samacharsecretary.com

ब्रिक्स कृषि कार्य समूह का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन: इंदौर में 9-13 जून तक आयोजन

इंदौर में 9 से 13 जून तक आयोजित होगा ब्रिक्स कृषि कार्य समूह का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सम्मेलन में 21 देशों के कृषि मंत्री, विशेषज्ञ और वरिष्ठ अधिकारी होंगे शामिल दो चरणों में होगा सम्मेलन, कृषि नवाचारों पर होगी वैश्विक चर्चा इंदौर केन्द्र सरकार द्वारा आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन-2026 के अंतर्गत कृषि कार्य समूह का महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आगामी 9 से 13 जून तक इंदौर के ग्रेंड शेरेटन होटल में होगा। पांच दिवसीय इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में 21 देशों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, नीति निर्धारक एवं विशेषज्ञ शामिल होंगे। सम्मेलन को लेकर रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इंदौर में बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में आयोजित होने वाला यह सम्मेलन प्रदेश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर है। शहर की स्वच्छता, हरियाली और सुंदरता अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने उत्कृष्ट रूप में प्रदर्शित होना चाहिए। उन्होंने नगर निगम, पुलिस प्रशासन, पर्यटन, लोक निर्माण, स्वास्थ्य विभाग सहित सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने आयोजन स्थलों, प्रमुख मार्गों एवं सार्वजनिक स्थलों पर विशेष साफ-सफाई, आकर्षक सजावट और प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि सम्मेलन के दौरान मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक कला, पारंपरिक खान-पान और कृषि नवाचारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाए। विदेशी प्रतिनिधियों के लिए विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदेश भ्रमण और कृषि उपलब्धियों पर आधारित प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्मेलन में आने वाले विदेशी मेहमानों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। एयरपोर्ट और होटलों पर अंग्रेजी, रूसी, तुर्की सहित विभिन्न भाषाओं के जानकार गाइड तैनात किए जाएं और उन्हें व्यवहार और आतिथ्य का पूर्व प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने कहा कि मेहमानों का स्वागत पगड़ी, तिलक और फूलमालाओं के साथ भारतीय परंपरा के अनुरूप गर्मजोशी से किया जाए। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में मध्यप्रदेश की लोक संस्कृति, पारंपरिक नृत्य एवं प्रसिद्ध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को शामिल करने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने कहा कि सम्मेलन की ब्रांडिंग में मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक पहचान स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए। केन्द्रीय कृषि मंत्री चौहान ने कहा कि सम्मेलन में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, यूगांडा, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात, कोलम्बिया, इंडोनेशिया सहित कुल 21 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि विश्व के लगभग 68 प्रतिशत किसान इन देशों में निवास करते हैं। उन्होंने कहा कि आयोजन की सभी व्यवस्थाएं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हों। बैठक में जानकारी दी गई कि सम्मेलन दो चरणों में आयोजित होगा। प्रथम चरण में 9 से 11 जून तक वरिष्ठ अधिकारियों की तीन दिवसीय बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें कृषि नवाचार, खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में स्मार्ट कृषि, कृषि अनुसंधान, कृषि व्यापार, किसान कल्याण तथा सतत विकास रणनीतियों जैसे विषयों पर तकनीकी चर्चा होगी। इसके बाद 12 एवं 13 जून को कृषि मंत्रियों की मुख्य बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें कृषि क्षेत्र में वैश्विक सहयोग और नीति संबंधी विषयों पर विचार-विमर्श होगा। इंदौर के ग्रामीण हाट बाजार में कृषि आधारित विशेष प्रदर्शनी लगाई जाएगी। समीक्षा बैठक में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, विधायक मधु वर्मा, रमेश मेंदोला, श्रीमती मालिनी गौड़, श्रीमती उषा ठाकुर, सुमित मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। बैठक में संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर शिवम वर्मा तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।  

