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मध्य प्रदेश में 29 मार्च से 3 दिन तक बारिश, 40 जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट

भोपाल  मध्य प्रदेश में एक बार फिर मौसम ने करवट ले ली है, जिससे प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदल गया है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में बादल छाए रहने और बारिश की संभावना बनी हुई है। अचानक हुए इस बदलाव के चलते लोगों को गर्मी से राहत मिली है, वहीं मौसम विभाग ने सतर्क रहने की सलाह भी जारी की है। बदलते मौसम का असर राजधानी भोपाल सहित कई जिलों में साफ देखा जा रहा है। मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि कल से लगातार तीन दिनों तक प्रदेश में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान भोपाल, उज्जैन समेत लगभग 40 जिलों में मौसम प्रभावित रहेगा। बारिश के साथ-साथ कई क्षेत्रों में तेज आंधी चलने की भी संभावना जताई गई है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है। ग्वालियर, चंबल, रीवा, सागर और जबलपुर संभाग के अधिकतर जिलों में मौसम का मिजाज बदलने की पूरी संभावना है। इन इलाकों में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश के साथ तेज हवाएं भी चल सकती हैं। नर्मदापुरम में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है और लू जैसे हालात देखने को मिल रहे हैं। वहीं, शुक्रवार को साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ के असर से ग्वालियर, चंबल, रीवा, सागर और जबलपुर संभाग के कई जिलों में बादल छाए रहे। हालांकि यह सिस्टम आज शनिवार को कमजोर हो जाएगा, जिससे तापमान में बढ़ोतरी होगी। इसके बाद 29 मार्च से नया सिस्टम एक्टिव होगा, जिसका असर 30 और 31 मार्च को सबसे ज्यादा रहेगा। 40 जिलों में बारिश की संभावना मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि 31 मार्च तक भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग के करीब 40 जिलों में बारिश हो सकती है। 29 मार्च को हल्की बूंदाबांदी के आसार हैं, जबकि 30 और 31 मार्च को तेज बारिश होने की संभावना है। कई जिलों में बढ़ा तापमान नर्मदापुरम में मार्च के दौरान चौथी बार लू चली है। लगातार गर्म हवाओं के कारण तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई। खजुराहो में 39.6 डिग्री, रतलाम और मंडला में 39.5 डिग्री, खंडवा में 39.1 डिग्री, खरगोन में 38.5 डिग्री, रायसेन में 38.4 डिग्री और सिवनी-सागर में 38.2 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। प्रदेश के प्रमुख शहरों में जबलपुर सबसे गर्म रहा, जहां तापमान 38.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। भोपाल, इंदौर और उज्जैन में तापमान 37 डिग्री तक पहुंच गया, जबकि ग्वालियर में 36.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मार्च में तीसरी बार बदलेगा मौसम मार्च महीने में अब तक आंधी-बारिश के दो दौर आ चुके हैं, जिनमें 45 से अधिक जिलों में प्रभाव देखा गया और 17 जिलों में ओले भी गिरे। अब तीसरा दौर 29 मार्च से शुरू होकर 30 मार्च तक जारी रहने की संभावना है। हालांकि 27 मार्च को भी मौसम में बदलाव देखा गया था, लेकिन उसका असर सीमित रहा। पिछले 24 घंटे में इस तरह रहा मौसम, चित्रकूट में बारिश! प्रदेश में पिछले 24 घंटे में सतना के चित्रकूट में तेज आंधी के साथ हुई जोरदार बारिश ने जनजीवन प्रभावित कर दिया. यहां रामनवमी के अवसर पर 21 लाख दीप जलाए जाने थे, लेकिन अचानक हुई और बारिश ने दीपों में पानी भर दिया. मौसम के बदले मिजाज ने पूरे आयोजन पर पानी फेर दिया और आनन-फानन में मंच को तिरपाल से ढकना पड़ा. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ लाइन की वजह से प्रदेश में नमी आ रही है. शुक्रवार को भी ग्वालियर, चंबल, रीवा और सागर संभाग के 20 से ज्यादा जिलों में बादल छाए रहे. शनिवार को पुराना सिस्टम कमजोर होकर आगे बढ़ेगा, जिससे आज दिन में गर्मी बढ़ेगी. लेकिन रविवार से नया सिस्टम फिर से सक्रिय हो जाएगा. अगले 3 दिन इस तरह रहेगा मौसम 28 मार्च: इस दिन प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बादल छाने का अनुमान है. कहीं-कहीं बूंदाबांदी भी हो सकती है. वहीं, भोपाल, इंदौर-उज्जैन समेत कई जिलों में तेज गर्मी रहेगी. 29 मार्च: उत्तरी हिस्से में बारिश का अलर्ट रहेगा. जिसके चलते ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, नीमच और मंदसौर जैसे जिले प्रभावित रहेंगे. 30 मार्च:  भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, राजगढ़, शाजापुर, गुना, अशोकनगर, विदिशा, सागर, निवाड़ी, छतरपुर, दमोह, पन्ना, कटनी, रीवा, सतना, मैहर, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, भिंड और दतिया में बारिश होने की संभावना हैं. 31 मार्च: भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़, विदिशा, सीहोर, हरदा, खंडवा, बुरहानपुर, बैतूल, नर्मदापुरम, रायसेन, सागर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बालाघाट, सिवनी, दमोह, कटनी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली जिलों में पानी गिरने के आसार बनेंगे. इस तरह रहा बड़े शहरों अधिकतम तापमान  भोपाल में 37.0°C इंदौर में 37.0°C जबलपुर में 38.4°C ग्वालियर में 36.1°C उज्जैन में 37.0°C बड़े शहरों का न्यूनतम तापमान भोपाल में  19.8°C इंदौर में 19.0°C जबलपुर में 21.5°C ग्वालियर में 21.5°C उज्जैन में 18.5°C

CSK को IPL 2026 से पहले बड़ा नुकसान, धोनी चोट के कारण शुरुआती दो हफ्ते नहीं खेलेंगे

