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राष्ट्रीय पोषण माह की तैयारी, ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ बनेगी जनभागीदारी की थीम

‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ की थीम पर मनेगा 9वां राष्ट्रीय पोषण माह मध्यप्रदेश में पोषण, बाल विकास और मातृ स्वास्थ्य संबंधी चलेंगे व्यापक जन-जागरूकता अभियान पोषण वाटिका, पोषण मेले और गर्म पके भोजन की गुणवत्ता की होगी सामुदायिक निगरानी 9 सितम्बर से शुरू होगा राष्ट्रीय पोषण माह भोपाल  इस वर्ष 9वें राष्ट्रीय पोषण माह-2026 का आयोजन ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ की थीम पर व्यापक जनभागीदारी के साथ किया जाएगा। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 के अंतर्गत आयोजित होने वाले पोषण माह का उद्देश्य आंगनवाड़ी केन्द्रों को पोषण, देखभाल और प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास की गतिविधियों का प्रभावी केन्द्र बनाते हुए समुदाय की सक्रिय भागीदारी और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। इस वर्ष 9 सितम्बर से राष्ट्रीय पोषण माह का आयोजन किया जा रहा है। पोषण को जनआंदोलन बनाने पर जोर इस वर्ष पोषण माह को केवल जागरूकता अभियान तक सीमित न रखते हुए समुदाय को आंगनवाड़ी केन्द्रों से जोड़ने और पोषण सेवाओं में उसकी भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके लिए प्रदेशभर में स्थानीय खाद्य पदार्थों, संतुलित आहार, पर्याप्त प्रोटीन, बच्चों के प्रारंभिक विकास, गर्म पके भोजन की गुणवत्ता तथा मातृ स्वास्थ्य से जुड़ी गतिविधियां आयोजित होंगी। स्थानीय खाद्य पदार्थों से सजेगा पोषण का संदेश आहार विविधता और पर्याप्त प्रोटीन को लेकर आंगनवाड़ी केन्द्रों पर स्थानीय एवं कम लागत में उपलब्ध खाद्य पदार्थों से पौष्टिक व्यंजनों की रेसिपी डेमोंस्ट्रेशन गतिविधियां होंगी। पोषण मेलों के माध्यम से स्थानीय सुपर फूड, मौसमी फल-सब्जियों, दालों, अनाज, मिलेट्स, दूध एवं दुग्ध उत्पाद, मेवा और बीज सहित प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थों की उपयोगिता बताई जाएगी। ‘प्रोटीन रिच फूड’ अभियान के माध्यम से परिवारों को रोजमर्रा के भोजन में किफायती और आसानी से उपलब्ध प्रोटीन स्रोत शामिल करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। आंगनवाड़ी केन्द्रों की पोषण वाटिकाओं में उत्पादित खाद्य पदार्थों तथा स्थानीय मौसमी खाद्य सामग्री को भी प्रदर्शित कर उनके नियमित उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा। बच्चों की थाली में मिलेगा ताजा और विविधतापूर्ण गर्म पका भोजन आंगनवाड़ी केन्द्रों पर 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को दिए जाने वाले गर्म पके भोजन की गुणवत्ता और विविधता पर विशेष ध्यान रहेगा। स्थानीय उपलब्धता के अनुसार खाद्य सामग्री में विविधता सुनिश्चित करने के साथ साप्ताहिक मेन्यू को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा। आंगनवाड़ी केन्द्रों पर गर्म पके भोजन की तैयारी, स्वच्छता और संतुलित पोषण को प्रदर्शित करने के लिए विभिन्न डेमोस्ट्रेशन किए जाएंगे। इनमें बच्चों के पालक, पंचायत प्रतिनिधि, स्वयं सहायता समूह और मातृ समितियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। आंगनवाड़ियों के प्रबंधन में समुदाय बनेगा भागीदार ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ की थीम को धरातल पर उतारने के लिए समुदाय की निगरानी और सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है। आंगनवाड़ी केन्द्रों पर सहयोगी मातृ समिति/आंगनवाड़ी प्रबंधन समिति को सक्रिय किया जाएगा और पोषण माह के दौरान कम से कम एक बैठक आयोजित की जाएगी। आंगनवाड़ी केन्द्रों पर नाश्ता एवं गर्म पके भोजन के मेन्यू बोर्ड प्रदर्शित किए जाएंगे। इनके माध्यम से हितग्राहियों को मिलने वाले पोषण आहार की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहेगी। समुदाय को भोजन की गुणवत्ता, मात्रा और मेन्यू के अनुसार वितरण की निगरानी में भी सहभागी बनाया जाएगा। पहले 1000 दिन पर विशेष फोकस, विकासात्मक विलंब की होगी पहचान बाल विकास के लिए पोषण के साथ गुणवत्तापूर्ण देखभाल को भी पोषण माह का प्रमुख हिस्सा बनाया गया है। विशेष रूप से जीवन के पहले 1,000 दिनों में उचित पोषण और संवेदनशील देखभाल के महत्व को लेकर व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा संशोधित होम विजिट शेड्यूलर के माध्यम से बच्चों के विकास और अभिभावकों की काउंसलिंग पर जोर दिया जाएगा। नवचेतना और आधारशिला पाठ्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ विकासात्मक विलंब वाले बच्चों की पहचान कर उन्हें स्वास्थ्य विभाग एवं आरबीएसके राष्ट्रीय स्वास्थ्य बाल कार्यक्रम टीम के माध्यम से आवश्यक सेवाओं के लिए रेफर किया जाएगा। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में लाभार्भियों को 100 प्रतिशत लाभ पहुँचाना पोषण माह के दौरान प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना को भी व्यापक रूप से जोड़ा जाएगा। पात्र गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को योजना से जोड़ने के लिए 100 प्रतिशत सैचुरेशन ड्राइव चलाया जाएगा। लंबित प्रकरणों की समीक्षा कर सत्यापन, स्वीकृति और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी। योजना की पात्रता, मिलने वाले लाभ, किश्तों और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी महिलाओं तक पहुंचाने के लिए विशेष जागरूकता अभियान होंगे। लाभार्थियों की सफलता की कहानियों को भी सोशल और जनसंचार माध्यमों के जरिए साझा किया जाएगा। आंगनवाड़ी बनेगी पोषण और बाल विकास की सामुदायिक प्रयोगशाला राष्ट्रीय पोषण माह-2026 के माध्यम से मध्यप्रदेश में आंगनवाड़ी केन्द्रों को केवल सेवाएं उपलब्ध कराने वाले केन्द्र के बजाय समुदाय की साझेदारी से पोषण, स्वास्थ्य, देखभाल और प्रारंभिक बाल विकास की सामुदायिक प्रयोगशाला के रूप में विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा। ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ समाज में जागरूकता के साथ स्पष्ट संदेश है कि बच्चों का पोषण और उनका समग्र विकास केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।  

