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पनामा पेपर मामले में राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ीं, जबलपुर हाईकोर्ट में अंतिम सुनवाई

जबलपुर  लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि मामले में आज एक बार फिर गुरुवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। पिछली सुनवाई जो कि दो दिन पहले हुई थी, उसमें कर्तिकेय सिंह चौहान ने जवाब देने के लिए समय मांगा था, जिसे कोर्ट ने मंजूर किया था। इससे पहले हुई सुनवाई में दोनों पक्षों राहुल गांधी और कार्तिकेय चौहान के वकीलों ने अपना-अपना पक्ष रखा था। दरअसल, भोपाल की विशेष अदालत में चल रहे मानहानि प्रकरण को MP हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ में चुनौती दी गई है। झाबुआ में चुनावी सभा में दिया था बयान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान के द्वारा दायर मानहानि परिवाद से जुड़ा है। एमपी-एमएलए कोर्ट भोपाल के विशेष मजिस्ट्रेट ने राहुल गांधी को समन जारी किया था। इसी समन और परिवाद को निरस्त कराने के लिए राहुल गांधी ने बीते दिनों मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा और अजय गुप्ता ने पक्ष रखा था। कोर्ट को बताया गया कि परिवाद पूरी तरह निराधार हैं और लगाए गए आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। कार्तिकेय सिंह चौहान की और से कहा गया कि साल 2018 में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए राहुल गांधी ने झाबुआ की चुनावी सभा में भाषण दिया था। इस दौरान उन्होंने कथित तौर पर पनामा पेपर्स लीक का जिक्र करते हुए शिवराज सिंह चौहान और कार्तिकेय का नाम लिया था। हालांकि इसके दूसरे दिन ही राहुल गांधी ने अपने बयान पर कहा था कि वे कन्फ्यूज हो गए थे। दरअसल वे छत्तीसगढ़ के सीएम रमन सिंह के बेटे का नाम लेना चाह रहे थे, लेकिन कार्तिकेय का नाम ले लिया। कार्तिकेय का दावा- इस बयान से उनकी छवि धूमिल हुई राहुल गांधी ने अपने बयान में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पर हुई कार्रवाई का उदाहरण देते हुए कहा था कि मध्यप्रदेश में ऐसी कार्रवाई नहीं हुई। इसे लेकर कार्तिकेय सिंह चौहान ने दावा किया कि इस बयान से उनकी छवि धूमिल हुई और उन्होंने एमपीएमएलए कोर्ट में मानहानि का केस दायर किया। इसी मामले में विशेष अदालत ने राहुल गांधी को समन जारी किया था, जिसे चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। अब इस मामले पर संभवता आज अंतिम सुनवाई हो सकती है, जिस पर कि सभी की नजर बनी हुई है।

मान सरकार का बड़ा ऐलान: अग्निवीरों के लिए बनेगी आरक्षण नीति, कमेटी गठित

चंडीगढ़ अग्निपथ योजना के तहत सेना में अग्निवीर के रूप में अपना सेवाकाल पूरा करने वाले युवाओं के पुनर्वास के लिए बड़ा निर्णय लेते हुए पंजाब सरकार ने अग्निवीरों के लिए आरक्षण नीति तैयार करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सिविल एवं पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया है, जो सरकारी सेवाओं में अग्निवीरों को आरक्षण का लाभ देने के लिए रूपरेखा तैयार करेगी।  आज यहां एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सरकारी नौकरियों में अग्निवीरों को आरक्षण देने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान कर दी। उन्होंने कहा कि इस नीति को निर्धारित समय सीमा के भीतर अंतिम रूप दिया जाना चाहिए ताकि प्रशिक्षित एवं अनुशासित युवा पंजाब के सामाजिक और आर्थिक विकास का अभिन्न हिस्सा बन सकें। इस संबंध में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “आरक्षण नीति की रूपरेखा को व्यापक दृष्टिकोण से तैयार करने की आवश्यकता है, ताकि देश की सेवा करने के बाद लौटने वाले अग्निवीरों का उचित पुनर्वास सुनिश्चित किया जा सके और उनके कौशल का उपयोग पंजाब की प्रगति के लिए किया जा सके।” मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों में अग्निवीरों के आरक्षण और भर्ती संबंधी सिफारिशें तैयार करने तथा रूपरेखा को अंतिम रूप देने के लिए राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों विकास प्रताप, भावना गर्ग, सुमेर सिंह गुर्जर और एस.एस. श्रीवास्तव पर आधारित समिति का गठन किया है।   अग्निवीरों की क्षमता का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि उनकी सेवाओं का उपयोग पंजाब पुलिस, वन रक्षक, अग्निशमन सेवाओं, जेल विभाग, होमगार्ड, पेस्को तथा सरकार के कई अन्य विभागों में प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने कहा, “अग्निवीरों के आरक्षण और चयन से संबंधित मानदंडों को जल्द से जल्द अंतिम रूप दिया जाना चाहिए ताकि इन कुशल एवं अनुशासित युवाओं की सेवाओं का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।” मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि पंजाब ने हमेशा देश की एकता और अखंडता की रक्षा में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा, “यह अत्यंत गर्व और संतोष की बात है कि देश का अन्नदाता होने के साथ-साथ पंजाब को देश की तलवार भुजा के रूप में भी जाना जाता है। पंजाब के लोगों को दुनिया भर में उनकी बहादुरी, मेहनत और उद्यमशीलता के लिए सम्मान प्राप्त है।” सशस्त्र बलों, अर्धसैनिक बलों, पुलिस तथा अग्निवीरों द्वारा देश की रक्षा में दिए गए अतुलनीय योगदान का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सरकार पहले से ही ड्यूटी के दौरान शहीद होने वाले जवानों के परिवारों को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह पहल सैनिकों, अर्धसैनिक बलों, पुलिस जवानों और उनके परिवारों के कल्याण के प्रति पंजाब सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है।” उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह कदम अग्निवीरों के भविष्य को सुरक्षित बनाने तथा देश सेवा के बाद उनके परिवारों को सहारा प्रदान करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।    

