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सीएम डॉ. यादव की अपील- मानसून सक्रिय रहने तक रहें बेहद सावधान, सुरक्षा को दें प्राथमिकता

मानसून सक्रिय रहने तक रहें बेहद सावधान – मुख्यमंत्री डॉ. यादव राहत एवं बचाव कार्यों में कोई कमी न रहें बाढ़ प्रभावितों को तत्काल दें खाना, कपड़ा और जरूरत का सूखा सामान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्टेट कमांड सेन्टर पहुंचकर वर्षाजनित परिस्थितियों की ली जानकारी राहत एवं बचाव कार्यों का लाइव निरीक्षण किया बीते एक माह में 2783 लोगों का किया गया है रेस्क्यू भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में अतिवृष्टि की वजह से कुछ क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई है। ऐसे में हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता नागरिकों की सुरक्षा है। कठिनाई की इस घड़ी में शासन, प्रशासन, तहसील का हर अधिकारी और कर्मचारी पूरी संवेदनशीलता, तत्परता और समन्वय के साथ राहत और बचाव कार्यों में सहयोग करें। किसी भी नागरिक को संकट में अकेला न छोड़ें। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, होमगार्ड, फील्ड अधिकारी, राहत एवं बचाव कार्य में जुटी एजेंसीज प्रदेश में मानसून सक्रिय रहने तक बेहद सजग रहें, सर्तक रहें, सावधान रहें और किसी भी परिस्थिति को हैंडल करने के लिए तैयार रहें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार को होमगार्ड कार्यालय के एसडीआरएफ स्टेट कमांड सेन्टर पहुंचकर प्रदेश के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों के साथ वीडियो कान्फ्रेंसिंग से बात की और सभी से उनके जिलों में वर्षा की स्थिति की जानकारी लेकर समीक्षा बैठक भी की। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कहीं बाढ़ का पानी घरों तक आ गया है तो प्रभावितों को तत्काल राहत शिविरों में पहुंचायें और सभी प्रभावितों को तत्काल खाना, कपड़ा और जरूरत का सूखा सामान उपलब्ध कराएं। साथ ही इन्हें शासन की ओर से नियमानुसार राहत राशि भी दिलायें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीसी के जरिए ही प्रदेश के कुछ जिलों में बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए चलायें जा रहे रेस्क्यू का लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने पन्ना, गुना, रीवा, सतना और पूर्वी मध्यप्रदेश के जिलों में अतिवृष्टि के कारण उपजी परिस्थतियों पर सीधे पुलिस अधीक्षकों, होमगार्ड और बचाव दल के अधिकारियों से बात की। बताया गया कि पन्ना की किलकिला नदी में आई बाढ़ के कारण यहां स्टेट डिसेस्टर इमरजेंसी रिस्पांस फोर्स (एसडीईआरएफ) द्वारा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। बैठक में मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव गृह विभाग संजय कुमार शुक्ल, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, एडीजी होमगार्ड सुप्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव, एडीजी इंटेलीजेंस अंशुमन यादव, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. सुदाम खाड़े, एसडीईआरएफ के स्टेट हेड सहित सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न जिलों में बारिश से उत्पन्न परिस्थितियों, प्रभावित क्षेत्रों में संचालित राहत एवं बचाव कार्यों तथा प्रशासन की तैयारियों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने रेस्क्यू ऑपरेशन और संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात टीमों की स्थिति की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और प्रशासनिक अमला पूरी मुस्तैदी के साथ कार्य करे तथा आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित लोगों तक तत्काल राहत एवं बचाव पहुंचाया जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रदेशवासियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आपदा प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाओं की निरंतर मॉनिटरिंग, विभागों के बीच बेहतर समन्वय और किसी भी आकस्मिक परिस्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा जिलों के अधिकारियों को वीसी से निर्देश देने के उपरांत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा में कहा कि प्रदेश में कमोबेश पूरे क्षेत्र में बारिश का दौर बना हुआ है। पश्चिमी मध्यप्रदेश को छोड़कर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश हुई है। इसके मद्देनजर एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें पूरी मुस्तैदी के साथ विभिन्न स्थानों पर तैनात हैं। बीते एक माह में आपदा प्रबंधन टीमों की मदद से 2,783 से अधिक लोगों का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर लिया गया है। फिलहाल अगले दो-चार दिनों में किसी बड़ी चुनौती की स्थिति नहीं है, लेकिन अचानक बाढ़ जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पहले से सुनिश्चित की गई हैं। हमारी इन्हीं तैयारियों का ही परिणाम है कि अब तक प्रदेश में जान-माल की कोई विशेष हानि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि हमारे पुलिस बल एवं राहत दलों ने भी पूरी दक्षता और मुस्तैदी के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया है। आगामी दिनों में बारिश की आशंका को देखते हुए हम लगातार सतर्क हैं और व्यवस्थाओं पर भी नजर बनाए हुए हैं। इसी क्रम में आज प्रदेश में बाढ़ आपदा प्रबंधन से संबंधित तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की है, ताकि किसी भी आकस्मिक परिस्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए प्रदेशवासियों के जान-माल-मवेशियों की सुरक्षा कायम रखी जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने सबसे संवाद कर अपनी तैयारियों को और बेहतर कर लिया है।  

Zee के संस्थापक सुभाष चंद्रा पर CBI ने दर्ज किया केस, LIC Housing Finance से जुड़ा ₹1,322 करोड़ का मामला