चेन्नई चेन्नई सुपर किंग्स के स्टार खिलाड़ी धोनी चोटिल होने के कारण दो हफ्तों को लिए आईपीएल से बाहर हो गए हैं. उनकी पिंडली की मांसपेशी में खिंचाव आ गया है, जिसके कारण वह सीज़न के पहले दो हफ़्तों तक नहीं खेल पाएंगे. फ्रेंचाइज़ी ने शनिवार को इस बात की पुष्टि की. CSK सोमवार शाम को गुवाहाटी के बरसापारा स्टेडियम में राजस्थान रॉयल्स के ख़िलाफ़ अपने अभियान की शुरुआत करने के लिए तैयार है. धोनी को लेकर सीएसके ने सोशल मीडिया पर अपने बयान में लिखा, "जल्द ठीक हो जाओ, Thala।". संजू सैमसन करेंगे विकेटकीपिंग धोनी के चोटिल होने से यकीनन फैन्स को निराशा हाथ लगी है.  धोनी की गैरमौजूदगी में, CSK विकेटकीपिंग की ज़िम्मेदारी भारत के ओपनर संजू सैमसन को सौंप सकती है. सैमसन को पिछले दिसंबर में आईपीएल 2026 की नीलामी से पहले ट्रेड करके टीम में शामिल किया गया था.  इसके लिए CSK ने रवींद्र जडेजा और सैम करन को राजस्थान रॉयल्स को देकर सैमसन को अपनी टीम में लिया था। अगस्त 2020 में इंटरनेशनल क्रिकेट से रिटायरमेंट की घोषणा करने के बाद से, धोनी सिर्फ़ IPL में नजर आते हैं. पिछले सीज़न में, धोनी सुपर किंग्स के लिए सभी 14 मैचों में खेले, जिसमें उन्होंने 24.50 की औसत और 135.17 के स्ट्राइक रेट से कुल 196 रन बनाए.  पिछले साल सीजन की शुरुआत में ही, कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ के कोहनी में फ्रैक्चर के कारण टूर्नामेंट से बाहर हो जाने के बाद, धोनी ने कप्तानी की बागडोर भी संभाल ली थी। फैन्स को निराशा पहले दो हफ्तों के लिए धोनी के न रहने से फैन्स निराश हो गए हैं. धोनी के न खेलने से आईपीएल का रोमांच भी थोड़ा काम हो गया है. लेकिन फैन्स दुआ कर रहे हैं कि माही जल्द से जल्द फिट होकर टीम में लौटे। धोनी पहले 3 मैचों में नहीं दिखेंगे धोनी अगर 2 हफ्ते तक बाहर रहे तो कम से कम 3 मैच मिस करेंगे. चेन्नई को अपना पहला मैच 30 मार्च को गुवाहाटी में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ  खेलना है, फिर वो 3 अप्रैल को  चेन्नई में ही पंजाब किंग्स खेलेगी. इसके बाद 5 अप्रैल को तीसरा मैच चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ खेलेगी।  इस खबर से साफ हो गया है कि 19वें सीजन के शुरुआती मैचों में फैंस को विकेट के पीछे 'माही' की जादुई कीपिंग और बल्ले से फिनिशिंग टच देखने को नहीं मिलेगा. धोनी 44 साल के हो चुके हैं. इस उम्र में मांसपेशियों की चोट से उबरना आसान नहीं होता, मेडिकल टीम उन्हें जल्द फिट करने की कोशिश में जुटी है. अब देखना होगा कि धोनी बीच सीजन किस मुकाबले के साथ मैदान पर वापसी करेंगे।  धोनी का चोटिल होना चेन्नई के लिए बड़ा झटका क्यों? आईपीएल 2026 का सीजन दिग्गज एमएस धोनी के करियर का फेयरवेल सीजन माना जा रहा है. बढ़ती उम्र और फिटनेस संबंधी समस्याओं के चलते धोनी शायद अगला सीजन ना खेलें. इसलिए फैंस इस बार उन्हें हर एक मैच में देखना चाहते थे, लेकिन अब वो कई मैचों से बाहर रहेंगे। धोनी इस लीग के इतिहास के सबसे सफल कप्तान हैं. उन्होंने अपनी कप्तानी में चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) को 5 बार (2010, 2011, 2018, 2021, 2023) खिताब जिताया है. 2008 में डेब्यू के बाद से उन्होंने 278 मैचों में 5439 रन बनाए हैं. खास बात ये है कि उनकी कप्तानी में सीएसके 10 से ज्यादा बार प्लेऑफ में पहुंची है. धोनी एक बेहतरीन फिनिशर और विकेटकीपर हैं. उनका मैदान पर रहना ही कई विरोधी टीमों को दवाब में ला देता है, क्योंकि धोनी के पास टीम को चलाने और फंसे हुए मैचों में टफ फैसले लेकर टीम को वहां से निकालने की जबरदस्त कला और समझ है, इसलिए प्लेइंग 11 में कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ को उनकी कमी साफ तौर पर खलेगी।  CSK Full Squad- एमएस धोनी, संजू सैमसन, ऋतुराज गायकवाड़, आयुष म्हात्रे, डेवाल्ड ब्रेविस, उर्विल पटेल, शिवम दुबे, रामकृष्ण घोष, खलील अहमद, मुकेश चौधरी, नाथन एलिस, अंशुल कंबोज, जेमी ओवर्टन, गुरजपनीत सिंह, नूर अहमद, श्रेयस गोपाल, अकील होसैन, प्रशांत वीर, कार्तिक शर्मा, मैथ्यू शॉर्ट, अमन खान, सरफराज खान, मैट हेनरी, राहुल चाहर, जैक फोक्स 

पंजाब में 292 करोड़ रुपये के मुफ्त इलाज को मिली मंजूरी, 3 महीने में 1.77 लाख मरीजों को हुआ फायदा