MP को मिलेगा नया निवेश मंच! भोपाल में 2027 ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिए जमीन तय

भोपाल  राजधानी में वर्ष 2027 में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। कोलार क्षेत्र के सतगढ़ी और महाबड़िया सहित आसपास के इलाकों का अधिकारियों ने निरीक्षण किया। स्थल चयन की प्रक्रिया के बाद महाबड़िया गांव को समिट के लिए बेहतर विकल्प माना गया है। यहां आयोजन के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध होने के साथ आसपास के क्षेत्र में जरूरी सुविधाएं विकसित करने की भी संभावना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्ष 2025 में भोपाल के मानव संग्रहालय क्षेत्र में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट आयोजित होने के बाद वर्ष 2027 में दोबारा राजधानी में यह आयोजन कराने का निर्णय लिया था। अब सरकार ने इसके लिए बुनियादी तैयारियां शुरू कर दी हैं। आधा दर्जन से ज्यादा जगहों का लिया जायजा उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, एमपीएसआईडीसी के प्रबंध संचालक, भोपाल कलेक्टर और अन्य अधिकारियों की टीम ने कोलार क्षेत्र के  सतगढ़ी, महाबड़िया,  रातीबड़ और करीब आधा दर्जन गांवों की लोकेशन देखी। अधिकारियों ने आयोजन के लिए उपलब्ध जमीन, पहुंच मार्ग और भविष्य में विकसित की जा सकने वाली सुविधाओं का जायजा लिया। पड़ताल के बाद महाबड़िया को समिट के लिए उपयुक्त स्थान माना गया है।   बारिश के बाद शुरू होंगे विकास कार्य समिट में देश-विदेश से उद्योगपति और निवेशक पहुंचेंगे। इसे देखते हुए आयोजन स्थल और आसपास के क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की तैयारी है। बारिश खत्म होने के बाद सड़क और दूसरी जरूरी सुविधाओं से जुड़े काम तेजी से शुरू किए जाने की संभावना है। लोक निर्माण विभाग, नगरीय विकास एवं आवास विभाग समेत अन्य संबंधित विभागों को भी आयोजन से पहले क्षेत्र में जरूरी व्यवस्थाएं विकसित करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।  छह महीने में सड़कों का नेटवर्क मजबूत करने की तैयारी समिट स्थल तक उद्योगपतियों और अन्य मेहमानों की आसान पहुंच के लिए कोलार क्षेत्र में सड़क नेटवर्क को बेहतर किया जाएगा। योजना के तहत डीमार्ट से सतगढ़ी तक सड़क और मानसरोवर डेंटल कॉलेज के पास से फोरलेन सड़क बनाने की तैयारी है। इसके अलावा केरवा और एयरपोर्ट की ओर से भी आयोजन स्थल तक सीधे संपर्क मार्ग विकसित करने की योजना है।   दुबई में निवेशकों को न्योता देंगे सीएम ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले मध्यप्रदेश सरकार विदेशों में भी निवेशकों से संपर्क बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सितंबर के दूसरे सप्ताह में दुबई जाने वाले हैं। वहां वे उद्योगपतियों से मुलाकात कर मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं और राज्य की औद्योगिक नीतियों की जानकारी देंगे।

बीमा कंपनियों के खिलाफ MP में बढ़ा गुस्सा! 5 साल में शिकायतों में 631.71% का उछाल

भोपाल  हेल्थ इंश्योरेंस, वाहन बीमा से संबंधित शिकायतें लगातार बढ़ती जा रहीं हैं। बीमा लोकपाल के पास पहुंचने वाली शिकायतें एमपी में पिछले पांच सालों में 631.71% बढ़ गई हैं।पॉलिसी बेचते समय 'कैशलेस' का वादा करने वाली कंपनियां क्लेम के वक्त नियम-शर्तों की ऐसी बारीक लाइनें सामने रख देती हैं कि उपभोक्ता खुद को ठगा सा महसूस करता है। अपनी ही गाढ़ी कमाई के पैसों के लिए दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर परेशान हो चुके उपभोक्ता अब हार मानकर लोकपाल और अदालतों की शरण ले रहे हैं। लोक सभा में पेश किए गए सरकारी आंकड़ों ने बीमा क्षेत्र की इस मनमानी की पोल खोलकर रख दी है। मप्र में 369 से बढ़कर सीधे 2,700 पर पहुंचीं शिकायतें मध्य प्रदेश में बीमा कंपनियों की तानाशाही साल-दर-साल बढ़ते आंकड़ों से साफ समझ आती हैं। साल 2021-22 में प्रदेश भर से बीमा लोकपाल के पास दावों की हेराफेरी और रिजेक्शन को लेकर महज 369 शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। इसके अगले ही साल 2022-23 में शिकायतों का यह ग्राफ करीब तीन गुना की छलांग लगाकर 913 पर जा पहुंचा। इसके बाद आम उपभोक्ताओं को परेशान करने का खेल और तेजी से बढ़ा। वर्ष 2023-24 में यह आंकड़ा सीधे 2,405 पर पहुंच गया और वर्ष 2024-25 में भी कुल 2,420 नए विवादित मामले सामने आए। हद तो तब हो गई जब वर्ष 2025-26 की ताजा रिपोर्ट में मध्य प्रदेश से रिकॉर्ड 2,700 शिकायतें लोकपाल के दफ्तर पहुंचीं। यह आंकड़ा साफ गवाही देता है कि पिछले 5 साल में कंपनियों ने प्रदेश के उपभोक्ताओं का जीना दूभर कर दिया है, जिसके चलते शिकायतों में 631.71% का यह खौफनाक उछाल आया है। जब कंपनियों ने बंद की फाइलें, तो कोर्ट पहुंचे पॉलिसी होल्डर जब बीमा कंपनियां 'नो-क्लेम' का ठप्पा लगाकर उपभोक्ताओं की फाइलें बंद कर देती हैं, तब मजबूरन लोगों को कोर्ट और उपभोक्ता फोरमों का दरवाजा खटखटाना पड़ता है। आंकड़ों के मुताबिक, नेशनल लेवल पर कोर्ट पहुंचने वाले इन विवादित मामलों की संख्या वर्ष 2021-22 में जहां 19,025 थी, वह अब (2025-26) में ढाई गुना बढ़कर 46,122 हो चुकी है। मध्य प्रदेश के संदर्भ में देखें तो इस साल अकेले लोकपाल ने रिकॉर्ड 1,745 मामलों का निपटारा सीधे तौर पर पीड़ित परिवारों के पक्ष में किया है। वहीं अदालतों में भी उपभोक्ताओं की जीत का सिलसिला लगातार मजबूत हुआ है। पिछले पांच सालों में क्रमशः 10,871, 13,442, 22,015, 23,765 और इस साल रिकॉर्ड 25,418 से अधिक फैसले सीधे तौर पर ग्राहकों के हक में आए हैं। यह साबित करता है कि कंपनियां जिन दावों को 'खारिज' कर रही थीं, उनका आधार कानूनी रूप से बिल्कुल गलत और मनमाना था। महाराष्ट्र और गुजरात के बाद मप्र तीसरे नंबर पर लोक सभा की रिपोर्ट में जो सबसे चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है, वह यह है कि क्लेम रिजेक्ट करने और उपभोक्ताओं को रुलाने में देश का सबसे बड़ा औद्योगिक राज्य महाराष्ट्र सबसे आगे है, जहां वर्ष 2025-26 में सबसे ज्यादा 7,333 क्लेम रिजेक्ट होने की शिकायतें दर्ज की गईं। इस सूची में गुजरात दूसरे स्थान पर है, जहां 4,181 मामले दर्ज किए गए। भारी भरकम प्रीमियम वसूलने के बाद भी क्लेम न देने की इस बीमारी से हमारा मध्य प्रदेश देश में तीसरे स्थान पर (2,700 मामले) खड़ा है। वहीं देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में भी 2,587 शिकायतें सामने आई हैं। दक्षिण भारत का रुख करें तो साक्षर राज्य केरल में 2,561 और तमिलनाडु में 2,371 शिकायतें दर्ज की गईं, जो यह साफ दिखाती हैं कि पूरे देश में इस समय बीमा कराने वाले उपभोक्ता कंपनियों के शोषण चक्रव्यूह में फंसे हुए हैं।

