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जल संरक्षण को दिनचर्या का हिस्सा बनाने, जल संरचनाओं की रक्षा और जल के प्रति जिम्मेदार सोच अपनाने का मुख्यमंत्री ने किया आह्वान

मुख्यमंत्री  साय और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री  सी. आर. पाटिल की संयुक्त अध्यक्षता में “जल संचय-जन भागीदारी 2.0” अभियान के क्रियान्वयन की हुई गहन समीक्षा केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री ने छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के क्षेत्र में हो रहे कार्यों और नवाचारों की सराहना की 31 मई तक 10 लाख जल संरचनाओं का लक्ष्य, जल सुरक्षा को मिलेगा नया आधार डबरी निर्माण से बढ़ेगा भू-जल स्तर, किसानों को मिलेगा अतिरिक्त लाभ रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की संयुक्त अध्यक्षता में आज नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित बैठक में प्रदेश में “जल संचय-जन भागीदारी 2.0” अभियान के क्रियान्वयन की गहन समीक्षा की गई। केंद्रीय मंत्री श्री पाटिल इस बैठक में वर्चुअली शामिल हुए और बैठक को संबोधित किया। इस दौरान बिलासपुर, दुर्ग और सूरजपुर जिले के कलेक्टरों ने अपने-अपने जिलों में अभियान के अंतर्गत संचालित कार्यों और गतिविधियों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जल संकट 21वीं सदी की केवल गंभीर पर्यावरणीय ही नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और विकासात्मक चुनौती भी बन चुका है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण को स्थायी और प्रभावी बनाने के लिए जनभागीदारी अनिवार्य है।उन्होंने देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के उस संदेश का उल्लेख किया, जिसमें पानी के उपयोग को प्रसाद के समान मानते हुए जल के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन से प्रेरित होकर राज्य सरकार जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अभियान के पहले चरण में छत्तीसगढ़ ने देशभर में द्वितीय स्थान प्राप्त किया तथा विभिन्न जिलों को भी अलग-अलग श्रेणियों में पुरस्कार मिले। पहले चरण में सामुदायिक भागीदारी के मॉडल पर कार्य करते हुए बड़े पैमाने पर बोरवेल रिचार्ज, रूफटॉप रेनवॉटर हार्वेस्टिंग, रिचार्ज शाफ्ट, सोक पिट और ओपनवेल रिचार्ज जैसी संरचनाओं का निर्माण किया गया। साय ने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में 5 क्रिटिकल और 21 सेमी-क्रिटिकल भू-जल ब्लॉक चिन्हित हैं। वर्ष 2024 की तुलना में 2025 में इनमें से 5 ब्लॉकों में भू-जल निकासी में कमी और भू-जल स्तर में सुधार दर्ज किया गया है, जो जल संरक्षण प्रयासों के सकारात्मक परिणामों का संकेत है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अभियान के दूसरे चरण “जल संचय-जन भागीदारी 2.0” के अंतर्गत तकनीक आधारित और अधिक परिणाममूलक रणनीति अपनाई जा रही है। राज्य सरकार ने 31 मई 2026 तक 10 लाख जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया है। मुख्यमंत्री ने इसे जल सुरक्षा की दिशा में प्रदेश का ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि राज्य के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर एक विशेष पहल के तहत 10 एकड़ से अधिक भूमि वाले चार लाख से अधिक किसानों को अपने खेतों में डबरी निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस कार्य में जिला प्रशासन के साथ-साथ औद्योगिक समूहों का सहयोग भी लिया जा रहा है। इन डबरियों से भू-जल स्तर में वृद्धि के साथ किसानों को सिंचाई एवं मछली पालन जैसी अतिरिक्त सुविधाएँ मिलेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि दूसरे चरण में सभी जल संरचनाओं की जियोटैगिंग, ग्राम पंचायतों के वॉटर बजट तथा जल सुरक्षा योजनाओं के निर्माण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही गांवों के युवाओं को “जल मित्र” के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि अभियान को गति मिल सके। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि क्रिटिकल और सेमी-क्रिटिकल ब्लॉकों पर विशेष फोकस रखते हुए सेमी-क्रिटिकल ब्लॉकों में 40 प्रतिशत तथा क्रिटिकल ब्लॉकों में 65 प्रतिशत जल संरक्षण कार्यों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने प्रदेशवासियों से जल संरक्षण को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने, जल संरचनाओं की रक्षा करने और जल के प्रति जिम्मेदार सोच अपनाने का आह्वान भी किया। केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के क्षेत्र में हो रहे कार्यों और नवाचारों की सराहना की। उन्होंने कहा कि गत वर्ष जल संरक्षण के प्रयासों में छत्तीसगढ़ देशभर में दूसरे स्थान पर रहा, जो राज्य के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने सितंबर 2024 को सूरत से ‘जल संचय जन भागीदारी अभियान’ की शुरुआत की थी और ‘कर्मभूमि से मातृभूमि के लिए जल संचयन में सहयोग’ का आह्वान किया था। इस अभियान का उद्देश्य जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देना है। केंद्रीय मंत्री पाटिल ने प्रदेश के समस्त कलेक्टरों से मनरेगा के तहत जल संचय कार्यों के लिए प्राप्त राशि का पूर्ण और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने राजनांदगांव प्रवास के दौरान एक महिला सरपंच द्वारा स्वयं के प्रयासों से जल संचयन के लिए किए गए उल्लेखनीय कार्यों की प्रशंसा की। इसके साथ ही उन्होंने जल संचय में व्यापक जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो तथा जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव कांताराव और छत्तीसगढ़ के समस्त कलेक्टर वर्चुअली उपस्थित थे।

