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यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी, इंदौर मेट्रो का दायरा बढ़ा; रेडिसन चौराहा होगा नया स्टेशन

इंदौर इंदौर में लंबे इंतजार के बाद अब मेट्रो का सफर बढ़ेगा और यात्री भी। अभी तक मेट्रो ट्रेन सात किलोमीटर तक चलती थी, लेकिन अब 17 किलोमीटर तक मेट्रो का संचालन होगा। मेट्रो को हरी झंडी केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर दिखाएंगे। दो माह पहले मेट्रो के कमर्शियल रन की मंजूरी मिल चुकी थी, लेकिन संचालन अब शुरू होगा।  एक साल के इंतजार के बाद अब मेट्रो सुपर कॉरिडोर से आगे बढ़कर रेडिसन चौराहे पर यात्रियों के साथ पहुंचेगी। इंदौर में 18 जून से सुपर कॉरिडोर के गांधी नगर स्टेशन से रेडिसन चौराहे तक मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू होगा। मेट्रो प्रोजेक्ट की समीक्षा बैठक में यह फैसला लिया गया। फिलहाल मेट्रो ट्रेन के किराए की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन अधिकतम 80 रुपये तक किराया होगा। बढ़ेगी यात्री संख्या अभी मेट्रो जिस हिस्से में चलती है, वह आबादी क्षेत्र नहीं है। इस कारण मेट्रो को काफी कम यात्री मिलते थे, लेकिन गांधी नगर से रेडिसन चौराहा तक मेट्रो का संचालन होने के बाद यात्रियों की संख्या बढ़ेगी, क्योंकि सुपर कॉरिडोर की आईटी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारी और कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थी इसका ज्यादा उपयोग करेंगे। इसके अलावा एयरपोर्ट तक जाने वाले यात्री भी इसका उपयोग कर सकेंगे, हालांकि उन्हें गांधी नगर से फिर ऑटो रिक्शा या अन्य विकल्प अपनाकर एयरपोर्ट तक जाना होगा।गांधी नगर मेट्रो स्टेशन से रेडिसन चौराहा तक पांच मेट्रो स्टेशन भी बनकर तैयार हो चुके हैं। इसके अलावा अलग-अलग स्पीड में मेट्रो का ट्रायल रन भी कई बार हो चुका है। 80 की स्पीड से चलेगी मेट्रो ट्रेन 17 किलोमीटर लंबे रूट पर 80 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से मेट्रो चलेगी। गांधी नगर से रेडिसन चौराहे तक आने में मेट्रो को 20 मिनट का समय लगेगा। पहले चरण में मेट्रो ट्रेन का संचालन खजराना चौराहा तक होगा। उसके बाद मेट्रो ट्रेन अंडरग्राउंड होगी। उसका काम भी अभी शुरू नहीं हो पाया है। फिलहाल मेट्रो का संचालन सात किलोमीटर हिस्से में हो रहा है। यहां मेट्रो का किराया अधिकतम 30 रुपये है। 17 किलोमीटर तक के संचालन में अधिकतम किराया 80 रुपये तक होगा। जब 30 किलोमीटर हिस्से में मेट्रो ट्रैक का काम पूरा होगा, तो हर 30 मिनट के अंतराल पर मेट्रो ट्रेन चलेगी। शहर में कुल 28 स्टेशनों से ट्रेन गुजरेगी। 20 से ज्यादा मेट्रो ट्रेनों का संचालन होगा। एक ट्रेन में साढ़े चार सौ यात्री सवार हो सकेंगे। बैठने के अलावा खड़े रहकर सफर करने में भी आसानी होगी। ट्रेन के भीतर लगे पोल में चार ग्रिप दी गई हैं, जिन्हें यात्री पकड़कर सफर कर सकते हैं। मेट्रो ट्रेन बाहरी और आंतरिक रूप से सीसीटीवी कैमरों से लैस होगी।  

स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा कदम: सिंहस्थ से पहले शुरू होगी MP की पहली मेडिसिटी, मंडला-राजगढ़ मेडिकल कॉलेज भी अगले साल से