चुनावी नतीजों के बाद शेयर बाजार में उछाल, सेंसेक्स में 900 अंक की बढ़त

मुंबई   मजबूत ग्लोबल सेंटिमेंट और पश्चिम बंगाल (West Bengal Election Result, 2026) सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों के बीचआज बाजार रफ्तार में है। खासतौर पर पश्चिम बंगाल में BJP की जीत की उम्मीद को बाजार घरेलू पॉलिटिकल डायनेमिक्स के हिसाब से एक पॉजिटिव संकेत मान रहा है। इसके चलते Sensex जहां, 900 अंक से ज्यादा की तेजी के साथ 77,910.75 पार चला गया है। वहीं, निफ्टी करीब 300 अंक के उछाल के साथ 24,290.20 तक पहुंच गया है। शुरुआती गैप-अप के बाद से ही बाजार में तेजी बरकरार है, जिससे साफ है कि ग्लोबल संकेतों के सपोर्ट से निवेशकों का सेंटीमेंट पॉजिटिव बना हुआ है और खरीदारी का दायरा बढ़ रहा है। गैप अप हुई ओपनिंग आज घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत पॉजिटिव लेकिन सतर्कता के साथ हुई है। Sensex जहां 343.77 अंकों की बढ़त के साथ 77,257.27 पर खुला, वहीं Nifty 66 अंकों की तेजी के साथ 24,063.55 पर ओपन हुआ है। हालांकि, आज ग्लोबल संकेत पॉजिटिव हैं। लेकिन, पश्चिम बंगाल सहित 5 राज्यों के चुनाव नतीजों को लेकर निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं। हालांकि, ओवरऑल अब भी क्रूड और यूएस-ईरान युद्ध ही बाजार के प्रमुख ड्राइविंग फैक्टर बने हुए हैं। ब्रॉड मार्केट में चौतरफा खरीदारी ब्रॉड मार्केट में आज मजबूती का व्यापक संकेत दिखा, जहां Nifty 500 करीब 0.44% और Nifty 200 0.40% की बढ़त के साथ ट्रेड कर रहे हैं। खास बात यह रही कि मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में ज्यादा तेजी दिखी, जहां Nifty Midcap 100 लगभग 0.75% और Nifty Smallcap 100 करीब 0.78% ऊपर हैं। यह संकेत देता है कि बाजार में जोखिम लेने की क्षमता बढ़ी है और निवेशक बड़े शेयरों के साथ-साथ ब्रॉड-बेस्ड खरीदारी कर रहे हैं। हालांकि India VIX में उछाल (करीब 5.8%) यह भी दिखाता है कि वोलैटिलिटी अभी बनी हुई है। सेक्टोरल मार्केट में IT, Auto में तेजी सेक्टोरल इंडेक्स में आज मिलाजुला लेकिन पॉजिटिव रुख देखने को मिला, जहां Nifty IT (0.86%), Nifty Auto (0.83%) और Nifty Realty (0.87%) ने बाजार को सपोर्ट दिया। इसके अलावा FMCG, मेटल और फार्मा सेक्टर में भी हल्की खरीदारी देखने को मिली। हालांकि बैंकिंग स्पेस में कमजोरी दिखी, जहां Nifty Private Bank हल्की गिरावट में रहा और Nifty Bank में सीमित बढ़त दर्ज हुई। इससे साफ है कि बाजार की तेजी फिलहाल सेक्टर-विशिष्ट है, जिसमें IT और रियल्टी जैसे सेक्टर लीड कर रहे हैं, जबकि बैंकिंग अभी भी दबाव में है। निवेशकों की संपत्ति में ₹6 लाख करोड़ का इजाफा निफ्टी मिडकैप 150 और स्मॉलकैप 250 में भी 1-1% से ज्यादा का उछाल देखा गया. इस शानदार रैली के कारण निवेशकों की संपत्ति में एक ही सत्र में लगभग ₹6 लाख करोड़ का इजाफा हुआ, जिससे बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹463 लाख करोड़ से बढ़कर ₹469 लाख करोड़ के पार पहुंच गया. पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी के रुझान जैसे-जैसे साफ होंगे, बाजार  में हलचल और तेज होने की उम्मीद है।  रियल्टी और आईटी शेयरों में बंपर तेजी सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो शुरुआती कारोबार में रियल्टी और आईटी शेयरों में खरीदारी देखी गई.निफ्टी रियल्टी और निफ्टी आईटी टॉप गेनर था. निफ्टी ऑटो, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी मेटल, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और निफ्टी फार्मा के साथ करीब सभी इंडेक्स हरे निशान में थे।  विदेशों से मिले थे अच्छे संकेत  भारतीय शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत से पहले ही विदेशों से सेंसेक्स निफ्टी के लिए अच्छे संकेत मिल रहे थे, ज्यादातर एशियाई शेयर बाजारों में तेजी के साथ कारोबार हो रहा था, तो वहीं Gift Nifty भी ग्रीन जोन में नजर आया।  सभी सेक्टर ग्रीन-ग्रीन  शेयर बाजार में तेजी के बीच लगभग सभी सेक्टर ग्रीन जोन में नजर आए. निफ्टी ऑटो, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी मेटल्स और निफ्टी पीएसयू बैंक में तेजी के साथ कोराबार हो रहा था।  दिग्गज कंपनियों के शेयर दौड़े शेयर बाजार में तेजी के बीच बीएसई लार्जकैप में शामिल Maruti Share (4.10%), HUL Share (3.95%), LT Share (2.50%), Asian Paints Share (2.40%), Adani Ports Share (2.35%) की तेजी लेकर कारोबार कर रहे थे. तो वहीं बैंकिंग शेयरों में भी उछाल देखने को मिला. Axis Bank Share (1.80%), HDFC Bank Share (1.60%) और SBI Share (1.30%) की तेजी में नजर आया। 

भवानीपुर में भाजपा की बढ़त, ममता बनर्जी की राजनीति को क्या होगी चुनौती?