नई दिल्ली  एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा की मुश्किलें एक बार फिर से बढ़ गई हैं। सीबीआई ने सुभाष चंद्रा और अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, CBI ने इस मामले में सुभाष चंद्रा के अलावा पंकज सुरोलिया, अमीश पांड्या और राजीव ढोलकिया को आरोपी बताते हुए केस दर्ज किया है। LICHFL ने लगाया ये आरोप उनके ऊपर 2018 से 2026 के बीच LIC हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के साथ 1,322 करोड़ रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी के आरोप हैं। LICHFL का दावा है कि 2018 में क्रेडिट फैसलिटीज लेते वक्त सुभाष चंद्रा की नेटवर्थ 59113 करोड़ रुपये की नेटवर्थ का सर्टिफिकेट दिया था, लेकिन उन्होंने 2024 में अपनी नेटवर्थ महज 31.79 करोड़ रुपये बताई थी। मीडिया कारोबारी सुभाष चंद्रा को लोन माफी से जुड़े विवाद के बाद एक और बड़ा झटका लगा है। दरअसल, जांच एजेंसी CBI ने एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा और अन्य लोगों के खिलाफ फ्रॉड का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि उन्होंने 2018 से 2026 के बीच LIC हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (LICHFL) के साथ ₹1322 करोड़ की धोखाधड़ी की। LICHFL का दावा है कि 2018 में क्रेडिट फैसलिटीज लेते समय सुभाष चंद्रा ने ₹59113 करोड़ का नेटवर्थ सर्टिफिकेट पेश किया था लेकिन 2024 में उन्होंने अपनी नेटवर्थ सिर्फ ₹31.79 करोड़ बताई। NCALT ने दिया है झटका एस्सेल समूह के चेयरमैन सुभाष चंद्रा के खिलाफ यह मामला ऐसे समय में दर्ज हुआ है जब राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCALT) ने व्यक्तिगत दिवाला मामले में एनसीएलटी के आदेश पर रोक लगा दी है। NCALT ने सुभाष चंद्रा को अपनी संपत्तियां बेचने या हस्तांतरित करने से रोक दिया। साथ ही उन्हें समूह की कंपनियों के कर्ज के लिए दी गई व्यक्तिगत गारंटी से जुड़े करीब 22,006 करोड़ रुपये के दावों का लगभग 6.5 करोड़ रुपये में निपटान करने की अनुमति देने वाले आदेश पर भी रोक लगा दी थी। NCALT के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अनूपिंदर सिंह ग्रेवाल की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय विशेष पीठ ने कहा कि री-पेमेंट योजना पर स्पष्ट बहुमत नहीं बना और इसलिए आदेश को प्रभावी नहीं किया जा सकता। क्या है विवाद? विवाद एक ऐसी री-पेमेंट योजना को लेकर है, जिसके तहत सुभाष चंद्रा को अपने समूह की कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज के लिए दी गई व्यक्तिगत गारंटी से जुड़े दावों का महज 6.5 करोड़ रुपये में सैटल करने की अनुमति दी गई थी। यह उनकी कंपनियों द्वारा चूक किए गए 22,006 करोड़ रुपये के मुकाबले 99.9 प्रतिशत की कटौती है। दस बैंकों और कर्जदाताओं ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था। एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस का विरोध हालांकि, एचडीएफसी बैंक, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस और केनरा बैंक समेत असहमत कर्जदाताओं ने इसका विरोध किया था। उनका कहना था कि इससे होने वाली वसूली बहुत कम होगी। असहमत कर्जदाताओं के पास 20 प्रतिशत से कम मताधिकार था। वहीं, सुभाष चंद्रा ने कहा है कि व्यापक रूप से बताई जा रही 22,006 करोड़ रुपये की राशि वह रकम नहीं है, जो उन्होंने व्यक्तिगत रूप से उधार ली थी। इसमें एस्सेल समूह की कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज के लिए उनके द्वारा दी गई गारंटी से जुड़े दावे शामिल हैं। उन्होंने व्यक्तिगत गारंटी से जुड़े दावों की राशि करीब 3,990 करोड़ रुपये बताई है और कहा है कि बड़ी राशि मूल रूप से कर्ज लेने वाली कंपनियों के खिलाफ दावों से संबंधित है। कितने करोड़ रुपये का था लोन? शिकायत के मुताबिक, LICHFL ने दो अलग-अलग लोन सुविधाओं के तहत कुल 980 करोड़ रुपये का मूल लोन मंजूर किया था। ब्याज और दूसरे शुल्क जुड़ने के बाद ये रकम बढ़कर करीब 1,322 करोड़ रुपये हो गई।  संपत्ति जांच की मांग हालांकि, असहमत कर्जदाताओं ने चंद्रा की घोषित कुल संपत्ति की और जांच की मांग की है। उनका कहना है कि गारंटी देने के लिए उनकी संपत्ति का विवरण एक प्रमुख आधार था। कर्जदाताओं के अनुसार, प्रमाणित आंकड़ों में 2018 में उनकी कुल संपत्ति करीब 40,600 करोड़ रुपये और 2017 में 45,900 करोड़ रुपये थी जबकि 2024 तक यह राशि काफी घट गई थी। कौन हैं सुभाष चंद्रा? सुभाष चंद्रा कभी भारत के प्रमुख कारोबारी चेहरों में शामिल थे। उन्होंने टेलीविजन, पैकेजिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और डायरेक्ट-टू-होम टेलीविजन सहित अलग-अलग क्षेत्रों में कारोबार खड़ा किया। वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के समर्थन से राज्यसभा सदस्य भी निर्वाचित हुए थे।

