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भोपाल में जनगणना का अपडेट: प्रशासन की रिपोर्ट के मुताबिक, 6000 से ज्यादा घरों की जानकारी डिजिटली दर्ज

भोपाल  जनगणना 2027 के तहत जिले के चार लाख घरों की मैपिंग व रिकॉर्ड ऑनलाइन मिल जाएगा। स्व गणना के तहत अपने घर व परिवार की ऑनलाइन पोर्टल से जानकारी देने में भोपाल के नागरिक सबसे तेजी से काम कर रहे हैं। प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार बीते पांच दिन में 6000 से अधिक घरों की जानकारी डिजिटली दर्ज हो चुकी है। इसमें तेजी आ रही है। अगले 10 दिनों में चार लाख घरों की मैपिंग होने का अनुमान है। ये कुल घरों का 70 फीसदी है। यानी एक मई से प्रगणकों को घर पहुंचने पर ज्यादा मशक्कत नहीं करना होगी। सिर्फ स्व गणना का 11 डिजिट का नंबर दर्ज करने से उन्हें स्थिति पता चल जाएगी। गौरतलब है कि एक प्रगणक को 200 घरों की मैपिंग का लक्ष्य दिया गया है। मौजूदा स्थिति में भोपाल में दस दिन में प्रगणक इस लक्ष्य का प्राप्त कर सकेंगे। जनवरी 2027 से आबादी की जातिगत गणना शुरू होगी। स्वगणना अभी 74 फीसदी अभी स्वगणना के लिए सेंसस के ऑनलाइन पोर्टल पर भोपाल अभी करीब 74 फीसदी पर है। आबादी के अनुसार स्वगणना की संख्यात्मक स्थिति देखें तो भोपाल के साथ सिर्फ मंदसौर व सागर ही बेहतर कर रहे हैं। इंदौर जैसे बड़े शहर भोपाल से काफी पीछे हैं। भोपाल में वेब पोर्टल पर प्रति 90 सेकंड में एक फार्म सबमिट हो रहा है। ये संख्या शुरुआत में डेढ़ मिनट थी। अफसरों के अनुसार अगले दो दिन में ये 20 से 22 सेकंड तक पहुंचेगी तो फार्म बढ़ेंगे। बता दें कि जिला प्रशासन का उद्देश्य है कि जनगणना कार्य को तय समयसीमा में पूरी सटीकता और पारदर्शिता के साथ पूरा किया जाए। 32 फीसदी आवास शेड वाले स्वगणना के तहत जो तथ्य सामने आ रहे हैं, उनमें जिले में 32 फीसदी आवास शेड व कच्चे सामने आ रहे हैं। यानि यहां पर आगामी समय में मकानों को लेकर बड़ा काम होगा। आवासीय उपयोग के इंफास्ट्रक्चर की बड़ी संभावना है। सरकारी स्तर पर भी आवास की बड़ी योजनाएं हैं। जर्जर व पुराने घरों को लेकर भी बड़ा आंकड़ा सामने आ रहा है। रेडियो ट्रांजिस्टर को भी शामिल किया है… मकान सूचीकरण की गणना में रेडियो ट्रांजिस्टर को भी शामिल किया है। हालांकि बदलते समय के साथ इसके लिए दिए ऑप्शन में स्मार्टफोन से एमपी रेडियो चलाने का विकल्प है। आप इसे सबमिट कर सकते हैं। स्वगणना का फार्म भरने की तकनीकी दिक्कतें खत्म हो गई है। घर की जियो टैगिंग के साथ आसानी से फार्म जमा हो रहे हैं। लोगों में काफी उत्साह है। भुवन गुप्ता, उप जिला जनगणना अधिकारी

लू से बचाव के लिए नया टाइम टेबल: दोपहर में बंद रहेंगी राशन दुकानें, सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक खुलेंगी

