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किसानों को मिलेगी 22वीं किस्त 13 मार्च को, कुछ किसान रह जाएंगे वंचित, जानें पूरी जानकारी

नई दिल्ली  देशभर के करोड़ों किसान जिस किस्त का इंतजार कर रहे थे, उसका समय अब करीब आ गया है. सरकार ने साफ कर दिया है कि किसानों को मिलने वाली अगली राशि जल्द उनके खातों में पहुंचने वाली है. दरअसल पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को हर साल आर्थिक मदद दी जाती है। जिससे खेती से जुड़े छोटे खर्चों में राहत मिल सके. कई दिनों से यह चर्चा चल रही थी कि अगली किस्त कब जारी होगी. अब इस पर तस्वीर साफ हो गई है. सरकार के मुताबिक पात्र किसानों के बैंक खातों में 13 मार्च को 22वीं किस्त भेजी जाएगी. हालांकि हर बार की तरह इस बार भी कुछ किसान ऐसे होंगे जिनके खाते में पैसे नहीं पहुंचेंगे। कब खाते में आएंगे 2 हजार रुपये? काफी समय से किसानों के बीच यह सवाल चल रहा था कि अगली किस्त कब जारी होगी. पहले माना जा रहा था कि फरवरी के आखिर तक पैसे आ सकते हैं. फिर यह चर्चा भी हुई कि होली से पहले किस्त जारी हो सकती है. अब सरकार की तरफ से यह साफ कर दिया गया है कि 13 मार्च को किसानों के खातों में 2000 रुपये भेजे जाएंगे. यह पैसा सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाता है, इसलिए किसानों को कहीं जाने की जरूरत नहीं होती। किसान योजना में ऐसे मिलता है फायदा     हर साल किसानों को कुल 6000 रुपये की मदद मिलती है.     यह रकम तीन किस्तों में दी जाती है.     हर चार महीने में 2,000 रुपये खाते में भेजे जाते हैं.     अब तक किसानों को 21 किस्तें मिल चुकी हैं.     अब 22वीं किस्त जारी होने के बाद लाखों किसानों को एक बार फिर सीधी आर्थिक मदद मिलने वाली है. इन किसानों को नहीं मिलेंगे पैसे हालांकि सभी किसानों को इस बार किस्त का फायदा नहीं मिलेगा. कुछ जरूरी नियम पूरे न होने पर किस्त अटक सकती है. सरकार ने पहले ही साफ कर दिया है कि योजना का लाभ लेने के लिए कुछ प्रक्रियाएं पूरी करना जरूरी है। अगर ये काम पूरे नहीं हैं तो पैसे रुक सकते हैं:     ई-केवाईसी पूरा नहीं किया है.     फार्मर आईडी नहीं बनवाई है.     बैंक खाते की जानकारी गलत है.     आधार और बैंक अकाउंट लिंक नहीं है. इन कारणों से कई किसानों की किस्त रुक जाती है. इसलिए जिन किसानों ने अभी तक ये काम पूरे नहीं किए हैं. उन्हें जल्द से जल्द अपडेट कर लेना चाहिए। आपके खाते में पैसे आएंगे या नहीं किसानों के लिए यह जानना भी आसान है कि उनके खाते में किस्त आएगी या नहीं. इसके लिए ऑनलाइन स्टेटस चेक किया जा सकता है.स्टेटस चेक करने के लिए ये आसान तरीका अपनाएं। ऐसे चेक करें स्टेटस     पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं.     Farmers Corner में Know Your Status ऑप्शन पर क्लिक करें.     अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और कैप्चा भरें.     इसके बाद स्क्रीन पर पूरी जानकारी दिखाई दे जाएगी. यहां से किसान यह भी देख सकते हैं कि उनका ई-केवाईसी, लैंड सीडिंग और आधार बैंक सीडिंग पूरा है या नहीं. अगर पहले किसी वजह से किस्त रुक गई थी और अब सभी जरूरी काम पूरे कर दिए गए हैं. तो आगे आने वाली किस्त फिर से मिल सकती है।