ईरान के खर्ग द्वीप के पास टैंकर पर हमला, अमेरिकी मिसाइल हमले से मची हलचल

तेहरान  अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम की ओर जा रहा है। इसी बीच ईरानी मीडिया ने खर्ग द्वीप पर बड़े हमले का दावा किया है। जानकारी के मुताबिक खर्ग द्वीप के पास जोरदार धमाके सुने गए हैं। ये धमाके वहीं हुए हैं जहां तेल का मुख्य हब है। एसएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक खर्ग द्वीप के पास ही ईरान के टैंकर को निशाना बनाया गया है। अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि अमेरिका ने ईरान के टैंकर को ही निशाना बनाया है या फिर खर्ग द्वीप पर भी तबाही मचाई है। बीते दिनों अमेरिका ने एआई वीडियो जारी करते हुए दावा किया था कि खर्ग द्वीप को तबाह करके टुकड़े-टुकड़े कर दिया गया है। हालांकि ईरान ने अमेरिका के इस दावे को खारिज कर दिया था। अमेरिका बोला- यह युद्ध नहीं है अमेरिका एक तरफ युद्ध की आग भड़काता ही जा रहा है और दूसरी तरफ दावा कर रहा है कि यह युद्ध नहीं है। वेंस से अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय 'व्हाइट हाउस' में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान पूछा गया कि क्या तीन नवंबर को होने वाले संसदीय चुनाव से पहले युद्ध समाप्त हो सकता है जिसके जवाब में उन्होंने कहा, ''मैं इसे युद्ध नहीं कहूंगा। फिलहाल सक्रिय गोलीबारी नहीं हो रही है।'' ट्रंप इसे बता रहे मामूली बात राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संघर्ष को ''मामूली बात'' करार दिया और देश के उपराष्ट्रपति जे डी वेंस के इस बयान से सहमति जताई कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को ''युद्ध'' नहीं कहा जा सकता। ट्रंप ने 'ओवल ऑफिस' (अमेरिका के राष्ट्रपति का आधिकारिक कार्यालय) में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान वेंस की एक दिन पहले की टिप्पणियों के बारे में सवाल किए जाने पर कहा कि ईरान पर अमेरिकी हमले अब ''रुक-रुककर'' हो रहे हैं। उन्होंने इस संघर्ष की गंभीरता को कम दिखाने की कोशिश की जबकि इस युद्ध पर अमेरिकी करदाताओं के 37.5 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक खर्च हो चुके हैं और अमेरिका के 18 सैन्यकर्मियों की मौत हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए एक अहम रास्ता बना हुआ है। क्षेत्रीय तनाव के बीच इससे होकर होने वाली जहाजों की आवाजाही में काफी कमी आई है। हाल के दिनों में यहाँ से गुज़रने वाले जहाजों की संख्या बहुत कम हो गई है। बड़े तेल टैंकर और गैस कैरियर लगभग इस रास्ते का इस्तेमाल करना बंद कर चुके हैं। तनाव बढ़ने से पहले, दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल और तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की खेप इसी जलडमरूमध्य से होकर गुज़रती थी।

असीम मुनीर को मिली सबसे बड़ी सैन्य शक्ति, पाकिस्तान में सेना, नौसेना और वायुसेना की कमान एक हाथ में

इस्लामाबाद पाकिस्तान की संसद ने देश के सैन्य कमान ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए पहली बार एक ही अधिकारी को सेना, नौसेना और वायुसेना- तीनों की कमान सौंपने का कानूनी अधिकार दिया है। नेशनल असेंबली ने अगस्त के अंत में पाकिस्तान के रक्षा बल अधिनियम, 2026 को मंजूरी दी थी। इसके तहत चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDF) का नया पद बनाया गया है। फील्ड मार्शल असीम मुनीर पाकिस्तान के पहले चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज बने हैं। वह इस पद के साथ-साथ सेना प्रमुख की जिम्मेदारी भी संभालते रहेंगे। यह बदलाव 1976 के बाद पाकिस्तान के सैन्य कमान ढांचे में सबसे बड़ा पुनर्गठन माना जा रहा है। इससे पहले किसी एक अधिकारी को तीनों सेनाओं पर इस तरह का औपचारिक कानूनी अधिकार नहीं मिला था। क्या बदला है पाकिस्तान की सैन्य कमान व्यवस्था में? अब तक तीनों सेनाओं के बीच तालमेल के लिए जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमिटी के चेयरमैन का पद था। यह पद 1976 में बनाया गया था, लेकिन इसके पास नौसेना या वायुसेना को सीधे कमांड करने का कानूनी अधिकार नहीं था। नए CDF पद में यह स्थिति बदल गई है। इसके तहत:     CDF को तीनों सेनाओं पर ऑपरेशनल कमान हासिल होगी।     वह सीधे संघीय सरकार को रिपोर्ट करेगा।     उसे ऐसे फैसलों को लागू कराने का अधिकार होगा, जिन्हें पुरानी व्यवस्था में लागू कराने की शक्ति नहीं थी।     असीम मुनीर सेना प्रमुख के पद पर रहते हुए CDF की जिम्मेदारी भी संभालेंगे। रावलपिंडी स्थित एक सेवानिवृत्त थ्री-स्टार जनरल ने अल जजीरा से कहा कि नए कानून ने प्रधानमंत्री से लेकर जमीन पर तैनात सैन्य इकाइयों तक कमान की एक स्पष्ट और लिखित श्रृंखला तैयार कर दी है। सेवानिवृत्त जनरल नईम खालिद लोधी के मुताबिक, CDF अब एक वास्तविक कमांडर है, जबकि पुराना पद मुख्य रूप से समन्वय तक सीमित था। क्या इससे सेना और ताकतवर हो गई? नए कानून को लेकर विश्लेषकों की राय एक जैसी नहीं है। कानून के मुताबिक, परमाणु बलों की कमान का पद अब सेना से ही आएगा। विश्लेषक माजिद निजामी के अनुसार, इससे औपचारिक रूप से वह संभावना खत्म हो गई है कि यह जिम्मेदारी पहले की तरह नौसेना या वायुसेना के किसी अधिकारी के पास भी जा सकती थी। रावलपिंडी के एक सेवानिवृत्त थ्री-स्टार जनरल ने नई व्यवस्था को स्पष्ट रूप से सेना-केंद्रित बताया। वहीं, रणनीतिक योजना से जुड़े रहे एक पूर्व अधिकारी ने आशंका जताई कि नौसेना और वायुसेना में करियर से जुड़े फैसले अब सेना के नेतृत्व वाली कमान व्यवस्था के जरिए होंगे। हालांकि, सेवानिवृत्त जनरल नईम खालिद लोधी ने इस बदलाव को अलग नजरिए से देखा। उनके अनुसार, CDF के पास अब फैसलों को लागू कराने की वास्तविक शक्ति है, जो पुराने समन्वयकारी पद के पास नहीं थी। क्या नागरिक सरकार की निगरानी कमजोर होगी? नए कानून के बाद नागरिक निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। वकील और पूर्व अधिकारी कर्नल इनाम रहीम के मुताबिक, अब CDF सिर्फ एक पत्र के जरिए अधिकारियों को बर्खास्त कर सकता है। इसके लिए पहले जिस कैबिनेट सारांश की जरूरत होती थी, वह अब जरूरी नहीं है। कराची के वकील अब्दुल मोइज जाफरी ने तर्क दिया कि कानून ने औपचारिक रूप से बराबर माने जाने वाले एक सर्विस चीफ को दूसरे के अधीन कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान में इस सवाल की स्वतंत्र रूप से जांच करने के लिए पर्याप्त स्वतंत्र अदालत नहीं है। हालांकि, हर कोई इस कानून को जरूरत से ज्यादा ताकत देने वाला नहीं मानता। सुप्रीम कोर्ट के वकील हाफिज अहसान अहमद खोखर ने इसकी तुलना ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के समान कानूनों से की। हालांकि इन देशों में संबंधित पद तीनों सेनाओं के बीच बदलता रहता है, जबकि पाकिस्तान में यह पद सेना प्रमुख के पास ही रहेगा। पाकिस्तान सरकार ने बताए बदलाव के तीन मकसद पाकिस्तान के मुताबिक, सैन्य कमान में यह पुनर्गठन तीन प्रमुख उद्देश्यों को ध्यान में रखकर किया गया है। पहला- जमीन, हवा, समुद्र, साइबर और ड्रोन अभियानों के बीच बेहतर तालमेल। दूसरा, पुरानी व्यवस्था को खत्म करना, जिसमें तीनों सेनाएं बड़े स्तर पर अलग-अलग तरीके से काम करती थीं। तीसरा- संकट के समय तेजी से फैसले लेना, क्योंकि अब एक अधिकारी तीनों सेनाओं को एक साथ निर्देश दे सकेगा।

