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मोजतबा खामेनेई कोमा में और पैर कटने की अफवाह, वेस्टर्न मीडिया में सनसनी

तेहरान ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं. सबसे हैरान करने वाला दावा है कि मोजतबा खामेनेई कोमा में हैं. उनका एक पैर भी काट दिया गया है और उनकी हालत बेहद संजीदा है. ये दावा ब्रिटिश अखबार 'द सन' ने अपनी रिपोर्ट में किया है।  'द सन' की ये रिपोर्ट उस समय सामने आई, जब कुछ घंटों पहले ही मोजतबा खामेनेई का पहला संदेश सामने आया, जिसमें उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों में हमले जारी रखे जाएंगे और होर्मुज स्ट्रेट की भी नाकेबंदी रहेगी।   'द सन' ने ये रिपोर्ट अपने सूत्र के हवाले से चलाई है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मोजतबा खामेनेई की हालत बहुत खराब है और वह कोमा में है. वह अस्पताल में ईरान के स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्री मोहम्मद रजा जफरगंदी की निगरानी में हैं. जफरगंदी ईरान के टॉप सर्जन्स में से एक हैं।  रिपोर्ट में क्या दावा किया गया? 'द सन' ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि मोजतबा खामेनेई तेहरान की सिना यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में इंटेसिव केयर में है. इस बिल्डिंग के एक हिस्से को भारी सिक्योरिटी के बीच सील कर दिया गया है।  रिपोर्ट में बताया गया कि मोजतबा का एक पैर कट गया है और उनके पेट और लिवर को भी गंभीर चोटें आई हैं. हालांकि, यह साफ नहीं है कि मोजतबा खामेनेई 28 फरवरी को उसी हमले में घायल हुए थे, जिसमें आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी. हालांकि, ईरान के सरकारी टीवी के एंकर मोजतबा खामेनेई को 'रमजान का जांबाज' यानी 'घायल योद्धा' बताते हैं।  'द सन' को सूत्र ने बताया, 'उनका एक या दोनों पैर काट दिए गए हैं. उनका लिवर या पेट भी फट गया है. वह शायद कोमा में भी हैं.' रिपोर्ट में कहा गया है कि दो दिन पहले ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान चुपके से मोजतबा खामेनेई से मिलने गए थे. सिना हॉस्पिटल की इंटेंसिव केयर यूनिट में सिर्फ कुछ ही ऑथराइज्ड लोगों को ही जाने की इजाजत है.  कितना मजबूत है ये दावा? 28 फरवरी से जब से अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग शुरू हुई है, तब से मोजतबा खामेनेई एक बार भी सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं।  मोजतबा खामेनेई को 8 मार्च को ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुना गया था. खामेनेई की मौत के लगभग एक हफ्ते बाद. उसी दिन ईरानी मीडिया ने खबरें दी थीं कि मोजतबा खामेनेई देश को संबोधित करेंगे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ।  सुप्रीम लीडर चुने जाने के पांच दिन के बाद मोजतबा खामेनेई का पहला संदेश दुनिया के सामने आया. लेकिन उनके संदेश को टीवी पर एक एंकर ने पढ़ा. वह कैमरे पर भी दिखाई नहीं दिए।  ईरान के सरकारी टीवी रिपोर्ट्स के एंकर्स ने मोजतबा खामेनेई को 'रमजान युद्ध का जांबाज' यानी 'घायल योद्धा' बताया. हालांकि, इस बात की पुष्टि नहीं की कि मोजतबा 28 फरवरी को घायल हुए थे या नहीं।  इन्हीं सब बातों के कारण उनकी हेल्थ को लेकर अटकलें, अफवाहें और दावे और भी बढ़ गए हैं. हालांकि, अब तक मोजतबा खामेनेई को सिर्फ दावे ही किए जा रहे हैं, कुछ पुष्टि नहीं हुई है।   

