाओं में व्यावसायिक प्रशिक्षण भी दिया जाए। हाईस्कूल एवं हायर सेकेण्डरी कक्षाओं में कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं अन्य रोजगारपरक पाठ्यक्रमों का भी अध्ययन कराया जाए। व्यावसायिक प्रशिक्षण को दृष्टिगत रखते हुए संभव हो तो क्षेत्रीय स्व-सहायता समूहों को भी ऐसी शालाओं और विद्यार्थियों से जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभागीय अधिकारियों को सभी विभागों के विद्यालयों को एक करने की योजना पर तेजी से काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में एनसीसी, एनएसएस जैसे सामाजिक सेवा कार्य को भी बढ़ावा देने वाली इकाइयों को प्रोत्साहित करें। विद्यालयों में स्वास्थ्य परीक्षण, ड्राइविंग लायसेंस कैम्प, प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग की सुविधा उपलब्ध कराने के भी प्रयास किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शासकीय स्कूलों से पास आउट विद्यार्थी 12वीं कक्षा के बाद उच्च शिक्षा, रोजगार, कृषि कार्य, पैतृक व्यवसाय, कौशल प्रशिक्षण जैसे किस कार्य/रोजगार में लगे हैं, इसकी ट्रैकिंग भी होनी चाहिए। इससे सरकार के पास हमारे युवाओं का एक डेटाबेस तैयार होगा। शासकीय स्कूलों में बढ़ी नामांकन की दर बैठक में सचिव स्कूल शिक्षा ने बताया कि शासकीय स्कूलों में विद्यार्थियों के नामांकन वृद्धि के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बेहद सकारात्मक परिणाम सामने आया है। वर्ष 2024-25 की तुलना में वर्ष 2025-26 में शासकीय विद्यालयों में कक्षा-1 में नामांकन में करीब 32.4 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं कक्षा 9 से 12 के नामांकन में 4.25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो पिछले वर्षों की तुलना में सर्वाधिक है। इस साल प्रदेश के सभी शासकीय स्कूलों में 1 अप्रैल को प्रवेशोत्सव कार्यक्रम आयोजित किया गया। अप्रैल माह में ही 92 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों को शाला में प्रवेश दिया गया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में राजगढ़ जिले के भैंसवा माता एव नरसिंहपुर जिले के गाडरवाड़ा में संस्कृति विद्यालय प्रारंभ किए गए हैं। ‍शिक्षा घर योजना मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में सचिव स्कूल शिक्षा द्वारा 'शिक्षा घर योजना' के नाम से एक नई योजना का प्रजेंटेंशन देने पर प्रस्तावित योजना की … Read more

अवैध खनन पर निगरानी होगी और सशक्त: शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई के लिए टोल फ्री नंबर 1800-233-2140 जारी

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में खनिज संसाधनों के प्रबंधन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनसहभागिता आधारित बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा लगातार ठोस कदम उठाया जा रहा है। इसी कड़ी में प्रदेश में खनन गतिविधियों की प्रभावी निगरानी, नागरिकों से सीधा संवाद तथा शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा “खनन सूचना केंद्र (Mining Information Center)” की स्थापना की गई है। प्रदेश में खनिजों से संबंधित गतिविधियों, शिकायतों और सूचनाओं के आदान-प्रदान को सुगम एवं प्रभावी बनाने के लिए संचालनालय, भूविज्ञान एवं खनिकर्म द्वारा टोल फ्री नंबर 1800-233-2140 जारी किया गया है। इस माध्यम से आम नागरिक अवैध खनन, अवैध परिवहन, खनिज संबंधी अनियमितताओं अथवा अन्य शिकायतों की जानकारी सीधे प्रशासन तक पहुंचा सकेंगे, जिससे समयबद्ध कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था को अधिक सशक्त बनाया जा सकेगा। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की “जीरो टॉलरेंस” नीति के अनुरूप स्थापित यह सूचना केंद्र पारदर्शी और उत्तरदायी प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूती प्रदान करेगा। अब खनन गतिविधियों से जुड़ी शिकायतों और सूचनाओं पर त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए एक संस्थागत तंत्र उपलब्ध होगा, जिससे अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण और जवाबदेही को बढ़ावा मिलेगा। खनन सूचना केंद्र का संचालन कार्यालयीन समयानुसार प्रतिदिन प्रातः 10:00 बजे से सायं 5:30 बजे तक किया जाएगा। प्राप्त सूचनाओं पर त्वरित समन्वय और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त संचालक (खनिज प्रशासन) स्तर के अधिकारी को नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि खनिज संपदा का संरक्षण, पारदर्शी उपयोग, राजस्व संवर्धन तथा अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण जनसहभागिता और तकनीकी समन्वय के माध्यम से ही संभव है। “खनन सूचना केंद्र” इस दिशा में शासन की जवाबदेह, संवेदनशील और पारदर्शी कार्यप्रणाली को मजबूत करने वाली एक महत्वपूर्ण जनहितकारी पहल है।

