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भारत को मिला एलपीजी संकट से निपटने का तरीका, किस्मत ने पलभर में बदल दी तस्वीर

नई दिल्‍ली  अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध ने भारत ही नहीं, दुनिया के तमाम देशों को गैस के संकट में धकेल दिया है. लेकिन, किस्‍मत भारत पर मेहरबान हुई और अचानक ग्‍लोबल मार्केट में प्राकृतिक गैस की कीमतें नीचे आ गईं. इसका फायदा उठाते हुए भारत ने ग्‍लोबल स्‍पॉट मार्केट से गैस की खरीदारी तेज कर दी है. इससे पश्चिम एशिया संकट के बाद बढ़ी गैस आयात की दिक्‍कतों से निपटने में मदद मिलेगी।  गैस मार्केट से जुड़े ट्रेडर्स का कहना है कि देश की सरकारी कंपनियां भारत पेट्रोलियम कॉर्प, गेल इंडिया लिमिटेड और गुजरात स्‍टेट पेट्रोलियम कॉर्प ने अप्रैल से जून की डिलीवरी के लिए 16 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट यानी बीटीयू पर खरीदा है. ये सप्‍लाई 15 अप्रैल को बंद हुए ट्रेड में खरीदी गई है. ट्रेडर्स का कहना है कि यह एक बड़ा बदलाव है, क्‍योंकि इससे पहले कीमतें ज्‍यादा होने की वजह से भारतीय खरीदारों ने स्‍पॉट मार्केट से खरीदारी कम कर दी थी और कई ट्रेंडर रद्द कर दिए थे।  क्‍यों आई है ऐसी नौबत ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्‍य लगभग बंद हो गया है और कतर में हमले से दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी प्‍लांट भी बंद हो गया. इस कारण भारत सहित दुनिया को सप्‍लाई होने वाले 20 फीसदी गैस के हिस्‍से पर दिक्‍कतें आ गईं. यही वजह रही कि भारत को भी पिछले साल की समान अवधि की तुलना में एलएनजी डिलीवरी करीब 14 फीसदी कम रही और सप्‍लाई के मुकाबले आयात का औसत गड़बड़ हो गया।  कीमत गिरी तो बढ़ गई खरीदारी भारत ने गैस खरीद ऐसे समय में बढ़ाई है, जब ग्‍लोबल स्‍पॉट मार्केट में प्राकृतिक गैस की कीमतें गिरकर एक महीने से भी ज्‍यादा के निचले स्‍तर पर चली गई हैं. युद्ध शुरू होने के बाद एक समय ऐसा भी आया था जब नेचुरल गैस के दाम ग्‍लोबल मार्केट में दोगुने से भी ज्‍यादा हो गए थे. तब इसकी कीमत 25 डॉलर प्रति बीटीयू के आसपास थी. यही वजह रही कि भारतीय खरीदारों ने अपने ट्रेडिंग बंद कर दी थी. अब कीमतें 50 फीसदी तक नीचे आ गई हैं, जिससे खरीदारी एक बार फिर बढ़ने लगी है।  गैस के लिए आयात पर निर्भर भारत सरकार ने कुछ साल पहले एक अभियान शुरू किया था कि देश को गैस आधारित अर्थव्‍यवस्‍था बनाना है, ताकि प्रदूषण पर लगाम कसी जा सके. फिलहाल अपनी जरूरत का करीब 60 फीसदी गैस चाहे वह प्राकृतिक गैस या हो फिर एलपीजी आज आयात करनी पड़ती है. साल 2024 में भारत का प्राकृतिक गैस का आयात करीब 35 हजार क्‍यूबिक मीटर के आसपास पहुंच गया था. पिछले साल का आंकड़ा तो और भी अधिक था, लेकिन इस साल की शुरुआत से ही ईरान संकट की वजह से आयात में कमी दिख रही है. भारत सबसे ज्‍यादा गैस का आयात कतर, यूएई और अमेरिका जेसे देशों से करता है। 

