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समाधान योजना से 29.81 लाख बिजली उपभोक्ताओं को राहत, ऊर्जा मंत्री तोमर का दावा

समाधान योजना में 29 लाख 81 हजार बिजली उपभोक्ताओं ने लिया लाभ : ऊर्जा मंत्री तोमर भोपाल  ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि समाधान योजना में 15 मई तक 29 लाख 81 हजार बिजली उपभोक्ताओं ने सरचार्ज में छूट का लाभ लिया है। उन्होंने बताया है कि पिछले वर्ष 3 नवम्बर को समाधान योजना 2025-26 की शुरुआत हुई थी। योजना 15 मई तक लागू थी। 473 करोड़ 39 लाख का सरचार्ज हुआ माफ मध्यप्रदेश सरकार की समाधान योजना 2025-26 में 29 लाख 81 हजार बिजली उपभोक्ताओं ने इस योजना का लाभ लिया है। कुल 1497 करोड़ 45 लाख रूपये जमा किये गये हैं, जबकि 473 करोड़ 39 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 8 लाख 91 हजार बकायादार उपभोक्ताओं ने अपना पंजीयन कराकर लाभ लिया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के खाते में 834 करोड़ 55 लाख से अधिक की मूल राशि जमा हुई है, जबकि 331 करोड़ 60 लाख रूपए का सरचार्ज माफ किया गया है। इसी तरह पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 11 लाख 27 हजार उपभोक्ताओं ने योजना का लाभ लिया है। कंपनी के खाते में 340 करोड़ 8 हजार रूपये जमा हुए हैं, जबकि 99 करोड़ 49 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 9 लाख 63 हजार उपभोक्ताओं ने योजना का लाभ लिया है। कंपनी के खाते में 322 करोड़ 82 लाख रूपये जमा हुए हैं, जबकि 42 करोड़ 30 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है।  

देवास विस्फोट कांड का मुख्य आरोपी दिल्ली एयरपोर्ट से दबोचा गया, अब तक 5 गिरफ्तारी

देवास देवास जिले के टोंककला में बीते दिनों पटाखा फैक्टरी में भीषण विस्फोट और आग लगने की घटना सामने आई थी। इस हादसे में पांच से अधिक लोगों की मौत हो गई थी, जबकि करीब 20 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। घटना के बाद पूरे मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया और कांग्रेस तथा बीजेपी के नेता एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते नजर आए। वहीं, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर मामले की जांच के लिए विशेष दल का गठन किया गया, जिसने टोंककला पहुंचकर जांच शुरू की। मामले को गंभीरता से लेते हुए देवास पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम बनाई और मुख्य आरोपी को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, मामले में अभी एक आरोपी की गिरफ्तारी बाकी है। पुलिस ने मुख्य आरोपी को दिल्ली एयरपोर्ट से किया गिरफ्तार टोंककला पटाखा फैक्टरी विस्फोट मामले में फरार चल रहे मुख्य आरोपी मुकेश विज को देवास पुलिस ने गुरुवार सुबह नई दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया। आरोपी चीन के गुआंग्झू शहर से फ्लाइट के जरिए भारत लौटा था। देवास पुलिस की विशेष टीम पहले से एयरपोर्ट पर तैनात थी और “लुक आउट सर्कुलर (LOC)” के आधार पर उसे दबोच लिया गया। पुलिस ने इस मामले में एक अन्य फरार आरोपी महेश चौहान, निवासी उत्तराखंड, को भी दिल्ली से गिरफ्तार किया है। इससे पहले फैक्टरी लाइसेंसी अनिल मालवीय, मुख्य ठेकेदार मोहम्मद अयाज और संयुक्त संचालक कपिल विज की गिरफ्तारी की जा चुकी है। अब तक इस मामले में कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। 13 सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया एसपी देवास पुनीत गेहलोत ने बताया कि फरार आरोपियों की तलाश और तकनीकी जांच के लिए 13 सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया था। दोनों फरार आरोपियों पर 10-10 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था। पुलिस की टीमें लगातार दिल्ली सहित कई स्थानों पर दबिश दे रही थीं। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश और डीजीपी कैलाश मकवाना के मार्गदर्शन में की गई। एडीजी उज्जैन जोन राकेश गुप्ता और डीआईजी उज्जैन रेंज नवनीत भसीन की निगरानी में देवास पुलिस मामले की वैज्ञानिक और पेशेवर तरीके से जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि मामले के हर पहलू की गंभीरता से जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