लाखों राज्यकर्मियों की बढ़ेगी सैलरी, योगी सरकार ने बढ़ाया महंगाई भत्ता

लखनऊ  यूपी के लाखों राज्य कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए अच्छी खबर है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी का आदेश जारी कर दिया है। शासनादेश में कहा गया है कि पहली जनवरी 2026 से महंगाई भत्ता बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है। यह आदेश केंद्र सरकार द्वारा जारी संशोधित दरों के आधार पर लागू किया गया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि 1 जनवरी 2026 से 30 अप्रैल 2026 तक के एरियर का भुगतान भविष्य निधि (GPF) खाते में जमा किया जाएगा। दो प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद कर्मचारियों का महंगाई भत्ता पहले के मुकाबले और बढ़ जाएगा। इससे कर्मचारियों कीमहीने सैलरी में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। जारी किए गए शासनादेश में कहा गया है कि प्रदेश के नियमित राज्य कर्मचारियों, सहायता प्राप्त शिक्षण एवं प्राविधिक शिक्षण संस्थानों के कर्मचारियों, शहरी स्थानीय निकायों के कर्मचारी तथा यूजीसी वेतनमान में कार्यरत पदधारकों को पहली जनवरी 2026 से 60 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता मिलेगा। बढ़ा हुआ डीएम कामई 2026 के नियमित वेतन के साथ मिलेगा। छह माह के भीतर रिटायर होने वाले हो वालों को नकद मिलगा जारी किए आदेश में यह भी बताया गया है कि जो राज्य कर्मचारी कर्मचारी रिटायर हो चुके हैं अथवा छह माह के भीतर रिटायर होने वाले हैं, उन्हें देय महंगाई भत्ते की पूरी राशि नकद रूप में प्रदान की जाएगी। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के इस फैसले से लाखों राज्य कर्मचारियों और पेंशनरों को राहत मिलने की उम्मीद है। कितना बढ़ेगा तनख्याह आपको समझाते हैं किसी कितनी सैलरी बढ़ेगी। मान लीजिए किसी का तनख्याह 50 हजार रुपए महीने है अब दो प्रतिशत बढ़ोतरी लगती है तो उसकी सैलरी 1000 रुपए महीने बढ़ सकती हैं। इसी तरह सलाना जोड़ेंगे यह बढ़ोतरी 12 हजार रुपये मानी जाएगी। योगी सरकार के इस फैसले से प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को ही नहीं बल्कि पेंशनरों को भी बड़ा लाभ मिलेगा। पेंशन में भी बढ़ोतरी होगी। इससे बुजुर्ग पेंशनरों को बड़ी राहत मिलेगी। कर्मचारियों और पेंशनरों में खुशी का माहौल वहीं राज्य कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी के आदेश के बाद यूपी के कर्मचारियों और पेंशनरों में खुशी माहौल है। कर्मचारियों ने सरकार का आभार जताया है। पेंशनरों ने भी उत्तर प्रदेश सरकार का आभार जताते हुए कहा कि महंगाई के दौर में बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता आर्थिक मदद देगा। कई कर्मचारी संगठनों ने इसे सकारात्मक कदम बताते हुए उम्मीद जताई कि भविष्य में भी कर्मचारियों के हित में इसी तरह के फैसले लिए जाएंगे।

Axis My India के प्रदीप गुप्ता का बड़ा दावा, अगले दो दशक तक BJP रहेगी ताकतवर

नई दिल्ली एक्सिस माय इंडिया (Axis My India) के प्रमुख और पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रदीप गुप्ता ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर बड़ी भविष्यवाणी की है। उन्होंने कहा है कि 2014 में शुरू हुआ भाजपा के राजनीतिक दबदबे का मौजूदा दौर कम से कम 20 साल तक जारी रहेगा। 'द एक्सिस माई इंडिया' सर्वेक्षण संस्था के प्रमुख गुप्ता ने तर्क दिया कि सत्तारूढ़ दल की स्थिति तब तक सुरक्षित रहेगी जब तक उसके शासन का प्रदर्शन बहुत कमजोर नहीं हो जाता। मालूम है कि प्रदीप गुप्ता के एक्सिस माय इंडिया के अतीत में ज्यादातर सर्वे और एग्जिट पोल्स सही साबित हुए हैं। हालांकि, 2024 लोकसभा चुनाव के एग्जिट पोल में उनसे चूक हो गई थी। कांग्रेस के लंबे समय तक रहे राजनीतिक प्रभुत्व के साथ तुलना करते हुए, गुप्ता ने कहा कि भारतीय राजनीति एक पार्टी के प्रभाव के एक और दौर की साक्षी बन रही है। गुप्ता ने 'पीटीआई-भाषा' को दिए साक्षात्कार में कहा, ''राजनीति में एक सीमा होती है। पहले, कांग्रेस ने 1977 तक लगातार शासन किया। उसके बाद, उसे मुश्किलें आने लगीं। उन दिनों, हम लगभग 20 साल तक चलने वाली राजनीतिक पीढ़ी की बात करते थे। वह 20 साल का दौर अब भी बना रहेगा।'' 'राजनीति का केंद्रीय ध्रुव बनी रह सकती है BJP' उन्होंने कहा कि भाजपा भी इसी तरह लंबे समय तक भारतीय राजनीति का केंद्रीय ध्रुव बनी रह सकती है। उनके विचार में, सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष दोनों का भविष्य काफी हद तक मौजूदा सरकार के कामकाज पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा, ''इतना बड़ा जनादेश मिलने के बाद, भाजपा से उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। इसलिए भाजपा और एनडीए को अब शानदार कामकाज करना होगा।'' गुप्ता ने कहा, ''जब तक उनका प्रदर्शन कमजोर या खराब नहीं होता, वे जीतते रहेंगे और विपक्ष हारता रहेगा।'' 'कांग्रेस के लिए विरासत में मिले मुद्दों का बोझ बना हुआ है' उन्होंने कहा कि कांग्रेस पर पहले कुशासन रहने की धारणाओं से जुड़े 'विरासत में मिले मुद्दों' का बोझ बना हुआ है जिससे उसके राजनीतिक नुकसान की भरपाई एक लंबी प्रक्रिया बन गई है। उन्होंने कहा, ''अगर आप 2029 की भी बात करें, तो इसका मतलब होगा लगभग 15 साल (कांग्रेस के लिए सत्ता से बाहर रहने के)। मुझे लगता है कि उन्हें पूरे देश को मनाने में कम से कम पांच साल और लग सकते हैं।'' गुप्ता ने यह भी कहा कि राजनीतिक प्रभुत्व ने जनता की आकांक्षाएं भी बढ़ा दी हैं। उन्होंने कहा, ''जब आप बड़ी ऊंचाइयों पर पहुंचते हैं, तो बाद में नीचे आने की भी प्रवृत्ति बनी रहती है। भाजपा भी उस स्तर पर पहुंच गई है जहां उससे आकांक्षाएं बढ़ गई हैं।'' 'यूपी में शासन के प्रति संतुष्टि का स्तर अच्छा, पंजाब में मिला-जुला’ वहीं, प्रदीप गुप्ता का कहना है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में एक साल से भी कम समय बचा है और सत्तारूढ़ भाजपा मजबूत स्थिति में नजर आ रही है, क्योंकि जनता योगी आदित्यनाथ सरकार के कामकाज से काफी हद तक संतुष्ट है। गुप्ता ने कहा कि पंजाब में चार-कोणीय मुकाबले के उभरने के कारण सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के प्रति जनता की संतुष्टि का स्तर ''मिला-जुला' बना हुआ है। प्रदीप गुप्ता ने राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इन दोनों राज्यों में अपनी एजेंसी के जमीनी स्तर पर किए गए काम से प्राप्त अवलोकन साझा किए। दोनों राज्यों में 2027 की शुरुआत में चुनाव प्रस्तावित है और जिनके परिणामों का व्यापक राष्ट्रीय प्रभाव होने की उम्मीद है।

