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CBSE 10वीं का परिणाम घोषित, जानें मार्कशीट डाउनलोड करने का तरीका

नई दिल्ली सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने आज सीबीएसई 10वीं का रिजल्ट रिजल्ट 2026 घोषित कर दिया है। जिन उम्मीदवारों ने सीबीएसई 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा दी है, वह सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in पर सीबीएसई 10वीं रिजल्ट 2026 देख सकते हैं। CBSE 10वीं कक्षा के रिजल्ट results.cbse.nic.in, cbse.nic.in, cbseresults.nic.in, digilocker.gov.in और results.gov.in पर देखे जा सकते हैं। सीबीएसई 10वीं रिजल्ट 2026 मार्कशीट डाउनलोड CBSE ने आज 10वीं क्लास का रिजल्ट घोषित कर दिया है। छात्रों अपने लॉगिन क्रेडेंशियल के माध्यम से अपनी मार्कशीट डाउनलोड कर सकते हैं। CBSE बोर्ड की मार्कशीट cbse.gov.in, results.cbse.nic.in, DigiLocker और Umang App पर जारी की जाएंगी। CBSE 10वीं का रिजल्ट 2026 मार्कशीट में क्या-क्या होगा? CBSE 10वीं क्लास की डिजिटल मार्कशीट में उम्मीदवार का नाम, रोल नंबर, जन्मतिथि, फोटो, स्कूल का नाम, माता-पिता का नाम, विषयवार प्राप्त अंक, कुल प्राप्त अंक, प्राप्त ग्रेड और पास होने की स्थिति जैसी जानकारी शामिल होगी। रिजल्ट जारी होने के बाद, छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी मार्कशीट ध्यान से देखें। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें CBSE 10वीं का रिजल्ट 2026 मोबाइल पर कैसे देखें? स्टेप 1: सबसे पहले सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in या results.cbse.nic.in पर जाएं। स्टेप 2: होमपेज पर उपलब्ध CBSE 10वीं रिजल्ट 2026 लिंक पर क्लिक करें। स्टेप 3: रोल नंबर, स्कूल नंबर, एडमिट कार्ड ID और जन्मतिथि (DOB) डालें। स्टेप 4: सबमिट बटन पर क्लिक करें। स्टेप 4: CBSE बोर्ड रिजल्ट 2026 स्क्रीन पर दिखाई देगा। स्टेप 5: मार्कशीट की PDF देखें और डाउनलोड करें। स्टेप 6: भविष्य के संदर्भ के लिए प्रिन्ट आउट ले लें। CBSE 10वीं का रिजल्ट 2026 घोषित होने के बाद क्या करें? CBSE के रिजल्ट घोषित होने के बाद छात्रों को 11वीं कक्षा या किसी अन्य परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन करने की जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं है। छात्रों को अपने-अपने स्कूलों में 11वीं कक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन करने से पहले, दूसरी बोर्ड परीक्षा का इंतजार करना होगा।  

साय कैबिनेट ने किए 9 बड़े फैसले, UCC समिति का गठन, महिलाओं को 50% रजिस्ट्री छूट, खनन-उद्योग नियमों में बदलाव

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज (15 अप्रैल) को मंत्रिपरिषद की बैठक संपन्न हो गई है। यह बैठक मंत्रालय स्थित महानदी भवन के मंत्रिपरिषद कक्ष (एम-5/20) में चल रही है। इस बैठक में कई विभागों से आए प्रस्तावों और योजनाओं की समीक्षा की गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए –  1.    मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ में Uniform Civil Code लागू करने के संबंध में Uniform Civil Code का प्रारूप तैयार करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक समिति का गठन करने का निर्णय लिया गया तथा समिति के सदस्यों के मनोनयन के लिए मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया।   छत्तीसगढ़ में वर्तमान में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण, भरण-पोषण एवं पारिवारिक मामलों से संबंधित विवादों में विभिन्न धर्मों के अनुसार अलग-अलग पर्सनल लॉ लागू हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत राज्य को सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का निर्देश दिया गया है। अलग-अलग कानूनों के कारण वैधानिक प्रक्रिया में असमानता उत्पन्न होती है, जिससे न्याय प्रक्रिया जटिल होती है। ऐसे में कानून को सरल, एकरूप और न्यायसंगत बनाने के लिए Uniform Civil Code लागू करना आवश्यक माना जा रहा है, जिससे धार्मिक और लैंगिक समानता को भी बढ़ावा मिलेगा। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है, जो राज्य के नागरिकों, संगठनों एवं विशेषज्ञों से व्यापक सुझाव लेकर Uniform Civil Code का प्रारूप तैयार करेगी। यह समिति वेब पोर्टल के माध्यम से फीडबैक भी आमंत्रित कर सकती है। समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार प्रारूप को विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत मंत्रिपरिषद से अनुमोदन के बाद विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे राज्य में एक समान और पारदर्शी नागरिक कानून व्यवस्था स्थापित हो सके। 2.    मंत्रिपरिषद ने महिलाओं के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है कि महिलाओं के नाम पर होने वाले भूमि रजिस्ट्रेशन पर लगने वाले शुल्क में 50 प्रतिशत की कमी की जाएगी। इसका उद्देश्य महिलाओं को संपत्ति अर्जन के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इस निर्णय से सरकार को लगभग 153 करोड़ रुपये राजस्व की कमी होगी, लेकिन महिला सशक्तीकरण के लिए इसे महत्वपूर्ण कदम माना गया है।  3.    मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य के सेवारत सैनिकों, भूतपूर्व सैनिकों एवं उनकी विधवाओं के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया, जिसके तहत उन्हें जीवनकाल में एक बार छत्तीसगढ़ राज्य के भीतर 25 लाख रूपए तक की संपत्ति (भूमि/भवन) क्रय करने पर देय स्टाम्प शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट प्रदान किया जाएगा। देश सेवा में समर्पित सैनिकों का जीवन प्रायः स्थानांतरण और अस्थायित्व से भरा होता है, जिसके बाद वे स्थायी निवास के लिए संपत्ति क्रय करते हैं, ऐसे में यह निर्णय उन्हें आर्थिक राहत प्रदान करेगा।  4.    मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम, 2015 में संशोधन के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। इस संशोधन से सेवा क्षेत्र को आबंटन हेतु स्पष्ट वैधानिक पात्रता मिलेगी। भूमि आवंटन प्रावधानों में न्यूनतम एवं अधिकतम सीमा का तार्किक सामंजस्य स्थापित होगा। लैंड बैंक भूखण्डों हेतु एप्रोच रोड का वैधानिक प्रावधान किया गया है। NBFC सहित वित्तीय संस्थाओं को सम्मिलित करने से उद्योगों के लिए ऋण उपलब्धता के विकल्प बढ़ेंगे। कंपनियों में शेयर धारिता परिवर्तन से संबंधित प्रावधानों में व्यावहारिक स्पष्टता आएगी और Ease of Doing Business सुनिश्चित होगा। PPP मॉडल के लिए स्पष्ट प्रावधान से निजी निवेश एवं औद्योगिक अवसंरचना विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।  5.    छत्तीसगढ़ गौण खनिज साधारण रेत (उत्खनन एवं व्यवसाय) नियम, 2025 में संशोधन का अनुमोदन किया गया। अब केन्द्र अथवा राज्य सरकार के सार्वजनिक उपक्रम जैसे छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पाेरेशन लिमिटेड को रेत खदानें आरक्षित की जा सकेगी। इससे पट्टेदार के एकाधिकार के फलस्वरूप उत्पन्न रेत की आपूर्ति-संकट में कमी आएगी तथा दुर्गम क्षेत्रों में रेत खदानों के सुगम संचालन सहित रेत की सुगम उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।   6.    मंत्रिपरिषद् की बैठक में छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम, 2015 में व्यापक संशोधन के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। इस संशोधन का उद्देश्य खनन क्षेत्र में पारदर्शिता, नियंत्रण और राजस्व वृद्धि सुनिश्चित करना है, अवैध खनन को रोकना तथा प्रक्रिया का सरलीकरण करना है। गौण खनिज की ऐसी खदाने जो अकारण बंद रहती है अथवा शिथिल रहती है, में कठोर प्रावधान लाया गया है। अब इन खदानों के अनिवार्य भाटक दर में 30 वर्षाें के बाद वृद्धि की गई है। इन खदानों को व्यपगत (लैप्स) घोषित किए जाने संबंधी कठोर प्रावधानों को नियमों में शामिल किया गया है, जिसके फलस्वरूप ऐसी खदानों का संचालन अनिवार्य रूप से किये जाने की बाध्यता सुनिश्चित हो सकेगी। खनिजों के अवैध उत्खनन/परिवहन/भंडारण पर कठोर दंड का प्रावधान किया गया है, जिसमें न्यूनतम जुर्माना 25 हजार रूपए निर्धारित किया गया है, जो कि 5 लाख रूपए तक भी हो सकता है। अवैध परिवहन के मामलों में सुपुर्दगी दिए जाने हेतु जमानत राशि का भी निर्धारण किया गया है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत रॉयल्टी चुकता प्रमाण पत्र संबंधी प्रावधान को पूरे प्रदेश में एकसमान लागू किया जा रहा है।  इसके अतिरिक्त उत्खनन पट्टों के समामेलन, अनुबंध पश्चात भू-प्रवेश एवं पर्यावरणीय शर्तों के अनुरूप संचालन जैसे प्रावधानों को भी सुदृढ़ किया गया है, जिससे खनिज संसाधनों के सुव्यवस्थित दोहन और राज्य के आर्थिक सुदृढ़ीकरण को बल मिलेगा। 7.    मंत्रिपरिषद द्वारा दुधारू पशु प्रदाय संबंधी पायलट प्रोजेक्ट योजना में समस्त सामाजिक वर्ग के हितग्राहियों को लाभान्वित किए जाने संबंधी संशोधन तथा एनडीडीबी के साथ निष्पादित एमओयू की संबंधित कंडिका में संशोधन का अनुमोदन किया गया। इससे अनुसूचित जनजाति वर्ग सहित सभी सामाजिक वर्ग के हितग्राहियों को लाभान्वित किया जा सकेगा जिससे उनके स्वरोजगार और आय में वृद्धि होगी तथा प्रदेश के सर्वांगीण, सामाजिक एवं आर्थिक विकास में सहयोग प्राप्त हो सकेगा।  8.    मंत्रिपरिषद द्वारा राज्य में पशुओं को संक्रामक रोगों से बचाने हेतु आवश्यक टीकाद्रव्यों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए National Dairy Development Board (NDDB) की सब्सिडरी कंपनी Indian Immunologicals Limited, हैदराबाद से टीकों की खरीदी किए जाने की अनुमति प्रदान की गई है। निविदा प्रक्रिया में पर्याप्त प्रतिस्पर्धा न बन पाने एवं जेम पोर्टल पर … Read more

