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वैश्विक संकट के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत: Morgan Stanley ने जताया भरोसा

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट टेंशन के बावजूद मॉर्गन स्टैनली ने भारत की FY27 (वित्त वर्ष 2026-27) के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.7 प्रतिशत कर दिया है. यह आंकड़ा अप्रैल में दिए गए 6.2 प्रतिशत के पूर्वानुमान से ऊपर है. जियो पॉलिटिकल टेंशन के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहने की उम्मीद है।  पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, एनालिस्ट ने जानकारी दी है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही थमने के कारण तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है. लेकिन मॉर्गन स्टैनली का मानना है कि FY27 में भारत 6.7 प्रतिशत की दर से बढ़ेगा. FY28 में यह ग्रोथ 7 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।  अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा तेल की कीमतें जून 2026 तिमाही में सबसे हाई लेवल पर पहुंचने के बाद कम होने की उम्मीद है. शुरुआती तिमाही में विकास थोड़ा धीमा पड़ सकता है, लेकिन बाद में सुधार होगा. घरेलू मांग, निवेश और नीतिगत सहायता से अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा. मॉर्गन स्टैनली ने चेतावनी भी दी है कि अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं तो विकास पर और ज्यादा दबाव पड़ सकता है।  ब्याज दरों बदलाव होने की संभावना कम मॉर्गन स्टैनली का अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस वित्त वर्ष में ब्याज दरों को स्थिर रखेगा. RBI नीतिगत दर को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रख सकता है और जरूरत पड़ने पर कुछ अन्य फैसले भी ले सकता है।  रिपोर्ट के मुताबिक, महंगाई पर कंट्रोल रखने और रुपये की स्थिरता बनाए रखने के लिए RBI सतर्क रहेगा. मिडिल ईस्ट संकट से ऊर्जा कीमतों में उछाल आने का खतरा है, जिससे महंगाई बढ़ सकती है. फिर भी, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और घरेलू फैक्टर्स से भारत इस चुनौती का सामना कर सकता है।  भारत को मिलेंगी नई संभावनाएं इस संकट के बावजूद भारत की स्थिति अन्य देशों की तुलना में बेहतर है. मॉर्गन स्टैनली के अनुसार, निवेश बढ़कर जीडीपी का 37.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, जिससे अगले पांच साल में अतिरिक्त 800 अरब डॉलर का पूंजी निवेश आ सकता है।  यह वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत को नई संभावनाएं देगा. मध्यम अवधि में 6.5 से 7 प्रतिशत की विकास दर बनाए रखना संभव है. सरकार की सुधार नीतियां, इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर और घरेलू खपत इस विकास को और मजबूत बनाएंगी।  आरबीआई ने दी चेतावनी हालांकि, Reserve Bank of India (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा किसी भी संभावित आर्थिक झटके से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और वैश्विक हालात पर लगातार नजर रखे हुए है.  उन्होंने कहा कि आरबीआई अपनी मौद्रिक नीति के जरिए आर्थिक विकास को बनाए रखने और महंगाई को नियंत्रण में रखने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करेगा।  आरबीआई गवर्नर ने चेतावनी दी कि अगर पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध लंबे समय तक चलता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है. इसका सीधा असर भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। 