पैक्स कम्प्यूटराईजेशन पूर्ण ; जल्द ही मोबाहल ऐप पर ट्रांजेक्शन

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) में नवीन सदस्य बनने के लिए सदस्यता अभियान 30 जून तक चलाएं। गत 14 अप्रैल से शुरू सदस्यता अभियान के जरिए पैक्स में 10 लाख नवीन सदस्य जोड़ें। उन्होंने कहा कि वर्ष में सवा लाख नए केसीसी स्वीकृति का लक्ष्य रखें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को मंत्रालय में सहकारिता विभाग की गतिविधियों की समीक्षा कर रहे थे। इस अवसर पर सहकारिता मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन और प्रमुख सचिव श्री डी.पी. आहूजा उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के सुदृढ़ीकरण की सराहना करते हुए कहा है कि अगले 3 साल में सभी कमजोर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक का सुदृढ़ीकरण किया जाए। बताया गया कि गत ढाई वर्षों में 18 कमजोर जिला बैंकों में से 6 की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। शासकीय अंश पूंजी सहायता से 6 जिला बैंक रीवा, सतना, जबलपुर, शिवपुरी, ग्वालियर एवं दतिया को सुदृढ़ करने का प्रयास है। अगले चरण में अन्य 6 भिंड, मुरैना, रायसेन, सागर, सीधी और नर्मदापुरम बैंक के सुदृढ़ीकरण का कार्य किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पैक्स से लेन-देन की प्रक्रिया को मोबाइल ऐप के जरिए किए जाने के प्रयास किए जाएं। इस पर बताया गया कि प्रदेश की सभी 4536 पैक्स को केंद्र प्रायोजित कंप्यूटराइजेशन योजना अंतर्गत कंप्यूटरीकृत कराया गया है। शत-प्रतिशत कंप्यूटराइजेशन से योजना क्रियान्वयन में प्रदेश देश में अग्रणी है। जल्द ही मोबाइल ऐप के जरिए ट्रांजेक्शन भी किया जा सकेगा। बैठक में बताया गया की बीज उत्पादक सहकारी संस्थाओं के माध्यम से गत 2 वर्षों में 14 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का उत्पादन एवं विपणन हुआ है। 1102 नई दुग्ध समितियों का गठन कर 5562 दुग्ध समितियों तथा वित्तीय समावेशन के लिए 76 हजार सदस्यों के खाते जिला सहकारी बैंक में खोले गए हैं। व्यापक स्तर पर भर्ती एवं संस्थागत क्षमता निर्माण के प्रयास किए गए हैं। राष्ट्रीय स्तर की सहकारी समितियों के साथ भागीदारी एवं व्यवसाय बताया गया कि राष्ट्रीय स्तर की नवीन गठित तीन सहकारी समितियों के साथ भागीदारी एवं व्यवसाय किया गया है।भारतीय बीज सहकारी समिति लि. (BBSSL) के साथ प्रदेश के सहकारी बीज संघ ने MoU किया है जिससे 17 करोड़ रूपये का व्यवसाय और 844 पैक्स द्वारा सदस्यता प्राप्त हुई है।राष्ट्रीय सहकारी आर्गेनिक लि. (NCOL) के साथ प्रदेश के सहकारी विपणन संघ का MoU हुआ जिससे 1335 पैक्स द्वारा सदस्यता प्राप्त हुई। राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लि. (NCEL) और प्रदेश के सहकारी संघ के साथ MoU में 1612 पैक्स द्वारा सदस्यता प्राप्त हुई। अभी उत्पादों का चिन्हांकन प्रक्रियाधीन है।  