श्योपुर में 2, मुरैना में 4 और भिंड में 5 सितंबर को होगा आयोजन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार प्रदेश के विभिन्न अंचलों में लगातार बलराम कृषि महोत्सव का आयोजन किया जाकर किसानों को लाभान्वित किया जा रहा है। किसान कल्याण वर्ष में प्रदेश के प्रत्येक जिला मुख्यालय पर बलराम कृषि महोत्सव मनाया जा रहा है। चंबल संभाग के श्योपुर में 2 सितंबर को मुरैना में 4 सितंबर को और भिंड में 5 सितंबर को बलराम कृषि महोत्सव मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को श्योपुर जिले में आयोजित बलराम महोत्सव को वर्चुअली संबोधित करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में राज्य सरकार द्वारा अन्नदाता किसानों कोलाभान्वित करने के लिये किसान कल्याण वर्ष में विभिन्न कार्यक्रम संचालित किया जा रहे हैं। किसानों के हित में लक्ष्य निर्धारित कर सतत प्रयास किये जा रहे हैं। सरकार ने वर्ष 2028-29 तक 100 लाख हैक्टेयर की सिंचाई क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। उद्यानिकी उत्पादन में 490 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य तय किया है। किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिये सरकार ने प्रतिदिन 50 लाख लीटर दुग्ध संकल्न का लक्ष्य निर्धारित किया है। प्रदेश में 5,562 दुग्ध समितियों के माध्यम से 83 हजार सदस्यों को वित्तीय लाभ मिलेगा। किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिये पीएम किसान सम्मान और मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना में पात्र हितग्राही किसानों को 12 हजार रूपये सालाना दिया जा रहा है। सरकार द्वारा किसानों को सिंचाई के लिये 5 रूपये में बिजली का स्थायी कनेक्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही 10 हॉर्स पॉवर तक के बिजली पंप कनेक्शन में सब्सिडी दी जा रही है। राज्य सरकार ने पीएम कुसुम योजना में 32 लाख किसानों को सोलर पंप देने का लक्ष्य निर्धारित कर सोलर पंप उपलब्ध करा रही है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों में निवेश को बढ़ावा देने के लिये 60 प्रतिशत तक की प्रोत्साहन राशि दी जायेगी। सरकार कृषि आधारित उद्योगों में 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में सराकर ने किसान कल्याण वर्ष में कृषि भूमि अर्जन की स्थिति में किसानों को 4 गुना मुआवजा देने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार ने किसानों को शून्य प्रतिशत की दर पर फसल ऋण का भुगतान साल भर में करने की सुविधा प्रदान की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशन में प्रदेश के समग्र विकास के लिये प्रतिबद्धता पूर्वक सभी वर्गों के कल्याण के लिये विभिन्न योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। किसान एवं संबद्ध राज्य सरकार ने 6 हजार करोड़ रूपये के मत्स्य निर्यात का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें 12 हजार 400 करोड़ रूपये से अधिक का संभावित निवेश आयेगा। सरकार का लक्ष्य है कि दृढ़ संकल्पित होकर समृद्ध मध्यप्रदेश के लिये निरंतर कार्य कर रही है।  

‘प्रलय’ का नाम ही काफी! ब्रह्मोस से ज्यादा रेंज और रफ्तार वाली इस मिसाइल की ताकत जानें

