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कश्मीर में ईरान के नाम पर ₹18 करोड़ चंदा जुटाने की कोशिश, सुरक्षा एजेंसियों को आतंकवादियों के फंडिंग का डर

श्रीनगर  कश्मीर घाटी में ईरान के समर्थन में चंदा जुटाने का सिलसिला तेजी से बढ़ा है. आधिकारिक अनुमान के मुताबिक अब तक करीब 17.91 करोड़ रुपये जमा किए जा चुके हैं. इसमें लगभग 85 प्रतिशत योगदान शिया समुदाय के लोगों का बताया जा रहा है. सबसे ज्यादा 9.5 करोड़ रुपये बडगाम जिले से जुटाए गए हैं।  इस बढ़ते चंदे को देखते हुए भारत स्थित ईरानी दूतावास ने एक नया बैंक खाता जारी किया है, जिसमें लोग सीधे पैसे जमा कर सकते हैं. इसके साथ ही यूपीआई आधारित भुगतान की सुविधा भी शुरू की गई है, जिससे आने वाले दिनों में चंदे की राशि और बढ़ने की संभावना है. यह अभियान जकात और सदक़ा जैसे धार्मिक दायित्वों के तहत चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य संघर्ष से प्रभावित ईरानी नागरिकों की मदद करना बताया गया है।  कश्मीर घाटी में ईरान के समर्थन में करोड़ों रुपए का चंदा जुटाया गया है। इससे देश की सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं। आशंका है कि इन पैसों का इस्तेमाल आतंकी फंडिंग में हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, अब तक 17.91 करोड़ रुपए चंदा जुटाया गया है। इनमें से 85% राशि शिया समुदाय ने दान की है। कश्मीर का बड़गाम शिया बहुल इलाका है। यहां से करीब 9.5 करोड़ रुपए जुटाए गए हैं। यह फंडरेजिंग अभियान जकात और सदका के जरिए लिया जा रहा है। इसका उद्देश्य मौजूदा संघर्ष से प्रभावित ईरानी नागरिकों की मदद करना बताया गया है। कश्मीर में ईरान के लिए तेजी से जुट रहा चंदा हालांकि खुफिया एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं. अधिकारियों को आशंका है कि इस चंदे का कुछ हिस्सा गलत हाथों में जा सकता है या उसका इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों के लिए किया जा सकता है. एजेंसियों का मानना है कि लोगों की भावना सच्ची है, लेकिन कई बिचौलिये और संदिग्ध संगठन नकद और अन्य रूपों में चंदा इकट्ठा कर रहे हैं, जो संभव है कि असली जगह तक न पहुंचे।  सूत्रों के अनुसार, लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे सीधे दूतावास में ही दान करें ताकि पारदर्शिता बनी रहे. खुफिया अधिकारियों ने पहले के मामलों का हवाला देते हुए कहा कि कुछ मामलों में चंदा इकट्ठा करने के नाम पर धन का दुरुपयोग हुआ है।  ईरानी दूतावास ने खोला विशेष बैंक अकाउंट इस चंदा को इकट्ठा करने के लिए ईरान के दूतावास ने एक विशेष बैंक अकाउंट खोला है, जिसमें UPI के जरिए भुगतान किया जा सकता है। यह कदम चंदे की प्रक्रिया को सुलभ बनाने के लिए उठाया गया है। अधिकारियों का मानना है कि चंदा जितना इकट्ठा हो रहा है, उसकी राशि और बढ़ने की भी संभावनाएं हैं। साथ ही, प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे दूतावास के आधिकारिक माध्यमों से ही चंदा भेजें ताकि पारदर्शिता बनी रहे। खुफिया एजेंसियों की सक्रियता बढ़ी खुफिया एजेंसियां इस पूरे मामले पर गौर कर रही हैं। उनका कहना है कि चंदा जुटाने के इस अभियान का कुछ हिस्सा गलत हाथों में जा सकता है। अधिकारियों ने इस बात का भी उल्लेख किया है कि लोगों की भावना तो सही हो सकती है, लेकिन बिचौलिये और बिना सत्यापन वाले संगठनों के कारण पारदर्शिता में कमी आ सकती है। धार्मिक नेताओं के आर्थिक संबंधों की जांच जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि कुछ शिया धार्मिक नेता और संगठन ईरान से आर्थिक सहायता प्राप्त कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि बिना पर्याप्त निगरानी के, इस प्रकार के फंड का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों या अन्य उद्देश्यों को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है। अतः सुरक्षा एजेंसियों ने फंड की निगरानी को और मजबूत करने की योजना बनाई है। Kashmiri Muslim: अधिकारियों की चिंता का बढ़ना अधिकारियों की चिंता बढ़ती जा रही है कि यदि इस चंदे का सही तरीके से उपयोग नहीं किया गया, तो इसके दुरुपयोग की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। पहले भी चैरिटी के नाम पर जुटाए गए फंड के दुरुपयोग के मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में मामला गंभीर हो सकता है। सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां अब स्थिति को और गंभीरता से ले रही हैं, ताकि चंदे की राशि का उपयोग सही दिशा में हो सके। समाज में चर्चा का विषय बना मामला यह मामला कश्मीर में बड़ा चर्चा का विषय बन गया है। समाज के विभिन्न वर्गों में इस चंदा जुटाने के अभियान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। खासकर धार्मिक समुदाय इसके प्रति गंभीरता दिखा रहा है। लेकिन अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं कि वे इस मामले को किस प्रकार नियंत्रित करेंगे। ईरानी दूतावास ने जारी किया नया बैंक अकाउंट और UPI सुविधा जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ शिया धार्मिक नेताओं और संगठनों को ईरान से आर्थिक सहायता मिलती है. इन फंड्स के जरिए कई गतिविधियां चलाई जाती हैं. अधिकारियों का कहना है कि बिना निगरानी के इस तरह का फंड फ्लो आगे चलकर राजनीतिक या अन्य गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है।  इसके अलावा, घर-घर जाकर चंदा इकट्ठा करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी भी सामने आई है. नकद, आभूषण और अन्य सामान के रूप में लिए जा रहे दान के सही हिसाब और सुरक्षित उपयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं. खुफिया एजेंसियों का मानना है कि इस तरह की स्थिति में निगरानी और पारदर्शिता बेहद जरूरी है. लोगों से अपील की गई है कि वो सतर्क रहें और सिर्फ विश्वसनीय माध्यमों से ही दान करें। 

