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सीएम योगी ने स्किल डेवलपमेंट, स्टार्टअप, डेटा सेंटर और रोजगार सृजन पर विस्तार से रखा पक्ष

उत्तर प्रदेश इमर्जिंग टेक्नोलॉजी और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसरः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सीएम योगी ने स्किल डेवलपमेंट, स्टार्टअप, डेटा सेंटर और रोजगार सृजन पर विस्तार से रखा पक्ष एआई, डिजिटल टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, डेटा साइंस, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों में नए सेंटर स्थापित किएः मुख्यमंत्री  आज की आवश्यकता है कि अधिक से अधिक युवाओं को भविष्य उन्मुख तकनीकों में प्रशिक्षित किया जाएः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  लखनऊ उत्तर प्रदेश विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य सरकार की नीतियों, उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं को कौशल, तकनीक और उद्यमिता से जोड़कर उत्तर प्रदेश को इमर्जिंग टेक्नोलॉजी और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर कर रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि स्किल डेवलपमेंट और आईटीआई व्यावसायिक शिक्षा के अंतर्गत आते हैं। सरकार ने व्यावसायिक शिक्षा के ढांचे को आधुनिक तकनीकों से जोड़ते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, डेटा साइंस, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों में नए सेंटर स्थापित किए हैं। उन्होंने बताया कि टाटा टेक्नोलॉजी के सहयोग से प्रत्येक जनपद के दो आईटीआई को इमर्जिंग टेक्नोलॉजी से जोड़ा जा रहा है। इन संस्थानों को ‘हब एंड स्पोक मॉडल’ पर विकसित किया जा रहा है, ताकि एक केंद्रीय संस्थान से जुड़े अन्य संस्थानों को तकनीकी संसाधन और प्रशिक्षण सहायता मिल सके। उन्होंने कहा कि आज की आवश्यकता है कि अधिक से अधिक युवाओं को भविष्य उन्मुख तकनीकों में प्रशिक्षित किया जाए। इमर्जिंग टेक्नोलॉजी आधारित कोर्स से युवाओं को जोड़ा गया मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से स्किल डेवलपमेंट और तकनीकी उन्नयन को नई दिशा मिली है। तकनीकी शिक्षा विभाग ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए पाठ्यक्रमों को आधुनिक बनाया है। माध्यमिक शिक्षा के तहत प्रत्येक जनपद के राजकीय कॉलेजों को इमर्जिंग टेक्नोलॉजी आधारित कोर्स से जोड़ा जा रहा है। विद्यार्थियों को डेटा उपयोग, इंटरनेट सुविधा और डिजिटल संसाधनों से सशक्त करने की प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री ने सीएम युवा उद्यमी योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि अब तक 1,10,000 युवाओं को 10 प्रतिशत मार्जिन मनी के साथ ब्याज-मुक्त और गारंटी-मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा चुका है। उन्होंने कहा कि योजना में चयन और प्रशिक्षण को अनिवार्य बनाया गया है, ताकि युवा सफल उद्यमी बन सकें। उन्होंने महिला उद्यमियों के लिए भी विशेष योजना लागू करने की बात कही गई। साथ ही स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना के माध्यम से युवाओं के डिजिटल सशक्तिकरण पर भी जोर दिया जा रहा है। स्टार्टअप और निवेश में वृद्धि मुख्यमंत्री ने कहा कि स्किल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और स्टैंडअप इंडिया जैसी पहलों को प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू किया गया है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 20,000 से अधिक स्टार्टअप सक्रिय हैं। 76 इनक्यूबेटर, 7 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और 8 यूनिकॉर्न राज्य में कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि पहले प्रदेश से पलायन रोजगार के अभाव और कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण होता था। अब कानून-व्यवस्था में सुधार और निवेश अनुकूल वातावरण के चलते रोजगार के अवसर बढ़े हैं और निवेश में वृद्धि हुई है। डेटा सेंटर और एआई पर फोकस मुख्यमंत्री ने बजट में घोषित यूपी डेटा अथॉरिटी और डेटा सेंटर क्लस्टर की स्थापना को भविष्य की जरूरत बताया। उनका कहना था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए डेटा सेंटर बुनियादी ढांचा आवश्यक है और उत्तर प्रदेश इस दिशा में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। इमर्जिंग टेक्नोलॉजी की फैब यूनिट स्थापना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह प्रदेश के औद्योगिक विकास की नई दिशा का संकेत है। बेरोजगारी दर 19 से 2.24 प्रतिशत पर आई मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पिछली सरकार के समय लगभग 19 प्रतिशत रही बेरोजगारी दर अब घटकर 2.24 प्रतिशत रह गई है। उन्होंने इसे नीतिगत सुधार, निवेश वृद्धि और कानून-व्यवस्था में सुधार का परिणाम बताया। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि विकास कार्यों को लेकर अविश्वास की स्थिति उसी मानसिकता को दर्शाती है, जो सीमित दृष्टिकोण से बाहर नहीं निकल पाती। उन्होंने कहा कि प्रदेश ने पिछले वर्षों में व्यापक परिवर्तन देखा है और सरकार विकास, निवेश और रोजगार सृजन की दिशा में प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को तकनीक, नवाचार और युवा शक्ति के माध्यम से देश की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य लेकर सरकार आगे बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की उपलब्धियों, नीतिगत बदलावों और भविष्य की दिशा का व्यापक खाका प्रस्तुत किया

उत्तर प्रदेश ने तय की है अपराध व अव्यवस्था से अनुशासन और कर्फ्यू से कानून के राज की यात्राः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की उपलब्धियों, नीतिगत बदलावों और भविष्य की दिशा का व्यापक खाका प्रस्तुत किया सीएम योगी ने कहा, उत्तर प्रदेश अब भय का नहीं, विश्वास और विकास का प्रदेश है अपराध व अव्यवस्था से अनुशासन की यात्रा केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि मानसिकता और नीतिगत प्रतिबद्धता का परिणामः मुख्यमंत्री राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारीः सीएम योगी लखनऊ  राज्यपाल के अभिभाषण पर शुक्रवार को विधानसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले नौ वर्षों की यात्रा अपराध और अव्यवस्था से अनुशासन की यात्रा है। कर्फ्यू से कानून के राज की यात्रा है। उपद्रव से उत्सव की यात्रा है। समस्या से समाधान की यात्रा है और अविश्वास से आत्मविश्वास की यात्रा है। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की उपलब्धियों, नीतिगत बदलावों और भविष्य की दिशा का व्यापक खाका प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि उत्तर प्रदेश अब भय का नहीं, विश्वास और विकास का प्रदेश है। अपराध और अव्यवस्था से अनुशासन की यात्रा केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि मानसिकता और नीतिगत प्रतिबद्धता का परिणाम है। राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।  विपक्ष का आचरण संवैधानिक प्रमुख और मातृशक्ति का अपमान मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष की शुरुआत में राज्यपाल का अभिभाषण सरकार की उपलब्धियों और भावी योजनाओं का आधिकारिक दस्तावेज होता है। इस दौरान विपक्षी दलों के सदस्यों का सदन में आचरण अनुचित था। नेता प्रतिपक्ष पर सवाल खड़े हुए करते हुए सीएम ने कहा कि संभवतः इसीलिए आप सदन में उपस्थित नहीं हुए, क्योंकि समाजवादी पार्टी के सदस्य आपके नियंत्रण से बाहर रहे होंगे। यही वह आचरण था, जिससे बिटिया घबराती थी और व्यापारी कारोबार समेटता था। मुख्यमंत्री ने विपक्ष को आड़े हाथ लेते हुए गालिब का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गालिब ने कहा था 'उम्र भर मैं ये भूल करता रहा, धूल चेहरे पर थी और आईना साफ करता रहा।' समाजवादी पार्टी के और मुख्य विपक्षी दलों के इस आचरण के कारण पूरा सदन अपने आप को आहत महसूस कर रहा था।  ‘परसेप्शन’ और कानून-व्यवस्था पर जोर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की छवि अचानक खराब नहीं हुई थी, बल्कि वर्षों तक चले अव्यवस्थित आचरण और अपराध के वातावरण ने उसे प्रभावित किया था। बेटियां भयभीत थीं, व्यापारी अपना कारोबार समेटने को मजबूर थे और दंगे-कर्फ्यू आम बात थे। 2017 के बाद से प्रदेश में “जीरो टॉलरेंस” नीति लागू की गई है। 2017 से पहले नीतिगत उदासीनता और प्रशासनिक शिथिलता का माहौल था, जबकि अब कानून का राज स्थापित हुआ है। 2017 के बाद से कोई सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ है और प्रदेश में भयमुक्त वातावरण बना है। समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा विकास का लाभ राज्यपाल के अभिभाषण का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि “डबल इंजन सरकार” के प्रयासों से 6 करोड़ से अधिक लोगों को बहुआयामी गरीबी से बाहर निकाला गया है। यह आंकड़ा नीति आयोग के अनुसार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गरीबी से बाहर आने का अर्थ यह नहीं कि लाभार्थियों को अन्य योजनाओं से वंचित किया जाएगा। राशन, स्वास्थ्य, आवास, पेंशन और अन्य सुविधाएं जारी रहेंगी। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हर गरीब को पक्का घर उपलब्ध कराया जा रहा है। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा दिया जा रहा है। निःशुल्क राशन की व्यवस्था जारी है। वृद्ध, निराश्रित और दिव्यांगजन को 12,000 रुपये वार्षिक पेंशन दी जा रही है। इन योजनाओं का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है। पुलिस सुधार और आधुनिक सुरक्षा तंत्र मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए किए गए सुधारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पुलिस बल में बड़े पैमाने पर भर्ती की गई है। पुलिस बल में महिलाओं की संख्या 10,000 से बढ़कर आज 44,000 हो गई है। 2017 से पहले हमारी प्रशिक्षण क्षमता 3,000 भी नहीं थी। आज यह स्थिति है कि हाल में 60,200 से अधिक पुलिस भर्ती की गईं, जिसके सभी चयनितों को प्रदेश में ही ट्रेनिंग दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि साइबर अपराध से निपटने के लिए सभी 75 जिलों में साइबर थाने की स्थापना के साथ-साथ प्रदेश के हर थाने में साइबर हेल्प डेस्क स्थापित की गई है। फॉरेंसिक साइंस इकोसिस्टम को मजबूत किया गया है, जिससे जांच प्रक्रिया अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी हुई है। बीमारू से विकास की ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब “बीमारू राज्य” की छवि से बाहर निकल चुका है। पहली बार आर्थिक सर्वेक्षण को सदन में व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत किया गया, जो “विचार से व्यवस्था और व्यवस्था से विकास” की यात्रा का प्रतीक है। उन्होंने इसे अविश्वास से आत्मविश्वास की ओर बढ़ता प्रदेश बताया, जहां पहले उपद्रव की खबरें सुर्खियां बनती थीं, अब निवेश, इन्फ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक कल्याण की खबरें प्रमुखता पा रही हैं।  उत्तर प्रदेश आज ट्रिपल-टी की त्रिवेणी बनकर उभरा मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 9 वर्ष की जो यात्रा है, ये अपराध और अव्यवस्था से अनुशासन की यात्रा है, कर्फ्यू से कानून के राज की यात्रा है, उपद्रव से उत्सव की यात्रा है, समस्या से समाधान की यात्रा है और अविश्वास से आत्मविश्वास की यात्रा है। यानी ये यात्रा केवल एक सत्ता प्राप्त करने की होड़ नहीं है, इसको प्राप्त करने के लिए सरकार की स्पष्ट नीति थी, साफ नीयत थी, दृढ़ इच्छाशक्ति थी और सुशासन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हम लोगों ने जब सामूहिक रूप से प्रयास किया, हर व्यक्ति के मन में विश्वास भरा,  हां यूपी भी कर सकता है, यूपी से भी परिणाम दिए जा सकते हैं और वही आज उत्तर प्रदेश के अंदर देखने को मिल रहा है। आज उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य नहीं है, आज यह ट्रिपल-टी का एक प्रतीक बना है। ट्रिपल टी मतलब टेक्नोलॉजी, ट्र्स्ट और ट्रांसफॉर्मेशन। यानी एक त्रिवेणी बनकर के उभरा है।  2017 के पहले केंद्र सरकार की योजनाओं का बॉटलनेक था उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री … Read more

पीएम मोदी की डिब्रूगढ़ यात्रा खास: राष्ट्रीय राजमार्ग पर उतरा विमान, इमरजेंसी लैंडिंग सुविधा चर्चा में

डिब्रूगढ़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी असम दौरे के तहत डिब्रूगढ़ पहुंच गए हैं. उनके दौरे की शुरुआत बेहद रणनीतिक रही, जब उनका विमान डिब्रूगढ़ के मोरान बाईपास पर नवनिर्मित इमरजेंसी लैंडिंग सुविधा (ELF) पर उतरा. यह पहली बार है कि पीएम का विमान नेशनल हाइवे पर उतरा. पूर्वोत्तर भारत में अपनी तरह की यह पहली सुविधा है, जो युद्ध और प्राकृतिक आपदा जैसी स्थितियों में भारतीय वायुसेना के लिए गेम-चेंजर साबित होगी. प्रधानमंत्री ब्रह्मपुत्र नदी पर बने कुमार भास्कर वर्मा सेतु का उद्घाटन करेंगे. ₹3,030 करोड़ की लागत से बना यह 6-लेन पुल पूर्वोत्तर का पहला 'एक्स्ट्राडोज्ड' पुल है. इस आधुनिक पुल की मदद से गुवाहाटी और उत्तर गुवाहाटी के बीच का सफर जो घंटों में तय होता था, अब मात्र 7 मिनट में सिमट जाएगा. इसमें भूकंपरोधी तकनीक और रियल-टाइम हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है. प्रधानमंत्री आईआईएम गुवाहाटी (IIM Guwahati) का उद्घाटन करेंगे, जो क्षेत्र में उच्च शिक्षा के मानक बदलेगा. साथ ही, कामरूप जिले में राष्ट्रीय डेटा केंद्र (National Data Center) का शुभारंभ होगा. 8.5 मेगावाट क्षमता वाला यह केंद्र पूर्वोत्तर की सरकारी सेवाओं को डिजिटल रूप से सुरक्षित और सशक्त बनाएगा. शहरी परिवहन को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए प्रधानमंत्री 225 इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाएंगे. इनमें से 100 बसें अकेले गुवाहाटी के लिए होंगी, जबकि बाकी नागपुर, भावनगर और चंडीगढ़ के लिए रवाना की जाएंगी. क्या है इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (14 फरवरी) असम के डिब्रूगढ़ में देश की पहली हाईवे इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) पर भारतीय वायुसेना के C-130J Super Hercules से लैंड किया. यह सुविधा ऊपरी असम में एक हाईवे स्ट्रिप पर बनाई गई है, जो युद्ध या आपातकाल में लड़ाकू विमानों, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टरों के लिए वैकल्पिक लैंडिंग की जगह देगी. यह पूर्वोत्तर भारत की रक्षा और रणनीतिक तैयारी में एक महत्वपूर्ण कदम है.  ELF क्या है और डिब्रूगढ़ में क्यों खास? इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी एक ऐसा हाईवे स्ट्रिप होता है जहां सामान्य समय में गाड़ियां चलती हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे रनवे में बदलकर विमान उतारे और उड़ाए जा सकते हैं. डिब्रूगढ़ ELF असम के ऊपरी हिस्से में है, जो भारत-चीन सीमा के बहुत करीब है.     भारतीय वायुसेना (IAF) को अगर मुख्य एयरबेस पर हमला हो या क्षतिग्रस्त हो जाएं, तो वैकल्पिक जगह देगी.     विमानों को तैनात करने की सुविधा देगी, जिससे दुश्मन का निशाना लगाना मुश्किल हो जाएगा.     पूर्वी सेक्टर में हवाई ऑपरेशंस की गहराई और जीवित रहने की क्षमता बढ़ाएगी. पहले ही सफल रिहर्सल हो चुकी है इस ELF की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. हाल ही में पूर्ण पैमाने 'रिहर्सल' की गई…     राफेल और सुखोई-30 MKI जैसे लड़ाकू विमान.     C-130J सुपर हरक्यूलिस ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट.     डोर्नियर सर्विलांस विमान.     एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH). ये सभी विमान हाईवे स्ट्रिप पर सफलतापूर्वक उतरे और उड़े. 'टच एंड गो' मैन्यूवर्स और कॉम्बैट फॉर्मेशन लैंडिंग भी की गई. हेलीकॉप्टरों से घायलों को निकालने (कैजुअल्टी इवैक्यूएशन) का अभ्यास भी हुआ. यह सुविधा युद्ध के साथ-साथ मानवीय सहायता मिशनों में भी काम आएगी. प्रधानमंत्री मोदी खुद IAF के C-130J विमान से इस स्ट्रिप पर उतरे. यह 2021 में उत्तर प्रदेश में बने इसी तरह के स्ट्रिप की तरह होगा, जहां भी उन्होंने विमान से लैंडिंग की थी. यह सेना की क्षमता का प्रदर्शन भी है. देशभर में ELF का नेटवर्क डिब्रूगढ़ ELF अकेला नहीं है. सड़क परिवहन मंत्रालय और IAF मिलकर देशभर में ऐसे 28 स्थानों की पहचान कर चुके हैं. असम में ही 5 ELF बन रहे हैं. कई पहले से ऑपरेशनल हैं. सभी IAF एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड्स को आधुनिक बनाया जा चुका है. पूर्वोत्तर में अन्य रणनीतिक प्रोजेक्ट्स यह सुविधा पूर्वोत्तर की रक्षा को मजबूत करने की बड़ी योजना का हिस्सा है… ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे प्रस्तावित अंडरवाटर रोड-रेल सुरंग – नदी के उत्तर और दक्षिण तट के बीच तेज आवाजाही. कई स्ट्रैटेजिक टनल और ऑल-वेदर रोड – बरसात या आपदा में भी कनेक्टिविटी बनी रहे. ये प्रोजेक्ट्स सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) पर निर्भरता कम करेंगे. सेना की तेज तैनाती सुनिश्चित करेंगे. क्यों जरूरी है यह सब? पूर्वोत्तर भारत की संवेदनशील सीमाओं (चीन, म्यांमार, बांग्लादेश) के पास है. यहां का इलाका मुश्किल है – नदियां, पहाड़, बाढ़. ये प्रोजेक्ट्स… प्राकृतिक आपदाओं और दुश्मन हमले दोनों से बचाव देंगे. सेना को तेज रिस्पॉन्स और बेहतर लॉजिस्टिक्स देंगे. रक्षा के साथ-साथ आम लोगों के लिए भी कनेक्टिविटी और विकास लाएंगे. डिब्रूगढ़ ELF पूर्वोत्तर की रक्षा रीढ़ को मजबूत करने वाला मील का पत्थर है. यह भारत की रणनीतिक सोच को दर्शाता है – भूगोल की चुनौतियों को ताकत में बदलना. आने वाले समय में ऐसे प्रोजेक्ट्स पूर्वोत्तर को और सुरक्षित और विकसित बनाएंगे.

मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के कार्यों को गिनाया तो समाजवादी पार्टी को आईना भी दिखाया

गिरगिट भी पश्चाताप करेगा कि ये समाजवादी मुझसे भी आगे निकल गएः मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के कार्यों को गिनाया तो समाजवादी पार्टी को आईना भी दिखाया तुष्टिकरण के नाम पर आक्रांताओं का महिमामंडन समाजवादी आंदोलन का मुख्य धंधा बन गया हैः योगी  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा सदस्यों से कहा कि मैंने राजू पाल और उमेश पाल की हत्या का मुद्दा इसलिए उठाया, क्योंकि आप लोगों ने माफिया को गले लगाया था। उन माफिया ने हमें आंखें दिखाने का प्रयास किया, तो दुष्परिणाम भी भुगता। हर गरीब को जीने का अधिकार, बिना भेदभाव के उनका हक मिलना चाहिए। जातीय वैमनस्यता समाज, देश हित में नहीं है। देश गुलाम भी जातीय वैमनस्यता के कारण हुआ। तुष्टिकरण के नाम पर आक्रांताओं को महिमामंडन करना समाजवादी आंदोलन का मुख्य धंधा बन गया है। यह कब रंग बदल दें, कोई भरोसा नहीं। सीएम ने तंज कसा कि गिरगिट भी आज पश्चाताप करेगा कि ये समाजवादी मुझसे भी आगे निकल गए हैं। संपत्ति और संतति का प्रतीक बन गया है समाजवादी सीएम ने कहा कि समाजवाद के आदर्श जेपी-लोहिया ने देश में बराबरी और सामाजिक न्याय की वकालत की थी, लेकिन आज संपत्ति और संतति समाजवादी के प्रतीक बन गए हैं। जो समाजवाद त्याग, संघर्ष, नैतिक आदर्शों का आह्वान करता था, आज वह इन लोगों के लिए वंशवाद, सुविधावाद और निजी साम्राज्य खड़ा करने की सीढ़ी बन गई है। लोहिया और जेपी की परंपरा ने कभी शोषण के विरुद्ध संघर्ष का उद्घोष किया था, लेकिन आज वही समाजवाद जातीय वैमनस्यता पैदा करने का माध्यम बन गया है। प्रयास होना चाहिए कि किसी वर्ग विशेष या जाति विशेष को जातीय संबोधन करने से बचें।  सीएम का कटाक्ष- समाजवादी पार्टी और विकास सीएम ने समाजवादी पार्टी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यह लोग विकास के बारे में क्या बात करेंगे। सीएम योगी ने समाजवादी पार्टी के गोमती रिवर फ्रंट, जेपीएनआईसी व पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के भ्रष्टाचार को भी गिनाया। बोले कि सरकार आने के बाद बैठक में हमने 110 मीटर चौड़े एक्सप्रेसवे को 120 मीटर चौड़ा करने का प्रस्ताव रखा। सीएम ने यह भी कहा कि प्रस्तावित सेमी बुलेट ट्रेन हम वहीं से चलाएंगे। देश के अंदर जो नए कॉरिडोर बनने जा रहे हैं, उनके लिए हमारी तैयारी उस दृष्टि से चल रही है। वाराणसी से इसे जोड़ने के लिए लैंड राज्य उपलब्ध कराएगा।  चार बार में सपा उतना नहीं कर पाई, जितना खेल मंत्री गिरीश यादव ने आधे समय में कर दिया  सीएम ने कहा कि प्रदेश में डबल इंजन सरकार शहर से गांव तक खेल इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास कर रही है। हमारे खेल मंत्री गिरीश चंद्र यादव ही हैं। समाजवादी पार्टी चार बार में जितना नहीं कर पाई, उन्होंने आधे समय में इतना कर दिया कि पूरी सपा उसमें डूब जाएगी। सरकार ने तय किया है कि 2030 के कॉमनवेल्थ और 2036 में भारत के ओलंपिक की दावेदारी को ध्यान में रखकर हर मंडल मुख्यालय पर एक स्पोट्रस कॉलेज होगा। हर कॉलेज के पास किसी एक खेल में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस होगा।  खेल के लिए पर्याप्त बजट, पैसे की कमी नहीं   सीएम ने कहा कि वाराणसी- गाजीपुर के नौजवान हॉकी में श्रेष्ठ प्रदर्शन कर रहे हैं। ललित उपाध्याय और राजकुमार पाल इसकी देन है। बीच में विपक्षी सदस्य ने टोका कि गाजीपुर का स्टेडियम सपा ने दिया है तो सीएम ने इस पर कहा कि पैसा गिरीश यादव (हमारी सरकार) ने दिया है। हमने प्राइवेट एकेडमी को भी धनराशि देनी प्रारंभ की है। पश्चिम यूपी में प्राइवेट एकेडमी अच्छा काम कर रही है। वहां से अच्छे खिलाड़ी निकलकर ओलंपिक में मेडल जीते हैं। ओलंपिक, कॉमनवेल्थ व एशियाड में मेडल जीतने वाले यूपी के खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी में प्राथमिकता के साथ डिप्टी एसपी, तहसीलदार व अन्य महत्वपूर्ण पदों पर तैनाती दी गई। खेल के लिए पर्याप्त बजट है।  इलेक्ट्रिक व्हीकल में भी यूपी ने दमदारी से उपस्थिति दर्ज की सीएम ने कहा कि इलेक्ट्रिक व्हीकल में भी यूपी ने दमदारी से उपस्थिति दर्ज की है। देश की पहली इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफेक्चरिंग की यूनिट यूपी में प्रारंभ हो चुकी है, यहां बस निर्माण की कार्रवाई चल रही है। राष्ट्रीय बाजार में यूपी की उपस्थिति 19 फीसदी है। तिपहिया ईवी में 40 प्रतिशत भागीदारी यूपी की है। एक्सप्रेसवे कॉरिडोर पर चार्जिंग स्टेशन व प्रदेश में 700 ईवी बसों का संचालन हो रहा है।

प्रशासनिक फेरबदल: मनीष सिंह की नई तैनाती, दीपक सक्सेना संभालेंगे आबकारी विभाग

भोपाल  राज्य सरकार ने शुक्रवार आधी रात बड़ी प्रशासनिक सर्जरी करते हुए 11 आईएएस और 4 राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं. नई लिस्ट के अनुसार, कई अहम विभागों में शीर्ष स्तर पर बदलाव हुआ है. 2009 बैच के मनीष सिंह को दोबारा जनसंपर्क आयुक्त बनाया गया है, जबकि अब तक जनसंपर्क की कमान संभाल रहे दीपक कुमार सक्सेना को आबकारी आयुक्त ग्वालियर की जिम्मेदारी सौंपी गई है. स्वास्थ्य और वन विभाग में अदला-बदली अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को वन विभाग से हटाकर लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग और भोपाल गैस त्रासदी विभाग की कमान सौंपी गई है. उनके पास पर्यावरण विभाग पहले की तरह बना रहेगा, इसके साथ ही खाद्य सुरक्षा आयुक्त की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी वर्णवाल को दी गई है. वहीं प्रमुख सचिव संदीप यादव को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग से हटाकर वन विभाग का मुखिया बनाया गया है. उन्हें प्रवासी भारतीय विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है.   MP में 11 IAS अधिकारियों का ट्रांसफर IAS अधिकारी वर्तमान पदस्थापना नवीन पदस्थापना IAS अशोक बर्णवाल (1991) अपर मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश शासन, वन विभाग तथा कृषि उत्पादन आयुक्त, मध्य प्रदेश तथा अपर मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश शासन, पर्यावरण विभाग एवं पर्यावरण आयुक्त तथा महानिदेशक, एप्को (अतिरिक्त प्रभार) (1) अपर मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश शासन, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग तथा (2) अपर मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश शासन, भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग तथा कृषि उत्पादन आयुक्त, मध्य प्रदेश तथा अपर मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश शासन, पर्यावरण विभाग तथा पर्यावरण आयुक्त तथा महानिदेशक, एप्को तथा आयुक्त, खाद्य सुरक्षा, मध्य प्रदेश भोपाल (अतिरिक्त प्रभार) IAS संदीप यादव (2000) प्रमुख सचिव, मध्य प्रदेश शासन, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग एवं प्रमुख सचिव, मध्य प्रदेश शासन, भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग तथा प्रमुख सचिव, मध्य प्रदेश शासन, प्रवासी भारतीय विभाग तथा आयुक्त, खाद्य सुरक्षा, मध्य प्रदेश भोपाल (अतिरिक्त प्रभार) (1) प्रमुख सचिव, मध्य प्रदेश शासन, वन विभाग तथा (2) प्रमुख सचिव, मध्य प्रदेश शासन, प्रवासी भारतीय विभाग (अतिरिक्त प्रभार) IAS अजय गुप्ता (2009) संचालक, किसान कल्याण तथा कृषि विकास, मध्य प्रदेश, भोपाल प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी लिमिटेड, जबलपुर IAS मनीष सिंह (2009) सचिव, मध्य प्रदेश शासन, जेल विभाग तथा सचिव, मध्यप्रदेश शासन, परिवहन विभाग तथा प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम, भोपाल तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी, इंटर स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी, भोपाल तथा प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एवं अधोसंरचना लिमिटेड (अतिरिक्त प्रभार) (1) आयुक्त, जनसंपर्क मध्य प्रदेश, भोपाल तथा (2) सचिव, मध्य प्रदेश शासन, परिवहन विभाग तथा प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम, भोपाल तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी, इंटर स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी, भोपाल तथा प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एवं अधोसंरचना लिमिटेड तथा प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश माध्यम (अतिरिक्त प्रभार) IAS अभिजीत अग्रवाल (2010) आबकारी आयुक्त, मध्य प्रदेश, ग्वालियर प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित, भोपाल IAS दीपक कुमार सक्सेना (2010) आयुक्त, जनसंपर्क मध्यप्रदेश, भोपाल तथा प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश माध्यम (अतिरिक्त प्रभार) आबकारी आयुक्त, मध्य प्रदेश, ग्वालियर IAS उमाशंकर भार्गव (2011) राज्यपाल के अपर सचिव, राजभवन, भोपाल संचालक, किसान कल्याण तथा कृषि विकास, मध्य प्रदेश, भोपाल IAS सुनील दुबे (2016) मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत, भिंड राज्यपाल के उप सचिव, राजभवन, भोपाल IAS संघमित्रा गौतम (2016) उप सचिव, मध्य प्रदेश शासन, उच्च शिक्षा विभाग मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत, अलीराजपुर IAS नंदा भलावे कुशरे (2019) मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत, आगर मालवा अपर परियोजना संचालक, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान, भोपाल IAS कमल सोलंकी (2019) उप सचिव, मध्य प्रदेश शासन, स्कूल शिक्षा विभाग मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत, रायसेन 3 SAS अधिकारियों का भी तबादला अधिकारी शिवशेखर शुक्ला, भाप्रसे (1994), अपर मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश शासन, गृह विभाग तथा अपर मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश शासन, संस्कृति विभाग तथा आयुक्त-सह-संचालक, स्वराज संस्थान एवं न्यासी सचिव, भारत भवन तथा अपर मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश शासन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग (अतिरिक्त प्रभार) को अपने वर्तमान कर्तव्यों के साथ-साथ अस्थायी रूप से आगामी आदेश तक अपर मुख्य सचिव, मध्यप्रदेश शासन, जेल विभाग का प्रभार अतिरिक्त रूप से सौंपा गया है. अधिकारी अजय गुप्ता, भाप्रसे (2009) द्वारा प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी लिमिटेड, जबलपुर का कार्यभार ग्रहण करने पर अधिकारी विशेष गढ़पाले, भाप्रसे (2008) प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड, जबलपुर तथा सचिव, मध्य प्रदेश शासन, ऊर्जा विभाग तथा प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, जबलपुर (अतिरिक्त प्रभार) केवल प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, जबलपुर के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त होंगे. अधिकारी अभिजीत अग्रवाल, भाप्रसे (2010) द्वारा प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित, भोपाल का कार्यभार ग्रहण करने पर श्री कुमार पुरुषोत्तम, भाप्रसे (2012) प्रबंध संचालक, कृषि विपणन बोर्ड-सह-आयुक्त, मण्डी, मध्य प्रदेश, भोपाल तथा प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित, भोपाल (अतिरिक्त प्रभार) केवल प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित, भोपाल के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त होंगे. मनीष सिंह फिर संभालेंगे जनसंपर्क सरकार ने 2009 बैच के मनीष सिंह को दोबारा जनसंपर्क विभाग की कमान दी है. वे पहले भी इस विभाग का नेतृत्व कर चुके हैं. उनके पास परिवहन और जेल विभाग पूर्ववत रहेंगे. साथ ही मप्र राज्य सड़क परिवहन निगम और इंटर स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा. जनसंपर्क संभाल रहे दीपक कुमार सक्सेना को अहम जिम्मेदारी देते हुए आबकारी आयुक्त ग्वालियर बनाया गया है. लंबे समय से आबकारी देख रहे अभिजीत अग्रवाल को मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ भोपाल का प्रबंध संचालक बनाकर वापस बुलाया गया है. कृषि वर्ष से पहले अहम बदलाव किसान कल्याण एवं कृषि विभाग से अजय गुप्ता को हटाकर मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी जबलपुर का प्रबंध संचालक नियुक्त किया गया है. राज्यपाल के अपर सचिव रहे उमाशंकर भार्गव को किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग का संचालक बनाया गया है. यह बदलाव इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि राज्य सरकार वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मना रही है. ऐसे में कृषि विभाग में नई प्रशासनिक रणनीति के संकेत माने जा रहे हैं. इसके साथ ही भिंड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुनील दुबे को राज्यपाल का उप सचिव बनाया गया है. जबकि … Read more

वैश्विक मंच पर भारत का दम, जमीन और समुद्र दोनों मोर्चों पर बड़ी कामयाबी

नई दिल्ली भारत के रक्षा मंत्रालय ने करीब 3.60 लाख करोड़ रुपये के रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी दी. इससे पहले बीते कुछ महीनों में कई अन्य प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है. भारत ऐसा अपनी रक्षा तैयारियों को आधुनिक बनाने के लिए कर रहा है. लेकिन, भारत ने अपनी इन रक्षा तैयारियों में अपनी पारंपरिक नीति से अलग एक बड़ा रणनीतिक बदलाव किया है. वह अब किसी एक देश पर पूरी तरह निर्भर नहीं है. उसने अपनी विदेश नीति की तरह ही रक्षा खरीद नीति में मल्टीपोलर बना दिया है. बीते कुछ महीनों के डेवलपमेंट को देखा जाए तो ऐसा लगता है कि भारत ने इस नीति में रूस के साथ-साथ अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी जैसे सुपरपावर्स को साधने का काम किया है. तकनीकी रूप से जर्मनी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य नहीं है लेकिन वह एक बहुत बड़ी आर्थिक शक्ति और सैन्य शक्ति है. भारत की इस रणनीति का उद्देश्य किसी एक वैश्विक पावर पर अत्यधिक निर्भरता से बचते हुए पूर्व और पश्चिम दोनों से सर्वश्रेष्ठ तकनीक हासिल करने की है. हाल के महीनों में रूस, अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी के साथ बड़े सौदों ने न केवल इन देशों को साधने का काम किया है, बल्कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और रणनीतिक स्वायत्तता को भी मजबूत किया है. रूस के साथ मजबूत रणनीतिक रिश्ते रूस भारत का सबसे पुराना और भरोसेमंद रक्षा साझेदार बना हुआ है. वैश्विक भू-राजनीतिक बदलावों के बावजूद रूस मौजूदा वक्त में सैन्य हार्डवेयर का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है. ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का संयुक्त उद्यम इसका प्रमुख उदाहरण है. S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की दो स्क्वाड्रन इसी साल डिलीवर होने वाले थहैं. इतना ही नहीं गुरुवार को ही रक्षा मंत्रालय ने रूस से 10 हजार करोड़ में एस-400 सिस्टम की मिसाइलें खरीद फैसला किया. इसी तरह रूस के साथ मिलकर ही यूपी के अमेठी में 6 लाख से अधिक AK-203 असॉल्ट राइफलों का स्वदेशी उत्पादन चल रहा है. सरकारी कंपनी एचएएल में Su-30MKI इंजनों का निर्माण भी रूस के सहयोग से चल रहा है. ये सौदे रूस को भारत में स्थायी बाजार देते हैं, जबकि भारत को सस्ती और विश्वसनीय तकनीक मिलती है. अमेरिका से मिलेगा हाईटेक तकनीक अमेरिका के साथ संबंध खरीदार-विक्रेता से व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी तक पहुंच चुके हैं. GE-F414 जेट इंजन सौदा सबसे बड़ा ब्रेकथ्रू है, जिसमें HAL के साथ 80 फीसदी तकनीक ट्रांसफर की बात चल रही है. यह सुविधा पहले केवल NATO सहयोगियों को मिलती थी. यह सौदा मार्च 2026 तक फाइनल होने की उम्मीद है, जो तेजस MkII और AMCA जैसे स्वदेशी फाइटर को पावर देगा. इसके अलावा, 31 MQ-9B सी गार्जियन ड्रोन और 6 अतिरिक्त P-8I पोसीडॉन विमानों की खरीद हिंद महासागर में अभूतपूर्व निगरानी प्रदान करेगी. अमेरिका को भारत एक पसंदीदा सुरक्षा भागीदार मिलता है, जबकि भारत को ‘सबमरीन हंटर’ जैसी उन्नत क्षमता मिलती है. रक्षा मंत्रालय ने फ्रांस से 114 राफेल खरीदने को मंजूरी दे दी है. फ्रांस बना एक सबसे भरोसेमंद साझेदार फ्रांस भारत का सबसे भरोसेमंद पश्चिमी साथी साबित हुआ है, जहां तकनीक साझा करने में कोई शर्त नहीं लगाई जाती. 36 राफेल फाइटर की सफल खरीद के बाद रक्षा मंत्रालय की रक्षा खरीद परिषद ने गुरुवार को 114 राफेल जेट्स की मंजूरी दी है. यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा है. इनमें से ज्यादातर भारत में निर्मित होंगे, जिसमें 50 फीसदी स्वदेशी सामग्री होगी. नौसेना के लिए 26 राफेल-एम (मरीन) पहले ही क्लियर हैं. स्कॉर्पीन (कलवरी-क्लास) सबमरीन पर सहयोग जारी है, जहां मझगांव डॉक अतिरिक्त यूनिट बना रहा है. फ्रांस को भारत में बड़ा बाजार और सह-उत्पादन मिलता है, जबकि भारत को हाई-परफॉर्मेंस फाइटर और जर्मनी के साथ सबमरीन डील जर्मनी भारत की अंडरवाटर डोमिनेंस में प्रमुख भूमिका निभा रहा है. प्रोजेक्ट-75(I) के तहत थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) के साथ 6 एडवांस्ड कन्वेंशनल सबमरीन का सौदा करीब $8-10 बिलियन (70,000-90,000 करोड़) का है. जनवरी 2026 में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की यात्रा के दौरान सहमति पत्र पर हस्ताक्षर हुए और मार्च तक यह सौदा फाइनल होने की उम्मीद है. ये सबमरीन मझगांव डॉकयार्ड लिमिटेड में बनेंगी, जिसमें फुल टेक्नोलॉजी ट्रांसफर होगा. ये सबमरीन लंबे समय तक पानी के नीचे रह सकेंगी.

बदनावर पीएम मित्र पार्क में बड़े निवेश की घोषणा, लाखों रुपये का प्रोजेक्ट और हजारों रोजगार के अवसर

बदनावर  मध्य प्रदेश के इंदौर में बदनावर स्थित पीएम मित्र पार्क (PM Mitra Park) में उद्योग स्थापित करने को लेकर कंपनियों की दिलचस्पी लगातार बढ़ती जा रही है। बढ़ती मांग को देखते हुए शासन ने पार्क के विकास का दूसरा चरण शुरू कर दिया है। दूसरे चरण में 13 कंपनियों को 320 एकड़ भूमि आवंटित की गई है, जिनके माध्यम से लगभग 7,500 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है। इससे 16 हजार से अधिक नए रोजगार सृजित होने का दावा किया गया है। पीएम मित्र पार्क का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। पहले चरण में ही कई बड़ी कंपनियों ने निवेश प्रस्ताव देकर जमीन प्राप्त कर ली थी। उद्योगों की बढ़ती रुचि को देखते हुए मप्र औद्योगिक विकास निगम (MPIDC) ने दूसरे चरण की आवंटन प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। दूसरे चरण के पूरा होने के साथ ही पीएम मित्रा पार्क में 38 कंपनियों से प्राप्त कुल निवेश प्रस्ताव 21,500 करोड़ रुपये से अधिक हो गए हैं। इस निवेश से बदनवार क्षेत्र में लगभग 55,000 रोजगार के अवसर सृजित होंगे। अब तक कुल 1,140 एकड़ भूमि आवंटित की जा चुकी है और तीसरे चरण का कार्य शीघ्र ही शुरू होगा। वर्तमान में, एमपीआईडीसी पट्टा विलेख और भूखंड पर कब्जा दिलाने की प्रक्रिया में तेजी से काम कर रही है। दूसरे चरण में, भीलोसा इंडस्ट्रीज ने 4,500 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा है, जिसके लिए 200 एकड़ भूमि आवंटित की जा रही है। इस इकाई से 3,500 नए रोजगार सृजित होंगे। मानव निर्मित फाइबर क्षेत्र की अग्रणी कंपनी भीलोसा इंडस्ट्रीज का राज्य में आगमन, एमएमएफ उद्योग के विकास में एक नए अध्याय की शुरुआत करेगा। एमपीआईडीसी के कार्यकारी निदेशक हिमांशु प्रजापति ने बताया कि मध्य प्रदेश के निवेश आकर्षण मॉडल को भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय द्वारा 30-31 जनवरी को चेन्नई में आयोजित चिंतन शिविर में औद्योगिक नीति और निवेश संवर्धन विभाग के प्रधान सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में आयोजित क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय रोड शो और सम्मेलनों की अन्य पीएम मित्र राज्यों में सराहना की गई। एमपीआईडीसी के कार्यकारी निदेशक ने बताया कि अगला लक्ष्य पीएम मित्र पार्क के आसपास सामाजिक बुनियादी ढांचे का विकास करना है, जिसमें स्कूल, कॉलेज, खेल के मैदान, अस्पताल, मनोरंजन केंद्र और कर्मचारियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और आरामदायक आवास शामिल हैं। सभी आय वर्ग के कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए आवास की योजना बनाई जा रही है। पीएम मित्रा पार्क को अत्याधुनिक औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। उद्योगों के लिए आवश्यक सभी बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ पर्यावरणीय मानकों पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसमें 20 एमएलडी जीरो लिक्विड डिस्चार्ज कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, 10 मेगावाट का सौर ऊर्जा संयंत्र और नियमों के अनुसार हरित क्षेत्र और जलाशयों का विकास शामिल है। वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए, पार्क में बॉयलर में कोयले के उपयोग पर पूर्णतः प्रतिबंध लगा दिया गया है। 38 कंपनियों से 21,500 करोड़ से अधिक का निवेश प्रस्ताव एमपीआइडीसी के कार्यकारी निदेशक हिमांशु प्रजापति के अनुसार, दूसरे चरण की पूर्णता के साथ ही पीएम मित्र पार्क में अब तक कुल 38 कंपनियों से 21,500 करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। इन प्रस्तावों के आधार पर बदनावर और आसपास के क्षेत्र में लगभग 55 हजार रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। अब तक पार्क में कुल 1,140 एकड़ भूमि आवंटित की जा चुकी है। तीसरे चरण की प्रक्रिया भी शीघ्र शुरू की जाएगी। वर्तमान में लीज डीड और प्लॉट आधिपत्य से संबंधित कार्यवाही लगातार जारी है। 4,500 करोड़ के निवेश प्रस्ताव, 200 एकड़ भूमि आवंटित दूसरे चरण के प्रमुख निवेशकों में भिलोसा इंडस्ट्रीज शामिल है, जिसने 4,500 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया है। कंपनी को 200 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। इस इकाई से लगभग 3,500 लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है। पिछले दिनों चेन्नई में आयोजित वस्त्र मंत्रालय के चिंतन शिविर में मध्यप्रदेश के निवेश आकर्षण मॉडल का प्रस्तुतिकरण प्रमुख सचिव, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग राघवेंद्र कुमार सिंह ने किया, जिसमें राज्य के औद्योगिक विकास और पीएम मित्र पार्क की प्रगति को प्रमुखता से रखा गया।

सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! 8वें वेतन आयोग का असर और प्राइवेट नौकरी वालों पर संभावित प्रभाव

नई दिल्ली  दिल्ली की सर्दी में चाय की चुस्कियों के साथ ऑफिस जाने वाले लाखों कर्मचारी आजकल एक ही बात पर चर्चा कर रहे हैं- 8वां केंद्रीय वेतन आयोग क्या लाने वाला है? आयोग की ऑफिशियल वेबसाइट लाइव हो चुकी है, जहां कर्मचारी, यूनियन और अन्य स्टेकहोल्डर्स 16 मार्च 2026 तक अपने सुझाव और फीडबैक जमा कर सकते हैं. यह आयोग नवंबर 2025 में गठित हुआ था और इसे 18 महीनों के अंदर अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपनी हैं, जिनमें वेतन, भत्ते, पेंशन और अन्य सुविधाओं की समीक्षा शामिल है. समझा जा रहा है कि जल्द ही सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा उछाल आने वाला है. लेकिन एक बड़ा सवाल कई लोगों के मन में है कि क्या ये बदलाव प्राइवेट सेक्टर की सैलरी पर भी असर डालेंगे? तो सच्चाई ये है कि 8वां वेतन आयोग प्राइवेट सेक्टर को सीधे तौर पर कवर नहीं करता. ये आयोग सिर्फ केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों (लगभग 48-50 लाख), डिफेंस पर्सनल और पेंशनर्स (करीब 68-70 लाख) के लिए बना है. प्राइवेट कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों पर इसका कोई कानूनी या डायरेक्ट प्रभाव नहीं पड़ता. न ही प्राइवेट कंपनियों को बाध्य किया जा सकता कि वे इसके हिसाब से सैलरी बढ़ाएं. तो प्राइवेट सेक्टर को कोई लाभ नहीं? नहीं, ऐसा भी नहीं है. हालांकि इसमें प्राइवेट सेक्टर सीधे तौर पर शामिल नहीं होता है. केंद्रीय वेतन आयोग केवल केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों (Central Government Employees), रक्षा कर्मियों (Defence Personnel) और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्ते और पेंशन की समीक्षा के लिए बनाया जाता है. इसकी Terms of Reference (ToR) में स्पष्ट रूप से यही लिखा होता है. प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों की सैलरी पर आयोग कोई सीधी सिफारिश नहीं करता. ऐसे में प्राइवेट सेक्टर पर कोई डायरेक्ट असर नहीं पड़ता. हां, इनडायरेक्ट असर की बात करें तो पिछले वेतन आयोगों में अच्छा-खासा असर देखा गया है. इनडायरेक्ट असर कैसे पड़ता है?     टैलेंट कॉम्पिटिशन (Talent Retention & Attraction): सरकारी सैलरी बढ़ने के बाद अच्छे इंजीनियर्स, MBA, CA, IT प्रोफेशनल्स आदि सरकारी नौकरी की ओर आकर्षित होते हैं. प्राइवेट कंपनियों को इन्हें रोकने या नए हायर करने के लिए सैलरी बढ़ानी पड़ती है. खासकर IT, Banking, Consulting, PSU-Competitive सेक्टर्स में यह असर बहुत ज्यादा दिखता है.     बेंचमार्किंग (Benchmarking): कई बड़ी प्राइवेट कंपनियां जैसे TCS, Infosys, HDFC, L&T आदि अपने वेतन स्ट्रक्चर को सरकारी वेतन आयोग या PSUs के सैलरी लेवल के साथ कम्पेयर करती हैं. 8वें वेतन आयोग में तो ToR में ही प्राइवेट सेक्टर की मौजूदा सैलरी को ध्यान में रखने को कहा गया है.     PSUs पर डायरेक्ट प्रभाव: केंद्रीय PSUs (जैसे ONGC, IOC, SAIL, BHEL) अक्सर केंद्रीय वेतन आयोग के बाद अपना वेतन रिवाइज करती हैं. इससे प्राइवेट सेक्टर में और दबाव बढ़ता है.     इकोनॉमिक मल्टीप्लायर: करीब 50 लाख कर्मचारी और 70 लाख पेंशनर्स की सैलरी बढ़ने से मार्केट में डिमांड बढ़ती है. डिमांड बढ़ने से कंपनियों को प्रोडक्शन बढ़ाना पड़ता है, जिससे वेतन में वृद्धि होती है. पिछले आयोगों का रियल अनुभव 7वें वेतन आयोग (2016) के बाद कई प्राइवेट कंपनियों ने 2016-18 में अच्छी सैलरी हाइक्स दीं, खासकर मिड-लेवल पर. अभी 8वें वेतन आयोग (2026 से लागू होने की संभावना) में अगर फिटमेंट फैक्टर 2.0+ हुआ तो सरकारी सैलरी में 30-35%+ की बढ़ोतरी हो सकती है. इससे प्राइवेट सेक्टर में खासकर एंट्री लेवल और मिड लेवल पर दबाव बढ़ेगा.

समाधान योजना में 5.58 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को सरचार्ज में राहत, सरकार ने जारी किए आंकड़े

समाधान योजना में अब तक 05 लाख 58 हजार से अधिक उपभोक्‍ताओं को मिली सरचार्ज में छूट 553 करोड़ 90 लाख मूल राशि हुई जमा, 267 करोड़ 70 लाख का सरचार्ज हुआ माफ दूसरे चरण में 28 फरवरी तक एकमुश्‍त जमा करने पर सरचार्ज में मिलेगी 90 प्रतिशत तक की छूट भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार की समाधान योजना 2025-26 का द्वितीय व अंतिम चरण 28 फरवरी तक लागू है। इस दौरान तीन माह से अधिक के बकायादार उपभोक्‍ताओं को एकमुश्‍त राशि जमा करने पर 90 प्रतिशत तक सरचार्ज में छूट का लाभ दिया जा रहा है। मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने कहा है कि पिछले साल 3 नवंबर से शुरू हुई समाधान योजना 2025-26 में शामिल होकर लाखों बकायादार उपभोक्‍ताओं ने छूट का लाभ लिया। कंपनी के प्रबंध संचालक  ऋषि गर्ग ने उपभोक्‍ताओं से अपील की है कि तीन माह से अधिक के बकायादार उपभोक्‍ता योजना के प्रथम चरण में शामिल नहीं हो पाए, वे अब द्वितीय चरण में शामिल होकर अपना बकाया बिल एकमुश्‍त जमा करके 90 फीसदी तक सरचार्ज माफी का लाभ उठा सकते हैं। समाधान योजना में 2025-26 में अब तक मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 5 लाख 58 हजार 598 बकायादार उपभोक्‍ताओं ने अपना पंजीयन कराकर लाभ लिया है। मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के खाते में 553 करोड़ 90 लाख से अधिक की मूल राशि जमा हुई है, जबकि 267 करोड़ 70 लाख रूपए का सरचार्ज माफ किया गया है। समाधान योजना 2025-26 के लागू होने से ऐसे अनेक उपभोक्‍ता हैं, जो बकाया बिल जमा कर रहे हैं और एकमुश्‍त बकाया राशि जमा करने पर अधिकतम छूट का लाभ ले रहे हैं। यह योजना उन बकायादार उपभोक्ताओं के लिए वरदान बनी है जो सरचार्ज के कारण मूलधन राशि जमा नहीं कर पा रहे थे। अब उन्हें समाधान योजना के द्वितीय चरण में सरचार्ज में 50 से लेकर 90 प्रतिशत तक छूट के साथ एकमुश्‍त अथवा किस्तों में भुगतान करने का विकल्प मिल रहा है। समाधान योजना 2025-26 : एक नजर में समाधान योजना 2025-26 का उद्देश्य 3 माह से अधिक अवधि के उपभोक्ताओं को बकाया विलंबित भुगतान के सरचार्ज पर छूट प्रदान करना है। यह योजना जल्दी आएं, एकमुश्‍त भुगतान कर ज्यादा लाभ पाएं के सिद्धांत पर आधारित है। योजना में द्वितीय और अंतिम चरण 01 फरवरी से शुरू हो चुका है जो कि 28 फरवरी 2026 तक चलेगा। दूसरे चरण में एक मुश्‍त भुगतान करने पर 70 से 90 फीसदी तथा किस्‍तों में भुगतान करने पर 50 से 60 फ़ीसदी तक सरचार्ज माफ किया जा रहा है। समाधान योजना 2025-26 का लाभ उठाने के लिए उपभोक्ताओं को म.प्र. मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी भोपाल के लिये portal.mpcz.in पर पंजीयन कराना होगा। कंपनी के "उपाय" ऐप एवं कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) तथा एमपी ऑनलाइन पर भी पंजीयन की सुविधा उपलब्‍ध है। पंजीयन के दौरान अलग-अलग उपभोक्ता श्रेणी के लिए पंजीयन राशि निर्धारित की गई है। घरेलू एवं कृषि उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 10 प्रतिशत तथा गैर घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 25 प्रतिशत भुगतान कर पंजीयन कराकर योजना में शामिल होकर लाभ उठा सकते हैं। विस्तृत विवरण तीनों कंपनियों की वेबसाइटों पर भी देखा जा सकता है साथ ही विद्युत वितरण केंद्र से भी योजना के संबंध में जानकारी ले सकते हैं।  

MP में बड़ा प्रशासनिक बदलाव, कई जिलों के अधिकारी होंगे ट्रांसफर, नई लिस्ट जल्द सार्वजनिक

भोपाल  मध्यप्रदेश में बजट सत्र खत्म होते ही बड़े प्रशासनिक बदलाव की तैयारी है। सरकार कई जिलों में कलेक्टर और कमिश्नर बदलने की योजना बना चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का कार्य 21 फरवरी को अंतिम प्रकाशन के साथ पूरा हो जाएगा, लेकिन तबादलों की कार्रवाई अब विधानसभा के बजट सत्र के बाद ही की जाएगी। विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से 6 मार्च तक चलेगा। परंपरागत रूप से इस दौरान तबादले नहीं किए जाते, इसलिए सत्र समाप्त होते ही मंत्रालय से लेकर मैदानी स्तर तक व्यापक फेरबदल देखने को मिल सकता है। कामकाज के आधार पर होगी छंटनी जानकारी के अनुसार, जिन कलेक्टरों की कार्यप्रणाली संतोषजनक नहीं पाई गई है, उन्हें बदला जाएगा। इस संबंध में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा आयोजित कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस में दिए गए निर्देशों के पालन की समीक्षा की गई है। मुख्य सचिव अनुराग जैन दो बार अधिकारियों के कामकाज का विस्तृत आकलन करा चुके हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसकी रिपोर्ट भी तैयार कर ली है। अब अंतिम निर्णय बजट सत्र के बाद लिया जाएगा। सचिव और अपर कलेक्टर भी होंगे प्रभावित फेरबदल सिर्फ कलेक्टर-कमिश्नर तक सीमित नहीं रहेगा। सचिव स्तर के कई अधिकारियों को नए दायित्व दिए जाएंगे। मैदानी स्तर पर अपर कलेक्टरों को भी बदला जा सकता है, खासकर वे अधिकारी जो ढाई साल से अधिक समय से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख सचिव पी नरहरि केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के इच्छुक हैं और उन्हें हरी झंडी भी मिल चुकी है। इसके अलावा सचिव स्तर के अधिकारी श्रीमन शुक्ला और स्वतंत्र कुमार सिंह भी प्रतिनियुक्ति की कतार में बताए जा रहे हैं। अधिकारियों की कमी से बढ़ा दबाव वर्तमान में प्रदेश के 44 अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं, जिनमें 14 अधिकारी 2024-25 में ही गए हैं। इससे प्रदेश में वरिष्ठ अधिकारियों की कमी महसूस की जा रही है। प्रमुख सचिव और अपर मुख्य सचिव स्तर पर कमी के कारण कई अधिकारियों के पास दो से तीन विभागों का अतिरिक्त प्रभार है। इस वर्ष केवल एम. सेलवेंद्रन को ही प्रमुख सचिव पद पर पदोन्नति मिली है। स्पष्ट है कि बजट सत्र समाप्त होते ही प्रदेश में बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकता है, जिसका असर मंत्रालय से लेकर जिलों तक पड़ेगा।