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राजस्थान बोर्ड 12वीं परिणाम: बेटियों की शानदार सफलता, दीपिका ने 99.8% और नव्या मीणा ने 99.6% अंक प्राप्त किए

जयपुर   राजस्थान बोर्ड 12वीं रिजल्ट 2026 की घोषणा कर दी गई है। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) 12वीं आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स का रिजल्ट Link आज 31 मार्च को सुबह 10 बजे एक्टिव कर दिया गया है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने ऑनलाइन माध्यम से रिजल्ट जारी किया है। इस दौरान बोर्ड के प्रशासक शक्ति सिंह राठौड़ और सचिव गजेंद्र सिंह राठौड़ भी बोर्ड कार्यालय से कार्यक्रम में शामिल रहे। रिजल्ट जारी हो गया है और Rajasthan Board 12th Result 2025 Direct Link ऑफिशियल वेबसाइट rajeduboard.rajasthan.gov.in पर एक्टिव है। छात्र सबसे पहले रोल नंबर से यहीं अपना रिजल्ट देख सकेंगे। यहां राजस्थान बोर्ड बारहवीं परिणाम 2026 से जुड़ी लेटेस्ट अपडेट्स देखते रहें। इस साल राजस्थान बोर्ड 12वीं की परीक्षा में कुल 9 लाख से अधिक छात्र शामिल हुए थे, जिनमें से 96.23 छात्र सफल घोषित किए गए हैं. पिछले साल की तरह इस बार भी [लड़कियों/लड़कों] का प्रदर्शन शानदार रहा और उन्होंने सफलता का परचम लहराया. बोर्ड मुख्यालय से प्रशासक शक्ति सिंह राठौड़ और सचिव गजेंद्र सिंह राठौड़ ने भी नतीजों की पुष्टि की है।  तीनों स्ट्रीम का पास प्रतिशत (Stream-wise Data) विज्ञान (Science): 97.52 प्रतिशत वाणिज्य (Commerce): 93.64 प्रतिशत कला (Arts): 97.54 प्रतिशत साइंस में लड़कियों ने मारी बाजी राजस्थान बोर्ड 12वीं साइंस रिजल्ट में लड़कों से ज्यादा लड़कियां फर्स्ट डिवीजन से पास हुई हैं.  साइंस में कुल 287068 स्टूडेंट ने रजिस्ट्रेशन किया था. इसमें से 285299 स्टूडेंट परीक्षा में बैठे थे. साइंस का परीक्षा परिणाम 97.52 प्रतिशत रहा. 97.02 प्रतिशत छात्र और 98.34 छात्राएं पास हुई हैं. 178051 में से 146644 छात्र और 107248 में से 98836 छात्राएं फर्स्ट डिवीजन से पास हुई हैं।  कॉमर्स में लड़कों का दिखा जलवा राजस्थान 12वीं बोर्ड  कॉमर्स में लड़कों का रिजल्ट बेहतर रहा. कॉमर्स में कुल 30798 स्टूडेंट रजिस्टर्ड थे, जिसमें से 30580 स्टूडेंट परीक्षा हिस्सा लिया था. कॉमर्स का परिणाम 93.64 प्रतिशत रहा.  छात्रों के पास होने का प्रतिशत 94.04 और छात्राओं का पास होने का प्रतिशत 92.82 रहा. 20666 छात्रों में से 13976 लड़के और 9914 लड़कियों में से 8096 लड़कियां फर्स्ट डिवीजन से पास हुई हैं।  आर्ट्स में लड़कियों ने मारी बाजी राजस्थान बोर्ड 12वीं आर्ट्स में बेटियां आगे रहीं. आट्‌र्स में कुल 591023 स्टूडेंट रजिस्टर्ड हैं, जिसमें से 583201 स्टूडेंट परीक्षा में शामिल हुए। परिणाम 97.54 प्रतिशत रहा. लड़कों के पास होने का प्रतिशत 96.68 और लड़कियों के पास होने का प्रतिशत 98.29 रहा।  कैसे चेक करें अपना रिजल्ट: सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट rajeduboard.rajasthan.gov.in पर जाएं. होमपेज पर 'Main Examination Results 2026' के लिंक पर क्लिक करें. अब अपनी स्ट्रीम (Science/Arts/Commerce) का चुनाव करें. अपना रोल नंबर दर्ज करें और 'सबमिट' बटन दबाएं. आपका रिजल्ट स्क्रीन पर होगा, इसे भविष्य के लिए डाउनलोड कर लें. रिजल्ट का डायरेक्ट लिंक: rajeduboard.rajasthan.gov.in, rajresults.nic.in राजस्थान बोर्ड ने परीक्षा परिणाम घोषित करने के साथ ही उन छात्रों के लिए भी दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं, जो अपने प्राप्त अंकों से संतुष्ट नहीं हैं. यदि किसी विद्यार्थी को लगता है कि उसे उसकी मेहनत के अनुरूप अंक नहीं मिले हैं, तो वह 'स्क्रूटनी' या कॉपियों की 'री-चेकिंग' के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन कर सकता है. इसके लिए बोर्ड द्वारा निर्धारित प्रति विषय शुल्क जमा करना होगा. स्क्रूटनी की प्रक्रिया परिणाम जारी होने के 15 दिनों के भीतर पूरी करनी अनिवार्य होती है, जिसके बाद संशोधित अंकतालिका जारी की जाती है।  वहीं, जो छात्र एक या दो विषयों में न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करने में असफल रहे हैं, उन्हें निराश होने की आवश्यकता नहीं है. राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) ऐसे विद्यार्थियों के लिए सप्लीमेंट्री (पूरक) परीक्षा का आयोजन करेगा. बोर्ड सचिव गजेंद्र सिंह राठौड़ के अनुसार, सप्लीमेंट्री परीक्षाओं का विस्तृत शेड्यूल और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी अगले 48 घंटों में आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध करा दी जाएगी. इससे छात्रों को अपना कीमती साल बचाने का एक और अवसर मिलेगा। 