राज्य सड़क सुरक्षा सचिवालय का गठन होगा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में नागरिकों को संस्थागत लोक परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिये मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना शीघ्र प्रारंभ की जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में परिवहन विभाग की समीक्षा बैठक ले रहे थे। बताया गया कि प्रदेश में सड़क सुरक्षा सचिवालय का गठन किया जा रहा है। बैठक में परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री  उदय प्रताप सिंह भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि आमजन के लिए सुरक्षित, सुगम और सुलभ परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना हमारा दायित्व है। बेहतर लोक परिवहन आसान यात्रा का साधन ही नहीं, प्रदेश के सामाजिक और आर्थिक विकास की जीवन रेखा भी है। प्रदेश की सीमा में अन्य राज्यों से आने वाले मालवाहक वाहनों की जांच के लिए परिवहन चौकियों और टोल नाकों को और अधिक आधुनिक एवं सुविधा सम्पन्न बनाया जाए। इसके लिए परिवहन चौकियों को शीघ्र ही एकीकृत (इंटीग्रेटेड) करने के प्रयास किए जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राहवीर योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि परिवहन विभाग में मानव संसाधन की कमी की पूर्ति अभियान चलाकर की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सर्वाधिक दुर्घटना क्षेत्रों की मैपिंग करा ली जाए, जिससे जरूरतमंदों को जल्द से जल्द मेडिकल सर्विसेस मुहैया कराई जा सकें। विभिन्न विभागों द्वारा दी जा रही एम्बुलेंस सेवाओं को एक प्लेटफार्म पर लाया जाए, जिससे दुर्घटना क्षेत्रों में जरूरतमंद तक 30 मिनट से भी कम समय में एम्बुलेंस ऑटो मोड (जो स्पॉट से निकटतम हो) में पहुंच जाए। 'म.प्र. राज्य सड़क सुरक्षा सचिवालय' का होगा गठन बैठक में सचिव परिवहन  मनीष सिंह ने बताया कि विभाग द्वारा क्रियान्वित पीएम-राहत योजना एवं राहवीर योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश, पूरे देश में पहले स्थान पर है। पीएम-राहत योजना में राज्य के सभी 55 जिलों में जिला नोडल अधिकारियों को ऑनबोर्ड किया जा चुका है। योजना में कुल 2,298 प्रकरणों में से 1692 प्रकरण अनुमोदित कर दिए गए हैं। राहवीर योजना में कुल 109 आवेदन मिले, इनमें से 49 प्रकरण मंजूर कर लिए गए हैं। बालाघाट जिले में राहवीर योजना पर बहुत अच्छा काम हुआ है। बैठक में बताया गया कि हाल ही में मध्यप्रदेश में हुई सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी (SCCoRS) की बैठक में कमेटी के अध्यक्ष एवं सदस्यों द्वारा इन दोनों योजनाओं के प्रचार-प्रसार एवं सफल क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार की पहल की बेहद सराहना की गई है। इसी कमेटी की अनुशंसा पर सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश में पृथक से 'म.प्र. राज्य सड़क सुरक्षा सचिवालय' का गठन भी किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में विभाग को दिए गए 4,400 करोड़ रूपए के लक्ष्य के विरूद्ध कुल 4911.78 करोड़ रूपए राजस्व आय अर्जित की गई। दिए गए लक्ष्य से विभाग द्वारा 111.6 प्रतिशत अधिक राजस्व अर्जन किया गया है। वर्तमान वित्त वर्ष 2026-27 के लिए करीब 5,721 करोड़ रूपए राजस्व आय का लक्ष्य रखा गया है। परिवहन विभाग द्वारा प्रदेश में 51 प्रकार की फेसलेस सर्विसेस दी जा रही हैं। इससे नागरिकों को बिचौलियों से तो मुक्ति मिली ही है, साथ ही पारदर्शितापूर्ण सेवा प्रदाय भी सुनिश्चित हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन सभी उपलब्धियों के लिए विभागीय मंत्री, अधिकारियों एवं मैदानी अमले को भी बधाई दी। 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना' मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीण नेटवर्क विस्तार, महिला सुरक्षा और प्रदेश के नागरिकों को संस्थागत लोक परिवहन की सुविधा मुहैया कराने के लिए राज्य सरकार की 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना' की अद्यतन प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि योजना का जल्द से जल्द फील्ड में शुभारंभ किया जाए। सचिव, परिवहन  मनीष सिंह ने बताया कि योजना को धरातल पर लाने के लिए तेजी से प्रक्रियागत काम जारी है। यह योजना दो चरणों में चलाई जाएगी। इसके लिए प्रदेश में 7 क्षेत्र क्रमश: इंदौर, उज्जैन, भोपाल (नर्मदापुरम सहित), जबलपुर, सागर, ग्वालियर (चंबल सहित) एवं रीवा (शहडोल सहित) स्थापित किए गए हैं। पहले चरण में चलाई जाने वाली बसों के लिए क्षेत्रीय मुख्यालयों से उपनगरीय क्षेत्रों तक विस्तारित मार्ग मंजूरी की विभागीय अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। अन्य क्षेत्रों के विस्तारित मार्गों की अधिसूचना शीघ्र ही जारी की जाएगी। उन्होंने बताया कि योजना के पहले चरण में प्रदेश के कुल 1,164 मार्गों पर लगभग 5,206 बसों का संचालन अगले दो सालों में किया जाएगा। इन सभी बसों की सुचारू मॉनिटरिंग के लिए एक दक्ष एवं इंटेलीजेंट ट्रांसपोर्ट मैंनेजमेंट सिस्टम स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि योजना के पहले चरण में इंदौर क्षेत्र के कुल 121 मार्गों में कुल 608 बसें, उज्जैन क्षेत्र के 120 मार्गों में 371 बसें, भोपाल क्षेत्र के 104 मार्गों में 398 बसें, जबलपुर क्षेत्र के 83 मार्गों पर 309 बसें, सागर क्षेत्र के 92 मार्गों में 344 बसें, ग्वालियर क्षेत्र के 65 मार्गों में 298 बसें तथा रीवा क्षेत्र के 35 मार्गों में 184 बसें चलाई जाएंगी। योजना के तहत चलाई जाने वाली सभी बसों का रंग एक जैसा होगा, ताकि एकरूपता बनी रहे। सचिव परिवहन ने बताया कि ड्रायविंग लायसेंस एवं पंजीयन प्रमाण पत्र को सहज बनाने के लिए विभाग द्वारा 1 अक्टूबर 2024 से डिजिटल फार्म में प्रमाण पत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं। प्रदेश में ई-डिटेक्शन प्रणाली प्रारंभ करने की व्यवस्था की जा रही है। इस पर काम प्रगति पर है। इस प्रणाली से चिन्हित स्थानों पर लगे कैमरों द्वारा वाहनों की नंबर प्लेट अपने आप स्कैन हो जाएगी। स्कैन किए गए वाहन क्रमांक से दस्तावेज वाहन पोर्टल से स्वत: जांच होकर सीधे ऑनलाइन भेज दिया जाएगा। बैठक में मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय  नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव वित्त  मनीष रस्तोगी, परिवहन आयुक्त  उमेश जोगा सहित अन्य विभागीय वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। 