सरकार का बड़ा दावा: 5 दिनों में 28% बढ़ा LPG उत्पादन, सिलेंडर डिलीवरी हुई तेज

नई दिल्ली पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को संसद में कहा कि पिछले पांच दिनों में रिफाइनरियों को दिए गए निर्देशों के बाद एलपीजी उत्पादन में 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। साथ ही अतिरिक्त एलपीजी की खरीद भी सक्रिय रूप से की जा रही है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह है कि देश के 33 करोड़ से अधिक परिवारों, खासकर गरीब और वंचित वर्ग की रसोई में गैस की कमी न हो। उन्होंने बताया कि घरेलू गैस की सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है और सिलेंडर की डिलीवरी का समय पहले की तरह ही बना हुआ है। पुरी ने संसद को बताया कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग से लेकर डिलीवरी तक का औसत समय अभी भी 2.5 दिन है, जो संकट से पहले भी इतना ही था। इसके अलावा, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर बिना रुकावट गैस सप्लाई दी जा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ जगहों से ऐसी जानकारी मिली है कि डिस्ट्रीब्यूटर और रिटेल स्तर पर गैस सिलेंडर जमा करने और घबराहट में ज्यादा बुकिंग करने की प्रवृत्ति देखी जा रही है। हालांकि यह स्थिति किसी वास्तविक सप्लाई की कमी के कारण नहीं, बल्कि लोगों की चिंता के कारण पैदा हुई है। पुरी ने आगे कहा कि सरकार डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (डीएसी) प्रणाली का विस्तार कर रही है। अभी यह करीब 50 प्रतिशत उपभोक्ताओं के लिए लागू है, जिसे बढ़ाकर 90 प्रतिशत तक किया जा रहा है। इस व्यवस्था में सिलेंडर की डिलीवरी तभी दर्ज होगी, जब उपभोक्ता अपने मोबाइल पर आए वन-टाइम कोड से इसकी पुष्टि करेगा, जिससे गैस की गलत तरीके से सप्लाई या हेरफेर को रोकना आसान होगा। मांग को संतुलित रखने के लिए शहरी क्षेत्रों में गैस सिलेंडर की बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिन का अंतर और ग्रामीण तथा दुर्गम क्षेत्रों में 45 दिन का अंतर तय किया गया है। मंत्री ने बताया कि तेल मार्केटिंग कंपनियों के फील्ड अधिकारी और एंटी-अडल्टरेशन सेल डिस्ट्रीब्यूटर स्तर पर निगरानी कर रहे हैं। इसके अलावा केंद्रीय गृह सचिव ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ बैठक कर राज्य प्रशासन को इस व्यवस्था के साथ जोड़ने पर चर्चा की है। पुरी ने कहा कि कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई को नियंत्रित करने का उद्देश्य काला बाजारी रोकना है, न कि होटल और रेस्टोरेंट उद्योग को नुकसान पहुंचाना। कमर्शियल एलपीजी पूरी तरह बाजार आधारित कीमत पर बिना सब्सिडी के बेची जाती है और इसके लिए कोई पंजीकरण या बुकिंग प्रणाली नहीं होती। उन्होंने कहा कि अगर कमर्शियल एलपीजी की बिक्री पूरी तरह खुली छोड़ दी जाती, तो काउंटर से खरीदे गए सिलेंडर अवैध बाजार में भेजे जा सकते थे, जिससे असली व्यावसायिक और घरेलू उपभोक्ताओं को नुकसान होता। इसलिए सरकार ने स्पष्ट प्राथमिकता और पारदर्शी आवंटन प्रणाली लागू की है। इस व्यवस्था की निगरानी के लिए इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम के कार्यकारी निदेशकों की तीन सदस्यीय समिति 9 मार्च को बनाई गई थी। इस समिति ने देश भर में राज्य के नागरिक आपूर्ति विभागों और रेस्तरां संघों के साथ बैठकें आयोजित की हैं और ये बैठकें जारी हैं। समिति ने विभिन्न क्षेत्रों और सेक्टरों के आधार पर कमर्शियल एलपीजी की वास्तविक जरूरत का आकलन किया है। इसके तहत एक बड़े फैसले में आज से तेल कंपनियां औसत मासिक कमर्शियल एलपीजी मांग का 20 प्रतिशत हिस्सा आवंटित करेंगी, ताकि जमाखोरी और काला बाजारी न हो। पुरी ने कहा कि एलपीजी और गैस पर दबाव कम करने के लिए वैकल्पिक ईंधन विकल्पों को भी सक्रिय किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हालिया 60 रुपए के समायोजन के बाद बिना सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 913 रुपए है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से इसकी कीमत करीब 987 रुपए होनी चाहिए थी। वैश्विक कीमतों के अनुसार, प्रति सिलेंडर 134 रुपए की बढ़ोतरी की जरूरत थी, लेकिन सरकार ने 74 रुपए खुद वहन किए। इसके कारण उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए अतिरिक्त खर्च प्रतिदिन 80 पैसे से भी कम बैठता है। पुरी ने बताया कि पड़ोसी देशों में एलपीजी की कीमतें भारत से ज्यादा हैं। पाकिस्तान में एलपीजी सिलेंडर करीब 1,046 रुपए, श्रीलंका में 1,242 रुपए और नेपाल में 1,208 रुपए के आसपास है। उन्होंने यह भी कहा कि तेल मार्केटिंग कंपनियों को 2024-25 में हुए करीब 40,000 करोड़ रुपए के नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने 30,000 करोड़ रुपए के मुआवजे को मंजूरी दी है।

केंद्र से मिली कई अहम मंजूरियां मुख्यमंत्री के प्रयासों से किसानों को मिली अहम सौगातें

