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किसानों को सस्ती बिजली उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

किसानों को सस्ती बिजली उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव किसानों को सोलर पम्प उपयोग के लिए करें प्रोत्साहित योजनाओं को समयबद्ध कर लाएं परिणाम किसानों को ऊर्जा उत्पादन से जोड़ने के लिए संभाग एवं जिला स्तर पर हों कार्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग की योजनाओं की समीक्षा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों को निर्बाध रूप से सस्ती बिजली सुलभ कराना हमारी सरकार की प्राथमिकता है। इस काम केलिए सरकार किसानों को हर जरूरी मदद देने को तैयार है। किसानों को सस्ती बिजली मिलेगी, तो वे अपना उत्पादन भी बढ़ा सकेंगे और प्रदेश की प्रगति में भी योगदान दे सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप ऊर्जा प्राप्ति के लिए उन्हें स्वयं ऊर्जा उत्पादक बनाया जाए। इसके लिए किसानों को हरित ऊर्जा उत्पादन से जोड़ा जाए। ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाकर ही हम किसानों का जीवन स्तर बेहतर बना सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के किसानों को सोलर पम्प का उपयोग करने के लिए हर तरीके से प्रोत्साहित किया जाए। किसानों को जो इससे जुड़ना चाहते हैं, विभाग उनका हरसंभव सहयोग और मार्गदर्शन भी करे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को मंत्रालय में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग की प्रचलित योजनाओं की अद्यतन प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभागीय अधिकारियों से कहा कि राज्य के हित में किसानों और नागरिकों सभी को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के लक्ष्य के लिए समर्पित और फोकस्ड होकर आगे बढ़ें। किसानों को सोलर पम्प से जोड़ने के साथ-साथ प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना की प्रगति में भी तेजी लाएं। उन्होंने कहा कि इस वित्तीय वर्ष के अंत तक 2 लाख से अधिक किसानों को सोलर पम्प से जोड़ने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ें। विभाग अपनी योजनाओं के वार्षिक लक्ष्यों की समीक्षा करें और नई जरूरतों के मुताबिक इन लक्ष्यों में वृद्धि करें, ताकि कम समय में अधिकतम लोगों को लाभ मिले। इसके लिए विभाग अपनी योजनाओं को टाइम फ्रेम में लेकर आएं और तय समय सीमा में ही लक्ष्यों का क्रियान्वयन सुनिश्चित करे। इससे तेज और अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे। निकाय पदाधिकारियों के साथ भोपाल में होगा एक दिन का उन्मुखीकरण कार्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सभी नगरीयनिकाय कचरा बेचकर और प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना (रूफ टॉप स्कीम) में तेजी से प्रगति लाकर अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं। नगरीय निकायों के पदाधिकारियों एवं अधिकारियों को इस विषय में प्रशिक्षण देने के लिए भोपाल में एक दिन का उन्मुखीकरण कार्यक्रम किया जाए। यह कार्यक्रम जल्दी ही किया जाए, ताकि निकायों को काम करने के लिए अधिकतम समय मिल सके। राज्य के ऊर्जा हितों का रखें विशेष ध्यान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उत्तरप्रदेश सरकार के साथ मिलकर मुरैना में 2 हजार मेगावॉट (2 गीगावॉट) की अल्ट्रा मेगा रिन्यूएबल एनर्जी पावर पार्क की स्थापना की प्रगति की जानकारी लेकर कहा कि इस मेगा परियोजना में राज्य के ऊर्जा हितों का विशेष ध्यान रखा जाए। अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मनु श्रीवास्तव ने बताया कि उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा मात्र पीक पीरियड में ही ग्रीन एनर्जी सप्लाय की मंशा व्यक्त की गई है। इस संबंध में उत्तरप्रदेश सरकार के वरिष्ठतम विभागीय अधिकारियों के साथ समुचित समन्वय किया जा रहा है। अपर मुख्य सचिव श्रीवास्तव ने बताया कि प्रदेश में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी) प्रोडक्शन के लिए तय किए गए लक्ष्यों को और भी परिशोधित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना (कुसुम बी) में अब तक 27 हजार 100 सोलर पम्प स्थापित किए जा चुके हैं। अगले दो साल में 4 लाख पम्पों को सौर ऊर्जीकृत करने का लक्ष्य है। इसके क्रियान्वयन के लिए विभाग ने 36 इकाईयां चुन ली हैं। इस योजना के पहले चरण में विभाग को एक लाख आवेदन मिल चुके हैं। अपर मुख्य सचिव श्रीवास्तव ने बताया कि सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना (कुसुम सी) के तहत विभाग ने लगभग 10 लाख किसानों को सौर ऊर्जीकरण से जुड़ने के लिए 493 सब स्टेशनों के जरिए किसानों को दिन के समय भी बिजली उपलब्ध कराने का बड़ा लक्ष्य लिया है। अब तक 2.50 लाख पम्प इंस्टाल कर दिये गये हैं। विभाग का लक्ष्य किसानों को ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उन्हें आर्थिक रूप से समर्थ बनाना भी है। सौर ऊर्जीकरण के लिए विभाग ने मासिक प्लान भी तैयार कर लिया है। रूफ टॉप स्कीम पर विभाग ने विशेष ध्यान केन्द्रित किया है। बैठक में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा एवं मुख्यमंत्री कार्यालय) नीरज मंडलोई, वित्त सचिव लोकेश जाटव, मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम के प्रबंध संचालक अमनवीर सिंह बैस सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