मुख्यमंत्री साय की त्वरित कार्रवाई: दिव्यांग चंदूलाल को मिली मदद

संवेदनशील नेतृत्व की मिसाल: मुख्यमंत्री साय ने दिव्यांग चंदूलाल की सुनी पुकार, मिनटों में मिला समाधान रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के संवेदनशील और जनहितकारी शासन की एक भावुक झलक आज चंदखुरी में देखने को मिली, जब उन्होंने एक दिव्यांग ग्रामीण की समस्या को न केवल सुना, बल्कि मौके पर ही उसका समाधान सुनिश्चित कर मानवता और उत्तरदायी नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत किया। चंदखुरी निवासी दिव्यांग चंदूलाल वर्मा के लिए यह दिन जीवन का अविस्मरणीय क्षण बन गया। वे मुख्यमंत्री से मिलने की आशा लेकर कायस्थ मंगल भवन के लोकार्पण कार्यक्रम में पहुंचे थे। कार्यक्रम समाप्ति के बाद जब वे मुख्यमंत्री से मिलने के लिए आगे बढ़े, तो सुरक्षा कारणों से उन्हें रोक दिया गया।इसी दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की नजर उन पर पड़ी। उन्होंने तत्परता दिखाते हुए सुरक्षाकर्मियों को निर्देश दिया कि वर्मा को मंच पर बुलाया जाए। यह एक छोटा-सा निर्णय था, लेकिन चंदूलाल के जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मिलते ही चंदूलाल ने अपनी व्यथा साझा की। उन्होंने बताया कि वे पहले राजमिस्त्री का कार्य करते थे, लेकिन शुगर की बीमारी और डायबिटिक फुट के कारण उनके पैरों में गंभीर समस्या हो गई, जिससे चलना-फिरना कठिन हो गया। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे अब कोई कार्य नहीं कर पा रहे हैं और उन्हें बैटरी संचालित ट्राईसिकल की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री साय ने अत्यंत संवेदनशीलता के साथ उनकी पूरी बात सुनी और तत्काल सहायता राशि प्रदान करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि उन्हें शीघ्र मोटराइज्ड ट्राईसिकल उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री के निर्देशों का त्वरित पालन सुनिश्चित किया गया। नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतीक बैस ने तत्काल प्रक्रिया पूर्ण कर चंदूलाल वर्मा को मोटराइज्ड ट्राईसिकल उपलब्ध कराया। अपनी खुशी व्यक्त करते हुए चंदूलाल भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि “मैंने सोचा भी नहीं था कि मुख्यमंत्री मुझसे मिलेंगे और मेरी समस्या का इतना जल्दी समाधान हो जाएगा। मैं उनका दिल से आभारी हूँ। धन्यवाद विष्णु भईया।” यह घटना केवल एक व्यक्ति की सहायता भर नहीं, बल्कि यह दर्शाती है कि राज्य सरकार का उद्देश्य हर नागरिक तक संवेदनशीलता, पहुंच और त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री का यह व्यवहार सुशासन के उस मॉडल को मजबूत करता है, जिसमें हर जरूरतमंद की आवाज सीधे शासन तक पहुंचती है और समाधान भी उतनी ही तेजी से मिलता है।

PAN कार्ड नियम में बदलाव 1 अप्रैल से: नाम mismatch पर हो सकता है PAN कार्ड बंद, जानें क्या करें

