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इंदौर प्रदेश में संपत्ति रजिस्ट्री में अव्वल, 21% राजस्व का योगदान अकेले इंदौर का

इंदौर  पंजीयन विभाग के 2025-26 के राजस्व आंकड़ों के अनुसार इंदौर जिले ने एक बार फिर पूरे प्रदेश में सबसे अधिक कमाई कर अपना दबदबा कायम रखा है। इंदौर ने पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा राजस्व अर्जित किया है। यहां कुल 2673.44 करोड़ की आय हुई है। वहीं भोपाल दूसरे, ग्वालियर तीसरे, जबलपुर चौथे और उज्जैन पांचवें स्थान पर रहा। भोपाल 1903.67, ग्वालियर 852.92 करोड़, जबलपुर 772.25 करोड़, उज्जैन 440.50 करोड़ की आय दे पाए हैं, जबकि इंदौर के महू नाका कार्यालय ने प्रदेश में चौथे नंबर पर कमाई दर्ज कराई है। इंदौर जिले के चारों कार्यालय इस बार भी प्रदेश में शीर्ष पर रहे। मोती तबेला स्थित पंजीयन कार्यालय ने 614.69 करोड़, ढक्कनवाला कुआं स्थित पंजीयन कार्यालय ने 674.06 करोड़, विजयनगर स्थित पंजीयन कार्यालय ने 756.98 करोड़, जबकि महू नाका स्थित पंजीयन कार्यालय ने 627.71 करोड़ रुपए की कमाई की। कुल मिलाकर इंदौर जिले का संयुक्त राजस्व 2673.44 करोड़ रुपए रहा, जो प्रदेश में सर्वाधिक है। उधर, भोपाल-1 कार्यालय की 481.37 करोड़ रुपए, भोपाल-2 की 997.22 करोड़ रुपए, भोपाल-3 कार्यालय की कमाई 425.08 करोड़ रुपए दर्ज की गई। जबकि ग्वालियर जिले के दोनों कार्यालयों ने क्रमश: 396.58 करोड़ और 456.34 करोड़ रुपए का राजस्व जुटाया। जबलपुर जिले में जबलपुर के दोनों कार्यालयों ने क्रमश: 371.36 करोड़ और 400.89 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित किया, जबकि सिंहस्थ के कारण उज्जैन से जो उम्मीद की जा रही थी वह पूरी नहीं हो सकी। इस वर्ष उज्जैन जिले ने मात्र 440.50 करोड़ रुपए की कमाई की। इंदौर ने रिकॉर्ड बनाया दरअसल, इंदौर ने पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 215.7 करोड़ रुपये अधिक राजस्व जुटाया है। वर्ष 2024-25 में जहां यह आंकड़ा 2528 करोड़ रुपये था, वहीं इस बार यह बढ़कर 2743.7 करोड़ रुपये पहुंच गया। यह वृद्धि शहर में तेजी से बढ़ते रियल एस्टेट कारोबार और निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। दस्तावेज पंजीयन के मामले में भी इंदौर ने रिकॉर्ड बनाया है। वर्ष 2025-26 में जिले में एक लाख 91 हजार 400 दस्तावेज पंजीकृत हुए, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 5124 अधिक हैं। वरिष्ठ जिला पंजीयक अमरेश नायडू के अनुसार इंदौर में संपत्ति बाजार लगातार विस्तार कर रहा है और आने वाले समय में यह आंकड़े और भी ऊंचाई छू सकते हैं। प्रदेश के प्रमुख चार शहरों का राजस्व     इंदौर – 2743.7 करोड     भोपाल – 1943.64 करोड़     ग्वालियर – 870.9 करोड़     जबलपुर – 789.7 करोड़ मार्च में सर्वाधिक राजस्व इंदौर जिले में वित्तीय वर्ष 2025-26 में सर्वाधिक राजस्व मार्च माह में 537.09 करोड़ रुपये जुटाया गया। इसी माह में सर्वाधिक 29086 दस्तावेज पंजीकृत हुए थे। दिसंबर माह में भी पंजीयन कार्यालय द्वारा 17441 दस्तावेज पंजीकृत किए गए और 238.28 करोड़ रुपये राजस्व जुटाया गया। सबसे कम राजस्व अप्रैल माह में 114.48 करोड़ रुपये राजस्व जमा हुआ और 7944 दस्तावेज पंजीकृत हुए थे। विजयनगर क्षेत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन इंदौर जिले में सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन विजयनगर स्थित पंजीयन कार्यालय ने किया। आंकड़ों के अनुसार इस क्षेत्र ने लक्ष्य के विरुद्ध 90.83 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की। यह प्रदर्शन न केवल जिले के भीतर सर्वोच्च रहा, बल्कि प्रदेशभर के कई बड़े कार्यालयों से भी बेहतर साबित हुआ। वर्ष-दर-वर्ष तुलना में भी इस कार्यालय की वृद्धि दर 11.63 प्रतिशत रही। यह आकड़े दर्शाते हैं कि जिले में संपत्ति पंजीयन की गतिविधियां तेज हुई हैं और बाजार की स्थिति में भी सुधार हुआ है। वर्ष 2024-25 में कार्यालय ने 677.75 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित किया था, जबकि वर्ष 2025-26 में यह बढक़र 756.98 करोड़ रुपए पहुंच गया। क्षेत्र में संपत्ति के पंजीयन, क्रय-विक्रय और वाणिज्यिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। इंदौर-महूनाका ने भी दिखाया दम महू नाका स्थित पंजीयन कार्यालय ने लक्ष्य के 81.85 प्रतिशत के टारगेट को पूरा किया है। महू नाका क्षेत्र ने सबसे अधिक राजस्व में बढ़ोतरी करते हुए इंदौर को पहले पायदान पर खड़ा करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। 22.59 प्रतिशत की बढ़ोतरी से इस क्षेत्र ने पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय बढ़त हासिल की, जिसने जिले की रैंकिंग को ऊपर बनाए रखने में भूमिका निभाई। मोती तबेला स्थित कार्यालय लक्ष्य का केवल 61.41 प्रतिशत ही हासिल कर पाया। इंदौर-2 कार्यालय मार्च में 79.85 प्रतिशत का लक्ष्य पूरा कर पाया। पिछले वर्ष की तुलना में 2.13 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वहीं ढक्कनवाला कुआं स्थित पंजीयन कार्यालय ने धीमी, लेकिन संतुलित प्रगति हासिल की। किसने पिछले वर्ष के मुकाबले कम कमाई की आंकड़ों के अनुसार कुल 4 कार्यालयों में पिछले वर्ष की तुलना में राजस्व में गिरावट दर्ज हुई। इन कार्यालयों ने कम कमाई की- ग्वालियर-1 ने माइनस 1.96% ,ग्वालियर-2 ने माइनस 2.17% इंदौर-1 में माइनस 6.10% व उज्जैन भी 9.69 प्रतिशत कमी की सूची में सबसे निचले पायदान पर है। यहां सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई है। उज्जैन ने 102 करोड़ के लक्ष्य के विरुद्ध केवल 61.85त्न प्राप्त किया और सबसे अधिक 9.69 प्रतिशत की कमी दर्ज की।