कांग्रेस की दो महिला पार्षदों के खिलाफ एफआईआर, बीएनएस धारा 196 के तहत मामला दर्ज

इंदौर  इंदौर नगर निगम के बजट सत्र के दौरान राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' का अनादर करने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। जांच के बाद एमजी रोड पुलिस ने कांग्रेस की दो महिला पार्षदों, रुबीना इकबाल खान और फौजिया शेख अलीम के खिलाफ बुधवार को मुकदमा दर्ज कर लिया है।पुलिस ने यह कदम भाजपा पार्षदों की शिकायत और वायरल वीडियो के आधार पर उठाया है।एमजी रोड थाना पुलिस ने बीते सोमवार और मंगलवार को दोनों आरोपी पार्षदों को पूछताछ के लिए तलब किया था। थाने में दोनों से घंटों तक सघन पूछताछ की गई और उनके बयान दर्ज किए गए।इसके बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 196/1 (विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना और सद्भाव बिगाड़ना) के तहत दोनों पार्षदों के खिलाफ केस दर्ज किया है। एमजी रोड पुलिस ने पार्षद रुबीना और पार्षद फौजिया अलीम के खिलाफ केस दर्ज कर लिया इंदौर नगर निगम के बजट सम्मेलन के दौरान वंदे मातरम् गीत के अपमान को लेकर उपजा विवाद अभी भी जारी है। सभापति और भाजपा के कई पार्षद विरोध स्वरूप थाने में बयान दर्ज करवा चुके हैं। पुलिस ने शिकायत के बाद पार्षद रुबीना खान के भी बयान लिए। अब एमजी रोड पुलिस ने पार्षद रुबीना और पार्षद फौजिया अलीम के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। साढ़े चार घंटे चली पूछताछ दर्ज किए बयान एसीपी विनोद दीक्षित ने बताया कि इस मामले में भाजपा पार्षद दल ने एमजी रोड थाने में आकर शिकायत की थी। इस शिकायत के बाद ही पूरे मामले की जांच की जा रही है। इस मामले में पार्षद फौजिया शेख अलीम के सोमवार को बयान दर्ज किए गए थे। मंगलवार को पार्षद रूबिना इकबाल खान के बयान दर्ज किए गए है। इसके साथ ही उनसे मामले को लेकर सवाल-जवाब भी किए गए। बयान देने के पहले रुबीना ने यू टर्न लेते हुए पत्र लिखने की बात पर मीडिया से कहा- सभी पार्षद मेरे भाई हैं, मुझे उस दौरान दो शब्द नहीं बोलने थे इससे पहले एमजी रोड पुलिस ने सोमवार को कांग्रेस पार्षद फौजिया अलीम तो मंगलवार को कांग्रेस पार्षद रुबीना खान के बयान लिए। बयान देने के पहले रुबीना ने यू टर्न लेते हुए पत्र लिखने की बात पर मीडिया से कहा कि सभी पार्षद मेरे भाई हैं। मुझे उस दौरान दो शब्द नहीं बोलने थे, इसके लिए खेद प्रकट करती हूं। मैं वंदे मातरम् का सम्मान करती हूं, अब कान पकड़ लिए, ऐसा नहीं होगा। मेरा गुस्सा ठंडा हुआ तो समझ आया कि मैंने गुस्से में गलत बोल दिया, मैं तो दोनों दिन वंदे मातरम् के लिए खड़ी थी रुबीना ने मीडिया से कहा, वे लोग (विपक्षी पार्षद) मुझे उकसा रहे थे। उस समय मैंने कहा था कि आपके बाप में दम हो और दूसरा शब्द था-कांग्रेस पार्टी भाड़ में जाए। ये दोनों शब्द आपत्तिजनक थे। जब मेरा गुस्सा ठंडा हुआ तो समझ आया कि मैंने गुस्से में गलत बोल दिया। मैं तो दोनों दिन वंदे मातरम् के लिए खड़ी थी। एएसपी विनोद दीक्षित ने बताया, करीब साढ़े चार घंटे बयान चले, पुलिस अब वीडियो का परीक्षण कर आगे की कार्रवाई करेगी एएसपी विनोद दीक्षित ने बताया, थाने में करीब साढ़े चार घंटे बयान चले। पुलिस अब वीडियो का परीक्षण कर आगे की कार्रवाई तय करेगी। हालांकि अभी कोई निष्कर्ष नहीं निकला। रुबीना ने की थी आपत्तिजनक टिप्पणी कांग्रेस पार्षद रुबीना इकबाल खान ने वंदे मातरम विवाद को लेकर सदन में आपत्तिजनक टिप्पणी भी की थी। उन्होंने कहा था कि किसी के बाप में दम हो तो वे हमने गवा कर दिखाए। इसके अलावा उन्होंने खुद की पार्टी के पार्षदों द्वारा वंदे मातरम विवाद में कुछ न बोलने पर भाड़ में जाए कांग्रेस जैसी टिप्पणी भी की थी। इसे लेकर उनके निष्कासन का प्रस्ताव शहर कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भेजा है।