कोरोना के बाद नया खतरा? जानिए हंतावायरस कितना खतरनाक है और इसका इलाज कैसे होगा

 नई दिल्ली हंतावायरस से प्रभावित लग्जरी क्रूज शिप एमवी होंडियस की घटना ने दुनिया भर में चिंता पैदा कर दी है. कुछ लोग इसे कोविड-19 जैसी नई महामारी समझ रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह बिल्कुल अलग है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख डॉ. टेड्रोस ने स्पष्ट कहा है कि यह कोविड-19 नहीं है. वर्तमान में हंतावायरस से पब्लिक हेल्थ का खतरा बहुत कम है।  हंतावायरस चूहों से इंसानों में फैलने वाला वायरस है. यह मुख्य रूप से दो प्रकार की बीमारियां पैदा करता है – एक फेफड़ों पर हमला करता है (Hantavirus Pulmonary Syndrome – HPS) और दूसरा किडनी को प्रभावित करता है. यह वायरस चूहों के मूत्र, लार और मल से फैलता है. जब ये सूखकर हवा में उड़ते हैं तो इंसान उन्हें सांस के साथ अंदर ले लेता है. कोविड-19 की तरह यह हवा में आसानी से नहीं फैलता।  कोविड-19 से सबसे बड़ा अंतर कोविड-19 हवा के जरिए बहुत तेजी से फैलता था. एक व्यक्ति से दूसरे में सामान्य बातचीत, खांसने या छींकने से भी संक्रमण हो जाता था. लेकिन हंतावायरस में इंसान से इंसान में संक्रमण बहुत दुर्लभ है. सिर्फ एंडीज स्ट्रेन ही इंसान से इंसान में फैलता है. यह तब होता है जब लंबे समय तक बहुत करीबी संपर्क हो, जैसे घर में साथ रहना या घनिष्ठ संबंध. सामान्य मिलने-जुलने से यह नहीं फैलता।  वैक्सीन अभी तक क्यों नहीं बना?  दुनिया भर में हर साल हंतावायरस से लगभग 60 हजार से एक लाख लोग संक्रमित होते हैं, फिर भी यूरोप, अमेरिका और लैटिन अमेरिका में अभी तक इसका कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है. इस वायरस के कारण होने वाली बीमारी बेहद खतरनाक हो सकती है, खासकर एंडीज स्ट्रेन जो 40 प्रतिशत तक मौत का कारण बन सकता है. हंतावायरस ने एक बार फिर इस सवाल को उठा दिया है कि क्या हमें महामारी आने से पहले ही टीका तैयार करना चाहिए। मॉडर्ना की कोशिश और प्रीक्लिनिकल स्टेज 2023 से अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना दक्षिण कोरिया की कोरिया यूनिवर्सिटी वैक्सीन इनोवेशन सेंटर के साथ mRNA Access प्रोग्राम के तहत काम कर रही है. इस साझेदारी की औपचारिक घोषणा 2024 में की गई थी. चूहों पर किए गए परीक्षणों में इस mRNA वैक्सीन ने अच्छे परिणाम दिखाए हैं. हालांकि, यह वैक्सीन अब भी प्रीक्लिनिकल स्टेज में है और ह्यूमन ट्रायल्स शुरू नहीं हुए हैं।  विशेष बात यह है कि यह वैक्सीन मुख्य रूप से हेमोरेजिक फीवर विद रीनल सिंड्रोम (HFRS) पैदा करने वाले स्ट्रेन पर काम कर रही है, न कि MV होंडियस क्रूज शिप वाले एंडीज स्ट्रेन पर, जो HPS (हंतावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम) का कारण बनता है।  क्रूज संकट के दौरान शेयरों में उछाल MV होंडियस क्रूज शिप पर हंतावायरस के मामले सामने आने के बाद जब मॉडर्ना की इस साझेदारी की खबर आई, तो कंपनी के शेयरों में करीब 10 प्रतिशत की तेजी आई. निवेशकों को उम्मीद है कि अगर भविष्य में बड़े पैमाने पर हंतावायरस का खतरा बढ़ा तो मॉडर्ना का mRNA प्लेटफॉर्म काम आ सकता है. लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि अभी तक यह सिर्फ शुरुआती चरण में है।  लक्षण और मौत का खतरा हंतावायरस के लक्षण शुरू में फ्लू जैसे होते हैं – बुखार, थकान, सिरदर्द. इसके 4-10 दिन बाद सांस लेने में तकलीफ और फेफड़ों में पानी भरना शुरू हो जाता है. HPS का मौत का दर करीब 40% है, जो कोविड-19 से ज्यादा है. लेकिन क्योंकि यह आसानी से नहीं फैलता, इसलिए बड़े स्तर पर फैलने का खतरा बहुत कम है. कोविड-19 का इनक्यूबेशन पीरियड 2-14 दिन था, जबकि हंतावायरस का 1-8 हफ्ते तक।  कोविड-19 से मिला सबक कोविड-19 महामारी ने पूरी दुनिया को सिखाया कि टीका बनाने का सबसे सही समय महामारी शुरू होने से पहले होता है. जब कोविड-19 आया तब mRNA टेक्नोलॉजी पहले से तैयार थी, जिसकी वजह से कुछ महीनों में ही वैक्सीन बन गई. हंतावायरस के मामले में भी यही स्थिति है. वैज्ञानिक सालों से इस पर काम कर रहे हैं, लेकिन लगातार फंडिंग और प्राथमिकता न मिलने के कारण प्रगति धीमी रही है।  दुनिया भर में स्थिति वर्तमान में कोई भी देश हंतावायरस का स्वीकृत टीका नहीं दे रहा है. कुछ देशों में शोध चल रहा है, लेकिन बड़े पैमाने पर उत्पादन और इमरजेंसी उपयोग की मंजूरी अभी दूर है. MV होंडियस वाली घटना ने वैश्विक स्तर पर इस दिशा में ध्यान खींचा है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अब समय आ गया है कि हंतावायरस जैसे जानलेवा वायरस पर गंभीरता से निवेश किया जाए।  मॉडर्ना की यह कोशिश एक अच्छी शुरुआत है. अगर मानव परीक्षण सफल रहे तो mRNA आधारित हंतावायरस वैक्सीन बन सकती है. लेकिन इसमें अभी कई साल लग सकते हैं।  क्रूज शिप पर क्या हुआ? एमवी होंडियस क्रूज शिप पर कुल 11 मामले सामने आए हैं. तीन लोगों – एक डच जोड़े और एक जर्मन पर्यटक – की मौत हो चुकी है. शिप पर सवार सभी लोगों को उनके देशों में भेज दिया गया है. उन्हें क्वारंटाइन में रखा गया है. स्पेन, नीदरलैंड, अमेरिका समेत कई देशों में यात्री पहुंच चुके हैं. विशेषज्ञों का अनुमान है कि कुछ यात्री अर्जेंटीना में शिप पर चढ़ने से पहले ही संक्रमित हो गए थे, क्योंकि वहां यह वायरस पहले से मौजूद है।  महामारी बनने का खतरा? विशेषज्ञों का साफ कहना है कि हंतावायरस से महामारी बनना लगभग असंभव है. क्योंकि इंसान से इंसान में फैलाव बहुत कम और सीमित है. WHO, ECDC और अन्य एजेंसियां इसे अच्छी तरह नियंत्रित करने में सक्षम हैं. कोविड-19 पूरी दुनिया में फैल गया था क्योंकि यह हवा में आसानी से घूमता था. हंतावायरस ऐसा नहीं है।  क्या सावधानी बरतनी चाहिए? जिन लोगों में लक्षण दिखें (बुखार, थकान, सांस लेने में दिक्कत) उन्हें तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. क्वारंटाइन का समय 6 हफ्ते तक रखा जा रहा है क्योंकि वायरस का इनक्यूबेशन लंबा है. हंतावायरस खतरनाक है, लेकिन इसका फैलाव कोविड-19 जैसा नहीं है. चूहों से बचाव, स्वच्छता और सतर्कता रखने से इसका खतरा बहुत कम किया जा सकता है. WHO और स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार निगरानी कर रहे हैं। 