रायपुर. छत्तीसगढ़ में पड़ रही भीषण गर्मी को देखते हुए सरकारी राशन दुकानों के संचालन के समय में बदलाव किया गया है। अब हितग्राहियों को राहत देने के लिए खाद्यान्न वितरण सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक किया जाएगा। नए आदेश के अनुसार दोपहर की तेज गर्मी को ध्यान में रखते हुए राशन दुकानें दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक बंद रहेंगी। इसके अलावा निर्धारित छुट्टियों के दिनों में दुकानें पूरी तरह बंद रहेंगी। पहले राशन दुकानें सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक संचालित हो रही थीं, जिससे तेज धूप में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। समय में बदलाव से अब लोगों को सुबह और शाम के अपेक्षाकृत ठंडे समय में राशन लेने की सुविधा मिल सकेगी। सरकार के इस फैसले से खासतौर पर बुजुर्गों, महिलाओं और मजदूर वर्ग को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। प्रशासन ने सभी उचित मूल्य दुकानों को नए समय का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। हितग्राहियों को मिलेगी राहत रायपुर खाद्य नियंत्रक भूपेंद्र मिश्रा ने बताया कि, गर्मी में हितग्राहियों को राहत देने के लिए यह आदेश जारी किया है। छुट्टियों के दिन भी खुलेंगी दुकानें इस आदेश के साथ विभाग ने अब छुट्टियों के दिन सोमवार एवं रविवार को भी दुकानें खोलने के निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत अब कोई भी दुकानदार रविवार और सोमवार को दुकान बंद नहीं करेगा। किसी कारणवश अगर बंद करना है, तो इसके लिए विभाग से अनुमति लेनी होगी। 10 से शाम 5 बजे तक खुल रही थीं दुकानें अभी तक उचित मूल्य की दुकानें सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक ही खुल रही थीं, लेकिन जिस तरह से भीषण गर्मी पड़ रही है, इसे देखते हुए कलेक्टर गौरव सिंह के निर्देश पर खाद्य विभाग ने सभी दुकानों के खुलने के समय में बदलाव किया है, ताकि लोगों को दोपहर में चिलचिलाती धूप एवं गरम हवा से राहत मिल सके। इस आदेश के तहत अब सभी दुकानें सुबह 7 बजे खुलेंगी और रात 9 बजे बंद होंगी। हालांकि दोपहर में 2 घंटे दुकानदारों को दुकानें बंद रखने की छूट दी गई है। गर्मी को देखते हुए लिया गया फैसला खाद्य नियंत्रक भूपेंद्र मिश्रा द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि बढ़ती गर्मी और लू के प्रभाव को देखते हुए राशन दुकानों के समय में विस्तार किया गया है। इसका उद्देश्य यह है कि लोग सुबह या शाम के समय आसानी से राशन प्राप्त कर सकें और दोपहर की तेज धूप से बचें। दोपहर में 1 से 3 बजे तक बंद रखने की छूट आदेश के अनुसार दुकानों को दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक आवश्यकतानुसार बंद रखा जा सकता है। यह निर्णय दुकानदारों और कर्मचारियों को भी गर्मी से राहत देने के लिए लिया गया है।

पारिवारिक संस्कृति व प्रेम, शांति, सद्भावना रथ को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिखाई हरी झंडी

पारिवारिक संस्कृति व प्रेम, शांति, सद्भावना रथ को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिखाई हरी झण्डी प्रेम, शांति और विश्व बंधुत्व का संदेश लेकर गांव-गांव तक पहुंचेगा दिव्य रथ एक वर्ष तक चलेगा जन जागरण अभियान भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रीवा में ब्रहृाकुमारी संस्थान द्वारा संचालित किए जा रहे पारिवारिक संस्कृति व प्रेम, शांति एवं सद्भावना रथ को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह अभियान समाज में प्रेम, शांति और भाईचारे की भावना को सशक्त करेगा तथा प्रदेश में सकारात्मक परिवर्तन लाएगा। प्रेम, शांति और विश्व बंधुत्व का संदेश लेकर गांव-गांव तक भ्रमण करने वाले रथ से एकता, प्रेम, सद्भावना व नशामुक्ति का संदेश जन-जन तक पहुंचेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनजागृति रथ में स्थापित 12 ज्योतिर्लिंगों के दिव्य स्वरूपों की पूजा-अर्चना की। रीवा के राजनिवास सर्किट हाउस में उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने ब्रहृाकुमारी संस्थान द्वारा चलाए जा रहे जन जागरण अभियान की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह पावन और आध्यात्मिक कार्य प्रदेश में विश्व बंधुत्व की भावना जागृत करने में सहायक सिद्ध होगा। ब्रहृाकुमारी संस्थान की भोपाल जोन की डायरेक्टर बीके निर्मला के निर्देशन में जन जागरण अभियान अंतर्गत ज्योतिर्लिंग रथ रीवा जिले में महाशिवरात्रि 2027 तक भ्रमण करेगा। कार्यक्रम में जिला भाजपाध्यक्ष वीरेन्द्र गुप्ता सहित ब्रम्हकुमारी संस्थान के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।  

भारत की अर्थव्यवस्था 2026 तक 6.4% बढ़ेगी, अमेरिकी टैरिफ और टैक्स के बावजूद UN रिपोर्ट में आ रहा है सकारात्मक आकलन