आशा भोंसले को मोहन यादव सरकार की बड़ी श्रद्धांजलि, मध्य प्रदेश सरकार शुरू करेगी राष्ट्रीय सम्मान

भोपाल भारतीय संगीत के स्वर्णिम युग की एक और महान आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई है। रविवार, 12 अप्रैल 2026 को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में 92 वर्ष की आयु में सुर सम्राज्ञी आशा भोंसले का निधन हो गया। मध्य प्रदेश सरकार ने इस महान हस्ती की विरासत को संजोने और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि देने के लिए उनके नाम पर एक विशेष 'राष्ट्रीय पुरस्कार' शुरू करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। लता मंगेशकर के बाद अब आशा भोंसले के नाम पर सम्मान मध्य प्रदेश के संस्कृति और पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने पुष्टि की है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ इस प्रस्ताव पर अंतिम चर्चा के बाद पुरस्कार की रूपरेखा तय की जाएगी। मंत्री लोधी के अनुसार, 'राज्य में पहले से ही लता मंगेशकर के नाम पर राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया जाता है। अब उनकी छोटी बहन और संगीत जगत की दिग्गज आशा भोंसले के नाम पर पुरस्कार स्थापित करना एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर होगा।' प्रस्तावित आशा भोंसले एक्सीलेंस अवॉर्ड का उद्देश्य न केवल स्थापित कलाकारों को सम्मानित करना होगा, बल्कि इसके जरिए उभरते हुए गायकों को नकद पुरस्कार, प्रदर्शन के अवसर और मेंटरशिप भी प्रदान की जाएगी। यह कदम मध्य प्रदेश सरकार के उस अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत राज्य की सांस्कृतिक विरासत और संगीत प्रतिभाओं को वैश्विक मंच दिया जा रहा है। आठ दशकों का सफर और 12,000 गीतों का जादू आशा भोंसले का संगीत सफर किसी चमत्कार से कम नहीं रहा। 1943 में मात्र 10 साल की उम्र से गायकी शुरू करने वाली आशा ताई ने आठ दशकों के करियर में कई भाषाओं में 12,000 से अधिक गाने रिकॉर्ड किए, जिसके लिए उनका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है। उनकी बहुमुखी आवाज ने फिल्मी गीतों से लेकर गजल, भजन और पॉप संगीत तक, हर विधा को जीवंत किया। साल 2000 में उन्हें दादा साहब फाल्के और 2008 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। आशा भोंसले केवल एक गायिका नहीं, बल्कि भारतीय संगीत की एक जीवंत संस्था थीं। उनके नाम पर पुरस्कार शुरू करना मध्य प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। यह सम्मान न केवल उनकी यादों को संजोएगा, बल्कि संगीत की दुनिया में नए सितारों को चमकने का मौका देगा। धर्मेंद्र सिंह लोधी, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री, मध्य प्रदेश अधिकारियों का मानना है कि यह पुरस्कार आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा बनेगा। जिस तरह आशा ताई ने अपनी मेहनत से एक अलग पहचान बनाई, यह पुरस्कार भी संगीत की नई पौध को उसी ऊंचाई तक पहुंचने का हौसला देगा। हालांकि पुरस्कार की शुरुआत की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है, लेकिन इस पहल ने देशभर के संगीत प्रेमियों के बीच एक सकारात्मक लहर पैदा कर दी है।  

