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बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था और भारत-ईयू डील: क्यों पड़ सकता है पड़ोसी देश मुश्किल में?

नई दिल्ली भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच लंबे समय से अटका पड़ा मुक्त व्यापार समझौता (FTA) आखिरकार 27 जनवरी को साइन हो ही गया। इस समझौते के बाद भारतीय वस्त्र एवं परिधान उद्योग के लिए बड़े अवसर खुलते दिख रहे हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि इस समझौते से भारत के वस्त्र निर्यात में तेज उछाल आ सकता है और यह सेक्टर मौजूदा करीब 7 अरब डॉलर से बढ़कर बहुत कम समय में 30 से 40 अरब डॉलर तक पहुंचने की क्षमता रखता है। इससे श्रम-प्रधान इस क्षेत्र में 60-70 लाख नई नौकरियों के सृजन की संभावना है। बांग्लादेश के प्रभुत्व को चुनौती और बराबरी का मौका पीयूष गोयल ने इस बात का जिक्र किया कि अक्सर यह सवाल पूछा जाता था कि बांग्लादेश कपड़ा निर्यात में भारत से इतना आगे क्यों है। दरअसल बांग्लादेश एक 'कम विकसित देश' (LDC) है, इसलिए उसे यूरोपीय बाजार में जीरो ड्यूटी (शून्य शुल्क) का लाभ मिलता है। इसी कारण बांग्लादेश ने यूरोपीय संघ के 250 अरब डॉलर के कपड़ा बाजार में से 30 अरब डॉलर पर कब्जा जमा लिया है। भारत अभी तक केवल 7 अरब डॉलर का निर्यात करता है और भारतीय सामानों पर 12% तक की ड्यूटी लगती है। इस FTA के लागू होते ही भारत ड्यूटी के मामले में बांग्लादेश के बराबर आ जाएगा, जिससे भारतीय निर्यातकों के लिए प्रतिस्पर्धा करना आसान होगा। केंद्रीय मंत्री गोयल ने कहा- अब जब FTA लागू होगा, भारत भी ड्यूटी के मामले में बांग्लादेश के बराबर हो जाएगा। इससे भारतीय निर्यातकों को समान प्रतिस्पर्धी अवसर मिलेगा। वस्त्र उद्योग: कृषि के बाद सबसे बड़ा रोजगारदाता केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में वस्त्र उद्योग कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा रोजगार देने वाला क्षेत्र है, जिसमें लगभग 4 करोड़ लोग काम करते हैं। वर्तमान में भारत यूरोपीय संघ को सालाना करीब 7 अरब डॉलर के वस्त्र और परिधान निर्यात करता है, जिन पर 12 फीसदी तक आयात शुल्क लगता है। FTA लागू होते ही यह शुल्क समाप्त हो जाएगा, जिससे भारत का निर्यात तेजी से बढ़ सकता है। समझौते का दायरा और 'पहले दिन से' लाभ पीयूष गोयल ने बताया कि इस समझौते के तहत भारतीय सामानों को अभूतपूर्व बाजार पहुंच मिलेगी। यह समझौता भारत से यूरोपीय संघ को होने वाले कुल निर्यात का लगभग 99% और यूरोपीय संघ से भारत को होने वाले निर्यात का 97% कवर करता है। कपड़ा, परिधान, गृह सज्जा और फर्निशिंग जैसे क्षेत्रों को, जिनमें श्रमिकों का हित सबसे ज्यादा है, उनको पहले दिन से शुल्क मुक्त पहुंच मिलेगी। वर्तमान में यूरोपीय बाजार में भारत की हिस्सेदारी बहुत कम है (वस्तुओं में 1.5% और सेवाओं में 2.5%), जो अब तेजी से बढ़ने के लिए तैयार है। कार्बन टैक्स (CBAM) की चुनौती और समाधान समझौते में आधुनिक नियामक चुनौतियों, विशेष रूप से यूरोपीय संघ के 'कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म' (CBAM) पर भी ध्यान दिया गया है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि CBAM एक क्षैतिज विनियमन है जो दुनिया भर के सभी भागीदार देशों पर लागू होता है। इस समस्या से निपटने के लिए एक 'तकनीकी संवाद' स्थापित किया जाएगा। भारतीय एजेंसियों को मान्यता दी जाएगी ताकि वे यूरोपीय मानकों के अनुसार भारत में ही कार्बन उत्सर्जन का सत्यापन कर सकें। दोनों पक्ष तकनीकी प्रक्रियाओं पर सहयोग करेंगे ताकि भारतीय निर्यातकों को यूरोप में अपनाई जाने वाली माप पद्धतियों को लेकर कोई परेशानी न हो।  

सांदीपनि पद्मा कन्या विद्यालय: कमजोर छात्राओं की बोर्ड परीक्षा तैयारी के लिए शिक्षक कर रहे घर-घर पढ़ाई

