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खाद्य मंत्री राजपूत का बयान: सभी संभागों में गेहूँ उपार्जन की प्रक्रिया शुरू

सभी संभागों में गेहूँ का उपार्जन शुरू : खाद्य मंत्री राजपूत 42689 किसानों से 18 लाख 97 हजार 480 क्विंटल गेहूँ उपार्जित भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अभी तक 42 हज़ार 689 किसानों से 18 लाख 97 हजार 480 क्विंटल गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। किसानों को 28 करोड़ 40 लाख रुपए का भुगतान उनके बैंक खाते में किया जा चुका है। गेहूँ का उपार्जन सभी संभागों में शुरू हो चुका है। अभी तक 2 लाख 58 हजार 644 किसानों द्वारा 1 करोड़ 13 लाख 95 हजार 407 क्विंटल गेहूँ के विक्रय के लिये स्लॉट बुक किये जा चुके हैं। किसान गेहूँ बिक्रय के लिये 24 अप्रैल 2026 तक स्लॉट बुक कर सकते हैं। खरीदी के लिये 3171 उपार्जन केन्द्र बनाये गये हैं। गेहूँ की खरीदी कार्यालयीन दिवसों में होती है। उपार्जन केंद्र में किसानों के लिये गेहूँ बिक्री की सभी सुविधाएं मंत्री राजपूत ने बताया है कि जिन जिलों में गेहूँ उपार्जन की प्रक्रिया शुरू हो गई है, वहाँ गेहूँ विक्रय की सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। उपार्जन केन्द्रों में छायादार स्थान में बैठने और पेय जल की समुचित सुविधा उपलब्ध कराई गई है। केंद्र में बारदाने, तौल कांटे सिलाई मशीन, कंप्यूटर, इंटरनेट, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और उपज की साफ सफाई के लिए पंखा, छनना आदि की व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की गई हैं। मंत्री राजपूत ने बताया है कि रबी विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों से 2585 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा घोषित 40 रूपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रूपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। गेहूँ के उपार्जन के लिये आवश्यक बारदानों की व्यवस्था की जा चुकी है। उपार्जित गेहूँ को रखने के लिये जूट बारदानों के साथ ही पीपी/एचडीपी बैग एवं जूट के भर्ती बारदाने का उपयोग किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूँ के सुरक्षित भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। उपार्जित गेहूं में से 8 लाख 65 हजार 600 क्विंटल गेहूँ का परिवहन किया जा चुका है। प्रदेश में गेहूँ उपार्जन के लिये इस वर्ष रिकार्ड 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3 लाख 60 हजार अधिक है। विगत वर्ष समर्थन मूल्य पर लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन किया गया था। इस वर्ष युद्ध की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद किसानों के हित में सरकार द्वारा 78 लाख मीट्रिक टन गेहूँ के उपार्जन का लक्ष्य रखा गया है, जो कि पिछले वर्ष से एक लाख मीट्रिक टन अधिक है।  

मध्यप्रदेश में कर्मचारियों का DA 5% बढ़ा, अप्रैल की सैलरी से मिलेगा लाभ, एरियर का भुगतान 6 किस्तों में

भोपाल  मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी है। राज्य की मोहन सरकार ने  छठे वेतनमान के तहत आने वाले कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में वृद्धि की है। इस संबंध में वित्त विभाग, मप्र शासन ने 15 अप्रैल 2026 को आदेश भी जारी कर दिए हैं। एरियर का भुगतान किस्तों में किया जाएगा। वित्त विभाग के आदेशानुसार, छठे वेतनमान (6th Pay Commission) के अंतर्गत वेतन पा रहे कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते (DA) में 5 फीसदी की वृद्धि की गई है। इसके बाद महंगाई भत्ते की दर 252 फीसदी से बढ़कर 257 फीसदी हो गई है। बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता मई 2026 में मिलने वाले अप्रैल के वेतन के साथ जुड़कर आएगा। चुंकी यह वृद्धि 1 जुलाई 2025 से प्रभावी मानी जाएगी, ऐसे में जुलाई 2025 से मार्च 2026 (9 महीने) तक एरियर 6 किस्तों में दिया जाएगा। एरियर की किस्तें मई, जून, जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर 2026 में वेतन के साथ खाते में जमा की जाएंगी। जिन कर्मचारी या अधिकारी इस अवधि के दौरान रिटायर्ड हो चुके हैं या जिनकी मृत्यु हो चुकी है उनके नामांकित सदस्य को एरियर की राशि एकमुश्त दी जाएगी। इसके अलावा पांचवें वेतनमान का लाभ पाने वाले कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 8 फीसदी और चतुर्थ वेतनमान प्राप्त कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 30 फीसदी तक की बढ़ोतरी की गई है। नई दरें 1 जुलाई 2025 से प्रभावी होंगी। एरियर की राशि 6 किस्तों में दी जाएगी। बता दें कि इससे पहले राज्य सरकार ने सातवें वेतनमान के तहत आने वाले 7.50 लाख कर्मचारियों के महंगाई भत्ते और 4.50 लाख पेंशनधारकों की महंगाई राहत में 3 फीसदी की वृद्धि की थी। एरियर का भुगतान करेगी मोहन सरकार DA का लाभ सरकार 1 जुलाई 2025 से देगी. इस तरह से जुलाई 2025 और अप्रैल 2026 के बीच के महीनों के लिए सरकार एरियर देगी. इसके लिए सरकार एरियर का भुगतान करेगी. एरियर के भुगतान को लेकर भी सरकार ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों को बकाया राशि 6 किस्तों में दी जाएगी. राज्य सरकार सातवां वेतनमान पा रहे कर्मचारियों का महंगाई भत्ता पहले ही 3 फीसदी बढ़ा चुकी है, जिसमें उनका कुल DA 58 प्रतिशत हो गया है।  कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद सरकार के इस फैसले से हजारों कर्मचारियों और पेंशनरों को राहत मिलने की उम्मीद है. बढ़ती महंगाई के बीच यह फैसला कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. ताकि वह अपने परिवार की अच्छे से देखभाल कर सकें।  अब 252% से बढ़कर 257% हुआ DA बढ़ोतरी के बाद छठे वेतनमान वाले कर्मचारियों का कुल महंगाई भत्ता 252 प्रतिशत से बढ़कर 257 प्रतिशत हो जाएगा। यह बदलाव अप्रैल 2026 के वेतन से लागू माना जाएगा। यानी इस महीने की सैलरी में कर्मचारियों को बढ़ा हुआ DA मिलना शुरू हो जाएगा। हालांकि इसका लाभ असल में 1 जुलाई 2025 से दिया जाएगा। इसका मतलब यह है कि जुलाई 2025 से मार्च 2026 तक यानी नौ महीने का एरियर भी कर्मचारियों को मिलेगा। एरियर 6 किस्तों में, रिटायर्ड को एकमुश्त सरकार ने यह भी तय कर दिया है कि नौ महीने का एरियर एक साथ नहीं दिया जाएगा। इसे छह बराबर किस्तों में बांटा जाएगा। यह किस्तें मई, जून, जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर 2026 में दी जाएंगी। हर किस्त में कर्मचारी को कुल एरियर का छठा हिस्सा मिलेगा। जो कर्मचारी या अधिकारी जुलाई 2025 से मार्च 2026 के बीच रिटायर हो चुके हैं, उनके लिए अलग व्यवस्था की गई है। उन्हें एरियर की पूरी राशि एकमुश्त यानी एक ही बार में दी जाएगी। इससे रिटायर्ड कर्मचारियों को भी इस फैसले का पूरा फायदा मिल सकेगा। सातवें वेतनमान वालों को पहले ही मिली राहत मध्यप्रदेश सरकार पहले ही सातवां वेतनमान पाने वाले कर्मचारियों का महंगाई भत्ता बढ़ा चुकी है। उनके DA में 3 फीसदी की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद सातवें वेतनमान वाले कर्मचारियों का कुल DA 58 प्रतिशत हो गया। यह बढ़ोतरी भी अप्रैल के वेतन से लागू की गई है। यानी अब दोनों वेतनमानों के कर्मचारियों को राहत मिल चुकी है। छठे वेतनमान वालों को 5% और सातवें वेतनमान वालों को 3% की बढ़ोतरी का फायदा अप्रैल की सैलरी से मिलेगा। क्यों अलग-अलग है DA दोनों के लिए छठे और सातवें वेतनमान में DA का प्रतिशत इसलिए अलग-अलग दिखता है क्योंकि दोनों की मूल वेतन संरचना अलग है। छठे वेतनमान में मूल वेतन कम होता है इसलिए DA का प्रतिशत ज्यादा रखा जाता है। सातवें वेतनमान में मूल वेतन पहले से अधिक है इसलिए DA का प्रतिशत अपेक्षाकृत कम होता है। यह खबर क्यों जरूरी है? मध्यप्रदेश में छठे वेतनमान के करीब 40 हजार कर्मचारी और अधिकारी हैं। DA बढ़ोतरी का सीधा असर उनकी मासिक आय पर पड़ता है। महंगाई के इस दौर में यह फैसला उनके परिवारों के लिए राहत लेकर आया है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर नागरिक को सम्मान के साथ जीने का अधिकार है और सरकारी कर्मचारियों की क्रय शक्ति बनाए रखना इसी दिशा में एक कदम है।  एरियर को किस्तों में देने का फैसला सरकारी खजाने पर एकमुश्त बोझ से बचाता है, जो वित्तीय अनुशासन के लिहाज से भी सही है। रिटायर्ड कर्मचारियों को एकमुश्त भुगतान की व्यवस्था सामाजिक न्याय की भावना को दर्शाती है। यह खबर लाखों परिवारों की आर्थिक स्थिति से जुड़ी है, इसलिए इसकी अहमियत बहुत ज्यादा है।