MP सरकार का बड़ा कदम: किसानों के लिए आई खुशखबरी, तुरंत जानिए नया फैसला

भोपाल  मध्यप्रदेश के किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्य सरकार ने गेहूं उपार्जन के लिए स्लॉट बुकिंग की अंतिम तारीख 6 दिन बढ़ाकर अब 30 अप्रैल 2026 कर दी है। पहले यह अवधि 24 अप्रैल तक निर्धारित थी। सरकार के इस फैसले से उन किसानों को राहत मिलेगी, जो अब तक अपनी उपज बेचने के लिए स्लॉट बुक नहीं करा पाए थे। इसके साथ ही सरकार ने स्लॉट बुकिंग की क्षमता भी बढ़ा दी है। अब किसान एक बार में 1000 क्विंटल की जगह 1500 क्विंटल तक गेहूं विक्रय के लिए स्लॉट बुक कर सकेंगे। इससे बड़े किसानों और अधिक उत्पादन करने वालों को सीधा फायदा मिलेगा। प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीदी का कार्य तेजी से जारी है। अब तक 1 लाख 30 हजार 655 किसानों से 57 लाख 13 हजार 640 क्विंटल गेहूं खरीदा जा चुका है। इसके बदले किसानों के बैंक खातों में 355 करोड़ 3 लाख रुपए की राशि भी ट्रांसफर की जा चुकी है। वहीं, 4 लाख 22 हजार 848 किसानों ने 1 करोड़ 82 लाख 96 हजार 810 क्विंटल गेहूं विक्रय के लिए स्लॉट बुक करा लिया है। किसानों की सुविधा के लिए प्रदेशभर में 3171 उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं, जहां छायादार बैठने की व्यवस्था, पेयजल, बारदाना, तौल कांटे, सिलाई मशीन, कंप्यूटर, इंटरनेट और गुणवत्ता जांच उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। सरकार वर्ष 2026-27 में किसानों से 2585 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य और 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस सहित कुल 2625 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीद रही है। उपार्जन के लिए जूट बारदानों के साथ पीपी और एचडीपी बैग की भी पर्याप्त व्यवस्था की गई है। इस वर्ष रिकॉर्ड 19 लाख 4 हजार किसानों ने गेहूं उपार्जन के लिए पंजीयन कराया है, जो पिछले साल की तुलना में 3 लाख 60 हजार अधिक है। पिछले वर्ष लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था, जबकि इस बार सरकार ने 78 लाख मीट्रिक टन उपार्जन का लक्ष्य रखा है। सरकार का कहना है कि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए खरीदी केंद्रों पर सभी जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं, ताकि समर्थन मूल्य का लाभ समय पर हर पात्र किसान तक पहुंच सके।

चंदेरी में हवाई सेवा की शुरुआत, बॉलीवुड सिटी को मिलेगा नया कनेक्टिविटी तो सीएम की बड़ी सौगात

चंदेरी पर्यटन के नए युग की शुरुआत होने जा रही है। प्रदेश में अंतरराज्यीय पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मप्र टूरिज्म बोर्ड द्वारा निजी संस्था जेट सर्व एविएशन के सहयोग से पीएमश्री पर्यटन हेलीकॉप्टर सेवा का संचालन किया जा रहा है।  चंदेरी में आज से पीएमश्री पर्यटन हेलीकॉप्टर सेवा शुरू हो सकती है। दरअसल यह सेवा पूर्व में 12 फरवरी से शुरू होनी थी, लेकिन कुछ कारणवश यह शुरू नहीं हो सकी। इसके बाद एक बार फिर 19 अप्रेल से इसे शुरू किया जाना प्रस्तावित है। चंदेरी बन चुकी है बॉलीवुड नगरी चंदेरी में आने वाले पर्यटको और यहां होने वाली फिल्मों की शूटिंग के लिए बड़े बडे शहरों से कलाकार आते हैं। साथ ही विदेशा सैलानी भी यहां पहुंचते हैं। ऐसे में अभी तक उनके पास दो ही मार्ग थे,जिसमें ट्रेन का मार्ग ललितपुर जो युपी में आता है वहां से सुगम था। वहीं सड़क मार्ग। ऐसे में पीएमश्री हेलीकॉप्टर सेवा से यहां आने वाले सैलानियों को सुविधा होगी। वहीं ओरछा तक के लिए यह सेवा रहेगी,जिसमें जिलेवासी भी सफर कर सकते हैं। कल से शुरू होगी सेवा मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा निजी संस्थानों के सहयोग से पीएमश्री पर्यटन हेलीकॉप्टर सेवा की शुरुआत 19 अप्रेल से की जा रही है। इसका शुभारंभ आज मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा किया जाना है। रविवार सुबह 9.30 बजे स्टेट हैंगर भोपाल से इसका शुभारंभ किया जाएगा। साथ ही मुख्यमंत्री द्वारा स्टेट हैंगर भोपाल से ओरछा और चंदेरी के लिए हेलीकॉप्टर का फ्लैग ऑफ किया जाना प्रस्तावित है। चंदेरी और ओरछा में शुरू हो जाएगी हेलीकॉप्टर सेवा इससे भोपाल से चंदेरी और ओरछा के लिए हेलीकॉप्टर सेवाओं की शुरुआत हो जाएगी। जिसके संबंध में अपर प्रबंध संचालक टूरिज्म बोर्ड ने पत्र भी जारी किया है। अब देखना यह है कि यह सेवा शुरू होती है या फिर इसकी तारीख में फिर से आगे बढ़ाई जा सकती है। बढ़ेगा रोजगार, पर्यटन को मिलेगा लाभ मध्य प्रदेश देश के बेस्ट टूरिज्म स्टेट में से एक है। जहां हर साल लाखों टूरिस्ट आते हैं। ऐसे में पीएमश्री योजना के तहत हवाई सेवा शुरू होने का सबसे बड़ा लाभ एमपी टूरिज्म को ही मिलेगा। इस सेवा के शुरू होने के बाद उम्मीद की जा रही है कि यहां आने वाले टूरिस्ट की संख्या में इजाफा दर्ज किया जा सकता है। इसका सीधा असर यह होगा कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। स्थानीय अर्थव्यस्था को बूम मिलेगा और लोगों के जीवन स्तर में सुधार देखने को मिलेगा। बता दें कि चंदेरी मध्य प्रदेश के अशोक नगर जिले में एक छोटे शहर जैसा है। ऐतिहासिक स्थल है और अपनी चंदेरी की साड़ियों के लिए जाना जाता है। दुनिया भर में मशहूर यह शहर अब सिर्फ चंदेरी की साड़ियों के लिए ही नहीं बल्कि यहां होने वाली बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग के लिए भी एक अनोखी पहचान स्थापित कर चुका है। वहीं ओरछा भी अब ऐतिहासिक और राजा राम की नगरी कहलाने वाला ओरछा भी इस दौड़ में आगे बढ़ रहा है। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बड़ा ऐलान: 10वीं-12वीं बोर्ड विद्यार्थियों को मिलेगा द्वितीय अवसर परीक्षा