भोपाल पैन कार्ड और आधार कार्ड आज के समय में बेहद जरूरी दस्तावेज बन चुके हैं। बैंकिंग से लेकर टैक्स फाइलिंग और सरकारी योजनाओं तक, हर जगह इनकी जरूरत पड़ती है। ऐसे में अगर इन दोनों दस्तावेजों की डिटेल्स में कोई गड़बड़ी या mismatch है, तो आपको भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। सूत्रों के अनुसार, 1 अप्रैल से उन लोगों पर कार्रवाई हो सकती है जिनके पैन कार्ड और आधार कार्ड में नाम एक जैसा नहीं है या स्पेलिंग में अंतर है। ऐसी स्थिति में संबंधित पैन कार्ड निष्क्रिय (inactive) हो सकता है, जिससे कई वित्तीय कार्य प्रभावित होंगे। क्या हो सकते हैं नुकसान? इनकम टैक्स रिफंड मिलने में दिक्कत, TDS अधिक कट सकता है,बैंकिंग और KYC प्रक्रियाएं प्रभावित, वित्तीय लेन-देन में परेशानी..इसलिए यदि आपके आधार और पैन में नाम अलग-अलग दर्ज है, तो इसे जल्द से जल्द ठीक कर लेना जरूरी है। कैसे करें आधार कार्ड में नाम अपडेट? सबसे पहले अपने मोबाइल में आधार से संबंधित ऐप या आधिकारिक पोर्टल का उपयोग करें, लॉगिन करने के लिए आधार नंबर और OTP दर्ज करें “Update Aadhaar Online” विकल्प पर क्लिक करें ,नाम अपडेट का विकल्प चुनें ,जरूरी दस्तावेज अपलोड करें ,निर्धारित शुल्क का भुगतान करके सबमिट करें.. इसके बाद आप स्टेटस चेक करके देख सकते हैं कि आपका अपडेट पूरा हुआ या नहीं। पैन कार्ड में नाम कैसे बदलें? NSDL या UTIITSL की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं “Changes/Correction in PAN” विकल्प चुनें पैन नंबर, नाम, जन्मतिथि और ईमेल जैसी जानकारी भरें सबमिट करने पर एक टोकन नंबर जनरेट होगा। आवश्यक बदलाव चुनकर जरूरी दस्तावेज अपलोड करें,शुल्क का भुगतान कर फॉर्म सबमिट करें.. अंत में acknowledgement स्लिप डाउनलोड कर लें। अगर आपके पैन और आधार कार्ड की जानकारी एक जैसी नहीं है, तो इसे तुरंत अपडेट करना जरूरी है। थोड़ी सी सावधानी आपको भविष्य में होने वाली बड़ी परेशानियों से बचा सकती है। एलपीजी के रेट से लेकर इनकम टैक्स के नियमों तक आइए जानते हैं कि 1 अप्रैल से क्या कुछ बदल जाएगा? 1-न्यू इनकम टैक्स लॉ इनकम टैक्स एक्ट 2025 1 अप्रैल से प्रभावी हो जाएगा। यह इनकम टैक्स एक्ट 1961 की जगह लेगा। नए एक्ट में ‘एसेसमेंट ईयर’, ‘प्रीवियस ईयर’ जैसे कंफ्यूज करने वाले शब्दों को टैक्स ईयर ही कहा जाएगा। 2-टैक्स में मिलेगी अधिक छूट न्यू टैक्स रिजीम की वजह से 12 लाख रुपये तक की आय पर अब कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा। सेक्शन 87 A में किए गए बढ़ाए गए छूट की सीमा की वजह से टैक्सपेयर्स को न्यू टैक्स रिजीम में यह फायदा होगा। 3- टीडीएस फॉर्म में बदलाव 1 अप्रैल 2026 से फॉर्म 16 और फॉर्म 16 A की जगह फॉर्म 130 और फॉर्म 131 ले लेगा। इस बदलाव के पीछे की वजह से टैक्सपेयर्स को अधिक सुविधा देना है। 4- पैन कार्ड का नियम हुआ कठिन 1 अप्रैल से पैन कार्ड बनवाना इतना आसान नहीं रह जाएगा। अभी तक पैन कार्ड के लिए सिर्फ आधार कार्ड ही जरूरी होता है। लेकिन 1 अप्रैल से बर्थ सर्टिफिकेट के लिए 10वीं की मार्कशीट और पासपोर्ट जैसे डॉक्यूमेंट भी जरूरी हो जाएंगे। 5- LPG की कीमतों पर फैसला 1 अप्रैल को एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव देखने को मिल सकता है। ईरान-इजरायल युद्ध की वजह से एलपीजी की सप्लाई बाधित हुई है। अब देखना है कि मार्च की तरह अप्रैल में भी कीमतों में कोई इजाफा होगा या नहीं। 6- CNG, PNG, ATF प्राइस अप्रैल के पहले दिन सीएनजी, पीएनजी और एटीएफ की कीमतों में भी बदलाव किया जा सकता है। अगर कोई चेंज होता है तो इसका सीधा असर आपकी-हमारी जेब पर पड़ेगा। 7- ATM से निकासी के नियम एचडीएफसी बैंक 1 अप्रैल से यूपीआई एटीएम से निकासी की लिमिट में बदलाव करने जा रहा है। अगर आप महीने में 5 ट्रांजैक्शन से अधिक करेंगे तब की स्थिति में हर एक ट्रांजैक्शन पर आपको 23 रुपये का भुगतान करना होगा। बंधन बैंक ने मेट्रो शहरों में फ्री एटीएम ट्रांजैक्शन की लिमिट को 5 से घटाकर 3 कर दिया है। अतिरिक्त ट्रांजैक्शन पर बैंक आपसे 23 रुपये लेगा। अगर कम बैलेंस की वजह से ट्रांजैक्शन पूरा नहीं होता है तब की स्थिति में आपसे बैंक 25 रुपये वसूलेगा। 8-विथड्रॉल लिमिट को बैंक ने घटाया पंजाब नेशनल बैंक ने कुछ सिलेक्टेड डेबिट कार्ड की विथड्रॉल लिमिट को 75000 रुपये से घटाकर 50,000 रुपये कर दिया है। यह नियम में 1 अप्रैल से प्रभावी हो जाएगा। 9- टिकट कैसिंल रिफंड के नियमों में बदलाव अगर आप किसी ट्रेन के प्रस्थान से 8 घंटे के अंदर टिकट कैंसिल करते हैं तब की स्थिति में आपको कोई रिफंड नहीं मिलेगा। पहले यह टाइमलाइन 4 घंटे की थी। 10- क्या है रेलवे का नया रिफंड स्ट्रक्चर 1-ट्रेन के प्रस्थान होने से 8 से 24 घंटे पहले टिकट कैंसिल करने पर 50 प्रतिशत रिफंड दिया जाएगा। 2- अगर कोई टिकट 24 घंटे से 72 घंटे में टिकट कैंसिल होता है तब की स्थिति में 25 प्रतिशत कटौती होगी। 3- ट्रेन के प्रस्थान होने से 72 घंटे पहले टिकट कैंसिल करने पर अधिकतम पैसा रिफंड हो जाएगा। ध्यान रखें इस स्थिति में भी पूरा पैसा रिफंड नहीं होगा।

उज्जैन में 3 से 5 अप्रैल को होगा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम

उज्जैन में 3 से 5 अप्रैल को होगा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम” प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान पर होगा वैश्विक मंथन मुख्यमंत्री डॉ. यादव सम्मेलन में होंगे शामिल उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आगामी 3 अप्रैल को उज्जैन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम” के उद्घाटन सत्र में शामिल होंगे। यह सम्मेलन 3 से 5 अप्रैल तक उज्जैन के समीप डोंगला में होगा। सम्मेलन का उद्घाटन उज्जैन स्थित तारामंडल परिसर में होगा। कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। बाबा महाकाल की पावन नगरी उज्जैन, जो प्राचीन काल से समय गणना और खगोल विज्ञान की वैश्विक धुरी रही है, एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक और बौद्धिक संगम का केंद्र बनेगी। भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान के समन्वय पर केंद्रित यह सम्मेलन देश-विदेश के वैज्ञानिकों, खगोलविदों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों तथा अंतरिक्ष क्षेत्र के विशेषज्ञों को एक साझा मंच प्रदान करेगा। कार्यक्रम में साइंस सेंटर का उद्घाटन भी किया जाएगा। साथ ही यूएवी (अनमैन्ड एरियल व्हीकल) एवं आरसी (रिमोट कंट्रोल) और सैटेलाइट मेकिंग (उपग्रह निर्माण) विषयों पर विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, जो युवाओं में तकनीकी कौशल, नवाचार क्षमता तथा अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि को प्रोत्साहित करेंगी। तीन दिवसीय कार्यक्रम मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) और विज्ञान भारती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। सह-आयोजक संस्थाओं में भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर, वीर भारत न्यास और दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान कार्यक्रम की सह-आयोजक संस्थाएं हैं। डोंगला का ऐतिहासिक एवं वैज्ञानिक महत्व उज्जैन से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित डोंगला प्राचीन काल से खगोल एवं ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रहा है। कर्क रेखा के यहां से गुजरने के कारण इसे काल गणना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। सम्मेलन में उज्जैन-डोंगला को वैश्विक मेरिडियन (मध्यान रेखा) के रूप में स्थापित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की जाएगी। इन प्रमुख विषयों पर होगा विचार-विमर्श सम्मेलन में आधुनिक विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। प्रमुख विषयों में विकसित भारत में स्पेस इकोनॉमी की भूमिका, खगोल विज्ञान, एस्ट्रोफिजिक्स एवं कॉस्मोलॉजी की नवीनतम तकनीक, भारतीय काल गणना पद्धति का वैज्ञानिक आधार, कालचक्र की अवधारणा और स्पेस सेक्टर से जुड़ी रणनीतियां शामिल हैं। विविध कार्यक्रम होंगे आयोजन के आकर्षण तीन दिवसीय सम्मेलन में मुख्य व्याख्यान, उच्च स्तरीय पैनल चर्चा, तकनीकी सत्र, ओपन सेशन, टेक्नोलॉजी एक्सपो, स्टार्टअप कॉन्फ्रेंस, डोंगला वेधशाला का भ्रमण, कार्यशालाएं, पुस्तक विमोचन, प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। डॉ. विक्रम साराभाई के विज़न को मिलेगा विस्तार उज्जैन प्राचीन काल से समय मापन का प्रमुख केंद्र रहा है। महान खगोलविद आचार्य वराहमिहिर ने उज्जैन को खगोलीय गणनाओं का आधार बनाया था। यहां विकसित कालचक्र की अवधारणा आज भी आधुनिक खगोल विज्ञान को प्रेरित करती है। यह सम्मेलन डॉ. विक्रम साराभाई के उस विज़न को आगे बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें भारत को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की परिकल्पना की गई थी। उज्जैन को वैश्विक टाइम स्केल सेंटर बनाने की पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश स्पेस टेक्नोलॉजी और नवाचार के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार उज्जैन को पुनः वैश्विक “टाइम स्केल सेंटर” के रूप में स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है। साथ ही आधुनिक साइंस सेंटर और प्रस्तावित साइंस सिटी के माध्यम से युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित किया जा रहा है। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को मिलेगा बल उज्जैन आगामी सिंहस्थ-2028 की तैयारियाँ भव्य रूप कर रहा है। सम्मेलन में इसरो, सीएसआईआर, डीआरडीओ, नीति आयोग सहित देश-विदेश के प्रमुख शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों के प्रतिनिधियों की सहभागिता प्रस्तावित है।  

जनगणना 2026 में सरकार ने पूछे 33 अहम सवाल, घर से लेकर अनाज तक जानिए क्या आपको सभी जवाब है?

 नई दिल्ली देश की 16वीं जनगणना अब केवल आबादी का आंकड़ा नहीं, बल्कि आपके रहन-सहन की पूरी 'डिजिटल कुंडली' होगी. सरकार द्वारा जारी 33 नए FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल) बताते हैं कि इस बार आपके घर की बनावट, इस्तेमाल होने वाले अनाज और यहां तक कि आपके पास मौजूद गाड़ियों के प्रकार पर भी पैनी नजर होगी. 1 अप्रैल से शुरू होने वाले इस अभियान में पहली बार जनता को खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर भरने की बड़ी सुविधा दी गई है।  जनगणना को लेकर केंद्र सरकार ने एक और ऐतिहासिक और सामाजिक बदलाव वाला कदम उठाया है. सरकार ने पहले चरण की जनगणना के लिए 33 सवालों की लिस्ट (FAQs) जारी कर दी है. इसमें सबसे चौंकाने वाली और बड़ी बात 'ल‍िव-इन रिलेशनशिप' को लेकर कही गई है।  ल‍िव-इन कपल्स के लिए क्या है नियम? सेल्फ-एन्युमरेशन (स्व-गणना) पोर्टल पर जारी जानकारी के मुताबिक, अगर कोई कपल 'ल‍िव-इन रिलेशनशिप' में रह रहा है और वे अपने रिश्ते को एक 'स्थिर संबंध' मानते हैं तो जनगणना के दौरान उन्हें 'शादीशुदा जोड़ा' ही माना जाएगा. यह पहली बार है जब जनगणना के आधिकारिक सवालों में इस तरह के सामाजिक ढांचे को स्पष्ट रूप से जगह दी गई है।  खुद भर सकेंगे अपनी जानकारी सरकार ने उन लोगों के लिए एक खास पोर्टल खोला है जो 'सेल्फ-एन्युमरेशन' का विकल्प चुनना चाहते हैं. यानी अब आप खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कर सकेंगे. यह सुविधा जनगणना के दोनों चरणों 'हाउसलिस्टिंग' (HLO) और 'जनसंख्या गणना' के लिए उपलब्ध होगी. जनता की आसानी के लिए पोर्टल पर 33 अक्सर पूछे जाने वाले सवालों की पूरी लिस्ट दी गई है।  1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा पहला चरण सरकार ने साफ कर दिया है कि 1 अप्रैल 2026 से जनगणना का पहला चरण शुरू होगा. इस दौरान घर-घर जाकर या ऑनलाइन माध्यम से नागरिकों से 33 सवाल पूछे जाएंगे।  ये सवाल पूछे जाएंगे आपसे घर की बनावट: घर के फर्श, दीवार और छत में किस सामग्री (मटेरियल) का इस्तेमाल हुआ है? परिवार का मुखिया: घर के मुखिया का नाम, लिंग और वह किस समुदाय (SC, ST या अन्य) से ताल्लुक रखते हैं? सुविधाएं और वाहन: घर में पीने के पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं कैसी हैं? आपके पास किस तरह के वाहन (साइकिल, स्कूटर, कार आदि) हैं? खान-पान: परिवार में मुख्य रूप से किस अनाज (Cereal) का सेवन किया जाता है? शादीशुदा जोड़े: घर में कितने विवाहित जोड़े रहते हैं? (यहीं ल‍िव-इन कपल्स वाला नियम लागू होगा). घर की स्थिति: मकान नंबर, बिल्डिंग नंबर और घर का मालिकाना हक (अपना या किराए का) क्या है? भवन नंबर से होगी शुरुआत प्रश्नों का क्रम भवन नंबर (नगरपालिका या स्थानीय प्राधिकरण द्वारा दिया गया नंबर) और जनगणना मकान नंबर से शुरू होगा. इसके बाद, गणना करने वाले अधिकारी घर के फर्श, दीवार और छत में इस्तेमाल की गई प्रमुख सामग्री के बारे में पूछेंगे. साथ ही, घर के उपयोग, उसकी स्थिति और परिवार में सामान्य रूप से रहने वाले व्यक्तियों की संख्या की जानकारी भी जुटाई जाएगी।  अधिकारी परिवार के मुखिया के बारे में जानकारी एकत्र करेंगे, जैसे उनका नाम, लिंग और क्या वे अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) या अन्य समुदायों से संबंध रखते हैं. साथ ही मकान के मालिकाना हक की स्थिति भी पूछी जाएगी। 