चंडीगढ़  पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत बड़े स्तर पर जनस्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। गत आठ जनवरी को योजना की शुरुआत के बाद तीन महीनों के भीतर ही 30.51 लाख से अधिक परिवारों का पंजीकरण किया गया है। इस योजना के तहत 292 करोड़ रुपये के मुफ्त इलाज को मंजूरी दी गई है। पंजाब भवन में  पत्रकार वार्ता में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि अब तक 1,77,097 लोगों के मुफ्त उपचार की मंजूरी दी गई है। 71,000 दावों का निपटारा कर दिया गया है। सूचीबद्ध अस्पतालों को 60 करोड़ का भुगतान भी किया जा चुका है। अस्पतालों को समय पर भुगतान का आश्वासन देते हुए डॉ. बलबीर ने कहा कि भगवंत मान सरकार ने बकाया भुगतान के लिए एक मजबूत प्रणाली विकसित की है। अस्पतालों को 31 मार्च तक के सभी बकाया 15 अप्रैल तक चुका दिए जाएंगे। CM स्वास्थ्य योजना के तहत 3 महीनों से कम समय में 30.51 लाख से अधिक परिवारों का पंजीकरण मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत बड़े स्तर पर जनस्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर एक नया मानक स्थापित किया है और 8 जनवरी 2026 को योजना की शुरुआत के बाद तीन महीनों के भीतर ही 30.51 लाख से अधिक परिवारों का पंजीकरण किया गया है और 292 करोड़ रुपये के मुफ्त इलाज को मंजूरी देकर पूरे देश में एक उदाहरण प्रस्तुत किया गया है। इस योजना के क्रियान्वयन के पैमाने और गति के बारे में जानकारी देते हुए पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि यह योजना तेजी से पंजाब के लाखों परिवारों को वास्तविक वित्तीय राहत और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रही है। पंजाब भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने बताया, “इस योजना के तहत अब तक 30,51,325 लाभार्थियों का पंजीकरण किया जा चुका है और 1,77,097 मुफ्त उपचारों को मंजूरी दी गई है। इलाज की कुल स्वीकृत लागत 292 करोड़ रुपये है, जिसमें से 267 करोड़ रुपये पहले ही स्वीकृत किए जा चुके हैं। हमने 71,000 दावों का निपटारा कर दिया है और सूचीबद्ध अस्पतालों को 60 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।” इस उपलब्धि के महत्व को रेखांकित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार ने हर मानक पर अन्य राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने कहा, “यह पंजाब के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। चाहे पंजीकरण की बात हो, कवर किए गए परिवारों की संख्या हो या उपचार प्राप्त करने वाले मरीजों की संख्या—हर मामले में पंजाब पहले स्थान पर है।” अस्पतालों को समय पर भुगतान का भरोसा दिलाते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि भगवंत मान सरकार ने बकाया भुगतान के लिए एक मजबूत प्रणाली विकसित की है। उन्होंने बताया कि 31 मार्च तक के सभी बकाया 15 अप्रैल तक चुका दिए जाएंगे, जिससे किसी भी अस्पताल का एक भी रुपया बकाया नहीं रहेगा। उन्होंने 1 अप्रैल से लागू होने वाले नए भुगतान ढांचे की जानकारी देते हुए बताया कि 1 लाख रुपये तक के दावों का निपटारा 15 दिनों के भीतर किया जाएगा, जबकि 1 लाख रुपये से अधिक के बिल एक सप्ताह के भीतर निपटाए जाएंगे। विवादित या सत्यापन की आवश्यकता वाले मामलों में यह प्रक्रिया एक महीने के भीतर पूरी कर ली जाएगी। योजना के वास्तविक प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि यह योजना पहले ही हर आयु वर्ग के लोगों को लाभ पहुंचा रही है। इसके लाभार्थियों में एक वर्ष के बच्चे से लेकर 99 वर्ष की बुजुर्ग महिला तक शामिल हैं, जिन्होंने इस योजना के तहत कैंसर का इलाज करवाया है। उन्होंने बताया कि इस योजना में दिल से जुड़ी 100 से अधिक गंभीर बीमारियों सहित जटिल प्रक्रियाओं को भी कवर किया गया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि योजना के तहत पटियाला मेडिकल कॉलेज में “रप्चर्ड साइनस” जैसी गंभीर स्थिति वाले मरीज का सफल इलाज किया गया है। डॉ. बलबीर सिंह ने आगे कहा कि जब सरकार मुफ्त इलाज सेवाओं पर 292 करोड़ रुपये खर्च कर रही है, तो इसका सीधा अर्थ है कि आम जनता का पैसा बच रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य स्वास्थ्य एजेंसी, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस के सहयोग से पूरे पंजाब में सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की निर्बाध सुविधा सुनिश्चित कर रही है।

IPL 2026 का आगाज आज, SRH के नए कप्तान ईशान किशन की चुनौती या विराट कोहली का धमाका?