“लखपति से करोड़पति दीदी” बनने का मुख्यमंत्री ने दिया मंत्र, महिलाओं को उद्यम विस्तार के लिए किया प्रेरित

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज ग्राम रामपुर में सुशासन तिहार के अंतर्गत आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में विभिन्न शासकीय योजनाओं के हितग्राहियों से आत्मीय संवाद कर उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलावों को करीब से जाना। मुख्यमंत्री ने महिलाओं, किसानों और ग्रामीण परिवारों से योजनाओं के लाभ, आयवृद्धि, आजीविका और जीवनस्तर में आए सुधारों की जानकारी लेते हुए कहा कि जब शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचता है, तभी सुशासन की वास्तविक सार्थकता सिद्ध होती है। संवाद के दौरान मुख्यमंत्री  साय ने साधना महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ी मती जागेश्वरी प्रजापति से उनके समूह द्वारा तैयार किए जा रहे आलू चिप्स के व्यवसाय की जानकारी ली। मती जागेश्वरी ने बताया कि समूह अब तक आलू चिप्स की बिक्री से लगभग 1 लाख 85 हजार रुपये की आय अर्जित कर चुका है। यह सुनकर मुख्यमंत्री ने सहज मुस्कान के साथ कहा, “आलू चिप्स का नाम सुनकर ही मुंह में पानी आ रहा है।” मुख्यमंत्री की इस आत्मीय टिप्पणी से शिविर स्थल पर हर्ष और आत्मीयता का वातावरण बन गया।  मुख्यमंत्री ने समूह की महिलाओं की मेहनत और उद्यमशीलता की सराहना करते हुए उन्हें अपने उत्पादों का विस्तार करने, बेहतर पैकेजिंग और बाज़ार से जुड़कर आय बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री ने इस दौरान महिलाओं से “लखपति दीदी योजना” की प्रगति पर चर्चा करते हुए कहा कि प्रदेश में अब तक 8 लाख से अधिक महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं तथा सरकार का लक्ष्य 10 लाख लखपति दीदियां तैयार करना है। उन्होंने महिलाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि अब समय केवल लखपति बनने का नहीं, बल्कि आगे बढ़कर “करोड़पति दीदी” बनने का है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक रूप से सशक्त महिलाएं परिवार, समाज और राज्य के विकास की सबसे मजबूत आधारशिला होती हैं।शिविर में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही  प्राण साय प्रजापति से भी आत्मीय चर्चा की। हितग्राही ने बताया कि योजना के माध्यम से उनके परिवार का पक्के मकान का सपना पूरा हुआ है। मुख्यमंत्री ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हर गरीब परिवार को सम्मानपूर्वक पक्की छत उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इस दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। सुशासन तिहार की सार्थकता उस समय और स्पष्ट दिखी जब ग्राम चंद्रपुर निवासी मती प्रिया सिंह ने मुख्यमंत्री को बताया कि उन्होंने शिविर में राशन कार्ड के लिए आवेदन दिया था और उसी दिन उनका आवेदन निराकृत कर राशन कार्ड उपलब्ध करा दिया गया। मुख्यमंत्री ने इसे प्रशासन की तत्परता और संवेदनशीलता का उदाहरण बताते हुए संबंधित अधिकारियों की सराहना की तथा कहा कि सुशासन तिहार का मूल उद्देश्य ही आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित, सरल और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है, ताकि लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और सरकार स्वयं उनके द्वार तक पहुँचे। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के एक लाभार्थी से भी संवाद किया, जिन्होंने बताया कि वे प्राप्त राशि का उपयोग सब्जी उत्पादन में कर रहे हैं, जिससे उनकी आय और आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। मुख्यमंत्री ने उनकी पहल की सराहना करते हुए उन्हें प्रधानमंत्री कुसुम योजना के अंतर्गत सोलर पंप लगाने के लिए प्रेरित किया, ताकि सिंचाई लागत कम हो, खेती अधिक लाभकारी बने और किसानों को बिजली खर्च से राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा और नवाचार आधारित खेती ही किसानों की आय वृद्धि का मजबूत आधार बनेगी। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने हितग्राहियों के अनुभव सुनने के बाद प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि योजनाओं का वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देता है जब उसका लाभ पात्र व्यक्ति तक पहुँचकर उसके जीवन में बदलाव लाए। उन्होंने ग्रामीणों से आह्वान किया कि वे शासन की योजनाओं की जानकारी लेकर उनका अधिकाधिक लाभ उठाएं और आत्मनिर्भर, समृद्ध तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहभागी बनें।

