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राजधानी के होटलों में आग का खतरा! बिना फायर NOC संचालित हो रहे अधिकांश होटल

भोपाल  दिल्ली के एक होटल में भीषण आग लगने से 21 लोगों की मौत के बाद देशभर में अग्नि सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं. इधर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की जमीनी हकीकत भी बेहद डरावनी और चिंताजनक है. दरअसल शहर में सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर करीब 3200 होटल और रेस्टोरेंट धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं, लेकिन इनमें से लगभग 99 प्रतिशत संस्थानों के पास वैध फायर एनओसी तक नहीं है. ऐसे में यदि आज किसी बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान में आग लग जाए, तो वहां मौजूद सैकड़ों ग्राहकों और कर्मचारियों की जान बचाना मुश्किल होगा।  राजधानी में महज 38 संस्थानों के पास वैधानिकता ​नगर निगम और प्रशासनिक रिकार्ड के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि भोपाल में संचालित करीब 3,200 होटल और रेस्टोरेंट में से सिर्फ 38 संस्थानों के पास ही वैध फायर एनओसी उपलब्ध है. जबकि बाकी के हजारों प्रतिष्ठान बिना किसी ठोस फायर प्लान की स्वीकृति के चल रहे हैं. हालांकि आबकारी विभाग से अनुमति प्राप्त लगभग 75 बारों को जरूर फायर सेफ्टी के दायरे में लाया गया है, लेकिन इसके अलावा एक बहुत बड़ी संख्या ऐसी है जो पूरी तरह से रामभरोसे संचालित हो रही है।  ​नियमों की उड़ रहीं धज्जियां, बेसमेंट में धधक रहे किचन ​अग्नि सुरक्षा नियमों के अनुसार किसी भी बिल्डिंग का बेसमेंट सिर्फ पार्किंग या स्टोरेज के उद्देश्य के लिए उपयोग किया जा सकता है. वहां कमर्शियल किचन चलाने की सख्त मनाही है. इसके बावजूद भोपाल के एमपी नगर, शाहपुरा, पुराने भोपाल, नर्मदापुरम रोड और संत हिरदाराम समेत अन्य इलाकों में अधिकांश होटलों और रेस्टोरेंटों के बेसमेंट में 10 से 50 कर्मचारियों की मौजूदगी में गैस चूल्हे और भारी-भरकम एलपीजी सिलेंडर धधक रहे हैं. सबसे खतरनाक बात यह है कि कई होटलों में एंट्री और एग्जिट के लिए अलग-अलग रास्ते तक नहीं हैं. आगजनी की स्थिति में ऐसी जगहों से बाहर निकलना नामुमकिन हो जाता है।  ​स्वतंत्र फायर एक्ट का अभाव, कार्रवाई करने में बंधे हाथ विशेषज्ञ बताते हैं कि ​भोपाल नगर निगम के पास वर्तमान में कोई स्वतंत्र और कड़ा फायर एक्ट लागू नहीं है. इस कानूनी कमजोरी के कारण जिम्मेदार अधिकारी नियमों का उल्लंघन करने वाले होटल मालिकों पर सीधे सख्त दंडात्मक कार्रवाई या भारी जुर्माना लगाने से कतराते हैं. वहीं जांच के नाम पर केवल नोटिस जारी करने की रस्म अदायगी की जाती है, जिसका फायदा उठाकर रसूखदार संचालक बिना किसी डर के अपना कारोबार जारी रखते हैं।  ​संकरी गलियां और अतिक्रमण, दमकल वाहनों का पहुंचना भी मुश्किल बता दें कि ​भोपाल के पुराने और घने बाजारों जैसे लखेरापुरा, हमीदिया रोड और चौक बाजार इलाके में स्थिति और भी बदतर है. इन क्षेत्रों में संकरी गलियों, बेतरतीब खड़े वाहनों और दुकानदारों द्वारा किए गए अवैध अतिक्रमण के कारण आपातकालीन स्थिति में दमकल की गाड़ियों का घटना स्थल तक पहुंचना बेहद चुनौतीपूर्ण है. हाल ही में हमीदिया रोड स्थित एक होटल के कमरों में शार्ट सर्किट से लगी आग के दौरान तंग रास्तों के कारण दमकल कर्मियों को राहत कार्य में भारी मशक्कत करनी पड़ी थी।  '​जांच के बाद होगी कार्रवाई' ​इस मामले में नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन का कहना है, "निगम की टीमें समय-समय पर शहर के व्यावसायिक परिसरों में उपलब्ध फायर सेफ्टी उपकरणों की जांच करती हैं. जिन होटलों, रेस्टोरेंटों या बेसमेंट संचालकों के पास वैध एनओसी नहीं पाई जाएगी, उन्हें चिह्नित कर नोटिस दिए जा रहे हैं और नियमों का कड़ाई से पालन न करने पर उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। 

क्या टूट की कगार पर है TMC? 23 सांसदों को लेकर सियासी हलचल तेज, ममता एक्टिव मोड में

 कोलकाता पश्चिम बंगाल चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद ममता बनर्जी को 15 साल बाद सत्ता गंवानी पड़ी थी. हालिया चुनाव में ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को 80 सीटों पर जीत मिली थी. टीएमसी के 80 में से 58 विधायकों ने पार्टी से निकाले जा चुके संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में बगावत कर दी. बागी गुट ने ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष का नेता घोषित कर दिया, जिन्हें स्पीकर ने भी मान्यता दे दी है।  विधायकों के बाद अब सांसदों के भी बगावत करने की चर्चा जोरों पर है. चर्चा है कि टीएमसी के 23 सांसद बागी गुट के संपर्क में हैं. चर्चा 20 सांसदों के केंद्र और सूबे की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में जाने की भी थी. टीएमसी में बगावत के बीच बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी के एक बयान ने सस्पेंस और बढ़ा दिया है. ऋतब्रत बनर्जी ने कहा है कि थोड़ा धैर्य रखिए, बहुत कुछ हो सकता है।  दरअसल, शुक्रवार को कोलकाता में ऋतब्रत बनर्जी से टीएमसी के 20 सांसदों के बीजेपी में शामिल होने की अटकलों को लेकर सवाल पूछा गया था. इस सवाल के जवाब में ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि पिछले सात दिन से मेरी किसी भी सांसद से कोई बात नहीं हुई है. उन्होंने किसी भी सांसद से कोई बात नहीं होने को आधार बनाते हुए कहा कि इसलिए यह नहीं कह सकता कि सांसद क्या कदम उठाएंगे।  पश्चिम बंगाल विधानसभा में बागी गुट की ओर से नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि वर्तमान में जीता हूं. कल क्या होगा, यह कोई नहीं कह सकता. हालांकि, सूत्रों की मानें तो टीएमसी में अगले हफ्ते टूट हो सकती है. 23 सांसद भी बागी गुट के साथ जा सकते हैं. टीएमसी सूत्रों की मानें, तो ये सांसद अभिषेक बनर्जी से नाराज बताए जा रहे हैं. यह सांसद भी विधायकों की तरह अलग गुट बना सकते हैं।  टीएमसी के लोकसभा में 28 सांसद हैं. ऐसे में दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई से बचने के लिए अलग गुट को 19 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी. कहा जा रहा है कि सांसदों की बगावत का नेतृत्व पार्टी के एक बहुत ही वरिष्ठ सांसद कर रहे हैं. राज्यसभा में टीएमसी के 13 सांसद हैं. राज्यसभा में अलग गुट की मान्यता के लिए नौ सांसदों का समर्थन जरूरी होगा।  दूसरी तरफ, टीएमसी में बगावत के बाद अब ममता बनर्जी भी एक्टिव मोड में आ गई हैं. ममता बनर्जी ने कोलकाता के कालीघाट स्थित अपने आवास पर बड़ी बैठक बुला ली है. यह बैठक 5 जून की शाम चार बजे से शुरू होनी है. ममता बनर्जी के घर इस बैठक में टीएमसी के करीब-करीब सभी बड़े नेताओं को बुलाया गया है।  टीएमसी में सांसदों के भी बगावत करने की सुगबुगाहट और बागी विधायकों के दावे को मान्यता देते हुए स्पीकर की ओर से ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के कमरे की चाबी सौंपे जाने के बाद ममता बनर्जी की यह पहली बड़ी बैठक है. टीएमसी के नाम-निशान को लेकर भी अब कयासों का दौर तेज हो गया है।  ममता बनर्जी के सामने 28 साल पहले बनाई गई अपनी ही पार्टी का नाम और निशान अपने पास बनाए रखने की चुनौती आ खड़ी हुई है. ममता की अगुवाई में होने जा रही इस बैठक में आगे की रणनीति तय पर चर्चा होनी है।   