प्रदेश में घरेलू गैस की कमी नहीं, सप्लाई लगातार जारी रहेगी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रदेश में घरेलू गैस की कोई कमी नहीं-निर्बाध आपूर्ति रहेगी जारी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव एलपीजी सहित अन्य ईंधन के परिवहन, भंडारण और वितरण पर फोकस मुख्य सचिव  जैन ने कलेक्टर्स के साथ की वी.सी. भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वर्तमान में मिडिल ईस्ट-एशिया में युद्ध की स्थितियों के संदर्भ में प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और मंत्रीगण सजग हैं। नागरिकों को चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है, केंद्र और राज्य सरकार के स्तर पर कालाबाजारी रोकने के लिए पूरे प्रबंधन किए गए हैं। नागरिकों को रसोई गैस संबंधी परेशानी नहीं होगी। प्रदेश में घरेलू रसोई गैस सहित पीएनजी और सीएनजी की कोई कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक गतिविधियों के कारण से पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस के संबंध में वर्तमान स्थितियों में अभी तक अधिकांश कच्चे तेल की आपूर्ति स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होती थी, जिसे परिवर्तित कर अन्य स्थानों से भी कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। साथ ही देश की रिफाइनरी उच्च क्षमता पर कार्य कर रही है। प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिये वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता के माध्यम से खरीदी प्रक्रिया जारी है। घरेलू पीएनजी और सीएनजी की आपूर्ति बिना कटौती के हो रही है। रिफाइनरी को एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे वर्तमान में एलपीजी उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि भी हुई है। इसके अलावा एक विशेष उपलब्धि प्राप्त हुई है कि जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले ऐसे जहाज एवं टेंकर जिनमें भारतीय फ्लेग लगे हैं उनको नहीं रोका जाएगा, यह एक राजनयिक विजय है, जिससे पेट्रोलियम सप्लाई में बाधा समाप्त होगी। गैस आपूर्ति प्रबंधन के लिये प्राकृतिक गैस नियंत्रण आदेश जारी किया गया है, जिससे देश में किसी भी प्रकार की घरेलू गैस की आपूर्ति में कमी न हो। उपरोक्त के अनुक्रम में प्रदेश में पेट्रोल, डीजल, एटीएस, क्रूड ऑयल और घरेलू गैस की किसी प्रकार की कमी की स्थिति नहीं है तथा निरंतर आपूर्ति जारी है। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत में किसी प्रकार की वृद्धि नहीं हुई है। इसी के दृष्टिगत मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार वरिष्ठ मंत्रियों की समिति का गठन भी किया गया है। मुख्य सचिव  जैन ने जिला कलेक्टर्स को दिये निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर मुख्य सचिव  अनुराग जैन ने गुरूवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से कमिश्नर-कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के साथ पश्चिम-मध्य एशिया में युद्ध के कारण उत्पन्न हुई स्थिति के दृष्टिगत एलपीजी सहित अन्य ईंधन की उपलब्धता की समीक्षा की और आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में डीजीपी  कैलाश मकवाना और एसीएस  शिवशेखर शुक्ला एवं मती रश्मि अरूण शमी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। मुख्य सचिव  जैन ने कलेक्टर्स से कहा कि घरेलू गैस वितरण की ऑनलाइन व्यवस्था को और मजबूत करें तथा इससे जुड़ी कंपनियां भी सर्वर आदि की क्षमता बढाएं जिससे रिफिल बुकिंग ओटीपी जनरेशन और वितरण बिना असुविधा के सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि सुनिश्चत करें कि गलत सूचनाओं का प्रसार और अफवाहों को सख्ती से रोंके और उपभोक्ताओं तक मीडिया आदि का उपयोग कर सही सूचना पहुचाएं। उन्होंने कहा कि नागरिकों के बीच सकारात्मक माहौल बनाए और सूचना तंत्र मजबूत कर अवैध जमाखोरी और कालाबाजारी की कोई भी घटना नही हो, यह सुनिश्चत करें। मुख्य सचिव  जैन ने कई कलेक्टर्स द्वारा होटल्स, रेस्टोरेंट, मैरिज गार्डन आदि के संचालकों से बात कर रसोई गैस की जगह इलेक्ट्रिक भट्टी और इंडेक्शन आदि का उपयोग बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने सभी कलेक्टर्स से कहा कि वे भी वैकल्पिक और सुरक्षित ईंधन के उपयोग के प्रति नागरिकों और खानपान व्यवसाय में लगे लोगों बीच वैकल्पिक ईंधन के उपयोग के प्रति जागरूकता बढाएं। मुख्य सचिव  जैन ने विभिन्न शहरों में पीएनजी के कनेक्शन की जानकारी ली और कलेक्टर्स से कहा कि वे अधिकाधिक उपभोक्ताओं को पाइप लाइन गैस प्रणाली से जोड़ें। उन्होंने कलेक्टर्स से कहा कि सी एम हेल्पलाइन की शिकायतों का उसी दिन संतुष्टि पूर्वक समाधान सुनिश्चित किया जाए। डी.जी.पी.  मकवाना ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि वे सोशल मीडिया सहित विभिन्न प्लेट फार्म पर गलत सूचनाओं और अफवाह फैलाने वालों पर कार्यवाही करें और संपूर्ण व्यवस्था में सुरक्षात्मक इंतजाम सुनिश्चित करें। अपर मुख्य सचिव खाद्य नागरिक आपूर्ति मती रश्मि अरूण शमी ने बताया कि प्रदेश में एलपीजी सहित पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त उपलब्धता है। प्रदेश के सीएनजी स्टेशन एवं पीएनजी उपभोक्ताओं के उपयोग के लिए एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता है। प्रदेश मे पेट्रोलियम/ सीएनजी/पीएनजी गैस की आपूर्ति लगातार जारी है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त मात्रा में एलपीजी की लगातार उपलब्धता है। शैक्षणिक एवं चिकित्सा संस्थानों को वाणिज्यिक सिलेंडर के उपयोग की छूट प्रदान की गई है। उन्होंने कलेक्टर्स से मीडिया के माध्यम से प्रचार-प्रसार करने के लिए भी कहा है। कांफ्रेंस में इंदौर, भोपाल, उज्जैन, जबलपुर, सागर, धार के कलेक्टर्स सहित ग्वालियर एवं रीवा के कमिश्नर ने किए जा रहे उपायों की जानकारी दी। एसीएस मती शमी ने अधिकारियों से कहा कि वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं को उपलब्ध स्टॉक का विवेकपूर्ण उपयोग करने एवं वैकल्पिक ईंधन स्रोतों को अपनाने की सलाह दें। जहां पीएनजी लाइन उपलब्ध है वहां पीएनजी के कनेक्शन लेने के लिए प्रेरित किया जाए। जिन कामो में गैस ज्यादा खर्च होती है उनको नियंत्रित करने एवं विकल्प तैयार करने के लिए प्रेरित किया जाए। जिला कलेक्टर, जिले के खाद्य नियंत्रक/अधिकारी, ऑयल कंपनी के नोडल अधिकारी तथा एलपीजी वितरकों से समन्वय कर एलपीजी की आवश्यकता तथा उपलब्धता की प्रतिदिन समीक्षा भी करें। वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा प्रदेश में घरेलू रसोई गैस की कोई कमीं नहीं है और उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान नहीं दें। राज्य शासन एलपीजी सहित अन्य ईंधन के परिवहन, भंडारण और वितरण पर पूरी तरह से सतर्क है। खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग की अपर मुख्य सचिव को समन्वय अधिकारी बनाया गया है, वे प्रतिदिन सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों से संवाद और समन्वय करेंगी। मुख्य सचिव  जैन ने कहा कि पर्याप्त उपलब्धता के बावजूद गलत सूचनाओं के कारण घरेलू गैस की कमी की अफवाह फैलने से रोका जाए। उन्होंने कहा कि रसोई गैस सहित अन्य ईंधन का सुरक्षित परिवहन, भंडारण और वितरण सुनिश्चित किया जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य स्तर के साथ ही … Read more