ATM से पैसे निकालने के नियम बदलने जा रहे हैं, 1 अप्रैल से होगी महंगी प्रक्रिया

नई दिल्‍ली अगर आप भी ATM कैश निकालते हैं तो अब आपको ज्‍यादा चार्ज देना पड़ सकता है, क्‍योंकि कई बैंक ATM से निकासी के नियम में बदलाव कर रहे हैं, जो 1 अप्रैल से प्रभावी होगा. यह बदलाव डेबिट कार्ड और क्‍यूआर कोड के जरिए एटीएम से कैश निकालने की सीमा, ट्रांजेक्‍शन चार्ज और यूज करने के तरीके में बदलाव किया गया है. आइए जानते हैं अब आपको UPI और डेबिट कार्ड के जरिए एटीएम से कैश निकालने पर क्‍या-क्‍या बदलाव देखना पड़ेगा।  फ्री UPI ट्रांजेक्‍शन लिमिट  HDFC बैंक की ओर से एक खास बदलाव किया गया है, जिसके तहत अब UPI बेस्‍ड ATM से किए गए कैश विड्रॉल को मंथली फ्री ट्रांजेक्‍शन लिमिट में गिना जाएगा. पहले इन ट्रांजेक्‍शन को अलग से गिना जाता था. नए नियम के तहत अब HDFC बैंक के अलावा, अन्‍य एटीएम से 5 ट्रांजेक्‍शन ही मुफ्त होगा. महानगरों में अन्‍य बैंकों के ATM पर 3 ट्रांजेक्‍शन फ्री होगा. अन्‍य शहरों में 5 ट्रांजेक्‍शन फ्री होगा।  मुफ्त कोटा समाप्‍त होता है और आप कार्ड या यूपीाआई किसी से भी एटीएम के जरिए पैसे निकालते हैं तो आकपेा हर लेनदेन पर 23 रुपये का चार्ज लागू होगा. इसमें टैक्‍स को शामिल नहीं किया गया है. इसके अलावा, एचडीएफसी बैंक ने एक समय नियम लागू किया है जिसके अनुसार शाम 7:30 बजे के बाद किए गए एटीएम लेनदेन को अगले दिन के लेनदेन के रूप में गिना जाएगा. महीने के अंतिम दिन, ऐसे लेनदेन अगले महीने के कोटे में शामिल कर लिए जाएंगे।  डेब‍िट कार्ड पर क्‍या बदला नियम पंजाब नेशनल बैंक PNB ने कुछ डेबिट कार्डों के लिए डेली विड्रॉल लिमिट में बदलाव किया है. 1 अप्रैल से, चुनिंदा कार्डों के लिए मैक्सिमम डेली विड्रॉल लिमिट ₹1 लाख से घटाकर ₹50,000 कर दी गई है. कार्ड की कैटेगरी के आधार पर पैसे निकालने की सीमा ₹50,000 से ₹75,000 के बीच हो सकती है।  लेनदेन नियमों का अपडेट बंधन बैंक के एटीएम पर ग्राहकों को प्रति माह 5 निःशुल्क वित्तीय लेनदेन करने की अनुमति होगी. अन्य बैंकों के एटीएम पर, महानगरों में 3 निःशुल्क लेनदेन और बाकी शहरों में 5 निःशुल्क लेनदेन की अनुमति होगी. पहले की व्‍यवस्‍थाओं के विपरीत अन्‍य बैंकों के एटीएम पर फाइनेंशियल और नॉन-फाइनेंशियल दोनों तरह के ट्रांजेक्‍शन (बैलेंस की भी जानकारी लेना) फ्री लिमिट गिने जाएंगे।  लिमिट पार होने के बाद क्‍या होगा?      वित्तीय लेनदेन: ₹23 प्रति लेनदेन     गैर-वित्तीय लेनदेन: ₹10 प्रति लेनदेन     अगर अकाउंट में पर्याप्‍त पैसा नहीं है और लेनदेन विफल होने पर ₹25 का जुर्माना लगेगा.  व्यक्तिगत बैंकों में बदलाव के अलावा, पूरे बैंकिंग सिस्टम में एटीएम शुल्क में व्यापक संशोधन किया गया है.     फ्री लिमिट के बाद लगने वाला शुल्क ₹21 से बढ़कर ₹23 प्रति लेनदेन हो गया है.      वित्तीय लेनदेन: ₹19     गैर-वित्तीय लेनदेन: ₹7 कस्‍टमर्स पर क्‍या होगा असर ये बदलाव देखने में मामूली लग सकते हैं, लेकिन इनका असर नियमित बैंकिंग आदतों पर पड़ सकता है. अगर आप बार-बार पैसे निकालते हैं तो आपको ज्‍यादा चार्ज चुकाना पड़ सकता है. शुल्क से बचने के लिए ग्राहकों को उपयोग पर अधिक बारीकी से नज़र रखने की आवश्यकता हो सकती है।  डिजिटल भुगतान की ओर बदलाव बैंक ग्राहकों को यूपीआई और नेट बैंकिंग जैसे डिजिटल विकल्पों की ओर प्रोत्साहित कर रहे हैं. एटीएम के बढ़ते उपयोग शुल्क और लेन-देन की गिनती में विस्तार के कारण, कई उपयोगकर्ता एटीएम जाना कम कर सकते हैं और डिजिटल माध्यमों पर अधिक निर्भर हो सकते हैं. भारत में वर्तमान में 2.5 लाख से अधिक एटीएम हैं, लेकिन डिजिटल भुगतान के बढ़ने के साथ-साथ उपयोग के रुझान में धीरे-धीरे बदलाव आ रहा है। 