Credit Card Rule Change: 1 अप्रैल से लागू होंगे नए नियम, जानें क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वालों के लिए क्या हैं बड़े बदलाव

मुंबई  अगर आप भी क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, तो यह जानकारी आपके बहुत काम की है. 1 अप्रैल 2026 से क्रेडिट कार्ड से जुड़े नियमों में कुछ बड़े बदलाव होने जा रहे हैं. ये बदलाव इनकम टैक्स एक्ट 2025 के तहत किए जा रहे हैं. आसान भाषा में कहें तो अब सरकार आपके क्रेडिट कार्ड के खर्चों पर पैनी नजर रखने वाली है।  1. बहुत ज्यादा खर्च किया तो देना होगा हिसाब अगर आप अपने क्रेडिट कार्ड से साल भर में 10 लाख रुपये या उससे ज्यादा का पेमेंट करते हैं, तो सावधान हो जाइए. अब बैंक इसकी जानकारी सीधे इनकम टैक्स विभाग को देंगे. यही नहीं, अगर आप विदेश यात्राओं पर मोटा पैसा खर्च करते हैं, तो उस पर भी नजर रहेगी.  मिल सकता है नोटिस भी  पेच कहां है? अगर आपका साल भर का खर्च आपकी कमाई, जो आपने टैक्स रिटर्न में दिखाई है, से बहुत ज्यादा निकला, तो इनकम टैक्स विभाग आपसे पूछ सकता है कि इतना पैसा आया कहां से? और आपको नोटिस भी मिल सकता है।  2. बिना पैन कार्ड के होगी परेशानी 1 अप्रैल से क्रेडिट कार्ड और पैन कार्ड का नियम सख्त होने वाला है. अब बिना पैन नंबर के कोई भी बैंक नया क्रेडिट कार्ड जारी नहीं करेगा. जिनके पास पहले से कार्ड है, उन्हें भी इसे लिंक करना होगा. इसका मतलब है कि आपका हर छोटा-बड़ा खर्च अब आपकी टैक्स प्रोफाइल से जुड़ जाएगा।  3. ऑफिस के कार्ड से पर्सनल शॉपिंग पड़ेगी भारी कई लोगों को अपनी कंपनी की तरफ से क्रेडिट कार्ड मिलता है. अब तक लोग इससे ऑफिस के काम के साथ-साथ कभी-कभार अपना निजी खर्च भी कर लेते थे. लेकिन अब अगर आपने कंपनी के कार्ड से अपनी पर्सनल शॉपिंग, फिल्म की टिकट या पर्सनल ट्रिप का भुगतान किया, तो सरकार उसे आपकी एक्स्ट्रा कमाई मानेगी।  हर बिल रखें संभाल कर! वह पैसा आपकी सैलरी में जोड़ दिया जाएगा और उस पर आपको टैक्स देना होगा. अब आपको हर बिल संभाल कर रखना होगा ताकि साबित कर सकें कि खर्च ऑफिस के काम के लिए था या खुद के लिए।  4. क्रेडिट कार्ड से भरिए इनकम टैक्स अब आप अपना इनकम टैक्स भरने के लिए नेट बैंकिंग या डेबिट कार्ड के चक्कर छोड़कर क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं. अगर टैक्स भरने के समय हाथ तंग है, तो कार्ड से पेमेंट कर दीजिए और बाद में बैंक को चुकाते रहिए. याद रखें कि बैंक इस पर प्रोसेसिंग फीस वसूल सकता है और अगर आपने समय पर कार्ड का बिल नहीं भरा, तो भारी ब्याज भी लग सकता है।  5. पते के सबूत के तौर पर इस्तेमाल अगर आपके पास बिजली बिल या कोई और पक्का कागजात नहीं है, तो अब आपका क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट पते के सबूत के तौर पर काम आएगा. अगर आपको पैन कार्ड बनवाना है या उसमें कुछ अपडेट कराना है, तो आप अपना लेटेस्ट क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट दे सकते हैं, बशर्ते उस पर आपका सही पता लिखा हो।  ध्यान रखने वाली बात! अगर आप सामान्य यूजर हैं जो महीने के 20-50 हजार खर्च करते हैं, तो आपको डरने की जरूरत नहीं है. लेकिन अगर आप हाई-वैल्यू यूजर हैं, तो अपने बिल और टैक्स रिटर्न का तालमेल बिठाकर चलें।     

भोजशाला विवाद अब सुप्रीम कोर्ट में, मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट की प्रक्रिया पर सवाल उठाए