RSS की बड़ी बैठक हरियाणा में, एजेंडे में चुनावी तैयारी और UGC विवाद

पनीपत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था 'अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा' की तीन दिवसीय बैठक हरियाणा के पनीपत में शुक्रवार से शुरू हो रही है. संघ के टॉप लीडरशिप की इस बैठक में आरएसएस के 100 साल के कार्य विस्तार की समीक्षा के साथ-साथ आगामी 100 सालों के कार्यक्रमों-अभियानों की रूपरेखा तैयार की जाएगी. इतना ही नहीं संघ के एजेंडे में 2026 और 2027 की चुनाव से लेकर यूजीसी विवाद पर मंथन किए जाने की संभावना है। आरएसएस की कार्य पद्धति में निर्णय करने वाली सर्वोच्च ईकाई अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा है. इसकी साल में महज एक बार बैठक होती है. संघ के शताब्दी वर्ष पूरे होने के बाद एबीपीएस की बैठक इस बार हरियाणा के पनीपत जिले की समालखा स्थित माधव सृष्टि परिसर में हो रही है। संघ की तीन दिनों तक चलने वाली महत्वपूर्ण बैठक के लिए सरसंघचालक मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले पहुंच चुके हैं. क्षेत्र-प्रांत संघचालक, कार्यवाह, प्रचारक और संघ प्रेरित 32 संगठनों के पदाधिकारी शामिल होंगे. देशभर से संघ और संघ प्रेरित संगठनों के 1487 प्रतिनिधि शिरकत करेंगे।  RSS की हरियाणा में तीन दिन की बैठक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बताया कि बैठक का औपचारिक आगाज शुक्रवार सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले की उपस्थिति में होगा, जो रविवार तक चलेगी. बैठक में आरएसएस से जुड़े भारतीय मजदूर संघ, विश्व हिंदू परिषद, एबीवीपी, सेवा भारती और भारतीय किसान संघ जैसे संगठन शामिल होंगे. इस दौरान संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों,सामाजिक चुनौतियों और संगठन विस्तार की आगामी रूपरेखा पर गहन मंथन किया जाएगा। सुनील आंबेकर ने कहा कि संघ की चर्चाओं में सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संत शिरोमणि रविदास की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों को भी शामिल किया जाएगा. माना जा रहा कि बैठक में शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में चल रहे कार्यक्रमों की समीक्षा होगी. इसके साथ ही अगले वर्ष की योजनाओं पर चर्चा होगी और  जिन्हें पिछली बेंगलुरू बैठक में जिम्मेदारियों सौंपी गई थी, उन्होंने उसे कितना पूरा किया, इस पर भी चर्चा होगी. पदाधिकारियों को नई जिम्मेदारियां भी दी जाएंगी। संघ अगले एक साल का बनाएगा प्लान RSS के शताब्दी वर्ष के जनसंपर्क अभियान के तहत, 'गृह संपर्क अभियान' ने कई राज्यों में 10 करोड़ से अधिक परिवारों से पहले ही संपर्क स्थापित कर लिया है. पिछले एक वर्ष में 5,500 से अधिक नई RSS शाखाएं शुरू की गई हैं. शताब्दी वर्ष की गतिविधियों के हिस्से के रूप में पूरे देश में लगभग 97 प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे. बैठक के अंतिम दिन संडे को दत्तात्रेय होसबाले मीडिया को संबोधित करेंगे और बैठक लाए गए प्रस्तावों और निर्णयों का विवरण साझा करेंगे। संघ के 'पंच परिवर्तन' प्रोजेक्ट पर फिर से ज़ोर दिए जाने की संभावना है. इस प्रोजेक्ट का मुख्य मकसद सामाजिक सद्भाव, पारिवारिक मूल्यों, पर्यावरण संरक्षण, अपनी पहचान, आत्मनिर्भरता और नागरिक कर्तव्यों को बढ़ावा देना है। RSS के एजेंडे में UGC से चुनाव तक संघ सूत्रों के मुताबिक एबीपीएस की बैठक में यूजीसी के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हो सकती है. देश के शिक्षण संस्थानों में दलित और पिछड़ी जाति के छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव को खत्म करने के लिए यूजीसी ने नए नियम बनाए थे, जिसे लेकर विरोध शुरू हो गया था. संघ की कोशिश है कि यूजीसी के नियमों लागू करने का स्वरूप इस कदर बनाया जाए, जिससे सामाजिक विरोध न हो सके।  यूजीसी के नियम को लेकर विवाद खड़ा हो गया था. एक तरफ उच्च जाति के समुदायों को लगता है कि इन नियमों से उनके साथ ज्यादती होगी और कानून का गलत इस्तेमाल हो सकता है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट के द्वारा अदालतों द्वारा इन पर रोक लगाए जाने से दलितों के बीच जवाबी लामबंदी शुरू हो गई है। ओबीसी और दलित समूह कथित तौर पर नाराज माने जा रहे हैं जबकि ये समुदाय महत्वपूर्ण वोट बैंक बनाते हैं, जिन्हें बीजेपी लुभाने की कोशिश कर रही है. 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव को देखते हुए, इस मुद्दे ने पार्टी को एक मुश्किल स्थिति में डाल दिया है. ऐसे में सूत्रों की माने तो संघ की इस अहम बैठक में यूजीसी के नए नियमों पर चर्चा हो सकती है. संघ इस मुद्दे पर कोई दिशा दे सकता है।  2026 में देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव है, जिसमें असम, बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी शामिल हैं. ऐसे में संघ की बैठक में इन राज्यों के चुनाव को लेकर भी चर्चा हो सकती है. वैचारिक रूप से बीजेपी से बंगाल, केरल व तमिलनाडु को अहम माना जाता है और सियासी तौर पर पार्टी अभी तक इन राज्यों में सत्ता में नहीं आ सकी है. इस तरह संघ की बैठक में चुनावी राज्यों के लिए मंथन कर रणनीति बनाई जा सकती है। घुसपैठ के मुद्दे पर भी क्या होगी चर्चा पड़ोसी मुल्कों से गैरकानूनी माइग्रेशन के चलते देश के कुछ राज्यों में हो रहे जनसंख्या असंतुलन को लेकर आरएसएस चिंतित है.घुसपैठ के कारण देश के कई राज्यों की जनसंख्या की स्थिति बदल रही है. असम और पश्चिम बंगाल में पहले से ही अवैध घुसपैठ का मुद्दा शुरू से ही रहा है. इन दोनों राज्यों में अगले महीने विधानसभा चुनाव होने हैं. बीजेपी इन राज्यों में घुसपैठ को मुद्दा बनाने में जुटी है. ऐसे में एबीपीएस की चर्चाओं में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की पहचान और उन्हें वापस भेजने के मुद्दे पर भी बात हो सकती है।  एबीपीएस मीटिंग के दौरान कई 'राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों' पर एक प्रस्ताव पारित करने की भी उम्मीद है. हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि यूजीसी और एनआरसी पर कोई प्रस्ताव आएगा या नहीं, लेकिन संघ की यह सबसे महत्वपूर्ण बैठक है. इसमें सरसंघचालक मोहन भागवत और दूसरे नंबर के नेता दत्तात्रेय होसबले सहित सभी सह सरकार्यवाह सहित अहम पदाधिकारियों की उपस्थित होगी।  संघ के एबीपीएस बैठक में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता भी बैठक में शामिल हो सकते हैं. इस दौरान अहम मुद्दों पर चर्चा करने साथ लिए गए फैसले न केवल अगले वर्ष के लिए संघ को दिशा देते हैं बल्कि बीजेपी की केंद्र और राज्य सरकारों को यह भी संकेत देते हैं कि वह … Read more