मुख्यमंत्री साय ने कहा: सहकार से समृद्धि के संकल्प को साकार करेगा नवगठित पैक्स

सहकार से समृद्धि के संकल्प को साकार करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित होंगे नवगठित पैक्स: मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री ने प्रदेश में नवगठित 515 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों का किया वर्चुअल शुभारंभ प्रदेश में सहकारी समितियों की संख्या बढ़कर हुई 2 हजार 573 किसानों को आसानी से मिलेगी खाद, बीज और अल्पकालीन ऋण की सुविधा रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नवा रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन से प्रदेश की नवगठित 515 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) का वर्चुअल शुभारंभ किया।उन्होंने इसे प्रदेश के किसानों के लिए बड़ी सौगात बताते हुए कहा कि “सहकार से समृद्धि” के संकल्प को साकार करने की दिशा में यह कदम ऐतिहासिक है।                 मुख्यमंत्री ने कहा कि इन नई समितियों के शुरू होने से अब पूरे प्रदेश में सहकारी समितियों की संख्या बढ़कर 2 हजार 573 हो गई है। उन्होंने प्रदेश के अन्नदाता किसानों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सरकार खेती-किसानी में आधुनिक तकनीक और सहकारिता के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा दे रही है, ताकि गांव और किसान समृद्ध बन सकें। उन्होंने बताया कि अब पैक्स समितियां बहुउद्देश्यीय सोसायटी के रूप में कार्य करेंगी, जिससे किसानों को खाद, बीज और अल्पकालीन ऋण जैसी सुविधाएं उनके गांव के पास ही उपलब्ध होंगी। साथ ही धान बेचने की प्रक्रिया भी आसान होगी और किसान अपनी नजदीकी समिति में ही धान बेच सकेंगे।            मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पहले से कार्यरत 2058 समितियों को बेहतर सेवाएं देने के लिए कंप्यूटरीकृत किया गया है और इनमें माइक्रो एटीएम भी लगाए गए हैं, जिनसे किसान 20 हजार रुपये तक की राशि निकाल सकते हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि नवगठित 515 समितियों में से 197 समितियां आदिवासी क्षेत्रों में स्थापित की गई हैं, जिससे दूर-दराज के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि ये समितियां केवल खाद-बीज वितरण तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि भविष्य में दुग्ध उत्पादन, मछली पालन जैसे सहायक कृषि गतिविधियों से भी जुड़ेंगी।  साथ ही समितियों में लोक सेवा केंद्र भी शुरू किए जाएंगे, जहां एक ही स्थान पर 25 से अधिक सरकारी सेवाएं उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री ने किसानों से अपील की कि वे इन समितियों के सदस्य बनकर इसका अधिकतम लाभ उठाएं और इनके संचालन में सक्रिय भागीदारी निभाएं।              इस अवसर पर सहकारिता मंत्री केदार कश्यप वर्चुअल उपस्थित रहे, साथ ही कृषि मंत्री रामविचार नेताम, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, रोजगार एवं कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, अपेक्स बैंक के प्राधिकृत अधिकारी केदारनाथ गुप्ता, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत तथा सचिव सहकारिता सी.आर. प्रसन्ना, सहकारिता विभाग के प्रबंध संचालक के.एन. कांडे सहित विभिन्न जिलों से लगभग 2500 जनप्रतिनिधिगण, किसान और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

उत्तर प्रदेश में टाटा समूह की उपस्थिति दोगुनी होगी, राज्य बनेगा बड़ा निर्यात हब: एन. चंद्रशेखरन

उत्तर प्रदेश में टाटा समूह की उपस्थिति होगी दोगुनी, राज्य बनेगा बड़ा निर्यात हब: एन. चंद्रशेखरन टाटा संस के चेयरमैन बोले- यूपी में अपार संभावनाएं, अगले पांच वर्षों में तेजी से बढ़ेगा निवेश और रोजगार लखनऊ  टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश के सबसे संभावनाशील औद्योगिक राज्यों में एक है और आने वाले वर्षों में यहां टाटा समूह की उपस्थिति दोगुनी से अधिक होने जा रही है। राज्य में निवेश के लिए अनुकूल माहौल, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और मजबूत नेतृत्व के कारण उद्योगों के विस्तार के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध हैं। एन चंद्रशेखरन ने ये बातें राजधानी में टाटा मोटर्स की 10 लाखवीं बस के फ्लैग ऑफ अवसर पर कहीं। यूपी बनेगा देश का प्रमुख ग्रोथ इंजन एन चंद्रशेखरन ने कहा कि यूपी में तेजी से विकसित हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर, मजबूत नीतिगत समर्थन और निवेश के अनुकूल वातावरण इसे औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र बना रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश में विकास की गति स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। राज्य सरकार की नीतियों और सहयोग के कारण उद्योगों को विस्तार का बेहतर अवसर मिल रहा है, जिससे बड़े पैमाने पर निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश में मौजूद अपार संभावनाएं, बढ़ती आर्थिक गतिविधियां और युवा कार्यबल इसे देश का प्रमुख ग्रोथ इंजन बनाने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में प्रदेश न केवल औद्योगिक, बल्कि तकनीकी और सामाजिक विकास के क्षेत्र में भी नई ऊंचाइयों को छुएगा। अगले पांच वर्षों में 20 लाख वाहनों के उत्पादन का लक्ष्य उन्होंने कहा कि लखनऊ स्थित टाटा प्लांट केवल एक औद्योगिक इकाई नहीं, बल्कि सप्लायर्स, पार्टनर्स और स्थानीय समुदाय के साथ विकसित एक सशक्त इकोसिस्टम है, जो टाटा समूह और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच विश्वास और साझेदारी का प्रतीक है। 34 वर्षों में 10 लाख वाहनों के उत्पादन का यह माइलस्टोन इस मजबूत संबंध और निरंतर विकास यात्रा को दर्शाता है। एन चंद्रशेखरन ने विश्वास जताया कि जिस प्रकार अब तक की प्रगति हुई है, अगले पांच वर्षों में 20 लाख वाहनों के उत्पादन का लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है। भारत की अर्थव्यवस्था आने वाले दशकों में वैश्विक स्तर पर सबसे तेज गति से बढ़ेगी और उत्तर प्रदेश इस विकास यात्रा में अग्रणी भूमिका निभाएगा। टीसीएस की यूपी यूनिट्स में अगले 5 वर्षों में होंगे 40 हजार प्रोफेशनल्स एन चंद्रशेखरन ने बताया कि टाटा मोटर्स का पोर्टफोलियो तेजी से विस्तृत हो रहा है, जिसमें पारंपरिक डीजल वाहनों के साथ-साथ सीएनजी, इलेक्ट्रिक और भविष्य में हाइड्रोजन आधारित वाहन भी शामिल होंगे। इससे उत्तर प्रदेश न केवल देश के लिए, बल्कि वैश्विक बाजार के लिए भी एक महत्वपूर्ण मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात केंद्र बन सकता है। टाटा समूह की अन्य कंपनियों के विस्तार का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के वर्तमान में लगभग 20,000 प्रोफेशनल्स लखनऊ, नोएडा और वाराणसी में कार्यरत हैं, जिनकी संख्या अगले पांच वर्षों में 40,000 तक पहुंच सकती है। इसके अलावा पावर, डिफेंस, रिटेल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में भी समूह का तेजी से विस्तार हो रहा है, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। मथुरा व गोरखपुर में भी सक्रिय पहल, सीएम का जताया आभार उन्होंने कहा कि टाटा समूह केवल औद्योगिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक क्षेत्रों में भी सक्रिय योगदान दे रहा है। जल संरक्षण, स्किल डेवलपमेंट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में पहल करते हुए समूह मथुरा में जल स्रोतों के पुनर्जीवन और गोरखपुर में एआई टेक्नोलॉजी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना जैसे कार्य कर रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार के सहयोग और दूरदर्शी नीतियों के कारण ही यह विकास संभव हो पाया है।

