samacharsecretary.com

उज्जैन एवं इंदौर में 1 करोड़ 5 लाख रुपये से अधिक की शराब, बियर व वाहन जप्त

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अवैध शराब के निर्माण, परिवहन एवं विक्रय के विरुद्ध लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में उज्जैन एवं इंदौर में दो अलग-अलग कार्रवाईयों में लगभग 1 करोड़ 5 लाख रुपये से अधिक मूल्य की अवैध शराब, बीयर एवं वाहन जप्त किए हैं। उज्जैन जिले के नानाखेड़ा क्षेत्र अंतर्गत निनोरा टोल प्लाजा के पास पुलिस ने घेराबंदी कर एक ट्रक को पकड़ा, जिसमें 900 पेटी (21,600 केन) कुल 10,800 बल्क लीटर अवैध बीयर परिवहन की जा रही थी। जिसकी अनुमानित कीमत 45 लाख रुपये है, तथा परिवहन में प्रयुक्त ट्रक (कीमत लगभग 55 लाख रूपये ) को जप्त किया । इस प्रकार लगभग 1 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की है। प्रकरण में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर आबकारी अधिनियम के तहत वैधानिक कार्रवाई की गई है। इंदौर जिले में वाहन चेकिंग के दौरान एक कार से 43 पेटी अवैध अंग्रेजी शराब जब्त की गई, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 5 लाख रूपये है। मध्यप्रदेश पुलिस आमजन से अपील करती है कि अवैध शराब, मादक पदार्थ एवं अन्य आपराधिक गतिविधियों की सूचना तत्काल पुलिस को दें।  

विनेश फोगाट ने बृजभूषण सिंह पर लगाया शोषण का आरोप, डर का सामना करने की बात की

चंडीगढ़  सीनियर महिला पहलवान विनेश फोगाट ने रविवार को चेतावनी दी कि गोंडा में आगामी राष्ट्रीय ओपन रैंकिंग कुश्ती टूर्नामेंट के दौरान उनके या उनकी टीम के सदस्यों के साथ कुछ भी अप्रिय घटना होने पर भारत सरकार जिम्मेदार होगी। इसके साथ ही उन्होंने प्रतियोगिता में ''पक्षपातपूर्ण फैसलों'' की आशंका भी जताई। विनेश ने लगभग 18 महीनों के बाद वापसी करने से पहले एक वीडियो संदेश में आरोप लगाया कि बृज भूषण शरण सिंह से जुड़े स्थल पर होने वाली प्रतियोगिता के परिणामों पर भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व प्रमुख के करीबी व्यक्ति प्रभाव डाल सकते हैं। वहीं विनेश ने खुलासा किया है कि वह उन छह महिला पहलवानों में से एक हैं, जिन्होंने पूर्व भारतीय कुश्ती महासंघ अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। भारत सरकार जिम्मेदार होगी विनेश ने कहा, ''प्रतियोगिता के दौरान अगर मेरे, मेरी टीम या समर्थकों के साथ कोई अप्रिय घटना घटती है तो इसके लिए भारत सरकार जिम्मेदार होगी।'' उन्होंने प्रतियोगिता के दौरान पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मीडिया और खेल समुदाय से आयोजन स्थल पर उपस्थित रहने का आग्रह किया। विनेश ने कहा, ''यह टूर्नामेंट ऐसी जगह आयोजित किया जा रहा है जहां उनका (बृज का) काफी प्रभाव है। किसी मुकाबले में कौन रेफरी होगा, कितने अंक दिए जाएंगे, मैट चेयरमैन कौन होगा, सब कुछ उनके और उनके लोगों के नियंत्रण में है।'' पिछले कुछ महीनो से अभ्यास कर रही इस 31 वर्षीय खिलाड़ी ने कहा कि वह ''ईमानदारी से'' कुश्ती में वापसी करना चाहती हैं और देश के लिए फिर से पदक जीतना चाहती हैं, लेकिन उन्होंने निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को लेकर संदेह व्यक्त किया। उन्होंने कहा, ''मुझे किसी तरह का विशेषाधिकार या विशेष व्यवहार नहीं चाहिए। मैं बस इतना चाहती हूं कि परिणाम प्रदर्शन के अनुकूल हों।'' गौरतलब है कि विनेश अब राजनीतिज्ञ भी हैं, जिन्होंने अक्टूबर 2024 में कांग्रेस के टिकट पर जुलाना निर्वाचन क्षेत्र से हरियाणा राज्य विधानसभा चुनाव जीता था। छह महिला पहलवानों में से एक हूं विनेश ने एक ऐसे माहौल में प्रतिस्पर्धा करने के मानसिक दबाव पर भी चिंता व्यक्त की जिसे उन्होंने शत्रुतापूर्ण करार दिया, क्योंकि वह सिंह के खिलाफ चल रहे यौन उत्पीड़न मामले में एक शिकायतकर्ता है। विनेश ने पीड़ितों की पहचान और गरिमा को लेकर उच्चतम न्यायालय के दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि परिस्थितियों के कारण उन्हें सार्वजनिक रूप से बोलने के लिए विवश होना पड़ा। उन्होंने कहा, ''मैं उन छह महिला पहलवानों में से एक हूं जिन्होंने शिकायत दर्ज कराई है। मामला अभी अदालत में है और गवाहों से पूछताछ चल रही है। उससे जुड़े किसी स्थान पर प्रतिस्पर्धा करना, जहां अधिकतर लोग उससे संबंधित हो सकते हैं, मुझ पर अत्याधिक मानसिक दबाव बनाता है।'' विनेश ने कहा, ''मुझे संदेह है कि मैं उस माहौल में अपना शत प्रतिशत दे पाऊंगी।'' उन्होंने अधिकारियों पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार और खेल मंत्रालय ''तमाशबीन की तरह देख रहे थे'' और उन्होंने सिंह को ''पूरी छूट'' दे दी थी। विनेश गोंडा में महिलाओं के 57 किलोग्राम भार वर्ग में प्रतिस्पर्धा करेंगी। इससे पहले वह 50 किलोग्राम और 53 किलोग्राम वर्ग में प्रतिस्पर्धा कर चुकी हैं। विनेश ने 2024 में पेरिस ओलंपिक खेलों में अधिक वजन के कारण फाइनल से अयोग्य घोषित होने के बाद से किसी प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया है। उससे पहले सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर प्रमुख पहलवानों और डब्ल्यूएफआई के बीच लंबे समय तक गतिरोध बना रहा था।

