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केंद्र सरकार की उर्वरक सब्सिडी पहल: अन्नदाताओं को मिलेगी 41 हजार करोड़ की मदद

अन्नदाताओं को उरर्वकों पर सब्सिडी के लिए केंद्र सरकार ने दी 41 हजार करोड़ से अधिक की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी का माना आभार भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के हित में केंद्र सरकार द्वारा लिए गए फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केन्द्रीय मंत्रीमंडल ने फॉस्फेट एवं पोटेशियम उर्वरकों पर न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी (NBS) को मंजूरी दी है जो अन्नदाताओं के हित में एक महत्वपूर्ण और सराहनीय निर्णय है। खरीब सीजन- 2026 में इससे किसान प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन-2026 के लिए फॉस्फेट एवं पोटेशियम उर्वरकों पर पोषक तत्व आधारित सब्सिडी के लिए 41 हजार 533.81 करोड़ की बजटीय व्यवस्था को स्वीकृति प्रदान की है। यह एक महत्वपूर्ण निर्णय है। गत वर्ष स्वीकृत राशि से यह 4,317 करोड़ रुपए अधिक है। वैश्विक चुनौतियों और अंतर्राष्ट्रीय कीमतों के रुझानों के बावजूद केंद्र सरकार ने किसानों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह सुनिश्चित किया है कि उर्वरक रियायती, किफायती एवं उचित दरों पर उपलब्ध हों और उन पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। मध्यप्रदेश में किसान-कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्र सरकार का यह निर्णय कृषि लागत को संतुलित कर किसानों की आय और उत्पादन क्षमता को सुदृढ़ करेगा। मध्यप्रदेश में वर्ष 2026 कृषि और कृषक कल्याण वर्ष है। इस नाते ऐसे निर्णय मध्यप्रदेश के अन्नदाताओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी हैं। मध्यप्रदेश सरकार किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। किसानों को नई तकनीक से अवगत करवाने के लिए उन्नत कृषि महोत्सव भी आयोजित किए जा रहे हैं। कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी के माध्यम से किसानों को शिक्षित जागरूक बनाने और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का लाभ प्रदान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान हितैषी इस पहल के लिए प्रधानमंत्री मोदी एवं केंद्रीय मंत्रीमंडल का हार्दिक आभार व्यक्त किया है।  