 ग्वालियर माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाएं सात फरवरी से शुरू हो रही हैं। परीक्षा को लेकर जहां शिक्षा विभाग स्कूलों में अतिरिक्त कक्षाएं और छुट्टी वाले दिन भी पढ़ाई करवा रहा है, वहीं सांदीपनि पद्मा कन्या विद्यालय के शिक्षकों ने छात्राओं की तैयारी के लिए एक अनोखी पहल शुरू की है। स्कूल के शिक्षक अब छात्राओं के घर तक पहुंचकर उन्हें पढ़ा रहे हैं, ताकि कमजोर छात्राएं भी अच्छे अंक ला सकें और स्कूल का परिणाम शत-प्रतिशत बना रहे। यह पहल खास तौर पर उन छात्राओं के लिए शुरू की गई है, जिन्होंने त्रैमासिक और अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं किया या जो किसी कारणवश नियमित कक्षाओं से नहीं जुड़ पा रही थीं। विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों ने मिलकर ऐसी छात्राओं की सूची तैयार की और फिर उनके क्षेत्रों में जाकर सामूहिक पढ़ाई का प्रयोग शुरू किया। शिक्षक ऐसे इलाकों का चयन कर रहे हैं, जहां आसपास कई छात्राएं रहती हों, ताकि एक साथ अधिक छात्राओं को लाभ मिल सके। शिक्षक पहुंचे छात्राओं के घर विद्यालय के विज्ञान शिक्षक पवन चौरसिया, चंद्रभान तमोली, एनडी दीक्षित सहित अन्य शिक्षक अपने-अपने विषयों के अनुसार छात्राओं को उनके घर जाकर पढ़ा रहे हैं। तय समय पर शिक्षक छात्राओं के घर पहुंचते हैं और पाठ्यक्रम की दोहराई, प्रश्न-उत्तर अभ्यास और शंकाओं का समाधान करते हैं। इससे छात्राओं को न केवल विषयों की बेहतर समझ मिल रही है, बल्कि उनका आत्मविश्वास भी लगातार बढ़ रहा है। घर पर पढ़ाने की वजह शिक्षकों का कहना है कि कई छात्राएं घरेलू जिम्मेदारियों, दूरी या अन्य व्यक्तिगत कारणों से स्कूल नियमित नहीं आ पातीं। ऐसे में घर जाकर पढ़ाने से उनकी पढ़ाई की निरंतरता बनी रहती है। खास बात यह है कि सांदीपनि स्कूलों में सामान्यतः तीन किलोमीटर के दायरे में रहने वाले छात्र-छात्राओं को ही प्रवेश दिया जाता है, जिससे शिक्षकों को घर-घर पहुंचने में ज्यादा कठिनाई नहीं हो रही है। मुख्य विषयों पर विशेष फोकस इस पहल के तहत गणित, विज्ञान और हिंदी जैसे मुख्य विषयों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शिक्षक सरल उदाहरणों और आसान भाषा में पाठ समझा रहे हैं, ताकि छात्राएं विषय को जल्दी और बेहतर तरीके से समझ सकें। कई अभिभावकों ने इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा है कि इससे उनकी बेटियों की पढ़ाई को नई दिशा मिली है। घर पर जाकर कराएंगे परीक्षा की तैयारी रवींद्र शर्मा, प्राचार्य, सांदीपनि पद्मा कन्या विद्यालय ने कहा कि कई छात्राओं को स्कूल की अतिरिक्त कक्षाओं में आने में परेशानी थी, इसलिए स्कूल के शिक्षकों ने तय किया कि वे उनके घर पर जाकर उन्हें पढ़ाएंगे और परीक्षा की तैयारी कराएंगे। अधिकारी की प्रतिक्रिया हरिओम चतुर्वेदी, जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि यदि यह मॉडल सफल रहा तो इसे शहर के अन्य स्कूलों में भी लागू करने पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल सांदीपनि पद्मा कन्या विद्यालय की यह पहल उन छात्राओं के लिए उम्मीद की किरण बन रही है, जो किसी न किसी वजह से पढ़ाई की मुख्यधारा से पीछे छूट रही थीं।

बड़ी ऊर्जा योजना: अनूपपुर में निवेश से 4,000 मेगावॉट बिजली, 60 हजार करोड़ खर्च होंगे

अनूपपुर  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में  समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में 4 हजार मेगावॉट बिजली के पॉवर सप्लाई एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर हुए. मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी के प्रबंध संचालक  विशेष गढ़पाले तथा टोरेंट पॉवर लिमिटेड के  जिगिश मेहता, अदानी पॉवर लिमिटेड के  एस.बी. खिलया तथा हिन्दुस्तान थर्मल प्रोजेक्ट्स के  रतुल पुरी के बीच पॉवर सप्लाई एग्रीमेंट का आदान-प्रदान हुआ. यह नए पॉवर हाउस अनूपपुर में स्थापित होंगे. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बिजली का महत्व शरीर में प्राणों की समान है. जैसे समस्त गतिविधियों के संचालन के लिए शरीर में प्राण आवश्यक है, वैसे ही किसी भी राज्य की प्रगति और उन्नति के लिए पर्याप्त विद्युत उपलब्धता आवश्यक है. 4000 मेगावॉट से ऊर्जा का विस्तार- सीएम मोहन यादव सीएम मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में 60 हजार करोड़ रुपए की लागत से 4 हजार मेगावॉट बिजली उत्पादन के लिए हुए समझौते प्रदेश के स्थाई विकास का आधार बनेंगे. इससे प्रदेश में कुल विद्युत उपलब्धता में बढ़ोतरी होने के साथ-साथ बिजली की मांग की शत-प्रतिशत आपूर्ति संभव होगी. डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ओन एंड ऑपरेट मॉडल पर स्थापित होने वाले इन नए विद्युत संयंत्रों से लगभग 8 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा.  निवेशकों की पहली पसंद मध्यप्रदेश- सीएम मोहन यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योग मित्र नीतियों, सशक्त अधोसंरचना और सुशासन आधारित व्यवस्था के परिणाम स्वरूप मध्यप्रदेश देश -विदेश के निवेशकों और औद्योगिक समूहों के लिए पहली प्राथमिकता बनता जा रहा है. विद्युत उत्पादन में भूमि-जल- पर्यावरण-कोयला- रेलवे लाइन आदि का बेहतर समन्वय आवश्यक है. इन सब आधारों पर मध्यप्रदेश उपयुक्त है. प्रदेश ने नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण उपलब्धियां अर्जित की हैं. प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की पहल पर प्रदेश को मिला पीएम मित्र पार्क विकास के नए आयाम और रोजगार के भरपूर अवसर प्रदान करेगा. प्रदेश में साल-2026 को कृषक कल्याण साल के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है. इससे उद्यमिता, स्वरोजगार और खाद्य प्रसंस्करण गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा.