मुंबई  भारत अपने डिफेंस सिस्‍टम को मॉडर्न वॉरफेयर के लिहाज से अपग्रेड कर रहा है. आर्मी, एयरफोर्स और नेवी को नई टेक्‍नोलॉजी से एडवांस किया जा रहा है. खासकर मिसाइल, फाइटर जेट और ड्रोन के सेगमेंट में हजारों करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है. नेक्‍स्‍ट जेनरेशन का फाइटर जेट डेवलप करने के लिए AMCA प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया गया है. इसके तहत पांचवीं के साथ ही छठी और उससे आगे की पीढ़ियों का लड़ाकू विमान डेवलप करने की योजना है. वहीं, मिसाइल डेवलपमेंट के क्षेत्र में भारत लगातार इतिहास रच रहा है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने हिन्‍द महासागर में तकरीबन 3000 किलोमीटर के लिए NOTAM जारी किया है. डिफेंस एक्‍सपर्ट का मानना है कि लंबी से मध्‍यम दूरी तक मार करने वाली मिसाइल का परीक्षण किया जा सकता है. इस बीच, DRDO एक और योजना बना रहे है. इसके तहत लॉन्‍ग रेंज एंटी-शिप मिसाइल के रेंज को दोगुना से ज्‍यादा किया जाएगा।  दरअसल, भारत अपनी समुद्री सुरक्षा और लंबी दूरी की मारक क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है. DRDO लॉन्ग रेंज एंटी-शिप मिसाइल (LR-AShM) के एक्‍सटेंडेड रेंज वाले वेरिएंट की संभावनाओं का अध्ययन कर रहा है, जिसकी मारक क्षमता करीब 3,500 किलोमीटर तक ले जाने का लक्ष्य हो सकता है. हालांकि, इसको लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. मौजूदा LR-AShM 1,500 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है. ऐसे में इसकी रेंज को दोगुने से भी अधिक बढ़ाकर 3,500 किलोमीटर तक ले जाने से यह सिस्‍टम केवल कोस्‍टल सिक्‍योरिटी तक सीमित न रहकर हिंद महासागर क्षेत्र में दूर मौजूद नौसैनिक खतरों के खिलाफ एक रणनीतिक हथियार बन सकती है. इसका इस्तेमाल जमीन से तैनात लॉन्चरों के जरिए समुद्र में काफी दूर मौजूद वॉरशिप और अन्य नौसैनिक लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकेगा।  हाइपरसोनिक टेक्‍नोलॉजी बनेगी अहम आधार ‘डिफेंस डॉट इन’ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित एक्‍सटेंडेड रेंज वाला वेरिएंट मौजूदा LR-AShM की हाइपरसोनिक बूस्ट-ग्लाइड तकनीक पर आधारित हो सकता है. इस तकनीक में शुरुआती रॉकेट फेज मिसाइल को बेहद ऊंचाई और अत्यधिक गति तक पहुंचाते हैं. इसके बाद हाइपरसोनिक ग्लाइड व्‍हीकल अलग होकर वायुमंडल की ऊपरी परतों में एयरोडायनामिक लिफ्ट का इस्तेमाल करते हुए लंबी दूरी तय करता है. रिपोर्ट के मुताबिक, मिसाइल की गति करीब मैक-10 (तकरीबन 12348 किलोमीटर प्रति घंटा) तक पहुंचाने और हजारों किलोमीटर की यात्रा के दौरान उसे नियंत्रित रखने के लिए रॉकेट मोटर, ईंधन, एयरोडायनामिक डिजाइन और फ्लाइट पाथ में बड़े बदलाव की जरूरत होगी. केवल अतिरिक्त ईंधन जोड़कर 3,500 किलोमीटर की रेंज हासिल करना संभव नहीं होगा. इसके लिए प्रोपल्‍सन सिस्‍टम और स्टेजिंग को भी नए सिरे से विकसित करना पड़ सकता है।  LR-AShM बनाम ब्रह्मोस मिसाइल   LR-AShM मिसाइल ब्रह्मोस मिसाइल मौजूदा क्षमता से दोगुनी से ज्यादा होगी रेंज: DRDO कथित तौर पर Long Range Anti-Ship Missile (LR-AShM) के एक एक्‍सटेंडेड वेरिएंट पर काम करने की संभावनाओं का अध्ययन कर रहा है, जिसकी मारक क्षमता 3,500 किलोमीटर तक हो सकती है. मौजूदा LR-AShM की बताई गई क्षमता करीब 1,500 किलोमीटर है. 3,500 किमी की रेंज हासिल होने पर यह प्रणाली तटीय रक्षा से आगे बढ़कर समुद्र में काफी दूर मौजूद नौसैनिक ठिकानों और युद्धपोतों के खिलाफ रणनीतिक क्षमता प्रदान कर सकती है. 800-900 KM तक मारक क्षमता: भारत के एक्‍सटेंडेड घरेलू ब्रह्मोस वेरिएंट की ऑपरेशनल रेंज करीब 800 से 900 किलोमीटर तक बताई जाती है. वहीं, निर्यात संस्करण की रेंज करीब 290 किमी और Su-30MKI से लॉन्च होने वाले संस्करण की क्षमता करीब 450-500 किमी बताई गई है. हाइपरसोनिक टेक्‍नोलॉजी: प्रस्तावित मिसाइल मौजूदा LR-AShM की हाइपरसोनिक boost-glide तकनीक को आगे बढ़ा सकती है. रॉकेट बूस्टर मिसाइल को बेहद ऊंचाई और करीब Mach 10 तक की गति देने के बाद अलग होगा, जिसके बाद हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन वायुमंडल की ऊपरी परतों में एयरोडायनामिक लिफ्ट का इस्तेमाल करते हुए लंबी दूरी तय करेगा. इतनी दूरी हासिल करने के लिए रॉकेट मोटर, ईंधन, मिसाइल की संरचना और उड़ान पथ में बड़े बदलाव की जरूरत होगी. दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइलों में शामिल: ब्रह्मोस करीब Mach 2.8 से Mach 3 की रफ्तार से लक्ष्य की ओर बढ़ सकती है. इसकी सुपरसोनिक स्पीड दुश्मन को प्रतिक्रिया के लिए बेहद कम समय देती है. 2,000 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान बड़ी चुनौती: 3,500 किलोमीटर की उड़ान के दौरान हाइपरसोनिक गति बनाए रखना सबसे बड़ी तकनीकी चुनौतियों में से एक होगा. अत्यधिक गति पर वायुमंडलीय घर्षण से पैदा होने वाली गर्मी मिसाइल के बाहरी हिस्से का तापमान 2,000 डिग्री सेल्सियस से अधिक तक पहुंचा सकती है. ऐसे में DRDO को बेहतर heat shielding, उच्च तापमान सहने वाली सामग्री और अधिक एयरोडायनमिक डिजाइन विकसित करना होगा. तीनों सेनाओं के लिए अहम हथियार: ब्रह्मोस को जमीन, समुद्र और हवा से लॉन्च किया जा सकता है. भारतीय वायुसेना के Su-30MKI लड़ाकू विमान से भी इसका एयर-लॉन्च्ड वेरिएंट इस्तेमाल किया जाता है. NavIC और एडवांस नेविगेशन से सटीक निशाना साधने पर जोर: हजारों किलोमीटर दूर समुद्री लक्ष्य को सटीकता से निशाना बनाने के लिए बेहद एडवांस नेविगेशन सिस्‍टम जरूरी होगी. संभावित रूप से भारत के NavIC सैटेलाइट नेटवर्क के साथ मिसाइल के onboard sensors को जोड़ा जा सकता है. इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के दौरान सैटेलाइट सिग्नल बाधित होने की स्थिति में ring-laser या fibre-optic gyroscopes जैसे आंतरिक नेविगेशन सिस्टम मिसाइल को लक्ष्य तक पहुंचाने में मदद कर सकते हैं. 200-300 किलोग्राम तक वॉरहेड: मिसाइल में करीब 200 से 300 किलोग्राम का पेलोड ले जाने की क्षमता बताई जाती है. इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से पारंपरिक हमलों के लिए किया जाता है. समुद्र में भारत की A2/AD क्षमता को मिल सकता है बड़ा बढ़ावा: अगर 3,500 किलोमीटर क्षमता वाला संस्करण विकसित होता है तो भारत जमीन से लॉन्च होने वाली मिसाइल के जरिए समुद्र में बहुत दूर मौजूद दुश्मन के नौसैनिक बेड़े को निशाना बना सकेगा. इससे भारत की Anti-Access/Area-Denial (A2/AD) क्षमता मजबूत होगी और मेन लैंड एवं स्‍ट्रैटजिक आइलैंड जोन के आसपास एक व्यापक सुरक्षा कवच तैयार हो सकता है. हालांकि, 3,500 किलोमीटर की रेंज फिलहाल एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य है. दो चरणों वाला प्रोपल्शन सिस्टम: ब्रह्मोस में पहले चरण में सॉलिड-प्रोपेलेंट बूस्टर और इसके बाद लिक्विड रैमजेट इंजन काम करता है. यही तकनीक इसे … Read more