अन्नामलाई ने छोड़ी जिम्मेदारी, BJP ने स्वीकार किया इस्तीफा; दक्षिण की राजनीति में नई हलचल

बेंगलुरु तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को बड़ा झटका लग सकता है. बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीजेपी छोड़ने का ऐलान कर सकते हैं. अन्नामलाई को मनाने की सभी कोशिशें नाकाम क्या रहीं, बीजेपी ने आंध्र प्रदेश को लेकर बड़ा फैसला ले लिया. बीजेपी ने आंध्र प्रदेश में खाली हो रही सभी चार सीटें सहयोगी दलों के लिए छोड़ दी हैं।  आंध्र प्रदेश में राज्यसभा सीटों के बंटवारे के जिस फॉर्मूले की चर्चा थी, उसके मुताबिक सूबे में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार की अगुवाई कर रही तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) को दो, पवन कल्याण की अगुवाई वाली जन सेना पार्टी को एक सीट मिलनी थी. चौथी सीट बीजेपी के खाते में आनी थी. लेकिन अब ऐसा होता नहीं दिख रहा।  आंध्र प्रदेश की चार राज्यसभा सीटों के चुनाव में बीजेपी खाली हाथ रहती नजर आ रही है. इसे तमिलनाडु में तेजी से बदल रहे सियासी घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है. तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष अन्नामलाई के पार्टी छोड़ने की चर्चा है और कहा जा रहा है कि इसी वजह से तमिलनाडु के पड़ोसी आंध्र प्रदेश की राज्यसभा सीटों के चुनाव में बीजेपी बैकफुट पर आ गई है।  बीजेपी ने जिस सीट पर दावा छोड़ दिया है, उसे लेकर कहा जा रहा है कि पार्टी इसी सीट से अन्नामलाई को राज्यसभा भेजने की तैयारी में थी. अब, जब अन्नामलाई के इस्तीफे की चर्चा जोरों पर है, कहा जा रहा है कि बीजेपी ने यह सीट सहयोगी दलों के लिए छोड़ने का फैसला कर लिया है. सूत्रों की मानें तो राज्यसभा चुनाव के लिए सीट शेयरिंग के इस नए फॉर्मूले पर अमरावती में एनडीए नेताओं की बैठक में मोहर भी लग गई।   बीजेपी ने मंजूर किया इस्तीफा भारतीय जनता पार्टी ने तमिलनाडु प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है. BJP के  राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने आधिकारिक तौर पर अन्नामलाई के इस्तीफे को मंजूरी दे दी है।  BJP की तरफ से जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, अन्नामलाई ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नवीन ने उनके इस इस्तीफे को तत्काल प्रभाव से स्वीकार भी कर लिया है।  भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और मुख्यालय प्रभारी अरुण सिंह के हस्ताक्षर के साथ जारी इस प्रेस रिलीज में स्पष्ट किया गया है कि के. अन्नामलाई अब भारतीय जनता पार्टी के प्राथमिक सदस्य भी नहीं हैं. पत्र में लिखा गया है, "भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, माननीय श्री नितिन नवीन ने तमिलनाडु के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष श्री के. अन्नामलाई द्वारा पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से दिए गए इस्तीफे को स्वीकार कर लिया है।  दिल्ली में बीजेपी नेताओं से की थी मुलाकात अन्नामलाई ने दो जून को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष से मुलाकात की थी. इसके तुरंत बाद उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के साथ एक अलग गोपनीय बैठक की. अमित शाह और नितिन नवीन समेत बीजेपी के तमाम शीर्ष नेताओं के साथ हुई इस बैठक में अन्नामलाई ने बेहद सौहार्दपूर्ण माहौल में पार्टी छोड़ने की इच्छा जता दी थी।  पूरी बैठक के बाद अन्नामलाई को वापस तमिलनाडु लौटना था. वे दिल्ली एयरपोर्ट के लिए रवाना हो चुके थे और फ्लाइट पकड़ने ही वाले थे कि तभी बीजेपी आलाकमान की तरफ से उन्हें अचानक वापस बुला लिया गया. बीजेपी के शीर्ष नेताओं ने अन्नामलाई को रोकने और पार्टी छोड़ने के फैसले को बदलने के लिए मनाने की आखिरी कोशिश की, लेकिन अन्नामलाई अपने फैसले पर अडिग रहे और आखिरकार बीजेपी मुख्यालय से उनका इस्तीफा स्वीकार होने की प्रेस रिलीज जारी हो गई।  आंध्र प्रदेश में एनडीए के घटक दलों के नेताओं की यह बैठक 4 जून को अमरावती में हुई थी. अब नए फॉर्मूले के मुताबिक सीएम एन चंद्रबाबू नायडू की अगुवाई वाली टीडीपी तीन सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी. वहीं, एक सीट पर पवन कल्याण की पार्टी का उम्मीदवार होगा. आंध्र प्रदेश एनडीए में समन्वय बेहतर बनाने के लिए इस महीने के अंत तक तिरुपति, अमरावती और विशाखापत्तनम में तीन रैलियां करने का निर्णय भी इस बैठक में लिया गया।  सीट बंटवारे के फॉर्मूले में यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है, जब अन्नामलाई की सियासी राह को लेकर अटकलें तेज हैं. अन्नामलाई ने 2 जून को अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन, बीएल संतोष समेत बीजेपी के शीर्ष नेताओं के साथ कई दौर की बैठकें कीं. अन्नामलाई ने भविष्य में साथ काम करने की राह खुली रखते हुए बीजेपी नेतृत्व को धन्यवाद दिया और यह जानकारी भी दी कि वह अब नई राह पर चलना चाहते हैं। 

मध्यप्रदेश में मौसम का प्रहार: देवास में बही कार, झाबुआ में झमाझम बारिश; जानिए कब आएगा मानसून