PM मोदी को मिले प्राचीन ताम्र पत्र, तमिलनाडु और चोल वंश की विरासत फिर चर्चा में

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नीदरलैंड दौरे पर दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करते हुए 17 समझौतों पर हस्ताक्षर किए. पीएम मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन के बीच रक्षा, सेमीकंडक्टर, ऊर्जा, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा, व्यापार, शिक्षा और समुद्री सहयोग समेत कई अहम क्षेत्रों में साझेदारी के लिए सहमति बनी. इसके अलावा नीदरलैंड की यात्रा में देश को एक बड़ी सांस्कृतिक और राजनयिक उपलब्धि भी हासिल हुई है. देश की करीब 1000 साल पुरानी विरासत वापस मिल गई है. नीदरलैंड की डच सरकार ने 11वीं सदी की अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाओं (Anaimangalam Copper Plates) को भारत को सौंप दिया है. आईए जानते हैं कि ‘लाइडेन प्लेट्स’ (Leiden Plates) के नाम से मशहूर 30 किलोग्राम की ये 21 बड़ी और 3 छोटी पट्टिकाओं में क्या लिखा है? इनका तमिलनाडु और चोल वंश से क्या कनेक्शन है? क्या हैं अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाएं: अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाओं को 'लीडेन प्लेट्स' भी कहा जाता है. ये 11वीं सदी की अत्यंत दुर्लभ और ऐतिहासिक तांबे की प्लेटें हैं, जो दक्षिण भारत के गौरवशाली चोल राजवंश से संबंधित हैं. लगभग 30 किलोग्राम वजनी इन पट्टिकाओं में 21 बड़ी और 3 छोटी प्लेटें शामिल हैं, जो एक विशाल तांबे की अंगूठी से जुड़ी हुई हैं. इस पर चोल शासक राजेंद्र चोल प्रथम की शाही मुहर भी अंकित है. 1690 ईस्वी के आसपास इन्हें डच ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी भारत से नीदरलैंड ले गए थे. लंबे समय तक ये लीडेन विश्वविद्यालय (Leiden University) में सुरक्षित थीं. इसीलिए इनको इतिहासकार लीडेन प्लेट्स के नाम से भी जानते हैं. अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाओं का क्या है इतिहास: अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाएं 1005 ईस्वी के आसपास चोल सम्राट राजराजा चोल प्रथम और उनके बेटे राजेंद्र चोल प्रथम के शासनकाल के दौरान जारी की गई थीं. ये पट्टिकाएं चोल शासकों द्वारा तमिलनाडु के नागापट्टनम में स्थित 'चूड़ामणि विहार' नामक बौद्ध मठ को अनैमंगलम गांव का राजस्व और कर दान करने के शाही आदेश को प्रमाणित करती हैं. यह मठ दक्षिण-पूर्व एशिया (जावा/सुमात्रा) के शैलेंद्र सम्राट द्वारा बनवाया गया था. कैसी दिखती हैं अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाएं: अनैमंगलम पट्टिकाओं में 21 तांबे की प्लेटें शामिल हैं, जिन्हें एक कांस्य की अंगूठी से बांधा गया है. इस अंगूठी पर राजा राजेंद्र चोल प्रथम की मुहर लगी है, जिन्होंने 11वीं शताब्दी में शासन किया था. 5 प्लेटों पर संस्कृत में शिलालेख हैं और बाकी 16 प्लेट्स पर तमिल में शिलालेख हैं. संस्कृत में चोल राजाओं का इतिहास और वंशावली लिखी हुई है. जबकि तमिल भाषा में दान और प्रशासनिक नियमों की जानकारी दी गई है. तमिल में प्रशासनिक डेटा, भूमि की सीमाएं, टैक्स छूट और स्थानीय शासन के नियम लिखे गए हैं. ये प्लेटें राजेंद्र चोल प्रथम की आधिकारिक शाही मुहर से बंद की गई हैं. इस मुहर पर चोल बाघ का प्रतीक, दो मछलियां (पांड्य प्रतीक) और एक धनुष (चेर प्रतीक) अंकित हैं, जो दक्षिण भारत पर चोलों की सर्वोच्चता को दर्शाते हैं. ताम्र पट्टिकाओं पर क्या लिखा है: तांबे की 5 पट्टियां संस्कृत भाषा में हैं, जिन पर चोल राजवंश की वंशावली अंकित है. इसकी शुरुआत विष्णु की स्तुति और पौराणिक दिव्य (सूर्यवंशी) पूर्वजों के नामों से होती है. वहीं, तमिल भाग राजा राजराज प्रथम (शासनकाल: 985-1012 ई.) के शासनकाल से संबंधित है, जो राजेंद्र चोल प्रथम के पिता थे. शिलालेख में कहा गया है कि राजा राजराज प्रथम ने अपने शासनकाल के 21वें वर्ष में यह घोषणा की थी कि एक बौद्ध तीर्थस्थल (विहार) के निर्माण के लिए एक गांव (अनैमंगलम) का संपूर्ण राजस्व और उसकी भूमि दान में दी जाएगी. चोलों की हिंदू धर्म के प्रति आस्था का प्रमाण हैं ताम्र पट्टिकाएं: यह शिलालेख चोलों की धार्मिक सहिष्णुता (एक हिंदू सम्राट द्वारा बौद्ध मठ को आर्थिक सहायता देना) का एक महत्वपूर्ण प्रमाण है. इसके साथ ही यह श्रीविजय साम्राज्य (आधुनिक सुमात्रा, इंडोनेशिया) जिसके शासक ने इस मठ का निर्माण करवाया था, के साथ उनके गहरे समुद्री और भू-राजनीतिक संबंधों को भी उजागर करता है. तांबे की 3 छोटी प्लेट्स में क्या लिखा: तीन तांबे की प्लेट्स भी एक कांस्य की अंगूठी से एक साथ बांधी हैं. इस पर राजा कुलोत्तुंग चोल प्रथम (जिन्होंने 1070 से 1120 तक शासन किया) की मुहर लगी है. इन पर तमिल में शिलालेख हैं. चोल प्लेटें, जो 1862 से लीडेन विश्वविद्यालय के पास सुरक्षित हैं. जो दक्षिण भारत में शाही फरमानों (राजकीय आदेशों) के महत्वपूर्ण स्रोत हैं. ये प्लेटें चोल और श्रीविजय साम्राज्यों के बीच संबंधों के बारे में ऐतिहासिक जानकारी भी देती हैं. इनका कुल वजन 30 किलोग्राम है. चोल वंश का पूरा इतिहास खोलती हैं ये तांबे की प्लेट्स: इन तांबे की प्लेट्स को चोल साम्राज्य के सबसे मूल्यवान अभिलेखों में से एक माना जाता है, जिनमें इनके प्रशासन, कराधान, भूमि सुधार, सिंचाई प्रणालियों और व्यापारिक प्रथाओं का विस्तृत विवरण मिलता है. ये शिलालेख इस राजवंश की धार्मिक सद्भाव की भावना को भी उजागर करते हैं. इनमें दक्षिण-पूर्व एशिया के श्रीविजय शासकों द्वारा स्थापित एक बौद्ध विहार के लिए 'अनैमंगलम' गांव को दान में दिए जाने का उल्लेख है. इतिहासकारों का मानना ​​है कि ये प्लेट्स लगभग एक हजार साल पहले दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच मौजूद मजबूत समुद्री, कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों का दुर्लभ प्रमाण प्रस्तुत करती हैं. चोल शासन के स्वर्ण युग से जुड़ी ये पट्टिकाएं भारत के दो सबसे शक्तिशाली समुद्री सम्राटों- राजराज चोल प्रथम (985-1014 ईस्वी) और उनके बेटे राजेंद्र चोल प्रथम (1014-1044 ईस्वी) के शासनकाल को दर्शाती हैं. अनैमंगलम गांव का इतिहास: अनैमंगलम, भारत के तमिलनाडु राज्य में नागापट्टनम के पास स्थित एक गांव है. ऐतिहासिक दृष्टि से यह गांव इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां सम्राट राजराजा चोल प्रथम ने 'चूड़ामणि विहार' नामक बौद्ध मठ को शाही भूमि दान में दी थी. इस मठ का निर्माण 1005 ईस्वी के आसपास श्रीविजय राजा श्री विजय मारविजयतुंगवर्मन ने करवाया था. सम्राट राजराजा चोल प्रथम ने इस मठ के भरण-पोषण के लिए अनैमंगलम गांव से प्राप्त होने वाले राजस्व को अनुदान के रूप में दे दिया था. राजराजा के पुत्र, राजेंद्र चोल प्रथम ने इस अनुदान को औपचारिक रूप प्रदान करते हुए, इसे 24 ताम्र-पत्रों (21 बड़े और 3 छोटे) पर उत्कीर्ण करवाने का आदेश दिया. चोल वंश की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का प्रमाण हैं ताम्र पट्टिकाएं: … Read more