वोटर लिस्ट में नाम कटा? महाराष्ट्र SIR के बाद 30 सितंबर तक करें दावा, ऐसे जुड़वाएं नाम

मुंबई  महाराष्ट्र में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रोसेस के तहत जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 2.06 करोड़ लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। ये लोग पिछली वोटर लिस्ट में शामिल कुल मतदाताओं का लगभग 21.14 प्रतिशत थे। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने सोमवार 31 अगस्त को यह जानकारी दी। राज्य के चुनाव अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 7.71 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम शामिल हैं। इनमें 3.95 करोड़ पुरुष, 3.75 करोड़ महिलाएं और 3,087 थर्ड जेंडर (अन्य लिंग) के मतदाता शामिल हैं। मुंबई में मतदाताओं की संख्या में लगभग 36.1 लाख की कमी आई है। यानी करीब 35 फीसदी वोटर ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर हो गए हैं। महाराष्ट्र की पिछली वोटर लिस्ट में जून तक करीब 9.8 करोड़ मतदाता दर्ज थे। जबकि SIR के बाद जारी ड्राफ्ट लिस्ट में यह संख्या घटकर लगभग 7.7 करोड़ रह गई है। यानी आंकड़ों के हिसाब से करीब 21.1 फीसदी की कमी आई है। हालांकि, चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ड्राफ्ट सूची से नाम बाहर होने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति का नाम हमेशा के लिए वोटर लिस्ट से हट गया है। ऐसे लोगों को 30 सितंबर तक अपना दावा और आपत्ति दाखिल करने का मौका दिया गया है। क्यों हटाए गए नाम? अधिकारियों ने बताया कि 2,06,88,487 मतदाताओं के नाम इसलिए हटाए गए क्योंकि उनके एन्यूमरेशन फॉर्म (गणना फर्म) जमा नहीं हो पाए। उनसे संपर्क नहीं हो सका। शायद उनकी मृत्यु हो गई थी। या उन्होंने अपना निवास स्थान बदल लिया था। SIR प्रोसेस से पहले महाराष्ट्र में 9.78 करोड़ मतदाता रजिस्टर्ड थे। इनमें से 78.86 प्रतिशत को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि सबसे ज्यादा फॉर्म 28.6 लाख पुणे में जमा नहीं हो पाए। इसके बाद ठाणे (28.5 लाख), मुंबई उपनगर (26.5 लाख), नागपुर (14.43 लाख), नासिक (10.27 लाख) और मुंबई शहर (9.5 लाख) का नंबर आता है। मुंबई में 36.1 लाख मतदाता कम SIR के बाद मुंबई के मतदाता आंकड़ों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई में करीब 36.1 लाख मतदाता कम हुए हैं, जो पिछली लिस्ट की तुलना में लगभग 35 फीसदी है। यह कमी कई कारणों से हुई है। मतदाता गणना के दौरान जिन लोगों के फॉर्म उपलब्ध नहीं हो सके या जिनके बारे में जानकारी नहीं मिली, उन्हें विभिन्न कैटेगरी में रखा गया। 17 लाख डुप्लीकेट नामों का भी मामला मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोक्कलिंगम के अनुसार, करीब 17 लाख डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में दर्ज पाए गए थे। इन नामों को एक साथ मिलाकर हटाया गया है। इसलिए इन्हें पूरी तरह से 'फर्जी' या 'डुप्लीकेट मतदाता' मानना सही नहीं होगा। यानी एक ही व्यक्ति का नाम अगर एक से अधिक जगह दर्ज था। उसे एक निर्वाचन क्षेत्र में बरकरार रखते हुए दूसरे स्थान से हटाया गया, तो इससे कुल मतदाता संख्या में कमी दिखाई देती है। 30 सितंबर तक वापस जुड़ सकता है नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम बाहर होने वाले मतदाताओं के लिए यह आखिरी मौका नहीं है। वे 30 सितंबर तक दावा और आपत्ति दाखिल कर सकते हैं। अगर किसी पात्र मतदाता का नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं है तो उसे अपने क्षेत्र के संबंधित चुनाव अधिकारी या BLO से संपर्क करके अपना दावा पेश करना होगा। जरूरी प्रक्रिया और दस्तावेज पूरे करने के बाद नाम को वोटर लिस्ट में शामिल कराने का अवसर मिलेगा। 18 साल के होने वाले युवाओं को भी मौका इस प्रक्रिया में पहली बार वोटर बनने वाले युवाओं के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर है। जो युवा 1 अक्टूबर से पहले 18 वर्ष की उम्र पूरी कर रहे हैं, वे भी इस अवधि के दौरान मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इससे पहली बार मतदान करने वाले पात्र युवाओं को भी आगामी चुनावी प्रक्रिया में शामिल होने का रास्ता मिलेगा। ऑनलाइन ऐसे चेक करें अपना नाम वोटर ड्राफ्ट लिस्ट में अपना नाम देखने के लिए नागरिक ECI के वोटर पोर्टल और महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट का इस्तेमाल कर सकते हैं। वोटर अपने EPIC नंबर के जरिए भी नाम और संबंधित डिटेल्स की जांच कर सकते हैं। इसके अलावा जिला निर्वाचन अधिकारियों के स्तर पर भी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट उपलब्ध कराई गई है। नाम नहीं है तो कौन सा फॉर्म भरना होगा? ड्राफ्ट लिस्ट में नाम नहीं होने पर पात्र व्यक्ति Form 6 के जरिए वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकता है। यानी जिन लोगों का नाम SIR के दौरान ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर हो गया है, उनके पास अभी दावा दाखिल कर अपना नाम वापस सूची में शामिल कराने का अवसर मौजूद है।     नाम जोड़ने के लिए: Form 6     मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए: Form 7     एड्रेस या अन्य डिटेल्स में सुधार के लिए: Form 8 ड्राफ्ट लिस्ट को अंतिम सूची न समझें महाराष्ट्र में मतदाता संख्या में इतनी बड़ी गिरावट के बाद सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह ड्राफ्ट मतदाता सूची है। यह फाइनल लिस्ट नहीं। जिन लोगों के नाम इसमें नहीं हैं, वे 30 सितंबर तक दावा और आपत्ति दाखिल कर सकते हैं। इसलिए महाराष्ट्र और खासकर मुंबई के मतदाताओं के लिए जरूरी है कि वे अपना नाम अभी चेक करें। अगर नाम गायब है या डिटेल्स में कोई गलती है, तो तय समय सीमा के भीतर आवेदन कर सुधार या नाम शामिल कराने की प्रक्रिया पूरी करें। आखिर 2.07 करोड़ नाम इस लिस्ट में क्यों आए? चुनाव आयोग ने इस आंकड़े का पूरा हिसाब भी जनता के सामने रखा है:     76.80 लाख वोटर ऐसे हैं जो परमानेंटली कहीं और शिफ्ट हो चुके हैं (ठोस जानकारी मिलने के बाद).     75.52 लाख लोग वेरिफिकेशन के दौरान घर पर मिले ही नहीं या उनका पता नहीं चल पाया.     34.81 लाख वोटरों का निधन हो चुका है (सर्टिफिकेट या परिवार की रिपोर्ट के आधार पर).     17.63 लाख नाम डुप्लीकेट हैं या वो किसी और इलाके में भी रजिस्टर्ड हैं.     2.23 लाख वोटर अन्य कारणों से इस लिस्ट … Read more