10वीं-12वीं बोर्ड के विद्यार्थियों को द्वितीय अवसर परीक्षा का मिलेगा मौका : मुख्यमंत्री डॉ. यादव अनुपस्थित, अनुत्तीर्ण और अंक सुधारने के इच्छुक विद्यार्थी ले सकेंगे लाभ 22 अप्रैल तक किया जा सकेगा आवेदन 7 से 25 मई तक आयोजित होगी परीक्षा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व और स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में किए गए नवाचारों के परिणामस्वरूप प्रदेश के बच्चों ने माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं एवं 12वीं की बोर्ड परीक्षा में शानदार प्रदर्शन किया है। शासकीय स्तर पर की गई पहल के साथ-साथ यह उपलब्धि विद्यार्थियों और शिक्षकों की कड़ी मेहनत का प्रमाण भी है। इस वर्ष किसी भी छात्र का परीक्षाफल पूरक घोषित नहीं किया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत अब विद्यार्थियों के लिए द्वितीय परीक्षा आयोजित की जा रही है। जो विद्यार्थी अनुपस्थित रहे, अनुत्तीर्ण हुए या अंक सुधारना चाहते हैं, वे निराश न हों, सरकार उनके साथ खड़ी है। "द्वितीय अवसर परीक्षा" 7 से 25 मई तक आयोजित होगी। राज्य सरकार द्वारा विद्यार्थियों को पिछली बार से अधिक परिश्रम और बेहतर करने के लिए एक मौका और दिया गया है। अनुत्तीर्ण हुए बच्चों के माता-पिता को ऐसे मौके पर अपने बच्चे के साथ खड़े होने और उन्हें हौसला देने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्हें बताया जा रहा है कि आज की असफलता से निराश होने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है। जीवन की राह में छोटी-मोटी असफलताएं हमें और अधिक मजबूत बनाने के लिए आती है। गिरकर संभलने वाला ही असली विजेता कहलाता है। माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित की जा रही द्वितीय अवसर परीक्षा में ऐसे छात्र जो मंडल की प्रथम परीक्षा में एक या अधिक विषयों में अनुपस्थित/अनुत्तीर्ण रहे हों, सम्मिलित हो सकेंगे। ऐसे परीक्षार्थी जो किसी विषय में उत्तीर्ण हो गए हों, वे भी अंक सुधारने के लिए द्वितीय अवसर परीक्षा में सम्मिलित हो सकते हैं। परीक्षार्थियों का प्रथम एवं द्वितीय अवसर में से जो भी श्रेष्ठ परिणाम होगा, वह अंतिम रूप से मान्य रहेगा। प्रायोगिक विषयों में किसी छात्र को प्रायोगिक और आंतरिक परीक्षा के केवल अनुत्तीर्ण भाग में शामिल होने की पात्रता होगी। द्वितीय अवसर परीक्षा में परीक्षार्थी को विषय परिवर्तन की अनुमति नहीं होगी। द्वितीय अवसर परीक्षा में शामिल होने के लिए ऑनलाइन आवेदन 22 अप्रैल रात 12 बजे तक एम.पी. ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भरे जा सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू करने वाले देश का पहला राज्य बना है। प्रदेश में प्राइमरी स्तर पर 'ड्रॉप आउट रेट' शून्य (Zero) हो गया है। प्रदेश में 369 सर्वसुविधायुक्त सांदीपनी विद्यालय और 730 पीएम स्कूल, शालेय शिक्षा की गुणवत्ता में क्रांतिकारी बदलाव ला रहे हैं। शिक्षा के लिए बजट में 36 हज़ार 730 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है, जो पिछले वर्ष से 11% अधिक है। यह निवेश अगली पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए है। निजी स्कूलों में पढ़ने वाले आर्थिक रूप से कमजोर 8 लाख 50 हज़ार से अधिक बच्चों की फीस राज्य सरकार भर रही है, ताकि कोई भी बच्चा संसाधनों की कमी के कारण पीछे न रहे।  