मुख्यमंत्री का निर्देश, मैनपावर एजेंसियों की होगी व्यापक एवं गहन जांच

श्रमिकों के अधिकारों से कोई समझौता नहीं, उल्लंघन पर होगी कठोरतम कार्रवाई: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री का निर्देश, मैनपावर एजेंसियों की होगी व्यापक एवं गहन जांच हर औद्योगिक इकाई में ग्रीवांस सेल अनिवार्य, शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें: मुख्यमंत्री अफवाह व दुष्प्रचार फैलाने वालों पर तत्काल सख्त कार्रवाई, सोशल मीडिया की सतत मॉनीटरिंग के निर्देश: मुख्यमंत्री गैर-श्रमिक उपद्रवी तत्वों को बेनकाब कर उनकी तस्वीरें सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शित की जाएं: मुख्यमंत्री श्रमिकों के लिए डॉरमेट्री निर्माण एवं सस्ते, सुलभ आवासीय योजनाओं की कार्ययोजना शीघ्र तैयार करें: मुख्यमंत्री पहली अप्रैल से बढ़े हुए वेतन का भुगतान हर हाल में सुनिश्चित किया जाए: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने औद्योगिक स्थिति की गहन समीक्षा कर दिए आवश्यक दिशा-निर्देश लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में श्रमिकों के अधिकारों, सम्मान एवं सामाजिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निर्देश दिए हैं कि श्रमिकों हितों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक श्रमिक को सम्मानजनक कार्य-परिस्थितियां, समय पर पूर्ण वेतन एवं सभी वैधानिक सुविधाएं प्राप्त होना उसका अधिकार है, और इसके हनन पर दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।  बुधवार देर शाम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश की औद्योगिक स्थिति की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने गौतमबुद्ध नगर के घटनाक्रम पर विशेष रूप से संज्ञान लिया। उन्होंने निर्देश दिए कि जो व्यक्ति वास्तविक श्रमिक नहीं हैं, किंतु औद्योगिक अशांति फैलाने, उपद्रव करने अथवा अव्यवस्था उत्पन्न करने में संलिप्त पाए जाते हैं, उनकी तत्काल पहचान सुनिश्चित कर उनके विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। ऐसे तत्वों को बेनकाब करते हुए आवश्यकतानुसार सार्वजनिक स्थलों पर उनकी तस्वीर लगाई जाए, ताकि जनसामान्य को वास्तविक स्थिति की स्पष्ट जानकारी मिल सके। लोग यह जान सकें कि प्रदेश के औद्योगिक विकास को बाधित करने की साजिश के पीछे कौन लोग हैं।   मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि श्रमिकों को भड़काने वाले संगठनों, अराजक तत्वों तथा अफवाह फैलाने वालों के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाए। उन्होंने सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक सूचनाओं, अफवाहों एवं दुष्प्रचार पर सतत निगरानी रखने के निर्देश देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में त्वरित पहचान कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, जिससे किसी भी प्रकार की भ्रम या अशांति की स्थिति को प्रारंभ में ही नियंत्रित किया जा सके। मैनपावर सप्लाई एजेंसियों में संभावित अनियमितताओं की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त की अध्यक्षता में गठित विशेष जांच समिति एवं श्रम विभाग को निर्देशित किया कि प्रदेश की सभी ऐसी एजेंसियों की व्यापक एवं गहन जांच कराई जाए। जांच के दौरान श्रमिकों की वास्तविक संख्या, औद्योगिक इकाइयों से प्राप्त भुगतान, श्रमिकों को किए जा रहे वास्तविक भुगतान, ईएसआई, बीमा तथा अन्य सुविधाओं की वस्तुस्थिति का सूक्ष्म परीक्षण किया जाए, ताकि किसी भी प्रकार के शोषण पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।  मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी सरकारी एवं निजी औद्योगिक इकाइयों में सुदृढ़ एवं सक्रिय ग्रीवांस सेल की स्थापना अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए, जहां श्रमिकों की शिकायतों का पारदर्शी, समयबद्ध एवं निष्पक्ष निस्तारण हो। मुख्यमंत्री ने कहा है कि श्रमिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान हर हाल में होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि औद्योगिक इकाइयों के सहयोग से कार्यस्थलों पर गुणवत्तापूर्ण मेस व्यवस्था विकसित की जाए।  श्रमिक कल्याण को और सुदृढ़ करते हुए मुख्यमंत्री ने सभी औद्योगिक विकास प्राधिकरणों को निर्देश दिए कि औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों के लिए डॉरमेट्री निर्माण एवं सस्ते और सुलभ आवासीय योजनाओं की विस्तृत कार्ययोजना शीघ्र तैयार कर प्रस्तुत की जाए। उन्होंने कहा कि विकास प्राधिकरण केवल राजस्व अर्जन तक सीमित न रहकर अपने सामाजिक उत्तरदायित्व का भी प्रभावी निर्वहन करें। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जहां श्रमिकों का वेतन सीधे बैंक खातों में हस्तांतरित किया जा रहा है, वहां बैंकों के साथ समन्वय स्थापित कर दुर्घटना एवं असामयिक मृत्यु जैसी परिस्थितियों के लिए सुरक्षा बीमा सुनिश्चित किया जाए। साथ ही श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं एवं चिकित्सा बीमा जैसी आवश्यक सुविधाओं पर भी विशेष प्राथमिकता के साथ कार्य किया जाए। औद्योगिक वातावरण को संतुलित एवं सकारात्मक बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री ने सभी जनपदों के औद्योगिक विकास प्राधिकरणों को उद्यमियों एवं औद्योगिक इकाइयों के प्रबंधन के साथ सतत संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए, ताकि समस्याओं का समय रहते समाधान सुनिश्चित किया जा सके। मुख्यमंत्री ने पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश देते हुए कहा कि श्रमिकों की आड़ में कोई भी अराजक तत्व औद्योगिक इकाइयों में प्रवेश न कर सके। संवाद केवल वास्तविक श्रमिकों के साथ स्थापित किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रदेश की सभी औद्योगिक इकाइयां सुचारु रूप से संचालित होती रहें। बैठक में अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त द्वारा अवगत कराया गया कि हाल में श्रमिकों के वेतन में वृद्धि के निर्णय से श्रमिकों में संतोष है तथा उद्यमी वर्ग भी इस व्यवस्था से संतुष्ट है। गौतमबुद्ध नगर में स्थिति अब लगभग सामान्य हो चुकी है। कुछ औद्योगिक इकाइयों में प्राप्त प्रबंधन संबंधी शिकायतों के दृष्टिगत मुख्यमंत्री ने थर्ड पार्टी सर्वेक्षण कराने के निर्देश दिए, ताकि समस्याओं के वास्तविक कारणों का निष्पक्ष आकलन कर प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि बढ़े  हुए वेतन का लाभ 01 अप्रैल से सभी श्रमिकों को मिलना चाहिए। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सभी मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, अपर पुलिस महानिदेशक (जोन), पुलिस आयुक्त, पुलिस महानिरीक्षक (रेंज), वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक सहित शासन स्तर के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

