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टेक कंपनियों ने 2026 में 73,000 कर्मचारियों को क्यों निकाला? वजह है चिंता का विषय

   नई दिल्ली दुनिया भर की टेक कंपनियों में इस समय एक बड़ा बदलाव चल रहा है और इसका सबसे बड़ा असर नौकरियों पर दिख रहा है. 2026 की शुरुआत से अब तक 73,000 से ज्यादा लोगों की नौकरी जा चुकी है. यह आंकड़ा सिर्फ एक-दो कंपनियों का नहीं, बल्कि करीब 90 से ज्यादा टेक कंपनियों का है।  सबसे बड़ी बात यह है कि यह सिर्फ एक नॉर्मल फायरिंग नहीं है. इसे टेक इंडस्ट्री का रीसेट कहा जा रहा है. कई कंपनियां सिर्फ AI के नाम पर ही छंटनी कर रही हैं. यानी कंपनियां अपने काम करने का तरीका बदल रही हैं और उसी के हिसाब से कर्मचारियों की जरूरत भी बदल रही है।  इस पूरे बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI. पहले जिन कामों के लिए बड़ी टीम की जरूरत होती थी, अब वही काम AI टूल्स की मदद से कम लोगों में हो रहा है. कंपनियां अब ज्यादा तेज, सस्ती और इफिशिएंट बनने की कोशिश कर रही हैं।  Meta से लेकर Oracle तक.. अगर इस आंकड़े को ध्यान से समझें, तो सबसे पहले नजर जाती है Meta Platforms पर. रिपोर्ट्स के मुताबिक Meta करीब 8,000 कर्मचारियों को निकालने की तैयारी में है. यह उसकी कुल वर्कफोर्स का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा माना जा रहा है।  यह छंटनी एक ही बार में नहीं, बल्कि अलग-अलग फेज में की जा रही है, जिससे साफ है कि कंपनी लंबे समय के लिए अपने खर्च को कम करना चाहती है।  इसके बाद बात आती है ऐमेजॉन की, जहां पिछले कुछ महीनों में बड़ी संख्या में नौकरियां कम की गई हैं. रिपोर्ट्स में यह संख्या करीब 30,000 तक बताई जा रही है।  ऐमेजॉन का यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि यह अकेले इस पूरे 73,000 के आंकड़े का बड़ा हिस्सा कवर करता है. इसी तरह Block Inc. ने भी करीब 4,000 कर्मचारियों को हटाया है. कंपनी ने अपने बिजनेस को लीन बनाने और खर्च कम करने के लिए यह फैसला लिया। सोशल मीडिया कंपनी Snap Inc. ने भी करीब 1,000 कर्मचारियों को निकालने का फैसला किया है. Snap ने साफ कहा है कि वह AI और ऑटोमेशन पर ज्यादा फोकस कर रही है, जिससे कुछ रोल्स की जरूरत कम हो गई है।  Oracle ने हाल ही में की है छंटनी इन बड़ी कंपनियों के अलावा Oracle और दूसरी कई टेक कंपनियों में भी हजारों की संख्या में कटौती की गई है, हालांकि हर कंपनी ने सटीक आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं. हाल ही में ओरैकल ने भारत से ही 10 हजार लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया और आगे चल कर 20,000 और जॉब्स जा सकती हैं।  अब अगर इन सभी को एक साथ देखें, तो तस्वीर साफ हो जाती है. Amazon के करीब 30,000, Meta के लगभग 8,000, Block के 4,000 और Snap के 1,000 के साथ बाकी 80-90 कंपनियों में हुई छोटी-बड़ी छंटनी मिलाकर कुल आंकड़ा 73,000 के पार पहुंच जाता है. इसमें ओरैकल द्वाारा फायर किए गए लोग भी हैं।  यह भी समझना जरूरी है कि यह सिर्फ उन नौकरियों का आंकड़ा है जो आधिकारिक तौर पर सामने आए हैं. कई कंपनियां बिना ऐलान के भी टीम कम कर रही हैं, हायरिंग रोक रही हैं या कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर रही हैं. ऐसे मामलों को जोड़ दिया जाए, तो असली संख्या इससे भी ज्यादा हो सकती है।  कोरोना में हुई ज्यादा हायरिंग? इस पूरे ट्रेंड के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं. सबसे पहले, कोरोना के समय कंपनियों ने बहुत तेजी से हायरिंग की थी. उस समय डिजिटल सर्विसेज की मांग बढ़ी थी, लेकिन अब ग्रोथ धीमी हो गई है. ऐसे में कंपनियां एक्स्ट्रा स्टाफ को कम कर रही हैं।  दूसरा बड़ी वजह है खर्च कम करना. ग्लोबल इकॉनमी लगातार बदल रही है, महंगाई और निवेश में कमी ने कंपनियों को ज्यादा सतर्क बना दिया है. अब वे हर खर्च को ध्यान से देख रही हैं और जहां जरूरत नहीं है, वहां कटौती कर रही हैं।  तीसरा और सबसे बड़ा कारण है AI का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल. अब कंपनियां यह समझ चुकी हैं कि कई काम मशीन से कराए जा सकते हैं. इससे उन्हें कम लोगों में ज्यादा काम करने का मौका मिल रहा है। 