मध्यप्रदेश सरकार का बड़ा फैसला: कर्मचारियों से जुड़े दो पुराने नियमों में होगा बदलाव

भोपाल  मोहन सरकार अपने कर्मचारियों (MP Government employees) से जुड़े दो बड़े नियमों में बदलाव करने जा रही है। वर्षों पहले 'दो ही बच्चे अच्छे' वाली जो बंदिशें लगाई थी, उसे हटाने पर सहमति बन गई है। आदेश कभी भी जारी हो जाएंगे। जिसके बाद उन सैकड़ों कर्मचारियों पर लटकी कार्रवाई की तलवार हट जाएगी, जिन्होंने जाने अनजाने में दो से अधिक बच्चे पैदा किए हैं। सरकार का यह फैसला राहत देने वाला होगा। दूसरी तरफ कुछ शर्तों के साथ अधिकारी, कर्मचारियों के लिए गिफ्ट लेना पहले से आसान हो जाएगा। ये एक वर्ष के भीतर अपनी एक सैलरी के बराबर गिफ्ट ले सकेंगे। ज्यादा कीमती गिफ्ट लेने पर कार्रवाई के दायरे में आएंगे। अधिकारी, कर्मचारियों को निवेश भी सोच समझकर ही करना होगा। गिफ्ट को कमाई का जरिया बनाया तो खैर नहीं निवेश की जाने वाली रकम, कमाई से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। ये सभी प्रावधान नए सिरे से तैयार किए जा रहे सिविल सेवा आचरण नियमों में किया जा रहा है। संशोधित सेवा नियम जारी होने बाकी है। सूत्रों के मुताबिक सरकार उक्त नियमों में संशोधन कर एक तरफ जहां राहत देने जा रही है तो वहीं दूसरी तरफ गिफ्ट को कमाई का जरिया बनाने से रोकने को लेकर भी कई कड़े प्रावधान किए जाने पर विचार चल रहा है। वास्तविकता से दूर गिफ्ट लेने की शर्त पुराने नियमों के तहत अभी अधिकारी-कर्मचारी 1500 या इससे अधिक का गिफ्ट स्वीकार नहीं कर सकते। समय के साथ यह बात वास्तविकता से मैच नहीं खा रही है। विवाह आयोजन, विवाह वर्षगांठ, धार्मिक समारोह जैसे अवसरों पर एक सामान्य व्यक्ति, जो कि शासकीय सेवक नहीं है, उसे भी कई गुना अधिक राशि के नकद उपहार मिलते हैं। ऐसे में शासकीय सेवकों के लिए पूर्व से लागू शर्त अव्यावहारिक है। समिति ने केंद्र सरकार के नए प्रावधानों का अध्ययन किया और पाया कि यह शर्त वास्तव में अव्यावहारिक है। महंगे गिफ्ट के प्रवेश पर लग सकती है रोक मंत्रालय में लगे सीसीटीवी कैमरे इस बात के प्रमाण है कि दीपावली जैसे मौकों पर लाखों के गिफ्ट पैक को मंत्रालय में प्रवेश दिया जाता है। जिसके पीछे बड़ी फर्मों व लोगों का हाथ होता है। ये गिफ्ट पैक कुछ बड़े अफसरों के कैबिन से लग्जरी वाहनों में घरों तक पहुंचते हैं। रुकेंगे ऐसे मामले मध्यप्रदेश में इस आदेश के आने पर बच्चों को मारने की घटनाओं पर विराम लगेगा। बीते महीनों पहले छिंदवाड़ा के नांदनवाड़ी प्राइमरी स्कूल के टीचर बबलू डांडोलिया के पहले से तीन बच्चे थे। नौकरी जाने के डर से बबलू ने पत्नी राजकुमारी के गर्भवती होने की जानकारी छिपाई। 23 सितंबर को रात करीब 3 बजे घर में ही बच्चे का जन्म हुआ। इसके बाद दोनों नवजात को नांदनवाड़ी गांव के जंगल ले गए। यहां उन्होंने बच्चे लावारिस छोड़ा और उसे पत्थरों से दबा दिया। दूसरे दिन ग्रामीण जब जंगल की तरफ गए तो उन्हें बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। पत्थर हटाकर देखा तो मासूम जिंदा था। रातभर ठंड में पड़े होने और चींटियों के काटने की वजह से उसे इन्फेक्शन हो गया था। ग्रामीण उसे अस्पताल ले गए थे।

AI की निगरानी में रहेगा सिंहस्थ 2028: उज्जैन में सुरक्षा व्यवस्था होगी पूरी तरह स्मार्ट