नई दिल्ली  संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग (ESCAP) द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट 'इकोनॉमिक एंड सोशल सर्वे ऑफ एशिया एंड द पैसिफिक 2026' के अनुसार, भारत वैश्विक चुनौतियों के बावजूद दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा. रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था साल 2026 में 6.4 प्रतिशत और साल 2027 में 6.6 प्रतिशत की दर से विकास करेगी।  विकास के मुख्य कारक रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में भारत की विकास दर 7.4 प्रतिशत रही थी. इस वृद्धि के पीछे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार, मजबूत घरेलू खपत और वस्तु एवं सेवा कर की दरों में कटौती जैसे प्रमुख कारण रहे. साथ ही, अमेरिकी टैरिफ लागू होने से पहले निर्यात में आई तेजी ने भी इसे समर्थन दिया. रिपोर्ट में सेवा क्षेत्र को भारतीय विकास का मुख्य इंजन बताया गया है।  वैश्विक व्यापार तनाव और चुनौतियां भविष्य के लिए सकारात्मक अनुमानों के बीच रिपोर्ट ने कुछ गंभीर चिंताओं की ओर भी इशारा किया है. अगस्त 2025 में अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ के बाद, 2025 की दूसरी छमाही में अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात में 25 प्रतिशत की भारी गिरावट देखी गई।  एक और बड़ी चिंता प्रेषण को लेकर है. भारत दुनिया का सबसे बड़ा प्रेषण प्राप्तकर्ता देश है, जिसे 2024 में 137 अरब डॉलर मिले थे. हालांकि, जनवरी 2026 से अमेरिका द्वारा सभी प्रेषणों पर लगाए गए 1 प्रतिशत टैक्स के कारण भारत को बड़ा आर्थिक नुकसान होने की आशंका है. भारत में प्रेषण का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा चिकित्सा और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए उपयोग किया जाता है, जिससे मध्यम वर्ग और ग्रामीण परिवारों पर सीधा असर पड़ सकता है।  निवेश और हरित अर्थव्यवस्था विदेशी निवेश (FDI) के मामले में भारत का प्रदर्शन सराहनीय रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, 2025 की पहली तीन तिमाहियों में भारत ने 50 अरब डॉलर का ग्रीनफील्ड एफडीआई आकर्षित किया, जो एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे अधिक है।  रिपोर्ट में भारत की 'उत्पादन आधारित प्रोत्साहन' (PLI) योजना की भी प्रशंसा की गई है. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि सोलर मॉड्यूल, बैटरी और ग्रीन हाइड्रोजन के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली यह योजना आयात पर निर्भरता कम करने और हरित औद्योगिक विकास के लिए एक बेहतरीन मॉडल है. वर्तमान में वैश्विक स्तर पर 1.66 करोड़ हरित नौकरियों में से भारत की हिस्सेदारी 13 लाख है, जिसे और बढ़ाने की संभावनाएं मौजूद हैं।  कुल मिलाकर, रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि भारत की आर्थिक नींव मजबूत है. हालांकि, मुद्रास्फीति के 2026 में 4.4% और 2027 में 4.3% रहने का अनुमान है. यदि भारत बाहरी व्यापारिक बाधाओं और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं का कुशलतापूर्वक प्रबंधन करता है, तो वह अपनी विकास यात्रा को स्थिर रख सकता है। 

मध्य प्रदेश में 10 जिलों में गर्म हवाओं का कहर, 21 से 23 अप्रैल तक लू का यलो अलर्ट, खजुराहो में तापमान 43 डिग्री

भोपाल   मध्यप्रदेश में बादल और बारिश की वजह से गर्मी में भले ही थोड़ी राहत मिली हो, लेकिन एक बार फिर लोगों को जबरदस्त गर्मी का सामना करना पड़ेगा. मौसम विभाग ने भोपाल सहित 10 जिलों में यलो अलर्ट जारी किया है. इन जिलों के अलावा बाकी जिलों में भी अधिकतम तापमान में 3 डिग्री तक का उछाल देखने को मिल सकता है. मौसम विभाग के मुताबिक 4 दिन बाद एक बार फिर मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।  अब रात में भी नहीं मिलेगा आराम 21 अप्रेल को प्रदेश के 10 जिलों में दिन के तापमान से ज्यादा रात के तापमान में बढ़त की चेतावनी जारी की गई है. मौसम विभाग के मुताबिक भोपाल, सीहोर, रायसेन, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, डिंडोरी में न्यूनतम तापमान में बढ़ोत्तरी होगी. 22 अप्रेल को 16 जिलों में हीट वेव का अलर्ट जारी किया गया है. भिंड, ग्वालियर, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, छिंदवाड़ा, पांढुर्ना, सिवनी, मंडला, बालाघाट, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, धार जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी की गई है।  23 अप्रैल को इन जिलों में चलेगी लू 23 अप्रेल को भिंड, ग्वालियर, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, छिंदवाड़ा, पांढुर्ना, सिवनी, मंडला, बालाघाट, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, धार जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी की गई है. 24 अप्रैल को भिंड, ग्वालियर, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, धार जिलों के लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है. इन जिलों में हीट वेव चल सकती है।  24 से फिर बदल सकता है मौसम मौसम वैज्ञानिक ई सुरेंद्रन ने बताया, '' अभी एक वेस्टर्न डिस्टनवेंस जम्मू कश्मीर और निकटवर्ती क्षेत्रों में बना हुआ है. उत्तर दक्षिण ट्रफ पूर्वी बिहार से दक्षिण पश्चिम मध्यप्रदेश तक बनी हुई है. एक नया पश्चिमी विक्षोभ 23 अप्रेल से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है. माना जा रहा है कि 24 अप्रैल के बाद एक बार फिर प्रदेश में मौसम करवट ले सकता है।  खजुराहो में 42.5 पहुंचा तापमान राजधानी भोपाल में अधिकतम तापमान 39.8 और इंदौर में 39.5 डिग्री तापमान दर्ज किया गया. उधर ग्वालियर, चंबल सहित करीबन 20 से ज्यादा जिलों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री से अधिक बना हुआ है. सबसे अधिक तापमान में खुजराहो में 43 डिग्री रिकॉर्ड किया गया. ग्वालियर में अधिकतम तापमान 42.5 रिकॉर्ड किया गया. इसके अलावा दतिया में 42.3 डिग्री, रतलाम में 42.3, श्योपुर में 42 डिग्री, रीवा में 42 डिग्री, सीधी में 42 डिग्री, नौगांव में 41.4 डिग्री, नरसिंहपुर में 41.4, धार में 40.4, गुना में 40.6, ग्वालियर में 42.5, नर्मदापुरम में 40.9, खंडवा में 40 डिग्री, रायसेन में 41.6, दमोह में 40.4, टीकमगढ़ में 40 डिग्री, उमरिया में 40.7 तापमान रिकॉर्ड किया गया। 