अडानी ग्रुप की एंट्री से चमकी JP की जमीन, खबर आते ही शेयरों में उछाल

कानपुर भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट पोर्ट और लॉजिस्टिक्स ऑपरेटर कंपनी अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (APSEZ) ने आज घरेलू बाजार में एक बहुत बड़ा कॉर्पोरेट सौदा करने का ऐलान किया है। अडानी पोर्ट्स संकट में फंसी कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के रेजोल्यूशन प्लान (दिवाला प्रक्रिया समाधान) के तहत जेपी फर्टिलाइजर्स एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड (JFIL) में 100% हिस्सेदारी खरीदने जा रही है। यह पूरा सौदा ₹1,500 करोड़ की नकद (Cash) डील के जरिए होगा। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं। इस अधिग्रहण (Acquisition) के बाद जेपी फर्टिलाइजर्स की सहायक कंपनी कानपुर फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (KFCL) पर अडानी पोर्ट्स का अप्रत्यक्ष (Indirect) नियंत्रण हो जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस डील के जरिए अडानी ग्रुप को कानपुर में 243 एकड़ बेशकीमती इंडस्ट्रियल और कमर्शियल जमीन का मालिकाना हक मिल जाएगा, जो आने वाले समय में उत्तर भारत के व्यापार की दिशा बदल सकता है। उम्मीद की जा रही है कि इससे हजारों लोगों को नौकरियां मिलेंगी। भले ही यह सौदा एक फर्टिलाइजर कंपनी का दिख रहा हो, लेकिन अडानी पोर्ट्स की नजर इस कंपनी की कानपुर वाली जमीन पर है। अडानी ग्रुप इस 243 एकड़ जमीन का इस्तेमाल खाद बनाने के लिए नहीं, बल्कि उत्तर भारत में एक विशाल मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (MMLP) और आधुनिक वेयरहाउसिंग (गोदाम) हब बनाने के लिए करने जा रहा है। रणनीतिक फायदा:- कानपुर को उत्तर भारत का एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र माना जाता है। इस जमीन पर लॉजिस्टिक्स पार्क बनने से अडानी ग्रुप का जमीनी ट्रांसपोर्ट नेटवर्क (Inland Logistics) बेहद मजबूत हो जाएगा। कंपनी ने लक्ष्य रखा है कि साल 2031 तक वह देश में अपने मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्कों की संख्या को 12 से बढ़ाकर 16 करेगी और अपनी वेयरहाउसिंग क्षमता को लगभग चार गुना तक बढ़ाएगी। कानपुर का यह प्रोजेक्ट इसी महा-प्लान का एक अहम हिस्सा है। जयप्रकाश एसोसिएट्स (Jaypee Group) लंबे समय से कर्ज के जाल में फंसी थी, जिसके समाधान के लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में दिवाला प्रक्रिया चल रही थी। इस साल की शुरुआत में वित्तीय लेनदारों (लेंडर्स) के बहुमत के समर्थन से एनसीएलटी ने जेपी एसोसिएट्स के लिए अडानी ग्रुप के ₹14,535 करोड़ के रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दी थी। दिलचस्प बात यह है कि दिग्गज उद्योगपति अनिल अग्रवाल की कंपनी 'वेदांता' ने इसके लिए अधिक बोली लगाई थी, लेकिन बैंकों और कर्जदाताओं ने वेदांता के प्रस्ताव को खारिज कर अडानी के प्लान पर भरोसा जताया। अडानी पोर्ट्स ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि जेपी एसोसिएट्स के लिए यह रेजोल्यूशन प्लान अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड द्वारा सबमिट किया गया था। इसे मार्च 2026 में NCLT (National Company Law Tribunal) की इलाहाबाद बेंच ने मंजूरी दी थी और बाद में मई 2026 में नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने भी इस फैसले को सही ठहराया। इस सौदे के लिए भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of India) की जरूरी मंजूरी अगस्त 2025 में ही मिल चुकी थी। नियमों के अनुसार, 17 मार्च 2026 को मिली एनसीएलटी की मंजूरी के बाद अगले 90 दिनों के भीतर इस ₹1,500 करोड़ के अधिग्रहण की प्रक्रिया को पूरी तरह से फाइनल (Consummated) कर लिया जाएगा। अडानी पोर्ट्स (Adani Ports and Special Economic Zone Ltd) के शेयरों में आज (21 मई 2026) हल्की लेकिन सकारात्मक तेजी देखने को मिली। खबर लिखे जाने तक स्टॉक 0.78% चढ़कर ₹1,786.40 पर कारोबार कर रहा था। हाल ही में कानपुर फर्टिलाइजर्स (Kanpur Fertilizers) अधिग्रहण और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क विस्तार की खबरों ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। जून 2010 में बनी जेपी फर्टिलाइजर्स (JFIL) का सालाना टर्नओवर पिछले कुछ सालों में नाममात्र (FY24 में ₹25,000 और FY25 में ₹2,000) का रह गया था। लेकिन, अडानी ग्रुप के हाथों में आने के बाद इसकी खाली पड़ी जमीनों का उपयोग देश के लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए किया जाएगा। यह डील उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास और रोजगार के नए रास्ते भी खोलेगी।