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: मेडिकल ऑफिसर भर्ती परीक्षा 15 दिनों में फिर से होगी, बदलाव से प्रभावित कई अभ्यर्थी

इंदौर जबलपुर हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने एमपीपीएससी (MPPSC) के तहत मेडिकल ऑफिसर्स की भर्ती से जुड़े मामले में फैसला सुनाया है. इंदौर हाईकोर्ट ने मामले में पूरी प्रक्रिया को फिर से आयोजित करने के निर्देश मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग को दिए हैं. हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद कई मेडिकल ऑफिसर्स को बड़ी राहत मिली है. अचानक जोड़ दिया गया एडिशनल रजिस्ट्रेशन का नियम एमपीपीएससी द्वारा साल 2024-2025 में मेडिकल ऑफिसर भर्ती को लेकर वैकेंसी निकाली गई थी. जहां कई लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराए थे. जिन लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराए थे, उनके इंटरव्यू किए गए. इसी बीच ऐन वक्त पर रजिस्ट्रेशन में एडिशनल रजिस्ट्रेशन का नियम जोड़ दिया गया. जिसके चलते कई एमबीबीएस डॉक्टर भर्ती प्रक्रिया में से बिना दस्तावेज जांच बाहर हो गए. इस मामलों को लेकर जो डॉक्टर प्रक्रिया को पूरी होने के बाद अचानक से बाहर हुए, उन्होंने इंदौर हाई कोर्ट में एडवोकेट तुषार सोडानी के माध्यम से एक याचिका लगाई. अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में लगाई थी याचिका याचिका में एमपीपीएससी द्वारा जारी विज्ञापन के आधार पर मेडिकल ऑफिसर की भर्ती प्रक्रिया के दौरान इंटरव्यू के दिन ही अचानक एडिशनल रजिस्ट्रेशन का नया नियम जोड़ देने की जानकारी कोर्ट को दी गई. साथ ही जिन अभ्यर्थियों के पास यह रजिस्ट्रेशन नहीं था, उन्हें फोन कर इंटरव्यू से बाहर कर दिया गया. अभ्यर्थियों ने इसके खिलाफ एक प्रतिनिधि भी भेजा, लेकिन एमपीपीएससी ने कोई जवाब नहीं दिया. इसके बाद अभ्यार्थियों ने हाईकोर्ट की शरण ली. 15 दिनों में फिर से परीक्षा आयोजित कराने का आदेश इंदौर हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि एडिशनल रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नियमों में नहीं है. असल आवश्यकता केवल पीजी मार्कशीट और पीजी रिजल्ट की थी. जिसे अभ्यार्थी पहले ही प्रस्तुत कर चुके थे. कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि 'रूल ऑफ द गेम बीच में बदले नहीं जा सकते.' अब हाई कोर्ट की इंदौर बेच ने एमपीपीएससी को निर्देश दिए हैं कि 15 दिनों के भीतर सभी प्रतिनिधित्व पर निर्णय लें और नई प्रक्रिया में पात्रता सुनिश्चित करें. साथ ही भर्ती के लिए आवेदन करने वाले सभी अभ्यार्थियों को मौका दें और रिपोर्ट कोर्ट में सबमिट करें. 

सिंहस्थ की तैयारी: उज्जैन में 100 एकड़ में फूलों का विशाल क्लस्टर, 30 जनवरी को भोपाल में फ्लॉवर एग्जीबिशन

उज्जैन  सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने उज्जैन में 100 एकड़ जमीन पर फूलों का विशेष उत्पादन क्लस्टर विकसित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर यह क्लस्टर धार्मिक नगरी उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में फूलों की बढ़ेगी खेती।  महाकालेश्वर सहित आसपास से आती है फूलों की डिमांड उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने बताया कि उज्जैन, महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर साल भर फूलों की बड़ी मांग रहती है। इसी को देखते हुए सरकार ने उज्जैन के आसपास व्यावसायिक पुष्प उत्पादन क्लस्टर विकसित करने की कार्य योजना बनाई है। सिंहस्थ 2028 को अवसर के रूप में देख रहा है विभाग मंत्री कुशवाह ने कहा कि सिंहस्थ मेले के दौरान करोड़ों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं और पूजा-अर्चना के लिए फूलों की मांग कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में बाहर से फूल मंगाने की बजाय स्थानीय किसानों द्वारा उत्पादित फूलों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इससे परिवहन लागत घटेगी और किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे। किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस क्लस्टर के माध्यम से उज्जैन और आसपास के किसानों को गुलाब, गेंदा, जरबेरा, रजनीगंधा, सेवंती, ग्लेडियोलस जैसे अधिक मांग वाले फूलों की वैज्ञानिक और व्यावसायिक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि पुष्प उत्पादन को केवल पारंपरिक खेती न मानते हुए कृषि-उद्यम के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। प्रशिक्षण से लेकर बाजार तक मिलेगा सहयोग     उन्नत किस्मों के पौधों की उपलब्धता     आधुनिक खेती तकनीकों का प्रशिक्षण     कोल्ड स्टोरेज और भंडारण सुविधाएं     मंडी और बाजार से सीधा जुड़ाव     पुष्प प्रसंस्करण इकाइयों से कनेक्शन प्रदेश को पुष्प उत्पादन में अग्रणी बनाने की योजना मंत्री कुशवाह ने कहा कि मध्यप्रदेश पहले से ही पुष्प उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। उज्जैन में 100 एकड़ का यह क्लस्टर राज्य को पुष्प उत्पादन के क्षेत्र में नंबर-वन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

ग्वालियर, भोपाल समेत कई शहरों में घना कोहरा, एमपी में मौसम ने बदला रुख; बारिश और ओले से फसलें प्रभावित