नई दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश समेत देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में नतीजों की घड़ी आ गई है. वोटों की गिनती के साथ ही रुझान आने शुरू हो गए हैं. बंगाल के रुझानों में टीएमसी-बीजेपी के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है. वहीं असम में बीजेपी आगे चल रही है जबिक केरलम में यूडीएफ को बढ़त दिख रही है. वहीं तमिलनाडु में सत्ताधारी डीएमके अपनी बढ़त को कायम किए हुए है.  जिन पांच राज्यों के चुनाव नतीजे आज आ रहे हैं, उनमें पश्चिम बंगाल और असम के साथ ही केरल और तमिलनाडु भी शामिल हैं. केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में रंगास्वामी राज जारी रहेगा या सत्ता बदलेगी, इसका फैसला भी आज आएगा।  पश्चिम बंगाल में विधानसभा की कुल 294 सीटें हैं. जिन पर वोट डाले गए थे. पहले चरण में 152 सीटों के लिए 23 अप्रैल को मतदान हुआ था. वहीं, दूसरे चरण में 142 सीटों पर 29 अप्रैल को वोट डाले गए थे. एक सीट पर पुनर्मतदान होना है, जिसकी वजह से आज 293 सीटों के नतीजे आ रहे हैं. शुरुआती रुझानों में बीजेपी और टीएमसी के बीच टाइट फाइट नजर आ रही है।  बंगाल में बीजेपी 129 सीटों पर आगे पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने फिर से लीड ले ली है. बीजेपी के उम्मीदवार शुरुआती रुझानों में 129  सीटों पर आगे चल रही है. वहीं, टीएमसी 110 सीटों पर आगे है. कांग्रेस एक सीट पर बढ़त बनाए हुए है. लेफ्ट का खाता भी खुलता नजर नहीं आ रहा है।  असम में बहुमत से आगे निकली बीजेपी असम के रुझानों में बीजेपी बहुमत के आंकड़े से आगे निकल गई है. बीजेपी 66 सीटों पर आगे निकल गई है. कांग्रेस की अगुवाई वाला गठबंधन 19 सीटों पर आगे चल रहा है. अन्य का खाता अब तक खुलता नहीं नजर आ रहा है।   बंगाल के रुझानों में टाइट फाइट पश्चिम बंगाल के शुरुआती रुझानों में फाइट टाइट दिख रही है. कभी बीजेपी, तो कभी टीएमसी आगे निकल रही है. फिलहाल, बीजेपी ने 122 विधानसभा सीटों पर लीड ले ली है. टीएमसी भी अधिक पीछे नहीं है. ममता बनर्जी की पार्टी 105 सीटों पर आगे चल रही है।  बंगाल और असमें बीजेपी को बढ़त, केरलमें यूडीएफ आगे बंगाल में 162 सीटों के रुझान आ गए ङैं जिसमें बीजेपी 88 सीटों पर आगे है जबकि टीएमसी72 सीटों पर आगे है. वहीं असम में 126 में से 54 सीटों के रुझान आ गए हैं जिसमें बीजेपी 44 सीटों पर आगे हैं जबकि कांग्रेस 10 सीटों पर आगे है.  केरलम में 140 सीटों में से 27 के रुझान आए हैं जिसमें यूडीएफ 15 और एलडीएफ और बीजेपी 5-5 सीटों पर आगे चल रहे हैं।  कभी बीजेपी, तो कभी टीएमसी आगे निकल रही है. शुरुआती रुझानों में बीजेपी और टीएमसी, दोनों दलों की लीड का आंकड़ा सौ के पार पहुंच चुका है. सत्ताधारी टीएमसी ममता बनर्जी की अगुवाई में जीत का चौका लगाने की कोशिश में है, वहीं बीजेपी को कमल खिलने की पुरजोर उम्मीद है., पश्चिम बंगाल में आजादी के बाद से अब तक का सर्वाधिक मतदान दर्ज किया गया है. सूबे में 92 फीसदी से अधिक मतदान हुआ है. भवानीपुर विधानसभा सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और सूबे की विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी आमने-सामने हैं।  एक्टर विजय का प्रचंड उलटफेर, असम में बीजेपी की जीत तय पश्चिम बंगाल : बैलट पेपर के शुरुआती रुझानों के मुताबिक बीजेपी आगे चल रही है. हालांकि टीएमसी ज्यादा पीछे नहीं है. पश्चिम बंगाल विधानसभा में 294 सीटें हैं. बहुमत का आंकड़ा 148 है. एक सीट फालटा में वोटों की गिनती नहीं हो रही है. बीजेपी की पैठ इस बार दमदार है. अब तक भद्रलोक बीजेपी के साथ नहीं था. इस बार कोलकाता, हावड़ा, आसनसोल जैसे शहरी इलाकों में 2021 के मुकाबले 20 प्रतिशत ज्यादा वोटिंग हुई. इसका असर रुझानों में है. इन शहरी सीटों पर बीजेपी आगे है।  तमिलनाडु : डीएमके पर जनता फिर भरोसा जताती दिख रही है. एक्टर विजय के टीवीके से भी पिछड़ गई है एआईएडीएमके. तमिलनाडु विधानसभा में 324 सीटें हैं और बहुमत के लिए 173 सीटें चाहिए।   तमिलनाडु में टीवीके बड़ी ताकत के तौर पर उभर रही है असम : कांग्रेस से अलग होने के बाद इसी की हस्ती मिटाने वाले हिमंत बिस्वा सरमा भगवा झंडा फिर फहराने की तैयारी में है. असम विधानसभा में 126 सीटें हैं और बहुमत का जादुई आंकड़ा 64 है।  केरलम : अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहा लेफ्ट फ्रंट कठिन दौर से गुजर रहा है. हालांकि पिनरई विजयन की पार्टी कांग्रेस की अगुआई वाले यूडीएफ को कड़ी टक्कर दे रही है. अगर एलडीएफ की हार होती है तो पूरे देश से कम्युनिस्टों का सफाया हो जाएगा. ताजा डेटा के मुताबिक 76 सीटों पर यूडीएफ आगे है. केरलम विधानसभा में 140 सीटें हैं और बहुमत का जादुई आंकड़ा 71 है. रुझान अगर परिणाम में तब्दील हो गए तो कांग्रेस का सीएम बनना तय है।  असम में विधानसभा की कुल 126 विधानसभा सीटें हैं. प्रदेश की सभी 126 विधानसभा सीटों के लिए 9 अप्रैल को वोट डाले गए थे. मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की अगुवाई में चुनाव मैदान में उतरी बीजेपी को जीत की हैट्रिक लगाने का भरोसा है. वहीं, सूबे की सत्ता से 10 साल लंबा वनवास समाप्त कराने की कोशिशों में जुटी कांग्रेस को भी जीत की उम्मीद है. प्रदेश में इस बार रिकॉर्ड 85 फीसदी से अधिक वोटिंग हुई है।  तमिलनाडु में 234 विधानसभा सीटों हैं. इन सीटों के लिए 23 अप्रैल को मतदान हुआ था. सूबे में मतदाताओं ने जबरदस्त उत्साह दिखाया और मतदान का आंकड़ा सभी पिछले रिकॉर्ड तोड़ते हुए 85.14 फीसदी तक पहुंच गया. सूबे में डीएमके की अगुवाई वाली मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की सरकार है. विपक्षी एनडीए की अगुवाई सूबे में एआईएडीएमके कर रही है. थलापति विजय की अगुवाई वाली नई नवेली टीवीके मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में है।  केरलम की बात करें तो इस तटीय प्रदेश की 140 विधानसभा सीटों के लिए एक ही चरण में 9 अप्रैल को वोट डाले गए थे. इस बार सूबे में 78.27 फीसदी मतदान हुआ है. वहीं, केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की 30 सीटों के लिए भी 9 अप्रैल को ही वोट डाले … Read more