बेंगलुरु  पूरी दुनिया के क्रिकेट फैंस के लिए आज से इस खेल का सबसे बड़ा त्योहार शुरू होने जा रहा है. सिर्फ तीन हफ्ते ही भारतीय टीम ने तीसरी बार टी20 वर्ल्ड कप जीतने की खुशी मनाई और अब इंडियन प्रीमियर लीग के 19वें सीजन के लिए तैयार है. एक साथ आईसीसी ट्रॉफी जीतने के बाद अब खिलाड़ी एक दूसरे के खिलाफ खेलते नजर आएंगे. पहली बार 2008 में शुरू होने के बाद से आईपीएल की सभी टीमें भारतीय कप्तानों की अगुवाई में अपने अभियान की शुरुआत करेंगी।  पिछले हफ्ते सनराइजर्स हैदराबाद ने ईशान किशन को नियमित कप्तान पैट कमिंस के लौटने तक टीम की कमान सौंपी गई है. पटना के 27 साल के ईशान किशन के लिए कप्तानी का मौका किसी सपने के सच होने जैसा है. छह महीने पहले तक उनका करियर खुद की बनाई मुश्किलों में फंसा नजर आ रहा था. कुछ अच्छे संयोगों ने उनकी किस्मत बदल दी और उन्हें फिर से सुर्खियों में ला दिया. अब किशन पहले से ज्यादा परिपक्व हैं, लेकिन उनकी मासूमियत और मस्ती बरकरार है।  ईशान किशन के लिए अब असली चुनौती यही है कि वे अपनी शानदार फॉर्म को जारी रखें. जिसने उनकी टीम में वापसी कराई थी. आईपीएल 2025 में उन्होंने एसआरएच के लिए डेब्यू मैच में शतक जड़ा जो सही मायने में उनकी वापसी थी. इसके बाद झारखंड को पहली बार खिताब सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी का खिताब दिलाया. अब वे टीम के कप्तान हैं जो दिखाता है कि वे अब नए नहीं बल्कि सीनियर और लीडर बन चुके हैं. यह उनके लिए खुद को साबित करने का बेहतरीन मौका है।  ईशान किशन और विराट कोहली की टक्कर जहां किशन के लिए आईपीएल 2026 बहुत कुछ दांव पर है, वहीं कोहली के लिए ऐसा नहीं लगता. रोहित शर्मा की तरह यह कोहली का पहला आईपीएल है जब वे सिर्फ एक फॉर्मेट के इंटरनेशनल खिलाड़ी हैं. दोनों ने आईपीएल 2025 के दौरान टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया. कोहली आईपीएल के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी (8,661 रन) हैं और सबसे ज्यादा शतक (8) भी उन्हीं के नाम हैं. 37 साल की उम्र में भी वे जबरदस्त फॉर्म में हैं और हर मैच को पूरी गंभीरता से खेलते हैं।  कोहली की सबसे बड़ी खासियत है उनकी प्रोफेशनलिज्म और टीम के लिए पूरी तरह समर्पित रहना. पिछले कुछ दिनों से वे एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में जमकर प्रैक्टिस कर रहे हैं. शनिवार को आईपीएल 2026 का पहला मैच रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और किशन की एसआरएच के बीच खेला जाएगा. आरसीबी के हेड कोच एंडी फ्लावर ने भी कहा, “मैंने विराट को बहुत करीब से देखा है. वे शानदार फॉर्म में हैं, सुपर फिट हैं. वे बहुत हल्के-फुल्के और भूखे नजर आते हैं. वे हमेशा से ही बहुत भूखे और दृढ़ निश्चयी रहे हैं। 

भोपाल में शुरू हुआ सूखे कचरे से कोयला बनाने का ट्रायल, 220 करोड़ में बना प्लांट

भोपाल भोपाल के आदमपुर छावनी में अब शहर के सूखे कचरे से कोयला बनाया जाएगा। नगर निगम ने पीपीपी मोड में 220 करोड़ रुपये की लागत से टोरिफाइड चारकोल प्लांट स्थापित किया है। इस प्लांट के माध्यम से प्रतिदिन 400 टन सूखे कचरे का निपटारा किया जाएगा और इसका ट्रायल रन भी शुरू कर दिया गया है। टोरिफाइड चारकोल प्लांट का महत्व स्वच्छ भारत मिशन के तहत नगर निगम ने यह कदम शहर में सस्टेनेबल वेस्ट मैनेजमेंट को बढ़ावा देने के लिए उठाया है। आदमपुर छावनी में स्थापित यह प्लांट नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (एनटीपीसी) के सहयोग से संचालित होगा। यहां से निर्मित टोरिफाइड चारकोल का उपयोग एनटीपीसी अपने औद्योगिक उपयोग में करेगी। ट्रायल रन और कचरे का प्रबंधन नगर निगम ने ट्रायल रन के लिए 3 दिनों में कुल 800 टन सूखा कचरा प्लांट को दिया है। पूरे ट्रायल रन के दौरान लगभग 1800 टन सूखे कचरे को प्रोसेस किया जाएगा। यह प्रक्रिया शहर से निकलने वाले सूखे कचरे के निपटान के लक्ष्य को पूरा करने में मदद करेगी। तीन दिन में 800 टन कचरा पहुंचा ट्रायल के शुरुआती तीन दिनों में ही प्लांट में 800 टन सूखा कचरा पहुंचाया गया है। अधिकारियों के अनुसार ट्रायल के दौरान कुल 1800 टन कचरे का उपयोग किया जाएगा हर दिन 400 टन कचरे की प्रोसेसिंग 15 एकड़ में फैले इस प्लांट में प्रतिदिन 400 टन सूखे कचरे को प्रोसेस कर टोरिफाइड चारकोल तैयार किया जाएगा। यह तकनीक कचरा निपटान के साथ-साथ ऊर्जा उत्पादन के लिए भी उपयोगी साबित होगी।  बनारस के बाद दूसरा संयंत्र, जहां बिजली का कोयला बनेगा  बनारस के बाद देश में दूसरे टोरिफाइड चारकोल प्लांट के रूप में आदमपुर खंती में स्थापित संयंत्र का ट्रायल रन शुरू हो गया है। इस प्लांट के जरिए रोज 400 टन सूखे कचरे को प्रोसेस कर चारकोल में बदला जाएगा 2021 में हुआ था अनुबंध 12 अक्टूबर 2021 को अनुबंध होने के करीब पांच साल बाद प्लांट का ट्रायल शुरू हुआ। इस दौरान 2023 में खंती में आग लगने, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति में देरी और तकनीकी प्रक्रियाओं के कारण प्रोजेक्ट तय समय से पीछे चला गया। बनारस में सेग्रीगेशन की कमी से प्लांट प्रभावित, यहां भी यही चुनौती बनारस में एनटीपीसी का करीब 200 टन प्रतिदिन क्षमता वाला टोरिफाइड चारकोल प्लांट 2021-22 में शुरू हुआ था। वहां संचालन के दौरान सबसे बड़ी समस्या साफ और अलग किया हुआ सूखा कचरा लगातार उपलब्ध न होना रही। इसके कारण प्लांट पूरी क्षमता पर नहीं चल पाया। भोपाल में भी ‘सेग्रीगेशन एट सोर्स’ कमजोर है। ऐसे में यदि घर स्तर पर कचरे का सही तरह से अलग नहीं हुआ, तो प्लांट को पर्याप्त गुणवत्ता वाला कचरा मिलना मुश्किल होगा। इससे इसका संचालन प्रभावित हो सकता है। एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि यह प्लांट केवल नए सूखे कचरे को ही प्रोसेस करेगा, जबकि खंती में पहले से जमा करीब 6 लाख टन लिगेसी वेस्ट जस का तस बना हुआ है। 400 टन क्षमता वाला बायो-सीएनजी प्लांट अब तक शुरू नहीं आदमपुर छावनी में प्रस्तावित 400 टन प्रतिदिन क्षमता का बायो-सीएनजी प्लांट भी अब तक शुरू नहीं हो सका है। यह प्लांट, जिसे देश का दूसरा सबसे बड़ा बताया गया था, अगस्त 2023 तक शुरू होना था, लेकिन पर्यावरणीय मंजूरी और तकनीकी अड़चनों के कारण इसमें देरी हो रही है। आयुक्त ने किया निरीक्षण नगर निगम आयुक्त Sanskriti Jain ने प्लांट का दौरा कर कार्यप्रणाली का निरीक्षण किया। उन्होंने इसे भोपाल के लिए गौरव का क्षण बताते हुए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम कदम बताया। एक नजर में प्रोजेक्ट 12 अक्टूबर 2021 को हुआ अनुबंध 220 करोड़ रुपये की लागत 15 एकड़ में स्थापित प्लांट प्रतिदिन 400 टन कचरे की प्रोसेसिंग क्षमता पर्यावरण को मिलेगा फायदा यह प्रोजेक्ट कचरे के वैज्ञानिक निपटान के साथ कोयले के विकल्प के रूप में उपयोगी होगा। इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और भोपाल देश के चुनिंदा शहरों में शामिल हो सकेगा, जहां कचरे का शत-प्रतिशत उपयोग किया जा रहा है। निगम को होगी लागत में बचत 15 एकड़ क्षेत्र में स्थापित इस प्लांट के संचालन से नगर निगम को सूखे कचरे के निपटान में होने वाले खर्च में बड़ी बचत होगी। पीपीपी मोड में लगाए गए इस प्लांट से नए लेगसी तैयार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और शहर का कचरा प्रबंधन अधिक व्यवस्थित तरीके से होगा। बनारस के बाद भोपाल में दूसरा प्लांट एनटीपीसी के अधिकारियों के अनुसार, बनारस के अनुभव से सीख लेकर भोपाल प्लांट में अपग्रेड टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया है। यह मध्यप्रदेश का पहला ऐसा प्रोजेक्ट है जो शहर के कचरे से टोरिफाइड चारकोल का उत्पादन करेगा। नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन ने शुक्रवार को प्लांट का निरीक्षण किया और ट्रायल रन की सफलता की जानकारी ली। इस प्रोजेक्ट से शहर का कचरा प्रबंधन और स्वच्छता दोनों ही स्तरों पर मजबूत होगा। निगम को बचत होगी पीपीपी मोड पर लगभग 220 करोड़ रुपए की लागत से आदमपुर छावनी में 15 एकड़ भूमि पर एनटीपीसी ने यह प्लांट स्थापित किया है। प्लांट के संचालन से निगम को सूखे कचरे के निष्पादन पर व्यय होने वाली राशि की बचत होगी और नया लेगसी तैयार नहीं हो पाएगा। बनारस के बाद भोपाल में ही लगा है प्लांट निगम कमिश्नर जैन को एनटीपीसी के अधिकारियों ने बताया कि बनारस के बाद भोपाल में देश का दूसरा ऐसा शहर है, जिसने टोरिफाइड चारकोल प्लांट स्थापित करने के लिए अनुबंध किया था। बनारस के प्लांट के संचालन के अनुभव एवं कार्य व्यवहार से सीख लेकर भोपाल के संयंत्र में अपग्रेड टेक्नालॉजी का उपयोग किया गया है। यह प्रोजेक्ट मध्यप्रदेश में अपने किस्म का पहला प्रोजेक्ट है। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से नगर निगम हर रोज सूखे कचरे का निपटारा कर सकेगा।

