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किसानों के लिए बड़ी अपडेट, PM Kisan की नई किस्त की तारीख पर आया ताजा संकेत

नई दिल्ली  PM Kisan Yojana 23rd Installment: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 23वीं किस्त का इंतजार क्या खत्म होने वाला है? ऐसे सवाल इस समय देशभर के करोड़ों किसानों के मन में उठ रहे हैं। अगर आप भी किसान हैं और पीएम किसान योजना की 23वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं, तो यह खबर आपके मतलब की हो सकती है। दरअसल, अब तक पीएम किसान योजना (PM Kisan Yojana) की 22 किस्तें जारी हो चुकी है। हर किस्त के जरिए किसानों के खाते में 2 हजार रुपये की राशि भेजी जाती है। हालांकि, कई बार तकनीकी कारणों से लाखों किसानों की कई किस्तें अटक भी चुकी हैं। लेकिन आगामी किस्त में उन किसानों के खाते में पिछली किस्त का भी पैसा आ जाता है। अगर आपकी भी 22वीं किस्त अटक गई है, तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है, 23वीं किस्त में पिछली किस्त का पैसा आ सकता है। आइए जानते हैं कि आखिर 23वीं किस्त का इंतजार कब खत्म होगा? PM Kisan Yojana 23rd Installment: कब खत्म होगा 23वीं किस्त का इंतजार? पीएम किसान योजना की 23वीं किस्त के तहत आखिर किसानों के खाते में 2-2 हजार रुपये कब क्रेडिट होंगे? यह सवाल हर किस्त से पहले होता है कि आखिर पैसा कब आएगा। दरअसल, केंद्र सरकार के तहत आने वाला कृषि मंत्रालय ही इस योजना को देखता है। वही किसानों का डेटा तैयार करता है और किस्त भेजने की पूरी तैयारी करता है। इस समय भारत के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान हैं। वह समय-समय पर अलग-अलग राज्य जाकर किसानों के साथ बातचीत करते हैं। कई तरह के कृषि कार्यक्रमों में भी वो शामिल होते है। इन कार्यक्रमों के जरिए वह किसानों से जुड़ी योजनाओं के बारे में बताते हैं। कई बार पीए किसान योजना का भी जिक्र करते हैं। हालांकि, अभी 23वीं किस्त को लेकर उनकी तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। और ना ही कृषि मंत्रालय की ओर से यह सूचना दी गई है कि 23वीं किस्त का पैसा कब आएगा। लेकिन पीएम किसान योजना के शुरू होने के बाद से ही वित्त वर्ष की पहली किस्त भेजने को जो समय रहा है वह जून-जुलाई का रहा है। यानी हर साल वित्त वर्ष की पहली किस्त फरवरी या मार्च और कैलेंडर वर्ष की दूसरी किस्त जून या जलुाई में जारी होती रही है। अगर थोड़ा लेट हुआ तो यह तारीख अगस्त के पहले या दूसरे सप्ताह तक भी गई है। लेकिन अधिकतर जून और जुलाई में ही आने का ट्रेंड रही है। पिछले साल (2025) 20वीं किस्त 2 अगस्त को जारी हुई थी। उससे पहले 2024 में 17वीं किस्त 18 जून को जारी की गई थी। ऐसे में अगर पिछली तारीखों को देखें तो संभावना है कि पीएम किसान योजना की 23वीं किस्त 18 जून के बाद आ सकती है। यानी किसानों का इंतजार 18 जून के बाद खत्म हो सकता है। हालांकि, किसानों को आधिकारिक सूचना आने तक इंतजार करना चाहिए। कैसे चेक करेंPM Kisan Yojana का ताजा स्टेटस पीएम किसान योजना का ताजा स्टेटस चेक करने के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करें। स्टेप 1: PM-KISAN के आधिकारिक पोर्टल https://pmkisan.gov.in/ पर जाएं। स्टेप 2: होमपेज पर “Know Your Status” (अपनी स्थिति जानें) विकल्प पर क्लिक करें। स्टेप 3: अब, दिए गए फ़ील्ड में अपना रजिस्ट्रेशन नंबर डालें।  अगर आपको अपना रजिस्ट्रेशन नंबर याद नहीं है “Know Your Registration Number” (अपना रजिस्ट्रेशन नंबर जानें) पर क्लिक करें मोबाइल नंबर या आधार कार्ड से खोजें OTP का इस्तेमाल करके वेरीफाई करें, और आप अपना रजिस्ट्रेशन नंबर देख पाएँगे। स्टेप 4: अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आए OTP का इस्तेमाल करके अपना वेरिफिकेशन पूरा करें। स्टेप 5: वेरिफिकेशन के बाद, आप स्क्रीन पर अपनी PM-KISAN की जानकारी देख पाएंगे, जिसमें ये शामिल हैं: किसान का नाम रजिस्ट्रेशन की स्थिति eKYC की स्थिति किस्त के भुगतान का इतिहास बैंक खाते की जानकारी लंबित या अस्वीकृत स्थिति (यदि कोई हो)