भोप्ला  मध्य प्रदेश में मौसम ने अचानक रौद्र रूप ले लिया है। साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ लाइन के असर से प्रदेश के कई जिलों में तेज बारिश के साथ ओले गिरे, जिससे जनजीवन और खेती दोनों प्रभावित हुए हैं। ठंड के बीच बारिश-ओलों के इस दौर ने तापमान और गिरा दिया है। मंगलवार को 20 से ज्यादा जिलों में बारिश दर्ज की गई, जबकि गुना, उज्जैन, आगर-मालवा और शाजापुर में ओलावृष्टि हुई। ग्वालियर, सागर समेत 14 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने बुधवार को भी हालात ऐसे ही बने रहने की चेतावनी दी है। ग्वालियर, सागर समेत 14 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इनमें ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, सागर और दमोह शामिल हैं। वहीं, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, नीमच, मंदसौर, कटनी, उमरिया, शहडोल, सीधी और सिंगरौली में बादल छाए रहने के आसार हैं। बारिश के साथ कोहरे की चादर उत्तरी मध्य प्रदेश में जहां बारिश का अलर्ट है, वहीं सुबह के समय घना कोहरा भी परेशानी बढ़ा रहा है। ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड के कई जिलों में मध्यम कोहरा छाया रहा। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, रायसेन और सीहोर में भी दृश्यता प्रभावित हुई। ग्वालियर-शिवपुरी में स्कूल बंद लगातार बारिश और बढ़ती ठंड को देखते हुए ग्वालियर प्रशासन ने एहतियातन बुधवार को कक्षा 8वीं तक के स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है। शिवपुरी समेत आसपास के इलाकों में भी ठंड का असर तेज रहा। मौसम विभाग के अनुसार, भोपाल, इंदौर, खंडवा, हरदा, विदिशा, नर्मदापुरम, खंडवा, बड़वानी, रतलाम, श्योपुर, उज्जैन, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, रीवा, सतना, टीकमगढ़, छतरपुर, शाजापुर, मंदसौर, आगर-मालवा, देवास, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, खरगोन, सीहोर, सागर, मऊगंज, धार आदि जिलों में 24 घंटे के अंदर बारिश का दौर चला। ग्वालियर में सबसे ज्यादा ढाई इंच, गुना, शिवपुरी-सागर में 1 इंच, दतिया में पौन इंच और राजगढ़ में आधा इंच पानी गिर गया। उज्जैन, शाजापुर, आगर-मालवा, देवास, मुरैना, सीहोर, सागर, रायसेन व अन्य जिलों में ओले भी गिरे। बारिश, आंधी-ओले के मौसम के बीच बुधवार सुबह घना कोहरा भी छाया रहा। ग्वालियर में सबसे कम विजिबिलिटी दर्ज की गई। यानी, यहां 50 मीटर के बाद कुछ नहीं दिखा। खजुराहो, भोपाल, दतिया, नर्मदापुरम, नौगांव, रीवा, सतना, राजगढ़, सागर, गुना, रायसेन, श्योपुर, बालाघाट, उमरिया, सिवनी, मंडला, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर में कोहरा दर्ज किया गया। हालांकि, रात के तापमान में बढ़ोतरी हुई है। बारिश के बाद एमपी में बढ़ी ठंड मध्य प्रदेश में मंगलवार को हुई बारिश के बाद एक बार फिर ठंड की वापसी हो गई है। तेज हवाओं के कारण कंपकंपी बढ़ गई है। पिछले 24 घंटे में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, देवास, खंडवा, शाजापुर, शिवपुरी, मऊगंज, सागर, उज्जैन समेत कई जिलों में बारिश हुई। जिसके बाद आज ठंड भी बढ़ गई है। ग्वालियर में बारिश के बाद आज कक्षा-8 तक के स्कूलों की छुट्टी भी घोषित कर दी गई है। मध्य प्रदेश का सबसे ठंडा जिला मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार को एमपी में सबसे कम न्यूनतम तापमान शिवपुरी में रहा। यहां पर न्यूनतम पारा 7 डिग्री सेल्सियस डिग्री दर्ज किया गया। इसके बाद खुजराहों में 7.4 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम पारा रिकॉर्ड हुआ। वहीं सबसे कम अधिकतम तापमान मुरैना में 18.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इस दौरान 3 जिलों में 30 डिग्री या उससे ऊपर अधिकतम पारा रहा। जिनमें मंडला, खंडवा और खरगौन शामिल हैं। ओलावृष्टि से खेती को झटका मंगलवार को प्रदेश के 25 से अधिक जिलों में आंधी और बारिश का असर देखा गया। आगर-मालवा, शाजापुर और गुना में गिरे ओलों से किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं। रतलाम, शाजापुर और आगर में तेज हवा के चलते खेतों में खड़ी फसलें गिर गईं। कई जगह सड़कों पर पानी बह निकला। रात के समय निवाड़ी, दतिया, श्योपुर, उज्जैन, खरगोन और धार में आकाशीय बिजली चमकती रही। 

खूबचंद की मौत के बाद प्रदर्शन जारी, इंदौर में दूषित पानी से संकट, ICU में तीन मरीज और वेंटिलेटर पर एक

