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बिहार में छापा, महाराष्ट्र बैंक डकैती के आरोपी को गिरफ्तार किया, दूसरा आरोपी भी पकड़ने का सुराग मिला

 सिंगरौली  सिंगरौली में स्थित महाराष्ट्र बैंक में दिनदहाड़े हुई सनसनीखेज डकैती के मामले में पुलिस ने घटना के 24 घंटे बाद ही एक आरोपी को बिहार से गिरफ्तार कर लिया है। जबकि, दूसरे आरोपी के झारखंड में छिपे होने की जानकारी मिली है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की अलग – अलग टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ में कई अहम सुराग हाथ लगे हैं। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने उसके कब्जे से 14 लाख रुपए कैश और 70 लाख रुपए का सोना बरामद कर लिया है। पूछताछ के आधार पर अन्य आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है। बिहार से धराया एक बदमाश आपको बता दें कि, डकैती की इस सनसनीखेज वारदात में कुल पांच बदमाश शामिल थे। इनमें से अब तक एक ही आरोपी पुलिस के हत्थे चढ़ सका है। बाकी चार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। 10 विशेष टीमें तलाश में जुटीं घटना की गंभीरता को देखते हुए डजीपी कैलाश मकवाना और पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में करीब 10 विशेष टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें अलग-अलग राज्यों में जाकर आरोपियों की तलाश कर रही हैं। साथ ही, तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर भी आरोपियों के मूवमेंट को ट्रैक किया जा रहा है। 50-50 हजार का इनाम घोषित पुलिस ने फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए 50 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही बाकी आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वहीं, गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के दौरान वारदात की पूरी साजिश और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका सामने आने की उम्मीद है। कट्टे की नोक पर की थी बैंक में डकैती गौरतलब है कि, बीते शुक्रवार की दोपहर नकाबपोश बदमाशों ने कट्टे की नोक पर बैंक में घुसकर डकैती को अंजाम दिया था। वारदात के दौरान बदमाशों ने दहशत फैलाने के लिए फायरिंग भी की थी। घटना के बाद से ही क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है। वहीं व्यापारी और आमजन सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि, मामले का जल्द खुलासा कर सभी आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया जाएगा। पुलिस बोली- आमलोग मदद के लिए आगे आएं बदमाश पिट्ठू बैग और एक बड़े थैले में सारा माल भरकर ले गए। घटना के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तुरंत संज्ञान लेते हुए। डीजीपी कैलाश मकवाना और रीवा रेंज के आईजी गौरव राजपूत मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज जारी कर आरोपियों की तलाश तेज कर दी है। वहीं, आम लोगों से बदमाशों को तलाशने में मदद करने की अपील भी की गई है। इस तरह दिया गया वारदात को अंजाम आपको बता दें कि, शुक्रवार को सिंगरौली जिले के बैढन में स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र में पहले दो बदमाश घुसे। बदमाशों ने बंदूक लहराते हुए सबसे पहले बैंक कर्मचारियों और मौजूद ग्राहकों को बंधक बनाया। इतने में बदमाशों के तीन अन्य साथी भी हथियार लहराते हुए बैंक में पहुंच गए। बंदूक के दम पर पूरे बैंक को हाईजेक कर बैंक कर्मचारी से कैश और लाकर की चाबी ले ली। 15 करोड़ रुपए आंकी जा रही डकैती की कीमत आरोप है कि, बैंक कर्मियों के विरोध करने पर बदमाशों ने उनके साथ मारपीट भी की थी। इस दौरान बैंक में मौजूद लोगों में चीख-पुकार मच गई। डीजीपी ने बताया कि, दर्ज एफआईआर के अनुसार, आरोपी बैंक से करीब 6 किलो सोना और लगभग 20 लाख रुपए की डकैती करके फरार हुए हैं। बता जा रहा है कि, बैंक से लूटा गया पूरा सोना ग्राहकों का है, जिसे बैंक द्वारा गिरवी रखा गया था। सोने मौजूदा कीमत ही 15 करोड़ रुपए आंकी जा रही है। पुलिस बोली- आमलोग मदद के लिए आगे आएं बदमाश पिट्ठू बैग और एक बड़े थैले में सारा माल भरकर ले गए। घटना के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तुरंत संज्ञान लेते हुए। डीजीपी कैलाश मकवाना और रीवा रेंज के आईजी गौरव राजपूत मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज जारी कर आरोपियों की तलाश तेज कर दी है। वहीं, आम लोगों से बदमाशों को तलाशने में मदद करने की अपील भी की गई है।