राघव चड्ढा को मिली Z कैटेगरी सुरक्षा, पंजाब ने छीनी, केंद्र ने दी

चंडीगढ़  आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को पंजाब सरकार द्वारा दी गई जेड प्लस (Z+) कैटेगरी की सुरक्षा वापस ले ली गई। इस खबर के सामने आने के कुछ ही देर बाद केंद्र सरकार की तरफ से उन्हें सुरक्षा मुहैया करा दी गई। मौजूदा खतरे की आशंका के आधार पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के द्वारा उन्हें जेड (Z) श्रेणी की सुरक्षा दी गई है। यह सुरक्षा दिल्ली और पंजाब, दोनों जगहों पर उपलब्ध होगी। उनकी सुरक्षा के लिए अर्धसैनिक बलों को तैनात किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि जब तक औपचारिकता पूरी नहीं कर ली जाती है, तब तक दिल्ली पुलिस को तत्काल सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश दिया गया है। आपको बता दें कि पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने पिछले सप्ताह ही राघव चड्ढा का सुरक्षा घेरा हटा लिया था। पंजाब से राज्यसभा सांसद चुने जाने के बाद उन्हें राज्य सरकार की ओर से सबसे उच्च स्तर की Z+ सुरक्षा प्रदान की गई थी। राघव चड्ढा और 'आप' नेतृत्व के बीच तनाव उस समय चरम पर पहुंच गया जब पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में उपनेता के पद से हटा दिया। इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए चड्ढा ने कहा था कि उन्हें "खामोश किया गया है, पराजित नहीं किया गया।" ‘आवाज उठाई, कीमत चुकाई’ आपको बता दें कि हाल ही में राघव चड्ढा ने इंस्टाग्राम पर ''आवाज उठाई, कीमत चुकाई'' शीर्षक वाला एक वीडियो शेयर किया था। यह वीडियो संसद में उनके द्वारा विभिन्न मुद्दे उठाते हुए दिखाने वाली कई 'क्लिप' का संकलन है। चड्ढा ने पोस्ट में कहा, ''पूरे सम्मान के साथ, मैं मेरे संसदीय प्रदर्शन पर सवाल उठाने वालों से यही कहूंगा कि मेरा काम ही बोलेगा।'' आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से दो अप्रैल को हटा दिया था। पार्टी ने उन पर आरोप लगाया है कि वह संसद में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्र के खिलाफ मुखर होकर बोलने से बचते रहे और इसके बजाय अपने प्रचार-प्रसार में लगे रहे। चड्ढा ने आक्रामक रुख अपनाते हुए पार्टी के आरोपों को 'झूठ करार दिया और कहा कि वह संसद में लोगों के मुद्दे उठाने गए थे, हंगामा करने नहीं। राज्यसभा में 'आप' के उपनेता पद से हटाए जाने के बाद से चड्ढा सोशल मीडिया पर कई वीडियो और पोस्ट साझा कर चुके हैं। इससे यह साफ संकेत गया है कि वह उन्हें राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटाए जाने के फैसले को चुपचाप स्वीकार नहीं करेंगे।

पवन खेड़ा की बढ़ी मुश्किलें, SC ने अग्रिम जमानत पर लगाई रोक, तुषार मेहता ने दी अहम दलील

नई दिल्ली कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगता दिख रहा है. पवन खेड़ा को तेलंगाना हाईकोर्ट में मिली जमानत के खिलाफ दायर असम सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें मिली अग्रिम जमानत पर रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही पवन खेड़ा को नोटिस जारी कर तीन हफ्ते में जवाब मांगा है।  सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जेके महेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदूरकर की बेंच के सामने असम सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तीखे सवाल उठाए. उन्होंने कहा, ‘अपराध असम में हुआ, मामला भी वहीं दर्ज है, तो तेलंगाना हाईकोर्ट ने जमानत क्यों दी?’ उन्होंने यह भी पूछा कि पवन खेड़ा ने असम हाईकोर्ट का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाया।  तुषार मेहता ने कोर्ट से तेलंगाना हाईकोर्ट के 10 अप्रैल के आदेश पर रोक लगाने की मांग की, जिसमें खेड़ा को एक सप्ताह के लिए ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दलीलें सुनने के बाद फिलहाल उस आदेश पर रोक लगा दी है।  सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि पवन खेड़ा ने अग्रिम जमानत की अवधि बढ़ाने की मांग की है, जिस पर अब अदालत विचार करेगी।  जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की बेंच ने इन बातों को सुनने के बाद यह माना कि कानूनी प्रक्रिया के हिसाब से मामला असम की अदालत का ही बनता है. अब पवन खेड़ा के पास कोई और रास्ता नहीं बचा है, उन्हें राहत के लिए असम की कोर्ट का दरवाजा खटखटाना ही पड़ेगा।  यह पूरा मामला तब शुरू हुआ था जब पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और उनकी पत्नी के खिलाफ कुछ गंभीर बातें कही थीं. इसी को लेकर असम में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी. अब मामला वापस वहीं पहुंच गया है जहां से शुरू हुआ था. आने वाले तीन हफ्ते पवन खेड़ा के लिए काफी भागदौड़ भरे हो सकते हैं क्योंकि उन्हें अब सुप्रीम कोर्ट को जवाब देने के साथ-साथ असम की कोर्ट में भी अपना पक्ष रखना होगा।  क्या है पूरा मामला? दरअसल, यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा के खिलाफ कथित मानहानिकारक टिप्पणियों से जुड़ा है. असम पुलिस ने खेड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है, जिसमें मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश जैसे आरोप शामिल हैं।  तेलंगाना हाईकोर्ट ने खेड़ा को यह राहत इस आधार पर दी थी कि वे असम जाकर सक्षम अदालत में नियमित जमानत के लिए आवेदन कर सकें. सुनवाई के दौरान खेड़ा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी थी कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध का है और इसमें गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं है।  वहीं, असम सरकार ने तेलंगाना हाईकोर्ट में ही इस याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाया था और कहा था कि खेड़ा दिल्ली के निवासी हैं, ऐसे में असम के बाहर राहत मांगने का कोई ठोस आधार नहीं बनता।  यह मामला राजनीतिक रूप से भी काफी संवेदनशील बन गया है. असम विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस और भाजपा के बीच इस मुद्दे पर तीखा टकराव देखने को मिला था. कांग्रेस ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया, जबकि भाजपा ने आरोपों को गंभीर बताते हुए कार्रवाई को सही ठहराया।  अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई के बाद यह तय होगा कि पवन खेड़ा को मिली राहत बरकरार रहती है या नहीं, और क्या उन्हें असम हाईकोर्ट का रुख करना होगा। 