बलराम कृषि महोत्सव किसानों की सेवा और सम्मान का उत्सव: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

किसानों की सेवा का त्यौहार है बलराम कृषि महोत्सव : मुख्यमंत्री डॉ. यादव फील्ड से लेकर फैक्ट्री तक सरकार किसानों के साथ है मुख्यमंत्री ने भिंड जिले में हुए बलराम कृषि महोत्सव में वीसी से की सहभागिता जिले के किसानों से की इस महोत्सव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भिंड की धरती जय जवान-जय किसान का सबसे अच्छा और सार्थक उदाहरण है। कभी डकैतों की समस्या से जूझने वाले इस क्षेत्र की पहचान आज उद्योग, रोजगार और कृषि से हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बलराम कृषि महोत्सव अन्नदाता किसानों की सेवा और इनके प्रति आभार व्यक्त करने का त्यौहार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को भिंड जिले में हुए बलराम कृषि महोत्सव को मुख्यमंत्री निवास से वीडियो कान्फ्रेंसिंग से संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में मौजूद किसानों से कहा कि कृषि क्षेत्र आने वाले समय में प्रदेश की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ और सबकी समृद्धि की सबसे बड़ी गारंटी बनने जा रहा है। उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि वे दुग्ध उत्पादन, अन्न उत्पादन, मछली पालन, उद्यानिकी जिसमें भी उनकी रुचि है, एक नई शुरुआत के साथ आगे बढ़ें। हमारी सरकार फील्ड से लेकर फैक्ट्री तक हमेशा किसानों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी किसान इस बलराम कृषि महोत्सव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। मुख्यमंत्री ने कहा कि धरती माता ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। अपने हीरे जैसी जमीन किसी को न बेचें, बल्कि अपने बच्चों को भी इसी पूंजी में परिश्रम और समर्पण का बीजरूपी निवेश करना सिखायें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि, पशुपालन और मछली पालन में भिंड तेजी से प्रगति कर रहा है। चंबल, सिंध और पहुज जैसी नदियों के पानी से सिंचित भिंड में बाजरा, गेहूं और सरसों खूब होती है। सरसों के उत्पादन में भिंड की अपनी अलग पहचान है। मुरैना-भिंड में प्रदेश की 50 प्रतिशत से ज्यादा सरसों की पैदावार होती है। मुख्यमंत्री ने प्रसन्न्ता व्यक्त करते हुए कहा कि भिंड जिले के किसान अब प्राकृतिक खेती में भी रुचि ले रहे हैं। यहां 3 हजार से अधिक किसानों ने 1250 हेक्टेयर रकबे में प्राकृतिक खेती की है। यहां दुग्ध संकलन में 31 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। लगभग 60 गौशालाओं में गौसेवा भी हो रही है। अब पांडरी गांव में स्वावलंबी गौशाला के लिए 5 हजार निराश्रित गौवंश के आश्रय की तैयारी की जा रही है। मछली पालन में भी यहां के प्रगतिशील लोगों ने नई तकनीक अपनाई है। भवथरा गांव में 25 लाख रुपए की लागत से आधुनिक मत्स्य पालन तकनीक लगाई गई है, जिससे 8 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार और किसान मिलकर एक नया इतिहास रचेंगे। यहां के किसानों ने पशुपालन और मछली पालन में रुचि लेकर इतिहास रचने की शुरुआत कर दी है। सरकार हमेशा इनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंचाई परियोजनाओं से भिंड की खेती-किसानी बदल रही है। उन्होंने कहा कि भिंड जिले को ऐतिहासिक पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना का लाभ मिलने जा रहा है, इससे यहां की खेती की तस्वीर बदल जाएगी। सिमार स्टॉप डैम का काम लगभग पूरा हो गया है। इससे 210 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई की सुविधा मिलेगी। उन्होंने बताया कि अटेर में कनेरा उद्वहन सिंचाई परियोजना का काम जून 2027 तक पूरा किया जाएगा। इससे 96 गांवों की 15 हजार हेक्टेयर से ज्यादा जमीन सिंचित होगी। वर्तमान में राजघाट, चंबल और हर्सी नहर प्रणालियों से जिले में 1 लाख 62 हजार 381 हेक्टेयर जमीन सिंचित हो ही रही है। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ यादव की पहल पर पूरे प्रदेश में उत्सव के माहौल में बलराम कृषि महोत्सव मनाया जा रहा है, जिसमें कृषक उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भगवान बलराम की कृपा से किसान कल्याण वर्ष केआयोजनों के अच्छे परिणाम आएंगे। कार्यक्रम में मंत्री शुक्ला और विधायक भिण्ड नरेंद्र सिंह कुशवाह द्वारा अन्य अतिथियों की उपस्थिति में दबोहामोड़ के रामसनेही शर्मा को फलोद्यान नर्सरी, बडेरा के पर्वत सिंह को नर्सरी, टुडिला के जगदीश सिंह कंसाना को प्राकृतिक खेती, मानगढ़ के रंजीत सिंह को जैविक खेती, बरूअनपुरा के गंगाराम बघेल को जैविक खेती, सोनेलाल का पुरा के अजय सिंह को केंचुआ खाद उत्पादन, उदन्नखेडा के लक्ष्मण सिंह नरवरिया को जैविक खेती, सैपुरा के संदीप सिंह को उन्नत तकनीकी से टमाटर एंव मिर्च उत्पादन, क्यारीपुरा के कुलदीप सिंह भदौरिया को जैविक खेती और बड़ागांव नं. 1 के गुरुप्रसन्न राजावत को देशी बीज संरक्षण के लिए शाल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में जिले के मेधावी विद्यार्थियों- निराली बघेल, कृतिका दुबे, प्रिंसी, साक्षी शर्मा, छवि परमार, सोनम देवी, साहिल यादव और अभय शर्मा को कक्षा 10वी और 12वी की बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। समारोह स्थल पर कृषकों की सुविधा हेतु कृषक पंजीयन, ई-केवाईसी तथा फॉर्मर आईडी पंजीयन के विशेष स्टाल लगाए गए थे। कार्यक्रम में पशुपालन और डेयरी विभाग, कृषक कल्याण विभाग, कृषि अभियांत्रिकी विभाग, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, मत्स्य विभाग और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित भिण्ड द्वारा प्रदर्शनी लगाई गई जिसके माध्यम से विभागीय उपलब्धियों और शासकीय योजनाओं की जानकारी प्रदान की गई। स्वसहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों का भी प्रदर्शन और विक्रय किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गई। बलराम कृषि महोत्सव के मुख्य कार्यक्रम स्थल पर अपेक्स बैंक भोपाल के प्रशासक महेन्द्र यादव, जनपद अध्यक्ष श्रीमती सरोज बघेल, कपिल यार्दे, देवेन्द्र नरवरिया सहित बड़ी संख्या में जिले के प्रगतिशील किसानबंधु उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि भिंड जिले के कुछ प्रगतिशील किसानों ने प्राकृतिक एवं जैविक खेती के साथ-साथ ताईवानी अमरूद और हल्दी का उत्पादन लिया है। इसके अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं।  