गंगा एक्सप्रेसवे पर 120 किमी/घंटा की गति से यात्रा करेंगे वाहन

गंगा एक्सप्रेसवे पर 120 किमी/घंटा की रफ्तार से फर्राटा भर सकेंगे वाहन   एक्सप्रेसवे के जरिए मेरठ से प्रयागराज तक सीधा संपर्क स्थापित होगा 02 मुख्य टोल प्लाजा और 19 रैम्प टोल प्लाजा के माध्यम से सुगम होगा आवागमन परियोजना में गंगा नदी पर लगभग 960 मीटर और रामगंगा नदी पर 720 मीटर लंबे पुल का निर्माण एक्सप्रेसवे पर यात्रियों के लिए 09 जन-सुविधा परिसर भी किए गए हैं विकसित शाहजहांपुर के पास एक्सप्रेसवे पर 3.5 किमी लंबी हवाई पट्टी भी, एयरफोर्स कर चुकी है इमरजेंसी लैंडिंग ड्रिल 29 अप्रैल को पीएम मोदी करेंगे गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण, यूपी को मिलेगी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी लखनऊ  उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में एक और बड़ा अध्याय जुड़ने जा रहा है। बहुप्रतीक्षित गंगा एक्सप्रेसवे का 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोकार्पण प्रस्तावित है। यह परियोजना प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों को सीधे जोड़ते हुए आवागमन, व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली मानी जा रही है। गंगा एक्सप्रेसवे को 120 किमी/घंटा की स्पीड के अनुसार डिजाइन किया गया है। इसका मतलब है कि मेरठ से प्रयागराज की लंबी दूरी अब पहले के मुकाबले काफी कम समय में तय की जा सकेगी। जहां पहले यह सफर 10-12 घंटे लेता था,  अब 6-7 घंटे में पूरा हो सकेगा। इससे आम यात्रियों के साथ-साथ माल ढुलाई करने वाले वाहनों को भी बड़ा लाभ मिलेगा। तकनीकी रूप से आधुनिक और भविष्य उन्मुख उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) के एसीईओ हरि प्रताप शाही के अनुसार, यह एक्सप्रेसवे 6 लेन में तैयार किया गया है, जिसे भविष्य में 8 लेन तक विस्तारित किया जा सकता है। इसकी कुल लंबाई लगभग 594 किमी है और राइट ऑफ-वे 120 मीटर चौड़ा रखा गया है, जिससे यातायात सुगम और सुरक्षित रहेगा। परियोजना को 4 समूहों में बांटकर विकसित किया गया है, जिससे निर्माण कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सका। इसमें आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों और उच्च गुणवत्ता मानकों का विशेष ध्यान रखा गया है। टोल व यात्री सुविधाओं का बेहतर प्रबंधन एक्सप्रेसवे पर 2 मुख्य टोल प्लाजा (मेरठ और प्रयागराज) के साथ 19 रैम्प टोल प्लाजा बनाए गए हैं। इससे वाहन चालकों को विभिन्न कट्स पर एंट्री और एग्जिट में आसानी होगी और जाम की स्थिति कम होगी। इसके अलावा यात्रियों के लिए 9 जन-सुविधा परिसरों का निर्माण किया गया है, जहां ईंधन, खानपान, शौचालय और विश्राम जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे लंबी दूरी की यात्रा अधिक आरामदायक बन सकेगी। इस परियोजना में गंगा नदी पर लगभग 960 मीटर लंबा और रामगंगा नदी पर करीब 720 मीटर लंबा पुल बनाया गया है। ये पुल न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि बाढ़ और जल प्रवाह को ध्यान में रखते हुए अत्याधुनिक डिजाइन पर आधारित हैं। रणनीतिक दृष्टि से अहम् एयरस्ट्रिप शाहजहांपुर के पास लगभग 3.5 किमी लंबी हवाई पट्टी का निर्माण किया गया है, जो इस एक्सप्रेसवे की खास पहचान बन चुकी है। यहां इंडियन एयर फोर्स द्वारा इमरजेंसी लैंडिंग का सफल परीक्षण किया जा चुका है। यह सुविधा किसी भी आपात स्थिति जैसे प्राकृतिक आपदा या सैन्य जरूरत में बेहद उपयोगी साबित होगी, जिससे एक्सप्रेसवे की सामरिक महत्ता भी बढ़ जाती है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा बल गंगा एक्सप्रेसवे के चालू होने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र और पूर्वी यूपी के कृषि प्रधान क्षेत्रों के बीच सीधा और तेज संपर्क स्थापित होगा। किसानों को अपनी उपज बड़े बाजारों तक पहुंचाने में आसानी होगी। उद्योगों को कच्चे माल और तैयार उत्पाद के परिवहन में समय और लागत की बचत होगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, खासकर धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी। यह एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के समग्र विकास का इंजन है। बेहतर कनेक्टिविटी से निवेश आकर्षित होगा, नए रोजगार सृजित होंगे और प्रदेश ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के मामले में और मजबूत होगा।