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सतत् प्रयासों का परिणाम है कि मध्यप्रदेश के किसानों को केंद्र सरकार से बड़ी राहत और कई महत्वपूर्ण मंजूरियां मिली हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्री  शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर राज्य के किसानों और ग्रामीण विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  प्रह्लाद सिंह पटेल और वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। इस उच्च स्तरीय चर्चा में ग्रामीण सड़कों सहित अनेक विषयों पर मध्यप्रदेश को बड़ी राहत देने वाले निर्णय लिये गये। सरसों किसानों को मिलेगा भावांतर भुगतान मुख्यमंत्री डॉ. यादव के आग्रह पर सरसों की खरीद से जुड़े मुद्दों पर महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। केंद्रीय कृषि मंत्री  चौहान ने भावांतर भुगतान योजना के तहत मध्यप्रदेश के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए संबंधित विभागों को भुगतान प्रक्रिया तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। इससे राज्य के सरसों उत्पादक किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। तुअर की शत-प्रतिशत खरीद का मार्ग प्रशस्त केंद्रीय मंत्री  चौहान ने बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव को तुअर (अरहर) की शत-प्रतिशत सरकारी खरीद का स्वीकृति-पत्र भी सौंपा। इस निर्णय से मध्यप्रदेश के तुअर उत्पादक किसानों की उपज का पूर्ण सरकारी उपार्जन सुनिश्चित होगा, जिससे उन्हें बाजार में भाव गिरने का जोखिम नहीं उठाना पड़ेगा और आय में स्थिरता आयेगी। दलहन–तिलहन उत्पादन बढ़ाने की दिशा में पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश को दलहन और तिलहन उत्पादन का अग्रणी केंद्र बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस पर केंद्र और राज्य की संयुक्त टीम द्वारा मूंग, उड़द, चना, तिल, सरसों और पाम ऑयल जैसी फसलों के लिए दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने पर सहमति बनी। फसल बीमा में किसानों के हितों की सुरक्षा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों के हितों की बेहतर सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। केंद्रीय मंत्री  चौहान ने निर्देश दिए कि सोयाबीन जैसी फसलों के आंकलन में केवल सैटेलाइट डेटा के बजाय क्रॉप कटिंग और रिमोट सेंसिंग तरीकों का उपयोग किया जाए, जिससे किसानों को वास्तविक नुकसान के आधार पर मुआवजा मिल सके। कृषि से जुड़े मुद्दों और योजनाओं की हुई समीक्षा बैठक में मध्यप्रदेश के लिए सरसों और सोयाबीन के भावांतर भुगतान, दलहन मिशन के तहत मूंग-उड़द के अतिरिक्त लक्ष्य, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता कार्यक्रम, मनरेगा मजदूरी और सामग्री भुगतान, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से जुड़े मुद्दों पर बिंदुवार चर्चा की गई। केन्द्रीय मंत्री  चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मध्यप्रदेश से जुड़े लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता से निपटाया जाए, जिससे राज्य के किसानों, मजदूरों और ग्रामीण गरीबों को शीघ्र राहत मिल सके। ग्रामीण विकास योजनाओं को मिलेगी गति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार किसानों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है और मध्यप्रदेश में वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाते हुए किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण विकास को नई गति देने के लिए राज्य सरकार लगातार काम कर रही है। केन्द्रीय कृषि मंत्री  चौहान ने मध्यप्रदेश में वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाये जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश मेरा अपना घर है। किसान कल्याण वर्ष में यह सुनिश्चित किया जायेगा कि सरसों, तुअर, मूंग, उड़द और तिलहनों की खेती करने वाले किसानों को हर संभव सहायता मिले और राज्य ग्रामीण विकास के हर पैमाने पर अग्रणी बने।  