उज्जैन  उज्जैन में सिंहस्थ-2028 से पहले मेडिकल कालेज प्रारंभ करने की तैयारी है। सरकार इसे प्रदेश की पहली मेडिसिटी के तौर पर विकसित कर रही है। विधानसभा चुनाव के पहले भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में भी एक मेडिसिटी बनाने की घोषणा की थी। अगला विधानसभा चुनाव 2028 के अंत में संभावित हैं, इसके पहले सरकार मेडिसिटी प्रारंभ करने की तैयारी कर रही है। शैक्षणिक सत्र 2027-28 से मेडिकल कॉलेज शुरू करने के लिए अगले वर्ष नेशनल मेडिकल कमीशन को चिकित्सा शिक्षा संचालनालय (डीएमई) द्वारा प्रस्ताव भेजा जाएगा। यहां एमबीबीएस 150 सीटें होंगी। उज्जैन के साथ मंडला और राजगढ़ में भी मेडिकल कॉलेज प्रारंभ करने की तैयारी चल रही है। वर्ष 2026 में बुधनी, दमोह और छतरपुर मेडिकल कॉलेज प्रारंभ करने के लिए डीएमई की तरफ से एनएमसी को आवेदन किया जा चुका है। एमबीबीएस सीटें 3450 पहुंच जाएंगी दो वर्ष में छह नए कालेज खुलने से प्रदेश में 25 शासकीय कॉलेज हो जाएंगे, जिनमें एमबीबीएस की कम से कम 3450 सीटें हो जाएंगी। इसी तरह से पीपीपी माडल सहित 13 नए निजी मेडिकल कॉलेज भी खुलने की स्थिति में हैं। इनमें 1300 सीटें होंगी। इस प्रकार शासकीय और निजी मिलाकर 1900 सीटें बढ़ जाएंगी। अभी प्रदेश के 19 शासकीय कालेजों में एमबीबीएस की 2850 और 14 निजी कॉलेजों में 2700 सीटें मिलाकर कुल 5550 सीटें हैं। 2028 तक यह 7450 हो जाएंगी। सब कुछ योजना के अनुरूप चला तो वर्ष 2033 तक हर साल 7450 डाक्टर तैयार होने लगेंगे। क्या-क्या सुविधा रहेगी उज्जैन की मेडिसिटी में     एमबीबीएस की 150 सीट वाला अत्याधुनिक मेडिकल कॉलेज होगा। इससे संबद्ध 550 बिस्तरों का अस्पताल होगा, जिसमें सुपरस्पेशियलिटी सेवाएं भी होंगी।     ऐसा डायग्नोस्टिक सेंटर बनाया जा रहा है जिसमें सभी पैथोलाजिकल, माइक्रोबायोलॉजिकल, रेडियोडायग्नोसिस की जांचें एक जगह पर हो सकेंगी।     एकीकृत स्वास्थ्य के अंतर्गत आयुष की पैथियों में उपचार की सुविधा और वेलनेस सेंटर बनेंगे। वेलनेस सेंटर बनाने का उद्देश्य बीमारी से बचाव (प्रिवेंशन) को लेकर है, जिसमें योग-ध्यान भी कराया जाएगा।     मेडिसिटी के माध्यम से स्वास्थ्य पर्यटन को आकर्षित करने की योजना है।     डॉक्टर व अन्य कर्मचारियों के लिए आवास की सुविधा भी रहेगी। सीएम केयर योजना : वर्ष 2028 से मिलने लगेगा लाभ सरकार ने इसी वर्ष सीएम केयर योजना प्रारंभ करने का निर्णय लिया है, जिसे कैबिनेट से स्वीकृति मिल गई है। इसके अंतर्गत पांच वर्ष में 3628 करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी है। योजना के अंतर्गत सुपरस्पेशियलिटी सेवाओं पर फोकस है। कैंसर में मेडिकल आंकोलॉजी, सर्जिकल आंकोलॉजी, रेडिएशन आंकोलॉजी, कार्डियोलॉजी, कार्डियक सर्जरी, आर्गन ट्रांसप्लांट जैसी सुविधाएं चरणबद्ध तरीके से विकसित की जानी हैं। साथ ही सुपरस्पेशियलिटी सेवाओं का प्रदेशस्तरीय अस्पताल भी भोपाल या उज्जैन में बनाने पर विचार चल रहा है। बता दें, लगभग 50 प्रतिशत कॉलेजों में अभी भी यह सेवाएं मिल रही हैं, पर कुछ जगह अलग से विभाग तक नहीं हैं। संसाधनों की बहुत अधिक कमी है। सीएम केयर में आने के बाद संबंधित कॉलेजों में अलग सुपर स्पेशियलिटी ब्लाक बनेगा। अलग से बजट होगा। दूसरा बड़ा लाभ यह होगा कि सुपरस्पेशियलिटी सीटें भी बढ़ जाएंगी।  