TCS मामले में बड़ा खुलासा: 9 FIR में यौन उत्पीड़न, धार्मिक दबाव और मलेशिया भेजने की साजिश, HR निदा खान पर सवाल

नासिक नासिक की एक प्रमुख आईटी कंपनी में महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न का चौंकाने वाला मामला अब मानव तस्करी और जबरन धर्मांतरण तक पहुंच गया है. पुलिस ने कंपनी की एचआर अधिकारी समेत कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया है. कुल नौ मामले दर्ज किए गए हैं. आरोपियों पर नौकरी, प्रेम और मदद का लालच देकर युवतियों का यौन शोषण करने का आरोप है।  पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी 2022 से दोस्ती के नाम पर युवतियों के साथ जाल बुन रहे थे. उन्होंने मानसिक और भावनात्मक दबाव बनाकर उनका शोषण किया. अब जांच में नया मोड़ आया है. पुलिस को पता चला है कि आरोपी पीड़ित युवतियों को मलेशिया बेचने की योजना बना रहे थे. वीडियो कॉल पर मलेशिया भेजने की चर्चा हुई थी. एक पीड़िता को सीधे मलेशिया भेजने की तैयारी चल रही थी, जिसमें पासपोर्ट बनाने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी थी. मामले की जांच कर रही एसआईटी को महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं. जांच में विदेशी फंडिंग, वित्तीय लेन-देन और बड़े रैकेट की आशंका जताई जा रही है. कुछ अधिकारियों को संदेह है कि इस पूरे मामले का राष्ट्रीय सुरक्षा से भी संबंध हो सकता है. पुलिस का मानना है कि अन्य कई महिलाओं को भी इसी तरह निशाना बनाया गया होगा।  कौन है निदा खान? निदा खान इस पूरे मामले की केंद्र बिंदु बन गई है. वह नासिक स्थित कंपनी की HR मैनेजर हैं और कंपनी की इंटरनल कमिटी (POSH एक्ट के तहत यौन उत्पीड़न रोकथाम समिति) का हिस्सा थीं. आरोप है कि कई शिकायतें उनके पास पहुंचीं, लेकिन उन्होंने उन्हें नजरअंदाज कर दिया या ऊपर नहीं भेजा. जांचकर्ताओं के मुताबिक POSH प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया. निदा खान सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी (SPPU) की पूर्व छात्रा हैं. उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार वे HR मैनेजर के पद पर काम कर रही थीं. पुलिस के अनुसार निदा खान और तौसिफ अत्तर को इस मामले का मास्टरमाइंड माना जा रहा है. कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि निदा खान फिलहाल फरार है और पुलिस उसकी तलाश में तकनीकी और खुफिया जानकारी का इस्तेमाल कर रही है. पुलिस ने अंडरकवर ऑपरेशन चलाया था. सात महिला पुलिसकर्मी हाउसकीपिंग स्टाफ बनकर कंपनी में काम करती रहीं और आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखी. इसी ऑपरेशन के आधार पर कई शिकायतें सामने आईं और नौ एफआईआर दर्ज हुईं।  आरोपों की गंभीरता आरोपियों पर यौन उत्पीड़न, जबरन धर्मांतरण, मानव तस्करी और वित्तीय धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोप लगे हैं. पीड़ित युवतियों का कहना है कि उन्हें नामाज पढ़ने, गोमांस खाने और धर्म बदलने के लिए दबाव डाला गया. कंपनी के अंदर ही कुछ कर्मचारियों ने इस जाल को फैलाया. TCS कंपनी ने आरोपी कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है. एसआईटी आरोपियों के बैंक लेन-देन, विदेशी संपर्क और संभावित रैकेट की गहराई से जांच कर रही है. पुलिस ने पीड़ितों के बयान दर्ज किए हैं. मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और SC/ST एक्ट की धाराओं के तहत कार्रवाई हो रही है।  TCS मामले में साजिश का खुलासा नासिक के TCS BPO कैंपस में कथित धर्म परिवर्तन और यौन उत्पीड़न का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है. अब तक इस मामले में 9 अलग-अलग एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें कई चौंकाने वाले आरोप सामने आए हैं. यह पूरा मामला एक पैटर्न की तरफ इशारा करता है, जिसमें महिला कर्मचारियों को निशाना बनाकर उनके साथ यौन शोषण और धार्मिक दबाव बनाया गया।  9 FIR में खुली साजिश की परतें पहली एफआईआर के अनुसार जुलाई 2022 से फरवरी 2026 के बीच आरोपियों दानिश शेख, तौसीफ अत्तर और निदा खान ने एक महिला कर्मचारी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई. आरोप है कि हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की गई. साथ ही तौसीफ अत्तर ने शादी का झांसा देकर कई बार शारीरिक संबंध बनाए. दानिश शेख पर भी कार्यालय में जबरन छूने और नजदीकी बढ़ाने की कोशिश करने का आरोप है।  सरी एफआईआर में मई 2023 से मार्च 2026 के बीच रजा मेमन और शाहरुख कुरैशी पर एक महिला कर्मचारी को घूरने, छूने और उसकी निजी जिंदगी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है. पीड़िता ने कई बार शिकायत की, लेकिन कंपनी के अधिकारी ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे आरोपियों को बढ़ावा मिला।  तीसरी एफआईआर में शफी शेख पर मीटिंग के दौरान महिला कर्मचारी को घूरने और अश्लील व्यवहार करने का आरोप है. इसके अलावा तौसीफ अत्तर ने भी निजी जीवन को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां कीं और शारीरिक नजदीकी बढ़ाने की कोशिश की।  चौथी एफआईआर के अनुसार मई 2025 से दिसंबर 2025 के बीच तौसीफ अत्तर ने महिला कर्मचारी से उसकी निजी जिंदगी से जुड़े सवाल पूछे और अश्लील इशारे किए. इसके अलावा हिंदू देवी-देवताओं को लेकर अपमानजनक टिप्पणी भी की गई, जिससे पीड़िता और अन्य कर्मचारी आहत हुए।  पांचवीं एफआईआर में आरोप है कि 2022 से मार्च 2026 के बीच तौसीफ अत्तर, दानिश, शाहरुख शेख और रजा मेमन ने मिलकर पीड़िता पर नमाज पढ़ने का दबाव बनाया और उसे मांस खाने के लिए मजबूर किया. साथ ही हिंदू धर्म और देवी-देवताओं का अपमान किया गया और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया गया।  छठी एफआईआर में सितंबर 2024 से फरवरी 2026 के बीच आसिफ अंसारी और शफी शेख पर महिला कर्मचारी के शरीर को लेकर अश्लील टिप्पणी करने और गलत तरीके से छूने का आरोप है. इसके साथ ही तौसीफ अत्तर पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का भी आरोप लगा है।  सातवीं एफआईआर के अनुसार जून 2025 से मार्च 2026 के बीच आसिफ अंसारी, शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन, तौसीफ अत्तर और शफी शेख ने महिला कर्मचारी का पीछा किया, अश्लील टिप्पणियां कीं और छेड़छाड़ की। साथ ही धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप भी लगाए गए।  आठवीं एफआईआर में जनवरी 2025 से अब तक रजा मेमन और शफी शेख पर महिला कर्मचारी से उसकी इच्छा के खिलाफ निजी बातें करने, शादी का प्रस्ताव देने और शरीर को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है. दोनों पर बार-बार शारीरिक संपर्क बनाने की कोशिश करने का भी आरोप है।  नौवीं एफआईआर में जनवरी 2026 से 1 अप्रैल 2026 के बीच रजा मेमन और शाहरुख कुरैशी पर अश्लील टिप्पणियां करने, इशारे करने और पीड़िता की निजी … Read more