इकॉनोमिक कॉरिडोर को मंजूरी, बैतूल-खंडवा-जुलवानिया हाईवे से बढ़ेगी कनेक्टिविटी और कारोबार

खंडवा खंडवा जिला इकॉनामिक कॉरिडोर के रूप में जल्द ही विकसित होने वाला है। बुधवार को नेशनल हाईवे 347बी हैवारखेड़ी (बैतूल) से जुलवानिया (बड़वानी) तक 233.653 किमी हाईवे का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने मंजूरी दे दी है। इस रोड की कुल लागत इसकी कुल लागत 4415.60 करोड़ की है। पहले पांच चरण में बनने वाला नेशनल हाईवे अब दो पैकेज में बनेगा। इस हाईवे के निर्माण से खंडवा सीधे गुजरात और महाराष्ट्र से जुड़ जाएगा। कैबिनेट में दो पैकेज में किया रोड एनएच-347बी पहले पांच चरणों में बनाया जाना था। इसमें हैवारखेड़ी से रोशनी, रोशनी से आशापुर, आशापुर से रूधि, रूधि से देशगांव और देशगांव से जुलवानिया तक रोड शामिल है। अब कैबिनेट ने इसे दो पैकेज में कर दिया है। इसमें हैवारखेड़ी से व्हाया रोशनी-आशापुर-रूधि तक कुल 125.01 किमी का रोड टू-लेन को पेव्ड शोल्डर स्टैंडर्ड (पक्की पटरी) के साथ बनाया जाएगा। इसमें 70.39 किमी का बायपास भी रहेगा। इसके आगे देशगांव-रूधि बायपास 28.680 किमी का काम पहले से ही चल रहा है, जो लगभग 70 प्रतिशत पूरा हो चुका है। देशगांव-जुलवानिया अब फोरलेन कैबिनेट ने एनएच-347बी के दूसरे पैकेज में देशगांव-जुलवानिया सेक्शन में 108.643 किमी रोड को मंजूरी दी है। इस रोड को पहले टू-लेन बनाया जाना था, लेकिन केबिनेट ने इसे अब अपग्रेड करते हुए फोर-लेन बनाने की स्वीकृति दी है। इस रोड पर 54.273 किमी का बायपास आ रहा है। साथ ही इसमें खरगोन जिले में 16.20 किमी का ग्रीन फिल्ड भी शामिल है। ग्रीन फिल्ड में वन विभाग और खेती की जमीन अधिग्रहण करने की कार्रवाई की जाएगी। नेशनल हाईवे हाइब्रिड एन्युइटी मोड पर बनाया जाएगा। खंडवा बनेगा दो नेशनल हाईवे का सेंटर एनएचएआइ द्वारा पहले ही इंदौर-इच्छापुर नेशनल हाईवे फोरलेन का काम किया जा रहा है। इसके साथ ही बैतूल-खंडवा-बड़ोदरा का काम भी चल रहा है। खंडवा का देशगांव दो नेशनल हाईवे का क्रॉसिंग बन रहा है। दो नेशनल हाईवे के सेंटर में आने से खंडवा का इकानोनिक कॉरिडोर भी मजबूत होगा। बैतूल से आगे ये हाईवे नागपुर से जुड़ा हुआ है। खंडवा से नागपुर, बड़ोदरा के साथ सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी। इधर इंदौर-इच्छापुर हाईवे से खंडवा सीधे राजस्थान और महाराष्ट्र के मुक्तईनगर से आगे तेलंगाना से जुड़ जाएगा। आर्थिक, सामाजिक, लॉजिस्टिक्स केंद्रों को कनेक्टिविटी यह परियोजना पूरे राज्य के प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों को बिना रुकावट कनेक्टिविटी देगी। यह उन्नत कॉरिडोर 06 पीएम गति-शक्ति आर्थिक केंद्रों से जुड़ेगा, जिनमें एक टेक्सटाइल क्लस्टर, दो मेगा फूड पार्क, एक औद्योगिक पार्क और दो सुपर थर्मल पावर प्लांट शामिल हैं। परियोजना 5 सामाजिक केंद्रों को भी एकीकृत करेगी, जिनमें खंडवा और बड़वानी जैसे दो आकांक्षी जिले, साथ ही बैतूल, खंडवा और खरगोन जैसे तीन आदिवासी जिले शामिल हैं। इसके अलावा, दो बड़े रेलवे स्टेशन, दो हवाई अड्डे और एक मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क सहित 5 लॉजिस्टिक्स केंद्र भी इस कॉरिडोर से जुड़ेंगे। व्यापार उद्योग को मिलेगी हाइट बैतूल-खंडवा-बड़ोदरा नेशनल हाईवे को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। इसमें रूधि-देशगांव और रोशनी-आशापुर के बीच काम चल रहा है। देशगांव जुलवानिया और हैवारखेड़ी-रोशनी के बीच भी जल्द ही काम शुरू किया जाएगा। नेशनल हाईवे से इकॉनोमिक कॉरिडोर बनेगा और यहां व्यापार-उद्योग को हाइट मिलेगी। आशुतोष सोनी, परियोजना निदेशक एनएचएआइ