दिल्ली के दिल तोड़े आखिरी गेंद का ड्रामा और मिलर का बड़ा गलती

नईदिल्ली  इंडियन प्रीमियर लीग के एक बेहद रोमांचक मुकाबले में 8 अप्रैल को गुजरात टाइटन्स ने आखिरी गेंद पर दिल्ली कैपिटल्स को हराकर सीजन की अपनी पहली जीत दर्ज की. मैच का नतीजा अंतिम गेंद तक झूलता रहा, जहां डेविड मिलर की एक छोटी सी चूक दिल्ली पर भारी पड़ गई.यह मुकाबला द‍िल्ली के अरुण जेटली स्टेड‍ियम में खेला गया।  211 रन के टारगेट का पीछा करते हुए दिल्ली कैपिटल्स की टीम 20 ओवर में 8 विकेट पर 209 रन ही बना सकी और जीत से महज एक रन दूर रह गई।  आखिरी ओवर में जीत के लिए 13 रन चाहिए थे. प्रसिद्ध कृष्णा गेंदबाजी कर रहे थे. मिलर ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए मैच को आखिरी गेंद तक पहुंचा दिया. लेकिन चौथी गेंद पर सिंगल लेने से इनकार करना उनकी सबसे बड़ी गलती साबित हुई।  अंतिम गेंद पर दिल्ली को 2 रन चाहिए थे. प्रसिद्ध ने धीमी बाउंसर डाली, जिसे मिलर कनेक्ट नहीं कर सके. रन लेने की कोशिश में कुलदीप यादव क्रीज से बाहर रह गए और जोस बटलर ने स्टंपिंग कर मैच गुजरात की झोली में डाल दिया. दिल्ली ने वाइड के लिए रिव्यू लिया, लेकिन गेंद सही करार दी गई।  जान‍िए आख‍िरी ओवर का रोमांच  19वें ओवर तक टाइटन्स का खेल पूरी तरह नियंत्रण में था और घरेलू टीम को अंतिम दो ओवरों में 36 रन चाहिए थे. इससे पहले वो स‍िराज के ओवर में 23 रन जड़ चुके थे।  प्रसिद्ध कृष्णा को अंतिम छह गेंदों पर 13 रन का बचाव करना था.विप्रज निगम पहली गेंद पर चौका लगाने के बाद आउट हो गए, जिससे मिलर को अंतिम तीन गेंदों पर 8 रन बनाने थे.इसके बाद चौथी गेंद पर लॉन्ग-ऑफ पर एक बड़ा हिट लगाया गया जिसने दिल्ली कैपिटल्स के लिए लगभग मैच तय कर दिया।  लेकिन पांचवी गेंद जो प्रसिद्ध कृष्णा ने डेविड मिलर को फेंकी, उस पर कोई रन नहीं नहीं आया. शॉर्ट ऑफ लेंथ की बॉल को एंगल से खेला, मिलर ने घूमकर डीप स्क्वायर लेग पर पुल किया. जब कुलदीप को वापस भेजा गया तो वह आधे रास्ते पर थे. मिलर खुद ऐसा करना चाहते थे. अगर स्कोर बराबर होता तो सिंगल मिल जाता और अगर कुलदीप चूक भी जाते, तो भी मैच टाई हो जाता. इसके बाद समीकरण 1 गेंद पर 2 रन हो गया।  आखिरी गेंद पर 2 रन चाहिए थे, प्रसिद्ध ने धीमी बाउंसर फेंकी जिसे मिलर ने कनेक्ट नहीं किया, और रन के लिए चले गए, जिससे कुलदीप यादव क्रीज से बाहर हो गए।  रिव्यू में वाइड बताया गया लेकिन इसे फेयर डिलीवरी माना गया, जिससे मिलर निराश हुए.यह दिल्ली कैपिटल्स की इस सीजन की पहली हार थी, जबकि टाइटन्स ने आखिरकार तीसरी कोशिश में पूरे पॉइंट हासिल किए।  10 साल में वॉशिंगटन सुंदर ने जड़ी पहली IPL फिफ्टी सुंदर को भारत के बेहतरीन ऑलराउंडरों में गिना जाता है, लेकिन आईपीएल में अपने पहले अर्धशतक तक पहुंचने में उन्हें पूरे 10 साल लग गए. 68 मैच और 48 पारियों के बाद सुंदर ने आखिरकार बल्ला उठाकर जश्न मनाया।  दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ सुंदर ने 32 गेंदों में 55 रन बनाए. उनकी इस पारी में 5 चौके और 2 छक्के शामिल रहे. यह पारी सिर्फ एक अर्धशतक नहीं थी, बल्कि वॉशिंगटन सुंदर के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है. अपने पूरे आईपीएल करियर में सुंदर को बल्लेबाजी के पर्याप्त मौके नहीं मिले और जब भी मौका मिला, वह उसे बड़े स्कोर में बदल नहीं पाए।  इससे पहले आईपीएल में उनका सबसे बड़ा स्कोर 49 रन था, जो उन्होंने पिछले सीजन में बनाया था. बता दें कि सुंदर ने 2017 में पहली बार आईपीएल खेला था. लेकिन उनके बल्ले से फिफ्टी नहीं आई थी. आईपीएल में सुंदर ने 4 टीमों के लिए खेला है और अबतक कुल 588 रन बनाए हैं।  इस पारी की सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने जोस बटलर के साथ मिलकर 103 रन की साझेदारी की. बटलर ने भी अर्धशतक लगाया और दोनों बल्लेबाजों ने मिलकर मैच का रुख बदल दिया. ऐसी रही सुंदर की बल्लेबाजी सुंदर की पारी को तीन हिस्सों में बांटा जा सकता है. शुरुआत में उन्होंने सिर्फ 12 गेंदों में लगभग 29 रन बनाए. इसके बाद उन्होंने थोड़ा समय लिया और अगली 16 गेंदों में 15 रन जोड़े. फिर आखिरी चरण में उन्होंने दोबारा तेजी से रन बनाना शुरू किया।  गुजरात टाइटंस ने अंत में 4 विकेट पर 210 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया. यह स्कोर ऐसे गेंदबाजी आक्रमण के खिलाफ आया, जिसे मजबूत माना जाता है।  बटलर-ग‍िल-सुंदर चमके इससे पहले, जोस बटलर ने 27 गेंदों में 52 रन की विस्फोटक पारी खेलते हुए टीम को तेज शुरुआत दिलाई. उन्होंने मुकेश कुमार के एक ओवर में तीन छक्कों सहित 23 रन बटोरे. पावरप्ले में दिल्ली ने 68 रन बना लिए थे।  बटलर के आउट होने के बाद कप्तान शुभमन गिल ने मोर्चा संभाला. उन्होंने 70 रन की शानदार पारी खेली, जिसमें पांच छक्के शामिल थे. वॉशिंगटन सुंदर ने भी 32 गेंदों में 55 रन बनाकर टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया. गुजरात ने 20 ओवर में 4 विकेट पर 210 रन बनाए।  दिल्ली की ओर से केएल राहुल ने 52 गेंदों में 92 रन की पारी खेली, जबकि पथुम निसांका ने 41 रन बनाए. दोनों के बीच 76 रन की साझेदारी हुई, जिससे टीम मजबूत स्थिति में दिख रही थी।  हालांकि, म‍िड‍िल ओवर्स में राशिद खान ने तीन विकेट लेकर मैच का रुख बदल दिया. इसके बाद दिल्ली की पारी लड़खड़ा गई. आखिरी ओवर से पहले दिल्ली को 36 रन चाहिए थे. मिलर ने मोहम्मद सिराज के ओवर में 23 रन बनाकर मैच में जान डाल दी, लेकिन अंत में उनकी एक गलती टीम को भारी पड़ गई।   म‍िलर का ओवरकॉन्फ‍िडेंस पड़ा द‍िल्ली पर भारी सीजन की शुरुआत में लगातार दो करीबी मुकाबले हारने वाली गुजरात टीम इस बार आखिरकार जीत की ओर झुकी. हालांकि, दिल्ली के डेविड मिलर लगभग हीरो बन गए थे, लेकिन आखिरी दो गेंदों में लिया गया उनका फैसला टीम पर भारी पड़ गया।  मैच का टर्निंग पॉइंट: राशिद का जादू गुजरात की जीत के असली हीरो राशिद खान रहे. उन्होंने 4 ओवर में 17 रन देकर 3 विकेट झटके. 10वें ओवर में … Read more

बालाघाट के 100 गांवों में बिजली, स्कूल और अन्य सुविधाओं की मिलेगी सौगात, बदलेगा माहौल