भोपाल मेट्रोपॉलिटन का विस्तार: 12,098 स्क्वायर किमी में 6 जिलों के 2510 गांव शामिल, नोटिफिकेशन जारी

 भोपाल  भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया का दायरा 12,098 वर्ग किलोमीटर का होगा। इसमें छह जिलों के 2510 गांवों को शामिल किया है। भूमि के क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे कम हिस्सा नर्मदापुरम का है तो भोपाल से अधिक सीहोर और राजगढ़ का क्षेत्र रखा गया है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। भोपाल मेट्रोपॉलिटन की अधिसूचना जारी होने के साथ ही अब प्रतिनियुक्ति पर अधिकारी और कर्मचारियों को लिया जाएगा। छह जिलों में तहसीलवार गांवों की जारी की गई अधिसूचना में भोपाल जिले में बैरसिया तहसील के 210 गांव, हुजूर तहसील के 257 गांव और कोलार तहसील के 60 गांव शामिल किए गए हैं। इसी तरह सीहोर जिले में आठ तहसील आष्टा, बुधनी, दोराहा, इच्छावर, जावर, श्यामपुर, रेहटी व सीहोर। रायसेन जिले में तीन तहसील गौहरगंज, रायसेन, सुल्तानपुर। राजगढ़ में सात तहसील ब्यावरा, खुजनेर, नरसिंहगढ़, पचोर, राजगढ़, सारंगपुर, सुठालिया। विदिशा में दो तहसील गुलाबगंज और विदिशा। नर्मदापुरम में पांच तहसील दोलारिया, होशंगाबाद गांव, इटारसी, माखन नगर, नर्मदापुरम शामिल की गई है। बता दें कि मध्य प्रदेश मेट्रोपॉलिटन रीजन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट 2025 को मई 2025 में कैबिनेट की मंजूरी मिली और अगस्त 2025 में विधानसभा से इसे पारित किया गया। किस जिले में कितनी तहसीलें अब भोपाल में वहीं, रायसेन जिले की बात करें तो इससे 3 तहसीलें जिनमें गौहरगंज, रायसेन, सुल्तानपुर रहेंगी। इसके अलावा, राजगढ़ जिले में 7 तहसीलें, जिनमें ब्यावरा, खुजनेर, नरसिंहगढ़, पचोर, राजगढ़, सारंगपुर, सुठालिया। विदिशा में दो तहसील गुलाबगंज और विदिशा। नर्मदापुरम में 5 तहसील दोलारिया, होशंगाबाद गांव, इटारसी, माखन नगर, नर्मदापुरम को शामिल किया गया है। मेट्रोपॉलिटन रीजन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट को 2025 में मिली मंजूरी आपको बता दें कि, मध्य प्रदेश मेट्रोपॉलिटन रीजन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट 2025 को मई 2025 में मोहन कैबिनेट की मंजूरी मिली थी और अगस्त 2025 में विधानसभा से इसे पारित किया गया था। क्षेत्रफल के हिसाब से किस जिले से कितना क्षेत्र जिला — क्षेत्र (वर्ग किमी) — प्रतिशत -सीहोर– 3302 — 50.46% -राजगढ़ — 2812– 46.61% -रायसेन– 2422– 28.57% -भोपाल — 2275– 82.25% -विदिशा– 804– 11.01% -नर्मदापुरम — 480 — 7.16% मुंबई से बड़े क्षेत्र में भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन का विस्तार भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन देश की आर्थिक मुंबई से भी बड़े इलाके में डेवलप किया जा रहा है, जिसमें राजधानी भोपाल और इसके पड़ोसी जिले रायसेन, सीहोर, विदिशा, राजगढ़ और नर्मदापुरम की कुल 12 हजार वर्गकिमी जमीन पर मेट्रोपॉलिटन रीजन का विस्तार किया जाएगा। अगर क्षेत्रफल की बात करें तो भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन का एरिया 12,098 वर्ग किमी में फैला रहेगा तो वहीं मुंबई मेट्रोपॉलिटन सिटी 6,300 वर्गकिमी में फैली रहेगी। मेट्रोपॉलिटन रीजन में ये इलाके रहेंगे मेट्रोपॉलिटन रीजन का भोपाल केंद्र बिंदु रहेगा, यानी राजधानी भोपाल ही सेंटर पॉइंट होगा, जिसमें भोपाल की हुजूर, बैरसिया, कोलार तहसील मेट्रोपॉलिटन रीजन में शामिल हुई है. इसके साथ ही सीहोर जिले की इछावर, आष्टा, सीहोर श्यामपुर, जावर को भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन का हिस्सा बनाया गया है. इसके साथ ही विदिशा जिले की ग्यारसपुर, गुलाबगंज और विदिशा तहसील को इस रीजन में जगह मिली है। राजगढ़ की नरसिंहगढ़, जीरापुर, ब्यावरा, पिछोर, खुजनेर तहसील को शामिल किया गया है। जबकि नर्मदापुरम की होशंगाबाद गांव, इटारसी, माखन नगर, नर्मदापुरम को जोड़ा है। इसके अलावा रायसेन जिले की औबेदुल्लागंज और रायसेन तहसील को जगह मिली है।

