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उज्जैन में सिंहस्थ की तैयारियां तेज, नमामि गंगे मिशन और विकास परियोजनाओं की होगी कड़ी परीक्षा

उज्जैन तीन साल की लंबी प्रतीक्षा और कड़े संघर्ष के बाद आखिरकार शिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने वाले ''नमामी गंगे मिशन'' को केंद्र सरकार से हरी झंडी तो मिल गई है, लेकिन अब प्रशासन और निर्माण एजेंसी के सामने इससे भी बड़ी अग्निपरीक्षा शुरू होने जा रही है। गाजियाबाद (उत्तरप्रदेश) की ‘सोमवंशी एनवायरो फर्म’ को 81 करोड़ रुपये का टेंडर मंजूर होने के बाद, अब सबसे बड़ा संकट सिंहस्थ-2028 की समय-सीमा के भीतर इस पूरी परियोजना को धरातल पर उतारने का है। टेंडर की शर्तों के मुताबिक, इस पूरी परियोजना को पूरा करने के लिए 18 महीने का समय निर्धारित है। लेकिन तकनीकी और वित्तीय उलझनों के कारण जो परियोजना दो साल पहले शुरू हो जानी थी, उसमें तीन साल की भारी देरी हो चुकी है। इस लेती-लतीफी के कारण अब प्रशासन के पास समय बहुत कम बचा है। वर्तमान में उज्जैन शहर के भीतर सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों को लेकर सड़क चौड़ीकरण, नए घाटों का निर्माण, पुल, सीवरेज नेटवर्क और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े दर्जनों विकास कार्य एक साथ समानांतर रूप से चल रहे हैं। ऐसे में अलग-अलग निर्माण एजेंसियों के बीच आपसी समन्वय बैठाना और बिना किसी बाधा के समयबद्ध तरीके से काम को अंजाम देना जिला प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगा। यदि इस बार भी काम समय पर पूरा नहीं हुआ, तो सिंहस्थ से पहले शिप्रा शुद्धिकरण का मुख्य लक्ष्य सीधे तौर पर प्रभावित हो सकता है। एमआईसी कब करेगी मंजूर केंद्र सरकार ने तो ठेकेदार तय करने को स्वीकृति दे दी मगर एमआइसी यानी महापौर परिषद से स्वीकृति मिलना अभी बाकी है। ये स्वीकृति कब मिलेगी, स्वीकृति उपरांत कार्य आदेश कब जारी होगा, कब भूमि पूजन होगा, ये अभी तय नहीं हो सका है। 92.78 करोड़ की थी प्रशासनिक स्वीकृति, 81 करोड़ में हुआ टेंडर लॉक शिप्रा नदी में मिलने वाले भैरवगढ़ और पीलियाखाल क्षेत्र के दूषित पानी को रोकने के लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने 24 मई 2023 को ही 92 करोड़ 78 लाख रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दे दी थी। जून 2023 में महापौर परिषद (एमआइसी) से हरी झंडी मिलने के बाद चार फर्मों ने निविदा में भाग लिया, लेकिन कड़ी परीक्षण प्रक्रिया के चलते पूर्व के सभी प्रस्ताव निरस्त करने पड़े। इसके बाद इसी साल फरवरी में संशोधित दरों के साथ फिर से टेंडर बुलाए गए, जिसमें अब गाजियाबाद की कंपनी का चयन किया गया है। पीएलसी-स्काडा आधारित मानिटरिंग और 15 साल का मेंटेनेंस इस हाईटेक परियोजना के तहत पीलियाखाल क्षेत्र में 22.06 एमएलडी क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और भैरवगढ़ क्षेत्र में 2.38 एमएलडी क्षमता का एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित होगा। बता दे कि अभी भैरवगढ़ क्षेत्र में बाटिक प्रिंट इकाइयों का केमिकल युक्त पानी सीधे शिप्रा में मिलता है, प्लांट लगने के बाद नहीं मिलेगा। योजना अनुसार दो सीवेज पंपिंग स्टेशन, दो एफ्लुएंट पंपिंग स्टेशन, 1420 मीटर राइजिंग मेन और 3500 मीटर एफ्लुएंट पाइपलाइन बिछाई जाएगी। जल की शुद्धता की रियल-टाइम जांच के लिए अत्याधुनिक पीएलसी-स्काडा आधारित मानिटरिंग सिस्टम लगेगा। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए यह प्लांट सौर ऊर्जा आधारित सुविधाओं से लैस होगा। खास बात यह है कि निर्माण पूरा होने के बाद संबंधित एजेंसी ही अगले 15 वर्षों तक इसके संचालन और रख-रखाव का पूरा जिम्मा संभालेगी। सिंहस्थ-2028 के लिहाज से क्या बदलेगा नालों पर रोक: भैरवगढ़ की रंगाई-छपाई फैक्ट्रियों और पीलियाखाल का गंदा पानी अब सीधे शिप्रा नदी में नहीं मिलेगा। शुद्ध जल: सीवेज का पूर्ण उपचार होने से नदी की जल गुणवत्ता में अभूतपूर्व सुधार होगा। आस्था का सम्मान: सिंहस्थ महाकुंभ में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को आचमन और स्नान के लिए स्वच्छ व अविरल शिप्रा जल मिल सकेगा।

मध्य प्रदेश में घटा स्कूल नामांकन, 109% से 76% पर पहुंचा आंकड़ा; NITI Aayog रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

भोपाल  मध्य प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा को लेकर एक बेहद चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। नीति आयोग द्वारा जारी वर्ष 2024–25 के ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश पिछले एक दशक में प्राथमिक स्कूली बच्चों के दाखिले के मामले में देश के सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले राज्यों की सूची में शामिल हो गया है। 30 फीसदी गिरा आंकड़ा आंकड़े बताते हैं कि एक दशक पहले मध्य प्रदेश का प्राइमरी स्कूल एनरोलमेंट रेशियो करीब 109.3% हुआ करता था, जो अब लगभग 30 फीसदी गिरकर महज 76.3% पर सिमट गया है। देश के किसी भी बड़े राज्य में यह गिरावट सबसे बड़ी और चौंकाने वाली है। इस मामले में मध्य प्रदेश की स्थिति केवल बिहार (77.2%), गुजरात (79.6%), उत्तर प्रदेश (83.1%) और राजस्थान (88.3%) जैसे राज्यों के समकक्ष या उनसे भी बदतर हो चुकी है। लाखों बच्चों ने छोड़ी पढ़ाई शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य प्रदेश जैसे बड़ी आबादी वाले राज्य में इस स्तर की गिरावट का मतलब है कि लाखों बच्चे औपचारिक प्राथमिक शिक्षा प्रणाली से बाहर हो चुके हैं। इसके पीछे स्कूलों तक पहुंच की कमी, बीच में पढ़ाई छोड़ना, परिवारों का पलायन या फिर डेटा एंट्री में लापरवाही जैसे गंभीर कारण हो सकते हैं। मध्य प्रदेश देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों में से एक है, इसलिए यहां प्रतिशत में मामूली बदलाव का असर भी लाखों बच्चों पर पड़ता है। इस भारी गिरावट के असली कारणों की पहचान करना बेहद जरूरी है। अगर बच्चे सच में स्कूल छोड़ रहे हैं, तो हमें मिड-डे मील को मजबूत करने, मुफ्त परिवहन, इंफ्रास्ट्रक्चर और कैश ट्रांसफर जैसी योजनाओं पर तुरंत काम करना होगा। मेघालय ने बनाया इतिहास इसके विपरीत, देश के छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इस मोर्चे पर बेहतरीन प्रदर्शन किया है। पूर्वोत्तर का मेघालय 180.7% के साथ देश में सबसे आगे है, जबकि मणिपुर, मिजोरम, गोवा और तेलंगाना जैसे राज्यों में नामांकन दर 100 प्रतिशत से भी ऊपर है, जो दिखाता है कि वहां तय उम्र से ज्यादा के बच्चे भी स्कूलों का रुख कर रहे हैं। इस गंभीर गिरावट पर मध्य प्रदेश पेरेंट्स एसोसिएशन ने नीतिगत दखल की मांग की है।

मध्यप्रदेश में निवेश का बड़ा धमाका, हेलियन की पहली भारतीय मैन्युफैक्चरिंग इकाई पीथमपुर में होगी स्थापित

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निवेश प्रयासों को मिली बड़ी सफलता हेलियन की पहली भारतीय मैन्युफैक्चरिंग इकाई का पीथमपुर में 8 जून को होगा भूमि-पूजन लगभग 2000 करोड़ रुपए का होगा निवेश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा मध्यप्रदेश को वैश्विक निवेश का पसंदीदा गंतव्य बनाने के लिए किए जा रहे सतत प्रयासों का एक और महत्वपूर्ण परिणाम सामने आया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में आयोजित राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय निवेश संपर्क अभियानों, क्षेत्रीय उद्योग सम्मेलनों तथा विदेश निवेश संवादों के माध्यम से प्रदेश में निवेशकों का विश्वास लगातार मजबूत हुआ है। इसी क्रम में विश्व की अग्रणी कंज्यूमर हेल्थकेयर कंपनी हेलियन द्वारा प्रदेश के पीथमपुर स्थित स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क में स्थापित की जाने वाली भारत की पहली मैन्युफैक्चरिंग इकाई का भूमि-पूजन 8 जून को मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा किया जाएगा। यह परियोजना मुख्यमंत्री डॉ. यादव के यूनाइटेड किंगडम प्रवास और वहां आयोजित निवेश संवादों से सार्थक हुई है। निवेशकों के साथ हुई विस्तृत चर्चाओं और मध्यप्रदेश की औद्योगिक क्षमताओं के प्रभावी प्रस्तुतीकरण के बाद हेलियन ने प्रदेश में अपना निवेश विस्तार करने का निर्णय लिया। अब यह निवेश प्रस्ताव क्रियान्वयन के चरण में पहुंच चुका है, जो प्रदेश में निवेश परियोजनाओं को तेजी से धरातल पर उतारने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। लगभग दो हजार करोड़ रुपए की लागत से स्थापित होने वाली यह परियोजना प्रदेश में साकार हो रही महत्वपूर्ण विदेशी निवेश परियोजनाओं में शामिल है। पीथमपुर के स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क में 40 एकड़ से अधिक क्षेत्र में विकसित की जाने वाली यह अत्याधुनिक इकाई मुख्य रूप से ओरल हेल्थ उत्पादों के निर्माण पर केंद्रित होगी। यहां उत्पादित सामग्री घरेलू बाजार की आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ एशिया-प्रशांत, मध्य-पूर्व और अफ्रीका क्षेत्र के अनेक देशों में निर्यात भी की जाएगी। हेलियन वैश्विक स्तर पर कंज्यूमर हेल्थकेयर क्षेत्र की अग्रणी कंपनियों में शामिल है। सेंसोडाइन, क्रोसिन, ईनो, ओट्रिविन, आयोडेक्स, सेंट्रम तथा ऑस्टोकैल्शियम जैसे लोकप्रिय उत्पादों के माध्यम से कंपनी विश्वभर में अपनी मजबूत पहचान रखती है। लगभग 170 से अधिक देशों में उपस्थिति रखने वाली यह कंपनी स्वास्थ्य एवं स्व-देखभाल (Self-Care) क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व स्थापित कर चुकी है। कंपनी की वैश्विक उपस्थिति और मध्यप्रदेश में प्रस्तावित यह निवेश, प्रदेश के औद्योगिक वातावरण और निवेश-अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र पर अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। परियोजना से लगभग 500 प्रत्यक्ष और 500 अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इसके साथ ही स्थानीय एमएसएमई इकाइयों, सप्लायर नेटवर्क, परिवहन, लॉजिस्टिक्स तथा अन्य सहायक उद्योगों को भी नए अवसर प्राप्त होंगे। स्थानीय प्रतिभाओं के कौशल विकास को बढावा देने के साथ कम से कम 30 प्रतिशत महिला कार्यबल की रोजगार में भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान देगी। स्थानीय मानव संसाधन के उपयोग पर विशेष ध्यान दिए जाने से क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने पिछले वर्षों में निवेश आकर्षित करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य सरकार द्वारा विकसित औद्योगिक अधोसंरचना, निवेशक-अनुकूल नीतियां, अनुमोदनों की सरलीकृत व्यवस्था, भूमि की उपलब्धता और उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण ने मध्यप्रदेश को वैश्विक कंपनियों के लिए आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित किया है। हाल के वर्षों में प्रदेश में विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों द्वारा किए गए निवेश इसी बढ़ते विश्वास का प्रमाण हैं। हेलियन की यह परियोजना मध्यप्रदेश को वैश्विक विनिर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह निवेश प्रदेश के औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन, निर्यात संवर्धन और वैश्विक निवेश आकर्षण के प्रयासों को नई मजबूती प्रदान करेगा और विकसित मध्यप्रदेश के संकल्प को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।  

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने शहरी विकास योजनाओं का लिया जायजा, कार्यों में तेजी लाने के दिए निर्देश

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने शहरी विकास योजनाओं का किया सघन निरीक्षण  इंटेक-वेल, फिल्टर प्लांट, डब्ल्यूटीपी, नालंदा परिसर और तालाब सौंदर्यीकरण कार्यों का लिया जायजा शहरवासियों की सुविधाएं बढ़ाने निर्माणाधीन कार्यों को जल्द पूरा करने के दिए निर्देश रायपुर.  उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने आज जगदलपुर में नगर निगम द्वारा कराए जा रहे किए विभिन्न विकास कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्यों का बारीकी से अवलोकन कर कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को सभी कार्यों को गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री साव ने जगदलपुर के पावर हाउस चौक स्थित इंटेक-वेल व फिल्टर प्लांट तथा महारानी वार्ड में लगभग 101 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित नयामुंडा फिल्टर प्लांट का निरीक्षण किया। उन्होंने पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की जानकारी लेते हुए नागरिकों को बेहतर एवं निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साव ने पीजी कॉलेज धरमपुरा में लगभग 11 करोड़ 18 लाख रुपये की लागत से निर्माणाधीन 500 सीटर नालंदा परिसर के कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने निर्माण कार्य में तेजी लाते हुए इसका काम शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए, ताकि विद्यार्थियों को जल्द से जल्द आधुनिक अध्ययन सुविधाओं का लाभ मिल सके। उप मुख्यमंत्री ने छत्रपति शिवाजी वार्ड में लगभग 79 लाख रुपये की लागत से किए जा रहे पण्डरीतरई तालाब सौंदर्यीकरण कार्य तथा करीब 3 करोड़ 71 लाख रुपये की लागत से के गंगामुड़ा तालाब सौंदर्यीकरण कार्य का भी निरीक्षण किया। उन्होंने तालाबों के सौंदर्यीकरण एवं संरक्षण कार्यों की सराहना करते हुए गुणवत्ता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों तालाबों के गहरीकरण से शहर के जलस्तर में भी सुधार होगा। साव के निरीक्षण के दौरान सांसद महेश कश्यप, महापौर संजय पाण्डेय, पार्षदगण, कलेक्टर आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा सहित जिला प्रशासन एवं नगरीय प्रशासन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

सोना-चांदी बाजार में बड़ी गिरावट, चांदी में ₹16 हजार से ज्यादा की टूट; अमेरिका बना वजह

नई दिल्‍ली सोना और चांदी के भाव में एक दिन के दौरान भारी गिरावट आई है. चांदी एक ही झटके में 16,600 रुपये तक टूट चुकी है, जबकि सोने की कीमत में भी बड़ी गिरावट आई है. शु्क्रवार को रात 11.30 बजे कमोडिटी मार्केट के बंद होने तक चांदी के भाव 16,000 से ज्‍यादा टूट चुके थे, जबकि सोने के दाम में भी करीब 4000 रुपये तक की गिरावट आई थी।   सोने और चांदी के भाव में एक दिन के दौरान इतनी भारी गिरावट सिर्फ अमेरिका की वजह से आई है. MCX पर दाम तेजी से गिरने के बाद सर्राफा बाजार में भी सोने-चांदी के भाव में गिरावट आई है. दिल्‍ली से लेकर मुंबई तक सोने-चांदी सस्‍ते हो चुके हैं।  MCX पर सोने-चांदी की कीमत  मल्‍टी कमोडिटी मार्केट में सोने के भाव में 3947 रुपये गिरकर 1,55,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जबकि चांदी की कीमत 16,595 रुपये गिरकर 2,48,201 रुपये प्रति किलो पर आ गया है. सोने-चांदी के भाव में ये गिरावट अमेरकी-ईरान तनाव और फेड रेट बढ़ोतरी की आशंका के बीच आया है।  क्‍यों आई सोने-चांदी के भाव में आई ये गिरावट?  इंटरनेशलन मार्केट में सोना 3.4 फीसदी तक गिर गया है. अमेरिका में जॉब डाटा अनुमान से बेहतर डेटा आया है. इसका असर बॉन्ड यील्ड और डॉलर पर पड़ा है. दोनों में तेजी देखी जा रही है, जिससे सोने-चांदी के भाव में भारी गिरावट रही है.  वहीं अमेरिका फेडरल बैंक इस साल इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है. इसकी बड़ी वजह यह है कि अमेरिका-ईरान में लड़ाई से कच्‍चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं. इससे मंहगाई बढ़ने का खतरा बन गया है. यह भी सोने-चांदी में गिरावट की बड़ी वज है।  इंटरनेशनल मार्केट में सोने-चांदी के भाव  अमेरिका में 5 जून को स्पॉट गोल्ड 3.2 फीसदी गिरकर 4,330.10 डॉलर प्रति औंस पर आ गया. वहीं सिल्वर 7.1 फीसदी गिरकर 68.63 डॉलर प्रति औंस पर आ गया. भारत में सोना 2 फीसदी और चांदी करीब 7 फीसदी टूटी है।   आपके शहर में सोने की कीमत      दिल्‍ली में 22 कैरेट सोने की कीमत 1,43,860 रुपये है.      चेन्‍नई में 22 कैरेट गोल्‍ड प्राइस 1,45,525 रुपये है.      मुंबई में 22 कैरेट सोने के दाम  ₹1,42,752 है.      बेंगलुरु में 22 कैरेट सोने का भाव 1,43,22 रुपये है.  17 जून को होगी फेड की बैठक  जानकारों का कहना है कि फेडरल रिजर्व इस साल दिंसंबर ट्रेडर्स का मानना है कि फेडरल रिजर्व इस साल दिसंबर तक इंटरेस्ट रेट 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ा सकता है.अक्‍टूबर में यह बढ़ोतरी 60 फीसदी बढ़ने की उम्‍मीद दिख रही है. हालांकि, जॉबा डेटा आने से पहले उम्‍मीद थी कि कम से कम इस साल तो इंटरेस्‍ट नहीं बढ़ सकता है. फेड के अधिकारियों की बैठक 16-17 जून को होने वाली है. इस बैठक की अध्यक्षता नए फेड चेयरमैन केविन वॉर्श करेंगे. इस बैठक के बाद फैसले का ऐलान किया जाएगा।  (नोट- सोने-चांदी में किसी भी तरह की खरीदारी से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.) 

साव ने दिए निर्देश : निर्माणाधीन सड़कों और पुलों की वजह से बरसात में लोगों को आवाजाही में न हो परेशानी

उप मुख्यमंत्री अरुण साव के बस्तर प्रवास का दूसरा दिन : मिशन अमृत, राष्ट्रीय राजमार्ग और तालाब सौंदर्यीकरण कार्यों का किया निरीक्षण साव ने दिए निर्देश : निर्माणाधीन सड़कों और पुलों की वजह से बरसात में लोगों को आवाजाही में न हो परेशानी  रायपुर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने अपने चार दिवसीय बस्तर प्रवास के दूसरे दिन आज कोण्डागांव में विभिन्न विकास एवं अधोसंरचना निर्माण कार्यों का निरीक्षण कर उनकी प्रगति की जानकारी की। उन्होंने विभागीय अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसियों को गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखते हुए सभी कार्यों को पूर्ण करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री साव ने कोंडागांव नगर पालिका में मिशन अमृत 2.0 के अंतर्गत निर्माणाधीन जल प्रदाय योजना के कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रगतिरत वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के कार्यों का जायजा लेकर परियोजना के तकनीकी पहलुओं की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को ठेकेदार के साथ बेहतर समन्वय बनाकर निर्माण कार्य की बाधाओं को दूर कर कार्य में तेजी लाने को कहा। उन्होंने गुणवत्ता और समय-सीमा का  विशेष ध्यान रखने को कहा। केंद्र सरकार की मिशन अमृत 2.0 योजना के तहत कोण्डागांव में पेयजल आपूर्ति के लिए 9 एमएलडी क्षमता का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जा रहा है। इस परियोजना के अंतर्गत कोण्डागांव से 25 किलोमीटर दूर कोसारटेडा बांध से पानी लाकर उसका शोधन कर नल कनेक्शनों के माध्यम से घर-घर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। लगभग 104 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना का 85 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। योजना के तहत दो ओवरहेड टैंकों का भी निर्माण किया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री ने कोपाबेड़ा में 3 करोड़ 61 लाख रुपये की लागत से किए जा रहे तालाब सौंदर्यीकरण एवं अन्य विकास कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने कोपाबेड़ा से शिव मंदिर तक निर्माणाधीन सड़क चौड़ीकरण कार्य का भी जायजा लिया। लगभग 2.9 किलोमीटर लंबी यह सड़क 4 करोड़ 61 लाख रुपये की लागत से निर्मित की जा रही है। उप मुख्यमंत्री साव ने निर्माणाधीन कोण्डागांव-नारायणपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-130डी के कार्यों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसी से सड़क के साथ ही इस मार्ग में बनने वाले पुल-पुलियों के निर्माण की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने इस प्रगतिरत सड़क के कारण बरसात में लोगों को आवाजाही में कोई समस्या न हो, इसका खास ध्यान रखने को कहा।  साव ने कोंडागांव के चिखलपुट्टी में नवनिर्मित बस स्टैंड का भी अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों को यहां यात्री सुविधाओं के विस्तार तथा बस स्टैंड के समुचित संचालन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। कलेक्टर श्रीमती नुपूर राशि पन्ना, नगर पालिका के अध्यक्ष नरपति पटेल और उपाध्यक्ष जसकेतू उसेंडी सहित लोक निर्माण, नगरीय प्रशासन एवं विकास तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी इस दौरान मौजूद थे।

अच्छे जनप्रतिनिधियों से बहती है विकास की धारा: मुख्यमंत्री

माफिया को चुनकर भेजोगे तो गरीबों का खून चूसेगा: मुख्यमंत्री सीएम योगी ने बलरामपुर में 300 करोड़ से अधिक की योजनाओं का किया लोकार्पण/शिलान्यास अच्छे जनप्रतिनिधियों से बहती है विकास की धारा: मुख्यमंत्री अब किसी गरीब का राशन नहीं खा सकता है माफिया: सीएम योगी सीएम बोले- बेटी या व्यापारी की सुरक्षा में सेंध लगाने वालों को छोड़ेंगे नहीं बलरामपुर,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विकास की प्रक्रिया तब आगे बढ़ती है, जब जनता अच्छे लोगों को चुनती है। माफिया को चुनकर भेजोगे तो गरीबों का खून चूसेगा। हमने माफिया को तबाह किया, उसकी जमीनों पर गरीबों के लिए मकान बना रहे हैं। डबल इंजन की सरकार डबल स्पीड के साथ काम कर रही है। किसान, व्यापारी, महिला को सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। आज हर जनपद विकास की मुख्यधारा से जुड़ा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बलरामपुर के मध्यनगर बिलोहा में शुक्रवार को 300 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया। इस दौरान मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण व अन्य शासकीय योजनाओं के लाभार्थियों को सम्मानित भी किया गया। सीएम ने कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की छात्राओं को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया। उन्होंने प्रगति के पथ पर अग्रसर बलरामपुर के विकास मॉडल पर जनता से सीधा संवाद भी किया। गोरखपुर से आकर करता था मदद मुख्यमंत्री ने कहा कि आज से नौ वर्ष पूर्व बलरामपुर में जब भी दुर्गा पूजा होती थी, पचपेड़वा, गैसड़ी, बलरामपुर, उतरौला आदि जगहों पर दंगे होते थे। मुझे गोरखपुर से आकर लोगों की मदद करनी पड़ती थी। आज उत्तर प्रदेश के 75 जनपद, 350 तहसीलें और 57 हजार से अधिक ग्राम पंचायतें दंगामुक्त हैं। विकास की प्रक्रिया के साथ प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। बलरामपुर के लोग 2017 से पहले कहीं जाते थे तो पहचान का संकट था। लोग माफिया से जोड़कर देखते थे। लेकिन, माफिया आज मिट्टी में मिल गए, कोई पहचान का संकट नहीं। आज बाहर जाएं और कहें कि आप यूपी से हैं तो आपको पूरा सम्मान मिलेगा। अब किसी गरीब का राशन नहीं खाता माफिया मुख्यमंत्री ने कहा कि याद करिए 2017 के पहले गरीब को राशन नहीं मिलता था। सपा के गुंडे राशन खा जाते थे। अब हर गरीब को फ्री में राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। गांवों में आय, निवास प्रमाण पत्र की भी सुविधा दी जा रही है। गरीब के उपचार के लिए आयुष्मान कार्ड उपलब्ध कराया जा रहा है। एक ओर गरीब कल्याणकारी योजनाएं और दूसरी ओर विकास कार्य बढ़ाए गए। सभी सरकारी योजनाओं का लाभ बिना भेदभाव दिया जा रहा है। पीएम मोदी के ‘सबका साथ-सबका विकास’ विजन के तहत काम हो रहा है। सुरक्षित माहौल में हो रहा निवेश मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर किसी ने बेटी या व्यापारी की सुरक्षा में सेंध लगाई तो फिर उसको छोड़ेंगे भी नहीं। यही सरकार की घोषित नीति है। प्रदेश के सुरक्षित माहौल में आज निवेश हो रहा है। बलरामपुर सौभाग्यशाली है कि चीनी मिल द्वारा प्लास्टिक जैसे एक मैटीरियल का निर्माण हो रहा है, जो उपयोग के बाद मिट्टी में मिल जाएगा। देश का सबसे युवा राज्य है यूपी मुख्यमंत्री ने कहा कि आज यूपी की पहचान सबसे ज्यादा निवेश, रोजगार, देश के सबसे युवा राज्य के रूप में हो रही है। यूपी को अयोध्या, काशी, मां पाटेश्वरी, मां शाकम्भरी, नैमिषारण्य, श्रावस्ती, जैन तीर्थंकरों की भूमि के रूप में नई पहचान मिल रही है। यह सम्मान आपको इसलिए मिल रहा है, क्योंकि आपने अच्छे जनप्रतिनिधियों को चुनकर भेजा है। आपने कैलाशनाथ शुक्ला, राम प्रताप वर्मा, पलटूराम को जिताया।  तुलसीपुर गैसड़ी बॉर्डर पर जनसभा की बड़ी वजह मुख्यमंत्री ने कहा कि आज मैं गैसड़ी और तुलसीपुर विधानसभा के बॉर्डर पर आया हूं। मैं 2007 में तुलसीपुर आया था, तब मांग हो रही थी कि मथुरा घाट में राप्ती नदी पर पुल बने। जैसे ही आपने कैलाश नाथ शुक्ला को तुलसीपुर से विधायक बनाया, मथुरा घाट पर भी पुल की स्वीकृति मिल चुकी है। तुलसीपुर और बलरामपुर में विकास हो रहा है। गैसड़ी में शैलेंद्र सिंह शैलू विधायक होते तो तेजी से विकास लाते। अच्छे लोग चुनेंगे तो अच्छे परिणाम आएंगे। जब आप परिवारवाद से ऊपर उठे और सत्ता परिवर्तन किया तो सरकार ने गरीब को कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा। विकास, सुरक्षा व सुशासन दिया। विश्वविद्यालय दिया, गरीब बच्चों को स्कॉलरशिप दी। बलरामपुर की उपलब्धियां और पर्यावरण संरक्षण का संदेश मुख्यमंत्री ने बलरामपुर की उपलब्धियों के साथ पर्यावरण संरक्षण पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस हमें प्रेरित करता है कि जल है तो कल है। अगर हम जलस्रोत गंदा करते हैं या वन की कटान करते हैं तो पर्यावरण की क्षति होती है। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की कीमत मानव को चुकानी होगी। आज तुलसीपुर को 300 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। नौ वर्ष पूर्व यह आकांक्षात्मक जनपद था। नीति आयोग के मानकों में देश के सबसे पिछड़े जनपदों में यह जिला था। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार ने डबल स्पीड से काम किया तो यह जनपद विकसित होने की ओर तेजी से बढ़ा है। सीएम योगी ने कहा कि एक समय बलरामपुर में बिजली, सड़क, सरयू राष्ट्रीय परियोजना, मेडिकल कालेज या हर घर नल योजना साकार होने के बारे में कोई सोच नहीं सकता था। किसी ने थारू संग्रहालय या मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय बनाने की बात नहीं सोची होगी। हमने मां पाटेश्वरी के नाम पर विश्वविद्यालय बनाया। अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर मेडिकल कालेज का निर्माण और नानाजी देशमुख की स्मृतियों को जीवंत बनाए रखते हुए थारू संग्रहालय बनाया। वनटांगिया गांवों के लोगों को आवासीय या जमीन के पट्टे देकर नागरिकता दी। आज थारू जनजाति के लोगों के पास अपना मकान और बच्चों के लिए स्कूल है।  सर्वाधिक नामांकन बलरामपुर में हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष सर्वाधिक नामांकन बलरामपुर में हुए हैं। यह शुभ लक्षण है। सीमावर्ती जनपद होने के नाते, विकास की प्रक्रिया के साथ तेजी से बढ़ रहा बलरामपुर विकास का मॉडल बन रहा है। बलरामपुर में विकास परियोजनाओं का शिलान्यास/लोकार्पण कुल परियोजनाएं: 126 लोकार्पण: 89 शिलान्यास: 37 कुल लागत: 392.25 करोड़ लोकार्पण की योजनाओं की लागत: 301.50 करोड़ शिलान्यास वाली योजनाओं की … Read more

सरकारी नौकरी के नियमों में बड़ा बदलाव, दो से अधिक बच्चों पर रोक; प्रोबेशन पूरा होते ही ऑटो परमानेंट होंगे कर्मचारी

भोपाल मध्यप्रदेश सरकार छह दशक बाद सरकारी नौकरी के लिए सेवा की सामान्य शर्तें बदलने जा रही है। 1961 की सेवा शर्तों में महिला अपराध में दोषी सिद्ध होने वाले व्यक्ति को सरकारी नौकरी के लिए अपात्र माना गया था, लेकिन अब नैतिक पतन को इसमें शामिल किया गया है यानी हत्या, भ्रष्टाचार सहित अन्य गंभीर अपराध में दोष सिद्ध होने पर भी पात्रता नहीं रहेगी। दरअसल, परिवीक्षा अवधि (प्रोबेशन) समाप्त करने को लेकर भी यह स्पष्ट कर दिया गया है कि निर्धारित अवधि समाप्त होने पर अधिकतम छह माह के भीतर निर्णय लेना होगा। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो यह मान लिया जाएगा कि कोई आपत्ति नहीं है और संबंधित को शासकीय सेवा में स्थायी कर दिया जाएगा। दावा किया जा रहा है कि एक से अधिक जीवित जीवनसाथी होने पर सरकारी नौकरी के लिए अपात्रता रहेगी। हालांकि, विशेष कारण होने पर इसमें सरकार छूट दे सकती है। स्वास्थ्य परीक्षण में उत्तीर्ण होना अनिवार्य रहेगा। यदि किसी को स्वास्थ्य परीक्षण में अयोग्य घोषित कर दिया तो कोई भी इसकी अनदेखी नहीं कर सकेगा। इसमें किसी को विवेकाधिकार से निर्णय का अधिकार भी नहीं होगा। दो बच्चे से अधिक होने पर सेवा समाप्ति का प्रावधान यथावत रखा गया है। 24 साल पुराना नियम फिर बरकरार मध्य प्रदेश सरकार अपने सिविल सेवा नियमों में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम 2026 का नया मसौदा जारी किया है। इस ड्राफ्ट में सबसे चर्चित बात यह है कि दो से अधिक बच्चों पर सरकारी नौकरी की पाबंदी को हटाया नहीं गया है। यह नियम मूल रूप से 2001 में तत्कालीन दिग्विजय सिंह सरकार ने लागू किया था। पिछले साल खुद जीएडी ने इस पाबंदी को हटाने का प्रस्ताव बनाया था। साथ ही, मुख्यमंत्री की सैद्धांतिक सहमति भी मिल गई थी। वहीं, नए ड्राफ्ट में सरकार उस फैसले से पलट गई है। दो बच्चों का नियम क्या कहता है? नए ड्राफ्ट के नियम पांच और छह के तहत पात्रता और अपात्रता की शर्तें तय की गई हैं। जिस उम्मीदवार की दो से अधिक जीवित संतानें हों और उनमें से किसी एक का जन्म 26 जनवरी 2001 को या उसके बाद हुआ हो, वह सरकारी नौकरी के लिए पात्र नहीं होगा। जुड़वां बच्चों के मामले में भी राहत नहीं है। यदि पहले से एक बच्चा हो और अगली डिलीवरी में दो या ज्यादा बच्चे हों, तो वह उम्मीदवार अपात्र माना जाएगा। प्रोबेशन में बड़ा बदलाव नए नियमों में प्रोबेशन (Probation – परिवीक्षा काल) को लेकर एक अहम प्रावधान जोड़ा गया है। यदि किसी कर्मचारी की प्रोबेशन अवधि खत्म होने के छह महीने के भीतर विभाग कोई निर्णय नहीं लेता, तो उसे स्वतः स्थायी मान लिया जाएगा। यानी विभागीय लापरवाही का फायदा अब कर्मचारी को मिलेगा। भर्ती दो माध्यमों से होगी। सीधी भर्ती और पदोन्नति (Promotion)। वयस्क होने पर नियुक्ति से पहले मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की सहमति ली जाएगी। सीधी भर्ती से आए कर्मचारियों को प्रोबेशन पर रखा जाएगा, जिसे जरूरत पड़ने पर अधिकतम एक साल तक बढ़ाया जा सकता है। नियमों में स्पष्टता के लिए नया प्रारूप तैयार प्रदेश में शासकीय सेवा के लिए सामान्य सेवा शर्तें 1961 में निर्धारित की गई थीं। बीच-बीच में कुछ संशोधन हुए मगर विभागों को असमंजस रहता था और वे सामान्य प्रशासन विभाग से मार्गदर्शन मांगते थे। इस प्रक्रिया में अनावश्यक समय लगता था। इसे देखते हुए सरकार ने नियम में स्पष्टता के लिए नए सिरे से नियम बनाने का निर्णय लिया। विभाग के अपर सचिव अजय कटेसरिया ने प्रारूप तैयार करके 15 जून तक सुझाव मांगे हैं ताकि इन्हें जल्द ही अंतिम रूप दे दिया जाए। अपात्रता, स्वास्थ्य परीक्षण और दो बच्चों का नियम एक से अधिक जीवित जीवनसाथी होने पर सरकारी नौकरी के लिए अपात्रता रहेगी। हालांकि, विशेष कारण होने पर इसमें सरकार छूट दे सकती है। स्वास्थ्य परीक्षण में उत्तीर्ण होना अनिवार्य रहेगा। यदि किसी को स्वास्थ्य परीक्षण में अयोग्य घोषित कर दिया तो कोई भी इसकी अनदेखी नहीं कर सकेगा। इसमें किसी को विवेकाधिकार से निर्णय का अधिकार भी नहीं होगा। दो बच्चे से अधिक होने पर सेवा समाप्ति का प्रविधान यथावत रखा गया है। वरिष्ठता और पदोन्नति का नया विन्यास वहीं, वरिष्ठता का निर्धारण चयन सूची में क्रम के अनुसार होगा न कि पदभार ग्रहण करने के आधार पर यानी जुलाई में यदि चयन होता है और कुछ अगस्त तो कुछ सितंबर में पदभार ग्रहण करते हैं तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। वरिष्ठता सह उपयुक्तता के आधार पर पदोन्नति के लिए उपयुक्त पाए गए व्यक्तियों की वरिष्ठता वही होगी जैसे उस संवर्ग में है, जिससे पदोन्नति की जाती है। परिवीक्षा अवधि को लेकर यह निर्धारित किया है कि जो अवधि शासन द्वारा निर्धारित की गई है, उसमें स्थायी करने या न करने को लेकर निर्णय लेना ही होगा। सीनियरिटी का नया फॉर्मूला एक ही साल में सीधी भर्ती, अनुकंपा नियुक्ति और पदोन्नति से लोग आते हैं तो सीनियरिटी का क्रम इस तरह होगा। पहले सीधी भर्ती वाले, फिर अनुकंपा नियुक्ति वाले और आखिर में पदोन्नति वाले। वहीं, यदि तीनों का नियुक्ति आदेश एक ही तारीख को निकले, तो प्रमोटेड कर्मचारी सबसे सीनियर माना जाएगा। हर साल 01 जनवरी की स्थिति में 31 मार्च तक नई ग्रेडेशन लिस्ट (Gradation List – वरिष्ठता सूची) अपडेट की जाएगी। इन 4 स्थितियों में भी नौकरी नहीं मिलेगी नए ड्राफ्ट में चार और कारण जोड़े गए हैं जिनमें उम्मीदवार अयोग्य माना जाएगा। पहला, एक से अधिक जीवित जीवनसाथी होने पर (विशेष मामलों में छूट संभव)। दूसरा, शारीरिक या मानसिक रूप से अनफिट पाए जाने पर। तीसरा, नैतिक अधोपतन या चारित्रिक मामलों में दोषी होने पर। चौथा, केंद्र, राज्य या किसी स्थानीय निकाय से पहले बर्खास्त हो चुके कर्मचारी भी अपात्र होंगे। इसके अलावा ड्राफ्ट में पांच परिस्थितियों में सेवा समाप्त करने का भी प्रावधान है: उपयुक्त शासकीय सेवक न पाए जाने पर, जरूरी योग्यता या दक्षता न होने पर, असंतोषजनक प्रदर्शन पर, विभागीय परीक्षा पास न करने पर और नियुक्ति के समय झूठी जानकारी देने पर। FIR वाले नियम पर उठा सवाल ड्राफ्ट के एक नियम पर विवाद खड़ा हो गया है। प्रावधान है कि किसी उम्मीदवार के खिलाफ आपराधिक मामला … Read more

धमतरी का महा-परिवर्तन, 60 करोड़ रुपए की ऐतिहासिक खरीदी के साथ तैयार होगा आधुनिक लॉजिस्टिक्स हब

धमतरी का 'महा-परिवर्तन': 60 करोड़ रुपए की रिकॉर्ड खरीदी और 30 हजार मीट्रिक टन का नया 'लॉजिस्टिक्स हब' ​अब नहीं भटकेगा किसान, ब्रॉडगेज रेल और आधुनिक गोदामों से बदलेगी धमतरी की तकदीर ​धान का कटोरा अब बनेगा 'वेयरहाउसिंग हब': धमतरी की नई आर्थिक उड़ान रायपुर     ​​छत्तीसगढ़ का कृषि प्रधान जिला धमतरी आज विकास और आत्मनिर्भरता के एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है। कभी रबी फसलों के रिकॉर्ड उपार्जन के बाद भंडारण की कमी से जूझने वाला यह जिला, आज अपनी मजबूत इच्छाशक्ति और प्रशासनिक दूरदर्शिता के कारण प्रदेश के एक प्रमुख 'वेयरहाउसिंग एवं कृषि लॉजिस्टिक्स हब' के रूप में उभर रहा है।       ​राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (NCCF) और छत्तीसगढ़ राज्य भंडारण गृह निगम (SWC) के संयुक्त प्रयासों से जिले में 30 हजार मीट्रिक टन की अतिरिक्त वैज्ञानिक भंडारण क्षमता विकसित की जा रही है, जो धमतरी की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि परिदृश्य को पूरी तरह बदलने के लिए तैयार है।     ​अतीत की चुनौती से लिया सबक               ​विगत वर्षों में धमतरी ने रबी फसलों, विशेषकर चने के रिकॉर्ड उत्पादन और उपार्जन का गवाह बना। लेकिन इस खुशी के साथ एक बड़ी चुनौती भी सामने आई।जिले में पर्याप्त भंडारण क्षमता का न होना। मजबूरी में उपज को दूसरे जिलों के गोदामों में भेजना पड़ा, जिससे न केवल परिवहन का खर्च बढ़ा, बल्कि प्रशासनिक और सहकारी संस्थाओं पर भी भारी दबाव पड़ा।     ​इसी चुनौती को अवसर में बदलते हुए धमतरी प्रशासन ने जिले में ही स्थायी और आधुनिक भंडारण अधोसंरचना विकसित करने की एक व्यापक कार्ययोजना पर काम शुरू किया। ​'विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना' का मिला संबल      ​केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी “विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना” धमतरी के लिए वरदान साबित हो रही है। इसके तहत जिले की चार प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) का चयन किया गया है। जिसमे ​अंवरी,​कोसमर्रा,पोटियाडीह-आमदी और ​कोलियारी शामिल है। ​इन चारों समितियों में 2,500-2,500 मीट्रिक टन क्षमता के आधुनिक गोदामों का निर्माण युद्ध स्तर पर जारी है। इनके पूरा होते ही ग्रामीण स्तर पर ही 10 हजार मीट्रिक टन की अतिरिक्त भंडारण सुविधा उपलब्ध हो जाएगी, जिससे स्थानीय किसानों को अपनी उपज सुरक्षित रखने के लिए दूर नहीं भटकना पड़ेगा। ​इसके साथ ही, राज्य भंडारण गृह निगम (SWC) द्वारा धमतरी और कुरूद में 10-10 हजार मीट्रिक टन क्षमता के दो बड़े गोदाम विकसित किए जा रहे हैं। केंद्रीय भंडारण निगम (CWC) के पास पहले से उपलब्ध 1 लाख मीट्रिक टन से अधिक की क्षमता के साथ अब धमतरी का नेटवर्क बेहद मजबूत होने जा रहा है। रिकॉर्ड खरीदी और आर्थिक समृद्धि(रबी विपणन वर्ष 2026)        ​भंडारण क्षमता में यह विस्तार हवा में नहीं, बल्कि जमीन पर बढ़ती कृषि समृद्धि को देखकर किया जा रहा है। रबी विपणन वर्ष 2026 में जिले के 9,103 किसानों से 1 लाख 16 हजार 162 क्विंटल चने की रिकॉर्ड खरीदी की गई है, जिसके एवज में 60.54 करोड़ रुपये सीधे किसानों के खातों में भुगतान करने की प्रक्रिया जारी है। चने के साथ-साथ सरसों और मसूर का भी सफल उपार्जन किया गया है। ​राइस मिलर्स और व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार     ​धान मिलिंग के क्षेत्र में धमतरी हमेशा से अग्रणी रहा है, लेकिन अक्सर तैयार चावल और धान के सुरक्षित रख-रखाव की समस्या आती थी। इस नई क्षमता विस्तार से ​मिलिंग गतिविधियों में तेजी आएगी,​भंडारण का दबाव कम होगा और ​परिवहन और लॉजिस्टिक्स की लागत में भारी कमी आएगी। ​इसके साथ ही, धमतरी में ब्रॉडगेज रेल लाइन पर जल्द शुरू होने वाला रैक संचालन जिले के विकास में चार चांद लगाने वाला है। रेल मार्ग जुड़ने से यहां का चावल और कृषि उत्पाद देश के बड़े बाजारों तक बेहद कम लागत में पहुंच सकेंगे। ​     धमतरी में विकसित हो रही वेयरहाउसिंग अधोसंरचना और जल्द प्रारंभ होने वाली ब्रॉडगेज रेल सेवाएं जिले को प्रदेश के प्रमुख लॉजिस्टिक्स एवं व्यापारिक केंद्र के रूप में स्थापित करेंगी। यह पहल रोजगार सृजन, व्यापार विस्तार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने में मील का पत्थर सिद्ध होगी। भंडारण क्षमता बढ़ने से कृषि उपज का बेहतर प्रबंधन, परिवहन लागत में कमी और विपणन व्यवस्था में सुधार होगा। यह नई अधोसंरचना किसानों, सहकारी संस्थाओं, व्यापारियों और उद्योगों के लिए दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देगी। ​     ​धमतरी की यह सफलता की कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि कैसे सही समय पर सही बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का निर्माण करके एक पूरे क्षेत्र की तकदीर बदली जा सकती है। आने वाले वर्षों में, भंडारण की यह सुदृढ़ व्यवस्था और रेल कनेक्टिविटी न केवल किसानों की आय में वृद्धि करेगी, बल्कि धमतरी को छत्तीसगढ़ के नक्शे पर एक बड़े 'कृषि-व्यापार और लॉजिस्टिक्स हब' के रूप में नई पहचान दिलाएगी।

आम की छांव में सजी मुख्यमंत्री की चौपाल, खाट पर बैठकर सुनीं ग्रामीणों की समस्याएं; मौके पर दिए समाधान

आम की छांव में मुख्यमंत्री की चौपाल: खाट पर बैठे, ग्रामीणों की सुनी बात, मौके पर दिए समाधान निमधा में नर्सिंग कॉलेज, मिनी स्टेडियम और मंगल भवन की घोषणा लापरवाह अधिकारियों को सख्त चेतावनी : महिलाओं को दिया ‘करोड़पति दीदी’ बनने का मंत्र स्व-सहायता समूहों की सफलता को मिली नई पहचान, मुख्यमंत्री ने किया ‘आजीविका गाथा’ कॉफी टेबल बुक का विमोचन रायपुर  सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आज मरवाही विकासखंड के ग्राम निमधा में एक अनूठा और आत्मीय जनसंवाद देखने को मिला। मुख्यमंत्री विष्णुदेव  साय गांव के बीच आम के पेड़ की छांव में खाट पर बैठकर ग्रामीणों से रूबरू हुए, उनकी समस्याएं सुनीं और शासन की योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति का प्रत्यक्ष फीडबैक लिया। उन्होंने ग्रामीणों से बिजली, पानी, राशन, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास जैसी मूलभूत सुविधाओं के संबंध में विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा 1 मई से 10 जून तक पूरे प्रदेश में सुशासन तिहार का आयोजन किया जा रहा है, जिसके माध्यम से शासन स्वयं गांवों तक पहुंचकर जनता की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित कर रहा है। उन्होंने कहा कि जिन समस्याओं का तत्काल निराकरण संभव है, उनका मौके पर ही समाधान किया जा रहा है, जबकि अन्य मामलों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा। जनचौपाल के दौरान ग्रामीणों और मरवाही विधायक प्रणव कुमार मरपच्ची ने जिले में नर्सिंग कॉलेज, ग्राम निमधा में मिनी स्टेडियम तथा सर्वसमाज के लिए विशाल मंगल भवन की मांग रखी। मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों की भावनाओं का सम्मान करते हुए तीनों मांगों को तत्काल स्वीकृति प्रदान करते हुए उनकी घोषणा की। ग्रामीणों द्वारा बिजली आपूर्ति संबंधी समस्याएं उठाए जाने पर मुख्यमंत्री ने मौके पर ही अधिकारियों से जानकारी ली और स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए आवश्यक कदम शीघ्र उठाए जाएंगे। जनसंवाद के दौरान राजस्व विभाग से जुड़ी शिकायत सामने आने पर मुख्यमंत्री ने संबंधित राजस्व निरीक्षकों को कड़ी चेतावनी देते हुए स्पष्ट कहा कि जनता की समस्याओं का समय पर निराकरण करें, अन्यथा कठोर कार्रवाई के लिए तैयार रहें। मुख्यमंत्री के इस स्पष्ट संदेश से सुशासन और जवाबदेही के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता एक बार फिर सामने आई। मुख्यमंत्री ने स्व-सहायता समूहों की महिलाओं और लखपति दीदियों से संवाद करते हुए उन्हें आर्थिक प्रगति की नई ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि अब लक्ष्य केवल लखपति बनना नहीं, बल्कि करोड़पति दीदी बनना होना चाहिए। महिलाओं ने उन्हें बताया कि महतारी वंदन योजना से प्राप्त होने वाली राशि उनके परिवार, बच्चों की शिक्षा और घरेलू जरूरतों में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में महतारी वंदन योजना की 28वीं किस्त के रूप में प्रदेश की लगभग 70 लाख महिलाओं के खातों में राशि अंतरित की गई है, जिसका लाभ ग्राम निमधा सहित पूरे जिले की महिलाओं को मिला है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार द्वारा 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति दी गई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय सुविधाओं का व्यापक विस्तार हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा की कि प्रदेश में शीघ्र ही सीएम हेल्पलाइन प्रारंभ की जाएगी, जिसके माध्यम से नागरिक टोल फ्री नंबर, ईमेल और व्हाट्सएप के जरिए अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। शिकायतों के त्वरित और समयबद्ध निराकरण के लिए विशेष व्यवस्था विकसित की जा रही है। जनचौपाल के दौरान राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों ने मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत किया। महिलाओं ने विष्णु भोग चावल, ब्लैक राइस, शहद, पापड़ और लड्डू जैसे स्थानीय उत्पादों की आकर्षक टोकरी मुख्यमंत्री को भेंट की। मुख्यमंत्री ने महिलाओं की उद्यमशीलता और आत्मनिर्भरता की सराहना करते हुए कहा कि स्व-सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का सबसे प्रभावी माध्यम बन रहे हैं। ग्रामीण परिवेश में आयोजित इस चौपाल में मुख्यमंत्री ने सरई के दोना-पत्तल में परोसे गए स्थानीय व्यंजनों – जामुन, कोईलार भाजी, बेल का शरबत, आम की चटनी और आमपना का स्वाद भी लिया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जिले की स्व-सहायता समूहों की महिलाओं की प्रेरणादायक सफलता कहानियों पर आधारित ‘आजीविका गाथा’ कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक ग्रामीण महिलाओं के संघर्ष, आत्मविश्वास, परिश्रम और सफलता का जीवंत दस्तावेज है, जो हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भरता और उद्यमिता की दिशा में प्रेरित करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका यह दौरा केवल योजनाओं की समीक्षा नहीं, बल्कि लोगों के बीच बैठकर उनकी वास्तविक जरूरतों और अपेक्षाओं को समझने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि सुशासन का वास्तविक उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाना है और राज्य सरकार इसी संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रही है। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष सुसमीरा पैकरा, उपाध्यक्ष राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह, नगर पालिका परिषद गौरेला के अध्यक्ष मुकेश दुबे, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल, आईजी रामगोपाल गर्ग, कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन, जिला पंचायत सीईओ मुकेश रावटे सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।