वर्षा जल की एक-एक बूंद का हो संरक्षण

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 'जल गंगा संवर्धन अभियान-2026' के माध्यम से प्रदेश की जल-संस्कृति को पुनर्जीवित करने का आह्वान किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि जल केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन की वह महती आवश्यकता है जिसे हमें भावी पीढ़ियों को उपलब्ध कराने के लिये सहेजकर रखना है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि इस अभियान में जल संरक्षण की पारंपरिक पद्धतियों के साथ नवीन तकनीकी नवाचारों को अपनाया जाए और प्रदेश के प्रत्येक जल स्रोत की सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध सुनिश्चित किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि इस वर्ष "वर्षा जल की एक-एक बूंद का संचयन और संरक्षण" ही हमारा परम ध्येय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 19 मार्च से पूरे प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरूआत होगी। भविष्य की चुनौतियों का समाधान: जल-समृद्ध मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौतियों के बीच जल-सुरक्षा ही विकास का मूल मंत्र है। 'जल गंगा संवर्धन अभियान' में प्रदेश जल संरचनाओं की नदियों, तालाबों, बावड़ियों और कुओं का पुनरुद्धार एक मिशन मोड में किया जायेगा। जन-भागीदारी से बनेगा जन आंदोलन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपील की है कि जल गंगा संवर्धन अभियान से जन-जन को जोड़कर एक 'जन-आंदोलन' का रूप दिया जाए। उन्होंने समाज के हर वर्ग, स्वयंसेवी संस्थाओं और युवाओं से इस पुनीत कार्य में आगे बढ़कर श्रमदान करने का आह्वान किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जब समाज का हर व्यक्ति जल संरचनाओं की सुरक्षा का प्रहरी बनेगा, तभी हम "परम वैभवशाली और जल-समृद्ध मध्यप्रदेश" के स्वप्न को साकार कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि अभियान में प्रत्येक जिले में जल स्रोतों के आसपास स्वच्छता सुनिश्चित की जाए और जल गुणवत्ता परीक्षण के कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। अभियान की प्रमुख गतिविधियां              जल संरचनाओं का कायाकल्प।              नवीन जल स्त्रोतों का निर्माण।              भू-जल स्तर बढ़ाने भवनों पर रूफ वॉटर हार्वेस्टिंग।              पुराने जल स्त्रोतों का संधारण।              जल स्त्रोतों के पास साफ-सफाई।              सोक पिट का निर्माण।              पेयजल की टेस्टिंग और टंकियों की सफाई।              पुराने तालाबों का गहरीकरण।              स्टॉप डेम का संधारण एवं नवीन निर्माण।              पेयजल पाइप लाइनों का संधारण।              जल स्त्रोतों के पास वृहद पौध-रोपण।              जल संरक्षण के लिए जन-भागीदारी बढ़ाना।  

रसोई गैस पर राहत जारी: पीएसयू तेल कंपनियों को 30 हजार करोड़ की सब्सिडी देगी सरकार

नई दिल्ली सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (पीएसयू) को एलपीजी सब्सिडी के लिए 30,000 करोड़ रुपए देने को मंजूरी दी है। यह राशि इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियों को दी जाएगी ताकि वे घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) सिलेंडर को रियायती कीमतों पर उपलब्ध करा सकें। यह जानकारी गुरुवार को संसद में दी गई। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत फिलहाल 913 रुपए है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के तहत गरीब उपभोक्ताओं को प्रति सिलेंडर 300 रुपए की लक्षित सब्सिडी देने के बाद केंद्र सरकार लाभार्थियों को 14.2 किलोग्राम एलपीजी सिलेंडर 613 रुपए प्रति सिलेंडर (दिल्ली में) की प्रभावी कीमत पर उपलब्ध करा रही है। घरेलू बाजार में एलपीजी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए मंत्रालय ने सभी घरेलू तेल रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स को सी3 और सी4 गैस स्ट्रीम को एलपीजी उत्पादन के लिए इस्तेमाल करने का निर्देश दिया है। मंत्री ने बताया कि यह एलपीजी उत्पादन सिर्फ सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को सप्लाई किया जाएगा। यह आदेश आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत जारी किए गए हैं। सुरेश गोपी ने यह भी कहा कि सरकार ने इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (आईएसपीआरएल) नाम की विशेष कंपनी के जरिए 5.33 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता वाले रणनीतिक कच्चे तेल भंडार बनाए हैं। ये भंडार ईरान युद्ध जैसे हालात में सप्लाई चेन में आने वाली बाधाओं से निपटने में मदद करेंगे। मंत्री ने बताया कि देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बाजार के अनुसार तय होती हैं, और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल मार्केटिंग कंपनियां इनकी कीमतों पर फैसला करती हैं। हालांकि जरूरत पड़ने पर सरकार टैक्स संरचना में बदलाव करके उपभोक्ताओं पर बोझ कम करने के लिए वित्तीय हस्तक्षेप भी करती है।उन्होंने बताया कि नवंबर 2021 और मई 2022 में केंद्र सरकार ने दो चरणों में पेट्रोल पर 13 रुपए और डीजल पर 16 रुपए प्रति लीटर तक केंद्रीय उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) कम की थी, जिसका पूरा फायदा उपभोक्ताओं को दिया गया था। इसके अलावा मार्च 2024 में तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में 2 रुपए प्रति लीटर की कटौती की थी। हालांकि अप्रैल 2025 में जब पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 2 रुपए प्रति लीटर बढ़ाई गई, तब इसका बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया।

जल संरक्षण में जनसहभागिता पर जोर, मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल से बढ़ा अभियान