क्या जंग के मुहाने पर हैं अमेरिका और ईरान: सैन्य ताकत, पलटवार की योजना और युद्ध के असर

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष की आहट बढ़ती जा रही है। डोनाल्ड ट्रंप ने दो एयरक्राफ्ट कैरियर बेड़ों को ईरान की खाड़ी पर तैनात करने  के आदेश दे दिए। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया। ईरान ने भी होर्मुज जलडमरूमध्य में एक युद्धाभ्यास कर इस क्षेत्र को पूरी तरह बंद करने का संकेत दिया, जो वैश्विक तेल सप्लाई में बाधा पहुंचाने वाला कदम साबित हो सकता है। यानी अमेरिका से लेकर यूरोप और अफ्रीका से लेकर पूरे एशिया के लिए आने वाले दिन कूटनीतिक स्तर पर काफी अहम होने वाले हैं। ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर अमेरिका और ईरान के बीच हालिया विवाद क्यों और कब से उभरा है? अमेरिका की तरफ से कौन से हथियार और बेड़े पश्चिम एशिया की तरफ भेजे गए हैं? ईरान इस स्थिति से निपटने के लिए कैसे तैयारी कर रहा है? अगर दोनों देशों के बीच संघर्ष भड़कता है तो इसका क्या असर हो सकता है? पहले जानें- ईरान-अमेरिका के बीच कैसे-क्यों भड़का है तनाव? ईरान-अमेरिका के बीच तनाव ईरान में महंगाई को लेकर विरोध प्रदर्शनों और उसके खिलाफ सरकारी कार्रवाई के बीच बढ़ा। तनाव की एक और वजह इस दौरान अमेरिका की ओर से पश्चिम एशिया में की गई सैन्य तैनाती भी रही, जिसके जरिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के अयातुल्ला शासन को खत्म करने की चेतावनी दे रहे हैं। इन सबके साथ ही ईरान का परमाणु कार्यक्रम हमेशा से ही दोनों पक्षों में तनाव का बड़ा कारण रहा है। 1. परमाणु कार्यक्रम अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना चाहता है और राष्ट्रपति ट्रंप एक नए परमाणु समझौते के लिए दबाव बना रहे हैं। 2. आंतरिक विरोध प्रदर्शन दिसंबर 2025 में ईरान में बढ़ती कीमतों और गिरती मुद्रा के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों पर ईरानी सरकार की सख्त कार्रवाई हुई। इसमें हजारों लोगों के मारे जाने की खबर है। बताया जाता है कि इन घटनाओं को खुद अमेरिका ने भड़काया, ताकि वह ईरान के मामलों में दखल दे सके। 3. क्षेत्रीय सुरक्षा ईरान का लगातार बढ़ता बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और इस्राइल जैसे अमेरिकी सहयोगियों पर बढ़ता खतरा भी दोनों देशों के बीच तनाव का बड़ा कारण है। इसके अलावा सऊदी अरब, यूएई भी अलग-अलग मौकों पर ईरान को लेकर खतरा जताते रहे हैं। अमेरिका की तरफ से कौन से हथियार और बेड़े पश्चिम एशिया की तरफ भेजे गए हैं? अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के सूत्रों और सैटेलाइट तस्वीरों के हवाले से अमेरिकी मीडिया ने दावा किया है कि ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में 2003 के इराक आक्रमण के बाद से अब तक की सबसे बड़ी सैन्य लामबंदी की गई है। इन सैन्य बेड़ों में अमेरिका के सबसे घातक एफ-22 रैप्टर लड़ाकू विमान से लेकर सबसे बड़े और खतरनाक युद्धपोत यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड शामिल हैं। 