एक फ्रेम में मोदी, जिनपिंग और पुतिन! वहीं साइलेंट होकर अपनी जगह पहुंचे शहबाज शरीफ

 नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वक्त किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में हैं. वह शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ के शिखर सम्मेलन में शामिल हुए. सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत संगठन के कई नेता पहुंचे. इसी दौरान एक ऐसा पल सामने आया, जिसमें पीएम मोदी ने जिनपिंग और पुतिन से एक साथ गर्मजोशी से मुलाकात की, जबकि शहबाज शरीफ उनके बगल से चुपचाप गुजरते नजर आए।  दरअसल, एससीओ के सभी नेता एक साथ जुट रहे थे. इसी दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक साथ सामने से आते दिखाई दिए. सामने पहुंचते ही शी जिनपिंग ने पीएम मोदी की तरफ हाथ बढ़ाया और दोनों नेताओं ने हैंडशेक किया. इसी दौरान पीएम मोदी ने पुतिन के हाथ पर भी गर्मजोशी से हाथ रखा. कुछ सेकेंड के इस पल में पीएम मोदी, जिनपिंग और पुतिन तीनों एक साथ नजर आए।  इसके बाद शी जिनपिंग आगे बढ़कर मंच की तरफ चले गए. लेकिन पीएम मोदी और पुतिन की बातचीत कुछ देर और जारी रही. दोनों नेता एक-दूसरे से गप-शप करते दिखाई दिए. इसके बाद पुतिन एक करीबी दोस्त की तरह पीएम मोदी को मंच तक ले जाते नजर आए. इस दौरान उन्होंने पीएम मोदी की पीठ पर हाथ भी रखा. मंच तक पहुंचने के बाद पुतिन अपने स्थान की तरफ बढ़ गए।  इसी दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी अपने स्थान की तरफ जाते दिखाई दिए. वीडियो में वह पीएम मोदी, जिनपिंग और पुतिन के पास से शांत तरीके से आगे बढ़ते नजर आते हैं. जब तीनों नेताओं के आसपास लोगों की भीड़ जुटी थी, उस वक्त शहबाज शरीफ उनके पीछे से आगे बढ़ते दिखाई दिए।  जिनपिंग के साथ मिलाया हाथ  इस घटना से जुड़ी अंदर की भी तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, जिसमें वो जिनपिंग के साथ एक दोस्ताना अंदाज में नजर आ रहे हैं और दोनों नेता हाथ मिलाते हुए साफ-साफ दिख रहे हैं।  पुतिन-मोदी की मुलाकात रही सुर्खियों में  इससे पहले सोमवार को पीएम मोदी ने यहीं पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात थी. यहां पर दोनों देशों के नेताओं ने एक दूसरे को शुभकामना दी और आने वाले ब्रिक्स सम्मेलन में पुतिन ने पहुंचने की बात भी कही. इसके अलावा भारत-रूस के सालाना समिट में भी एक बार फिर पीएम मोदी और पुतिन की मुलाकात होने वाली है. इन सबके साथ ही प्रधानमंत्री ने रूसी राष्ट्रपति से यूक्रेन युद्ध को लेकर भी चर्चा की और कहा कि मानवता के हित में युद्ध का अंत होना चाहिए।  एससीओ सम्मेलन से पीएम मोदी ने नेताओं के साथ अपनी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर शेयर कीं. इन तस्वीरों में शहबाज शरीफ रूसी राष्ट्रपति पुतिन के बगल में खड़े दिखाई दिए. वहीं पीएम मोदी दूसरी तस्वीर में पुतिन के दोस्त और बेलारूस के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर लुकाशेंको और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के बीच खड़े नजर आए।  बिश्केक में सामने आया यह पूरा दिलचस्प वाकया इसलिए भी दिलचस्प रहा क्योंकि एक ही मंच पर पीएम मोदी, जिनपिंग और पुतिन की मौजूदगी पर ग्लोबल मीडिया की नजर रही. वहीं, इसी दौरान शहबाज शरीफ का चुपचाप आगे बढ़ते हुए दिखना वीडियो का अलग ही हिस्सा बन गया। 

हेग कोर्ट के फैसले पर भारत का करारा जवाब! कहा- कोर्ट का कोई अधिकार नहीं, आदेश मानने से इनकार