बालाघाट  मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी बाहुल्य वनांचल क्षेत्र के सैकड़ों गांव नक्सलवाद की चपेट में बीते 35 सालों से भी अधिक समय से न केवल डर के साये में जीवन बिताने को मजबूर रहे, बल्कि इस लम्बे अरसे के दौरान विकास की मुख्य धारा से कोसों दूर रह गए. लेकिन नक्सलवाद के खात्मे के साथ ही यहां के लोगों का जीवन भयमुक्त और खुशहाल नजर आने लगा है. अब यहां विकास की बयार नजर आने लगी है. यह कहना गलत नहीं होगी कि कभी नक्सलवाद का दंष झेलने वाले गांवों में अब विकास का पहिया घूमने लगा है।  100 गांवों में होगा विकास कार्य नक्सलवाद की चपेट में रहे तकरीबन 100 से अधिक गांवों में 300 करोड़ से अधिक की राशि से बिजली पानी, सड़क सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं को मुहैया कराया जायेगा. नक्सलवाद जिले के लिए नासूर की तरह था. जिसके कारण वनांचल क्षेत्र के सैकड़ों गांव विकास की मुख्य धारा से अलग थलग पड़े रह गए. चूंकि जब भी इन ग्रामीण अंचलों में कार्य किये जाते थे, तो नक्सली उन कार्यों में बाधा उत्पन्न करते थे, कभी मशीनों को जला देते थे, तो कभी ठेकेदारों को डराते धमकाते थे।  नक्सली इन क्षेत्रों का विकास कभी नहीं चाहते थे. नक्सलवाद यहां पर विकास की राह में सबसे बड़ा रोड़ा था. लेकिन अब समय बदला है और समय के साथ यहां की तस्वीर भी बदलने लगी है. बरसों विकास से दूर रहने वाले गांवों में अब जीवन खुशहाल नजर आ रहा है।  शिक्षा स्वास्थ्य और रोजगार पर जोर बालाघाट कलेक्टर मृणाल मीणा ने बताया कि, ''जिले के बैहर, परसवाड़ा, बिरसा, लांजी, किरनापुर सहित बालाघाट विकासखण्ड के सैकड़ों गांव नक्सलवाद की चपेट में रहे. अब उन सभी गांवों में इंफ्रास्ट्रक्चर डेव्हलपमेंट, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है. जहां पर उन इलाकों के सभी जनप्रतिनिधियों से चर्चा कर विकास का खाका तैयार किया जा रहा है, जिसे शासन को भेज कर स्वीकृति ली जा सकेगी।  सोलर सेंटर एवं ट्रांसफार्मर की स्थापना फिलहाल इन वनांचल क्षेत्रों के 16 गांवों में जल संसाधन विभाग द्वारा सिचांई की योजनाएं तैयार कर खेती को बेहतर बनाने काम जारी है. वहीं विद्युत विभाग द्वारा सोलर सेंटर एवं ट्रांसफार्मर स्थापना के लिए तकरीबन 13.50 करोड़ रूपये के प्रस्ताव तैयार हैं. खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की 37 गांवों में उचित मूल्य की दुकान और 50 मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदाम के निर्माण की योजना है. इसके अलावा तीन करोड़ की राशि से महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनवाड़ी भवनों के निर्माण व मरम्मत कार्य प्रस्तावित हैं।  इसी के साथ सर्व शिक्षा अभियान के तहत शाला भवन निर्माण, उद्योग एवं तकनीकि विभाग द्वारा आईटीआई भवन व छात्रावास, मत्स्य विभाग द्वारा तालाब निर्माण, पशुपालन विभाग द्वारा पशु पेड़, कृषि विभाग द्वारा 1.74 करोड़ की राशि से कृषि विकास कार्य, उद्यानिकी विभाग द्वारा नर्सरी स्थापना, पीएम सड़क योजनांतर्गत 189 किमी लंबाई की 41 सड़कों का निर्माण, स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्वास्थ्य केन्द्रों का सुधार, आयुष विभाग द्वारा 3.45 करोड़ के औषधालय निर्माण के प्रस्ताव शामिल हैं।  डर से निकल खुशहाली की तरफ बढ़े ग्रामीण इस तरह अब कभी लाल आतंक का गढ़ माने जाने वाले बालाघाट जिले के वनांचल क्षेत्रों में जीवन खुशहाली की ओर है. डर और भयमुक्त माहौल निर्मित होने से लोगों के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आ रहे हैं. वहीं शासन प्रशासन द्वारा यहां के विकास का खाका तैयार कर जिस तरह से कार्यों का संपादन किया जा रहा है, निश्चित तौर पर आने वाले समय में यहां निवासरत लोगों को शासन की योजनाओं का लाभ मिलेगा और उनके जीवन स्तर में भी बदलाव होगा। 

बीजेपी की रणनीति: नरोत्तम मिश्रा पर फिर दांव, उपचुनाव की तैयारियों में तेजी

 दतिया  दतिया से कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेन्द्र भारती को सहकारिता बैंक भ्रष्टाचार मामले में एमपी एमएलए कोर्ट द्वारा दोषी करार देते हुए तीन साल की सजा सुनाई गई है। इसके बाद उनकी विधानसभा की सदस्यता भी शून्य घोषित कर दी गई है । कोर्ट में राजेंद्र भारती के केस की सुनवाई भी आगे बढ़ गई है। इस बीच बीजेपी ने दतिया में उपचुनाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। मंगलवार को प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भोपाल में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से मुलाकात की जिससे राजनैतिक सरगर्मी बढ़ गई। राजेंद्र भारती दतिया से पिछले चुनाव में नरोत्तम मिश्रा को हराकर ही विधायक बने थे। यही वजह है कि दोनों नेताओं की इस मुलाकात को दतिया में संभावित उपचुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। दतिया से कांग्रेस विधायक रहे राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद सियासी चहलकदमी तेज हो गई है। भाजपा ने तो अंदरखेमे अभी से उपचुनाव की तैयारियां शुरू कर दी है। मंगलवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के बीच राजधानी में बंद कमरे में तकरीबन आधा घंटे तक चर्चा चली। प्रदेश अध्यक्ष के भोपाल स्थित आवास में यह मुलाकात हुई। पार्टी सूत्रों के मुताबिक भाजपा ने अभी से इस सीट को लेकर गुणा-भाग शुरू कर दिया है। बता दें, दतिया पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा का मजबूत गढ़ रही है। वे यहां से तीन बार जीते, लेकिन पिछले चुनाव में उन्हें राजेंद्र भारती से हार मिली थी। नरोत्तम मिश्रा को राज्यसभा भेजने पर विचार सवर्ण वर्ग की नाराजगी दूर करने के लिए भाजपा नरोत्तम मिश्रा का राज्यसभा भेजने का दांव चल सकती है। यह अलग बात है कि भाजपा का यह दांव जातिगत राजनीति में कितना कारगर साबित होता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नरोत्तम मिश्रा को राज्यसभा भेजकर सवर्णों के राजनीतिक गुस्से को ठंडा किया जा सकता है। फिर यूजीसी पर अब फैसला कोर्ट से आना है, जिसका सभी को इंतजार है। 27 साल पुराने मामले में भारती को कोर्ट से झटका दतिया से कांग्रेस विधायक रहे राजेंद्र भारती को दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट ने बीते दिनों 27 साल पुराने एक बैंक फ्रॉड मामले में दोषी पाया था। उन्हें विभिन्न मामलों में अधिकतम तीन साल की सजा मिली। उधर कोर्ट का फैसला आते ही उसी दिन विधानसभा सचिवालय ने उनकी विधायकी निरस्त कर दी। हालांकि एक्शन नियमों के अनुरूप हुए, लेकिन कांग्रेस ने इसे सरकार की साजिश करार दिया था। सन 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में प्रदेश के दिग्गज नेता और पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा हार गए थे। प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़े राजेन्द्र भारती जीतकर विधायक बन गए थे। उन्होंने चुनाव में भाजपा के नरोत्तम मिश्रा को 7742 वोटों से शिकस्त दी थी। तब राजेन्द्र भारती को 88977 वोट मिले थे और नरोत्तम मिश्रा को 81235 वोट प्राप्त हुए थे। विधानसभा चुनाव में हार के बाद भी पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा चुप नहीं बैठे। वे इलाके और प्रदेश की राजनीति में लगातार सक्रिय रहे हैं। दतिया में उपचुनाव होने की स्थिति में पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा बीजेपी के उम्मीदवार के रूप में स्वाभाविक दावेदार होंगे। इधर दिल्ली हाईकोर्ट ने राजेंद्र भारती केस की अगली सुनवाई के लिए 15 अप्रैल की तारीख तय की है। कोर्ट ने राज्य सरकार व शिकायतकर्ता को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई पर उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि दतिया विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक रहे राजेन्द्र भारती को बीते दिनों सहकारिता बैंक घोटाले में दोषी मानते हुए एमपी एमएलए कोर्ट ने तीन साल की सजा सुनाई है। सजा का फैसला आने के कुछ घंटों बाद ही मध्यप्रदेश विधानसभा के सचिवालय ने राजेन्द्र भारती की सदस्यता शून्य घोषित कर दी थी। अब राजेन्द्र भारती की विधानसभा की सदस्यता और राजनैतिक भविष्य का फैसला हाईकोर्ट में ही तय होगा।

