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नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में बोले सीएम, भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हुई

लखनऊ यूपी में पिछले नौ वर्षों में 9 लाख से अधिक नौजवानों को सरकारी नौकरी दी गई है। यह किसी भी राज्य में सर्वाधिक नियुक्तियों की प्रक्रिया को सकुशल एवं पारदर्शी तरीके से संपन्न करने का रिकॉर्ड है। ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को लोक भवन में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के लिए नवचयनित 357 कनिष्ठ विश्लेषकों (औषधि) तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के नवचयनित 252 दंत स्वास्थ्य विज्ञानियों को नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में कहीं। सीएम योगी ने कहा, सिर्फ अधीनस्थ चयन आयोग इस वर्ष 32 हजार से अधिक नियुक्तियों की प्रक्रिया संपन्न करेगा। शिक्षा चयन आयोग हजारों शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी करेगा। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को लगभग 15 हजार भर्तियां करनी है। इस प्रकार चालू वित्तीय वर्ष (2026-27) में डेढ़ लाख से अधिक सरकारी भर्तियों की प्रक्रिया संपन्न होनी है। प्रक्रिया में किसी प्रकार की सेंध न लगे, इसके लिए सख्त कानून भी बनाया है, जिसके तहत सेंधमारी करने वालों को आजीवन कारावास की सजा और उसकी पूरी संपत्ति को जब्त किया जाता है। युवाओं के सपने का टूटना आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ धोखा मुख्यमंत्री ने कहा कि हर माता-पिता की इच्छा होती है कि उनका बच्चा अच्छी शिक्षा प्राप्त कर एक सुरक्षित और बेहतर भविष्य की ओर आगे बढ़े। इसके लिए वे हरसंभव प्रयास करते हैं, लेकिन जब अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते, तो न केवल उस युवा के सपने टूटते हैं, बल्कि उसके माता-पिता और परिवार से जुड़े अन्य लोगों की उम्मीदें भी चकनाचूर हो जाती हैं। किसी युवा के सपनों का टूटना केवल एक व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ धोखा है। उत्तर प्रदेश की ‘बीमारू राज्य’ के रूप में पहचान बनाने में चयन प्रक्रियाओं में भेदभाव, बेईमानी और भ्रष्टाचार की भूमिका थी। भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताएं इतनी अधिक थीं कि न्यायालय को बार-बार हस्तक्षेप करना पड़ता था। फर्जी डिग्री वाले लोग करते थे चयन प्रक्रिया का नेतृत्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले लगभग हर नियुक्ति प्रक्रिया पर कहीं न कहीं कोर्ट स्टे लगते थे, न्यायालय से कड़ी टिप्पणियां मिलती थीं। स्थिति यह थी कि जो व्यक्ति पात्र नहीं था, वह भी आयोग का चेयरमैन बन जाता था। यहां तक कि फर्जी डिग्री वाले लोग चयन प्रक्रिया का नेतृत्व कर रहे थे। पैसे के लेनदेन के कारण भर्तियां प्रभावित होती थीं और योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिल पाता था। वर्तमान समय में कई युवा उस दौर से अनभिज्ञ हैं, क्योंकि वे तब नाबालिग थे। वर्ष 2017 के बाद भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाया गया है। इसका परिणाम यह है कि अब तक पुलिस विभाग में 2,20,000 से अधिक भर्तियां सफलतापूर्वक की जा चुकी हैं। गत 9 वर्षों में हम लोगों ने निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से रिकॉर्ड 9 लाख से अधिक युवाओं की भर्तियां कीं। आज औषधि विभाग के पास जांच के लिए मंडल स्तर पर ए ग्रेड की लैब मौजूद सीएम ने कहा कि अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा 4 और 6 मई को नियुक्त पत्र वितरिण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। ये लगातार चलेगा। सरकार बिना भेदभाव पिछले नौ वर्षों में कोरोना महामारी के बावजूद प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय तीन गुना करने में सफल रही है। प्रदेश में आज देश का सबसे अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर, एक्सप्रेसवे, हाइवे आदि मौजूद हैं। आज वे विभाग अच्छा काम कर रहे हैं, जिन्हें पहले लोग जानते तक नहीं थे। लगभग हर जनपद में मेडिकल कॉलेज हैं, दो एम्स कार्यरत हैं। 2017 से पहले सब भगवान भरोसे था, परिणाम भी उसी प्रकार से आते थे। उस दौरान पूरा सिस्टम ही बीमारू था। खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग के पास दवा की क्वालिटी एवं खाद्य पदार्थों में मिलावट जांचने के उपकरण व लैब्स नहीं थीं। अब विभाग के पास जांच के लिए मंडल स्तर पर ए-ग्रेड की लैब हैं। प्रशिक्षित मैनपॉवर है, जो समय-सीमा में जांच के नतीजे बता देंगे। वर्ष 2017 से पहले पांच प्रयोगशालाएं थीं, आज आधुनिक उपकरणों के साथ 18 प्रयोगशालाएं हैं। कनिष्ठ विश्लेषकों (खाद्य) की भर्ती भी जल्द सीएम ने कहा कि पहले 5 प्रयोगशालाओं में 12,000 नमूने प्रतिवर्ष लिए जाते थे। अब इनकी संख्या बढ़कर 55,000 हो गयी है। आज 357 कनिष्ठ विश्लेषकों (औषधि) की भर्ती प्रक्रिया संपन्न हुई है, जिसके साथ ही इनकी संख्या 44 से बढ़कर 401 हो गयी है। वर्तमान में कनिष्ठ विश्लेषकों (खाद्य) की संख्या अभी केवल 58 है। हमने 417 पदों के लिए अधियाचन भेजा है, जो उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में विचाराधीन है। जल्द ही भर्ती प्रक्रिया संपन्न होगी। वर्तमान में 36 हजार खाद्य नमूने प्रतिवर्ष लिये जाते हैं। भर्ती प्रक्रिया संपन्न होने से इनकी संख्या बढ़कर प्रतिवर्ष 1,08,000 से अधिक हो जाएगी। आज 252 डेंटल हाइजीनिस्ट को भी नियुक्ति पत्र वितरित किए गए हैं।