इंदौर  भागीरथपुरा के खूबचंद पिता गन्नूदास की दूषित पानी से मंगलवार को मौत हो गई थी। बुधवार को उनके परिजनों ने अंत्येष्टी से पहले सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन किया। खूबचंद की मौत के साथ ही भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों की संख्या 29 हो चुकी है।  यह कहा जाता है कि द्यजल ही जीवन हैद्ग, लेकिन देश के सबसे साफ शहर माने जाने वाले इंदौर की एक बस्ती में पानी ही मौत की वजह बन गया है। दूषित पानी के कारण भागीरथपुरा में 30 दिन में 29 मौतें हो चुकी हैं। अभी भी तीन लोग जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। इस कांड को एक माह पूरा हो रहा है, लेकिन अभी भी पूरी बस्ती में साफ पानी नहीं मिल पाया है और न ही अफसर यह बता पाए कि दूषित पानी के कारण आखिर इतनी मौतें कैसे हो गईं? यह कांड सामने आने के बाद कई सरकारी जांचें हुईं और आयोग का गठन भी हो चुका है। मामला कोर्ट में है, लेकिन अब तक किसी भी जिम्मेदार के खिलाफ कोई आपराधिक केस दर्ज नहीं हुआ है। 29 दिसंबर को भागीरथपुरा बस्ती के 20 मरीज दो अलग-अलग निजी अस्पतालों में भर्ती हुए थे। उन्हें देखने क्षेत्रीय विधायक कैलाश विजयवर्गीय पहुंचे थे, जिसके बाद दूषित पानी से फैल रही बीमारी का खुलासा हुआ। 30 दिसंबर को अस्पताल में भर्ती एक व्यक्ति की पहली मौत हुई थी। इन मौतों के पीछे नगर निगम की भारी लापरवाही उजागर हुई है। बस्ती की पाइपलाइनें 30 साल से ज्यादा पुरानी और जर्जर हो चुकी हैं। भागीरथपुरा से जुड़ा नगर निगम का जोन शिकायतों के मामले में शहर में दूसरे स्थान पर है। पिछले दो माह में यहाँ सबसे ज्यादा गंदे पानी की शिकायतें मिली थीं, लेकिन अफसरों ने उन पर ध्यान नहीं दिया। शौचालय के नीचे से गुजरती रही पाइपलाइन हैरानी की बात यह है कि सालभर से लाइन बदलने के प्रस्ताव तैयार थे, लेकिन काम शुरू नहीं हुआ। गंदे पानी की शिकायतों को अफसरों ने गंभीरता से नहीं लिया। जिस नर्मदा लाइन से घरों में पानी जाता है, उसके ऊपर पुलिस चौकी का शौचालय बना दिया गया और मल-मूत्र का पानी नर्मदा लाइन में समाता रहा। जब मौतें होने लगीं, तब अफसरों ने शौचालय तोड़कर लीकेज खोजा। पूरी लाइन में 30 से ज्यादा लीकेज मिले, जिन्हें एक माह बाद भी पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सका है। कोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम की पेश रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर सुरक्षित पानी की आपूर्ति, इलाज और जांच संबंधी निर्देशों का पूरा पालन नहीं हुआ है। मौतों के आंकड़ों को लेकर भी गंभीर असहमति सामने आई। जहां सरकारी रिपोर्ट में 16 मौतों को जलजनित बीमारी से जोड़ा गया है, वहीं याचिकाकर्ताओं ने मृतकों की संख्या लगभग 30 बताई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय जांच आयोग बनाया है। आयोग जल प्रदूषण के कारणों, वास्तविक मौतों की संख्या, बीमारियों की प्रकृति, चिकित्सा व्यवस्था की पर्याप्तता, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही और पीड़ितों को मुआवजे पर रिपोर्ट देगा। कोर्ट ने दैनिक जल गुणवत्ता जांच और नियमित स्वास्थ्य शिविर जारी रखने के निर्देश देते हुए चार सप्ताह में अंतरिम रिपोर्ट मांगी है। अगली सुनवाई 5 मार्च 2026 को होगी। आयोग को व्यापक अधिकार आयोग को सिविल कोर्ट के समान अधिकार दिए गए हैं। वह अधिकारियों व गवाहों को तलब कर सकेगा, दस्तावेज मंगा सकेगा, जल गुणवत्ता परीक्षण करा सकेगा और स्थल निरीक्षण कर सकेगा। राज्य सरकार आयोग को आवश्यक स्टाफ, कार्यालय और संसाधन उपलब्ध कराएगी। रिपोर्ट में मौतों के कारण स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि भागीरथपुरा के 30 प्रतिशत हिस्से में वाटर सप्लाई शुरू कर दी गई है। यह हिस्सा साढ़े 9 किमी का है। हालांकि, जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की पीठ ने रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में यूज किए गए वर्बल अटॉप्सी शब्द पर भी आपत्ति जताई है। कोर्ट ने पूछा है कि यह शब्द मेडिकल का है या आपके द्वारा ईजाद किया है। अदालत ने यह भी पाया कि रिपोर्ट में मौतों के कारण स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं हैं और उसमें पर्याप्त तर्क एवं सहायक सामग्री का अभाव है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि रिपोर्ट की विश्वसनीयता सिद्ध करने के लिए अधिक उपयुक्त, ठोस और प्रामाणिक दस्तावेज प्रस्तुत करें। इसके अलावा अंतरिम राहत के स्वरूप पर भी चिंता व्यक्त की। सवाल उठाया है कि समिति अपने सुझावों का प्रभावी और निष्पक्ष क्रियान्वयन किस प्रकार सुनिश्चित करेगी। क्षेत्र में लगातार हो रही मौतें और उनके कारणों की अनिश्चितता अत्यंत चिंताजनक है। रिपोर्ट को बताया ‘आई-वॉश’ सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने रिपोर्ट को अस्पष्ट बताते हुए उसे मात्र एक 'आई-वॉश' करार दिया है। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला ने नगर निगम को निर्देशित किया कि वरिष्ठ अधिवक्ता के सुझाए गए परीक्षणों पर गंभीरता से विचार किया जाए। कोर्ट की सभी चिंताओं का स्पष्ट एवं ठोस उत्तर प्रस्तुत करें। इसके अलावा, सुनवाई के दौरान कोर्ट ने न्यायालय परिसर में स्वच्छता और जल की स्थिति का भी संज्ञान लिया और संबंधित अधिकारियों को स्वच्छ एवं सुरक्षित जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सिर्फ 8 पैरामीटर्स पर पानी की कैसी टेस्टिंग निगम की ओर से तर्क दिया कि पानी की टेस्टिंग की गई है। याचिकाकर्ता ने कहा कि सिर्फ 8 मानकों पर पानी की टेस्टिंग की गई जबकि 2018 में मप्र प्रदूषण मंडल ने भागीरथपुरा समेत इंदौर के पानी की 34 मानकों पर टेस्टिंग की थी। इस पानी को फिकल कंटामिनेटेड पाया था। ऐसे में जब भागीरथपुरा में 28 मौतें हो चुकी हैं तो निगम सिर्फ 8 मानकों पर टेस्टिंग कैसे कर रही है। निगम ने यह भी नहीं बताया कि टेस्टिंग का तरीका क्या था। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से विश्वस्तरीय तीन पैरामीटर्स पर पानी की टेस्टिंग के तीन तरीके बताए गए। मदद रेडक्रॉस से, शासन की ओर से कुछ भी नहीं याचिकाकर्ता की ओर से बताया कि मुआवजे को लेकर भी झूठी जानकारी दी जा रही है। अभी मृतकों को जो 2-2 लाख रुपए की राशि दी गई है वह रेड क्रॉस सोसायटी की ओर … Read more

वाइजैग में टीम इंडिया की प्लेइंग 11 और मैच अपडेट: ईशान की धुंआधार बैटिंग, चार खिलाड़ी बेंच पर