झीरम घाटी हमले के दोषियों पर कोर्ट का फैसला, 13 साल बाद सभी 10 आरोपी दोषी करार

रायपुर  छत्तीसगढ़ के इतिहास के सबसे काले और दहला देने वाले अध्यायों में से एक, झीरम घाटी नक्सल हमले के मामले में आखिरकार न्याय की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। एनआईए की विशेष अदालत ने करीब 13 साल पुराने इस मामले में शनिवार को अहम फैसला सुनाते हुए सभी 10 बचे हुए आरोपियों को दोषी करार दिया है। लंबे समय से फैसले का इंतजार कर रहे पीड़ित परिवारों और समर्थकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण निर्णय है। 25 मई 2013 को हुआ था नरसंहार यह वीभत्स घटना 25 मई 2013 की है, जब कांग्रेस पार्टी की 'परिवर्तन यात्रा' के दौरान दरभा की झीरम घाटी में नक्सलियों ने घात लगाकर सुनियोजित हमला किया था। इस भीषण नक्सल हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा, और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत 32 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। घटना के दो दिन बाद 27 मई 2013 को केंद्र सरकार ने इस मामले की जांच एनआईए को सौंपी थी। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) की विशेष अदालत ने 2013 के झीरम घाटी माओवादी हमले के मामले में सभी 10 आरोपियों को शनिवार को दोषी ठहराया. इस हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं समेत 29 लोगों की मौत हुई थी.बचाव पक्ष के अधिवक्ता अरविंद चौधरी ने बताया कि जगदलपुर में एनआईए के विशेष न्यायाधीश अभय सिंह राजपूत की अदालत ने दो महिलाओं समेत सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया।  उन्होंने बताया कि अदालत ने सजा की अवधि पर आदेश 16 सितंबर के लिए सुरक्षित रख लिया है. सुनवाई के दौरान 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए.चौधरी ने कहा कि हम इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करेंगे. हमें अभी तक फैसले की प्रति नहीं मिली है. इसके बाद ही अपील के आधार के बारे में बता पाएंगे।  कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर घात लगाकर हुआ था हमला यह हमला 25 मई 2013 को हुआ था जब माओवादियों ने बस्तर जिले के दरभा थाना क्षेत्र के झीरम घाटी इलाके में एक राष्ट्रीय राजमार्ग पर कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा' पर घात लगाकर हमला किया था।  इस हमले में कांग्रेस नेताओं, आम नागरिकों और 10 सुरक्षाकर्मियों समेत कम से कम 29 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 30 से अधिक लोग घायल हुए थे.मारे गए लोगों में कांग्रेस की प्रदेश इकाई के तत्कालीन अध्यक्ष नंद कुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश, विपक्ष के पूर्व नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल तथा वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक उदय मुदलियार शामिल थे।  एनआईए ने 40 मुख्य आरोपियों समेत 150 से अधिक लोगों पर एफआईआर दर्ज की थी, जिनमें से 11 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई थी, जबकि शेष 10 आरोपी हिरासत में थे। इस केस में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे। न्यायिक आयोग का भी हुआ था गठन यह रैली 2013 के अंत में हुए छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले आयोजित की गई थी.घटना के बाद राज्य पुलिस ने मामला दर्ज किया था, लेकिन रमन सिंह नीत तत्कालीन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने हमले के दो दिन के भीतर ही इसकी जांच एनआईए को सौंप दी थी. राज्य सरकार ने घटना की जांच के लिए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के तत्कालीन न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में एक न्यायिक आयोग का भी गठन किया था।  अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए 10 आरोपियों के नाम एनआईए कोर्ट द्वारा दोषी करार दिए गए 10 आरोपियों के नाम इस प्रकार हैं:     प्रमिला मोडियम     चैतु लेकाम उर्फ मुन्ना     सुमित्रा उर्फ सुमित्रा पुनेम मोडियम     मुक्का मांडवी     कोसा कवासी उर्फ कोसाराम     आयत मरकाम     मड़कामी देवा     जोग मड़कामी     बंजमी सेना उर्फ चमरू उर्फ देंगा     महादेव