डराने वाले आंकड़े: MP में HIV संक्रमण तेजी से बढ़ा, मां से बच्चों तक पहुंच रहा खतरा

इंदौर.  मध्य प्रदेश में एचआईवी संक्रमण को लेकर सामने आए ताजा आंकड़ों ने स्वास्थ्य तंत्र की चिंता बढ़ा दी है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस समय संक्रमण दर लगातार बढ़ रही है, उसी समय जांचों की संख्या में कमी क्यों आ रही है. इंदौर जैसे बड़े शहर में वर्ष 2022 में जहां करीब 1.47 लाख लोगों की एचआईवी जांच की गई थी, वहीं अब यह संख्या घटकर लगभग 85 हजार रह गई है. इसके बावजूद पॉजिटिव मरीजों की संख्या 492 से बढ़कर 615 तक पहुंच गई है. संक्रमण दर भी 0.33 प्रतिशत से बढ़कर 0.72 प्रतिशत हो गई है. यानी कम जांच के बावजूद ज्यादा संक्रमित सामने आ रहे हैं. यह संकेत देता है कि जमीनी स्तर पर संक्रमण की वास्तविक स्थिति आंकड़ों से कहीं अधिक गंभीर हो सकती है।  स्थिति केवल इंदौर तक सीमित नहीं है. राज्य एड्स नियंत्रण समिति के आंकड़े बताते हैं कि एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिलाओं की संख्या पिछले पांच वर्षों में तेजी से बढ़ी है. वर्ष 2020-21 में जहां 3771 संक्रमित गर्भवती महिलाएं दर्ज थीं, वहीं 2025-26 में यह संख्या 7167 तक पहुंच गई. इसी अवधि में 200 से अधिक नवजात बच्चों में संक्रमण मां से पहुंचने के मामले सामने आए हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच, नियमित दवा और चिकित्सकीय निगरानी से इस तरह के अधिकांश मामलों को रोका जा सकता है. इसके बावजूद बढ़ते आंकड़े स्वास्थ्य जागरूकता और उपचार व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े कर रहे हैं।  इंदौर में क्यों बढ़ रही संक्रमण दर स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन वर्षों में एचआईवी पॉजिटिविटी रेट लगभग दोगुना हो गया है. वर्ष 2022 में यह दर 0.33 प्रतिशत थी, जो 2023 में 0.67 प्रतिशत, 2024 में 0.70 प्रतिशत और 2025 में 0.72 प्रतिशत तक पहुंच गई. विशेषज्ञों का मानना है कि असुरक्षित यौन संबंध और नशे के दौरान संक्रमित सुइयों का उपयोग संक्रमण फैलने के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।  जांच कम होने से छिप रही असली तस्वीर एचआईवी नियंत्रण का सबसे प्रभावी तरीका व्यापक स्क्रीनिंग और समय पर पहचान है. लेकिन इंदौर में जांचों की संख्या लगातार कम हो रही है. इससे कई संक्रमित व्यक्ति समय पर सामने नहीं आ पा रहे हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कम स्क्रीनिंग के कारण संक्रमण की वास्तविक स्थिति का आकलन करना कठिन हो रहा है।  गर्भवती महिलाओं और नवजातों पर बढ़ता खतरा राज्य में एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिलाओं की संख्या बढ़ना सबसे चिंताजनक पहलू माना जा रहा है. वर्ष 2025-26 में 743 एचआईवी पॉजिटिव गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी दर्ज की गई. कई मामलों में गर्भावस्था के दौरान समय पर जांच नहीं हुई या उपचार बीच में छूट गया. परिणामस्वरूप संक्रमण मां से बच्चे तक पहुंचने का जोखिम बढ़ गया।  क्यों नहीं रुक रहा संक्रमण विशेषज्ञों के अनुसार कई कारण संक्रमण नियंत्रण में बाधा बन रहे हैं. इनमें समय पर जांच न होना, एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी बीच में छोड़ देना, संक्रमण की जानकारी छिपाना, नवजात को आवश्यक दवा न देना और संक्रमित मां द्वारा चिकित्सकीय सलाह के बिना स्तनपान कराना शामिल है।  केस स्टडी ने बढ़ाई चिंता एक मामले में महिला की पहली गर्भावस्था के दौरान एचआईवी जांच ही नहीं हुई. दूसरी गर्भावस्था में संक्रमण का पता चला. इसके बाद पति और पहला बच्चा भी संक्रमित पाए गए. दूसरे मामले में मां ने उपचार पूरा नहीं लिया और नवजात को निर्धारित दवा भी नहीं दी गई. बाद में बच्चा एचआईवी पॉजिटिव पाया गया।  कमलनाथ ने जांच और निगरानी का मुद्दा उठाया पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार से विशेष कदम उठाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच और दवा उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है. वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि एचआईवी को केवल चिकित्सा नहीं बल्कि सामाजिक जागरूकता के माध्यम से भी नियंत्रित किया जा सकता है। 