 विशाखापत्तनम तो भारत और न्यूजीलैंड के बीच टी20 सीरीज का कारवां वाइजैग (व‍िशाखापत्तनम) पहुंच चुका है. जहां दोनों देशों के बीच सीरीज का चौथा मैच है. वैसे अच्छी बात यह है कि भारतीय टीम सीरीज में 3-0 से अजेय है. ऐसे में यह मैच एक तरह से बेंच पर बैठे ख‍िलाड़‍ियों के लिए मौका होगा.  डॉ. वाईएस राजशेखर रेड्डी एसीए-वीडीसीए क्रिकेट स्टेडियम में देखा जाए तो कुल  4 टी20 मुकाबले हुए हैं. वहीं भारतीय टीम ने 3 मुकाबले जीते हैं, एक मुकाबले में उसे हार म‍िली है.  इस मैदान पर सबसे पहले कोई टी20 मैच 14 फरवरी 2016 को हुआ था, जब भारतीय टीम ने श्रीलंका को 9 व‍िकेट से हराया था. इसके बाद दूसरा टी20 मैच 24 फरवरी 2019 को ऑस्ट्रेल‍िया के ख‍िलाफ भारत ने खेला, लेकिन  ऑस्ट्रेल‍िया ने 3 व‍िकेट से जीता. इसके बाद 14 जून 2022 को भारत ने साउथ अफ्रीका को 48 रनों से मात दी. यहां कोई आख‍िरी टी20 मुकाबला भारत और ऑस्ट्रेल‍िया के बीच 2 नवंबर 2023 को हुआ. ज‍िसे भारतीय टीम ने रोमांचक अंदाज में 2 विकेट से अपने नाम किया.  ईशान क‍िशन हैं वाइजैग में हाइएस्ट स्कोरर  ईशान किशन ने यहां 2 टी20 मैच  खेले हैं और 112 रन बनाए हैं, इस तरह वो इस मदान पर हाइएस्ट स्कोरर हैं. ऑस्ट्रेल‍ियन बल्लेबाज जोश इंग्ल‍िश ने यहां एक मैच खेला और 110 रन बनाए. जो इस मैदान पर एकमात्र टी20 शतक है. सूर्यकुमार यादव ने भी यहां एक मैच खेलते हुए 1 मैच में 80 रन जड़े हैं. वहीं इस मैदान पर रव‍िचंद्रन अश्व‍िन ने एक टी20 मैच खेला और  विकेट लिया. वहीं जसप्रीत बुमराह ने इस मैदान पर 2 टी20 मैच खेलते हुए 4 विकेट लिए हैं. युजवेंद्र चहल और हर्षल पटेल ने भी 4-4 विकेट झटके हैं.  वाइजैग में ऐसी होगी प्लेइंग 11, बेंच पर बैठेंगे ये 4 ख‍िलाड़ी भारत और न्यूजीलैंड के बीच 5 मैचों की टी20 सीरीज का चौथा मुकाबला आज (शुक्रवार) व‍िशाखापत्तनम (वाइजैग) के डॉ. वाईएस राजशेखर रेड्डी एसीए-वीडीसीए क्रिकेट स्टेडियम में है. भारत पहले से ही सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त पर है. ऐसे में यह देखना होगा कि भारतीय टीम इस मुकाबले में क्या बदलाव करती है, क्योंकि सीरीज में कुछ प्लेयर्स को कोई भी टी20 मैच खेलने का मौका नहीं मिला है.  टी20 वर्ल्ड कप 2026 को देखते हुए भारतीय टीम हार्दिक पंड्या को आराम देने पर विचार कर सकती है. हार्दिक इंजरी-प्रोन माने जाते हैं और टीम मैनेजमेंट उन्हें बड़े टूर्नामेंट से पहले फ्रेश रखना चाहता है.श्रेयस अय्यर को शुरुआती तीन टी20 मुकाबलों के लिए तिलक वर्मा के रिप्लेसमेंट के तौर पर टीम में शामिल किया गया था. हालांकि, अब उनके खेलने की संभावनाएं और मजबूत हो गई हैं. बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) की सलाह है कि तिलक वर्मा को पूरी तरह फिट होने से पहले जल्दबाजी में ना उतारा जाए. ऐसे में श्रेयस अय्यर को चौथे टी20 में हार्दिक पंड्या की जगह प्लेइंग XI में शामिल किया जा सकता है.टीम मैनेजमेंट न सिर्फ अय्यर की क्षमताओं को परखना चाहता है, बल्कि उन्हें टी20 फॉर्मैट में खुद को साबित करने का एक दुर्लभ मौका भी देना चाहता है. ईशान किशन ने टी20 टीम में वापसी के बाद शानदार प्रदर्शन किया है. उन्होंने इस सीरीज़ में क्रमशः 8, 76 और 28 रन बनाए हैं. कप्तान सूर्यकुमार यादव और टीम मैनेजमेंट दोनों का उन्हें पूरा सपोर्ट हासिल है. ऐसे में इस बात की पूरी संभावना है कि उनको वाइजैग टी20 में मौका मिलेगा. ईशान को टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए बैक-अप विकेटकीपर-बल्लेबाज के तौर पर देखा जा रहा है और मौजूदा फॉर्म को देखते हुए उन्हें आगे भी लगातार मौके मिलने तय माने जा रहे हैं. वहीं अक्षर पटेल के भी प्लेइंग XI में लौटने की उम्मीद है, क्योंकि वह टी20 वर्ल्ड कप के लिहाज से टीम का अहम हिस्सा हैं. जसप्रीत बुमराह एक और मुकाबला खेल सकते हैं, जहां उनका साथ अर्शदीप सिंह और शिवम दुबे निभाएंगे. स्पिन विभाग में कुलदीप यादव और रवि बिश्नोई टीम की पहली पसंद बने रह सकते हैं, जबकि वरुण चक्रवर्ती को एक बार फिर बेंच पर बैठना पड़ सकता है. IND vs NZ 4th T20I के लिए संभावित भारतीय प्लेइंग XI: अभिषेक शर्मा – ओपनर, संजू सैमसन – ओपनर, ईशान किशन – बल्लेबाज, सूर्यकुमार यादव (कप्तान) – बल्लेबाज, श्रेयस अय्यर – बल्लेबाज, शिवम दुबे – ऑलराउंडर, अक्षर पटेल – ऑलराउंडर, रवि बिश्नोई – स्पिनर, कुलदीप यादव – स्पिनर, अर्शदीप सिंह – तेज गेंदबाज, जसप्रीत बुमराह – तेज गेंदबाज,  बेंच पर: हार्दिक पंड्या, वरुण चक्रवर्ती, रिंकू सिंह, हर्षित राणा वाइजैग में हुए टी20 मैचों की ह‍िस्ट्री     23 नवंबर 2023: भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 2 विकेट से हराया.     14 जून 2022: भारत ने साउथ अफ्रीका को 48 रन से हराया.     24 फरवरी 2019: ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 3 विकेट से हराया.     14 फरवरी 2016: भारत ने श्रीलंका को 9 विकेट से हराया. भारत का टी20 सीरीज के ल‍िए स्क्वॉड: सूर्यकुमार यादव (कप्तान), अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेटकीपर), ईशान किशन, श्रेयस अय्यर, हार्दिक पंड्या, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, जसप्रीत बुमराह, वरुण चक्रवर्ती, रिंकू सिंह, अर्शदीप सिंह, रवि बिश्नोई, हर्षित राणा न्यूजीलैंड का टी20 सीरीज के ल‍िए स्क्वॉड:मिचेल सेंटनर (कप्तान), डेवोन कॉन्वे, बेवन जैकब्स, डेरिल मिचेल, ग्लेन फिलिप्स, टिम रॉबिनसन, जिमी नीशम, ईश सोढ़ी, जैक फॉल्क्स, मार्क चैपमैन, माइकल ब्रेसवेल, रचिन रवींद्र, काइल जेम‍िसन, मैट हेनरी, जैकब डफी, क्रिस्टियन क्लार्क भारत vs न्यूजीलैंड के बीच टी20 सीरीज 2026 मुकाबलों का र‍िजल्ट  1st T20I, नागपुर: भारत ने न्यूज़ीलैंड को 48 रन से हराया 2nd T20I, रायपुर: भारत ने न्यूज़ीलैंड को 7 विकेट से हराया  3rd T20I, गुवाहाटी: भारत ने न्यूज़ीलैंड को 8 विकेट से हराया   