मध्यप्रदेश के देवास में बड़ा हादसा: पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट में 4 लोगों की जान गई, 15 घायल

देवास  मध्य प्रदेश के देवास जिले में एक पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण धमाके से बड़ा हादसा हो गया. धमाका इतना तेज था कि आसपास के इलाके में दहशत फैल गई. हादसे में अब तक 4 लोगों की मौत की खबर सामने आई है, जबकि कई अन्य लोगों के घायल होने की आशंका जताई जा रही है. धमाके के समय फैक्ट्री के अंदर 25 से ज्यादा मजदूर मौजूद थे।  मध्य प्रदेश के देवास जिले में एक ऐसा खौफनाक हादसा हुआ, जिसने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है. देवास से करीब 17 किलोमीटर दूर हुए इस हादसे से इलाके में दहशत का माहौल. एबी रोड पर टोंककला के पास स्थित एक पटाखा फैक्ट्री में अचानक भीषण आग लग गई. आग लगने के कुछ ही पलों बाद फैक्ट्री के भीतर रखे बारूद के जखीरे में एक के बाद एक कई जोरदार धमाके हुए. धमाकों की आवाज कई किलो मीटरदूर तक सुनाई दी।  4 लोगों मौत कई बुरी तरह झुलसे जानकारी के मुताबिक फैक्ट्री में अचानक विस्फोट होने के बाद आग लग गई. धमाके की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी. घटना के बाद फैक्ट्री में काम कर रहे मजदूरों में भगदड़ मच गई. स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी, जिसके बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया. इस हृदयविदारक हादसे में अब तक 4 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अधिक लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं. झुलसे हुए लोगों की हालत इतनी नाजुक है कि मौत का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।  सुरक्षा मानकों की अनदेखी स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्ट्री में खुलेआम बारूद रखकर पटाखे बनाने का काम किया जा रहा था और सुरक्षा मानकों की लगातार अनदेखी की जा रही थी. ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभागों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।  लोगों में आक्रोश हादसे के बाद गांव-गांव में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है. लोगों ने फैक्ट्री मालिक अनिल मालवीय पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि फैक्ट्री को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था. मौके पर सुबह भारी मात्रा में खुले में बारूद पड़े होने की बात भी सामने आई है, जिससे लोगों का गुस्सा और बढ़ गया।  घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया हादसे में अब तक तीन लोगों की मौत की खबर सामने आई है, जबकि 20 से ज्यादा लोग झुलस गए हैं. घायलों को तुरंत एंबुलेंस और अन्य वाहनों की मदद से देवास के जिला अस्पताल पहुंचाया गया. जिला अस्पताल में घायलों का प्राथमिक उपचार शुरू किया गया, लेकिन कुछ लोगों की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें बेहतर इलाज के लिए इंदौर रेफर किया गया है. अब तक सात गंभीर घायलों को इंदौर भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।  इलाके में धुएं का गुबार प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाका इतना तेज था कि फैक्ट्री की दीवारें क्षतिग्रस्त हो गईं और आसपास के इलाके में धुएं का गुबार फैल गया. कई श्रमिक आग की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गए. स्थानीय ग्रामीणों ने घायलों को बाहर निकालने में मदद की और प्रशासन को सूचना दी. हादसे के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है।  फिलहाल प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य जारी है. पुलिस ने फैक्ट्री परिसर को घेर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है. शुरुआती आशंका है कि बारूद या पटाखा सामग्री में अचानक विस्फोट होने से यह हादसा हुआ. हालांकि, विस्फोट के सही कारणों का पता जांच के बाद ही चल सकेगा. मौके पर ADG उज्जैन राकेश गुप्ता, संभागायुक्त आशीष सिंह, DIG, कलेक्टर और एसपी पहुंचे हैं।  हादसे की जांच होगी प्रशासन यह भी जांच कर रहा है कि फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं और वहां काम कर रहे मजदूरों के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम मौजूद थे या नहीं. अधिकारियों का कहना है कि हादसे की जांच के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. वहीं, जिला प्रशासन लगातार अस्पतालों से घायलों की स्थिति की जानकारी ले रहा है। 