जनता को राहत: छत्तीसगढ़ सरकार शुरू करेगी CM हेल्पलाइन, 24×7 शिकायत दर्ज करने की सुविधा

रायपुर. छत्तीसगढ़ में जल्द सीएम हेल्पलाइन नंबर शुरू होने जा रहा है. 24 घंटे सक्रिय रहने वाले इस हेल्पलाइन नंबर पर राज्य का कोई भी व्यक्ति समस्या या फिर शिकायत कर सकेगा. अफसरों को इन समस्याओं का तय सीमा में निराकरण करना होगा. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने यह जानकारी जशपुर के लिए रवाना होने से पहले मीडिया से चर्चा में दी. उन्होंने बताया की सीएम हेल्पलाइन नंबर पर आने वाली शिकायतों या फिर समस्याओं के निराकरण के लिए समय निर्धारित होगा. अगर तय समय पर शिकायत या समस्या का समाधान नहीं हुआ तो जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई होगी. छत्तीसगढ़ विधानसभा में निंदा प्रस्ताव के लिए आहुत विशेष सत्र पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे देश की महिलाओं के साथ बहुत बड़ा अन्याय हुआ है. प्रधानमंत्री मोदी महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने जा रहे थे, लेकिन कांग्रेस ने इसका विरोध किया. इसे लेकर विधानसभा में विशेष सत्र बुलाया गया है. वहीं पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर विष्णुदेव साय ने कहा कि टीएमसी और ममता बनर्जी को लेकर वहां के लोगों में काफी आक्रोश है. मैने भी पश्चिम बंगाल का दौरा किया है. लोग बदलाव लाना चाहते हैं, भाजपा की सरकार वहां जरूर बनेगी.

नारी शक्ति वंदन अधिनियम में बाधा डालकर विपक्ष ने उजागर किया अपना महिला-विरोधी चेहरा: मुख्यमंत्री