अमित शाह का जवाब: ‘सपा मुस्लिम महिलाओं को टिकट दे, हमें कोई आपत्ति नहीं’, मुसलमानों को आरक्षण पर बयान

नई दिल्ली  संसद का विशेष सत्र आज यानी गुरुवार 16 अप्रैल 2026 से शुरू हो रहा है. स्‍पेशल सेशन में नारी शक्ति वंदन अधिनियम यानी महिला आरक्षण कानून में संशोधन को लेकर विधेयक पेश किया जाएगा. इसके साथ ही परिसीमन से जुड़ा विधेयक भी पेश किए जाने की संभावना है. इसको लेकर सत्‍ता पक्ष और विपक्ष में लामबंदी तेज हो गई है. लोकसभा में कुल मिलाकर तीन विधेयक पेश किया जाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लोकसभा को संबोधित कर सकते हैं. विपक्षी दल लाए जा रहे विधेयक का विरोध करने की तैयारी कर रहे हैं. विपक्ष का कहना है कि वह महिला आरक्षण के समर्थन में हैं, लेकिन इससे जुड़े परिसीमन का विरोध करते हैं. अब NDA यानी नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस के पास लोकसभा में संशोधन विधेयक के लिए आंकड़ा फिलहाल नहीं है. ऐसे में सत्तारूढ़ गठबंधन को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के लिए विपक्ष की कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है. दूसरी तरफ, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के लिए गुरुवार को एक विधेयक संसद में पेश किया जाएगा, जिसमें संसद के निचले सदन में सदस्यों की मौजूदा संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है. इसके साथ ही सरकार परिसीमन आयोग के गठन के लिए भी एक विधेयक तथा इनसे संबंधित केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026 लाने की तैयारी में है।  अमित शाह ने अखिलेश यादव के बयान पर किया पलटवार अमित शाह ने कहा कि, मुस्लिमों को धर्म के आधार पर आरक्षण गैर संवैधानिक है, इसका सवाल ही पैदा नहीं होता. अखिलेश यादव बोले कि आपने अनडेमोक्रेटिक बात कही है. धर्म की बात कही होगी. पूरा देश आधी आबादी को आरक्षण चाहता है. मैं जानना चाहता हूं कि मुस्लिम महिलाओं के लिए क्या. अमित शाह ने कहा- समाजवादी पार्टी पूरी टिकटें मुस्लिम महिलाओं को दे दे, हमें कहां आपत्ति है।  कुछ बयान चिंता पैदा कर रहे हैं – अमित शाह सपा सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि जनगणना क्यों नहीं करा रहे. आप धोखा देकर ये बिल लाना चाहते हैं. इस पर अमित शाह ने कहा- अध्यक्ष जी सदन की कार्रवाई को पूरा देश देख रहा हैय कुछ बयान ऐसे किए गए जो जनता में चिंता पैदा कर रहे हैं. अखिलेश पूछ रहे हैं जनगणना क्यों नहीं हो रही है। मैं देश को बताना चाहता हूं जनगणना जारी है. उन्होंने कहा कि हम जातीय जनगणना की मांग करेंगे. मैं बताना चाहता हूं कि सरकार इसका भी निर्णय ले चुकी है। और जाति के साथ ही यह जनगणना हो रही है।  सपा ने किया परिसीमन बिल का विरोध लोकसभा में परिसीन बिल पेश होते ही हंगामा शुरू हो गया है. सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि देश के संविधान में हम संसद को पावर इस बात की दी गई है कि संविधान की रक्षा करें, सुरक्षा करें, लेकिन सभापति जी आज ऐसे बिल आए हैं कि जो हमारे संविधान को ही तोड़-मरोड़ रहे हैं और इसका हम समाजवादी पार्टी के लोग पुरजोर विरोध करते हैं.  सभापति जी जिस तरह से डिलिमिटेशन को जनगणना से पृथक किया जा रहा है. ये मैं समझता हूं कि ये संविधान की भावनाओं के पूरी तरह से विरोध में हैं. समाजवादियों से बड़ा महिलाओं का हितैषी इस देश की कोई पार्टी नहीं है. आज भी आपसे ज्यादा सदस्य हमारे पास हैं. इसलिए सभापति जी आपके माध्यम से सरकार से अनुरोध है कि इस बिल को संविधान संशोधन बिल को परिसीमन बिल को केंद्र आज संशोधन बिल को वापस लिया जाए।  महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर बयानबाजी भी बढ़ गई है. भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा, ‘मैं नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कमिटमेंट के लिए उनका शुक्रिया अदा करता हूं, ताकि भारतीय महिलाओं को उनके अधिकार मिल सकें. यह मांग लंबे समय से उठाई जा रही थी लेकिन पूरी नहीं हुई. कांग्रेस, जिसने कई सालों तक और हाल ही में 2004 से 2014 तक राज किया, उसने सिर्फ वादे किए. सोनिया गांधी और राहुल गांधी उन्हें पूरा करने में फेल रहे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने वादे पूरे किए हैं. यह भारतीय जनता पार्टी का महिला सशक्तीकरण के लिए कमिटमेंट है. NDA के सभी घटक पूरी ताकत से एक साथ खड़े रहे हैं. पिछली बार यह बिना किसी विरोध के पास हो गया था, लेकिन इस बार कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां इसका राजनीतिकरण कर रही हैं. वे एक बार फिर महिलाओं को उनके अधिकार मिलने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं।  विपक्ष पर क्‍या आरोप अनुराग ठाकुर ने कहा कि विपक्षी दल एक के बाद एक बहाने ढूंढ रहे हैं. सच तो यह है कि कांग्रेस और दूसरी पार्टियां महिला सशक्तीकरण के पक्ष में नहीं लगतीं, लेकिन कुछ भी हो महिलाओं को उनके अधिकार मिलने चाहिए. प्रधानमंत्री बनने के बाद से मोदी ने महिलाओं के लिए न्याय पक्का किया है. कांग्रेस ने हमेशा देश को बांटने की कोशिश की है, कभी जाति, धर्म और कभी इलाके के आधार पर. भाजपा सांसद ने आगे कहा कि आज भी कांग्रेस के कुछ साथी यह तर्क देते हैं कि दक्षिणी राज्यों में सीटें कम हो जाएंगी. हम बड़ी जिम्मेदारी के साथ कहना चाहते हैं कि किसी का हक, किसी की सीटें कम नहीं हो रही हैं, बल्कि सबके साथ इंसाफ हो रहा है।   जातिगत जनगणना पर अमित शाह और अखिलेश यादव में बहस संसद विशेष सत्र लाइव: संसद में जनगणना और आरक्षण के मुद्दे पर उस समय तीखी बहस देखने को मिली, जब समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार से जनगणना में देरी को लेकर सवाल उठाया. उन्होंने पूछा कि आखिर जनगणना का इंतजार क्यों नहीं किया जा रहा है, क्योंकि उनकी पार्टी जाति आधारित जनगणना की मांग लगातार कर रही है. इस पर जवाब देते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि सरकार ने जनगणना का काम शुरू कर दिया है और इसमें जाति आधारित आंकड़े भी शामिल किए जाएंगे. उन्होंने कहा कि फिलहाल हाउसलिस्टिंग का कार्य चल रहा है और जब मुख्य जनगणना शुरू होगी, तब उसमें जाति का कॉलम भी जोड़ा जाएगा. अमित शाह ने आगे कहा कि सरकार का … Read more