विजय के CM बनने के बाद बदली राजनीति! मान का आरोप- अब दिलजीत पर BJP की नजर

चंडीगढ़  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने नीट पेपर लीक मामले को लेकर भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए इसे लाखों विद्यार्थियों के साथ विश्वासघात बताया, जिनके सपने परीक्षा प्रणाली में बार-बार हुई असफलताओं के कारण चूर-चूर हो गए हैं। कई मुद्दों पर भाजपा पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पंजाबी गायक दिलजीत दोसांझ की ओर से भाजपा के इशारे पर राजनीति में आने से इनकार करने के बाद, उनके खिलाफ डराने-धमकाने का अभियान शुरू कर दिया गया है। दिलजीत के राजनीति में आने से इनकार पर धमकाने की राजनीति शुरू CM ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रसिद्ध गायक दिलजीत दोसांझ के राजनीति में आने से इनकार करने के बाद, भाजपा ने उनके खिलाफ डराने-धमकाने की चालों का सहारा लिया। तमिलनाडु के राजनीतिक मैदान में अभिनेता विजय की सफलता के बाद, भाजपा को एहसास हुआ कि कलाकारों को ज्यादा जनता की मान्यता मिलती है, इसलिए उन्होंने दिलजीत दोसांझ को राजनीति में लाने की कोशिश की। जब से दिलजीत सिंह ने भाजपा का प्रस्ताव ठुकरा दिया है, उनके खिलाफ धमकाने की सियासत शुरू हो गई है, जो बिल्कुल गलत है। उनके मैनेजर के घर पर हमला करना धमकी की इस राजनीति को दर्शाता है। पेपर लीक ने उम्मीदों को चकनाचूर कर दिया मीडिया से बातचीत के दौरान, मुख्यमंत्री बोले- नीट पर्चा लीक होने की घटना ने लाखों उम्मीदवारों के सपनों को चकनाचूर कर दिया है और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करने में केंद्र की असफलता को जग-जाहिर कर दिया है। विद्यार्थियों ने अथक मेहनत की और परीक्षा पास करने की उम्मीद में रातें जागकर बिताईं, लेकिन पेपर लीक ने उनकी उम्मीदों को चकनाचूर कर दिया है। परीक्षार्थी गहरे सदमे में हैं क्योंकि केंद्र सरकार उनकी भविष्य की आशाओं के साथ हुई इस धोखाधड़ी को रोकने में असफल रही है। इस पेपर लीक के कारण लाखों उम्मीदें टूट गई हैं। केंद्र को परीक्षा स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से करवाने को सुनिश्चित बनाना चाहिए था, जिससे लाखों विद्यार्थियों की किस्मत बदल सकती थी। विकास और भलाई एजेंडा AAPको सत्ता में वापस लाएगा इस दौरान, मुख्यमंत्री ने कहा कि "रंगला पंजाब" बनाना पंजाब में 'आप' का एकमात्र चुनाव मुद्दा रहेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि 'आप' सरकार ने पिछले कुछ सालों में कई लोक-हितैषी और विकास-मुखी पहल की हैं। पंजाब के विद्यार्थी नीट, जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं, लगभग 90% घरों को मुफ्त बिजली मिल रही है। लोग 10 लाख रुपए तक का नकद रहित डॉक्टरी इलाज करवा रहे हैं। हम विकास, भलाई और ईमानदार शासन के एजेंडे के साथ लोगों के पास जाएंगे। पंजाब में सर्वपक्षीय विकास हो रहा है और लोग इन पहलों का दिल से समर्थन कर रहे हैं।

‘हम दुश्मन नहीं पार्टनर बनें’… जिनपिंग ने ट्रंप को दिया ग्लोबल लीडरशिप का पाठ

बीजिंग  चीन की राजधानी बीजिंग में अमेरिका और चीन के बीच हुई हाई-स्टेक्स समिट में दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं ने टकराव नहीं, बल्कि साझेदारी का संदेश देने की कोशिश की. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई मुलाकात ऐसे वक्त में हुई, जब दोनों देशों के रिश्ते पिछले कई वर्षों से ट्रेड वॉर, टेक्नोलॉजी बैन, ताइवान और वैश्विक प्रभाव की लड़ाई को लेकर तनावपूर्ण रहे है।  बैठक की शुरुआत में शी जिनपिंग ने बेहद संतुलित और कूटनीतिक अंदाज में दुनिया के सामने बड़ा संदेश रखा. उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय एक नए मोड़ पर खड़ी है और ऐसे समय में चीन और अमेरिका की जिम्मेदारी पहले से ज्यादा बढ़ जाती है।  जिनपिंग ने ट्रंप की तरफ देखते हुए कहा, "क्या हम मिलकर वैश्विक चुनौतियों का सामना कर सकते हैं और दुनिया को ज्यादा स्थिरता दे सकते हैं? क्या हम अपने लोगों के हित और मानवता के भविष्य को ध्यान में रखते हुए द्विपक्षीय रिश्तों का बेहतर भविष्य बना सकते हैं?" अमेरिका-चीन को दुश्मन नहीं, साझेदार होना चाहिए! राष्ट्रपति जिनपिंग ने कहा कि ये सिर्फ दो देशों के सवाल नहीं हैं, बल्कि इतिहास, दुनिया और पूरी मानवता से जुड़े सवाल हैं, जिनका जवाब दोनों नेताओं को मिलकर देना होगा. चीनी राष्ट्रपति ने साफ कहा कि चीन और अमेरिका के साझा हित उनके मतभेदों से कहीं ज्यादा बड़े हैं. जिनपिंग ने कहा, "एक देश की सफलता दूसरे के लिए अवसर है. चीन और अमेरिका के रिश्तों में स्थिरता पूरी दुनिया के लिए अच्छी बात है।  शी जिनपिंग ने आगे कहा कि दोनों देशों को प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझेदार बनना चाहिए. उनके मुताबिक, टकराव दोनों देशों के लिए नुकसानदायक होगा, जबकि सहयोग से दोनों को फायदा मिलेगा. जिनपिंग ने यह भी कहा कि नई सदी में बड़ी शक्तियों को साथ रहने और साथ आगे बढ़ने का रास्ता तलाशना होगा।  शी जिनपिंग ने 2026 को चीन-अमेरिका रिश्तों के लिए "ऐतिहासिक और निर्णायक साल" बनाने की अपील भी की. उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देश पुराने तनाव पीछे छोड़कर नए भविष्य की तरफ बढ़ेंगे।  राष्ट्रपति ट्रंप ने शी जिनपिंग की सराहना की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बैठक के दौरान जिनपिंग की खुलकर तारीफ की. उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों को शानदार बताते हुए कहा कि जिनपिंग एक महान नेता हैं. ट्रंप ने कहा, "आपका दोस्त होना मेरे लिए सम्मान की बात है. चीन और अमेरिका के रिश्ते पहले से बेहतर होने जा रहे हैं." ट्रंप ने यह भी कहा कि जब भी दोनों देशों के बीच कोई समस्या आई, उन्होंने और जिनपिंग ने सीधे बातचीत कर उसे जल्दी सुलझाया. उन्होंने चीन की उपलब्धियों और नेतृत्व क्षमता की भी सराहना की।  हालांकि, दोनों नेताओं के सार्वजनिक बयानों में नरमी दिखी, लेकिन बंद कमरे में हुई बातचीत में व्यापार, ईरान, चिप टेक्नोलॉजी, स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज और वैश्विक शक्ति संतुलन जैसे बड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। 