चंडीगढ़ एयर-शो: एयरफोर्स की सूर्यकिरन टीम ने किया डायमंड-Y फॉर्मेशन, पंजाब और हरियाणा के CMs ने भी लिया हिस्सा

चंडीगढ़  चंडीगढ़ में सुखना लेक पर सूर्यकिरण एयर शो का आज दूसरा दिन है। दूसरे दिन शो में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और हरियाणा के सीएम नायब सैनी भी पहुंचे। वहीं दोनों प्रदेशों के गवर्नर भी पहुंचे।   पहले दिन के शो ने पूरे शहर को रोमांच से भर दिया, वहीं इस आयोजन ने बेटियों के सपनों को भी नई दिशा दे दी। आसमान में जांबाज पायलटों के हैरतअंगेज करतब देखकर कई छात्राओं के मन में देशसेवा का जज्बा जगा और उन्होंने पायलट बनने का संकल्प लिया। चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से इस एयर शो में स्कूली बच्चों को भी शामिल होने का मौका दिया गया। चार सरकारी स्कूलों के 50-50 बच्चों को विशेष अनुमति देकर लाया गया। स्नेहालय के बच्चों ने भी इस आयोजन में भाग लिया। छोटे-छोटे बच्चों से लेकर किशोर छात्राओं तक, हर किसी के चेहरे पर उत्साह और गर्व दिखा। स्नेहालय के छोटे बच्चों ने भी पायलट बनने की इच्छा जताई। शिक्षकों ने प्रशासन के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों के भविष्य को नई दिशा देते हैं। इस तरह के कार्यक्रमों से आत्मविश्वास बढ़ता है और बच्चे देश सेवा के लिए प्रेरित होते हैं। चंडीगढ़ में सुखना लेक पर चल रहे एयर शो का आज दूसरा और आखिरी दिन है। करीब एक घंटे चले एयर-शो में एयरफोर्स की टीम सूर्यकिरन ने आसमान में कई करतब दिखाए। टीम ने हवा में डायमंड, Y, तेजस, DNA जैसे फॉर्मेशन बनाकर लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर किया। साथ ही कभी 360 तो कभी 90 डिग्री पर घूमकर हैरतअंगेज कारनामे किए। अंत में टीम के 2 फाइटर जेट ने हवा में धुएं से हार्ट बनाकर दर्शकों को धन्यवाद कहा। इसी के साथ एयर-शो संपन्न हुआ। इसे देखने के लिए हरियाणा के CM नायब सिंह सैनी और पंजाब के CM भगवंत मान भी पहुंचे। उनके साथ चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया और हरियाणा के गवर्नर अशीम घोष मौजूद रहे। एयर-शो संपन्न होने के बाद सुखना लेक को आम जनता के लिए दोपहर 2 बजे खोल दिया जाएगा। इस एयर शो के चलते 26 मार्च से आम जनता के लिए सुखना लेक बंद है। एयर शो के दौरान जैसे ही सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम ने आसमान में कलाबाजियां दिखाईं, पूरा माहौल तालियों और जयकारों से गूंज उठा। इस रोमांच ने खासतौर पर बेटियों के दिलों में एक नई ऊर्जा भर दी। कई छात्राओं ने कहा कि अब वे भी पायलट बनकर देश का नाम रोशन करना चाहती हैं। अब सपना नहीं, लक्ष्य बन गया सरकारी स्कूल की छात्रा तराना ने कहा कि वह पहले से ही डिफेंस में जाना चाहती थी लेकिन इस शो को देखने के बाद उसका हौसला और मजबूत हो गया है। अब पूरी मेहनत से तैयारी करूंगी और पायलट बनकर देश का नाम रोशन करूंगी। इस क्षेत्र में लड़कियों की भागीदारी और बढ़नी चाहिए। डर पर जीत, सपनों को मिली उड़ान छात्रा सादिया ने बताया कि एयर शो ने उसके सपने को और मजबूत बना दिया है। पहले मुझे ऊंचाई से डर लगता था लेकिन आज का शो देखने के बाद मेरा डर खत्म हो गया। अब देश सेवा के अपने लक्ष्य को जरूर पूरा करूंगी। वर्दी पहनने का सपना और मजबूत हुआ भारती ने कहा कि वह भारतीय सेना में जाकर आगे चलकर कर्नल बनना चाहती है। अगर मौका मिला तो वायुसेना में जरूर जाऊंगी। इस एयर शो ने मुझे पायलट बनने के लिए प्रेरित किया है।