गैस सिलेंडर आपूर्ति व्यवस्था पर मुख्य सचिव ने कलेक्टरों के साथ की अहम बैठक

भोपाल  युद्ध के बाद खाड़ी देशों में बिगड़े हालातों का असर अब अन्य देशों में भी दिखने को मिल रहा है. इस कारण भारत में भी एलपीजी गैस की सप्लाई बाधित (LPG Supply Shortage) हो रही है. इसको देखते हुए मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव ने गुरुवार को गैस सिलेंडर आपूर्ति को लेकर कलेक्टरों की महत्वपूर्ण बैठक ली. इसके बाद मुख्य सचिव ने भोपाल कलेक्टर के लिए आदेश जारी किया है. ईंधन के आयात में हुई रुकावट को देखते हुए पेट्रोलियम और गैस मंत्रालय के निर्देश पर मुख्य सचिव ने कलेक्टरों की बैठक ली।  फिलहाल एलपीजी की आपूर्ति केवल घरेलू उपभोक्ताओं को ही करने का निर्देश दिया है. उपभोक्ताओं के लिए गैस एजेंसियों ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं, जहां भारत गैस उपभोक्ताओं के लिए हेल्पलाइन नंबर-1800-22-4344, इंडेडेन ऑयल गैस- 1800-2333-555, एचपी गैस- 1800-2333-555 नंबर है. इसके साथ ही मुख्य सचिव ने गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी और अवैध गैस रिफलिंग की जांच करने का भी आदेश दिया है।  मुख्य सचिव ने गैस सिलेंडर आपूर्ति को लेकर कलेक्टरों की महत्वपूर्ण बैठक ली मुख्य सचिव की बैठक लेने के बाद भोपाल कलेक्टर ने आदेश जारी किया एलपीजी की आपूर्ति केवल घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को करने के संबंध में आदेश दिया आयात में हुई रूकावट को देखते हुये पेट्रोलियम और गैस मंत्रालय के निर्देश पर मुख्य सचिव ने कलेक्टरों की बैठक ली   भारत गैस हेल्पलाईन नंबर-1800-22-4344, इण्डेन ऑयल गैस हेल्पलाईन नंबर 1800-2333-555, एचपी गैस हेल्पलाईन नंबर 1800-2333-555 गैस सिलेण्डरों की कालाबाजारी एवं अवैध गैस रिफलिंग की सतत जांच करने मुख्य सचिव ने दिया आदेश होटल-रेस्तरां में नहीं होगी सप्लाई भोपाल कलेक्टर ने भी आदेश जारी करते हुए कहा कि कमर्शियल गैस सिलेंडरों की होटल, रेस्तरां और मॉल में सप्लाई नहीं होगी. इसके अलावा एलपीजी का उपयोग करने वाले औद्योगिक क्षेत्र और फैक्ट्री में भी गैस सिलेंडर की आपूर्ति नहीं की जाएगी. फिलहाल घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है. कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति सिर्फ चिकित्सालय और शैक्षणिक संस्थाओं में की जाएगी। इसके साथ ही निर्देश दिए हैं कि सिलेंडर की जमाखोरी करने वालों पर जिला प्रशासन निगरानी रखेगा. अगर कोई ऐसा करता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी. SDM, ACP और आपूर्ति अधिकारी को यह जिम्मेदारी दी गई है। 

मंत्री देवांगन के विभागों के लिए 1823 करोड़ रुपये की अनुदान मांगें विधानसभा में पारित

मंत्री  लखनलाल देवांगन के विभागों के लिए 01 हजार 823 करोड़ रुपए से अधिक की अनुदान मांगें पारित राज्य को अब तक 8 लाख करोड़ रूपए से अधिक निवेश प्रस्ताव भूमि का आबंटन अब ई-निविदा के माध्यम से किया-जिससे राजस्व 20 प्रतिशत बढ़ा*  श्रमिक आवास एवं ई-रिक्शा की राशि 01 लाख रूपए से बढ़ाकर  1.50 लाख रूपए कर दी गई अगले वर्ष से श्रमिकों के 200 बच्चों को उत्कृष्ट स्कूलों में दाखिला हेतु अभिनव पहल  रायपुर छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज वाणिज्य एवं उद्योग विभाग तथा श्रम विभाग के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 01 हजार 823 करोड़ 87 लाख 69 हजार रूपए की अनुदान मांगे पारित की गईं। इसमें वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के लिए 01 हजार 567 करोड़ 86 लाख 79 हजार रूपए, श्रम विभाग के लिए 256 करोड़ 90 हजार रूपए शामिल हैं। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश मंे नई औद्यागिक नीति लागू की गई है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।  उद्योग विभाग उद्योेग मंत्री  देवांगन नेे कहा कि इस बजट में सरकार द्वारा राज्य के औद्योगिक विकास हेतु वाणिज्य एवं उद्योग विभाग को बजट में रुपए 1750 करोड़ आबंटित किया गया है। इसमें रूपए 652 करोड़ उद्योगों को अनुदान हेतु तथा औद्योगिक प्रयोजन हेतु भू-अर्जन, भूमि विकास तथा औद्योगिक अधोसंरचना विकास के लिए लगभग रूपए 700 करोड़ का प्रावधान किया गया है। उन्होंने सदन को जानकारी देते हुए कहा कि औद्योगिक भूमि आबंटन को अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाने हेतु औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि का आबंटन अब ई-निविदा के माध्यम से किया जा रहा है। इससे न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ी है बल्कि राजस्व में भी 20 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है। इन सतत प्रयासों का ही परिणाम है कि राज्य द्वारा 140 से अधिक निवेशकों को इन्विटेशन टू इन्वेस्ट जारी किया गया है। राज्य को अब तक 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों में स्टील, पावर, सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल्स, आईटी, बीपीओ तथा क्लीन एनर्जी जैसे विविध और उभरते हुए क्षेत्रों के निवेश शामिल हैं, जो राज्य की औद्योगिक प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। मंत्री  देवांगन नेे कहा कि विगत एक वर्ष में 951 उद्योग स्थापित हुए हैं, जिनके द्वारा रु 8000 करोड़ से अधिक का निवेश किया गया एवं हमारी सरकार आने के बाद लगभग 45000 से अधिक रोजगार उत्पन्न हुए। राज्य में बस्तर से सरगुजा तक 23 नवीन औद्योगिक क्षेत्रों एवं पार्कों का निर्माण किया जा रहा है जिनमें से 4 फ्लेटेड फैक्ट्री अधोसंरचना है। राज्य शासन सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास हेतु प्रतिबद्ध है एवं इस दिशा में तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि उद्योगों में रोजगार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने एवं उनके जीवन को सरल करने की दृष्टि से बिलासपुर जिले में 2 कामकाजी महिला हॉस्टल निर्माणाधीन है, जिसके लिए बजट में रुपए 20 करोड़ का प्रावधान किया गया है। निजी भूमि पर औद्योगिक पार्क की स्थापना के लिए निवेशकों को आकर्षित करने की दृष्टि से अधोसंरचना लागत पर 50 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान औद्योगिक विकास नीति में किया गया है। इससे राज्य केन औद्योगिक अधोसंरचना विकास को बल मिलेगा। मुख्यमंत्री के पहल पर स्टार्ट-अप मिशन के लिए रूपए 100 करोड़ का प्रावधान बजट के अंतर्गत किया है। श्रम विभाग  मंत्री  देवांगन सदन में कहा कि मुख्यमंत्री  साय के नेतृत्व में श्रम विभाग छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल के अंतर्गत अधिसूचित 56 प्रवर्ग के असंगठित श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण के लिये वर्ष 2026-27 के बजट में कुल रुपये 128 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है, जो गत वर्ष से लगभग 3 करोड़ अधिक है। श्रमिक बच्चों को उत्कृष्ट स्कूल में शिक्षा की अभिनव पहल करते हुए प्रदेश में 96 श्रमिकों के बच्चों को 6वीं क्लास में डी.पी.एस. राजकुुमार कॉलेज, कांगेर वैली एकेडमी में निःशुल्क पढ़ाई कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अगले वर्ष अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत 200 बच्चों को प्रदेश के उत्कृष्ट स्कूलों में दाखिला देने की घोषणा की थी, इस पर अमल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मंडल द्वारा उपकर के माध्यम से संकलित राशि से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों एवं उनके परिवार के लिये उपलब्ध निधि से 60 प्रवर्ग में पंजीकृत 32.58 लाख निर्माण श्रमिकों के लिए संचालित 31 योजनाओं के क्रियान्वयन में वर्ष 2025 में लगभग रूपये 387 करोड़ से अधिक राशि कल्याणकारी योजनाओं में व्यय किया गया है। वर्ष 2026-27 में पंजीकृत 02.01 लाख संगठित श्रमिकों के लिये 14 योजनाओं हेतु बजट में राज्य शासन के अनुदान हेतु रुपये 06 करोड़ प्रावधान किया गया है। श्रम मंत्री ने बताया कि श्रम विभाग के मुख्य दायित्व विभिन्न श्रम कानूनों के प्रावधानों के अंतर्गत श्रमिकों के हित संरक्षण किया जाना है, जिसके पालन हेतु श्रमायुक्त संगठन में रुपये 30 करोड़ 63 लाख का बजट प्रावधान किया गया है। श्रमिक आवास की राशि प्रति आवास 01 लाख रूपए से बढ़ाकर 1.50 लाख कर दी है। इसी तरह ई-रिक्शा की राशि भी एक लाख से बढ़ाकर 1.50 लाख रूपए की जाएगी।  औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा हेतु वर्ष 2026-27 में रुपये 10 करोड़ के बजट का प्रावधान किया गया है। संचालनालय द्वारा कारखाना अधिनियम के अंतर्गत कारखानों का लायसेंस नवीनीकरण, आनसाइट आपात योजना एवं कारखाना भवनों के नक्शे आदि का निराकरण भी आनलाईन ही किया जा रहा है। इंडस्ट्रियल हाईजिन लैब हेतु वर्ष 2026-27 में रुपये 05 करोड़ के बजट का प्रावधान किया गया है।  वर्ष 2026-27 हेतु कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं के लिए रुपये 76 करोड़ 38 लाख का प्रावधान किया गया है।  वाणिज्यक कर (आबकारी) विभाग मंत्री  देवांगन नेे कहा कि विभागीय दक्षता बढ़ाने हमने इस वित्तीय वर्ष में 10 जिला अधिकारी, 85 आबकारी उपनिरीक्षक की भर्ती की है तथा 200 आबकारी आरक्षक की भर्ती प्रक्रिया अंतिम चरण पर है। वर्ष 2024-25 हेतु निर्धारित किये गये 10500 करोड़ (दस हजार पांच सौ करोड़) आबकारी राजस्व लक्ष्य के विरूद्ध 10145 करोड़ (दस हजार एक सौ पैतालीस करोड़) का आबकारी राजस्व अर्जित किया गया जो कि इससे पूर्व के वित्तीय वर्ष 2023-24 में अर्जित आबकारी राजस्व 8430 करोड़ (आठ हजार चार सौ तीस करोड़) की तुलना में 20.35 प्रतिशत अधिक है तथा राज्य के कुल कर राजस्व प्राप्ति का लगभग 11 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि उपयुक्त नीति एवं विभागीय कार्ययोजना … Read more

