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प्रधानमंत्री मोदी ने मध्यप्रदेश में चीता प्रोजेक्ट को मिली ऐतिहासिक सफलता का किया उल्लेख

वन्यजीव संरक्षण से प्रदेश में वन पर्यटन को मिलेगी नई दिशा और गति: मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी ने मध्यप्रदेश में चीता प्रोजेक्ट को मिली ऐतिहासिक सफलता का किया उल्लेख मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को दी वन्यजीव सप्ताह-2026 की बधाई भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देश में चीतों के सफल पुनर्स्थापन के लिए किए जा रहे सामूहिक प्रयासों की सराहना की गई है। प्रधानमंत्री मोदी से मिली यह सराहना हम सभी को नई ऊर्जा और उत्साह प्रदान करने वाली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों और वन संरक्षण से जुड़े सभी मैदानी साथियों को एक अक्टूबर से प्रारंभ हुए वन्यजीव सप्ताह-2026 की बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को 'एक्स' पर कहा कि मध्यप्रदेश के लिए यह गौरव का विषय है कि 'प्रोजेक्ट चीता' की सफलता ने वन्यजीव संरक्षण के हमारे संकल्प को और भी मजबूत किया है। सच्चे अर्थों में हमारे वनकर्मियों, अधिकारियों, वैज्ञानिकों और स्थानीय समुदायों के समर्पित प्रयासों को इसका श्रेय जाता है। उन्होंने कहा कि हम सभी मिलकर वन्यजीवों के सुरक्षित आवास और प्रकृति के संतुलन के संरक्षण में अपना योगदान दें। इससे वन्यजीव संरक्षण के साथ ही प्रदेश में वन पर्यटन को भी नई दिशा और गति मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा वन्यजीव सप्ताह के संदर्भ में 30 सितम्बर को एक संदेश जारी किया गया है। इस संदेश में उन्होंने कहा है कि पिछले एक दशक में भारत ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। प्रोजेक्ट चीता की सफलता इसका उल्लेखनीय उदाहरण है। इसके साथ ही, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, गैंडे, घड़ियाल, स्लॉथ बियर, नदी डॉल्फिन और हिम तेंदुए जैसी प्रजातियों के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयास हमारे संरक्षण कार्यों के व्यापक होते दायरे का प्रमाण हैं। संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (आईबीसीए) के माध्यम से बिग कैट प्रजातियों के संरक्षण में वैश्विक सहयोग को आगे बढ़ाने में नेतृत्वकारी भूमिका निभा रहा है। यह मंच बाघ, शेर, तेंदुआ और जगुआर जैसी प्रमुख बिग कैट प्रजातियों के संरक्षण से जुड़े हमारे अनुभवों को अन्य देशों के साथ साझा करने और उनसे सीखने का अवसर प्रदान करता है। वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन और प्रकृति के संतुलन के लिए उनके आवासों का आपस में जुड़ा होना आवश्यक है। केन्द्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर वन्यजीव कॉरिडोरों की पहचान और उनके संरक्षण पर निरंतर कार्य कर रही है। हमारी संरक्षण यात्रा को अग्रिम पंक्ति के वनकर्मियों, वैज्ञानिकों और संरक्षणकर्मियों के समर्पण तथा स्थानीय समुदायों की अमूल्य भागीदारी से शक्ति मिलती है। वन्यजीवों के संरक्षण के साथ मानव और वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व भी आवश्यक है। इस दिशा में समय पर सूचना और त्वरित प्रतिक्रिया, बेहतर निगरानी, वैज्ञानिक प्रबंधन, स्थानीय स्तर पर जागरूकता और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में देशवासियों से अपील की है कि सरकार के प्रयासों के साथ-साथ हम सभी अपने-अपने स्तर पर वन्यजीवों और उनके आवासों की रक्षा में योगदान दें। जब जंगल और वन्यजीव सुरक्षित रहेंगे, तो प्रकृति का संतुलन भी बना रहेगा। यही हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे मूल्यवान विरासत होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी सभी से वन्यजीवों के संरक्षण में सहयोग देने का आहवान किया है।  

PPF Interest Rate पर सरकार का फैसला, निवेशकों को मिलेगा कितना ब्याज?