पंजाब में बाढ़ के बाद पर्यावरण में बदलाव, वेटलैंड्स में पक्षियों की संख्या घटी, प्रजातियां बढ़ीं

 चंडीगढ़ पंजाब के वेटलैंड्स से इस बार मिले आंकड़े मिश्रित तस्वीर पेश कर रहे हैं। जहां प्रवासी पक्षियों की कुल संख्या में गिरावट दर्ज की गई है, वहीं प्रजातियों (स्पीशीज) की विविधता बढ़ना पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव का संकेत दे रहा है। जनवरी 2026 में हुए बर्ड सेंसस के अनुसार, 2025 में 77,772 पक्षी दर्ज किए गए थे, जो 2026 में घटकर 71,129 रह गए। वहीं प्रजातियों की संख्या 270 से बढ़कर 304 हो गई। यह सेंसस हरिके वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी, नंगल वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी, केशोपुर वेटलैंड्स, रंजीत सागर वेटलैंड्स, रोपड़ वेटलैंड्स और कंजली वेटलैंड्स में एशियन वाटरबर्ड सेंसस प्रोटोकॉल के तहत किया गया। सर्वे के दौरान प्रजाति-वार गिनती, फ्लॉक (झुंड) साइज, हैबिटैट उपयोग और डिस्टर्बेंस फैक्टर्स का भी आकलन किया गया। राज्य के सबसे बड़े हरिके वेटलैंड में पक्षियों की संख्या 57,251 से घटकर 52,707 हो गई, लेकिन प्रजातियों की संख्या 80 से बढ़कर 87 दर्ज की गई। केशोपुर वेटलैंड में भी पक्षियों की संख्या 13,675 से घटकर 10,450 रह गई, जबकि प्रजातियां 75 से बढ़कर 78 हो गईं। रोपड़ वेटलैंड में पक्षियों की संख्या में हुआ इजाफा वहीं रोपड़ वेटलैंड में पक्षियों की संख्या 1,486 से बढ़कर 2,313 और प्रजातियां 44 से 46 हो गईं। नंगल वेटलैंड में भी संख्या 2,411 से बढ़कर 3,189 और प्रजातियां 36 से बढ़कर 44 दर्ज की गईं। कंजली वेटलैंड में भी सकारात्मक रुझान रहा, जहां पक्षियों की संख्या 440 से बढ़कर 623 और प्रजातियां 23 से बढ़कर 29 हो गईं। रंजीत सागर वेटलैंड में पक्षियों की संख्या 2,500 से घटकर 1,867 हो गई, हालांकि प्रजातियों की संख्या 20 से बढ़कर 21 हो गई। मुख्य वन्यजीव संरक्षक बसंता राजकुमार के अनुसार, पिछले वर्ष आई भीषण बाढ़ का असर वेटलैंड्स पर पड़ा, जिससे हरिके, केशोपुर और रंजीत सागर जैसे क्षेत्र अधिक प्रभावित हुए। इसके विपरीत रोपड़, नंगल और कंजली अपेक्षाकृत कम प्रभावित रहे, जिससे वहां पक्षियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई। नई प्रजातियों के आने से मिले सकारात्मक संकेत इसके बावजूद कुछ सकारात्मक संकेत भी सामने आए हैं। केशोपुर में 441 कामन क्रेन (सारस) का बड़ा फ्लॉक दर्ज किया गया, जो पंजाब में सीमित क्षेत्र में ही पाया जाता है। नंगल में 11 ब्लैक-नेक्ड ग्रीब्स का देखा जाना भी खास माना जा रहा है, क्योंकि यह प्रजाति उत्तर-पश्चिम भारत में कम ही रिपोर्ट होती है। पंजाब के वेटलैंड्स वैश्विक स्तर पर भी अहम हैं। हरिके, रोपड़, कंजली, केशोपुर और नंगल को रामसर साइट का दर्जा प्राप्त है। राज्य में 7 प्रतिशत से कम फॉरेस्ट और वाइल्डलाइफ कवर होने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय महत्व के वेटलैंड्स की संख्या के मामले में पंजाब देश में तीसरे स्थान पर है। जानें: कैसे हुआ बर्ड सेंसस 2026     जनवरी 2026 में एशियन वाटरबर्ड सेंसस प्रोटोकॉल के तहत सर्वे     वेटलैंड्स को अलग-अलग सर्वे ब्लॉक्स में बांटा गया     डबल काउंटिंग से बचने के लिए वैज्ञानिक तरीका अपनाया गया     स्पीशीज-वार गिनती, फ्लॉक साइज, हैबिटैट उपयोग और डिस्टर्बेंस का आकलन     पंजाब फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के साथ बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी (बीएनएचएस), वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसईआर), डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया, पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (पीएयू), गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (जीएनडीयू) और पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) की भागीदारी प्रमुख वेटलैंड्स का प्रदर्शन     हरिके: संख्या घटी, स्पीशीज बढ़ीं     केशोपुर: संख्या में गिरावट, स्पीशीज में इजाफा     रोपड़: संख्या और स्पीशीज दोनों बढ़ीं     नंगल: दोनों में मजबूत सुधार     कंजली: सकारात्मक ट्रेंड     रंजीत सागर: संख्या घटी, स्पीशीज में हल्की बढ़ोतरी जानें इस स्थ्डी से क्या अहम संकेत मिले     कुल बर्ड काउंट घटा, लेकिन स्पीशीज डाइवर्सिटी बढ़ी     बाढ़ का असर कई वेटलैंड्स पर साफ दिखा     कुछ वेटलैंड्स में इकोलॉजिकल बैलेंस बेहतर हुआ     रेयर स्पीशीज की मौजूदगी उम्मीद बढ़ाने वाली  