हमारे प्रयास: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया मातृसत्ता से जुड़ने का रास्ता

हम देश को मातृसत्ता से जोड़ रहे हैं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के राजनैतिक सशक्तिकरण का नया युग हो रहा है आरंभ 16 अप्रैल 2026 महिला सशक्तिकरण की होगी मंगलमय तारीख विधानसभाओं और लोकसभा में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण से हमारा लोकतंत्र बनेगा अधिक समावेशी, सशक्त और संवेदनशील मध्यप्रदेश नारी शक्ति के वंदन का है उत्कृष्ट उदाहरण जन चेतना के लिए नारी शक्ति वंदन अभियान को घर-घर पहुंचाना आवश्यक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य स्तरीय नारी शक्ति वंदन कार्यक्रम को किया संबोधित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने चुनौतीपूर्ण कार्यों को पूरा करते हुए मध्यप्रदेश सहित देश को सशक्त बनाया है। उन्होंने असंभव को संभव कर दिखाया है। हम देश को मातृसत्ता से जोड़ रहे हैं। गुरुवार 16 अप्रैल 2026 महिला सशक्तिकरण की मंगलमय तारीख होगी। देश की विधानसभाओं और लोकसभा में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का विषय आएगा तो वह समय देश में होली-दीवाली एक साथ मनाने जैसा होगा। शासन के सूत्र जब बहनों के हाथ में आते हैं तो संवेदनशीलता से परिपूर्ण कितने नवाचार किए जा सकते हैं, इसके कई उत्कृष्ट उदाहरण हमारे सामने हैं। मध्यप्रदेश रानी दुर्गावती की धरती है। राज्य सरकार ने लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती मनाई। उनकी शासन व्यवस्था में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के बलबूते पर काशी में बाबा विश्वनाथ का धाम बनाया। सभी तीर्थ स्थलों पर अन्न क्षेत्र और यात्रियों के रुकने की व्यवस्था कराई। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के राजनैतिक सशक्तिकरण का नया युग आरंभ हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव "नारी शक्ति वंदन कार्यक्रम-प्रबुद्ध जन सम्मेलन'' को संबोधित कर रहे थे। रविंद्र भवन के हंस ध्वनि सभागार में कार्यक्रम वंदे मातरम गान के साथ आरंभ हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नारी शक्ति वंदन पखवाड़े के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला संगठनों, स्वयं सेवी संस्थाओं, नगरीय निकायों तथा पंचायत राज संस्थाओं की प्रतिनिधियों, महिला पत्रकार, छात्राएं शामिल हुईं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बोर्ड परीक्षा में टॉपर बालिकाओं को सराहा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माध्यमिक शिक्षा मंडल की हायर सेकेंड्री और हाई स्कूल परीक्षा की टॉपर छात्राओं की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉक्टर यादव ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत करने वाली छात्राओं का अंगवस्त्रम के साथ नारियल और पौधा भेंट कर अभिवादन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महिला सशक्तिकरण पर लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। कार्यक्रम में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उईके, महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, नागरिक विकास एवं आवास राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, पंचायत और ग्रामीण विकास राज्यमंत्री श्रीमती राधा सिंह, शिक्षाविद सुश्री शोभा पैठनकर, विधायक एवं पूर्व मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस और सांसद श्रीमती लता वानखेड़े विशेष रूप से उपस्थित थीं। कार्यक्रम में जवाहर बाल भवन की बालिकाओं ने सरस्वती वंदना का गायन किया। मध्यप्रदेश में महिलाओं ने अदम्य साहस और नेतृत्व क्षमता के कई उदाहरण किए प्रस्तुत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश नारी शक्ति के वंदन का उत्कृष्ट उदाहरण है। प्रदेश के नगरीय निकायों में बहनों को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। प्रदेश के आधे से अधिक स्थानीय निकायों की कमान बहनें संभाल रही हैं। लोकसभा में हमारी 6 बहनें सांसद और विधानसभा में 27 बहनें विधायक हैं। प्रदेश में 5 महिला मंत्री अपने विभागों की जिम्मेदारी बखूबी निभा रही हैं। मध्यप्रदेश में महिलाओं ने अदम्य साहस और नेतृत्व क्षमता के कई उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। ग्वालियर अंचल से राजमाता विजया राजे सिंधिया ने तत्कालीन सरकार को छोड़ा और प्रदेश में पहली संविद सरकार बनाई । विनम्रता की प्रतिमूर्ति राजमाता ने कभी कोई पद नहीं लिया और जनता के लिए कार्य करती रहीं। इंदौर की बहन श्रीमती सुमित्रा महाजन लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष रहीं। पूर्व विदेश मंत्री स्व. सुषमा स्वराज ने भी लोकसभा में प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। आज देश का राष्ट्रपति का पद श्रीमती द्रोपदी मुर्मु संभाल रही हैं। महिला कल्याण और महिलाओं के नेतृत्व में विकास हमारी प्राथमिकता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में सभी क्षेत्रों में देश सशक्त हो रहा है। महिला कल्याण और महिलाओं के नेतृत्व में विकास उनकी प्राथमिकता है। इसी क्रम में हमारी बहनों को तीन तलाक से मुक्ति दिलाने का उल्लेखनीय कार्य भी हुआ है। देश में महिलाओं के आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक सशक्तिकरण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं। जन चेतना के लिए नारी शक्ति वंदन अभियान को घर-घर पहुंचाना आवश्यक है। इससे हमारा लोकतंत्र अधिक समावेशी, सशक्त और संवेदनशील बनेगा। सभी वर्गों और पार्टियों से नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने में सहयोग अपेक्षित : सुश्री भूरिया महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में लागू होने जा रहे नारी शक्ति वंदन अधिनियम से देश में नारी शक्ति को सशक्त नेतृत्व के और अधिक अवसर मिलेंगे। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने लोकतंत्र की मजबूती के लिए महिलाओं को आरक्षण देने की पहल की है। इससे देश की विधानसभाओं और लोकसभा में महिलाओं की 33 प्रतिशत भागीदारी होगी। देश के नीतिगत निर्णयों में मातृ शक्ति की हिस्सेदारी बढ़ेगी। राज्य सरकार भी नारी सशक्तिकरण में कोई कसर नहीं छोड़ रही है, जिसका लाभ प्रदेश की महिलाओं को मिल रहा है। पहली बार महेश्वर में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर को समर्पित कैबिनेट हुई और मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने पूरा वर्ष नारी कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। अब समय आ गया है कि देश के सभी वर्गों और दलों के प्रतिनिधियों को नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने में सहयोग करना चाहिए। हमारा हर कदम देश-प्रदेश को आगे ले जाने के लिए होगा। नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम : राज्य मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर नारी शक्ति सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्य मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा लाए गए 106वें संविधान संशोधन के माध्यम से देश की करोड़ों महिलाओं को वह सम्मान और संवैधानिक शक्ति मिली है, जिसका 1996 से 2010 … Read more