US-चीन टकराव बढ़ा: 5 कंपनियों पर प्रतिबंध, ड्रैगन ने आदेश मानने से किया इनकार

वाशिंगटन ईरानी तेल खरीद को लेकर अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव अब और बढ़ गया है. अमेरिका ने ईरानी तेल खरीद करने वाली चीन की 5 कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया है. अमेरिका ने इन कंपनियों को अपनी “स्पेशली डिज़िग्नेटेड नेशनल्स (SDN)” सूची में डाल दिया है, जिसके तहत उनकी संपत्तियां फ्रीज की जा सकती हैं और उनके साथ लेन-देन पर रोक लगाई जाती है. वहीं इस फैसले के जवाब में चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने एक बड़ा फैसला लेते हुए अपने देश की कंपनियों को अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन न करने का आदेश दिया है. यह कदम खास तौर पर उन चीनी पेट्रोकेमिकल कंपनियों को बचाने के लिए उठाया गया है, जिन पर अमेरिका ने ईरान के तेल कारोबार से जुड़े होने का आरोप लगाया है. अमेरिका को जवाब देने चीन का ‘ब्लॉकिंग स्टैच्यूट’ लागू चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने शनिवार को एक आधिकारिक आदेश जारी कर घरेलू कंपनियों को अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन करने से रोक दिया है. यह पहली बार है जब चीन ने अपने “ब्लॉकिंग स्टैच्यूट” यानी ऐसा कानूनी हथियार इस्तेमाल किया है, जो विदेशी कानूनों के असर को अपने देश में निष्प्रभावी करने के लिए बनाया गया है. इस कदम को सिर्फ कूटनीतिक विरोध से आगे बढ़कर कानूनी जवाबी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है. इन 5 बड़ी चीनी कंपनियों को मिला संरक्षण चीनी सरकारी मीडिया शिन्हुआ के मुताबिक, जिन कंपनियों को इस आदेश से सुरक्षा दी गई है, उनमें शामिल हैं:     हेंगली पेट्रोकेमिकल (डालियान) रिफाइनिंग कंपनी लिमिटेड     शेडोंग शौगुआंग लुकिंग पेट्रोकेमिकल कंपनी लिमिटेड     शेडोंग जिनचेंग पेट्रोकेमिकल ग्रुप कंपनी लिमिटेड     हेबेई शिनहाई केमिकल ग्रुप कंपनी लिमिटेड     शेडोंग शेंगशिंग केमिकल कंपनी लिमिटेड अमेरिका के कदम पर चीन की सख्त प्रतिक्रिया चीन के वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि 2025 से अमेरिका लगातार अपने कार्यकारी आदेशों के जरिए चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगा रहा है, यह आरोप लगाते हुए कि वे ईरान के तेल कारोबार में शामिल हैं. प्रवक्ता ने इन कदमों की आलोचना करते हुए कहा कि इससे चीनी कंपनियों और तीसरे देशों के बीच सामान्य व्यापारिक गतिविधियों पर गलत तरीके से रोक लग रही है. उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक संबंधों के बुनियादी नियमों का उल्लंघन बताया.