पटना में बाढ़ को लेकर हाई अलर्ट, 13 जिलों की निगरानी के लिए मंत्रियों और सचिवों की तैनाती

 पटना बिहार में भारी बारिश और प्रमुख नदियों में उफान के बाद बाढ़ से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 13 मंत्रियों को अपने प्रभार वाले जिलों में बाढ़ की निगरानी का काम सौंपा है। उनके साथ प्रभारी सचिवों की भी ड्यूटी लगाई गई है। बक्सर से पटना, समस्तीपुर और भागलपुर तक कई इलाके जलमग्न हैं। पटना में बाढ़ के चलते अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया गया है। सीएम सम्राट लगातार दूसरे दिन बाढ़ प्रभावित इलाके के हवाई सर्वे पर निकले हैं। शनिवार को वह भागलपुर में बाढ़ से राहत एवं बचाव कार्य का जायजा ले रहे हैं। बिहार सरकार की ओर से गंगा किनारे स्थित जिलों में राहत और बचाव कार्यों की सघन निगरानी का काम प्रभारी मंत्रियों और सचिवों को सौंपा है। जिन 13 जिलों के लिए निर्देश जारी हुए हैं, उनमें बक्सर, भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, बेगूसराय, समस्तीपुर, लखीसराय, खगड़िया, मुंगेर, भागलपुर और कटिहार शामिल हैं। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, प्रभारी मंत्री और प्रभारी सचिव संबंधित जिले में बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे और जमीन पर राहत एवं बचाव कार्य की निगरानी करेंगे। पटना में बाढ़ से हाई अलर्ट सीएम सम्राट ने पटना के शहरी क्षेत्र में गंगा के बढ़ते जलस्तर की विशेष निगरानी के आदेश दिए हैं। पटना में तटबंध और आसपास के क्षेत्र पर खास ध्यान दिया जाएगा। पटना नगर निगम, जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग को हाई अलर्ट पर रहने को कहा गया है। गंगा नदी का जलस्तर पटना में गांधी घाट के पास गंगा नदी खतरे के निशान ऊपर बह रही है। शनिवार सुबह 10 बजे गांधी घाट गेज साइट पर जलस्तर 50.53 मीटर दर्ज किया गया, जो 48.60 मीटर के खतरे के निशान से लगभग 1.93 मीटर ऊपर है। नदी अपने उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) 50.52 मीटर के करीब बह रही है। अधिकारियों ने जलस्तर में और बढ़ोतरी होने की चेतावनी दी है। बिहार बाढ़ की स्थिति बिहार में बाढ़ की वर्तमान स्थिति की जानकारी डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी ने ली। वह शनिवार को फिर पटना में सिंचाई भवन स्थित जल संसाधन विभाग के कंट्रोल कमांड सेंटर पहुंचे। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पूरे राज्य के विभिन्न संवेदनशील स्थलों का जायजा लिया। अधिकारियों को तटबंधों पर सतत निगरानी के निर्देश दिए। बिहार बाढ़ से 10 लाख आबादी प्रभावित- सरकार आपदा प्रबंधन विभाग ने शनिवार को कहा कि बिहार के 11 जिलों के 50 प्रखंडों की 201 पंचायतों में 10.28 लाख की आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है। यहां राहत एवं बचाव कार्य जारी है। इन जिलों में बाढ़ की निगरानी करेंगे प्रभारी मंत्री-     बक्सर – नंद किशोर राम     भोजपुर – अरुण शंकर प्रसाद     पटना – विजय चौधरी     सारण – बिजेंद्र प्रसाद यादव     वैशाली – निशांत कुमार     बेगूसराय – रामकृपाल यादव     समस्तीपुर – दामोदर रावत     लखीसराय – सुनील कुमार     खगड़िया – मदन सहनी     मुंगेर – संजय पासवान     भागलपुर – नीतीश मिश्रा     कटिहार – प्रमोद चंद्रवंशी

यूपी में बाढ़ के बीच योगी सरकार का राहत अभियान तेज, 18,810 लोगों को सुरक्षित स्थान पहुंचाया