बिलासपुर संभाग के पांच जिलों की संयुक्त समीक्षा बैठक में विकास कार्यों, राजस्व प्रकरणों, पेयजल, स्वास्थ्य और खरीफ तैयारियों की विस्तृत समीक्षा

रायपुर    शासन प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जनसमस्याओं का संवेदनशील, पारदर्शी और समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने सुशासन तिहार के अंतर्गत बिलासपुर प्रवास के दौरान बिलासपुर, मुंगेली, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, सक्ती एवं सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों के अधिकारियों की संयुक्त समीक्षा बैठक के दौरान यह बात कही। मुख्यमंत्री  साय ने विकास कार्यों की प्रगति, राजस्व मामलों, पेयजल व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं तथा आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। राजस्व प्रकरणों के निराकरण के लिए चलाएं विशेष अभियान मुख्यमंत्री ने राजस्व मामलों की समीक्षा करते हुए समय-सीमा से बाहर तथा एक वर्ष से अधिक समय से लंबित प्रकरणों के निराकरण के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और अन्य राजस्व प्रकरण सीधे नागरिकों के जीवन और आजीविका से जुड़े होते हैं। ऐसे मामलों में अनावश्यक विलंब आमजन की परेशानी बढ़ाता है, इसलिए इनके त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निराकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं पर रखें विशेष निगरानी मुख्यमंत्री  साय ने ग्रीष्मकालीन परिस्थितियों को देखते हुए सभी जिलों में पेयजल व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में पेयजल संकट उत्पन्न न हो, इसके लिए निरंतर निगरानी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को आगामी वर्षा ऋतु को ध्यान में रखते हुए संभावित मौसमी बीमारियों की रोकथाम एवं उपचार के लिए अग्रिम तैयारी करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाओं और मूलभूत सुविधाओं के संबंध में किसी प्रकार की असुविधा न हो, यह प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है। बैठक में मुख्यमंत्री ने आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए खाद एवं बीज की उपलब्धता, भंडारण और वितरण व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने कलेक्टरों को निर्देश दिए कि किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद एवं बीज उपलब्ध कराया जाए तथा वितरण व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने पश्चिम एशिया की परिस्थितियों के कारण डीएपी उर्वरक की सीमित उपलब्धता का उल्लेख करते हुए किसानों को वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के लिए जागरूक करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एसएसपी, यूरिया, नैनो यूरिया तथा नैनो डीएपी जैसे विकल्पों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए। वैज्ञानिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग से उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ खेती की लागत भी कम की जा सकती है। कृषि क्षेत्र में बढ़ेगी महिलाओं की भागीदारी  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि महिलाओं को आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण और आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे तकनीक आधारित कृषि गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें। इससे कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों का विस्तार होगा और महिलाओं के लिए रोजगार एवं आय के नए अवसर भी सृजित होंगे। जनभागीदारी से सफल हो रहा सुशासन तिहार मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि वे स्वयं प्रदेश  में  आयोजित समाधान शिविरों में शामिल होकर आम नागरिकों से सीधे संवाद कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के बावजूद शिविरों में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि जनता का शासन और प्रशासन के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार केवल शिकायतों के निराकरण का अभियान नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच विश्वास एवं संवाद को मजबूत करने का माध्यम है। मुख्यमंत्री ने महतारी वंदन योजना की 28वीं किश्त जारी होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, सतत निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने का आह्वान करते हुए कहा कि शासन की प्रत्येक योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही सुशासन का वास्तविक उद्देश्य है। यही विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का आधार बनेगा। बैठक में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री  तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री  अरुण साव, सांसद मती कमलेश जांगड़े, विधायक  अमर अग्रवाल,  धरमलाल कौशिक,  धर्मजीत सिंह,  सुशांत शुक्ला,  दिलीप डहरिया, जिला पंचायत अध्यक्ष  राजेश सूर्यवंशी, मुख्यमंत्री के सचिव  पी. दयानंद, विशेष सचिव  रजत बंसल, संभागायुक्त  सुनील जैन, पुलिस महानिरीक्षक  रामगोपाल गर्ग तथा पांचों जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