28 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी करेंगे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन, जानें 10 महत्वपूर्ण बातें

 नोएडा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मार्च 2026 को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) का उद्घाटन करेंगे. यूपी सरकार ने कहा है कि जेवर में बना नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए गेम चेंजर साबित होगा. यह एयरपोर्ट कृषि, उद्योग, लॉजिस्टिक्स और रोजगार के क्षेत्र में व्यापक असर डालेगा. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन काल यानी 28 मार्च को हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के इस सबसे बड़े हवाई अड्डे का उद्घाटन करेंगे। इससे न केवल हवाई सफर करने वालों को फायदा होगा बल्कि दिल्ली-एनसीआर के रियल एस्टेट सेक्टर को भी बूस्ट मिलेगा। जेवर हवाई अड्डा एनसीआर के विकास में बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके शुरू होने से यहां के इलाकों में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। अभी तक ज्यादातर लोग दिल्ली उसके आसपास रहना ज्यादा पसंद करते थे। इस हवाई अड्डे के शुरू होने के बाद यमुना एक्सप्रेसवे, ग्रेटर नोएडा और जेवर जैसे इलाकों में रहने का ट्रेंड बढ़ सकता है। यहां के इलाकों में सड़कें बेहतर की जा रही, मेट्रो और रैपिड रेल जैसी सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं, जिससे यहां रहना और ज्यादा आसान हो जाएगा। जेवर एयरपोर्ट शुरू में (फेज-1) प्रति वर्ष 1.2 करोड़ यात्रियों (12 मिलियन पैसेंजर्स) को हैंडल करने की क्षमता रखता है. पूरी तरह विकसित होने के बाद इसकी क्षमता बढ़ाकर 7 करोड़ यात्रियों प्रति वर्ष (70 मिलियन पैसेंजर्स) तक की जा सकेगी।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत विकसित यह एयरपोर्ट राज्य की भौगोलिक सीमाओं को तोड़कर वैश्विक बाजार से जोड़ेगा. इससे कृषि उत्पादों, छोटे उद्योगों (MSMEs), पर्यटन और अन्य क्षेत्रों को सीधा फायदा होगा. जेवर एयरपोर्ट के उद्घाटन समारोह की तैयारियां अंतिम चरण में हैं. सुरक्षा, ट्रैफिक मैनेजमेंट, पार्किंग, मेडिकल सुविधाएं और सीसीटीवी निगरानी को मजबूत किया गया है. वीवीआईपी मूवमेंट और आम लोगों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।  इन्वेस्ट करने वालों को एक्सपर्ट की सलाह एक्सपर्ट की मानना है कि बेशक नोएडा एयरपोर्ट शुरू हो गया है और इसके आसपास कई बड़े हाउसिंग और बिजनेस प्रोजेक्ट्स शुरू हो रहे हैं या शुरू हो चुके हैं लेकिन फिर भी आपको इन्वेस्ट के मामले में सतर्क रहना चाहिए। कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले उसकी कानूनी स्थिति की जांच जरूर करें। यह जरूर चेक करें कि वो प्रोजेक्ट RERA एक्ट 2016 के तहत रजिस्टर् है या नहीं। केवल लोकेशन के आधार पर फैसला न लें बल्कि वहां हो रहे वास्तविक विकास और सुविधाओं को भी समझें। ताज से लेकर कुंभ तक… सफर होगा आसान ये हवाई अड्डा एक बड़े ‘गेटवे’ यानी प्रवेश द्वार का काम करेगा. भारत अपनी संस्कृति और अध्यात्म के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है. अब तक विदेशी या घरेलू पर्यटकों को आगरा का ताजमहल देखने, मथुरा और वृंदावन के दर्शन करने, प्रयागराज के कुंभ मेले में जाने या फिर श्रावस्ती और कुशीनगर जैसे प्रमुख बौद्ध स्थलों तक पहुंचने के लिए काफी हद तक दिल्ली एयरपोर्ट पर निर्भर रहना पड़ता था. जेवर एयरपोर्ट के शुरू होने से इन सभी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक स्थलों की दूरी काफी कम हो जाएगी. जिससे पर्यटन को एक नई रफ्तार मिलेगी और यात्रियों के समय और पैसे दोनों की बचत होगी।  यूपी की इकॉनमी के लिए गेम चेंजर है जेवर एयरपोर्ट मनोज गौड़, सीएमडी, गौड़ ग्रुप के अनुसार, जेवर एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश के पूरे इकॉनोमिक सिस्टम के लिए एक बड़ा कदम है। इसके शुरू होने से इस पूरी बेल्ट पर मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और सर्विस सेक्टर से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स शुरू होंगे। कनेक्टिविटी और इंडस्ट्री बढ़ने से सीधे तौर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। जाहिर है यहां जॉब करने वालों को किफायती घरों की जरूरत होगी जिससे हाउसिंग की डिमांड बढ़ेगी। यह एयरपोर्ट सिर्फ नोएडा या ग्रेटर नोएडा ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए एक मजबूत 'गेटवे' का काम करेगा।   आइए जानते हैं जेवर एयरपोर्ट से जुड़ी 10 खास बातें… – नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट भारत को वैश्विक एविएशन हब बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. दिल्ली-एनसीआर के लिए दूसरा बड़ा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बनकर यह क्षेत्र की कनेक्टिविटी को और मजबूत करेगा।  – यह एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर का दूसरा बड़ा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट होगा, जो दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर बढ़ते बोझ को कम करेगा. एक रनवे के साथ शुरू होने वाला यह एयरपोर्ट 3900 मीटर लंबा रनवे, आधुनिक टर्मिनल और कार्गो सुविधाओं से लैस है।  – शुरू में (फेज-1) यह एयरपोर्ट सालाना 1.2 करोड़ (12 मिलियन) यात्रियों को हैंडल करेगा. पूरा विकसित होने पर क्षमता 7 करोड़ यात्रियों और लगभग 10 लाख टन कार्गो तक पहुंच जाएगी।  – 3900 मीटर लंबा रनवे, आधुनिक नेविगेशन सिस्टम, ऑल-वेदर ऑपरेशन और 40 एकड़ का एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर) फेसिलिटी है. कार्गो टर्मिनल 2.5 लाख टन से शुरू होकर 18 लाख टन तक बढ़ाया जा सकेगा। – एयरपोर्ट को नेट-जीरो एमिशन बनाने का लक्ष्य है. भारतीय विरासत से प्रेरित डिजाइन (घाट और हवेली जैसी शैली) में बनाया गया है।  – यमुना एक्सप्रेसवे पर स्थित यह एयरपोर्ट सड़क, रेल, मेट्रो और अन्य परिवहन से जुड़ेगा. इससे यात्रियों और कार्गो की सुविधा बढ़ेगी।  – फल, सब्जी, डेयरी उत्पाद और फूल जैसे जल्द खराब होने वाले सामान आसानी से अंतरराष्ट्रीय बाजार पहुंचेंगे. इससे किसानों की आय बढ़ेगी और 'फार्म टू ग्लोबल मार्केट' मॉडल मजबूत होगा।  – राज्य के करीब 1 करोड़ छोटे-मध्यम उद्योगों को वैश्विक बाजार से जोड़ने में मदद मिलेगी. निर्यात बढ़ेगा, लागत घटेगी और प्रतिस्पर्धा क्षमता मजबूत होगी।  – एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक्स, होटल, कृषि और सप्लाई चेन सेक्टर में लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे. आसपास के इलाकों में औद्योगिक विकास तेज होगा।  – फेज-1 पर करीब 11,200 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. यह पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित किया जा रहा है।  वास्तुकला में दिखेगी यूपी, उत्तराखंड और राजस्थान की झलक अक्सर एयरपोर्ट का मतलब कांच और कंक्रीट की बड़ी और नीरस इमारतें माना जाता है. लेकिन, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के डिजाइन को बेहद खास तरीके से तैयार किया गया है. अधिकारियों के मुताबिक, इसकी वास्तुकला में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की साफ झलक देखने को मिलेगी।  टर्मिनल की छत को एक सफेद रंग के पारदर्शी कैनोपी (छतरी) का आकार दिया गया है, जो गंगा, यमुना और हिंडन नदियों की उठती-गिरती लहरों का अहसास … Read more