बिहार पुलिस का बड़ा अभियान: सीवान से पटना तक एनकाउंटर की झड़ी, कई अपराधी ढेर

पटना बिहार में अपराधियों पर ताबड़तोड़ ऐक्शन हो रहा है। मुख्यमंत्री की गद्दी संभालने के बाद सम्राट चौधरी ने पहले ही कहा था कि वो अपराधियों का पिंडदान करेंगे। सीएम के इस कथन के बाद से ही राज्य में अपराधियों पर पुलिस कहर बनकर बरप रही है। इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि महज 18 दिन के सम्राट चौधरी के राज में मगध से अंग और सारण तक पांच एनकाउंटर अब तक हो चुके हैं। सबसे पहले बात करते हैं आज यानी रविवार को सीवान जिले में हुए ताजा एनकाउंटर की। सारण में दो एनकाउंटर सीवान के चर्चित हर्ष मर्डर केस में पुलिस ने  एनकाउंटर किया है। पुलिस ने इस हत्याकांड के मुख्य आरोपी सोनू यादव को मुठभेड़ में मार गिराया है। यहां भाजपा नेता व पूर्व एमएलसी मनोज सिंह के भांजे हर्ष सिंह की गत 29 अप्रैल को गोली मारकर हत्या करने वाले मुख्य आरोपित सोनू यादव को पुलिस के साथ मुठभेड़ में रविवार की अहले सुबह ढेर कर दिया गया। वह हुसैनगंज थाना क्षेत्र के सरेया का रहने वाला है। गाड़ी सटने के विवाद में पूर्व एमएलसी के भांजा व बहनोई को गोली मार दी गई थी। भांजे हर्ष की मौत हो गई थी और बहनोई का इलाज अस्पताल में चल रहा है। इससे पहले इस हत्याकांड के एक दिन बाद यानी 30 अप्रैल की सुबह भी सीवान पुलिस ने इसी मर्डर केस से जुड़े एक अन्य आरोपी छोटू यादव का हाफ एनकाउंटर किया था। पुलिस ने छोटू यादव के पैर में गोली मारी थी। पुलिस की गोली से छोटू जख्मी हुआ था और उसे बाद में इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अंग के सुल्तानगंज में रामधनी यादव का एनकाउंटर इससे पहले सम्राट चौधरी की पुलिस ने बिहार के भागलपुर जिले के सुल्तानगंज नगर परिषद के सभापति पर हुए हमले के कथित मुख्य साजिशकर्ता रामधनी यादव को 29 अप्रैल को पुलिस मुठभेड़ में मारा गिराया था। मुठभेड़ के दौरान एक पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) और दो निरीक्षक घायल हो गए थे। दरअसल 28 अप्रैल को तीन हथियारबंद अपराधियों ने सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में सभापति राजकुमार के कक्ष में गोलीबारी की थी। जिसमें सभापति और कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बाद में कार्यपालक पदाधिकारी की मौत हो गई थी। राजकुमार को इलाज के लिए पटना के एक अस्पताल में भेज दिया गया था। यह जानकारी सामने आई थी कि सुल्तानगंज नगर परिषद की उपसभापति नीलम देवी और उनके पति रामधनी यादव ने व्यक्तिगत रंजिश में सभापति राजकुमार पर हमला करवाया था। बाद में रामधनी यादव पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारा गया था। ज्वेलरी लूटकांड के आरोपी का पटना में हाफ एनकाउंटर इससे पहले 22 अप्रैल को पटना पुलिस ने एक हाफ एनकाउंटर किया था। पुलिस ने रामकृष्णा नगर इलाके में एक ज्वेलरी लूट के आरोपी को उसी जगह पर गोली मारी थी जहां अपराधियों ने लूट के माल का बंटवारा किया था। दरअसल 19 अप्रैल को रामकृष्णा नगर में गहनों की लूटपाट हुई थी। इस लूटकांड में पुलिस ने दिलीप को पकड़ा था। पटना के एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने बताया था कि दिलीप ने अपना जुर्म कबूल कर लिया था। पुलिस जब उसे लेकर हथियार बरामदगी के लिए गई थी तब उसने पुलिस पर गोली चलाई थी। जिसके बाद मोर्चा संभालते हुए पुलिस ने उसके पैर में गोली मारी थी। पुलिस ने बताया था कि इस लूटकांड में कुल 4 अपराधी शामिल थे। नवादा में 50 हजार के इनामी का एनकाउंटर इससे पहले पुलिस ने 26 अप्रैल को नवादा जिले में एक हाफ एनकाउंटर किया था। यहां रोह थाना क्षेत्र के कोशी गांव में राइस मिल के पास पुलिस की गोली लगने से एक अपराधी घायल हो गया था। पुलिस ने उसके पास से एक देसी कट्टा और 3 कारतूस बरामद किए थे। आरोपी की पहचान मूल रूप से बिहार के ही जमुई जिले के रहने वाले लछुआड़ गांव के मिटू यादव के तौर पर हुई थी। मिंटू पर आरोप था कि वो एक मेडिकल प्रैक्टिशनर अशोक कुमार की निर्मम हत्या में शामिल था। मिंटू के खिलाफ कई अन्य केस भी दूसरे थानों में केस दर्ज है। पुलिस ने उसे अंतरराज्यीय अपरााधी बताया था। मंटू पर 50 हजार रुपये का इनाम था।

ईडी ने छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े नए छापों में 5.39 करोड़ रुपए की बरामदी की

रायपुर  प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच तेज कर दी है और राज्य में कई स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाते हुए लगभग 5.39 करोड़ रुपए की नकदी और कीमती सामान जब्त किया है। इसकी जानकारी अधिकारियों ने दी। आधिकारिक बयान के अनुसार, ईडी के रायपुर जोनल ऑफिस ने 30 अप्रैल को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत रायपुर, दुर्ग/भिलाई और बिलासपुर जिलों में स्थित 13 परिसरों में तलाशी अभियान चलाया। इस तलाशी अभियान में शराब व्यापारियों, चार्टर्ड अकाउंटेंटों, व्यवसायियों और कॉरपोरेट संस्थाओं को निशाना बनाया गया, जिन पर घोटाले से जुड़े अपराध की आय को संभालने या छिपाने में संलिप्त होने का संदेह था। छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने 53 लाख रुपए नकद और लगभग 3.234 किलोग्राम सोने के आभूषण और ईंटें बरामद कीं, जिनकी कीमत लगभग 4.86 करोड़ रुपए है। इसके अलावा, कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच चल रही है। ईडी आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) और भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (एसीबी) रायपुर द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर मामले की जांच कर रही है। अब तक की जांच से वरिष्ठ नौकरशाहों, शराब उत्पादकों, एफएल-10ए लाइसेंस धारकों और उनके सहयोगियों की मिलीभगत से एक सुनियोजित आपराधिक साजिश का संकेत मिला है। कथित घोटाला छत्तीसगढ़ में 2019 से 2022 के बीच शराब की खरीद, लाइसेंसिंग और बिक्री में अवैध कमीशन की वसूली से संबंधित है। ईओडब्ल्यू/एसीबी के आरोप पत्रों के अनुसार, इस घोटाले के माध्यम से अर्जित अपराध की कुल धनराशि लगभग 2,883 करोड़ रुपए होने का अनुमान है। ईडी ने अब तक पीएमएलए की धारा 19 के तहत नौ लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी, छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड (सीएसएमसीएल) के तत्कालीन प्रबंध निदेशक, तत्कालीन आबकारी आयुक्त, तत्कालीन आबकारी मंत्री, तत्कालीन मुख्यमंत्री के पुत्र और मुख्यमंत्री के एक उप सचिव सहित अन्य लोग शामिल हैं। इस जांच में शराब बनाने वालों, नकदी संभालने वालों, हवाला संचालकों, लाइसेंस धारकों और राजनीतिक मध्यस्थों की भूमिका सहित कई पहलुओं को शामिल किया गया है।अधिकारियों ने बताया कि पीएमएलए के तहत अब तक छह अंतरिम कुर्की आदेश (पीएओ) जारी किए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 380 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्तियों की कुर्की की गई है। इनमें आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियां, बैंक खाते, वाहन, आभूषण और आरोपी तथा उनकी कथित बेनामी संस्थाओं से जुड़े शेयर शामिल हैं। नई दिल्ली स्थित न्याय निर्णायक प्राधिकरण द्वारा इनमें से कई कुर्कियों की पुष्टि की जा चुकी है। ईडी ने रायपुर स्थित पीएमएलए मामलों की विशेष अदालत में 81 आरोपियों और संस्थाओं के खिलाफ छह अभियोग भी दायर किए हैं। ये मामले फिलहाल विशेष अदालत, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय सहित विभिन्न न्यायिक मंचों में चल रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि हालिया तलाशी में और सबूत मिले हैं, और इन निष्कर्षों के आधार पर अतिरिक्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें और दस्तावेज जमा करना और अभियोग लगाना शामिल है। मामले में आगे की जांच जारी है।