केदारनाथ धाम के कपाट आज सुबह 8 बजे होंगे खुलेंगे, भक्तों की भीड़ लगनी शुरू

गौरीकुंड  ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग भगवान केदारनाथ की यात्रा अपने सबसे पावन पड़ाव पर पहुंच चुकी है. बम-बम भोले के जयकारों और आर्मी बैंड की सुरीली धुन के बीच बाबा केदारनाथ की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली अब केदारपुरी के बिल्कुल करीब है. केदारनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले पूरी केदारपुरी को कई क्विंटल फूलों से किसी दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है।   फाटा से गौरीकुण्ड तक भक्ति का सैलाब बाबा केदारनाथ की डोली सोमवार को फाटा से अपने सफर पर निकली और बड़ासू, शेरसी, रामपुर, सीतापुर होते हुए शाम करीब 4 बजे गौरीकुण्ड पहुंची. सोनप्रयाग से लेकर गौरीकुण्ड तक श्रद्धालुओं ने फूल-मालाओं और अक्षत के साथ बाबा की पालकी का जोरदार स्वागत किया।  सोमवार की रात बाबा की डोली ने गौरी माई मंदिर, गौरीकुण्ड में विश्राम किया.  इससे पहले डोली शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर से रवाना होकर गुप्तकाशी पहुंची थी, जहां आर्मी बैंड की धुन ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया।  शाम धाम पहुंचें बाबा, आज होगा महा-अभिषेक कल सुबह विशेष पूजा-अर्चना के बाद डोली गौरीकुण्ड से केदारनाथ धाम के लिए रवाना .  हजारों की संख्या में पैदल यात्री इस डोली के पीछे-पीछे चल रहे हैं.  उम्मीद है कि शाम तक डोली मंदिर परिसर में पहुंची .  वहीं, भक्तों की नजरें आज सुबह 8:00 बजे के उस ऐतिहासिक पल पर टिकी हैं, जब मंत्रोच्चार के बीच केदारनाथ मंदिर के कपाट आम जनता के लिए खोल दिए जाएंगे।  पैदल मार्ग पर भारी जाम और अव्यवस्था आस्था के इस महाकुंभ में जहां जोश हाई है, वहीं व्यवस्थाएं पस्त नजर आ रही हैं.  गौरीकुण्ड से केदारनाथ तक के संकरे पैदल मार्ग पर इस वक्त पैर रखने की जगह नहीं है.  हजारों यात्रियों का हुजूम एक साथ आगे बढ़ रहा है, जिससे रास्ते में जगह-जगह भयंकर जाम की स्थिति बनी हुई है।  यात्रा मार्ग पर सबसे बड़ी मुसीबत घोड़े-खच्चर बन गए हैं. इनकी बेतरतीब आवाजाही और संकरे रास्तों पर इनके कारण पैदल चल रहे यात्रियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. यात्रियों का कहना है कि पशुओं के दबाव के कारण जाम खुल नहीं रहा है, जिससे बुजुर्गों और बच्चों की सांसें फूल रही हैं।  केदारघाटी हुई शिवमय बेशक रास्ते कठिन हैं और जाम की चुनौती बड़ी है, लेकिन भक्तों का हौसला कम नहीं हुआ है. गुप्तकाशी से लेकर गौरीकुण्ड तक पूरा इलाका शिव के रंग में रंगा नजर आ रहा है।  तीन दिन पहले बाबा केदार ने छोड़ा शीतकालीन गद्दीस्थल बाबा केदारनाथ की पंचमुखी डोली रविवार, 19 अप्रैल को अपने शीतकालीन गद्दीस्थल उखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर से रवाना हुई थी। 20 किलोमीटर का सफर तय कर डोली फाटा पहुंची, जहां आर्मी बैंड की धुन और स्कूली बच्चों के जयकारों के साथ डोली का स्वागत किया गया। इसके बाद डोली सोमवार सुबह फाटा से निकली और शाम को गौरीकुंड पहुंची। यहां से मंगलवार सुबह बाबा की पंचमुखी डोली केदारनाथ धाम के लिए रवाना हो चुकी है। बाबा केदार की डोली 178 दिन ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ में विराजमान रही। इससे पहले, 23 अक्टूबर 2025 (भैया दूज) को सुबह 8:30 बजे केदारनाथ धाम के कपाट बंद किए गए थे। कपाट बंद होने के बाद बाबा की डोली रामपुर और गुप्तकाशी होते हुए तीन दिनों की पैदल यात्रा पूरी कर 25 अक्टूबर 2025 को ऊखीमठ पहुंची थी, जहां छह महीने तक उनकी शीतकालीन पूजा-अर्चना हुई। 149 दिन बाद बद्रीनाथ धाम पहुंचेंगे भगवान बद्री विशाल बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खुलने जा रहे हैं। इसे देखते हुए चमोली पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। धाम में आतंकवादी निरोध दस्ता (एटीएस) की तैनाती भी की गई है। भगवान बद्री विशाल की डोली मंगलवार, 21 अप्रैल को जोशीमठ से धाम के लिए रवाना होगी। करीब 42 किलोमीटर का सफर तय करके डोली बुधवार शाम बद्रीनाथ धाम पहुंचेगी। 23 अप्रैल को सुबह 6:15 बजे मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। भगवान बद्रीनाथ की गद्दी करीब 6 महीने तक जोशीमठ के नरसिंह मंदिर में विराजमान रही। बद्रीनाथ धाम के कपाट 25 नवंबर 2025 को दोपहर करीब 2:56 बजे बंद हुए थे। कपाट बंद होने के बाद भगवान की गद्दी पांडुकेश्वर होते हुए अपने शीतकालीन प्रवास जोशीमठ पहुंची थी, जहां पूरी सर्दियों में उनकी विशेष पूजा-अर्चना हुई। दो दिन पहले खुले थे कपाट रविवार से चारधाम यात्रा शुरू हुई थी। दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर गंगोत्री और 12 बजकर 35 मिनट पर यमुनोत्री के कपाट खोल दिए गए थे। इससे पहले गंगोत्री धाम के कपाट 22 अक्टूबर 2025 (अन्नकूट, गोवर्धन पूजा) को सुबह 11:36 बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए थे। वहीं, यमुनोत्री धाम के कपाट भाई दूज पर 23 अक्टूबर 2025 को दोपहर 12:30 बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए थे।

JDU में बदलाव: नीतीश कुमार ने श्रवण को विधायक दल का नेता बनाया, तीन दिन पहले बढ़ी थी सुरक्षा