सुशासन तिहार बना जनसमस्याओं के समाधान का अभियान, CM विष्णु देव साय का बड़ा संदेश

सुशासन तिहार जनता की समस्याओं के समाधान का अभियान, सरकार पहुंच रही लोगों के द्वार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय रामानुजनगर-पटना समाधान शिविर में मुख्यमंत्री ने की महत्वपूर्ण घोषणाएं: रामपुर-रामानुजनगर में मिनी स्टेडियम, पटना में हायर सेकेंडरी स्कूल तथा सूरजपुर पॉलीटेक्निक की बाउंड्रीवाल निर्माण की घोषणा रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत सूरजपुर जिले के रामानुजनगर-पटना में आयोजित समाधान शिविर में आमजन से संवाद करते हुए कहा कि सुशासन तिहार जनता की समस्याओं के समाधान का अभियान है, जिसके माध्यम से शासन और प्रशासन स्वयं लोगों के द्वार तक पहुँचकर उनकी शिकायतों, समस्याओं और आवश्यकताओं का निराकरण सुनिश्चित कर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना और आम नागरिकों को बेहतर से बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि  सरकार का दायित्व है कि वह लोगों के बीच जाकर जमीनी वास्तविकताओं को समझे और यह सुनिश्चित करे कि योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ सही व्यक्ति तक सही समय पर पहुँच रहा है या नहीं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार के अंतर्गत यह उनका 11वाँ जिला प्रवास है और 10 जून तक प्रदेश के सभी 33 जिलों का दौरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में अधिकारियों के साथ योजनाओं के क्रियान्वयन, राजस्व प्रकरणों के निराकरण तथा लंबित मामलों की समीक्षा की जा रही है और ग्राम पंचायत स्तर पर समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि नागरिक सुविधाओं और विकास कार्यों की गुणवत्ता के मामले में किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा तथा औचक निरीक्षण के माध्यम से व्यवस्थाओं की सतत निगरानी की जा रही है। उन्होंने तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले ग्रामीण भाई-बहन नंगे पैर जंगलों में तेंदूपत्ता संग्रहण करने जाते थे, जिससे उन्हें चोट लगने का खतरा रहता था, लेकिन चरण पादुका योजना के माध्यम से अब उन्हें राहत और सुरक्षा मिल रही है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार किसानों, महिलाओं, गरीब परिवारों और ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि किसानों को 3716 करोड़ रुपये बोनस वितरित किया गया है, 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जा रही है तथा सरकार बनने के बाद 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने उपस्थित महिलाओं से महतारी वंदन योजना की राशि मिलने की जानकारी भी ली और बताया कि लगभग 70 लाख महिलाएँ इस योजना से लाभान्वित हो रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि रामलला दर्शन योजना, मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना और अटल डिजिटल सेवा केंद्रों के माध्यम से नागरिकों तक आवश्यक सुविधाएँ पहुँचाई जा रही हैं, जबकि ई-डिस्ट्रिक्ट प्रणाली के जरिए आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र सहित अनेक सेवाएँ घर बैठे उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल्द ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन शुरू की जाएगी, जहाँ नागरिक टोल-फ्री नंबर के माध्यम से अपनी समस्याएँ दर्ज करा सकेंगे और उनके निराकरण की नियमित मॉनिटरिंग होगी। उन्होंने मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि बिजली बिल समाधान शिविर 31 जून तक आयोजित किए जाएंगे तथा लोगों से इसका लाभ लेने की अपील की। साथ ही प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से जुड़कर ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का आग्रह भी किया। धान बुवाई के मौसम का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने किसानों को आश्वस्त किया कि खाद, बीज, नैनो डीएपी और नैनो यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है, ताकि खेती की लागत कम हो और किसानों को समय पर संसाधन मिल सकें। मुख्यमंत्री साय ने जिले के विकास के लिए तीन महत्वपूर्ण घोषणाएँ करते हुए रामपुर-रामानुजनगर में मिनी स्टेडियम निर्माण, पटना में हायर सेकेंडरी स्कूल तथा नगर पालिका सूरजपुर पॉलीटेक्निक की बाउंड्रीवाल निर्माण की घोषणा की। उन्होंने कहा कि विकसित और समृद्ध छत्तीसगढ़ का निर्माण राज्य सरकार का संकल्प है और विकास कार्यों की गति को और तेज किया जाएगा। कार्यक्रम के पश्चात मुख्यमंत्री किसान रघुनंदन सिंह के निवास पहुँचे, जहाँ उन्होंने हितग्राहियों के साथ सरई पत्ते से बने दोने-पत्तल में परोसे गए छत्तीसगढ़ी पारंपरिक भोजन का आत्मीयता से स्वाद लिया। मिट्टी के चूल्हे पर बनी कोयलार भाजी, कोचई पत्ते से बना ईढ़र और आम की चटनी जैसे पारंपरिक व्यंजनों के साथ मिट्टी के गिलास में जल ग्रहण कर मुख्यमंत्री ने प्रदेश की संस्कृति, परंपरा और ग्रामीण जीवन से अपने गहरे जुड़ाव का संदेश दिया।

स्कूली शिक्षा में बड़ा बदलाव, छात्रों को पढ़ाया जाएगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