Air Taxi की टेस्टिंग शुरू, अब मिनटों में पहुंचे ऑफिस और एयरपोर्ट

नई दिल्ली  आसमान में उड़ती टैक्सी. सुनने में अब भी थोड़ा साइंस-फिक्शन जैसा लगता है. लेकिन तकनीक की दुनिया इस सपने को धीरे-धीरे सच में बदल रही है. अमेरिकी कंपनी Joby Aviation ने अपनी पहली प्रोडक्शन इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी (Air Taxi) की उड़ान शुरू कर दी है. यानी एक ऐसी मशीन, जिसमें आने वाले समय में लोग बैठकर शहर के ऊपर से उड़ते हुए ऑफिस या एयरपोर्ट जा सकेंगे. कंपनी का दावा है कि अगर सब ठीक रहा तो जल्द ही यह एयर टैक्सी आम लोगों के लिए भी उपलब्ध हो सकेगी। जॉबी एविएशन ने घोषणा की है कि, कंपनी ने अपनी पहली प्रोडक्शन एयर टैक्सी की टेस्टिंग शुरू कर दी है. कंपनी का कहना है कि यह कदम पैसेंजर सर्विस शुरू करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चला तो आने वाले समय में लोग शहरों के ऊपर से इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी में सफर करते नजर आ सकते हैं। कंपनी ने बताया कि शुरुआती उड़ानें उसके मरीना, कैलिफोर्निया स्थित प्लांट में की जा रही हैं. यहां कंपनी के पायलट एयरक्राफ्ट की टेस्टिंग कर रहे हैं. दरअसल, कंपनी ये टेस्टिंग इसलिए कर रही है ताकि एयरक्रॉफ्ट बिना किसी तकनीकी खामी के फेडरेशन के सामने पेश किया जा सके. अमेरिकी विमानन नियामक संस्था फेडरेशन एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) इसकी आधिकारिक जांच और सर्टिफिकेशन प्रक्रिया शुरू करेगी. कंपनी को उम्मीद है कि इसी साल इसके लिए जरूरी टेस्ट पूरे कर लिए जाएंगे। कैसी है ये Air Taxi Joby Aviation कई साल से इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही है. कंपनी पहले ही नियामकों (रेगुलेटर्स) के साथ मिलकर एयरक्राफ्ट के डिजाइन, उसके पार्ट्स और प्रोडक्शन प्लान को मंजूरी दिलाने की प्रक्रिया में काफी आगे बढ़ चुकी है. कंपनी के डेवलपमेंट मॉडल पहले की टेस्टिंग में 50,000 मील से ज्यादा उड़ान भी भर चुके हैं. यानी टेक्निकली अब तक इस फ्लाइंग प्रोसेस में कंपनी कोई ख़ास समस्या नहीं आई है। Joby की एयर टैक्सी का डिजाइन काफी खास है. यह हेलिकॉप्टर और हवाई जहाज दोनों का मिला-जुला रूप है. इसमें 6 रोटर लगे हैं जो इसे अपनी जगह से ही सीधा टेक-ऑफ और लैंडिंग करने में मदद करते हैं. इसके बाद यह सामान्य एयरक्रॉफ्ट की तरह आगे की ओर उड़ान भरती है. यह इलेक्ट्रिक एयरक्राफ्ट एक पायलट और 4 पैसेंजर को लेकर उड़ान भर सकता है. कंपनी का दावा है कि यह हेलिकॉप्टर की तुलना में ज्यादा साइलेंट है। ये एक इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (eVTOL) एयरक्राफ्ट जैसा होगा. इसकी अधिकतम रफ्तार करीब 200 मील प्रति घंटा (321 किमी/घंटा) होगी और एक बार चार्ज करने पर यह लगभग 100 मील (160 किमी) तक उड़ान भर सकेगी. शहर के भीतर यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए इसमें कई अलग-अलग लेवल की सेफ्टी सिस्टम भी लगाए गए हैं। जल्द शुरू होगी पैसेंजर सर्विस कंपनी की योजना इस साल के अंत तक Dubai में अपनी पहली पैसेंजर सर्विस शुरू करने की है. इसके लिए शहर में 4 लैंडिंग साइट बनाने की योजना है, जिनमें से दो पर काम शुरू हो चुका है. इसके अलावा कंपनी अमेरिका में भी लिमिटेड लेवल पर ऑपरेशन शुरू करने की तैयारी कर रही है. यह एक फेडरल प्रोग्राम का हिस्सा होगा, जिसका मकसद इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी को नेशनल एयरस्पेस में शामिल करना है। UBER का ऐलान हाल ही में मशहूर राइड-हेलिंग ऐप Uber ने ऐलान किया था कि, कंपनी जॉबी एविएशन के साथ मिलकर एयर टैक्सी सर्विस शुरू करने जा रही है. एयर टैक्सी की बुकिंग प्रक्रिया बिल्कुल सामान्य राइड की तरह होगी. आप ऐप खोलेंगे, अपना डेस्टिनेशन डालेंगे और अगर उस रास्ते पर हवाई सफर संभव होगा तो एयर टैक्सी का विकल्प अपने आप दिख जाएगा. इस एक ही बुकिंग में आपको पहले टेक-ऑफ प्वाइंट तक वाया रोड ले जाया जाएगा, फिर हवा में उड़ान होगी और उतरने के बाद आखिरी मंजिल तक फिर सड़क मार्ग से ही सफर कराया जाएगा. यानी पूरा सफर एक ही टिकट और एक ही ऐप में। आने वाले वर्षों में कंपनी अपने प्रोडक्शन को भी तेजी से बढ़ाने की योजना बना रही है. इसके लिए कैलिफोर्निया के प्लांट के साथ-साथ डेटन, ओहियो स्थित फैक्ट्री में भी प्रोडक्शन बढ़ाया जाएगा. कंपनी का टार्गेट है कि साल 2027 तक हर महीने करीब 4 एयरक्राफ्ट का निर्माण किया जाए. इससे भविष्य में बड़े पैमाने पर एयर टैक्सी सेवा शुरू करने का रास्ता साफ हो सकता है।