मध्यप्रदेश में रेल सेवाओं का हुआ ऐतिहासिक विस्तार, पिछले दो सालों में बड़ी उपलब्धि

मध्यप्रदेश में पिछले दो सालों में रेल सेवाओं में हुआ अभूतपूर्व विस्तार रेलवे ट्रैक की लंबाई बढ़कर हुई 5,200 किमी देश का चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क डबल इंजन सरकार का एक आदर्श मॉडल बनकर उभरा मध्यप्रदेश बेहतर रेल संपर्क से अगले दो सालों में अर्थ-व्यवस्था में आएगा बदलाव मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अथक प्रयासों का परिणाम, केंद्र से मिला सहयोग भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अथक प्रयासों के फलस्वरूप मध्यप्रदेश में पिछले दो सालों में रेल सेवाओं और बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। मध्यप्रदेश 'डबल इंजन सरकार' का एक शानदार उदाहरण बनकर उभरा है। अब प्रदेश भारत का चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है और रेल कनेक्टिविटी में सबसे बड़ी हिस्सेदारी वाले शीर्ष दस राज्यों में से एक है। रेलवे ट्रैक की लंबाई बढ़कर 5,200 किलोमीटर हो गई है, जो देश के कुल रेल नेटवर्क का 7.6% है। बेहतर रेल सेवाओं के माध्यम से देश के सभी हिस्सों तक आसानी से पहुँचा जा सकता है। मध्यप्रदेश के लिए आवंटित रेलवे बजट में 24 गुना वृद्धि हुई है। इस वर्ष 15,188 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो एक रिकॉर्ड है। पिछले वर्ष यह राशि 14,745 करोड़ रुपये थी। वर्ष 2009 से 2014 तक, वार्षिक बजट केवल 632 करोड़ रुपये था। वर्तमान में 1,18,379 करोड़ रुपये की लागत वाली विभिन्न रेल परियोजनाएँ अलग-अलग चरणों में चल रही हैं। आर्थिक विकास में आयेगी तेजी मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से केंद्र सरकार ने कई प्रमुख रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिससे राज्य को आर्थिक परिवर्तन की गति तेज करने में मदद मिली है। इस प्रगति का श्रेय केंद्र और राज्य सरकारों के बीच गहरी आपसी समझ और समन्वय को जाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जबलपुर-गोंदिया रेलवे लाइन और इंदौर-मनमाड रेलवे लाइन के दोहरीकरण, तथा सिंहस्थ कुंभ मेला : 2028 के संदर्भ में अन्य अधोसंरचना विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी है। बड़ी उपलब्धि यह है कि राज्य में रेल लाइनों का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा हो चुका है। अमृत भारत स्टेशन योजना में छह स्टेशनों – कटनी दक्षिण, नर्मदापुरम, ओरछा, सिवनी, शाजापुर और श्रीधाम – पर पुनर्विकास का काम पूरा हो चुका है। इसके अलावा, पूरे राज्य में 74 स्टेशनों को अपग्रेड किया जा रहा है। यात्रियों के लिये 3,163 करोड़ रुपये की आधुनिक सुविधाएँ विकसित की जा रही है। वंदे भारत ट्रेनें यात्रियों के लिए वरदान साबित हुई हैं। इनमें भोपाल-नई दिल्ली, इंदौर-नागपुर, भोपाल-रीवा और खजुराहो-बनारस शामिल हैं। इंदौर और भोपाल में 2 मेट्रो ट्रेनें चल रही हैं, जिनसे शहरी आबादी को राहत मिली है। रायसेन ज़िले के उमरिया गाँव में 1800 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक रेल कोच निर्माण इकाई बनाई जा रही है। इससे 5000 लोगों को रोजगार मिलेगा। बड़े राज्यों में सीधा संपर्क जबलपुर-गोंदिया रेल लाइन के दोहरीकरण से महाकौशल क्षेत्र में बड़ा बदलाव आएगा। इससे पर्यटन, धार्मिक गतिविधियों और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। इस प्रोजेक्ट में 5,200 करोड़ रुपये से ज़्यादा का निवेश किया गया है। कान्हा नेशनल पार्क और धुआँधार जलप्रपात जैसे पर्यटन स्थलों में पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। इससे जबलपुर सहित मण्डला, सिवनी और बालाघाट जिलों को सीधा लाभ मिलेगा। व्यापार-व्यवसाय और पर्यटन क्षेत्र का विस्तार होगा। कोयला, इस्पात, सीमेंट, खाद्यान्न और उर्वरक के परिवहन में तेजी आयेगी। उद्योगों के लिये मजबूत सप्लाई चेन बनेगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इंदौर-मनमाड रेलवे लाइन 18,036 करोड़ रुपये से ज़्यादा की लागत से बनाई जा रही है। इन रेलवे प्रोजेक्ट्स से मध्यप्रदेश को बड़े आर्थिक लाभ की उम्मीद है। इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन धार, खरगौन और बड़वानी जिलों को सीधा लाभ होगा। कृषि और व्यापार बढ़ेगा। बाजरा और अनाज उत्पादक जिलों की पहुँच बड़े बाजारों तक बनेगी। उज्जैन और ओंकारेंश्वर जैसे धार्मिक महत्व के शहरों से सम्पर्क बढ़ेगा। यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए, 3 नई ट्रेनें शुरू की गई हैं। रीवा से पुणे (जबलपुर और सतना होते हुए), जबलपुर से रायपुर (नैनपुर, बालाघाट और गोंदिया होते हुए), और ग्वालियर से बेंगलुरु (गुना और भोपाल होते हुए)। ये सेवाएँ कनेक्टिविटी को और भी बेहतर बनाएँगी। केंद्रीय मंत्रीमंडल ने 2 बड़े कमर्शियल हब-मुंबई और इंदौर – के बीच 309 किलोमीटर लंबी एक नई रेलवे लाइन को भी मंज़ूरी दी है। इन कमर्शियल केंद्रों को जोड़ने के अलावा, यह प्रोजेक्ट महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के उन क्षेत्रों को भी जोड़ेगा जहाँ अभी रेलवे कनेक्टिविटी नहीं है। यह रेलवे लाइन महाराष्ट्र के 2 ज़िलों और मध्यप्रदेश के 4 ज़िलों से होकर गुज़रेगी। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 18,036 करोड़ रुपये है, और यह 2028-29 तक पूरा हो जाएगा। यह प्रोजेक्ट पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है। एकीकृत योजना के माध्यम से, यह यात्रा को आसान बनायेगा। सामान और सेवाओं के निर्बाध प्रवाह को संभव बनाएगा। यह परियोजना महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के 6 जिलों को कवर करेगी। इसमें 30 नए स्टेशन बनाए जाएंगे। इससे बड़वानी जैसा आकांक्षी जिला भी रेलवे कनेक्टिविटी से लाभान्वित होगा। लगभग 1,000 गांवों और लगभग 30 लाख लोगों को रेलवे कनेक्टिविटी की सुविधा मिलेगी। यह परियोजना जवाहरलाल नेहरू पोर्ट गेटवे पोर्ट और अन्य बंदरगाहों को पीथमपुर ऑटो क्लस्टर औद्योगिक केंद्र से भी जोड़ेगी। इस क्लस्टर में 90 बड़े उद्योग और 700 छोटे और मध्यम उद्यम हैं। इसके अतिरिक्त, यह परियोजना मध्यप्रदेश के बाजरा उत्पादक जिलों को महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक जिलों से जोड़ेगी, जिससे इन उत्पादों का देश के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों तक परिवहन आसान हो जाएगा। नई परियोजनाओं की शुरूआत भोपाल-रामगंज मंडी रेललाइन से राजगढ़ और भोपाल का सीधा संपर्क राजस्थान में हो जायेगा। इस 276 किमी लाइन में से 169 किमी पर काम पूरा हो गया है। इससे व्यापार, खेती और आम नागरिकों को सुविधा होगी। इटारसी-भोपाल-बीना और इटारसी-नागपुर चौथी रेललाइन को मंजूरी मिल चुकी है। वर्ष 2009 से 2014 के बीच जहां 145 कि.मी. नई रेल पटरियाँ बिछाई गईं, जिनका औसत 29 कि.मी. प्रति वर्ष रहा वहीं 2014 से 2025 तक, 2,651 कि.मी. नई पटरियाँ बिछाई गईं, जिनका औसत 241 कि.मी. प्रति वर्ष रहा, जो कि लगभग 8 गुना ज़्यादा है। वर्तमान में, 4,740 किमी के रेलवे प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, जिनकी अनुमानित लागत 89,543 करोड़ रूपये है। ये प्रोजेक्ट्स विकास के अलग-अलग चरणों में हैं। अब तक 2,092 किमी पर … Read more