BJP की धांसू रणनीति: MP में राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस से तीसरी सीट छीनने की तैयारी

भोपाल  मध्य प्रदेश की राज्यसभा चुनाव के लिए बिसातें बिछनी शुरु हो गई हैं। प्रदेश में तीन राज्यसभा सीटें अगले महीने यानी की जून में रिक्त हो रही हैं, इस सीटों के खाली होने के पहले ही बीजेपी और कांग्रेस में प्योर रणनीति पर काम शुरु हो चुका है। प्रदेश की जिन सीटों पर जून 2026 में चुनाव होगों उनमें कांग्रेस के दिग्विजय सिंह, दूसरी पर भाजपा के सुमेर सिंह सोलंकी और तीसरी सीट पर राज्य मंत्री जार्ज कुरियन राज्यसभा सदस्य हैं। इन्ही तीन सीटों पर चुनाव होगें। संख्या बल के हिसाब से देखें तो 2 सीटें भाजपा और एक कांग्रेस के खाते में जानी तय मानी जा रही है लेकिन कांग्रेस सीट पर दिग्विजय सिंह के मना करने और कांग्रेस के बढ़ते दावेदारों के साथ ही, कांग्रेस में चल रही गुटबाजी और कलह का फायदा उठाकर भाजपा तीसरी सीट को भी अपने पाले में ले जाने की योजना पर विचार कर रही है, भाजपा अपना उम्मीदवार उतारने का प्लान बना रही है। भाजपा कर रही इस ऱणनीति पर काम दरअसल पहले इस सीट के लिए पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम चर्चाओं में था, लेकिन दतिया में राजेंद्र भारती की सदस्यता पर लटकी तलवार से संभावित विधानसभा उपचुनाव के चलते अब स्थिति बदल रही है।   किसी आदिवासी चेहरे को मैदान में उतारने पर विचार किया जा रहा है। इस प्लान के लिए दो वजहें है जिस पर भाजपा विचार कर रही है। पहली है कांग्रेस के आदिवासी विधायकों का समर्थन हासिल करने का मकसद, वहीं दूसरे कारण है  विपक्ष की शक्ति को कम करना। जानकारी के मुताबिक  भाजपा दावा कर रही है कि कांग्रेस के कुछ आदिवासी विधायक उनके संपर्क में हैं। कांग्रेस के लिए आसान मानी जाने वाली राज्यसभा की तीसरी सीट पर गणित कुछ और ही बन रहा है  क्योंकि  दतिया विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद कांग्रेस विधायकों की संख्या घटकर 64 हो गई है। विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान पर कोर्ट ने रोक लगाई है तो बीना विधायक निर्मला सप्रे का मामला भी कोर्ट में हैं। इस स्थिति में कांग्रेस के घटकर 62 पर पहुंच चुके हैं,यहां से बीजेपी कुछ खेल कर सकती है। वैसै बात करें तो कांग्रेस के पास अपनी राज्यसभा सीट पाने का संख्या बल है लेकिन  पार्टी में संभावित क्रास वोटिंग को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही है।

इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर में 5 साल में 20 हजार करोड़ का निवेश, विकास की नई दिशा