अब दूध पर भी बढ़ी मार: Amul और Mother Dairy ने बढ़ाए दाम, आज से लागू नए रेट

नई दिल्ली आज से आम आदमी की रसोई का बजट फिर बढ़ गया है. देश की दो बड़ी डेयरी कंपनियों अमूल और मदर डेयरी ने दूध के दाम बढ़ा दिए हैं. दोनों कंपनियों ने अपने अलग-अलग दूध वैरिएंट्स पर 2 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की है. नई कीमतें आज यानी 14 मई, गुरुवार से लागू हो गई हैं. कंपनियों का कहना है कि किसानों से दूध खरीद की लागत बढ़ने और उत्पादन खर्च ज्यादा होने की वजह से कीमतों में बदलाव करना पड़ा है।  Amul Milk Price Hike: अमूल दूध हुआ महंगा गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (GCMMF) ने अमूल दूध के दाम 2 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ा दिए हैं. कंपनी के मुताबिक नई कीमतें पूरे भारत में लागू होंगी और सभी प्रमुख वैरिएंट्स महंगे हो जाएंगे.अब अमूल का फुल क्रीम दूध 68 रुपये की जगह 70 रुपये प्रति लीटर मिलेगा. इसके अलावा कंपनी ने अपने कई दूसरे वैरिएंट्स की कीमतों में भी बढ़ोतरी की है।  कौन-कौन से Amul Milk Products हुए महंगे? आप इस लिस्ट में देख सकते हैं कि अमूल के किन दूध वैरिएंट्स की कीमत बढ़ी हैं…     अमूल फुल क्रीम मिल्क (Amul Full Cream Milk)     अमूल गोल्ड (Amul Gold)     अमूल स्टैंडर्ड मिल्क (Amul Standard Milk)     अमूल बफेलो मिल्क (Amul Buffalo Milk)     अमूल स्लिम एंड ट्रिम (Amul Slim & Trim)     अमूल ताज़ा (Amul Taaza)     अमूल काउ मिल्क (Amul Cow Milk)     अमूल टी स्पेशल मिल्क (Amul Tea Special Milk) कंपनी ने बताया कि आखिरी बार मई 2025 में दूध की कीमतें बढ़ाई गई थीं. उस समय भी प्रति लीटर 2 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई थी।  Mother Dairy Milk Price Hike: मदर डेयरी ने भी बढ़ाए दूध के दाम अमूल के बाद मदर डेयरी ने भी अपने लिक्विड मिल्क वैरिएंट्स की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर दी है. कंपनी ने कहा कि पिछले एक साल में किसानों से दूध खरीद की कीमत करीब 6% बढ़ी है, जिसकी वजह से लागत बढ़ी है.मदर डेयरी के मुताबिक कंपनी अपनी कुल कमाई का करीब 75-80% हिस्सा किसानों और दूध खरीद पर खर्च करती है. ऐसे में बढ़ी हुई लागत का कुछ असर ग्राहकों पर डालना जरूरी हो गया था।  अब कितना महंगा मिलेगा Mother Dairy दूध? दिल्ली-NCR में मदर डेयरी के नए रेट (Mother Dairy New Price List) इस तरह होंगे…      Token Milk अब 56 रुपये से बढ़कर 58 रुपये प्रति लीटर हो गया है.     Full Cream Milk की कीमत 70 रुपये से बढ़कर 72 रुपये प्रति लीटर हो गई है.     Toned Milk अब 58 रुपये की जगह 60 रुपये प्रति लीटर मिलेगा.     Double Toned Milk (Live Lite) की कीमत 52 रुपये से बढ़कर 54 रुपये प्रति लीटर हो गई है.     Cow Milk अब 60 रुपये की जगह 62 रुपये प्रति लीटर मिलेगा.     Pro Milk की कीमत 70 रुपये से बढ़कर 72 रुपये प्रति लीटर हो गई है. मदर डेयरी ने बताया कि आखिरी बार अप्रैल 2025 में कीमतों में बदलाव किया गया था. क्यों बढ़ रहे हैं दूध के दाम? दूध कंपनियों के मुताबिक कई वजहों से लागत बढ़ी है…     किसानों से महंगे दाम पर दूध खरीद     पशु चारे की बढ़ती कीमतें     ट्रांसपोर्ट और सप्लाई लागत में इजाफा     गर्मी के मौसम में दूध उत्पादन पर असर इन्हीं वजहों से दूध कंपनियों ने दूध की कीमतें बढ़ाने का फैसला लिया है।  आम आदमी के बजट पर कितना पड़ेगा असर? दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी का सीधा असर घरों के मासिक बजट पर पड़ सकता है. रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीज होने की वजह से अब परिवारों को हर महीने ज्यादा खर्च करना पड़ेगा. खासकर उन परिवारों पर ज्यादा असर होगा जहां रोजाना 2 से 5 लीटर तक दूध इस्तेमाल होता है.चाय, कॉफी, मिठाई और डेयरी प्रोडक्ट्स की लागत भी आने वाले दिनों में बढ़ सकती है.