1. नौसैनिक बेड़े विमानवाहक पोत: अमेरिका ने इस क्षेत्र में दो परमाणु-संचालित विमानवाहक पोत तैनात किए हैं। पहला यूएसएस अब्राहम लिंकन है, जो जनवरी के अंत में अरब सागर पहुंच चुका है। इसके बाद दुनिया के सबसे बड़े और आधुनिक विमानवाहक पोत यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड को भी क्षेत्र में पहुंचने का आदेश दिया गया है। यह मौजूदा समय में अटलांटिक महासागर से पश्चिम एशिया के रास्ते पर है। विध्वंसक पोत: वर्तमान में क्षेत्र में कुल 13 विध्वंसक पोत तैनात किए जा चुके हैं। इनमें यूएसएस अब्राहम लिंकन के साथ आए तीन प्रमुख पोत- यूएसएस फ्रैंक ई. पीटरसन जूनियर, यूएसएस स्प्रुआंस और यूएसएस माइकल मर्फी शामिल हैं। ये पोत उन्नत रडार और बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणालियों से लैस हैं। 2. वायु शक्ति और लड़ाकू विमान लड़ाकू विमान: अमेरिका ने बड़ी संख्या में एफ-22 रैप्टर और एफ-35 लाइटनिंग II जैसे स्टील्थ फाइटर जेट तैनात किए हैं। इनके अलावा एफ-15 और एफ-16  फैल्कन लड़ाकू विमानों की स्क्वाड्रन भी भेजी गई हैं। सहायक विमान: हवाई अभियानों के संचालन के लिए ई-3 सेंट्री (अवाक्स) टोही विमान, केसी-135 रिफ्यूलिंग टैंकर और ई-11 युद्धक्षेत्र संचार विमान तैनात किए गए हैं। ड्रोन और बमवर्षक: जॉर्डन के मुवाफ्फाक साल्टी एयर बेस पर कम से कम पांच एमक्यू-9 रीपर ड्रोन देखे गए हैं। इसके अलावा, डिएगो गार्सिया द्वीप पर बी-2 स्टील्थ बमवर्षक विमानों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है। इन्हीं बी-2 बमवर्षक विमानों के जरिए अमेरिका ने पिछले साल ऑपरेशन मिडनाइट हैमर को अंजाम दिया था और ईरान के परमाणु ठिकानों पर जीबीयू-57 बम बरसाए थे। 3. मिसाइल और रक्षा प्रणालियां हमलावर मिसाइलें: अमेरिकी युद्धपोत टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों से लैस हैं, जिनका इस्तेमाल पहले भी ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले के दौरान रक्षा व्यवस्थाओं को ध्वस्त करने के लिए किया जा चुका है। हवाई रक्षा प्रणालियां: ईरानी मिसाइलों के जवाबी हमले से सुरक्षा के लिए पेंटागन ने क्षेत्र में अतिरिक्त पैट्रियट और एयर डिफेंस सिस्टम (THAAD) हवाई रक्षा प्रणालियां तैनात की हैं। इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर: विमानवाहक पोतों पर इलेक्ट्रॉनिक-वारफेयर विमान और एएन/एसएलक्यू-25ए निक्सी जैसे डिकॉय सिस्टम भी मौजूद हैं, जो दुश्मन के हथियारों को भ्रमित कर सकते हैं और अपने किसी भी हथियार को हमले से बचा सकते हैं। मौजूदा समय में कहां है अमेरिका का यह सैन्य जमावड़ा? अमेरिका का यह सैन्य जमावड़ा ईरान के इर्द-गिर्द कई रणनीतिक स्थानों पर तैनात है, इनमें प्रमुख एयरबेस और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र जॉर्डन, सऊदी अरब और ओमान के पास स्थित हैं। इसके अलावा अरब सागर, हिंद महासागर, बहरीन और कतर में भी अमेरिका के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने और सुविधाएं मौजूद हैं। पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में लगभग 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। ईरान कैसे कर रहा अमेरिका के हमले का जवाब देने की तैयारी? अमेरिका के बढ़ते सैन्य दबाव के जवाब में ईरान ने भी अपनी सैन्य और रणनीतिक तैयारियां तेज कर दी हैं। 1. सैन्य हाई अलर्ट और जवाबी हमले की चेतावनी 25 जनवरी को ईरान ने घोषणा की कि उसके सशस्त्र बल पूर्ण सतर्कता की स्थिति में आ गए हैं। ईरान के संयुक्त राष्ट्र मिशन ने चेतावनी दी है कि यदि उसे उकसाया गया, तो वह ऐसा जवाब देगा जैसा पहले कभी नहीं देखा गया। 2. रणनीतिक नौसैनिक अभ्यास होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान ने अपनी ताकत दिखाने के लिए कई लाइव-फायर ड्रिल्स की हैं। ईरान का यह अभ्यास इसलिए भी अहम है, क्योंकि … Read more