डीएम गौतमबुद्धनगर की अध्यक्षता में औद्योगिक इकाइयों की आउटसोर्सिंग एजेंसी/संविदाकारों की बैठक आयोजित

डीएम गौतमबुद्धनगर की अध्यक्षता में विभिन्न औद्योगिक इकाइयों की आउटसोर्सिंग एजेंसी/संविदाकारों की बैठक कार्मिक या श्रमिक के उपद्रवी व्यवहार पर संबंधित एजेंसी होगी ब्लैक लिस्ट, की जाएगी लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई समस्त संविदाकार शासन की गाइडलाइंस के अनुसार निर्धारित वेतन देना करें सुनिश्चित राज्य सरकार श्रमिकों एवं नियोजकों दोनों के हितों की रक्षा के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध  गौतमबुद्धनगर जनपद में शासन की गाइडलाइंस का शत प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित कराने एवं औद्योगिक शांति बनाए रखने के उद्देश्य से जिलाधिकारी की अध्यक्षता में विभिन्न औद्योगिक इकाइयों की आउटसोर्सिंग एजेंसी/संविदाकारों के साथ बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि आउटसोर्सिंग एजेंसी/संविदाकार उद्योग को चलाने तथा लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में सभी आउटसोर्सिंग एजेंसी/संविदाकारों की जिम्मेदारी है कि वे अपने कार्मिकों व श्रमिकों समेत शांति व्यवस्था बनाए रखें। डीएम ने निर्देश दिया कि सभी संविदाकार शासन की गाइडलाइंस का शत प्रतिशत पालन सुनिश्चित करें। अगर किसी भी एजेंसी द्वारा या एजेंसी के कार्मिक/श्रमिक द्वारा उपद्रवी व्यवहार किया जाएगा तो उसकी जिम्मेदारी एजेंसी की भी होगी। ऐसे में उस एजेंसी को ब्लैक लिस्ट करते हुए एजेंसी का लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई की जा सकती है ।   जिलाधिकारी ने राज्य सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन का उल्लेख करते हुए बताया कि अकुशल श्रमिक के लिए 13,690, अर्धकुशल श्रमिक के लिए 15,059 तथा कुशल श्रमिक के लिए 16,868 रुपए प्रतिमाह वेतन निर्धारित किया गया है। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी संविदाकार इन वेतन मानकों का पूर्ण रूप से अनुपालन सुनिश्चित करें एवं श्रमिक के बैंक खातों में पूर्ण वेतन हस्तांतरित करें। किसी भी प्रकार के नियमों का उलंघन व श्रमिकों का शोषण करने पर सख्त कार्रवाई होगी। जिलाधिकारी ने कहा कि उद्योग, श्रमिक एवं नियोजक तीनों एक-दूसरे के पूरक हैं। उद्योगों का सुचारु संचालन रोजगार के अवसरों को सुरक्षित रखता है, वहीं नियोजकों की स्थिरता से श्रमिकों का भविष्य भी सुनिश्चित होता है। यदि औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं, तो इसका प्रतिकूल प्रभाव सभी पक्षों के साथ-साथ प्रदेश के समग्र विकास पर पड़ता है।   डीएम ने सभी से अपील की कि किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रामक सूचना पर ध्यान न दें और औद्योगिक शांति बनाए रखते हुए आपसी सहयोग एवं विश्वास के साथ कार्य करें। जिलाधिकारी ने यह भी आश्वस्त किया कि राज्य सरकार श्रमिकों एवं नियोजकों दोनों के हितों की रक्षा के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है और किसी भी समस्या के समाधान हेतु प्रशासन तत्परता से कार्य करेगा। बैठक में अपर जिलाधिकारी वित्त राजस्व अतुल कुमार, डीडी फैक्ट्री बृजेश, संबंधित विभागों के अधिकारीगण एवं विभिन्न औद्योगिक इकाइयों के संविदाकार उपस्थित रहे।