बाढ़ के बीच योगी सरकार का राहत अभियान तेज, 18,810 लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया 4.02 लाख लंच पैकेट और 79 हजार से अधिक बाढ़ राहत किट प्रभावितों को वितरित की गईं 1072 मेडिकल टीमें रख रहीं स्वास्थ्य का ध्यान, 24 जिलों में राहत-बचाव अभियान जारी   बाढ़ संकट में सरकार की तत्परता बनी सुरक्षा कवच, अब तक नहीं होने दी कोई जनहानि अयोध्या में जिला प्रशासन ने सोशल मीडिया से सूचना मिलते ही परिवार को पहुंचाई मदद रायबरेली में उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने प्रभावित परिवारों को वितरित की राहत सामग्री लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में बाढ़ की चुनौती के बीच योगी सरकार का राहत और बचाव अभियान लगातार तेज गति से जारी है। सरकार की सक्रियता और प्रशासन की तत्परता से बाढ़ प्रभावित लोगों तक भोजन, स्वास्थ्य सुविधाएं और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक अब तक 18,810 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है, जबकि शुक्रवार को ही 4,799 लोगों का रेस्क्यू किया गया। राहत अभियान के तहत अब तक 4.02 लाख से अधिक लंच पैकेट और 79,666 बाढ़ राहत किट वितरित की जा चुकी हैं। 1,821 नाव एवं मोटरबोट रेस्क्यू कार्य में लगाई गई हैं। बाढ़ से अब तक कोई जनहानि की सूचना नहीं है। 6 हजार से ज्यादा लोग शरणालय में रह रहे वर्तमान में 24 जिलों में बाढ़ का असर है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी और राहत कार्य किया जा रहा है। अब तक 18,810 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इसके साथ ही 1,313 बाढ़ शरणालय स्थापित किए गए हैं, जिनमें 6 हजार से ज्यादा लोग रह रहे हैं। 4 लाख से ज्यादा लंच पैकेट किए वितरित बाढ़ के बीच प्रभावित परिवारों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चल रहा है। बाढ़ की शुरूआत से अब तक 4.02 लाख से अधिक लंच पैकेट और 79 हजार से अधिक बाढ़ राहत किट वितरित की जा चुकी हैं। शुक्रवार को भी 38 हजार से ज्यादा लंच पैकेट और 6 हजार से ज्यादा बाढ़ राहत किट बांटी गईं। इससे प्रभावित लोगों को संकट की स्थिति में तत्काल भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। स्वास्थ्य सुरक्षा पर भी सरकार का विशेष फोकस बाढ़ के बाद जलजनित बीमारियों की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को भी सक्रिय रखा गया है। प्रदेश में अब तक 1,072 मेडिकल टीमें गठित की जा चुकी हैं। स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए 5.75 लाख से अधिक क्लोरीन टैबलेट और 2 लाख से ज्यादा ओआरएस पैकेट वितरित किए गए हैं। 1,821 नाव-मोटरबोट से लगातार रेस्क्यू जलभराव और बाढ़ के कारण जहां सड़क मार्ग से पहुंचना मुश्किल है, वहां नाव और मोटरबोट के जरिए राहत एवं बचाव दल पहुंच रहे हैं। अब तक 1,821 नाव एवं मोटरबोट का प्रयोग किया जा चुका है। इससे प्रभावित गांवों में फंसे लोगों को निकालने और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाने में महत्वपूर्ण मदद मिल रही है। अब तक बाढ़ से कोई व्यक्ति या पशुहानि दर्ज नहीं हुई है, जो रेस्क्यू ऑपरेशंस और निगरानी व्यवस्था की अहम उपलब्धि है। बाढ़ से मकान क्षतिग्रस्त होने के 485 मामलों में प्रभावित परिवारों को सहायता वितरित की जा चुकी है। प्रभावित 24 जिले अयोध्या, आजमगढ़, बदायूं, बलिया, बाराबंकी, बस्ती, चंदौली, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, कासगंज, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, मुरादाबाद, प्रयागराज, रायबरेली, रामपुर, संत कबीर नगर, शाहजहांपुर, उन्नाव और वाराणसी। सोशल मीडिया से सूचना पर पहुंची मदद, आवास का दिया भरोसा अयोध्या में सोशल मीडिया के माध्यम से परिवार की परेशानी की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई की। बीकापुर के खजुराहट गांव के बरगदीया मजरे में प्रभावित अर्पिता पाण्डेय के परिवार को खाद्य सामग्री, सब्जियां, तिरपाल, बर्तन, गैस सिलेंडर सहित जरूरी गृह उपयोगी सामान उपलब्ध कराया गया। विधायक डॉ. अमित चौहान भी राहत सामग्री लेकर पहुंचे। प्रशासन ने परिवार को मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी प्राथमिकता से शुरू कर दी है। बाढ़ प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचे राज्यमंत्री रायबरेली में उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने बाढ़ प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचकर राहत सामग्री वितरित की। उन्होंने कहा कि आपदा की इस घड़ी में प्रदेश सरकार प्रत्येक प्रभावित परिवार के साथ पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता से खड़ी है। उन्होंने अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी तरह की शिथिलता न बरतने और प्रत्येक जरूरतमंद परिवार तक समयबद्ध तरीके से राहत व सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए।

इंदौर मेट्रो का बढ़ा दायरा, 17 किमी रूट पर दौड़ी ट्रेन; CM मोहन यादव ने गिनाए विकास के फायदे

इंदौर  इंदौर में 17 किलोमीटर लंबे मेट्रो ट्रैक पर सेवा दोबारा शुरू किए जाने को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि इंदौर केवल मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि प्रदेश की आर्थिक समृद्धि का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में शहर के भीतर आवागमन को सुगम बनाने और बाहर से आने वाले लोगों के लिए बेहतर यातायात सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए मेट्रो जैसी आधुनिक सेवाओं का विस्तार बेहद जरूरी है। मुख्यमंत्री ने इंदौरवासियों और प्रदेशवासियों को मेट्रो सेवा शुरू होने पर हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि इंदौर लगातार विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मेट्रो परियोजना शहर के यातायात को बेहतर बनाने के साथ ही भविष्य में इंदौर के विकास को नई गति देने का काम करेगी। शहर की बढ़ती आबादी और यातायात के बढ़ते दबाव को देखते हुए सार्वजनिक परिवहन के आधुनिक साधनों की जरूरत लगातार बढ़ रही है। वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर भी मुख्यमंत्री ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का इंदौर में स्वागत है, लेकिन कांग्रेस को अपने शासनकाल में युवाओं की स्थिति को लेकर भी जवाब देना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आंकड़े उठाकर देखे जाएं तो वर्ष 1956 से 2003 तक प्रदेश में कांग्रेस की सरकारें रहीं। ऐसे में युवाओं और महिलाओं की स्थिति को लेकर कांग्रेस को भी अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में बिजली उत्पादन का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में मध्यप्रदेश में बिजली की उपलब्धता बेहद कम थी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के दौरान बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में बिजली उत्पादन को लगातार बढ़ाया गया। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि प्रदेश में बिजली उत्पादन क्षमता करीब 5 हजार मेगावाट से बढ़ाकर 25 हजार मेगावाट तक पहुंचाई गई है और बिजली की उपलब्धता लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि आज मध्यप्रदेश आर्थिक और विकास के कई क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में विपक्ष को केवल आरोप लगाने के बजाय अपने शासनकाल के कामकाज का हिसाब भी जनता के सामने रखना चाहिए।

J&K में बड़ा ऑपरेशन, सुरक्षाबलों ने लश्कर कमांडर यासिर को किया ढेर; पाकिस्तानी नागरिक था आतंकी