स्कूली शिक्षा में कक्षा 8 से 12 में कृ‍त्रिम बुद्धिमता (एआई) के कौशल को किया जाये शामिल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया एक जुलाई से पहले पूरी कर ली जाए सभी स्कूलों में बनाई जाए बाउण्ड्री वॉल्स शत-प्रतिशत रिजल्ट देने वाली शालाओं को करें सम्मानित सम्राट विक्रमादित्य की जीवनी को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाएं पूर्व छात्र-छात्रा सम्मेलन कराएं "शिक्षा घर योजना" के प्रस्ताव को मिली सैद्धांतिक सहमति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की स्कूल शिक्षा विभाग की योजनाओं एवं गतिविधियों की समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सम्राट विक्रमादित्य की जीवनी को स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाये। गुरू सांदीपनि के जीवन पर भी रोचक पुस्तक तैयार की जाए। स्कूली शिक्षा में कक्षा 8 से 12 में कृ‍त्रिम बुद्धिमता (एआई) के कौशल को कैसे जोड़ा जाए, इस पर भी एक कार्य योजना तैयार की जाए। निजी विद्यालय खोलने के लिए सामाजिक संस्थाओं और संगठनों को प्रोत्साहन दिया जाए। अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया एक जुलाई से पहले पूरी कर ली जाए। सत्र प्रारंभ होने से पहले स्कूलों में सभी पूर्व तैयारियां कर ली जाएं। प्रदेश की सभी आंशिक जीर्ण-शीर्ण शालाओं की तत्काल मरम्मत करा ली जाए। सभी स्कूलों में बाउण्ड्री वॉल्स बनाई जाए। एक जुलाई से गुरू पूर्णिमा (29 जुलाई) तक "शिक्षक वंदना कार्यक्रम", अभिभावकों एवं जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में आयोजित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को मंत्रालय में स्कूल शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं और अन्य गतिविधियों की समीक्षा की। बैठक में स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश को विकसित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए हमारी सरकार सांदीपनि विद्यालय जैसी अत्याधुनिक शालाओं में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराकर प्रदेश की नींव मजबूत कर रही है। प्रदेश के हर विद्यार्थी तक उत्कृष्ट शैक्षणिक सुविधाएं और संसाधन समय पर पहुंचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। विभागीय गतिविधियों में तेजी लाएं और 16 जून से प्रारंभ हो रहे शैक्षणिक सत्र से पहले सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्कूलों में पूर्व छात्र-छात्रा सम्मेलन कराए जाएं, ताकि ऐसे विद्यार्थी जो अपने विद्यालय से भावनात्मक रूप से जुड़े हैं, वे उस विद्यालय के विकास-विस्तार में कुछ योगदान भी कर सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने परीक्षा परिणामों को और अधिक बेहतर बनाने के लिए शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने, नियमित मॉनीटरिंग, तकनीक और नवाचार आधारित शिक्षण पद्धति अपनाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जिन शालाओं में शत-प्रतिशत रिजल्ट आया है, उनके शिक्षकों का सार्वजनिक सम्मान किया जाएगा। बैठक में बताया गया कि प्रदेश की 26 शालाएं ऐसी हैं, जहां शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम आया है। यहां के सारे विद्यार्थी उत्तीर्ण हो गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन शालाओं के अतिरिक्त 90 या 95 प्रतिशत से अधिक रिजल्ट देने वाली शालाओं को भी सम्मानित किया जाए। उन्होंने कहा कि सांदीपनि विद्यालय की अवधारणा/योजना को जन-जन तक पहुंचाने के लिए एक विस्तृत कार्य योजना भी तैयार की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को ऐसे जिलों को चिन्हित करने को कहा, जहां सभी शालाओं में सभी प्रकार की व्यवस्थाएं उपलब्ध हों, साथ ही भौतिक एवं मानव संसाधन की कमी वाले जिलों की भी अलग श्रेणी तैयार की जाए। इससे सरकार को इन्हीं जिलों पर फोकस करने में आसानी होगी। कमी वाले जिलों पर इसी साल से काम प्रारंभ किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारी स्थानीय विधायक के साथ बैठकर पूरी विधानसभा क्षेत्र के स्कूलों में व्यवस्थाओं की बेहतरी के लिए प्रयास करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उनके द्वारा समय-समय पर की गई सभी घोषणाओं का जल्द से जल्द पालन करायें। एक वर्ष से पुरानी कोई भी घोषणा लंबित न रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वर्तमान में स्कूल शिक्षा विभाग की संचालित 14 विभागीय योजनाओं को निरंतर रखने की सहमति दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के बेहतरी के लिए सरकार हर जरूरी प्रयास करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि छोटे बच्चों की शिक्षा के लिए प्रारंभ से ही माहौल बनाया जाए। महिला बाल विकास विभाग भी इसमें योगदान दें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर अब प्रदेश के इतिहास में पहली बार स्कूल शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग बच्चों की गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई के लिए एक साथ मिलकर काम करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिन हाईस्कूलों के आस-पास हायर सेकेण्डरी स्कूल उपलब्ध नहीं हैं, ऐसे हाईस्कूलों को चिन्हित कर उन्हें हायर सेकेण्डरी स्कूलों में प्रोन्नत करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाए। शालाओं में दिया जाए व्यावसायिक प्रशिक्षण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की शालाओं में व्यावसायिक प्रशिक्षण भी दिया जाए। हाईस्कूल एवं हायर सेकेण्डरी कक्षाओं में कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं अन्य रोजगारपरक पाठ्यक्रमों का भी अध्ययन कराया जाए। व्यावसायिक प्रशिक्षण को दृष्टिगत रखते हुए संभव हो तो क्षेत्रीय स्व-सहायता समूहों को भी ऐसी शालाओं और विद्यार्थियों से जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभागीय अधिकारियों को सभी विभागों के विद्यालयों को एक करने की योजना पर तेजी से काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में एनसीसी, एनएसएस जैसे सामाजिक सेवा कार्य को भी बढ़ावा देने वाली इकाइयों को प्रोत्साहित करें। विद्यालयों में स्वास्थ्य परीक्षण, ड्राइविंग लायसेंस कैम्प, प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग की सुविधा उपलब्ध कराने के भी प्रयास किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शासकीय स्कूलों से पास आउट विद्यार्थी 12वीं कक्षा के बाद उच्च शिक्षा, रोजगार, कृषि कार्य, पैतृक व्यवसाय, कौशल प्रशिक्षण जैसे किस कार्य/रोजगार में लगे हैं, इसकी ट्रैकिंग भी होनी चाहिए। इससे सरकार के पास हमारे युवाओं का एक डेटाबेस तैयार होगा। शासकीय स्कूलों में बढ़ी नामांकन की दर बैठक में सचिव स्कूल शिक्षा ने बताया कि शासकीय स्कूलों में विद्यार्थियों के नामांकन वृद्धि के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बेहद सकारात्मक परिणाम सामने आया है। वर्ष 2024-25 की तुलना में वर्ष 2025-26 में शासकीय विद्यालयों में कक्षा-1 में नामांकन में करीब 32.4 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं कक्षा 9 से 12 के नामांकन में 4.25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो पिछले वर्षों की तुलना में … Read more