लाड़ली बहनों के लिए सरकार का बड़ा ऐलान, मिलेगा यह खास तोहफा, पूरी डिटेल जानें

भोपाल मध्यप्रदेश की लाड़ली बहनों के लिए मोहन सरकार एक और बड़ी सौगात की तैयारी में है। अब केवल हर महीने आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि महिलाओं को स्थायी रोजगार से जोड़ने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया जा रहा है। सरकार की नई योजना के तहत इच्छुक लाड़ली बहनों को गाय-भैंस पालन के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी, ताकि वे डेयरी व्यवसाय से जुड़कर अपनी आय बढ़ा सकें। सूत्रों के मुताबिक, योजना की शुरुआत गोवर्धन पूजा से की जा सकती है। इस योजना के तहत सभी महिलाओं के लिए पशुपालन अनिवार्य नहीं होगा, बल्कि खेती-किसानी और पशुपालन में रुचि रखने वाली महिलाएं ही इसका लाभ ले सकेंगी। सरकार पशुधन खरीदने के लिए आर्थिक मदद देगी, जिससे महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें। फिलहाल प्रदेश की करीब 1.25 करोड़ लाड़ली बहनों को हर महीने 1500 रुपए की राशि दी जा रही है, जिस पर सरकार को लगभग 1836 करोड़ रुपए का मासिक भार उठाना पड़ रहा है। विपक्ष लगातार इस राशि को अपर्याप्त बताते हुए 3000 रुपए प्रतिमाह देने के वादे की याद दिला रहा है। सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि भविष्य में इस राशि को बढ़ाकर 3000 रुपए तक ले जाने की योजना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कहना है कि सरकार का उद्देश्य केवल नकद सहायता देना नहीं, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। इसी सोच के तहत नवंबर 2026 से महिलाओं को विभिन्न आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के नए विकल्प तलाशे जा रहे हैं। महिला आधारित योजनाओं की समीक्षा के लिए सरकार ने मंत्री निर्मला भूरिया की अध्यक्षता में एक समिति भी बनाई है। इस समिति में मंत्री कृष्णा गौर, प्रतिमा बागरी, राधा सिंह और संपतिया उइके को शामिल किया गया है। समिति इस बात पर काम कर रही है कि महिलाओं को मासिक किस्त के बजाय एकमुश्त सहायता देकर स्थायी काम-धंधे से कैसे जोड़ा जाए, ताकि उनकी आमदनी कई गुना बढ़ सके। सरकार योजना का नाम बदलने पर भी विचार कर रही है। संभावना है कि इसे प्रदेश की किसी ऐसी वीरांगना के नाम पर रखा जाए, जिन्होंने समाज और जनकल्याण के लिए साहसिक कार्य किए हों। हाल ही में नर्मदापुरम के सिवनी मालवा में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा था कि प्रदेश की 1.25 करोड़ से अधिक लाड़ली बहनों को अब तक 55 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की सहायता दी जा चुकी है। योजना शुरू होने से अब तक प्रति बहन 40,500 रुपए से अधिक राशि सीधे बैंक खातों में पहुंच चुकी है। सीएम ने भरोसा दिलाया कि बहनों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। सरकार आगे भी हरसंभव मदद करेगी और योजना को और मजबूत बनाया जाएगा।