इंदौर इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का भूमिपूजन रविवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव के हाथों होने जा रहा है। 20 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर में अगले पाँच वर्षों में 20 हजार करोड़ रुपये का निवेश होगा। इस इंडस्ट्रियल जोन को बैंकिंग, बीमा, फाइनेंस जैसे अन्य सेक्टरों के लिए डिजाइन किया गया है। इस प्रोजेक्ट के लिए पहले चरण में दो हजार करोड़ रुपये की राशि मंजूर हुई है, जिसमें से 327 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।  कॉरिडोर के जरिए आईटी, लॉजिस्टिक्स, फिनटेक, एरोसिटी और ग्रीन इंडस्ट्री जैसे सेक्टर विकसित किए जाएंगे, जिससे बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इस कॉरिडोर से एक लाख से अधिक रोजगार मिलने की संभावना है। इंदौर के नैनोद से पीथमपुर के बीच बनने वाले इस कॉरिडोर की एयरपोर्ट से कनेक्टिविटी बेहतर होगी। सरकार की कोशिश है कि यहां परंपरागत उद्योगों के बजाय ऐसे उद्योग विकसित हों, जो भारी मशीनों पर निर्भर न हों। इसी कारण डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर जैसी उन्नत इंडस्ट्री के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं।   इस कॉरिडोर के लिए सबसे बड़ी चुनौती किसानों से जमीन अधिग्रहण की है। लगभग 60 प्रतिशत किसान अपनी जमीन देने के लिए तैयार नहीं हुए हैं। 60 से 70 मीटर चौड़ाई में इस कॉरिडोर को विकसित किया जाएगा, जिससे इंदौर से पीथमपुर के बीच की दूरी 10 किलोमीटर तक कम हो जाएगी और आवागमन भी आसान होगा।   कॉरिडोर के दोनों ओर 300-300 मीटर क्षेत्र में उद्योगों के लिए सरकार जमीन उपलब्ध कराएगी। यह इकोनॉमिक कॉरिडोर सुपर कॉरिडोर से भी जुड़ा होगा, जिसे इंदौर विकास प्राधिकरण ने लगभग दस वर्ष पहले विकसित किया था। यहां टीसीएस, इंफोसिस जैसी कंपनियों के स्पेशल इकोनॉमिक जोन हैं और तीन बड़े शैक्षणिक संस्थान भी स्थित हैं।

होर्मुज संकट से निपटने के लिए ग्रीन सिग्नल, 2000 मेगावाट बिजली और LPG-तेल की आपूर्ति में कोई कमी नहीं

मुंबई ईरान जंग के चलते होर्मुज स्‍ट्रेट से तेल और गैस लदे जहाजों का आना-जाना बुरी तरह से प्रभावित हुआ है. इससे दुनियाभर में एनर्जी क्राइसिस जैसे हालात पैदा हो गए हैं. तेल और गैस की आपूर्ति में कमी आने का खामियाजा अब आमलोगों को भुगतना पड़ रहा है. पेट्रोल, डीजल और LPG की कीमतों में भारी उछाल आया है. पश्चिम एशिया में तनाव से पैदा हुए संकट के बीच अब कई देशों ने ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों पर गंभीरता से काम करना शुरू कर दिया है. भारत भी इसमें पीछे नहीं है. सौर और पवन ऊर्जा के बाद अब एक और क्‍लीन एनर्जी ऑप्‍शन पर गंभीरता से काम शुरू हो गया है. वह परमाणु ऊर्जा. भारत ने कुडनकुलम न्‍यूक्लियर एनर्जी प्‍लांट की यूनिट 5 और 6 पर आगे बढ़ने का फैसला किया है।  दरअसल, भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को बड़ा बढ़ावा देते हुए Atomic Energy Regulatory Board (AERB) ने तमिलनाडु के Kudankulam Nuclear Power Plant (कुडनकुलम) परमाणु ऊर्जा परियोजना की यूनिट 5 और 6 में प्रमुख उपकरणों की स्थापना के लिए मंजूरी दे दी है. यह अनुमति 30 अप्रैल 2026 को जारी की गई, जिससे देश के परमाणु ऊर्जा विस्तार को नई गति मिलने की उम्मीद है. इस मंजूरी के तहत Nuclear Power Corporation of India Limited (NPCIL) अब रिएक्टर प्रेशर वेसल, स्टीम जनरेटर और कूलेंट पंप जैसे अहम उपकरणों की स्थापना का कार्य शुरू कर सकेगा. यह चरण किसी भी परमाणु संयंत्र के निर्माण में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसके बाद परियोजना अपने अंतिम विकास चरणों में प्रवेश करती है।  मल्‍टी-लेवल सिक्‍योरिटी रिव्‍यू AERB की यह अनुमति एक विस्तृत और मल्‍टी-लेवल सुरक्षा समीक्षा के बाद दी गई है. नियामक संस्था ने रिएक्टर डिजाइन को अपने निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप पाया और यह सुनिश्चित किया कि परियोजना में अब तक हुए सिविल निर्माण कार्य भी संतोषजनक हैं. इससे पहले अप्रैल 2021 में ‘फर्स्ट पोर ऑफ कंक्रीट’ के लिए अनुमति दी गई थी, जिसके बाद से निर्माण कार्य लगातार प्रगति पर है. यूनिट 5 और 6 में अत्याधुनिक सुरक्षा सुविधाएं शामिल की गई हैं, जो AERB के लाइट वॉटर रिएक्टर आधारित परमाणु संयंत्रों के लिए निर्धारित सुरक्षा कोड के अनुरूप हैं. ये मानक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर International Atomic Energy Agency (IAEA) द्वारा निर्धारित नवीनतम सुरक्षा दिशानिर्देशों से मेल खाते हैं. इन यूनिट्स में उन्नत पैसिव सेफ्टी सिस्टम और मजबूत कंटेनमेंट मैकेनिज्म लगाए जा रहे हैं, जिससे ऑपरेशन के दौरान उच्च स्तर की सुरक्षा और दुर्घटना-प्रतिरोध सुनिश्चित किया जा सके।  हर यूनिट की क्षमता 1000 मेगावाट तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में स्थित कुडनकुलम परियोजना भारत का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा उत्पादन केंद्र है. यहां कुल छह प्रेसराइज्ड वॉटर रिएक्टर (VVER डिजाइन) स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें प्रत्येक की क्षमता 1000 मेगावाट है. यह परियोजना रूस के साथ तकनीकी सहयोग के तहत विकसित की जा रही है और इसे भारत-रूस परमाणु साझेदारी का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है. कुडनकुलम की पहली दो यूनिट्स 2013 और 2015 से ऑपरेशन में हैं और दक्षिणी ग्रिड को बिजली आपूर्ति कर रही हैं. वहीं यूनिट 3 और 4 एडवांस स्‍टेज में हैं, जिनके लिए पहले ही प्रमुख उपकरणों की स्थापना की मंजूरी दी जा चुकी है. अब यूनिट 5 और 6 के लिए मिली ताजा अनुमति से पूरे प्रोजेक्ट की गति और तेज होने की संभावना है।  परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा कुडनकुलम इन नई यूनिट्स के चालू होने से भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी. इससे न केवल देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता भी कम होगी. साथ ही स्वच्छ और स्थिर ऊर्जा स्रोत के रूप में परमाणु ऊर्जा की भूमिका और मजबूत होगी. कुडनकुलम परियोजना का पूर्ण रूप से छह यूनिट्स के साथ संचालन भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा. यह परियोजना देश की तकनीकी क्षमता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सुरक्षा मानकों के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। 