पटना. बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत श्रवण कुमार को बिहार विधानसभा में जदयू विधायक दल का नेता चुना गया है। उनके नाम को औपचारिक रूप से विधानसभा भेजे जाने के बाद अधिसूचना भी जारी कर दी गई। यह निर्णय नीतीश कुमार द्वारा लिया गया, जिन्हें हाल ही में जदयू विधायक दल का नेता चुनने के लिए अधिकृत किया गया था। श्रवण कुमार पूर्व मुख्यमंत्री के बेहद करीबी माने जाते हैं और पूर्व सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। लंबे राजनीतिक अनुभव का लाभ श्रवण कुमार नालंदा विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 1995 से लगातार विधायक चुने जाते रहे हैं। उनका यह अनुभव पार्टी के लिए एक मजबूत आधार माना जा रहा है। कयासों पर लगा विराम 20 अप्रैल को हुई जदयू विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से नीतीश कुमार को नेता चयन के लिए अधिकृत किया गया था। इसके बाद कई नामों को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन नीतीश कुमार ने सभी कयासों पर विराम लगाते हुए श्रवण कुमार के नाम पर मुहर लगा दी। बढ़ाई गई सुरक्षा, बढ़ी जिम्मेदारी गौरतलब है कि हाल ही में श्रवण कुमार की सुरक्षा बढ़ाकर उन्हें Y+ श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई है। यह निर्णय उनके बढ़ते राजनीतिक महत्व को दर्शाता है। संगठनात्मक संतुलन साधने की कोशिश इससे पहले जदयू के वरिष्ठ नेता व‍िजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव को उपमुख्यमंत्री बनाया जा चुका है। ऐसे में श्रवण कुमार को विधायक दल का नेता बनाकर पार्टी ने संगठनात्मक संतुलन साधने की कोशिश की है।

रॉबर्ट पेप ने समझाई ईरान की मजबूती, ‘चौथी सबसे बड़ी ताकत’ बनने की वजह

तेहरान  क्या दुनिया अब तक ईरान को समझने में बहुत बड़ी भूल कर रही थी? क्या पश्चिमी देश जिस ईरान को एक ‘कमजोर’ देश मान रहे थे, वह असल में दुनिया का एक नया पावर सेंटर बन चुका है? मशहूर अमेरिकी रणनीतिकार और अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ रॉबर्ट पेप ने कहा, दुनिया का नजरिया अब ईरान को लेकर पूरी तरह से बदल रहा है. उन्‍होंने एक्‍स पर ल‍िखा, ईरान अब वो नहीं, जो हम उसे समझ रहे थे।  ज‍िस वक्‍त ईरान अमेर‍िका के सामने सीना ठोककर खड़ा है, ठीक उसी वक्‍त रॉबर्ट पेप ने यह बातें कहीं. अमेरिकी टीवी शो ‘मॉर्निंग जो’ की एक चर्चा का हवाला देते हुए उन्‍होंने कहा कि अब तक पश्चिमी मीडिया में इस बात पर बहस होती थी कि ईरान कितना कमजोर हो चुका है. लेकिन अब अचानक पूरी बहस का रुख बदल गया है. अब वहां चर्चा इस बात पर हो रही है कि ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) का क्या होगा और ईरान के साथ नेगोशिएशन कैसे किया जाए. पेप के मुताबिक, अब दुनिया समझ गई है कि ईरान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।  बहुत बड़ा चेंज आ गया     पेप का कहना है कि यह वैश्विक नजरिए में एक बहुत बड़ा और गहरा बदलाव है. दुनिया अब ईरान को ‘सुलझाई जाने वाली एक समस्या’ के रूप में नहीं देख रही है. बल्कि अब उसे एक ऐसी ‘बड़ी ताकत’ के रूप में देखा जा रहा है, जिसका लोहा मानना ही पड़ेगा. पेप के मुताबिक, दुनिया में नए ‘पावर सेंटर’ यानी शक्ति के केंद्र इसी तरह से उभरते हैं. उन्होंने बताया कि दो हफ्ते पहले ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के अपने लेख में उन्होंने ठीक यही बात कही थी।      तब पेप ने लिखा था कि ईरान बिखर नहीं रहा है, बल्कि ‘होर्मुज’ का इस्तेमाल करके वह एक टिकाऊ ताकत बन रहा है. तब लोगों को उनकी बात अजीब लगी थी, लेकिन आज वही बात एक सच्चाई बन चुकी है. रॉबर्ट पेप ने समझाया कि आखिर ईरान के हाथ में ऐसी कौन सी चाबी है. इसका जवाब है ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’. यह दुनिया का वो संकरा समुद्री रास्ता है, जहां से हर दिन लगभग 2 करोड़ बैरल तेल गुजरता है. यह पूरी दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का करीब 25 फीसदी है।      एशिया से लेकर खाड़ी देशों की पूरी अर्थव्यवस्था इसी एक समुद्री रास्ते पर टिकी हुई है. पेप कहते हैं कि जो भी देश इस ‘चोकपॉइंट’ को कंट्रोल करेगा, वह पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने की ताकत रखेगा. ईरान की इस नई ताकत के पीछे उसकी एक बेहद स्मार्ट रणनीति है. पेप इसे ‘दबदबा’ नहीं, बल्कि ‘डिनायल’ की नीति कहते हैं।      ईरान को इस समुद्री रास्ते को पूरी तरह से बंद करने की कोई जरूरत नहीं है. वह सिर्फ अपनी मिसाइलों, ड्रोन्स, समुद्री सुरंगों और अपनी शानदार भौगोलिक स्थिति का इस्तेमाल करके वहां एक लगातार बना रहने वाला ‘खतरा’ पैदा कर रहा है. इस रास्ते पर सिर्फ ‘अनिश्चितता’ का खौफ पैदा करना ही दुनिया का व्यवहार बदलने के लिए काफी है. ईरान बिना रास्ता ब्लॉक किए ही अपना काम निकाल रहा है।  वेस्‍ट के ल‍िए यह कड़वी सच्‍चाई रॉबर्ट पेप ने पश्चिमी देशों और अमेरिका के सामने एक बहुत बड़ी सच्चाई रखी है. उनका कहना है कि इस स्थिति ने दुनिया के सामने एक गहरी चुनौती पेश कर दी है. अब दो ही विकल्प बचे हैं. या तो पूरी दुनिया ईरान को ग्लोबल पावर के ‘चौथे केंद्र’ के रूप में स्वीकार कर ले, या फिर ईरान के इस दबदबे को तोड़ने के लिए एक ऐसी जंग छेड़े, जिसकी भयंकर कीमत पूरी दुनिया को चुकानी पड़ेगी. पेप इसे ‘द एस्केलेशन ट्रैप’ यानी बढ़ते तनाव का जाल कहते हैं। 