प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई ऊर्जा – इन्दौर को सेंट्रल ग्रोथ हब बनायेगा यह कॉरिडोर

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विकास एक क्रमिक प्रक्रिया है। प्रदेश में अधिकाधिक औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के जरिए उत्पादन गतिविधियों का विस्तार और निर्यात वृद्धि हमारा प्रमुख लक्ष्य है। हम उद्योग-धंधों को बढ़ावा देकर प्रदेश के औद्योगिक विकास लक्ष्यों की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रदेश की प्रगति का नया अध्याय है। यह कॉरिडोर सच्चे अर्थों में नये मध्यप्रदेश के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मालवा के किसान हमेशा कमाल करते हैं। प्रदेश के विकास में विशेषकर मालवा क्षेत्र के किसानों का सहयोग और समर्पण अनुकरणीय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार को इंदौर जिले में ग्राम नैनोद में इन्दौर-उज्जैन मेट्रोपोलिटन एरिया की अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजना के तहत 2360 करोड़ की लागत से विकसित होने वाले इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के पहले चरण के कार्यों का भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह इकोनॉमिक कॉरिडोर यहां की नई संभावनाओं, नए सपनों और नए अवसरों का गेट-वे है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह कॉरिडोर इंदौर-पीथमपुर औद्योगिक प्रक्षेत्र सहित पूरे मालवांचल के विकास को नई गति देगा। साथ ही इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन एरिया के समग्र विकास में भी अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि इस कॉरिडोर के निर्माण से उद्योगों को बेहतर कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स और आधारभूत सुविधाएं मिलेंगी, जिससे उत्पादन लागत में कमी आयेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस इकोनॉमिक कॉरिडोर के पहले चरण में सड़क, परिवहन और औद्योगिक ढांचे को मजबूत किया जाएगा। इस कॉरिडोर से रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। स्थानीय युवाओं को लाभ मिलेगा और अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। यह कॉरिडोर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय निवेश के लिए मध्यप्रदेश को एक आकर्षक गंतव्य बनाएगा तथा बेहतर कनेक्टिविटी के साथ आधुनिक अधोसंरचनाओं से लैस यह क्षेत्र जल्द ही देश के प्रमुख इंडस्ट्रियल हब के रूप में अपनी पहचान बनायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लगभग 2360 करोड़ रुपये की लागत से विकसित हो रहा यह कॉरिडोर प्रोजेक्ट प्रदेश को निवेश, उद्योग और रोजगार के नए केंद्र के रूप में स्थापित करेगा। करीब 20 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर इंदौर की व्यावसायिक क्षमता और पीथमपुर के औद्योगिक सामर्थ्य के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी स्थापित करेगा। इससे लॉजिस्टिक्स की लागत घटेगी और मार्केट में तेजी आएगी। इस परियोजना से 5 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और 1 लाख अप्रत्यक्ष, रोजगार सृजित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि इस इकोनॉमिक कॉरिडोर परियोजना में किसानों के हितों को केंद्र में रखते हुए 60 प्रतिशत विकसित भूमि वापस देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। इससे अब वे विकास प्रक्रिया में भागीदार भी बन रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज यदि हमारा मध्यप्रदेश उद्योगों के उजालों से रौशन हो रहा है, तो इसमें किसानों की बड़ी भूमिका है। उन्होंने अपनी पुश्तैनी जमीनें सरकार को दीं। हमने किसानों की बात सुनी। उनका समर्थन पाया और उन्हें इस कॉरिडोर के निर्माण में भागीदार भी बनाया। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस कॉरिडोर निर्माण में करीब 650 करोड़ रुपये के विकसित प्लॉट किसानों को दिए गए। इससे वे भी विकास के इस महायज्ञ में भागीदार बने। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह किसानों की सरकार है। किसानों को कोई भी कष्ट नहीं आने देंगे। अब हम किसानों को चार गुना मुआवजा देंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम किसानों द्वारा पैदा किए गए गेहूं का दाना-दाना खरीदेंगे। इस उपार्जन सत्र में 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जाएगा। किसानों को सिंचाई के लिए बिजली प्रदाय के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि हम किसानों को दिन में ही बिजली देने की व्यवस्था कर रहे हैं। इससे उन्हें खेतों में रतजगा नहीं करना पड़ेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ में बीते सभी सिंहस्थों के रिकॉर्ड टूटेंगे। हम ऐसी सभी व्यवस्थाएं कर रहे हैं। इन्दौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर में बनने वाली सड़कों से सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं के आवागमन एवं अन्य प्रबंधन में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा कॉरिडोर है, जिससे किसान, ग्रामीण, युवा, उद्योगपति, उद्यमी, लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाता सभी को लाभ होगा। यह कॉरिडोर क्षेत्र के विकास का नया रिकार्ड कायम करेगा। मुख्यमंत्री का किसानों ने किया अभिनंदन, जताया आभार कार्यक्रम के दौरान 60 प्रतिशत विकसित भूमि किसानों को वापस देने तथा किसानों को चार गुना मुआवजा देने के राज्य सरकार के ऐतिहासिक निर्णय के लिए क्षेत्रीय किसानों, ग्रामीणों और सरपंचों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का साफा पहनाकर एवं बड़ी गजमाला से आत्मीय स्वागत-अभिनंदन किया। किसानों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को कृषि देवता भगवान बलराम का चित्र एवं पवित्र हल भेंटकर आभार जताया। इस अवसर पर क्षेत्रीय किसानों ने मुख्यमंत्री के समक्ष प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश संवर्धन को इस कॉरिडोर में भूमि देने के लिए अपना सहमति पत्र प्रदान किया। इसी दौरान किसानों को कॉरिडोर में विकसित भूखंडों के अलॉटमेंट लेटर भी प्रदान किए गए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में 1700 किमी लंबे 6 ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे प्रोजेक्ट पर तेजी से काम जारी है। प्रदेश में 3 हजार 368 किमी लंबे 6 बड़े एक्सप्रेस-वे, प्रगति पथ और 48 नए इंडस्ट्रियल पार्क भी विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में राष्ट्रीय राजमार्गों का कुल नेटवर्क 1 लाख 46 हजार 200 किमी से अधिक हो चुका है। आज हमारे यहां दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क उपलब्ध है। मध्यप्रदेश भी इस मामले में पीछे नहीं है। प्रदेश में दिन-प्रतिदिन नए-नए राजमार्गों की मंजूरी मिल रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 5 ग्रीनफ़ील्ड कॉरिडोर्स बनाए जा रहे हैं। आने वाले तीन सालों में मध्यप्रदेश में 6 बड़े एक्सप्रेस-वे और प्रगति पथ विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें नर्मदा प्रगति पथ, विंध्य एक्सप्रेस-वे, मालवा-निमाड़ विकास पथ, अटल प्रगति पथ, बुंदेलखंड विकास पथ और मध्य भारत विकास पथ शामिल हैं। विकास को मिलेगी नई गति, किसान बनेंगे समृद्ध और युवाओं को मिलेगा रोजगार : मंत्री  विजयवर्गीय नगरीय विकास एवं आवास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर परियोजना देश की सर्वश्रेष्ठ योजनाओं में शामिल होगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विशेष प्रयासों से आकार ले रही यह परियोजना प्रदेश के विकास का मजबूत आधार बनेगी। यह कॉरिडोर प्रदेश के विकास को नई दिशा देगा और … Read more