fमहिला अधिकार के लिए सड़क पर उतरे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महिला आरक्षण पर विपक्ष के विश्वासघात के खिलाफ जन आक्रोश पदयात्रा में प्रदेश अध्यक्ष, दोनों उपमुख्यमंत्री, सहयोगी दलों के नेता समेत पूरी सरकार के साथ शामिल हुए सीएम योगी नारी शक्ति वंदन अधिनियम में बाधा डालकर विपक्ष ने उजागर किया अपना महिला-विरोधी चेहरा: मुख्यमंत्री  विपक्ष का आचरण नारी गरिमा के प्रतिकूल, आक्रोशित महिलाएं दे रहीं सड़कों पर जवाब: सीएम योगी नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विपक्ष के दोहरे चरित्र के विरुद्ध महिलाओं के जनाक्रोश को सीएम योगी ने दी आवाज तेज धूप भी नहीं रोक सकी आधी आबादी का आक्रोश, जनाक्रोश पदयात्रा में शामिल हुईं हजारों महिलाएं सपा-कांग्रेस की महिला-विरोधी राजनीति के खिलाफ राजधानी में सीएम योगी के नेतृत्व में उमड़ा जन-सैलाब आक्रोशित महिलाएं बोलीं, ‘सपा की पुरानी बीमारी-आधी आबादी से गद्दारी’ लखनऊ  नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक को लोकसभा में विपक्ष द्वारा पारित नहीं होने देने के विरोध में मंगलवार को राजधानी लखनऊ ऐतिहासिक जनाक्रोश का साक्षी बना, जब महिला अधिकार के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं सड़क पर उतरे। उनके नेतृत्व में हजारों महिलाओं का हुजूम मुख्यमंत्री आवास से सिविल हॉस्पिटल होते हुए विधान भवन तक उमड़ पड़ा। इस जनाक्रोश पदयात्रा में सीएम योगी के साथ पूरा मंत्रिमंडल सड़क पर उतरा दिखाई दिया। यह कोई साधारण पदयात्रा या रैली नहीं थी, यह नारी सम्मान और उसके संवैधानिक अधिकारों पर हुए हमले का सीधा और बेहद तीखा जवाब था। विधान भवन के सामने महिलाओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को विधानसभाओं एवं लोकसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है, किंतु कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके सहित इंडी गठबंधन के दलों द्वारा इसे बाधित करने का प्रयास उनके अलोकतांत्रिक और महिला-विरोधी चेहरे  को उजागर करता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इन दलों को अपनी नकारात्मक छवि सुधारने का अवसर दिया गया था, किंतु इन्होंने उसका दुरुपयोग करते हुए महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी अन्याय के विरोध में देशभर में आधी आबादी सड़कों पर उतरकर लोकतांत्रिक ढंग से अपना आक्रोश प्रकट कर रही है। लखनऊ में प्रचंड गर्मी के बावजूद हजारों की संख्या में मातृशक्ति की सहभागिता प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों के प्रति व्यापक जनसमर्थन और आशीर्वाद का प्रतीक है। उन्होंने उपस्थित महिलाओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि प्रदेश का एक-एक नागरिक आधी आबादी की इस न्यायोचित मांग के साथ मजबूती से खड़ा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बीते वर्षों में देश ने व्यापक परिवर्तन देखा है, जिसमें ‘महिला, गरीब, युवा और किसान’ इन चार जातियों को केंद्र में रखकर नीतियों का निर्माण किया गया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप देश ने विकास और आत्मनिर्भरता के नए मानक स्थापित किए हैं। ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत योजना सहित अनेक योजनाओं ने महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है। स्वच्छ भारत मिशन केवल स्वच्छता का अभियान नहीं, बल्कि नारी गरिमा की रक्षा का सशक्त माध्यम है, वहीं उज्ज्वला योजना केवल ईंधन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य, सम्मान और स्वावलंबन को सुदृढ़ करने का माध्यम है। केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाएं केवल लाभ वितरण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि परिवारों को स्वावलंबन की दिशा में अग्रसर करने का सशक्त आधार बन रही हैं। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, घरौनी वितरण जैसे प्रयासों ने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी आर्थिक सशक्तीकरण से जोड़ने का कार्य किया है। डबल इंजन की सरकार लगातार कार्य कर रही है, लेकिन कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और इंडी गठबंधन के दल हर योजना का विरोध करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम विधानसभाओं और लोकसभा में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण सुनिश्चित करने वाला है और यह व्यवस्था वर्ष 2029 तक लागू हो जाए, इसको लेकर प्रधानमंत्री जी और गृह मंत्री जी ने सभी को आश्वस्त भी किया, इसके बावजूद इन विपक्षी दलों का जो आचरण रहा है, वह नारी गरिमा के प्रतिकूल रहा है। इसी कारण आज देशभर की महिलाएं इन दलों के विरोध में एकजुट होकर आंदोलन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ‘डबल इंजन’ सरकार महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना तथा युवा संबंधी अन्य योजनाएं इस दिशा में प्रभावी माध्यम बन रही हैं। मुख्यमंत्री ने आक्रोश पदयात्रा में बड़ी संख्या में सहभागिता के लिए सभी महिलाओं का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। तेज धूप भी नहीं रोक सकी संकल्प, हाथों में तख्तियां-होंठों पर प्रतिकार पूर्वाह्न लगभग 10 बजे मुख्यमंत्री आवास से प्रारंभ हुई इस पदयात्रा के समय भी चुभने वाली तेज धूप थी,  लेकिन महिलाओं का आक्रोश उससे कहीं अधिक धधक रहा था। हाथों में विपक्ष की कुत्सित राजनीति की निंदा करते हुए स्लोगन लिखी हुईं तख्तियां और ‘बहन- बेटियों का अपमान-नहीं सहेगा हिन्दुस्तान, महिला अधिकारों पर वार-सपा-कांग्रेस जिम्मेदार, कांग्रेस का हाथ-नारी शक्ति के खिलाफ, नारी के सम्मान में-एनडीए मैदान में’ जैसे गूंजते नारों के साथ यह रैली विपक्ष की कायरता और राजनीतिक स्वार्थ को बेनकाब करती हुई आगे बढ़ी। हर कदम पर महिलाओं का हुजूम साफ संदेश दे रहा था- आधी आबादी के सम्मान और अधिकारों पर कोई समझौता नहीं, कोई चुप्पी नहीं, कोई माफी नहीं। जनाक्रोश पदयात्रा में हजारों महिलाओं की सहभागिता ने साबित किया कि आधी आबादी इस मुद्दे पर खामोश नहीं रहेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस पदयात्रा में केन्द्रीय मंत्री एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक और सहयोगी दलों के नेता सहित मंत्रिमंडल के सदस्यों तथा भाजपा की विभिन्न इकाइयों के पदाधिकारियों के साथ अग्रिम पंक्ति में चल रहे थे। राजधानी लखनऊ के लिए यह एक अभूतपूर्व दृश्य था। रैली के दौरान पूरे मार्ग पर अनुशासन और उत्साह का अद्वितीय संगम देखने को मिला। युवा, वृद्ध, छात्राएं और कामकाजी महिलाएं, हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को व्यापक सामाजिक … Read more

चीता संरक्षण के लिए मंदसौर में ऐतिहासिक कदम, प्रभास और पावक ने हासिल किया बड़ा मील का पत्थर