साइलेंट फर्टिलिटी क्राइसिस की चेतावनी: न इंसान, न जानवर, वैज्ञानिकों ने कहा – नस्ल बचाना मुश्किल

 नई दिल्ली दुनिया में आज हजारों तरह के सिंथेटिक रसायन (मानव-निर्मित केमिकल) फैले हुए हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि इनमें से कई पेस्टिसाइड, प्लास्टिक, पॉल्यूटेंट और फॉरएवर केमिकल प्रजनन क्षमता यानी फर्टिलिटी को चुपचाप नुकसान पहुंचा रहे हैं. एक नई स्टडी में वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि रसायन और जलवायु परिवर्तन मिलकर मानव और जानवरों दोनों की प्रजनन क्षमता, जैव विविधता और स्वास्थ्य को गंभीर खतरे में डाल रहे हैं।  पिछले 50 सालों में पृथ्वी पर वन्यजीवों की आबादी दो-तिहाई से ज्यादा घट चुकी है. इसमें प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन बड़ी वजह माने जा रहे हैं. इंसानों में भी पुरुष और महिला दोनों में बांझपन की समस्या बढ़ रही है।  वैज्ञानिकों का मानना है कि हार्मोन बिगाड़ने वाले रसायन (Endocrine Disrupting Chemicals – EDCs) इसके मुख्य कारण हो सकते हैं. आज बाजार में 1000 से ज्यादा ऐसे केमिकल मौजूद हैं जो हमारे शरीर के प्राकृतिक हार्मोन को नकल करते या रोकते हैं।  विभिन्न जीवों पर पड़ने वाले प्रभाव एक टेबल में वैज्ञानिकों ने दिखाया है कि अलग-अलग जीवों पर कौन-कौन से रसायन और तनाव कैसे असर कर रहे हैं…      कीड़े-मकोड़े: Tributyltin, Phthalates, Microplastics आदि से लिंग परिवर्तन, प्रजनन क्षमता घटना.     मछलियां: Pyrethroids, Microplastics से अंडे कम बनना, जनसंख्या घटना.     पक्षी: PFAS, Organoclorines से अंडे से बच्चा निकलने में समस्या.     सरीसृप: धातु और तापमान से लिंग अनुपात बिगड़ना.     मेंढक: Phthalates से प्रजनन सफलता घटना.     समुद्री स्तनधारी: गर्भपात, समय से पहले जन्म.     इंसान: PFAS, Microplastics से स्पर्म की संख्या और गति कम होना, पुरुष जननांगों में समस्या. रसायन पर्यावरण में लंबे समय तक बने रहते हैं और कम मात्रा में भी बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं.। जलवायु परिवर्तन कैसे बढ़ा रहा है खतरा? ग्लोबल वार्मिंग से तापमान बढ़ रहा है, जिससे जानवरों पर अतिरिक्त तनाव पड़ रहा है. गर्मी, ऑक्सीजन की कमी और रसायन मिलकर प्रजनन के तनाव को और बढ़ा देते हैं. स्टडी में कहा गया है कि इंसानों की फर्टिलिटी ट्रेंड वन्यजीवों जैसी ही है. दोनों ही अनजाने में हानिकारक रसायनों के संपर्क में आ रहे हैं।  दुनिया में 1,40,000 से ज्यादा सिंथेटिक केमिकल हैं, लेकिन सिर्फ 1% की पूरी सुरक्षा जांच हुई है. DDT, PFAS (Forever Chemicals) जैसे कई केमिकल पहले इस्तेमाल होते रहे और बाद में इनके नुकसान पता चले।  DDT के कारण पक्षियों के अंडे पतले हो गए. समुद्री जानवरों की प्रजनन क्षमता घटी. PFAS महिलाओं में फर्टिलिटी 40% तक कम कर सकता है. माइक्रोप्लास्टिक भी जनन अंगों में जमा हो रहे हैं, लेकिन उनके पूरे प्रभाव अभी पता नहीं हैं. वैज्ञानिक सुसान ब्रैंडर के नेतृत्व में की गई स्टडी में कहा गया है कि पारिस्थितिकी तंत्र और मानव स्वास्थ्य एक-दूसरे से जुड़े हैं. अगर वन्यजीवों की प्रजनन क्षमता खत्म हुई तो पूरा फूड चेन प्रभावित होगा, जिसका असर अंत में इंसानों पर पड़ेगा।  क्या है इस समस्या का समाधान  वैज्ञानिकों का कहना है कि Global Plastics Treaty जैसे अंतरराष्ट्रीय समझौते जरूरी हैं. हमें रसायनों की सुरक्षा जांच तेज करनी होगी. प्लास्टिक प्रदूषण कम करना होगा और क्लाइमेट चेंज रोकने के प्रयास बढ़ाने होंगे।  यह छिपा प्रजनन संकट कोई दूर की बात नहीं है. यह आज हमारे आसपास हो रहा है. अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाली पीढ़ियां गंभीर स्वास्थ्य और जैव विविधता संकट का सामना करेंगी. रसायनों और जलवायु दोनों पर एक साथ नियंत्रण जरूरी है, वरना साइलेंट फर्टिलिटी क्राइसिस धीरे-धीरे बड़े संकट में बदल सकता है। 