योगी सरकार का बड़ा एक्शन, 9 वरिष्ठ IPS अफसरों की नई तैनाती

लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार ने पुलिस प्रशासन में बड़ा फेरबदल करते हुए गुरुवार को 9 आईपीएस अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं. इस प्रशासनिक बदलाव में चार वरिष्ठ एडीजी रैंक के अधिकारियों को पदोन्नति देकर डीजी पद पर नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं. सरकार के इस फैसले को पुलिस व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है आलोक सिंह PAC के नए DG होंगे इस फेरबदल में सबसे प्रमुख नियुक्तियों में आलोक सिंह को प्रोविंशियल आर्म्ड कांस्टेबुलरी (पीएसी) का नया डीजी बनाया गया है. इससे पहले वे कानपुर जोन में एडीजी पद पर कार्यरत थे. वहीं बिनोद कुमार सिंह को सीआईडी एवं साइबर क्राइम का डीजी नियुक्त किया गया है. वे इसी विभाग में एडीजी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे।  इसके अलावा जय नारायण सिंह, जो अब तक पावर कारपोरेशन में डीजी के पद पर थे, उन्हें आर्थिक अपराध शाखा (EOW) का नया डीजी बनाया गया है. इसी तरह डीके ठाकुर को नागरिक सुरक्षा एवं विशेष सुरक्षा बल से स्थानांतरित कर होमगार्ड विभाग का डीजी नियुक्त किया गया है।  अनुपम कुलश्रेष्ठ को कानपुर जोन का ADG बनाया गया एडीजी स्तर पर भी कई अहम बदलाव किए गए हैं. अनुपम कुलश्रेष्ठ, जो अब तक आगरा जोन की एडीजी थीं, उन्हें कानपुर जोन का नया एडीजी बनाया गया है. वहीं यातायात एवं सड़क सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे ए. सतीश गणेश को अब एडीजी क्राइम की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।  एसके भगत ADG आगरा जोन बने इसी क्रम में आरके स्वर्णकार, जो एडीजी पीएसी के पद पर कार्यरत थे, उन्हें पावर कारपोरेशन का एडीजी नियुक्त किया गया है. इसके साथ ही एसके भगत को एडीजी क्राइम से हटाकर आगरा जोन का नया एडीजी बनाया गया है. आईजी स्तर पर भी बदलाव किया गया है, जिसमें गीता सिंह को अभियोजन निदेशालय से स्थानांतरित कर प्रशिक्षण निदेशालय का नया आईजी नियुक्त किया गया है।  यह व्यापक तबादला आदेश उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी किया गया है. प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस फेरबदल का उद्देश्य पुलिस व्यवस्था में दक्षता बढ़ाना, कानून-व्यवस्था को मजबूत करना और विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों में कार्यक्षमता को नई दिशा देना है. सरकारी आदेश के बाद पुलिस महकमे में नई जिम्मेदारियों को लेकर अधिकारियों के बीच हलचल तेज हो गई है और सभी अधिकारी जल्द ही अपने-अपने नए पदभार संभालेंगे।  IPS अधिकारियों की तबादला सूची 1. जय नरायन सिंह (बैच: 1994) पुरानी तैनाती: पुलिस महानिदेशक / अपर पुलिस महानिदेशक, उ०प्र० पावर कॉरपोरेशन लि०, लखनऊ नई तैनाती: पुलिस महानिदेशक, ई०ओ०डब्ल्यू० (EOW), उ०प्र०, लखनऊ 2. ध्रुव कान्त ठाकुर (बैच: 1994) पुरानी तैनाती: पुलिस महानिदेशक, नागरिक सुरक्षा, उ०प्र० (अतिरिक्त प्रभार: विशेष सुरक्षा बल) नई तैनाती: पुलिस महानिदेशक/महासमादेष्टा, होमगार्ड, उ०प्र०, लखनऊ (अतिरिक्त प्रभार: नागरिक सुरक्षा, उ०प्र०) 3. बिनोद कुमार सिंह (बैच: 1994) पुरानी तैनाती: पुलिस महानिदेशक, सी०आई०डी०, उ०प्र०, लखनऊ (अतिरिक्त प्रभार: साइबर क्राइम, उ०प्र०) नई तैनाती: पुलिस महानिदेशक, सी०आई०डी०, उ०प्र०, लखनऊ (अतिरिक्त प्रभार: साइबर क्राइम और यू०पी०-112, लखनऊ)  4. आलोक सिंह (बैच: 1995) पुरानी तैनाती: पुलिस महानिदेशक / अपर पुलिस महानिदेशक, कानपुर जोन, कानपुर नई तैनाती: पुलिस महानिदेशक, पीएसी (PAC) मुख्यालय, उ०प्र०, लखनऊ (अतिरिक्त प्रभार: विशेष सुरक्षा बल, उ०प्र०) 5. अनुपम कुलश्रेष्ठ (बैच: 1995) पुरानी तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, आगरा जोन, आगरा नई तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, कानपुर जोन, कानपुर 6. ए० सतीश गणेश (बैच: 1996) पुरानी तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, यातायात एवं सड़क सुरक्षा, निदेशालय, उ०प्र०, लखनऊ नई तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, यातायात एवं सड़क सुरक्षा, निदेशालय, लखनऊ (अतिरिक्त प्रभार: अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध, उ०प्र०, लखनऊ) 7. डॉ० आर० के० स्वर्णकार (बैच: 1996) पुरानी तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, पीएसी (PAC) मुख्यालय, उ०प्र० नई तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, उ०प्र० पावर कॉरपोरेशन लि०, लखनऊ 8. एस० के० भगत (बैच: 1998) पुरानी तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध, उ०प्र०, लखनऊ नई तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, आगरा जोन, आगरा 9. गीता सिंह (बैच: 2007) पुरानी तैनाती: पुलिस महानिरीक्षक (IG), अभियोजन, उ०प्र०, लखनऊ नई तैनाती: पुलिस महानिरीक्षक (IG), प्रशिक्षण निदेशालय, उ०प्र०, लखनऊ