अंडमान सागर में बड़ा हादसा: 300 रोहिंग्याओं से भरी नाव पलटी, 250 लोगों की मौत की आशंका

ढाका संयुक्त राष्ट्र (UN) ने  एक बेहद दुखद घटना की जानकारी दी है। अंडमान सागर में रोहिंग्या शरणार्थियों और बांग्लादेशी नागरिकों से भरी एक नाव पलट गई है, जिसमें बच्चों सहित लगभग 250 लोगों के डूबने या लापता होने की आशंका है। जीवित बचे लोगों ने बताया कि इस नाव पर महिलाओं, बच्चों, चालक दल के सदस्यों और संदिग्ध मानव तस्करों सहित लगभग 300 लोग ठसाठस भरे हुए थे। हादसा कब, कहां और कैसे हुआ? शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस नाव में लगभग 280 लोग सवार थे। यह नाव 4 अप्रैल को दक्षिणी बांग्लादेश के 'टेकनाफ' इलाके से मलेशिया के लिए निकली थी। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के अनुसार, समुद्र में तेज हवाओं, खराब मौसम और नाव में क्षमता से बहुत अधिक लोगों के भरे होने के कारण यह बीच समुद्र में पलट गई। बचाव कार्य और एक खौफनाक आपबीती बांग्लादेश तट रक्षक (BCG) के अनुसार, उनका एक जहाज 'एम.टी. मेघना प्राइड' इंडोनेशिया जा रहा था, उसने 9 अप्रैल को समुद्र से 9 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया। इनमें एक महिला भी शामिल है। ये लोग अंडमान द्वीप समूह के पास गहरे पानी में ड्रम और लकड़ियों के सहारे अपनी जान बचाते हुए पाए गए। आधिकारिक समाचार एजेंसी एए के मुताबिक 280 लोगों अवैध तरीके से बोर्ट में बैठकर मलेशिया की ओर जा रहे थे. लेकिन अंडमान सागर की लहरों को कुछ और ही मंजूर था. समंदर की उफनती लहरों के कारण ऐसा हुआ. उन चीखों की गवाह बनीं, जो मदद के लिए उठीं और फिर हमेशा के लिए खामोश हो गईं. ये बोट बांग्‍लादेश के कॉक्स बाजार से शुरू चली थी. इस हादसे में बाल-बाल बचे रफीकुल इस्लाम ने बताया कि नाव पर क्षमता से कहीं ज्यादा लोग सवार थे, जिनमें 13 क्रू मेंबर और मानव तस्कर भी शामिल थे. रफीकुल ने दावा किया कि नाव पलटने से पहले ही करीब 25 से 30 लोग भीड़ और दम घुटने के कारण दम तोड़ चुके थे. इसके बाद समंदर की विशाल लहरों ने नाव को अपनी चपेट में ले लिया और देखते ही देखते सब कुछ खत्म हो गया।  बचाए गए 9 लोगों में से 6 तस्‍कर टेकनाफ मॉडल पुलिस स्टेशन के प्रभारी सैफुद्दीन इस्लाम के अनुसार, बांग्लादेशी जहाज ने 9 अप्रैल को हिंद महासागर से 9 लोगों को रेस्क्यू किया था. जांच में पता चला कि बचाए गए 9 लोगों में से 6 कथित मानव तस्कर हैं जिन्हें अब जेल भेज दिया गया है. पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है और जांच जारी है कि इस अवैध यात्रा के पीछे और कौन-कौन से सिंडिकेट शामिल हैं।  UNHCR और IOM की चेतावनी संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने एक संयुक्त बयान जारी कर इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है. उन्होंने कहा कि यह त्रासदी रोहिंग्या शरणार्थियों की बेबसी और उनके दीर्घकालिक समाधान की कमी का नतीजा है. बांग्लादेश वर्तमान में लगभग 1.3 मिलियन रोहिंग्याओं की मेजबानी कर रहा है, जो म्यांमार के सैन्य दमन के बाद वहां रह रहे हैं।  40 वर्षीय रफीकुल इस्लाम इस हादसे में बाल-बाल बचे हैं। उन्होंने बताया कि मानव तस्करों ने उन्हें मलेशिया में नौकरी दिलाने का लालच देकर नाव पर चढ़ाया था। उन्होंने बताया कि यात्रियों ने समुद्र में चार दिन और रातें बिताईं और इस दौरान हालात तेजी से बिगड़ते गए। गश्ती दलों की नजर से बचने के लिए, तस्करों ने यात्रियों को मछली और जाल रखने वाले बेहद तंग स्टोरेज कम्पार्टमेंट में छिपने के लिए मजबूर किया। इस्लाम ने बताया कि वहां सांस लेने के लिए मुश्किल से ही कोई ऑक्सीजन थी। नाव पलटने से पहले कम से कम 30 लोगों की दम घुटने से मौत हो चुकी थी। हम सांस तक नहीं ले पा रहे थे। जब नाव पलटी, तो सैकड़ों लोग समुद्र में गिर गए। इस्लाम के अनुसार, हादसे के समय नाव पर लगभग 240 लोग सवार थे, जिनमें करीब 20 महिलाएं और कई बच्चे शामिल थे। इनमें से मुट्ठी भर लोग ही जिंदा बच सके। रफीकुल ने बताया- हममें से कई लोगों को नाव के निचले हिस्से में रखा गया था, जहां कुछ लोगों की तो वहीं मौत हो गई। नाव से जो तेल रिसा था, उससे मैं जल गया। हादसा होने के बाद रेस्क्यू होने तक वे लगभग 36 घंटे तक समुद्र में तैरते रहे। ये लोग खतरनाक समुद्री यात्रा क्यों कर रहे थे? म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों को लंबे समय से जुल्म और हिंसा का सामना करना पड़ा। इस समय म्यांमार के रखाइन राज्य में सेना और एक विद्रोही गुट 'अराकान आर्मी' के बीच भीषण जंग चल रही है। जान बचाने के लिए 10 लाख से ज्यादा रोहिंग्या बांग्लादेश के कॉक्स बाजार में बने विशाल शिविरों में रह रहे हैं, जहां हालात बेहद खराब और अमानवीय हैं। मलेशिया जाने की चाहत मलेशिया एक अपेक्षाकृत अमीर देश है, जहां कंस्ट्रक्शन और खेती के काम के लिए एशिया के गरीब हिस्सों से मजदूर जाते हैं। तस्कर इन्ही मजबूर लोगों से पैसे लेकर उन्हें खतरनाक और खचाखच भरी नावों से अवैध तरीके से ले जाते हैं। संयुक्त राष्ट्र (UNHCR) ने क्या कहा? संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि यह घटना म्यांमार के लोगों के लंबे समय से बेघर होने और उनकी समस्या का कोई स्थायी समाधान न होने का एक भयानक परिणाम है। यह त्रासदी याद दिलाती है कि म्यांमार में हालात सुधारने के लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत है, ताकि रोहिंग्या शरणार्थी सुरक्षित और सम्मान के साथ अपनी मर्जी से अपने घर लौट सकें। यह कोई पहली घटना नहीं है। अंडमान सागर, जो म्यांमार, थाइलैंड और मलेशिया के बीच फैला है, वह ऐसे कई हादसों का गवाह बनता रहता है। पिछले साल मई में भी म्यांमार तट के पास दो नावों के डूबने से 427 रोहिंग्या लोगों के मारे जाने की आशंका जताई गई थी। गहराता मानवीय संकट और हताशा यह त्रासदी रोहिंग्या शरणार्थियों की उस गहरी हताशा को उजागर करती है, जिसके चलते वे मलेशिया, इंडोनेशिया और थाइलैंड जैसे देशों में जाने के लिए जान की बाजी लगा रहे हैं। सहायता एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि मानवीय सहायता में लगातार हो रही कमी के कारण स्थिति और खराब हो रही है। कॉक्स बाजार में … Read more