8th Pay Commission: 1.89x हो सकता है फिटमेंट फैक्टर, DA रीसेट होगा, कैलकुलेशन पर नजर डालें

नई दिल्ली DA का 60% पहुंचना सिर्फ एक डेटा पॉइंट नहीं है- यह 8वें वेतन आयोग की पूरी दिशा तय करने वाला संकेत है.अब तस्वीर साफ है न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर 1.60 गुना होगा, लेकिन संभावनित वास्तविक स्तर 1.89 गुना हो सकता है. बाकी फैसला करेगा- समय, महंगाई और सरकार का संतुलन।  केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग (8th pay commission) की सबसे बड़ी पहेली- फिटमेंट फैक्टर कितना होगा? अब धीरे-धीरे साफ होने लगी है।  महंगाई भत्ता (DA) जब 60% के स्तर पर पहुंच गया, तो यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं रहा, बल्कि नई सैलरी स्ट्रक्चर का बेस बन गया है।  यानी अब सवाल ये नहीं है कि सैलरी बढ़ेगी या नहीं… बल्कि ये है कि कितनी बढ़ेगी और किस फॉर्मूले से बढ़ेगी।  DA का 60% होना बना नया आधार महंगाई भत्ता (DA) जब 60% के स्तर पर पहुंचता है, तो यह केवल एक आंकड़ा नहीं होता, बल्कि अगले वेतन आयोग के लिए सैलरी स्ट्रक्चर का ‘बेस’ बन जाता है। पुराने नियमों के मुताबिक, जब भी नया वेतन आयोग आता है, तो पिछले DA को बेसिक सैलरी में मर्ज कर दिया जाता है। समझिए गणित:     चूंकि वर्तमान महंगाई दर के हिसाब से DA 60% तक पहुंच चुका है, इसलिए न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर 1.60 होना तय है।     यदि फिटमेंट फैक्टर 1.60 से कम रखा गया, तो कर्मचारियों की सैलरी महंगाई की तुलना में कम हो जाएगी। क्या होगा नया फिटमेंट फैक्टर? (1.89x की संभावना) जानकारों का कहना है कि 8वें वेतन आयोग के लागू होने में यदि देरी होती है और DA 72% से 76% के करीब पहुंचता है, तो नया सैलरी इंडेक्स 1.72 से 1.76 के बीच होगा। ऐसे में सरकार संतुलन बनाने के लिए फिटमेंट फैक्टर को 1.89 गुना तक बढ़ा सकती है। हाइलाइट्स: क्या बदलेगा आपके लिए?     DA होगा जीरो: नया वेतन आयोग लागू होते ही महंगाई भत्ता (DA) फिर से 0 से शुरू होगा।     सैलरी इंडेक्स: न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर 1.60 (फ्लोर) होगा, जबकि वास्तविक स्तर 1.89x तक जा सकता है।     पेंशनर्स को लाभ: कर्मचारियों के साथ-साथ पेंशनर्स की पेंशन भी इसी आधार पर संशोधित होगी।     नया फॉर्मूला: नई बेसिक सैलरी = (पुरानी बेसिक सैलरी × फिटमेंट फैक्टर)। कब लागू होगा 8वां वेतन आयोग? फिलहाल सरकार ने आधिकारिक तौर पर कोई तारीख घोषित नहीं की है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक इसकी सिफारिशें लागू हो सकती हैं। फिटमेंट फैक्टर जितना अधिक होगा, कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में उतना ही बड़ा उछाल आएगा। क्या संकेत मिल रहे हैं?     DA 60%= सैलरी इंडेक्स 1.60     1.60= न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर (फ्लोर)     देरी के साथ DA 72-76% तक जा सकता है     संभावित फिटमेंट फैक्टर रेंज= 1.80 से 1.89x     DA एडजस्ट होकर फिर 0 से शुरू होगा DA 60% होते ही चर्चा क्यों तेज हुई? हर वेतन आयोग का बेसिक नियम है: पुराने DA को बेसिक सैलरी में जोड़कर नया वेतन तय होता है।  अब समझिए: अगर DA 60% है, तो इसका मतलब है कि आपकी मौजूदा सैलरी पहले ही 60% महंगाई का असर झेल चुकी है।  इसलिए नया फिटमेंट फैक्टर 1.60 से कम हुआ तो महंगाई की भरपाई ही नहीं होगी।  यही वजह है कि 1.60 अब न्यूनतम सीमा बन चुका है. Q1: DA 60% कैसे पहुंचा और इसका मतलब क्या है? CPI-IW (Industrial Workers Index) के आधार पर DA तय होता है.     दिसंबर 2025 इंडेक्स: 148.2     DA गणना: 60.35%     लागू स्तर: 60% इसका मतलब: अगर आपकी बेसिक सैलरी 100 थी, तो अब प्रभावी सैलरी 160 के बराबर है. Q2: फिटमेंट फैक्टर का असली गणित क्या कहता है? फॉर्मूला बहुत सीधा है: नई सैलरी= पुरानी बेसिक × फिटमेंट फैक्टर DA 60%- इंडेक्स= 1.60 लेकिन यहीं कहानी खत्म नहीं होती. अगर वेतन आयोग लागू होने में देरी होती है: DA और बढ़ेगा, 72%-76% तक पहुंच सकता है. इससे नया इंडेक्स बनता है: 1.72-1.76 अब इसमें जुड़ता है: स्ट्रक्चरल बफर (10-13%) Final अनुमान: 1.80 से 1.89 (सबसे यथार्थ रेंज) Q3: क्या 1.89 फाइनल हो सकता है? सीधा जवाब- संभावना मजबूत है, लेकिन गारंटी नहीं. क्यों? क्योंकि सरकार इन चीजों को भी देखती है:     आर्थिक स्थिति     वेतन बढ़ोतरी का बोझ     कर्मचारियों की मांग     महंगाई का भविष्य यानी यह सिर्फ गणित नहीं, पॉलिसी डिसीजन भी है