सियासी हलचल तेज: अखिलेश के पहुंचते ही अपर्णा ने की अकेले में मुलाकात

लखनऊ अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव के निधन के बाद लखनऊ से लेकर सैफई तक शोक का माहौल है. गुरुवार सुबह उनका अंतिम संस्कार बैकुंठ धाम भैंसाकुंड में किया जाएगा. इससे पहले बुधवार देर शाम तक कालिदास मार्ग स्थित आवास पर नेताओं, रिश्तेदारों और करीबी लोगों का आना-जाना लगा रहा. इसी बीच कई भावुक दृश्य भी सामने आए।  अपर्णा यादव जब असम से लौटकर सीधे लखनऊ पहुंचीं तो घर के भीतर का माहौल बेहद गमगीन था. कुछ ही मिनटों बाद प्रतीक यादव का पार्थिव शरीर भी एंबुलेंस से आवास पहुंचा. परिवार के लोग लगातार एक-दूसरे को संभालने की कोशिश कर रहे थे. इसी दौरान अखिलेश यादव भी घर पहुंचे. जैसे ही अखिलेश ने प्रतीक के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित किया उसके बाद अपर्णा यादव और अखिलेश यादव के बीच कुछ देर बंद कमरे में बातचीत हुई. बाहर पूरा परिवार और करीबी लोग मौजूद रहे, लेकिन उस कमरे में क्या बातचीत हुई, इसकी जानकारी सामने नहीं आई।  अपर्णा यादव ने खुद दी अंतिम संस्कार की जानकारी प्रतीक यादव के अंतिम संस्कार को लेकर अपर्णा यादव ने खुद सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट साझा की. उन्होंने लिखा कि अत्यंत दुःख के साथ सूचित किया जाता है कि पद्म विभूषण और पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव जी के सुपुत्र एवं हम सभी के प्रिय प्रतीक यादव जी का अंतिम संस्कार गुरुवार सुबह 11 बजे बैकुंठ धाम (भैंसाकुंड) में संपन्न होगा. उन्होंने इस दुःख की घड़ी में लोगों से गरिमामयी उपस्थिति की अपील भी की. पोस्ट सामने आते ही सोशल मीडिया पर संवेदनाओं की बाढ़ आ गई. राजनीतिक दलों के नेताओं से लेकर आम लोगों तक ने परिवार के प्रति शोक व्यक्त किया।  पोस्टमार्टम हाउस से निकले तो भावुक दिखे अखिलेश इससे पहले समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे थे. वहां मीडिया से बातचीत के दौरान वह काफी भावुक नजर आए. उन्होंने कहा कि प्रतीक अपने स्वास्थ्य को लेकर बेहद जागरूक थे और हमेशा फिटनेस पर ध्यान देते थे. अखिलेश यादव ने कहा कि प्रतीक बिजनेस में व्यस्त रहते थे और कई बार व्यापारिक नुकसान मानसिक दबाव भी पैदा कर देता है. उन्होंने बताया कि करीब दो महीने पहले उनकी प्रतीक यादव से मुलाकात हुई थी. उस दौरान उन्होंने प्रतीक से कहा था कि वह अपने बिजनेस पर ध्यान दें. अखिलेश यादव ने कहा, वह बहुत अच्छा लड़का था. उन्होंने यह भी कहा कि पूरा परिवार इस समय एकजुट होकर खड़ा है और आगे परिवार जो फैसला करेगा, उसी के अनुसार कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।  अपर्णा के पहुंचने का इंतजार करता रहा परिवार पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी यादव परिवार के कई सदस्य सीधे घर नहीं पहुंचे. परिवार के करीबी लोगों के मुताबिक पहले अपर्णा यादव के लखनऊ पहुंचने का इंतजार किया गया. अपर्णा असम से फ्लाइट के जरिए सीधे लखनऊ पहुंचीं और एयरपोर्ट से कालिदास मार्ग स्थित आवास चली गईं. उनके पहुंचने के कुछ ही मिनटों बाद प्रतीक यादव का पार्थिव शरीर भी घर लाया गया. घर के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल और सुरक्षाकर्मी तैनात रहे. वहीं अंदर लगातार परिवार और करीबी लोगों का पहुंचना जारी रहा।  सबसे पहले पहुंचे शिवपाल यादव प्रतीक यादव का शव घर पहुंचने के तुरंत बाद सबसे पहले शिवपाल यादव वहां पहुंचे. कुछ ही देर में डिंपल यादव भी घर पहुंच गईं. दोनों ने अपर्णा यादव और उनकी बेटियों को ढांढस बंधाया. घर के भीतर का माहौल बेहद भावुक था. कई बार परिवार के सदस्य खुद को संभालते नजर आए. अखिलेश यादव और डिंपल यादव काफी देर तक प्रतीक यादव के पार्थिव शरीर के पास रहे. इस दौरान उनकी दोनों बेटियां भी वहीं मौजूद रहीं।  बीजेपी और सपा नेताओं का लगा तांता प्रतीक यादव के निधन के बाद राजनीतिक सीमाएं भी टूटती नजर आईं. समाजवादी पार्टी और भाजपा दोनों दलों के नेता परिवार को सांत्वना देने पहुंचे. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह भी घर पहुंचे. सैफई से यादव परिवार के कई सदस्य लगातार लखनऊ पहुंचते रहे. इसी दौरान मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी भी श्रद्धांजलि देने पहुंचे. शाम तक घर के बाहर नेताओं और समर्थकों की भीड़ बढ़ती चली गई CM योगी भी पहुंचे श्रद्धांजलि देने शाम करीब चार बजे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी श्रद्धांजलि देने पहुंचे. मुख्यमंत्री ने परिवार के सदस्यों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की. इससे पहले मुख्यमंत्री सोशल मीडिया पर भी दुख जता चुके थे. उन्होंने कहा था कि प्रतीक यादव का आकस्मिक निधन अत्यंत दुःखद है और ईश्वर परिवार को इस पीड़ा को सहने की शक्ति दें।  साक्षी महाराज और अखिलेश की मुलाकात चर्चा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पहुंचने से ठीक पहले एक और तस्वीर चर्चा में आ गई. भाजपा सांसद साक्षी महाराज भी परिवार को ढांढस बंधाने पहुंचे थे. इसी दौरान बाहर आए अखिलेश यादव सीधे साक्षी महाराज के पास गए और उन्हें गले लगा लिया. यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया. हाल के दिनों में साक्षी महाराज ने ओबीसी वोट और यूजीसी जैसे मुद्दों पर भाजपा को लेकर बयान दिए थे. ऐसे में इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा शुरू हो गई. हालांकि उस समय माहौल पूरी तरह शोक का था और दोनों नेताओं ने परिवार के दुख को प्राथमिकता दी।  अंतिम समय में घर पर थीं दोनों बेटियां जानकारी के मुताबिक जिस समय प्रतीक यादव की तबीयत बिगड़ी, उस समय घर में उनकी दोनों बेटियां मौजूद थीं. घरेलू स्टाफ और सुरक्षाकर्मी भी वहीं तैनात थे. उस दौरान अपर्णा यादव असम में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने गई हुई थीं. सूत्रों के अनुसार सुबह करीब पांच बजे घरेलू नौकर ने प्रतीक यादव को कमरे में बेहोशी की हालत में देखा. बताया जा रहा है कि वह कोहनी के बल पड़े हुए थे. नौकर ने तुरंत परिवार और अस्पताल को सूचना दी. इसके बाद सिविल अस्पताल से इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर को घर भेजा गया।  अस्पताल पहुंचने से पहले ही थम चुकी थीं सांसें डॉक्टर जब मौके पर पहुंचे तो शरीर में कोई प्रतिक्रिया नहीं हो रही थी. हार्ट फंक्शन भी नहीं कर रहा था. इसके बाद तत्काल अस्पताल में इमरजेंसी तैयारी शुरू की गई और उन्हें सिविल अस्पताल ले जाया गया. इस दौरान … Read more