लोक भवन में नियुक्ति पत्र वितरण: सीएम योगी के नेतृत्व में निष्पक्ष प्रक्रिया बनी भरोसे की पहचान

लखनऊ खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के 357 कनिष्ठ विश्लेषक (औषधि) तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के 252 दंत स्वास्थ्य विज्ञानियों के चेहरे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों नियुक्ति पत्र पाकर खुशी से दमक उठे। उन्होंने योगी सरकार की पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की सराहना की। पारदर्शिता और समयबद्धता से बढ़ा युवाओं का विश्वास कनिष्ठ विश्लेषक (औषधि) के पद पर चयनित औरैया के प्रतीक कुमार दीक्षित ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हुई है। उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि समयबद्ध तरीके से चयन प्रक्रिया पूरी होना युवाओं के लिए बड़ी राहत है। प्रतीक ने यह भी कहा कि पहले प्रयोगशालाओं की संख्या कम थी, लेकिन योगी सरकार ने लैब बढ़ाकर रोजगार के नए अवसर सृजित किए हैं। दंत स्वास्थ्य विज्ञानी (डेंटल हाइजीनिस्ट) के पद पर चयनित लखनऊ की साक्षी सिंह ने नियुक्ति पत्र पाकर कहा कि यह पूरे परिवार के लिए गौरव का क्षण है। उन्होंने कहा कि पूरी चयन प्रक्रिया पारदर्शी रही, जिसके कारण योग्य अभ्यर्थियों को अवसर मिला है। मुख्यमंत्री के संबोधन से उन्हें प्रेरणा मिली है और वे अपने दायित्व का पूरी निष्ठा से निर्वहन करेंगी। रोजगार के अवसरों से मजबूत हो रहा प्रदेश दंत स्वास्थ्य विज्ञानी (डेंटल हाइजीनिस्ट) के पद पर चयनित कानपुर नगर की सभ्या कटियार ने कहा कि योगी सरकार में युवाओं को लगातार रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने इसे अपने जीवन का गौरवपूर्ण दिन बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के विचारों से प्रेरित होकर वो अपने पद की जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी से निभाएंगी।  कनिष्ठ विश्लेषक औषधि के पद पर चयनित गाजीपुर के राकेश कुमार यादव ने कहा कि नियुक्ति पत्र पाकर मुझे बहुत खुशी है। भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हुई है। जो योग्य अभ्यर्थी हैं सिर्फ वही चयनित हुए हैं। राकेश ने कहा कि सीएम योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने नया मुकाम हासिल करके पूरे देश में अग्रणी राज्य के रूप में जाना जा रहा है। महिलाओं और युवाओं को मिला सम्मान कनिष्ठ विश्लेषक औषधि के पद पर चयनित मुरादाबाद की प्रियंका गौतम ने कहा कि मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार में सभी वर्गों, खासकर महिलाओं को सम्मान मिल रहा है। पहले जहां जानकारी तक नहीं मिल पाती थी, वहीं अब सरकार स्वयं बुलाकर सम्मान दे रही है। दंत स्वास्थ्य विज्ञानी (डेंटल हाइजीनिस्ट) के पद पर चयनित बस्ती के ऋषभ प्रताप सिंह और सीतापुर की पूजा वर्मा ने भी मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष रही और इससे युवाओं का भरोसा मजबूत हुआ है। कार्यक्रम के दौरान अभ्यर्थियों ने एक स्वर में कहा कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने देश में एक नई पहचान बनाई है।

मुख्यमंत्री साय का हेलीकॉप्टर अचानक उतरा सरगुजा के सिलमा गांव में, खाट पर बैठकर किया संवाद