भारत और रूस की साझेदारी ने पलट दिया गेम, ट्रंप के रोकने के बावजूद 3 साल में ऐसा नहीं हुआ

नई दिल्ली स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी संकट और ग्लोबल सप्लाई चेन पर बढ़ते दबाव के बीच भारत ने अपनी रणनीति साफ कर दी है. दुनिया जहां तेल की कमी से जूझ रही है, वहीं भारत ने बिना देरी किए रूसी कच्चे तेल की खरीद फिर से तेज कर दी है. भारत अपनी करीब 90 प्रतिशत कच्चे तेल की जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, ऐसे में किसी भी ग्लोबल व्यवधान का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. यही वजह है कि अब फोकस सस्ते तेल से ज्यादा लगातार सप्लाई पर है।  ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 में भारत ने रूस से करीब 1.98 मिलियन बैरल प्रति दिन कच्चा तेल खरीदा. यह जून 2023 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है. अप्रैल में यह आंकड़ा घटकर 1.57 मिलियन बैरल प्रति दिन पर आया है, लेकिन इसकी वजह मांग में कमी नहीं बल्कि तकनीकी कारण हैं. नायरा एनर्जी की रिफाइनरी में मेंटेनेंस शटडाउन के चलते अस्थायी गिरावट आई है. बाजार को उम्मीद है कि अगले महीने से फिर तेजी देखने को मिलेगी।  अब सप्लाई सिक्योरिटी है फोकस वेस्ट एशिया से आने वाली सप्लाई में अनिश्चितता ने भारतीय रिफाइनरियों की प्राथमिकता बदल दी है. अब सवाल यह नहीं है कि तेल कितना सस्ता है, बल्कि यह है कि वह लगातार मिल पा रहा है या नहीं. ऊर्जा बाजार की विशेषज्ञ वंदना हरि (Vandana Hari) का कहना है कि “भारत जितना रूसी कच्चा तेल हासिल कर सकता है, उतना खरीद रहा है. जब तक पर्शियन गल्फ से सप्लाई बाधित रहेगी, तब तक भारत रूसी तेल की अधिकतम खरीद जारी रखेगा।  वहीं, पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा (Sujata Sharma) ने कहा, “हमारी प्राथमिकता घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए ऊर्जा उपलब्ध कराना है. यह फैसला तकनीकी और व्यावसायिक व्यवहार्यता के आधार पर लिया जाता है।  पुरानी रणनीति की वापसी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने डिस्काउंट के चलते रूसी तेल की खरीद तेजी से बढ़ाई थी. उस समय भारत रूस का सबसे बड़ा खरीदार बन गया था. हालांकि 2025 में अमेरिकी दबाव और प्रतिबंधों के कारण खरीद में थोड़ी कमी आई, लेकिन मौजूदा संकट ने भारत को फिर उसी रणनीति की ओर लौटा दिया है।  घट रहा ग्लोबल स्टॉक, बढ़ रही टेंशन ग्लोबल मार्केट में एक और संकेत चिंता बढ़ाने वाला है. समुद्र में जमा रूसी तेल का स्टॉक तेजी से घट रहा है. पिछले साल के अंत में यह करीब 155 मिलियन बैरल था, जो अब घटकर करीब 100 मिलियन बैरल रह गया है. इसका मतलब है कि डिमांड बढ़ रही है और सप्लाई पर दबाव लगातार बना हुआ है। 