बाबरी मस्जिद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

नई दिल्ली. भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शुक्रवार को राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले की प्रभावी सुनवाई न हो, इसके लिए कई कोशिशें की गई थीं.  उन्होंने ये बातें वरिष्ठ अधिवक्ता अनिरुद्ध शर्मा और श्रीधर पोटाराजू द्वारा लिखी 'केस फॉर राम- द अनटोल्ड इनसाइडर्स स्टोरी' नामक किताब के मौके पर इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में कही हैं.  'वकीलों ने किया वॉकआउट' मेहता ने कहा कि कभी-कभी अप्रत्यक्ष कोशिशें तो कभी-कभी बहुत ज्यादा स्पष्ट प्रयास किए गए, ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि मामले की सुनवाई न हो. उन्होंने एक घटना का जिक्र किया, जिससे उनके मन में बहुत कड़वाहट पैदा हो गई. उन्होंने कहा, 'जब देरी करने के सभी कोशिशें विफल हो गईं तो  तो दो प्रख्यात वकीलों ने कोर्ट से वॉकआउट कर दिया, ये कुछ ऐसा था जो हमने केवल संसद में सुना था.'  सॉलिसिटर जनरल ने सुनवाई को रोकने के लिए किए गए कथित प्रयासों पर जोर देते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों ने न्यायिक राजनेता का अद्भुत कौशल दिखाया, जिससे ये मामला सही दिशा में आगे बढ़ा. 'हर मामले में टर्निंग पॉइंट था मामला' मेहता ने कहा कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामला कई मायनों में एक महत्वपूर्ण मोड़ था और वरिष्ठ अधिवक्ता अनिरुद्ध शर्मा और श्रीधर पोताराजू द्वारा लिखित पुस्तक पूरे घटनाक्रम की पूरी कहानी बताती है. उन्होंने कहा कि ये सिर्फ तथ्यों का संकलन नहीं है. ये इतिहास नहीं, बल्कि घटनाओं की जीवंत कथा है. ये मामला इतिहास से जुड़ा था और इतिहास बनाने वाला था. कानूनी, सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक- हर दृष्टि से ये एक टर्निंग पॉइंट था. उन्होंने बताया कि वरिष्ठ अधिवक्ताओं अनिरुद्ध शर्मा और श्रीधर पोटाराजू द्वारा लिखी गई ये किताब पूरे क्रम को बयान करती है. इस कार्यक्रम में भारतीय पुरातत्वविद् के के मोहम्मद और वरिष्ठ अधिवक्ता गुरु कृष्ण कुमार ने भी भाग लिया. दरअसल, तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 2019 के ऐतिहासिक फैसले में अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण की सर्वसम्मति से अनुमति दी थी. अदालत ने अपने फैसले में पूरे 2.77 एकड़ भूखंड को मंदिर के लिए आवंटित किया गया और मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ अलग प्लॉट दिया गया था.