प्रदेश में 9 से 23 अप्रैल तक मनाया जाएगा 8वां पोषण पखवाड़ा

प्रदेश में 9 से 23 अप्रैल तक मनाया जाएगा 8वां पोषण पखवाड़ा बच्चों के मस्तिष्क विकास पर रहेगा विशेष फोकस भोपाल  प्रदेश में 9 अप्रैल से 23 अप्रैल 2026 तक 8वां “पोषण पखवाड़ा” मनाया जाएगा। इस वर्ष पोषण पखवाड़े का मुख्य थीम “जीवन के पहले छह वर्षों में मस्तिष्क का अधिकतम विकास (Maximizing Brain Development in the First Six Years of Life)” निर्धारित किया गया है। पखवाड़े का औपचारिक शुभारंभ 9 अप्रैल को आंगनवाड़ी केन्द्रों और समुदाय स्तर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया जाएगा। इस दौरान “पोषण पर चर्चा” कार्यक्रम के माध्यम से समुदाय के साथ संवाद स्थापित किया जाएगा। पोषण पखवाड़े में मुख्य रूप से मातृ एवं शिशु पोषण, जन्म से 3 वर्ष तक मस्तिष्क विकास के लिए प्रारंभिक प्रोत्साहन, 3 से 6 वर्ष तक खेल आधारित शिक्षा, बच्चों में स्क्रीन टाइम कम करने में परिवार और समुदाय की भूमिका तथा सशक्त आंगनवाड़ी निर्माण में सामुदायिक सहयोग जैसे विषयों पर गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार मानव मस्तिष्क का लगभग 85 प्रतिशत विकास जन्म से 6 वर्ष की आयु तक हो जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए पोषण पखवाड़े में परिवारों और समुदायों में ऐसे व्यवहारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा, जो बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को मजबूत बनाते हैं। अभियान के तहत विभिन्न तिथियों पर गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए स्वास्थ्य शिविर, पोषण संबंधी कहानी वाचन, दादी-नानी के अनुभव साझा कार्यक्रम, स्थानीय खाद्य सामग्रियों से पौष्टिक व्यंजन प्रतियोगिता, जंक फूड के दुष्प्रभावों पर जागरूकता रैली, बच्चों के विकासात्मक मील के पत्थरों की पहचान अभियान तथा माता-पिता के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा बच्चों में स्क्रीन टाइम कम करने, खेल आधारित सीखने, माता-पिता की भागीदारी बढ़ाने तथा सामुदायिक सहयोग से आंगनवाड़ी केन्द्रों को मजबूत बनाने के लिए भी विशेष गतिविधियाँ होंगी। 22 अप्रैल को पंखुड़ी पोर्टल के माध्यम से आंगनवाड़ी केन्द्रों के लिए सामुदायिक सहयोग एवं दान अभियान चलाया जाएगा, जबकि 23 अप्रैल को पोषण मेला आयोजित कर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाज के प्रभावशाली व्यक्तियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। पोषण पखवाड़े में सभी जिलों में रैलियां, पोषण वाटिका निर्माण, प्रश्नोत्तरी, पोस्टर एवं नारा लेखन प्रतियोगिता, सोशल मीडिया अभियान तथा आंगनवाड़ी केन्द्रों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही अभियान से संबंधित गतिविधियों की जानकारी पोषण अभियान के जन-आंदोलन डैशबोर्ड पर दर्ज की जाएगी। प्रदेश में इस अभियान के अंतर्गत महिला एवं बाल विकास विभाग, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जनजातीय कार्य, नगरीय प्रशासन एवं विकास तथा स्कूल शिक्षा विभाग सहित विभिन्न विभागों के समन्वय से कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।  