अब एथेनॉल से चलेगा चूल्हा, LPG सिलेंडर के महंगे दामों से मिलेगी आज़ादी

नई दिल्‍ली भारत में रसोई गैस (LPG) की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई में आने वाली बाधाएं अक्सर होटल, रेस्टोरेंट और बड़े संस्थानों के लिए सिरदर्द बनी रहती हैं. लेकिन अब इस संकट का एक स्वदेशी और टिकाऊ समाधान निकालने की दिशा में प्रयास तेज हो गए हैं. मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार अब कमर्शियल कुकिंग के लिए एथेनॉल (Ethanol) का इस्तेमाल करने पर गंभीरता से विचार कर रही है।  यदि यह योजना जमीन पर उतरती है तो आने वाले समय में कमर्शियल किचन से एलपीजी सिलेंडरों की निर्भरता काफी हद तक कम हो सकती है. लगभग 1,000 करोड़ लीटर अतिरिक्त एथेनॉल क्षमता को कुकिंग के लिए यूज में लाने की योजना है. आने वाले हफ्तों में इस पर एक विस्तृत व्हाइट पेपर अंतर-मंत्रालयी पैनल के सामने पेश किया जा सकता है।  एलपीजी से सस्‍ता है एथेनॉल एथेनॉल, खासकर हाइड्रस एथेनॉल कमर्शियल एलपीजी के मुकाबले सस्ता पड़ सकता है. इसमें लगभग 95% एथेनॉल और थोड़ा पानी होता है. इस वजह से इसे अतिरिक्त डीहाइड्रेशन प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ता और इसकी लागत कम रहती है. कमर्शियल एलपीजी की कीमत लगभग ₹103 प्रति किलोग्राम है, जबकि हाइड्रस एथेनॉल करीब ₹70 प्रति किलोग्राम पड़ता है. हालांकि, एथेनॉल की कैलोरिफिक वैल्यू यानी ऊर्जा क्षमता एलपीजी से कम होती है. इसका मतलब है कि एथेनॉल की ज्यादा मात्रा की जरूरत पड़ती है।  किससे बनता है एथेनॉल? भारत में एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और टूटे हुए चावल से बनता है. इसका इस्‍तेमाल एक बायोफ्यूल के रूप में किया जाता है. भारत में अब एथेनॉल युक्‍त पेट्रोल की बिक्री होती है. कुकिंग के लिए इस्तेमाल होने वाला एथेनॉल मिश्रण ईंधन वाले एथेनॉल से अलग होता है और सस्ता भी है।  क्‍या है सरकार की योजना? एक सूत्र ने बताया कि सरकार की योजना शुरुआत में व्‍यावसायिक संस्‍थानों जैसे होटल, एयरपोर्ट और रेस्टोरेंट में एथेनॉल का इस्‍तेमाल खाना बनाने में करने की है. अमेरिका ईरान-युद्ध की वजह से एलपीजी आयात बाधित हुआ है और इस वजह से घरेलू बाजार में एलपीजी की उपलब्धता कम हुई है. ऑयल मार्केटिंग कंपनियां घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दे रही हैं, जिससे होटल और रेस्टोरेंट जैसे कमर्शियल संस्थानों को कम एलपीजी की आपूर्ति हो रही है।  कमर्शियल कुकिंग के लिए एथेनॉल (Ethanol) के इस्तेमाल के प्रस्ताव को एक अंतर-मंत्रालयी पैनल के सामने रखा जाएगा. इस पैनल में पेट्रोलियम, सड़क परिवहन, भारी उद्योग और खाद्य मंत्रालय के अधिकारी शा‍मिल हैं. यही पैनल एथेनॉल से जुड़े नीतिगत फैसले लेता है. सूत्रों के अनुसार, उद्योग के प्रतिनिधियों ने ट्रायल शुरू करने और सरकार के साथ मिलकर सुरक्षा व तकनीकी मानक विकसित करने की इच्‍छा जताई है. इसके लिए एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। 

पर्यटन को बढ़ावा: डॉ. मोहन यादव लॉन्च करेंगे हेली सेवा, ओरछा-चंदेरी सफर होगा आसान