नई दिल्ली  भारत के निजी मामले में दखलअंदाजी करने की कोशिश कर रही अंतरराष्ट्रीय संस्था को भारत ने उसकी हैसियत याद दिला दी। इस संस्था ने सिंधु समझौते पर पाकिस्तान के पक्ष में फैसला दिया था। संस्था को लगा कि इससे भारत के ऊपर दबाव बनेगा, लेकिन भारत ने उस अंतरराष्ट्रीय संस्था को सीधे ठेंगा दिखा दिया और उसके किसी भी आदेश को मानने से साफ मना कर दिया। इस संस्था का नाम ' कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ' (CoA) है और इसका ऑफिस नीदरलैंड के सुंदर और बेहद अहम शहर द हेग में है। संस्था को ही बता दिया गैर कानूनी भारत ने सोमवार को 'कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन' के फैसले को मानने से मना कर दिया। संस्था का फैसला सिंधु जल संधि से जुड़ा था। इतना ही नहीं भारत ने कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन 'गैर-कानूनी तरीके से गठित तक बता दिया और कहा कि संस्था के फैसले का भारत के संप्रभु फैसलों पर कोई असर नहीं पड़ता। विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक बयान में कहा कि 'कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन' का गठन वर्ल्ड बैंक ने किया था। ये पाकिस्तान के साथ भारत की 1960 की संधि की शर्तों का साफ तौर पर उल्लंघन था। कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन का निर्देश खारिज इन घटनाक्रमों से साफ है कि सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद फिर बढ़ गया। दरअसल, हेग स्थित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने कहा था कि भारत सिंधु जल संधि को एकतरफा तौर पर न तो रोक सकता है और न ही खत्म कर सकता है। भारत ने इस फैसले को सीधे तौर पर खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने इस कोर्ट को कभी मान्यता नहीं दी है। इसलिए भारत न तो इसकी कार्यवाही में शामिल हुआ और न ही इसके पहले दिए गए किसी फैसले को स्वीकार किया है। सिंधु जल संधि अस्थायी तौर पर स्थगित भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक कोर्ट का मौजूदा या भविष्य में आने वाला कोई भी फैसला भारत की ओर से चलाए जा रहे प्रोजेक्ट या उसके फैसलों पर असर नहीं डालेगा। विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि भारत का सिंधु जल संधि को अबेयंस में रखने का फैसला लागू है। यानी भारत ने संधि के तहत अपनी जिम्मेदारियों को फिलहाल रोक रखा है। मंत्रालय ने कहा कि भारत अपने इस फैसले पर कायम है। दरअसल, अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला लिया था। भारत का कहना रहा है कि पाकिस्तान के साथ सामान्य संबंधों के लिए आतंकवाद और पानी के मुद्दे को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। अदालत ने रतले प्रोजेक्ट पर भी टिप्पणी की मध्यस्थता अदालत ने जम्मू-कश्मीर में बन रहे रतले जलविद्युत संयंत्र से जुड़े कुछ निर्माण कार्यों पर अस्थायी रोक लगाने का निर्देश भी दिया है। अदालत का कहना है कि सिंधु जल संधि के तहत किसी एक देश को अपने स्तर पर संधि को रोकने, निलंबित करने या खत्म करने का अधिकार नहीं है। वहीं भारत इस पूरे निष्कर्ष को मानने से इनकार कर रहा है। भारत का तर्क है कि जिस संस्था के अधिकार क्षेत्र को ही वह स्वीकार नहीं करता, उसके फैसले उसके लिए बाध्यकारी नहीं हो सकते। सिंधु जल संधि: आखिर विवाद है किस बात पर? भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि 1960 में हुई थी। इसके तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह नदियों के पानी के इस्तेमाल को लेकर दोनों देशों के अधिकार और जिम्मेदारियां तय की गई थीं। हाल के वर्षों में इस संधि को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा है। भारत ने संधि को स्थगित रखने का फैसला लिया है जबकि पाकिस्तान लगातार संधि को लागू रखने की मांग करता रहा है। इसी विवाद के बीच पाकिस्तान की पहल पर मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू हुई। भारत ने इस प्रक्रिया में शामिल होने से इनकार किया और अपनी अलग आपत्तियां दर्ज कराईं। भारत का रुख साफ: संधि पर हमारा फैसला कायम विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में दोहराया कि भारत इस तथाकथित मध्यस्थता संस्था के किसी भी फैसले को मान्यता नहीं देता। भारत के मुताबिक, इस संस्था का गठन ही संधि के प्रावधानों के खिलाफ है। इसलिए उसके द्वारा सुनाया गया कोई भी फैसला भारत के लिए बाध्यकारी नहीं है। इस तरह सिंधु जल संधि को लेकर अब दो बिल्कुल अलग दावे सामने हैं। हेग की मध्यस्थता अदालत संधि को लागू मान रही है जबकि भारत अदालत के अधिकार क्षेत्र और उसके फैसले- दोनों को ही खारिज कर रहा है। इस विवाद का असर भारत-पाकिस्तान के बीच पानी के बंटवारे के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर में चल रही जलविद्युत परियोजनाओं पर भी देखने को मिल सकता है। सिंधु जल संधि: भारत को पाकिस्तान से दोबारा बातचीत की जरूरत क्यों पड़ी?  समझिए विवाद की पूरी कहानी भारत ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को ‘स्थगित’ (In Abeyance) रखने का फैसला अभी तक बरकरार रखा है। पिछले कुछ हफ्तों में पाकिस्तान की ओर से कई तीखी और राजनीतिक बयानबाज़ियां सामने आई हैं। पाकिस्तान ने पिछले महीने इस संधि पर एक तथाकथित ‘अंतरराष्ट्रीय’ कॉन्फ्रेंस भी आयोजित की। इसमें वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों और प्रमुख नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर सिंधु नदी बेसिन की नदियों के जल प्रवाह में किसी तरह की रुकावट डाली गई तो इसके गंभीर परिणाम होंगे और युद्ध जैसी हालात भी पैदा हो सकते हैं। आर्बिट्रेशन कोर्ट ने बयान में क्या कहा था? कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने सोमवार को जारी अपने बयान में कहा था कि भारत ने जिस आधार पर संधि को स्थगित किया है, वह संधि को रोकने या खत्म करने के लिए पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने कहा कि सिंधु जल संधि अभी भी पूरी तरह लागू है और भारत को संधि के तहत अपनी जिम्मेदारियां निभानी चाहिए। भारत ने इस दावे को भी स्वीकार नहीं किया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कोर्ट जिस तरह से बनाया गया है, वह खुद सिंधु जल संधि की शर्तों का उल्लंघन है। इसलिए भारत के लिए इसके फैसले की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है। पाकिस्तान संधि लागू करने की लगा रहा गुहार भारत का कहना है कि कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के पास इन मामलों … Read more