कृषि मंत्री कंषाना ने कहा: किसानों के कल्याण के लिए राज्य सरकार उठा रही है महत्वपूर्ण कदम

किसानों के कल्याण, समृद्धि और खुशहाली के लिए राज्य सरकार द्वारा लिए जा रहे हैं महत्वपूर्ण निर्णय: कृषि मंत्री कंषाना पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ खेती के लिए नरवाई प्रबंधन को किया जा रहा है मजबूत भोपाल  किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल  सिंह कंषाना ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में किसानों के कल्याण समृद्धि और खुशहाली के लिए अनेक प्रयास किया जा रहे हैं। प्रदेश में वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ यादव द्वारा किसानों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा रहे हैं। इस वर्ष गेहूं उपार्जन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये निर्धारित किया गया है। राज्य सरकार द्वारा घोषित 40 रुपये का अतिरिक्त बोनस सहित किसानों को 2625 रूपये प्रति किंवटल की राशि मिलेगी। कृषि मंत्री कंषाना ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ खेती के लिए नरवाई प्रबंधन को मजबूत किया जा रहा है। प्रदेश में धारा 163 के तहत नरवाई जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। इसके तहत ढाई हजार रुपए से लेकर 15 हजार हजार रुपए तक जुर्माना लगाने का प्रावधान है। पराली प्रबंधन यंत्रों जैसे हैप्पी सीडर और सुपर सीडर पर अनुदान राशि प्रदान की जा रही है। किसानों को विभिन्न माध्यमों से पराली न जलाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। मंत्री कंषाना ने कहा कि राज्य सरकार ने रबी विपणन वर्ष 2026 में सरसों उत्पादक किसानों के लिए भावांतर भुगतान योजना लागू की है। इसके लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 5950 रूपये प्रति क्विंटल निर्धारित है। बाजार मूल्य और न्यूनतम समर्थन मूल्य के अंतर की राशि किसानों के बैंक खातों में सीधे प्रदान की जायेगी। राज्य सरकार ने वर्ष 2026 में किसानों के लिए उड़द की सरकारी खरीद पर 600 रुपके प्रति क्विंटल का बोनस देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। उड़द का न्यूनतम समर्थन मूल्प 7800 रुपये प्रति किंवटल है जिसमें 600 रूपये अतिरिक्त बोनस सहित किसानों को 8400 रुपये प्रति क्विंटल का लाभ मिलेगा। मंत्री कंषाना ने कहा कि मध्यप्रदेश में सिंचाई का रकबा लगभग 55 लाख हेक्टेयर तक पहुँच गया है। राज्य सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 100 लाख हेक्टेयर तक ले जाना है। प्रदेश में पीएम कुसुम योजना के तहत किसानों को सिंचाई के लिए सोलर पंप लगाने पर 90 प्रतिशत तक की सब्सिडी मिल रही है।  मध्यप्रदेश में दुग्ध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश में मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम के माध्यम से दुग्ध उत्पादन और पशुपालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीकों, उन्नत बीज और कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सेटेलाइट और ड्रोन सर्वे द्वारा फसलों की निगरानी की जा रही है। फूड प्रोसेसिंग यूनिट का विस्तार और मोटे अनाज के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश में जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रयास किये जा रहे है।  

सीएम मोहन यादव का ऐलान: 6 महीने में मध्य प्रदेश में लागू होगा यूसीसी, गोवा-उत्तराखंड मॉडल की करेंगे स्टडी