मंदसौर भारत के महत्त्वाकांक्षी 'प्रोजेक्ट चीता' की सफलता की कहानी में एक और ऐतिहासिक पन्ना जुड़ गया है। दक्षिण अफ्रीका की धरती से आए दो चीता भाई प्रभास और पावक ने मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में स्थित गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में अपना एक साल यानी 365 दिन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। तारीखों की नजर से देखें 3 साल का गौरवशाली सफर ​इन दोनों भाइयों का भारत में अब तक का सफर किसी रोमांचक फिल्म से कम नहीं रहा है: -​18 फरवरी 2023: दक्षिण अफ्रीका से उड़ान भरकर भारत की मिट्टी पर कदम रखा। -​2 साल (कूनो नेशनल पार्क): भारत की जलवायु, शिकार और वातावरण को समझने के लिए कूनो में लंबा समय बिताया। -​1 साल (गांधीसागर): आज गांधीसागर में इनका एक साल पूरा होना इस बात पर मुहर लगाता है कि यह अभयारण्य चीतों के लिए एक आदर्श और सुरक्षित घर है। भाईचारे और शिकार का अनूठा तालमेल ​​इनकी साझेदारी ही गांधीसागर में इनकी सफलता का सबसे बड़ा राज है। फील्ड टीम की निगरानी में इनके गठबंधन की कुछ ऐसी बारीकियाँ सामने आई हैं जो हैरान कर देने वाली हैं। -​शिकार की रणनीति: जब ये शिकार पर निकलते हैं तो दोनों के बीच एक मूक संवाद होता है। एक भाई शिकार का पीछा कर उसे थकाता है तो दूसरा सटीक घात लगाकर उसे दबोच लेता है। -​सुरक्षा का पहरा: भोजन करते समय ये कभी लापरवाह नहीं होते। जब एक शिकार खाता है, तो दूसरा मुस्तैद होकर चारों तरफ पहरा देता है। आराम करते समय भी दोनों अपनी पीठ जोड़कर विपरीत दिशाओं में मुँह करके बैठते हैं, ताकि 360-डिग्री सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। -संकट में साथ: टीम ने देखा है कि अगर एक भाई सुस्त महसूस करता है, तो दूसरा उसे छोड़कर ओझल नहीं होता। वह उसके इर्द-गिर्द ही रहता है, मानो उसे हिम्मत दे रहा हो। एलोग्रूमिंग (सामाजिक साफ़-सफ़ाई) उद्देश्य: यह सामाजिक संबंधों को मज़बूत करता है, विशेष रूप से नर चीतों के समूहों (भाई या करीबी नर साथी) और कभी-कभी माँ और शावकों के बीच। संदर्भ: यह अक्सर भोजन के बाद देखा जाता है, जिससे चेहरे जैसे कठिन स्थानों से खून और गंदगी को हटाने में मदद मिलती है। व्यवहार: इसमें दूसरे चीते को चाटना, कुतरना और रगड़ना शामिल है, जो एक आरामदायक और जुड़ाव भरा अनुभव हो सकता है। जुड़ी हुई आवाज़े: इन ग्रूमिंग सत्रों के दौरान अक्सर उनके 'पुर्राने' (Purring) की आवाज़ सुनी जा सकती है। ऑटोग्रूमिंग (स्वयं की साफ़-सफ़ाई) उद्देश्य: चीते अपने शरीर को साफ़ करने के लिए अपनी जीभ का उपयोग करते हैं, जो गंदगी और परजीवियों को हटाने और उनके फर (रौएं) के रखरखाव के लिए महत्वपूर्ण है। प्रक्रिया: उनकी जीभ पर विशेष 'केराटिनाइज्ड पैपिला' (छोटी, खुरदरी, कंघी जैसी संरचनाएं) होती हैं, जो एक स्क्रबर की तरह काम करती हैं और गंदगी व ढीले बालों को हटाने में मदद करती हैं। बेहद जरूरी: यह ग्रूमिंग व्यवहार चीतों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और उनके समूहों में आपसी एकता बनाए रखने के लिए बहुत आवश्यक हैं।

महिलाओं को आरक्षण नहीं दिया गया, तो सपा-कांग्रेस को 2027 में कोई वोट नहीं मिलेगा: केशव प्रसाद मौर्य