भोपाल अब हवाई मार्ग से जुड़ेगा ओरछा और चंदेरी से भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश में पर्यटन और धार्मिक यात्राओं को सुगम, सुरक्षित और आनंददायक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए रविवार, 19 अप्रैल को सुबह 10:45 बजे, राजधानी के स्टेट हैंगर से "पीएमश्री हेली पर्यटन सेवा" के अंतर्गत नए सेक्टर (भोपाल-चंदेरी-ओरछा) का विधिवत शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इस अवसर पर हेलीकॉप्टर को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे और यात्रियों को बोर्डिंग पास भी प्रदान करेंगे। धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा यह नया सेक्टर भोपाल को भगवान श्रीराम की राजनगरी ओरछा और ऐतिहासिक विरासत के लिए प्रसिद्ध चंदेरी से जोड़ेगी। इससे श्रद्धालु श्रीरामराजा मंदिर में सुगमता से दर्शन के लिये पहुँच सकेंगे और चंदेरी की सांस्कृतिक विरासत व प्रसिद्ध हस्तशिल्प (चंदेरी साड़ी) का अनुभव ले सकेंगे। एंड टू एंड सेवा का सप्ताह में 5 दिन होगा संचालन सेक्टर-2 अंतर्गत यह सेवा सप्ताह में 5 दिन (बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार और रविवार) संचालित होगी। यात्रियों के लिए भोपाल से चंदेरी का किराया ₹5,500 और भोपाल से ओरछा का किराया ₹6,500 निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, ₹14,500 के विशेष पैकेज में टैक्सी, वीआईपी दर्शन और प्रसाद जैसी 'एंड-टू-एंड' सुविधाएं भी शामिल हैं। चंदेरी और ओरछा में पर्यटकों के लिए ₹3,500 में 'जॉय राइड' की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। सुविधा और सुरक्षा सर्वोपरि पीपीपी मॉडल पर संचालित इस सेवा में पर्यटकों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया है। यात्रा के लिए 6 सीटों वाले आधुनिक हेलीकॉप्टर का उपयोग किया जा रहा है। गंतव्य पर होटल, भोजन और स्थानीय भ्रमण के लिए गाइड की व्यवस्था भी पूर्व निर्धारित रहेगी। बुकिंग के लिए पर्यटक www.flyola.in और IRCTC पोर्टल पर बुकिंग कर सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा मध्यप्रदेश स्थापना दिवस 1 नवंबर 2025 के अवसर पर पीएमश्री हेली पर्यटन सेवा का शुभारंभ किया गया था। यह सेवा वर्तमान में आध्यात्मिक सेक्टर इंदौर, उज्जैन और ओंकारेश्वर के साथ वाइल्डलाइफ सेक्टर जबलपुर, कान्हा, बांधवगढ़, चित्रकूट और मैहर के बीच सफलतापूर्वक संचालित है। इस सेवा का अब तक 2 हजार 648 पर्यटकों और श्रद्धालुओं ने लाभ लिया है।  

अमेरिका का बड़ा यूटर्न: भारत को मिलेगा रूस से सस्ता तेल, ट्रंप प्रशासन का नया निर्णय

नई दिल्ली  रूसी तेल पर भारत को सुबह-सुबह खुशखबरी मिली है. पश्चिम एशिया संघर्ष और ईंधन संकट के बीच अमेरिका ने बड़ा यूटर्न लिया है. अमेरिका ने रूसी तेल पर वह ऐलान किया है, जिसका भारत को बंपर फायदा मिलेगा. अमेरिका ने अब उस तेल वाले छूट को रिन्यू करने का फैसला किया है, जिससे भारत को रूसी तेल खरीदने की अनुमति मिलती है. जी हां, अमेरिका ने घोषणा की है कि वह उन देशों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने वाली प्रतिबंधों में छूट को आगे बढ़ाएगा, जिसका मकसद ईरान युद्ध के कारण आपूर्ति में आई कमी को दूर करना था. बता दें कि बीते दिनों ही अमेरिका के वित्त मंत्री ने कहा था कि अमेरिका अब रूसी तेल वाली छूट को आगे नहीं बढ़ाएगा।  रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री की अनुमति देने वाली प्रतिबंधों से छूट को बढ़ा दिया है. यह छूट एक महीने के लिए बढ़ाई गई है. यह फैसला इसलिए लिया गया ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के कारण बने दबाव को कम किया जा सके. पहले अमेरिका ने रूसी तेल पर मिली छूट को बढ़ाने से इनकार कर दिया था. अमेरिका का यह फैसला केवल उन रूसी तेल को लेकर है, जो समंदर में जहाज पर मौजूद हैं।  अमेरिकी वित्त विभाग का नया फैसला अमेरिकी वित्त विभाग ने शुक्रवार देर रात एक नया लाइसेंस वाला आदेश जारी किया. इसमें देशों को 17 अप्रैल से 16 मई के बीच जहाजों पर लदे रूसी तेल को खरीदने की अनुमति दी गई है. यह कदम पहले जारी 30 दिन की छूट की जगह लेता है, जो 11 अप्रैल को समाप्त हो गई थी. अमेरिका के इस फैसले से भारत को अब फायदा ही फायदा है।  अमेरिका के लिए यह यूटर्न क्यों अमेरिका का फैसला उस फैसले से उलट है, जो इसी हफ्ते की शुरुआत में वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने लिया था. अमेरिकी वित्त मंत्री बेसेंट ने बीते दिनों कहा था कि अमेरिका रूसी तेल वाली इस राहत को आगे बढ़ाएगा. ट्रंप प्रशासन का रूसी तेल वाला यह छूट अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण प्रभावित ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने के प्रयासों का हिस्सा है. हालांकि, अमेरिका का यह फैसला केवल रूसी तेल को लेकर है. ईरान, क्यूबा और उत्तर कोरिया के तेल इस लाइसेंस वाले आदेश से बाहर हैं।  रूसी तेल पर अभी और छूट मिलेगी? ब्रेट एरिक्सन ने कहा, ‘ईरान-अमेरिका संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को स्थायी नुकसान पहुंचाया है और उन्हें स्थिर करने के लिए उपलब्ध उपाय लगभग खत्म हो चुके हैं.’ उन्होंने यह भी जोड़ा कि आगे और छूट दी जा सकती है. वहीं, बेसेंट ने बताया कि इससे पहले मार्च में जारी एक अलग छूट के तहत लगभग 14 करोड़ बैरल ईरानी तेल वैश्विक बाजारों तक पहुंचा था, जिससे संघर्ष के दौरान आपूर्ति पर बने दबाव को कम करने में मदद मिली थी।  भारत को कितना फायदा? यहां ध्यान देने वाली बात है कि भारत भी प्रतिबंधों में छूट का एक बड़ा लाभार्थी है. यूं कहिए तो बड़ा लाभार्थी. अमेरिकी छूट मिलने के बाद भारत ने बड़ी मात्रा में रूसी तेल खरीदे थे. ट्रंप प्रशासन के इस छूट वाले फैसले की अमेरिकी नेताओं ने आलोचना की थी कि इससे मास्को और तेहरान पर वित्तीय दबाव कम हो रहा है. सरकारी अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत ने रूसी तेल पर अमेरिकी छूट लागू होने के बाद रूस से करीब 3 करोड़ बैरल तेल का ऑर्डर दिया था. अब नए फैसले का मतलब है कि भारत अभी आगे भी रूस से सस्ता तेल खरीदता रहेगा। 