सरगुजा जिले के ग्राम सिलमा में अचानक उतरा मुख्यमंत्री साय का हेलीकॉप्टर खाट में बैठकर ग्रामीणों से किया संवाद: सुनी समस्याएं, समाधान के दिए निर्देश रायपुर प्रदेशव्यापी ‘सुशासन तिहार 2026’ के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड के ग्राम पंचायत सिलमा के शांतिपारा पहुंचे, जहां उन्होंने जन चौपाल के माध्यम से ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने न केवल योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी स्थिति का जायजा लिया, बल्कि आम नागरिकों की समस्याओं को सुनकर उनके त्वरित निराकरण के निर्देश भी दिए। जन चौपाल में उपस्थित ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री साय के समक्ष अपनी समस्याएं और मांगें रखीं, जिन पर मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता के साथ संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रत्येक आवेदन का समयसीमा में समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। इस दौरान ग्राम सुआरपारा निवासी राजेश शुक्ला ने अपनी आर्थिक कठिनाइयों का जिक्र करते हुए बिजली बिल माफी और आर्थिक सहायता के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने तत्काल मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए मामले पर संज्ञान लिया और आश्वस्त किया कि उनकी स्थिति को देखते हुए बिजली बिल माफी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, साथ ही आवश्यक आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री के इस त्वरित निर्णय से भावुक हुए राजेश शुक्ला ने कहा कि वे लंबे समय से अपनी समस्या को लेकर परेशान थे, लेकिन आज मुख्यमंत्री ने स्वयं उनकी बात को गंभीरता से सुना और समाधान का भरोसा दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह चौपाल उनके लिए राहत और विश्वास का माध्यम बनी है। जन चौपाल को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘सुशासन तिहार’ शासन की कार्यप्रणाली में बेहतर और सकारात्मक बदलाव का संकल्प है। उन्होंने बताया कि 40 दिनों तक चलने वाले इस अभियान के माध्यम से अब प्रशासन स्वयं जनता के द्वार तक पहुंचेगा और उनकी समस्याओं का मौके पर समाधान सुनिश्चित करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले नागरिकों को अपने कार्यों के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब शासन स्वयं गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनेगा और उनका निराकरण करेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जन चौपाल में प्राप्त प्रत्येक आवेदन को गंभीरता से लेते हुए निर्धारित समयसीमा के भीतर उसका समाधान सुनिश्चित किया जाए। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी भी ग्रामीणों से ली तथा हितग्राहियों से संवाद कर योजनाओं के प्रभाव का फीडबैक प्राप्त किया।  इस अवसर पर पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, लूण्ड्रा विधायक प्रबोध मिंज, महापौर श्रीमती मंजूषा भगत, कलेक्टर अजीत वसंत  सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