उज्जैन के महाकाल मंदिर की AI तकनीक बनी मिसाल, ‘त्रिनेत्र’ को राष्ट्रीय सम्मान

उज्जैन उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए विकसित की गई कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित वीडियो सर्विलांस प्रणाली ‘त्रिनेत्र’ को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय द्वारा घोषित 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कारों की सूची में महाकाल मंदिर की इस अत्याधुनिक प्रणाली का चयन किया गया है। यह सम्मान मंदिर प्रबंधन द्वारा तकनीक के माध्यम से सुरक्षा, निगरानी और व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में किए गए नवाचारों की महत्वपूर्ण पहचान माना जा रहा है। बढ़ती श्रद्धालु संख्या के बीच बना सुरक्षा का मजबूत कवच अक्टूबर 2022 में श्रीमहाकाल महालोक के लोकार्पण के बाद उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान में प्रतिदिन 80 हजार से लेकर एक लाख तक श्रद्धालु महाकाल मंदिर पहुंच रहे हैं। वहीं श्रावण मास, पर्व-त्योहारों, विशेष तिथियों और अवकाश के दिनों में यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। इतनी बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुचारु दर्शन व्यवस्था सुनिश्चित करना मंदिर प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया था। इसी चुनौती से निपटने के लिए मंदिर प्रबंध समिति ने आधुनिक तकनीक का सहारा लेते हुए एआई आधारित वीडियो सर्विलांस सिस्टम विकसित किया, जिसे ‘त्रिनेत्र’ नाम दिया गया। AI तकनीक से हो रही हर गतिविधि की निगरानी ‘त्रिनेत्र’ प्रणाली मंदिर परिसर में स्थापित कैमरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक की मदद से भीड़ के मूवमेंट, सुरक्षा संबंधी गतिविधियों और संभावित जोखिमों पर लगातार नजर रखती है। इससे भीड़ नियंत्रण, आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया और सुरक्षा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया गया है। मंदिर प्रशासन का मानना है कि इस तकनीक ने न केवल श्रद्धालुओं की सुरक्षा को मजबूत किया है, बल्कि व्यवस्थाओं को भी अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डिजिटल नवाचार का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस अवार्ड के लिए चयन महाकाल मंदिर में लागू डिजिटल नवाचारों की सफलता का प्रमाण माना जा रहा है। यह उपलब्धि न केवल मंदिर प्रशासन के लिए गौरव का विषय है, बल्कि धार्मिक स्थलों पर तकनीक आधारित प्रबंधन मॉडल को भी नई पहचान दिलाने वाली है। ऐसे काम करता है सिस्टम     इसके तहत ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर और श्री महाकाल महालोक परिसर में 600 से अधिक एडवांस एआइ आधारित कैमरे लगाए गए हैं।     सभी कैमरों को खास कंट्रोल रूम से जोड़ा गया है। यहां से सुरक्षाकर्मी और अधिकारी रियल-टाइम मॉनिटरिंग करते हैं।     यह सिस्टम श्रद्धालुओं की संख्या की सटीक जानकारी, भीड़ वाले क्षेत्र और प्रतिबंधित क्षेत्रों में हो रही गतिविधियों का पता लगाता है।     सिस्टम से प्राप्त सटीक जानकारी से अधिकारी भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के लिए बेहतर कदम उठा पाते हैं।  

सरकारी भर्ती के लिए सख्त होंगे मानदंड, नैतिक पतन से जुड़े मामलों को भी किया जाएगा शामिल

भोपाल  राज्य सरकार 65 साल बाद सरकारी नौकरी के लिए सेवा की सामान्य शर्तें बदलने जा रही है। वर्ष 1961 की सेवा शर्तों में महिला अपराध में दोषी सिद्ध होने वाले व्यक्ति को सरकारी नौकरी के लिए अपात्र माना गया था लेकिन अब नैतिक पतन को इसमें शामिल किया गया है यानी हत्या, भ्रष्टाचार सहित अन्य गंभीर अपराध में दोष सिद्ध होने पर भी पात्रता नहीं रहेगी। परिवीक्षा अवधि और स्थायीकरण को लेकर बड़ा फैसला परिवीक्षा अवधि (प्रोबेशन) समाप्त करने को लेकर भी यह स्पष्ट कर दिया गया है कि निर्धारित अवधि समाप्त होने पर अधिकतम छह माह के भीतर निर्णय लेना होगा। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो यह मान लिया जाएगा कि कोई आपत्ति नहीं है और संबंधित को शासकीय सेवा में स्थायी कर दिया जाएगा। नियमों में स्पष्टता के लिए नया प्रारूप तैयार प्रदेश में शासकीय सेवा के लिए सामान्य सेवा शर्तें 1961 में निर्धारित की गई थीं। बीच-बीच में कुछ संशोधन हुए मगर विभागों को असमंजस रहता था और वे सामान्य प्रशासन विभाग से मार्गदर्शन मांगते थे। इस प्रक्रिया में अनावश्यक समय लगता था। इसे देखते हुए सरकार ने नियम में स्पष्टता के लिए नए सिरे से नियम बनाने का निर्णय लिया। विभाग के अपर सचिव अजय कटेसरिया ने प्रारूप तैयार करके 15 जून तक सुझाव मांगे हैं ताकि इन्हें जल्द ही अंतिम रूप दे दिया जाए। अपात्रता, स्वास्थ्य परीक्षण और दो बच्चों का नियम एक से अधिक जीवित जीवनसाथी होने पर सरकारी नौकरी के लिए अपात्रता रहेगी। हालांकि, विशेष कारण होने पर इसमें सरकार छूट दे सकती है। स्वास्थ्य परीक्षण में उत्तीर्ण होना अनिवार्य रहेगा। यदि किसी को स्वास्थ्य परीक्षण में अयोग्य घोषित कर दिया तो कोई भी इसकी अनदेखी नहीं कर सकेगा। इसमें किसी को विवेकाधिकार से निर्णय का अधिकार भी नहीं होगा। दो बच्चे से अधिक होने पर सेवा समाप्ति का प्रविधान यथावत रखा गया है।   वरिष्ठता और पदोन्नति का नया विन्यास वहीं, वरिष्ठता का निर्धारण चयन सूची में क्रम के अनुसार होगा न कि पदभार ग्रहण करने के आधार पर यानी जुलाई में यदि चयन होता है और कुछ अगस्त तो कुछ सितंबर में पदभार ग्रहण करते हैं तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। वरिष्ठता सह उपयुक्तता के आधार पर पदोन्नति के लिए उपयुक्त पाए गए व्यक्तियों की वरिष्ठता वही होगी जैसे उस संवर्ग में है, जिससे पदोन्नति की जाती है। परिवीक्षा अवधि को लेकर यह निर्धारित किया है कि जो अवधि शासन द्वारा निर्धारित की गई है, उसमें स्थायी करने या न करने को लेकर निर्णय लेना ही होगा।  

छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि  सिन्हा का संपूर्ण जीवन समाजसेवा, संगठन निर्माण और योग के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित रहा। उनका निधन न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक अपूरणीय क्षति है। मुख्यमंत्री  साय ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा एक कुशल संगठनकर्ता, सरल, सौम्य और मृदुभाषी व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने अपने व्यवहार, कार्यशैली और समर्पण से समाज के विभिन्न वर्गों के बीच विशेष पहचान बनाई थी। योग के प्रति उनकी निष्ठा और समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें विशिष्ट बनाती थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष का दायित्व संभालने के बाद  सिन्हा ने पूरे समर्पण और ऊर्जा के साथ योग आंदोलन को नई दिशा देने का कार्य किया। उन्होंने योग को केवल स्वास्थ्य का माध्यम नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा बनाने के लिए अनेक नवाचार किए। उनके प्रयासों से प्रदेश में योग गतिविधियों को नई पहचान और व्यापक जनस्वीकृति मिली। मुख्यमंत्री  साय ने स्वर्गीय  सिन्हा के साथ बिताए गए क्षणों को स्मरण करते हुए कहा कि उनसे नियमित मुलाकात होती थी और हर मुलाकात में वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए योग आधारित नए विचार साझा करते थे। उनकी सोच सदैव रचनात्मक और जनहितकारी होती थी। वे योग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर सक्रिय रहते थे और इसी उद्देश्य को अपने जीवन का मिशन बना चुके थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष जशपुर के रणजीता स्टेडियम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम की सफलता में  सिन्हा की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। सीमित समय में उन्होंने जिस कुशलता और प्रतिबद्धता के साथ उस आयोजन को भव्य स्वरूप दिया, वह उनकी संगठन क्षमता और कार्यकुशलता कावो उत्कृष्ट उदाहरण है। उस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता ने योग के प्रति जनजागरूकता को नई ऊंचाई प्रदान की थी। उनका जीवन समाज के प्रति समर्पण, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक था, जो आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरणा देता रहेगा। मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा परिजनों को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की। श्रद्धांजलि सभा में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, वन मंत्री  केदार कश्यप, स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल, स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेंद्र यादव, विधायक  अमर अग्रवाल, विधायक  धरमलाल कौशिक, विधायक  अजय चंद्राकर, महापौर मती मीनल चौबे,  रमेश बैस,  राम प्रताप,  पवन साय, डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना,  राम दत्त,  राजीव लोचन महाराज सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, योग साधक एवं योग जगत से जुड़े लोगों ने उपस्थित होकर स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा को श्रद्धासुमन अर्पित किया।

डेब्यू का मौका और नए संयोजन की तैयारी, अफगानिस्तान मुकाबले के लिए भारत की संभावित XI

 मुल्लांपुर अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाले एकमात्र टेस्ट मैच के साथ टीम इंडिया अपने 2026 के टेस्ट अभियान की शुरुआत करने जा रही है. 6 जून (शनिवार) से न्यू चंडीगढ़ के महाराजा यादविंद्र सिंह इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले जाने वाले इस मुकाबले में भारतीय टीम की प्लेइंग-11 क्या होगी, इस पर भी फैन्स की निगाहें हैं।  मैच से एक दिन पहले मुख्य कोच गौतम गंभीर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई अहम संकेत दिए, जिससे यह अंदाजा लगाना आसान हो गया कि अफगानिस्तान के खिलाफ भारत किस संयोजन के साथ उतर सकता है. खास बात यह है कि कुछ युवा खिलाड़ियों को मौका मिल सकता है, जबकि कुछ बड़े नाम अपनी जगह पक्की कर चुके हैं।  भारतीय बल्लेबाजी की शुरुआत एक बार फिर यशस्वी जायसवाल और केएल राहुल की जोड़ी करेगी. जायसवाल इस समय भारत के सबसे भरोसेमंद टेस्ट बल्लेबाजों में गिने जाते हैं, जबकि राहुल को इस मैच के लिए उपकप्तान भी बनाया गया है।  गंभीर देंगे सुदर्शन को भी मौका IPL (इंडियन प्रीमियर लीग) 2026 में बल्ले से धमाल मचाने वाले साई सुदर्शन को नंबर-3 पर मौका मिलना लगभग तय माना जा रहा है. गौतम गंभीर ने भी संकेत दिए हैं कि टीम मैनेजमेंट युवा बल्लेबाज को लंबी पारी खेलने की जिम्मेदारी सौंपने के मूड में है. साई ने IPL 2026 में 722 रन बनाए थे और अब वह उसी फॉर्म को टेस्ट क्रिकेट में भी जारी रखना चाहेंगे. साई के प्लेइंग-11 में जगह बनाने का मतलब यह है कि देवदत्त पडिक्कल को बाहर बैठना पड़ेगा।  गर्दन की चोट के कारण दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पिछला टेस्ट नहीं खेलने वाले शुभमन गिल अब पूरी तरह फिट हैं और नंबर-4 पर बल्लेबाजी करते नजर आएंगे. वहीं विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ के लिए यह मुकाबला बेहद खास रहने वाला है. पंत अपने करियर का 50वां टेस्ट मैच खेलने उतरेंगे और टीम उनसे बड़ी पारी की उम्मीद करेगी. नीतीश कुमार रेड्डी तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर की भूमिका में नजर आ सकते हैं. पिछले कुछ महीनों में उन्होंने बल्ले और गेंद दोनों से प्रभावित किया है।  इसके अलावा वॉशिंगटन सुंदर का खेलना भी तय माना जा रहा है. सुंदर टीम को स्पिन के साथ-साथ बल्लेबाजी में भी गहराई देंगे. कुलदीप यादव भारत के मुख्य स्पिनर होंगे. रवींद्र जडेजा की गैरमौजूदगी में कुलदीप पर बड़ी जिम्मेदारी होगी. वहीं घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करने वाले हर्ष दुबे को टेस्ट डेब्यू का मौका मिल सकता है।  हालांकि हाल के दिनों में मोहम्मद सिराज के वर्कलोड मैनेजमेंट को लेकर चर्चा हुई थी, लेकिन ताजा संकेतों के अनुसार वह प्लेइंग इलेवन का हिस्सा रह सकते हैं. सिराज वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप 2025-27 चक्र में भारत के सबसे सफल गेंदबाज रहे हैं और अफगानिस्तान के खिलाफ तेज आक्रमण की अगुआई करेंगे. उनका साथ देने के लिए प्रसिद्ध कृष्णा सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं. ऐसे में पंजाब के युवा तेज गेंदबाज गुरनूर बरार को डेब्यू के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है।  भारतीय टीम की संभावित प्लेइंग-11: यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल (उप कप्तान), साई सुदर्शन, शुभमन गिल (कप्तान), ऋषभ पंत (विकेटकीपर), नीतीश कुमार रेड्डी, वॉशिंगटन सुंदर, हर्ष दुबे, कुलदीप यादव, मोहम्मद सिराज और प्रसिद्ध कृष्णा। 

आज का मौसम: मॉनसून की रफ्तार तेज, देश के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी

तिरुवनन्तपुरम दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के केरल में दस्तक देते ही उत्तर भारत का मौसम भी करवट लेने लगा है। मौसम विभाग ने 5 जून को यूपी, बिहार, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, पंजाब और हरियाणा में बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं मॉनसून केरल के बाद अब कर्नाटक, तमिलनाडु के इलाकों की ओर आगे बढ़ रहा है। मौसम विभाग का कहना है कि प्री मॉनसून का असर उत्तर और पश्चिमी भारत में दिखाई देगा। अगले 24 घंटे में कम से कम 16 राज्यों में भारी बारिश हो सकती है। इसकेसाथ ही 60 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है। केरल और कर्नाटक में भारी बारिश मौसम विभाग के मुताबिक एक सप्ताह के दौरान केरल और कर्नाटक के बड़े इलाके में मूसलाधार बारिश हो सकती है। वहीं तमिलनाडु के भी बड़े क्षेत्र में बारिश का अनुमान है। पूर्वोत्तर के राज्यों में भी एक सप्ताह भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में 50 से 60 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। मछुआरों को सलाह दी गई है कि कम से कम 9 जून तक वे बंगाल की खाड़ी में ना उतरें। इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट मौम विभाग ने कहा है कि 5 जून को दक्षिण में केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना में भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा पूर्वोत्तर के असम, अरुणाचल, मेघालय, नागालैंड, और सिक्किम में बारिश का अनुमान है। उत्तर भारत की बात करें तो पंजाब. हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत कम से कम 16 राज्यों में आंधी-तूफान के साथ बारिश की संभावना है। दिल्ली का मौसम राजधानी दिल्ली में 4 जून को भी गरज-चमक के साथ बारिश हुई। वहीं मौसम विभाग का अनुमान है कि 5 और 6 जून को भी ादल छाए रहेंगे। हवा की गति 40 से 60 किमी प्रति घंटा रह सकती है। इसके अलावा 5 जून को दोपहर में कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है। बारिश और हवा की वजह से तापमान में 1 से 2 डिग्री की गिरावट दर्ज की जाएगी। यूपी का मौसम पूर्वी उत्तर प्रदेश में 5 ओर 6 जून को आंधी के साथ बारिश का अलर्ट जारी कया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक लखनऊ,वाराणसी, गोरखपुर, अयोध्या, बलिया, जौनपुर और गाजीपुर में 5 जून को बारिश हो सकती है। इसके अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, गाजियाबाद, बागपत, अलीगढ़, आगरा और मथुरा में भी मध्यम बारिश का अनुमान है। हवाओं की गति 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रह सकती है। पूर्वी यूपी में 7 से 10 जून तक हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है। बिहार का मौसम बिहार के भागलपुर, बांका, मुंगेर और जमुई में आंधी के साथ बारिश का अनुमान लगाया गया है। इसके अलावा राजस्थान के बड़े इलाके में आंधी के साथ बारिश की संभावना है। पहाड़ी इलाकों का मौसम हिमाचल प्रदेश के मंडी, शिमला, कांगड़ा. चंबा, कुल्लू, सोलन और सिरमौर जिलों में गरज-चमक के साथ बौछार पड़ सकती है। इसके अलावा हवाओँ की रफ्तार 40 से 60 किमी प्रतिघंटे की रहने की संभावना है। उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग, चोमील, नैनीताल, हरिद्वार, देहरादून, पिथौरागढ़. उत्तर काशी और टिहरी जिलों में मध्यम बारिश की संभावा है। 5 जून को कई जगहों पर ओलावृष्टि भी हो सकती है।

कहा गुणवत्ता और समय-सीमा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता, सभी कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित कर समय पर पूरा करें काम

रायपुर उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने अपने चार दिवसीय बस्तर प्रवास के पहले दिन आज कई कार्यों का निरीक्षण कर आवश्यक निर्देश दिए। वे इस दौरान कांकेर के कोटतरा में सुशासन तिहार के तहत आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में भी शामिल हुए। उन्होंने इस दौरान ग्राम पंचायत के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण किया। उन्होंने विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को चेक, सामग्री और प्रमाण पत्र भी वितरित किए।  साव आगामी चार दिनों तक बस्तर में रहकर निर्माण कार्यों और योजनाओं के मैदानी स्तर पर क्रियान्वयन का निरीक्षण करेंगे। वे इस दौरान बस्तर संभाग के सभी जिलों के अधिकारियों की बैठक लेकर कार्यों की प्रगति की समीक्षा भी करेंगे। वे आज अपने बस्तर प्रवास के पहले दिन कांकेर पहुंचे, जहां उन्होंने चारामा विकासखण्ड के ग्राम बड़ेगौरी में जल जीवन मिशन के कार्यों का जायजा लिया। जल जीवन मिशन के तहत यहां दो करोड़ 49 लाख रुपए की लागत से पानी टंकी का निर्माण और रेट्रोफिटिंग कर 391 घरों में स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति की जा रही है।  साव ने घरों में जाकर जल आपूर्ति भी देखी। वे वहां जल अर्पण कार्यक्रम में भी शामिल हुए। उप मुख्यमंत्री  साव ने कांकेर में निर्माणाधीन 250 सीटर नालंदा परिसर के कार्यों का निरीक्षण किया। चार करोड़ 71 लाख रुपए की लागत से इसका निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कार्यों में तेजी लाते हुए आगामी अक्टूबर माह तक इसका निर्माण पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने मुख्य नगर पालिका अधिकारी को कांकेर में जिला मुख्यालय के अनुरूप साफ-सफाई की व्यवस्था और जनसुविधाएं विकसित करने के निर्देश दिए।  साव ने अमोड़ा-नरहरपुर सड़क के निर्माण कार्य का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कार्य की धीमी प्रगति पर नाराजगी जाहिर करते हुए ठेकेदार और कार्यपालन अभियंता को इसमें तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता और समय-सीमा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इनमें किसी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने वर्क-फोर्स और मशीनरी बढ़ाकर कार्यों को गति देने के निर्देश दिए। 40 करोड़ 23 लाख रुपए की लागत से 16 किमी इस टू-लेन सड़क का निर्माण किया जा रहा है। कांकेर के विधायक  आशाराम नेताम भी सभी कार्यों के निरीक्षण के दौरान मौजूद थे।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार के सुशासन का 13वां वर्ष आरंभ

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी सनातन संस्कृति में पर्यावरण संरक्षण की मूल अवधारणा नीहित है। पांच तत्वों से बनी सृष्टि के संरक्षण के लिए हर तत्व का महत्व हमारे पूजा पाठ-भोजन और भजन की पद्धति में विद्यमान है। सनातन संस्कृति में एक पेड़ को 10 पुत्रों के बराबर माना गया है। हमारी जीवन पद्धति में पर्यावरण संरक्षण प्रकट होता है। राज्य सरकार प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पर्यावरण संरक्षण के लिए सभी कार्य पूर्ण प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत प्रदेश में नदी, कुओं, बावड़ियों और तालाबों के संरक्षण के लिए पवित्र भाव से कार्य जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्व पर्यावरण दिवस पर "एक पेड़ मां के नाम 2.0" अभियान के राज्य स्तरीय समारोह के शुभारंभ अवसर पर यह विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री  दिलीप अहिरवार, अपर मुख्य सचिव वन एवं पर्यावरण  अशोक बर्णवाल विशेष रूप से उपस्थित थे। राज्य स्तरीय पुरस्कार किये प्रदान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार मे दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इससे पहले, सभागार परिसर में स्वर्ण चंपा, सीता अशोक, रामफल और आंवला का पौधा रोपा। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कार्यक्रम में 8 श्रेणियों में 11 राज्य स्तरीय पर्यावरण पुरस्कार प्रदान किये। पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और सतत् विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली औद्योगिक इकाइयों, शैक्षणिक संस्थाओं, सामाजिक संगठनों तथा व्यक्तियों को वर्ष 2024-25 के लिसे पुरस्कार प्रदान किए। 16 जिलों की 500 बावड़ियों के प्रलेखन दस्तावेजों का किया गया विमोचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सर्कुलर इकॉनॉमी से संबंधित 5 कोर्स मॉड्यूल्स और एप्को तथा इन्टैक द्वारा प्रदेश में संचालित जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत 16 जिलों की 500 बावड़ियों के प्रलेखन दस्तावेजों का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नवाचारों, सर्कुलर इकोनॉमी तथा जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों पर केंद्रित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। प्रधानमंत्री  मोदी देश में सबसे लंबे समय तक कार्य करने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार के सुशासन का 13वाँ वर्ष आरंभ हो चुका है। प्रधानमंत्री  मोदी देश में सबसे लंबे समय तक कार्य करने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री होंगे। गर्व का विषय है कि प्रधानमंत्री  मोदी सतत निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में रिकॉर्ड बनाएंगे। प्रधानमंत्री का पद उनके आसीन होने से गौरवान्वित हुआ है। परमात्मा ने प्रधानमंत्री  मोदी को यश प्रदान किया है। भारत रत्न से सम्मानित पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने 24 दलों के गठबंधन की सरकार चलाई थी। उन्होंने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी अनेक सौगातें देश को दी और पूर्ण बहुमत की सरकार की कामना की। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी की कामना वर्ष 2014 में पूर्ण हुई। सुशासन और विरासत से विकास के मार्ग पर चलते हुए भारत सशक्त हुआ। वर्तमान समय में देश आतंकवाद और नक्सलवाद से मुक्त है। भारतीय प्रतिभाएं अंतरिक्ष विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा खेल सहित सभी क्षेत्रों में विश्व में अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन कर रही हैं। प्रधानमंत्री  मोदी ने हर परिस्थिति में खिलाड़ियों और वैज्ञानिकों का उत्साहवर्धन किया है। भारत पूरी मजबूती के साथ ऊर्जा संकट से बाहर निकल रहा है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान समय में मौसम के लिए अलनीनो और पश्चिम एशिया में विषम परिस्थियों के कारण दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल और गैस सहित ऊर्जा का संकट है। प्रधानमंत्री  मोदी के कुशल नेतृत्व में हमारा देश पूरी मजबूती के साथ ऊर्जा संकट से बाहर निकल रहा है। गैस त्रासदी प्रकृति से खिलवाड़ का सबसे बड़ा उदाहरण थी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल गैस त्रासदी आम नागरिकों और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली सबसे भयावह घटना है। राज्य सरकार ने यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में पड़ा कचरा 40 साल बाद सफलतापूर्वक निष्पादित करवाया है। इस तरह से भोपाल की धरती से गैस त्रासदी के कलंक को मिटाया है। अब राज्य सरकार यूनियन कार्बाइड की भूमि का समुचित प्रबंधन करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। प्रदेश में क्लीन-ग्रीन एनर्जी को प्रोत्साहित करने के लिए किए जा रहे है अनेक कार्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में क्लीन-ग्रीन एनर्जी को प्रोत्साहित करने के लिए अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। प्रदेश में ग्रीन एनर्जी के लिए सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बॉयोमास और जल विद्युत परियोनाएं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। सांची, खजुराहो सहित अन्य स्थानों पर ग्रीन एनर्जी के लिए बड़े प्रोजेक्ट्स पर कार्य जारी है। मध्यप्रदेश वन्य प्राणियों के संरक्षण के साथ सहअस्तित्व के सर्वश्रेष्ठ उदाहरण कर रहा है प्रस्तुत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण और वन्य जीवों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश में चीतों के पुनर्वास के अलावा असम से जंगली भैंसे भी लाए गए हैं। मध्यप्रदेश वन्य प्राणियों के संरक्षण के साथ सहअस्तित्व के साथ सर्वश्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। हमीदिया हॉस्पिटल भोपाल पुरुस्कृत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए मे. विसाग बॉयो फ्यूल प्राइवेट लिमिटेड बारासिवनी बालाघाट, आर.सी.सी.पी.एल. सीमेंट मैहर, टैफे मोटर्स एंड ट्रैक्टर्स लिमिटेड मंडीदीप जिला रायसेन, रामरमा मैंगनीज और माइन्स बारासिवनी बालाघाट, केसर एग्रोटेक बारासिवनी बालाघाट, नगर पालिका परिषद सिवनी मालवा, हमीदिया हॉस्पिटल भोपाल, विजेश लूनावत स्मृति फाउण्डेशन भोपाल, एक्रोपॉलिस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च इंदौर, डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल सूर्य विहार सिंगरौली को पुरस्कृत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह पहल प्रदेश की अन्य औद्योगिक इकाइयों और संस्थाओं को प्रदूषण नियंत्रण एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करेगी। "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान ने जन सहभागिता से नए आयाम स्थापित किए राज्यमंत्री  अहिरवार ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए हवा, पानी और पेड़ बचाना आवश्यक है। प्रधानमंत्री  मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान सफल हुआ है। इस अभियान में जन सहभागिता के नए आयाम स्थापित हुए हैं। अपर मुख्य सचिव  अशोक बर्णवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने लाइफ स्टाइल फॉर एन्वायरमेंट का नारा दिया, जो विश्व में प्रसिद्ध हुआ। भारत सरकार का मिशन लाइफ, पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करें राज्यमंत्री  अहिरवार ने कहा कि हमें प्राकृतिक … Read more

राजीव स्मृति वन में बरगद का पौधा लगाकर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

रायपुर   मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर  राजधानी रायपुर स्थित राजीव स्मृति वन में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान 2026-27 का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री  साय ने कृष्ण वट (बरगद) का पौधा रोपित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर वन मंत्री  केदार कश्यप ने भी बेल का पौधा लगाकर अभियान में सहभागिता निभाई। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव  साय ने कहा कि प्रकृति और मानव जीवन का संबंध अभिन्न है। अनियंत्रित वृक्ष कटाई और पर्यावरणीय असंतुलन पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। ऐसे समय में प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किया गया ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की दिशा में एक प्रेरक और भावनात्मक पहल है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि गत वर्ष प्रदेश में ढाई करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन जनसहभागिता और विभागीय प्रयासों से साढ़े तीन करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस वर्ष भी प्रदेशवासी निर्धारित लक्ष्य से कहीं अधिक पौधारोपण कर नया कीर्तिमान स्थापित करेंगे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल है जहां लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनाच्छादित है। राज्य सरकार और वन विभाग के सतत प्रयासों से वन क्षेत्र का संरक्षण और विस्तार निरंतर जारी है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपने घर, खेत, आंगन और मेड़ों में अपनी माता के नाम एक पौधा लगाने का आग्रह करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने आदिवासी समाज की प्रकृति संरक्षण परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जनजातीय समुदाय सदियों से जंगलों को अपनी संस्कृति और जीवन का अभिन्न हिस्सा मानकर उनकी रक्षा करता आया है। सरना स्थलों में वृक्षों को देवतुल्य मानकर पूजा जाना प्रकृति के प्रति हमारी सांस्कृतिक आस्था और संरक्षण की भावना का जीवंत उदाहरण है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने समाज सेवा एवं जनकल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पद्म सम्मानित व्यक्तित्व  पंडी राम मंडावी,  जागेश्वर यादव तथा डॉ. रामचंद्र गोडबोले का सम्मान किया। उन्होंने कहा कि इन विभूतियों का जीवन समाजसेवा, समर्पण और जनहित का प्रेरणादायी उदाहरण है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा प्रकाशित पुस्तकों—‘द बैगा’, ‘वेटलैंड्स ऑफ छत्तीसगढ़’, ‘फ्लोरल डायवर्सिटी ऑफ बीजापुर डिवीजन’, ‘मैमल्स ऑफ छत्तीसगढ़’ तथा ‘उत्तरी छत्तीसगढ़ के अनूठे पर्यटन स्थल और उनकी विविधता’—का विमोचन भी किया। वन मंत्री  केदार कश्यप ने कहा कि ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान प्रकृति और मातृत्व के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक अनूठा माध्यम है। उन्होंने प्रदेशवासियों से इस अभियान को जन-जन का आंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने बिलासपुर जिले के कोपरा जलाशय को रामसर साइट का दर्जा मिलने पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए इसे छत्तीसगढ़ के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया। कार्यक्रम में भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम सिलीबहार की सु चन्दनबती कोला ने स्व-सहायता समूहों द्वारा जंगल संरक्षण और जैविक खेती के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि गांव में 138 एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक एवं जैविक खेती की जा रही है, जिससे युवाओं का पलायन पूरी तरह रुक गया है तथा पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा मिली है। कार्यक्रम को अपर मुख्य सचिव  मनोज पिंगुआ तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक  अरुण कुमार पाण्डेय ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष  रामसेवक पैकरा, आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परम्परा एवं औषधि पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष  अंजय शुक्ला, विधायक  मोतीलाल साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष  नवीन अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।