झारखंड विधानसभा में ₹6450 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश

रांची. झारखंड विधानसभा का बजट सत्र शुरू हो चुका है. आज (शुक्रवार, 20 फरवरी) सत्र के तीसरे दिन वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने 6450 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया. आज की कार्यवाही में प्रश्नकाल के दौरान जेएलकेएम विधायक जयराम महतो ने प्रवासियों के पंजीकरण को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने सदन में सरकार से पूछा कि क्या ये बात सही है कि राज्य में 16 लाख से ज्यादा प्रवासी मजदूर हैं, लेकिन सिर्फ 1 लाख 91 हजार ही पंजीकृत है. प्रवासी श्रमिकों के पंजीकरण और सुविधाओं के लिए झारखंड प्रवासी श्रमिक आयोग का गठन करने का विचार कर रही है. प्रवासी मजदूर के निधन पर 5 लाख मिले. जयराम महतो के सवाल का जवाब देते हुए मंत्री संजय यादव ने बताया कि 2 लाख 29 हजार प्रवासी मजदूर रजिस्टर्ड हैं. प्रचार प्रसार के माध्यम से रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया जारी है. इस मामले पर सरकार और विभाग काफी गंभीर है. किसी को भी अगर विदेशों में परेशानी हुई है तो सरकार आगे आई है. प्रवासी नियंत्रण कक्ष रांची में है. कोई लापरवाही नहीं होती, इसीलिए आयोग की कोई जरूरत नहीं है. प्रवासी मजदूरों के निधन पर राशि बढ़ाने पर विचार हो सकता है. वहीं चन्द्रदेव महतो ने पूछा कि क्या प्रवासी नियंत्र कक्ष बनाया गया गया है. सरकार ने अलग से डायरेक्टरेट बनाने का आश्वासन दिया था. अभी काम करने वाले एनजीओ है, पावर सीमित है. इस पर मंत्री ने बताया कि प्रवासी मजदूरों के लिए जो जरूरी होगा, वो किया जाएगा. बाबूलाल मरांडी ने पूछा कि बाहर राज्यों में भाषा की भी दिक्कत होती है. सरकार से आग्रह है कि उन शहरों में कोई मैकेनिज्म तैयार करें तो मजदूरों की कठिनाई दूर हो सकती है. मृत को 50 हजार मिलता है, लेकिन उनके घर उजड़ जाते हैं. आवास सुनिश्चित हो, सरकारी राशन मिले और शिक्षा की व्यवस्था भी सुनिश्चित हो. हम सब का यह दायित्व बनता है. वहीं अरूप चैटर्जी ने कहा कि काम के बाद भी कई बार मजदूरों को हाजरी नहीं दी जाती. एक अधिकारी अगर उन राज्यों में बैठे तो उन्हें मदद मिलेगी और निदेशालय जल्द से जल्द बने. मानसिक तौर पर प्रताड़ित मजदूर जब आत्महत्या करता है तो उस मजदूर के बॉडी लाने की भी व्यवस्था की जानी चाहिए? इस पर मंत्री संजय यादव ने बताया कि मामला गंभीर हैं. सीएम से बात करके राज्य हित में फैसला लिया जाएगा. विधायक निर्मल महतो ने पूछा कि 10 हजार सहिया धरने पर बैठी हैं. पूरे राज्य में 2007 से 42000 सहिया, सहिया साथी 2500 और 688 टीटी सहिया स्वास्थ्य विभाग में कार कर रहे हैं. कोरोनाकाल में कई सहियाओं की जान गई है. इस सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि राज्य में लगभग राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में 64 हजार सहिया हैं. सहिए के प्रति सरकार संवेदनशील है. कोरोनाकाल में सहियाओं ने बढ़-चढ़ कर भाग दिया. कोरोनाकाल में 1 महिला रेनी देवी की मौत हुई है. सरकार ने हर संभव मदद की है. विधायक ने कहा कि प्रतिमाह मानदेय बढ़ाया जाना चाहिए. एम्बुलेंस की व्यवस्था बढ़े. धरना पर सरकार बात करे. मंत्री ने कहा कि इंसेंटिव के तहत रखा जाता है. विधायक स्टीफन मरांडी ने कहा कि मैया सम्मान में ढाई हजार रुपये स्वास्थ्य सहिया का वेतन बढ़ाया जाए. मंत्री ने कहा कि हर माह इंटेंसिव के तहत काम होता है. जो भी कार्यक्रम चलाए जाते है. उसमें इंटेंसिव मिलता है. प्रति माह 10 से 1 हजार आमदनी होती है. 8 मार्च को एक साल का एकमुश्त राशि महिला दिवस पर सहियाओं को दी जाएगी. 

अमित शाह पर टिप्पणी विवाद: सुल्तानपुर कोर्ट पहुंचे राहुल गांधी, बयान के बाद लौटे, अगली सुनवाई 9 मार्च को

 सुल्तानपुर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को सुल्तानपुर में एमपी-एमएलए कोर्ट में अपना बयान दर्ज कराया। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताते हुए खुद को बेगुनाह बताया। कोर्ट ने मामले में सफाई साक्ष्य पेश करने के लिए अगली तारीख 9 मार्च निर्धारित की है। करीब आधे घंटे तक कोर्ट कक्ष का दरवाजा बंद करके मानहानि मामले में धारा 313 के तहत बयान दर्ज करने की प्रक्रिया चली। इस दौरान अदालत परिसर में समर्थकों की भारी भीड़ जुटी रही। कोर्ट कक्ष से लेकर बाहर तक कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू रही। भीड़ को नियंत्रित करने में सुरक्षाकर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती गई। अब मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च को होगी। जब बचाव पक्ष की ओर से सफाई साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएंगे। इससे पहले वह लखनऊ एयरपोर्ट से सड़क मार्ग से सुल्तानपुर पहुंचे। वहां एमपी-एमएलए कोर्ट में पेश हुए। उन्हें बयान दर्ज कराने के लिए कोर्ट ने आज आखिरी मौका दिया था। इस दौरान दीवानी न्यायालय की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। इससे पहले डॉग स्क्वायड ने परिसर की तलाशी ली। सुरक्षा में कोई चूक न हो, इसके लिए एक एएसपी व चार सीओ समेत भारी पुलिस बल को तैनात हैं। यह है पूरा मामला दरअसल, कर्नाटक में एक प्रेसवार्ता के दौरान राहुल गांधी द्वारा केंद्रीय मंत्री अमित शाह पर अपमानजनक टिप्पणी का आरोप है। इसे लेकर जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष व भाजपा नेता विजय मिश्र ने राहुल गांधी के विरुद्ध दीवानी में मानहानि का परिवाद दायर किया था। इसकी सुनवाई चल रही है। इस मामले में राहुल गांधी 26 जुलाई 2024 को पेश हुए थे। उसके बाद से वह सुनवाई की तिथि के दिन अनुपस्थित होते रहे। 19 जनवरी को जब वह हाजिर नहीं हुए तो अदालत ने उन्हें 20 फरवरी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया था। 