75 साल के अरबपति की ₹2.70 लाख करोड़ की संपत्ति, जिन्होंने राजस्थान रॉयल्स खरीदी

जयपुर  आईपीएल (IPL 2026) चल रहा है, क्रिकेट के मैदान पर चौकों-छक्कों की बारिश देखने को मिल रही है. वहीं दूसरी ओर इसमें हिस्सा लेने वाली टीमों की खरीद-बिक्री भी जोर शोर पर है. राजस्थान रॉयल्स टीम को नया मालिक मिला है. भारतीय मूल के अरबपति और स्टील किंग के नाम से पहचाने जाने वाले लक्ष्मी मित्तल परिवार ने Rajsthan Royals को खरीद लिया है. इसके लिए लिए डील 15,660 करोड़ रुपये में डन हुई है।  अरबपति Lakshmi Mittal के परिवार ने देश में वैक्सीन किंग कहे जाने वाले सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला के साथ मिलकर ये डील की है. रिपोर्ट के मुताबिक, आईपीएल टीम का सौदा पूरा होने के बाद, मित्तल फैमिली के पास राजस्थान रॉयल्स का लगभग 75% मैजोरिटी स्टेक होगा, जबकि Adar Poonawalla के पास करीब 18% हिस्सा रहेगा. बाकी की हिस्सा अन्य निवेशकों के पास होगा।  मित्तल-पूनावाला ने मिलकर की डील डन  स्टील किंग अरबपति लक्ष्मी मित्तल आर्सेलरमित्तल के फाउंडर हैं. उनकी फैमिली ने ने अदार पूनावाला के साथ मिलकर राजस्थान रॉयल्स में नियंत्रक हिस्सेदारी हासिल करने पर सहमति जताई, और फिर मनोज बदले व उनके ग्रुप से राजस्थान रॉयल्स का अधिग्रहण किया है. इस सौदे की वैल्यू करीब 1.65 अरब डॉलर ( लगभग 15,660 करोड़ रुपये) बताई गई है।  लक्ष्मी मित्तल, आदित्य मित्तल, वनीशा मित्तल-भाटिया, आदर पूनावाला और मनोज बदले राजस्थान रॉयल्स के बोर्ड में शामिल होंगे. आदित्य मित्तल लक्ष्मी मित्तल के बेटे हैं, जबकि वनीशा मित्तल-भाटिया उनकी बेटी हैं।  भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI), भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग, आईपीएल गवर्निंग काउंसिल और अन्य रेग्युलेटर्स से अनुमोदन मिलने के बाद 2026 की तीसरी तिमाही में यह सौदा पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है।  लक्ष्मी मित्तल बोले- मैं बहुत उत्साहित राजस्थान रॉयल्स आईपीएल की शुरुआती टीमों में से एक है और इसने साल 2008 में पहला आईपीएल सीजन अपने नाम किया था. इस डील को लेकर अरबपति लक्ष्मी मित्तल ने कहा है कि इस इन्वेस्टमेंट के साथ उनका व्यक्तिगत जुड़ाव है।  मित्तल के मुताबिक, 'मुझे क्रिकेट से प्यार है और मेरा परिवार राजस्थान से ही है, इसलिए राजस्थान रॉयल्स के अलावा मैं किसी और IPL Team का हिस्सा नहीं बनना चाहूंगा. कई महान खिलाड़ियों ने राजस्थान रॉयल्स की जर्सी पहनी है और मैं इस शानदार टीम का हिस्सा बनने के लिए उत्सुक हूं.' वहीं सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला ने कहा कि वे इस सौदे से खुश हैं, राजस्थान रॉयल्स एक मजबूत विरासत वाली प्रमुख आईपीएल फ्रेंचाइजी है।  स्टील किंग की इतनी है नेटवर्थ लक्ष्मी मित्तल का जन्म और पालन-पोषण उत्तरी राजस्थान के सादुलपुर में हुआ था और उन्हें देश में Steel King के तौर पर पहचाना जाता है. भारतीय मूल के स्टील टाइकून अरबपति Lakshmi Mittal अब तक ब्रिटेन के सबसे अमीरों की लिस्ट में शामिल रहे थे. बीते कुछ समय पहले ही उन्होंने ब्रिटेन (UK) छोड़ने का फैसला लेते हुए सबको चौंका दिया था।  फोर्ब्स रियल टाइम बिलेनियर्स इंडेक्स के आंकड़ों को देखें, तो लक्ष्मी मित्तल भारतीय अमीरों की लिस्ट में चौथे पायदान पर शामिल हैं. उनकी नेटवर्थ (Lakshmi MIttal Networth) 28.4 अरब डॉलर है।  1995 में लंदन शिफ्ट हुए थे मित्तल लक्ष्मी मित्तल साल 1995 में लंदन गए थे और वे जल्द ही ब्रिटेन के सबसे प्रमुख भारतीय कारोबारियों में से एक बन गए.  उन्होंने अपनी संपत्ति आर्सेलर मित्तल के माध्यम से बनाई, जो विश्व की दूसरी सबसे बड़ी स्टील निर्माता कंपनी है. इसमें Lakshmi Mittal और उनके परिवार के पास लगभग 40% की हिस्सेदारी है. 2021 में लक्ष्मी मित्तल ने सीईओ की भूमिका अपने बेटे आदित्य मित्तल को सौंप दी थी, लेकिन कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में काम करना जारी रखा है।  ब्रिटेन में संपत्ति के अलावा अरबपति लक्ष्मी मित्तल के पास दुबई में एक हवेली है और अब उन्होंने यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) में पास नाया आइलैंड पर एक डेवलपमेंट प्रोजेक्स में बड़े हिस्से खरीदे हैं. इसके अलावा बिलियनेयर्स-रो कहे जाने वाले केंसिंग्टन पैलेस गार्डन्स में उनकी संपत्तियां देश के सबसे महंगे घरों में शामिल हैं। 

Inflation Bomb: 21 देशों में महंगाई का खतरा बढ़ा, US-ईरान युद्ध से आर्थिक संकट गहरा

  नई दिल्ली अमेरिका और ईरान में युद्ध (US-Iran War) में भले ही सीजफायर चल रहा है, लेकिन दुनिया में इसका असर देखने को मिल रहा है. इस जंग से तेल-गैस की कीमतों में लगी आग के  चलते यूरोप में महंगाई का बम फूटा है. यहां के 21 देशों में महंगाई अप्रैल महीने में बढ़ (Inflation Attack) गई है, जिसकी सबसे बड़ी वजह एनर्जी प्राइस हाइक बना है. ऊर्जा की कीमतों में तगड़ा इजाफा देखने को मिली है. पहले से ही ये युद्ध ग्लोबल इकोनॉमी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा था और इसके सबूत भी सामने आने लगे हैं।  होर्मुज ने बिगड़ा यूरोप का खेल  US-Iran War के चलते दुनिया को तेल और गैस की सप्लाई के लिए महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता होर्मुज स्ट्रेट बंद होने (Hormuz Strait Closure) के चलते फ्यूल सप्लाई पर गहरा असर हुआ. पाकिस्तान, ब्रिटेन से लेकर श्रीलंका, भारत और साउथ कोरिया तक में इसका असर देखने को मिला. इन देशों में पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel Price) से लेकर एलपीजी तक की कीमतों में तगड़ा इजाफा (LPG Price Hike) देखने को मिला।  वहीं अप्रैल में यूरोप में महंगाई दर (Inflation In Europe) भी तेजी से बढ़ा है, क्योंकि ग्रोथ रेट लगातार कमजोर हो रहा है. इस तरह से Inflation Rate Rise न सिर्फ कंज्यूमर्स और यूरोपियन सेंट्रल बैंक के पॉलिसीमेकर्स दोनों के लिए चिंता की बात है।  महंगाई से सहमे 21 देश 21 देश, जो शेयर्ड यूरो करेंसी का इस्तेमाल करते हैं, वो महंगाई बढ़ने से सहमे हुए हैं. इनमें ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, फिनलैंड, फ्रांस (France), जर्मनी (Germany), इटली (Italy), नीदरलैंड्स (Netherlands), स्पेन (Spain) जैसे नाम शामिल हैं.  एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोजोन में सालाना महंगाई दर मार्च में 2.6% से बढ़कर अप्रैल में 3% हो गई. इसकी बड़ी वजह एनर्जी की कीमतों में 10.9% की तगड़ी बढ़ोतरी रही।  यूरोपियन यूनियन की स्टैटिस्टिकल एजेंसी यूरोस्टैट के अनुसार, कच्चे तेल की कीमत (Crude Price Hike) 120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर ट्रेड करने से ये खराब हालात बने, जो कि 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध (US-Israel Vs Iran War) शुरू होने से पहले करीब 73 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रही था।   ग्रोथ रेट ने किया निराश न सिर्फ महंगाई, बल्कि यूरोजन की ग्रोथ रेट ने भी निराश किया है. साल के पहले तीन महीनों में यूरोज़ोन की ग्रोथ पिछली तिमाही की तुलना में इकोनॉमिक आउटपुट में 0.1% की मामूली बढ़त में रही. इन आंकड़ों को देखकर साफ कहा जा सकता है कि वेस्ट एशिया का युद्ध ग्लोबल इकॉनमी (Global Economy) के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ है।  सबसे खराब हालात ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक करने से बने हैं, जो कि वह समुद्री रास्ता है जिससे पहले दुनिया का लगभग 20% तेल फारस की खाड़ी के जरिए प्रोड्यूसर्स से कस्टमर्स तक जाता था. तेल की कीमतों में उछाल का असर गैस स्टेशनों और जेट फ्यूल की कीमतों पर तुरंत दिखा है।  बढ़ती महंगाई ने चिंता जताई है कि यह धीमी या न के बराबर ग्रोथ के साथ इकॉनमी में शामिल हो सकती है, जो कि पॉलिसीमेकर्स के लिए एक बड़ी उलझन है और इसे स्टैगफ्लेशन कहा जाता है. इससे ECB जैसे सेंट्रल बैंकों के पास कुछ ही अच्छे ऑप्शन बचते हैं. महंगाई को कंट्रोल करने का सबसे आम तरीका यह है कि सेंट्रल बैंक अपनी बेंचमार्क इंटरेस्ट रेट बढ़ा (Policy Rate Hike) दे, लेकिन इससे चीजें खरीदने के लिए क्रेडिट कॉस्ट बढ़कर ग्रोथ धीमी हो सकती है। 