ईरान के लिए ट्रंप का कड़ा संदेश: ‘डील करो, नहीं तो होगी बमबारी

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने दोहरे तेवर में नजर आए हैं. एक तरफ वे ईरान के साथ युद्ध खत्म होने पर व्हाइट हाउस में "पार्टी" करने की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ खुली चेतावनी दे रहे हैं कि अगर तय समय तक समझौता नहीं हुआ, तो फिर से बमबारी शुरू हो सकती है।  एयर फोर्स वन पर पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने साफ कहा कि वह ईरान के साथ चल रहे सीजफायर को आगे बढ़ाने के मूड में नहीं भी हो सकते. उन्होंने कहा, "शायद मैं इसे एक्सटेंड न करूं. अगर ऐसा हुआ तो ब्लॉकेड जारी रहेगा और हमें फिर से बम गिराने पड़ सकते हैं।  राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया है कि 21 अप्रैल की डेडलाइन बेहद अहम है. अगर इस तारीख तक अमेरिका और ईरान के बीच कोई ठोस समझौता नहीं होता, तो सीजफायर खत्म हो सकता है. इसका मतलब साफ है कि मिडिल ईस्ट एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की तरफ बढ़ सकता है. हालांकि ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि डील हो जाएगी. उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि यह होने वाला है" लेकिन ईरान का कहना है कि उनकी बातों पर भरोसे कम है।  होर्मुज के आसपास ब्लॉकेड रहेगा जारी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया कि चाहे सीजफायर बढ़े या नहीं, अमेरिका का ईरान पर लगाया गया नौसैनिक ब्लॉकेड जारी रहेगा. यह ब्लॉकेड ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है, क्योंकि इससे उसके तेल निर्यात पर सीधा असर पड़ता है. यानी भले ही बातचीत जारी हो, लेकिन दबाव की राजनीति भी साथ-साथ चलती रहेगी।  अमेरिका-ईरान में बातचीत की कोशिशें जारी इस बीच खबर है कि अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि जल्द ही पाकिस्तान में एक नई बातचीत के दौर के लिए मिल सकते हैं. हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि दोनों पक्ष किसी समझौते तक पहुंचने की कोशिश में हैं. ईरानी सूत्रों की तरफ से खबरें चल रही हैं कि सोमवार को ये बातचीत इस्लामाबाद में होगी और रविवार शाम तक दोनों देशों के नेता पाकिस्तान पहुंचेंगे. पिछले दौर की बातचीत बिना नतीजे के खत्म हुई थी, ऐसे में इस बार का राउंड और भी अहम माना जा रहा है।  ट्रंप का "डबल गेम" ट्रंप की रणनीति को समझना मुश्किल नहीं है. एक तरफ वह बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ सैन्य दबाव बनाए रखते हैं.  फिलहाल हालात बेहद नाजुक हैं. 21 अप्रैल की डेडलाइन करीब है और पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता हो पाता है या नहीं। 

मध्यप्रदेश को साधना सप्ताह में अध‍िकतम पाठयक्रम पूरा करने पर मिला राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान

साधना सप्ताह में मप्र को अध‍िकतम पाठयक्रम पूरा करने राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान राज्य में जनजातीय कार्य व‍िभाग प्रथम स्थान पर नये व‍िषयों, एआई आधार‍ित पाठयक्रमों में लोकसेवकों ने द‍िखाई व‍िशेष रूच‍ि भोपाल  भारत सरकार द्वारा म‍िशन कर्मयोगी के अंतर्गत लोक सेवकों के ल‍िए संचाल‍ित ऑनलाइन प्रश‍िक्षण एवं क्षमता न‍िर्माण के ल‍िये चलाये गये साधना सप्ताह में मध्यप्रदेश को आईगाट पोर्टल पर अध‍िकतम पाठयक्रम पूरा करने के ल‍िए राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान म‍िला है। साधना सप्ताह गत दो अप्रैल से 10 अप्रैल तक चलाया गया था। राष्ट्रव्यापी साधना सप्ताह में व‍िभ‍िन्न पाठयक्रमों में पंजीयन करने वाले लोक सेवकों की संख्या 9 लाख 49 हजार 215 रही। एक घण्टे के कोर्स पूरा करने वाले प्रदेश के लोक सेवकों की संख्या 3 लाख 12 हजार 662 रही। चार घंटे के कोर्स पूरा करने वाले लोक सेवकों की संख्या 2 लाख 25 हजार 700 और कम से कम एक एआई कोर्स पूरा करने वाले लोक सेवकों की संख्या 1 लाख 85 हजार 562 रही। साधना सप्ताह के दौरान कर्मयोगी उत्कर्ष बैच 855 को म‍िला जबक‍ि 92,432 को एआई दक्ष बैच म‍िला। केन्द्रीय कार्म‍िक मंत्री डॉ. ज‍ितेन्द्र सिंह ने नई द‍िल्ली में गत द‍िवस गर‍िमापूर्ण समारोह में मप्र को सम्मान‍ित क‍िया। आसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी के महान‍िदेशक सच‍िन स‍िन्हा ने पुरस्कार ग्रहण क‍िया। उन्होने व‍िभागों के लोक सेवकों को न‍िरंतर मार्गदर्शन द‍िया और व‍िभागों में न‍िरंतर समन्वय बनाये रखा। अकादमी के संचालक मुजीबुर्रहमान खान ने बताया क‍ि अकादम‍िक स्टाफ और व‍िभागों के सहयोग से प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान म‍िला है। आसीवीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी को व‍िभागों के ल‍िए एआई आधार‍ित क्षमता न‍िर्माण कार्ययोजनाएं बनाने में उल्लेखनीय योगदान के ल‍िये पुरस्कृत क‍िया गया। राज्य स्तर पर जनजातीय कार्य व‍िभाग द्वारा 10 हजार से ज्यादा लोकसेवकों की श्रेणी में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर व‍िजय शाह ने व‍िभाग के सभी अध‍िकार‍ियों-कर्मचार‍ियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होने कहा क‍ि प्रश‍िक्षण एक न‍िरंतर प्रक्र‍िया है। लोकह‍ित के कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा करने के ल‍िए कार्यदक्षता अन‍िवार्य है। साधना सप्ताह में क्या हुआ साधना सप्‍ताह का उद्देश्य शासकीय सेवकों में प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के माध्‍यम से शासकीय तंत्र में सुदृढ़ता सुनिश्चित करना था। प्रशिक्षण की विभिन्‍न प्रणालियों को अपनाने और iGoT कर्मयोगी पर उपलब्‍ध पाठ्यक्रमों को पूरा करने के लिए लोक सेवकों को प्रेरित क‍िया गया। साधना सप्ताह का ढांचा तीन प्रमुख सूत्रों पर केंद्रित था — टेक्नोलॉजी, परंपरा और ठोस परिणाम। “साधना सप्ताह’’ के दौरान प्रत्‍येक अधिकारी/कर्मचारी को न्‍यूनतम 05 प्रशिक्षण पूर्ण करने का लक्ष्‍य दिया गया था। प्रत्येक विभाग में 4 से 5 व्यक्तियों का समूह बनाया गया, जिसमें विभागाध्यक्ष, स्थापना एवं तकनीकि शाखाओं से जुड़े अधिकारी थे। संभाग, जिला, विकास खंड एवं प्रत्येक कार्यालय प्रमुख के स्तर पर समूह बनाए गये। साधना सप्‍ताह अतंर्गत विभागों के शासकीय सेवकों/संविदा अधिकारियों/कर्मचारियों को उनके पदों के अनुसार कम से कम 10 प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आंवटित किए गए। कम से कम तीन एआई कोर्स पूर्ण करने पर “AI दक्ष बैज” दिया जा रहा है। डिजिटल प्रशिक्षण में आगे मध्यप्रदेश सर्वाधिक डिजिटल प्रशिक्षण iGOT पोर्टल पर कोर्स निर्मित करने वाला पहला राज्य बन गया है और सबसे अधिक लोकसेवकों को iGOT पोर्टल पर पंजीकृत करने वाला तीसरा राज्य है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर केन्द्र सरकार द्वारा लोकसेवकों की कार्यक्षमता बढ़ाने और उनको नागरिक केन्द्र‍ित होकर कर्मयोगी के रूप में दक्षतापूर्वक अपनी भूमिका निभाने मिशन कर्मयोगी वर्ष 2020 में लागू किया गया था। यह ऑनलाइन प्रशिक्षण प्राप्त करने का ऐसा प्लेटफार्म है जिसके माध्यम से सरकारी अधिकारी-कर्मचारी कहीं भी – कभी भी – किसी भी स्थान से अपनी सुविधानुसार स्व-प्रशिक्ष‍ित हो सकते हैं। वे अपनी दक्षता और ज्ञान बढ़ाने अपने विभाग से संबंधित विषयों पर उपलब्ध पाठयक्रमों में प्रशिक्ष‍ित हो सकते हैं। इसके अलावा अपनी रूचि अनुसार अन्य विभागों के लिए बने पाठयक्रमों में भी प्रशिक्ष‍ित हो सकते हैं। एआई आधार‍ित क्षमता निर्माण कार्ययोजना में अग्रणी क्षमता निर्माण आयोग से मिले इनपुट को शामिल कर बनी क्षमता निर्माण नीति लागू करने में भी मध्यप्रदेश अग्रणी है। सभी विभागों में क्षमता निर्माण इकाइयाँ स्थापित हो गई हैं और प्रशिक्षण की आवश्यकता का विश्लेषण करने के बाद कैडर-वार क्षमता निर्माण कार्य योजनाएँ तैयार की जा रही हैं। विभागों में क्षमता निर्माण प्रबंधकों की सेवाएँ लेने का भी प्रावधान है। उन्हें क्षमता निर्माण इकाइयों द्वारा सहयोग दिया जायेगा। क्षमता निर्माण प्रबंधकों द्वारा वार्षिक क्षमता निर्माण योजनाएं तैयार की जाएंगी। विभिन्न विभागों में कार्यरत मानव संसाधन की दक्षता दर्शाने वाला एक डैशबोर्ड तैयार किया गया है, जिससे माध्यम से मुख्यमंत्री कुशल कर्मचारियों की उपलब्धता की स्थिति जान सकेंगे।  

बड़ी खबर: होर्मुज में भारतीय टैंकर पर फायरिंग, समुद्री इलाके में बढ़ा तनाव

नई दिल्ली भारतीय नौसेना इस घटना की डिटेल्स का पता लगाने की कोशिश कर रही है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फिलहाल कोई भारतीय नौसेना का जहाज मौजूद नहीं है। भारत के पास गल्फ ऑफ ओमान में 2 डिस्ट्रॉयर, एक फ्रिगेट और एक टैंकर तैनात हैं। ओमान के उत्तर में भारतीय क्रूड ऑयल टैंकर पर ईरानी नौसेना ने गोलीबारी की है, जिसमें लगभग 20 लाख बैरल इराकी तेल लदा था। यह जानकारी उन लोगों ने दी जो इस मामले से वाकिफ हैं। इस घटना से ठीक पहले दो भारतीय जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से वापस लौटने के लिए मजबूर किया गया था। इस घटना में दो जहाज (जग अर्णव और सनमार हेराल्ड) शामिल थे। इनमें से केवल एक पर सीधा हमला हुआ। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, जग अर्णव पर फायरिंग की गई, जिससे क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं। वहीं, आसपास मौजूद सनमार हेराल्ड को निशाना नहीं बनाया गया और वह सुरक्षित रहा। अब तक की रिपोर्ट में क्या पता चला भारतीय नौसेना इस घटना की डिटेल्स का पता लगाने की कोशिश कर रही है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फिलहाल कोई भारतीय नौसेना का जहाज मौजूद नहीं है। भारत के पास गल्फ ऑफ ओमान में 2 डिस्ट्रॉयर, एक फ्रिगेट और एक टैंकर तैनात हैं। अधिकारियों ने बताया कि भारत इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की ओर से की गई इस फायरिंग को गंभीरता से ले रहा है। भारत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में खुली और स्वतंत्र नौवहन की नीति का समर्थन करता है। उन्होंने यह भी कहा कि फायरिंग वाले टैंकर के बगल में एक और भारतीय क्रूड ऑयल टैंकर मौजूद था, लेकिन उस पर कोई हमला नहीं हुआ। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरान और ओमान के बीच स्थित है। यह दुनिया के सबसे अहम तेल पारगमन गलियारों में से एक है। यहां से वैश्विक क्रूड शिपमेंट्स का करीब 20% गुजरता है। भारत उन देशों में शामिल है जिनके सबसे ज्यादा जहाज इस स्ट्रेट से गुजरते हैं, जो खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा आयात पर भारत की निर्भरता को दर्शाता है। ईरान ने अमेरिका के साथ चल रही जंग के बीच भारत को मित्र राष्ट्र की सूची में रखा है। इसलिए ईरान भारतीय जहाजों को इस स्ट्रेट से गुजरने की इजजात दे रहा है, जबकि अन्य देशों के जहाजों को ड्रोन-मिसाइल हमलों की धमकी देकर रोका जा रहा है।  