एंटी-वुमेन एलाइंस साबित हुआ इंडी एलाइंस सड़क पर निकलकर सपा व कांग्रेस का बैंड बजा रही हैं उत्तर प्रदेश की आक्रोशित बहनें: बृजेश पाठक महिलाओं को आरक्षण नहीं दिया गया, तो सपा-कांग्रेस को 2027 में कोई वोट नहीं मिलेगा: केशव प्रसाद मौर्य नारी अधिकारों का हनन करने के बाद खुशियां मनाना दर्शाता है कांग्रेस व सपा की मानसिकता: अरुण सिंह विपक्ष मोदी-विरोध में इतना अंधा हो गया कि हर अच्छी पहल का विरोध कर रहा है: पंकज चौधरी लखनऊ  नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विपक्ष के षड्यंत्र के विरोध में मंगलवार को लखनऊ में ‘जन आक्रोश पदयात्रा’ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ ही उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक व केशव प्रसाद मौर्य, पंचायती राज्यमंत्री ओमप्रकाश राजभर, राज्यसभा सांसद अरुण सिंह और केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी समेत हजारों महिलाओं ने सड़कों पर उतरकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सभी ने एक सुर में कहा कि 17 अप्रैल को संसद में यह बिल पास होने वाला था, लेकिन कांग्रेस और सपा ने न सिर्फ इसका विरोध किया, बल्कि मतदान में इसे गिराने के बाद तालियां बजाकर खुशी मनाई। उन्होंने इसे महिलाओं के अधिकारों का हनन बताया और कहा कि 2027 के चुनाव में इन दलों को महिला आक्रोश का खामियाजा भुगतना पड़ेगा। केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने तो यहां तक कहा कि इंडी एलाइंस अब एंटी-वुमेन एलाइंस साबित हो चुका है। बिल के विरोध का खामियाजा चुनाव में भुगतना पड़ेगा उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि आज प्रदेश की महिला शक्ति सड़कों पर है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की दुरभि संधि और संकीर्ण मानसिकता के कारण नारी शक्ति वंदन अधिनियम को संसद में रोकने का काम किया गया है। आज उत्तर प्रदेश की आक्रोशित बहनें सड़क पर निकलकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का बैंड बजाने का काम कर रही हैं। इन पार्टियों को आने वाले चुनावों में इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। हम सब अच्छी तरह जानते हैं कि समाजवादी पार्टी की सरकार जब-जब प्रदेश में होती है, गुंडे-बदमाश खुलेआम बहन-बेटियों को परेशान करने का काम करते हैं। इसीलिए नारे लगते हैं, 'देख सपाई-बिटिया घबराई'। वक्त है कि सब एकजुट होकर सपा व कांग्रेस को महिला शक्ति का अहसास कराएं। मां दुर्गा, मां काली, मां सरस्वती बनकर विपक्षियों को सबक सिखाएं। महिलाओं को आरक्षण दिलाकर रहेंगे: केशव प्रसाद मौर्य उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि समाजवादी पार्टी का सूपड़ा साफ होना है। 2027 में बिना महिलाओं के कोई चुनाव जीत सकता है क्या? अगर महिलाओं को आरक्षण नहीं दिया गया, तो सपा-कांग्रेस को आने वाले चुनाव में कोई वोट नहीं मिलेगा। इसके लिए तैयार हो जाइए। प्रधानमंत्री मोदी जी ने कहा है कि हम हिम्मत नहीं हारेंगे। हम महिलाओं को आरक्षण दिलाकर रहेंगे। इसी संकल्प के साथ हमें यहां से जन आक्रोश मार्च निकालना है। सपा व कांग्रेस को कभी माफ नहीं करेंगे राज्यसभा सांसद अरुण सिंह ने कहा कि 17 अप्रैल के दिन देशभर की महिलाओं के मन में एक आकांक्षा थी कि आज जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर निर्णय होगा, तो वह हमारे पक्ष में होगा। वे उत्सव मनाएंगी, खुशियां मनाएंगी और यह दिन देश के इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। लेकिन कांग्रेस व सपा ने संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के संशोधन का विरोध किया और उसके विरुद्ध मतदान किया। उन्होंने सिर्फ विरोध ही नहीं किया, बल्कि नारी अधिकारों का हनन करने के बाद तालियां भी बजाईं और खुशियां भी जाहिर कीं। यह कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की मानसिकता को दर्शाता है। उसी के कारण पूरे देश में जन आक्रोश है। इसीलिए इतनी बड़ी संख्या में आप लोग यहां एकत्र हुए हैं, यह बताने के लिए कि सपा व कांग्रेस को हम कभी माफ नहीं करेंगे। 80 प्रतिशत बहुसंख्यक महिलाओं के हितों को ठेस पहुंचाई पंकज चौधरी ने कहा कि नारी का उत्थान व सम्मान, भाजपा की यही पहचान है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में नारी सशक्तीकरण के लिए हमारी सरकार लगातार काम कर रही है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम का मुख्य उद्देश्य देश की माताओं और बहनों को नेतृत्व का अधिकार देना था। ताकि लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत सीटों पर महिलाएं चुनाव लड़ सकें और नीति-निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो सके। इसके बावजूद सपा और कांग्रेस सहित विपक्ष ने इसमें बाधा डाली। कुछ लोगों ने कहा कि इससे उत्तर और दक्षिण भारत में भेद पैदा हो जाएगा। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि मुस्लिम महिलाओं का आरक्षण भी होना चाहिए। हमारे नेताओं ने सदन में इन सभी आपत्तियों का विस्तार से जवाब दिया। विपक्षी दल जहां एक तरफ महिलाओं का सम्मान और सशक्तीकरण की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ नकाब और वोट बैंक के चक्कर में उन्होंने 20 प्रतिशत अल्पसंख्यक महिलाओं के नाम पर 80 प्रतिशत बहुसंख्यक महिलाओं के हितों को ठेस पहुंचाने का काम किया है।

124 साल में कई बार हुआ भोजशाला का सर्वे, हर बार मिलीं मूर्तियां-श्लोक, MP HC में अब होगी सुनवाई