मुख्यमंत्री ने नालंदा परिसर निर्माण कार्य का लिया जायजा, कार्य की गुणवत्ता और गति पर दिया जोर

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज बलरामपुर जिला मुख्यालय में 4 करोड़ 48 लाख रुपये की लागत से निर्माणाधीन नालंदा परिसर का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति एवं गुणवत्ता का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि निर्माण कार्य को निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाए, क्योंकि यह परिसर जिले के विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण अध्ययन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री  साय ने परिसर में उपयोग की जा रही निर्माण सामग्री, कार्य की प्रगति तथा प्रस्तावित सुविधाओं की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को आगाह किया कि निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और गुणवत्ता के सभी मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है, ताकि वे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी प्रभावी ढंग से कर सकें। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि नालंदा परिसर में आधुनिक ई-लाइब्रेरी, प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित पुस्तकें, समृद्ध अध्ययन सामग्री एवं पत्र-पत्रिकाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे युवाओं को एक समग्र और अनुकूल अध्ययन वातावरण मिल सकेगा। उन्होंने निर्देशित किया कि कार्य में तेजी लाते हुए परिसर को शीघ्र पूर्ण किया जाए, ताकि जिले के विद्यार्थियों को इसका लाभ जल्द से जल्द मिल सके। उन्होंने निरीक्षण के दौरान परिसर में प्रस्तावित अन्य सुविधाओं की जानकारी लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए और कहा कि नालंदा परिसर राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसके तहत युवाओं को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।  मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह परिसर जिले के विद्यार्थियों के लिए ज्ञान और अवसर का एक सशक्त केंद्र बनेगा तथा उनके भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

ट्रंप का जर्मनी पर दोहरा हमला: सैनिकों की वापसी और कारों पर 25% टैरिफ का कड़ा फैसला