राज्य स्थापना दिवस पर राज्यपाल पटेल का संदेश, विविधता में एकता की शक्ति का उत्सव

राज्य स्थापना दिवस समारोह, विविधता में एकता की शक्ति का उत्सव : राज्यपाल पटेल राज्यपाल पटेल राजस्थान, ओडिशा और हिमाचल प्रदेश के स्थापना दिवस के संयुक्त कार्यक्रम में हुए शामिल लोक भवन में "एक भारत-श्रेष्ठ भारत" के तहत हुआ आयोजन भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि राज्यों का स्थापना दिवस कार्यक्रम, भारत की विविधता में एकता की शक्ति का उत्सव है। यह एक दूसरे की कला, संस्कृति, इतिहास और विकास से परिचय कराता है। सभी में आपसी सदभाव, प्रेम और भाईचारा बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि आयोजन, देश की विभिन्नता में एकता की शक्ति को पहचानने और भावी पीढ़ी को परिचित कराने का भी माध्यम है। राज्यपाल पटेल ने कहा कि यह केवल तिथियों का आयोजन नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक यात्रा का उत्सव भी है, जो हमें अपनी विरासत को संजोते हुए विकास के नए आयाम स्थापित करने की प्रेरणा देता है। राज्यपाल पटेल बुधवार को लोक भवन में राजस्थान, ओडिशा और हिमाचल प्रदेश के स्थापना दिवस के संयुक्त समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने तीनों राज्यों के निवासियों को राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दी। लोक भवन के सांदीपनि सभागार में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे। राज्यपाल पटेल ने कहा कि "एक भारत-श्रेष्ठ भारत" की संकल्पना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सराहनीय पहल है। यह विकसित भारत निर्माण की संकल्पना को साकार करने सभी राज्यों को एक साथ जोड़ने का प्रयास है। राज्यपाल पटेल ने तीनों राज्यों के प्रतिनिधियों से वर्ष 2047 तक भारत को विकसित बनाने में योगदान देने का आव्हान भी किया। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और महापुरूषों का किया स्मरण राज्यपाल पटेल ने राजस्थान, ओडिशा और हिमाचल प्रदेश के स्थापना दिवस समारोह में तीनों राज्यों के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और महापुरूषों का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत के निर्माण में राजस्थान के बालमुकुंद बिस्सा, अर्जुन लाल सेठी, केसरी सिंह बारहठ, विजय सिंह पथिक, जमनालाल बजाज, हीरालाल शास्त्री, सागरमल गोपा और माणिक्य लाल वर्मा जैसे सेनानियों का योगदान अमूल्य है। आजादी के संघर्ष में उड़ीसा के लक्ष्मण नाइक, मालती चौधरी, जमुनीबती पट्टनायक, सुरेंद्र साई और अटल बिहारी आचार्य का अदम्य साहस, देशभक्ति का प्रदर्शन राष्ट्र भक्तों के लिए प्रेरणा का प्रतीक है। हिमाचल प्रदेश में राम सिंह पठानिया ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका। कांशीराम, जिन्हें “पहाड़ी गाँधी” कहा जाता है, ने जनजागरण और संघर्ष के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी। इसी प्रकार डॉ. वाई. एस. परमार, पदम देव, शिवानन्द रमौला, पूर्णानंद, सत्यदेव, सदाराम चंदेल, दौलत राम तथा ठाकुर हजारा सिंह का संघर्ष और बलिदान हर पीढ़ी के लिए प्रेरणा दायक है। राज्यपाल पटेल ने सभी नागरिकों, विशेषकर युवाओं से महान सेनानियों के त्याग, साहस और समर्पण से प्रेरणा लेने, राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने तथा “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” के संकल्प को साकार करने की अपील भी की। तीनों राज्यों की कला और संस्कृति अद्भुत राज्यपाल पटेल ने कहा कि राजस्थान की भक्ति परंपरा, मीरा के भजन, भव्य किले, लोक कला, संगीत, नृत्य, हस्तशिल्प, थार मरुस्थल और विभिन्न विश्व धरोहर स्थल भारत की वैश्विक पहचान है। भारत की आध्यात्मिक और स्थापत्य विरासत में भगवान जगन्नाथ की पावन भूमि ओडिशा और कोणार्क का सूर्य मंदिर हमारी सांस्कृतिक गरिमा के प्रतीक हैं। देवभूमि के रूप में प्रसिद्ध हिमाचल प्रदेश की अनुपम प्राकृतिक सुंदरता, स्वच्छ पर्यावरण, धार्मिक आस्थाएं और पौराणिक परंपराएं हमारी सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध कर राष्ट्रीय पहचान को गौरवान्वित करती हैं। सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत हमारा लक्ष्य राज्यपाल पटेल ने कहा कि हमारी भौगोलिक और सांस्कृतिक विशेषताएँ भले ही भिन्न हों लेकिन हमारा लक्ष्य सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ओडिशा के खनिज संसाधन और औद्योगिक विकास, राजस्थान की नव-करणीय ऊर्जा, पर्यटन विकास तथा हिमाचल प्रदेश के पर्यावरणीय संरक्षण के समन्वित प्रयासों से ही ‘आत्मनिर्भर भारत’ का निर्माण संभव होगा। तीनों राज्यों की लोक, शास्त्रीय और संस्कृति की दिखी झलक राज्यपाल पटेल के समक्ष राजस्थान, ओडिशा और हिमाचल प्रदेश राज्य की लोक संस्कृति और शास्त्रीय परंपराओं पर आधारित प्रस्तुतियां दी गई। उन्होंने सभी आर्कषक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की सराहना की। राज्यपाल पटेल ने समारोह की सभी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में महिला और बेटियों की संपूर्ण सहभागिता को महिला सशक्तिकरण की मिसाल बताया। समारोह में राजस्थान सांस्कृतिक समाज की ओर से घूमर और कठपुतली नृत्य प्रस्तुत किया गया। राजस्थान राज्य के इतिहास और कला संस्कृति पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। ओडिशा राज्य के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभम्पति का संदेश और राज्य की लघु फिल्म का प्रसारण किया गया। सांस्कृतिक प्रस्तुति के अंतर्गत शास्त्रीय नृत्य ओडिसी और उत्कल समाज की ओर से भगवान जगन्नाथ की स्तुति नृत्य हुआ। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता का लघु संदेश और लोक भवन हिमाचल प्रदेश की ऐतिहासिकता पर आधारित लघु फिल्म दिखाई गई। हिमाचल समाज जनसेवा समिति की ओर से राज्य की लोक, कला और भक्ति आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गई। राज्यपाल पटेल का राजस्थान, ओडिशा और हिमाचल प्रदेश के मध्यप्रदेश में निवासरत प्रतिनिधियों ने अपने-अपने राज्यों की संस्कृति के अनुरूप पारंपरिक स्वागत किया। राज्यपाल पटेल को राजस्थानी पगड़ी, ओडिशा हस्तशिल्प, हिमाचली टोपी और फलों की टोकरी भेंट की गई। संयुक्त समारोह में पूर्व डी.जी.पी संतोष कुमार रावत, रमेश अग्रवाल, पुरूषोत्तम, तीनों राज्यों के प्रदेश में निवासरत नागरिक और लोक भवन के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।  