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये प्रभावी रूप से जनभागीदारी की पहल की गई है। प्रदेश में “जल महोत्सव-2026” आयोजित किया जा रहा है। जल जीवन मिशन के अंतर्गत यह अभियान केवल पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्राम स्तर पर जल प्रबंधन के लिये समुदाय की सहभागिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक दूरदर्शी प्रयास है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति व्यवस्था को दीर्घकालिक, उत्तरदायी और आत्मनिर्भर बनाने की अवधारणा को सुदृढ़ किया जा रहा है। प्रदेश के चयनित ग्रामों में 8 मार्च से 22 मार्च 2026 के बीच जल महोत्सव 2026 का आयोजन किया जा रहा है। इस महोत्सव का उद्देश्य उन ग्रामों की उपलब्धियों को सामने लाना है जहाँ हर घर तक नल से जल की सुविधा सुनिश्चित हो चुकी है और पेयजल योजनाओं का संचालन, प्रबंधन तथा रख-रखाव ग्राम पंचायतों और समुदाय की सक्रिय भागीदारी से सफलतापूर्वक किया जा रहा है। जल महोत्सव ग्रामीण समुदाय को जल प्रबंधन की जिम्मेदारी के प्रति और अधिक जागरूक एवं सहभागी बनाने का अवसर भी प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश में जल जीवन मिशन को एक व्यापक जनभागीदारी आधारित पहल के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। जल महोत्सव के माध्यम से ग्राम पंचायतों, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों, स्वयं सहायता समूहों तथा स्थानीय समुदाय की सक्रिय भूमिका को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे जल स्रोतों के संरक्षण, पेयजल प्रणालियों के सुचारु संचालन और सामुदायिक स्वामित्व की भावना को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके। प्रदेश में जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिये निरंतर उल्लेखनीय कार्य किये जाते रहे है। देश का पहला “जल अर्पण दिवस” राजगढ़ जिले में गोरखपुरा समूह जल प्रदाय योजना के अंतर्गत 23 दिसम्बर 2025 को आयोजित किया गया था, जिसने जल प्रबंधन में सामुदायिक सहभागिता का एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया। जल महोत्सव के लिए ऐसे ग्रामों का चयन किया गया है जहाँ हर घर जल की स्थिति सत्यापित हो चुकी है और ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति द्वारा पेयजल आपूर्ति व्यवस्था का संचालन प्रभावी रूप से किया जा रहा है। प्रत्येक जिले से ऐसे 2 ग्राम चिन्हित किए गए हैं जहाँ जल जीवन मिशन के मानकों के अनुरूप जल प्रदाय की व्यवस्था सफलतापूर्वक संचालित हो रही है। इन ग्रामों में कार्यक्रमों का आयोजन कलेक्टर के मार्गदर्शन में जिला पंचायत तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के समन्वय से किया जा रहा है। उत्कृष्ट कार्य करने वाले होंगे सम्मानित महोत्सव में ग्राम स्तर पर जल प्रबंधन में उल्लेखनीय योगदान देने वाले वाल्वमैन, स्वयं सहायता समूह की महिला सदस्य तथा ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति के सक्रिय सदस्यों को चिन्हित किया जाएगा। जिला जल एवं स्वच्छता समिति की बैठक में कलेक्टर के द्वारा इनका सम्मान किया जाएगा, जिससे समुदाय आधारित जल प्रबंधन के उत्कृष्ट प्रयासों को प्रोत्साहन मिल सके। कार्यक्रम के आयोजन के लिए प्रत्येक चयनित ग्राम में परियोजना क्रियान्वयन इकाई स्तर पर उपलब्ध मद से अधिकतम 25 हजार रु. तक की राशि व्यय की जा सकेगी। प्रदेश की विभिन्न परियोजना क्रियान्वयन इकाइयों के अंतर्गत आने वाले जिलों में यह आयोजन किया जा रहा है। इनमें प्रमुख रूप से भोपाल, सीहोर, राजगढ़, ग्वालियर, इंदौर, रतलाम, नीमच, छिंदवाड़ा, शहडोल, अनूपपुर, रीवा, सीधी, छतरपुर, दमोह, पन्ना, उज्जैन तथा बड़वानी सहित अन्य जिलों के चयनित ग्राम शामिल हैं। जल महोत्सव-2026 के माध्यम से प्रदेश में सुरक्षित पेयजल उपलब्धता की दिशा में प्राप्त उपलब्धियों को रेखांकित करने के साथ जल प्रबंधन में सामुदायिक सहभागिता को और अधिक सुदृढ़ करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति व्यवस्था को स्थायी और प्रभावी रूप से संचालित किया जा सके।  

मुख्यमंत्री ने “बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026” का किया शुभारंभ