भोपाल  डॉ. मोहन यादव सरकार मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रियों से कहा कि यूसीसी का अध्ययन करें, इसे राज्य में लागू करना है। इस संकेत के बाद गृह विभाग में प्रक्रिया तेज हो गई है, क्योंकि यूसीसी बिल तैयार करने की जिम्मेदारी इसी विभाग की है। सूत्रों के अनुसार, जल्द ही राज्य स्तर पर एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाई जाएगी। इसी साल दिवाली से पहले प्रदेश में यूसीसी लागू किया जा सकता है। सूत्र बताते हैं कि समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट तैयार करने से पहले गोवा और उत्तराखंड में कुछ समय पहले लागू किए गए यूसीसी का अध्ययन किया जा रहा है। जिससे मध्य प्रदेश के लिए व्यावहारिक और संतुलित मॉडल तैयार किया जा सके। ड्राफ्ट तैयार होते ही इसे कैबिनेट में पेश किया जाएगा। सरकार इसे राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से संवेदनशील मानते हुए सही समय पर कैबिनेट में लाने की रणनीति बना रही है। राज्य स्तरीय कमेटी बनने के बाद आगे की प्रक्रिया और ड्राफ्ट को कैबिनेट में पेश करने की टाइमलाइन तय की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक राज्य स्तर पर जल्द ही एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की जाएगी। ताकि 6 महीने में ही राज्य में यूसीसी को लागू किया जा सके। इसके लिए मध्य प्रदेश को दिल्ली से भी संकेत मिल चुके हैं। अन्य राज्यों के मॉडल का अध्ययन और अनुभव देख तैयार होगा प्रदेश का प्रारूप मध्य प्रदेश सरकार इस विषय पर अन्य राज्यों के मॉडल का भी अध्ययन करेंगी। इसमें गोवा सिविल कोड का अधिकारी अध्ययन करेंगी। खास तौर पर उन राज्यों के अनुभवों को देखा जा रहा है, जहां इस तरह के कानून पर काम हो चुका है या प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। इसके आधार पर प्रदेश के लिए उपयुक्त प्रारूप तैयार किया जाएगा। इसके बाद इसे कैबिनेट के सामने पेश किया जाएगा। मानसून सत्र 2026 में कैबिनेट में लाने की तैयारी, आ सकता है बड़ा फैसला यूसीसी बिल को लेकर मानसून सत्र 2026 में ही प्रस्ताव को कैबिनेट में लाया जा सकता है। सरकार की तैयारी है कि यूसीसी को मध्यप्रदेश में व्यावहारिक मॉडल को सोच-परख के साथ लाया जाए। किसी वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंचाए बिना इसे लागू किया जाएगा। इसके लिए बाकायदा कानूनी विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों से चर्चा की जाएगी और पूरी व्यावहारिकता के साथ इसे लागू किया जाएगा। कुल मिलाकर यदि सबकुछ सरकार के मुताबिक सही रहा तो मानसून सत्र 2026 में ही इस पर बड़ा फैसला आने की उम्मीद भी है। यूसीसी लागू करने से क्या बदलेगा यूसीसी के लागू होते ही प्रदेश में सभी धर्मों के लिए शादी, तलाक, विरासत और यहां तक कि गोद लेने की प्रक्रिया के लिए नियम एक समान होंगे। वहीं अलग-अलग मान्यताएं और पर्सनल लॉ खत्म हो जाएंगे। शादी और तलाक के लिए हर धर्म के अपने अलग-अलग नियम है। यूसीसी के बाद विवाह पंजीयन अनिवार्य हो जाएगा। न्यूनतम आयु समान होगी, तलाक के कानूनी आधार सभी के लिए एक समान होंगे। जहां बहुविवाह वहां क्या बदलाव कई पर्सनल लॉ में एक से अधिक विवाह की अनुमति या गुंजाइश रखी गई है। यूसीसी लागू होते ही ऐसे पर्सनल कानून खत्म या व्यवस्था खत्म हो जाएगी। संपत्ति पर क्या दिखेगा असर यूसीसी लागू होने के बाद बेटियों को भी परिवार के बेटों के बराबर संपत्ति लेने का अधिकार होगा। यूसीसी लागू होते ही यह नियम सभी के लिए समान रूप से मानने योग्य होगा। मध्य प्रदेश के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या? मध्य प्रदेश में बड़ी संख्या में जनजातीय और विशेष पिछड़ी जनजातियां निवास करती हैं। जहां पारंपरिक विवाह पद्धतियां चलन में हैं। इन परंपराओं को यूसीसी में शामिल करना या अलग प्रावधान बनाना प्रदेश सरकार के लिए बड़ी चुनौती साबित होगा। इन प्रथाओं और परंपराओं में दापा प्रथा (वधू का मूल्य देना), भगेली/लम्सना विवाह (युवक-युवती भाग कर शादी करते हैं और बाद में समाज मान्यता देता है), सेवा विवाह (वधू मूल्य न देने पर लड़का ससुराल में रहकर सेवाएं देता है), वहीं नातरा प्रथा (विधवा पुनर्विवाह या साथी बदलने की अनुमति) जैसी प्रथाएं बड़ी चुनौती साबित होंगी। बता दें कि प्रदेश में आदिवासी जनजाति वर्ग की 47 फीसदी सीट आरक्षित हैं। वहीं सरकार हर वर्ग की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए यूसीसी लागू करने पर विचार कर रही है। ऐसे में यह सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी। किन राज्यों में यूसीसी लागू, कहां चल रही प्रक्रिया     मध्य प्रदेश में गठित होने वाली है कमेटी, मंत्री शुरू करेंगे यूसीसी का अध्ययन।     गुजरात में मार्च 2026 में बिल पास हुआ है, अब इसे लागू करने की तैयारी चल रही है।     उत्तरप्रदेश में भी यूसीसी लागू करने की तैयारियां जारी हैं।     असम में नवंबर 2025 में यूसीसी लागू किया गया। यहां बहू विवाह निषेध कानून पास हुआ, यूसीसी की दिशा में कदम बढ़ाया।     उत्तराखंड में फरवरी 2024 में बिल पास होने के बाद, 27 जनवरी 2025 को लागू किया गया।     गोवा में 1867 के पुर्तगाली सिविल कोड के कारण यहां यूसीसी पहले से लागू है। स्वतंत्र भारत का पहला राज्य जिसने लागू किया यूसीसी बता दें कि गोवा के बाद और स्वतंत्र भारत की बात की जाए तो यूसीसी को अपने यहां लागू करने वाला देश का पहला उत्तराखंड था। यूसीसी लागू करने के बाद से यहां शादी और तलाक का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। लिव इन रिलेशनशिप का 30 दिन में रजिस्ट्रेशन भी यहां अनिवार्य किया गया है। ऐसा न करने वालों पर 3 महीने तक जेल की सजा और जुर्माना या फिर दोनों का प्रावधान है। उत्तराखंड का मॉडल गुजरात ने किया फॉलो उत्तराखंड के मॉडल को ही गुजरात ने भी फॉलो किया। धोखे, दबाव या पहचान छिपाकर शादी को अपराध माना गया। इस पर 7 साल की सजा और जेल भी हो सकती है। 60 दिन में लिव इन रजिस्ट्रेशन कराना होगा। संपत्ति पर बेटे और बेटी का बराबर हक। एसटी को कानून से बाहर रखा गया है। असम में पूरी तरह लागू नहीं यूसीसी उधर असम ऐसा राज्य है जहां यूसीसी लागू है लेकिन पूरी तरह से नहीं। यहां बहु विवाह को अपराध घोषित किया गया है। वहीं छठी … Read more