‘खादी’ और ‘ग्रामोद्योग उत्पाद’ अब ऑनलाइन, विदेशों में भी पहुंचाए जाएंगे

भोपाल  मध्यप्रदेश की खादी और उसके उत्पाद अब ग्लोबल होने की ओर बढ़ रहे हैं। मध्यप्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के ब्रांड्स की अब पूरे देश के साथ ग्लोबल ब्रांडिंग और ऑनलाइन खरीदी-बिक्री शुरू करने की तैयारी हो गई है। इसके लिए एक ई-कॉमर्स प्लेटफार्म तैयार कराया जा रहा है, इसके साथ इसे केंद्र के ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स से भी जोड़ा जाएगा। इसके तहत एक ई-कॉमर्स पोर्टल और मोबाइल ऐप तैयार किया जाएगा। इससे प्रदेश की खादी पूरे देश के साथ विदेशों में रहने वालों के लिए भी उपलब्ध हो जाएगी। लोगों में काफी प्रिय हैं ये उत्पाद बोर्ड इसके लिए निजी कंपनियों की मदद लेने जा रहा है। इसे ई-कॉमर्स पोर्टल विकसित करने, उसे ओएनडीसी से जोड़ने सहित उसके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी दी जाएगी। बोर्ड के कबीरा खादी और विंध्या वैले ब्रांड के उत्पाद प्रदेश में काफी लोकप्रिय हैं, इसलिए इनके क्षेत्र के विस्तार के लिए प्रयास शुरू किए गए हैं।  इसके तहत प्रदेश के खादी वस्त्रों के साथ हैंडीक्राफ्ट्स, कुटीर उद्योगों के सामान, हस्तनिर्मित साज-सज्जा के सामान को देश भर में पहुंचाया जाएगा। अभी बोर्ड द्वारा कई उत्पादन केन्द्र और बिक्री आउटलेट खोले गए हैं लेकिन इनकी पहुंच सीमित है। यह होंगे काम -खादी के सभी उत्पादों का एक कैटालॉग तैयार किया जाएगा। -बोर्ड के अधिकारियों के साथ विक्रय केंद्रों और अन्य संबद्ध लोगों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। -संबंधित कंपनी पोर्टल शुरू होने के बाद तकनीकी सपोर्ट और समस्या आने पर उसका निराकरण भी करेगी। -स्टॉक मैनेजमेंट संबंधी काम भी किया जाएगा। -कस्टमर मैनेजमेंट किया जाएगा, उनके आर्डर से लेकिन एक्सचेंज, ऑर्डर रद्द करना आदि काम ऑनलाइन होंगे। -बिक्री का एनालिसिस भी आसानी से हो सकेगा। कम बिक्री वाले क्षेत्र को बढ़ाने के प्रयास होंगे। ग्लोबल होने की राह पर ये कदम बीते कई सालों में मध्यप्रदेश के कई उत्पादों को सिंगापुर, न्यूयॉर्क, मिलान, वैंकूवर, जापान, बहरीन और कुवैत जैसे देशों में प्रदर्शनियों में शामिल किया गया है। ओडीओपी के तहत राज्य के 38 उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है, और म.प्र. के ODOP उत्पादों का निर्यात सालाना लगभग 15% की दर से बढ़ रहा है। प्रदेश के इंदौर जैसे शहरों से अब सीधे अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों तक ई-कॉमर्स के माध्यम से खादी उत्पादों की पहुंच बन रही है। विन्ध्या वैली और कबीरा ब्रांड: म.प्र. खादी ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा गुणवत्ता के प्रतीक के रूप में इन ब्रांड्स को स्थापित किया गया है। प्रदेश में दूध उत्पादन के मामले में, सांची ब्रांड ने पहले ही राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना ली है।