महंगाई की मार जारी! CNG के दाम फिर बढ़े, मुंबई वालों की बढ़ी टेंशन

 मुंबई  मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में आम जनता को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। सीएनजी (CNG) के दामों में अचानक बढ़ोतरी कर दी गई है, जिससे रोजाना गैस पर निर्भर लाखों वाहन चालकों की जेब पर असर पड़ना तय है। महानगर गैस लिमिटेड (MGL) ने सीएनजी की कीमत में ₹2 प्रति किलो की बढ़ोतरी कर दी है। यह नई दरें मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई समेत पूरे एमएमआर क्षेत्र में तुरंत प्रभाव से लागू कर दी गई हैं। महानगर गैस लिमिटेड द्वारा की गई इस बढ़ोतरी के बाद अब मुंबई में सीएनजी का नया रेट 84 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है। इससे पहले सीएनजी की कीमत 82 रुपये प्रति किलो थी। अचानक हुई इस वृद्धि ने उन हजारों लोगों को झटका दिया है जो पेट्रोल-डीजल के विकल्प के रूप में सीएनजी को अपना चुके हैं। पूरे MMR क्षेत्र में लागू हुई नई दरें यह नई कीमतें केवल मुंबई शहर तक ही सीमित नहीं हैं। एमजीएल (MGL) की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, बढ़े हुए दाम मुंबई के साथ-साथ ठाणे, नवी मुंबई, मीरा-भायंदर और कल्याण-डोंबिवली समेत पूरे मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में प्रभावी होंगे। इसका मतलब है कि पूरे रीजन के लाखों वाहन मालिकों पर इसका सीधा वित्तीय बोझ पड़ेगा। कितने लोगों पर असर? इस बढ़ोतरी का सीधा असर मुंबई के लाखों यात्रियों पर पड़ेगा. शहर में बड़ी संख्या में ऑटो, टैक्सी, बसें और निजी वाहन सीएनजी पर चलते हैं. आंकड़ों के मुताबिक मुंबई क्षेत्र में करीब 12 लाख से ज्यादा वाहन सीएनजी का इस्तेमाल करते हैं. इनमें लगभग 4.7 लाख ऑटो रिक्शा, 1.6 लाख टैक्सियां और 5 लाख से ज्यादा निजी कारें शामिल हैं।  ऑटो और टैक्सी यूनियनों ने कहा है कि सीएनजी महंगी होने से उनकी परिचालन लागत बढ़ जाएगी. ऑटो चालकों का कहना है कि अब प्रति किलोमीटर खर्च और बढ़ जाएगा. इसी वजह से किराए में बढ़ोतरी की मांग भी तेज हो गई है. ऑटो यूनियन ने संकेत दिया है कि वे कम से कम 1 रुपये किराया बढ़ाने की मांग करेंगे. वहीं टैक्सी यूनियन 2 रुपये तक किराया बढ़ाने की तैयारी में हैं।  सीएनजी की कीमत बढ़ने का असर सार्वजनिक परिवहन पर भी पड़ सकता है. BEST, NMMT, MSRTC और दूसरी परिवहन सेवाओं की हजारों बसें सीएनजी पर चलती हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में बस संचालन की लागत भी बढ़ सकती है।  हालांकि राहत की बात यह है कि पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इससे मुंबई और आसपास के करीब 31 लाख घरों को राहत मिलेगी, जहां खाना बनाने के लिए पाइप गैस का इस्तेमाल होता है।  MGL का कहना है कि कीमत बढ़ने के बावजूद सीएनजी अभी भी पेट्रोल और डीजल के मुकाबले सस्ता विकल्प है. कंपनी के अनुसार मौजूदा दरों पर भी सीएनजी, पेट्रोल की तुलना में करीब 44 फीसदी और डीजल के मुकाबले लगभग 7 फीसदी तक सस्ती पड़ती है।  आगे और बढ़ोतरी का खतरा तेल उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि ग्लोबल कच्चे तेल के संकट के कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी जल्द बढ़ सकती हैं. मुंबई में ट्रांसपोर्ट का बड़ा हिस्सा CNG पर निर्भर है. आम आदमी, ऑटो-टैक्सी वाले और बस ऑपरेटर सभी पर इसका सीधा असर पड़ेगा. हालांकि MGL ने आश्वासन दिया है कि CNG अभी भी पर्यावरण के हिसाब से सबसे अच्छा और बजट में सस्ता विकल्प बना रहेगा।  ऑटो और टैक्सी का सफर होगा महंगा? सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा असर सार्वजनिक परिवहन पर पड़ता है। मुंबई की लाइफलाइन मानी जाने वाली काली-पीली टैक्सी और ऑटो रिक्शा पूरी तरह से सीएनजी पर आधारित हैं। ऐसे में चालक यूनियनों की ओर से अब किराए में बढ़ोतरी की मांग उठना लाजमी है। अगर आने वाले दिनों में टैक्सी और ऑटो का किराया बढ़ता है, तो इसका सीधा असर मुंबई के आम मुसाफिरों की जेब पर पड़ेगा। क्यों बढ़ी कीमतें? महानगर गैस लिमिटेड ने इस बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव को मुख्य कारण बताया है। हालांकि, उपभोक्ता इस फैसले से नाखुश हैं क्योंकि पिछले कुछ महीनों में यह दूसरी बार है जब सीएनजी के दाम बढ़ाए गए हैं।  