योगी सरकार के कैबिनेट विस्तार में महिला प्रतिनिधित्व, ब्राह्मणों पर ध्यान और OBC से एक नाम तय

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के कैबिनेट विस्तार की चर्चाएं काफी दिन से हैं। कहा जा रहा था कि खरमास के बाद कभी भी कैबिनेट विस्तार हो सकता है। अब जानकारी मिल रही है कि बंगाल चुनाव के बाद कभी भी फेरबदल हो सकता है। इस फेरबदल में कुछ नए मंत्री जुड़ सकते हैं तो कुछ लोगों को संगठन में भेजा जा सकता है। इसके अलावा विभागों में भी परिवर्तन किया जा सकता है। 2027 विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा फिलहाल संगठन मजबूत कर रही है। ऐसे में कुछ सीनियर और तेज नेताओं को संगठन की कमान भी दी जा सकती है। वहीं मंत्री परिषद में जातीय और क्षेत्रीय समीकरण साधने पर जोर होगा। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक बीते कुछ दिनों में लगातार बैठकें हुई हैं। विनोद तावड़े लखनऊ पहुंचे थे तो कई नेताओं से मुलाकात की थी। इसके अलावा दिल्ली जाकर भी राज्य के दोनों डिप्टी सीएम शीर्ष नेताओं से मिल चुके हैं। फिलहाल संघ की ओर से भाजपा के साथ समन्वय करने वाले अरुण कुमार, पीएम नरेंद्र मोदी, होम मिनिस्टर अमित शाह समेत कई नेताओं के साथ मंथन का दौर चल रहा है। माना जा रहा है कि बंगाल चुनाव के बाद कैबिनेट विस्तार पर अंतिम मुहर लग जाएगी। पहले राउंड में कुछ नामों को तय किया गया है, जिन पर दिल्ली से मुहर लगने का इंतजार है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष का इंतजार था और अब पंकज चौधरी को जिम्मेदारी मिल गई है तो फिर कैबिनेट विस्तार का भी प्लान बन रहा है। चर्चा है कि कैबिनेट विस्तार में किसी सीनियर ब्राह्मण नेता को तवज्जो मिल सकती है। अब तक डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के अलावा एक और ब्राह्मण चेहरा जितिन प्रसाद थे। फिलहाल जितिन प्रसाद दिल्ली की राजनीति में चले गए हैं। ऐसे में उनके स्थान पर किसी को चांस मिल सकता है। बीते कुछ महीनों से ब्राह्मणों की नाराजगी का नैरेटिव भी विपक्ष चलाता रहा है। ऐसे में भाजपा शायद बिरादरी के किसी नेता को मौका दे। अखिलेश के PDA की काट क्यों खोजना चाह रही भाजपा? इसके अलावा दलित समुदाय से भी किसी नेता को मंत्री पद मिल सकता है। कांशीराम जयंती से लेकर आंबेडकर जयंती तक मनाने वाले अखिलेश यादव लगातार पीडीए का नारा दोहरा रहे हैं। ऐसे में दलित समुदाय को अपने पाले में रखने के लिए भाजपा किसी नेता को मौका जरूर देगी। सबसे ज्यादा चर्चा किसी महिला को मंत्री बनाए जाने की है। ऐसा इसलिए क्योंकि महिला आरक्षण विधेयक लोकसभा में गिरने के बाद भाजपा इसे मुद्दा बना रही है। ऐसे में किसी महिला को मंत्री बनाकर भाजपा के पास मौका होगा कि वह उदाहरण देते हुए विपक्ष को घेरे। ओबीसी वर्ग से तय माना जा रहा भूपेंद्र चौधरी का नाम ओबीसी की बात करें भूपेंद्र चौधरी का नाम तय माना जा रहा है। वह अब तक प्रदेश अध्यक्ष थे। जाट बिरादरी से आते हैं और बिना किसी विवाद के काम करने वाले नेता हैं। ऐसे में जाट समाज के बीच संदेश देने के लिए उन्हें मौका मिल सकता है। पश्चिम यूपी यूं भी भाजपा के लिए अहम है। अब तक सीएम के अलावा प्रदेश अध्यक्ष और दोनों डिप्टी सीएम में से कोई भी पश्चिम यूपी का नहीं है। इसलिए मंत्री परिषद के जरिए इस क्षेत्रीय संतुलन को भी साधा जा सकता है।

मोहन भागवत की Z प्लस सिक्योरिटी का खर्च RSS उठा रहा, हाई कोर्ट में याचिका दाखिल, जज ने किया ये बयान