CM साय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कमिश्नर, आईजी और कलेक्टरों के साथ की बड़ी बैठक

पेट्रोलियम पदार्थों और गैस सिलेंडरों की उपलब्धता पर ले रहे हैं जानकारी पेट्रोलियम पदार्थों और गैस की पर्याप्त उपलब्धता, अफवाहों पर न दें ध्यान परिस्थिति का फायदा लेकर आवश्यक वस्तु की कालाबाजारी करने वालों पर हो कड़ी करवाई रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के सभी संभागीय आयुक्तों, आईजी, कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। यह बैठक मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में उपजी वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए बुलाई गई थी, ताकि राज्य में जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित न हो। बता दें कि मुख्यमंत्री ने बैठक में रसोई गैस, पेट्रोल, डीजल और खेती के लिए उर्वरकों की उपलब्धता की बारीकी से जांच की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन चीजों का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित किया जाए ताकि आम जनता को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। दरअसल, बैठक में भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के उपयोग पर भी चर्चा की गई है। मैदानी सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था को लेकर कड़े तेवर दिखाए हैं। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट कहा है कि बाजार में सामानों की कमी को लेकर फैलने वाली किसी भी तरह की अफवाह या भ्रामक सूचना पर तुरंत एक्शन लिया जाए। मुख्यमंत्री ने साफ चेतावनी दी है कि यदि कोई भी व्यापारी या बिचौलिया जमाखोरी या कालाबाजारी के जरिए कृत्रिम संकट पैदा करने की कोशिश करता है, तो उस पर तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाए। गौरतलब है कि इस महत्वपूर्ण बैठक में खाद्य, कृषि, परिवहन और ऊर्जा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ तेल विपणन कंपनियों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। शासन की कोशिश है कि वैश्विक तनाव के बावजूद छत्तीसगढ़ के बाजारों में जरूरी सामानों की आपूर्ति और कीमतें सामान्य बनी रहें।  

पीएम नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम को लेकर पूरे इलाके में 5000 पुलिसकर्मी तैनात

5 स्तरीय सुरक्षा घेरे में जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, हाईटेक निगरानी से चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा पीएम नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम को लेकर पूरे इलाके में 5000 पुलिसकर्मी तैनात  एंटी-ड्रोन, सीसीटीवी और इंटेलिजेंस नेटवर्क से कड़ी निगरानी 100 से अधिक प्रवेश द्वारों पर 200 डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर स्थापित एंटी-सैबोटाज चेक, बम डिस्पोजल स्क्वाड, एंटी-माइंस चेकिंग और स्निफर डॉग्स की तैनाती नोएडा/जेवर नवनिर्मित जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन समारोह और प्रस्तावित जनसभा को लेकर पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर ने अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था लागू की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति के मद्देनजर पूरे क्षेत्र को 5-स्तरीय सुरक्षा घेरे में रखा गया, जिसमें अत्याधुनिक तकनीक, खुफिया समन्वय और व्यापक पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुरूप यह पूरी व्यवस्था पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के नेतृत्व में संचालित की जा रही है।  5-स्तरीय सुरक्षा घेरा, एसपीजी के साथ समन्वय नोएडा के जॉइंट सीपी राजीव नारायण मिश्रा ने बताया कि कार्यक्रम की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे क्षेत्र में मल्टी लेयर सिक्योरिटी आर्किटेक्चर के तहत 5 सुरक्षा रिंग बनाईं गईं। एसपीजी के साथ निरंतर समन्वय रखते हुए सभी एंट्री प्वाइंट्स पर सघन चेकिंग, बैगेज स्क्रीनिंग और पहचान सत्यापन किया जा रहा है। 100 से अधिक प्रवेश द्वारों पर 200 डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर लगाए गए, जबकि महिलाओं के लिए अलग चेकिंग एन्क्लोजर की व्यवस्था की गई। 5000 से अधिक सुरक्षाकर्मी, कई एजेंसियों की तैनाती सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस के करीब 5000 राजपत्रित और अराजपत्रित अधिकारियों की तैनाती की गई। इसके अलावा पीएसी, आरएएफ, एटीएस और सीआईएसएफ की संयुक्त तैनाती कर सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ किया गया। एयरपोर्ट परिसर और आसपास पहले से स्थापित पुलिस चौकियों पर भी अतिरिक्त बल तैनात किया गया। एंटी-ड्रोन, बीडीडीएस और स्निफर डॉग से निगरानी कार्यक्रम स्थल पर एंटी-सैबोटाज चेक, बीडीडीएस (बम डिस्पोजल स्क्वाड), एंटी-माइंस चेकिंग और स्निफर डॉग्स की तैनाती की गई। एंटी-ड्रोन टीमों द्वारा आसमान से निगरानी रखी गई, जबकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई के लिए क्विक रिएक्शन टीम्स को रणनीतिक स्थानों पर तैनात किया गया। इंटेलिजेंस और सोशल मीडिया पर कड़ी नजर आईबी और स्टेट इंटेलिजेंस यूनिट्स के साथ रियल-टाइम कोऑर्डिनेशन स्थापित किया गया है। नोएडा के जॉइंट सीपी राजीव नारायण मिश्रा ने बताया कि सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के जरिए अफवाहों और संभावित खतरों को लेकर नजर रखी गई, जिससे किसी भी स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। सीसीटीवी कंट्रोल रूम और हेल्प डेस्क की व्यवस्था पूरे कार्यक्रम स्थल और एयरपोर्ट परिसर में सीसीटीवी निगरानी के लिए विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। साथ ही आमजन की सुविधा के लिए विभिन्न स्थानों पर पुलिस हेल्प डेस्क भी बनाए गए हैं, जिससे लोगों को त्वरित सहायता मिल सके। आपदा प्रबंधन और चिकित्सा सुविधाएं अलर्ट मोड पर आपात स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ टीमों को अलर्ट पर रखा गया है। फायर ब्रिगेड और फायर टेंडर स्टैंडबाय पर रहे, जबकि मेडिकल डेस्क, एम्बुलेंस और विशेष एम्बुलेंस कॉरिडोर की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई। यही नहीं, एवैक्यूएशन रूट और असेंबली प्वाइंट पहले से तय कर मॉक ड्रिल भी कराई गई है।  ट्रैफिक डायवर्जन और पार्किंग का विशेष प्लान यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए रियल-टाइम ट्रैफिक मॉनिटरिंग के साथ विस्तृत डायवर्जन प्लान लागू किया गया। करीब 15 निर्धारित पार्किंग स्थलों पर 20,000 से अधिक वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था की गई है।  हाईटेक कम्युनिकेशन और कंट्रोल सिस्टम सभी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के लिए डेडिकेटेड वायरलेस नेटवर्क और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है। इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल डैशबोर्ड के जरिए सभी व्यवस्थाओं की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की गई। नदी क्षेत्र में भी सुरक्षा, ड्रोन पर प्रतिबंध यमुना नदी के नजदीक होने के कारण उस क्षेत्र में भी पेट्रोलिंग की भी विशेष व्यवस्था की गई है। साथ ही कार्यक्रम क्षेत्र को नो-फ्लाई जोन घोषित कर एंटी-ड्रोन सिस्टम सक्रिय रखा गया।