जल संरक्षण अभियान’ की शुरुआत, योगी सरकार ने स्कूलों से की पहल

योगी सरकार की पहल, स्कूलों से शुरू होगा 'जल संरक्षण अभियान' छात्रों और समाज में जल बचाने की व्यावहारिक आदत विकसित करना है उद्देश्य 16 से 30 अप्रैल तक प्रदेश के सभी विद्यालयों एवं शैक्षिक संस्थानों में मनाया जाएगा ‘जल पखवाड़ा’ – ‘जल शक्ति अभियान: कैच द रेन’ के अंतर्गत संचालित होगा अभियान, प्रत्येक दिन की गतिविधि की रिपोर्टिंग अनिवार्य लखनऊ  योगी सरकार ने जल संरक्षण को लेकर निर्णायक पहल करते हुए इसे सीधे स्कूलों से जोड़ दिया है। ‘जल शक्ति अभियान’ के अंतर्गत 16 से 30 अप्रैल तक प्रदेश के सभी विद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों में ‘जल पखवाड़ा’ आयोजित किया जाएगा, जिसके माध्यम से लाखों छात्र जल संरक्षण के प्रति न केवल जागरूक होंगे, बल्कि जल बचाने की जिम्मेदारी भी सक्रिय रूप से निभाएंगे। इस पहल के जरिए जल संरक्षण को जनभागीदारी से जुड़ा अनिवार्य दायित्व बनाया जा रहा है, जिसकी शुरुआत स्कूली कक्षाओं से लेकर संपूर्ण समाज तक व्यापक प्रभाव डालेगी। अभियान की विशेषता इसकी सुदृढ़ मॉनिटरिंग व्यवस्था है। सभी विद्यालयों के लिए प्रतिदिन की गतिविधियों की ऑनलाइन रिपोर्टिंग अनिवार्य की गयी है। ट्रैकर के माध्यम से प्रतिभागियों की संख्या, गतिविधियों का विवरण तथा फोटो/वीडियो अपलोड करने होंगे। इसके लिए जनपद स्तर पर बेसिक शिक्षा अधिकारियों को नोडल अधिकारी नामित कर जवाबदेही सुनिश्चित की गई है।  योगी सरकार की मंशा जल संरक्षण अभियान को व्यापक जन आंदोलन का स्वरूप देने की है, ताकि समाज में जल संरक्षण के प्रति स्थायी सोच एवं व्यवहार विकसित हो सके। विद्यालयों की प्रार्थना सभा में 'जल शपथ' जल पखवाड़ा के दौरान विद्यालयों को जल संरक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके अंतर्गत जल संरक्षण विषय पर कार्यशालाएं आयोजित होंगी, जिनमें जल निगम, पंचायती राज, बेसिक शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही प्रतिदिन प्रार्थना सभा में ‘जल शपथ’ दिलाई जाएगी और छात्रों व अभिभावकों के बीच जल संरक्षण से जुड़ी जानकारियों का प्रसार किया जाएगा, ताकि यह अभियान घर-घर तक प्रभावी रूप से पहुंचे। निबंध, वाद-विवाद, प्रश्नोत्तरी, चित्रकला जैसी प्रतियोगिताओं से बढ़ाई जाएगी भागीदारी छात्रों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए निबंध, वाद-विवाद, प्रश्नोत्तरी, चित्रकला तथा अन्य रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा, जिससे उनमें जल संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित हो सके। इसके अतिरिक्त प्रत्येक विद्यालय में पेयजल स्रोतों एवं जल भंडारण स्थलों की साफ-सफाई के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। जल निगम की प्रयोगशालाओं के माध्यम से पेयजल की गुणवत्ता की जांच कर आवश्यक शुद्धिकरण भी सुनिश्चित किया जाएगा। इसके साथ ही विद्यालयों में जल संरक्षण विषयक फोटो प्रदर्शनी का आयोजन, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के बीच संवाद व जनजागरूकता गतिविधियों को भी शामिल किया गया है, जिससे यह अभियान व्यवहार परिवर्तन का माध्यम बन सके।

यूरोप की आत्मनिर्भरता की ओर कदम: अमेरिका को किनारे करते हुए ‘यूरोपियन NATO’ की योजना