ईरान ने चीनी सैटेलाइट के जरिए अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं, रिपोर्ट से बढ़ी चिंताएं

तेहरान  ईरान ने चीन के जासूसी सैटेलाइट का इस्तेमाल करते हुए मिडल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी ठिकानों की रेकी की थी। इसी के चलते उसे पूरी जानकारी मिल गई थी और फिर जंग में उसने चुन-चुनकर अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। चीनी सैटेलाइनट का यह इस्तेमाल 2024 के आखिरी दिनों में किया गया था। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान ने TEE-01B सैटेलाइट्स का इस्तेमाल किया था। इन्हें चीन की कंपनी 'अर्थ आई' ने तैयार किया है। इनकी सेवाओं को ईरानी सेना की एयरोस्पेस फोर्स ने खरीदा था। चीन की ओर से इन सैटेलाइट्स को लॉन्च करने के कुछ दिन बाद ही ईरान ने सेवाएं ली थीं। इस बीच चीनी विदेश मंत्रालय ने ऐसी रिपोर्ट्स को खारिज किया है। उसका कहना है कि चीन पर टैरिफ लगाने के लिए ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं। इन मनगढ़ंत आरोपों का इस्तेमाल हमारे ऊपर टैरिफ लगाने के बहाने के तौर पर किया जा सकता है। चीनी मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि यदि अमेरिका ने हमारे ऊपर टैरिफ बढ़ाया तो फिर हम भी उसका जवाब देंगे। फाइनेंशियल टाइम्स ने लिखा है कि उसने ईरानी सेना के लीक दस्तावेजों के अध्ययन के बाद यह जानकारी दी है। अखबार का कहना है कि ईरानी सेना के कमांडरों ने सैटेलाइट से कहा था कि वह अमेरिकी मिलिट्री ठिकानों की मॉनिटरिंग करे। इसके बाद सैटेलाइट की मदद से तस्वीरें और अन्य जानकारियां हासिल की गईं। इन तस्वीरों को काफी पहले ही जुटाया गया था। इसके बाद जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले किए तो उसने भी जवाबी हमले किए। ईरान ने इराक, कतर, सऊदी अरब समेत कई देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए। जानकारी यह भी है कि चीनी सैटेलाइट्स की रेंज में एशिया का ज्यादातर हिस्सा आता है। इसके अलावा लैटिन अमेरिका समेत कई और क्षेत्र उसकी जद में हैं। 'ट्रंप भी कह चुके मेरा इरादा चीन को टारगेट करना' बता दें कि चीन पर डोनाल्ड ट्रंप खुद ही आरोप लगा चुके हैं कि उसने ईरान को हथियारों के जरिए मदद की है। उनका कहना था कि मैंने कुछ देशों पर 50 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने की जो बात कही है, वह मुख्य रूप से चीन के लिए ही है। गौरतलब है कि मई में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद चीन जाने वाले हैं। माना यह भी जा रहा है कि शायद अपने दौरे से पहले एक बेहतर डील के लिए चीन पर दबाव डालने की भी उनकी यह रणनीति हो सकती है।