श्रीनगर यूसमर्ग में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई. संयुक्त बलों के साथ हुई इस मुठभेड़ में पाकिस्तानी लश्कर कमांडर यासिर मारा गया. सूत्रों के मुताबिक, मुठभेड़ में मारा गया लश्कर कमांडर यासिर पहले सुलेमान मूसा के बड़े लश्कर ग्रुप का हिस्सा था. हालांकि, करीब एक साल पहले वह इस ग्रुप से अलग हो गया था। सुरक्षाबलों ने जिस आतंकी को मार गिराया था, उसकी पहचान यासिर के रूप में हुई है। यासिर पाकिस्तान का नागरिक था और प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा से जुड़ा हुआ था। सुरक्षाबलों ने ऑपरेशन अशदर के तहत कार्रवाई करते हुए आतंकी को मार गिराया। उसकी पहचान सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां उसके नेटवर्क और गतिविधियों से जुड़ी अन्य जानकारियां जुटाने में लगी हैं। आतंकी नेटवर्क पर सुरक्षा बलों की नजर इस कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की मुहिम में अहम सफलता माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां इलाके में सक्रिय आतंकी नेटवर्क और उनके मददगारों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। यूसमर्ग में ऑपरेशन अशदर के दूसरे दिन सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई पिछले दो दिनों से चल रहा आतंकवाद के खिलाफ अभियान में सुरक्षाबलों को मध्य कश्मीर के बडगाम जिले के यूसमर्ग में शुक्रवार को बड़ी सफलता मिली। सेना और पुलिस ने अशदर गली के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में जारी मुठभेड़ के दूसरे दिन ऑपरेशन अशदर के तहत एक आतंकी को मार गिराया। उसके कब्जे से एके-47 राइफल और अन्य युद्ध सामग्री बरामद की गई है। सुरक्षाबलों को इलाके में चार से पांच और आतंकियों के छिपे होने की आशंका है। जंगल व पहाड़ी क्षेत्र में उनकी तलाश के लिए घेराबंदी जारी है। सेना की चिनार कोर के अनुसार, सटीक खुफिया सूचना पर अशदर गली क्षेत्र में आतंकियों की तलाश के लिए संयुक्त अभियान चलाया जा रहा था।यह क्षेत्र यूसमर्ग के दूधपथरी से करीब आठ घंटे की कठिन पैदल चढ़ाई वाला है। सेना की 53 राष्ट्रीय राइफल्स, 10 पैरा कमांडो, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान समूह (एसओजी) की टीमें बुधवार से ही इस इलाके में आतंकियों की तलाश में जुटी थीं। वीरवार को जंगल में संदिग्ध गतिविधि नजर आने पर जवानों ने आतंकियों को आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी। इसके जवाब में आतंकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। सुरक्षाबलों ने भी मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की। दोनों पक्षों के बीच भीषण गोलीबारी के बाद आतंकी घने जंगल में छिप गए। शुक्रवार सुबह अभियान दोबारा तेज किया गया और मुठभेड़ में एक आतंकी मारा गया। मारे गए आतंकी की अभी पहचान नहीं हो पाई है। सूत्रों के अनुसार, उसके पाकिस्तानी होने की आशंका है। साथ ही लश्कर-ए-ताइबा से जुड़े होने की बात भी सामने आ रही है। वहीं, कश्मीर जोन के आईजीपी सुजीत कुमार भी मुठभेड़ स्थल के पास पहुंचे और अभियान का जायजा लिया। यासिर की गतिविधियों का पता यूसमर्ग के ऊपरी इलाकों में चलने के बाद संयुक्त बलों ने ऑपरेशन चलाया. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, सुलेमान उर्फ मूसा उस लश्कर ग्रुप का सदस्य था, मूसा पिछले साल श्रीनगर के डाचीगाम जंगल इलाके में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया था।  रात में घेरे के भीतर ही छिप गए थे आतंकी रक्षा सूत्रों के अनुसार, कुछ देर की गोलीबारी के बाद आतंकी घने जंगल और रात के अंधेरे का फायदा उठाकर घेरे के भीतर ही छिप गए। रात में दृश्यता कम होने के कारण सुरक्षाबलों ने जंगल से बाहर निकलने के संभावित रास्तों को सील कर घेराबंदी बनाए रखी। शुक्रवार सुबह रोशनी होते ही तलाशी अभियान को फिर से चलाया और एक आतंकी ढेर कर दिया। आतंकियों के खात्मे के लिए स्निफर डॉग्स भी लगाए सूत्रों के अनुसार, मुठभेड़ में शामिल आतंकियों की संख्या चार से पांच हो सकती है। आशंका है कि आतंकियों का यह गुट पीर पंजाल की ऊंची पहाड़ियों के रास्ते दक्षिण कश्मीर की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहा था। घने जंगलों, प्राकृतिक गुफाओं और खड़ी चट्टानों वाले इस इलाके में अन्य आतंकियों के छिपे होने की आशंका को देखते हुए सुरक्षाबलों ने तलाशी अभियान तेज कर दिया है। आतंकियों की मौजूदगी को पूरी तरह खत्म करने के लिए स्निफर डॉग्स और आधुनिक उपकरणों की मदद से जंगल में अभियान जारी है। लेफ्टिनेंट जनरल ने चिनार कोर की कार्रवाई को सराहा नॉर्दर्न कमांड के सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने अशदर गली इलाके में एक आतंकी को मार गिराने की त्वरित व सटीक कार्रवाई के लिए चिनार कोर की सराहना की। नॉर्दर्न कमांड ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि वह जम्मू-कश्मीर को आतंकवाद मुक्त बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। स्थानीय सूत्रों ने दो आतंकियों के मारे जाने का दावा किया है, लेकिन रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, मुठभेड़स्थल से अभी तक एक ही आतंकी का शव, एक एसाल्ट राइफल व अन्य युद्धक सामग्री मिली है। जब तक दूसरे आतंकी का शव नही मिल जाता उसके मारे जाने की पुष्टि नहीं हो सकती। प्रवक्ता ने बताया कि मारे गए आतंकियों के वहीं आस पास छिने होने की संभावना को देखते हुए अभियान को जारी रखा गया है। ऊपरी युसमर्ग पीर पंजाल पर्वतीय क्षेत्र में स्थित है और घने जंगलों तथा दुर्गम पहाड़ी भूभाग के कारण सुरक्षा अभियानों के लिहाज से चुनौतीपूर्ण माना जाता है। युसमर्ग एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भी है। अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद इसे पर्यटकों के लिए बंद किया गया था। यहां से राजौरी-पुंछ क्षेत्र की ओर जाने वाले मार्ग भी निकलते हैं। सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके में घेराबंदी और तलाशी बढ़ा दी है। अधिकारियों के अनुसार, अभियान पूरा होने के बाद ही मारे गए आतंकी की पहचान और अन्य विवरण साझा किए जाएंगे।