नागपुर  RSS यानी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत को मिली Z प्लस सुरक्षा को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल हुई। इस याचिका के जरिए मांग की गई थी कि सुरक्षा पर हो रहे खर्च का भुगतान संघ की तरफ से ही किया जाना चाहिए। हालांकि, उच्च न्यायालय ने याचिका को खारिज कर दिया है। साथ ही याचिकाकर्ता की मंशा पर भी सवाल उठाए हैं। 40 से 45 लाख रुपये महीने का खर्च उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ के समक्ष दायर जनहित याचिका में दावा किया गया कि सुरक्षा कवर की लागत कथित तौर पर 40 लाख से 45 लाख रुपये प्रति माह बताई गई है, जो सार्वजनिक धन का दुरुपयोग और राज्य के खजाने का नुकसान है क्योंकि आरएसएस एक पंजीकृत संगठन नहीं है। याचिका को खारिज करते हुए मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर और जस्टिस अनिल किलोर की पीठ ने याचिका दायर करने के पीछे याचिकाकर्ता के मकसद और इरादे पर सवाल उठाए। याचिकाकर्ता के वकील ने यह जानकारी दी। याचिका में क्या नागपुर निवासी ललन सिंह द्वारा अपने वकील अश्विन इंगोले के माध्यम से दायर याचिका में यह दलील दी गई कि करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग ऐसे व्यक्ति को 'जेड-प्लस' श्रेणी की वीवीआईपी सुरक्षा प्रदान करने के लिए किया जा रहा है, जिसका संगठन 'पंजीकृत' नहीं है। याचिकाकर्ता ने सरकार की तरफ से भागवत को दी गई उच्च स्तरीय सुरक्षा के लिए उनसे शुल्क की भरपाई का अनुरोध किया था। मुकेश अंबानी केस का दिया हवाला उन्होंने 2023 में उच्चतम न्यायालय द्वारा उद्योगपति मुकेश अंबानी से संबंधित एक मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया, जिसमें शीर्ष अदालत ने भारत सरकार की नीति के अनुसार उन्हें 'जेड-प्लस' श्रेणी की सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया था। साथ ही इसका पूरा खर्च उनके परिवार द्वारा उठाया जाना था। मोहन भागवत को कब मिली थी जेड प्लस सिक्योरिटी जून 2015 में संघ प्रमुख भागवत की सुरक्षा को बढ़ाकर जेड प्लस श्रेणी का कर दिया गया था। इसके साथ ही उनके सुरक्षा घेरे को संभालने का जिम्मा CISF यानी सेंट्रल आर्म्ड इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्सेज के पास आ गया था। इससे पहले उनकी सुरक्षा में महाराष्ट्र पुलिस की टुकड़ियां तैनात थीं। खास बात है कि पहली बार साल 2012 में यूपीए सरकार के दौरान भागवत को जेड प्लस सिक्योरिटी देने के आदेश दिए गए थे। तब सुशील कुमार शिंदे देश के गृहमंत्री थे।

कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने PM मोदी को ‘आतंकवादी’ कहा, फिर सफाई दी

 चेन्नई कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चेन्नई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी को आतंकवादी कह दिया. कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा है कि मोदी आतंकवादी हैं और उनकी पार्टी बराबरी के सिद्धांत में विश्वास नहीं करती है. खड़गे ने कहा कि AIADMK लोकतंत्र को कमजोर कर रही है और पेरियार और आम्बेडकर के सिद्धांतों के खिलाफ काम कर रही है।  हालांकि बाद में खड़गे सफाई देते नजर आए. उन्होंने कहा कि, 'मैंने आतंकवादी नहीं कहा, मैंने कहा कि वे आतंकित कर रहे हैं।  कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने बाद में कहा कि वे यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि वे धमकाते हैं. उन्होंने कहा, "मैं यह स्पष्ट करना चाहता था कि मोदी हमेशा धमकाते हैं. मैंने आपको क्रम बताया था, IT, ED। सभी संस्थाएं उनके हाथों में हैं. मैंने कभी यह नहीं कहा कि वह एक आतंकवादी हैं. वह लोगों को आतंकित कर रहे हैं।  तमिलनाडु में चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चेन्नई में कहा कि मोदी और शाह ने पहले भी चुनी हुई सरकारों को गिराने की कोशिशें की हैं. आप जानते हैं, 11 सालों में उन्होंने कई सरकारें गिरायी, विधायकों को खरीदा, राज्यसभा सांसदों को खरीदा. इन लोगों ने धनबल और मसल पावर का इस्तेमाल किया. इनके हाथ में जो संस्थाएं हैं, जैसे कि CBI, ED, IT सभी संस्थानों का वे गलत प्रयोग कर रहे हैं और राजनीतिक दलों के नेताओं पर छापा मरवा रहे हैं।  चेन्नई में पत्रकारों को संबोधित करते हुए खड़गे ने AIADMK के प्रधानमंत्री के साथ हाथ मिलाने के फैसले पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, 'वे (AIADMK) मोदी के साथ कैसे मिल सकते हैं? वह (मोदी) एक आतंकवादी हैं। और वह समानता में विश्वास नहीं रखते। उनकी पार्टी भी समानता और न्याय में विश्वास नहीं रखती। और ये लोग उनके साथ मिल रहे हैं, इसका मतलब है कि वे लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं।' खड़गे का मोदी सरकार पर आरोप कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “कश्मीर में 26 लोग इसलिए मारे गए क्योंकि मोदी सरकार ने वहां पर्यटकों को सुरक्षा मुहैया नहीं कराई। मोदी कश्मीर नहीं गए क्योंकि खुफिया एजेंसियों ने उन्हें ऐसा करने से मना किया था। आपने (केंद्र सरकार ने) पर्यटकों से वहां (पहलगाम) न जाने को क्यों नहीं कहा? अगर आपने उन्हें बताया होता तो 26 लोगों की जान बच सकती थी और यह छोटा सा युद्ध भी रुक सकता था।” विदेश नीति को लेकर भी खड़गे ने मोदी सरकार को घेरा मल्लिकार्जुन खड़गे ने विदेश नीति को लेकर भी मोदी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी पिछले 11 सालों से लगातार विदेश यात्राएं कर रहे हैं, लेकिन जब भारत को पाकिस्तान को बेनकाब करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन की जरूरत थी, तो कोई भी देश हमारा साथ देने के लिए आगे नहीं आया। पिछले 11 सालों में प्रधानमंत्री मोदी ने 151 विदेश यात्राएं की हैं और 72 देशों का दौरा किया है। इनमें से 10 बार उन्होंने अमेरिका का दौरा किया है। फिर भी मोदी सरकार की विदेश नीति के तहत हमारा देश अकेला खड़ा है। क्या प्रधानमंत्री का काम सिर्फ विदेश जाकर फोटो खिंचवाना है?” उमर अब्दुल्ला ने खीर भवानी मंदिर में की पूजा-अर्चना, जानें कश्मीरी पंडितों के लिए क्यों खास ये धार्मिक स्थल खड़गे ने कहा कि आईएमएफ ने पाकिस्तान को 1.4 बिलियन डॉलर का बेलआउट लोन दिया है लेकिन किसी ने भी भारत के रुख का समर्थन नहीं किया। उन्होंने कहा कि जब हमारे बहादुर सशस्त्र बल आतंकवादियों के खिलाफ अभियान चला रहे थे, तब अचानक सीजफायर की घोषणा कर दी गई।