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सालय स्थित सभागार से मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने योजना का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं को प्रमाण पत्र प्रदान किया और अधिक से अधिक लोगों से योजना का लाभ लेने की अपील की। साथ ही मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत 2 हजार 931 हितग्राहियों को 8 करोड़ 79 लाख रुपए की सब्सिडी भी अंतरित की। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बिजली आज हमारी मूलभूत जरूरतों में शामिल हो चुकी है और इसके बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है। कई परिवार आर्थिक कारणों से समय पर बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाते, जिससे सरचार्ज के कारण बकाया राशि बढ़ जाती है और पूरा भुगतान करना कठिन हो जाता है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं की इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने समाधान योजना शुरू की है, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाधान योजना के माध्यम से लंबे समय से बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाने वाले प्रदेश के निम्न एवं मध्यम आय वर्ग तथा कृषि उपभोक्ताओं को राहत देने की पहल की गई है। योजना के तहत प्रदेश के 28 लाख 42 हजार उपभोक्ताओं को कुल 757 करोड़ रुपए की राहत दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 के बाद देश के लगभग 18 हजार गांवों तक बिजली पहुंचाई गई, जिससे आजादी के बाद से अंधेरे में रहे गांव भी रोशन हुए। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में हमारे अपने संसाधनों से लगभग 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है और प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने बताया कि कोरोना काल में आर्थिक कठिनाइयों के कारण कई उपभोक्ता बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाए थे, जिससे बकाया राशि बढ़ गई थी। राज्य सरकार ने उपभोक्ताओं की इस परेशानी को समझते हुए समाधान योजना लागू की है।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के प्रति प्रदेश में लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है और अब तक लगभग 36 हजार लोग इससे जुड़ चुके हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि महिला स्व सहायता समूहों द्वारा सोलर पैनल वेंडर के रूप में कार्य किया जाना एक सकारात्मक पहल है। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से बिजली की बचत करने और घरेलू बिजली के अनावश्यक उपयोग से बचने की अपील की।   मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग के अधिकारियों को समाधान योजना के लिए बधाई देते हुए निर्देश दिए कि शिविर लगाकर और व्यापक प्रचार-प्रसार के माध्यम से अधिक से अधिक उपभोक्ताओं को समाधान योजना से जोड़ा जाए। उल्लेखनीय है कि योजना के अंतर्गत उपभोक्ताओं की तीन श्रेणियां निर्धारित की गई हैं, जिनमें 31 मार्च 2023 की स्थिति में निष्क्रिय उपभोक्ता, सक्रिय एकल बत्ती कनेक्शनधारी उपभोक्ता तथा सक्रिय अशासकीय घरेलू एवं अशासकीय कृषि उपभोक्ता शामिल हैं। इन श्रेणियों के उपभोक्ताओं को विद्युत देयक जमा करने के लिए प्रोत्साहन के रूप में अधिभार की राशि में 100 प्रतिशत छूट तथा मूल बकाया राशि में 75 प्रतिशत तक छूट का प्रावधान किया गया है। योजना का लाभ लेने के लिए उपभोक्ताओं को पंजीयन कराना होगा और पंजीयन के समय बकाया राशि का न्यूनतम 10 प्रतिशत भुगतान करना अनिवार्य होगा। शेष राशि का भुगतान किस्तों में किया जा सकेगा और आगामी माह में कोई अधिभार नहीं लगेगा। यह योजना 30 जून 2026 तक प्रभावशील रहेगी। इस अवसर पर रायपुर उत्तर विधायक  पुरंदर मिश्रा, रायपुर नगर निगम महापौर मती मीनल चौबे, जिला पंचायत अध्यक्ष  नवीन अग्रवाल, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव सहित बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी और विद्युत उपभोक्ता उपस्थित थे।

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर! 8वें वेतन आयोग में 6% सालाना बढ़ोतरी का प्रस्ताव, DA फॉर्मूला भी बदल सकता है