CM साय का जमीनी जुड़ाव: चंदागढ़ में निर्माणाधीन घर में ईंट जोड़कर दिया प्रेरणा संदेश

रायपुर. सुशासन तिहार 2026 के तहत सीएम विष्णुदेव साय के प्रदेशव्यापी दौरे की शुरुआत हो चुकी है. अभियान के पहले दिन सीएम साय का हेलीकॉप्टर जशपुर जिले के सुदूर वनांचल ग्राम चंदागढ़ में उतरा. प्रदेश के मुखिया के आगमन पर ग्रामीणों में खुशी का माहौल बन गया. उन्होंने गमछा पहनाकर स्वागत किया. इस दौरान मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह और मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल उपस्थित रहे.  जनसेवा का संदेश, श्रमदान का उदाहरण  चंदागढ़ में उस वक्त मुख्यमंत्री साय की सामने आई जब, उन्होंने पीएम आवास योजना के हितग्राही के निर्माणाधीन घर में स्वंय सिमेंट लगाकर ईंट जोड़ी और हौसला बढ़ाया. वहीं उन्होंने जनता के साथ फोटो भी खिंचवाई. सुशासन का अर्थ केवल व्यवस्था नहीं : सीएम साय सीएम साय ने कहा कि सुशासन का अर्थ केवल व्यवस्था नहीं, बल्कि हर नागरिक तक समयबद्ध समाधान पहुंचाना है. त्वरित कार्रवाई और त्वरित निदान के संकल्प के साथ सरकार जनविश्वास को और मजबूत कर रही है. पारदर्शिता, जवाबदेही और जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता मानते हुए प्रदेश सरकार निरंतर ऐसे निर्णय और प्रयास कर रही है, जो सीधे नागरिकों के जीवन को सरल, सुगम और सशक्त बनाते हैं. ‘सुशासन तिहार’ इसी सोच का सशक्त प्रतिबिंब है. एक ऐसा जनआंदोलन, जो जनभागीदारी को बढ़ाते हुए विकास को नई गति और दिशा दे रहा है, तथा शासन और जनता के बीच विश्वास को और प्रगाढ़ बना रहा है. 1 मई से 10 जून तक सुशासन तिहार सुशासन तिहार के तहत 1 मई से 10 जून 2026 तक प्रदेशभर में जन समस्या निवारण शिविर आयोजित किए जाएंगे. ग्रामीण क्षेत्रों में 15 से 20 ग्राम पंचायतों के समूह और शहरी क्षेत्रों में वार्ड क्लस्टर के आधार पर शिविर लगाए जाएंगे. इन शिविरों में न केवल जन समस्याओं का समाधान किया जाएगा, बल्कि शासन की योजनाओं के प्रति जन-जागरूकता भी बढ़ाई जाएगी. पात्र हितग्राहियों को मौके पर ही योजनाओं का लाभ प्रदान करने की व्यवस्था की जाएगी. शिविरों में प्राप्त आवेदनों का अधिकतम एक माह के भीतर निराकरण सुनिश्चित करने तथा प्रत्येक आवेदक को उसके आवेदन की स्थिति से अवगत कराने के भी निर्देश दिए गए हैं.