सेंसेक्स 1263 अंक उछला, 78,111 पर बंद, निफ्टी ने 24,200 का आंकड़ा पार किया

मुंबई  अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत से भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल आया। बुधवार (15 अप्रैल) को सेंसेक्स-निफ्टी दिनभर हरे निशान पर थे। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1263.67 (1.64%) अंक की बढ़त के साथ 78,111.24 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 388.65 (1.63%) अंक की तेजी के साथ 24,231.30 के स्तर पर बंद हुआ। बाजार में तेजी के कारण… ट्रंप का बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ युद्ध खत्म होने के करीब है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा। कच्चे तेल में गिरावट ब्रेंट क्रूड नरम पड़ा, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए राहत की उम्मीद बढ़ी।   India VIX में बड़ी गिरावट वोलैटिलिटी इंडेक्स 17% से ज्यादा गिरा यानी बाजार में डर कम हुआ और जोखिम लेने की भूख बढ़ी।   शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) सोमवार को बिकवाल रहे थे और उन्होंने 1,983.18 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 2,432.30 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे। सेंसेक्स सोमवार को 0.91 प्रतिशत जबकि निफ्टी 0.86 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ था। बाबासाहेब आंबेडकर जयंती के उपलक्ष्य में मंगलवार को शेयर बाजार बंद थे। 

गोरखपुर ने एआई जागरूकता के क्षेत्र में गिनीज बुक में नाम किया दर्ज

एआई जागरूकता पर गिनीज बुक में दर्ज हुआ गोरखपुर का नाम सीएम योगी के मार्गदर्शन में रची गई ‘एआई फॉर ऑल’ अवेयरनेस प्रोग्राम की रूपरेखा, 764187 ऑनलाइन पंजीकरण का विश्व कीर्तिमान गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के प्रतिनिधि ने मुख्यमंत्री और टाटा संस के चेयरमैन को सौंपा प्रमाण पत्र गोरखपुर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जागरूकता पर गोरखपुर का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हो गया है। सीएम योगी के मार्गदर्शन में तैयार किए गए ‘एआई फॉर ऑल’ अवेयरनेस प्रोग्राम ने एक सप्ताह की समय सीमा में 764187 ऑनलाइन पंजीकरण का विश्व कीर्तिमान स्थापित किया है। एमपीआईटी (महाराणा प्रताप इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) ने टीसीएस (टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज) और अन्य संस्थानों के सहयोग से इस प्रोग्राम को शुरू किया है। बुधवार को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के प्रतिनिधि ऋषि नाथ ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन को इस प्रोग्राम के तहत पंजीकरण का विश्व कीर्तिमान रचे जाने का प्रमाण पत्र सौंपा। यह प्रमाण पत्र एमपीआईटी में पूर्वी उत्तर प्रदेश के पहले सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लोकार्पण समारोह के मंच पर सौंपा गया। एमपीआईटी ने ‘एआई फॉर ऑल’ अवेयरनेस प्रोग्राम के लिए 5 लाख पंजीकरण का लक्ष्य रखा था। इसके लिए निर्धारित तिथि, 9 अप्रैल तक 764187 पंजीकरण हुए। इसके अंतर्गत दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर, महायोगी गुरु गोरखनाथ राज्य आयुष विश्वविद्यालय, एमपी पॉलिटेक्निक, आईटीएम गीडा, बीआईटी गीडा आदि को भी साझा पहल में शामिल किया गया। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के प्रतिनिधि ने बताया कि ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया को कड़े मानकों पर परखने के बाद प्रमाण पत्र सौंपा गया है।  पूर्णतः निशुल्क इस एआई अवेयरनेस प्रोग्राम में एआई का परिचय, जेनेरेटिव एआई टूल्स, प्रॉम्प्टिंग एंड प्रोडक्टिविटी, रिस्पांसिबल एआई यूज, साइबर हाइजीन, फ्रॉड प्रिवेंशन, पासवर्ड एंड ओटीपी सेफ्टी और सेफ डिजिटल प्रैक्टिसेज के बारे में विस्तृत प्रशिक्षण दिया जाएगा।

मध्यप्रदेश में गेहूं की MSP और बोनस पर खरीद की शुरुआत, रजिस्ट्रेशन वाले किसानों को मिलेगा फायदा

शहडोल : MSP यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी का इंतजार कर रहे किसानों को बड़ी राहत मिलने वाली है. गेहूं की कटाई, गहाई के बाद अब शासन किसानों का गेहूं खरीदने की तैयारी में है. जिला आपूर्ति नियंत्रक विपिन पटेल के मुताबिक, '' रबी सीजन में MSP पर गेहूं खरीदी का काम 2026-27 के तहत 15 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 12 मई 2026 तक संचालित किया जाएगा।  मध्य प्रदेश में गेहूं पर इतना MSP और बोनस जिला आपूर्ति नियंत्रक ने कहा, '' इस वर्ष गेहूं का समर्थन मूल्य 2585 रु प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, जिस पर मध्यप्रदेश शासन 40 रु प्रति क्विंटल बोनस भी दे रहा है. इस तरह से किसानों को कुल 2625 रु प्रति क्विंटल की दर से एमएसपी का भुगतान किया जाएगा और उनकी फसल इस नई दर पर खरीदी जाएगी।  शहडोल में इतने किसानों ने कराया रजिस्ट्रेशन जिला आपूर्ति नियंत्रक विपिन पटेल ने जानकारी दी है कि MSP पर गेहूं की खरीदी सिर्फ पंजीकृत किसानों से ही की जाएगा, जिले में कुल 9,526 किसानों ने गेहूं बेचने के लिए पंजीयन कराया है, जिनमें से 13 अप्रैल 2026 तक 418 किसानों की स्लॉट बुकिंग की जा चुकी है. यानी साफ है कि जिन किसानों ने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है, शासन उनसे एमएसपी पर गेहूं की खरीद नहीं करेगा. यानी बिना पंजीकरण वाले किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ लेने से वंचित रह जाएंगे।  स्लॉट बुकिंग का ध्यान रखें किसान जिला आपूर्ति नियंत्रक विपिन पटेल ने अपील करते हुए कहा है कि जिन किसानों का गेहूं एमएसपी पर बेचने के लिए तैयार हो चुका है, वे शीघ्र अतिशीघ्र स्लॉट बुक कर निर्धारित तिथि पर अपने नजदीकी उपार्जन केंद्र पहुंच जाएं. स्लॉट के हिसाब से किसान पहुंचकर अपना गेहूं बेच सकते हैं. किसानों की सुविधा के लिए शनिवार एवं रविवार को भी पूरे दिन स्लॉट बुकिंग की व्यवस्था उपलब्ध रहेगी।  पूरा फायदा लेने के लिए इस बात का रखें ध्यान साथ ही जिला आपूर्ति नियंत्रक ने कहा है कि किसान अगर एमएसपी का पूरा लाभ लेना चाहते हैं, तो वे अपने साथ साफ-सुथरा, सूखा व अच्छी गुणवत्ता का गेहूं ही उपार्जन केंद्रों पर लाएं. इससे उनका अनाज अमानक या लो क्वालिटी का घोषित नहीं होगा और बिना किसी परेशानी के खरीदी प्रक्रिया पूरी हो सकेगी। 