आइसर की नई तकनीक से सेमीकंडक्टर निर्माण में सुधार, स्वदेशी माइक्रोफैब्रिकेशन से बढ़ेगी गति

भोपाल भारत को सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आइसर) भोपाल के वैज्ञानिकों ने कम लागत और कम कार्बन उत्सर्जन वाली स्वदेशी माइक्रोफैब्रिकेशन तकनीक विकसित की है। यह तकनीक सेमीकंडक्टर चिप निर्माण की जटिल और महंगी प्रक्रिया को सरल और किफायती बनाने की क्षमता रखती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नवाचार से भारत में सेमीकंडक्टर अनुसंधान और उत्पादन को नई गति मिल सकती है। साथ ही यह तकनीक बड़े उद्योगों के साथ-साथ शैक्षणिक संस्थानों और स्टार्टअप्स के लिए भी चिप निर्माण अनुसंधान को सुलभ बनाएगी। आइसर भोपाल के वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि     आइसर भोपाल के विद्युत अभियांत्रिकी और कंप्यूटर विज्ञान विभाग के डॉ. शांतनु तालुकदार और उनकी टीम ने कई वर्षों के शोध के बाद यह स्वदेशी तकनीक विकसित की है। उनकी टीम में डॉ. स्वप्नेंदु घोष और देबजीत डे सरकार भी शामिल रहे।     वैज्ञानिकों ने माइक्रोफैब्रिकेशन प्रक्रिया में उपयोग होने वाले फोटोमास्क और हार्ड मास्क के निर्माण के लिए नई विधि विकसित की है। इस शोध का प्रकाशन अंतरराष्ट्रीय जर्नल “माइक्रो एंड नैनो इंजीनियरिंग” में भी किया गया है, जिससे इसकी वैश्विक स्तर पर भी सराहना हो रही है। माइक्रोफैब्रिकेशन प्रक्रिया होगी आसान     आधुनिक सेमीकंडक्टर चिप निर्माण में फोटोमास्क और हार्ड मास्क की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इनकी सहायता से नैनोमीटर से लेकर माइक्रोन स्तर तक के सूक्ष्म पैटर्न चिप के सब्सट्रेट पर स्थानांतरित किए जाते हैं।     पारंपरिक तकनीक में इन मास्क को तैयार करने के लिए अत्यंत महंगे उपकरण, अत्याधुनिक लिथोग्राफी मशीनें, विशेष क्लीनरूम और कई प्रकार के खतरनाक रसायनों की आवश्यकता होती है।     यही कारण है कि भारत के कई शैक्षणिक और शोध संस्थानों के लिए इस क्षेत्र में कार्य करना चुनौतीपूर्ण रहा है। नई स्वदेशी तकनीक इन जटिलताओं को कम करते हुए कम संसाधनों में माइक्रोफैब्रिकेशन को संभव बना सकती है। क्रोमियम परत से बनाए जाते हैं सूक्ष्म पैटर्न     नई तकनीक में नैनोमीटर मोटाई की क्रोमियम धातु की परत का उपयोग किया जाता है। वैज्ञानिकों ने एक अत्यंत नुकीले धातु प्रोब की सहायता से इलेक्ट्रोकेमिकल ऑक्सीकरण अभिक्रिया को बेहद सीमित क्षेत्र में नियंत्रित करने की विधि विकसित की है। इस प्रक्रिया में क्रोमियम की सतह पर सीधे पैटर्न बनाए जाते हैं।     वैज्ञानिक इसे इस तरह समझाते हैं जैसे कागज पर पेन से लिखकर आकृति बनाई जाती है। इसी सिद्धांत पर अत्यंत सूक्ष्म स्तर पर चिप के लिए जरूरी डिजाइन तैयार किए जा सकते हैं। इस नवाचार से फोटोमास्क और हार्ड मास्क का निर्माण अपेक्षाकृत सरल और सस्ता हो जाता है। पर्यावरण के लिए भी लाभकारी तकनीक     इस नई विधि की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें अतिरिक्त रेजिस्ट परत, महंगे लिथोग्राफी उपकरण या खतरनाक रसायनों की आवश्यकता नहीं पड़ती। इससे उत्पादन लागत में कमी आने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन और पर्यावरणीय जोखिम भी कम हो जाते हैं।     इसके अलावा यह तकनीक माइक्रोफैब्रिकेशन की दो प्रमुख प्रक्रियाओं—लिथोग्राफी और एचिंग—का एक साथ समाधान प्रस्तुत करती है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह मौजूदा सेमीकंडक्टर निर्माण प्रणालियों के साथ भी आसानी से एकीकृत की जा सकती है। स्टार्टअप और संस्थानों के लिए नए अवसर     विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक माइक्रोफैब्रिकेशन अनुसंधान को बड़े उद्योगों और सीमित प्रयोगशालाओं से बाहर निकालकर शैक्षणिक संस्थानों और स्टार्टअप्स तक पहुंचाने में सहायक होगी। इससे नवाचार की गति तेज होगी और भारत में सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत आधार मिलेगा। आइसर भोपाल के निदेशक प्रो. गोवर्धन दास के अनुसार यह तकनीक उद्योगों के साथ साझा की जाएगी, ताकि बड़े पैमाने पर कम लागत में सेमीकंडक्टर चिप निर्माण को बढ़ावा दिया जा सके। क्या होते हैं फोटोमास्क और हार्ड मास्क     फोटोमास्क एक पारदर्शी प्लेट होती है, जो आमतौर पर कांच या क्वार्ट्ज से बनाई जाती है। इसमें बहुत छोटे-छोटे पैटर्न बनाए जाते हैं, जिनकी मदद से फोटोलिथोग्राफी प्रक्रिया के दौरान चिप पर डिजाइन तैयार किया जाता है।     वहीं हार्ड मास्क एक मजबूत परत होती है, जो सिलिकॉन, ऑक्साइड या नाइट्राइड जैसे पदार्थों से बनाई जाती है। इसका उपयोग माइक्रोफैब्रिकेशन में संरचना को सुरक्षित रखते हुए पैटर्न ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। दोनों तकनीकों का उपयोग सेमीकंडक्टर चिप निर्माण में व्यापक रूप से किया जाता है। सेमीकंडक्टर का बढ़ता महत्व     सेमीकंडक्टर ऐसी सामग्री होती है जिसकी विद्युत चालकता धातुओं और इंसुलेटर के बीच होती है। यही विशेषता इसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए अत्यंत उपयोगी बनाती है। मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर प्रोसेसर, मेमोरी चिप, ट्रांजिस्टर, डायोड, एलईडी और सोलर सेल जैसे उपकरणों में इसका व्यापक उपयोग होता है।     इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों, सेंसर, एयरबैग सिस्टम, रक्षा और अंतरिक्ष तकनीक में भी सेमीकंडक्टर का महत्वपूर्ण योगदान है। 5जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसे आधुनिक प्रौद्योगिकी प्रकल्प भी इसी पर निर्भर हैं। आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम     विशेषज्ञों के अनुसार आइसर भोपाल के वैज्ञानिकों की यह उपलब्धि भारत के लिए सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि इस तकनीक का बड़े पैमाने पर उपयोग शुरू होता है तो देश में चिप निर्माण की लागत कम हो सकती है और अनुसंधान संस्थानों के लिए नए अवसर खुल सकते हैं। इससे न केवल तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलेगा बल्कि भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में अपनी मजबूत उपस्थिति भी दर्ज करा सकेगा।  