2606 लोकेशन पर प्रॉपर्टी गाइडलाइन दर में वृद्धि, प्रॉपर्टी के दाम में होगी भारी बढ़ोतरी

भोपाल  वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जिले की नई कलेक्टर गाइडलाइन प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। गुरुवार को केंद्रीय मूल्यांकन समिति की भोपाल में हुई बैठक में इंदौर जिले की 2606 लोकेशन पर गाइडलाइन दर बढ़ाने के प्रस्ताव पर सहमति बनी है। अब इसे शासन की अंतिम मंजूरी के लिए भेजा गया है। 90 लोकेशन पर गाइडलाइन दर बढ़ाने के प्रस्ताव को स्वीकृति इससे पहले जिला मूल्यांकन समिति की बैठक में 267 दावे-आपत्तियों का निराकरण किया गया। इनमें से 11 मामले नियमों में बदलाव से जुड़े होने के कारण शासन स्तर पर भेजे गए हैं। आपत्तियों के परीक्षण के बाद 90 लोकेशन पर गाइडलाइन(Property Guideline) दर बढ़ाने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। इनमें मुख्य रूप से कृषि भूमि की कीमतों में वृद्धि और विकसित हो रही कॉलोनियों के अनुरूप दर तय करने की मांग शामिल रही। 270 नई कॉलोनियां गाइडलाइन में शामिल इस बार गाइडलाइन में नई कॉलोनियों को बड़े पैमाने पर शामिल किया गया है। पहले 198 कॉलोनियां जोड़ी गई थीं, जबकि दावे-आपत्तियों के बाद 72 और कॉलोनियों को शामिल किया गया। इस तरह 270 नई कॉलोनियां गाइडलाइन में हैं, जिससे इन क्षेत्रों में रजिस्ट्री प्रक्रिया और पारदर्शी होगी। 46 फीसदी क्षेत्रों में गाइडलाइन बढ़ेगी मालूम हो, जिले में वर्तमान में 4840 लोकेशन पर संपत्तियों का पंजीयन होता है। इनमें से 2606 लोकेशन पर दरें बढ़ाने का प्रस्ताव है, यानी करीब 46 फीसदी क्षेत्रों में गाइडलाइन(Property Guideline) बढ़ेगी। प्रस्ताव के अनुसार, दरों में 10 से लेकर 300 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। इनमें सबसे ज्यादा 1553 लोकेशन पर 21 से 51 प्रतिशत तक वृद्धि प्रस्तावित है। करीब 115 लोकेशन पर गाइडलाइन दरों में 100 प्रतिशत से ज्यादा तो कुछ क्षेत्रों में यह वृद्धि 300 प्रतिशत तक पहुंच सकती है । क्या है कलेक्टर गाइडलाइन ? कलेक्टर गाइडलाइन वह न्यूनतम दर होती है, जिस पर सरकार जमीन या मकान की कीमत तय करती है। इससे कम कीमत पर रजिस्ट्री नहीं हो सकती। हर साल क्यों बढ़ती हैं दरें? सरकार बाजार कीमतों के हिसाब से हर साल रिवीजन करती है, ताकि स्टाम्प ड्यूटी का सही मूल्य मिल सके और अंडरवैल्यू रजिस्ट्री रोकी जा सके। इस बार बढ़ोतरी ज्यादा क्यों?     कई इलाकों में लंबे समय से रेट नहीं बढ़े थे     रियल एस्टेट में तेजी और डेवलपमेंट (नई सड़कें, प्रोजेक्ट)     शहरी इलाकों में डिमांड बढ़ना     आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?     जमीन/मकान खरीदना महंगा होगा     स्टाम्प और रजिस्ट्री शुल्क बढ़ जाएगा     पुराने एग्रीमेंट वाले खरीदारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।  