उज्जैन  धार्मिक आस्था के सबसे बड़े आयोजनों में से एक सिंहस्थ महापर्व 2028 को लेकर उज्जैन में तैयारियां अब हाईटेक मोड पर पहुंच गई हैं। इस बार मेले में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के जरिए भीड़ प्रबंधन से लेकर सुरक्षा व्यवस्था तक को पूरी तरह स्मार्ट बनाया जाएगा। सिंहस्थ 2028 को लेकर प्रशासन ने तैयारियों को तेज कर दिया है। विशेष पुलिस महानिदेशक उपेन्द्र जैन ने मेला क्षेत्र का निरीक्षण कर सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने साफ किया कि इस बार सिंहस्थ को AI आधारित निगरानी सिस्टम से लैस किया जाएगा। आधुनिक CCTV कैमरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक की मदद से संदिग्ध गतिविधियों और व्यक्तियों की पहचान की जाएगी। मेला क्षेत्र में संवेदनशील और अति-संवेदनशील स्थानों को चिन्हित कर वहां अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। वहीं भीड़ नियंत्रण, लापता लोगों की खोज, महिला सुरक्षा और अपराध रोकथाम के लिए विशेष रणनीति तैयार की जा रही है। इसके साथ ही ट्रैफिक मैनेजमेंट को लेकर भी विस्तृत प्लान तैयार किया जा रहा है। डायवर्जन रूट, पार्किंग जोन और इमरजेंसी वाहनों के लिए अलग कॉरिडोर बनाए जाएंगे ताकि भारी भीड़ के बावजूद यातायात सुचारू बना रहे। टेंट सिटी और अस्थायी ढांचों की सुरक्षा को देखते हुए फायर सेफ्टी पर विशेष जोर दिया गया है। फायर ब्रिगेड को अलर्ट रखने और समय-समय पर मॉक ड्रिल आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं आपदा प्रबंधन को लेकर भी प्रशासन सतर्क है। एम्बुलेंस, मेडिकल टीम और रेस्क्यू यूनिट को पूरी तरह तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। निरीक्षण के दौरान वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयसीमा की समीक्षा की।

चिंताजनक रिपोर्ट: चंडीगढ़ की महिलाओं में खून की कमी, जंक फूड से जुड़ा खतरा बढ़ा

 चंडीगढ़  सिटी ब्यूटीफुल में महिलाओं में एनीमिया (खून की कमी) पाई गई है। 15 से 49 वर्ष की 60.3 प्रतिशत महिलाओं में खून की कमी से जूझ रही। इसकी एक वजह ज्यादा जंक फूंड खाना बताई जा रही है। इस बात की जानकारी केंद्रीय महिला व बाल विकास मंत्रालय की ओर से संसद में पेश रिपोर्ट में हुआ है। लाेकसभा में पेश मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार चंडीगढ़ की महिलाओं की स्थिति पंजाब व हिमाचल प्रदेश से अधिक खराब है। पंजाब में 58.7 व हिमाचल में 53 प्रतिशत एनीमिया से पीड़ित है। डॉक्टरों के अनुसार ग्रामीण महिलाओं के मुकाबले शहरी महिलाओं में रेड बल्ड सेल की कमी का कारण जंक फूड का अधिक सेवन है। विशेषज्ञों का कहना है कि जंक फूड में आयरन की मात्रा नहीं होती है। इनका अधिक सेवन सेहत के साथ खिलवाड़ करना है। केंद्र सरकार की ओर से एनीमिया के संकट से निपटने के लिए कई योजनाओं को लागू किया गया है। इसके साथ स्वास्थ्य विभाग आंगनबाड़ियों में जाकर महिलाओं को पोषण के बारे में समय -समय पर जागरूक कर रहा है। राज्य/केंद्र शासित प्रदेश      स्थिति  चंडीगढ़                            60.3% पंजाब                              58.7% हरियाणा                         60.4% हिमाचल प्रदेश                53.0% जम्मू-कश्मीर                 65.9% डॉक्टरों ने यह बताई वजह डाॅक्टरों के अनुसार एनीमिया का सबसे बड़ा कारण शरीर में आयरन की कमी होना है, जब शरीर में रेड बल्ड सेल धीरे-धीरे खत्म होने लगती हैं। इसके साथ बाडी को जरूरत के अनुसार डाइट नहीं मिलती तो इससे खून की कमी होने लगती है। भागदौड़ भरी जिंदगी में खानपान को लेकर अनदेखी गंभीर स्थिति उत्पन्न कर रही है। खास तौर पर महिलाएं इससे ज्यादा प्रभावित हैं। इसका मुख्य कारण असमय व असंतुलित भोजन करना है। कामकाजी महिलाएं जहां फास्ट फूड व अनियमित खानपान की आदत के कारण एनीमिया जैसी गंभीर बीमारी का शिकार हो रही हैं, वहीं गृहणी खुद के सेहत की अनदेखी से बीमारियों की चपेट में आ रही हैं। बार-बार सिरदर्द होना, चिड़चिड़ा, फटी या लाल जीभ, भूख कम लगना, कमजोरी, थकान, पीली त्वचा, सांस की तकलीफ, हाइपरटेंशन यह सब शरीर में खून की कमी के लक्षण हो सकते है। यह चिंता का विषय क्यों है? क्लिनिकल हेमेटोलॉजी और मेडिकल ऑन्कोलॉजी के सहायक प्रोफेसर डॉ. अरिहंत जैन बताते हैं, “कार्यरत महिलाएं असंतुलित आहार के कारण एनीमिया से विशेष रूप से प्रभावित होती हैं। आयरन की कमी से लाल रक्त कोशिकाएं धीरे-धीरे मरने लगती हैं, और अगर इसका इलाज न किया जाए तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।” इस समस्या से निपटने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने एनीमिया मुक्त भारत (एएमबी) कार्यक्रम भी शुरू किया था। इस प्रमुख पहल का उद्देश्य महिलाओं, बच्चों और किशोरों सहित छह लक्षित समूहों में इस बीमारी को कम करना है। आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करें। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि उचित आहार संबंधी आदतों से एनीमिया को नियंत्रित किया जा सकता है, जिसमें हरी पत्तेदार सब्जियां, फल और आयरन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन शामिल है। एनीमिया के प्रसार और इसके दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभावों को कम करने के लिए जन स्वास्थ्य पहल और जागरूकता अभियान आवश्यक हैं। एनीमिया क्या है? शरीर में पर्याप्त लाल रक्त कोशिकाओं या हीमोग्लोबिन की कमी होने पर एनीमिया हो जाता है, जिसका मुख्य कारण आयरन की कमी है। इससे थकान, कमजोरी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं। महिलाएं, विशेषकर प्रजनन आयु की महिलाएं, मासिक धर्म में रक्तस्राव और आहार में आयरन की अपर्याप्त मात्रा के कारण एनीमिया के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं। खून बढ़ाने के लिए इनका करें सेवन     आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थों जैसे बीफ, मीट, बीन्स, दाल, गहरे हरे पत्तेदार सब्जियां और सूखे मेवे।     फल और फलों के रस, गहरे हरे पत्तेदार सब्जियां, हरी मटर, राजमा, मूंगफली और अनाज प्रोडक्ट्स     विटामिन बी 12- विटामिन बी-12 से भरपूर खाद्य पदार्थों में मांस, डेयरी प्रोडक्ट और सोया     विटामिन सी- विटामिन सी से भरपूर खाद्य पदार्थों में खट्टे फल और जूस, मिर्च, ब्रोकोली, टमाटर, तरबूज आदि का सेवन करें।  