MP के तीन तहसीलों के 14 गांवों में मिला लौह अयस्क का खजाना, सरकार को होगा बड़ा फायदा

जबलपुर   मध्य प्रदेश के करीब 15 जिलों में छोटे-बड़े स्तर पर आरयन ओर (लौह अयस्क) के ब्लॉक के बीच जबलपुर से अच्छी खबर है। यहां तीन तहसील मझौली, सिहोरा और पनागर में चार जगह आयरन ओर का बड़ा ब्लॉक मिला है। इसका रकबा 1081 हेक्टेयर है। सबसे बड़ा 936 हेक्टेयर का ब्लॉक मझौली के दर्शनी में मिला है। यह पहला मौका है, जब इतने बड़े क्षेत्र में लौह अयस्क मिला है। जबलपुर व कटनी की वर्तमान खदानें 20 से 35 हेक्टेयर की हैं। यहां से चीन तक लौह अयस्क भेजा जा चुका है। अब नए ब्लॉक मिलने के बाद प्रदेश का राजकोष और मजबूत होगा। संचालक को भेजी गई रिपोर्ट आयरन ओर व मैग्नीज का रकबा मझौली, सिहोरा, पनागर तहसील के 14 गांवों में है। सिहोरा के झीटी और कोड़ामुकुर में 86 हेक्टेयर का ब्लॉक है। मझौली के खुड़ावल में आयरन ओर, लैटराइट व मैग्नीज का रकबा 11, पनागर के कटैया में दोनों खनिज 49 हेक्टेयर में फैले हैं। तीनों का रकबा 1000 हेक्टेयर है। नीलामी प्रक्रिया प्रशासन ने शुरू की है। फैक्ट फाइल – प्रदेश में जबलपुर आयरन ओर का सबसे बड़ा उत्पादक। – 03 साल पहले भी सिहोरा और पनागर में कुछ ब्लॉक मिले थे।  – इनमें 10 लाख टन से अधिक आयरन ओर होने का अनुमान। – अभी 42 छोटी-बड़ी खदानें, इनमें 35 आयरन ओर की हैं। मुख्यालय भेजी है रिपोर्ट जिले में 4 जगह आयरन ओर, मैग्नीज, लैटराइट का ब्लॉक मिला है। रकबा 1081 हेक्टेयर है। ब्लॉक क्षेत्र की भूमि सीमांकन किया जा रहा है। रिपोर्ट मुख्यालय भेजी है। -एके राय, खनिज अधिकारी जबलपुर

MP का शहर जल्द जुड़ेगा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से, हाईस्पीड रोड प्रोजेक्ट को दी हरी झंडी