धार धार के ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में चल रहे विवाद ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। मुस्लिम पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाली कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच की कार्यवाही से असंतुष्टि जताते हुए देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया है।  सुनवाई की तारीख को लेकर आपत्ति मुस्लिम पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष आवेदन प्रस्तुत किया गया है। इस आवेदन में मांग की गई है कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में 2 अप्रैल को होने वाली प्रस्तावित सुनवाई से पहले, उनकी आपत्तियों पर 1 अप्रैल को ही विचार किया जाए। सोसायटी का मानना है कि उनकी दलीलों को सुने बिना प्रक्रिया को आगे बढ़ाना उचित नहीं है। सर्वे की वीडियोग्राफी पर अड़ा पेंच मुस्लिम पक्ष का मुख्य तर्क यह है कि 11 मार्च को हाईकोर्ट में प्रस्तुत उनके आवेदन पर 16 मार्च को उचित सुनवाई नहीं हुई। उनकी प्रमुख मांग है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा भोजशाला परिसर में किए जा रहे वैज्ञानिक सर्वे की पूरी वीडियोग्राफी के फुटेज उन्हें उपलब्ध कराए जाएं। आवेदन में यह भी कहा गया है कि हाईकोर्ट ने पूर्व में उनकी याचिका को सुनवाई योग्य नहीं माना था, जिसके कारण उन्हें शीर्ष अदालत की शरण लेनी पड़ी। सोसायटी के अध्यक्ष अब्दुल समद ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने बीते 11 मार्च को एएसआई द्वारा किए जा रहे सर्वे की वीडियोग्राफी उपलब्ध कराने की आधिकारिक मांग की थी। मुस्लिम पक्ष का आरोप है कि 16 मार्च को हुई पिछली सुनवाई के दौरान इस महत्वपूर्ण विषय पर न तो कोई चर्चा की गई और न ही अदालत की ओर से कोई ठोस आदेश पारित किया गया।     जजों के निरीक्षण के बाद बढ़ी सरगर्मी हाल ही में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी ने भारी सुरक्षा के बीच धार पहुंचकर भोजशाला का बारीकी से निरीक्षण किया था। जजों ने एएसआई के अधिकारियों से सर्वे की प्रगति और परिसर के भीतर मंगलवार को हनुमान चालीसा/पूजा और शुक्रवार को नमाज के आयोजनों की व्यवस्थाओं पर विस्तृत जानकारी ली थी। इस निरीक्षण के तुरंत बाद मुस्लिम पक्ष का सुप्रीम कोर्ट जाना मामले की गंभीरता को दर्शाता है। 2 अप्रैल की सुनवाई क्यों है अहम? हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका पर 2 अप्रैल को होने वाली सुनवाई ऐतिहासिक साक्ष्यों और एएसआई की प्रारंभिक रिपोर्ट पर केंद्रित हो सकती है। मुस्लिम पक्ष चाहता है कि इस सुनवाई से पहले 1 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट उनकी दलीलें सुन ले, ताकि हाईकोर्ट की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। यह मामला न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि एएसआई की कार्यप्रणाली और डिजिटल साक्ष्यों की स्वीकार्यता पर भी बड़ा कानूनी सवाल खड़ा करता है। याचिका की वैधता पर उठाए सवाल कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस द्वारा दायर की गई मूल याचिका की वैधता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका तर्क है कि यह याचिका सुनवाई के योग्य ही नहीं है, इसके बावजूद मामले की कार्यवाही को निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा है। इन्हीं तकनीकी और कानूनी आधारों को मुख्य बिंदु बनाते हुए अब सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की गुहार लगाई गई है। वर्तमान में सभी की निगाहें सर्वोच्च न्यायालय के आगामी निर्णय पर टिकी हैं कि वह इस संवेदनशील मामले में क्या रुख अपनाता है।

PM E-Drive योजना: इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए सरकार ने बदले सब्सिडी के नियम

 नई दिल्ली देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. अब आम लोगों को इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर खरीदने पर मिलने वाली सब्सिडी का फायदा पहले से ज्यादा समय तक मिलेगा. इस फैसले से न सिर्फ ईवी खरीदना सस्ता होगा, बल्कि बाजार में इसकी मांग भी और तेज होने की उम्मीद है।  क्या हुआ है बदलाव सरकार ने प्राइम मिनिस्टर इलेक्ट्रिक ड्राइव रेवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल इन्हैंसमेंट (PM E-Drive) स्कीम के तहत सब्सिडी की समय सीमा में बदलाव किया है. भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी नए नोटिफिकेशन के अनुसार, इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर मिलने वाली सब्सिडी अब 31 जुलाई 2026 तक दी जाएगी. वहीं, इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर के लिए यह लाभ 31 मार्च 2028 तक मिलता रहेगा. यह योजना पहले 31 मार्च 2026 तक खत्म होने वाली थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 2028 तक कर दिया गया है. खास बात यह है कि टू-व्हीलर के लिए 4 महीने का एक्स्ट्रा टाइम दिया गया है।  अक्टूबर 2024 में शुरू हुई इस स्कीम का कुल बजट 10,900 करोड़ रुपये रखा गया है. इसका मकसद इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर, बस, ट्रक और एंबुलेंस की खरीद को बढ़ावा देना है. साथ ही देश में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना भी इसका अहम हिस्सा है. इस योजना के तहत 3,679 करोड़ रुपये सीधे सब्सिडी के रूप में दिए जाने हैं, जबकि 7,171 करोड़ रुपये पब्लिक चार्जिंग और ई-बस जैसी सुविधाओं पर खर्च किए जाएंगे।  सब्सिडी में कटौती जहां एक तरफ सरकार ने सब्सिडी की समय-सीमा बढ़ाई है, वहीं इसकी रकम में कटौती भी की है. जिसका सीधा आम लोगों के इलेक्ट्रिक वाहन खरीदारी पर पड़ेगा. 1 अप्रैल 2025 से इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर सब्सिडी घटाकर 2,500 रुपये प्रति kWh कर दी गई है, जो अधिकतम 5,000 रुपये है. यानी इलेक्ट्रिक स्कूटर या बाइक खरीदने वालों को ज्यादा से ज्यादा 5,000 रुपये तक का लाभ मिलेगा. पहले यह 5,000 रुपये प्रति kWh और अधिकतम 10,000 रुपये तक थी. आमतौर पर बाजार में उपलब्ध इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कम से कम 2kWh बैटरी पैक के साथ आते हैं. ऐसे में लोगों को वाहनों पर कम से कम 10,000 रुपये तक का बेनिफिट जरूर मिल जाता था।  इसी तरह, इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर पर भी सब्सिडी कम कर दी गई है. अब यह 2,500 रुपये प्रति kWh और अधिकतम 12,500 रुपये प्रति वाहन है, जो पहले 25,000 रुपये तक मिलती थी. इसलिए सब्सिडी की समय सीमा भले ही बढ़ी हो लेकिर सब्सिडी के रूप में मिलने वाली रकम कम हो गई है. दरअसल, सरकार सिलसिलेवार ढंग से सब्सिडी खत्म पर विचार कर रही है. इसलिए धीमें-धीमें इसे कम किया जा रहा है।  भारी उद्योग मंत्रालय ने 5 फरवरी 2026 तक PM E-Drive योजना के तहत वाहन निर्माताओं को 1,182.32 करोड़ रुपये की राशि वापस की है. यह पैसा उन इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर दी गई छूट के बदले लौटाया गया है, जो 1 अप्रैल 2024 के बाद रजिस्टर्ड हुए हैं. अब तक 14,39,224 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर इस योजना का लाभ उठा चुके हैं।  कितने वाहनों को मिलेगा फायदा इस योजना के तहत देश भर में 24.79 लाख इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर, 3.16 लाख थ्री-व्हीलर और 14,028 बस और ट्रक को सपोर्टै देना है. इसके साथ ही देशभर में 88,500 चार्जिंग स्टेशन लगाने का भी टार्गेट रखा गया है. 27 जनवरी 2026 तक इस योजना के तहत 22.12 लाख इलेक्ट्रिक वाहन बिक चुके हैं. इनमें 19.19 लाख टू-व्हीलर और 2.93 लाख थ्री-व्हीलर शामिल हैं. इसके लिए कंपनियों को अब तक 1,703 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जा चुकी है।  इलेक्ट्रिक बस और चार्जिंग इंफ्रा पर जोर सरकार इलेक्ट्रिक बसों और चार्जिंग नेटवर्क को भी तेजी से बढ़ा रही है. 4,391 करोड़ रुपये की लागत से 14,028 इलेक्ट्रिक बसें बड़े शहरों में चलाई जाएंगी. इनमें बेंगलुरु, दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, अहमदाबाद, पुणे और सूरत जैसे शहर शामिल हैं. चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के तहत 22,100 फास्ट चार्जर, 1,800 बस चार्जर और 48,400 टू और थ्री-व्हीलर चार्जिंग पॉइंट लगाने का टार्गेट है। 