स्पेनिश टीवी सीरीज़ रूरल टूरिज्म ऑफ द वर्ल्ड में दिखेगी मध्यप्रदेश की संस्कृति, ग्रामीण- प्राकृतिक वैभव और अध्यात्म का संगम

भोपाल  मध्यप्रदेश के ग्रामीण पर्यटन और समृद्ध सांस्कृतिक वैभव को अब वैश्विक मंच पर एक नई और विशिष्ट पहचान मिलने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी विजन और नेतृत्व में मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश तेजी से एक 'ग्लोबल फिल्मिंग हब' के रूप में स्थापित हो रहा है। इसी कड़ी में स्पेन के प्रतिष्ठित प्रोडक्शन हाउस ‘कलर्स कम्युनिकेशन ग्रुप’ द्वारा निर्मित अंतर्राष्ट्रीय टेलीविजन सीरीज़ "रूरल टूरिज्म ऑफ द वर्ल्ड" की शूटिंग प्रदेश के विभिन्न पर्यटन अंचलों में हुई। इस गौरवशाली पहल से मध्यप्रदेश की अनूठी जीवन शैली और पर्यटन स्थलों का प्रदर्शन दुनिया के 80 से अधिक देशों में किया जाएगा, जिससे राज्य की पर्यटन संभावनाओं को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई उड़ान मिलेगी। सावरवानी, धूसावानी, चिमटीपुर और तामिया की जनजातीय परंपरा का हुआ फिल्मांकन अंतर्राष्ट्रीय प्रोजेक्ट के तहत छिंदवाड़ा जिले की नैसर्गिक सुंदरता और यहां की जीवंत जनजातीय संस्कृति ने स्पेनिश फिल्म क्रू को गहराई से प्रभावित किया है। टीम ने जिले के सावरवानी, धूसावानी, चिमटीपुर और तामिया क्षेत्र में प्रवास कर ग्रामीण जीवन, स्थानीय परंपराओं और पातालकोट की विशिष्ट जीवन शैली को कैमरे में कैद किया। विशेष रूप से पातालकोट में संपन्न जनजातीय विवाह की पारंपरिक रस्मों और प्राकृतिक सौंदर्य का फिल्मांकन किया गया है। स्पेनिश डायरेक्टर जुआन फ्रूटोस ने धूसावानी होमस्टे में मिले आत्मीय आतिथ्य की सराहना करते हुए कहा कि यदि कोई वास्तविक भारत की जड़ों को जानना चाहता है, तो उसे मध्यप्रदेश के इन गांवों का अनुभव अवश्य लेना चाहिए। स्पेन में हुए एमओयू के मिल रहे सुखद परिणाम यह महत्वपूर्ण उपलब्धि इसी वर्ष जनवरी-2026 में स्पेन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मेले 'FITUR मैड्रिड 2026' के दौरान हुए रणनीतिक समझौतों और एमओयू (MoU) का सुखद परिणाम है। पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैया राजा टी. और अपर प्रबंध संचालक  अभय अरविंद बेडेकर के मार्गदर्शन में प्रदेश को एक 'फिल्म फ्रेंडली डेस्टिनेशन' के रूप में वैश्विक पटल पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। इस सीरीज़ में न केवल ग्रामीण संस्कृति, बल्कि सांची स्तूप, भीमबेटका की गुफाएं, सतपुड़ा नेशनल पार्क और उज्जैन के  महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग जैसी ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक धरोहरों को भी शामिल किया गया है, जो प्रदेश के बहुआयामी पर्यटन वैभव को दुनिया के सामने प्रदर्शित करेंगी। मध्यप्रदेश बनेगा ग्लोबल फिल्मिंग हब इस वैश्विक पहल से न केवल मध्यप्रदेश की अंतर्राष्ट्रीय ब्रांडिंग सुदृढ़ होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार, होमस्टे और हस्तशिल्प जैसी गतिविधियों को भी भारी प्रोत्साहन मिलेगा। कलेक्टर छिंदवाड़ा  हरेंद्र नारायन एवं जिला प्रशासन के समन्वय से संपन्न हुई यह शूटिंग राज्य को विश्व सिनेमा के मानचित्र पर एक जीवंत और सांस्कृतिक कैनवास के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। आने वाले समय में ऐसे अंतर्राष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स से मध्यप्रदेश का पर्यटन क्षेत्र नई ऊंचाइयों को छुएगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगा। मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा शूटिंग के लिए आवश्यक अनुमति, लॉजिस्टिक सहयोग, सुरक्षा व्यवस्था और ऑन-ग्राउंड समन्वय उपलब्ध कराया जा रहा है। यह पहल राज्य को “फिल्म फ्रेंडली डेस्टिनेशन” के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। बीते कुछ वर्षों में मध्यप्रदेश ने फिल्म पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। बॉलीवुड फिल्मों, वेब सीरीज़ और अंतर्राष्ट्रीय डॉक्यूमेंट्री प्रोजेक्ट्स के लिए प्रदेश लगातार पसंदीदा लोकेशन बन रहा है। इससे न केवल राज्य की वैश्विक ब्रांडिंग मजबूत हो रही है, बल्कि स्थानीय रोजगार, ग्रामीण पर्यटन और सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिल रहा है। मध्यप्रदेश आज केवल “टाइगर स्टेट” नहीं, बल्कि विश्व सिनेमा के लिए प्रकृति, संस्कृति, अध्यात्म और अनुभवों से भरा एक जीवंत कैनवास बन चुका है।