पांच राज्यों के चुनाव परिणामों की लाइव गिनती शुरू होगी सुबह 8 बजे, यहां देखें पूरा अपडेट

नई दिल्ली भारत निर्वाचन आयोग 4 मई को तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, केरल और पुडुचेरी के विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे घोषित करेगा। पिछले कुछ हफ्तों में ये चुनाव कई चरणों में कराए गए थे, जिनमें सभी राजनीतिक दलों ने जोरदार प्रचार किया। कई सीटों पर कड़ा मुकाबला देखने को मिला और मतदान भी अच्छा रहा। मतगणना सुबह 8 बजे से कड़ी सुरक्षा के बीच शुरू होगी। शुरुआती कुछ घंटों में रुझान आने लगेंगे और दिन के अंत तक लगभग सभी सीटों के परिणाम सामने आ जाएंगे। गिनती की शुरुआत पोस्टल बैलेट से होती है, जिसमें सेवा कर्मियों, चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारियों और अन्य लोगों के वोट शामिल होते हैं, जो सीधे मतदान नहीं कर पाए थे। इसके बाद ईवीएम की गिनती शुरू होती है, जिसमें हर मशीन को अधिकारियों और उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में खोला जाता है। कैसे होती है वोटों की गिनती? पोस्टल बैलेट की गिनती के बाद ईवीएम से वोटों की गिनती की जाती है। हर मशीन से यह साफ हो जाता है कि किस उम्मीदवार को कितने वोट मिले हैं। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से होती है और इसमें उम्मीदवारों के एजेंट भी मौजूद रहते हैं। गिनती के दौरान हर राउंड के बाद अपडेट जारी किया जाता है, जिससे यह पता चलता रहता है कि कौन उम्मीदवार आगे चल रहा है और किस सीट पर मुकाबला कड़ा है। कहां देखें चुनाव परिणाम? आप विधानसभा चुनाव के नतीजों की लाइव कवरेज दैनिक जागरण के प्लेटफॉर्म पर देख सकते हैं। यहां आपको पूरे दिन लगातार अपडेट, ग्राउंड रिपोर्टिंग और विशेषज्ञों की राय मिलेगी। वेबसाइट पर सीटवार नतीजे, पार्टी के हिसाब से आंकड़े और लाइव डैशबोर्ड भी उपलब्ध होंगे, जिससे आप हर पल की जानकारी आसानी से ले सकेंगे। इसके अलावा, दैनिक जागरण के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी आप तेजी से अपडेट, वीडियो और ब्रेकिंग न्यूज पा सकते हैं, जिससे चलते-फिरते भी नतीजों पर नजर रखी जा सकती है।

प्रदेश के 20 हजार से अधिक पशुपालक एवं दुग्ध उत्पादक होंगे शामिल

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार को ग्वालियर में राज्य स्तरीय दुग्ध उत्पादक एवं पशुपालक सम्मेलन का शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव विभागीय योजनाओं के अंतर्गत लाभान्वित हितग्राहियों को स्वीकृति प्रमाण-पत्र भी वितरित करेंगे। मेला ग्राउंड ग्वालियर में होने वाले सम्मेलन में पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  लखन पटेल भी उपस्थित रहेंगे। दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को मिल्क कैपिटल बनाने और दुग्ध उत्पादकों और पशुपालकों को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा लगातार नवाचार किए जा रहे हैं। वर्ष-2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा ग्वालियर जिले में राज्य स्तरीय दुग्ध उत्पादक एवं पशुपालक सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। मैत्री कार्यकर्ता, पशुपालक, क्षीरधारा ग्रामों के सरपंच और सहकारी दुग्ध समिति के सदस्य करेंगे अनुभव साझा सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न जिलों के करीब 20 हजार पशुपालक, दुग्ध उत्पादक, लाभान्वित हितग्राही, सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि और उत्कृष्ट कार्य करने वाले पशुपालक शामिल होंगे। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, उन्नत पशुपालन को बढ़ावा देने और सहकारिता के माध्यम से पशुपालकों की आर्थिक समृद्धि पर विशेष जोर दिया जाएगा। साथ ही मैत्री कार्यकर्ता, उदाहरणीय पशुपालक और क्षीरधारा ग्रामों के सरपंच सहित सहकारी दुग्ध समिति के सदस्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव से अपने अनुभव साझा करेंगे। कार्यक्रम स्थल पर पशुपालन एवं डेयरी विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों द्वारा दुग्ध उत्पादन और सरकारी योजनाओं की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।