11वीं के नतीजों में शानदार प्रदर्शन: झारखंड में 99.12% स्टूडेंट्स पास, गुमला-गिरिडीह अव्वल

रांची. झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक बोर्ड) ने 11वीं परीक्षा 2026 का रिजल्ट आधिकारिक रूप से जारी कर दिया है। इस परीक्षा में शामिल हुए छात्र परिणाम आनलाइन माध्यम से चेक कर सकते हैं। जो छात्र इस परीक्षा में पास हुए हैं, वे अब कक्षा 12वीं में प्रवेश ले सकेंगे। वहीं, जो छात्र पास नहीं हो पाए हैं, उनके लिए आगे सुधार या सप्लीमेंट्री परीक्षा के विकल्प भी उपलब्ध हो सकते हैं। बोर्ड द्वारा जारी किया गया रिजल्ट आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। छात्र अपने रोल नंबर और रोल कोड की मदद से आसानी से अपना स्कोरकार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। बता दें कि जैक बोर्ड ने कक्षा 11वीं में इस वर्ष कुल 3,58,533 स्टूडेंट्स परीक्षा में शामिल हुए थे, जिनमें 3,55,399 छात्र पास हो गए। जैक बोर्ड 11वीं कक्षा का पासिंग प्रतिशत 99.12 प्रतिशत रहा। झारखंड बोर्ड के अनुसार, कुल 3,61,683 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जिनमें से 3,58,533 परीक्षा में शामिल हुए। रिजल्ट जारी करते हुए जैक बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. नटवा हंसदा ने छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन को बधाई दी। आनलाइन जारी मार्कशीट में छात्र का नाम, रोल नंबर, विषयवार अंक, कुल अंक और पास फेल की स्थिति दी गई है। यह मार्कशीट अस्थायी होती है, जबकि मूल मार्कशीट बाद में स्कूल से प्राप्त होगी। जो छात्र इस परीक्षा में पास हुए हैं, वे अब कक्षा 12वीं में प्रवेश ले सकेंगे। वहीं, जो छात्र पास नहीं हो पाए हैं, उनके लिए आगे सुधार या सप्लीमेंट्री परीक्षा के विकल्प भी उपलब्ध हो सकते हैं। रांची जिले से इस वर्ष 34,907 छात्र छात्राओं ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया था जिसमें 34,642 परीक्षा में शामिल हुए 34,286 छात्र छात्राएं पास हुए। रांची जिले का पासिंग प्रतिशत 98.97 रहा जबकि पिछले वर्ष 98.68 प्रतिशत था। वहीं, पासिंग प्रतिशत में पहले पायदान पर गुमला 99.60 और गिरिडीह 99.60 प्रतिशत रहे। बता दें कि रांची जिले में 15,809 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जिसमें 15,660 छात्र परीक्षा में शामिल हुए और 15,474 छात्रों ने सफलता पाई। छात्रों का पासिंग प्रतिशत 98.81 रहा जबकि पिछले वर्ष 98.26 प्रतिशत छात्र पास हुए थे। वहीं, 19,098 छात्राओं ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जिसमें 18,982 छात्राएं परीक्षा में शामिल हुईं और 18,812 छात्राएं पास हुईं, छात्राओं का पासिंग प्रतिशत 99.10 रहा जबकि पिछले वर्ष 99.04 प्रतिशत था। वहीं, पूरे राज्य की बात करें तो छात्राें का पासिंग प्रतिशत 99.08 जो कि पिछले वर्ष 98.62 था जबकि छात्राओं का पासिंग प्रतिशत 99.16 प्रतिशत रहा जबकि पिछले वर्ष छात्राओं का पासिंग प्रतिशत 98.79 था। शत प्रतिशत रहा रिजल्ट योगदा सत्संग इंटरमीडिएट महाविद्यालय, जगन्नाथपुर, धुर्वा के विद्यार्थियों का पासिंग प्रतिशत शत प्रतिशत रहा। आर्ट्स में कुल 128 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए जिनमें सभी उत्तीर्ण रहे। कॉमर्स में कुल 123 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए और सभी उत्तीर्ण हुए। साइंस स्ट्रीम में कुल 125 विद्यार्थी शामिल हुए और इनमें सभी विद्यार्थी उत्तीर्ण रहे। इंटरमीडिएट महाविद्यालय के सचिव अरविंद कटियार, सहायक सचिव रवि प्रताप सिंह तथा प्राचार्य राजीव मिश्रा ने विद्यार्थियों के प्रदर्शन को बेहतर बताते हुए उनके बेहतर भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।