भोपाल  मध्य प्रदेश में मानसून की एंट्री भले ही न हुई हो, लेकिन प्री मानसून जमकर बरस रहा है। झाबुआ में शुक्रवार सुबह जोरदार बारिश हुई। धार, पीथमपुर और रतलाम में भी पानी गिरा। इससे पहले भोपाल में गुरुवार शाम करीब 70 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार के साथ आंधी चली और बारिश हुई। करीब 80 पेड़ या उनकी टहनियां सड़कों पर गिर गईं। इससे ट्रैफिक जाम के हालात बने। ओले भी गिरे। देवास में बारिश की वजह से एक कार रपटे से बह गई। हादसा मसुरिया-भंडारिया रोड पर हुआ। कार सवार चार लोगों ने कूदकर जान बचाई।मौसम केंद्र के मुताबिक, शुक्रवार को भोपाल-इंदौर समेत करीब 45 जिलों में मौसम बदला रहेगा। 60KM प्रतिघंटा तक की रफ्तार से आंधी चल सकती है। नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, श्योपुर, शिवपुरी, अशोक नगर, सागर और दमोह में तेज आंधी का ऑरेंज अलर्ट है।वहीं, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, दतिया, मुरैना, भिंड, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, पांढुर्णा, सतना, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज आंधी तो कहीं बारिश वाला मौसम बना रहेगा।  केरल में मानसून की आधिकारिक एंट्री के साथ ही मध्य प्रदेश में मौसम ने पूरी तरह करवट ले ली है. प्रदेश में मानसून भले अभी नहीं पहुंचा हो, लेकिन प्री-मानसून गतिविधियां जोर पकड़ चुकी हैं. पिछले दो दिनों से प्रदेश के बड़े हिस्से में तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का दौर जारी है. मौसम विभाग ने 5 जून को प्रदेश के 45 जिलों के लिए विशेष अलर्ट जारी किया है. कई इलाकों में 50 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है. राजधानी भोपाल समेत कई शहरों में मौसम का यह बदला हुआ मिजाज लोगों को गर्मी से राहत दे रहा है, लेकिन तेज हवाओं और पेड़ गिरने की घटनाओं ने प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है।  इंदौर में 6.8 डिग्री लुढ़का पारा, कई शहरों में गिरावट मध्य प्रदेश में पिछले 24 घंटे के अंदर 20 से ज्यादा जिलों में तेज आंधी और बारिश का दौर रहा। रतलाम में सबसे ज्यादा डेढ़ इंच पानी गिर गया। भोपाल में पौन इंच और इंदौर-श्योपुर में आधा इंच से ज्यादा बारिश हुई। धार, गुना, नर्मदापुरम, शाजापुर, रायसेन, राजगढ़, उज्जैन, जबलपुर, छतरपुर, झाबुआ, सीहोर, मैहर समेत कई जिलों में भी बारिश रिकॉर्ड की गई है। आंधी-बारिश की वजह से रात के तापमान में खासी गिरावट आई है। भोपाल में पारा 20.2 डिग्री सेल्सियस रहा। इंदौर में एक ही रात में 6.8 डिग्री की गिरावट के बाद तापमान 19 डिग्री पर आ गया। ग्वालियर में 27.5 डिग्री और जबलपुर में 26.6 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। हिल स्टेशन पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा। यहां न्यूनतम तापमान 18 डिग्री दर्ज किया गया। धार में 20.3 डिग्री, श्योपुर में 21 डिग्री, रतलाम में 21.2 डिग्री, दमोह में 22.5 डिग्री, शिवपुरी में 23 डिग्री, गुना में 23.5 डिग्री, खंडवा में 24 डिग्री, नर्मदापुरम में 24.1 डिग्री, नरसिंहपुर में 24.6 डिग्री और रायसेन में 24.8 डिग्री सेल्सियस टेम्परेचर रहा। केरल पहुंचा मानसून, एमपी में 20 जून तक आने की संभावना मौसम विभाग के अनुसार, इस साल मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक 5 से 7 दिन लेट हो सकती है। प्रदेश में मानसून के एंटर होने की सामान्य तारीख 15 जून है। दक्षिणी हिस्से से मानसून एमपी में दस्तक देता है। साल 2025 में 1 दिन बाद यानी 16 जून को मानसून एंटर हो गया था, जबकि विदाई 15 अक्टूबर तक हुई थी। सामान्यत: केरल में आने के 15 दिन बाद एमपी में भी मानसून दस्तक दे देता है। इस वजह से इस बार प्रदेश में मानसून आने की तारीख 20 से 22 जून बताई जा रही है। केरल में 4 जून को ही मानसून ने दस्तक दी है। गुरुवार शाम भोपाल में तेज आंधी और बारिश ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया. करीब 70 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चली हवाओं के कारण शहर में लगभग 80 पेड़ और उनकी टहनियां सड़कों पर गिर गईं. कई इलाकों में ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी. शाजापुर, सीहोर, इछावर और शुजालपुर में भी तेज बारिश और ओलावृष्टि दर्ज की गई. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्तमान में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती परिसंचरण तंत्र के कारण अगले चार दिनों तक प्रदेश में मौसम का यही रुख बना रह सकता है. तापमान में भी 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज होने की संभावना है।  अगले चार दिन तक बना रहेगा मौसम का असर मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में फिलहाल प्री-मानसून सिस्टम सक्रिय है। ट्रफ लाइन और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से शुक्रवार को भी भोपाल, इंदौर सहित करीब 45 जिलों में तेज आंधी और बारिश की संभावना है। कुछ क्षेत्रों में हवा की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रतिघंटा तक पहुंच सकती है। नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, श्योपुर, शिवपुरी, अशोकनगर, सागर और दमोह जिलों के लिए तेज आंधी का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। गर्मी से मिली बड़ी राहत लगातार हो रही बारिश और बादलों की आवाजाही के चलते प्रदेश के अधिकांश शहरों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से नीचे आ गया है। भोपाल में अधिकतम तापमान 37.4 डिग्री, इंदौर में 38.4 डिग्री, उज्जैन और जबलपुर में 39 डिग्री तथा ग्वालियर में 40.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। केवल कुछ शहरों में ही तापमान 40 डिग्री से ऊपर रहा। सबसे अधिक तापमान नौगांव में 42.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। कई जिलों में तेज बारिश और तापमान में भारी गिरावट रायसेन जिले के गैरतगंज, देवनगर और सिलवानी क्षेत्र में देर रात तेज आंधी के साथ बारिश हुई। नर्मदापुरम जिले के पिपरिया में रातभर रुक-रुककर बारिश का दौर चला, जिससे तापमान में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। कई इलाकों में दिन और रात के तापमान में 8 से 10 डिग्री तक की कमी देखने को मिली। मानसून की दस्तक में हो सकती है देरी मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रदेश में मानसून इस बार सामान्य तिथि से कुछ दिन देर से पहुंच सकता है। मध्य प्रदेश में मानसून की सामान्य प्रवेश तिथि 15 जून मानी जाती है, लेकिन इस बार इसके 20 से 22 जून के बीच पहुंचने की संभावना जताई जा … Read more

युवा वर्ष के लिए उच्च शिक्षा सहित संबंधित विभाग करें आवश्यक तैयारी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रदेश में नैक की तर्ज पर गठित करें सैक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव युवा वर्ष के लिए उच्च शिक्षा सहित संबंधित विभाग करें आवश्यक तैयारी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव महाविद्यालयों में कृषि पाठ्यक्रम को लोकप्रिय बनाने का कार्य सराहनीय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उच्च शिक्षा क्षेत्र में उपलब्धियों के लिए दी बधाई उच्च शिक्षा विभाग की हुई समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की आवश्यकता के अनुसार नए महाविद्यालय प्रारंभ किए जाएं। जिन सघन आबादी वाले क्षेत्रों में महाविद्यालय संचालित हैं, वहां विद्यार्थी संख्या बढ़ने पर शिक्षण में शिफ्ट व्यवस्था भी लागू करने पर विचार किया जाए। राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) की तर्ज पर राज्य परिषद अर्थात सैक के गठन की कार्यवाही प्रारंभ की जाए। रोजगार परक पाठ्यक्रमों पर फोकस किया जाए। आने वाला वर्ष युवा वर्ष होगा, इस नाते अन्य संबंधित विभागों के साथ विद्यार्थियों के हित में नए कार्यक्रमों और प्रकल्पों को लागू करने की तैयारी भी की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में कृषि के स्नातक पाठ्क्रम की व्यवस्था सुनिश्चित कर इस विषय को लोकप्रिय बनाने के प्रयासों पर हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने कृषि पाठ्यक्रम से प्रदेश के लगभग 20 हजार से अधिक विद्यार्थियों को जोड़ने की सफलता के लिए उच्च शिक्षा विभाग को बधाई भी दी।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को मंत्रालय में उच्च शिक्षा विभाग के कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उच्च शिक्षा में गुणवत्ता में निरंतर सुधार के कदम उठाए जाएं। पीएममहाविद्यालयों में भी इस दिशा में ठोस प्रयास किए जाएं। अन्य सभी शासकीय महाविद्यालयों में भी शिक्षण और अन्य गतिविधियों का सुचारू संचालन होता रहे, इस पर ध्यान दिया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नए पाठ्यक्रमों को प्रारंभ करने की दिशा में हुए कार्यों की जानकारी प्राप्त की। बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में इंदौर, उज्जैन और चित्रकूट में तीन वर्षीय विमानन पाठ्यक्रम बीबीए प्रारंभ किया गया है। विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में भारतीय ज्ञान परम्परा प्रकोष्ठ की स्थापना की गई है। प्रदेश में 384 शोध केंद्र संचालित हैं। गत वर्ष 83 नए शोध केंद्र प्रारंभ किए गए। आने वाले समय में 100 शोध केंद्र स्थापित होंगे। सकल नामंकन अनुपात (जीईआर) में प्रदेश ने भारत के 1.1 प्रतिशत की वृद्धि के मुकाबले 1.8 की वृद्धि करने में सफलता प्राप्त की है। इसी तरह गत ढाई वर्ष में नेशनल लॉ इन्स्टिट्यूट यूनिवर्सिटी में 27वीं और डीएवीवी इंदौर ने 49वीं रैंक प्राप्त की है। प्रदेश की तीन अन्य उच्च शिक्षण संस्थाओं को भी नेशनल इन्स्टिट्यूशनल रैंकिंग फ्रेम वर्क (एनआईआर एफ) द्वारा श्रेष्ठ व्यवस्थाओं के लिए सराहा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि छिन्दवाड़ा के राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय में अच्छे विषयों का समावेश करें। इसके लिए राज्य सरकार आवश्यक आर्थिक सहयोग देगी। विशेष रूप से खाद्य प्रसंस्करण, आर्किटेक्चर और कृषि विज्ञान के कोर्स के लिए व्यवस्था की जाए। विद्यार्थियों की रूचि के अनुरूप नए पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाएं। विभाग की प्रमुख उपलब्धियाँ बैठक में बताया गया कि उच्च शिक्षा विभाग सूचना प्रौद्योगिकी का अधिक से अधिक उपयोग कर रहा है। स्वयं पोर्टल पर उपलब्ध पाठ्यक्रमों में पंजीयन के कार्य में मध्यप्रदेश ने जुलाई 2025 में 3 लाख 52 हजार 931 पंजीयन कर देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। जुलाई 2026 के सेमेस्टर में यह संख्या 2 लाख 73 हजार 266 हो गई है। प्रदेश में गुना, खरगौन और सागर में नए विश्वविद्यालय और आगर मालवा में लॉ कॉलेज प्रारंभ किया गया। प्रदेश के 8 महाविद्यालयों में 28 विषयों में पीजी कक्षाएं प्रारंभ की गईं। प्रदेश के 618 उच्च शिक्षण संस्थान भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के "वन नेशन-वन सबक्रिप्शन" पोर्टल पर पंजीयन करवा चुके हैं। इस पोर्टल का प्रदेश के 8 लाख से अधिक विद्यार्थी और शोधार्थी उपयोग कर चुके हैं। प्रदेश इस कार्य में भी देश में प्रथम है। मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में 5 हजार फैकल्टी और स्टॉफ को प्रशिक्षण देने के साथ ही मनोबल सत्र में 71 हजार 705 विद्यार्थी भागीदारी कर चुके हैं। जुलाई से मार्च तक तीन चरणों में कैलेंडर जारी कर अकादमिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन सुनिश्चित किया गया है। प्रदेश में भारतीय ज्ञान परम्परा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन के विशेष विशेषज्ञों की समितियां भी गठित की गईं। प्रदेश में 55 शासकीय महाविद्यालयों का प्रधानमंत्री कॉलेज और एक्सीलेंस के रूप में उन्नयन कर विभिन्न सुविधाएं बढ़ाई गई हैं। प्रमुख नवाचारों में 10 संभागीय मुख्यालयों पर डिजिटल स्टूडियो शुरू हुए हैं। ई ज्ञान सेतु चैनल के माध्यम से ई-कंटेंट उपलब्ध करवाया जा रहा है जिसमें हिन्दी के साथ क्षेत्रीय भाषाओं बुंदेली, बघेली और मालवीय के ई-कंटेंट भी शामिल हैं। ई-प्रवेश के लिए मोबाइल एप की शुरूआत और सार्थक एप से उपस्थिति की जानकारी प्राप्त की जा रही है। समर्थ सॉफ्टवेयर पर विश्वविद्यालयों को जोड़ा गया है। प्रदेश के 8 महाविद्यालयों में एवीजीसी लेब स्थापित की जा रही है। यह लेब एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स के कार्यों में सहायक है। आईआईटी दिल्ली के सहयोग से 68 महाविद्यालय एआई कोर्स का संचालन कर रहे हैं। गैर हिन्दी भारतीय भाषाओं में अध्ययन की व्यवस्था के लिए प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। साधना सप्ताह में आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर उच्च शिक्षा विभाग ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में दूसरा स्थान प्राप्त किया है।        मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रमुख निर्देश     महाविद्यालय और विश्वविद्यालय में रोजगार परक पाठ्यक्रम के संचालन पर जोर हो।     पार्ट टाइम महाविद्यालय संचालित किए जाएं। प्रातः और शाम की शिफ्ट में कॉलेज चलाए जा सकते हैं।     आवश्यकता के अनुसार सांदीपनि विद्यालयों के भवन में भी महाविद्यालय संचालित करें।     कक्षा 12वीं उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों के लिए कॉउंसलिंग की भी व्यवस्था हो।     खाद्य प्रसंस्करण, आर्किटेक्चर और कृषि विज्ञान सहित अन्य वोकेशनल विषयों के अध्ययन के लिए महाविद्यालयों में आवश्यक व्यवस्था की जाए।  

मेट्रो यात्रियों की संख्या बढ़ाने पर्यटन विभाग से तालमेल बढ़ाएं: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मेट्रो रेल यात्रियों की संख्या बढ़ाने के लिए पर्यटन विभाग का लें सहयोग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर और भोपाल मेट्रो रेल परियोजनाओं के हुए दो तिहाई कार्य पूरे कार्यो की समय-सीमा में पूर्णता के दिए गए निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में भोपाल और इंदौर में मेट्रो रेल संचालन के प्रथम चरण के कार्य पूर्ण होने के बाद परियोजना के आगामी चरणों के कार्य समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं। सघन आबादी के क्षेत्रों और कामकाजी नागरिकों की सुगम आवाजाही के लिए मेट्रो रेल व्यवस्था एक वरदान है। प्रदेश की राजधानी भोपाल और प्रमुख व्यवसायिक केन्द्र इंदौर में मेट्रो रेल यात्रियों की संख्या बढ़ाने के लिए पर्यटन विभाग का आवश्यक सहयोग प्राप्त किया जाए। दोनों नगरों की मेट्रो रेल परियोजना के सभी चरणों के सम्पूर्ण कार्यों को तेजी से पूरा किया जा रहा है। समग्र प्रगति की दृष्टि से दोनों परियोजनाओं के दो तिहाई कार्य पूर्ण हो चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय में भोपाल और इंदौर के मेट्रो रेल प्रोजेक्ट कार्यों की समीक्षा कर आवश्यक निर्देश दिए। नगरीय विकास और आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित संबंधित वरिष्ठ अधिकारी बैठक में शामिल हुए। विद्यार्थियों की अध्ययन यात्रा से भी जोड़ें मेट्रो परियोजना को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर और भोपाल मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र भी बन रहे हैं। प्रमुख धार्मिक केंद्रों, पर्यटन स्थलों, पुरातात्विक धरोहर स्थलों और टाइगर रिजर्व एवं अभयारण्य की सैर के लिए विद्यार्थियों सहित अन्य नागरिकों के लिए प्रबंध होने से मेट्रो रेल का उपयोग बढ़ेगा। इन प्रयासों में पर्यटन विभाग सहित मध्यप्रदेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद (मेपकास्ट) की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।  भोपाल मेट्रो परियोजना बैठक में बताया गया कि भोपाल मेट्रो रेल परियोजना में फेज़-1 में सुभाष नगर से एम्स तक दिसम्बर 2025 से संचालन हो रहा है। इस ट्रेक पर 7.1 किलोमीटर क्षेत्र में 8 एलिवेटेड स्टेशन बनाए गए हैं। फेज़-2 में सुभाष नगर से करोंद चौराहा तक 9.64 से किलोमीटर सेक्शन में कार्य हो रहा है, जो जून 2028 तक पूर्ण होना प्रस्तावित है। इस सेक्शन में 6 एलिवेटेड और दो भूमिगत स्टेशन होंगे। इसी तरह फेज़-3 में भदभदा चौराहा से रत्नागिरी चौराहे तक 14.16 लम्बाई के सेक्शन में कार्य हो रहा है। इस सेक्शन में 13 एलिवेटेड स्टेशन होंगे। यह कार्य भी आने वाले 2 वर्ष में पूर्ण होगा। इंदौर मेट्रो परियोजना बैठक में बताया गया कि इंदौर मेट्रो रेल परियोजना में फेज-1 के रीच वन में गांधी नगर से सुपर कॉरिडोर 3 तक 5.26 किलोमीटर के सेक्शन का शुभारंभ मई 20 25 में हो चुका है। फेज-1 के रीच-2 में सुपर कॉरिडोर 3 से मालवीय नगर चौराहे तक 11.43 किलोमीटर के सेक्शन के कार्य लगभग पूर्ण हो चुके हैं। फेज-2 के अंतर्गत रीच-1 में शहीद बगीचा से खजराना चौराहा तक 1.77 किलोमीटर सेक्शन के कार्य और फेज-2 के ही रीच-2 के एयर पोर्ट से गांधी नगर तक 1.5 किलोमीटर सेक्शन के कार्य जून 2028 तक पूर्ण होंगे। फेज-3 में खजराना चौराहा से एयरपोर्ट के 11.59 किलोमीटर लम्बाई के सेक्शन के कार्य होंगे। बैठक में नगरों में भविष्य में क्रियान्वित किए जाने वाले फ्लाई ओवर निर्माण, मेट्रो रेल और सड़क निर्माण के कार्यों के संबंध में भी चर्चा हुई।  

राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा ने उतारे 11 उम्मीदवार, MP से तरुण चुग तो कर्नाटक से कांग्रेस ने पवन खेड़ा पर लगाया दांव

भोपाल/जयपुर/अहमदाबाद/दिल्ली भाजपा और कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है। मध्यप्रदेश की दो सीटों के लिए राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और उद्योगपति रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया है। राजस्थान से पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया और डॉ. अलका गुर्जर को प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस ने भी सात उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है। पार्टी ने कर्नाटक से मल्लिकार्जुन खड़गे, पवन खेड़ा और मंसूर अली खान को उम्मीदवार बनाया है। वहीं मध्य प्रदेश से मीनाक्षी नटराजन, राजस्थान से नीरज डांगी, तमिलनाडु से प्रवीण चक्रवर्ती और झारखंड से प्रणव झा को राज्यसभा चुनाव के लिए टिकट दिया गया है। ओडिशा में 25 मई को देवाशीष सामंतराय ने बीजू जनता दल (BJD) और राज्यसभा से इस्तीफा देकर भाजपा जॉइन कर ली थी। इस तरह ओडिशा की इस सीट पर उपचुनाव होगा। इसके लिए भाजपा ने देवाशीष को ही उम्मीदवार बनाया है। 13 राज्यों की 27 राज्यसभा सीटों पर 18 जून को चुनाव होगा। नामांकन भरने की लास्ट डेट 8 जून है। तमिलनाडु, मेघालय और मिजोरम में भी प्रत्याशी घोषित     तमिलनाडु: CM विजय की पार्टी TVK ने राज्य की एक राज्यसभा सीट कांग्रेस को दी है। पार्टी ने यहां से प्रवीण चक्रवर्ती को उम्मीदवार बनाया है।     मेघालय: मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस-II (MDA-II) ने नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) के जेम्स पीके संगमा को सर्वसम्मति से उम्मीदवार बनाया है।     मिजोरम: राज्य की एक सीट के लिए सत्ताधारी दल जोराम पीपुल्स मूवमेंट (ZPM) ने पार्टी प्रवक्ता के. लालतलुआंगकिमा को प्रत्याशी घोषित किया है। NDA के पास 18 सीट राज्यसभा की जिन 27 सीटों पर चुनाव होने हैं, उनमें से NDA के पास अभी 18 (आंध्र प्रदेश से 1, गुजरात से 4, कर्नाटक से 3, राजस्थान-मध्य प्रदेश से 2-2, झारखंड, मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल, महाराष्ट्र और तमिलनाडु से एक-एक सीटे हैं)। वहीं कांग्रेस गठबंधन के पास 5 सीटे हैं। वहीं तीन अन्य सीटें YSRCP के खाते में हैं। एक बीजेडी के पास थी। इन चुनावों में NDA को 17 सीटें मिलने की संभावना है, जबकि कांग्रेस को पांच, JMM को दो और TVK को एक सीट मिलने की उम्मीद है। एक सीट मिजोरम में जोरम पीपल्स मूवमेंट जीत सकती है। YSRCP अपनी तीनों सीटें गंवा सकती है। 244 सदस्यों वाले उच्च सदन में NDA के पास अभी 149 सांसद हैं, जबकि विपक्ष के पास 78 और गैर-गठबंधन वाले क्षेत्रीय दलों के पास 17 सांसद हैं। केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू और जॉर्ज कूरियन का कटा टिकट, मोदी कैबिनेट से विदाई तय भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए 11 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है. इस सूची के सामने आते ही सियासी गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा दो केंद्रीय राज्य मंत्रियों रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कूरियन के नामों के कटने को लेकर शुरू हो गई है. उम्मीदवारों की सूची में जगह न मिलने के कारण अब दोनों ही मंत्रियों की मोदी मंत्रिपरिषद से छुट्टी तय मानी जा रही है।  BJP की इस 11 संसदीय उम्मीदवारों की सूची में सबसे चौंकाने वाला  नाम रवनीत सिंह बिट्टू का है. वह राजस्थान कोटे से राज्यसभा सांसद हैं. केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को दोबारा मौका नहीं दिया गया है. पंजाब में सिखों के बड़े चेहरे के तौर पर स्थापित बिट्टू का 21 जून को कार्यकाल समाप्त हो रहा है. संसद का सदस्य न रहने की स्थिति में उनका मंत्री पद जाना अब लगभग तय है।  वहीं, मध्य प्रदेश कोटे से राज्यसभा सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कूरियन का नाम भी इस सूची से नदारद है. कूरियन का कार्यकाल भी आगामी 21 जून को समाप्त हो रहा है. उन्हें दोबारा राज्यसभा न भेजने के फैसले के बाद अब मोदी कैबिनेट में फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है।  सांगठनिक धुरंधरों को मिला ईनाम पार्टी ने इस बार मंत्रियों को ड्रॉप करके संगठन में रात-दिन काम करने वाले जमीनी रणनीतिकारों पर बड़ा दांव खेला है।  भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और कई राज्यों के चुनावी प्रभारी तरुण चुघ को मध्य प्रदेश कोटे से उम्मीदवार बनाया गया है.चुघ को टिकट देकर पार्टी ने उनके संगठनात्मक कौशल को पुरस्कृत किया है. उनके साथ एमपी से प्रदेश मंत्री और लंबे समय से प्रदेश बीजेपी का प्रमुख चेहरा रहे रजनीश अग्रवाल को भी संसद भेजा जा रहा है।  इसके अलावा, राजस्थान भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वर्तमान में हरियाणा बीजेपी के प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया को राजस्थान से टिकट मिला है. पूनिया की जमीनी और जाट समुदाय पर मजबूत पकड़ को देखते हुए इसे बड़ा फैसला माना जा रहा है।  वहीं, बीजेपी की केंद्रीय सचिव डॉ. अलका गुर्जर को भी राजस्थान कोटे से राज्यसभा का टिकट दिया गया है, जो महिला और क्षेत्रीय संतुलन को मजबूत करेगा।  गुजरात के 4 'सरप्राइज' नाम  बीजेपी ने अपने अभेद्य किले गुजरात से चार ऐसे चेहरों को मैदान में उतारा है जिन्होंने राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया है.इन नामों के पीछे RSS की पसंद और ओबीसी-आदिवासी सोशल इंजीनियरिंग साफ दिखाई देती है।  राजूभाई शुक्ला: मेहसाणा के रहने वाले राजूभाई शुक्ला लंबे समय से पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता और मजबूत ब्राह्मण चेहरा हैं. वर्तमान में वे सुरेंद्रनगर के जिला प्रभारी हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से गहरा जुड़ाव रखते हैं. वे मेहसाणा जिला महामंत्री और कड़ी नगरपालिका के प्रमुख भी रह चुके हैं।  मानसिंह परमार: युवा चेहरा मानसिंह परमार सोमनाथ जिले से आते हैं. वे ओबीसी मोर्चा के प्रमुख व पूर्व विधायक गोविंद परमार के भतीजे हैं और खुद भी पूर्व जिला अध्यक्ष के रूप में संगठन संभाल चुके हैं।  जितेंद्र कंजारिया: देवभूमि द्वारका के खंभालिया से पूर्व विधायक मेघजी कंजारिया के बेटे जितेंद्र खुद भी ओबीसी समुदाय से आते हैं और क्षेत्र के बड़े जमीनी नेता हैं।  मुकेशभाई राठवा: छोटा उदेपुर जिला महामंत्री मुकेश राठवा भारतीय जनता युवा मोर्चा से अपनी राजनीति शुरू कर चुके हैं. RSS के कैडर रहे मुकेश राठवा की गुजरात के आदिवासी समुदाय पर बेहद मजबूत पकड़ मानी जाती है।  नॉर्थ-ईस्ट पर विशेष फोकस  मणिपुर में जारी संवेदनशील और सामाजिक हालात के बीच भाजपा ने मणिपुर बीजेपी की प्रदेश अध्यक्ष  ए. शारदा देवी को राज्यसभा का टिकट दिया है. एक महिला और सांगठनिक अध्यक्ष को उच्च सदन में भेजना राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा … Read more

लोनधारकों को राहत या इंतजार? RBI ने रेपो रेट को रखा स्थिर

नई दिल्ली केंद्रीय बैंक RBI ने 3 से 5 जून तक चली मॉनिटरी पॉलिसी मीटिंग के बाद रेपो रेट 5.25 पर बरकरार रखने का फैसला लिया है. गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने शुक्रवार सुबह 10 बजे MPC मीटिंग में लिए गए फैसलों के बारे में जानकारी दी. वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद रेपो रेट नहीं बढ़ाने के फैसले को जानकार, एक राहत की तरह मान रहे हैं. इस फैसले से स्‍पष्‍ट है कि अगर आपने रेपो रेट से लिंक्‍ड होम लोन, कार लोन या अन्‍य तरह का बैंक लोन लिया है, तो आपके लोन की EMI नहीं बढ़ेगी।  कैसी रहेगी देश की GDP ग्रोथ?  केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान मामूली रूप से कम कर दिया है. गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने बताया कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए रियल GDP ग्रोथ अनुमान  6.9 से कम कर 6.6 फीसदी कर दिया है।      जून 2026 तिमाही: 6.6%     सितंबर 2026 तिमाही: 6.3%     दिसंबर 2026 तिमाही: 6.5%     मार्च 2027 तिमाही: 6.8%   इस साल अनुमान से ज्‍यादा रह सकती है महंगाई महंगाई दर पर RBI का अनुमान है कि इस साल देश में महंगाई थोड़ी ज्‍यादा रह सकती है. इसमें तेल और गैस की बढ़ी कीमतों का बड़ा रोल रहेगा. मार्च में महंगाई दर 3.4 फीसदी और अप्रैल में 3.5 फीसदी रही थी, जबकि इससे पहले फरवरी 2026 में महंगाई दर 3.2 रही थी.  ये आंकड़े केंद्रीय बैंक के 4% के लक्ष्‍य से कम थे. हालांकि आने वाले दिनों में महंगाई बढ़ सकती है. RBI के अनुमान के अनुसार वित्त वर्ष 2027 में महंगाई दर 5.1 फीसदी रह सकती है।      जून 2026 तिमाही: 4.2%     सितंबर 2026 तिमाही: 5.1%     दिसंबर 2026 तिमाही: 5.9%     मार्च 2027 तिमाही: 5.4% हर दो महीने में होती है RBI की मीटिंग मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी में 6 सदस्य होते हैं। इनमें से 3 RBI के होते हैं, जबकि बाकी केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। RBI की मीटिंग हर दो महीने में होती है। वित्त वर्ष 2026-27 में मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की कुल 6 बैठकें होंगी। पहली बैठक 6-8 अप्रैल 2026 को हुई थी। RBI MPC मीटिंग के अन्य बड़े फैसले     ग्रोथ का अनुमान घटाया: वेस्ट एशिया (मध्य पूर्व) में चल रहे तनाव और सप्लाई चेन में रुकावटों के चलते RBI ने आर्थिक विकास दर यानी GDP ग्रोथ के अनुमान को घटा दिया है। अब चालू वित्त वर्ष के लिए GDP ग्रोथ आउटलुक को 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया गया है।     स्टांस 'न्यूट्रल' रखा: महंगाई के बढ़ते जोखिमों के बावजूद मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने अपनी नीति का रुख 'न्यूट्रल' (तटस्थ) बनाए रखने का फैसला किया है। कमेटी स्थिति पर नजर रखते हुए डेटा के आधार पर आगे कदम उठाएगी।     महंगाई को लेकर चिंता: गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि हालांकि रिटेल महंगाई अभी टारगेट के दायरे में है, लेकिन वैश्विक तनाव के कारण फ्यूल (ईंधन) और एनर्जी की बढ़ती कीमतें आगे चलकर खुदरा बाजार और आम जनता की जेब पर दबाव डाल सकती हैं।     कमजोर मानसून का डर: पश्चिम-दक्षिण मानसून में कमी (कम बारिश) के अनुमान को लेकर भी चिंता जताई गई है। इसका सीधा असर खेती-किसानी की पैदावार और ग्रामीण इलाकों में मांग पर पड़ सकता है। हालांकि, सरकार की फसल विविधीकरण यानी डायवर्सिफिकेशन जैसी योजनाएं इसके असर को कम करने में मदद करेंगी।     सर्विस सेक्टर मजबूत: अच्छी बात यह है कि घरेलू आर्थिक गतिविधियां अब भी मजबूत बनी हुई हैं। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर का प्रदर्शन बेहतर है और GST रेशनलाइजेशन व स्थिर रोजगार के चलते शहरी क्षेत्रों में कंजम्पशन (खपत) को सहारा मिल रहा है। रेपो रेट क्या है, इससे लोन कैसे सस्ता होता है? RBI जिस ब्याज दर पर बैंकों को लोन देता है उसे रेपो रेट कहते हैं। रेपो रेट कम होने से बैंक को कम ब्याज पर लोन मिलेगा। बैंकों को लोन सस्ता मिलता है, तो वो अक्सर इसका फायदा ग्राहकों को पास कर देते हैं यानी बैंक भी अपनी ब्याज दरें घटा देते हैं। रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ाता और घटाता क्यों है? किसी भी सेंट्रल बैंक के पास पॉलिसी रेट के रूप में महंगाई से लड़ने का एक शक्तिशाली टूल है। जब महंगाई बहुत ज्यादा होती है तो सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट बढ़ाकर इकोनॉमी में मनी फ्लो को कम करने की कोशिश करता है। पॉलिसी रेट ज्यादा होगी तो बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा होगा। बदले में बैंक अपने ग्राहकों के लिए लोन महंगा कर देते हैं। इससे इकोनॉमी में मनी फ्लो कम होता है। मनी फ्लो कम होता है तो डिमांड में कमी आती है और महंगाई घट जाती है। इसी तरह जब इकोनॉमी बुरे दौर से गुजरती है तो रिकवरी के लिए मनी फ्लो बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट कम कर देता है। इससे बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज सस्ता हो जाता है और ग्राहकों को भी सस्ती दर पर लोन मिलता है।

मंत्रिमंडल गठन के साथ ही संकट! विभाग आवंटन से नाराज रेड्डी ने छोड़ा पद

 बेंगलुरु कर्नाटक में नई सरकार के गठन और विभागों के बंटवारे के तुरंत बाद कांग्रेस के भीतर का आंतरिक असंतोष एक बड़े राजनीतिक संकट में बदल गया है. वरिष्ठ कांग्रेस नेता और नवनियुक्त कैबिनेट मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।  रेड्डी ने खुलेआम अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि उनसे किया गया वादा पूरा नहीं किया गया, जिसके चलते वे यह बड़ा कदम उठा रहे हैं. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे कैबिनेट छोड़ रहे हैं, लेकिन विधायक (MLA) और कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में काम करते रहेंगे।  प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रामलिंगा रेड्डी ने उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार पर सीधा निशाना साधा. रेड्डी ने दावा किया, "डीके शिवकुमार खुद मेरे घर आए थे और कहा था कि जब मैं सीएम बनूंगा, तो मैं इस मंत्रालय (बेंगलुरु विकास) को छोड़ दूंगा और आप इसे संभाल लेना." रेड्डी के मुताबिक, शपथ ग्रहण समारोह से ठीक एक दिन पहले भी जब वे शिवकुमार से मिले, तो उन्हें दोबारा आश्वस्त किया गया था कि बेंगलुरु से जुड़ा पोर्टफोलियो उन्हीं को मिलेगा।  रेड्डी ने भावुक होते हुए कहा, "मैंने कभी इस विभाग की मांग खुद से नहीं की थी, लेकिन मुझे बार-बार इसका भरोसा दिया गया था. दो बार वादा करने के बाद अब मुझे जल संसाधन विभाग दे दिया गया. मैं इस फैसले से बेहद निराश हूं और इसीलिए इस्तीफा दे रहा हूं।  समर्थक के हाथ भेजा इस्तीफा, पत्र में लिखी बड़ी बात रामलिंगा रेड्डी ने अपना इस्तीफा सीधे मुख्यमंत्री को सौंपने के बजाय अपने एक समर्थक के जरिए मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव को भिजवाया है. अपने त्यागपत्र में उन्होंने लिखा, "मैं कैबिनेट में मंत्री पद देने के लिए आपका और कांग्रेस पार्टी का आभार व्यक्त करता हूं. हालांकि, चूंकि मैं अपनी अंतरात्मा के खिलाफ काम करने में असमर्थ हूं, इसलिए मैं मंत्री पद से अपना इस्तीफा सौंप रहा हूं. कृपया इसे स्वीकार करें।  राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर भी चर्चा तेज है कि रामलिंगा रेड्डी ने अपने त्यागपत्र में 'माननीय मुख्यमंत्री' के रूप में डी. के. शिवकुमार को संबोधित किया है, जो राज्य के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान की ओर इशारा करता है. हालांकि, रेड्डी ने मीडिया से कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से न तो शिवकुमार से नाराज हैं और ना ही सिद्धारमैया से।  दरअसल, रामलिंगा रेड्डी 'बेंगलुरु शहरी विकास'  विभाग की मांग कर रहे थे. वे इस महत्वपूर्ण विभाग पर अपनी कमान चाहते थे, लेकिन मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने यह जिम्मेदारी ब्याटरायनपुरा के विधायक कृष्णा बायरे गौड़ा को सौंप दी। 

मध्यप्रदेश से राज्यसभा की जंग तय, कांग्रेस की मीनाक्षी बनाम BJP के तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल

भोपाल  राज्यसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है, जिसमें मध्य प्रदेश से पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग और प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल को प्रत्याशी बनाया गया है. इस फैसले के साथ ही राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है, खासकर इसलिए क्योंकि इस बार दो मौजूदा केंद्रीय मंत्रियों को दोबारा मौका नहीं दिया गया. पार्टी ने अन्य राज्यों में भी कई अहम नामों की घोषणा की है. मध्य प्रदेश में दो सीटों पर उम्मीदवार उतारकर बीजेपी ने मुकाबले को रोचक बना दिया है, जिसके चलते क्रॉस वोटिंग की भी संभावना पर नजर रखी जा रही है।  MP से दो उम्मीदवार, चुनाव होगा दिलचस्प बीजेपी ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा की दो सीटों के लिए तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल को टिकट दिया है. दोनों उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से यहां चुनाव होना तय माना जा रहा है, जिससे राजनीतिक समीकरणों पर नजर बढ़ गई है।  केंद्रीय मंत्रियों को नहीं मिला मौका इस बार पार्टी ने केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कूरियन को राज्यसभा नहीं भेजा है. दोनों का कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है, लेकिन नए सिरे से उन्हें मौका नहीं दिया गया. इस फैसले को भविष्य के राजनीतिक बदलावों के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।  तरुण चुग: संगठन के मजबूत रणनीतिकार तरुण चुग वर्तमान में बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव हैं और पार्टी के अनुभवी संगठनात्मक नेताओं में गिने जाते हैं. पंजाब के अमृतसर से आने वाले चुग ने आरएसएस से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी और संगठन के विभिन्न स्तरों पर काम किया है. वे जमीनी स्तर के कार्यकर्ता से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक अपनी भूमिका निभा चुके हैं और कई राज्यों में संगठन प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।  तरुण चुग भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और वर्तमान में राष्ट्रीय महासचिव हैं. वे पार्टी के संगठनात्मक रणनीतिकार के रूप में जाने जाते हैं और कई राज्यों में चुनावी प्रबंधन व संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. तरुण चुग ने बेहद कम उम्र (लगभग 9 वर्ष) में RSS से जुड़कर सामाजिक कार्यों की शुरुआत की।  इसके बाद वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े और संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई.     1989–1994: ABVP में जिला सचिव और राज्य कार्यकारिणी सदस्य     1993: अमृतसर में BJYM (भारतीय जनता युवा मोर्चा) के जिला अध्यक्ष बने तरुण चुग ने युवा राजनीति से अपने करियर को मजबूती दी और धीरे-धीरे संगठन में बड़े पदों तक पहुंचे     1997: पंजाब BJP युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष     राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य (BJYM)     राज्य महासचिव (युवा मोर्चा) उन्होंने युवाओं को जोड़ने के लिए “युवा चेतना यात्रा” का नेतृत्व किया, जो 2100 किमी लंबी थी।  BJP संगठन में प्रमुख पद तरुण चुग संगठन के कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं:     प्रदेश भाजपा प्रशिक्षण प्रकोष्ठ संयोजक     राज्य मीडिया एवं प्रशिक्षण प्रकोष्ठ प्रभारी     राज्य भाजपा सचिव     पंजाब भाजपा महासचिव     राष्ट्रीय महासचिव (वर्तमान) जिम्मेदारियां और क्षेत्रीय प्रभारी तरुण चुग को पार्टी ने कई महत्वपूर्ण राज्यों की जिम्मेदारी सौंपी है:     जम्मू-कश्मीर प्रभारी     लद्दाख प्रभारी     तेलंगाना प्रभारी     अंडमान-निकोबार प्रभारी     दिल्ली भाजपा सह-प्रभारी राजनीतिक महत्व वे चुनावी रणनीति, बूथ प्रबंधन और संगठन विस्तार में अहम भूमिका निभाते हैं. तरुण चुग का राज्यसभा के लिए चयन कई कारणों से अहम माना जा रहा है. इसे संगठन को महत्व देने के संकेत के साथ-साथ पंजाब और उत्तर भारत में राजनीतिक संतुलन और भविष्य की बड़ी जिम्मेदारियों की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।  रजनीश अग्रवाल को भी मिला मौका रजनीश अग्रवाल, जो वर्तमान में मध्य प्रदेश बीजेपी में प्रदेश मंत्री हैं, को भी राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया गया है. उनकी नियुक्ति को प्रदेश संगठन में सक्रिय भूमिका और पार्टी के प्रति समर्पण का परिणाम माना जा रहा है।  अन्य राज्यों में भी बड़े नाम बीजेपी ने अन्य राज्यों के लिए भी उम्मीदवारों की घोषणा की है. राजस्थान से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को राज्यसभा भेजा जा रहा है. मणिपुर से ए. शारदा देवी को टिकट दिया गया है, जबकि ओडिशा में देबाशीष सामंतराय को उम्मीदवार बनाया गया है, जो पहले बीजेडी से जुड़े थे।  गुजरात में बीजेपी मजबूत स्थिति में गुजरात में बीजेपी ने चारों सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं और उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है. यह पहली बार होगा जब गुजरात से कांग्रेस का कोई भी राज्यसभा सदस्य नहीं होगा।  पंजाब राजनीति से जुड़ा फैसला रवनीत सिंह बिट्टू को राज्यसभा में अवसर नहीं मिलने से यह संकेत मिल रहा है कि वे पंजाब विधानसभा चुनाव में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं. उन्होंने पहले ही संकेत दिया था कि वे पंजाब लौटकर राजनीति में सक्रिय होंगे।  मंत्रीमंडल फेरबदल के संकेत दो केंद्रीय मंत्रियों को राज्यसभा टिकट न मिलने और “एक व्यक्ति, एक पद” की नीति को देखते हुए यह भी माना जा रहा है कि केंद्र सरकार में जल्द फेरबदल हो सकता है. कुछ नेताओं को नई जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं, जिससे राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।  बीजेपी की रणनीतिक चाल राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी ने इस सूची के माध्यम से संगठन और नेतृत्व के संतुलन को ध्यान में रखा है. अनुभवी नेताओं के साथ-साथ नए चेहरों को मौका देकर पार्टी ने भविष्य की रणनीति तैयार की है।  राज्यसभा चुनाव पर सभी की नजर अब सभी की नजर राज्यसभा चुनाव पर टिकी हुई है, जहां क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक समीकरण अहम भूमिका निभा सकते हैं. मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों में यह चुनाव आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम को दिशा दे सकता है।