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पिकनिक मनाने रायगढ़ पहुंचे थे छात्र, समुद्र की लहरों में समाए 8 युवक

रायगढ़  महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में बड़ा हादसा सामने आया है। पुणे के एक निजी कोचिंग क्लास से आए आठ छात्रों की समुद्र में डूबने से मौत हो गई। यह हादसा रायगढ़ जिले के दिवेआगर बीच पर हुआ। समुद्र में नहाने के दौरान तेज लहरों की चपेट में आने पर छात्र खुद को नहीं बचा पाए। छात्र महाराष्ट्र के पुणे जिले के आलंदी से पिकनिक मनाने आए थे। कड़ी मशक्कत के बाद समुद्र से सभी आठ छात्रों के शव बाहर निकाल लिए गए। पुणे से रायगढ़ के इस बीच की दूरी करीब 166 किलोमीटर है। 11वीं-12वीं कक्षा के छात्र जानकारी के अनुसार सभी छात्र पुणे के आलंदी के रहने वाले हैं। वे दिवेआगर बीच नहाते वक्त ही हादसे का शिकार बने। ये छात्र पुणे के आलंदी की एक प्राइवेट कोचिंग क्लास से आए थे। सभी छात्र 11वीं और 12वीं कक्षा के साइंस के स्टूडेंट हैं। स्थानीय लोग पीड़ितों को बचाने के लिए दौड़े और उन्हें बोरली प्राइमरी हेल्थ सेंटर ले गए। जहां पहुंचने पर मेडिकल अधिकारियों ने सभी आठों को मृत घोषित कर दिया। मृतक छात्रों की पहचान तन्मय दत्तात्रेय वाहिले, सुमित भरत अहिरे, प्रणव रामदास बनसोडे, कैवल्य सतीश वासनकर, राजवीर युवराज वाहिले, यश किरण वानखेड़े, सोहम तुकाराम भंडवलकर और कौस्तुभ संदीप दौंड के रूप में हुई है। ये सभी आठ छात्र 16 साल के थे और पुणे के आलंदी के रहने वाले थे। जैसे ही घटना की खबर फैली, स्थानीय लोगों और पर्यटकों में हड़कंप मच गया। दिवेआगर में 'भाऊ मारुति सालुंखे महाकाली वॉटर स्पोर्ट्स' के मालिक भाऊ मारुति सालुंखे और उनकी टीम ने तुरंत खोज अभियान शुरू किया। बता दें कि रायगढ़ जिले में अलीबाग, कशिश, और दिवेआगर जैसे कई मशहूर समुद्री तट (बीचेस) हैं, जो अपनी खूबसूरती के लिए जाने जाते हैं, लेकिन मॉनसून या हाई टाइड के दौरान यहां सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। प्रसिद्ध तीर्थस्थल है यह बीच पुलिस और अधिकारियों ने इस दुखद घटना की जांच शुरू कर दी है। ऐसा मान जा रहा है कि समुद्र के पानी की गहराई और लहरों का अंदाजा नहीं होने के कारण यह दर्दनाक हादसा होने की प्राथमिक जानकारी सामने आई है। दिवेआगर रायगड के श्रीवर्धन तालुका का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। सभी छात्रों के शवों को आगे की कार्रवाई के लिए बोर्ली पंचतन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में रखा गया है। चार किलोमीटर लंबा है यह बीच यह बीच लगभग 4 किलोमीटर लंबा है और नारियल, सुपारी तथा सुरु के पेड़ों से घिरा हुआ है। पर्यटकों के लिए यहां जेट स्की, बनाना राइड और बोट राइड जैसी कई वाटर एक्टिविटी उपलब्ध हैं। सुबह के समय यहां हजारों की संख्या में सीगल्स दिखाई देते हैं और यहां से सूर्यास्त का नजारा बहुत मनमोहक होता है। यहां प्रसिद्ध सुवर्णा गणेश मंदिर और प्राचीन रूपनारायण मंदिर भी स्थित हैं। सुनेत्रा पवार ने की कलेक्टर से बात इस हादसे को लेकर राज्य की डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार रायगढ़ के कलेक्टर से बात की। उन्होंने दिवेआगर बीच पर हुई दुखद घटना में मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। सुनेत्रा पवार ने प्रशासन को सभी जरूरी मदद तुरंत उपलब्ध कराने और उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

सीएम योगी ने बापू की 157वीं जयंती पर निवेदित की श्रद्धा, प्रदेशवासियों को दी ‘अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ की शुभकामना

मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर किया पुष्पार्चन  सीएम योगी ने बापू की 157वीं जयंती पर निवेदित की श्रद्धा, प्रदेशवासियों को दी ‘अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ की शुभकामना स्कूली बच्चों ने भजनों व गीतों पर दी सुमधुर प्रस्तुति  आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के निर्माण में निरंतर मार्गदर्शन प्रदान कर रहे बापू के आदर्श, सादगी और विचारः मुख्यमंत्री  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती पर उनके प्रति श्रद्धा निवेदित की। मुख्यमंत्री ने जीपीओ स्थित राष्ट्रपिता की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। इस अवसर पर स्कूली बच्चों ने 'रघुपति राघव राजा राम', 'वह शक्ति हमें दो दयानिधे', 'वैष्णव जन तो तेने कहिए' आदि भजनों/गीतों पर संगीतमयी प्रस्तुति दी। मुख्यमंत्री ने भजनों का श्रवण किया। मुख्यमंत्री ने दी 'अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस' की शुभकामना मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर प्रदेशवासियों को 'अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस' की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर लिखा कि सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर संपूर्ण विश्व को स्वदेशी व अहिंसा के माध्यम से स्वाधीनता का संदेश देने वाले, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की पावन जयंती पर कोटिश: नमन। प्रदेशवासियों को 'अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस' की शुभकामनाएं। सीएम ने लिखा कि बापू के आदर्श, सादगी और विचार आज भी हम सभी को आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के निर्माण में निरंतर मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं। पुष्पांजलि कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, कैबिनेट मंत्री राकेश सचान, राज्यसभा सांसद ब्रजलाल, महापौर सुषमा खर्कवाल, विधान परिषद सदस्य डॉ. महेंद्र सिंह, मुकेश शर्मा, लालजी प्रसाद निर्मल, रामचंद्र प्रधान, पवन सिंह चौहान, डॉ. नीरज बोरा, राजेश्वर सिंह, जय देवी, अमरेश कुमार, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव, भाजपा के महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी आदि मौजूद रहे।

पंजाब में 36.87 लाख महिलाओं को मिला योजना का लाभ, सीएम मान ने बताई सरकार की उपलब्धियां

चंडीगढ़  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा है कि ‘मावां-धीआं सत्कार योजना’ के तहत महिलाओं के बैंक खातों में तीन महीने की दूसरी किस्त के रूप में 1,262.54 करोड़ रुपये सीधे ट्रांसफर किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 36.87 लाख महिलाओं को अक्तूबर, नवंबर और दिसंबर की किस्त एक साथ मिल रही है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, अब तक इस योजना के तहत महिलाओं के खातों में कुल 3,824.87 करोड़ रुपये सीधे भेजे जा चुके हैं। श्री गोइंदवाल साहिब में आयोजित विशाल समागम को संबोधित करते हुए मान ने कहा कि महिलाओं के मोबाइल फोन पर बैंक खाते में राशि पहुंचने की पुष्टि के ‘टूं-टूं’ संदेश उनकी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का असर दिखाते हैं। उन्होंने दावा किया कि जब तक उनकी सरकार सत्ता में रहेगी, महिलाओं के मोबाइल पर ऐसे संदेश आते रहेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार लोगों से लिए गए कर के पैसे को उनकी भलाई पर खर्च कर रही है। मान ने कहा कि योजना का उद्देश्य महिलाओं में आत्मविश्वास, स्वाभिमान और आर्थिक स्वतंत्रता बढ़ाना है। उनके अनुसार पंजाब की करीब 97 प्रतिशत महिलाएं इस योजना का लाभ लेने के योग्य होंगी और सरकार का लक्ष्य सम्मान राशि का लाभ एक करोड़ महिलाओं तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि योजना में कोई शर्त नहीं रखी गई है। यदि एक परिवार में तीन महिलाएं पात्र हैं तो तीनों को सम्मान राशि मिलेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि योजना के पंजीकरण में 1.37 लाख ‘सत्कार सखियों’ ने योगदान दिया है और उन्हें प्रोत्साहन राशि के तौर पर अब तक 51 करोड़ रुपये से अधिक दिए जा चुके हैं। पंजीकरण में सहयोग कर रही आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी 25 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। यह सामाजिक क्रांति है’ मान ने खडूर साहिब की ऐतिहासिक धरती का जिक्र करते हुए कहा कि इसी क्षेत्र में गुरु अमरदास जी ने सती प्रथा के खिलाफ आवाज उठाई और लंगर की परंपरा को मजबूत किया। उन्होंने कहा कि इसी वजह से ‘मावां-धीआं सत्कार योजना’ के लिए इस ऐतिहासिक धरती को चुना गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे पहले 73.99 लाख महिलाओं को सम्मान राशि के रूप में 2,562.33 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने योजना को महिलाओं की आर्थिक आजादी से जोड़ते हुए इसे ‘सामाजिक क्रांति’ बताया।  विपक्षी दलों पर साधा निशाना भगवंत मान ने कांग्रेस, भाजपा और अकाली दल पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि ये दल सत्ता में आते हैं तो महिलाओं की मासिक सम्मान राशि, मुफ्त बिजली और मुफ्त बस यात्रा जैसी सुविधाएं बंद हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास कार्यकर्ताओं की तुलना में मुख्यमंत्री बनने की इच्छा रखने वाले नेताओं की संख्या अधिक है।   कांग्रेस को लेकर मान ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को पद से हटा दिया गया है और नया अध्यक्ष नियुक्त किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि नए अध्यक्ष के आने के बाद भी कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई खत्म नहीं होगी। अकाली दल पर हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बादल, कैप्टन और मजीठिया परिवारों का लंबे समय तक पंजाब की राजनीति पर प्रभाव रहा, लेकिन अब राजनीतिक परिस्थितियां बदल चुकी हैं। उन्होंने अकाली नेताओं पर धर्म के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप भी लगाया।  शिक्षा में सुधार का दावा मान ने अपनी सरकार के शिक्षा क्षेत्र के कामकाज का जिक्र करते हुए दावा किया कि केंद्र के मूल्यांकन के अनुसार पंजाब स्कूली शिक्षा में 27वें स्थान से पहले स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने स्मार्ट क्लासरूम बनाए, अध्यापकों को प्रशिक्षण दिया और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती की। मुख्यमंत्री ने नीट परीक्षा का उदाहरण देते हुए कहा कि जब उन्होंने सत्ता संभाली थी तो पंजाब से करीब 80 छात्र ही नीट परीक्षा पास करते थे। सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए मुफ्त प्रशिक्षण शुरू करने के बाद इस साल 882 विद्यार्थियों के नीट पास करने का दावा उन्होंने किया। मान ने कहा कि इनमें बड़ी संख्या ऐसे परिवारों के बच्चों की है, जिन्होंने आर्थिक कठिनाइयों के बीच अपने बच्चों की पढ़ाई जारी रखी।  

क्रिकेट वर्ल्ड कप का पूरा शेड्यूल समझिए, भारत के सामने ऑस्ट्रेलिया-पाकिस्तान की चुनौती

नई दिल्ली आईसीसी मेन्स क्रिकेट वर्ल्ड कप 2027 का पूरा शेड्यूल 1 अक्टूबर (गुरुवार) को जारी कर दिया गया. साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की संयुक्त मेजबानी में होने वाला 14 टीमों का यह टूर्नामेंट 2 अक्टूबर से 21 नवंबर 2027 तक खेला जाएगा. कुल 57 मुकाबले इन तीन देशों के 12 मैदानों पर होंगे. केपटाउन में आयोजित विशेष लॉन्च कार्यक्रम में ICC (अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल) ने टूर्नामेंट का शेड्यूल जारी किया. वर्ल्ड कप की शुरुआत 2 अक्टूबर से नामीबिया में होने वाली तीन टीमों की सुपर सीरीज के साथ होगी, जबकि मुख्य ग्रुप स्टेज 7 अक्टूबर से शुरू होगा।  भारतीय टीम अपने अभियान की शुरुआत मौजूदा चैम्पियन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ करेगी. दोनों टीमें 7 अक्टूबर को केप टाउन के न्यूलैंड्स क्रिकेट ग्राउंड में आमने-सामने होंगी. यह मुकाबला 2023 वर्ल्ड कप फाइनल की यादें भी ताजा करेगा, जिसमें ऑस्ट्रेलिया ने भारत को हराकर खिताब जीता था. इसके बाद भारत का अगला ग्रुप मुकाबला 10 अक्टूबर को पाकिस्तान के खिलाफ होगा. जोहानिसबर्ग के वांडरर्स स्टेडियम में होने वाला यह मैच टूर्नामेंट के हाई-वोल्टेज मुकाबलों में शामिल रहेगा. फिर भारत 14 अक्टूबर को सेंचुरियन में अफगानिस्तान से भिड़ेगा, जबकि 17 अक्टूबर को ब्लोमफोंटेन में क्वालिफायर A के खिलाफ उतरेगा. ग्रुप चरण में भारत का आखिरी मुकाबला 24 अक्टूबर को जिम्बाब्वे के खिलाफ विक्टोरिया फॉल्स में होगा।  भारत के ग्रुप मुकाबले 7 अक्टूबर- भारत vs ऑस्ट्रेलिया, केप टाउन  10 अक्टूबर- भारत vs पाकिस्तान, जोहानिसबर्ग  14 अक्टूबर- भारत vs अफगानिस्तान,  सेंचुरियन 17 अक्टूबर- भारत vs क्वालिफायर A, ब्लोमफोंटेन  24 अक्टूबर- जिम्बाब्वे vs भारत, विक्टोरिया फॉल्स  मुख्य टूर्नामेंट से पहले 2 अक्टूबर को नामीबिया की राजधानी विंडहोक में तीन टीमों की सुपर सीरीज खेली जाएगी. इसमें वर्ल्ड कप क्वालिफायर में दूसरे, तीसरे और चौथे स्थान पर रहने वाली टीमें हिस्सा लेंगी. तीनों टीमें राउंड-रॉबिन आधार पर एक-दूसरे से खेलेंगी. अंक तालिका में शीर्ष पर रहने वाली टीम मुख्य ग्रुप चरण में जगह बनाएगी।  ग्रुप A में भारत, ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्ता, अफगानिस्तान, जिम्बाब्वे और क्वालिफायर A हैं. वहीं ग्रुप-बी में साउथ अफ्रीका, श्रीलंका, इंग्लैंड, बांग्लादेश, न्यूजीलैंड और क्वालिफायर B को रखा गया है. ग्रुप बी में बांग्लादेश को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि बाकी की टीम्स काफी तगड़ी दिख रही हैं. ग्रुप स्टेज में कुल 30 मुकाबले होंगे. प्रत्येक टीम अपने ग्रुप की बाकी टीमों से एक-एक मैच खेलेगी।  दोनों ग्रुप से शीर्ष तीन-तीन टीमें सुपर-7 में पहुंचेंगी. इसके अलावा दोनों ग्रुप में चौथे स्थान पर रहने वाली टीमों में से बेहतर रैंक वाली टीम भी अगले स्टेज में जगह बनाएगी. सुपर-7 में सातों टीमें एक-दूसरे के खिलाफ एक-एक मैच खेलेंगी और कुल 21 मुकाबले होंगे. इसके बाद अंक तालिका की शीर्ष चार टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी. अगर कोई गैर-सीडेड टीम किसी सीडेड टीम से ऊपर रहते हुए क्वालीफाई करती है, तो वह संबंधित सीडेड स्थान हासिल कर लेगी।  भारत से दो-दो बार भिड़ेंगे ऑस्ट्रेलिया-पाकिस्तान? देखा जाए तो भारत और पाकिस्तान की भिड़ंत सिर्फ ग्रुप चरण तक सीमित नहीं रह सकती. अगर दोनों टीमें सुपर-7 चरण के लिए क्वालिफाई करती हैं, तो टूर्नामेंट में दोनों का दूसरी बार सामना होने की संभावना है. आईसीसी ने सुपर-7 के लिए टीमों को प्री-सीडिंग दी है. भारत को A1 और पाकिस्तान को A3 स्थान मिला है. इस व्यवस्था के तहत दोनों टीमें 7 नवंबर को केपटाउन में एक-दूसरे के खिलाफ खेल सकती हैं. हालांकि यह मुकाबला तभी संभव होगा जब भारत और पाकिस्तान दोनों सुपर-7 में पहुंचें और उनकी स्थिति तय प्री-सीडिंग के अनुरूप रहे।  भारत और ऑस्ट्रेलिया भी टूर्नामेंट में दो बार आमने-सामने आ सकते हैं. ग्रुप चरण में 7 अक्टूबर के मुकाबले के बाद दोनों टीमों की संभावित दूसरी भिड़ंत 28 अक्टूबर को विक्टोरिया फॉल्स में हो सकती है. ऑस्ट्रेलिया को A2 के तौर पर प्री-सीड किया गया है. ऐसे में दोनों के सुपर-7 में पहुंचने की स्थिति में टूर्नामेंट के अगले चरण में एक और मुकाबले की संभावना बनी हुई है।  सुपर 7 प्री-सीडिंग A1: भारत A2: ऑस्ट्रेलिया A3: पाकिस्तान AB4: इंग्लैंड B1: न्यूजीलैंड B2: साउथ अफ्रीका B3: श्रीलंका सेमीफाइनल-फाइनल के लिए रिजर्व डे सुपर-7 के बाद पहला सेमीफाइनल 17 नवंबर को केप टाउन और दूसरा 18 नवंबर को सेंचुरियन में खेला जाएगा. सुपर-7 में पहले स्थान पर रहने वाली टीम चौथे स्थान वाली टीम से भिड़ेगी, जबकि दूसरे स्थान वाली टीम का सामना तीसरे स्थान की टीम से होगा. दोनों सेमीफाइनल के लिए आईसीसी ने रिजर्व डे रखा है, ताकि बारिश या किसी अन्य कारण से मैच निर्धारित दिन पूरा नहीं होने पर उसे अगले दिन पूरा कराया जा सके।  वर्ल्ड कप 2027 का फाइनल 21 नवंबर को जोहानिसबर्ग में खेला जाएगा. फाइनल के लिए भी रिजर्व डे रखा गया है. अगर निर्धारित दिन मुकाबला पूरा नहीं हो पाता है तो 22 नवंबर को रिजर्व डे के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा. इस तरह भारत के लिए टूर्नामेंट में कम से कम पांच ग्रुप मैच तय हैं, लेकिन सुपर-7 में पहुंचने की स्थिति में ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के खिलाफ दोबारा मुकाबले की संभावनाएं भी बन सकती हैं. 30 सितंबर 2026 की कटऑफ तारीख के आधार पर 10 टीमों ने सीधे वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई किया है. मेजबान साउथ अफ्रीका और जिम्बाब्वे को स्वत: जगह मिली, जबकि भारत, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान, इंग्लैंड, श्रीलंका, अफगानिस्तान और बांग्लादेश ने आईसीसी ओडीआई रैंकिंग के आधार पर सीधे क्वालिफाई किया. बाकी चार स्थान आईसीसी मेन्स क्रिकेट वर्ल्ड कप क्वालिफायर 2027 से तय होंगे. क्वालिफायर जीतने वाली टीम सीधे ग्रुप चरण में पहुंचेगी, जबकि दूसरे, तीसरे और चौथे स्थान पर रहने वाली टीमें सुपर सीरीज खेलेंगी. इनमें से शीर्ष टीम को ग्रुप स्टेज का टिकट मिलेगा. क्रिकेट वर्ल्ड कप 2027 का फुल शेड्यूल तारीख टीम 1 टीम 2 वेन्यू 2 अक्टूबर, शनिवार क्वालिफायर 1 क्वालिफायर 3 विंडहोक 4 अक्टूबर, सोमवार क्वालिफायर 1 क्वालिफायर 2 विंडहोक 6 अक्टूबर, बुधवार क्वालिफायर 2 क्वालिफायर 3 विंडहोक 7 अक्टूबर, गुरुवार भारत ऑस्ट्रेलिया केपटाउन 8 अक्टूबर, शुक्रवार पाकिस्तान अफगानिस्तान सेंचुरियन 8 अक्टूबर, शुक्रवार इंग्लैंड बांग्लादेश विंडहोक 9 अक्टूबर, शनिवार जिम्बाब्वे क्वालिफायर A बुलावायो 9 अक्टूबर, शनिवार साउथ अफ्रीका न्यूजीलैंड केपटाउन 10 अक्टूबर, रविवार भारत पाकिस्तान जोहानिसबर्ग 10 अक्टूबर, रविवार श्रीलंका क्वालिफायर B विंडहोक 11 अक्टूबर, सोमवार जिम्बाब्वे अफगानिस्तान बुलावायो 12 अक्टूबर, मंगलवार ऑस्ट्रेलिया क्वालिफायर A पार्ल 12 अक्टूबर, मंगलवार न्यूजीलैंड बांग्लादेश ईस्ट लंदन 13 अक्टूबर, बुधवार इंग्लैंड श्रीलंका विंडहोक 13 … Read more

यूपी में आर्द्रभूमियों के संरक्षण का व्यापक अभियान, 22 उच्च प्राथमिकता वाली आर्द्रभूमियां अधिसूचित

स्वच्छ गंगा: योगी सरकार के प्रयासों से आर्द्रभूमि संरक्षण को नई दिशा, गंगा पुनर्जीवन के लिए तेज हुआ वैज्ञानिक प्रबंधन यूपी में आर्द्रभूमियों के संरक्षण का व्यापक अभियान, 22 उच्च प्राथमिकता वाली आर्द्रभूमियां अधिसूचित आर्द्रभूमि संरक्षण से मजबूत होगी गंगा की सेहत, तीन जिलों में 5.36 करोड़ की परियोजनाओं पर काम 275 आर्द्रभूमियों का सर्वे और हेल्थ कार्ड पूरा, अब एकीकृत प्रबंधन योजनाओं पर जोर 8 आर्द्रभूमियों की प्रबंधन योजनाएं तैयार, अनुमोदन के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन को भेजने की तैयारी भूजल रिचार्ज और प्रदूषण नियंत्रण में अहम भूमिका, आर्द्रभूमियों के संरक्षण से बढ़ेगा नदी तंत्र का स्वास्थ्य लखनऊ  योगी सरकार में उत्तर प्रदेश में आर्द्रभूमि संरक्षण को केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित रखने के बजाय इसे गंगा पुनर्जीवन, जल सुरक्षा और स्थानीय पारिस्थितिकी से जोड़कर आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रदेश में गंगा नदी के किनारे स्थित 22 उच्च प्राथमिकता वाली आर्द्रभूमियों को विधिवत अधिसूचित किया जा चुका है। अब इनके वैज्ञानिक और समन्वित प्रबंधन के लिए एकीकृत प्रबंधन योजनाओं (आईएमपी) को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी क्रम में 8 आर्द्रभूमियों के प्रबंधन प्रस्ताव तैयार हो चुके हैं, जिनकी समीक्षा चल रही है और इन्हें जल्द अनुमोदन के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन को भेजा जाएगा। राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के अधिशासी निदेशक जोगिंदर सिंह ने कहा कि आर्द्रभूमियों को कानूनी संरक्षण मिलने से इनके संरक्षण, पुनर्स्थापन और वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए संस्थागत आधार मजबूत हुआ है। एकीकृत प्रबंधन योजनाओं में आर्द्रभूमि के प्राकृतिक आवास का पुनर्स्थापन, प्रदूषण नियंत्रण, जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय लोगों की भागीदारी जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसका सीधा संबंध गंगा और उसकी सहायक नदियों के नदी तंत्र को मजबूत करने से है। तीन जिलों में 5.36 करोड़ की परियोजनाएं वर्तमान में मुजफ्फरनगर, प्रयागराज और बलिया में आर्द्रभूमि विकास की परियोजनाएं प्रगति पर हैं। इन परियोजनाओं को राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन से वित्तीय सहायता मिल रही है और तीनों परियोजनाओं की कुल लागत 5.36 करोड़ रुपये है। प्रयागराज में नुमईया दह झील एवं खेड़ुवा ताल, बलिया में दहताल रेवती और मुजफ्फरनगर में कालेवाला झील को लेकर अलग-अलग संरक्षण एवं विकास कार्य किए जा रहे हैं। प्रयागराज की 591.78 हेक्टेयर क्षेत्र वाली आर्द्रभूमि में आर्द्रभूमि स्वास्थ्य सुधार, प्रदूषण नियंत्रण और जैव विविधता संरक्षण के साथ स्थानीय समुदाय की भागीदारी से आवास पुनर्स्थापन व जल गुणवत्ता सुधार पर काम हो रहा है। बलिया की 34.70 हेक्टेयर दहताल रेवती में जल संचयन संरचनाओं को मजबूत करने, तटवर्ती पौधरोपण और भूजल पुनर्भरण से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं। वहीं मुजफ्फरनगर की 88.36 हेक्टेयर कालेवाला झील में प्रदूषण नियंत्रण, तटवर्ती क्षेत्र संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन के लिए वैज्ञानिक प्रबंधन उपाय लागू किए जा रहे हैं। 275 आर्द्रभूमियों का सर्वे पूरा प्रदेश में गंगा तटवर्ती 27 जिलों में 10 किलोमीटर की सीमा के भीतर स्थित कुल 275 आर्द्रभूमियों का सूचीकरण, दस्तावेजीकरण और हेल्थ कार्ड तैयार करने का कार्य पूरा हो चुका है। इनके लिए इंटीग्रेटेड वेटलैंड मैनेजमेंट प्लान का निरूपण भी किया गया है। जानकारी के अनुसार 231 आर्द्रभूमियां गंगा के अलग-अलग नदी-खंडों में शामिल हैं, जिसमें बिजनौर से रामगंगा संगम तक 93, रामगंगा संगम से गोमती संगम तक 106 और गोमती संगम से घाघरा संगम तक 32 आर्द्रभूमियां हैं। भूजल और नदी तंत्र को मिलेगा लाभ आर्द्रभूमियां प्राकृतिक रूप से पानी को रोकने, प्रदूषकों को छानने और भूजल पुनर्भरण में मदद करती हैं। इनके संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन से जल सुरक्षा मजबूत होने के साथ जैव विविधता और स्थानीय पारिस्थितिकी को भी लाभ मिलता है। यही वजह है कि इन क्षेत्रों को गंगा पुनर्जीवन की व्यापक कार्ययोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा रहा है। आठ नई योजनाओं पर आगे बढ़ेगा काम राज्य स्वच्छ गंगा मिशन (उत्तर प्रदेश) के यूनिट हेड नॉलेज एंड प्लानिंग मिथिलेश कुमार (पद) ने बताया कि बदायूं, बुलंदशहर, कानपुर नगर, उन्नाव और मुजफ्फरनगर की आठ आर्द्रभूमियों के आईएमपी प्रस्ताव तैयार हो चुके हैं। इनमें बदायूं की पिपरौल पुख्ता और खैरपुर खैराती, बुलंदशहर की मोहम्मदपुर मुबारकपुर, कानपुर नगर की जैसरमऊ, उन्नाव की कुशराजपुर और मेला रामकुंवर तथा मुजफ्फरनगर की चौरावाला और मिलाखेड़ी शामिल हैं। इन प्रस्तावों की समीक्षा के बाद इन्हें अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। इस तरह आर्द्रभूमियों को कानूनी संरक्षण देने, उनका वैज्ञानिक आकलन करने और मौके पर संरक्षण परियोजनाएं चलाने की प्रक्रिया उत्तर प्रदेश में गंगा पुनर्जीवन के साथ जल सुरक्षा, भूजल संरक्षण, जैव विविधता और स्थानीय आजीविका को जोड़ रही है। 22 अधिसूचित आर्द्रभूमियां, 10 जिलों में करीब 409.63 हेक्टेयर उच्च प्राथमिकता वाली कुल 22 अधिसूचित आर्द्रभूमियां 10 जिलों में दर्ज हैं। इनमें अलीगढ़ की मुरारखास प्रेतनगर, सिसई और सीकरी आर्द्रभूमियां, कासगंज की बस्तौली-ब्रह्मपुर, सिकंदरपुर खुर्द और रामनछौनी, बदायूं की पिपरौल पुख्ता और खैरपुर खैराती, उन्नाव की मेला रामकुंवर और कुशराजपुर तालाब, प्रयागराज की बड़ा तालाब, उपरिहा तालाब और नुमाईया दाही झील, फर्रुखाबाद की कुठिला झील, खरगपुर खंडौली और रामपुर टफरपुर आर्द्रभूमि, कानपुर नगर की जैसरमऊ, चंदौली की बबरना, बुलंदशहर की मोहम्मदपुर मुबारकपुर, मुजफ्फरनगर की मिलाखेड़ी व चौरावाला तालाब और भदोही की समदा ताल आर्द्रभूमि शामिल हैं। इन 22 अधिसूचित आर्द्रभूमियों का कुल क्षेत्रफल लगभग 409.63 हेक्टेयर है।

युवा शराब से क्यों बना रहे दूरी? 2022-24 के डेटा में गिरावट, बड़ी उम्र के लोगों में बढ़ा सेवन

नई दिल्ली शराब पीने को लेकर एक नया ट्रेंड सामने आया है,  पिछले कुछ सालों में 40 साल से कम उम्र के लोगों में शराब पीने का चलन कम हुआ है, वहीं 50 से 64 साल की उम्र के लोगों में शराब पीने वालों की संख्या बढ़ी है. इतना ही नहीं, इस उम्र के कुछ लोग पहले से ज्यादा शराब पीने लगे हैं।  नई स्टडी Annals of Internal Medicine में प्रकाशित हुई है. रिसर्च के मुताबिक, 2022 से 2024 के बीच अमेरिका में शराब पीने वाले युवाओं की संख्या अब कम हो रही है, युवा शराब से दूरी बन रहे हैं, कोरोना महामारी के बाद युवाओं में ये शराब पीने का ट्रेंड कम हो रहा है. रिसर्च में जो आंकड़े बताए गए हैं उनके मुताबिक, 2018 तक अमेरिका में 40 साल से कम उम्र वाले 66 % लोग शराब पीत थे, 2020 में ये आंकड़ा 69 % था, लेकिन 2024 में ये 67 % रह गया है. 40 साल से कम उम्र में जेन- जी यानी 26 से 30 साल की उम्र के युवा भी शामिल हैं. रिसर्च में ये भी बताया गया है कि 50 साल से अधिक उम्र में शराब पीने का ट्रेंड अब ज्यादा क्यों बढ़ा है।  50 की उम्र के बाद क्यों चिंता ज्यादा? डॉक्टरों के मुताबिक, 50 से 64 साल की उम्र में शराब का ज्यादा सेवन खास तौर पर चिंता का विषय है. इस उम्र में पहले से ही हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, लिवर और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है, ज्यादा शराब इन जोखिमों को और बढ़ा सकती है।  स्टडी के प्रमुख शोधकर्ता और लिवर विशेषज्ञ डॉ. ब्रायन पी. ली के मुताबिक, इस उम्र के लोग ज्यादा मानसिक तनाव में हैं, इस वजह से वह शराब का सहारा ले रहे हैं. हालांकि इसका मतलब ये नहीं है कि 40 से कम उम्र वालों में मानसिक तनाव कम हो गया है, लेकिन 50 प्लस वाले इसको कम करने के लिए शराब ज्यादा पी रहे हैं।    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जो लोग कभी-कभी शराब पीते हैं, उनमें से 53 प्रतिशत लोग अब शराब की खपत कम करने की कोशिश कर रहे हैं. यह संख्या पांच साल पहले केवल 44 प्रतिशत थी. साथ ही, जिन लोगों ने कभी शराब नहीं पी, उनकी संख्या भी 2020 के बाद 3 प्रतिशत बढ़ गई है. हालांकि, वैश्विक स्तर पर शराब की बिक्री अभी भी बहुत बड़ी है. 2024 में दुनिया भर में शराब की कुल खपत 253 बिलियन लीटर तक पहुंच गई है. लेकिन इसके बावजूद, इसका विकास बहुत धीमा हो गया है।  वहीं रिपोर्ट के अनुसार, भारत में शराब की खपत 2024 से 2029 के बीच 357 मिलियन लीटर बढ़ने की संभावना है. इससे भारत दुनिया में तेजी से बढ़ने वाला शराब बाजार बन रहा है. हालांकि, यह बदलाव वैश्विक प्रवृत्ति के विपरीत है, जहां युवा वर्ग शराब से दूर हो रहे हैं. रिपोर्ट ने नॉन-अल्कोहल स्पिरिट्स की बढ़ती मांग पर भी प्रकाश डाला है. शराब की बिक्री में केवल 0.6 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी हुई और इसका कुल बाजार मूल्य 1.7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचा, वहीं नॉन-अल्कोहल स्पिरिट्स की बिक्री 17 प्रतिशत बढ़ी. रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 से 2029 तक यह बाजार 24 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है और 2029 तक यह 10.2 बिलियन लीटर से अधिक हो जाएगा।  मानसिक तनाव में शराब लेना बन सकता है आदत द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, मानसिक तनाव के समय कुछ लोग शराब को राहत पाने का तरीका मान लेते हैं, लेकिन इससे समस्या खत्म नहीं होती. धीरे-धीरे शराब तनाव से निपटने की आदत बन सकती है और इसकी मात्रा भी बढ़ सकती है. इसलिए अगर कोई व्यक्ति 50 की उम्र के बाद  शराब पीता है या पहले से ज्यादा शराब लेने लगा है, तो इसे सिर्फ आदत मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।  कौन सी शराब खरीदना पसंद कर रहे हैं युवा? आज की पीढ़ी केवल सस्ती शराब देखकर ही नहीं खरीद रही है, इसके अलावा भी उनकी कुछ पंसद है, जिस पर उनका फोकस ज्यादा रहता है जैसे…     ऐसी शराब जिसका टेस्ट अलग हो.     शराब की क्वालिटी भी अच्छी हो.     साथ ही कोई खास पहचान हो. शराब का बिजनेस आखिर कैसे बढ़ा? युवा ने शराब पीना भले ही कम कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद शराब कंपनियों के बिजनेस में तेजी देखने को मिल रही है, जिसकी वजह यह है कि युवा शराब को कम जरूर पी रहे हैं, लेकिन जब भी पी रहे हैं तो महंगी और क्वालिटी को देखते हुए ही पी रहे हैं. जिसकी वजह से शराब कंपनियों की कमाई आगे बढ़ी है. खास कर इस बदलाव का असर वोदका के अलग-अलग फ्लेवर की पसंद में भी दिख रहा है।  इन कंपनियों का प्रर्दशन रहा अच्छा युवा की बदलती मांग की वजह से ही रैडिको खेतान, यूनाइटेज स्पिरिट्स और यूनाइटेड ब्रुअरीज जैसी कंपनियां अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं. यानी Gen Z अब कम शराब जरूर पी रहे हैं, लेकिन बेहतर क्वालिटी और अलग फ्लेवर की शराब पीना पसंद कर रहे हैं। 

सोयाबीन किसानों के लिए बड़ी खबर, 3 अक्टूबर से पंजीयन; खाते में भेजे जाएंगे ₹1

भोपाल   मध्य प्रदेश के सोयाबीन किसानों के लिए जरूरी खबर सामने आई है। MP Soybean Bhavantar Yojana 2026 के तहत खरीफ वर्ष 2026 यानी विपणन वर्ष 2026-27 में सोयाबीन फसल के लिए किसानों का पंजीयन 3 अक्टूबर 2026 से शुरू होगा। किसान 17 अक्टूबर 2026 तक अपना पंजीयन करा सकेंगे। पंजीयन की प्रक्रिया ई-उपार्जन पोर्टल के माध्यम से निर्धारित नियमों के अनुसार की जाएगी। भावांतर योजना के तहत सोयाबीन किसानों को उनकी उपज के भाव में अंतर की भरपाई के लिए भुगतान किया जाना है। योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को निर्धारित समय सीमा में पंजीयन कराना जरूरी होगा। किसानों की सुविधा के लिए प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पंजीयन केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। MP Soybean Bhavantar Yojana 2026 के तहत सोयाबीन किसानों का पंजीयन 3 अक्टूबर से शुरू होकर 17 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। यानी किसानों के पास पंजीयन पूरा करने के लिए करीब दो सप्ताह का समय रहेगा। प्रशासन की ओर से किसानों से अपील की गई है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार न करें और समय रहते अपना पंजीयन करा लें। पंजीयन के लिए किसानों को ई-उपार्जन पोर्टल पर निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। इसके अलावा राज्य में बनाए गए पंजीयन केंद्रों पर जाकर भी किसान आवश्यक दस्तावेजों के साथ रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। MP Soybean Registration 2026 कहां कराया जा सकता है? MP Soybean Registration 2026 के लिए किसानों को कई विकल्प दिए गए हैं। ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केंद्रों पर किसान निःशुल्क पंजीयन करा सकेंगे। इसके अलावा सहकारी समितियों और सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केंद्रों पर भी किसानों के लिए मुफ्त रजिस्ट्रेशन की सुविधा उपलब्ध रहेगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को अपने नजदीकी केंद्र पर पंजीयन कराने में सुविधा मिलेगी। किसान चाहें तो निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ई-उपार्जन पोर्टल के माध्यम से भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। आधिकारिक ई-उपार्जन पोर्टल पर किसान पंजीयन और उपार्जन से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध हैं। निजी केंद्रों पर पंजीयन के लिए कितना शुल्क लगेगा? MP Soybean Bhavantar Yojana 2026 के तहत किसान एमपी ऑनलाइन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेंटर यानी CSC, लोक सेवा केंद्र और निजी साइबर कैफे से भी पंजीयन करा सकते हैं। इन केंद्रों पर प्रति पंजीयन अधिकतम 50 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। वहीं ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, तहसील कार्यालय और निर्धारित सहकारी केंद्रों पर पंजीयन निःशुल्क कराया जा सकेगा। किसानों को पंजीयन कराने से पहले यह जरूर देख लेना चाहिए कि केंद्र पर निर्धारित शुल्क से अधिक राशि तो नहीं ली जा रही है। MP Soybean Bhavantar Yojana 2026 पंजीयन के लिए कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी हैं? MP Soybean Registration 2026 के दौरान किसानों के भूमि संबंधी दस्तावेज, आधार कार्ड और अन्य फोटो पहचान पत्रों का सत्यापन किया जाएगा। इसलिए किसान पंजीयन केंद्र पर जाने से पहले अपने जरूरी दस्तावेज तैयार रखें। भूमि रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी और आधार कार्ड की जानकारी सही होना जरूरी है। नाम या अन्य जानकारी में अंतर होने पर पंजीयन प्रक्रिया में परेशानी आ सकती है। किसानों को यह भी सलाह दी गई है कि वे अपना मोबाइल नंबर और बैंक खाते की जानकारी पहले से जांच लें, ताकि पंजीयन के दौरान गलत जानकारी दर्ज न हो। 7.10 लाख किसानों ने कराया था पंजीयन, 1476 करोड़ का भुगतान वर्ष 2025-26 में भावांतर योजना के तहत 7.10 लाख किसानों ने पंजीयन कराया था। इनमें से 16.95 लाख टन सोयाबीन खरीदा गया और 1476 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। इस साल 7 से 10 लाख किसानों के पंजीयन और करीब 20 लाख टन सोयाबीन खरीदी का अनुमान है। पंजीयन ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, तहसील कार्यालयों के सुविधा केंद्र और सहकारी समितियों व विपणन संस्थाओं के केंद्रों पर निशुल्क होगा। एमपी ऑनलाइन, सीएससी कियोस्क, लोक सेवा केंद्र और निजी साइबर कैफे से अधिकतम 50 रुपए शुल्क देकर भी पंजीयन कराया जा सकेगा। सिकमी, बटाईदार, कोटवार और वन पट्टाधारी किसानों का पंजीयन केवल सहकारी समितियों में होगा। इनका राजस्व विभाग 100% सत्यापन करेगा। पंजीयन से पहले बैंक खाते और दस्तावेजों की कराएं जांच सोयाबीन के भावांतर पंजीयन से पहले किसान बैंक खाते को आधार और एक्टिव मोबाइल नंबर से लिंक करा लें। मोबाइल नंबर या बायोमेट्रिक अपडेट के लिए जिला/तहसील या डाकघर के आधार केंद्र पर जाएं। पंजीयन के दौरान भूमि संबंधी दस्तावेज, आधार कार्ड और आईएफएससी कोड सही दर्ज कराएं। आधार वेरिफिकेशन होगा अनिवार्य MP Soybean Bhavantar Yojana 2026 में पंजीयन कराने और फसल बेचने के लिए आधार नंबर का सत्यापन जरूरी होगा। आधार का वेरिफिकेशन आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर आने वाले OTP या बायोमेट्रिक डिवाइस के माध्यम से किया जा सकता है। पंजीयन तभी मान्य होगा जब किसान के भू-अभिलेख और खसरे में दर्ज नाम का मिलान आधार कार्ड में दर्ज नाम से होगा। यदि दोनों जगह नाम में अंतर पाया जाता है तो किसान को तहसील कार्यालय से सत्यापन कराना होगा। सत्यापन के बाद ही पंजीयन को मान्य किया जाएगा। इसलिए किसानों को पंजीयन कराने से पहले अपने आधार और भूमि रिकॉर्ड में दर्ज नाम की जांच कर लेना चाहिए। बैंक खाते की जानकारी भी सही रखें मध्य प्रदेश सोयाबीन भावांतर योजना 2026 के तहत भुगतान के लिए किसान के आधार लिंक बैंक खाते को प्राथमिकता दी जाएगी। यदि आधार लिंक खाते में भुगतान करने में किसी तरह की परेशानी आती है तो पंजीयन के दौरान उपलब्ध कराए गए बैंक खाते में भुगतान किया जा सकता है। पंजीयन के समय किसान को अपना बैंक खाता नंबर और IFSC कोड देना होगा। बैंक खाता सक्रिय होना चाहिए और उसकी जानकारी सही दर्ज होनी चाहिए। अक्रियाशील बैंक खाते और संयुक्त बैंक खाते स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इसके अलावा Fino, Airtel और Paytm Bank के खाते भी पंजीयन के लिए मान्य नहीं होंगे। आधार लिंक बैंक खाते का होगा सत्यापन पंजीयन के दौरान किसान के आधार लिंक बैंक खाते की जांच के लिए मध्य प्रदेश राज्य आपूर्ति निगम द्वारा ई-उपार्जन/JIT पोर्टल के माध्यम से 1 रुपये का ट्रांजेक्शन किया जाएगा। इसका उद्देश्य बैंक खाते की जानकारी का सत्यापन करना है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने बैंक खाते और मोबाइल नंबर को आधार से लिंक रखें। यदि आधार में मोबाइल नंबर … Read more

मिठाई खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर, UP में खुली मिठाइयों पर होगी एक्सपायरी डेट

सहारनपुर  पितृ पक्ष समाप्त होते ही त्योहारी सीजन शुरू होने जा रहा है। नवरात्र के बाद करवाचौथ, अहोई अष्टमी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाईदूज जैसे प्रमुख पर्व मनाए जाएंगे। त्योहारों के दौरान मिठाइयों की मांग कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में मिठाइयों की गुणवत्ता और उनकी सुरक्षित उपयोग अवधि को लेकर अब व्यवस्था और सख्त की जा रही है। 15 अक्तूबर से खुली मिठाइयों पर भी निर्माण तिथि (मैन्युफैक्चरिंग डेट) और उपयोग की अंतिम तिथि (यूज बाय डेट) अंकित करना अनिवार्य होगा। खुली मिठाइयों पर भी लिखनी होगी एक्सपायरी डेट अभी तक शहर की बड़ी से लेकर छोटी मिठाई की दुकानों पर अधिकांश मिठाइयां खुले में रखकर बेची जाती हैं। ग्राहक जिस मिठाई की जितनी मात्रा मांगता है, उसे उसी समय तौलकर डिब्बे में पैक कर दिया जाता है। इस तरह की मिठाइयों के पैकेट या डिब्बे पर आमतौर पर निर्माण और उपयोग की तारीख दर्ज नहीं होती। इसके कारण ग्राहक को यह जानकारी नहीं मिल पाती कि मिठाई कब तैयार की गई थी और उसे कितने समय तक सुरक्षित रूप से खाया जा सकता है। त्योहारी सीजन में यह व्यवस्था और महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि इस दौरान दुकानों पर मिठाइयों की बिक्री बढ़ने के साथ बड़ी मात्रा में मिठाइयों का उत्पादन भी होता है। नई व्यवस्था के तहत दुकानदारों को खुली मिठाइयों के संबंध में भी निर्माण और उपयोग की तिथि की जानकारी प्रदर्शित करनी होगी। इससे ग्राहकों को मिठाई खरीदते समय उसकी ताजगी और उपयोग की अवधि के बारे में जानकारी मिल सकेगी। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी पंकज कुमार गुप्ता ने बताया कि त्योहारी सीजन में मिठाई की दुकानों पर निगरानी बढ़ाई जाती है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद दुकानदारों के लिए तारीख संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण होगा। इसका उद्देश्य मिठाइयों की गुणवत्ता को लेकर पारदर्शिता बढ़ाना और ग्राहकों को जागरूक करना है। उन्होंने बताया कि नवरात्र के बाद लगातार त्योहार होने के कारण मिठाई कारोबारियों ने भी तैयारी शुरू कर दी है। दीपावली और भाईदूज के आसपास मिठाइयों की बिक्री सबसे अधिक बढ़ने की उम्मीद रहती है। ऐसे में दुकानदारों को नई व्यवस्था के अनुरूप तैयारी करनी होगी। वहीं ग्राहकों को भी मिठाई खरीदते समय निर्माण और उपयोग की तिथि की जानकारी अवश्य देखनी चाहिए।  

भोपाल में तैयार हो रहा MP BJP का नया मुख्यालय, 3 ब्लॉक में दिखेगा हाईटेक अंदाज

भोपाल  मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को जल्द ही अपना नया और अत्याधुनिक प्रदेश मुख्यालय मिलने वाला है। भोपाल के दीनदयाल परिसर में बन रही इस बहुमंजिला इमारत का काम अब अपने अंतिम चरण में है। इंटीरियर और फिनिशिंग का काम पूरा होने में करीब चार महीने का समय और लगेगा। माना जा रहा है कि पार्टी फरवरी 2027 में इस भव्य भवन में आधिकारिक रूप से गृह प्रवेश कर लेगी। इसके साथ ही, नए संगठन महामंत्री चंद्रशेखर तिवारी के रहने के लिए दीपावली तक एक फ्लोर पूरी तरह से तैयार कर लिया जाएगा। समर्पण दिवस पर हो सकता है गृह प्रवेश     पुराने दफ्तर की तरह ही यह नया कार्यालय भी जनसंघ के संस्थापक पंडित दीनदयाल उपाध्याय को समर्पित होगा। सूत्रों की मानें तो 11 फरवरी को पंडित जी की पुण्यतिथि होती है, जिसे भाजपा 'समर्पण दिवस' के रूप में मनाती है (इस दिन कार्यकर्ता पार्टी फंड में अपना योगदान देते हैं)। पूरी संभावना है कि इसी दिन या इसके एक-दो दिन पहले नए दफ्तर का लोकार्पण किया जाए। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी कुछ दिन पहले हुई एक समीक्षा बैठक में दीपावली तक कम से कम दो फ्लोर रहने और काम करने लायक तैयार करने के निर्देश दिए हैं।  तीन खास हिस्सों में बंटा होगा पूरा परिसर यह विशाल कार्यालय मुख्य रूप से तीन अलग-अलग ब्लॉकों में विभाजित किया गया है, जिनके नाम 'संकल्प', 'समर्पण' और 'सहयोग' रखे गए हैं…     संकल्प (मुख्य कार्यालय): यह 11 से 12 मंजिला मुख्य प्रशासनिक इमारत होगी, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष का कक्ष होगा। इसके अलावा यहां मीडिया और सोशल मीडिया का वार रूम तथा उच्च स्तरीय बैठकों के लिए कक्ष बनाए जा रहे हैं।     समर्पण (पदाधिकारी निवास): चार मंजिला यह ब्लॉक प्रदेश और केंद्रीय नेताओं के ठहरने के लिए होगा। इसमें अतिथियों के लिए योग और अध्ययन कक्ष की भी सुविधा होगी।     सहयोग (प्रशासनिक ब्लॉक): सात मंजिला इस हिस्से का उपयोग कर्मचारियों के कामकाज और सुरक्षा व्यवस्था के संचालन के लिए किया जाएगा। हाई-टेक सुविधाओं और ग्रीन एनर्जी से लैस होगा नया दफ्तर     लगभग 1.5 एकड़ (65,000 वर्ग फुट) जमीन पर बन रहे इस नए प्रदेश मुख्यालय का कुल बिल्ट-अप एरिया 1.15 लाख से 1.25 लाख वर्ग फुट के बीच होगा। इसे पूरी तरह से भारतीय वास्तु शास्त्र और 'ग्रीन एनर्जी' के कॉन्सेप्ट को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।  

2 अक्टूबर को ‘No UPI Day’, व्यापारियों में मतभेद; CAIT ने आयोजन से किया इनकार

  नई दिल्ली आज  2 अक्टूबर है यानी गांधी जयंती, अगर आप किसी दुकान पर खरीदारी करने के जाएं और वहां पर दुकानदार आपसे कैश मांगे, यानी यूपीआई पेमेंट लेने से मना कर दे, तो परेशान मत होना. दरअसल, सरकार के 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर के विरोध में व्यापिरियों ने 2 अक्टूबर को 'No UPI Day' मनाने का ऐलान किया है. हालांकि, इसे लेकर अब व्यापारियों में आपस में ही मतभेद भी देखने को मिल रहे हैं और वे दो ग्रुप में बंटे हुए नजर आ रहे हैं।  ऐसा इसलिए क्योंकि नो यूपीआई डे को लेकर 'चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री' (CTI) ने व्यापारियों से गांधी जयंती के दिन UPI QR कोड, स्कैनर और साउंड बॉक्स ढककर सिर्फ कैश में भुगतान लेने की अपील की है. तो वहीं कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स यानी CAIT ने इससे दूरी बना ली है।  CAIT का ऐलान- नहीं होंगे शामिल बीजेपी सांसद प्रवीण खंडेलवाल की अगुवाई वाली कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) का कहना है कि वह 2 अक्टूबर को 'No UPI Day' नहीं मनाएगी और न ही उसने इसके लिए व्यापारियों से किसी तरह की कोई अपील की है. कैट ने साफ किया है कि संगठन ने इसमें शामिल होने के बारे में कोई फैसला, प्रस्ताव या आधिकारिक घोषणा नहीं की है।  CTI फैसला वापस लेने को तैयार नहीं एक ओर जहां कैट इससे दूरी बनाए हुए है, तो वहीं दिल्ली के चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने यूपीआई पेमेंट पर MDR लगाने के विरोध में 2 अक्टूबर को No UPI Day मनाने का ऐलान किया है. CTI का कहना है कि व्यापारियों ने अपना फैसला वापस नहीं लिया है. संगठन से जुड़े व्यापारी दिल्ली और पूरे देश में इसे मनाएंगे. इसमें 100 से ज्यादा बड़े व्यापारी संगठन शामिल रहेंगे।  सीटीआई को उम्मीद है कि देश भर में 2000 से ज्यादा जगहों पर 'नो UPI डे' मनाया जाएगा. संगठन ने दिल्ली और देश के सभी दुकानदारों और व्यापारियों से अपील की है कि वे 2 अक्टूबर को अपनी UPI मशीनों को काले कपड़े से ढक लें और सिर्फ कैश में लेन-देन करें।  सरकार से UPI MDR हटाने की मांग चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मांग की है कि सरकार 2000 रुपये से ज्यादा के UPI लेन-देन पर लागू किए जाने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR को वापस ले. इसके पीछे बड़ा तर्क देते हुए सीटीआई ने कहा है कि इसका बोझ 6 करोड़ दुकानदारों और व्यापारियों पर पड़ेगा।  इसके साथ ही संगठन की ओर से 15 अक्टूबर से लागू होने वाले 2000 रुपये से ज्यादा के UPI पेमेंट पर चार्ज को लेकर कहा गया कि इससे UPI Payment में 50% की गिरावट आ सकती है. देश में कैश का चलन फिर से बढ़ सकता है।  कहां कितना लगेगा यूपीआई चार्ज? गौरतलब है कि यूपीआई पेमेंट एमडीआर 2000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4% तय किया गया है, लेकिन सभी पेमेंट के लिए एक एक जैसा नहीं है. जैसे इसमें फ्लैट-रेट-मॉडल कैटेगरी को भी शामिल किया गया है. इसके तहत आने वाले तमाम यूपीआई पेमेंट्स, जिनमें पेट्रोल पंप ट्रांजैक्शंस भी आते हैं, उनपर फिक्स्ड एमडीआर वसूला जाएगा, जो 5 रुपये तय किया गया है. इसके अलावा ₹100000 तक पेमेंट वाले व्यापारियों को राहत दी गई है, यानी इन्हें मर्चेंट डिस्काउंट रेट जीरो (Zero MDR) वाली कैटेगरी में शामिल किया गया है।