मोहन सरकार की पहल: अब वाराणसी में गूंजेगी सम्राट विक्रमादित्य की शौर्य गाथा

मोहन सरकार की पहल:अब वाराणसी में गूंजेगी सम्राट विक्रमादित्य की शौर्य गाथा 3 से 5 अप्रैल तक वाराणसी में होगा “महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य” का भव्य मंचन भोपाल  मध्यप्रदेश में मोहन सरकार भारतीय ज्ञान परंपरा और गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पटल पर स्थापित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। गौरवमयी अभियान विक्रमोत्सव-2026 के अंतर्गत, मोक्षदायिनी नगरी वाराणसी में आगामी 3 से 5 अप्रैल 2026 तक भव्य “महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य” का मंचन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की विशेष रुचि और दूरदर्शी सोच का परिणाम है कि बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन से शुरू हुई यह सांस्कृतिक यात्रा अब बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी पहुँच रही है। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का महाकुंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य केवल एक शासक नहीं, बल्कि भारतीय न्यायप्रियता, वीरता और सुशासन के जीवंत प्रतीक हैं। वाराणसी में होने वाला यह महानाट्य जन-जन को उस वैभवशाली कालखंड से परिचित कराएगा। जब सम्राट विक्रमादित्य ने आज से लगभग 2100 वर्ष पूर्व आक्रांता शकों का समूल नाश कर 'विक्रम संवत' का प्रवर्तन किया था, यह संवत विश्व की प्राचीनतम काल-गणनाओं में से एक है, जो भारतीय विज्ञान और खगोल शास्त्र की श्रेष्ठता को दर्शाता है। अद्वितीय शौर्य और न्याय का चित्रण वाराणसी में होने वाली तीन दिवसीय विक्रमादित्य महानाट्य के माध्यम से सम्राट विक्रमादित्य के 'शकारि' और 'साहसांक' बनने की गाथा को जीवंत किया जाएगा। नाटक में दिखाया जाएगा कि कैसे एक लोक-कल्याणकारी राजा ने अपने राजकोष से धन देकर प्रजा को ऋणमुक्त किया और एक ऐसा साम्राज्य स्थापित किया जहाँ न कोई दरिद्र था और न ही कोई दुखी। साथ ही, सम्राट की 'नवरत्न' परंपरा—जिसमें कालिदास, वराहमिहिर और धन्वंतरि जैसे महान विद्वान शामिल थे—के माध्यम से 'श्रेष्ठ भारत' के निर्माण के संकल्प को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा। दिल्ली के लाल किले पर सफल मंचन और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इसकी सराहना के बाद, वाराणसी का यह मंचन एक नया मील का पत्थर साबित होगा। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विक्रमोत्सव की ऐतिहासिक सफलता उल्लेखनीय है कि उज्जैन में आयोजित 'विक्रमोत्सव 2026' ने डिजिटल आउटरीच में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ की रिपोर्ट के अनुसार, 7 फरवरी से 24 मार्च 2026 के बीच इस आयोजन की डिजिटल रीच 17.72 करोड़ से अधिक रही है। सोशल मीडिया पर #vikramutsav2026 जैसे हैशटैग्स ने वैश्विक स्तर पर ट्रेंड किया, जिससे सिद्ध होता है कि युवा पीढ़ी अपनी जड़ों की ओर लौटने को आतुर है। महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ और मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित यह महानाट्य वाराणसी में न केवल सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मजबूत करेगा, बल्कि राष्ट्रीय एकता के सूत्र को और अधिक सुदृढ़ करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के संकल्पों के अनुरूप यह आयोजन 'विकसित भारत' की राह में 'सांस्कृतिक पुनर्जागरण' का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।