Middle East तनाव: ईरान पर खतरा बढ़ा, F-35 और US बेड़े की मौजूदगी, सऊदी झटका और ट्रंप की उकसावे वाली नीति

तेहरान  ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर पहुंच चुका है. फिलहाल दोनों देशों में सीधी जंग तो नहीं, लेकिन हालात उससे कम भी नहीं हैं. सैन्य, राजनीतिक और रणनीतिक टकराव चल रहा है. अमेरिका, ईरान पर परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय मिलिशिया को समर्थन और मानवाधिकारों के आरोप लगा रहा है, वहीं ईरान अमेरिका को मध्य-पूर्व में दखल देने वाला और प्रतिबंधों से अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाला देश कहता है. पिछले कुछ महीनों में अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में विमानवाहक पोत, युद्धपोत और लड़ाकू विमान तैनात किए हैं. जिसके जवाब में ईरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी हमले को पूरी जंग मानकर उसके खिलाफ कार्रवाई करेगा. दोनों देशों के बीच बयानबाजी सैन्य तैयारियां, प्रतिबंध, साइबर और खुफिया कार्रवाइयां इस टकराव को और तेज कर रही हैं. ईरान की ओर बढ़ रही विनाश की खेप अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि अमेरिका का एक बड़ा नौसैनिक बेड़ा ईरान की ओर बढ़ रहा है, हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें उम्मीद है कि इसका इस्तेमाल करने की नौबत नहीं आएगी. ट्रंप ने एक बार फिर तेहरान को चेतावनी दी कि वह प्रदर्शनकारियों की हत्या या अपने परमाणु कार्यक्रम को दोबारा शुरू करने जैसी किसी भी कार्रवाई से बचे. उन्होंने ईरान को व्यापार समझौता करने या परिणाम भुगतने की चेतावनी दी. सऊदी अरब ने दिया अमेरिका को झटका ईरान भी अमेरिका के इस कदम को लेकर अपनी तैयारी पूरी रख रहा है. ईरान की ओर से UAE से बातचीत की गई थी, जिसके बाद इस देश ने स्पष्ट कहा कि यह अपनी हवा, जमीन या पानी किसी भी हमला-सक्रियता के लिए इस्तेमाल नहीं होने देगा. ऐसी ही बातचीत ईरान की सऊदी अरब से भी हुई है. इस देश ने भी अमेरिका को झटका देते हुए कहा है कि तेहरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए वो अपने हवाई क्षेत्र या जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देगा. सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेश्चकियान से बातचीत के बाद ये बात कही है. दोनों देश साफ कर चुके हैं कि वे किसी भी सैन्य हमले के लिए अपने देश को लॉन्चपैड नहीं बनने देगा. सैन्य अभ्यास की तैयारी में है अमेरिका समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, अमेरिकी एयर फोर्स के सेंट्रल कमांड ने बयान में कहा कि यह अभ्यास मिडिल ईस्ट में लड़ाकू हवाई ताकत को तैनात करने, फैलाने और बनाए रखने की क्षमता दिखाएगा. यहां बताना जरूरी है कि सेंट्रल कमांड ही इस इलाके में अमेरिकी सेनाओं की जिम्मेदारी संभालती है. लेकिन अभ्यास की तारीख या सटीक जगह का खुलासा नहीं किया गया है. इससे रहस्य और बढ़ गया है. क्या यह ईरान की सीमा के करीब होगा? या सिर्फ दिखावा है? अमेरिकी जंगी बेड़े में क्या-क्या मौजूद?     अमेरिका के जंगी बेड़े में USS Abraham Lincoln एयरक्राफ्ट कैरियर और उसके साथ चलने वाले युद्धपोत मौजूद हैं.     अमेरिका के मशहूर फाइटर जेट F-35 को यहां तैनात किया गया है, जो अपनी सटीक मारक क्षमता और छिपकर वार करने में सिद्धहस्त है.     इसके अलावा Growler इलेक्ट्रॉनिक विमान और विध्वंसक युद्धपोत क्षेत्र में मौजूद हैं. जो ईरान पर कभी भी हमले के लिए पूरी तरह तैयार हैं.     अमेरिका ने डेमो ऑफ फोर्स यानी ताकत दिखाने के लिए तैयारी पूरी कर ली है, वहीं ईरान ने जवाबी चेतावनियों, युद्ध-तैयारी, समुद्री और तट सुरक्षा बढ़ाई है. अमेरिका के जमावड़े पर क्या है ईरान का रिएक्शन? ईरान ने अमेरिका की चेतावनियों का कड़ा जवाब दिया है. ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि किसी भी तरह का हमला क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ाएगा. ईरान ने चेताया कि किसी भी सैन्य प्रयास का जवाब पहले से भी ज्यादा दर्दनाक और निर्णायक होगा. तेहरान के एक केंद्रीय चौक में एक विशाल पोस्टर भी दिखाई दिया, जिसमें दिखाई गया- ‘आप हवा बोओगे, तूफान काटोगे’, जिसका सीधा संकेत अमेरिकी कैरियर ग्रुप को है. ईरान-अमेरिका के बीच क्यों बढ़ा तनाव? वैसे तो परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर ईरान-अमेरिका में पहले से ही असहमति है, लेकिन ट्रंप ने इस कार्यकाल में ईरान पर परमाणु कार्यक्रम छोड़ने के लिए दबाव डाला है. पिछले दिनों ईरान में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हुए, जिसमें प्रदर्शनकारियों की मौत पर दुनिया भर में ईरान की आलोचना हो रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार चेतावनी दी कि अगर ईरान प्रदर्शनकारियों को मारता रहा, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई करेगा. बताया जा रहा है कि प्रदर्शन में हजारों लोगों की मौत हुई है. प्रदर्शन तो फिलहाल शांत है लेकिन अमेरिका का सैन्य जमावड़ा क्षेत्र में तनाव बढ़ा रहा है.