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए राहत, DA में 2% की वृद्धि को मिली कैबिनेट की मंजूरी

नई दिल्ली जिस पल का लंबे समय से सरकारी कर्मचारी इंतजार कर रहे थे, वो पल आज आ गया है. केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते (DA) में 2% बढ़ोतरी को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है. इससे पहले अक्टूबर में DA को 55% से बढ़ाकर 58% किया गया था, जो 1 जुलाई 2025 से लागू हुआ था. बाद में इसका एरियर भी दिया गया था, जिससे कर्मचारियों और पेंशनर्स दोनों को फायदा मिला था।  केंद्र सरकार समय-समय पर अपने कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) और पेंशनर्स की महंगाई राहत (DR) बढ़ाती रहती है. आपको बता दें कि सरकार कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) साल में दो बार बढ़ाती है. अब कितनी मिलेगी सैलरी? मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 50,000 रुपये है. अभी 58% डीए के हिसाब से उसे हर महीने 29,000 रुपये डीए मिल रहा है. अगर इसमें 2% की बढ़ोतरी होती है, तो डीए 60% हो जाएगा और उसे 30,000 रुपये मिलने लगेंगे. यानी हर महीने 1,000 रुपये की बढ़ोतरी होगी, साथ ही जनवरी से एरियर का भी फायदा मिलेगा।  यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कर्मचारी संगठनों की ओर से प्रस्तावित 8वें वेतन आयोग में वेतन स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव की मांग की गई. नेशनल काउंसिल–जॉइंट कंसल्टेटिव मैकेनिज्म (NC-JCM) ने अपने प्रस्ताव में 3.83 का फिटमेंट फैक्टर मांगा है, जिससे न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये से बढ़कर करीब 69,000 रुपये तक हो सकती है. सरकार के इस फैसले से करीब 1.19 करोड़ कर्मचारियों और पेंशनर्स को फायदा मिलेगा।  अब कितनी बढ़ेगी सैलरी? बता दें कि अगर किसी केंद्रीय कर्मचारी का बेसिप पे 36 हजार 500 रुपए है तो 60 फीसदी के हिसाब से अब उसका डीए   21 हजार 900 रुपए हो जाएगा. बड़ी बात यह है कि अब कर्मचारियों को जनवरी से एरियर भी मिलेगा. नया नियम 1 जनवरी 2026 से लागू माना जाएगा. इसका मतलब यह है कि कर्मचारियों को केवल अगले महीने की बढ़ी हुई सैलरी ही नहीं मिलेगी, बल्कि पिछले तीन महीनों यानी जनवरी फरवरी और मार्च का बकाया एरियर  भी एकमुश्त दिया जाएगा।  लंबे समय से इंतजार कर रहे थे कर्मचारी केंद्र सरकार के इस कदम से उन कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है जो पिछले कुछ समय से इस घोषणा का इंतजार कर रहे थे और बढ़ती महंगाई के बीच अपनी आय बढ़ाने की मांग कर रहे थे. यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब कर्मचारी संगठन 8वें वेतन आयोग के तहत वेतन संरचना में बड़े बदलावों की मांग कर रहे हैं।  क्यों बढ़ाया जाता है महंगाई भत्ता? बढ़ती महंगाई के कारण सरकारी कर्मचारियों के खर्चों की भरपाई के लिए सरकार साल में दो बार जनवरी और जुलाई में महंगाई भत्ता बढ़ाती है. इसकी गणना श्रम मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों (CPI-IW) के आधार पर की जाती है, जो यह बताते हैं कि जरूरी चीजों के दाम कितने बढ़े हैं. आसान शब्दों में जैसे-जैसे बाजार में कीमतें बढ़ती हैं, आपकी सैलरी की वैल्यू बनाए रखने के लिए सरकार इस भत्ते में बढ़ोतरी करती है।  साल में दो बार बढ़ता है डीए सरकार आमतौर पर साल में दो बार जनवरी और जुलाई के लिए DA (महंगाई भत्ता) बढ़ाती है, और इसकी घोषणा अक्सर त्योहारों के समय जैसे होली या दिवाली के आसपास की जाती है. पिछले साल मार्च के अंत में DA बढ़ोतरी की घोषणा हुई थी, जबकि जुलाई की बढ़ोतरी का ऐलान अक्टूबर में किया गया था।  इस साल कर्मचारियों को उम्मीद थी कि होली यानी मार्च की शुरुआत तक DA बढ़ जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इसी वजह से यह मामला पिछले 10 सालों में सबसे ज्यादा देरी वाला भी माना जा रहा था, क्योंकि आमतौर पर सरकार मार्च के अंत तक DA बढ़ोतरी की घोषणा कर देती है. हालांकि, एक्सपर्ट के अनुसार, यह देरी मुख्य रूप से प्रशासनिक प्रक्रियाओं और मंजूरी के अलग-अलग चरणों की वजह से हो रही थी।  सॉवरेन मेरिटाइम फंड को भी मंजूरी कैबिनेट ने प्रस्ताव में ‘परिवार’ की परिभाषा को बढ़ाकर आश्रित माता-पिता को भी शामिल करने की बात कही गई है. साथ ही वेतन में ज्यादा अंतर पर लीमिट तय करने, ज्यादा इंक्रीमेंट देने और महंगाई से जुड़े भत्तों को बढ़ाने का सुझाव दिया गया है. कैबिनेट ने 13,000 करोड़ रुपये के फंड के साथ एक सॉवरेन मेरिटाइम फंड (Sovereign Maritime Fund) को भी मंजूरी दी है. इसका मकसद भारतीय जहाजों के लिए सस्ता और स्थिर बीमा कवर उपलब्ध कराना है. इसके अलावा, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना को 2028 तक बढ़ा दिया गया है और इसके लिए 3,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट भी मंजूर किया गया है।  58% से बढ़कर 60% हो जाएगा DA केंद्रीय कर्मचारियों को फिलहाल DA के तौर पर मूल वेतन के 58% की दर से राशि मिलती है. अब 2% बढ़ोतरी को मंजूरी दिए जाने के बाद अब ये 60% हो जाएगा. कर्मचारियों को उनकी बेसिक सैलरी का 60% DA मिलेगा, जबकि पेंशनर्स को उनके मूल पेंशन का 60% DR मिलेगा।  महंगाई भत्ते या महंगाई राहत का सीधा संबंध महंगाई से होता है. सरकार, साल में दो बार, जनवरी और जुलाई में इसमें बदलाव किया जाता है, यानी बढ़ाया जाता है. इसका कैलकुलेशन AICPI-IW यानी औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर की जाती है, जिसे श्रम ब्यूरो (श्रम मंत्रालय) हर महीने जारी करता है. AICPI-IW के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 से DA में 2% की बढ़ोतरी तय मानी जा रही थी. हालांकि कुछ वर्ग को 3% बढ़ोतरी की भी उम्‍मीद थी। 