योगी सरकार का बड़ा कदम: नोएडा-गाजियाबाद में श्रमिकों की सैलरी में ₹3000 तक की बढ़ोतरी

योगी सरकार का बड़ा फैसला: नोएडा-गाजियाबाद में श्रमिकों की सैलरी में ₹3000 तक की बढ़ोतरी हाई पावर कमेटी की सिफारिश पर अंतरिम वेतन वृद्धि लागू, 1 अप्रैल से नई दरें प्रभावी गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद में श्रमिकों के वेतन में 21% तक वृद्धि अकुशल, अर्धकुशल और कुशल श्रेणियों में नई दरें घोषित हिंसा फैलाने वाले असामाजिक तत्वों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश गौतमबुद्ध नगर  नोएडा और गाजियाबाद के श्रमिकों को बड़ी राहत देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित उच्च स्तरीय समिति ने न्यूनतम वेतन में अंतरिम वृद्धि का ऐलान किया है। हालिया घटनाक्रमों के बाद की गई विस्तृत समीक्षा के आधार पर सरकार ने संतुलित निर्णय लेते हुए अकुशल, अर्धकुशल और कुशल श्रेणियों में करीब ₹3000 तक वेतन बढ़ाया है, जिससे गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद में 21% तक वृद्धि हुई है। यह नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी। सरकार ने ₹20,000 न्यूनतम वेतन की खबरों को भ्रामक बताया है, वहीं श्रमिकों की मांगों और उद्योगों की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए आगे वेज बोर्ड के माध्यम से स्थायी समाधान की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में प्रदेश सरकार औद्योगिक शांति, श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा तथा निवेश अनुकूल वातावरण बनाए रखने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जनपद गौतम बुद्ध नगर में पूर्व की भांति सौहार्द, शांति एवं विकास की गति निरंतर बनी रहे।          एक अप्रैल से लागू होगी नई दरें औद्योगिक विकास आयुक्त, उत्तर प्रदेश दीपक कुमार ने हाल ही में हुए घटनाक्रमों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए न्यूनतम वेतन में तात्कालिक रूप से अंतरिम वृद्धि का निर्णय लिया है, जिसमें सबसे अधिक बढ़ोतरी कुशल श्रेणी के श्रमिकों के लिए की गई है, वहीं गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद में यह वृद्धि सबसे अधिक 21 प्रतिशत तक की गई है और यह नई अंतरिम वेतन दरें 01 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगी। इस प्रकार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में श्रमिकों को सीधी आर्थिक राहत प्रदान की गई है। साथ ही, आगामी माह में गठित होने वाले वेज बोर्ड की अनुशंसाओं के आधार पर स्थायी न्यूनतम वेतन निर्धारण की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी। सरकार श्रमिकों के कल्याण हेतु स्वास्थ्य, पेंशन एवं उनके बच्चों की शिक्षा से जुड़ी नई योजनाओं पर भी विचार कर रही है। अकुशल, अर्धकुशल और कुशल श्रेणी में हुई वेतन वृद्धि अंतरिम वेतन वृद्धि के अनुसार अकुशल श्रमिकों का वेतन ₹11313 से बढ़ाकर ₹13690 कर दिया गया है, अर्धकुशल श्रमिकों का वेतन ₹12445 से बढ़ाकर ₹15059 किया गया है, जबकि कुशल श्रमिकों का वेतन ₹13940 से बढ़ाकर ₹16868 कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि अन्य नगर निगम वाले जनपदों के लिए अकुशल श्रमिकों का वेतन ₹11313 से बढ़ाकर ₹13006, अर्ध कुशल श्रमिकों का वेतन ₹12445 से बढ़ाकर ₹14306 तथा कुशल श्रमिकों का वेतन ₹13940 से बढ़ाकर ₹16025 कर दिया गया है। इसी प्रकार अन्य जनपदों के लिए अकुशल श्रमिकों का वेतन ₹11313 से बढ़ाकर ₹12356, अर्ध कुशल श्रमिकों का वेतन ₹12445 से बढ़ाकर ₹13591 तथा कुशल श्रमिकों का वेतन ₹13940 से बढ़ाकर ₹15224 कर दिया गया है।  ₹20,000 मासिक न्यूनतम वेतन संबंधी खबरें भ्रामक एवं निराधार उन्होंने बताया कि सोमवार को हुए प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर हुई हिंसात्मक घटनाओं का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल प्रभाव से उच्च स्तरीय समिति का गठन किया। समिति द्वारा नोएडा पहुंचकर पूरे प्रकरण की गहन जांच की गई। जांच में यह तथ्य सामने आया कि सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर ₹20,000 मासिक न्यूनतम वेतन लागू होने संबंधी खबरें पूरी तरह भ्रामक एवं निराधार हैं। वास्तविक स्थिति यह है कि भारत सरकार द्वारा नई श्रम संहिताओं के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर पर ‘फ्लोर वेज’ निर्धारित करने की प्रक्रिया प्रगति पर है, जिसका उद्देश्य देशभर के श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन की एक समान आधार रेखा सुनिश्चित करना है। हिंसा में बाहरी तत्वों की संलिप्तता की आशंका राज्य सरकार द्वारा नियोक्ता संगठनों, श्रमिक संगठनों एवं अन्य सभी हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया जा रहा है। प्राप्त सुझावों और आपत्तियों का गंभीरता से परीक्षण किया जा रहा है, ताकि एक संतुलित, व्यावहारिक एवं सर्वमान्य निर्णय लिया जा सके। समिति द्वारा विभिन्न चरणों में श्रमिकों एवं नियोक्ताओं के साथ बैठकें आयोजित की गईं। श्रमिक प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन पूर्णतः शांतिपूर्ण था, जिसमें वेतन वृद्धि, साप्ताहिक अवकाश, ओवरटाइम का दुगुना भुगतान, श्रमिक हितों की सुरक्षा एवं सम्मानजनक कार्य वातावरण जैसी मांगें शामिल थीं। उन्होंने हिंसा में बाहरी तत्वों की संलिप्तता की आशंका जताई। वहीं, नियोक्ताओं ने बताया कि वर्तमान समय में उद्योग जगत वैश्विक आर्थिक चुनौतियों से गुजर रहा है। कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि और निर्यात में कमी ने उद्योगों पर दबाव बढ़ाया है। इसके बावजूद श्रमिकों की मांगों को उन्होंने प्रासंगिक एवं विचारणीय बताया। श्रमिकों के वेलफेयर के लिए कन्ट्रोल रूम स्थापित समिति द्वारा प्रेस वार्ता के दौरान बताया गया कि जनपद स्तर पर श्रमिकों के वेलफेयर एवं शान्ति व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु एक कन्ट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जिसके नम्बर 120-2978231,  120-2978232, 120-2978862, 120-2978702 हैं, इस कन्ट्रोल रूम के माध्यम से श्रमिक अपनी किसी भी प्रकार की समस्या, शिकायत अथवा सूचना दर्ज करा सकते हैं।        असामाजिक एवं बाहरी तत्वों की पहचान के लिए अभियान जनपद में औद्योगिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास करने वाले असामाजिक एवं बाहरी तत्वों के विरुद्ध प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। ऐसे तत्व न केवल कानून-व्यवस्था के लिए खतरा हैं, बल्कि श्रमिकों और उद्योगों के बीच विश्वास एवं सहयोग की भावना को भी कमजोर करते हैं। प्रशासन द्वारा इन तत्वों की पहचान के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें तकनीकी निगरानी, खुफिया तंत्र एवं स्थानीय स्तर पर सूचना संकलन को मजबूत किया गया है। पहचान किए गए दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है, जिसमें गिरफ्तारी, आपराधिक मुकदमे दर्ज करना तथा आवश्यकतानुसार अन्य विधिक प्रावधानों के अंतर्गत दंडात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार स्पष्ट रूप से यह संदेश देना चाहती है कि शांति एवं विकास के वातावरण को बाधित करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। … Read more