तेज आंधी और बारिश से उत्तर प्रदेश में भारी तबाही, 52 लोगों ने गंवाई जान

उत्तर प्रदेश   वायुमंडल के निचले क्षोभमंडल में वेस्ट यूपी के ऊपर चक्रवाती परिस्थिति बन गई। साथ ही दक्षिण राजस्थान से आ रही पुरवा की मदद मिलने से बुधवार को प्रदेश में 100 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार तक आंधी है। नतीजतन प्रदेश में बुधवार को कुदरत का कहर टूट पड़ा। दोपहर बाद प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में आई भीषण आंधी और बारिश के कारण हुए हादसों में अब तक कुल 52 लोगों की मौत हो चुकी है। आंधी की रफ्तार इतनी तेज थी कि सैकड़ों पेड़, बिजली के खंभे और साइन बोर्ड उखड़ गए, जिससे यातायात और बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। पूर्वांचल और प्रयागराज मंडल में सबसे ज्यादा तबाही देखने को मिली। भदोही में 10 और मिर्जापुर में एक वृद्ध समेत कुल 11 लोगों की जान चली गई। भदोही के औराई में मंदिर की दीवार गिरने से पूजा करने गई दो महिलाओं सहित चार लोगों की मौत हो गई। वहीं, प्रयागराज में शाम को आई आंधी ने 10 लोगों की जान ले ली, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों के 7 और प्रतापगढ़ के 3 लोग शामिल हैं। सिद्धार्थनगर में भी टिनशेड गिरने की घटना के बाद एक बच्चे की मौत हो गई। मध्य यूपी और रुहेलखंड में हादसों का सिलसिला मध्य यूपी के जिलों में आंधी-तूफान ने 15 लोगों की बलि ले ली। इसमें अकेले फतेहपुर में सर्वाधिक 8 मौतें हुईं। इसके अलावा उन्नाव में तीन, हरदोई में दो और झांसी व कानपुर देहात में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई। रुहेलखंड के बरेली मंडल में सुबह 11 बजे आई आंधी ने बदायूं में छह और बरेली में चार लोगों सहित कुल 10 लोगों की जान ले ली। अवध और मुरादाबाद मंडल का हाल अवध क्षेत्र में भी आंधी का कहर बरपा, जहां सीतापुर में पेड़ गिरने से दो और रायबरेली में करंट लगने से एक किशोरी समेत 3 लोगों की मौत हो गई। रायबरेली के डलमऊ में रेलवे फाटक टूट गया और लालगंज में कार पर पेड़ गिर गया। मुरादाबाद मंडल के संभल में दीवार और पोल गिरने से महिला समेत दो लोगों की मौत हुई, जबकि अमरोहा में 8 लोग घायल हुए हैं। मंडल में 250 से अधिक बिजली के पोल गिरने से ग्रामीण इलाकों में ब्लैकआउट की स्थिति है। यातायात और बिजली व्यवस्था चरमराई तेज हवाओं के कारण वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग पर साइन बोर्ड गिरने से रूट डायवर्ट करना पड़ा। गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों में धूल भरी आंधी के साथ हल्की बारिश हुई। मौसम विभाग के अनुसार, वायुमंडल में कम दबाव का क्षेत्र बनने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों को राहत कार्य तेज करने और पीड़ितों को तत्काल सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। अब थमेगा सिलसिला, गर्मी बढ़ेगी मौसम विभाग के अनुसार वर्षा के बावजूद प्रदेश के अनेक भागों में तापमान में दर्ज बढ़ोतरी हुई है। नतीजतन आज बुन्देलखण्ड के बांदा में तापमान 45.4 डिग्री दर्ज किया गया। आने वाले दिनों में मौसम शुष्क रहने और प्रदेश के दक्षिणी जिलों में लू की स्थिति होने का पूर्वानुमान है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने CBSE 12वीं परीक्षा उत्तीर्ण छात्रों को दी बधाई

  रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा में सफलता प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि यह उपलब्धि विद्यार्थियों की मेहनत, अनुशासन, समर्पण और निरंतर प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों ने अपने परिश्रम, लगन और आत्मविश्वास के बल पर सफलता की नई मिसाल प्रस्तुत की है, जो अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि शिक्षा केवल परीक्षा में अंक प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, नवाचार और राष्ट्र निर्माण की मजबूत आधारशिला है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश के विद्यार्थी आने वाले समय में शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, खेल, कला, अनुसंधान और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर छत्तीसगढ़ तथा देश का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करेंगे। मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका को भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों की सफलता के पीछे माता-पिता का त्याग, शिक्षकों का मार्गदर्शन और निरंतर प्रेरणा एक मजबूत शक्ति के रूप में कार्य करती है। कठिन परिस्थितियों में भी बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए उनका समर्पण सराहनीय है। मुख्यमंत्री  साय ने सभी विद्यार्थियों से जीवन में निरंतर सीखने, सकारात्मक सोच बनाए रखने और अपने लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सफलता का वास्तविक अर्थ केवल परीक्षा परिणाम नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनना भी है। मुख्यमंत्री  साय ने सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल, सफल और प्रेरणादायी भविष्य की मंगलकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य सरकार युवाओं के बेहतर भविष्य, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

नियुक्ति के अगले ही दिन झटका: CM विजय के ज्योतिषी की OSD पोस्ट गई

 चेन्नई तमिलनाडु के सीएम जोसेफ विजय ने अपने ज्योतिषी पंडित रिकी राधा वेत्रीवेल को नियुक्ति के 24 घंटे के अंदर ही पद से हटा दिया है. सीएम विजय ने मंगलवार को पंडित रिकी राधा वेत्रीवेल को मुख्यमंत्री ऑफिस में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) के पद पर नियुक्त किया था. लेकिन उनकी ये नियुक्ति तुरंत ही विवादों के घेरे में आ गई थी. TVK में सीएम के प्रतिद्वंद्वी खेमे और गठबंधन के साथियों ने इस नियुक्ति की आलोचना की थी. इसके बाद सीएम विजय ने 24 घंटे से भी कम समय में ज्योतिषी पंडित रिकी राधा वेत्रीवेल की नियुक्ति को रद्द कर दिया है।  सरकार के प्रधान सचिव ने एक पत्र में कहा है कि पंडित रिकी राधा की OSD के पद पर नियुक्ति को रद्द किया जाता है।  मंगलवार को जब सीएम विजय ने ज्योतिषी पंडित रिकी राधा की नियुक्ति को हरी झंडी दी तो उनके इस कदम से तमिलनाडु के राजनीतिक हलकों में बड़ा विवाद खड़ा हो गया. VCK, CPIM और CPI जैसी पार्टियों ने, जिन्होंने TVK सरकार को अपना समर्थन दिया था, इस कदम की खुलकर आलोचना की।  बुधवार को विधानसभा में फ्लोर टेस्ट से पहले, VCK MLA वाणी अरसु ने सरकार से साइंटिफिक और लॉजिकल सोच पर फोकस करने और उन चीजों पर ध्यान न देने की अपील की जिन्हें ज़्यादातर अंधविश्वास माना जाता है।   उन्होंने कहा, "हमारी सरकार को साइंटिफिक सोच को महत्व देना चाहिए, ज्योतिष को नहीं। बता दें कि विजय की सरकार ने आज ही तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत हासिल की है।  फ्लोर टेस्ट से पहले तमिलनाडु सरकार के मंत्री निर्मल कुमार ने कहा था कि पंडित रिकी राधा हमारी पार्टी के प्रवक्ता रहे हैं. इसलिए हमने उनकी नियुक्ति की है. उनका ज्योतिषी होना उनके व्यक्तिगत जीवन की बात है. किसी भी व्यक्ति को OSD बनाया जा सकता है।  लेफ्ट पार्टियों, CPIM और CPI ने भी इस अपॉइंटमेंट पर VCK जैसी ही प्रतिक्रिया दी. स्टेट सेक्रेटरी पी शनमुगम ने कहा कि साइंटिफिक सोच और समझदारी भरी सोच को बढ़ावा देना सरकार की ज़िम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि सरकारी खर्च पर किसी ज्योतिषी को सरकारी पद पर अपॉइंट करने से सिर्फ़ अंधविश्वास को बढ़ावा मिलेगा. CPI के स्टेट सेक्रेटरी एम वीरपांडियन ने भी ऐसी ही चिंता जताई. इस रिएक्शन ने पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता की ज्योतिषियों पर कथित निर्भरता से भी तुलना शुरू हो गई है।  वहीं AIADMK के सांसद आईएस ईनाबदुरई ने कहा कि दूसरों का भविष्य देखने वाले पंडित रिकी राधा अपना ही भविष्य नहीं देख पाए. विजय सरकार के बुरे दिन शुरू हो गए हैं।  सीएम विजय पर उनके ज्योतिषी का कितना प्रभाव था? पंडित रिकी राधा लंबे समय से विजय के पर्सनल ज्योतिषी और आध्यात्मिक सलाहकार रहे हैं. शपथ ग्रहण की तारीख/समय जैसी महत्वपूर्ण घटनाओं में भी उनकी सलाह ली गई मानी जाती है. पंडित रिकी राधा  TVK के प्रवक्ता के रूप में भी सक्रिय थे।  पंडित रिकी राधा ने चुनाव से लगभग एक साल पहले ही थलपति विजय और उनकी पार्टी TVK की "सुनामी जीत" की भविष्यवाणी कर दी थी. यह सटीक साबित हुई।  तमिल भूमि के अधिकारों और सभी लोगों के कल्याण के लिए काम करेगी टीवीके सरकार: आधव अर्जुन तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के अध्यक्ष विजय बुधवार (13 मई 2026) को राज्य विधानसभा में बहुमत साबित करेंगे। विश्वास मत से पहले TVK और AIADMK के कई विधायक तमिलनाडु सचिवालय स्थित विधानसभा परिसर पहुंचे। विजय की पार्टी ने विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीती थीं। इसके बाद उन्हें कांग्रेस, CPI, CPI(M), VCK और IUML का समर्थन मिला जिससे गठबंधन की ताकत 121 सीटों तक पहुंच गई और उनके मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया। इस बीच AIADMK में संभावित टूट की अटकलें तेज हो गई हैं। खबरें हैं कि पार्टी के भीतर दो गुट बन गए हैं- एक सीवी षणमुगम के नेतृत्व में और दूसरा पूर्व मुख्यमंत्री तथा पार्टी महासचिव एडापड्डी के पलानास्वामी के समर्थन में। षणमुगम ने आरोप लगाया था कि पार्टी के अधिकांश सदस्य DMK के समर्थन से सरकार बनाने के प्रस्ताव के खिलाफ थे। राजनीतिक हलचल को और बढ़ाते हुए विजय ने मंगलवार को शण्मुगम के कार्यालय का दौरा भी किया जिससे राज्य में नए राजनीतिक समीकरणों की अटकलें तेज हो गई हैं। AIADMK के एक विधायक ने समाचार एजेंसियों से कहा कि पार्टी से जुड़े सभी फैसले पलानास्वामी ही लेंगे और दावा किया कि पार्टी नेतृत्व के साथ अब भी बहुमत मौजूद है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी का माना आभार