वाशिंगटन जर्मनी को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख एक बार फिर सख्त दिख रहा है. उन्होंने साफ कहा है कि जर्मनी में तैनात अमेरिकी सैनिकों की संख्या सिर्फ 5 हजार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे कहीं ज्यादा कटौती की जाएगी. यानी जो शुरुआत 5 हजार सैनिकों की वापसी से हो रही है, वो आगे और बड़ी हो सकती है. इससे पहले ट्रंप ने यूरोपीय यूनियन की कारों और ट्रकों पर 25% टैरिफ लगाने का भी ऐलान किया था, जिसका असर खासतौर पर जर्मनी पर पड़ सकता है।  देखा जाए तो ट्रंप की नाराजगी की वजह व्यापारिक समझौतों का सही से पालन न होना है. न्यूज एजेंसी एपी के मुताबिक, उन्होंने खुलेआम कहा है कि यूरोपीय संघ ने वादों को निभाया नहीं है, इसलिए अब अगले हफ्ते से वहां बनने वाली कारों और ट्रकों पर 25% टैक्स लगाया जाएगा. जर्मनी, जो गाड़ियों के निर्माण के लिए जाना जाता है, उसके लिए यह फैसला बड़ा झटका माना जा रहा है. असल में सारा मामला फ्लोरिडा में खुला, जहां पत्रकारों के सवाल पर ट्रंप ने दो-टूक कहा, '5 हजार का आंकड़ा तो बहुत छोटा है, हम इससे कहीं ज्यादा सैनिकों की छुट्टी करने वाले हैं और सेना में बड़ी कटौती करेंगे।  हैरानी की बात ये है कि खुद पेंटागन ने पहले सिर्फ 5 हजार सैनिकों की बात कही थी, लेकिन ट्रंप के इस ताजा बयान ने सबको सोच में डाल दिया है. अमेरिका के भीतर भी इस फैसले का विरोध शुरू हो गया है. कई बड़े नेताओं का मानना है कि अगर अमेरिकी सैनिक जर्मनी छोड़कर चले गए, तो रूस के राष्ट्रपति पुतिन को अपनी ताकत दिखाने का खुला मौका मिल जाएगा. खासकर तब, जब यूक्रेन और रूस की जंग को 5 साल पूरे होने वाले हैं।  क्या अकेले पड़ जाएंगे यूरोपीय देश? जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने इस पर बहुत ही शांत तरीके से जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि सैनिकों को वापस बुलाने की बात तो ट्रंप सालों से कर रहे थे, इसलिए ये कोई नई बात नहीं है. उनका मानना है कि अब यूरोप के देशों को खुद अपनी सुरक्षा के लिए आगे आना होगा और अपनी जिम्मेदारी खुद संभालनी होगी. हालांकि, उन्होंने ये भी याद दिलाया कि अमेरिकी सैनिकों का जर्मनी में होना सिर्फ हमारे लिए नहीं, बल्कि खुद अमेरिका के फायदे के लिए भी है।  पेंटागन की मानें तो इन सैनिकों की वापसी अगले 6 से 12 महीनों में पूरी कर ली जाएगी. फिलहाल जर्मनी में करीब 36,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, जो वहां के बड़े मिलिट्री बेस और एयर बेस की सुरक्षा संभालते हैं. जानकारों का कहना है कि सैनिकों का जाना एक अलग बात है, लेकिन इससे जो दुनिया को मैसेज जाएगा वो काफी गंभीर हो सकता है. ट्रंप की ये नाराजगी ईरान के मामले में भी देखी जा रही है, जहां उन्हें लगता है कि यूरोपीय देशों ने उनका साथ नहीं दिया।  अब हर किसी की नजर इस बात पर है कि ट्रंप का ये 'हंटर' जर्मनी की तिजोरी और उसकी सुरक्षा पर कितना भारी पड़ता है. एक तरफ सैनिकों की घर वापसी का दबाव और दूसरी तरफ कारों पर 25% का तगड़ा टैक्स, ट्रंप ने साफ मैसेज दे दिया है कि अब वो 'अमेरिका फर्स्ट' की नीति के लिए किसी भी समझौते के मूड में नहीं हैं. अब देखना ये होगा कि क्या इस फैसले के बाद यूरोप अपने दम पर अपनी सुरक्षा कर पाएगा या फिर उसे अमेरिका के आगे झुकना पड़ेगा?  