लेबनान में 10 लाख से ज्यादा लोग बेघर, UN शांति सैनिक की मौत, हालात बिगड़े

बेरूत  ईरान से जुड़े युद्ध ने अब वैश्विक संकट का रूप ले लिया है, जहां एक तरफ तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं तो दूसरी तरफ जमीनी और हवाई हमले भी तेज हो गए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उसने परमाणु हथियार नहीं छोड़े तो उसका अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है. साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है और जल्द कोई समझौता हो सकता है. इसी बीच बगदाद में अमेरिकी बेस पर हमले और लेबनान में इजरायल-हिजबुल्लाह टकराव ने हालात और बिगाड़ दिए हैं, जहां लाखों लोग बेघर हो चुके हैं।  तेल संकट भी लगातार गहराता जा रहा है. होरमुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण सप्लाई बाधित हुई है, जिससे ब्रेंट क्रूड 107 डॉलर के पार पहुंच गया. कई देश अब रूस से तेल खरीदने को मजबूर हैं, जबकि कुछ देशों में फ्यूल की कीमतें दोगुनी हो चुकी हैं. ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों को आम लोगों को राहत देने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट मुफ्त करना पड़ा है. वहीं कुवैत में पावर प्लांट पर हमले और ड्रोन-मिसाइल घटनाओं ने खाड़ी क्षेत्र में भी डर का माहौल बना दिया है।  इसी बीच ईरान की तरफ से बड़ा बयान सामने आया है. ब्रिगेडियर जनरल इब्राहिम जोलफकारी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधी चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ने फारस की खाड़ी में किसी द्वीप पर कब्जा करने की कोशिश की, तो अमेरिकी सैनिक ‘शार्क का खाना’ बन जाएंगे. उन्होंने ट्रंप पर इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दबाव में काम करने का आरोप भी लगाया।  तनाव को और बढ़ाने वाला दावा यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने किया. उन्होंने आरोप लगाया कि रूस ने ईरान की मदद की. उनके मुताबिक रूसी जासूसी सैटेलाइट्स ने डिएगो गार्सिया में अमेरिका और ब्रिटेन के सैन्य अड्डे की तस्वीरें लीं और यह जानकारी ईरान को दी गई. जेलेंस्की ने कहा कि 24 और 25 मार्च को ली गई इन तस्वीरों के बाद ईरान ने वहां मिसाइल हमला करने की कोशिश की, हालांकि दोनों मिसाइल निशाने पर नहीं लगीं. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह दावा सही साबित होता है, तो यह संघर्ष और ज्यादा खतरनाक रूप ले सकता है. हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया अमेरिका और ब्रिटेन का अहम सैन्य अड्डा है. ऐसे में इस पर किसी भी तरह की गतिविधि पूरे क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा सकती है।   दबाव के बीच ईरान की कमाई बढ़ी  अमेरिका और इजरायल के दबाव के बीच ईरान को आर्थिक मोर्चे पर बड़ा फायदा होता दिख रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक फरवरी के अंत से अब तक ईरान की रोजाना तेल आय लगभग दोगुनी हो गई है. बताया जा रहा है कि बढ़ती वैश्विक कीमतों और सप्लाई संकट का फायदा उठाकर तेहरान ने अपनी रणनीति मजबूत की है।   इजरायल ने हथियारों का बड़ा सौदा किया क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच इजरायल ने अपनी सैन्य तैयारी और तेज कर दी है. रक्षा मंत्रालय ने Elbit Systems के साथ 48 मिलियन डॉलर का समझौता किया है, जिसके तहत हजारों 155mm आर्टिलरी शेल खरीदे जाएंगे. अधिकारियों के मुताबिक यह कदम विदेशी सप्लाई पर निर्भरता कम करने और घरेलू हथियार उत्पादन को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है. युद्ध के बीच सप्लाई चेन सुरक्षित रखने के लिए इजरायल लगातार अपनी रक्षा क्षमता बढ़ाने में जुटा है।  बेथलहम के पास आगजनी, फिलिस्तीनी वाहनों को जलाया वेस्ट बैंक के बेथलहम के पास नहालिन इलाके में इजरायली बसने वालों पर आगजनी का आरोप लगा है. फिलिस्तीनी न्यूज एजेंसी के मुताबिक हमलावरों ने इलाके में घुसकर दो फिलिस्तीनी वाहनों को आग के हवाले कर दिया और दीवारों पर नस्लीय नारे लिखे. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह घटना बाहरी इलाके में हुई, जहां हमलावरों ने पहले हमला किया और फिर बाकौश इलाके में इकट्ठा होकर तोड़फोड़ की।   कतर ने कुवैत पर हमले की निंदा की, बढ़ा क्षेत्रीय तनाव कतर ने कुवैत के पावर स्टेशन और पानी के प्लांट पर हुए हमले को लेकर ईरान की कड़ी निंदा की है. कतर के विदेश मंत्रालय ने इसे ‘गंभीर आक्रामक कार्रवाई’ बताते हुए तुरंत रोकने की मांग की है और कुवैत के साथ पूरी एकजुटता जताई है. कुवैत अधिकारियों के मुताबिक इस हमले में एक भारतीय कर्मचारी की मौत हुई है और साइट पर मौजूद सर्विस बिल्डिंग को भी नुकसान पहुंचा है।  इजरायल लिंक के आरोप में दो लोगों को फांसी  ईरान में दो लोगों को फांसी दे दी गई है, जिन पर अमेरिका और इजरायल से जुड़े विपक्षी संगठन मुजाहिदीन-ए-खलक के साथ काम करने का आरोप था. अर्ध-सरकारी तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक दोनों पर सुरक्षा बलों पर हमले करने के आरोप भी लगाए गए थे. अधिकारियों का कहना है कि ये कार्रवाई देश की सुरक्षा के खिलाफ गतिविधियों के चलते की गई है।   वियतनाम भी रूसी तेल की ओर झुका  वैश्विक तेल संकट के बीच वियतनाम की बिन्ह सोन रिफाइनरी ने रूसी कच्चा तेल खरीदने के लिए बातचीत शुरू कर दी है. साथ ही अफ्रीका, अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया से भी सप्लाई के विकल्प तलाशे जा रहे हैं. अमेरिका ने रूसी तेल पर 30 दिन की छूट देकर खरीद की अनुमति दी है, जिससे कई देशों को राहत मिली है. होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के बाद सप्लाई पर असर पड़ा है, जिसके चलते थाईलैंड, फिलीपींस और इंडोनेशिया जैसे देश भी रूस से तेल खरीद रहे हैं. वहीं चीन और भारत अब भी रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदार बने हुए हैं।   