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी का विपणन सत्र 2026-27 के लिए 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि के लिए आभार माना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में किसानों के हित में लगातार निर्णय लिए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री  मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि को स्वीकृति दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के इस निर्णय से अन्नदाता किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने में मदद मिलेगी। केंद्र सरकार ने किसानों के हित संवर्धन के लिए ठोस कदम उठाए हैं। मध्यप्रदेश के किसान इन सभी प्रावधानों का लाभ प्राप्त करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में वर्ष 2026 में किसान कल्याण वर्ष के अंतर्गत अनेक गतिविधियों आयोजित की जा रही हैं। प्रत्येक माह किसानों के कल्याण के लिए उन्नत यंत्रों की प्रदर्शनियां, किसान हितैषी योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ ही किसानों को नई कृषि तकनीक के प्रशिक्षण का लाभ दिलवाया जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा फसलों के न्यूनत समर्थन मूल्य में वृद्धि किए जाने से मध्यप्रदेश और देश के किसान प्रत्यक्ष तौर पर लाभान्वित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश  अन्न उत्पादन में आगे है। इस नाते प्रदेश के रागी, मक्का,ज्वार और बाजरा उत्पादक किसानों को इस फैसले से विशेष लाभ होगा। विपणन सत्र 2026-27 के लिए खरीफ फसलों के न्यूतम समर्थन मूल्य में उल्लेखनीय वृद्धि केन्द्रीय मंत्रिमंडलीय समिति ने सूरजमुखी बीज के एमएसपी में सबसे अधिक 622 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि के साथ कपास में 557 रुपए प्रति क्विंटल, नाइजर सीड में 515 रुपए प्रति क्विंटल और तिल में 500 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि की है। उत्पादन लागत पर किसानों को अनाजों में सर्वाधिक मूंग में सबसे अधिक 61 प्रतिशत लाभ रहने का अनुमान है। इसके बाद बाजरा और मक्का में 56 प्रतिशत और अरहर में 54 प्रतिशत लाभ का अनुमान है। जहां उड़द में यह प्रतिशत 51 है, वहीं रागी, हाइब्रिड ज्वार और धान में लागत पर 50 प्रतिशत लाभ किसानों को मिलेगा। तिलहन फसलों में मूंगफली, सूरज मुखी के बीज, तिली सोयाबीन, तिल,नायजर सीड और मध्यम रेशे के कपास में किसानों को लागत पर मार्जिन 50-50 प्रतिशत का अनुमान है।