नई दिल्ली PPF (Public Provident Fund) में निवेश करने वालों के लिए अक्टूबर से दिसंबर 2026 की तिमाही में कोई बदलाव नहीं हुआ है। केंद्र सरकार ने स्मॉल सेविंग्स स्कीम (Small Savings Schemes) की ब्याज दरों की समीक्षा के बाद सभी प्रमुख योजनाओं की दरें पिछली तिमाही के स्तर पर ही रखने का फैसला किया है। इसका मतलब है कि PPF पर अक्टूबर-दिसंबर 2026 में भी 7.10% सालाना ब्याज मिलेगा। वित्त मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स (Department of Economic Affairs) ने 30 सितंबर 2026 को Q3 FY2026-27 के लिए यह फैसला जारी किया था। आइए इसको जरा विस्तार से समझते हैं। PPF की ब्याज दर लंबे समय से 7.10% पर बनी हुई है। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के लिए भी सरकार ने इसमें कोई बढ़ोतरी या कटौती नहीं की है, यानी जिन निवेशकों को PPF की दर बढ़ने की उम्मीद थी, उन्हें फिलहाल मौजूदा 7.10% दर से ही संतोष करना होगा। PPF की ब्याज दर हर तिमाही सरकार द्वारा स्मॉल सेविंग्स स्कीम (Small Savings Schemes) की समीक्षा के दौरान तय की जाती है। PPF एक लॉन्ग टर्म सेविंग्स स्कीम (Long-Term Savings Scheme) है, जिसकी मूल अवधि 15 साल होती है। इसमें एक फाइनेंशियल ईयर में कम से कम ₹500 और अधिकतम ₹1.50 लाख जमा किए जा सकते हैं। किसी व्यक्ति के नाम पर सामान्य तौर पर एक ही PPF अकाउंट रखा जा सकता है। खाता बैंक या पोस्ट ऑफिस के माध्यम से खोला जा सकता है। PPF में निवेश का एक फायदा यह भी है कि खाते को 15 साल की अवधि पूरी होने के बाद 5-5 साल के ब्लॉक में आगे बढ़ाया जा सकता है। निवेशक एक्सटेंशन के दौरान कॉन्ट्रिब्यूशन जारी रख सकता है या बिना नए निवेश के भी खाते को जारी रखने का विकल्प चुन सकता है। PPF को टैक्स-इफिशिएंट इंवेस्टमेंट (Tax-Efficient Investment) के तौर पर देखा जाता है। इसका मतलब है कि आपको मिलने वाले रिटर्न पर कम से कम टैक्स लगे, ताकि टैक्स चुकाने के बाद आपके पास ज्यादा से ज्यादा मुनाफा बचे। मौजूदा इनकम टैक्स एक्ट (Income Tax Act, 2025) के तहत पात्र निवेश पर सेक्शन 123 के अंतर्गत कुल ₹1.50 लाख तक की डिडक्शन का प्रावधान है, जिसमें PPF भी शामिल है। यह लाभ पुरानी टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) चुनने वाले पात्र टैक्सपेयर्स के लिए है। PPF से मिलने वाला ब्याज और मेच्योरिटी अमाउंट भी टैक्स के बाहर (Tax Exemption) है। इस तरह PPF को आम तौर पर EEE (Exempt-Exempt-Exempt) कैटेगरी में रखा जाता है। हालांकि, टैक्स बेनिफिट (Tax Benefit) लेने से पहले यह देखना जरूरी है कि आपकी आय और चुना गया टैक्स रिजीम (New Tax Regime) इन नियमों के तहत पात्र है या नहीं। PPF अकाउंट को एक्टिव रखने के लिए हर फाइनेंशियल ईयर कम से कम ₹500 जमा करना जरूरी है। अगर किसी साल न्यूनतम कॉन्ट्रिब्यूशन नहीं किया जाता है, तो अकाउंट इनएक्टिव (Account Inactive) हो सकता है। इसे दोबारा एक्टिव (Active) कराने के लिए संबंधित नियमों के अनुसार बकाया न्यूनतम डिपॉजिट (Deposit) और पेनॉल्टी (Penalty) का भुगतान करना पड़ता है। PPF में पार्शियल विड्रॉल (Partial Withdrawal) की सुविधा भी उपलब्ध है। हालांकि, इसके लिए निर्धारित शर्तें लागू होती हैं। सामान्य तौर पर विड्रॉल की सुविधा 7वें फाइनेंशियल ईयर से शुरू होती है। इसलिए यह योजना केवल ब्याज कमाने के लिए ही नहीं, बल्कि लंबे समय के फाइनेंशियल गोल्स (Financial Goals) के लिए भी इस्तेमाल की जाती है। PPF की 15 साल की मूल अवधि पूरी होने के बाद निवेशक के पास खाते को बंद करने या इसे आगे जारी रखने का विकल्प होता है। इस अकाउंट को 5 साल की अवधि के ब्लॉक में एक्सटेंड किया जा सकता है। अगर निवेशक कॉन्ट्रिब्यूशन जारी रखने का विकल्प चुनता है, तो मौजूदा नियमों के अनुसार नए निवेश पर भी ब्याज मिलता रहता है। इसलिए, अक्टूबर-दिसंबर 2026 में PPF इंवेस्टर्स के लिए मुख्य अपडेट यही है कि 7.10% की मौजूदा ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं हुआ है। लॉन्ग-टर्म (Long-Term) निवेश करने वालों के लिए PPF की ब्याज दर के साथ-साथ इंवेस्टमेंट पीरियड, टैक्स रिजीम और अपने फाइनेंशियल गोल्स (Financial Goals) को ध्यान में रखकर फैसला करना जरूरी है।  

अखिलेश ने तिजोरी भरने के लिए बनाया था एक्सप्रेसवे: चौधरी भूपेंद्र सिंह

अखिलेश के खिलाफ मंत्रियों ने खोला मोर्चा, चौधरी भूपेंद्र सिंह और राजभर ने गिनाए पुराने कारनामे अखिलेश ने तिजोरी भरने के लिए बनाया था एक्सप्रेसवे: चौधरी भूपेंद्र सिंह सपा राज में पत्रकार को जिंदा जलाया गया था, अखिलेश पर चौधरी भूपेंद्र का तीखा प्रहार पीडीए मतलब परिवार, दौलतमंद और अपराधी: ओम प्रकाश राजभर ‘लोकतंत्र की देते हैं दुहाई और इमरजेंसी वाली कांग्रेस से करते हैं गलबहियां’: भूपेंद्र और राजभर लखनऊ,   समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान, लोकतंत्र की रक्षा, एक्सप्रेसवे निर्माण और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर दिए गए बयानों पर उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह और ओम प्रकाश राजभर ने कड़ा पलटवार किया है। दोनों नेताओं ने अखिलेश यादव के बयानों को उनके पुराने राजनीतिक फैसलों और सपा सरकार के कार्यकाल की याद दिलाते हुए आड़े हाथ लिया। लोकतंत्र की दुहाई पर चौधरी भूपेंद्र सिंह का निशाना चौधरी भूपेंद्र सिंह ने अखिलेश यादव द्वारा लोकतंत्र सेनानियों को 51 हजार सम्मान राशि देने के ऐलान पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र की बात करने वालों को पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। उन्होंने कहा कि अखिलेश एक तरफ इमरजेंसी का रोना रोते हैं, वहीं दूसरी तरफ उसी कांग्रेस के साथ गलबहियां कर चुनाव लड़ रहे हैं, जिसने देश पर तानाशाही थोपकर इमरजेंसी लगाने का ऐतिहासिक पाप किया था। एक्सप्रेसवे के मुद्दे पर घेरा अखिलेश यादव के एक्सप्रेसवे संबंधी दावों पर चौधरी भूपेंद्र सिंह ने सपा सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि सपा कार्यकाल के दौरान सड़क और एक्सप्रेसवे निर्माण में हुई संगठित लूट जगजाहिर है। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश के कार्यकाल में केवल एक एक्सप्रेसवे बना, जिसमें भारी भ्रष्टाचार हुआ। निजी और पारिवारिक तिजोरी भरने के लिए एक्सप्रेसवे का रूट जानबूझकर बदला गया था, और सपा इस खुली धांधली से मुंह नहीं मोड़ सकती। 'सपा राज में पत्रकार को जिंदा जलाया गया था' पत्रकारों के सम्मान और सुरक्षा के दावों पर पलटवार करते हुए चौधरी भूपेंद्र सिंह ने शाहजहांपुर में पत्रकार को जिंदा जलाए जाने की घटना याद दिलाई। उन्होंने कहा कि सपा सरकार में एक मंत्री के खिलाफ स्टोरी करने पर पत्रकार को जिंदा जला दिया गया और बाद में अस्पताल में भी उसकी जान लेने की कोशिश हुई। उन्होंने आगे कहा कि जब अखिलेश यादव को प्रेस वार्ता में किसी पत्रकार का सवाल पसंद नहीं आता, तो वे उसकी जाति पूछने लगते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पत्रकारों को धमकाने, सपा कार्यकर्ताओं द्वारा मारपीट करने और 'मुर्दाबाद' के उस मामले में अखिलेश की मौजूदगी और उनके इशारे पर पत्रकारों से बर्बरता की गई थी। राजभर बोले- अखिलेश की किसी बात का भरोसा नहीं कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव की राजनीतिक विश्वसनीयता पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 2017 में कांग्रेस के साथ गठबंधन की विफलता के बाद खुद अखिलेश ने इसे अपनी 'सबसे बड़ी भूल' करार दिया था। इसके बाद मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में जाकर जनता से कांग्रेस को वोट न देने की अपील की और उसे धोखेबाज बताया। राजभर ने उत्तराखंड उपचुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां सपा के 2,200 वोट काटने की वजह से ही कांग्रेस मामूली अंतर से हारी थी। इमरजेंसी के इतिहास पर राजभर का वार इमरजेंसी का जिक्र करते हुए ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि रायबरेली से राज नारायण के चुनाव मामले में अदालत द्वारा इंदिरा गांधी को 6 साल के लिए अयोग्य ठहराए जाने के बाद कांग्रेस ने देश में इमरजेंसी थोपी थी। लाखों नेताओं, कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को सलाखों के पीछे डाला गया। राजभर ने सवाल उठाया कि उसी कांग्रेस के साथ खड़े होकर अखिलेश किस मुंह से लोकतंत्र सेनानियों को पेंशन और सम्मान देने की बात कर रहे हैं। PDA मतलब परिवार, दौलतमंद और अपराधी अखिलेश के 'पीडीए' (PDA) फार्मूले की धज्जियां उड़ाते हुए राजभर ने कहा कि इनके PDA का असली अर्थ है- 'P' से परिवार, 'D' से धनी राम यानी दौलतमंद, और 'A' से अपराधी। राजभर ने सवाल उठाया कि जिन निष्ठावान कार्यकर्ताओं ने खून-पसीना बहाकर, लाठियां खाकर सपा को सींचा, उनके हक को दरकिनार कर केवल धनकुबेरों और अपराधियों को तरजीह दी जा रही है। मुस्लिम व अन्य वर्गों के प्रतिनिधित्व पर सवाल राजभर ने सपा के भीतर मुस्लिम प्रतिनिधित्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुसलमानों के एकतरफा वोट से सपा विधायक जीतते हैं, लेकिन जब राज्यसभा भेजने की बात आती है तो मुसलमानों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। उन्हें केवल वोट बैंक और गुलाम बनाकर रखा गया है। उन्होंने यह भी पूछा कि PDA में पंडित और सामान्य वर्ग की हिस्सेदारी कहां है? एक बार किसी को भेजा गया, उसके बाद उन्हें भी दरकिनार कर दिया गया। डिंपल यादव के निर्विरोध चुनाव पर उठाए सवाल राजभर ने डिंपल यादव के पूर्व में हुए निर्विरोध चुनाव का उल्लेख करते हुए गंभीर आरोप लगाया कि उस समय विरोधी प्रत्याशियों को कथित तौर पर अगवा कर जबरन पर्चे वापस कराए गए थे। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव का सरोकार न तो पिछड़ों से है, न दलितों से, न मुसलमानों से और न ही सामान्य वर्ग से, उनकी राजनीति केवल परिवार और निजी स्वार्थ तक सीमित है।

लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी ने वीर पुलिसकर्मियों को विभिन्न वीरता पदकों से किया सम्मानित

वीरता पदक पाकर बोले पुलिसकर्मी- अत्याधुनिक संसाधनों से मजबूत हुई पुलिसिंग, जनता में बढ़ा सुरक्षा का भरोसा लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी ने वीर पुलिसकर्मियों को विभिन्न वीरता पदकों से किया सम्मानित अशोक कुमार मीणा को गैलेंट्री मेडल, अमित श्रीवास्तव को राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री वीरता पदक कुलदीप कुमार बोले- तकनीक के इस्तेमाल से बदली पुलिसिंग, जीरो टॉलरेंस नीति का दिख रहा असर घनश्याम यादव ने मुख्यमंत्री के हाथों पदक मिलने को बताया गौरव का क्षण लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में वीर पुलिसकर्मियों को विभिन्न वीरता पदकों से सम्मानित किया। पदक प्राप्त करने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने इसे अपने और परिवार के लिए गौरव का क्षण बताया। पुलिसकर्मियों ने एक स्वर में कहा कि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश की पुलिसिंग में व्यापक बदलाव आया है और अत्याधुनिक संसाधनों व तकनीक के इस्तेमाल से पुलिस की कार्यक्षमता बढ़ी है। अपराधियों में पुलिस का डर बढ़ा हरदोई के पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा को गैलेंट्री मेडल से सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए गर्व का पल है। पुलिसिंग में काफी बदलाव आया है और अपराधियों में पुलिस का डर बढ़ा है। ऋतुल कुमार वर्मा को राष्ट्रपति वीरता पदक से सम्मानित किया गया है।  उन्होंने कहा कि करीब 15-16 वर्षों की सेवा में उन्होंने पुलिसिंग का बदलता स्वरूप देखा है और वर्तमान में पहले से बेहतर माहौल है। मुख्यमंत्री के हाथों सम्मान मिलना गौरव की बात एसटीएफ वाराणसी यूनिट के इंस्पेक्टर अमित श्रीवास्तव को राष्ट्रपति वीरता पदक और मुख्यमंत्री वीरता पदक से सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि सम्मान उनके और परिवार के लिए खुशी का क्षण है। पुलिस को कार्य करने की स्वतंत्रता मिलने और प्रभावी कार्रवाई का परिणाम है कि अपराध में कमी आई है और अपराधियों में भय का माहौल बना है। इसी क्रम में संभल में सीओ के पद पर तैनात कुलदीप कुमार को राष्ट्रपति वीरता पदक मिला। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के हाथों सम्मान मिलना गौरव की बात है। पुलिस ने समय के साथ खुद को बदला है और तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा है।  आज यूपी पुलिस देश में नंबर वन कुलदीप कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री जी की जीरो टॉलरेंस नीति का नतीजा है कि यूपी पुलिस आज देश की नंबर वन पुलिस है। एसटीएफ मुख्यालय लखनऊ के इंस्पेक्टर घनश्याम यादव को मुख्यमंत्री वीरता पदक से सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि जिन मुख्यमंत्री को अब तक टीवी और अखबारों में देखते थे, उनके हाथों से पदक मिलना उनके लिए बेहद गर्व का क्षण है। एसटीएफ में तैनात अंगद सिंह यादव को गैलेंट्री पदक मिला। उन्होंने कहा कि अच्छे कार्य के लिए मिला यह सम्मान उनके और परिवार के लिए गर्व का विषय है। जीरो टॉलरेंस नीति के तहत पुलिस अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है।  पुलिस की कार्रवाई से अपराधियों में डर मुख्यमंत्री वीरता पदक से सम्मानित धर्मेंद्र सिंह राठौर ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई से अपराधियों में डर और जनता में सुरक्षा की भावना बढ़ी है। पुलिस सुधारों पर भी काम हो रहा है और पुलिसकर्मियों की आवास समेत मूलभूत सुविधाओं में सुधार किया गया है। उपनिरीक्षक अजय वर्मा को मुख्यमंत्री वीरता पदक से सम्मानित किया गया है। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक संसाधनों के आने से पुलिसिंग बेहतर हुई है और पुलिसकर्मी अधिक प्रभावी ढंग से अपना कार्य कर पा रहे हैं।