अमित शाह ने बंगाल में किया आह्वान, ‘कमल का बटन दबाओ, भाजपा सरकार बनाओ, घुसपैठियों को भगाओ’

कलकत्ता पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनावी जंग गरमाई हुई है. दोनों राज्यों में सत्ता बचाने और हासिल करने की कोशिशें तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जिसमें पहले चरण में 152 सीटों पर 23 अप्रैल को और दूसरे चरण में 142 सीटों पर 29 अप्रैल को मतदान होगा. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. सभी राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे 4 मई को आएंगे।  पश्चिम बर्धमान में बोले अमित शाह- बंगाल से हर घुसपैठिए को निकाल देंगे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बर्धमान में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि यह चुनाव सिर्फ भाजपा के उम्मीदवार को विधायक बनाने या अपने कार्यकर्ता को मुख्यमंत्री बनाने के लिए नहीं है.  शाह ने कहा, “ये चुनाव पूरे बंगाल को घुसपैठियों से मुक्त करने के लिए है. उन्होंने जनता से वादा किया कि 23 तारीख को कमल के निशान पर बटन दबाकर 5 तारीख को भाजपा की सरकार बना दो. फिर हम बंगाल से एक-एक घुसपैठिए को चुन-चुनकर बाहर निकाल देंगे. अमित शाह ने कहा कि भाजपा बंगाल में कानून का राज कायम करेगी और राज्य को अवैध घुसपैठ से पूरी तरह मुक्त करेगी।  आसनसोल में बोलीं दिल्ली की सीएम- अब डर से आगे निकले बंगाल दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आसनसोल में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए लोगों से अपील की कि अब बंगाल को डर और आतंक से आगे निकलना चाहिए.  रेखा गुप्ता ने कहा कि बंगाल अब टीएमसी के गुंडों की पक्षपात वाली राजनीति को बर्दाश्त नहीं करेगा।  गुंडों व माफिया को चुन- चुन कर जेल में डालेंगे लोगों से बेखौफ मतदान करने की अपील करते हुए शाह ने कहा कि 23 मई को ममता का कोई भी गुंडा आपका बाल बांका नहीं कर पाएगा। टीएमसी के किसी भी गुंडे से किसी को डरने की जरूरत नहीं है। भाजपा सरकार बनते ही टीएमसी के गुंडों व माफिया को चुन- चुन कर जेल में डालेंगे। शाह ने कहा कि यह चुनाव घुसपैठियों को निकालने का चुनाव है। उन्होंने पूछा कि क्या ममता बनर्जी और उनका भतीजा ऐसा कर सकती है। घुसपैठियों को चुन-चुन कर बाहर निकलेंगे उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी सरकार ने बीएसएफ को भारत- बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन तक नहीं दी। शाह ने पार्टी के संकल्प पत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि हमने तय किया है कि भाजपा सरकार बनने के 45 दिनों के अंदर अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बिना तारबंदी वाले हिस्सों में बाड़ लगाने के लिए जरूरी भूमि बीएसएफ को सौंप दी जाएगी। उन्होंने फिर दोहराया कि भाजपा का वादा है कि न सिर्फ बंगाल से बल्कि पूरे देश से हम घुसपैठियों को चुन- चुन कर बाहर निकलेंगे। बंगाल की अस्मिता की रक्षा टीएमसी नहीं कर सकती उन्होंने आगे कहा कि बंगाल की अस्मिता की रक्षा टीएमसी नहीं कर सकती। कविगुरु रवींद्र नाथ टैगोर की विरासत को यूनेस्को के धरोहर में शामिल करने का काम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया। बांग्ला को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने का काम मोदी सरकार ने किया।शाह ने आरोप लगाया कि ममता दीदी बहुसंख्यक समाज को डरा रही है। दीदी कह रही हैं कि टीएमसी नहीं रहेगी तो बहुसंख्यक समाज का अस्तित्व नहीं रहेगा। यह कहने वाली आप कौन होती है। बहुसंख्यक समाज का अस्तित्व आपकी वजह से नहीं है। शाह ने सवाल किया कि आपके शासनकाल में मुर्शिदाबाद में हिंसा हुई, हिंदुओं को निशाना बनाया गया। रामनवमी त्योहार के दौरान शोभायात्राओं पर हमले हुए, सरस्वती पूजा करने की अनुमति नहीं दी गई, तब आप कहां थी। भ्रष्टाचारियों से घोटाले का पाई-पाई का हिसाब लेंगे शाह ने बंगाल में शिक्षक भर्ती से लेकर नगर निगम में हुए नियुक्तियों में हुए घोटाले, गाय तस्करी, राशन, मनरेगा, पीएम आवास घोटालों आदि का जिक्र करते हुए कड़ी चेतावनी दी। शाह ने कहा कि सारे भ्रष्टाचारियों को कह कर जाता हूं कि भाजपा की सरकार बनने पर घोटाले का पाई-पाई का हिसाब जनता को देना पड़ेगा। जिन्होंने गरीब जनता का हक लूटा है उनसे वापस वसूला जाएगा। भाजपा सरकार में बेखौफ घूम पाएंगी बच्चियां  महिला सुरक्षा पर घेरते हुए शाह ने कहा कि एक महिला मुख्यमंत्री होने के बावजूद ममता बनर्जी माताओं- बहनों की सुरक्षा नहीं कर सकीं। महिलाओं से उन्होंने आह्वान किया कि भाजपा की सरकार बना दीजिए, बच्चियां रात में एक बजे भी स्कूटी से बाहर बेखौफ घूम सकेंगी। कोई गुंडे- बदमाश उन्हें नहीं छेड़ पाएंगे। उन्होंने महिलाओं को भरोसा दिया कि भाजपा की सरकार बनने पर राज्य में न संदेशखाली न आरजी कर, न ला कालेज और न मेडिकल कालेज में दुष्कर्म जैसी घटनाएं होगी। बंगाल में बोले सचिन पायलट- कांग्रेस पूरे राज्य की हर सीट पर चुनाव लड़ रही है कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने मुर्शिदाबाद में कहा कि बंगाल की जनता ने राज्य सरकार को भी तीन मौके दिए और केंद्र सरकार को भी. लेकिन दोनों सरकारों के बीच लगातार झगड़े की वजह से आम लोगों को बिना वजह बहुत परेशानी झेलनी पड़ी. सचिन पायलट ने कहा, पहली बार कांग्रेस पूरे राज्य की हर सीट पर चुनाव लड़ रही है. कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है. उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि इस बार कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत बेहतर होगा. कांग्रेस अब बंगाल में मजबूती से वापसी कर रही है और लोगों की समस्याओं को हल करने के लिए पूरी ताकत से काम करेगी।  असम-केरल-पुडुचेरी में बंपर हुई थी वोटिंग असम में 75.91%, केरल में लगभग 78% और पुडुचेरी में 72% के आसपास वोटिंग दर्ज की गई थी।  तमिलनाडु में स्टालिन बनाम पलानीस्वामी तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा के लिए एक चरण में 23 अप्रैल को मतदान होगा.मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की डीएमके सत्ता में है.2021 में डीएमके गठबंधन ने 133 सीटें जीती थीं. मुख्य मुकाबला डीएमके और एआईएडीएमके के बीच है.एआईएडीएमके के नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) का बीजेपी के साथ गठबंधन है, जो डीएमके के लिए चुनौती बन रहा है।   बंगाल में ममता बनाम सुवेंदु-बीजेपी की टक्कर पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव दो चरणों में हो रहे हैं. पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 सीटों पर और दूसरे … Read more