नई दिल्ली केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए बनने वाले अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी संघ (AIDEF) ने 8वां केंद्रीय वेतन आयोग को कई अहम सुझाव दिए हैं। कर्मचारी संगठन ने आयोग की चेयरपर्सन न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई को भेजे अपने जवाब में कुल 17 मांगें रखी हैं। इनमें सबसे बड़ी मांग महंगाई भत्ता (DA) की गणना के तरीके को बदलने की है। AIDEF का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था कर्मचारियों को मिलने वाले वास्तविक महंगाई प्रभाव को सही तरह से नहीं दर्शाती। क्या है डिटेल अभी केंद्र सरकार के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता औद्योगिक श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) के 12 महीने के औसत के आधार पर तय होता है। इस इंडेक्स को लेबर ब्यूरो तैयार करता है, जिसमें सब्जी, फल, कपड़े और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों को शामिल किया जाता है। इसी के आधार पर साल में दो बार DA बढ़ोतरी तय होती है। क्या है DA कैलकुलेशन लेकिन, AIDEF का कहना है कि यह इंडेक्स कर्मचारियों और पेंशनरों की वास्तविक खर्च स्थिति को नहीं दिखाता। संगठन के मुताबिक CPI बास्केट में कई वस्तुओं की कीमतें पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (राशन) या सब्सिडी वाली दरों पर मानी जाती हैं, जबकि ज्यादातर कर्मचारी बाजार से ऊंची कीमत पर सामान खरीदते हैं। इसलिए महंगाई की असली मार इस इंडेक्स में दिखाई नहीं देती। इसी वजह से AIDEF ने सुझाव दिया है कि 8वें वेतन आयोग में DA की गणना के लिए नया और ज्यादा वास्तविक इंडेक्स बनाया जाए। संगठन का कहना है कि इसमें खुली रिटेल मार्केट में मिलने वाली कीमतों या सरकारी कोऑपरेटिव कंज्यूमर स्टोर्स की दरों को आधार बनाया जाना चाहिए। इससे कर्मचारियों को महंगाई के अनुसार सही भत्ता मिल सकेगा। इसके अलावा AIDEF ने कई अन्य अहम मांगें भी रखी हैं। संगठन ने सेना में लागू अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीर जैसी फिक्स्ड टर्म भर्ती व्यवस्था को खत्म करने और सभी अग्निवीरों को नियमित करने की मांग की है। साथ ही मौजूदा मिलिट्री सर्विस पे (MSP) को हटाकर ‘डायनेमिक रिस्क एंड रेडीनेस प्रीमियम’ देने का प्रस्ताव रखा गया है, जो पुलिस और अन्य बलों की एंट्री लेवल सैलरी से कम से कम 25% ज्यादा होना चाहिए। वेतन और प्रमोशन से जुड़े मामलों में भी AIDEF ने बड़े बदलाव सुझाए हैं। संगठन ने मौजूदा 3% सालाना वेतन वृद्धि को बढ़ाकर 6% करने, सेवा के 30 साल में कम से कम 5 गारंटीड प्रमोशन देने और सबसे ज्यादा तथा सबसे कम वेतन के बीच अनुपात 1:10 रखने की मांग की है। इसके अलावा सशस्त्र बलों के लिए पुरानी पेंशन योजना को जारी रखने और सेवानिवृत्ति आयु में मानवीय तरीके से चरणबद्ध बढ़ोतरी जैसे सुझाव भी दिए गए हैं।

मंत्री राजवाड़े के विभागों के लिए 11,763 करोड़ रुपये की अनुदान मांगें पारित

मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े के विभागों के लिए लगभग 11 हजार 763 करोड़ रुपये की अनुदान मांगें पारित समाज के अंतिम व्यक्ति तक के सम्मान और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध :  राजवाड़े महतारी वंदन योजना से राज्य की 70 लाख से अधिक महिलाएं लाभान्वित  समाज कल्याण का बजट पिछले 5 वर्षों की तुलना में 59 प्रतिशत अधिक प्रधानमंत्री श्री मोदी की गारंटी को पूरा करने बेटियों के भविष्य के लिए रानी दुर्गावती योजना होगी शुरू  नशा मुक्ति के लिए सामाजिक सहयोग से चलेगा अभियान, वरिष्ठ नागरिकों केे देखभाल के लिए “सियान गुड़ी” डे-केयर सेंटर की होगी स्थापना रायपुर छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के विभागों के लिए 11 हजार 762 करोड़ 53 लाख रूपए की अनुदान मांगें पारित कर दी गईं है। इनमें महिला एवं बाल विकास विभाग के लिए 10,162 करोड़ 53 लाख रूपए तथा समाज कल्याण विभाग के लिए 1600 करोड़ रूपए से अधिक का बजट प्रावधान किया गया है।  महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने सदन में चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि राज्य सरकार मातृशक्ति के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए अनेक योजनाओं का प्रभावी संचालन कर रही है।  राजवाड़े ने कहा कि महतारी वंदन योजना राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में से एक है। यह योजना राज्य की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक पहल साबित हुई है। इसके तहत प्रदेश की लगभग 70 लाख महिलाओं को लाभान्वित किया जा रहा है। अब तक 25 किश्तों में 14 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रदान की जा चुकी है। इससे महिलाओं के जीवन में आर्थिक मजबूती के साथ आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिला है और उनके जीवन में स्वावलंबन लाने का काम किया है। राजवाड़े ने सदन में कहा कि महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य तथा पोषण को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लिए 120 करोड़ रुपये तथा मिशन वात्सल्य योजना के लिए 80 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन के लिए 800 करोड़ रुपये तथा पूरक पोषण आहार के लिए 650 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। आंगनबाड़ी केंद्रों के उन्नयन और आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए भी विशेष प्रावधान किया गया है। राजवाड़े ने कहा कि किशोरी बालिकाओं के स्वास्थ्य और पोषण के लिए ’किशोरी बालिका योजना’ के लिए 40 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही छात्राओं की स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए ’शुचिता योजना’ के लिए 10 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।  राजवाड़े ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोेदी जी के गारंटी को पूरा करने राज्य सरकार बेटियों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए ’रानी दुर्गावती योजना’ प्रारंभ करने जा रही है। इस योजना के तहत बेटी के 18 वर्ष पूर्ण होने पर उन्हेें 1.5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके लिए इस वर्ष के बजट में 15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा पोषण अभियान के संचालन के लिए 125 करोड़ रुपये तथा मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह योजना के लिए 40 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान रखा गया है।  राजवाड़े ने कहा कि हमारी सरकार महिलाओं की सम्मान और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि वन स्टॉप सेंटर, सखी निवास और चाइल्ड हेल्पलाइन जैसी योजनाओं के संचालन के लिए भी बजट में पर्याप्त राशि का प्रावधान किया गया है। महिला सुरक्षा से संबंधित कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा जनजागरूकता कार्यक्रमों को भी प्राथमिकता दी जा रही है। समाज कल्याण विभाग सदन को जानकारी देते हुए राजवाड़े ने बताया कि समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1600 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है, जो पिछले पांच वर्षों की तुलना में लगभग 59 प्रतिशत अधिक है। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत प्रदेश में लगभग 21 लाख 76 हजार हितग्राहियों को पेंशन का लाभ डीबीटी के माध्यम से दिया जा रहा है। इसके लिए 1402 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वरिष्ठ नागरिकों केे देखभाल और सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए राज्य में “सियान गुड़ी” डे-केयर सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं, जिसके लिए 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा वृद्धाश्रमों के संचालन के लिए 6 करोड़ रुपये, राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना के लिए 20 करोड़ रुपये तथा मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के लिए 20 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए विशेष विद्यालयों के संचालन, कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण तथा पुनर्वास कार्यक्रमों के लिए भी बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं। साथ ही उभयलिंगी कल्याण बोर्ड की स्थापना के लिए 1 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।  लक्ष्मी राजवाड़े ने सदन में कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का उद्देश्य केवल योजनाओं का संचालन करना नहीं बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय, सम्मान और सुरक्षा पहुंचाना है। इन्हीं बातों को ध्येय में रखकर हमारी सरकार सेवा, संवेदना और संकल्प के साथ समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं।