उज्जैन मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन को जल्द ही देश के सबसे बड़े हाईस्पीड रोड नेटवर्क से सीधा कनेक्शन मिलने वाला है। केंद्र सरकार ने उज्जैन को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे जोड़ने के लिए नई सड़क परियोजना को मंजूरी दे दी है। करीब 80.45 किमी लंबी सड़क बनने से महाकाल की नगरी तक पहुंचना आसान हो जाएगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 3839 करोड़ रुपए बताई जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि सिंहस्थ मेले से पहले इस कनेक्टिविटी को तैयार कर लिया जाए, ताकि देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधा मिल सके। 2025 में बना नेशनल हाईवे, अब तेजी से आगे बढ़ेगा काम इस मार्ग को मई 2025 में राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित किया गया था। इसके बाद 6 महीने में ही विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर ली गई है। अब भूमि अधिग्रहण और अन्य प्रक्रियाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक 17 मार्च तक टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है। जबकि अप्रैल 2026 से निर्माण कार्य शुरू करने की योजना है। परियोजना को 2028 से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अभी संकरी सड़क, एक्सप्रेस वे बनने पर होगी तेज रफ्तार फिलहाल जिस मार्ग से यह कनेक्टिविटी बनेगी, वहां कई हिस्सों में मार्ग की चौड़ाई करीब 5.5 मीटर है। यहां वाहन की रफ्तार 20-25 किमी प्रतिघंटा ही है। लेकिन नई सड़क 4 लेन होगी, इसके बनने के बाद वाहनों की रफ्तार 80-100 किमी प्रतिघंटा होगी। गुजरात, महाराष्ट्र से उज्जैन का सफर होगा आसान दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे से जुड़ने के बाद गुजरात और महाराष्ट्र से उज्जैन आने का रास्ता काफी छोटा हो जाएगा। वर्तमान में यहां के यात्रियों को उज्जैन आने के लिए एक लंबा सफर तय करना पड़ता है। नई सड़क बनने के बाद श्रद्धालुओं, पर्यटकों और व्यापारिक गतिविधियों को भी बड़ा फायदा होगा। उद्योगों को भी मिलेगा लाभ इस परियोजना से इंदौर, देवास, उज्जैन के साथ ही पीथमपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को भी फायदा होगा। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से माल परिवहन तेज होगा और लॉजिस्टिक लागत कम होने की उम्मीद भी नजर आ रही है।

“बिहार ने दिखाया कमाल, गरीबी 41% से घटकर 4% पर! नीतीश कुमार के नेतृत्व में हुआ बदलाव”

पटना. बिहार में इन दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चा हर चौक-चौराहे पर हो रही है.  नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार का सीएम कौन होगा, इस सवाल का जवाब भी लोग जानना चाह रहे हैं. वहीं नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की जेडीयू में जॉइनिंग के साथ ही उनके सियासी उदय की भी चर्चा जोरों पर है. लेकिन, इन सबके बीच नए बिहार को लेकर जो आंकड़े सामने आए  हैं, वह सच में नीतीश कुमार के विजन और विजडम दोनों की बेहतरीन मिसाल पेश करते हैं। दरअसल कभी विकास के मामले में देश के सबसे पिछड़े राज्यों में गिने जाने वाले बिहार को लंबे समय तक “बीमारू राज्य” कहा जाता रहा. लेकिन, अब तस्वीर तेजी से बदलती दिख रही है. प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य श्यामका रवि ने ‘प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद’ (Economic Advisory Council to the Prime Minister) से जुड़ी अपनी भूमिका के साथ इंडिया एक्स्प्रेस (The Indian Express) में लिखे लेख में बताया है कि पिछले एक दशक में बिहार ने जीवन स्तर, गरीबी और पोषण क्षमता जैसे कई अहम सूचकों पर उल्लेखनीय सुधार किया है। संजय झा ने भी शेयर किया पोस्ट इस आर्टिकल में बताया गया कि गया है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल के दौरान बिहार में राजनीतिक स्थिरता और शासन की निरंतरता का असर विकास के आंकड़ों में साफ दिखाई देता है. कई मामलों में बिहार ने पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल को भी पीछे छोड़ दिया है. उपभोग, गरीबी में कमी और पोषण क्षमता जैसे क्षेत्रों में बिहार की प्रगति राष्ट्रीय औसत के करीब पहुंचती दिख रही है. राज्यसभा सांसद और जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने भी इस आर्टिकल को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट शेयर इसे आंख खोलने वाली रिपोर्ट बताई है। हैरान करने वाले हैं रिपोर्ट के प्रमुख आंकड़े और तथ्य     2011 से 2024 के बीच बिहार के ग्रामीण इलाकों में रियल मासिक प्रति व्यक्ति खर्च (MPCE) में औसतन 4.5% वार्षिक वृद्धि हुई, जो राष्ट्रीय औसत 3.1% से करीब 50% अधिक है।     शहरी बिहार में रियल MPCE की वृद्धि 4.6% रही, जबकि पूरे भारत में यह 2.6% रही.     ग्रामीण बिहार में मासिक प्रति व्यक्ति खर्च 2011-12 में ₹1,086 से बढ़कर ₹3,531 हो गया.     इसी अवधि में पश्चिम बंगाल में यह ₹1,211 से बढ़कर ₹3,366 तक पहुंचा, लेकिन उसकी वृद्धि दर कम रही.     शहरी बिहार में नॉमिनल MPCE की वृद्धि 10.7% रही, जबकि पश्चिम बंगाल में यह केवल 6.9% दर्ज की गई. राष्ट्रीय औसत के मुकाबले बिहार की स्थिति में सुधार     बिहार का ग्रामीण MPCE राष्ट्रीय औसत के 80.5% से बढ़कर 91.7% तक पहुंच गया.     शहरी क्षेत्रों में यह 58.7% से बढ़कर 75.4% हो गया.     इसके विपरीत पश्चिम बंगाल के आंकड़ों में गिरावट देखी गई.     ग्रामीण अनुपात 89.8% से घटकर 87.5% हो गया.     शहरी अनुपात 97.5% से घटकर 82.8% रह गया. गरीबों की आय में भी तेज वृद्धि     ग्रामीण बिहार में सबसे गरीब 20% आबादी की आय में 4.2% CAGR की वृद्धि हुई.     मध्यम वर्ग में यह 4.6% और अमीर वर्ग में 4.4% रही.     शहरी बिहार में गरीब वर्ग की वृद्धि 5.7% रही, जो सबसे ज्यादा है. गरीबी में भारी गिरावट     2011-12 में बिहार में गरीबी दर 41.3% थी.     2023-24 में यह घटकर 4.4% रह गई, जो राष्ट्रीय औसत 4.0% के लगभग बराबर है.     पश्चिम बंगाल की गरीबी दर इसी अवधि में 30.4% से घटकर 6% रही, जो बिहार से अधिक है। पोषण क्षमता में भी सुधार     2011-12 में बिहार में 64.7% परिवार पोषणयुक्त भोजन खरीदने में सक्षम नहीं थे.     2023-24 में यह घटकर 27.4% रह गया.     पश्चिम बंगाल में यह आंकड़ा 56% से घटकर 34.6% तक आया क्या कहता है विश्लेषण? रिपोर्ट के अनुसार बिहार में जीवन स्तर में सुधार, गरीबी में तेज कमी और खपत क्षमता में बढ़ोतरी जैसे संकेत स्पष्ट हैं. विश्लेषकों का मानना है कि लंबे समय तक स्थिर शासन और नीतिगत निरंतरता ने इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई है. रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि जिस बिहार को कभी स्थायी आर्थिक पिछड़ेपन का उदाहरण माना जाता था, अब वही राज्य कई सामाजिक-आर्थिक संकेतकों पर तेजी से आगे बढ़ता नजर आ रहा है।