मॉडर्न जेल के ऊपर तंबाकू और सिगरेट लेकर उड़ते ड्रोन को पत्थर मारकर गिराया

कपूरथला. पंजाब के कपूरथला में देर रात मॉडर्न जेल परिसर के ऊपर एक ड्रोन उड़ता हुआ देखा गया। हालांकि, जेल अधिकारियों ने ड्रोन को गिरा दिया। अगली सुबह सर्च करने पर एक सिक्योरिटी टावर के पास भूरे रंग का ड्रोन मिला, और उससे तंबाकू, सिगरेट, रोलिंग पेपर और एक लाइटर बरामद हुआ। पंजाब की जेल में ड्रोन से सामान पहुंचाने का यह पहला मामला है, जिससे जेल प्रशासन की चिंताए बढ़ गई है। बेशक जेल प्रशासन की मुस्तैदी ने ड्रोन से सामान अंदर पहुंचाने के मंसूबे को नाकाम कर दिया है, लेकिन यह जेल प्रशासन के लिए खतरे की घंटी है। एसपी जेल के अनुसार, ड्रोन को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है और अज्ञात के खिलाफ प्रीजन एक्ट, बीएनएस और एयरक्राफ्ट एक्ट के तहत केस दर्ज करके जांच शुरू कर दी गई है। सुभानपुर रोड पर थेह कांजला स्थित मॉडर्न जेल कपूरथला के सहायक सुपरिटेंडेंट धीरज कुमार ने थाना कोतवाली की पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 17/18 की दरमियानी रात को वह ड्यूटी पर तैनात थे। रात करीब 11:30 बजे गश्त के दौरान जेल की सीमा के ऊपर एक ड्रोन मंडराता देखा। उन्होंने तुरंत तत्परता दिखाते हुए ड्रोन को गिरा दिया। फिर जेल गार्ड के साथ मिलकर पूरे जेल परिसर की तलाशी शुरू कर दी, लेकिन अंधेरा होने के कारण ड्रोन नहीं मिला। अगली सुबह होने पर उन्होंने जेल गार्ड के साथ फिर से पूरे जेल परिसर की तलाशी ली शुरू कर दी। सुबह करीब आठ बजे सुरक्षा टावर नं.9 के पीछे बैरक नं.3 के पास मिनी 255 कंपनी का एक भूरे रंग का ड्रोन पड़ा मिला। उसके साथ टेप से कुछ सामान लिपटा हुआ था, जिसे खोलने पर उसमें से तंबाकू, सिगरेट, रोलिंग पेपर और पांच लाइटर बरामद हुए। एसपी जेल श्यामल ज्योति ने बताया कि ड्रोन के आपरेटिंग कंट्रोल का पता लगाने के लिए उसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। वहां से रिपोर्ट आने पर पता चलेगा कि ड्रोन कहां से आया है। इसके अलावा उन्होंने जेल के अंदर चौकसी बढ़ा दी है। इस तरह की गतिविधियां कतई बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।