धार   धार भोजशाला परिसर को लेकर हाईकोर्ट की युगलपीठ में पहले धार के हस्तक्षेपकर्ताओं की बहस पूरी हुई। इसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने सर्वे पर बात रखी। बताया, हाईकोर्ट ने 2024 में सर्वे आदेश दिए। इससे पहले 1902 के बाद से ही कई बार सर्वे हो चुका है। अन्य शोधकर्ताओं ने भी सर्वे किया। हर सर्वे में मूर्तियां और श्लोक मिले। यह कई रिपोर्ट में है। मुस्लिम पक्ष ने पेश किए मस्जिद के सबूत उधर, धार के जिब्रान अंसारी, फिरोज, अयाज की हस्तक्षेप याचिका पर वकील सैयद अशहार अली वारसी ने बात रखी। कहा, मंदिर (Bhojshala) के लिए जरूरी है शिखर, गोपुरम, मंडप, गर्भगृह, जो इस निर्माण में नहीं हैं। मस्जिद (Bhojshala) के लिए जरूरी किबला, जिसकी दीवार मक्का की ओर हो, वो यहां है। 1908 में ही पुरातत्व इमारत घोषित सुनील जैन ने बताया, इसे 1908 में पुरातत्व महत्व (Bhojshala) की इमारतों में, तो 1958 में संरक्षित इमारतों में शामिल किया गया। इसी दौरान कोर्ट ने इसे भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद का नाम किस दस्तावेज में आया, उस पर जारी नोटिफिकेशन पर सवाल खड़ा किया था। भोजशाला में 100 साल से अधिक पुराने सर्वे और संस्कृत अवशेष मिले – एएसआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील जैन ने बताया कि भोजशाला का अध्ययन आज का नहीं है, बल्कि पिछले 100 से अधिक वर्षों से इसका लगातार सर्वे और शोध होता आ रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1902-03 में भी यहां विस्तृत सर्वे किया गया था, जिसमें कई ऐतिहासिक अवशेषों का रिकॉर्ड तैयार किया गया था। एएसआई ने यह भी बताया कि समय-समय पर हुए विभिन्न सर्वे में भोजशाला से मूर्तियां और पत्थरों पर संस्कृत में लिखे श्लोक मिले हैं। इन अवशेषों से यह संकेत मिलता है कि यह स्थान प्राचीन भारतीय शिक्षा और संस्कृति से जुड़ा रहा है। 2024 सर्वे रिपोर्ट और ऐतिहासिक दर्जे पर एएसआई का पक्ष – कोर्ट को यह भी जानकारी दी गई कि वर्ष 2024 में हाई कोर्ट के आदेश के बाद एएसआई ने आधुनिक तकनीकों की मदद से एक नया और विस्तृत सर्वे किया। इसकी रिपोर्ट पहले ही अदालत में जमा की जा चुकी है। इस रिपोर्ट में भी पहले जैसे ही तथ्य सामने आए हैं, जैसे संस्कृत श्लोक और प्राचीन मूर्तियां। एएसआई ने बताया कि भोजशाला को वर्ष 1908 में ही पुरातत्व महत्व की सूची में शामिल किया गया था और बाद में 1958 में इसे संरक्षित भवन घोषित किया गया। इससे यह साफ होता है कि सरकार भी इसके ऐतिहासिक महत्व को मानती है। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह सवाल भी उठाया कि “भोजशाला” और “कमाल मौला मस्जिद” नाम सबसे पहले किस दस्तावेज में दर्ज हुए और क्या इस पर कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी हुआ था। इस पर दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दलीलें दी गईं। अब इस मामले में मंगलवार को एएसआई अपने 98 दिन चले हालिया सर्वे की पूरी रिपोर्ट पर विस्तार से तर्क रखेगा। इसके बाद मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद अपना पक्ष अदालत में प्रस्तुत करेंगे। कई बार हो चुका है भोजशाला का सर्वे बता दें कि ऐतिहासिक धार भोजशाला (Bhojshala) का मुख्य और नवीनतम वैज्ञानिक सर्वे 22 मार्च 2024 से शुरू किया गया था। जो 98 दिन तक चला। इस सर्वे की रिपोर्ट 15 जुलाई 202 को AsI ने एमपी हाईकोर्ट (इंदौर) में पेश की थी। जबकि इससे पहले 1902 में भी भोजशाला का सर्वे किया गया था। इस सर्वे के अलावा 7 अप्रैल 2003 को भी एक व्यवस्था के तहत जांच की गई थी। बताते चलें कि ASI ने जीपीआर और जीपीएस के साथ ही कार्बन डेंटिंग तकनीक का इस्तेमाल करते हुए इसका सर्वे किया है। सर्वे का उद्देश्य पता लगाना है कि यह मंदिर है या मस्जिद सर्वे का उद्देश्य यह पता लगाना था कि धार भोजशाला (Bhojshala) स्थल एक सरस्वती मंदिर है या फिर कमाल मौला की मस्जिद। हिंदु इसे मंदिर का नाम देते हैं और मुस्लिम मस्जिद का। इसके अलावा जैन समाज भी अपनी याचिका दर्ज कर भोजशाला का तीसरा दावेदार बन चुका है। मामला हाईकोर्ट में है, जिसकी दोबारा सुनवाई शुरू हुई है। इस कड़ी में आज फिर सुनवाई होनी है।