नीति आयोग समर्थित ‘मिशन कामयाबी’ के तहत वर्चुअल रियलिटी और आधुनिक तकनीक से होगा शिक्षण

रायपु मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने सुशासन तिहार के अंतर्गत कोरिया जिले के सोनहत विकासखंड के ग्राम कुशहा में आयोजित चौपाल के दौरान नीति आयोग द्वारा वित्तपोषित ‘मिशन कामयाबी’ के तहत संचालित ‘कामयाबी वेन’ को हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया। इस पहल के माध्यम से दूरस्थ एवं ग्रामीण अंचलों के विद्यार्थियों तक आधुनिक डिजिटल शिक्षा और तकनीकी आधारित सीखने के अवसर पहुंचाए जाएंगे, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता और सीखने के अनुभव में सकारात्मक बदलाव आएगा। मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर कहा कि प्रदेश सरकार का प्रयास है कि गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधुनिक तकनीक का समान अवसर मिले। उन्होंने कहा कि आज का दौर ज्ञान, नवाचार और तकनीक का है, ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी डिजिटल संसाधनों और नई शिक्षण पद्धतियों से जोड़ना आवश्यक है, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें। उल्लेखनीय है कि ‘कामयाबी वेन’ के माध्यम से विद्यार्थियों को वर्चुअल रियलिटी (VR) एवं ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) तकनीक आधारित शिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। यह वेन विज्ञान, गणित, तकनीकी अवधारणाओं और अन्य विषयों को अधिक रोचक, अनुभवात्मक और व्यवहारिक तरीके से समझाने में सहायक होगी। इससे विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता, तकनीकी जागरूकता तथा बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों में सुधार आने की संभावना है। मुख्यमंत्री  साय  ने विश्वास व्यक्त किया कि यह अभिनव पहल दूरस्थ गांवों के विद्यार्थियों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगी तथा उन्हें विज्ञान, डिजिटल तकनीक और आधुनिक शिक्षा से सरल एवं प्रभावी ढंग से जोड़ने का माध्यम बनेगी। इस अवसर पर विधायक  भैया लाल राजवाड़े, स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध सिंह, विशेष सचिव  रजत बंसल, कलेक्टर मती रोक्तिमा यादव, पुलिस अधीक्षक  रवि कुमार कुर्रे सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को इन्वेस्ट यूपी से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा की