पेरिस मिडिल-ईस्ट में जारी जंग और वैश्विक तनाव के बीच यूरोप ने एक ऐसा साहसिक कदम उठाया है जिसने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल मचा दी है। होर्मुज स्ट्रेट संकट और ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका के साथ बढ़ते मतभेदों के बीच, यूरोपीय देशों ने अब अमेरिका से अलग होकर अपनी स्वतंत्र सुरक्षा रणनीति बनाने का फैसला किया है। ब्रिटेन और फ्रांस के नेतृत्व में एक नया सुरक्षा ढांचा तैयार किया जा रहा है, जिसे अनौपचारिक तौर पर 'यूरोपियन NATO' कहा जा रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट जैसे दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में शिपिंग रूट को फिर से बहाल करना और अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ​अमेरिका से किनारा: क्यों अलग राह पर चला यूरोप?  इस नई सुरक्षा योजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें अमेरिका को जानबूझकर अलग रखा गया है। हाल के दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूरोपीय देशों के बीच ईरान युद्ध और नौसैनिक नाकाबंदी जैसी रणनीतियों को लेकर गहरे मतभेद उभरे हैं। कई यूरोपीय देशों ने अमेरिका के आक्रामक सैन्य अभियानों का समर्थन करने से इनकार कर दिया है। यही वजह है कि अब यूरोप "आत्मनिर्भर सुरक्षा" की दिशा में आगे बढ़ रहा है। जर्मनी जैसे देश, जो पहले कभी अलग सैन्य गुट बनाने के खिलाफ थे, अब इस 'यूरोपियन NATO' की पहल का खुलकर समर्थन कर रहे हैं। ​होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा और मिशन के 3 मुख्य लक्ष्य  ​पूरी यूरोपियन रणनीति मुख्य रूप से होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित बनाने पर केंद्रित है, जहाँ से वैश्विक तेल सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। हालिया युद्ध और समुद्री खतरों की वजह से यहाँ शिपिंग बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस नए गठबंधन के तीन मुख्य लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं:     ​युद्ध के दौरान संकट में फंसे जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालना।     ​समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाना।     ​भविष्य में जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए एक स्थायी निगरानी और एस्कॉर्ट सिस्टम तैयार करना। यूरोप का मानना है कि युद्ध खत्म होने के बाद इस रूट को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी होगा. इसी को ध्यान में रखते हुए ब्रिटेन और फ्रांस इस पहल की अगुवाई कर रहे हैं. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों इस हफ्ते 40 से ज्यादा देशों की एक बड़ी बैठक बुलाने जा रहे हैं, जिसमें इस नई सुरक्षा योजना पर चर्चा होगी।  इस प्रस्ताव के तहत एक बहुराष्ट्रीय रक्षा गठबंधन बनाया जाएगा, जो समुद्री जहाजों की सुरक्षा, माइन हटाने और निगरानी का काम करेगा. खास बात यह है कि यह पूरी व्यवस्था यूरोपीय कमांड के तहत चलेगी, न कि अमेरिका के नेतृत्व में. यही बदलाव इस योजना को सबसे अलग बनाता है।  दरअसल, यह कदम सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी छिपा है. हाल के दिनों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूरोपीय देशों के बीच ईरान युद्ध को लेकर मतभेद बढ़े हैं. कई यूरोपीय देशों ने अमेरिका के सैन्य अभियान या ब्लॉकेड जैसी रणनीतियों का समर्थन करने से इनकार कर दिया है।  यही वजह है कि अब यूरोप "आत्मनिर्भर सुरक्षा" की दिशा में आगे बढ़ रहा है. जर्मनी जैसे देश, जो पहले अलग सैन्य रास्ते के खिलाफ थे, अब इस पहल का समर्थन कर रहे हैं. अगर जर्मनी इसमें शामिल होता है, तो इसकी माइन-क्लीयरिंग क्षमता इस मिशन को और मजबूत बना सकती है।  इस योजना के तीन मुख्य लक्ष्य बताए जा रहे हैं. पहला, युद्ध के दौरान फंसे जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालना. दूसरा, समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाना और तीसरा, भविष्य में जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए निगरानी और एस्कॉर्ट सिस्टम तैयार करना।  यह पहल पहले भी कुछ हद तक देखी जा चुकी है. उदाहरण के लिए, यूरोप ने रेड सी में "ऑपरेशन एस्पाइड्स" के तहत अपने जहाजों को सुरक्षा दी थी, जो अमेरिका के अलग मिशन से स्वतंत्र था. अब उसी मॉडल को बड़े स्तर पर लागू करने की कोशिश की जा रही है।  हालांकि, इस योजना के सामने कई चुनौतियां भी हैं. सबसे बड़ी चुनौती यह है कि क्या ईरान इस तरह के किसी मिशन को मंजूरी देगा. इसके अलावा, यूरोप को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इस मिशन के दौरान किसी तरह का नया टकराव न हो क्योंकि अमेरिका पहले से ही इस क्षेत्र में अपनी नौसेना के जरिए दबाव बना रहा है, जिसने होर्मुज स्ट्रेट के आसपास ब्लॉकेड लगा रखा है।  ​संसदीय और कूटनीतिक पहल: 40 देशों की महाबैठक  इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए कूटनीतिक स्तर पर बड़ी तैयारी शुरू हो गई है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टारमर और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों इसी हफ्ते 40 से ज्यादा देशों की एक बड़ी बैठक बुलाने जा रहे हैं। इस बैठक में नई सुरक्षा योजना और यूरोपीय कमांड के तहत बहुराष्ट्रीय रक्षा गठबंधन बनाने पर चर्चा होगी। खास बात यह है कि यह पूरी व्यवस्था यूरोपीय कमान के तहत चलेगी, न कि अमेरिका के नेतृत्व में। यह कदम न केवल सुरक्षा बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी है कि यूरोप अब अपनी रक्षा जरूरतों के लिए वाशिंगटन पर निर्भर नहीं रहना चाहता। ​चुनौतियां और भविष्य: क्या ईरान इसको मंजूरी देगा?​  हालांकि यह योजना सुनने में जितनी प्रभावी है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि क्या ईरान इस तरह के किसी यूरोपीय मिशन को अपने क्षेत्र में मंजूरी देगा? इसके अलावा, यूरोप को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इस मिशन के दौरान अमेरिका के साथ कोई नया टकराव न हो, क्योंकि अमेरिका पहले से ही अपनी नौसेना के जरिए इस क्षेत्र में दबाव बनाए हुए है। यदि यह योजना सफल होती है, तो यह 'यूरोपियन NATO' भविष्य में वैश्विक शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल सकता है।  

एमपी में 345 विधायक और 45 सांसद, 33% महिला आरक्षण लागू होने से सत्ता के समीकरण में होगा बदलाव