CM डॉ. यादव ने PM मोदी से की मुलाकात, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 के लिए किया आमंत्रित

प्रधानमंत्री मोदी से मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की आत्मीय भेंट ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 के लिए किया आमंत्रित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरूवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से आत्मीय भेंट कर उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया। प्रधानमंत्री मोदी को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश में जारी विकास कार्यों, जनकल्याणकारी पहलों, उपलब्धियों, निवेश और प्रदेश की प्रगति से जुड़े विभिन्न विषयों की जानकारी दी। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वर्ष 2027 में मध्यप्रदेश में आयोजित होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिए प्रधानमंत्री मोदी को आमंत्रित किया। उन्होंने प्रदेश में निवेश के लिए तैयार किए जा रहे अनुकूल वातावरण, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में प्रारंभ की गई ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ के संबंध में भी प्रधानमंत्री मोदी को अवगत कराया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 17 सितंबर से प्रदेश में संचालित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत प्रदेशभर में आयोजित की जा रही विभिन्न गतिविधियों और कार्यक्रमों की जानकारी भी प्रधानमंत्री मोदी को दी। उन्होंने अभियान के माध्यम से जनभागीदारी, सेवा और जनकल्याण से जुड़े विभिन्न आयोजनों के बारे में अवगत कराया।  

CM डॉ. यादव ने दिए आदर्श गौशाला जल्द तैयार करने के निर्देश, विभागीय योजनाओं पर चर्चा

भोपाल में आदर्श गौ शाला स्थापित करने के कार्य को शीघ्र पूर्ण करें: मुख्यमंत्री डॉ. यादव विभागों की योजनाओं पर हुई चर्चा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विकास योजनाओं पर चर्चा की। इन विभागों में नगरीय विकास एवं आवास, खनिज, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग और लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को हुई बैठक में विभागों के अधिकारियों से योजनाओं की प्रगति और कार्यों की जानकारी प्राप्त की और जरूरी दिशा-निर्देश दिए। इस अवसर पर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) नीरज मंडलोई सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नगरीय विकास और आवास विभाग द्वारा प्रदेश के नगरों के साथ ही राजधानी भोपाल के विकास में नए आयाम जोड़े जाएं। ग्वालियर, इंदौर और उज्जैन में बड़ी आदर्श गौशालाओं के संचालन में सफलता मिली है। इसी तरह भोपाल में इस मॉडल पर आदर्श गौ-शाला स्थापित करने के कार्य को गति प्रदान करते हुए अच्छे परिणाम प्राप्त करने के प्रयास किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंगरौली को आदर्श जिला बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाज के प्रतिष्ठित नागरिकों से भी चर्चा की जाए। नई टाउनशिप विकसित होने से आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होगी और सभी वर्ग लाभान्वित होंगे। खनिज विभाग के अधिकारियों ने सिंगरौली जिले में माइनिंग सेक्टर की नई संभावनाओं और भविष्य में जिले के समग्र विकास की रूपरेखा प्रस्तुत की। बैठक में बताया गया कि सिंगरौली में अधोसंरचना विकास के कार्य हो रहे हैं। सिंगरौली विकास प्राधिकरण की गतिविधियों का विस्तार किया जा रहा है। निजी क्षेत्र में आईटी पार्क स्थापना को प्रोत्साहित करें सूचना प्रौद्योगिकी विभाग से संबंधित चर्चा में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि निजी क्षेत्र में भी आईटी पार्क स्थापना को प्रोत्साहित किया जाए। जबलपुर के उद्यमी सेमीकंडक्टर क्षेत्र में कार्य के इच्छुक हैं। इस नाते उन्हें मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया जाए। इसके अलावा टेक्नीकल यूनिवर्सिटी को एक महत्वपूर्ण कौशल विकास केंद्र की पहचान देने के प्रयास किए जाएं। बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश जल जीवन मिशन के कार्यों में अग्रणी है। प्रदेश के 83 लाख से अधिक परिवारों को नल से जल मिल रहा है। गत दो वर्ष में इस कार्य में अच्छी सफलता मिली है। प्रदेश की 38 हजार 403 जल प्रदाय संरचनाओं को जियो टैग किया गया है।  

लोकभवन में अत्याधुनिक 87 इंटरसेप्टर वाहनों को फ्लैग ऑफ किया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने

2017 से पहले माफिया के सामने नाक रगड़ती थी सरकार: सीएम योगी   लोकभवन में अत्याधुनिक 87 इंटरसेप्टर वाहनों को फ्लैग ऑफ किया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वीर पुलिसकर्मियों का सम्मान और पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह की पुस्तक ‘संघर्ष’ का विमोचन भी किया सीएम ने   बंद कमरे में टिप्पणी करना आसान, सुरक्षा हटा दें तो बड़े से बड़े व्यक्ति को भीगी बिल्ली बनने में देर नहीं लगती: मुख्यमंत्री   सीएम ने कहा- पुलिस रिफॉर्म लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना उत्तर प्रदेश, सात पुलिस कमिश्नरेट कर रहे काम   14 लाख से अधिक कैमरों से अपराध पर निगरानी, घटनाओं के खुलासे के साथ रोकथाम में भी मिल रही मदद   यूपी पुलिस को पहली बार कीर्ति चक्र, वीरगति को प्राप्त इंस्पेक्टर सुनील कुमार के परिवार का सम्मान   16 पुलिसकर्मियों को राष्ट्रपति वीरता पदक, 10 को मुख्यमंत्री वीरता पदक लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती सरकार की कानून-व्यवस्था पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश के हर जिले में दुर्दांत माफिया का बोलबाला था। समानांतर सरकारें चलती थीं। माफिया के सामने नाक रगड़ी जाती थी, घुटने टेके जाते थे और पुलिस मजबूर थी। राजनीतिक नेतृत्व की रीढ़ ही टेढ़ी हो तो वह कानून-व्यवस्था को सीधा कैसे कर सकता है।   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को लोकभवन सभागार में आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने 87 इंटरसेप्टर वाहनों को हरी झंडी दिखाई, वीर पुलिसकर्मियों को पदक प्रदान किए और पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह की पुस्तक ‘संघर्ष’ का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के बाद सरकार ने पुलिस सुधारों को आगे बढ़ाया। प्रकाश सिंह ने जिस पुलिस रिफॉर्म की वकालत की थी, उसे उत्तर प्रदेश ने देश में सबसे पहले लागू किया। प्रदेश में अब सात पुलिस कमिश्नरेट काम कर रहे हैं। आज यूपी पुलिस के सामने विचार, वीरता और तकनीक, तीनों का समन्वय दिखाई दे रहा है। ‘संघर्ष’ के माध्यम से पुलिस सेवा के अनुभव और चुनौतियां सामने आई हैं तो जांबाजों की वीरता का सम्मान हुआ है और सड़क सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक इंटरसेप्टर वाहन पुलिस बल को समर्पित किए गए हैं। बंद कमरे में बैठकर टिप्पणी करना बेहद आसान मुख्यमंत्री ने कहा कि बंद कमरे में बैठकर किसी के प्रति कोई भी टिप्पणी करना आसान है। कोई व्यक्ति कितना भी बड़ा क्यों न हो और उसे अपने पद का कितना भी गुरूर हो, सुरक्षा हटा दी जाए तो अराजकता के माहौल में उसे भीगी बिल्ली बनने में देर नहीं लगेगी। स्वस्थ चिंतन तभी संभव है, जब समाज में सुरक्षा का वातावरण हो। सुरक्षित माहौल में ही समृद्धि की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है। यूपी पुलिस की थीम ‘आपकी सुरक्षा, हमारा संकल्प’ इसी भावना को व्यक्त करती है। जब तराई क्षेत्र आतंकवाद की चपेट में था, तब पुलिस व सेना की सुरक्षा में ही आवागमन संभव था। सूर्यास्त के बाद आवाजाही लगभग बंद हो जाती थी। उस समय डीजीपी के रूप में प्रकाश सिंह ने इन चुनौतियों का सामना किया।  पुलिस सुधारों के लिए प्रकाश सिंह को सुप्रीम कोर्ट की शरण लेनी पड़ी थी। उत्तर प्रदेश ने पुलिस सुधारों को लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। विचार तभी सार्थक, जब व्यवहार में उतरें मुख्यमंत्री ने कहा कि वैचारिकी केवल शब्द या आलेख नहीं होती, बल्कि वह व्यावहारिक जीवन की चुनौतियों को भी समाहित करती है। प्रकाश सिंह ने अपने सेवाकाल में पग-पग पर इन चुनौतियों का सामना किया और अपनी पूरी सेवा को कुशलतापूर्वक पूरा किया। लंबे समय तक विभिन्न संस्थानों में व्याख्यानों के माध्यम से युवाओं को प्रेरित करने वाली उनकी वैचारिकी अब पुस्तक के रूप में सामने आई है। आचार और विचार में जब समन्वय होता है और दोनों एक ही दिशा में आगे बढ़ते हैं, तभी परिणाम सामने आता है। 2017 से पहले कानून-व्यवस्था थी बड़ी चुनौती मुख्यमंत्री ने 2017 से पहले प्रदेश की कानून-व्यवस्था की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय ‘यूपी वाला’ कहकर लोगों को बाहर कर दिया जाता था। पुलिस के सामने भी बड़ी चुनौतियां थीं। राजनीतिक नेतृत्व में स्वयं निर्णय लेने की सामर्थ्य नहीं हो तो कानून-व्यवस्था को नियंत्रित करना कठिन होता है। तब पुलिस सुधार और अवस्थापना सुविधाओं की स्थिति भी बेहतर नहीं थी। एक वर्ष में करीब छह हजार पुलिस कार्मिकों को ही प्रशिक्षण दिया जा सकता था। पुलिसकर्मियों को टूटे भवनों में रहना पड़ता था। पीएसी की वाहिनियां समाप्त कर दी गई थीं। कोसीकलां, मेरठ, अलीगढ़ और मुजफ्फरनगर समेत कई स्थानों पर दंगों के चलते लंबे समय तक कर्फ्यू लगा। इन्हीं परिस्थितियों में उत्तर प्रदेश को बीमारू कहा जाने लगा। अर्थव्यवस्था, रोजगार, तकनीक और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन सहित विभिन्न क्षेत्रों में चुनौतियां खड़ी थीं। 2017 के बाद इन परिस्थितियों को बदलते हुए प्रदेश को आगे बढ़ाने का काम किया गया। तकनीक बनी आधुनिक पुलिसिंग का आधार सीएम योगी ने कहा कि पुलिस सुधारों के साथ तकनीक का समावेश भी आवश्यक है। सेफ सिटी के लक्ष्य के तहत प्रदेश के शहरों में 14 लाख से अधिक कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे घटनाओं की रोकथाम और उनके अनावरण में भूमिका निभा रहे हैं। जिलों में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किए गए हैं। विचार और व्यवहार के साथ जब तकनीक जुड़ती है तो उसके परिणाम भी सामने आते हैं। आज यूपी पुलिस की पहचान में यह बदलाव दिखाई देता है। सुनील कुमार सिंह की वीरता को नमन मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश पुलिस के एसटीएफ से जुड़े जांबाज इंस्पेक्टर स्वर्गीय सुनील कुमार सिंह की वीरता को नमन किया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने उनकी वीरता के लिए उन्हें कीर्ति चक्र से सम्मानित किया है और यूपी पुलिस को पहली बार यह गौरव प्राप्त हुआ है। सुनील कुमार सिंह ने 22 जनवरी, 2025 को आमने-सामने की मुठभेड़ में चार दुर्दांत अपराधियों को मार गिराया था। इस दौरान वह अपराधियों की गोलियों से गंभीर रूप से घायल हुए और बाद में उनका बलिदान हुआ। मुख्यमंत्री ने उनकी धर्मपत्नी एवं परिवार के सदस्यों को सम्मानित करते हुए उनकी स्मृति को नमन किया। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में 16 पुलिस अधिकारियों एवं कार्मिकों को राष्ट्रपति के वीरता पुरस्कार तथा 10 पुलिस अधिकारियों एवं कार्मिकों को मुख्यमंत्री वीरता पदक से … Read more

सितंबर में UPI ने फिर बनाया रिकॉर्ड, 2407 करोड़ ट्रांजैक्शन से हुआ ₹29.37 लाख करोड़ का लेनदेन

 नई दिल्ली आजकल छोटी दुकान से लेकर बड़े स्टोर तक पेमेंट का तरीका तेजी से बदल रहा है. कुछ रुपये की चाय हो या हजारों रुपये की खरीदारी, मोबाइल निकालकर QR कोड स्कैन करना लोगों की रोजमर्रा की आदत बन चुका है. सितंबर के UPI आंकड़े भी इसी बदलाव की तस्वीर दिखाते हैं. इस महीने यूपीआई पर कुल 24.07 बिलियन यानी 2407 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए और इनकी कुल वैल्यू ₹29.37 लाख करोड़ रही. यानी औसतन हर दिन करीब 802 मिलियन यानी 80.2 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए।  खास बात यह है कि ये आंकड़े ऐसे समय आए हैं, जब 15 अक्टूबर से ₹2000 से ज्यादा के मर्चेंट UPI पेमेंट पर नया MDR फ्रेमवर्क लागू होने वाला है. हालांकि, पर्सन-टू-पर्सन (P2P) यूपीआई ट्रांजैक्शन पहले की तरह पूरी तरह फ्री रहेगा. यानी आप अपने परिवार के सदस्यों, दोस्तों या रिश्तेदारों को UPI से पैसे भेजते हैं, तो उस पर किसी तरह का चार्ज नहीं लगेगा. नई व्यवस्था सिर्फ मर्चेंट यानी दुकानदारों या व्यापारियों को किए जाने वाले पेमेंट पर लागू होगी. यहां भी जानना जरूरी है कि MDR चार्ज पेमेंट करने वाले पर नहीं बल्कि रिसीव करने वाले पर लागू होगा।  हर दिन 80 करोड़ से ज्यादा UPI ट्रांजैक्शन नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के मुताबिक सितंबर में यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या सालाना आधार पर 23 फीसदी बढ़ी. वहीं कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में 18 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. सितंबर में हर दिन औसतन ₹97,913 करोड़ के यूपीआई ट्रांजैक्शन हुए. यानी रोजाना ट्रांजैक्शन की संख्या और उनकी कुल रकम, दोनों रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए. अगर सिर्फ महीने के कुल आंकड़े देखें तो सितंबर में यूपीआई ट्रांजैक्शन अगस्त के मुकाबले थोड़े कम रहे।  अगस्त में 24.51 बिलियन ट्रांजैक्शन हुए थे और उनकी कुल वैल्यू ₹29.82 लाख करोड़ थी. लेकिन इसका सीधा मतलब यह नहीं है कि सितंबर में डिजिटल पेमेंट की रफ्तार कमजोर हुई. कैशफ्री के को-फाउंडर रीजू दत्ता के मुताबिक अगस्त में 31 दिन थे, जबकि सितंबर में 30 दिन. इसलिए दोनों महीनों के कुल आंकड़ों की तुलना करते समय दिनों की संख्या को ध्यान में रखना जरूरी है।  सितंबर में बड़े UPI ट्रांजैक्शन बढ़े रीजू दत्ता के मुताबिक अप्रैल से अगस्त के बीच यूपीआई पर एवरेज डेली ट्रांजैक्शन वैल्यू करीब ₹96,000 करोड़ रही थी. सितंबर में यह बढ़कर करीब ₹98,000 करोड़ पहुंच गई. इसकी एक वजह सितंबर में अपेक्षाकृत ज्यादा रकम वाले ट्रांजैक्शन होना भी बताया जा रहा है. महीने के बीच में गणेश चतुर्थी का त्योहार भी पड़ा, जिससे खरीदारी और उपभोक्ता खर्च को सहारा मिला. सितंबर के आंकड़ों को आने वाले फेस्टिव सीजन के लिए भी अहम माना जा रहा है।  अक्टूबर में बड़ी फेस्टिव सेल्स शुरू होने की उम्मीद है, जबकि नवंबर में दिवाली का त्योहार आएगा. डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म Fibe के एमडी और ग्रुप सीईओ अक्षय मेहरोत्रा के मुताबिक ₹29.37 लाख करोड़ की रकम वाले 24.07 बिलियन मंथली यूपीआई ट्रांजैक्शन यह दिखाते हैं कि डिजिटल पेमेंट लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में कितनी मजबूती से शामिल हो चुका है. उनके मुताबिक फेस्टिव सीजन में पेमेंट, कर्ज और तकनीक को जोड़ने से वित्तीय सेवाओं की पहुंच और बढ़ सकती है।  छोटे शहरों तक है UPI की पहुंच यूपीआई की बढ़ती पहुंच सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है. PayNearby के फाउंडर आनंद कुमार बजाज के मुताबिक छोटे शहरों, ग्रामीण इलाकों और मोहल्ले की दुकानों में भी यूपीआई का इस्तेमाल बढ़ रहा है. यानी डिजिटल पेमेंट अब सिर्फ बड़े मॉल या ऑनलाइन खरीदारी तक सीमित नहीं रहा. स्थानीय दुकानदार और छोटे कारोबारी भी तेजी से यूपीआई से जुड़ रहे हैं।  IMPS लेनदेन में भी हुई बढ़ोतरी सितंबर में इमीडिएट पेमेंट सर्विस (IMPS) के जरिए भी लेनदेन में बढ़ोतरी दर्ज हुई. इसकी कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू ₹7.06 लाख करोड़ रही, जो सालाना आधार पर 18 फीसदी ज्यादा है. सितंबर में IMPS पर रोजाना औसतन 11.80 मिलियन यानी करीब 1.18 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए. इनकी औसत दैनिक वैल्यू ₹23,530 करोड़ रही।  UPI की रफ्तार पर पड़ेगा MDR का असर? फिलहाल जानकारों का मानना है कि नए MDR फ्रेमवर्क से यूपीआई के कुल ट्रांजैक्शन वॉल्यूम या वैल्यू पर बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है. इसकी एक बड़ी वजह यह है कि ज्यादातर मर्चेंट ट्रांजैक्शन ₹2,000 तक के दायरे में आते हैं और इस सीमा तक जीरो MDR जारी रहेगा. अक्षय मेहरोत्रा के मुताबिक यूपीआई का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है और आने वाले समय में इसके लिए सस्टेनेबल इकोनॉमिक मॉडल जरूरी होगा. उनके अनुसार मामूली MDR से यूपीआई को चलाने में जो इंफ्रास्ट्रक्चर लगता है, उसको मेंटेन करने के लिए आर्थिक सहारा मिलेगा. अब नजर 15 अक्टूबर पर है, जब नया MDR फ्रेमवर्क लागू होगा। 

शेयर बाजार में बड़ा नुकसान, निफ्टी 13% गिरा; 102 स्टॉक्स ने गंवाई आधी से ज्यादा वैल्यू

मुंबई  शेयर मार्केट में गुरुवार यानी 01 अक्‍तूबर 2026 को फ‍िर भूचाल आया. सेंसेक्‍स एक वक्‍त 1000 पॉइंट नीचे तक ग‍िर गया था. लेकिन बाजार में इस समय सबसे बड़ा फर्क इंडेक्स और आम शेयरों के प्रदर्शन में दिखाई दे रहा है. निफ्टी 2026 में करीब 13% नीचे है. पहली नजर में यह बड़ी गिरावट जरूर है, लेकिन निफ्टी 500 के अंदर झांकेंगे तो तस्वीर और ज्यादा खराब दिखती है. 500 शेयरों में से 252 शेयर अपने ऑल टाइम हाई से 30% से ज्यादा नीचे आ चुके हैं. यानी आधे से ज्यादा शेयरों में बड़ी चोट लग चुकी है. सबसे बड़ा आंकड़ा 102 शेयरों का है. निफ्टी 500 में शामिल 102 शेयर अपने रिकॉर्ड हाई से 50% से ज्यादा नीचे हैं. जिस शेयर की कीमत कभी 100 रुपये थी, वह अब 50 रुपये से भी नीचे आ चुका है. यानी हर पांच शेयरों में करीब एक शेयर अपने सबसे ऊंचे भाव की आधी कीमत भी नहीं बचा पाया है. 167 शेयर 40% से ज्यादा और 347 शेयर 20% से ज्यादा नीचे हैं। आम तौर पर जब बाजार में बड़ी गिरावट आती है तो माना जाता है कि छोटे शेयर ज्यादा टूटते हैं. लेकिन इस बार बड़ी कंपनियां भी दबाव में हैं. निफ्टी 50 के 18 शेयर अपने 52 हफ्तों के हाई से 20% से ज्यादा नीचे आ चुके थे और इन शेयरों की कुल मार्केट वैल्यू में करीब 31.35 लाख करोड़ रुपये की कमी आई. यानी चोट सिर्फ छोटे निवेशकों के पसंदीदा शेयरों में नहीं है। अब सितंबर की कहानी समझिए सितंबर ने इस गिरावट को और तेज कर दिया. पूरे महीने विदेशी निवेशकों यानी FIIs ने भारतीय शेयरों में करीब 44,013 करोड़ रुपये की नेट बिकवाली की. 2026 में अब तक FIIs करीब 4.03 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं. सितंबर की बिकवाली खास इसलिए है क्योंकि महीने के आखिरी चार कारोबारी दिनों में ही करीब 29,175 करोड़ रुपये निकल गए. यानी महीने की करीब दो-तिहाई बिकवाली सिर्फ चार दिनों में हुई। आखिरी दिन तो जैसे बिकवाली का बांध टूट गया 30 सितंबर को FIIs ने एक ही दिन में 10,148 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए. यह 23 मार्च के बाद सबसे बड़ी एक दिन की विदेशी बिकवाली रही. उससे एक दिन पहले यानी 29 सितंबर को भी 9,980 करोड़ रुपये की बिकवाली हुई थी. 28 सितंबर को 5,353 करोड़ और 25 सितंबर को 3,694 करोड़ रुपये निकले. चार दिनों में लगातार बढ़ती बिकवाली ने बाजार पर अचानक दबाव बढ़ा दिया। विदेशी बेच रहे हैं, तो बाजार संभाल कौन रहा है? यहां कहानी का दूसरा पहलू है. घरेलू संस्थागत निवेशक यानी DIIs सितंबर में हर एक कारोबारी दिन खरीदार रहे. पूरे महीने उन्होंने करीब 76,030 करोड़ रुपये लगाए. 30 सितंबर को जब FIIs ने 10,148 करोड़ रुपये बेचे, उसी दिन DIIs ने 11,272 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे. यानी बाहर का पैसा निकल रहा है तो देश का संस्थागत पैसा लगातार बाजार में पैसा लगा रहा है। फिर भी शेयरों की हालत इतनी खराब क्यों? यही सबसे बड़ा सवाल है. अगर घरेलू निवेशक 76 हजार करोड़ रुपये लगा रहे हैं तो बाजार संभल क्यों नहीं रहा? वजह यह है कि पैसा बाजार में आना और हर शेयर को बचाना दो अलग बातें हैं. विदेशी बिकवाली खासकर बड़े और ज्यादा कारोबार वाले शेयरों पर दबाव डाल सकती है. दूसरी तरफ बाजार के कई शेयर पहले से महंगी कीमतों पर कारोबार कर रहे थे. कमाई उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ी तो उनकी कीमतों में तेज करेक्शन आया। 50% गिर गया मतलब सस्ता हो गया, यह सबसे बड़ा भ्रम मान लीजिए किसी शेयर का भाव 100 रुपये था और वह 50 रुपये पर आ गया. गिरावट 50% हुई. लेकिन अब वह 50 रुपये से वापस 100 रुपये पहुंचने के लिए 100% बढ़ना पड़ेगा. इसलिए सिर्फ यह देखकर कि शेयर अपने हाई से आधा रह गया है, उसे सस्ता मानना सही नहीं है. पहले यह देखना होगा कि कंपनी की कमाई, कर्ज, कारोबार और भविष्य की संभावना में क्या बदलाव आया है. कुछ शेयरों में पुरानी तेजी का हिसाब चुक रहा है कोविड के बाद बाजार में कई थीम बहुत तेजी से चलीं. रेलवे, डिफेंस, सरकारी कंपनियों और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े शेयरों में निवेशकों की भारी दिलचस्पी आई. कई शेयरों के भाव उनकी मौजूदा कमाई से काफी आगे निकल गए. अब जब कमाई उस रफ्तार से नहीं बढ़ी, तो कीमत नीचे आने लगी. इसे ऐसे समझिए. पहले उम्मीद के दम पर भाव चढ़ा, अब असली कमाई के हिसाब से भाव की दोबारा जांच हो रही है। निफ्टी बचा हुआ दिख रहा है क्योंकि बड़ी कंपनियां पूरी तस्वीर नहीं हैं निफ्टी 50 में सिर्फ 50 बड़ी कंपनियां हैं. लेकिन भारतीय शेयर बाजार में हजारों कंपनियां लिस्टेड हैं. इसलिए निफ्टी का 13% नीचे होना यह नहीं बताता कि हर कंपनी 13% नीचे है. कुछ शेयर मामूली नीचे होंगे, कुछ 20-30% नीचे और कुछ 50-60% तक टूट चुके हैं. यही वजह है कि किसी निवेशक का पोर्टफोलियो निफ्टी से दोगुना-तिगुना ज्यादा गिर सकता है। विदेशी निवेशकों की अगली चाल पर बाजार की नजर सितंबर में सिर्फ कैश मार्केट में बिकवाली नहीं हुई. विदेशी निवेशकों ने इंडेक्स फ्यूचर्स में भी करीब 3.75 अरब डॉलर की बिकवाली की. सितंबर सीरीज में उनकी इंडेक्स फ्यूचर्स की नेट शॉर्ट पोजिशन करीब 1.84 लाख कॉन्ट्रैक्ट से बढ़कर 2.67 लाख कॉन्ट्रैक्ट हो गई. इसका मतलब बाजार के डेरिवेटिव हिस्से में भी विदेशी निवेशकों की सावधानी बढ़ी है। तेल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ने आग में घी का काम किया बाजार पर दबाव सिर्फ विदेशी निवेशकों की बिकवाली से नहीं आया. कच्चे तेल की ऊंची कीमत और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड भी चिंता बढ़ा रही हैं. भारत तेल का बड़ा आयातक है. तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ता है और रुपये पर दबाव आ सकता है. वहीं अमेरिकी बॉन्ड से ज्यादा रिटर्न मिलने पर विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिका में पैसा लगाना ज्यादा आकर्षक हो सकता है. सितंबर में दोनों चीजों ने भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ाया । SIP वाला पैसा अभी बाजार की ढाल बना हुआ है घरेलू निवेशकों की लगातार खरीदारी इस पूरी कहानी का दूसरा मजबूत पक्ष है. अगस्त में SIP के जरिए 32,297 करोड़ रुपये का … Read more

पाकिस्तान पर 4-3 की जीत, एशियन गेम्स गोल्ड के साथ ओलंपिक टिकट पक्का करने उतरेगा भारत

आईची-नागोया  डिफेंडिंग चैंपियन भारत ने पाकिस्तान को एक रोमांचक सेमीफाइनल में हराते हुए एशियन गेम्स के मेंस हॉकी फाइनल में जगह बना ली है. तीन क्वार्टर तक पीछे चल रही पाकिस्तानी टीम ने चौथे क्वार्टर में वापसी करते हुए स्कोर 3-3 से बराबर कर दिया था. मगर आखिरी 47 सेकंड में अभिषेक के फील्ड गोल करते हुए भारत को 4-3 से फाइनल में धमाकेदार एंट्री दिला दी, जहां उसका सामना मलेशिया और साउथ कोरिया के बीच होने वाले दूसरे सेमीफाइनल के विनर से होगा।  भारत के लिए कब किसने किए गोल?     अभिषेक (60वां मिनट)     सुखजीत (23 मिनट)     हरमनप्रीत सिंह (पांचवां और 13वां मिनट) पाकिस्तान के लिए कप्तान अबू बकर ने 30वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर पर पहला गोल किया जबकि शाहिद हन्नान (45वां) और राणा वाहिद (49वां) ने पांच मिनट के भीतर दो गोल करके मैच रोमांचक बना दिया था।  28 साल बाद फाइनल में भारत की दोनों टीम भारत 2016 साउथ एशियाई खेलों के फाइनल के बाद से पाकिस्तान के खिलाफ नहीं हारा था और ये सिलसिला अबतक जारी रहा. 1998 में हुए बैंकॉक एशियन गेम्स के बाद ये पहला मौका है, जब भारत की पुरुष और महिला दोनों टीम हॉकी के फाइनल में पहुंची है. दोनों टीम अब एशियाई खेलों के फाइनल से सिर्फ एक जीत दूर हैं और ऐसे में गलती की गुंजाइश बेहद कम होगी।  हरमनप्रीत के नाम एशियन गेम्स में दूसरे सबसे ज्यादा गोल कप्तान हरमनप्रीत सिंह अब एशियन गेम्स 2026 में 10 गोल मारकर सबसे ज्यादा स्कोर करने वाले प्लेयर्स की लिस्ट में पाकिस्तानी सुफियान खान (11) के बाद दूसरे नंबर पर हैं, उनके साथी फारवर्ड अभिषेक और दिलप्रीत सिंह 9-9 गोल के साथ बराबरी पर हैं. पेनल्टी कॉर्नर पर हरमनप्रीत के ड्रैग फ्लिक भारत के लिए लगातार बड़ा हथियार रहे हैं. भारत को फाइनल में अपनी इस ताकत को बरकरार रखना होगा।  सारे मैच जीतकर गोल्ड मेडल के लिए भिड़ेगा भारत इसी साल वर्ल्ड कप में सातवें पोजिशन पर रहने के बाद भारतीय हॉकी टीम ने एशियन गेम्स में सारे मैच जीतते हुए फाइनल तक का सफर तय किया. हरमनप्रीत सिंहीक टीम ने पूल ए में अपने सभी पांच मुकाबले जीतकर टॉप पर फिनिश किया था. भारत ने अपने पहले मैच में इंडोनेशिया पर 13-1 की शानदार जीत दर्ज की थी, इसके बाद श्रीलंका को 16-1 से रौंदा था. भारत ने दक्षिण कोरिया के खिलाफ 8-2 से जीत दर्ज की और फिर मेजबान जापान को 2-0 से हराया जो पूल स्टेज का उसका सबसे कड़ा मुकाबला रहा था. भारत ने ग्रुप स्टेज का अंत बांग्लादेश पर 10-0 की शानदार जीत के साथ किया।  हॉकी टीम ने पाकिस्तान से वॉलीबॉल में हार का बदला ले लिया इससे पहले आज दिन की शुरुआत में भारतीय पुरुष वॉलीबॉल टीम को क्वार्टर फाइनल में चिर प्रतिद्वंद्वी और ऊंची रैंकिंग वाले पाकिस्तान के हाथों 0-3 से हार का सामना करना पड़ा. इस तरह एशियन गेम्स में 40 साल बाद मेडल का सपना भी चकनाचूर हो गया. भारतीय खिलाड़ी पूरी तरह लय से बाहर नजर आए और वर्ल्ड रैंकिंग में 38वें स्थान पर काबिज पाकिस्तान के खिलाफ एक घंटे 22 मिनट तक चले पहले क्वार्टर फाइनल में 19-25, 23-25, 18-25 से हार गए. पुरुष वॉलीबॉल में भारत ने एशियाई खेलों में दो अन्य पदक भी जीते हैं जो 1958 में कांस्य और 1962 में रजत पदक हैं।