बंगाल चुनाव में किंगमेकर कौन बनेगा? त्रिशंकु विधानसभा का गणित

कलकत्ता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में किसी एक पार्टी की लहर नहीं, बल्कि एक कड़ा 'चुनावी गतिरोध' देखने को मिल रहा है। ज्यादातर एग्जिट पोल यह नहीं बता रहे हैं कि कौन जीत रहा है, बल्कि यह दिखा रहे हैं कि 148 के जादुई आंकड़े के इर्द-गिर्द मुकाबला कितना कांटे का है। हालात ये हैं कि महज 5-10 सीटों का हेरफेर ही यह तय कर देगा कि राज्य में एक स्थिर सरकार बनेगी या फिर सूबे में त्रिशंकु विधानसभा की नौबत आएगी। टीएमसी और बीजेपी में कांटे की टक्कर ज्यादातर एग्जिट पोल के रुझानों से साफ है कि सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) और राज्य में अपना विस्तार कर रही भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच सीधी और कांटे की टक्कर है। क्या कहते हैं एग्जिट पोल के आंकड़े? मैट्रिज (Matrize-ABP): इसके मुताबिक बीजेपी को 146-161 और टीएमसी को 125-140 सीटें मिल सकती हैं। अगर बीजेपी 146 पर रुकती है, तो वह बहुमत से दूर रह जाएगी और यह सीधे तौर पर त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति होगी। पीमार्क (PMARQ): इन आंकड़ों में बीजेपी का पलड़ा थोड़ा भारी है। बीजेपी को 150-175 और टीएमसी को 118-138 सीटें दी गई हैं। हालांकि, यहां भी बीजेपी का निचला आंकड़ा (150) बहुमत (148) से जरा सा ही ऊपर है, जो एक कमजोर जनादेश का इशारा है। एक्सिस माई इंडिया (Axis My India): इस मशहूर पोलस्टर ने बंगाल के लिए अपने आंकड़े ही जारी नहीं किए। उनका कहना है कि बहुत बड़ी संख्या में वोटरों ने अपनी पसंद का खुलासा करने से इनकार कर दिया, जिससे कड़े मुकाबले की पुष्टि होती है। पीपुल्स पल्स (Peoples Pulse): इस पोल ने दोनों पार्टियों के आंकड़ों को एक-दूसरे के काफी करीब दिखाया है, जिसका मतलब है कि तकनीकी रूप से कोई भी जीत सकता है। त्रिशंकु विधानसभा के पूरे आसार आंकड़ों को देखें तो बंगाल में त्रिशंकु विधानसभा की संभावना काफी मजबूत है। ज्यादातर अनुमान बीजेपी को 140-160 और टीएमसी को 120-140 सीटों के आसपास दिखा रहे हैं। दोनों बहुमत के करीब तो हैं, लेकिन लगातार इससे ऊपर नहीं दिख रहे। हालांकि, ध्यान रखना जरूरी है कि एग्जिट पोल सिर्फ एक अनुमान होते हैं और अतीत में इनके गलत साबित होने का भी इतिहास रहा है। क्या होती है त्रिशंकु विधानसभा और क्या है नियम? बंगाल में त्रिशंकु विधानसभा का मतलब है कि किसी भी दल को 148 सीटें नहीं मिलेंगी और कोई भी अपने दम पर सरकार नहीं बना पाएगा। ऐसी स्थिति में राज्यपाल की भूमिका अहम हो जाती है। नियम के मुताबिक, राज्यपाल सबसे बड़ी पार्टी को सबसे पहले सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं। बहुमत नहीं मिला तो सरकार कैसे बनेगी? बीजेपी की रणनीति: अगर बीजेपी बहुमत से चूकती है, तो वह छोटी पार्टियों और निर्दलीय विधायकों से समर्थन मांग सकती है। टीएमसी की रणनीति: ममता बनर्जी की पार्टी समर्थन के लिए कांग्रेस और लेफ्ट का रुख कर सकती है। जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से जरूरत पड़ने पर टीएमसी को समर्थन देने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट जवाब देने के बजाय कहा कि पार्टी तस्वीर साफ होने का इंतजार करेगी। फ्लोर टेस्ट और राष्ट्रपति शासन का विकल्प जो भी सरकार बनेगी, उसे विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के जरिए अपना बहुमत साबित करना ही होगा। अगर कोई भी गठबंधन काम नहीं करता है, तो राज्य में कुछ समय के लिए राष्ट्रपति शासन लगने और दोबारा चुनाव होने की भी संभावना बन सकती है, हालांकि ऐसा दुर्लभ ही होता है। 92% बंपर वोटिंग और 'किंगमेकर' की भूमिका पहले के चुनावों के उलट, 2026 का चुनाव पूरी तरह से टीएमसी और बीजेपी के बीच का चुनाव बन गया है। सत्ता विरोधी वोट कई दलों में बंटे हुए हैं और 92 प्रतिशत से ज्यादा की बंपर वोटिंग मजबूत लामबंदी का संकेत देती है। बीजेपी के लिए इसके मायने: अगर त्रिशंकु विधानसभा बनती है और बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरती है, तब भी उसे सहयोगियों की जरूरत पड़ेगी। ममता बनर्जी से सत्ता छीनने की कोशिश कर रही बीजेपी के लिए यह स्थिति राज्य में उसके नियंत्रण को सीमित कर देगी। टीएमसी के लिए इसके मायने: यह विपक्षी एकजुटता की एक बड़ी परीक्षा होगी। अगर कांग्रेस और लेफ्ट साथ देते हैं, तो बीजेपी से पिछड़ने के बावजूद टीएमसी सत्ता बरकरार रख सकती है। कांग्रेस-लेफ्ट के लिए इसके मायने: ऐसी स्थिति में कम या शून्य सीटें होने के बावजूद कांग्रेस और लेफ्ट के पास 'किंगमेकर' बनने और अपनी प्रासंगिकता हासिल करने का एक बड़ा मौका होगा।