120 करोड़ रुपये की परियोजना युवाओं को देगी अध्ययन, आवास और प्रतियोगी परीक्षा तैयारी की सर्वश्रेष्ठ सुविधाएं

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत आज बिलासपुर प्रवास के दौरान मधुबन-जूना बिलासपुर क्षेत्र में निर्माणाधीन नालंदा परिसर एवं एजुकेशन हब का निरीक्षण कर परियोजना की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने निर्माण कार्यों का अवलोकन करते हुए अधिकारियों को गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि यह परियोजना प्रदेश के युवाओं के लिए अवसरों के नए द्वार खोलेगी और बिलासपुर को शिक्षा एवं प्रतियोगी परीक्षा तैयारी के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करेगी। इस अवसर पर केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री  तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री  अरुण साव, विधायक  अमर अग्रवाल,  धरमलाल कौशिक,  सुशांत शुक्ला, जिला पंचायत अध्यक्ष  राजेश सूर्यवंशी, महापौर मती पूजा विधानी, मुख्यमंत्री के सचिव  पी. दयानंद, विशेष सचिव  रजत बंसल, संभागायुक्त  सुनील जैन, पुलिस महानिरीक्षक  रामगोपाल गर्ग, कलेक्टर  संजय अग्रवाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  रजनेश सिंह सहित जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि बिलासपुर में प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में विद्यार्थी सीजीपीएससी, यूपीएससी, नीट, जेईई, एसएससी, बैंकिंग, व्यापम तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं। इन विद्यार्थियों को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और आधुनिक अध्ययन वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगभग 13 एकड़ शासकीय भूमि पर 120 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक एजुकेशन हब विकसित किया जा रहा है। परियोजना के अंतर्गत नालंदा डिजिटल पब्लिक लाइब्रेरी, 300-300 सीटर बालक एवं बालिका छात्रावास, आधुनिक शैक्षणिक ब्लॉक तथा विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप अन्य सुविधाओं का निर्माण किया जा रहा है। एक ही परिसर में अध्ययन, आवास और शैक्षणिक संसाधनों की उपलब्धता विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उत्कृष्ट वातावरण प्रदान करेगी। इससे प्रदेश के विभिन्न जिलों से आने वाले विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिलेगा। अधिकारियों ने बताया कि परिसर में 48 बड़े रेंटल हॉल का निर्माण भी किया जा रहा है। इससे नगर निगम के लिए दीर्घकालिक और स्थायी आय का स्रोत विकसित होगा। पीपीपी मॉडल पर विकसित की जा रही इस परियोजना का संचालन वित्तीय दृष्टि से भी आत्मनिर्भर होगा तथा नगर निगम पर अतिरिक्त आर्थिक भार नहीं आएगा। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्य सरकार युवाओं को बेहतर संसाधन, आधुनिक अधोसंरचना और प्रतिस्पर्धी वातावरण उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि नालंदा परिसर एवं एजुकेशन हब केवल एक भवन परियोजना नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों और आकांक्षाओं को नई दिशा देने वाला ज्ञान केंद्र है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि परियोजना पूर्ण होने के बाद बिलासपुर की पहचान प्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख शैक्षणिक एवं प्रतियोगी परीक्षा तैयारी केंद्र के रूप में स्थापित होगी। यह एजुकेशन हब हजारों विद्यार्थियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के साथ उनके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत आधारशिला बनेगा।  