बड़ा फैसला: छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक बना कानून, गजट में प्रकाशित

रायपुर. छत्तीसगढ़ में जबरन और प्रलोभन से धर्मांतरण पर रोक लगाने 19 मार्च को विधानसभा में पारित छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक ने कानून का रूप ले लिया है. विधेयक पर 6 अप्रैल को राज्यपार रमेन डेका के हस्ताक्षर करने के बाद अब छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशित कर दिया गया है. बता दें कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में 19 मार्च को उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 को विस्तृत चर्चा और विचार-विमर्श के बाद पारित किया गया था. विधेयक का उद्देश्य राज्य में धर्मांतरण से संबंधित गतिविधियों को सुव्यवस्थित करना और नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा सुनिश्चित करना है. उपमुख्यमंत्री शर्मा ने विधेयक के संबंध में कहा था कि वर्ष 1968 से लागू प्रावधान वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप पर्याप्त नहीं रह गए थे. बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में धर्मांतरण से जुड़े विवादों के कारण सामाजिक तनाव और वर्ग संघर्ष की स्थितियां बनीं, जो कई बार प्रशासन और न्यायालय तक पहुंचीं. ऐसे परिदृश्य में एक स्पष्ट, पारदर्शी और प्रभावी कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की गई, जिससे समाज में बार-बार उत्पन्न होने वाले विवादों को रोका जा सके और समरसता को बनाए रखा जा सके. विधेयक में धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं. अब धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को प्राधिकृत अधिकारी के समक्ष आवेदन देना होगा, जिसके बाद निर्धारित समय-सीमा में सूचना सार्वजनिक की जाएगी और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी. जांच के उपरांत ही प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा. साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी व्यक्ति को अपनी इच्छा से धर्म चुनने की पूर्ण स्वतंत्रता रहे, लेकिन यह परिवर्तन किसी दबाव, प्रलोभन या भय के कारण न हो, इसकी जांच अनिवार्य होगी. इस कानून में धर्मांतरण कराने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं के लिए पंजीयन अनिवार्य किया गया है. इसके लिए प्राधिकृत अधिकारी को हर वर्ष विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, जिसमें धर्मांतरण से संबंधित जानकारी का विवरण शामिल होगा. ग्राम सभा को भी इस प्रक्रिया में भागीदारी दी गई है, जिससे स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके. विवाह को धर्मांतरण का आधार नहीं माना गया है, और विवाह के बाद भी धर्म परिवर्तन के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होगा. अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए विधेयक में कड़े दंड के प्रावधान किए गए हैं. जिसमें अवैध धर्मांतरण रोकने के लिए सामान्य अवैध धर्मांतरण पर 7 से 10 वर्ष तक कारावास एवं न्यूनतम 5 लाख रुपए तक जुर्माना, विशेष वर्ग जिसमें महिला, अनुसूचित जाति, जनजाति, नाबालिग आदि शामिल है, के अवैध धर्मांतरण पर 10 से 20 वर्ष तक कारावास एवं न्यूनतम 10 लाख रुपए जुर्माना, सामूहिक अवैध धर्मांतरण पर 10 वर्ष से आजीवन कारावास एवं न्यूनतम 25 लाख रुपए जुर्माना का प्रावधान है. इसी तरह लोक सेवक द्वारा इस प्रकार का अपराध किया जाता है तो उसे 10 से 20 वर्ष कारावास एवं 10 लाख रुपए तक जुर्माना का प्रावधान किया गया है, वैसे ही धन के माध्यम से धर्मांतरण किए जाने संबंधित व्यक्ति को 10 से 20 वर्ष कारावास एवं 20 लाख रुपए तक जुर्माना का प्रावधान किया गया है. भय या प्रलोभन द्वारा धर्मांतरण पर 10 से 20 वर्ष कारावास एवं न्यूनतम 30 लाख रुपए जुर्माना का भी प्रावधान है. इन अपराधों की पुनरावृत्ति किए जाने पर संबंधित को आजीवन कारावास और पीड़ितों के लिए प्रतिकार व्यवस्था विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है. इस विधेयक में प्रतिकार व्यवस्था के तहत यदि किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन दबाव, प्रलोभन या धोखे से किया गया हो, तो उसे स्पष्ट रूप से पीड़ित माना जाएगा. ऐसे मामलों में न्यायालय आरोपी को पीड़ित को क्षतिपूर्ति देने का आदेश दे सकता है. इसका भी प्रावधान किया गया है. इस अधिनियम के तहत मामलों की जांच उप निरीक्षक या उससे वरिष्ठ अधिकारी द्वारा की जाएगी. ऐसे मामलों में प्रमाण का भार आरोपी पर होगा. मामलों की सुनवाई के लिए निर्धारित न्यायालयों को अधिसूचित किया जाएगा.