मिडिल ईस्ट संकट का असर: अब प्रदेश में बढ़ेगी दवाओं की कीमत

भोपाल   मिडिल ईस्ट में वार का अंजाम ये हुआ है कि अब महंगाई ने आम जिंदगी में मुश्किलें बढ़ा दी हैं। होटल-रेस्टोरेंट्स में खाना महंगा हो गया, यहां तक कि आम भारतीय की पहली पसंद समोसा-कचोरी और चाट तक के पैसे बढ़ गए। 10 रुपए का समोसा 20 का मिलने लगा। गैस संकट ने हर परिवार का खर्च दोगुना कर दिया। वहीं अब ताजा खबर ये है कि आपदा में अवसर चीन ने भी खोज लिया। इसका बड़ा असर ये होने जा रहा है कि अब आपकी मेडिकल किट भी आपकी जेब पर बोझ बढ़ाने वाली है। युद्ध से ग्लोबल सप्लाई हुई प्रभावित दरअसल ईरान-इजरायल युद्ध के कारण ग्लोबल सप्लाई प्रभावित हुई है। इसके कारण दवाओं का कच्चा माल 166 फीसदी तक महंगा हो गया है। अगर यह तनाव लंबा खिंचा, तो बाजार में दवाओं की कीमतें 25 से 30 फीसदी तक बढ़ सकती है। दवाएं महंगी होने से सबसे ज्यादा वे मरीज परेशान होंगे जो बीपी, शुगर और अस्थमा जैसी बीमारियों के लिए हर दिन दवाएं खाते हैं। मध्य प्रदेश की 200 से ज्यादा फार्मा कंपनियां चीन पर निर्भर मध्य प्रदेश की छोटी-बड़ी 200 से ज्यादा फार्मा कंपनियां कच्चे माल के लिए चीन पर निर्भर हैं। युद्ध के कारण शंघाई पोर्ट मुंबई तक आने वाले जहाजों को अब सुरक्षित रास्तों के चक्कर में 30-40 की जगह 80-90 दिन लग रहे हैं। शिपिंग लागत 15 रुपए से बढ़कर 40 रुपए प्रति किलो पहुंच गई है। कारोबारियों का दावा है कि लागत दोगुनी होने के कारण कीमतों में इजाफा करना पड़ेगा। जेनेरिक दवाओं और केमिस्ट शॉप्स पर डिस्काउंट बंद दवा बाजार के एक्सपर्ट्स बताते हैं कि सबसे पहला असर जेनेरिक दवाओं और केमिस्ट की दुकानों पर मिलने वाले डिस्काउंट पर पड़ा है। जो दवाएं अब तक 10-20 फीसदी की छूट पर मिल रही थीं। अब वे एमआरपी पर ही बिक रही हैं। आने वाले 15-20 दिन में एथिकल यानी ब्रांडेड और सर्जिकल सामान भी महंगा होने के आसार हैं। देशभर में तैयारी शुरू बेसिक ड्रग डीलर्स एसोसिएशन के मुताबिक कच्चे माल की कमी के कारण और बढ़ते माल भाड़े के कारण उद्योग को प्रभावित किया है। केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र धाकड़ के मुताबिक देश भर में इसकी तैयारी शुरू हो चुकी है। अगले 15-20 दिन में इसका असर दिखने लगेगा। रोज दवा लेने के वाले मरीजों पर असर ज्यादा होगा। जिन परिवारों में बुजुर्ग, उनकी जेब पर दोगुना असर जिन परिवारों में दो बुजुर्गों का मासिक खर्च यदि 3000 रुपए है, तो डिस्काउंट खत्म होने और दवाओं के नए रेट बढ़ने के बाद यह 3800 तक पहुंच सकता है। कच्चा माल महंगा होने पर टेंडर वाली छोटी कंपनियां सप्लाई से पीछे हट सकती हैं। इससे सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवाओं में कमी की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। बुखार, खांसी की दवाओं का कच्चा 155 फीसदी महंगा! पैरासिटामोल बुखार की दवा है, पहले इसके कच्चे माल की कीमत 225 रुपए प्रति किलोग्राम थी, जो अब बढ़कर 575 हो जाएगी। वहीं कफ सीरप प्रोपलीन ग्लाइकोल 150 रुपए प्रति किलोग्राम से बढ़कर 400 रुपए हो गया है। इंफेक्शन के लिए दी जाने वाली एजिथ्रोमाइसिन का सामान 11,000 रुपए प्रति किलोग्राम से बढ़कर 14,500 रुपए तक महंगा हुआ है। आईब्रुफेन जैसी दर्द निवारक दवाई बनाने के लिए कच्चे माल की कीमतें 600 रुपए से बढ़कर 900 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई हैं। वहीं एंटीबायोटिक सिफेक्सिन का सामान 8500 से बढ़कर 11000 रुपए प्रति किलोग्राम तक महंगा हुआ है। इसका असर अब इनकी दवाओं पर दिखेगा और ये दवाएं भी महंगी हो सकती हैं। 

बलिया में बनेगा मेडिकल कॉलेज, योगी सरकार ने निर्माण कार्य को दी हरी झंडी

लखनऊ  हर जिले में मेडिकल कालेज खोलने की योजना पर अमल करते हुए प्रदेश सरकार ने मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में अहम निर्णय लिया। बलिया में स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए 437 करोड़ रुपये का बजट को स्वीकृति प्रदान कर दी। नया स्वशासी राज्य मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए बलिया जिला कारागार की कुल 14.05 एकड़ जमीन दस मार्च 2025 को चिकित्सा शिक्षा विभाग के पक्ष में हस्तांतरित की थी। संस्थान के लिए गठित सोसायटी का मेमोरेंडम व बाइलाज यथावत रखा गया। अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा एवं चिकित्सा स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने बताया कि स्वशासी राज्य मेडिकल कॉलेज बलिया का व्यय 200 करोड़ रुपये से अधिक होने कारण व्यय वित्त समिति द्वारा अनुमोदित लागत 437 करोड़ रुपये का प्रस्ताव मंगलवार को कैबिनेट के सामने रखा गया, जिसे स्वीकृति मिल गई। कहा कि मेडिकल कालेज के निर्माण से जनसामान्य को बेहतर इलाज मिलेगा। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि प्रदेशभर में चिकित्सा सेवाओं का विस्तार हो रहा है, जिसका लक्ष्य समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक उच्चीकृत चिकित्सा पहुंचाई जा सके। वहीं, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि बलिया मेडिकल कालेज का निर्माण बहुप्रतीक्षित है। कैबिनेट का निर्णय बलिया के लोगों को राहत पहुंचाने वाला है। प्रदेश में अब 82 मेडिकल कालेज हो गए हैं। प्रदेश सरकार के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने इस बाबत कहा कि जिले के लिए यह बहुत बड़ी परियोजना है जिसे मुख्यमंत्री ने हरी झंडी देकर साधुवाद का काम किया है। मेडिकल कालेज कुल 14 एकड़ में बनेगा जिसमें जेल परिसर के ढाई एकड़ एरिया में अमर सेनानी चित्तू पांडेय स्मारक के निर्माण का भी प्रावधान किया गया है। ऐसे में मेडिकल कालेज के साथ इसका भी निर्माण जिले के सेनानियों के गरिमानुरुप कराया जाएगा। कहा कि मेडिकल कालेज के शिलान्यास की तिथि जल्द तय की जाएगी। इसमें प्रयास है कि इसका शिलान्यास मुख्यमंत्री से ही कराया जाए। परिवहन विभाग के मंगलकारी हुआ मंगलवार परिवहन मंत्री ने कहा मंगलवार का दिन परिवहन विभाग के लिए भी काफी महत्वपूर्ण और मंगलकारी रहा। कैबिनेट में मंगलवार को परिवहन विभाग के कुल तीन प्रस्ताव स्वीकृत हुए जिसमें पीपीपी मॉडल पर बनने वाले 49 बस अड्डे भी शामिल हैं। इन 49 बस अड्डों में बलिया के रसड़ा व बिल्थरारोड का भी बस अड्डा शामिल है जो पीपीपी मोड पर विकसित किया जाएगा। यह परियोजना भी बलिया के लिए काफी बड़ी है। कहा बलिया विकास के मामले में किसी भी दृष्टिकोण से पीछे नहीं रहेगा। चुनाव से पूर्व जो भी वादे किए गए हैं वो सभी पूरे किए जाएंगे।