बिहार में सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, पहली बार राज्य में बीजेपी की अपनी सरकार

पटना  नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बिहार की राजनीति में आज से सम्राट चौधरी का युग शुरू हो गया है. पहली बार बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री बना है. सम्राट चौधरी बिहार के 24वें मुख्यमंत्री हैं. इस शपथ ग्रहण समारोह में बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन, जेपी नड्डा और चिराग पासवान समेत कई बड़े नेताओं ने भाग लिया।  पटना के लोकभवन में बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण कर ली है. राज्यपाल सैय्यद अता हसनैन उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. बिहार के राजनीतिक इतिहास में ये पहली है, जब भारतीय जनता पार्टी का कोई नेता मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली है. सम्राट चौधरी के साथ जेडीयू कोटे से विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव डिप्टी सीएम के तौर पर शपथ ली. आज केवल इन तीन नेताओं का ही शपथ ग्रहण हुआ, जबकि नई एनडीए सरकार के गठन के बाद भी कैबिनेट में अभी 33 मंत्री पद खाली हैं. इस भव्य शपथग्रहण समारोह में बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, चिराग पासवान और जीतन राम मांझी विशेष रूप से मौजूद रहे।  सम्राट चौधरी की नई सरकार में बिजेंद्र प्रसाद यादव ने ली शपथ बिहार की नवनिर्वाचित सरकार में जेडीयू के कद्दावर और वरिष्ठ नेता बिजेंद्र प्रसाद यादव ने मंत्री पद की शपथ ली। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली इस नई टीम में बिजेंद्र यादव का शामिल होना सरकार के प्रशासनिक अनुभव को मजबूती प्रदान करेगा। वे दशकों से बिहार की राजनीति और सरकार का अहम हिस्सा रहे हैं, और उनके पास ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण विभागों को संभालने का लंबा अनुभव है। बिहार में भाजपा के लिए ऐतिहासिक पल, पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री बिहार की राजनीति में आज एक नया युग शुरू हो रहा है, जहां पहली बार भाजपा का कोई नेता मुख्यमंत्री पद की कमान संभालने जा रहा। सम्राट चौधरी लोकभवन में शपथ लेकर ये ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित करेंगे। हालांकि यह समारोह संक्षिप्त होगा, लेकिन इसका राजनीतिक महत्व काफी बड़ा है। सरकार के नए स्वरूप में जेडीयू कोटे से बिजेंद्र यादव और विजय चौधरी उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। बिहार के इतिहास में ये पहली बार होगा जब जदयू कोटे से दो उपमुख्यमंत्री सरकार का हिस्सा बनेंगे। डिप्टी सीएम के नाम पर संजय सरावगी ने लगाई मुहर बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि बिहार को पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 20 साल के कार्यकाल के बाद आज नए मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी और उपमुख्यमंत्री के रूप में विजय चौधरी और विजेंद्र यादव मिल रहे हैं। विकास की जो रेखा नीतीश कुमार ने खींची थी उसी रेखा को आगे बढ़ाने का काम सम्राट चौधरी के नेतृत्व में होगा। BJP का 46 साल का संघर्ष, पहली बार सीएम इससे पहले नीतीश कुमार ने अपना इस्तीफा सौंपा। महज 9 साल पहले बीजेपी में शामिल हुए सम्राट चौधरी बेहद मुखर और आक्रामक नेता माने जाने जाते हैं। 26 साल पहले विधायक चुने गए, 2024 में डिप्टी सीएम बने और 2025 में बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद फिर डिप्टी सीएम की शपथ ली। अब उनके पास सीएम के तौर पर पूरे बिहार का शासन चलाने के साथ पार्टी और NDA गठबंधन को साथ रखने की भी चुनौती होगी। वहीं, बिहार की राजनीति में पहले जनसंघ और फिर बीजेपी हमेशा सक्रिय रही। बीजेपी पहले भी दो बार बड़ी पार्टी बनी लेकिन सीएम हमेशा नीतीश कुमार ही बने। ये पहला मौका है जब बीजेपी के पास सीटें भी ज्यादा हैं और सम्राट चौधरी के तौर पर उन्हें सीएम भी अपना मिला है।  डिप्टी सीएम बिजेंद्र यादव का सफरनामा सुपौल से 1990 से लगातार विधायक, 'कोसी का विश्वकर्मा' के नाम से मशहूर 1991 में लालू सरकार में पहली बार बने मंत्री, 2005 में नीतीश के CM बनने के समय JDU के प्रदेश अध्यक्ष नीतीश कैबिनेट में कई बार बिजली मंत्री रहे वित्त, वाणिज्य कर जैसे विभाग भी संभाला, 2025 में लगातार नौवीं बार जीत दर्ज की 2025 में कांग्रेस के मिन्नतुल्लाह रहमानी को हराया     JDU के सबसे सीनियर नेताओं में एक, नीतीश के करीबी और थिंक टैंक में शामिल     1982 से लगातार बिहार विधानसभा के सदस्य, दलसिंहसराय सीट से पहली बार चुनाव जीते     सरायरंजन सीट से पहली बार 2010 में जीत दर्ज की, 2025 में सरायरंजन सीट से चुनाव जीते     वित्त, शिक्षा, कृषि, ग्रामीण विकास जैसे विभाग संभाले     2015 से 2020 तक विधानसभा के स्पीकर      साफ-सुथरी इमेज और कुशल प्रशासक की छवि बिहार के नए 'सम्राट' का सफरनामा     RJD के साथ सियासी करियर की शुरुआत     1999 में राबड़ी सरकार में मंत्री बने     2000 में पहली बार परबत्ता से बने विधायक     2013 में RJD से बगावत, JDU में एंट्री     2 जून 2014 में मांझी सरकार में मंत्री बने     मांझी को हटाने पर बगावत, JDU से सस्पेंड     2017 में BJP में शामिल 2023 में बिहार BJP अध्यक्ष     2021 में नीतीश कैबिनेट में बने मंत्री     2024 में नीतीश सरकार में डिप्टी सीएम का जिम्मा     तारापुर से जीता 2025 विधानसभा का चुनाव     2025 में दूसरी बार डिप्टी सीएम बने     15 अप्रैल 2026 को सीएम पद की शपथ 967 में कर्पूरी बने थे मुख्‍यमंत्री  करीब 59 वर्षों बाद वे इस उपलब्धि को दोहराएंगे-इससे पहले 1967 में उप मुख्यमंत्री बने जननायक कर्पूरी ठाकुर ने 1977 में मुख्यमंत्री पद संभाला था। भाजपा के राज्यसभा सदस्य डॉ. भीम सिंह के अनुसार, बिहार की राजनीति में उप मुख्यमंत्री का पद हमेशा से सत्ता संतुलन का प्रतीक रहा है। 1957 में श्रीकृष्ण सिंह की सरकार में पहली बार यह पद बनाया गया था, जब अनुग्रह नारायण सिन्हा को उप मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया था। तब से अब तक लगभग 10 नेता इस पद पर रह चुके हैं, लेकिन कर्पूरी ठाकुर ही ऐसे नेता थे, जो आगे चलकर मुख्यमंत्री बने। अब सम्राट चौधरी इस सूची में दूसरा नाम जोड़ने जा रहे हैं। नीतीश युग में उप मुख्यमंत्रियों की भरमार नीतीश कुमार के दो दशक लंबे राजनीतिक दौर में बिहार में सबसे अधिक उप मुख्यमंत्री बनाए गए। इस सूची में सुशील कुमार मोदी, तारकिशोर प्रसाद, रेणु देवी, तेजस्वी … Read more