इंटरनेट की ‘मास्टर चाबी’ ईरान के पास! खतरे में पड़ सकते हैं WhatsApp, UPI और ऑनलाइन सेवाएं

तेहरान  दुनिया का इंटरनेट क्या अब ईरान के कंट्रोल में जा सकता है? पिछले कुछ दिनों से मिडिल ईस्ट से जुड़ी एक खबर ने टेक दुनिया में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ईरान अब समुद्र के नीचे बिछी उन इंटरनेट केबल्स पर कंट्रोल बढ़ाने की तैयारी कर रहा है, जिनसे दुनिया का बड़ा हिस्सा जुड़ा हुआ है। मामला सिर्फ इंटरनेट स्पीड का नहीं है, बल्कि ग्लोबल डेटा, ऑनलाइन बैंकिंग, क्लाउड सर्विस और अरबों डॉलर की डिजिटल इकॉनमी का भी है।  शिप्स ही नहीं, इंटरनेट के लिए भी ईरान लेगा टोल? असल कहानी फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ी है. यही वह समुद्री रास्ता है जहां से तेल के बड़े जहाज गुजरते हैं. लेकिन कम लोग जानते हैं कि इसी रास्ते के नीचे दुनिया की कई अहम अंडरसी इंटरनेट केबल्स भी गुजरती हैं. यही केबल्स एशिया, यूरोप और मिडिल ईस्ट को इंटरनेट से जोड़ती हैं।  अब ईरान से जुड़े मीडिया नेटवर्क और IRGC यानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़ी रिपोर्ट्स में कहा गया है कि इन इंटरनेट केबल्स से कमाई की जा सकती है. ये ठीक वैसा ही होगा जैसे ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले शिप्स से टोल वसूलने का फैसला किया है।  कुछ रिपोर्ट्स में इसे डिजिटल टोल बूथ जैसा मॉडल बताया गया है. यानी जो विदेशी कंपनियां या नेटवर्क इन केबल्स का इस्तेमाल करेंगे, उनसे फीस ली जा सकती है।  रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान से जुड़े मीडिया आउटलेट्स ने दावा किया कि इन केबल्स के जरिए हर दिन भारी मात्रा में डिजिटल ट्रैफिक गुजरता है. इसमें बैंकिंग ट्रांजैक्शन, क्लाउड डेटा, सोशल मीडिया ट्रैफिक और AI सर्विस तक शामिल हैं।  समुद्र के नीचे से ट्रैवल करता है डेटा इस खबर ने इसलिए चिंता बढ़ा दी है क्योंकि दुनिया पहले ही अंडरसी केबल्स पर बढ़ते खतरे को लेकर परेशान है. इंटरनेट का करीब 95 से 99 प्रतिशत ट्रैफिक समुद्र के नीचे बिछी फाइबर केबल्स से गुजरता है. अगर इनमें बड़ी खराबी आ जाए या जानबूझकर नुकसान पहुंचाया जाए तो कई देशों में इंटरनेट, बैंकिंग और क्लाउड सर्विस पर असर पड़ सकता है।  पोर्ट्स में बताया गया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब सिर्फ तेल का रास्ता नहीं रहा, बल्कि डिजिटल दुनिया का भी बड़ा सेंटर बन चुका है. यहां कई अहम केबल्स गुजरती हैं जो एशिया और यूरोप को जोड़ती हैं।  क्या टेक कंपनियां मानेंगी ईरानी कानून? मामला सिर्फ कमाई तक सीमित नहीं है. कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि ईरान फ्यूचर में विदेशी टेक कंपनियों को अपने नियम मानने के लिए मजबूर कर सकता है. यहां तक कि केबल्स की मरम्मत और मेंटेनेंस का काम भी अपने नियंत्रण में लेने की बात सामने आई है।  टेक एक्सपर्ट्स का डर यह है कि अगर किसी दिन इन केबल्स पर तनाव बढ़ा या उन्हें नुकसान पहुंचा, तो उसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा. भारत समेत एशिया के कई देशों की इंटरनेट कनेक्टिविटी भी प्रभावित हो सकती है. वीडियो कॉल से लेकर UPI पेमेंट और AI सर्वर तक असर महसूस हो सकता है।  अब दुनिया की चिंता यह है कि अगर भविष्य में इंटरनेट भी तेल की तरह जियोपॉलिटिकल हथियार बन गया, तो हालात कितने बदल सकते हैं. अभी तक देश तेल सप्लाई रोकने की धमकी देते थे, लेकिन आने वाले समय में इंटरनेट केबल्स भी दबाव बनाने का बड़ा जरिया बन सकती हैं।  यानी जिस इंटरनेट को लोग सिर्फ मोबाइल डेटा और WiFi समझते हैं, उसके पीछे समुद्र के नीचे फैला हजारों किलोमीटर लंबा एक ऐसा नेटवर्क है, जिस पर अब दुनिया की राजनीति भी उतर आई है। 

हफ्ते में सिर्फ 5 लीटर तेल! क्या भारत में भी लागू हो सकता है फ्यूल राशनिंग नियम?