ईरान का अमेरिका पर हमला करने का खतरा, FBI की चेतावनी ने मचाया हड़कंप

तेहरान  ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद से पश्चिम एशिया में भीषण जंग छिड़ चुकी है। बौखलाए ईरान ने इजरायल के साथ साथ सऊदी अरब, बहरीन, UAE और कतर जैसे खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों को लगातार निशाना बनाया है। अब खबर है कि ईरान सीधा अमेरिका पर ही हमला बोल सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान अमरीकी राज्य कैलिफोर्निया पर हमला करने की योजना बना रहा है। अमेरिका की फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ने हाल ही में कैलिफोर्निया के पुलिस डिपार्टमेंट को चेतावनी दी है कि ईरान पश्चिमी तट पर ड्रोन के जरिए अमेरिकियों पर हमला कर सकता है। फर्स्टपोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक FBI के अधिकारियों ने एक अलर्ट जारी किया है जिसमें अमेरिकी सरकार को चेतावनी दी गई है कि युद्ध जारी रहा तो ईरान के बदले के लिए तैयार रहें। अलर्ट पर कैलिफोर्निया रिपोर्ट में ABC न्यूज की एक रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। इसमें फरवरी के आखिर में भेजे गए अलर्ट के मुताबिक, "हमें हाल ही में जानकारी मिली है कि फरवरी 2026 की शुरुआत में, ईरान कथित तौर पर अमेरिकी होमलैंड के तट पर एक अनजान जहाज से UAV का इस्तेमाल करके अचानक हमला करने की सोच रहा था। अगर US ईरान पर हमला करता है तो ईरान कैलिफोर्निया को निशाना बना सकता है।" जानकारी के मुताबिक राज्य इसे लेकर हाई अलर्ट पर है। डोनाल्ड ट्रंप को भी दी थी धमकी इससे पहले ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी अपनी जान बचाने की चेतावनी दी थी। ईरान के एक शीर्ष सुरक्षा अधिकारी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए ट्रंप को धमकी दी। अली लारिजानी ने बीते मंगलवार को एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ''ईरान जैसा बलिदानी राष्ट्र तुम्हारी खोखली धमकियों से नहीं डरता। तुमसे बड़े भी ईरान को खत्म नहीं कर सके। सावधान रहें, कहीं खुद आपका सफाया ना हो जाए।'' ईरान ने रखी शर्तें इस बीच ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए 3 शर्तें रख दी हैं। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने बुधवार को कहा है कि अमेरिका को ईरान के अधिकारों को मान्यता देनी ही होगी और यह गारंटी देनी होगी कि देश पर भविष्य में हमले नहीं होंगे। बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किए गए एक बयान में, पेजेशकियन ने कहा कि जंग का हल सिर्फ इन शर्तों के जरिए ही निकलेगा। पेजेशकियन ने लिखा, "इस जंग को, जिसे यहूदियों और अमेरिका ने शुरू किया है, को खत्म करने का एक मात्र तरीका है, ईरान के कानूनी अधिकारों को मान्यता देना, युद्ध का हर्जाना देना और भविष्य में हमले के खिलाफ पक्की अंतर्राष्ट्रीय गारंटी देना।"