जल की हर बूंद में बसती है आने वाले कल की धड़कन, संरक्षण पर जोर

भोपाल  विश्व पर्यावरण दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्म मंथन और संकल्प का अवसर है। यह वह क्षण है जब हमें प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों को पुनः स्मरण करते हुए एक ऐसे भविष्य की कल्पना करनी चाहिए, जहां जल, जंगल और जमीन सुरक्षित हों। आज आवश्यकता केवल एक दिन के संकल्प की नहीं, बल्कि आने वाले युगों तक चलने वाले जन-संकल्प की है। पीढ़ियों से हम सुनते आए हैं. “जल ही जीवन है।” किंतु विडंबना यह है कि इस सत्य को समझने में हमें एक गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ा। आज यह संकट किसी एक मोहल्ले, शहर, राज्य या देश तक सीमित नहीं है, बल्कि सम्पूर्ण पृथ्वी के अस्तित्व से जुड़ा वैश्विक प्रश्न बन चुका है। भारत भी इस चुनौती से अछूता नहीं है। बढ़ती जनसंख्या, अनियंत्रित शहरीकरण, वनों की कटाई और जलवायु परिवर्तन ने प्राकृतिक जल स्रोतों को तेजी से क्षीण कर दिया है। ऐसे समय में पानी की प्रत्येक बूंद को सहेजना मानवता का सबसे बड़ा दायित्व बन गया है। जल संकट की गंभीरता केवल पानी की कमी तक सीमित नहीं है। भू-जल स्तर का निरंतर गिरना, नदियों का प्रदूषित होना, पारंपरिक जल स्रोतों का लुप्त होना और वर्षा जल का व्यर्थ बह जाना इस संकट के प्रमुख कारण हैं। गांवों और नगरों की जीवन रेखा रहे तालाब, बावड़ियाँ और कुएं आज उपेक्षा, अतिक्रमण और कचरे के बोझ तले दम तोड़ रहे हैं। दूसरी ओर कृषि और उद्योगों में भूजल के अंधाधुंध दोहन ने स्थिति को और अधिक विकट बना दिया है। ऐसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में “जल गंगा संवर्धन अभियान” आशा की एक सशक्त किरण बनकर उभरा है। यह अभियान केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि जनभागीदारी पर आधारित एक सामाजिक आंदोलन है, जिसका मूल मंत्र है…“जन सहयोग से जल संरक्षण और संवर्धन।” इसका उद्देश्य जल संकट के मूल कारणों का समाधान करते हुए समाज को जल संरक्षण के लिए प्रेरित करना है। मैंने स्वयं अपने विधानसभा क्षेत्र नरसिंहपुर तथा गृह नगर गोटेगांव में सिंगरी नदी के पुनर्जीवन के लिये सफाई अभियान चलाकर जल स्रोतों के संरक्षण का प्रयास किया है। इसी अनुभव के आधार पर मैं सदैव आह्वान करता हूं—“नदियों को नाला बनाना बंद करें।” वास्तव में नदी का उद्गम स्थल ऊर्जा का केंद्र होता है और जहां नदियों का संगम होता है, वहां जीवन की नई संभावनाएँ जन्म लेती हैं। इसलिए नदियों के उद्गम और उनके प्राकृतिक स्वरूप की रक्षा करना हमारा सामूहिक दायित्व है। मेरे आराध्य परम पूज्य  बाबा  जी की वाणी है कि संकल्प में विकल्प नहीं होता। संकल्प में विक्लप खोजने पर महानतम कार्य रुक जाते हैं। “जल गंगा संवर्धन अभियान” के अंतर्गत पुराने तालाबों, कुओं, बावड़ियों और नदियों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि बारिश का पानी धरती में समाहित होकर भू-जल स्तर को पुनर्जीवित कर सके। जल स्रोतों के आसपास व्यापक वृक्षारोपण किया जा रहा है, जिससे जल संरक्षण की प्राकृतिक प्रक्रिया मजबूत हो सके। साथ ही नदियों में प्रदूषण रोकने और गंदे नालों के प्रवाह को नियंत्रित करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। इस अभियान के परिणाम उत्साहवर्धक हैं। जल संरचनाओं की सफाई और गहरीकरण से भू-जल स्तर में सुधार हुआ है। अनेक ऐतिहासिक तालाबों और बावड़ियों का पुनर्जीवन हुआ है, जिससे स्थानीय स्तर पर जल उपलब्धता बढ़ी है। “पानी चौपाल” जैसे कार्यक्रमों ने लोगों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा की है और जल बचाने की संस्कृति को पुनर्जीवित किया है। कृषि क्षेत्र में भी इस अभियान ने सकारात्मक प्रभाव डाला है। किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए, जिससे कम पानी में अधिक उत्पादन संभव हो । यह न केवल जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि किसानों की आर्थिक समृद्धि का भी आधार बन रहा है। जल संकट के स्थायी समाधान के लिए कुछ अतिरिक्त प्रयास भी आवश्यक हैं। शहरों में अपशिष्ट जल का शोधन कर पुनः उपयोग किया जाना चाहिए। औद्योगिक प्रदूषण पर कठोर नियंत्रण आवश्यक है और व्यक्तिगत स्तर पर भी हमें पानी की बर्बादी रोकने की आदत विकसित करनी होगी। जब तक समाज का प्रत्येक व्यक्ति इस जिम्मेदारी को स्वीकार नहीं करेगा, तब तक कोई भी अभियान पूर्ण सफलता प्राप्त नहीं कर सकता। जल संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा नैतिक दायित्व है। आज यदि हम जल को सहेजेंगे, तभी भविष्य सुरक्षित रहेगा। हमें अपनी प्राचीन जल संस्कृति से जोड़ते हुए वैज्ञानिक जल प्रबंधन की दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग देखना है। आइए, इस विश्व पर्यावरण दिवस पर हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि जल की हर बूंद को बचाएंगे, जल स्रोतों का संरक्षण करेंगे और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे। क्योंकि सच यही है—पानी को सहेजना ही आने वाली पीढ़ियों को बचाना है और जल का संरक्षण ही जीवन का संरक्षण है। भारत की भूमी और मौसम दोनों हमें संदेश दे रहे हैं 5 जून से पौधारोपण की तैयारी करें और वर्षा प्रारंभ होने पर पौधरोपण “विश्व पर्यावरण दिवस” आहवान सुफल औऱ सफल होगा।  