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को इन्वेस्ट यूपी के अधिकारियों संग बैठक की। इस दौरान उन्होंने ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी 5.0) की विस्तृत समीक्षा की। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री जी को बताया कि 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतरने को तैयार हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जीबीसी 5.0 के अंतर्गत हर जनपद में निवेश हो, इसका विशेष रूप से ध्यान रखा जाए। उन्होंने जनपदों की पर कैपिटा  इनकम बढ़ाने पर जोर दिया और कहा कि इसके लिए मैन्युफेक्चरिंग पावर को बढ़ावा देना आवश्यक है। इस अवसर पर इन्वेस्ट यूपी के अधिकारियों ने विगत दिनों लीड्स 2025 रैंकिंग में उत्तर प्रदेश को मिले एग्जेम्प्लर अवार्ड को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को समर्पित किया। अधिकारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश लॉजिस्टिक्स एवं इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री ने इस पुरस्कार के लिए इन्वेस्ट यूपी के अधिकारियों को बधाई दी।  मुख्यमंत्री के समक्ष जीबीसी के दौरान पूरे आयोजन का विस्तार से ब्योरा प्रस्तुत किया गया। इसमें स्टेज डिजाइन से लेकर पाथवे, एग्जीबिशन लेआउट को भी प्रस्तुत किया गया। एग्जीबिशन को 8 जोन में विभाजित किया गया है। पहला जोन- व्हाई यूपी है, जिसमें उत्तर प्रदेश के बदले परिदृश्य को विस्तार से दिखाया जाएगा। जोन 2 में इंफ्रास्ट्रक्चरल ट्रांसफॉर्मेशन, जोन 3 में डिफेंस व एयरोस्पेस, जोन 4 में ईवी एवं ग्रीन एनर्जी सस्टेनिबिलिटी, जोन-5 में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफेक्चरिंग, जोन-6 में टेक्सटाइल्स, जोन-7 में टूरिज्म तथा जोन-8 में फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में यूपी में आए सार्थक बदलाव को विस्तार से प्रदर्शित किया जाएगा।  मुख्यमंत्री जी ने कहा कि डिफेंस कॉरिडोर में भूमि की मांग तेजी से बढ़ी है। इसके सापेक्ष हमें भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर देना होगा। इसके अलावा उन प्रोजेक्ट्स में, जहां वर्षों पूर्व भूमि आवंटित की गई, लेकिन अब तक निवेश नहीं हुआ है। ऐसे प्रोजेक्ट्स के बारे में भी अद्यतन जानकारी हासिल की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज के समय में सबसे महत्वपूर्ण विषय एफडीआई को आमंत्रित करना है। इसके लिए व्यापक स्तर पर प्रयास करने होंगे। इसके साथ ही पब्लिक से जुड़े मुद्दे हमारी प्राथमिकता में होने चाहिए।  मुख्यमंत्री ने कहा कि एमओयू करते समय संस्थानों की पूरी पड़ताल/जानकारी अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए। निवेशकों से जितना अच्छा व्यवहार होगा, समय से उनकी समस्याओं का निस्तारण करेंगे तो वह प्रदेश के लिए ब्रांड अंबेस्डर की तरह कार्य करेंगे। मुख्यमंत्री जी ने लैंडबैंक बढ़ाने पर जोर दिया। इनवेस्टमेंट पर दिए जाने वाले इंसेंटिव्स को इवेंट बनाकर निवेशकों का सम्मान करें और उनका मनोबल बढ़ाएं।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब पारंपरिक औद्योगिक राज्य की छवि से आगे बढ़कर रक्षा निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन एनर्जी, डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग का उभरता हुआ राष्ट्रीय हब बन रहा है।  मुख्यमंत्री के समक्ष उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के अंतर्गत होने वाले उत्तर प्रदेश रक्षा व एफडीआई कॉन्क्लेव 2026 का प्रस्तुतिकरण भी किया गया। बताया गया कि “उत्तर प्रदेश रक्षा और एफडीआई कॉन्क्लेव 2026” प्रदेश की नई औद्योगिक रणनीति का बड़ा मंच साबित होगा, जिसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (यूपीडीआईसी) में रक्षा एवं एयरोस्पेस उद्योगों को आकर्षित करना, वैश्विक निवेशकों को जोड़ना और उद्योग, सरकार तथा रक्षा संस्थानों के बीच समन्वित इकोसिस्टम विकसित करना है।  कॉन्क्लेव लखनऊ में आयोजित किए जाने का प्रस्ताव है, जिसमें रक्षा मंत्रालय, डीपीएसयू, वैश्विक OEMs, रक्षा विशेषज्ञ, MSMEs और स्टार्टअप्स को एक मंच पर लाया जाएगा। एजेंडा में उत्तर प्रदेश की रक्षा विनिर्माण क्षमता, एयरोस्पेस निवेश, रोजगार प्रोत्साहन नीति 2024, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और डीपीएसयू की भूमिका जैसे विषयों पर विस्तृत पैनल चर्चाएं प्रस्तावित हैं। मुख्यमंत्री जी और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के संबोधन के साथ बी2जी और बी 2बी इंटरैक्शन भी आयोजित किए जाने की योजना है।   कॉन्क्लेव के अपेक्षित परिणामों में निवेश समझौते (एमओयू), कॉरिडोर विस्तार का रोडमैप, टेस्टिंग एवं सर्टिफिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, उद्योग-सरकार साझेदारी और निवेशकों को स्पष्ट पॉलिसी सपोर्ट शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य केवल निवेश आकर्षित करना नहीं बल्कि यूपी में एक दीर्घकालिक डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तैयार करना है।  प्रस्तुतिकरण में उत्तर प्रदेश की रणनीतिक ताकतों को विस्तार से रेखांकित किया गया है। इसमें बेहतर कनेक्टिविटी, औद्योगिक भूमि की उपलब्धता, कुशल कार्यबल, सिंगल विंडो क्लीयरेंस, अनुसंधान एवं विकास सहयोग और मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को प्रमुख आधार बताया गया। साथ ही डीआरडीओ, एचएएल, बीईएल, बोइंग, एयरबस, टाटा, अदाणी जैसी संस्थाओं और कंपनियों की संभावित भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा गया कि यूपी अब रक्षा और एयरोस्पेस निर्माण के लिए तेजी से पसंदीदा गंतव्य बन रहा है। बैठक में मुख्यमंत्री को इन्वेस्ट यूपी की विभिन्न डेस्क के कामकाज से भी अवगत कराया गया। बताया गया कि इलेक्ट्रॉनिक्स डेस्क उत्तर प्रदेश के सबसे प्रभावी निवेश क्षेत्रों में शामिल है। इस डेस्क के अंतर्गत 8,050 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश आवेदन प्राप्त हुए हैं। ऑटोमोबाइल डेस्क में 722 करोड़ रुपये के निवेश आवेदन प्राप्त होने की जानकारी दी गई है। जीसीसी डेस्क के अंतर्गत लगभग 2,487 करोड़, स्टील एंड सीमेंट डेस्क में लगभग 12,232 करोड़, टेक्सटाइल्स डेस्क में लगभग 1,321 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।  बैठक में कंट्री डेस्क के कामकाज की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री को बताया गया कि जापान से लगभग 50 हजार करोड़ रुपये, सिंगापुर से 40 हजार करोड़ रुपये, जर्मनी और यूके से 5 हजार करोड़ रुपये, ताइवान से 3 हजार करोड़ रुपये, यूएई से 2,074 करोड़ रुपये और दक्षिण कोरिया से 1,600 करोड़ रुपये के संभावित निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। बताया गया कि सिंगापुर और जापान बिजनेस मिशन ट्रिप भी अगस्त में प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री ने इन मिशन ट्रिप्स को अच्छे तरीके से संपन्न करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का उद्देश्य इन मिशन ट्रिप्स के जरिए उत्तर प्रदेश को एशिया के बड़े विनिर्माण और टेक्नोलॉजी निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

सेमीकंडक्टर से टेक्नोलॉजी तक, प्रधानमंत्री मोदी के दौरे ने खोले विकास के नए रास्ते