महिला आरक्षण बिल पर सियासत गरम: अरुण साव बोले- महिलाएं कांग्रेस को नहीं करेंगी माफ

रायपुर. नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लोकसभा में पारित नहीं हो पाने से पहले ही भाजपा नेताओं का गुस्से पर आज छत्तीसगढ़ पहुंची कांग्रेस सांसद रंजीता रंजन के बयान ने आग में घी डालने का काम किया. यह गुस्सा उप मुख्यमंत्री अरुण साव के बयान में साफ नजर आया, जब उन्होंने बिल पारित होने को कांग्रेस की ऐतिहासिक गलती करार देते हुए कहा कि इसके लिए छत्तीसगढ़ की महिलाएं कभी माफ नहीं करेंगी. उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने आज रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में पत्रकारों से नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लोकसभा में पारित नहीं हो पाने पर कहा कि वास्तव में देश की आधी आबादी के साथ अन्याय और धोखा हुआ है. दशकों तक नारी शक्ति को उनके अधिकार से वंचित किया गया है. जब नगरीय निकायों एवं पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण मिला हुआ है, तो उन्हें विधानसभा और लोकसभा में आरक्षण क्यों नहीं मिलना चाहिए? उन्होंने कहा कि कांग्रेस और विपक्षी दलों ने पिछले चार दशकों से महिलाओं को उनके अधिकार से वंचित रखा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने प्रयत्न किया कि आधी आबादी को उनका अधिकार मिले, लेकिन कांग्रेस और इंडी गठबंधन ने षड्यंत्र करके नारी शक्ति को फिर से उनके अधिकार से वंचित किया है. उनकी आवाज को और बुलंद करने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है. उप मुख्यमंत्री साव ने कहा कि ये कितनी हास्यास्पद बात है कि छत्तीसगढ़ के तीन करोड़ लोगों की उपेक्षा करके जिस रंजीता रंजन को राज्यसभा में भेजा गया, वही रंजीता रंजन जी आज छत्तीसगढ़ आ रही हैं. जिसने संसद में बिल के खिलाफ समर्थन कर छत्तीसगढ़ के माताएं और बहनों को अधिकार से वंचित किया. साव ने कहा कि वास्तव में कांग्रेस छत्तीसगढ़ के साथ और छत्तीसगढ़ की आधी आबादी के साथ धोखा हुआ है. भविष्य में कांग्रेस को यह बहुत भारी पड़ने वाली है. छत्तीसगढ़ की माताएं-बहनें कांग्रेस को कभी माफ नहीं करेगी. उनके अधिकारों से वंचित करने वाली ही आज इस विषय में सवाल करने आ रही है, ये कितनी हास्यास्पद बात है. उन्हें तो पहले छत्तीसगढ़ की आधी आबादी के सवालों का जवाब देना होगा.