अजित पवार की विमान दुर्घटना में मौत, बारामती में शोक की लहर, रोते-बिलखते पहुंचे समर्थक

 बारामती महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार का बुधवार को एक विमान क्रैश में निधन हो गया. यह हादसा उनके गृह जिले बारामती में हुआ. शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक विमान में सवाल सभी छह लोगों की मौत हो गई. बताया जा रहा है कि बारामती में लैंडिंग के वक्त यह हादसा हुआ. अजीत पवार बारामती से ही विधायक हैं. यह पूरा इलाका पवार परिवार का गढ़ कहा जाता है. हादसे के बाद विमान आग का गोला बन गया. आसमान में धुंए के गुब्बारे देखे गए. शुरू में कहा गया कि इस क्रैश में अजीत पवार गंभीर रूप से जख्मी हुए. उनको बारामती के अस्पताल में भर्ती करवाया गया है. लेकिन थोड़ी देर बार उनको मृत बता दिया गया. विमान में अजीत पवार अपने सहयोगियों के साथ मौजूद थे. इस हादसे में पायलट की भी मौत हो गई है. यह विमान सुबह 8 से 9 बजे के बीच मुंबई से उड़ान भरा था. यह एक चार्टर प्लेन था. डॉक्टरों की एक टीम उनका इलाज कर रही थी लेकिन उनको नहीं बचाया जा सका. हादसे के बाद विमान आग का गोला बन गया. अजीत पवार बारामती में आज कई कार्यक्रमों में शिरकत करने वाले थे. बारामती की सांसद और उनकी बहन सुप्रिया सुले बारामती के लिए रवाना हो गई हैं. दिल्ली से पवार परिवार बारामती के लिए रवाना हो रहे हैं. उड़ान भरने के करीब एक घंटे बाद हादसा रिपोर्ट के बाद मुंबई से उड़ान भरने के करीब एक घंटे बाद यह हादसा हुआ. यह एक प्राइवेट जेट था. हादसे के बाद पूरे बारामती में शोक की लहर है. अजीत पवार कई बार राज्य के डिप्टी सीएम रहे थे. राज्य की राजनीति में वह एक बहुत बड़े कद के नेता थे. मौजूदा वक्त में उनके कद का बहुत कम सक्रिय नेता हैं. पवार परिवार में शोक की लहर अजीत पवार इस वक्त एनसीपी के प्रमुख थे. उन्होंने अपने चाचा शरद पवार से राजनीति के गुर सीखे थे. लेकिन करीब तीन साल पहले अजीत पवार और शरद पवार के रास्ते अलग-अलग हो गए थे. एनसीपी दोफाड़ हो गई और मूल एनसीपी पर उनका कब्जा हो गया. उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार राज्यसभा सांसद हैं. उनकी चचेरी बहन सप्रिया सुले बारामती से सांसद हैं. वह एनसीपी-शरद गुट की नेता है. महाराष्ट्र की राजनीति खासकर मराठा राजनीति पर पवार परिवार का गहरा प्रभाव है. पूरे महाराष्ट्र में शोक की लहर महाराष्ट्र में अजीत पवार को दादा कहा जाता था. महाराष्ट्र की राजनीति में वह एक अपने चाचा की तरह ही सभी दलों के प्रिय नेता थे. सभी दलों में उनके दोस्त हैं. हर कोई उनके निधन पर शोक जता रहा है. बीते विधानसभा में चुनाव में अपने दम पर अपनी पार्टी को खड़ा कर साबित कर दिया था कि वह राजनीति के माहिल खिलाड़ी हैं. एनसीपी संगठन पर पकड़ अजीत पवार एनसीपी संगठन के नेता था. शरद पवार के उत्तराधिकारी के तौर पर अजीत पवार के साथ उनकी चचेरी बहन सुप्रिया सुले दावेदार थीं. लेकिन, शरद पवार ने एनसीपी के अध्यक्ष के तौर पर सुप्रिया सुले के हाथ में कमान दे दी. इसके बाद करीब तीन साल पहले एनसीपी दोफाड़ हो गया. अजीत पवार गुट ने राज्य में भाजपा के साथ गठबंधन कर सरकार में शामिल हो गया. वह देवेंद्र फडणवीस सरकार में डिप्टी सीएम बने. पीएम मोदी ने ली हादसे की जानकारी हादसे के बाद पीएम नरेंद्र ने महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस से बात की है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस हादसे की जानकारी ली है. पीएम ने इस बारे में सीएम से बातचीत की है.