नई दिल्ली  दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच इस समय भारत सिर्फ एक बाजार नहीं बल्कि एक भरोसेमंद ताकत बनकर उभर रहा है. यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया पांच देशों की यात्रा अब सिर्फ कूटनीतिक दौरा नहीं मानी गई, इसे भारत के आर्थिक भविष्य की बड़ी जीत के तौर पर देखा गया है. विदेशों में अक्सर भारत की राजनीतिक बहस चर्चा में रहती है, लेकिन इस बार तस्वीर अलग थी. दुनिया की दिग्गज कंपनियों के सीईओ भारत में निवेश बढ़ाने की बात कर रहे थे. सेमीकंडक्टर से लेकर लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी तक, हर सेक्टर में भारत को लेकर उत्साह दिखाई दिया. करीब ₹3.5 लाख करोड़ के निवेश और विस्तार योजनाओं ने यह संकेत दिया कि वैश्विक कंपनियां अब चीन प्लस वन रणनीति में भारत को सबसे मजबूत विकल्प मान रही हैं. यही कारण है कि इस दौरे को भारत की आर्थिक कूटनीति का बड़ा मास्टरस्ट्रोक कहा जा रहा है।  पीएम मोदी की इस यात्रा के दौरान 50 से ज्यादा वैश्विक कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक हुई. इन कंपनियों की कुल वैल्यू लगभग 2.7 से 3 ट्रिलियन डॉलर बताई जा रही है. इनमें से कई कंपनियां पहले से भारत में काम कर रही हैं, लेकिन अब वे अपने कारोबार का दायरा बढ़ाना चाहती हैं. अधिकारियों के मुताबिक, भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, बढ़ती खपत और स्थिर नीतियां विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं. संयुक्त अरब अमीरात ने अकेले करीब 5 अरब डॉलर यानी लगभग ₹45 हजार करोड़ के नए निवेश की घोषणा की. सरकार इसे भारत की मजबूत ग्लोबल इमेज और निवेशकों के भरोसे का बड़ा संकेत मान रही है. विपक्ष जहां सरकार पर सवाल उठाता रहा है, वहीं इस निवेश ने यह संदेश दिया कि वैश्विक मंच पर भारत की आर्थिक पकड़ लगातार मजबूत हो रही है।  किन सेक्टर्स में आएंगे सबसे ज्यादा पैसे प्रधानमंत्री मोदी की पांच देशों की यात्रा के दौरान जिन कंपनियों से बातचीत हुई, उनमें टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी और सेमीकंडक्टर सेक्टर की कई बड़ी कंपनियां शामिल थीं. अधिकारियों का कहना है कि इन कंपनियों का भारत में पहले से करीब 180 अरब डॉलर का निवेश और कारोबारी एक्सपोजर है. अब वे नए प्रोजेक्ट्स और एक्सपेंशन प्लान पर तेजी से काम करना चाहती हैं. इससे आने वाले वर्षों में लाखों रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।  इस दौरे का सबसे बड़ा संदेश यह रहा कि दुनिया की बड़ी कंपनियां भारत को सिर्फ एक उपभोक्ता बाजार नहीं बल्कि मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन हब के रूप में देख रही हैं. चीन और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव के बाद कई कंपनियां अपनी सप्लाई चेन भारत में शिफ्ट करना चाहती हैं. यही वजह है कि पीएम मोदी की बैठकों में “मेक इन इंडिया” और “डिजिटल इंडिया” जैसे अभियानों को काफी समर्थन मिला।  UAE ने सबसे बड़ा दांव क्यों लगाया? संयुक्त अरब अमीरात ने भारत में करीब 5 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान किया है. यह निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर, बंदरगाह, ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में किया जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और UAE के बीच तेजी से मजबूत होते व्यापारिक रिश्तों का यह बड़ा असर है. दोनों देशों के बीच CEPA समझौते के बाद व्यापार और निवेश में लगातार बढ़ोतरी हुई है।  किन सेक्टर्स को होगा सबसे ज्यादा फायदा? सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, सेमीकंडक्टर, एआई, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर ऐसे सेक्टर हैं जहां सबसे ज्यादा निवेश आने की संभावना है. भारत सरकार इन सेक्टर्स में पहले ही कई प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है. विदेशी कंपनियां अब भारत को लंबे समय के निवेश केंद्र के रूप में देख रही हैं।  भारत की अर्थव्यवस्था के लिए कितना बड़ा संकेत? करीब ₹3.5 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों को भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. इससे न केवल रोजगार बढ़ेंगे बल्कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में भी इजाफा होगा. सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है।  क्या विपक्ष के सवालों का जवाब है यह दौरा? प्रधानमंत्री मोदी के विदेश दौरों को लेकर अक्सर विपक्ष सवाल उठाता रहा है. लेकिन इस बार निवेश और व्यापारिक समझौतों ने सरकार को मजबूत राजनीतिक संदेश देने का मौका दिया है. भाजपा इसे भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत और मोदी की व्यक्तिगत कूटनीतिक क्षमता का प्रमाण बता रही है।  पीएम मोदी की इस यात्रा से भारत को कितना निवेश मिला? प्रधानमंत्री मोदी की पांच देशों की यात्रा के दौरान करीब ₹3.5 लाख करोड़ यानी लगभग 40 अरब डॉलर के निवेश और कारोबारी विस्तार योजनाओं पर चर्चा हुई. इनमें कई बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं. UAE ने अकेले 5 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है. यह निवेश भारत के कई रणनीतिक सेक्टर्स में होगा।  किन सेक्टर्स में सबसे ज्यादा निवेश आने की उम्मीद है? सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी, लॉजिस्टिक्स, टेक्नोलॉजी, एआई और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में सबसे बड़े निवेश होंगे. भारत सरकार पहले से इन क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ाने और विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए नीतियां चला रही है. इससे रोजगार और उत्पादन दोनों बढ़ सकते हैं।  क्या यह निवेश भारत की अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा देगा? विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े निवेश से भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ेगी, नई टेक्नोलॉजी आएगी और लाखों रोजगार पैदा होंगे. साथ ही भारत की वैश्विक सप्लाई चेन में हिस्सेदारी मजबूत होगी. इससे भारत की आर्थिक वृद्धि को लंबी अवधि में बड़ा फायदा मिल सकता है।