MP में बिजली की दरों में बढ़ोतरी: 1 अप्रैल से 150 यूनिट के बाद होगा बिल महंगा

 भोपाल मध्य प्रदेश की जनता को महंगाई का एक और झटका लगने जा रहा है. रसोई गैस और अन्य चीजों की बढ़ती कीमतों के बीच अब बिजली दरों में भी बढ़ोतरी कर दी गई है. मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नया टैरिफ जारी किया है, जिसके तहत बिजली दरों में करीब 4.80 प्रतिशत की वृद्धि की गई है. ये नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी. इसका असर प्रदेश के करीब डेढ़ करोड़ घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।  हालांकि आयोग ने निम्न दाब (एलवी-1) और ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देते हुए उनकी दरों में कोई बदलाव नहीं किया है. इसके अलावा, 100 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं को पहले की तरह रियायत मिलती रहेगी. लेकिन 150 यूनिट से ज्यादा खपत करने वालों पर इस बढ़ोतरी का असर पड़ेगा।  नई व्यवस्था के तहत 151 यूनिट का स्लैब पार करते ही प्रति यूनिट दर के साथ-साथ फिक्स्ड चार्ज भी बढ़ जाएगा. फिक्स्ड चार्ज को 28 रुपए से बढ़ाकर 30 रुपए प्रति 0.1 किलोवॉट कर दिया गया है, जिससे उपभोक्ताओं का कुल बिल बढ़ना तय है।  अगर अलग-अलग खपत के हिसाब से देखें तो 150 यूनिट से ज्यादा खपत पर बिजली बिल करीब 1017 रुपए तक पहुंच सकता है, जो लगभग 4.94 प्रतिशत की वृद्धि है. वहीं 200 यूनिट से ज्यादा खपत पर बिल करीब 1696 रुपए तक हो सकता है, यानी करीब 5.30 प्रतिशत बढ़ोतरी. इसी तरह 250 यूनिट पर बिल लगभग 2183 रुपए (5.10 प्रतिशत वृद्धि), 300 यूनिट पर 2668 रुपए (4.98 प्रतिशत वृद्धि) और 400 यूनिट से अधिक खपत पर बिल करीब 3689 रुपए (4.82 प्रतिशत ज्यादा) तक पहुंच सकता है।  जानकारों का मानना है कि इस बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर गर्मियों के मौसम में होगा, जब एसी, कूलर और अन्य बिजली उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ जाता है. ऐसे में ज्यादा खपत करने वाले उपभोक्ताओं को भारी बिल का सामना करना पड़ सकता है।  इसके अलावा, नई दरों में टाइम ऑफ डे (TOD) व्यवस्था को भी प्रभावी किया गया है. इसके तहत शाम 6 बजे से रात 10 बजे के बीच बिजली की खपत पर ज्यादा फीस देनी होगी. यानी पीक ऑवर्स में बिजली का इस्तेमाल महंगा पड़ेगा, जबकि दिन के समय बिजली इस्तेमाल करने पर कम खर्च आएगा. अनुमान है कि पीक टाइम में बिल 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।  बिजली कंपनियों ने आयोग के सामने 10.19 प्रतिशत टैरिफ बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था. कंपनियों का तर्क था कि पिछले वित्तीय वर्ष में उन्हें करीब 6,044 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है, जिसकी भरपाई के लिए दरें बढ़ाना जरूरी है. हालांकि आयोग ने इस प्रस्ताव को कम करते हुए 4.80 प्रतिशत तक ही वृद्धि को मंजूरी दी. कुल मिलाकर, नई दरों के लागू होने के बाद मध्य प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को अपने खर्च में बढ़ोतरी के लिए तैयार रहना होगा। 

एमपी में दो बच्चों का नियम खत्म, अब तीन या अधिक संतान वालों को भी मिलेगी सरकारी नौकरी