भारत की आत्मा बचाने में आदिवासी-सूचित समुदायों की अहम भूमिका: मोहन भागवत

नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत  ने कहा है कि जिस तरह से दुनिया इस समय डावांडोल हो रही है, वैश्विक उथल-पुथल मची है, ऐसे में सुदृढ़ एवं सबल भारत ही विश्व का आधार बन सकता है। इसके लिए भारत को सभी समाजों को साथ लेकर चलना होगा और आदिवासी और अनुसूचित जाति समुदायों ने भारत की आत्मा बचाई है. इन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास की मुख्यधारा से जोड़ना जरूरी है. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि विदेशी आक्रमणों और तमाम कठिनाइयों के बावजूद आदिवासी समुदायों और अनुसूचित जातियों ने भारत की पहचान और उसकी आत्मा को संरक्षित रखा. संघ प्रमुख भागवत आज मुंबई के गेट वे ऑफ इंडिया पर आयोजित ‘कर्मयोगी एकल शिक्षक मेला’ में वनवासी इलाकों में शिक्षा का प्रसार करने वाले शिक्षकों को सम्मानित करने के अवसर पर बोल रहे थे। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि अस्थिर विश्व में सुदृढ़ भारत ही आधार बन सकता है, जिसके लिए आदिवासी समाज को मुख्यधारा में लाना आवश्यक है। भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि मानव जीवन का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को वापस देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. उन्होंने आगे कहा कि भारतीय समाज की मूल भावना और मूल्य प्रणाली हजारों वर्षों से कायम है, जिसे अक्सर हिंदू समाज की पहचान के रूप में देखा जाता है. विदेशी आक्रमणकारियों ने भारत की असली ताकत उसकी सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों को निशाना बनाया जो इन मूल्यों को जीवित रखे हुए थे. इसके बावजूद आदिवासी और अनुसूचित जाति समुदायों ने देश की आत्मा को बचाए रखा. भागवत शनिवार को मुंबई में आयोजित कर्मयोगी पुरस्कार समारोह में बोल रहे थे. इस कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी राज्य के आदिवासी विकास मंत्री प्रो. अशोक उइके और महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर भी मौजूद थे। उन्होंने आगे कहा कि वर्षों से आदिवासी समाज ने हमारी संस्कृति को संभाल कर रखा है और आदिवासी समाज हमें बहुत कुछ देता रहा है। उनकी यही प्रवृति भारत की सनातन संस्कृति की पहचान है और आदिवासियों ने सबका कल्याण करने की इसी प्रवृति को सहेज कर रखा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज में शिक्षा का यह प्रसार संवेदना से किया जाने वाला कार्य है। यह दया से नहीं, जी तोड़ मेहनत से संभव है। डॉ. भागवत ने कहा कि सामान्य तौर पर देश के आम लोगों को जो सुविधाएं मिलती है वो आदिवासी समाज को नहीं मिल पातीं। उन्हें देश के मुख्य प्रवाह में लाए बिना समाज का विकास नहीं हो सकता। समारोह में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि अब राजनीति की व्याख्या बदलने की जरूरत है। पावर पालिटिक्स या सत्ता पाना अब राजनीति नहीं है। राजनीति का अर्थ अब विकास और सामाजिक सेवा है। नागपुर स्थित ‘स्वर्गीय लक्ष्मणराव मानकर स्मृति संस्था’  अब तक विदर्भ में चलाए जा रहे एकल विद्यालयों को अब पूरे महाराष्ट्र में विस्तारित करने जा रही है। यह संस्था नितिन गडकरी के मार्गदर्शन और मुंबई के जाने-माने व्यवसायी अतुल शिरोडकर की अध्यक्षता में काम करती है।

स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा देने राज्य सरकार सदैव तत्पर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य शासन स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। राज्य में 10 हजार स्टार्टअप धारकों ने अपना पंजीयन कराया है। स्टार्टअप शुरू करने वालों को राज्य सरकार प्रतिमाह स्टाइफंड भी दे रही है। प्रदेश में चारों ओर उद्योगों का फैलाव हो, इसके लिए लगातार नवाचार किए जा रहे हैं। बाहर की कम्पनियों को निवेश के लिए औद्योगिक समिट के माध्यम से प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे युवाओं को रोजगार मिले और प्रदेश विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ता रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इंदौर जिले के महू में एक निजी कॉलेज में आयोजित प्लेसमेंट प्रोग्राम में युवाओं को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कॉलेज के उन युवाओं को प्लेसमेंट के प्रमाण-पत्र वितरित किए, जिनका प्लेसमेंट विभिन्न कम्पनियों में हुआ। कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट, विधायक सु उषा ठाकुर, कॉलेज के सेक्रेटरी  सुनील बंसल और  शरद त्रिवेदी विशेष रूप से उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों को आह्वान किया कि यदि हम किसी विषय को मन लगाकर गहराई से पढ़ते हैं, तो उसकी याददाश्त लम्बे समय तक बनी रहती है। अत: एकाग्रचित होकर अध्ययन करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिक्षक बनकर विद्यार्थियों से प्रश्न किए, तो वहीं विद्यार्थियों ने भी मुख्यमंत्री डॉ. यादव से प्रश्न किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों से विज्ञान और राजनीति से जुड़े प्रश्न किए, तो वहीं विद्यार्थियों ने उद्योग और नवाचार को लेकर प्रश्न किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केवल पाठ्यक्रम तक ही विद्यार्थी स्वयं को सीमित न रखें, वह आगे भी अपना मनन और चिंतन जारी रखे। नये-नये नवाचार करें और स्वयं को भी परखें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्टार्टअप, गुरूत्वाकर्षण, ब्रह्माण्ड, नवाचार, निवेश आदि को विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से समझाया। उन्होंने सुशीला देवी बंसल कॉलेज परिसर में आयोजित विज्ञान परियोजना प्रदर्शनी का अवलोकन किया और विभिन्न वैज्ञानिक मॉडलों और प्रोजेक्ट के बारे में विद्यार्थियों से जानकारी प्राप्त की। साथ ही सामूहिक चित्र भी खिंचवाये। कार्यक्रम में कॉलेज के सचिव  सुनील बंसल ने बताया कि संस्था के इंदौर के अलावा भोपाल और मंडीदीप में भी कॉलेज है। अधिकांश विद्यार्थियों का प्लेसमेंट मध्यप्रदेश की कम्पनियों में ही हुआ है। इसका श्रेय राज्य सरकार को जाता है कि यहाँ लगातार नये उद्योग खुल रहे है और प्रदेश दिनों-दिन विकसित हो रहा है।  