तेज हवाओं से बाधित विद्युत आपूर्ति को सुधारने में जुटीं बिजली कंपनियों की टीमें

भोपाल राजधानी भोपाल में गुरुवार की शाम आये तेज आँधी-अँधड़ और वर्षा से विद्युत प्रदाय में व्यापक व्यवधान और हानि पहुँची। प्राप्त जानकारी के अनुसार भोपाल शहर में लगभग 300 फीडर पूर्ण या आंशिक रूप से प्रभावित हुए हैं। कई स्थानों पर विद्युत संरचना को गंभीर क्षति पहुँची है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी की टीम मैदान में कार्य कर रही है। सभी स्थानों पर यथाशीघ्र विद्युत प्रवाह शुरू करने युद्ध स्तर पर कार्रवाई की जा रही है। ऊर्जा मंत्री  तोमर ने लिय जायजा ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने शहर के विभिन्न स्थानों पर पहुँचकर आँधी-अँधड़ से हुए नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को अतिशीघ्र विद्युत प्रवाह शुरू करने के लिये अधिकारियों को निर्देशित किया है।

सुशासन तिहार के तहत सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम भीखमपुरा पहुंचे मुख्यमंत्री, ग्रामीणों से किया सीधा संवाद

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने सुशासन तिहार के अंतर्गत आज सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम भीखमपुरा में आयोजित जनचौपाल में ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा क्षेत्र के विकास के लिए अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। गौशाला परिसर में आयोजित जनचौपाल में मुख्यमंत्री पारंपरिक खाट पर बैठकर ग्रामीणों, महिलाओं, जनप्रतिनिधियों एवं स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से रूबरू हुए और उनकी समस्याओं, सुझावों तथा अपेक्षाओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सुशासन तिहार केवल एक प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि शासन और जनता के बीच विश्वास, संवाद और जवाबदेही को मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रही है और उनके त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण समाधान के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आमजन से प्राप्त आवेदनों और शिकायतों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की योजनाओं का वास्तविक मूल्यांकन तभी संभव है जब सरकार स्वयं लोगों के बीच जाकर उनकी प्रतिक्रिया प्राप्त करे। इसी उद्देश्य से प्रदेशभर में जनचौपालों और समाधान शिविरों का आयोजन किया जा रहा है।  मुख्यमंत्री  साय ने जनचौपाल में उपस्थित ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास और जनकल्याण का लाभ पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, किसानों के हित में संचालित विभिन्न योजनाओं, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना तथा महिला स्व-सहायता समूहों के सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका लाभ प्रत्येक पात्र हितग्राही तक पहुंचे। जनचौपाल के दौरान ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत मांगों पर मुख्यमंत्री ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने सपेरा समाज के लिए सर्वसुविधायुक्त सामुदायिक भवन के निर्माण, बस्ती क्षेत्र में मंगल भवन निर्माण, गांव की आंतरिक गलियों में सीसी रोड निर्माण तथा चंडी मंदिर के समीप स्थित डबरी तालाब के सौंदर्यीकरण की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने ग्राम की प्राथमिक शाला का नामकरण पंडित हृदयानंद पाणिग्राही के नाम पर किए जाने की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों का विकास राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और अधोसंरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क तथा आजीविका के क्षेत्र में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों से शासन की योजनाओं का लाभ लेने और विकास कार्यों में सक्रिय सहभागिता निभाने का आग्रह किया। इस अवसर पर वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने कहा कि भीषण गर्मी के बीच मुख्यमंत्री का सीधे गांव पहुंचकर लोगों से संवाद करना उनकी संवेदनशील कार्यशैली और जनसेवा के प्रति समर्पण का परिचायक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में विकास और सुशासन को नई दिशा मिली है तथा शासन की योजनाओं का लाभ तेजी से अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है। कार्यक्रम मे मुख्यमंत्री के सचिव  पी. दयानंद, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव  रजत बंसल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे।        

विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) पर कुकरैल में होगा वृहद पौधरोपण, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे शुभारंभ

लखनऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर विश्व पर्यावरण दिवस पर शुक्रवार को ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत व्यापक स्तर पर पौधरोपण किया जाएगा। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कुकरैल वन क्षेत्र से इसका शुभारंभ करेंगे। उनके नेतृत्व में पूरे राज्य में एक दिन में 5 करोड़ पौधरोपण किए जाएंगे। इसके लिए सभी विभागों व मंडलों के लक्ष्य निर्धारित कर दिए गए हैं। पर्यावरण दिवस पर वन विभाग की तरफ से इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में मुख्य आयोजन होगा, जिसमें मुख्यमंत्री भी शामिल होंगे।  कुकरैल वन क्षेत्र में होगा वृहद पौधरोपण  ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत कुकरैल वन क्षेत्र में वृहद पौधरोपण होगा। सबसे पहले यहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पौधरोपण करेंगे। यहां 200 से अधिक पौधे लगाए जाएंगे। इस कार्यक्रम में वन मंत्री अरुण सक्सेना, प्रभारी मंत्री, प्रमुख सचिव, विभागाध्यक्ष समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे।  जनसहभागिता से प्रदेश मनाएगा उत्सव इसके पश्चात प्रदेश के 17 नगर निगमों, 825 विकास खंडों, 762 नगर निकायों समेत सभी ग्राम पंचायतों में यह अभियान पूरे दिन चलेगा। वन विभाग के संयोजकत्व में ग्राम्य विकास, पंचायती राज, कृषि, उद्यान, नगर विकास आदि विभागों के सहयोग से अमृत सरोवर, तालाबों, सड़कों, एक्सप्रेसवे, नदियों, नहरों आदि के किनारे पौधे लगाए जाएंगे। इसमें विद्यालयों, महाविद्यालयों, स्वयं सहायता समूहों, सामाजिक संगठनों आदि की भी सहभागिता होगी।  लखनऊ मंडल में 62 लाख, बरेली में 32.21 लाख व प्रयागराज में लगेंगे 32.17 लाख पौधे मंडल – लक्ष्य मेरठ- 19,06,000 सहारनपुर- 14,86,000 आगरा- 24,67,000 अलीगढ़- 18,97,000 मुरादाबाद- 27,60,000 बरेली- 32,21,000 प्रयागराज- 32,17,000 वाराणसी- 24,83,000 मीरजापुर- 28,63,000 गोरखपुर- 24,75,000 बस्ती- 16,01,000 आजमगढ़- 18,93,000 लखनऊ- 62,77,000 अयोध्या- 30,41,000 देवीपाटन- 29,34,000 कानपुर- 31,83,000 झांसी- 31,67,000 चित्रकूट- 31,29,000 ग्राम्य विकास विभाग 3 करोड़ तथा कृषि विभाग लगाएगा 75 लाख पौधे  विभाग – लक्ष्य ग्राम्य विकास विभाग- 3 करोड़  कृषि विभाग- 75 लाख  वन विभाग- 50 लाख  उद्यान विभाग- 50 लाख  पंचायती राज विभाग- 20 लाख  नगर विकास- 5 लाख कुल- 5 करोड़

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भीखमपुरा में निर्माणाधीन पीएम आवासों का किया निरीक्षण

रायपुर  सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड स्थित ग्राम भीखमपुरा पहुंचे, जहां उन्होंने सपेरा बस्ती में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्माणाधीन आवासों का निरीक्षण कर विकास कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। मुख्यमंत्री  साय ने वर्षों से मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जीवनयापन कर रहे सवरा (सपेरा) जनजाति के परिवारों से आत्मीय संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री  साय ने निर्माणाधीन आवासों का अवलोकन करते हुए कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि विकास और जनकल्याण का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र परिवार को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को सभी स्वीकृत आवासों और अन्य निर्माण कार्यों को गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण कराने के निर्देश दिए। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को बताया कि वे पिछले लगभग 35 वर्षों से कच्चे घरों में रहकर जीवनयापन कर रहे थे।प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से अब उनका पक्के घर का सपना साकार हो रहा है। हितग्राहियों ने कहा कि पहली बार उन्हें अपने परिवार के साथ सुरक्षित और सम्मानजनक आवास में रहने की उम्मीद मिली है। मुख्यमंत्री  साय ने ग्रामीणों की मांगों को गंभीरता से सुनते हुए जाति प्रमाण पत्र सहित अन्य आवश्यक प्रकरणों के त्वरित निराकरण के निर्देश अधिकारियों को दिए। इस दौरान मुख्यमंत्री  साय ने दिव्यांग हितग्राही रमाबाई सिदार को बैसाखी प्रदान कर उनकी सहायता की तथा बच्चों को चॉकलेट वितरित कर उनसे आत्मीय बातचीत की। मुख्यमंत्री की सहजता और अपनत्व से ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिला। उल्लेखनीय है कि भीखमपुरा की सपेरा बस्ती में 68 परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास, सीसी रोड तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। यहां प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, जल जीवन मिशन सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ हितग्राहियों तक पहुंचाया जा रहा है। वर्ष 2024-25 में 25 आवास, वर्ष 2025-26 में 14 आवास तथा मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 14 आवास स्वीकृत किए गए हैं। वहीं 10 अन्य पात्र परिवारों को आवास प्लस 2.0 सर्वे में शामिल किया गया है। कार्यक्रम के दौरान ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कदम का पौधा तथा वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने बरगद का पौधा रोपित किया। परिसर में कुल पांच पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य का संदेश दिया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।