लोकसभा में सांसदों की संख्या बढ़कर 850 होगी, 3 नए बिलों के मसौदे दिए गए

नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने देश के लोकतांत्रिक ढांचे में बड़े बदलाव लाने वाले तीन प्रमुख विधेयकों का मसौदा सांसदों को दिया है. केंद्र सरकार संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 जल्‍द पास कराने की तैयारी कर रही है. ये विधेयक आगामी जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर अधिकतम 850 करने, निर्वाचन क्षेत्रों के नए सिरे से निर्धारण (Delimitation) और महिला आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करने का वैधानिक मार्ग प्रशस्त करते हैं. सरकार के इस कदम के साथ ही दशकों से लंबित सीटों के पुनर्गठन और भाषाई व क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व की नई व्यवस्था पर औपचारिक मुहर लगने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।  वर्ष 2026 में पेश किए गए ये तीनों विधेयक भारत के चुनावी ढांचे और सीटों के पुनर्निर्धारण (Delimitation) में व्यापक बदलाव का प्रस्ताव करते हैं:     संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 (Bill 107): यह विधेयक लोकसभा में सीटों की संख्या को अधिकतम 815 (राज्यों से) और 35 (केंद्र शासित प्रदेशों से) तक बढ़ाने का प्रावधान करता है . इसके अलावा, यह ‘जनसंख्या’ की परिभाषा में बदलाव करता है ताकि निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण संसद द्वारा निर्धारित नवीनतम जनगणना के आधार पर किया जा सके।      परिसीमन विधेयक, 2026 (Bill 108): यह नवीनतम जनगणना के आंकड़ों के आधार पर लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों के आवंटन और निर्वाचन क्षेत्रों के विभाजन के लिए एक परिसीमन आयोग के गठन का प्रावधान करता है . आयोग में सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश अध्यक्ष होंगे।      केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 (Bill 109): यह विधेयक पुडुचेरी, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के कानूनों में संशोधन करता है ताकि उन्हें नए परिसीमन नियमों और महिला आरक्षण (संविधान के अनुच्छेद 334A) के अनुरूप बनाया जा सके . इसके तहत पुडुचेरी में नामांकित सदस्यों की संख्या बढ़ाकर पांच करने का प्रस्ताव है, जिनमें से दो महिलाएं होंगी।  सांसदों को सौंपे गए तीनों विधेयक (संविधान संशोधन, परिसीमन, और केंद्र शासित प्रदेश कानून) यह स्पष्ट करते हैं कि भारत की चुनावी राजनीति अब तक के सबसे बड़े बदलाव की दहलीज पर है. इन दस्तावेजों के आधार पर मुख्य निष्कर्ष निम्नलिखित हैं: 1. लोकसभा का ऐतिहासिक विस्तार (850 सीटें) विधेयकों का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा लोकसभा की सदस्य संख्या में भारी वृद्धि है।  ·         नई संरचना: संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के अनुसार, लोकसभा की सदस्य संख्या बढ़ाकर अधिकतम 850 करने का प्रस्ताव है. इसमें 815 सदस्य राज्यों से और 35 सदस्य केंद्र शासित प्रदेशों से होंगे।  ·         क्यों है यह बड़ा: वर्तमान में लोकसभा की अधिकतम संख्या 550 (प्रभावी 543) है. 300 से अधिक सीटों की यह वृद्धि पिछले कई दशकों का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक विस्तार है।  2. ‘जनसंख्या’ की नई परिभाषा और जनगणना का आधार अब तक सीटों का आवंटन 1971 की जनगणना के आधार पर अटका हुआ था।  ·         नया फॉर्मूला: बिल 107 के माध्यम से अनुच्छेद 82 और 170 में संशोधन प्रस्तावित है. इसके तहत जनसंख्या का अर्थ अब वह नई जनगणना होगी जिसके आंकड़े संसद द्वारा निर्धारित किए जाएंगे।  ·         तात्पर्य: यह स्पष्ट संकेत है कि 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना ही नई सीटों के आवंटन का आधार बनेगी।  3. परिसीमन आयोग परिसीमन विधेयक, 2026 (Bill 108) एक शक्तिशाली परिसीमन आयोग के गठन का मार्ग प्रशस्त करता है।  ·         कार्य: यह आयोग तय करेगा कि जनसंख्या के अनुपात में किस राज्य को कितनी अतिरिक्त सीटें मिलेंगी।    संतुलन: इसमें न्यायिक और प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों और चुनाव आयोग को शामिल किया गया है. यह आयोग उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच जनसंख्या आधारित प्रतिनिधित्व के असंतुलन को भी संबोधित करेगा।  4. महिला आरक्षण का व्यावहारिक क्रियान्वयन तीसरा विधेयक (Bill 109) केंद्र शासित प्रदेशों (दिल्ली, पुडुचेरी, जम्मू-कश्मीर) के कानूनों में बदलाव लाता है।   आरक्षण का लिंक: यह सुनिश्चित करता है कि 106वें संविधान संशोधन (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के तहत प्रस्तावित 33% महिला आरक्षण नए परिसीमन के साथ ही लागू हो. नामांकन: पुडुचेरी जैसे क्षेत्रों में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।  5. एक नया राजनीतिक युग इन बिलों का विश्लेषण बताता है कि यह केवल सीटों की संख्या बढ़ाना नहीं है बल्कि: ·         प्रतिनिधित्व में सुधार: बढ़ती जनसंख्या के बावजूद एक सांसद पर कम आबादी का बोझ होगा, जिससे जमीनी स्तर पर काम बेहतर होगा।  ·         आधुनिक संसद: नई संसद की क्षमता (करीब 888 सीटें) के अनुरूप यह ढांचा तैयार किया गया है।  ·         चुनौती: उत्तर और दक्षिण के राज्यों के बीच सीटों के वितरण को लेकर होने वाली राजनीतिक बहस के लिए सरकार ने कानूनी ढाल तैयार कर ली है। 

MP Board Result 2026: लड़कियों ने मारी ‘हैट्रिक’, लड़कों को पछाड़कर मेरिट लिस्ट में किया दबदबा