आज रात 8.30 बजे पीएम मोदी का संबोधन, ‘नारी शक्ति बिल’ पर हो सकती है अहम बात

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रात 8.30 बजे देश को संबोधित करेंगे। उनका ये संबोधन ऐसे समय हो रहा है, जब एक दिन पहले ही लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पास नहीं हो पाया है। लोकसभा में दो तिहाई बहुमत न हो पाने की वजह से एनडीए सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम लोकसभा में पास नहीं करवा पाई है। पिछले 12 सालों में ऐसा पहली बार हुआ है, जब मोदी सरकार का कोई बिल वोटिंग के बाद संसद में गिर गया है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री इस बिल को लेकर ही देश को संबोधित कर सकते हैं। विपक्ष ने जमकर किया था विरोध बता दें कि एक दिन पहले ही लोकसभा में विपक्ष के विरोध के बाद महिला आरक्षण को लेकर लाया गया बिल गिर गया था। तब विपक्षी पार्टियों ने मिलकर इस बिल का विरोध किया था। इस दौरान संसद में हंगामे की स्थिति भी देखने को मिली थी। विपक्ष ने आरोप लगाया था कि सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल के दौरान परिसीमन का खेल खेलना चाहती है। इससे दक्षिण भारत के राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा। पीएम मोदी ने की थी ये खास अपील प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर वोटिंग से पहले ट्वीट पर एक संदेश दिया था। उन्होंने कहा था कि जो भ्रम फैलाए गए, उनको दूर करने के लिए तर्कबद्ध जवाब दिया गया है। हर आशंका का समाधान किया गया है। जिन जानकारियों का अभाव था, वो जानकारियां भी हर सदस्य को दी गई हैं। किसी के मन में विरोध का जो कोई भी विषय था, उसका भी समाधान हुआ है। महिला आरक्षण के इस विषय पर देश में चार दशक तक बहुत राजनीति कर ली गई है। अब समय है कि देश की आधी आबादी को उसके अधिकार अवश्य मिलें। सरकार ने किया था ये अनुरोध. शुक्रवार को लोकसभा में 131वां संविधान संशोधन बिल पास नहीं हो सका। इसके चलते संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण मिलने का इंतज़ार अभी जारी है। इस बिल का उद्देश्य था कि साल 2029 से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किया जाए और लोकसभा की सीटों की संख्या भी बढ़ाई जाए। लेकिन इस प्रस्ताव को पर्याप्त समर्थन नहीं मिल पाया। वोटिंग के दौरान कुल 528 सदस्यों ने मतदान किया। इनमें से 298 सदस्यों ने बिल के पक्ष में वोट दिया, जबकि 230 सदस्यों ने इसका विरोध किया। संविधान संशोधन बिल पास करने के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है, जिसके लिए कम से कम 352 वोट चाहिए थे, जो इस बिल को नहीं मिल सके। बिल पास न होने के बाद सरकार ने ओम बिरला से यह भी अनुरोध किया कि वे दो अन्य प्रस्तावित कानूनों पर फिलहाल आगे कार्रवाई न करें। देश की करोड़ों महिलाओं की दृष्टि हम पर प्रधानमंत्री ने आगे कहा था कि आजादी के इतने दशकों बाद भी भारत की महिलाओं का निर्णय प्रक्रिया में इतना कम प्रतिनिधित्व रहे, ये ठीक नहीं। अब कुछ ही देर लोकसभा में मतदान होने वाला है। मैं सभी राजनीतिक दलों से आग्रह करता हूं, अपील करता हूं। कृपया करके सोच-विचार करके पूरी संवेदनशीलता से निर्णय लें, महिला आरक्षण के पक्ष में मतदान करें। मैं देश की नारी शक्ति की तरफ से भी सभी सदस्यों से प्रार्थना करूंगा। कुछ भी ऐसा ना करें, जिनसे नारीशक्ति की भावनाएं आहत हों। देश की करोड़ों महिलाओं की दृष्टि हम सभी पर है, हमारी नीयत पर है, हमारे निर्णय पर है। कृपया करके नारीशक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन का साथ दें।  

केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के मुआवजे पर छतरपुर में विरोध, प्रशासन के आश्वासन से खत्म हुआ आंदोलन

छतरपुर  केन-बेतवा लिंक परियोजना के कारण विस्थापित होने वाले 14 गांवों के ग्रामीणों का आंदोलन फिलहाल थम गया है। मुआवजे और पुनर्वास में अनियमितताओं के आरोपों के बीच छतरपुर जिला प्रशासन ने झुकते हुए दोबारा सर्वे कराने का फैसला लिया है। कलेक्टर पार्थ जायसवाल द्वारा गठित विशेष संयुक्त टीमों ने  ही जमीनी स्तर पर वेरिफिकेशन और विसंगतियों की जांच शुरू कर दी है। 7 दिन की डेडलाइन प्रशासन ने इस री-सर्वे को कैंपेन मोड में चलाने के निर्देश दिए हैं। संयुक्त टीमों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे अगले 7 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट और नए प्रस्ताव पेश करें। इस कदम का उद्देश्य उन पात्र लाभार्थियों को शामिल करना है जो पहले छूट गए थे और उन अपात्रों को बाहर करना है जिन्होंने गलत तरीके से लाभ लेने की कोशिश की है। हमारा लक्ष्य स्पष्ट है: किसी भी पात्र व्यक्ति का हक नहीं छिनना चाहिए और किसी भी अपात्र को सूची में जगह नहीं मिलनी चाहिए। पारदर्शिता ही हमारी प्राथमिकता है। पारदर्शिता के लिए दूसरे क्षेत्र के अधिकारियों की ड्यूटी मुआवजे की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कलेक्टर ने एक अनूठी पहल की है। री-सर्वे की जिम्मेदारी उन स्थानीय कर्मचारियों को नहीं दी गई है जिन पर पहले पक्षपात के आरोप लगे थे। इसके बजाय, बिजावर सब-डिवीजन और अन्य तहसीलों के एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और पटवारियों को मैदान में उतारा गया है। ये टीमें स्वतंत्र रूप से वोटर लिस्ट, बीपीएल कार्ड, बिजली बिल और स्कूल रिकॉर्ड के जरिए पात्रता की जांच करेंगी। प्रभावितों के लिए क्या है खास? कुल प्रभावित गांव 14 गांव सर्वे की समय सीमा 7 कार्य दिवस (रिपोर्ट सबमिशन) जांच का आधार वोटर लिस्ट, बीपीएल कार्ड, बिजली बिल, स्कूल रिकॉर्ड टीम का गठन एसडीएम, तहसीलदार और पटवारियों की संयुक्त टीम अतिरिक्त लाभ भूमिहीन परिवारों के लिए सरकारी कल्याणकारी योजनाएं

तुंगल बना इको-पर्यटन हब: वन मंत्री की पहल से बदली तस्वीर

सुकमा/रायपुर. सुकमा जिले में वन विभाग की एक सराहनीय पहल ने विकास और पुनर्वास की नई मिसाल पेश की है। वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में तैयार किया गया तुंगल इको-पर्यटन केंद्र आज आत्मनिर्भरता और सामाजिक बदलाव का प्रतीक बन गया है। सुकमा नगर से मात्र एक किलोमीटर दूर स्थित यह स्थान पहले उपेक्षित और जर्जर था, लेकिन वन विभाग के प्रयासों से इसे एक सुंदर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया। यहाँ बनाए गए आकर्षक टापू और प्राकृतिक वातावरण अब स्थानीय लोगों के साथ-साथ पड़ोसी राज्य ओडिशा से आने वाले पर्यटकों को भी आकर्षित कर रहे हैं। इस केंद्र की सबसे खास पहल है “तुंगल नेचर कैफे”, जिसे ‘आत्मसमर्पण पुनर्वास महिला स्वयं सहायता समूह’ की 10 महिलाएँ संचालित कर रही हैं। इनमें 5 महिलाएँ वे हैं जिन्होंने नक्सलवाद का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया है, जबकि 5 महिलाएँ नक्सल हिंसा से प्रभावित रही हैं। इन सभी को जगदलपुर और सुकमा के संस्थानों में विशेष प्रशिक्षण देकर रोजगार के लिए तैयार किया गया है। आज ये महिलाएँ आत्मविश्वास के साथ पर्यटकों का स्वागत कर रही हैं और सम्मानजनक जीवन जी रही हैं। जो महिलाएँ कभी संघर्ष और भय के माहौल में थीं, वे अब स्वावलंबन और आत्मसम्मान की मिसाल बन गई हैं। इस पर्यटन केंद्र की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 31 दिसंबर 2025 को शुरू होने के बाद केवल तीन महीनों में, 30 मार्च 2026 तक यहाँ 8 हजार 889 पर्यटक आए। इस दौरान केंद्र ने लगभग 2.92 लाख रूपए की आय भी अर्जित की। पर्यटक यहाँ स्वादिष्ट स्थानीय व्यंजनों का आनंद लेने के साथ-साथ तुंगल डैम में कयाकिंग, पैडल बोटिंग और बाँस राफ्टिंग जैसी रोमांचक गतिविधियों का भी अनुभव कर रहे हैं। यह पहल साबित करती है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर जीवन की दिशा बदली जा सकती है। तुंगल इको-पर्यटन केंद्र न केवल पर्यटन का केंद्र है, बल्कि यह उन महिलाओं के साहस, आत्मविश्वास और वन विभाग की दूरदर्शी सोच का प्रतीक है। यह कहानी हमें यह संदेश देती है कि प्रकृति संरक्षण के साथ-साथ मानव विकास को जोड़कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। बस्तर की बदलती तस्वीर में यह केंद्र एक उज्ज्वल उदाहरण बनकर उभरा है।