जल संसाधन मंत्री सिलावट का बयान: प्रदेश में जल संवर्धन और जल संरक्षण के कार्यों को बढ़ाएं

प्रदेश में अधिक से अधिक हों जल संवर्धन और जल संरक्षण के कार्य : जल संसाधन मंत्री सिलावट जल गंगा संवर्धन अभियान संबंधी ली बैठक भोपाल जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत प्रदेश के गांव-गांव, नगर-नगर में जल संरक्षण एवं जल संवर्धन संबंधी कार्य कराए जा रहे हैं। विभागीय अधिकारी समाज के सभी वर्गों एवं आमजन के सहयोग से अपने-अपने क्षेत्र में वृहत रूप से जल संरक्षण और संवर्धन के कार्य कराएं और इस अभियान को पूरी तरह सफल बनाएं। प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान गत 19 मार्च से चलाया जा रहा है जो तीन माह तक चलेगा। जल संसाधन मंत्री सिलावट ने सोमवार को अपने निवास कार्यालय में जल गंगा संवर्धन अभियान संबंधी बैठक लेकर अभियान के अंतर्गत कराए जा रहे कार्यों की समीक्षा की एवं आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में अपर मुख्य सचिव, जल संसाधन डॉ. राजेश राजौरा, अधीक्षण यंत्री पुष्पेन्द्र सिंह, श्रीमती हर्षा जैनवाल एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मंत्री सिलावट ने निर्देश दिए कि अभियान के अंतर्गत आगामी दिनों में कराए जाने वाले कार्यों की कछारवार विस्तृत रूप रेखा तैयार कर आगामी 3 दिवस में प्रस्तुत की जाए। अभियान के सम्बन्ध में समय-समय पर विभाग द्वारा जारी विस्तृत दिशा निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। बैठक मैं बताया गया कि जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जल संसाधन विभाग द्वारा मुख्य रूप से जल संग्रहण स्रोतों के रख-रखाव एवं मरम्मत के अनुरूप अपूर्ण कार्यां को पूर्ण करना, निर्मित तालाब की पाल पर मिट्टी के कटाव अथवा अतिवर्षा से क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में पुनः निर्माण किये जाने, तालाबों की पिचिंग, बोल्डर टो तथा घाट आदि के मरम्मत का कार्य, जल संरचनाओं के किनारों पर अतिक्रमण को रोकना, संपूर्ण नहर प्रणाली में घास, झाडी, छोटे पेड पोधे आदि की सफाई का कार्य एवं वृक्षारोपण, शहरी आबादी क्षेत्रों में प्रमुख नहरों का चिन्हाकंन व सीमांकन का कार्य, स्टाप डेम बैराज-वीयर के गेट इत्यादि की मरम्मत, बांध के फ्लस बार स्लूज बेल की मरम्मत तथा सफाई का कार्य, केचमेंट एरिया में अवरोध का चिन्हांकन कर उसे हटाना तथा अन्य आवश्यक तकनीकी कार्य आदि कराए जा रहे हैं। अधिकारियों को सभी कार्यों को पूर्ण गुणवत्ता के साथ कराए जाने के निर्देश दिए गए।