आईटी और BPO की नौकरियां 4 साल में हो जाएंगी खत्म: खोसला

नई दिल्ली. मशहूर भारतीय अमेरिकी कारोबारी और इन्वेस्टर विनोद खोसला ने बड़ी भविष्यवाणी की है। उनका कहना है कि आईटी और बीपीओ सर्विसेज का भविष्य ज्यादा दिन का नहीं है। उन्होंने कहा कि यह उद्योग 2030 तक समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय आईटी कंपनियों को सलाह दी है कि यदि वे भविष्य में बने रहना चाहते हैं तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर तेजी से काम करें। भविष्य में यदि वे दुनिया भर को AI सर्विसेज मुहैया करा सकेंगी तो उनके लिए बचे रहना आसान हो जाएगा। उन्होंने कहा कि कोई भी भविष्यवाणी करना कठिन है, लेकिन हमारा अनुमान है कि 2030 से 2035 तक आईटी और बीपीओ का बिजनेस समाप्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि हम अपने पुराने बिजनेस पर ही नहीं टिके रह सकते। इसकी बजाय हमें उन्हें नई सेवाएं देनी होंगी। खोसला ने कहा कि दुनिया अभी AI के साथ तालमेल बिठाने में उतनी सक्षम नहीं है, जितना भारत है। अहम बात है कि उनके पास या तो पश्चिम से तकनीक लेने का विकल्प है, जो बहुत महंगा है। या फिर अफ्रीका और साउथ ईस्ट एशिया के देश हैं, जिनके पास जानकारी काफी कम है। खोसला वेंचर्स के संस्थापक ने कहा कि भारतीय कंपनियां पूरी दुनिया में AI सर्विसेज दे सकती हैं। यह हमारे लिए सबसे अच्छा अवसर है। मुख्य बात यही है कि जो इस समय में तेजी से आगे बढ़ेंगे या बदलाव को स्वीकार करेंगे, उनके पास ही अवसर होंगे। विनोद खोसला ने इकनॉमिक टाइम्स से बातचीत में इस सवाल का भी जवाब दिया कि यदि AI की स्पीड बढ़ी तो नौकरियां कम होंगी और उससे बचने का रास्ता क्या है। उन्होंने कहा कि हर देश आने वाले समय में इस मामले में गति पकड़ेगा। आप देखेंगे कि एआई के चलते उत्पादकता बढ़ेगी और कम लोगों की जरूरत होगी। अगले 15 साल इस दुनिया के लिए अहम होने वाले हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में चीजें और मनोरंजन सस्ते हो जाएंगे। यदि देखें तो 2050 तक काफी बदलाव हो जाएंगे। यही नहीं उन्होंने भारत के लोगों की सुविधा को लेकर भी बात की। 'AI से हर भारतीय को मिलेगा पर्सनल डॉक्टर और किसानों को वैज्ञानिक' खोसला ने कहा कि ऐसा भी संभव हो सकता है कि हर भारतीय के पास अपना एक पर्सनल डॉक्टर हो। यह हर वक्त उपलब्ध होगा। इससे नागरिकों के लिए हेल्थकेयर की सुविधा थोड़ी सस्ती हो जाएगी, जो फिलहाल काफी महंगी है। यह सिस्टम आधार से लिंक हो सकता है। इसके अलावा देश में 25 करोड़ बच्चे हैं, जो AI ट्यूटर का ही इस्तेमाल करते हुए पढ़ाई कर सकते हैं। देश में लाखों किसान हैं, जो बेहद छोटी जोत में काम करते हैं। उनके पास ज्यादा समझ नहीं होती। ऐसे लोगों को कृषि वैज्ञानिक जैसी सेवाएं एआई के माध्यम से मिल सकती हैं।

MP में महुआ से बनी मदिरा को अन्य राज्यों में ड्यूटी फ्री कराने की होगी कोशिश

भोपाल. प्रदेश के आदिवासियों के स्व-सहायता समूहों द्वारा महुआ से निर्मित मदिरा को अन्य राज्यों में ड्यूटी मुक्त कराने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए उनके राज्यों की हेरिटेज अथवा विशेष मदिरा को प्रदेश में ड्यूटी फ्री किया जाएगा। यह प्रविधान आबकारी नीति 2026 में किया गया है। इसके साथ ही शराब ठेके में साधारण बैंक गारंटी एवं सावधि जमा (एफडी) मान्य नहीं की जाएगी। प्रतिभूति राशि के रूप में सिर्फ ई-चालान/ई बैंक गारंटी ही मान्य होंगी। 2021-22 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा महुआ को हेरिटेज लिकर के रूप में मान्यता दी गई है। इसके तहत पारंपरिक महुआ से हेरिटेज मदिरा बनाने के लिए सरकार द्वारा आदिवासी स्वयं सहायता समूहों को लाइसेंस, आधुनिक प्रशिक्षण और कर छूट दी जा रही है। इसे अन्य राज्यों में प्रोत्साहित करने के लिए नीति में प्रविधान किया गया है कि कोई राज्य यदि महुआ से बनी मप्र की मदिरा को ड्यूटी फ्री करता है तो यहां भी उनके उत्पाद को ड्यूटी फ्री किया जा सकेगा। आरक्षित मूल्य में 20 प्रतिशत की वृद्धि प्रदेश की सभी 3,553 शराब दुकानों की नीलामी ई-टेंडर और ई-आक्शन के माध्यम से होगी। दुकानें आरक्षित मूल्य में 20 प्रतिशत की वृद्धि के साथ नीलाम होंगी। आरक्षित मूल्य के आधार पर जिले के समूह को तीन-चार बैच में वर्गीकृत किया जाएगा। नीति में शराब की ड्यूटी दरें, विनिर्माण इकाई, बार आदि की लाइसेंस फीस यथावत रखी है। शराब विनिर्माताओं को पूर्व वर्षों की तरह अपने उत्पाद की कीमत के अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है। विनिर्माता पोर्टल पर निर्धारित व्यवस्था अनुसार अपने उत्पाद की कीमत घोषित कर सकेंगे। देश के बाहर मदिरा के निर्यात को प्रोत्साहन देने लिए फीस में संशोधन, लेबल पंजीयन में सरलीकरण आदि प्रविधान किया गया है।