अपर कलेक्टर पोस्टिंग को लेकर उलझी सरकार, वरिष्ठ अफसरों में नाराजगी के संकेत

भोपाल  मध्य प्रदेश में राज्य प्रशासनिक सेवा के सीनियर अफसरों को अपर कलेक्टर पद पर पदस्थ करने के मामले में राज्य सरकार संतुलन नहीं बना पा रही है। लोकसभा चुनाव के पहले से पोस्टिंग का बिगड़ा तालमेल अब तक पटरी पर नहीं आ पाया है। इसका असर यह है कि करीब 20 जिलों में अपर कलेक्टर के पद रिक्त हैं। नियमित अधिकारी की पोस्टिंग नहीं होने से एक ओर जिलों की प्रशासनिक व्यवस्था पर असर पड़ रहा है तो दूसरी ओर मंत्रालय और विभागाध्यक्ष कार्यालयों में अवर सचिव की जिम्मेदारी निभा रहे युवा अफसरों में गुस्सा भी है कि सरकार उनसे फील्ड का काम नहीं ले रही है। राज्य शासन द्वारा प्रदेश के बड़े जिलों भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर में दो से तीन अपर कलेक्टर की पदस्थापना की जाती है। यहां कलेक्टर कार्यालय में इतने पद स्वीकृत भी हैं लेकिन इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में यह पद रिक्त बताए जा रहे हैं। इसके अलावा छोटे जिलों में भी अपर कलेक्टर के पद पर पोस्टिंग नहीं होने से कलेक्टरों को व्यवस्था संचालन के लिए अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपनी पड़ रही है। एसडीएम कैडर के पद नहीं भरे गए यही स्थिति संयुक्त कलेक्टर के पदों के मामले में भी है जिन्हें जिले में एसडीएम की जिम्मेदारी सौंपी जाती है, इस कैडर के भी सभी पद नहीं भरे गए हैं। राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों ने कहा है कि सरकार अधिकारी होने के बाद भी फील्ड में पोस्टिंग न करके इस कैडर के अफसरों की ऊर्जा शक्ति का लाभ नहीं ले पा रही है। जिलों में सीईओ जिला पंचायत का पद भी राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों के लिए होता है, वहां सरकार ने राज्य प्रशासनिक सेवा के मुकाबले युवा आईएएस अफसर अधिक संख्या में तैनात किए हैं। इन जिलों में खाली हैं अपर कलेक्टर के पद जिन जिलों में अपर कलेक्टर के पद रिक्त बताए जा रहे हैं उसमें जबलपुर, नरसिंहपुर, नर्मदापुरम, सीहोर, शाजापुर, बड़वानी, बुरहानपुर, ग्वालियर, छतरपुर, निवाड़ी, इंदौर के अलावा आठ अन्य जिले शामिल हैं। इन सभी जिलों में राज्य प्रशासनिक सेवा के अपर कलेक्टर की पोस्टिंग नहीं किए जाने के कारण कलेक्टरों को प्रभार के सहारे व्यवस्था संचालित करनी पड़ रही है। नए सिलेक्ट युवाओं की भी मंत्रालय और विभागाध्यक्ष कार्यालयों में पोस्टिंग अभी जो पोस्टिंग है उसमें पीएससी से चुने गए नए युवाओं को भी फील्ड में पदस्थ करने के बजाय मंत्रालय और विभागाध्यक्ष कार्यालयों में पदस्थ रखा है। बताया जाता है कि वर्तमान में अधिकांश युवा अफसर मंत्रालय में अवर सचिव, ओएसडी बनकर फाइलों के निराकरण में लगे हैं। इस कारण उनमें व्यवस्था के प्रति गुस्सा भी है। ऐसे युवा अफसरों का कहना है कि जिलों में डिप्टी कलेक्टर, एसडीएम, अपर कलेक्टर और संयुक्त कलेक्टर की जिम्मेदारी निभा रहे कई सीनियर अफसर मंत्रालय में पदस्थ किए जा सकते हैं लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। कनिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और कम अनुभवी अफसरों को फील्ड में मौका नहीं दिया जा रहा है। पूर्व में एसआईआर के कार्य के कारण स्‍थानांतरण नहीं करने का सरकार का बहाना था और अब जबकि ऐसी कोई स्थिति नहीं है तो भी पदस्थापना नहीं की जा रही है।

बॉयफ्रेंड से शादी करने वाली वायरल गर्ल की हाई कोर्ट में गुहार, दस्तावेजों पर उठाए सवाल

इंदौर   प्रयागराज महाकुंभ में माला बेचने वाली सोशल मीडिया पर वायरल हुई युवती ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में याचिका दाखिल की है. इसमें उसने कहा है "जन्म प्रमाण पत्र से संबंधित दस्तावेजों में छेड़छाड़ की गई है." युवती ने याचिका में ये भी कहा है "उसके पति के खिलाफ झूठा प्रकरण दर्ज करवाया गया है।  परिजनों ने बेटी को नाबालिग बताया प्रयागराज महाकुंभ में वायरल हुई युवती ने कुछ माह पहले केरल में रहने वाले फरमान खान नामक व्यक्ति के साथ शादी कर ली थी. इसका उसके परिजनों ने विरोध किया था. युवती के परिजनों ने आरोप लगाते हुए पुलिस को शिकायत की थी "उनकी बेटी नाबालिग है. फरहान खान से ने उसे फंसाकर शादी की है." खरगोन पुलिस ने फरहान खान सहित अन्य लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी।  युवती की जन्मतिथि पर विवाद इंदौर हाई कोर्ट में वायरल गर्ल के एडवोकेट ने उसकी उम्र को लेकर याचिका लगाई है. याचिका में मध्य प्रदेश शासन, डीजीपी मध्य प्रदेश, डीजीपी केरल और युवती के पिता को पक्षकार बनाया गया है. वकील ने कोर्ट को बताया है कि युवती की वास्तविक जन्म तिथि 1 जनवरी 2008 है और इस आधार पर उसके आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड बने हैं।  युवती के वकील बीएल नागर का कहना है "1 जनवरी 2009 की जन्म तिथि वाला प्रमाण पत्र फर्जी तरीके से तैयार किया गया है. इसकी जांच होनी चाहिए." वायरल गर्ल महाराष्ट्र के फरमान के साथ डेढ़ साल से रिश्ते में थी. फेसबुक पर शुरू हुए इस रिश्ते का युवती के परिवार ने कड़ा विरोध किया था।  अपने प्रेमी से तिरुवनंतपुरम में रचाई शादी अपने पिता से झगड़े के बाद ये युवती अपने प्रेमी फरमान खान साथ ट्रेन से तिरुवनंतपुरम पहुंची. युवती का दावा है कि उसके पिता उसे दूसरी शादी के लिए मजबूर कर रहे हैं और वह स्वतंत्र रूप से जीना चाहती है. युवती ने तिरुवनंतपुरम में 11 मार्च 2026 को अपने बॉयफ्रेंड फरमान खान से शादी कर ली।  कैसे शुरू हुआ विवाद? इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब कुंभ मेले के दौरान माला बेचते हुए मोनालिसा का वीडियो वायरल हुआ और इस लोकप्रियता के बाद उन्हें एक फिल्म का ऑफर मिला। बताया जा रहा है कि इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान उनकी मुलाकात उत्तर प्रदेश के बागपत निवासी फरमान खान से हुई और दोनों के बीच प्रेम संबंध बन गए। दोनों ने अरूमानूर श्री नैनार देवा मंदिर में रचाई थी शादी इसके बाद दोनों ने बीते 11 मार्च 2026 को केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित अरूमानूर श्री नैनार देवा मंदिर में प्रेम विवाह कर लिया। दूसरी तरफ, युवती के पिता ने महेश्वर थाने में शिकायत दर्ज कराई कि उनकी बेटी नाबालिग है और फरमान खान उसे बहला-फुसलाकर भगा ले गया है, जिसके आधार पर पुलिस ने फरमान के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी थी। अब इस मामले में नया मोड़ तब आया जब 'वायरल गर्ल' ने खुद अपने पति के बचाव में इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। युवती के अधिवक्ता बीएल नागर द्वारा दायर इस याचिका में दावा किया गया है कि युवती की वास्तविक जन्मतिथि 1 जनवरी 2008 है, जिसके आधार पर वह पूरी तरह बालिग (वयस्क) है। पिता का क्या है आरोप? वहीं, मोनालिसा के पिता द्वारा पुलिस रिकॉर्ड में उसकी जन्मतिथि 1 जनवरी 2009 बताई गई है, जिससे वह नाबालिग साबित हो रही है। युवती का आरोप है कि 2009 की जन्मतिथि वाला प्रमाण पत्र गलत तरीके से तैयार किया गया है, जबकि उसकी वास्तविक जन्मतिथि के आधार पर ही उसके आधिकारिक पहचान पत्र (वोटर आईडी और अन्य दस्तावेज) बने हुए हैं। इस याचिका में मध्य प्रदेश शासन, डीजीपी मध्य प्रदेश, डीजीपी केरल और युवती के पिता को पक्षकार बनाया गया है। अदालत से गुहार लगाई गई है कि किसी सक्षम अधिकारी से इस पूरे उम्र विवाद की निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाए और युवती का वास्तविक जन्म प्रमाण पत्र सामने लाया जाए ताकि मामले में त्वरित और न्यायसंगत कार्रवाई हो सके। महाकुंभ के घाटों से शुरू हुआ यह सफर अब अदालत की चौखट तक पहुंच गया है, और अब देखना यह होगा कि इंदौर हाईकोर्ट दस्तावेजों की जांच के बाद इस उम्र विवाद और प्रेम विवाह पर क्या फैसला सुनाता है।

देश में इबोला खतरे की आशंका पर एडवाइजरी जारी, सरकार सतर्क

नई दिल्ली केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने वैश्विक स्तर पर बढ़ रहे इबोला वायरस के खतरे को देखते हुए देश के सभी बंदरगाहों, हवाई अड्डों और एंट्री पॉइंट्स पर सख्त हेल्थ एडवाइजरी जारी की है। यह कदम विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा पिछले हफ्ते इबोला प्रकोप को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किए जाने के बाद एहतियात के तौर पर उठाया गया है। एडवाइजरी के अनुसार, अत्यधिक जोखिम वाले देशों से आने या वहां से होकर गुजरने करने वाले यात्रियों की सघन निगरानी की जाएगी। उनमें कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, युगांडा और दक्षिण सूडान जैसे देश शामिल हूं। इन देशों से आने वाले किसी भी यात्री में यदि बीमारी के लक्षण दिखते हैं तो उन्हें इमिग्रेशन चेक से पहले एयरपोर्ट के हेल्थ ऑफिसर या हेल्प डेस्क को इसकी सूचना देनी होगी। यदि कोई यात्री इबोला के किसी संदिग्ध या पुष्ट मरीज के खून या शारीरिक तरल पदार्के सीधे संपर्क में आया है, तो उसे भी अनिवार्य रूप से स्वास्थ्य अधिकारियों को रिपोर्ट करना होगा। स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपील करते हुए कहा, "यात्रियों की सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमों को ध्यान में रखते हुए कृपया हेल्थ स्क्रीनिंग और सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों में सहयोग करें।" यह व्यवस्था काफी हद तक कोविड-19 महामारी के दौर की याद दिलाती है। राहत की बात यह है कि वर्तमान में भारत में इबोला का एक भी मामला सामने नहीं आया है। यह एडवाइजरी पूरी तरह से एहतियाती तौर पर जारी की गई है। हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस बात पर चिंता जताई थी कि यह वायरस बेहद तेजी से फैल रहा है, जिसके बाद ही इसे अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया गया। खतरे को भांपते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने बुधवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में राज्यों को सभी मोर्चों पर तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। एसओपी के मुताबिक, केंद्र ने राज्यों के साथ विस्तृत SOP साझा की है, जिसमें आगमन से पहले और बाद की स्क्रीनिंग, क्वारंटाइन प्रोटोकॉल, केस मैनेजमेंट, रेफरल सिस्टम और लैब टेस्टिंग की प्रक्रिया शामिल है। स्वास्थ्य सचिव ने सभी नामित स्वास्थ्य केंद्रों को आपसी समन्वय के साथ निगरानी रखने और समय पर रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। यह वायरस ऑर्थोइबोलावायरस परिवार से संबंधित एक जूनोटिक संक्रमण है, जो इंसानों के लिए बेहद घातक और जानलेवा साबित हो सकता है। सामान्य फ्लू की तरह बुखार, कमजोरी, थकान, सिरदर्द, गले में खराश, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द इसके लक्षण है। गंभीर स्थिति में उल्टी और दस्त जैसे लक्षण होते हैं। शरीर के आंतरिक और बाहरी अंगों से बिना किसी स्पष्ट कारण के खून बहना इस बीमारी का सबसे मुख्य और विशिष्ट लक्षण है। कैसे फैलता है यह संक्रमण? संक्रमित व्यक्ति के खून, लार, पसीना, आंसू, उल्टी, मल और मां के दूध जैसे शारीरिक तरल पदार्थों के सीधे संपर्क में आने से। वायरस से दूषित कपड़ों, बिस्तरों या सतहों को छूने से। संक्रमण से मरने वाले व्यक्ति के शव के सीधे संपर्क में आने से भी यह तेजी से फैलता है। SOP की भी की जा रही समीक्षा सरकार की ओर से उठाए गए प्रमुख कदमों में स्क्रीनिंग, निगरानी, क्वॉरंटीन और केस मैनेजमेंट से जुड़े एसओपी की समीक्षा शामिल है। पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी को इबोला जांच के लिए नामित किया गया है, जबकि चरणबद्ध तरीके से अन्य प्रयोगशालाओं को भी तैयार किया जा रहा है। अपील जारी, घबराएं नहीं स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और किसी भी अपुष्ट जानकारी को साझा करने से बचें। कहा, सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह सतर्क और किसी भी उभरती स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। कैसे फैलता है इबोला वायरस बता दें कि इबोला वायरस को जानलेवा संक्रमण माना जाता है। इसमें हेमोरेजिक फीवर यानी रक्त स्त्राव के साथ बुखार होता है। इससे पीड़ित मरीज को तेज बुखार आता है और शरीर के इंटर्नल अंगों में खून बहना शुरू हो जाता है और ऑर्गन फेलियर जैसी चीजें भी होती हैं।     इबोला वायरस संक्रमित जंगली जानवरों (जैसे चमगादड़) का मांस खाने से इंसानों में पहुंच सकता है।     इसके अलावा किसी संक्रमित व्यक्ति के खून, पसीने, लार, मल-मूत्र या उल्टी के सीधे संपर्क में आने से फैलता है।     बता दें कि इबोला वायरस पानी या हवा के संपर्क में आने पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता।