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बस्तर में विकास और विश्वास की नई इबारत, अमित शाह से मिले CM विष्णुदेव साय

बस्तर में विकास और जनविश्वास का मजबूत हो रहा है आधार: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रायपुर /नई दिल्ली  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर बस्तर सहित राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों में हो रहे विकास कार्यों की जानकारी दी। इस दौरान उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल एवं संचार सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ शासन की योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। सेवा केंद्रों एवं जनसुविधा केंद्रों के माध्यम से लोगों को शासकीय सेवाएं उनके घर के निकट उपलब्ध कराई जा रही हैं। साय ने कहा कि बस्तर आज विकास और पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। चित्रकोट, तीरथगढ़ और कांगेर घाटी जैसे पर्यटन स्थलों में सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि विकास एवं जनकल्याण के प्रयासों से क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन दिखाई दे रहा है तथा शासन के प्रति लोगों का विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बस्तर में हो रहे विकास कार्यों और जनकल्याणकारी प्रयासों की सराहना करते हुए राज्य को केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।

टीही टनल परियोजना में अभी बाकी है काम, 60 मीटर हिस्से का निर्माण शेष

इंदौर  इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन प्रोजेक्ट के तहत टीही के आगे टनल बन रही है। टनल के एक हिस्से (टीही एंड, पी-1) पर 60 मीटर का काम बचा है। सारी मशीनरी और लेबर यहीं लगी हुई है। इसे रेलवे 15 दिन में पूरा कर लेगा। इसके बाद तीन किमी लंबी टनल की लाइनिंग का काम पूरा हो जाएगा। इसी टनल के बीच के हिस्से में कट एंड कवर था, उसे रेलवे ने पूरा कर लिया है, अब यहां लिफ्ट और सीढ़ियों का काम चल रहा है। टनल के सबसे आखिरी हिस्से (पीथमपुर एंड, पी-2) में काम पूरा कर ट्रैक बिछाने के लिए यह हिस्सा दे दिया गया है। कंस्ट्रक्शन कंपनी से जुड़े लोगों ने कहा– टनल का कुल 261 मीटर का काम बचा था, इसमें से 201 मीटर काम कर लिया है। बचा काम 15 दिन में पूरा कर लिया जाएगा। रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं टनल का लाइनिंग काम 8 जुलाई तक पूरा करने का लक्ष्य है। दो पारियों में 12-12 घंटे की शिफ्ट में 300 मजदूर काम कर रहे हैं। ऐसे तैयार हो रहा प्रोजेक्ट     शिलान्यास: 18 फरवरी 2008     लागत वर्तमान में: 1680 करोड़ से ज्यादा।     कुल 200.97 किमी लंबी लाइन।     वर्तमान स्थिति: टीही तक का काम पूरा हो गया है। दूसरी ओर दाहोद से कटवाड़ा और आगे कुछ हिस्से में काम चल रहा है।     देरी का खामियाजा: 678.56 करोड़ रुपए लागत थी। प्रोजेक्ट के हर साल देरी के साथ लागत भी बढ़ती जा रही है। टाइमलाइन बनाकर काम कर रहे हर दिन की टाइमलाइन बनाकर काम कर रहे हैं। टीही एंड पर जिस हिस्से में टनल का काम चल रहा है, उससे 1208 मीटर आगे तक रेलवे ने ट्रैक बिछा लिया है। यहां बैलास्ट लेस ट्रैक बिछाया जा रहा है, जो आम ट्रैक से अलग और खास होता है। करीब 1800 मीटर से ज्यादा हिस्से में ट्रैक बिछाने का काम बचा है। रेलवे का कहना है कि हर दिन 50 से ज्यादा मीटर हिस्से में ट्रैक का फाउंडेशन तैयार किया जा रहा है। टनल के अंदर केबल-ट्रे, सीसीटीवी, ओएचई ब्रैकेट लगाने का काम भी तेजी से चल रहा है। फरवरी 2026 तक काम पूरा होना था रेलवे ने पहले टनल का काम पूरा करने का लक्ष्य फरवरी-2026 रखा था। अब संभावना है कि सितंबर-अक्टूबर तक धार तक ट्रेन चलाई जा सकती है। हालांकि रेलवे का कहना है कि टनल का काम काफी चुनौतीपूर्ण है, इसलिए समय लग रहा है। दो-तीन महीने का समय और लग सकता है। बारिश के कारण फिर काम की गति धीमी हो सकती है। टनल की वजह से ही अटका है काम रेलवे एक्सपर्ट नागेश नामजोशी ने कहा- 2017-18 से टनल का काम चल रहा है। कोरोना के बाद कॉन्ट्रैक्ट भी शॉर्ट टर्मिनेट हुए। फिर नए सिरे से कॉन्ट्रैक्ट होकर काम शुरू हुआ। टनल की वजह से काफी समय लग गया। रेलवे को चाहिए कि अब तेजी से काम कर जल्द से जल्द पूरा करें। उन्होंने यह भी कहा- 2007-08 में इंदौर-दाहोद रेल प्रोजेक्ट तैयार हुआ और इसका शिलान्यास हुआ तब मूल प्रोजेक्ट में टीही के आगे टनल नहीं थी। यह प्रोजेक्ट हमारे लिए महत्वपूर्ण     इंदौर-दाहोद प्रोजेक्ट हमारे लिए सबसे अहम है। टीही टनल का काम जल्द पूरा हो और धार तक ट्रेन का संचालन शुरू हो, इसके लिए हम टाइम लाइन बनाकर काम काम कर रहे हैं। हर दिन की मॉनिटरिंग की जा रही है। टनल में हमने सारे संसाधन लगाए हैं, 300 से ज्यादा मजदूर 24 घंटे काम कर रहे हैं। – विनीत अभिषेक, सीपीआरओ, पश्चिम रेलवे

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मुख्य सचिव को दिए निर्देश

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राज्य में जनसुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बहुमंजिला आवासीय परिसरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, कोचिंग संस्थानों, होटलों तथा अन्य सार्वजनिक उपयोग के भवनों की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा और विशेष ऑडिट के निर्देश दिए हैं। हाल के दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों में हुई अग्नि दुर्घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा है कि ऐसी घटनाओं से सबक लेकर सुरक्षा मानकों के कड़ाई से पालन को सुनिश्चित करना आवश्यक है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नागरिकों, विद्यार्थियों और आमजन की सुरक्षा से जुड़ा कोई भी विषय शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले संस्थानों एवं प्रतिष्ठानों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य सचिव विकास शील ने राज्य के सभी संभागीय आयुक्तों, जिला कलेक्टरों, नगर निगम आयुक्तों, मुख्य नगरपालिका अधिकारियों, अग्निशमन विभाग तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों को विशेष निरीक्षण अभियान संचालित करने के निर्देश जारी किए हैं। इस अभियान के अंतर्गत बहुमंजिला आवासीय भवनों, कोचिंग सेंटरों, ट्यूशन कक्षाओं, होटल, लॉज, मॉल, व्यावसायिक परिसरों एवं अन्य सार्वजनिक भवनों की सुरक्षा व्यवस्थाओं का विस्तृत परीक्षण किया जाएगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विद्यार्थियों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों तथा आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना शासन की जिम्मेदारी है। इसलिए सभी संबंधित संस्थानों में निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए। निरीक्षण के दौरान अग्निशमन यंत्रों एवं फायर सेफ्टी उपकरणों की उपलब्धता, वैध फायर एनओसी, आपातकालीन निकास मार्गों की व्यवस्था, भवन की संरचनात्मक सुरक्षा, विद्युत वायरिंग एवं उपकरणों की स्थिति, सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था, प्राथमिक उपचार सुविधा, पेयजल एवं स्वच्छता व्यवस्था सहित अन्य आवश्यक सुरक्षा मानकों की जांच की जाएगी। साथ ही भवनों की क्षमता के अनुरूप लोगों की संख्या, पार्किंग व्यवस्था तथा आपदा की स्थिति में निकासी एवं राहत प्रबंधन की तैयारियों का भी परीक्षण किया जाएगा। मुख्यमंत्री साय ने निर्देश दिए हैं कि निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों के संबंध में संबंधित संस्थानों को आवश्यक सुधार हेतु निर्देश दिए जाएं तथा गंभीर अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

India-US ट्रेड डील को लेकर बड़ी प्रगति, 2030 तक 500 अरब डॉलर व्यापार का टारगेट

नई दिल्ली भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक और रणनीतिक संबंधों में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है. दोनों देश एक बेहद ऐतिहासिक और व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं. अमेरिकी विदेश मंत्रालय की वरिष्ठ अधिकारी बेथनी पोलोस मॉरिसन ने कैपिटल हिल में आयोजित 'फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज' के एक कार्यक्रम में इसकी घोषणा की है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस महत्वाकांक्षी समझौते का मुख्य उद्देश्य साल 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर के पार पहुंचाना है. इस रणनीति को 'मिशन 500' का नाम दिया गया है।  परिणाम-उन्मुख संबंधों पर जोर अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में दोनों देश अब केवल बैठकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका ध्यान सीधे परिणामों पर केंद्रित है. फरवरी 2026 में व्यापार समझौते की दिशा में की गई आधिकारिक घोषणा के बाद से दोनों देशों की टीमों ने इस पर दिन-रात काम किया है. इस समझौते के लागू होने से अमेरिकी निर्यातकों के लिए भारत का 140 करोड़ (1.4 बिलियन) उपभोक्ताओं वाला विशाल बाजार पूरी तरह खुल जाएगा, जो दोनों देशों के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी होगा।  क्या है समझौते की प्रमुख बातें? 500 अरब डॉलर की भारतीय खरीद: इस समझौते के तहत भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर मूल्य के ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके पुर्जे, कीमती धातुएं, कोकिंग कोल और अत्याधुनिक तकनीकी उत्पाद खरीदने की योजना बना रहा है।  ऊर्जा साझेदारी में उछाल: दोनों देशों के बीच हाइड्रोकार्बन व्यापार 2025 से तेजी से बढ़ा है और यह 14.4 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है. साथ ही नए 'शांति अधिनियम' के तहत दोनों देश नागरिक परमाणु सहयोग बढ़ाने की राह तलाश रहे हैं।  रिकॉर्ड भारतीय निवेश: आर्थिक मोर्चे पर भारतीय कंपनियां भी अमेरिका में भारी निवेश कर रही हैं. हाल ही में हुए 'SelectUSA इन्वेस्टमेंट समिट' में भारतीय कंपनियों द्वारा 20 अरब डॉलर के नए निवेश की प्रतिबद्धताएं जताई गईं, जो अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी निवेश घोषणाओं में से एक है।  टैरिफ नीति में बदलाव के बाद नए सिरे से बातचीत हाल ही में अमेरिकी टैरिफ नीतियों में आए बड़े बदलावों और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद इस समझौते के ढांचे को फिर से समायोजित किया जा रहा है. इसी सिलसिले में अमेरिकी मुख्य व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमीसन ग्रीर नई दिल्ली के दौरे पर हैं, जहां वे भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ इस समझौते के आखिरी हिस्सों को सुलझाने के लिए गहन बातचीत कर रहे हैं. दोनों पक्षों की कोशिश है कि 24 जुलाई 2026 से पहले (जब अमेरिका का अस्थायी 10% टैरिफ समाप्त हो रहा है) एक अंतरिम व्यापार समझौते को लागू कर दिया जाए. भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, दोनों देश अगले महीने यानी जुलाई के मध्य तक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को पूरी तरह से लागू करने की स्थिति में होंगे।  व्यापार संतुलन और शिक्षा का योगदान वित्तीय वर्ष 2025-26 में अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार रहा है. इस दौरान भारत का अमेरिका को निर्यात मामूली बढ़त के साथ 87.3 अरब डॉलर रहा, जबकि अमेरिका से भारत का आयात 15.95 प्रतिशत बढ़कर 52.9 अरब डॉलर पर पहुंच गया. इस वजह से भारत का व्यापार अधिशेष जो पहले 40.89 अरब डॉलर था, वह घटकर 34.4 अरब डॉलर रह गया है. व्यापार के साथ-साथ शिक्षा क्षेत्र भी इस रिश्ते को मजबूती दे रहा है; वर्तमान में 3,30,000 से अधिक भारतीय छात्र अमेरिकी शिक्षण संस्थानों में पढ़ रहे हैं, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सालाना 14 अरब डॉलर का योगदान देते हैं। 

कपूरथला में आज 25 जून से 24 जुलाई तक चलेगा विशेष पुनरीक्षण अभियान, हर घर भरेंगे गणना प्रपत्र

चंडीगढ़ पंजाब राज्य में आज 25 जून से विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत घर-घर गणना शुरू होगी। यह कार्य 24 जुलाई तक चलेगा। सूबे में अब तक 86.02 फीसदी मतदाताओं की मैपिंग पूरी हो चुकी है। पंजाब की मुख्य चुनाव अधिकारी अनिंदिता मित्रा नेमान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से बैठक की। इस दौरान बीएलओ द्वारा घर-घर दौरे के समय गणना प्रपत्रों के वितरण और संग्रहण की जानकारी साझा की गई। भारत निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार यह गणना होगी। इसमें 24,453 बीएलओ राज्य के 2 करोड़ 14 लाख 61 हजार 43 मतदाताओं तक पहुंचेंगे। मतदान केंद्रों का युक्तिकरण 24 जुलाई तक पूरा किया जाएगा। मतदाता सूचियों का प्रारूप प्रकाशन 3 अगस्त 2026 को होगा।  25 जून से 24 जुलाई तक घर-घर जाएंगे BLO उपायुक्त ने बताया कि 25 जून से 24 जुलाई तक बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाता गणना प्रपत्र (Enumeration Forms) वितरित करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक BLO अभियान के दौरान हर परिवार के पास तीन बार जाएगा और पात्र मतदाताओं से हस्ताक्षरित गणना प्रपत्र प्राप्त करेगा, ताकि मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाया जा सके। BLO को दिया जा चुका है विशेष प्रशिक्षण आकाश बंसल ने बताया कि संबंधित विधानसभा क्षेत्रों में नियुक्त सभी BLO को विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के लिए पहले ही प्रशिक्षण दिया जा चुका है। जिला चुनाव अधिकारी एवं उपायुक्त दलविंदरजीत सिंह ने  बताया कि अमृतसर जिले में आने वाले 11 विधानसभा क्षेत्रों में एसआईआर-2026 को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं। उन्होंने कहा कि जिले में कुल 19,73,071 मतदाता हैं, जिनमें से 17,49,155 मतदाताओं (88.65 प्रतिशत) की मैपिंग का कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि चुनावी अमले की तैयारियों और कार्यान्वयन प्रक्रिया की समीक्षा कर ली गयी है। सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यक प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित न रहे और किसी अपात्र व्यक्ति का नाम सूची में दर्ज न हो। जिला चुनाव अधिकारी ने कहा कि मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने के लिए निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी प्रक्रिया संपन्न की जाएगी। इसके साथ ही लोगों को जागरूक करने के लिए व्यापक प्रचार अभियान भी चलाया जा रहा है। उन्होंने जिले के सभी नागरिकों से अपील की कि घर-घर गणना के दौरान बीएलओ को पूरा सहयोग दें और सही एवं अद्यतन जानकारी उपलब्ध करायें, ताकि पारदर्शी और सटीक मतदाता सूची तैयार की जा सके।प्रशासन के अनुसार, यह विशेष पुनरीक्षण अभियान आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान BLO, राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बूथ लेवल एजेंट (BLA) के साथ समन्वय स्थापित कर पूरे महीने मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्य करेंगे। 3 अगस्त को प्रकाशित होगी प्रारूप मतदाता सूची जिला निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, संशोधित प्रारूप मतदाता सूची (Draft Electoral Roll) का प्रकाशन 3 अगस्त को किया जाएगा। इसके बाद निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन से संबंधित दावे और आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी। पारदर्शी और त्रुटिरहित मतदाता सूची पर जोर उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान के दौरान निर्वाचन आयोग के सभी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाए। उन्होंने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल करना और सूची को पूरी तरह सटीक एवं अद्यतन बनाना है।     25 जून से 24 जुलाई तक चलेगा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान।     BLO घर-घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित और एकत्र करेंगे।     प्रत्येक परिवार के पास तीन बार जाएंगे बूथ लेवल अधिकारी।     सभी BLO को पहले ही विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है।     राजनीतिक दलों के BLA भी अभियान में सहयोग करेंगे।     3 अगस्त को प्रकाशित होगी प्रारूप मतदाता सूची।     दावे और आपत्तियां निर्वाचन आयोग के तय कार्यक्रम के अनुसार स्वीकार की जाएंगी।  

NDA की ताकत बढ़ने के संकेत, 5 सांसद दे सकते हैं साथ; जानिए कितना बदलेगा आंकड़ा

नई दिल्ली मॉनसून सत्र से पहले ही एनडीए का संख्याबल लोकसभा में बढ़ने के आसार हैं। अटकलें हैं कि एक और विपक्षी दल के सांसद टूटकर एनडीए में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। खास बात है कि हाल ही में तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना उद्धव बालासाहब ठाकरे के सदस्यों ने एनडीए को समर्थन देने का ऐलान किया है। क्या टूटेगी शरद पवार की पार्टी? मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि वरिष्ठ नेता शरद पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी एसपी के सांसदों में टूट हो सकती है। कहा जा रहा है कि 5 पार्टी सांसद एनडीए को समर्थन देने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, अब तक साफ नहीं हो सका है कि ये सांसद कौन हैं। कहा जा रहा है कि महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने हाल ही में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इसके बाद एनसीपी में टूट की अटकलें होने जा रही थीं। खबरें ये भी थीं कि शिवसेना यूबीटी में टूट के बाद शरद पवार ने सांसदों से संपर्क साधा था। हालांकि, पार्टी ने इसका औपचारिक ऐलान नहीं किया है। नंबर गेम समझें टीएमसी के 20 सांसदों ने अलग गुट बनाकर नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में विलय करने का ऐलान कर दिया था। इस संबंध में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को समर्थन पत्र भी सौंपा जा चुका है। वहीं, सोमवार को ही शिवसेना यूबीटी के 6 सांसदों ने बगावत कर एनडीए को समर्थन दे दिया है। ये सभी सांसद महाराष्ट्र सीएम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए थे। फिलहाल, एनसीपी एसपी के पास 8 लोकसभा सांसद हैं और अगर 5 टूटते हैं, तो एनडीए को फायदा हो सकता है। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है। लोकसभा में कुल सीटें 543 हैं और दो तिहाई के लिए 362 सीटों की जरूरत है। अब जब निचले सदन में नौगांव, बशीरहाट और शिलॉन्ग के रूप में 3 सीटें खाली हैं, तो यह संख्या घटकर 360 पर आ जाती है। अप्रैल में एनडीए कमजोर समर्थन के चलते परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन बिल पास नहीं करा पाया था। फिलहाल, एनडीए के पास 293 सदस्य हैं। अटकलें ये भी हैं कि 37 लोकसभा सांसदों वाली समाजवादी पार्टी में भी टूट हो सकती है। भाजपा के कई नेता ऐसा दावा कर रहे हैं। हालांकि, अखिलेश यादव की अगुवाई वाली पार्टी ने इससे इनकार कर दिया है। गणित NCPI के 20 सांसदों, शिवसेना के 6 सांसदों के समर्थन के बाद एनडीए 319 सीटों पर पहुंच जाएगा। हालांकि, सत्तारूढ़ गठबंधन दो तिहाई बहुमत के आंकड़े से खासा दूर है। अगर एनसीपी एसपी के 5 और सांसद समर्थन देते हैं, तो संख्या 324 पर पहुंच जाएगी। अगर द्रमुक मतदान से दूर रहती है, तो सदन में एनडीए को लाभ हो सकता है।  

China-Bangladesh डील से बढ़ी चिंता, J-10CE लड़ाकू विमान के जरिए भारत को घेरने की रणनीति!

ढाका  साउथ एशिया के डिफेंस मार्केट में इन दिनों तगड़ी हलचल है. पाकिस्तान के नक्शेकदम पर चलते हुए बांग्लादेश भी चीन का लड़ाकू विमान J-10CE को अपने बेड़े में शामिल करने की तैयारी में जुट गया है. बांग्लादेश वायु सेना चीन से ऐसे 24 फाइटर जेट्स खरीदने की डील के बेहद करीब है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान इस लड़ाकू विमान के फुस्स हो जाने के बावजूद, ड्रैगन ने उल्टा नैरेटिव सेट करके इस जेट को जी-जान से प्रमोट किया. अब ढाका उसके जाल में फंस गया है. करीब 40 मिलियन डॉलर कीमत वाला ये सौदा अगर पक्का हुआ तो भारत की दोनों सरहदों पर चीनी हथियारों का पहरा मजबूत हो जाएगा।  बांग्लादेश में चीन का डिफेंस जाल बांग्लादेश की सेनाएं पहले से ही बड़े पैमाने पर चीनी हथियारों पर निर्भर हैं. चीन धीरे-धीरे बांग्लादेश के तीनों सेनाओं में घुस चुका है. थल सेना की बात करें तो बांग्लादेश का पूरा टैंक बेड़ा चीनी मूल का है, उनकी एयर डिफेंस और आर्टिलरी में भी चीनी उपकरणों की भरमार है. नौसेना के क्षेत्र में भी बांग्लादेश ने चीन से ही पनडुब्बी हासिल की थीं।  अब इस प्लानिंग को आगे बढ़ाते हुए बांग्लादेशी वायु सेना को भी पूरी तरह चीनी रंग में रंगने की तैयारी है. बांग्लादेश के पास फिलहाल रूसी मिग-21 का चीनी वर्जन F-7 फाइटर्स है, जिसे वो काफी समय से बदलने की कोशिश में था. हालांकि उसने यूरोफाइटर जैसी पश्चिमी तकनीकों पर भी विचार किया लेकिन चीन ने नई चाल चल दी. चीन ने बांग्लादेश को कम कीमत और आसान शर्तें ऑफर कीं और आखिरकार पासा चीन के पक्ष में झुकता दिख रहा है।  J-10CE, जिसे चीन में ‘विगोरस ड्रैगन’ के नाम से जाना जाता है, कोई साधारण विमान नहीं है. ये चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स (PLAAF) का सबसे भरोसेमंद फाइटर जेट है. ये विमान चीन की खतरनाक PL-15 मिसाइलों से लैस होता है।  चीन का गिरता एक्सपोर्ट और तीन देशों का खतरनाक नेक्सस स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ समय में वैश्विक स्तर पर चीनी हथियारों की बिक्री में भारी गिरावट आई है. ऐसे में चीन के लिए ये डील संजीवनी की तरह है. रिपोर्ट के अनुसार, चीन जितने भी हथियार एक्सपोर्ट करता है, उसका 80% हिस्सा एशिया में ही आता है।  भारत के लिए क्या बदलेगा? चीन के कुल सैन्य निर्यात का 60% से ज्यादा हिस्सा सिर्फ तीन देश खरीदते हैं- पाकिस्तान, बांग्लादेश और म्यांमार. आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर और पूर्व डीजी आर्टिलरी लेफ्टिनेंट जनरल पीआर शंकर के मुताबिक, चीन ने भारत को घेरने के लिए पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ एक खतरनाक मिलिट्री नेक्सस बना लिया है, जिस पर भारत को कड़ी नजर रखनी होगी।  अगर बांग्लादेश-चीन की ये डील फाइनल होती है तो भारत के पश्चिमी बॉर्डर यानी पाकिस्तान और पूर्वी बॉर्डर यानी बांग्लादेश दोनों तरफ चीनी फाइटर जेट्स तैनात हो जाएंगे यानी चीन की एंट्री हो जाएगी. भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती ये होगी कि संकट के समय भारत को दोतरफा हवाई खतरों का सामना करना पड़ सकता है. इसके अलावा, बांग्लादेश में चीनी तकनीशियनों और सैन्य विशेषज्ञों की मौजूदगी बढ़ेगी जो भारतीय सीमा के बेहद करीब रहकर खुफिया कूटनीति और निगरानी को अंजाम दे सकते हैं। 

महुआ मोइत्रा के बयान से सियासी हलचल, शुभेंदु अधिकारी की तारीफ के बाद बढ़ीं अटकलें

कलकत्ता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद ममता बनर्जी इन दिनों मुश्किलों का सामना कर रही हैं। हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस में बागियों की झरी लग गई। हाल ही में ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में बागी विधायकों और अन्य नेताओं ने ममता बनर्जी को उनकी ही बनाई पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से बेदखल कर दिया। इस बीच उनकी सबसे करीबी सांसद और टीएमसी की फायरब्रांड नेता महुआ मोइत्रा ने भी चौंकाने वाला बयान दिया है। महुआ मोइत्रा (TMC) और शुभेंदु अधिकारी (BJP) मौजूदा समय में एक-दूसरे के धुर विरोधी माने जाते हैं। हालांकि, उनका यह बयान ममता की चिंता बढ़ा सकती है। महुआ मोइत्रा ने बीते 22 जून को बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू के दौरान पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की तारीफ की है। उन्हें एक अच्छा दोस्त बताया और पुराने दिनों को याद किया जब शुभेंदु ने उनकी मदद की थी। शुभेंदु मेरे अच्छे दोस्त महुआ कहती हैं, “शुभेंदु मेरे अच्छे दोस्त हैं। जब हम एक पार्टी में थे तो उन्होंने मेरा काफी साथ दिया। जब मैं करीमपुर से चुनाव लड़ी थी तो सिर्फ वही मेरे लिए प्रचार करने के लिए आए थे। मुझे जो भी मदद चाहिए होता था वह मुझे भेजते थे। जब 2014 में मुझे लोकसभा का टिकट मिलने वाला था और नहीं मिला। मैं पूरी रात रोई थी। उस समय सिर्फ शुभेंदु अधिकारी ने ही मेरा साथ दिया था। उन्होंने मुझसे कहा था- नहीं बहन, मैं हूं न। ये सारे भावनात्मक कनेक्शन रहते हैं। आज हम दोनों अलग-अलग पार्टी में हैं। बात नहीं होती है। यह अलग बात है।” आपको बता दें कि उस समय शुभेंदु अधिकारी तृणमूल कांग्रेस में हुआ करते थे और ममता बनर्जी के बाद पार्टी के सबसे कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे। दिसंबर 2020 में शुभेंदु अधिकारी ने टीएमसी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था। महुआ इस समय अपने शुरुआती राजनीतिक सफर को याद कर रही थीं। 2016 में लड़ी थी विधानसभा चुनाव महुआ मोइत्रा ने साल 2016 में पश्चिम बंगाल की करीमपुर विधानसभा सीट से अपना पहला चुनाव लड़ा था और जीता था। उस समय शुभेंदु अधिकारी टीएमसी के कद्दावर संगठनकर्ता और नदिया जिले के पार्टी पर्यवेक्षक हुआ करते थे। महुआ उसी दौर का जिक्र कर रही हैं कि जब संगठन के अन्य नेताओं ने उनका साथ नहीं दिया, तब शुभेंदु अधिकारी ने जमीन पर उतरकर उनके लिए चुनाव प्रचार किया था। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले महुआ मोइत्रा कृष्णानगर सीट से चुनाव लड़ना चाहती थीं, लेकिन शुरुआती चर्चाओं में जब उन्हें टिकट मिलने में संशय था तब वे भावुक हो गई थीं। उस समय शुभेंदु ने एक सीनियर सहकर्मी के नाते उन्हें ढांढस बंधाया था। बाद में महुआ को कृष्णानगर से टिकट मिला और वे जीतकर संसद पहुंचीं।

ग्राम पंचायत की विशेष ग्राम सभाओं में जल संरक्षण के संकल्प को दोहराया जाएगा

भोपाल  प्रदेश में जल संरक्षण को एक जन-आंदोलन बनाने के उद्देश्य से शुरू किए गए ऐतिहासिक "जल गंगा संवर्धन अभियान-2026" का 25 जून से 30 जून 2026 की अवधि में प्रदेश में समारोहपूर्वक समापन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में वर्ष प्रतिपदा (19 मार्च 2026) को प्रारंभ हुए इस अभियान के तहत प्रदेश में जल संरक्षण और संवर्धन के अभूतपूर्व कार्य किए गए हैं। इस व्यापक जन-आंदोलन के दौरान ग्रामीण, नगरीय, वन, सिंचाई, शिक्षा और औद्योगिक क्षेत्रों में लगभग 10,514 करोड़ रुपये की लागत से 3.62 लाख से अधिक कार्यों का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया गया है। इसके अंतर्गत खेत तालाब, कूप रिचार्ज, अमृत सरोवर, चेकडेम, जलाशयों के जीर्णोद्धार, नालों की सफाई, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और नदी पुनर्जीवन जैसे महत्वपूर्ण कार्य पूर्ण कर प्रदेश को जल संसाधनों से समृद्ध बनाया गया है। अभियान की उपलब्धियों को जन-सामान्य के समक्ष लाने और जन-सहभागिता का सम्मान करने के उद्देश्य से 25 से 30 जून के बीच राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत में विशेष समापन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आयोजनों के दौरान विशेष ग्राम सभाएं बुलाई जाएंगी, जिनमें निष्पादित कार्यों, उपलब्धियों और लाभान्वित परिवारों का विस्तृत प्रस्तुतिकरण देने के साथ जल संरचनाओं पर आधारित प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी। सभाओं में मुख्यमंत्री के प्रेरणादायी संदेश का वाचन कर जल संरक्षण के संकल्प को दोहराया जाएगा। साथ ही, जनप्रतिनिधियों द्वारा महत्वपूर्ण जल संरचनाओं का लोकार्पण कराया जाएगा और खेत तालाब जैसी व्यक्तिगत संरचनाएं संबंधित हितग्राहियों को औपचारिक रूप से हस्तांतरित की जाएंगी। इस अवसर पर जन-सहभागिता, श्रमदान और नवाचार के माध्यम से उत्कृष्ट योगदान देने वाले नागरिकों, स्वयंसेवी संगठनों, जलदूतों, पंचायत प्रतिनिधियों और शासकीय कर्मचारियों को सम्मानित किया जाएगा तथा सामुदायिक जल संरचनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों को इनके रख-रखाव एवं जल के विवेकपूर्ण उपयोग की शपथ दिलाई जाएगी। समापन कार्यक्रमों में न केवल पिछले कार्यों की समीक्षा की जाएगी, बल्कि आगामी प्राथमिकताओं और भावी योजनाओं पर भी विशेष चर्चा होगी। इसके तहत 01 जुलाई 2026 से प्रारंभ होने वाले "विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण)" (VB – GRAM G) के विभिन्न आयामों और लाभों के संबंध में बड़े पैमाने पर जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही, आगामी मानसून ऋतु में व्यापक पौध-रोपण के लिए 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत जनसहभागिता सुनिश्चित करने तथा पूर्व में किए गए पौध-रोपण की समीक्षा की जाएगी, और किसानों के साथ खरीफ-2026 की तैयारियों तथा भावी कृषि कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा होगी। शासन के निर्देशानुसार इन कार्यक्रमों में जिलों के प्रभारी मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, जिला व जनपद पंचायत प्रतिनिधियों तथा अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।  

जीसीसी, टेक्नोलॉजी, रियल एस्टेट, स्टार्टअप और मानव संसाधन क्षेत्र के दिग्गजों ने योगी सरकार की नीतियों पर जताया भरोसा

बेंगलुरु/लखनऊ  देश की टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप राजधानी बेंगलुरु में उत्तर प्रदेश की विकास गाथा और निवेश संभावनाओं की गूंज सुनाई दी। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी), टेक्नोलॉजी, इंश्योरेंस, रियल एस्टेट, स्टार्टअप और मानव संसाधन क्षेत्र से जुड़े उद्योग जगत के दिग्गजों ने उत्तर प्रदेश को निवेश, नवाचार और रोजगार सृजन का सबसे संभावनाशील गंतव्य बताया। उद्योग प्रतिनिधियों का मानना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, मजबूत कानून-व्यवस्था, निवेशक के अनुकूल नीतियों और तेज़ी से विकसित हो रही कनेक्टिविटी ने उत्तर प्रदेश को नई अर्थव्यवस्था, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटरों और वैश्विक निवेश का उभरता केंद्र बना दिया है। बेंगलुरु में आयोजित निवेशक संवाद के दौरान उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने उत्तर प्रदेश में उपलब्ध अवसरों, निवेश माहौल और भविष्य की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए। निवेशकों ने राज्य को टेक्नोलॉजी, विनिर्माण, सेवा क्षेत्र, स्टार्टअप और रोजगार सृजन के लिए देश के सबसे आकर्षक गंतव्यों में से एक बताया। जीसीसी क्षेत्र में नया मानक स्थापित कर सकता है उत्तर प्रदेश ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) उद्योग विशेषज्ञ और एआई रणनीतिकार अनिल पद्मनाभन ने कहा कि उत्तर प्रदेश की मजबूत शासन व्यवस्था, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश समर्थक वातावरण इसे जीसीसी क्षेत्र के लिए आदर्श गंतव्य बनाता है। उन्होंने कहा कि सरकार की सक्रिय कार्यशैली और उद्योग जगत के साथ निरंतर संवाद राज्य को नई पहचान दे रहा है। उनके अनुसार भारत में जीसीसी स्थापित करने की योजना बनाने वाली कंपनियों के लिए उत्तर प्रदेश का मूल्यांकन करना अनिवार्य होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने वैश्विक ग्राहकों को उत्तर प्रदेश में निवेश और जीसीसी स्थापित करने के लिए प्रेरित करेंगे। नोएडा-जेवर-लखनऊ कॉरिडोर पर निवेशकों की बढ़ती रुचि सत्त्व ग्रुप के डायरेक्टर कॉरपोरेट अफेयर्स पी.के. मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश निवेश के लिए देश के सबसे आकर्षक राज्यों में शामिल हो चुका है। उन्होंने विशेष रूप से नोएडा, ग्रेटर नोएडा, लखनऊ और जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र आने वाले वर्षों में देश के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक और औद्योगिक कॉरिडोर के रूप में उभरेगा। उनके अनुसार नियामकीय पारदर्शिता, प्रशासनिक दक्षता और बेहतर कार्यसंस्कृति ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। रोजगार सृजन को मिलेगी नई रफ्तार वैश्विक इंश्योरेंस ब्रोकिंग कंपनी एऑन (एओएन) की निदेशक शेरिन जॉन ने कहा कि उनकी कंपनी नोएडा स्थित अपने कार्यालय का विस्तार कर रही है और 600 से 1000 अतिरिक्त कर्मचारियों को जोड़ने की योजना पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि उद्योगों, बाजारों और इंफ्रास्ट्रक्चर तक आसान पहुंच उत्तर प्रदेश को कॉरपोरेट विस्तार के लिए आदर्श स्थान बनाती है। एऑन की विस्तार योजना यह संकेत देती है कि राज्य में उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार अवसरों का दायरा लगातार बढ़ रहा है। वहीं टीमलीज सर्विसेज लिमिटेड की प्रबंध निदेशक अपर्णा मित्रा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में उपलब्ध विशाल प्रतिभा, तेजी से विकसित हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश के बढ़ते अवसर इसे नई अर्थव्यवस्था का प्रमुख केंद्र बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में निवेश करने के लिए इससे बेहतर समय नहीं हो सकता। स्टार्टअप और नवाचार को मिल रहा नया आधार आविष्कार समूह और इंटेलीकैप की प्रतिनिधि सायना देनुगरा ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में निवेशकों और उद्यमियों के लिए अत्यंत अनुकूल वातावरण तैयार किया है। राज्य में नए व्यवसायों को बढ़ावा देने, विकासात्मक पूंजी को आकर्षित करने और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हुआ है। उन्होंने कहा कि उनकी संस्थाएं कृषि, खाद्य प्रणाली और ऊर्जा परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि लखनऊ सहित राज्य के कई शहर भविष्य में टेक्नोलॉजी और नवाचार आधारित स्टार्टअप इकोसिस्टम के प्रमुख केंद्र बनेंगे। उनके अनुसार देश के पारंपरिक कारोबारी केंद्रों पर बढ़ते दबाव के बीच उत्तर प्रदेश नई प्रतिभा, नई पूंजी और नए उद्यमों के लिए सबसे मजबूत विकल्प बनकर उभर रहा है। निवेश की संभावनाओं पर भरोसा जताया टीई कनेक्टिविटी की प्रतिनिधि सुनीता ने भी उत्तर प्रदेश में उभरती निवेश संभावनाओं पर भरोसा जताया। उन्होंने बताया कि कंपनी वैश्विक स्तर पर कनेक्टिविटी उत्पादों, डेटा विश्लेषण, ऑटोमोबाइल क्षेत्र के लिए कनेक्टर्स और सेंसर के विकास में कार्यरत है तथा बेंगलुरु स्थित उसके ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर में करीब 1,400 कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी भविष्य में अपने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटरों के विस्तार पर विचार कर रही है और इस क्रम में विभिन्न विकल्पों का मूल्यांकन किया जा रहा है। सुनीता ने कहा कि उत्तर प्रदेश बुनियादी ढांचे में तेजी से निवेश कर रहा है और अन्य अग्रणी राज्यों के सफल मॉडलों से सीखते हुए आगे बढ़ रहा है। उनके अनुसार निवेशकों के लिए उत्तर प्रदेश वर्तमान समय में एक शानदार अवसर प्रदान करता है और राज्य के विकास की गति भविष्य के निवेश के लिए सकारात्मक संकेत देती है।