शिक्षा में बड़ा बदलाव: मॉडल संस्कृति स्कूलों से फीस हटाने की योजना तैयार

चंडीगढ़. हरियाणा सरकार शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य के सभी 1638 मॉडल संस्कृति स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए निशुल्क शिक्षा लागू करने की तैयारी है। शिक्षा विभाग ने दाखिला शुल्क और मासिक फीस पूरी तरह समाप्त करने का प्रस्ताव तैयार करके सरकार को मंजूरी के लिए भेज दिया है। मंजूरी मिलते ही आगामी शैक्षणिक सत्र 2027-28 से बिना किसी शुल्क के प्रवेश और पढ़ाई की सुविधा मिलेगी। अब तक ली जाती है फीस इन स्कूलों में पहली से पांचवीं तक प्रवेश के लिए 500 रुपये व छठी से 12वीं तक 1000 रुपये शुल्क लिया जाता है। कक्षा के अनुसार हर महीने 200 रुपये से 500 रुपये तक फीस भी देनी पड़ती है। सेकेंडरी मॉडल संस्कृति स्कूल चल रहे हैं। इन स्कूलों में आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और भाषा पर विशेष ध्यान दिया जाता है। फीस समाप्त होने से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ा लाभ मिलेगा। मॉडल संस्कृति स्कूलों की है अलग पहचान हरियाणा में मॉडल संस्कृति स्कूल योजना की शुरुआत वर्ष 2020 में की गई थी। ये स्कूल सामान्य सरकारी स्कूलों की तुलना में आधुनिक शिक्षा व्यवस्था, बेहतर आधारभूत सुविधाओं और भारतीय संस्कृति आधारित पाठ्यक्रम के लिए खास माने जाते हैं। यहां स्मार्ट कक्षाएं, अंग्रेजी माध्यम शिक्षा, गतिविधि आधारित पढ़ाई और भाषा-संस्कृति पर विशेष जोर दिया जाता है। इन स्कूलों में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ अनुशासन और संस्कार भी दिए जाते हैं। इन स्कूलों में पढ़ाने के लिए सरकारी शिक्षकों को भी टेस्ट पास करना पड़ता है।