लाउड स्पीकर पर आरती पर दो पक्षों में जमकर पथराव

जबलपुर. जबलपुर जिले की सिहोरा तहसील (MP News) में गुरुवार रात करीब नौ बजे आपसी विवाद के बाद दो पक्ष भिड़ गए। एक धार्मिक स्थल के बाहर लगी रैलिंग टूटने से लोग आक्रोशित हो गए। इससे दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर पथराव कर दिया। इसमें कुछ लोगों के आंशिक घायल होने की सूचना है। पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर उपद्रवियों को खदेड़ा और अश्रु गैस के गोले भी छोड़े। तनाव को देखते हुए मौके पर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह और पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय पहुंचे। अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। पुलिस ने हालात नियंत्रण का दावा करते हुए जांच के बाद मामला दर्ज करने की बात कही है।

यूपी की सियासत गरम: मोहन भागवत से मिले दोनों डिप्टी CM, 2027 चुनाव की रणनीति पर चर्चा?

लखनऊ . उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत की हैट्रिक के लिए खुद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत मैदान में उतर चुके हैं. गोरखपुर प्रवास के बाद वे लखनऊ पहुंचे।  जहां पहले वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ 40 मिनट तक मुलाक़ात की. गुरुवार को मेरठ रवानगी से पहले उनकी मुलाक़ात दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पटाहक से हुई. इन मुलाकातों को राजनीतिक और संगठनात्मक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, आरएसएस प्रमुख ने हिंदुत्व के अजेंडे को धार देने और जाति की राजनीति को ख़त्म करने को लेकर चर्चा की है. इसकी वजह यह है कि हाल के दिनों में जिस तरह से यूजीसीबिल और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का मुद्दा उठा उससे, हिन्दू वोट बंटने का खतरा है. इसका सीधा नुकसान बीजेपी को इसलिए भी है, क्योंकि बीजेपी 80 बनाम 20 की राजनीति करती है. यानी सपा का पीडीए और बीजेपी का दलित वोट भी सिका हिस्सा है. सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में मोहन भागवत से करीब 30-40 मिनट तक बातचीत की. यह मुलाकात आरएसएस के शताब्दी वर्ष के संदर्भ में बताई जा रही है, लेकिन सियासी गलियारों में इसे 2027 के चुनावी रोडमैप, हिंदुत्व एजेंडा, संगठन-सरकार समन्वय और सामाजिक समीकरणों पर रणनीति बनाने के रूप में देखा जा रहा है. मुलाकात के दौरान प्रदेश की राजनीतिक स्थिति, संगठन की भूमिका और आगामी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है. किस मुद्दे पर हुई होगी चर्चा? मुख्यमंत्री के साथ मुलाकात के बाद, गुरुवार सुबह मोहन भागवत ने उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक से भी अलग-अलग मुलाकात की. सरस्वती कुंज में हुई इन बैठकों में हिंदुत्व से जुड़े मुद्दों, जातिगत राजनीति, सामाजिक समरसता और चुनावी रणनीति पर विचार-विमर्श होने की बात कही जा रही है. हालांकि, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से मोहन भागवत ने जाति को भूलने और खुद को हिंदू बताने का आह्वान किया है उससे साफ़ है कि 2027 के लिए सियासी बिसात तैयार की जा रही है. इन मुलाकातों से स्पष्ट है कि आरएसएस 2027 के चुनाव को लेकर प्रदेश स्तर पर मजबूत समन्वय और तैयारी में जुटा हुआ है. आरएसएस और बीजेपी के बीच समन्वय मजबूत होगा यह मुलाकातें ऐसे समय हो रही हैं जब उत्तर प्रदेश में सामाजिक-राजनीतिक माहौल गर्म है और विभिन्न दल अपनी-अपनी रणनीतियां तैयार कर रहे हैं. आरएसएस की ओर से हिंदू समाज में एकता, सतर्कता और सामाजिक सद्भाव पर जोर दिया जा रहा है, जबकि सरकार-संगठन के बीच बेहतर तालमेल को चुनावी सफलता की कुंजी माना जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये मुलाकातें न केवल भाजपा की चुनावी तैयारियों को मजबूती देंगी, बल्कि संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाएंगी.