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9 दिन की देरी के बाद प्रदेश पहुंचा मानसून, दो सीमाओं से हुई दमदार दस्तक

भोपाल  इस बार दक्षिण–पश्चिम मानसून की जोरदार एंट्री प्रदेश की दो सीमाओं से हुई है। प्रदेश के पूर्वी और दक्षिणी इलाकों से मानसून बुधवार को दाखिल हुआ। अहम बात यह है कि राजधानी भोपाल की दहलीज पर मानसून पहुंच गया है। हालांकि अभी इसकी आधिकारिक रूप से घोषणा नहीं हुई है, लेकिन नर्मदापुरम तक मानसून पहुंच गया है, जो इस बात का संकेत है कि मानसून भोपाल से काफी करीब है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार अलीराजपुर, धार, इंदौर, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडोरी और अनूपपुर में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो गया है। इसके चलते राजधानी समेत प्रदेश के दक्षिण हिस्सों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जोरदार आंधी–तूफान के साथ कहीं हल्की तो कहीं तेज वर्षा हुई। 9 दिन की देरी से हुई एंट्री मौसम केंद्र के पूर्वानुमान अधिकारी अरुण शर्मा ने बताया कि प्रदेश में मानसून के कदम रखने की सामान्य तिथि 15 जून मानी जाती है। लेकिन इस बार मानसून तय समय से 9 दिन की देरी से पहुंचा। अगले 2 से 3 दिनों में मानसून के पूरे मध्य प्रदेश को कवर कर लेगा। वर्ष 2020 में 15 जून को पहुंचा था मानसून दस साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो मानसून वर्ष 2020 में 15 जून को पहुंचा था। उसके बाद से अब तक एक भी बार तय समय में मानसून नहीं आया। पिछले साल 16 जून को प्रदेश में दाखिल हुआ था और राजधानी भोपाल में इसकी एंट्री 18 जून को हुई थी। राजधानी में शाम को हुई झमाझम वर्षा प्रदेश में मानसून की दस्तक के साथ ही राजधानी भोपाल में बुधवार शाम को गरज–चमक के साथ झमाझम वर्षा हुई । दिन में तीखी धूप से राजधानीवासी बेहाल थे, शाम को अचानक आसमान पर काले बादल छाए और तेज हवा चलने के साथ वर्षा हुई। इससे राजधानीवासियों को गर्मी और उमस से राहत महसूस हुई। अब तक सामान्य से 50 प्रतिशत कम हुई वर्षा एक जून से 24 जून तक प्रदेश में सामान्य के मुकाबले 50 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। सबसे कम वर्षा पूर्वी मध्य प्रदेश हुई। जहां वर्षा सामान्य से 70 प्रतिशत कम दर्ज की गई। वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी वर्षा का आंकड़ा सामान्य से 32 प्रतिशत कम है। केंद्र ने 45 जिलों के लिए जारी किया अलर्ट ऑरेंज अलर्ट– भोपाल, विदिशा, रायसेन, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगौन, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, इंदौर, रतलाम, उज्जैन, देवास, शाजापुर, आगर, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, दतिया, सतना, अनुपपूर, शहडोल, उमरिया, डिंडोरी, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, पन्ना, दमोह, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, पांढ़ुर्णा। येलो अलर्ट– सीहोर। पिछले 10 सालों में मानसून प्रदेश में कब–कब पहुंचा वर्ष — प्रदेश — भोपाल 2016 — 19 — 19 2017 — 22 — 26 2018– 24 — 27 2019 — 24 –28 2020 — 15 –23 2021 — 10 –11 2022 — 16 –26 2023 — 24 –24 2024 — 21 — 23 2025 — 16 — 18 2026 — 24 — 00 सुबह साढ़े आठ बजे से लेकर शाम साढ़े पांच बजे तक कहां कितनी हुई वर्षा शहर का नाम — वर्षा मिलीमीटर में बैतूल — 9.0 भोपाल — 2.0 धार — 4.0 इंदौर — 2.0 खरगौन — 8.0 रायसेन — 2.0 उज्जैन — 1.0 छिंदवाड़ा — 0.8  

सालों के इंतजार के बाद बुरहानपुर के केले को GI टैग, किसानों में खुशी की लहर

बुरहानपुर   बुरहानपुर का केला पूरे देश के साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर है. अब बुरहानपुर में उत्पादित केले को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल गई है. हाल ही में बुरहापुर के केले को जियोग्राफिकल इंडिकेशन (Geographical Indication) यानि जीआई टैग मिला है. इससे केला उत्पादक किसानों में खुशी की लहर है. बीते 15 सालों से बुरहानपुर के केले को जीआई टैग दिलाने की कोशिशें चल रही थीं।  सालाना औसतन 18 लाख मैट्रिक टन उत्पादन बुरहानपुर जिले में करीब 26 हजार हेक्टेयर रकबे में केला फसल लगाई जाती है. 18 हजार 640 किसान केला फसल लगाते हैं. 18 लाख मैट्रिक टन से ज्यादा उत्पादन होता है. अब केले को जीआई टैग मिलने से इसकी विशिष्टता को आधिकारिक मान्यता मिल गई है. अब किसानों को अपनी फसल का बेहतर दाम, व्यापक बाजार और निर्यात के नए अवसर मिलेंगे. इसके अलावा केला आधारित उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा. बुरहानपुर जिले में केला फसल का इतिहास पुराना है. सन् 1960 से यहां केले की फसल उगाई जा रही है।  खाड़ी देशों तक बुरहानपुर के केले की मिठास बुरहानपुर जिला प्रशासन के मुताबिक यहां की अनुकूल जलवायु, उपजाऊ भूमि सहित विशेष भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यहां उत्पादित केला अपनी मिठास, आकर्षक रंग सहित उच्च स्तरीय क़्वालिटी के लिए देश-प्रदेश ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी विशेष पहचान रखता है. बुरहानपुर के केले की मिठास न सिर्फ देश में, बल्कि खाड़ी देशों में भी अपने स्वाद का जादू बिखेरती है. हर साल बड़ी मात्रा में केला यहां से विदेशों में सप्लाई किया जाता है।  बुरहानपुर में 55 से अधिक केला प्रोसेसिंग इकाइयां बुरहानपुर के केला व्यवसाय से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोग जुड़े हैं. प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत बुरहानपुर जिले में 55 से अधिक केला प्रोसेसिंग इकाइयां स्थापित की गई हैं. इन इकाइयों में केले से विभिन्न प्रकार के उत्पाद तैयार किए जाते हैं. विधायक अर्चना चिटनिस ने बताया "बुरहानपुर के केले को जीआई टैग मिल गया है. विभिन्न विभागों, कृषि एवं उद्यानिकी विशेषज्ञों सहित संबंधित संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित करने के बाद ये उपलब्धि मिली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘वोकल फोर लोकल‘ और ‘लोकल टू ग्लोबल‘ विजन को बढ़ावा दिया है. इसी का ये परिणाम है।  क्या है जीआई टैग और क्या हैं इसके लाभ जियोग्राफिकल इंडिकेशन (Geographical Indication) यानि जीआई टैग एक प्रकार से उस उत्पाद के लिए प्रमाणपत्र है. जीआई टैग मिलने से उत्पाद को विशेष पहचान स्थान से जोड़कर मिलती है. जीआई टैग मिलने के बाद उत्पादकों की आय में वृद्धि होती है. क्योंकि उत्पाद की प्रामाणिकता साबित होती है. इस कारण उत्पाद को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में अच्छी कीमत मिलती है। 

कतर का बड़ा प्रस्ताव, खाड़ी देशों के निवेश से ईरान की अर्थव्यवस्था को मिल सकता है $300 बिलियन का सहारा

दोहा  कतर का मानना है कि खाड़ी देशों से ईरान से जुड़े इन्वेस्टमेंट मैकेनिज्म को फंड करने में मदद के लिए कहा जा सकता है. कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने खुद इस पर सहमति जताई है।  अल जजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब्दुलरहमान अल थानी का मानना है कि खाड़ी राज्य, ईरान के आर्थिक सुधार के लिए वित्तीय मदद दे सकते हैं. कतर के प्रधानमंत्री की ये टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है।  दरअसल ये प्रस्तावित ढांचा 300 अरब डॉलर के निवेश कोष की रिपोर्टों से जुड़ा हुआ है. इस फंड का मकसद जंग के बाद ईरान की अर्थव्यवस्था को संभालना और वहां मची अफरा-तफरी को संभालना है।  ईरान और अमेरिका के बीच मिडिएटर बना कतर इस मामले में कतर ईरान और अमेरिका के बीच मिडिएटर की तरह काम कर रहा है. इसके साथ ही, कतर ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को रिलीज कराने और क्षेत्र में तनाव कम करने से जुड़ी वार्ताओं में भी सीधे तौर पर शामिल रहा है।  कतर ने खाड़ी देशों को तीन सुझाव दिए हैं, जिसके जरिए वो ईरान की मदद कर सकते हैं।      खाड़ी देश कई इन्वेस्टमेंट प्रोजेक्ट्स के जरिए ईरान मदद कर सकते हैं.     वो फाइनेंसिंग मैकेनिज्म का हिस्सा बन सकते हैं,     खाड़ी देश आर्थिक विकास से जुड़ी पहलों में सहयोग दे सकते हैं. वार्ता के नतीजों पर टिका है भविष्य हालांकि, इस योजना को लेकर अभी तक किसी भी तरह की कमिटमेंट या फंडिंग का ऐलान नहीं हुआ है. ऐसे किसी भी फंड का बनना पूरी तरह से अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत के अंतिम नतीजों पर ही निर्भर करेगा. ये इस बात पर भी निर्भर करेगा कि दोनों देशों के बीच होने वाले अंतिम समझौते को किस तरह लागू किया जाता है।   

जबलपुर एयरपोर्ट का नाम होगा रानी दुर्गावती के नाम पर

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि रानी दुर्गावती, अदम्य साहस, अद्वितीय पराक्रम और साहस की प्रतिमूर्ति थीं। नारी शक्ति का पराक्रम मां दुर्गावती के व्यक्तित्व में नजर आता है। मुगलों को युद्धों में धूल चटाने वाली ऐसी वीरांगना रानी दुर्गावती का आज 463वां बलिदान दिवस है। रानी दुर्गावती ने गौंडवाना साम्राज्य में 52 गढ़ों पर शासन किया। पति की असमय मृत्यु के बाद 5 साल के बेटे को सिंहासन पर बैठाया और 15 साल तक जनता की सेवा के लिए और क्षेत्र की रक्षा के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया। मध्यप्रदेश की धरती पर लगभग 500 वर्ष पूर्व रानी दुर्गावती का जन्म हुआ, लेकिन आज पूरा देश और प्रदेश उन्हें आदर के साथ स्मरण करता है। हमारा सौभाग्य है कि प्रदेश सरकार के गठन के बाद मंत्रि-परिषद की पहली बैठक जबलपुर में रानी दुर्गावती को समर्पित कर आयोजित की गई थी। इसके बाद दूसरी कैबिनेट बैठक रानी दुर्गावती के गौंडवाना साम्राज्य की राजधानी संग्रामपुर में आयोजित की गई। उन्होंने कहा कि जबलपुर एयरपोर्ट का नाम वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम पर रखने के लिए केंद्रीय उड्डयन मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव वीरांगना रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर उनकी समाधि स्थल नर्रई नाला जबलपुर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रानी दुर्गावती को समर्पित नवीन संस्थान जबलपुर में 100 करोड़ रूपए की लागत से मदन महल के पास तैयार हो रहा है, जिसका लोकार्पण बहुत जल्द किया जाएगा। इस संस्थान से प्रदेश की भावी पीढ़ी रानी दुर्गावती के गौरवशाली अतीत और कार्यों से परिचित होंगी। जबलपुर में रानी दुर्गावती के नाम पर एक चिड़ियाघर (जू) और वन्य प्राणी रेस्क्यू सेंटर बन रहा है। इसके साथ ही 35वीं बटालियन मंडला का नाम रानी दुर्गावती के नाम पर रखा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के नायकों की वीरता और समृद्ध विरासत को सही रूप में प्रस्तुत करने के लिए 'विरासत से विकास' अभियान शुरू किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रानी दुर्गावती का शासन काल, गौंड साम्राज्य का स्वर्णिम युग था। रानी दुर्गावती ने किसान कल्याण के लिए उस दौर में बीज संग्रह, फसल चक्रण और जल संचय के महत्वपूर्ण कार्य कराए थे। उनके प्रबंधन के परिणाम स्वरूप अनाज के भंडार भरे हुए थे। किसानों के कल्याण के लिए ठोस निर्णय ले रही है सरकार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के कल्याण के लिए संकल्पित है और पूरा वर्ष किसानों को समर्पित करते हुए ठोस निर्णय ले रही है। अब किसान बंधुओं के लिए शून्य ब्याज दर पर 31 मार्च तक कर्ज चुकाने की बाध्यता खत्म कर दी गई है। किसान जिस तारीख को लोन लेंगे, तब से एक वर्ष की समयावधि में कर्ज चुकाया जा सकेगा। राज्य सरकार 880 करोड़ रुपए का भुगतान वित्तीय संस्थाओं को करेगी। राज्य सरकार पर्यटन, उद्योगों और अधोसंरचना विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। शासकीय परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण करने पर सरकार किसानों को अब चार गुना मुआवजा देगी। प्रदेश में संचालित रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना से कोदो-कुटकी पैदा करने वाले किसानों को लाभ मिल रहा है। प्रदेश की लाड़ली बहनों को हर माह जारी हो रहे 1500 रुपए से उनकी आत्मनिर्भरता बढ़ी है। किसानों को प्रधानमंत्री सम्मान निधि का भी लाभ मिल रहा है। रानी दुर्गावती द्वारा किसानों के कल्याण के लिये चलाये गये कार्यक्रमों से प्रेरित होकर प्रदेश सरकार भी निरंतर कृषक हित में कार्य कर रही है। हमारी सरकार के पास किसान कल्याण और कल्याणकारी योजनाओं के लिए धन की कमी नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय कल्याण के लिए प्रधानमंत्री मोदी लगातार कार्य कर रहे हैं। देश में पहली बार जनजातीय वर्ग श्रीमती द्रौपदी मुर्मु राष्ट्रपति पद को सुशोभित कर रही हैं। राज्य सरकार सबका साथ, सबका विकास और सबका प्रयास के भाव से काम कर रही है। हमारी सरकार जो कहती है, वो करके दिखाती है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने वीरांगना रानी दुर्गावती के संबंध में ओजपूर्ण कविता से अपने उदबोधन की शुरूआत करते हुये ‘’अड़े खड़ी दीवार बने, सदैव से प्रेम की दीवानी, तूफानों से हार न मानी, मरकर हुई अमर रानी, मरकर हुई अमर रानी’’ये पंक्तियों पढ़ी। उन्होंने वीरांगना महारानी रानी दुर्गावती के चरणों को नमन करते हुये कहा कि केंद्र और राज्य सरकार जनजातीय समाज के सम्मान, उत्थान, भाषा, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार जल संरक्षण, वन संरक्षण, जनजातीय अंचलों के विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में लगातार काम कर रही है। उन्होंने जनजातीय समाज से अपनी भाषा, बोली, संस्कृति और परंपराओं को सहेजने का आह्वान किया। साथ ही कहा कि रानी दुर्गावती के आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि वीरांगना रानी दुर्गावती का नाम लेते ही महाकौशल और मध्यप्रदेश के कण-कण में श्रद्धा का भाव जाग उठता है। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती केवल एक वीर योद्धा नहीं थीं, बल्कि जल प्रबंधन, कृषि व्यवस्था, आत्मसम्मान और मातृभूमि के प्रति समर्पण की अद्भुत प्रतिमूर्ति थीं। उनके द्वारा बनाए गई तालाबों की श्रृंखला, जल संचयन और संसाधनों के उपयोग की उनकी व्यवस्था आज भी बड़े-बड़े जल विशेषज्ञों को चकित करती है। मंत्री सिंह ने कहा कि जबलपुर की धरती के लिए यह गर्व का विषय है कि यह वही भूमि है, जहाँ वीरांगना रानी दुर्गावती का बलिदान हुआ। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से आग्रह किया कि जबलपुर एयरपोर्ट का नाम भी वीरांगना महारानी रानी दुर्गावती के नाम पर किया जाए। यह केवल नामकरण नहीं, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक अस्मिता और गौरव को राष्ट्रीय पहचान देने वाला निर्णय होगा। वरिष्ठ विधायक एवं प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि रानी दुर्गावती का बलिदान स्वतंत्रता, संस्कृति, अस्मिता और स्वाभिमान की रक्षा का अमर प्रतीक है। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती ने अपने जीवन से यह संदेश दिया कि सम्मान के साथ मृत्यु, अपमानजनक जीवन से कहीं श्रेष्ठ होती है। खंडेलवाल ने कहा कि जनजातीय समाज का योगदान भारत के इतिहास में अमूल्य है और रानी दुर्गावती उसी गौरवशाली परंपरा की सबसे उज्ज्वल प्रेरणाओं में से एक हैं। उन्होंने कहा कि नई … Read more

सायआयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा बढ़ावा, मुख्यमंत्री साय ने अमित शाह के समक्ष रखा संस्थान स्थापना का प्रस्ताव

नई दिल्ली  छत्तीसगढ़ को आयुर्वेद चिकित्सा, अनुसंधान और उच्च शिक्षा के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य के विकास, जनकल्याण और विभिन्न समसामयिक विषयों पर विस्तार से चर्चा करते हुए छत्तीसगढ़ में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) की स्थापना का आग्रह किया। मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री के साथ छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा भी थे। मुख्यमंत्री ने गृह मंत्री को बताया कि नई दिल्ली और पणजी में संचालित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान देश में आयुर्वेद आधारित चिकित्सा, अनुसंधान और नवाचार के उत्कृष्ट केंद्र के रूप में स्थापित हो चुके हैं। इन संस्थानों ने आधुनिक विज्ञान और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के समन्वय से स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दी है तथा बड़ी संख्या में दक्ष आयुर्वेद चिकित्सक और शोधकर्ता तैयार किए हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों और औषधीय संपदा से समृद्ध राज्य है। प्रदेश का बड़ा हिस्सा वनाच्छादित है, जहां अनेक दुर्लभ औषधीय वनस्पतियां और जड़ी-बूटियां प्राकृतिक रूप से उपलब्ध हैं। जनजातीय अंचलों में पारंपरिक औषधीय ज्ञान की समृद्ध विरासत भी मौजूद है। ऐसे में यहां अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की स्थापना आयुर्वेद चिकित्सा और अनुसंधान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि AIIA की स्थापना से प्रदेशवासियों को उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी, वहीं युवाओं को राष्ट्रीय स्तर के संस्थान में अध्ययन, अध्यापन और अनुसंधान के अवसर प्राप्त होंगे। इससे आयुर्वेद आधारित चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा और छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य, शिक्षा तथा अनुसंधान के क्षेत्र में एक नई पहचान स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि संस्थान का लाभ केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मध्य भारत के व्यापक क्षेत्र को मिलेगा। पड़ोसी राज्यों के नागरिकों को भी बेहतर आयुर्वेदिक उपचार और शोध सुविधाओं का लाभ प्राप्त हो सकेगा। साय ने केंद्रीय बजट 2026 में देश में तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानों की स्थापना की घोषणा का उल्लेख करते हुए आग्रह किया कि इनमें से एक संस्थान छत्तीसगढ़ को प्रदान किया जाए। उन्होंने कहा कि यह संस्थान राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के साथ-साथ रोजगार, अनुसंधान और ज्ञान आधारित विकास को भी नई गति देगा। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बस्तर सहित राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों, अधोसंरचना विस्तार और जनहितकारी योजनाओं की प्रगति की जानकारी भी केंद्रीय गृह मंत्री को दी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य में विकास और जनकल्याण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।

सायबर धोखाधड़ी होने पर अविलंब 1930 पर करें शिकायत

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सायबर खतरा एक ऐसा अदृश्य दुश्मन है , जो बिना दस्तक दिए हमारे घरों तक पहुंच रहा है। सायबर खतरों को समझना ही उनसे बचने का सबसे बड़ा रास्ता है। सावधानी ही सुरक्षा है और जानकारी ही बचाव है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट, डीप-फेक, फेक प्रोफाइल, हैकिंग, डेटा ब्रीचिंग, ऑनलाइन फ्रॉड, ओटीपी धोखाधड़ी, ऑनलाइन शॉपिंग ठगी, रैनसमवेयर हमले और फर्जी निवेश लिंक जैसे अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में प्रत्येक नागरिक को सतर्क रहने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की जनता को सायबर सुरक्षा के तीन महत्वपूर्ण सूत्र 'जागरूकता, सावधानी और सहभागिता' के बारे में बताकर कहा कि जो लोग सायबर सुरक्षा की जानकारी रखते हैं, वे दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को रवीन्द्र भवन में आयोजित ‘राज्य व्यापी सायबर जागरूकता अभियान’ के तहत "सेफ क्लिक 2.0'' के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। यह अभियान 24 जून से शुरू होकर 8 जुलाई तक प्रदेश के 10 संभाग, 55 जिलों और 50 हजार से अधिक गांव में एक साथ चलेगा। इस अभियान के तहत सायबर ठगी और अन्य अपराधों से बचने के लिए जागरूक किया जाएगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने सायबर जागरूकता अभियान के पोस्टर, स्कूली बच्चों के लिए तैयार की गई सायबर जागरूकता बुकलेट्स तथा अभियान के ऑफिशियल वीडियो का विमोचन किया। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सायबर जागरूकता रथ को झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को तुलसी का पौधा भेंट कर स्वागत किया गया। समापन पर प्रतीक चिन्ह प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभियान के संचालन के लिए मध्यप्रदेश पुलिस की सराहना करते हुए कहा कि संकट के समय मध्यप्रदेश पुलिस हमेशा संकटमोचक हनुमान की भूमिका में रहती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि वर्ष 2025 में प्रदेश में विभिन्न सायबर जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से 33 लाख से अधिक नागरिकों को जागरूक किया गया। अब अभियान का विस्तार पंचायतों, स्कूलों, बैंकों, बाजारों, धार्मिक स्थलों और सरकारी कार्यालयों तक किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार के 56 विभागों की लगभग 1700 सेवाएं एकीकृत पोर्टल पर उपलब्ध हैं और इनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से सायबर सुरक्षा को जन आंदोलन का रूप देने का आह्वान करते हुए कहा कि वर्तमान दौर में सायबर खतरे अदृश्य रूप में हमारे जीवन में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन और कंप्यूटर के माध्यम से होने वाले सायबर अपराधों से बचाव के लिए सावधानी और जागरूकता ही सबसे प्रभावी हथियार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सायबर अपराधों के प्रति प्रदेशवासियों को जागरुक करने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस का "सेफ क्लिक 2.0'' सायबर जागरूकता अभियान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस अभियान से प्रदेश के सभी नागरिक जागरूक होंगे। उन्होंने कहा कि सायबर अपराधी एक प्रकार से डिजिटल दौर के राक्षस हैं, जो दबे पाँव लैपटॉप, कम्प्यूटर और मोबाइल के जरिए हमारे साथ सेंधमारी और डकैती करते हैं। आजकल डिजिटल अरेस्ट, डीप फेक, डेटा ब्रीजिंग, ऑनलाइन फ्रॉड, रेनसमवेयर अटैक जैसे अनेक प्रकार के सायबर अपराध संचालित हैं। लेकिन सायबर अपराधों के मामले में सावधानी ही बचाव है। मध्यप्रदेश पुलिस ने देश में पहली बार सायबर डकैती का लाइव पर्दाफाश किया था। इसके लिए मध्यप्रदेश पुलिस बधाई की पात्र है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश पुलिस ने पिछले वर्ष अपने सायबर जागरुकता अभियान के माध्यम से लगभग 33 लाख से अधिक नागरिकों को सतर्क किया था। इस वर्ष 15 दिन तक चलने वाले "सेफ क्लिक 2.0'' अभियान में हर दिन अलग थीम रखी गई है। इस दौरान लोगों को बैंकिंग, महिला सुरक्षा, ग्रामीण इलाकों में जागरुकता के बारे में बताया। यह अभियान बैंकों, बाजारों, स्कूलों, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थलों पर संचालित किया जाएगा। इसके लिए लोकरंजन के रुचिकर कार्यक्रम तैयार किए गए हैं। सायबर सुरक्षा को जागरूकता, सावधानी और सहभागिता के माध्यम से प्रभावी बनाया जाएगा। सायबर अपराध हेल्पलाइन 1930 और नेशनल सायबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के बारे में लोगों को बताया जा रहा है। यह नंबर सायबर अपराध के मामले में सबसे पहले पीड़ितों की ढ़ाल बनता है। लालच और जल्दबाजी कर सकती है आर्थिक नुकसान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नागरिकों को सचेत करते हुए कहा कि अगर आपको कोई अनजान लिंक मिले या डराने धमकाने की कॉल आए तो "रुको, सोचो और फिर एक्शन लो''। लालच और जल्दबाजी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है। पुलिस के अभियान को जन जागरुकता अभियान को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने में हम सभी सहभागी बनें। राज्य सरकार ने सायबर अपराध के विरुद्ध मजबूत फ्रेमवर्क तैयार किया है। नागरिकों के डेटा संरक्षण के लिए डिजिटल पर्सनल डेटा एक्ट को भारत सरकार ने लागू किया है। प्रदेश में कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम का गठन किया गया है। राज्य शासन के 56 विभागों की 1700 से अधिक सेवाओं को एक पोर्टल पर उपलब्ध कराया गया है। यह एक प्रशंसनीय पहल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि "सेफ क्लिक 2.0'' अभियान में बैकों, बाजारों, धार्मिक स्थलों सबको जोड़ा गया है। अभियान को शुरू करने का यही सही समय है, क्योंकि हमारी युवा पीढ़ी उच्च शिक्षा के लिए महाविद्यालयों में प्रवेश ले रही है। जागरुकता ही सायबर क्राइम से बचने का है सुरक्षा कवच : डीजीपी मकवाना पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा 24 जून से 8 जुलाई तक सेफ क्लिक 2.0 सायबर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज सायबर अपराध केवल एक आर्थिक चुनौती नहीं है, बल्कि यह समाजिक विश्वास और राष्ट्रीय सुरक्षा के भी जुड़ा गंभीर विषय है। पिछले कुछ वर्षों में सायबर अपराधों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और करीब 80 प्रतिशत शिकायतें वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित होती हैं। डिजिटल अरेस्ट, डीपफेक, फर्जी प्रोफाइल, फर्जी सिमकार्ड, म्यूल बैंक अकाउंट, महिला एवं बच्चों के जुड़े अपराधों की संख्या भी बढ़ी है। मध्यप्रदेश पुलिस सायबर अपराध पर काबू पाने की कोशिश कर रही है। हमारा दृष्टिकोण स्पष्ट है- रोकथाम, अनुसंधान और जागरुकता। इसी दिशा में 25 दिसंबर 2025 से प्रदेश में ई-जीरो एफआईआर की शुरुआत की गई है। वर्तमान में 1 लाख रुपए तक की सायबर धोखाधड़ी की … Read more

ममता सरकार पर बढ़ा दबाव, ₹2.29 लाख करोड़ के कथित नुकसान पर CAG रिपोर्ट से सियासी हलचल

कोलकाता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद लगातार राज्य में हलचल मची हुई है. पहले ममता बनर्जी चुनाव हार गईं फिर उनकी पार्टी टूट गई. अब ताजा मामला यह है कि उनके सरकार के दौरान 2.29 लाख करोड़ रुपए गायब होने का आरोप लग रहा है.  जिसके बाद माना जा रहा है कि राजनीति में वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा बवंडर उठने वाला है. मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक, बीजेपी सरकार अब विधानसभा में पिछले चार सालों की लंबित सीएजी (CAG) ऑडिट रिपोर्ट पेश करने की तैयारी कर रही है. यह मामला सीधे तौर पर साल 2011 से 2020 के बीच खर्च हुए 2.29 लाख करोड़ रुपये के उपयोग प्रमाण पत्र (UCs) से जुड़ा है, जो अभी तक जमा नहीं किए गए हैं. समझते हैं पूरी बात।  पैसों का हिसाब ही नहीं दिया गया! सरकारी नियमों के अनुसार, किसी भी विभाग को मिले सरकारी अनुदान के बाद उसका उपयोग प्रमाण पत्र यानी ‘यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट’ जमा करना अनिवार्य होता है. यह सर्टिफिकेट बताता है कि पैसा कहां और कैसे खर्च हुआ. लेकिन हैरानी की बात यह है कि बंगाल सरकार ने इतने लंबे समय तक इन प्रमाण पत्रों को जमा ही नहीं किया. इस लापरवाही ने अब राज्य के सरकारी खजाने की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. पहले विपक्ष में रही बीजेपी इन दिनों राज्य में सरकार चला रही है. अब बीजेपी का आरोप है कि इतने बड़े फंड का बिना हिसाब-किताब के खर्च होना सरकारी नियमों का खुला उल्लंघन है।  पंचायत और शिक्षा विभाग सबसे ज्यादा संदेह में मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीएजी की साल 2020-21 की आखिरी रिपोर्ट में सबसे बड़ी गड़बड़ियां पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग में पाई गई थीं. इस विभाग के करीब 81,839 करोड़ रुपये के यूसी पेंडिंग थे. इसके बाद स्कूली शिक्षा विभाग का नंबर आता है, जिसके 36,850 करोड़ रुपये का हिसाब अभी तक स्पष्ट नहीं है. शहरी विकास और नगरपालिका मामलों के विभाग के भी 30,693 करोड़ रुपये का कोई ठोस ब्यौरा नहीं मिला है. यह आंकड़े दिखाते हैं कि जनता के पैसे का इस्तेमाल किस तरह सवालों के घेरे में रहा है।  आपदा राहत फंड में भी बड़ी धांधली सिर्फ सामान्य विभागों की बात नहीं है, बल्कि आपदा राहत फंड के साथ भी खेल हुआ है. मार्च 2021 तक के आंकड़ों के मुताबिक, सीएजी ने बताया था कि 3,400 करोड़ रुपये के 11,321 ‘डिटेल्ड कंटिजेंट’ (DC) बिल जमा ही नहीं किए गए. ये बिल तब जरूरी होते हैं जब सरकार ‘एब्स्ट्रैक्ट कंटिजेंट’ (AC) बिलों के जरिए पैसा निकालती है. तय समय सीमा खत्म होने के बावजूद इन बिलों का न आना बड़ी वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है।  बजट सत्र में मचेगा सियासी घमासान अब बीजेपी सरकार 2021-22 से लेकर 2024-25 तक की उन रिपोर्टों को भी सदन के पटल पर रखने जा रही है, जिन्हें पिछली सरकार ने छिपाए रखा था. आने वाले बजट सत्र में इन रिपोर्टों के पेश होते ही ममता बनर्जी की सरकार की आखिरी चार सालों की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार होना तय माना जा रहा है. प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि क्या ये रिपोर्टें केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहेंगी या फिर इनके आधार पर कोई कानूनी कार्रवाई भी शुरू की जाएगी. टीएमसी के लिए यह सदन में अपनी सफाई देना सबसे बड़ी चुनौती होने वाली है। 

गुणवत्ता की निगरानी के लिए मानक मापदंड तय किए जाएं: राज्यपाल पटेल

गुणवत्ता की निगरानी के मानक मापदंड किए जाए निर्धारित : राज्यपाल पटेल  राज्यपाल ने सिकल सेल उन्मूलन अभियान की प्रगति पर हर्ष व्यक्त किया लोक भवन में जनजातीय कार्य विभाग समीक्षा बैठक हुई भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि योजनाओं की मंशा और क्रियान्वयन की व्यवहारिकता में संवेदनशीलता की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता का मूल्यांकन मुख्यतः तकनीकी विषय है, इसलिए हितग्राहियों की प्रतिक्रिया पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। निर्माण सामग्री एवं कार्य की गुणवत्ता की निगरानी के मानक मापदंड निर्धारित किए जाए। अधिकारियों द्वारा निगरानी मापदंड के अनुसार नियमित गुणवत्ता परीक्षण करना चाहिए।       राज्यपाल पटेल लोक भवन में बुधवार को आयोजित समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे।  राज्यपाल को बैठक में पीएम-जनमन योजना अंतर्गत 9 विभागों की 11 अधोसंरचनात्मक, 7 हितग्राही मूलक योजनाओं और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत 17 विभागों की 25 योजनाओं  की प्रगति की जानकारी दी गई। राज्यपाल पटेल ने कहा कि जनजातीय बहुल क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता की पहल पीएम-जनमन योजना और धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजनाएं है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य के लिए निर्धारित समय सीमा तक कार्य की रीति-नीति उचित नहीं है। रणनीति, समय सीमा से पहले कार्य पूरा करने की होनी चाहिए। नए कार्यों के क्रियान्वयन में पूर्व अनुभवों और चुनौतियों को दृष्टिगत रखते हुए कार्य योजना तैयार की जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अति पिछड़ी जनजातियों के विकास और उत्थान के प्रयासों को आवश्यकता और बहुलता की प्राथमिकता के साथ क्रियान्वयन की औपचारिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाए। राज्यपाल पटेल ने प्रदेश में सिकल सेल उन्मूलन अभियान के तीव्र गति से क्रियान्वयन पर हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 से पूर्व वर्ष 2026 तक लक्ष्य का पूरा होना अनुमानित है। उन्होंने सभी संबंधितों को इसके लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि 15 वर्ष की आयु तक के सिकल सेल रोगी वाहक के स्वास्थ्य प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इससे उनका भावी जीवन सुरक्षित हो जाएगा। जरूरी है कि सिकल सेल की दवाओं की उपलब्धता सदैव सुनिश्चित रहे। एलोपैथिक उपचार पद्धति के साथ ही आयुर्वेद औषधियों के उपयोग के संबंध में जन जागरण के प्रयासों की जरूरत भी बताई। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद की दवाओं के उपयोग से रक्त की उपलब्धता बढ़ने और थकान में कमी के उत्साह जनक प्रारंभिक परिणाम प्राप्त हुए है। राज्यपाल ने बैठक में जनजातीय बहुल क्षेत्रों की तहसीलवार बुनियादी सुविधाओं का मानचित्र तैयार कर प्रभावी निगरानी, जन औषधि केन्द्रों के संचालन में जनजातीय युवाओं की भागीदारी तथा विद्यालयों में छात्राओं, छात्र के पृथक शौचालयों की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर बल दिया। समीक्षा बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा, जनजातीय प्रकोष्ठ की सदस्य सचिव श्रीमती मीनाक्षी सिंह, प्रकोष्ठ के सदस्य, लोक भवन और जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।  

IAEA का ईरान को सख्त संदेश, परमाणु स्थलों के निरीक्षण पर नहीं होगा समझौता

 टोक्यो अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल मारियानो ग्रॉसी ने बुधवार को संकेत दिया कि ईरान के न्यूक्लियर एनरिचमेंट साइट्स का निरीक्षण उनकी टीम द्वारा किया जाएगा. यह अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए हुए अंतरिम समझौते का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है. IAEA प्रमुख का यह इस मामले में अब तक का सबसे स्पष्ट बयान है. संयुक्त राष्ट्र की यह परमाणु निगरानी एजेंसी ईरान के परमाणु भंडार की स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।  इजरायल ने ईरान के साथ 2025 में 12 दिनों तक चले युद्ध के दौरान उनके परमाणु स्थलों को निशाना बनाया था. अमेरिका ने भी B-2 बमवर्षक विमानों से ईरान के फोर्दो, नतांज और इस्फहान न्यूक्लियर फैसेलिटी पर हमले किए थे. इन हमलों के बाद से ईरान ने IAEA को उन परमाणु सुविधाओं तक पहुंचने से रोक रखा है. इन परमाणु सुविधाओं में ईरान के पास इतना उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम होने का अनुमान है कि यदि वह चाहे तो लगभग 10 परमाणु बम बना सकता है।  ईरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है. हालांकि, वह दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जिसके पास बिना किसी घोषित वेपन प्रोग्राम के 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम मौजूद है. इन परमाणु स्थलों का IAEA की टीम द्वारा निरीक्षण करने के मामले में अमेरिका और ईरान ने 23 जून को विरोधाभासी बयान दिए थे. अमेरिका ने दावा किया था कि ईरान ने अपने परमाणु स्थलों का निरीक्षण करने की अनुमति दे दी है. वहीं, ईरान ने इस तरह की कोई अनुमति देने से इनकार किया था।  ईरान के परमाणु स्थलों का निरीक्षण होकर रहेगा: IAEA जापान के फुकुशिमा दाइची परमाणु संयंत्र में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में IAEA प्रमुख राफेल मारियानो ग्रॉसी ने पत्रकारों से कहा, 'मैं राजनीतिक बयानों को समझ सकता हूं, वे वास्तविकता का हिस्सा हैं. लेकिन मैं आपको यह याद दिलाना चाहता हूं कि दोनों देशों के राष्ट्रपतियों द्वारा एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं. उस समझौते में स्पष्ट रूप से लिखा है कि परमाणु सामग्री और परमाणु सुविधाओं से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी IAEA द्वारा की जाएगी. जाहिर है, ऐसा करने के लिए हमें निरीक्षण करना होगा. यह निरीक्षण परसों हो, एक हफ्ते बाद हो या 10 दिन बाद, यह महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि यह होगा।  ये निरीक्षण इसलिए बेहद अहम माने जा रहे हैं क्योंकि समझौते के तहत ईरान के उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम भंडार को कम संवर्धित स्तर तक लाने यानी 'डाउनब्लेंड' करने की बात कही गई है. ईरान की ओर से ग्रॉसी के इस बयान पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने मंगलवार को तेहरान में पत्रकारों से कहा था कि पिछले साल अमेरिका द्वारा बमबारी किए गए परमाणु स्थलों का निरीक्षण करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों के आने की कोई योजना नहीं है।  उन्होंने यह बयान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की टिप्पणी को खारिज करते हुए दिया था. पिछले साल के 12 दिन तक चले युद्ध के बाद से IAEA को ईरान के कुछ अन्य परमाणु स्थलों, जैसे बुशेहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र, का दौरा करने की अनुमति दी गई है. लेकिन संवर्धन स्थलों तक पहुंच न होने के कारण एजेंसी यह सत्यापित नहीं कर पा रही है कि ईरान के यूरेनियम भंडार की वास्तविक स्थिति क्या है और यूरेनियम संवर्धन में इस्तेमाल होने वाली सेंट्रीफ्यूज मशीनों की स्थिति कैसी है. ईरान और IAEA दोनों का कहना है कि तेहरान फिलहाल यूरेनियम संवर्धन नहीं कर रहा है. हालांकि, परमाणु विशेषज्ञों को आशंका है कि ईरान अपने यूरेनियम भंडार को किसी गुप्त स्थान पर स्थानांतरित कर सकता है। 

सांसदों के जाने के बाद उद्धव की बढ़ीं मुश्किलें, अब दफ्तर को लेकर नया विवाद

मुंबई  लोकसभा सांसदों की बगावत के झटके से उबर रही शिवसेना (यूबीटी) की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रहीं. पार्टी को अब संसद में एक और बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है. पार्टी के 6 सांसदों के शिवसेना (शिंदे) में विलय के बाद न सिर्फ उसकी संसदीय ताकत घटेगी, बल्कि संसद भवन परिसर में मिले उसके दफ्तर पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।  सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में लोकसभा अध्यक्ष की औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद शिवसेना (यूबीटी) के संसदीय दल में सिर्फ चार सांसद ही बाकी रह जाएंगे।   संसद के नियम के तहत आमतौर पर पांच या उससे ज्यादा सांसदों वाले दलों को ही संसद भवन परिसर में अलग दफ्तर आवंटित किया जाता है. ऐसे में पार्टी को अपने वर्तमान कार्यालय से हाथ धोना पड़ सकता है।  संसदीय गतिविधियों में पार्टी की भागीदारी पर पड़ सकता है असर सांसदों की संख्या घटने का असर राजनीतिक और संसदीय गतिविधियों में पार्टी की भागीदारी पर भी पड़ सकता है. अहम राष्ट्रीय और संसदीय मुद्दों पर केंद्र सरकार की ओर से बुलाई जाने वाली सर्वदलीय बैठकों में आमतौर पर पांच से कम सांसदों वाले दलों को आमंत्रित नहीं किया जाता है. ऐसे में भविष्य में शिवसेना (यूबीटी) की इन बैठकों में मौजूदगी पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।  फिलहाल शिवसेना (यूबीटी) के संसदीय दल का दफ्तर संविधान सदन (पुराना संसद भवन) के कमरा नंबर 128A में स्थित है. ये दफ्तर अविभाजित शिवसेना को आवंटित कमरे नंबर 128 के ठीक बगल में है. सांसदों की संख्या में संभावित कमी के बाद इस कार्यालय के आवंटन की स्थिति पर भी नजरें टिकी हुई हैं।  महाराष्ट्र की राजनीति में 'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चा पिछले कई दिनों से महाराष्ट्र की राजनीति में 'ऑपरेशन टाइगर' खूब चर्चा में हैं. इस दलबदल को एकनाथ शिंदे का 'ऑपरेशन टाइगर' कहा जा रहा है. शिवसेना पर आए इस संकट को राज्यसभा सांसद संजय राउत सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं. संजय राउत दिल्ली में हैं. वहीं पार्टी के सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई भी दिल्ली में ही ठहरे हुए हैं.  बताया जा रहा है कि संजय राउत दलबदल को रोकने के लिए किताबों और संसदीय प्रक्रिया का अध्यन करने में लगे हैं।  संजय राउत और अनिल देसाई ने दिल्ली के प्रमुख वकीलों के साथ इस बात पर बातचीत की कि अगर छह सांसद बेहतर अवसरों की तलाश में अगर पार्टी बदल लेते हैं तो उसमें क्या कानूनी उपाय किए जाने चाहिए. इसको लेकर अनिल परब ने बताया कि अगर सुप्रीम कोर्ट यूबीटी और शिंदे गुट के धनुष-बाण चिन्ह वाले फैसले पर सुनवाई की होती तो हमारा पक्ष मजबूत होता।  शिवसेना संकट पर क्या बोले एक्सपर्ट्स? इस बीच एक्सपर्ट्स का कहना है कि ठाकरे के लिए इस संकट से निपटना चुनौती भरा हो सकता है, जिसे देश की राजनीति के तेजी से बदलते स्वरूप के रूप में देखा जाना चाहिए. लेखक और शिवसेना के इतिहासकार प्रकाश अकोलकर यह सब पैसे का खेल है. कोई भी पार्टी बीजेपी के पैस और संसाधनों का सामना नहीं कर सकती. सांसद से लेकर विधायक तक बिकने को तैयार हैं. बीजेपी जो ऐसा कर रही है यह बेहद शर्मनाक है।  उन्होंने कहा कि 20 से 25 साल के युवाओं की सिर्फ यही राय है कि उद्धव ठाकरे को बीजेपी का डटकर सामना करना चाहिए. एक कार्यकर्ता ने कहा कि अब समय आ गया है कोई बीजेपी के सामने खड़ा हो और देश में विपक्षी पार्टियों को खत्म करने की नापाक साजिश को पर्दाफाश करे।  वहीं दूसरी तरफ कई शिवसैनिक 'ऑपरेशन टाइगर के विरोध के लिए सड़कों पर उतरने के लिए भी तैयार हैं.' बता दें कि पार्टी बदलने वाले 6 सांसदों में संजय दीना पाटिल ने पहले कहा था कि उनकी गठबंधन में जाने की मर्जी नहीं है।