अमेरिका ने ईरान से तेल आयात पर प्रतिबंध छूट को बढ़ाने से मना किया

वॉशिंगटन  बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच अमेरिका के वित्त मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि उसका ईरानी तेल पर लगे बैन में कुछ समय के लिए दी गई छूट को बढ़ाने का कोई इरादा नहीं है. इसे युद्ध की वजह से सप्लाई में रुकावटों को कम करने के लिए लागू किया गया था।  यह कदम तेहरान पर दबाव बढ़ाने की अमेरिका की बड़ी रणनीति का हिस्सा है. वित्त मंत्रालय का कहना है कि वह ईरान की आर्थिक और ऊर्जा को लेकर गतिविधि पर रोक लगाने के मकसद से 'इकोनॉमिक फ्यूरी' अप्रोच को आगे बढ़ा रहा है।  वित्त मंत्रालय इकोनॉमिक फ्यूरी के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है, ईरान पर ज़्यादा से ज़्यादा दबाव बनाए हुए है. फाइनेंशियल संस्थानों को पता होना चाहिए कि डिपार्टमेंट मौजूद सभी टूल्स और अथॉरिटी का इस्तेमाल कर रहा है और विदेशी कंपनियों के खिलाफ सेकेंडरी बैन लगाने के लिए तैयार है जो ईरान की एक्टिविटीज को सपोर्ट करना जारी रखते हैं।  अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने कहा कि समुद्र में पहले से फंसे ईरानी तेल की बिक्री की इजाजत देने वाला शॉर्ट-टर्म ऑथराइज़ेशन कुछ दिनों में खत्म होने वाला है और इसे रिन्यू नहीं किया जाएगा. इससे पहले 21 मार्च को अमेरिका ने शुक्रवार (लोकल टाइम) को इस साल 19 अप्रैल तक ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर लगी पाबंदियों में कुछ समय के लिए ढील देने का ऐलान किया था. इसमें अमेरिका में ईरानी कच्चे और रिफाइंड प्रोडक्ट्स की बिक्री की इजाजत देना भी शामिल था।  इस फैसले की जानकारी अमेरिकी वित्त मंत्रालय के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल के एक बयान से मिली. इसने 20 मार्च से जहाजों पर लोड किए गए ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की डिलीवरी और बिक्री को मंजूरी दी थी. बयान में 19 अप्रैल, 2026 को वह तारीख बताया गया, जब तक ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर छूट रहेगी।  इसमें कहा गया है कि कुछ अपवादों को छोड़कर, 'ऊपर बताई गई अथॉरिटीज द्वारा मना किए गए सभी ट्रांज़ैक्शन जो आम तौर पर किसी भी जहाज पर लोड किए गए ईरानी मूल के कच्चे तेल या पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की बिक्री, डिलीवरी या उतारने के लिए जरूरी है. इसमें ऊपर बताई गई अथॉरिटीज के तहत ब्लॉक किए गए जहाज भी शामिल हैं. 20 मार्च, 2026 को रात 12:01 बजे ईस्टर्न डेलाइट टाइम या उससे पहले, वे 19 अप्रैल, 2026 को रात 12:01 बजे ईस्टर्न डेलाइट टाइम तक मंजूर हैं।  बयान में कहा गया है कि लाइसेंस से मंजूर ट्रांज़ैक्शन में ईरान से आने वाले कच्चे तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट का अमेरिका में इम्पोर्ट भी शामिल है. चूंकि ईरान के साथ लड़ाई अभी भी जारी है, इसलिए यह रणनीतिक जलमार्ग ज्यादातर समुद्री ट्रैफिक के लिए असल में बंद है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और राजनयिक रिश्तों पर दबाव बना हुआ है। 

8th Pay Commission में अहम बदलाव, केंद्र सरकार ने अंबिका आनंद को निदेशक पद पर किया नियुक्त