राष्ट्रपति भवन में छत्तीसगढ़ की प्रतिभा और समृद्ध लोक संस्कृति की विद्यार्थियों ने छोड़ी अमिट छाप

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु से भेंट कर लौटे छत्तीसगढ़ के प्रतिभावान विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने सौजन्य मुलाकात की। विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री  साय को राष्ट्रपति भवन की अपनी यादगार यात्रा और राष्ट्रपति महोदया के साथ हुए आत्मीय संवाद के अनुभव सुनाए। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को इस विशेष अवसर के लिए बधाई देते हुए कहा कि राष्ट्रपति भवन में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करना अपने आप में गौरव की बात है। प्रदेश के विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक प्रस्तुति से छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया है। मुख्यमंत्री  साय ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद करते हुए उनकी यात्रा के संबंध में जानकारी ली। विद्यार्थियों ने बताया कि राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु से मिलना उनके जीवन का अविस्मरणीय अनुभव रहा। राष्ट्रपति महोदया ने उनसे सहजता और आत्मीयता के साथ बातचीत की तथा उनकी शिक्षा, रुचियों और भविष्य की आकांक्षाओं के बारे में जाना। विद्यार्थियों ने राष्ट्रपति भवन के भ्रमण और वहां बिताए क्षणों से जुड़े अपने अनुभव भी मुख्यमंत्री के साथ साझा किए। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हमारे बच्चों में प्रतिभा और संभावनाओं की कोई कमी नहीं है। उन्हें सही अवसर, प्रोत्साहन और मंच मिले तो वे हर क्षेत्र में छत्तीसगढ़ का नाम रोशन कर सकते हैं। ऐसे अवसर विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ उनके सपनों को नई ऊंचाई देते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से पूरी लगन और मेहनत के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखने तथा जीवन में बड़े लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया। उल्लेखनीय है कि रक्षाबंधन के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ के प्रतिभावान विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु से भेंट और संवाद का विशेष अवसर प्राप्त हुआ था। इस अवसर पर राष्ट्रपति महोदया ने विद्यार्थियों से आत्मीयतापूर्वक बातचीत की। उन्होंने बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। राष्ट्रपति भवन में इस मुलाकात का एक अत्यंत भावुक और यादगार क्षण उस समय आया, जब राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु ने CWSN (Children with Special Needs) विद्यार्थी नुकेश कुमार वर्मा को स्वयं राखी बांधी। राष्ट्रपति महोदया का यह आत्मीय स्नेह नुकेश के साथ ही वहां उपस्थित विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए भी जीवनभर संजोकर रखने वाली स्मृति बन गया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति की सुंदर झलक भी राष्ट्रपति भवन में देखने को मिली। छात्राओं ने प्रदेश के पारंपरिक सुवा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा, गीत-संगीत और सांस्कृतिक सौंदर्य से सजी इस प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया। राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु ने प्रस्तुति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं की सराहना की। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि यह विशेष रूप से प्रसन्नता की बात है कि प्रदेश के बच्चों ने देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा से जुड़े राष्ट्रपति भवन में छत्तीसगढ़ की प्रतिभा के साथ उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भी सुंदर परिचय दिया। उन्होंने कहा कि हमारी लोक संस्कृति हमारी पहचान और हमारी अमूल्य धरोहर है। नई पीढ़ी जब इसे आत्मसात कर देश के प्रतिष्ठित मंचों पर प्रस्तुत करती है, तो हमारी परंपराओं को नई ऊर्जा और व्यापक पहचान मिलती है। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि राष्ट्रपति महोदया से प्राप्त प्रोत्साहन और इस यात्रा से मिले अनुभव को वे अपने जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा बनाएं। उन्होंने सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वे अपने सपनों को बड़ा रखें, आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें और अपनी उपलब्धियों से परिवार, प्रदेश और देश को गौरवान्वित करें। राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु से भेंट करने वाले विद्यार्थियों में नारायणपुर जिले की राजवती पोयाम, सुकमा जिले के हिमांशु ठाकुर, दुर्ग जिले की पायल राजानी, महासमुंद जिले की रागनी साहू, रायपुर जिले के नुकेश कुमार वर्मा तथा महासमुंद जिले के दुर्गेश साहू एवं डिगेश सेन शामिल थे। इस अवसर पर डॉ. मुक्ति बैस, राज्य नोडल अधिकारी, समग्र शिक्षा, रायपुर तथा  चंद्रशेखर मिथलेश, व्याख्याता (भौतिकी), शासकीय आशी बाई गोलछा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, महासमुंद भी उपस्थित थे।  

डॉ. तीजन बाई श्रद्धांजलि समारोह की तैयारियां तेज, शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों के साथ किया निरीक्षण

रायपुर. प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव पद्म विभूषण से सम्मानित, विश्वविख्यात पंडवानी गायिका एवं छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की अमूल्य धरोहर स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई के गृहग्राम गनियारी स्थित निवास पहुंचे। उन्होंने शोकाकुल परिवारजनों से भेंट कर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं तथा इस दुःख की घड़ी में उन्हें ढांढस बंधाया। इस अवसर पर उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार 14 जुलाई को आयोजित होने वाले दशगात्र एवं श्रद्धांजलि कार्यक्रम की तैयारियों के संबंध में परिवारजनों एवं जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा कर आवश्यक व्यवस्थाओं की चर्चा की। यादव ने कहा कि स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई का निधन केवल उनके परिवार की नहीं, बल्कि समूचे छत्तीसगढ़ और देश की सांस्कृतिक विरासत की अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपनी विलक्षण पंडवानी गायन शैली के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोककला को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका सांस्कृतिक योगदान, व्यक्तित्व और कला सदैव आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। स्कूल शिक्षा मंत्री ने कहा कि दशगात्र एवं श्रद्धांजलि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में दिवंगत डॉ. तीजन बाई के प्रशंसकों, कला जगत से जुड़े लोगों एवं गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति को देखते हुए बैठक, भोजन, आवागमन सहित सभी व्यवस्थाएं गरिमापूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से सुनिश्चित की जाएंगी। उन्होंने परिवारजनों से आवश्यक व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की तथा आश्वस्त किया कि राज्य शासन इस अवसर पर हर संभव सहयोग प्रदान करेगा। इस अवसर पर महापौर निर्मल कोसरे, ग्रामवासी, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक सहित जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।