भोपाल  मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी से जुड़ा करीब 24 साल पुराना दो बच्चों वाला नियम अब खत्म होने की तैयारी में है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिसे मुख्यमंत्री से सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। अब इसे जल्द ही कैबिनेट में पेश किया जाएगा। अगर कैबिनेट से मंजूरी मिलती है, तो तीन या उससे अधिक बच्चों वाले लोगों को सरकारी नौकरी से न तो बाहर किया जाएगा और न ही नौकरी पाने से रोका जाएगा। अभी तक इस नियम के कारण कई कर्मचारी और उम्मीदवार प्रभावित हो रहे थे।  क्या था पुराना नियम? साल 2001 में तत्कालीन सरकार ने सिविल सेवा नियमों में बदलाव कर यह प्रावधान लागू किया था। इसके तहत दो से ज्यादा बच्चे होने पर सरकारी नौकरी में नियुक्ति या नौकरी जारी रखने में दिक्कत आती थी। यानी उनको अपात्र माना जाता था।  इस बदलाव का सबसे ज्यादा फायदा शिक्षा विभाग को मिलेगा। जानकारी के अनुसार, बड़ी संख्या में शिक्षक ऐसे हैं जो इस नियम से प्रभावित थे। नया नियम लागू होने के बाद उनकी नौकरी सुरक्षित हो जाएगी। इसके अलावा स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग में भी हजारों मामले लंबे समय से लंबित हैं, जिन्हें अब सुलझाया जा सकेगा। पुराने मामलों पर भी होगा फैसला सरकार उन कर्मचारियों को भी राहत देने पर विचार कर रही है, जिन्हें तीसरी संतान के कारण नौकरी से हटाया गया था या जिनके मामले कोर्ट में चल रहे हैं। कैबिनेट इन सभी मामलों पर अंतिम निर्णय ले सकती है। बता दें पिछले कुछ वर्षों में इस नियम को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता के खिलाफ बताया गया और बदलते सामाजिक हालात के हिसाब से इसे पुराना माना गया। इसी बीच जनसंख्या संतुलन को लेकर भी चर्चा तेज हुई, जिसके बाद सरकार ने इस पर पुनर्विचार शुरू किया।  दूसरे राज्यों में पहले ही बदलाव मध्य प्रदेश से पहले राजस्थान और छत्तीसगढ़ इस नियम को खत्म कर चुके हैं। वहां तीन या उससे अधिक बच्चों वाले लोग बिना किसी रोक-टोक के सरकारी सेवा में बने रह सकते हैं। सरकार इस प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट में रख सकती है, जिसके बाद इस नियम को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया जाएगा।

PM Kisan की 23वीं किस्त से पहले किसानों के लिए जरूरी कदम, जानें क्या करें

भोपाल  देश के करोड़ों किसानों के लिए बड़ी खबर है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 23वीं किस्त जल्द जारी होने वाली है, लेकिन उससे पहले कुछ जरूरी काम पूरे करना अनिवार्य कर दिया गया है। अगर आपने ये काम समय पर नहीं किए, तो आपके खाते में आने वाले ₹2000 अटक सकते हैं। क्या है योजना? केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल ₹6000 की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि तीन किस्तों (₹2000-₹2000) में सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है। 23वीं किस्त से पहले ये काम जरूरी अगर आप अगली किस्त चाहते हैं, तो तुरंत ये काम निपटा लें:  e-KYC पूरा करें – बिना eKYC के भुगतान रोका जा सकता है, आधार-बैंक लिंकिंग – आपका बैंक खाता आधार से लिंक होना चाहिए ,भूमि सत्यापन (Land Verification) – जमीन के रिकॉर्ड अपडेट रहें ABPS एक्टिव रखें – आधार आधारित पेमेंट सिस्टम चालू होना जरूरी  कब आएगी 23वीं किस्त? सरकारी पैटर्न के अनुसार, अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच 23वीं किस्त जारी होने की संभावना है। अब तक कितना मिला फायदा? 2019 से अब तक 22 किस्तें  जारी, किसानों को ₹4.27 लाख करोड़ से ज्यादा ट्रांसफर ,9 करोड़ किसान हर साल लाभ ले रहे.. किसानों के लिए क्यों जरूरी है ये योजना? यह योजना सिर्फ पैसे देने तक सीमित नहीं है, बल्कि: बीज और खाद खरीदने में मदद , कर्ज पर निर्भरता कम, खेती में निवेश बढ़ा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत.. नई सुविधा: किसान ई-मित्र सरकार ने किसानों की मदद के लिए AI आधारित ‘किसान ई-मित्र’ चैटबॉट भी शुरू किया है, जो 24×7 सवालों के जवाब देता है। कैसे चेक करें अपना स्टेटस? PM Kisan पोर्टल के “Farmers Corner” में जाएं या नजदीकी CSC सेंटर पर जानकारी लें.. निष्कर्ष अगर आप चाहते हैं कि अगली किस्त बिना रुकावट सीधे आपके खाते में आए, तो अभी से जरूरी अपडेट पूरे कर लें। एक छोटी सी गलती आपके ₹2000 रोक सकती है।