नई दिल्ली ईरान युद्ध और मध्य पूर्व (Middle East) में तेल आपूर्ति मार्गों में आई रुकावट के कारण पूरी दुनिया एक गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रही है। इस संकट के बीच कई देशों में फ्यूल राशनिंग लागू की जा चुकी है। भारत में भी न‍िजी वाहनों के ल‍िए एक ल‍िमिट में पेट्रोल-डीजल और गैस खरीदने का कोटा तय करना एक उपाय हो सकता है। फिलहाल, भारत सरकार ने अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं किया है। अगर देश में कोटा सिस्टम लागू होता है, तो लोग अपने मन के मुताबिक पेट्रोल, डीजल या गैस नहीं खरीद पाएंगे। बता दें कि श्रीलंका, पाकिस्तान, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों में QR Code, ऑड-ईवन नियम और साप्ताहिक फ्यूल लिमिट लागू हो चुकी है। अगर भविष्य में हालात और बिगड़ते हैं, तो भारत समेत कई देशों में भी ऐसे कदम उठाए जा सकते हैं। सरल शब्दों में कहें तो 'फ्यूल राशनिंग' सरकार द्वारा लगाया गया वह प्रतिबंध है, जिसके तहत आप अपनी मर्जी के मुताबिक जितना चाहें उतना पेट्रोल या डीजल नहीं खरीद सकते हैं। सरकार प्रत्येक नागरिक या वाहन के लिए एक 'कोटा' तय कर देती है। एक निश्चित समय सीमा (जैसे एक हफ्ता) में आप केवल लिमिट में ही ईंधन खरीद पाएंगे। इसके लिए सरकार QR-कोड, कूपन या गाड़ियों के नंबर के हिसाब से 'ऑड-ईवन' (Odd-Even) जैसे तरीके अपनाती है। 2026 के इस वैश्विक संकट में कई देशों ने अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए ईंधन की बिक्री पर सीमा लगा दी है। श्रीलंका: यहां 'नेशनल फ्यूल पास' (QR कोड) सिस्टम लागू है। कारों के लिए हफ्ते में केवल 15-25 लीटर और मोटरसाइकिलों के लिए सिर्फ 5 लीटर पेट्रोल तय किया गया है। पाकिस्तान: यहां स्थिति इतनी गंभीर है कि एक बार में वाहन को केवल 5 लीटर तेल मिल रहा है। साथ ही सरकारी कर्मचारियों के लिए हफ्ते में केवल 4 दिन काम का नियम बनाया गया है। फ्रांस और जर्मनी: यूरोप के संपन्न देश भी अब राशनिंग की कगार पर हैं। फ्रांस के कुछ इलाकों में QR कोड के जरिए हफ्ते में 15-20 लीटर की सीमा तय की गई है, जबकि जर्मनी में कुछ जगहों पर एक बार में केवल 10 लीटर पेट्रोल मिल रहा है। बांग्लादेश और म्यांमार: बांग्लादेश ने ऊर्जा बचाने के लिए स्कूलों को ऑनलाइन कर दिया है और बिजली की रोटेशनल कटौती (Load Shedding) शुरू कर दी है। म्यांमार में 'ऑड-ईवन' सिस्टम से पेट्रोल दिया जा रहा है। स्लोवेनिया और केन्या: स्लोवेनिया ने प्राइवेट ड्राइवरों के लिए हफ्ते में 50 लीटर का कोटा तय किया है, वहीं केन्या ने घरेलू सप्लाई बचाने के लिए तेल के निर्यात पर ही पाबंदी लगा दी है। ईंधन की किल्लत का असर भारत पर भी पड़ा है। लाइव हिंदुस्तान की बिजनेस टीम ने हाल ही में कुछ शहरों में एक सर्वे किया, जिसमें पाया गया कि पेट्रोल पंप संचालकों ने खुद से ही पेट्रोल-डीजल खरीदने की एक सीमा तय कर रखी है। पूछने पर पता लगा कि कुछ दिनों पहले बाइक सवार ग्राहकों को 200 रुपये और कार चालकों को 2,000 रुपये से ज्यादा का तेल नहीं दिया जा रहा था। अभी भी कई शहरों में पेट्रोल पंप पर अपनी गाड़ी की टंकी फुल कराने पहुंच रहे ग्राहकों को निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है। इससे पता चलता है कि बिना किसी आदेश के पहले ही पेट्रोल पंप संचालकों ने अपनी कार्यशैली बदलकर कोटा सिस्टम शुरू कर दिया है। वर्क फ्रॉम होम और 4-डेज वर्किंग:– फिलीपींस, लाओस और पाकिस्तान ने विदेशी मुद्रा बचाने के लिए सरकारी कर्मचारियों को घर से काम करने या हफ्ते में कम दिन ऑफिस आने का आदेश दिया है। कार-लेस-डेज:– न्यूजीलैंड जैसे देश 'कार-लेस-डेज' (हफ्ते में एक दिन गाड़ी न चलाना) को फिर से शुरू करने पर विचार कर रहे हैं। पब्लिक ट्रांसपोर्ट:- वियतनाम और कंबोडिया जैसे देशों में लोगों को कारपूलिंग और बस-मेट्रो का उपयोग करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है क्योंकि लगभग 30% पेट्रोल पंप बंद हो चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले ही देशवासियों से ईंधन और यात्रा में कटौती करने की भावुक अपील की है। हालांकि, भारत में अभी तक औपचारिक रूप से राशनिंग लागू नहीं हुई है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचता है, तो भविष्य में 'कोटा सिस्टम' या 'QR कोड आधारित खरीद' की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फ्यूल राशनिंग का विचार डरावना लग सकता है, लेकिन यह संकट के समय तेल के समान वितरण को सुनिश्चित करने का एक तरीका है। फिलहाल, बचाव का सबसे अच्छा तरीका यही है कि हम निजी वाहनों का कम से कम उपयोग करें और ईंधन की बर्बादी रोकें।