नारी शक्ति पर नरेंद्र मोदी का भरोसा: ‘आरक्षण का संकल्प अटूट, हर रुकावट होगी पार’

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण विधेयक के मुद्दे पर विपक्ष की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें ‘नारी शक्ति का अपराधी’ करार दिया है। पीएम ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने इस ऐतिहासिक सुधार को रोकने के लिए शुरू से ही षड्यंत्र रचे हैं। उन्होंने अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेताओं पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इन दलों ने महिलाओं के पक्ष में खड़े होने का एक बड़ा अवसर खो दिया है। प्रधानमंत्री के अनुसार, विपक्ष को डर है कि यदि महिलाएं सशक्त हो गईं, तो उनकी परिवारवादी राजनीति खतरे में पड़ जाएगी। इसीलिए उन्होंने इस विधेयक का समर्थन न करके देश की 50% आबादी के सपनों को रौंदने का काम किया है। परिसीमन का झूठ, अंग्रेजों वाली राजनीति संसद में चर्चा के दौरान PM Modi ने परिसीमन के मुद्दे पर फैलाई जा रही भ्रांतियों का भी जवाब दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ वाली नीति अपनाते हुए परिसीमन के नाम पर देश में दरार पैदा करने का प्रयास किया है। पीएम ने स्पष्ट किया कि आरक्षण लागू होने से सभी राज्यों की पहुंच और शक्ति समान स्तर पर बढ़ेगी, लेकिन विपक्ष ने अपनी स्वार्थी राजनीति के चलते इसमें अड़ंगा डाला। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास सुधरने का एक मौका था, जिसे उन्होंने अपनी नकारात्मक सोच के कारण गँवा दिया है, जिसका परिणाम अब जनता के सामने है। विकास विरोधी चेहरा कांग्रेस का पुराना इतिहास कांग्रेस को ‘एंटी-रिफॉर्म’ पार्टी बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इतिहास साक्षी है कि इस दल ने हमेशा देश के विकास में रुकावटें डाली हैं। चाहे वह सीएए (CAA) कानून हो या सीमा विवादों का समाधान, कांग्रेस हमेशा विरोध की तख्ती लेकर विकास को लटकाती आई है। मोदी ने कहा कि कांग्रेस की इसी नकारात्मकता के कारण भारत आज उस ऊंचाई पर नहीं है जहां उसे होना चाहिए था। उन्होंने चेतावनी दी कि अब देश की बेटियां विपक्ष के इस अड़ियल रवैये का जवाब देंगी और उनकी हर साजिश को बेनकाब करेंगी। अचूक संकल्प: बिल पास करवाकर रहेगी सरकार: PM Modi भले ही वर्तमान में विधेयक को आवश्यक बहुमत न मिल पाया हो, लेकिन PM Modi ने अपना संकल्प दोहराते हुए कहा कि भाजपा और एनडीए का आत्मबल अजय है। उन्होंने कहा, “भले ही हमें संसद में 66% वोट न मिले हों, लेकिन देश की नारी शक्ति का 100% आशीर्वाद हमारे पास है।” प्रधानमंत्री ने विपक्षी नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि वे विज्ञापन छपवाकर उन्हें क्रेडिट देने को तैयार हैं, बस वे बिल का समर्थन करें। उन्होंने वादा किया कि हर रुकावट को खत्म करके यह बिल पास करवाया जाएगा और नारी शक्ति को उनका हक दिलाकर ही दम लिया जाएगा।