भोपाल  मध्य प्रदेश के चुनावी परिदृश्य में एक ऐसा बड़ा बदलाव आने वाला है, जो अगले कई दशकों की राजनीति को नई दिशा देगा। 16 अप्रैल से शुरू हो रहे संसद के विशेष सत्र में प्रस्तावित 33% महिला आरक्षण और परिसीमन बिल (131वां संविधान संशोधन) पेश होने जा रहा है। इस मास्टर प्लान के लागू होने से मध्य प्रदेश में न केवल महिला प्रतिनिधित्व बढ़ेगा, बल्कि विधानसभा और लोकसभा सीटों की संख्या में भी भारी बढ़ोतरी होगी। विधानसभा में होंगी 114 महिलाएं प्रस्तावित बदलावों के तहत, मध्य प्रदेश विधानसभा की कुल सदस्य संख्या 230 से बढ़ाकर 345 किए जाने की योजना है। इस विस्तारित सदन में महिलाओं के लिए 114 सीटें आरक्षित होंगी, जो वर्तमान में मात्र 27 महिला विधायकों की तुलना में एक बड़ी छलांग है।सीटों की संख्या बढ़ने के साथ ही सरकार बनाने के लिए जादुई आंकड़े में भी बदलाव आएगा। अब राज्य में बहुमत साबित करने के लिए 116 के बजाय 174 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी। यह बदलाव न केवल छोटे दलों की भूमिका को प्रभावित करेगा, बल्कि बड़े दलों को भी अपनी चुनावी रणनीति नए सिरे से तैयार करने पर मजबूर करेगा। कैबिनेट का भी होगा विस्तार परिसीमन का असर सिर्फ सदन की सीटों तक सीमित नहीं रहेगा। नियमों के मुताबिक, विधानसभा की कुल संख्या का 15% हिस्सा मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। ऐसे में प्रदेश के कैबिनेट मंत्रियों की अधिकतम संख्या 35 से बढ़कर 52 हो जाएगी। यानी आने वाले समय में मध्य प्रदेश में मंत्रियों की एक बड़ी फौज नजर आएगी। लोकसभा के मोर्चे पर भी एमपी की ताकत बढ़ेगी। राज्य से लोकसभा सांसदों की संख्या 29 से बढ़कर 43 करने का प्रस्ताव है। इनमें महिला सांसदों की संख्या भी मौजूदा 6 से बढ़कर 14 होने की उम्मीद है। यह पूरा ढांचा 31 मार्च 2029 के बाद होने वाले चुनावों से प्रभावी होने की संभावना है। विधानसभा सीटें 230 345 +115 बहुमत का आंकड़ा 116 174 +58 महिला विधायक (आरक्षित) 27 (अनुमानित) 114 ऐतिहासिक वृद्धि लोकसभा सीटें 29 43 +14 मंत्री परिषद की क्षमता 35 52 तक +17

नारी वंदन को मिशन-2029 में सोशल क्रांति बनाने की रणनीति, MP भाजपा का बड़ा कदम

भोपाल  भारतीय जनता पार्टी की कोर कमेटी की बैठक  में जिसमें संगठनात्मक मजबूती, आगामी कार्यक्रमों और खास तौर पर नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर चर्चा हुई। भारतीय जनता पार्टी इस कानून को वर्ष 2029 के चुनावों में बड़ा “गेम चेंजर” बनाने की दिशा में काम कर रही है। पहली बैठक को औपचारिक माना गया, लेकिन इसमें कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। मंडल स्तर पर प्रशिक्षण वर्ग पहले ही पूरे किए जा चुके हैं और अब जिला व प्रदेश स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों को विस्तार दिया जाएगा। ताकि संगठन को और मजबूत किया जा सके।  बैठक में सत्ता और संगठन के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया गया। नेताओं का मानना है कि सरकार की योजनाओं और पार्टी के कार्यक्रमों के बीच तालमेल मजबूत होगा, तो उसका सीधा लाभ जनता तक पहुंचेगा। इस दौरान यह रणनीति भी बनी कि विधायक और सांसद नारी शक्ति वंदन अधिनियम को महिलाओं के सशक्तिकरण के बड़े कदम के रूप में जनता के बीच प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करेंगे। पार्टी इसे केवल एक कानून के रूप में नहीं, बल्कि महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी में मजबूत करने वाले ऐतिहासिक फैसले के रूप में प्रचारित करने की तैयारी में है। ताकि आने वाले चुनावों में पार्टी को उसका लाभ मिले।   भाजपा का मानना है कि महिलाओं के लिए लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रविधान गेम-चेंजर साबित होगा। इसे केवल एक कानूनी उपलब्धि के रूप में नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति के रूप में जनता के बीच ले जाया जाएगा। सरकार अपनी योजनाओं के जरिए और संगठन अपने बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के जरिए हर घर तक यह संदेश पहुंचाएगा कि भाजपा ही महिलाओं की सच्ची हितैषी है। इसके साथ ही समान नागरिक संहिता के जरिए भेदभाव दूर करने का संदेश घर-घर पहुंचाया जाएगा। कोर ग्रुप की यह पहली बैठक थी। इससे पहले आठ सदस्यीय छोटी टोली संगठन ने सत्ता-संगठन में समन्वय के लिए बनाई गई थी। इसके बाद 20 सदस्यों का कोर ग्रुप बनाया गया है। बैठक में मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और भाजपा के राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री शिवप्रकाश उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और जगदीश देवड़ा, प्रदेश प्रभारी डा महेंद्र सिंह, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, मंत्री राकेश सिंह, कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल एवं अजा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व लोकसभा सदस्य विष्णुदत्त शर्मा, मंत्री संपतिया उइके, लता वानखेड़े, डा नरोत्तम मिश्रा, अरविंद भदौरिया और फग्गन सिंह कुलस्ते उपस्थित थे। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान बिहार में भाजपा विधायक दल की बैठक के चलते इसमें शामिल नहीं हो सके। साझा अभियान के प्रमुख कार्यक्रम     जन-जागरण पखवाड़ा: मध्य प्रदेश में 25 अप्रैल 2026 तक एक विशेष पखवाड़ा मनाया जाएगा, जिसमें महिलाओं को उनके राजनीतिक अधिकारों जैसे 33 प्रतिशत आरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा।     नारी शक्ति पदयात्रा: आगामी 15 और 16 अप्रैल को प्रदेश के हर लोकसभा क्षेत्र में 'नारी शक्ति पदयात्रा' निकाली जाएगी। इसके साथ ही महिला कार्यकर्ताओं द्वारा बाइक रैलियों का आयोजन भी किया जाएगा।     सम्मेलन और टाउन हाल: प्रदेश भर में टाउन हॉल कार्यक्रम और सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, जिनमें सरकार की महिला केंद्रित योजनाओं (जैसे लाड़ली बहना योजना) और आरक्षण कानून के लाभ बताए जाएंगे। संगठनात्मक तालमेल: सभी मंत्री और पार्टी पदाधिकारी जमीनी स्तर पर जाकर महिलाओं से सीधा संवाद करेंगे। मिस्ड काल अभियान: अभियान के समर्थन में जनमत जुटाने के लिए एक मिस्ड काल नंबर भी जारी किया गया है, जिसके जरिए लोग इस कानून के प्रति अपनी सहमति दर्ज करा सकते हैं। प्रशिक्षण महा अभियान की भी समीक्षा की कोर ग्रुप की बैठक में भाजपा द्वारा चलाए गए पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महा अभियान की भी समीक्षा की गई। मंडल स्तर पर प्रशिक्षण वर्ग संपन्न हो चुके हैं, अब जिले और प्रदेश स्तर पर आयोजित किए जाएंगे। कहां कितना काम हुआ इसकी रिपोर्ट कोर ग्रुप की बैठक में रखी गई। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल व क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल सहित अन्य पदाधिकारियों ने संबोधित किया।