33/11 केवी उपकेन्द्र निर्माण की रखी गई आधारशिला, 12 गांव होंगे लाभान्वित

रायपुर उप मुख्यमंत्री ने ग्राम जैतपुरी में 5.20 लाख रुपए के सीसी रोड निर्माण की घोषणा की रामनवमी के शुभ अवसर पर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कबीरधाम जिले के ग्राम जैतपुरी में विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ी सौगात देते हुए 2 करोड़ 98 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाले 33/11 के.व्ही., 5 एम.वी.ए. क्षमता के नवीन विद्युत उपकेन्द्र का विधिवत भूमि पूजन कर निर्माण कार्य का शुभारंभ किया। इस उपकेन्द्र के स्थापित होने से जैतपुरी सहित आसपास के 12 गांवों के करीब 1 हजार 750 से अधिक उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा और उन्हें गुणवत्तापूर्ण, नियमित एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध हो सकेगी। वर्षों से लो वोल्टेज, बार-बार बिजली बाधित होने और लंबी फीडर लाइन की समस्या से जूझ रहे क्षेत्रवासियों को राहत मिलेगी। इस दौरान उप मुख्यमंत्री ने ग्राम जैतपुरी में 5 लाख 20 हजार रुपए के सीसी रोड निर्माण की घोषणा की।  उप मुख्यमंत्री ने ग्राम जैतपुरी में 5.20 लाख रुपए के सीसी रोड निर्माण की घोषणा की           उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार गांव और वनांचल क्षेत्रों के विकास पर भी पूरा ध्यान दे रही है। उन्होंने बताया कि यह नया बिजली उपकेन्द्र बनने से क्षेत्र में बिजली की समस्या दूर होगी और विकास तेजी से बढ़ेगा। अब लोगों को लो-वोल्टेज और बार-बार बिजली जाने की परेशानी से राहत मिलेगी। इस परियोजना के पूरा होने के बाद बिजली व्यवस्था स्थायी रूप से बेहतर हो जाएगी।          उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने बताया कि इस उपकेन्द्र में 5 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर स्थापित किया जाएगा तथा यहां से 3 अलग-अलग 11 केवी फीडर निकाले जाएंगे, जिससे आसपास के 12 गांव सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। इस व्यवस्था से क्षेत्र में वोल्टेज की समस्या दूर होगी, जिससे किसानों को विशेष रूप से राहत मिलेगी और कृषि कार्य के लिए निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। इस दौरान उन्होंने  प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास निर्माण की जानकारी दी। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष  ईश्वरी साहू, पुलिस जवाबदेही प्राधिकरण सदस्य  भगत पटेल,  नितेश अग्रवाल, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  कैलाश चंद्रवंशी, जनपद उपाध्यक्ष  नंद वास,  लोकचंद साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे। 2.98 करोड़ रुपए की लागत से होगा निर्माण, विकास को मिलेगी नई दिशा         विकासखंड कवर्धा के ग्राम जैतपुरी में नवीन 33/11 केवी विद्युत उपकेन्द्र का निर्माण कार्य प्रारंभ होने से क्षेत्र के समग्र विकास को नई गति मिलेगी और क्षेत्रवासियों के लिए सुविधाओं का विस्तार करेगी। ग्राम जैतपुरी में लगभग 2 करोड़ 98 लाख रुपए की लागत से उपकेन्द्र का निर्माण किया जाएगा। इसमें 5 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर स्थापित किया जाएगा, जिससे क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति की क्षमता बढ़ेगी। 12 गांवों को मिलेगा सीधा लाभ            ग्राम जैतपुरी में स्थापित होने वाला यह नया विद्युत सबस्टेशन क्षेत्र की बिजली व्यवस्था को मजबूत करेगा। इसके माध्यम से जैतपुरी, सिंघनपुरी, लालपुर, तारो, खैरबना, धनडबरा, बटालियन, मंडलाकोना, हाथीडोब सहित कुल 12 गांवों को सीधा लाभ मिलेगा, जहां लंबे समय से लो वोल्टेज और अनियमित बिजली की समस्या बनी हुई थी। इस उपकेन्द्र से उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा और क्षेत्र में नियमित, गुणवत्तापूर्ण एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। 1750 से अधिक उपभोक्ताओं को मिलेगी बेहतर बिजली          नए सब स्टेशन के निर्माण से लगभग 1750 से अधिक उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण और निर्बाध विद्युत आपूर्ति मिल सकेगी। वर्तमान में 8 गांवों की बिजली आपूर्ति जोरताल सबस्टेशन से संचालित 11 केवी खैरबना फीडर के माध्यम से होती है। खैरबना फीडर की लंबाई लगभग 40 किलोमीटर है, जिस पर पीक सीजन में 120 एम्पियर तक लोड रहता है। इसके कारण अंतिम छोर के गांवों में लो वोल्टेज की समस्या बनी रहती है, जिससे विशेषकर कृषि पंप उपभोक्ताओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। साथ ही, लंबी लाइन होने के कारण बार-बार फाल्ट और बिजली बाधित होने की समस्या भी सामने आती है। इस समस्या से अब निजात मिलेगा और गांव के लोगों को राहत मिलेगी।

जौरा सब स्टेशन में उच्च क्षमता का पॉवर ट्रांसफार्मर स्थापित, ऊर्जा मंत्री तोमर का बयान