वर्ल्ड लिवर डे 2026: पंजाब ने ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत लिवर रोग की स्क्रीनिंग को किया और व्यापक

चंडीगढ़ 19 अप्रैल को दुनिया भर में ‘सॉलिड हैबिट्स, स्ट्रॉन्ग लिवर’ थीम के साथ मनाए जाने वाले वर्ल्ड लिवर डे के मौके पर, ‘द लैंसेट’ की एक चेतावनी में लिवर की बीमारियों में दुनिया भर में तेज़ी से बढ़ोतरी पर रोशनी डाली गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2050 तक ‘मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोइक लिवर डिज़ीज़’ (MASLD) के मामलों में तेज़ी से बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इस खतरनाक स्थिति के बीच, पंजाब इस चुनौती का डटकर सामना करने के लिए आगे बढ़ रहा है। राज्य ने बढ़ी हुई स्क्रीनिंग और कैशलेस ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के ज़रिए अपनी हेल्थ सेवाओं को मज़बूत किया है, जिससे मॉडर्न लाइफस्टाइल से जुड़ी इस तेज़ी से बढ़ती ‘साइलेंट एपिडेमिक’ के खिलाफ भारत की लड़ाई में यह लीडिंग रोल निभा रहा है। लिवर की बीमारियाँ दुनिया भर में एक ‘साइलेंट एपिडेमिक’ के तौर पर उभर रही हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि लगभग तीन में से एक एडल्ट इससे प्रभावित है। यह एक ऐसी बीमारी है जिसके लक्षण अक्सर तभी दिखते हैं जब गंभीर नुकसान पहले ही हो चुका होता है। ‘द लैंसेट’ की एक स्टडी में चेतावनी दी गई है कि 2023 में मरीज़ों की संख्या 1.3 बिलियन से बढ़कर 2050 तक 1.8 बिलियन हो सकती है, जो 42 परसेंट की बढ़ोतरी है। भारत में भी ऐसा ही ट्रेंड देखा जा रहा है, खासकर शहरी आबादी और हाई-रिस्क ग्रुप्स में। पंजाब के डॉक्टरों के मुताबिक, ‘हेपेटाइटिस-C’ इंफेक्शन, शराब पीने और खाने की बदलती आदतों की वजह से स्थिति और गंभीर होती जा रही है। डॉ. वीरेंद्र सिंह ने कहा, “भारत में शराब लिवर की गंभीर बीमारियों का एक बड़ा कारण है और वायरल हेपेटाइटिस के साथ मिलकर यह हालत और खराब कर देती है। फैटी लिवर की बीमारी अब शराब और हेपेटाइटिस-C के साथ एक बड़ा कारण बनकर उभर रही है। लंबे समय तक अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाना, फ्राइड खाना और ट्रांस-फैट खाने से यह समस्या और बढ़ रही है।” डॉक्टर यह भी चिंताजनक ट्रेंड देख रहे हैं कि कम उम्र के मरीज़ों में लिवर की बीमारियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। इसका मुख्य कारण शराब का बढ़ता सेवन और हेपेटाइटिस-C का फैलना है, जो राज्य में बदलती लाइफस्टाइल और व्यवहार के ट्रेंड को दिखाता है। हेल्थ सर्विसेज़ के बारे में उन्होंने कहा, “पंजाब ने अपने रेफरल सिस्टम को मज़बूत किया है, जिससे लिवर की बीमारियों का पहले पता चल रहा है। गांवों में स्क्रीनिंग और स्पेशलिस्ट सर्विसेज़ तक पहुंच भी बेहतर हुई है, हालांकि फैटी लिवर के ‘साइलेंट’ नेचर की वजह से देर से पता चलने की समस्या अभी भी है।” फाइनेंशियल और पहुंच से जुड़ी रुकावटों को दूर करने के लिए, राज्य ने चीफ मिनिस्टर हेल्थ स्कीम के तहत कवरेज बढ़ाया है, जो सरकारी और लिस्टेड प्राइवेट अस्पतालों में हर परिवार को हर साल 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज देती है। डॉ. सिंह बताते हैं कि एक बार मरीज़ के भर्ती होने के बाद, ज़्यादातर टेस्ट और दवाएं इस स्कीम के तहत कवर हो जाती हैं, जिससे मरीज़ का जेब से होने वाला खर्च कम हो जाता है। इस स्कीम में टेस्टिंग, हॉस्पिटल में भर्ती होना और स्पेशलिस्ट सर्विसेज़ शामिल हैं। उन्होंने कहा कि चीफ मिनिस्टर हेल्थ स्कीम ने कई मरीज़ों को बेहतर इलाज दिलाने में मदद की है और यह कई जानें बचाने में अहम साबित हुई है। पंजाब के हेल्थ मिनिस्टर डॉ. बलबीर सिंह ने यह भी कहा, “यह स्कीम जेब से होने वाले खर्च को कम करती है, साथ ही डायग्नोसिस और इलाज में देरी को भी रोकती है।” पब्लिक हेल्थ प्रोग्राम के तहत स्क्रीनिंग बढ़ाने से उम्मीद है कि जल्दी पता लगाने में सुधार होगा और बीमारी का बढ़ना धीमा हो जाएगा। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि लिवर की बीमारी के शुरुआती स्टेज को अक्सर लाइफस्टाइल में बदलाव जैसे अच्छी डाइट, रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी और शराब कम पीने से ठीक किया जा सकता है।