भोपाल  मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) ने शैक्षणिक सत्र 2025-2026 के लिए 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट आज, 15 अप्रैल को जारी कर दिया है. बता दें कि इस साल एमपी बोर्ड में 10वीं के लिए 9 लाख से ज्यादा और 12वीं के लिए 7 लाख से अधिक छात्रों ने हिस्सा लिया था. छात्र अपना परीक्षा परिणाम ऑफिशियल वेबसाइट mpbse.nic.in और mpresults.nic.in पर जाकर चेक कर सकते हैं।  माध्यमिक शिक्षा मंडल, मध्य प्रदेश ने वर्ष 2026 की 10वीं (हाईस्कूल) परीक्षा का परिणाम जारी कर दिया है। इस बार कुल 73.42% नियमित छात्र पास हुए हैं।पन्ना जिले की प्रतिभा सिंह सोलंकी ने 500 में से 499 अंक हासिल कर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। हाई स्कूल परीक्षा 13 फरवरी से 6 मार्च 2026 के बीच हुई थी। इसमें कुल 8,97,061 विद्यार्थी शामिल हुए, जिनमें 7,87,733 नियमित और 1,09,328 प्राइवेट परीक्षार्थी थे। छात्राओं का प्रदर्शन बेहतर इस बार भी छात्राओं का प्रदर्शन छात्रों से बेहतर रहा। छात्राओं का पास प्रतिशत 77.52% रहा, जबकि छात्रों का 69.31% दर्ज किया गया। सरकारी स्कूल आगे, परिणाम 76.80% शासकीय स्कूलों का परिणाम 76.80% रहा, जो निजी स्कूलों के 68.64% से अधिक है। इससे सरकारी स्कूलों के बेहतर प्रदर्शन का संकेत मिलता है। टॉपर्स में छात्राओं का दबदबा मेरिट लिस्ट में 378 विद्यार्थियों ने जगह बनाई, जिनमें 235 छात्राएं और 143 छात्र शामिल हैं। जिलावार प्रदर्शन: अनूपपुर 93.85% के साथ पहले स्थान पर जिलावार परिणाम में अनूपपुर 93.85% के साथ पहले और आलीराजपुर 92.14% के साथ दूसरे स्थान पर रहा। पूरक की जगह द्वितीय अवसर परीक्षा इस वर्ष पूरक परीक्षा की जगह द्वितीय अवसर परीक्षा का प्रावधान किया गया है। मुख्य परीक्षा में फेल, अनुपस्थित या अंक सुधारने वाले छात्र 7 मई 2026 से होने वाली इस परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। 2.89 लाख छात्र फेल कुल 2,89,693 छात्र फेल घोषित किए गए हैं, जबकि परीक्षा के दौरान 47 नकल के मामले सामने आए। इतने छात्र हुए पास मध्य प्रदेश बोर्ड ने इस साल का पास प्रतिशत भी जारी कर दिया है. पिछले साल के मुकाबले इस बार नतीजों में सुधार देखने को मिला है: 10वीं बोर्ड: 78.14% छात्र पास हुए. 12वीं बोर्ड: 76.22% छात्र सफल रहे।  यहां पर भी चेक कर सकते हैं रिजल्ट mpbse.nic.in mpbse.mponline.gov.in mpresults.nic.in डिजिलॉकर (DigiLocker) और MPBSE मोबाइल ऐप पिछले 5 सालों का रिकॉर्ड (12वीं बोर्ड) इस साल (2026) का कुल पास प्रतिशत 76.22% रहा है. पिछले सालों का रिकॉर्ड इस प्रकार है: 2026: 76.22%  2025: 74.48% 2024: 64.48% 2023: 55.28% 2022: 72.72% 2021: (कोविड-19 की वजह से प्रमोटेड) 2020: 68.81% मंत्री बोले- रिजल्ट 'फुलप्रूफ' रखा गया स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह के अनुसार, रिजल्ट से पहले क्रॉस चेकिंग और वैरिफिकेशन तेजी से पूरा किया गया। हर स्तर पर जांच की गई, ताकि कोई गलती न रहे। रिजल्ट 'फुलप्रूफ' रखा गया है, जिससे छात्रों को परेशानी न हो। 16 लाख से ज्यादा छात्र हुए शामिल इस वर्ष प्रदेश में 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में करीब 16 लाख से अधिक छात्र शामिल हुए हैं। इनमें लगभग 9 लाख 7 हजार विद्यार्थी 10वीं और करीब 7 लाख छात्र 12वीं की परीक्षा में बैठे। इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए परीक्षा संचालन के लिए प्रदेशभर में 3856 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। MP Board 10th Result 2026: स्टूडेंट्स का पास प्रतिशत विद्यार्थी एमपी बोर्ड पास प्रतिशत रेगुलर स्टूडेंट्स कितने पास हुए 76.01% रेगुलर छात्रों का पास प्रतिशत 72.39% रेगुलर छात्राओं का पास प्रतिशत 79.41% कुल पास प्राइवेट स्टूडेंट्स 30.60% प्राइवेट छात्रों का पास परसेंट 31.27% प्राइवेट छात्राओं का पास परसेंट 30% कितने बच्चों ने दिया था पेपर एमपी बोर्ड 10वीं की परीक्षा इस साल कुल 897061 स्टूडेंट्स शामिल हुए थे। इसमें से रेगुलर बच्चे 787733 और स्वाध्यायी परीक्षार्थियों की संख्या 109328 थी। रिट लिस्ट में कितने स्टूडेंट्स मध्य प्रदेश हाई स्कूल रिजल्ट 2026 की मेरिट लिस्ट में इस बार 235 छात्राओं और 143 छात्रों ने जगह बनाई है। कुल मिलाकर 378 स्टूडेंट्स टॉप पर रहे हैं। जिनमें लड़कियां लड़कों से ज्यादा हैं।  हाई स्कूल टॉपर प्रतिभा के मार्क्स कितने? एमपी बोर्ड 10वीं कक्षा में इस साल सरस्वती ज्ञान मंदिर हाई स्कूल गुनौर पन्ना की कुमारी प्रतिभा सिंह सोलंकी ने पहला स्थान हासिल किया है। उन्होंने 500 में से 499 अंक प्राप्त किए हैं। ऐसे चेक करें रिजल्ट  सबसे पहले बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट mpresults.nic.in पर जाएं. होमपेज पर 'HSC (Class 10th)' या 'HSSC (Class 12th)' रिजल्ट लिंक पर क्लिक करें. अपना 9 अंकों का रोल नंबर और एप्लीकेशन नंबर दर्ज करें. कैप्चा कोड भरने के बाद 'Submit' बटन पर क्लिक करें. आपका रिजल्ट स्क्रीन पर होगा, इसे डाउनलोड करें.फेल होने पर निराश न हों, आ गई 'सेकंड मुख्य परीक्षा' बता दें कि मध्य प्रदेश बोर्ड के नियमों के अनुसार हर सब्जेक्ट में पास होने के लिए 33 प्रतिशत मार्क्स (पहले 35% का चर्चा थी, लेकिन बोर्ड नियम 33% है) लाने होंगे. जो छात्र एक या दो विषयों में असफल रहे हैं, उनके लिए 7 मई 2026 से 'सेकंड मुख्य परीक्षा' (पूरक परीक्षा का नया रूप) आयोजित की जाएगी. इसके लिए छात्र आज से ही आवेदन कर सकते हैं।  एक्सपर्ट की सलाह- तनाव से बचें छात्र परीक्षा के दौरान छात्रों की सेहत को लेकर भी विशेषज्ञों ने अहम सलाह दी है। डॉक्टरों और काउंसलर्स ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें और उन्हें मानसिक रूप से सहयोग दें। सही दिनचर्या, पर्याप्त नींद और संतुलित आहार से बेहतर प्रदर्शन संभव है।