जौरा सब स्टेशन में उच्च क्षमता का पॉवर ट्रांसफार्मर स्थापित : ऊर्जा मंत्री तोमर जौरा सब स्टेशन में उच्च क्षमता का पॉवर ट्रांसफार्मर स्थापित, ऊर्जा मंत्री तोमर का बयान जौरा सब स्टेशन में अब उच्च क्षमता का पॉवर ट्रांसफार्मर, ऊर्जा मंत्री तोमर ने की पुष्टि भोपाल  ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी द्वारा मुरैना जिले की विद्युत व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ एवं विश्वसनीय बनाने के लिए 132 केवी जौरा सब स्टेशन की क्षमता में वृद्धि की गई है। उन्होंने बताया कि सब स्टेशन में पूर्व स्थापित 20 एमवीए क्षमता के पॉवर ट्रांसफार्मर के स्थान पर 50 एमवीए क्षमता का नया पॉवर ट्रांसफार्मर सफलतापूर्वक स्थापित कर ऊर्जीकृत किया गया है। इससे मुरैना जिले की पारेषण प्रणाली की विश्वसनीयता बढ़ेगी तथा जौरा क्षेत्र के हजारों उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति उचित वोल्टेज पर प्राप्त हो सकेगी। मंत्री तोमर ने इस उपलब्धि पर एमपी ट्रांसको के कार्मिकों को बधाई देते हुए कहा कि इससे क्षेत्र के औद्योगिक, कृषि एवं घरेलू उपभोक्ताओं को विशेष लाभ मिलेगा और भविष्य में बढ़ती विद्युत मांग को भी आसानी से पूरा किया जा सकेगा। इन क्षेत्रों को होगा लाभ एमपी ट्रांसको के अधीक्षण अभियंता राजीव तोतला ने जानकारी दी कि जौरा सब स्टेशन में नए पॉवर ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने से कुम्हेरी, जौरा, सुमावली, सांकरा, सिटी जौरा, चिनौनी, नवोदय तथा बगचिनी सहित आसपास के क्षेत्रों के लगभग 18 हजार विद्युत उपभोक्ता लाभान्वित होंगे। इनमें औद्योगिक, कृषि एवं घरेलू श्रेणी के उपभोक्ता शामिल हैं। जिले की ट्रांसफार्मेशन क्षमता में वृद्धि अधीक्षण अभियंता राजीव ने जानकारी दी कि 20 एमवीए के स्थान पर 50 एमवीए क्षमता का पॉवर ट्रांसफार्मर स्थापित होने से जौरा सब स्टेशन की कुल क्षमता बढ़कर 113 एमवीए हो गई है। एमपी ट्रांसको मुरैना जिले में 220 केवी के 2 सब स्टेशन (मुरैना एवं सबलगढ़) तथा 132 केवी के 7 सब स्टेशन (मुरैना, बामोर, अम्बाह, बड़ागांव डिमनी, कैलारस, जौरा एवं पोरसा) के माध्यम से विद्युत पारेषण कर रही है। इस नए ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने से जिले की कुल ट्रांसफार्मेशन क्षमता बढ़कर 1482 एमवीए हो गई है, जिससे विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता एवं स्थिरता में महत्वपूर्ण सुधार होगा।  

India-Russia Talks: ईरान युद्ध ने दिया भारत-रूस को मौका, US को भी होगी बड़ी डील की जानकारी

 नई दिल्ली युद्ध ने कई समीकरण बदल दिए हैं, अमेरिकी बैन के कारण भारत ने धीरे-धीरे रूस से तेल खरीदना कम कर दिया था. लेकिन अब युद्ध ने मिडिल-ईस्ट से तेल की सप्लाई को बाधित कर दिया है. जिसके बाद भारत अब अधिक से अधिक कच्चा तेल रूस से खरीदने पर विचार कर रहा है, ताकि देश में पेट्रोल-डीजल की किल्लत न हो।  न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस संकट ने भारत को एक बार फिर रूस के साथ अपने पुराने और मजबूत संबंधों को आगे बढ़ाने का मौका दे दिया है और भारत ने अपना कदम बढ़ा दिया है।  दरअसल, मिडिल-ईस्ट में संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे रूट बाधित हो गया है. यह मार्ग दुनिया के सबसे बड़े तेल परिवहन रास्तों में से एक है, और भारत जैसे देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. इस संकट के चलते वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे भारत के सामने भी ऊर्जा सुरक्षा की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।  LNG को लेकर रूस से बातचीत शुरू  बता दें, भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से पूरा करता है. लेकिन फिलहाल सप्लाई में दिक्कतें आ रही हैं. ऐसे में भारत अब रूस को एक वैकल्पिक और भरोसेमंद सप्लायर के रूप में देख रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और रूस के बीच लिक्विफाइड नैचुरल गैस (LNG) को लेकर एक बड़ी डील पर बातचीत शुरू हो चुकी है, जो यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बार हो रही है. सूत्रों के मुताबिक भारत ने रूसी एलएनजी खरीदने के संदर्भ में अमेरिका को जानकारी दे दी है।  इतना ही नहीं, भारत अपने कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी को बढ़ाकर लगभग 40% तक ले जाने पर विचार कर रहा है. Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में रूसी कच्चे तेल का आयात जनवरी 2026 के स्तर से दोगुना होकर कम से कम 40% तक पहुंच सकता है. रूस पहले से ही भारत को रियायती दरों पर तेल उपलब्ध कराता रहा है, जो मौजूदा महंगाई और ऊर्जा संकट के दौर में भारत के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।  अमेरिका को चुभ सकता  है रूस-भारत का करीब आना गौरतलब है कि रूसी तेल खरीदने को लेकर  ही भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ा था, जिसके बाद अमेरिका ने अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ थोप दिया था. यही नहीं, जब ट्रंप ने भारत पर टैरिफ घटाकर 18 फीसदी करने का ऐलान किया तो, उस समय उन्होंने कहा था कि भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया है, जिसके बाद टैरिफ में छूट दी गई।  लेकिन अब में मिडिल-ईस्ट में जिस तरह के हालात हैं, उसे देखते हुए भारत अब अमेरिका से विशेष छूट मांग रहा है, ताकि वह रूस से ऊर्जा खरीद जारी रख सके. इस पूरे घटनाक्रम का एक बड़ा भू-राजनीतिक पहलू भी है. क्योंकि भारत और रूस फिर से करीब आने वाला है, जो कि अमेरिका को चुभ सकता है. रूस भी इस अवसर का फायदा उठाते हुए भारत के साथ अपने रिश्ते को और गहरा करने की कोशिश कर रहा है।  वैसे भी भारत और रूस एनर्जी के अलावा बिजली, एविएशन और व्यापार जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं. खास बात यह है कि दोनों देशों के बीच व्यापार अब रुपये और रूबल में भी किया जा रहा है, जिससे डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिश हो रही है।