नई दिल्ली 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission)  को लेकर एक अहम खबर सामने आई है। कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने व्यय विभाग के अंतर्गत आठवें केंद्रीय वेतन आयोग में दो अधिकारियों – स्मिता मोल एम एस और अंबिका आनंद की  नियुक्ति को लेटरल ट्रांसफर के आधार पर मंजूरी दे दी है। स्मिता मोल एम एस, फिलहाल नागरिक उड्डयन मंत्रालय में उप सचिव के पद पर कार्यरत हैं और उन्हें 8वें CPC में उप सचिव नियुक्त किया गया है। वहीं, अंबिका आनंद, इस्पात मंत्रालय में वर्तमान में निदेशक के पद पर कार्यरत हैं, उन्हें 8वें सीपीसी में निदेशक नियुक्त किया गया है। क्या होगा दोनों अधिकारियों का कार्यकाल स्मिता मोल एम एस का कार्यकाल आयोग के साथ ही समाप्त हो जाएगा और इसे 14 अप्रैल, 2029 तक बढ़ाया जा सकता है, जो केंद्रीय कर्मचारी योजना के तहत उनके चार साल के कार्यकाल की शेष अवधि के बराबर है, या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो। वहीं, अंबिका आनंद का कार्यकाल भी आयोग के साथ ही समाप्त होगा और केंद्रीय कर्मचारी योजना के तहत उनके स्वीकार्य पांच वर्षीय कार्यकाल की शेष अवधि के अनुरूप, 13 अक्टूबर, 2030 तक या अगले आदेश तक बढ़ाया जा सकता है। इन नियुक्तियों से पहले, सरकार ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग में दो वरिष्ठ अधिकारियों को संयुक्त सचिव के रूप में नियुक्त करने की मंजूरी दी थी। इनमें अमित सतीजा (आईएएस) और नीरज कुमार गयागी (आईडीएएस) को व्यय विभाग के अधीन कार्यरत आयोग में संयुक्त सचिव के रूप में नियुक्त किया गया था। इससे पहले खबर आई थी कि नेशनल काउंसिल की स्टाफ साइड ने आयोग को अपना 51 पेज का मेमोरेंडम तय समय से पहले भेज दिया है। जेसीएम के सचिव शिव गोपाल मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि, "कर्मचारियों की जरूरतों और बढ़ती महंगाई को ध्यान में रखते हुए कई अहम प्रस्ताव दिए गए हैं।" सैलरी-एरियर की ये है डिटेल केंद्रीय कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का बेसब्री से इंतजार है। यह वेतन आयोग 18 महीने के भीतर अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगा। सिफारिशों के लागू होने से पहले वेतन आयोग से जुड़ी कुछ ऐसी बातें हैं जो केंद्रीय कर्मचारियों को जान लेना जरूरी है। उदाहरण के लिए यह जानना जरूरी है कि कितने केंद्रीय कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा। इसके अलावा, सैलरी और एरियर को वेतन आयोग कैसे निर्धारित करते हैं। 8वें वेतन के बारे में दरअसल, केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और पेंशन को संशोधित करने के लिए हर 10 साल में गठित किया जाता है। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। इसके सदस्यों में प्रोफेसर पुलक घोष और पंकज जैन शामिल हैं। वेतन आयोग विभिन्न मंत्रालयों, कर्मचारी संघों, पेंशनभोगियों और अन्य संबंधित पक्षों से विचार और सुझाव इकट्ठा करता है। ये सुझाव इकट्ठा हो जाने के बाद वेतन आयोग सैलरी स्ट्रक्चर, पेंशन फॉर्मूलों और भत्तों के पैटर्न का विश्लेषण और अध्ययन करता है और उसके बाद ही अंतिम सिफारिशें देता है। वेतन आयोग का कब गठन हुआ? बता दें कि 8वें वेतन आयोग की घोषणा पिछले साल जनवरी महीने में की गई थी। इसके लिए संदर्भ की शर्तें (ToR) पिछले साल नवंबर में जारी की गई थीं। तब से ही सैलरी ग्रोथ, बकाया, संशोधनों और पेंशन स्ट्रक्चर में प्रस्तावित बदलावों के लागू होने को लेकर काफी अटकलें लगाई जा रही हैं। इस बीच, वेतन आयोग के पास अपनी सिफारिशें जमा करने के लिए कुल 18 महीने का समय है। बता दें कि 7वें वेतन आयोग को बनने से लेकर लागू होने तक 2.5 साल लगे और 6वें वेतन आयोग को 2 साल जबकि 5वें वेतन आयोग को 3.5 साल लगे। बहरहाल, अब वेतन आयोग की 24 अप्रैल 2026 को देहरादून में एक बैठक भी होने वाली है। फिटमैंट फैक्टर की अहम भूमिका वेतन आयोग वेतन को लेकर जो भी सिफारिशें करेगा उसमें फिटमैंट फैक्टर की अहम भूमिका होगी। फिटमेंट फैक्टर एक ऐसा मल्टीप्लायर है जो पुरानी बेसिक पे को नई (संशोधित) बेसिक पे में बदलता है। इस मामले में फैक्टर जितना ज्यादा होगा सैलरी और पेंशन में उतनी ही अधिक बढ़ोतरी होगी। इसका असर प्रोविडेंट फंड में किए जाने वाले योगदान, ग्रेच्युटी से जुड़ी गणनाओं और बेसिक पे से जुड़े रिटायरमेंट के अन्य लाभों पर भी पड़ता है। आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का फायदा केंद्र सरकार के लगभग 50 लाख कर्मचारियों और 65 लाख रिटायर्ड पेंशनभोगियों को मिलने की उम्मीद है। कहने का मतलब है कि एक करोड़ से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा। बता दें कि वेतन आयोग की सिफारिशें एक जनवरी 2026 से प्रभावी होने की उम्मीद है। कहने का मतलब है कि केंद्र सरकार के इन कर्मचारियों को एरियर के तौर पर मोटी रकम मिल सकती है।  

योगी सरकार ने गंगा किनारों का विकास कर 90 हजार परिवारों को बनाया आत्म निर्भर

गंगा के किनारे 26 जिलों में ऑर्गेनिक क्लस्टर से बदल रही यूपी की तस्वीर योगी सरकार ने गंगा किनारों का विकास कर 90 हजार परिवारों को बनाया आत्म निर्भर गंगा किनारे प्रदेश में अब आस्था के साथ बह रही है समृद्धि की नई धारा ऑर्गेनिक विलेज डेवलप कर रही योगी सरकार, रसायन-मुक्त खेती को बनाया मिशन नमामि गंगे के तहत 3,370 जैविक क्लस्टर संचालित, जैविक और प्राकृतिक खेती से किसान बन रहे समृद्ध लखनऊ मां गंगा के किनारे उत्तर प्रदेश में अब आस्था के साथ समृद्धि की नई धारा भी बह रही है। योगी सरकार ने गंगा के तटवर्ती 26 जिलों में जैविक खेती का ऐसा मॉडल तैयार किया है, जो न सिर्फ किसानों की आय बढ़ा रहा है बल्कि प्रदेश की कृषि व्यवस्था को भी नई दिशा दे रहा है। नमामि गंगे योजना के तहत गंगा के दोनों किनारों पर 5-5 किलोमीटर क्षेत्र में 3,370 जैविक क्लस्टर विकसित किए गए हैं, जिनसे करीब 90 हजार किसान परिवार आत्मनिर्भर बने हैं। योगी सरकार इन क्षेत्रों में ऑर्गेनिक विलेज विकसित कर रसायन-मुक्त खेती को मिशन मोड में आगे बढ़ा रही है।       कम लागत और ज्यादा मुनाफा जैविक और प्राकृतिक खेती अपनाने से किसानों की उत्पादन लागत घटी है। रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता कम होने से जहां लागत घटी है, लाख ही बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पादों से बाजार में अधिक कीमत मिल रही है। यह पहल केवल खेती सुधार तक सीमित नहीं है। इससे गंगा की स्वच्छता, मिट्टी की गुणवत्ता,  भूजल संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था सभी को लाभ मिल रहा है। गांव-गांव प्रशिक्षण, तकनीक और प्रोत्साहन केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और प्रोत्साहन उपलब्ध कराया जा रहा है। प्राकृतिक उर्वरक और पारंपरिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देकर टिकाऊ खेती का मॉडल तैयार किया जा रहा है। वहीं, वर्ष 2024-25 में नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत राज्य स्वच्छ गंगा मिशन द्वारा अब तक 35 जनपदों में जिला स्तर पर प्राकृतिक खेती की कार्यशालाएं आयोजित की जा चुकी हैं। आगामी वित्तीय वर्ष में बाकी जनपदों में भी कार्यशालाएं प्रस्तावित हैं। ऑर्गेनिक विलेज में मिल रहे ऑर्गेनिक खाद्य पदार्थ प्रदेश के 26 गंगा तटवर्ती जिलों में चल रहे इस अभियान के तहत अब तक 3,370 जैविक क्लस्टर स्थापित किए जा चुके हैं, जिनसे किसान परिवार सीधे जुड़ चुके हैं और आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। गंगा के दोनों किनारों पर ऑर्गेनिक बेल्ट को इस मॉडल के लिए विकसित किया गया है, जहां गांव स्तर पर ऑर्गेनिक विलेज तैयार किए जा रहे हैं। जिससे लोगों को ऑर्गेनिक खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।  रसायन-मुक्त उत्पादन से उपभोक्ताओं के बीच बढ़ी डिमांड इस योजना की खास बात ये है कि एक ओर जहां किसानों की आय बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर लोग कीटनाशकों से प्रभावित वस्तुओं से होने वाली बीमारियों से भी बच रहे हैं। किसानों का रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों पर खर्च घटा है, वहीं दूसरी ओर  मिट्टी की उर्वरता बेहतर हुई है। इसके चलते  जैविक उत्पादों को बाजार में प्रीमियम रेट मिल रहा है और रसायन-मुक्त उत्पादन से उपभोक्ताओं के बीच मांग भी बढ़ी है।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा: चिकित्सा छात्रों को समय पर छात्रवृत्ति का भुगतान सुनिश्चित करें

भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में चिकित्सा शिक्षा छात्रों को विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत दी जा रही छात्रवृत्ति एवं अन्य लाभों के भुगतान की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अंतर्विभागीय समन्वय से छात्रवृत्ति एवं संबंधित हितलाभों का समयबद्ध एवं सुचारू भुगतान सुनिश्चित किया जाए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि छात्रों को उनकी पात्रता अनुसार मिलने वाले सभी लाभ बिना किसी विलंब के प्राप्त हों। उन्होंने निर्देशित किया कि भुगतान प्रक्रिया में किसी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक बाधा उत्पन्न न हो तथा यदि ऐसी कोई समस्या आती है तो उसका त्वरित निराकरण किया जाए। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि विद्यार्थियों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को प्रदान की जा रही छात्रवृत्ति योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। साथ ही संबल योजना एवं मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना के अंतर्गत हितलाभ वितरण की अद्यतन स्थिति की भी समीक्षा की। बैठक में अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, संचालक चिकित्सा शिक्षा डॉ अरुणा कुमार सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रीवा जिले में लोक निर्माण विभाग के विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रीवा जिले में लोक निर्माण विभाग के आधारभूत संरचना विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की कमिश्नर बंगला से ढेकहा तिराहे तक 700 करोड़ रुपए की लागत से बनेगा फ्लाइओवर लक्ष्मण बाग, संस्‍कृत विश्‍वविद्यालय तक सहज एवं सुगम पहुंच मार्ग के लिये बिछिया नदी में बनेगा पुल भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय, भोपाल में रीवा जिले में लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत प्रस्तावित सड़क एवं आधारभूत संरचना विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सभी प्रस्तावों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र अंतिम रूप देकर टेंडर प्रक्रिया प्रारंभ की जाए जिससे विकास कार्य समयबद्ध रूप से शुरू हो सकें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रीवा में कमिश्नर बंगला से ढेकहा तिराहे तक 700 करोड़ रुपए की लागत से प्रस्तावित फ्लाइओवर निर्माण कार्य पर विशेष चर्चा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि यह फ्लाइओवर वर्तमान यातायात दबाव को कम करने के साथ भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आधुनिक एवं दूरदर्शी ट्रैफिक मैनेजमेंट प्रणाली विकसित करेगा। इसके निर्माण से शहर में सुगम एवं व्यवस्थित आवागमन सुनिश्चित होगा तथा यातायात बाधाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने लक्ष्मण बाग से कुठुलिया मार्ग में बिछिया नदी पर प्रस्तावित पुल निर्माण कार्य की भी समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि कुठुलिया मार्ग का विकास लक्ष्मण बाग सहित संस्‍कृत विश्‍वविद्यालय तक सहज एवं सुगम पहुंच का मार्ग प्रशस्त करेगा। इससे विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं स्थानीय नागरिकों को आवागमन में विशेष सुविधा प्राप्त होगी। उन्होंने रिवर फ्रंट के सौंदर्यीकरण कार्य को भी परियोजना में शामिल करने के निर्देश दिए। बैठक में लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने प्रस्तावित परियोजनाओं की प्रगति एवं कार्ययोजना की जानकारी प्रस्तुत की।

परिसीमन में कोई बदलाव नहीं, दक्षिण राज्यों को नहीं होगा नुकसान, जानें किस राज्य को कितनी सीटें मिलेंगी

नई दिल्ली लोकसभा में सीटें बढ़ने की तैयारी है। गुरुवार को संसद में महिलाओं को आरक्षण देने के लिए बिल पेश होने जा रहा है। इसी बीच खबरें हैं कि सभी राज्यों में लोकसभा में हिस्सेदारी 50 फीसदी बढ़ जाएगी। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। विधेयकों में सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव दिया गया था, जिसे लेकर दक्षिण के कुछ राज्यों में सीटों की संख्या को लेकर चिंताएं बनी हुईं थीं। सरकार जो तीन विधेयक लाने जा रही है उनमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक, 2026 व केंद्र शासित कानून (संशोधन) विधेयक 2026 शामिल हैं। न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार के सूत्र बताते हैं कि लोकसभा में सभी राज्यों की हिस्सेदारी में 50 प्रतिशत का इजाफा होगा। सरकार महिलाओं के आरक्षण के लिए संविधान में संशोधन बिल ला रही है। इसके लिए सत्र 16 अप्रैल से शुरू हो रहा है, जो 18 अप्रैल तक चलेगा। दक्षिण राज्यों को क्या मिलेगा रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया, '2011 की जनगणना अब कोई जरूरी शर्त नहीं होगी। इसका मतलब है कि अनुपात के हिसाब से कुछ भी नहीं बदलेगा। इससे दक्षिण भारतीय राज्यों की यह चिंता दूर हो जाएगी कि संसद में उनकी हिस्सेदारी या सीटें कम हो सकती हैं।' उन्होंने कहा, 'दक्षिण भारतीय राज्यों के लिए कुछ भी नुकसान नहीं है। जो अनुपात आज है, वो बरकरार रहेगा।' दक्षिणी राज्यों की चिंता दक्षिणी राज्यों के कई नेता, खासकर तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और आंध्र प्रदेश के नेताओं ने परिसीमन को लेकर चिंता जताई थी. उनका कहना था कि जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों को राजनीतिक रूप से नुकसान नहीं होना चाहिए. सरकारी सूत्रों का यह बयान इन चिंताओं का जवाब माना जा रहा है. सूत्रों ने स्पष्ट किया कि परिसीमन का उद्देश्य किसी राज्य को लाभ या नुकसान पहुंचाना नहीं है, बल्कि लोकसभा की क्षमता बढ़ाना और लोकतंत्र को और अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाना है. हालांकि, अंतिम रूप से सीटों का आवंटन और नए क्षेत्रों का निर्धारण परिसीमन आयोग द्वारा किया जाएगा. सरकार ने कहा है कि आयोग को भी मौजूदा अनुपात बनाए रखने के निर्देश दिए जाएंगे. यह फैसला संसद के विशेष सत्र में चर्चा के दौरान सामने आया है, जहां परिसीमन और महिलाओं के आरक्षण से संबंधित विधेयक पेश किए जाने की तैयारी है. सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह व्यवस्था संघीय ढांचे को मजबूत रखते हुए लोकसभा को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास है. दक्षिणी राज्यों को आश्वासन दिया गया है कि उनकी राजनीतिक आवाज कम नहीं होगी।  तमिलनाडु सीएम ने दी थी चेतावनी मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने मंगलवार को चेतावनी दी थी कि अगर परिसीमन प्रक्रिया में राज्य के हित को नुकसान पहुंचाने वाला कोई कदम उठाया गया या उत्तरी राज्यों की राजनीतिक ताकत में अनुचित वृद्धि की गई, तो तमिलनाडु में बड़े पैमाने पर आंदोलन होंगे, 'पूरी ताकत से विरोध प्रदर्शन' होंगे जिससे राज्य ठप पड़ सकता है। स्टालिन ने कहा कि देश को एक बार फिर '1950 और 1960 के दशक की द्रमुक देखने को मिल सकती है।' पहले भी लगाए थे आरोप स्टालिन ने 14 अप्रैल को आरोप लगाया था कि महिला आरक्षण पर मसौदा विधेयक से पता चलता है कि यह एक 'षड्यंत्र' है, जो परिसीमन लागू होने पर तमिलनाडु और उत्तरी राज्यों के बीच अंतर को बढ़ाएगा। तेलंगाना भी सक्रिय मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने दक्षिणी राज्यों और पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर एक 'हाइब्रिड मॉडल' का प्रस्ताव रखा है। जिसके तहत प्रस्तावित अतिरिक्त सीट में से 50 प्रतिशत सीट आनुपातिक आधार पर आवंटित की जाएंगी और शेष सीट GSDP (सकल राज्य घरेलू उत्पाद) और अन्य मानदंडों के आधार पर आवंटित की जाएंगी।