खाट में बैठकर ग्रामीणों से किया संवाद: सुनी समस्याएं, समाधान के दिए निर्देश

रायपुर  प्रदेशव्यापी ‘सुशासन तिहार 2026’ के अंतर्गत मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड के ग्राम पंचायत सिलमा के शांतिपारा पहुंचे, जहां उन्होंने जन चौपाल के माध्यम से ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने न केवल योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी स्थिति का जायजा लिया, बल्कि आम नागरिकों की समस्याओं को सुनकर उनके त्वरित निराकरण के निर्देश भी दिए। जन चौपाल में उपस्थित ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री  साय के समक्ष अपनी समस्याएं और मांगें रखीं, जिन पर मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता के साथ संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रत्येक आवेदन का समयसीमा में समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। इस दौरान ग्राम सुआरपारा निवासी  राजेश शुक्ला ने अपनी आर्थिक कठिनाइयों का जिक्र करते हुए बिजली बिल माफी और आर्थिक सहायता के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने तत्काल मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए मामले पर संज्ञान लिया और आश्वस्त किया कि उनकी स्थिति को देखते हुए बिजली बिल माफी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, साथ ही आवश्यक आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री के इस त्वरित निर्णय से भावुक हुए राजेश शुक्ला ने कहा कि वे लंबे समय से अपनी समस्या को लेकर परेशान थे, लेकिन आज मुख्यमंत्री ने स्वयं उनकी बात को गंभीरता से सुना और समाधान का भरोसा दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह चौपाल उनके लिए राहत और विश्वास का माध्यम बनी है। जन चौपाल को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि ‘सुशासन तिहार’ शासन की कार्यप्रणाली में बेहतर और सकारात्मक बदलाव का संकल्प है। उन्होंने बताया कि 40 दिनों तक चलने वाले इस अभियान के माध्यम से अब प्रशासन स्वयं जनता के द्वार तक पहुंचेगा और उनकी समस्याओं का मौके पर समाधान सुनिश्चित करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले नागरिकों को अपने कार्यों के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब शासन स्वयं गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनेगा और उनका निराकरण करेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जन चौपाल में प्राप्त प्रत्येक आवेदन को गंभीरता से लेते हुए निर्धारित समयसीमा के भीतर उसका समाधान सुनिश्चित किया जाए। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी भी ग्रामीणों से ली तथा हितग्राहियों से संवाद कर योजनाओं के प्रभाव का फीडबैक प्राप्त किया।  इस अवसर पर पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल, लूण्ड्रा विधायक  प्रबोध मिंज, महापौर मती मंजूषा भगत, कलेक्टर  अजीत वसंत  सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

शादी के मौसम में सोने की कीमत में 26,778 रुपये की गिरावट, चांदी भी सस्ती हुई

इंदौर  शादियों के इस सीजन में सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली है। आल टाइम हाई से सोने का रेट 26778 रुपये के स्तर पर लुढ़क चुका है। वहीं, चांदी 143106 रुपये सस्ता हो गया है। आइए डीटेल्स में जानते हैं कि सोने और चांदी का क्या रेट चल रहा है? आज सोने का क्या है रेट? (Gold price today) इंडियन बुलियंस ज्वैलर्स एसोसिएशन की रिपोर्ट के अनुसार गुरुवार को 24 कैरेट 148652 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। 23 कैरेट गोल्ड का रेट 148057 रुपये प्रति 10 ग्राम, 22 कैरेट गोल्ड का रेट 136165 रुपये प्रति 10 ग्राम और 18 कैरेट गोल्ड का रेट 111489 रुपये 10 ग्राम के स्तर पर था। वहीं, 14 कैरेट गोल्ड का रेट 86961 रुपये प्रति 10 ग्राम था। चांदी दाम कितना गिरा? (Silver Rate Today) ibjarates के अनुसार गुरुवार को चांदी का रेट 236882 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर था। बता दें, शुक्रवार को छुट्टी थी। इस वजह से नए रेट जारी नहीं किए गए थे। वहीं, शनिवार और रविवार को सप्ताहिक की होने की वजह से अब सोमवार को नए रेट जारी किए जाएंगे। सोने की कीमतों में गिरावट की क्या वजह? (Why Gold price falling) मौजूदा समय में वैश्विक स्तर ईरान युद्ध की वजह से काफी उथल-पुथल मचा हुआ है। जिसकी वजह से निवेशक सोने की जगह डॉलर में इनवेस्टमेंट कर रहे हैं। मौजूदा समय में डॉलर काफी मजबूत हो चुका है। डॉलर की कीमतों में जारी तेजी की वजह से भी सोने पर बुरा असर पड़ा है। बढ़ती महंगाई ने भी स्थिति को बिगाड़ा सोने के रेट में गिरावट के पीछे की वजह महंगाई को भी माना जा रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में जारी बढ़ोतरी की वजह से दुनिया भर में महंगाई बढ़ रही है। इसकी वजह से भी कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। महंगा होने की वजह से भी बनाई दूरी सोने की कीमतों में अचानक से एक साल के दौरान बहुत तेजी आई है। जिसके बाद आम-आदमी की पहुंच से सोना दूर होने लगा। निवेशकों ने इसकी वजह से भी दूरी बनाई है। गिरावट के पीछे एक वजह यह भी है। (यह निवेश की सलाह नहीं है। सोने और चांदी की कीमतों में जारी तेजी के पीछे कई कारण होते हैं। यहां प्रस्तुत जानकारी के आधार पर लाइव हिन्दुस्तान गोल्ड और सिल्वर में इनवेस्टमेंट की सलाह नहीं देता है।)