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टिश्यू कल्चर तकनीक से किसानों की बढ़ेगी आय, वन मंत्री केदार कश्यप ने बताए फायदे

रायपुर ; टिश्यू कल्चर तकनीक से किसानों को मिलेगा अधिक लाभ : वन मंत्री केदार कश्यप उन्नत सागौन रोपण पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित निजी भूमि पर सागौन रोपण के लिए शासन दे रहा 100 प्रतिशत तक अनुदान रायपुर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप आज अरण्य भवन, नवा रायपुर में आज “सागौन प्रबंधन एवं उन्नत सागौन रोपण” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में  शामिल हुए। कार्यक्रम में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण पाण्डेय, वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। उन्नत सागौन रोपण पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित सागौन है सुरक्षित और लाभकारी हरित निवेश कार्यशाला को संबोधित करते हुए वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि सागौन (टीक) का प्रबंधन और उन्नत रोपण उच्च गुणवत्ता वाली इमारती लकड़ी के उत्पादन और शानदार मुनाफे का सौदा है स उन्होंने कहा कि सागौन विश्व की सबसे मूल्यवान इमारती लकड़ियों में से एक है। इसकी मजबूती, टिकाऊपन और दीमक-रोधी गुणों के कारण इसे लकड़ी का राजा कहा जाता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार लोग भविष्य की सुरक्षा के लिए बैंक में निवेश करते हैं, उसी तरह सागौन का पौधा लगाना भी एक दीर्घकालिक और सुरक्षित निवेश है। इससे किसानों को भविष्य में बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त हो सकता है। टिश्यू कल्चर पौधों से बढ़ेगी उत्पादकता वन मंत्री कश्यप ने किसानों को आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए बताया कि टिश्यू कल्चर तकनीक से तैयार सागौन के पौधे सामान्य पौधों की तुलना में तेजी से बढ़ते हैं। इन पौधों का तना सीधा और गुणवत्तापूर्ण होता है, जिससे बेहतर गुणवत्ता की लकड़ी प्राप्त होती है और किसानों की आय बढ़ती है। अंतरवर्ती फसलों से होगी अतिरिक्त आमदनी कश्यप ने बताया कि किसान सागौन रोपण के शुरुआती वर्षों में पौधों के बीच खाली स्थान पर दलहन, तिलहन अथवा अन्य फसलें लेकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। वहीं 8 से 10 वर्ष बाद वृक्षों की छंटाई (थिनिंग) से भी आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। राज्य शासन द्वारा निजी भूमि पर व्यावसायिक वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष अनुदान दिया जा रहा है। 5 एकड़ तक के किसानों को 100 प्रतिशत अनुदान छोटे और सीमांत किसानों के लिए 5 एकड़ तक सागौन रोपण पर 100 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है। इसके तहत प्रति पौधा 94.50 रुपये की सहायता प्रदान की जाती है। बड़े वृक्षारोपण प्रकल्पों को 50 प्रतिशत सहायता 5 एकड़ से अधिक क्षेत्र में वृक्षारोपण करने वाले किसानों एवं संस्थाओं को 50 प्रतिशत वित्तीय अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। विशेषज्ञ वैज्ञानिकों ने दी आधुनिक जानकारी कार्यशाला में कोयम्बटूर से आईं प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. रेखा आर. वारियर और डॉ. आर. यशोदा ने किसानों को उन्नत सागौन उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने मिट्टी के चयन, पौधों की देखभाल, रोग प्रबंधन तथा टिश्यू कल्चर आधारित पौधों की विशेषताओं पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया। छत्तीसगढ़ में सागौन उत्पादन की व्यापक संभावनाएं विशेषज्ञों ने बताया कि छत्तीसगढ़ की जलवायु और मिट्टी सागौन उत्पादन के लिए अत्यंत उपयुक्त है। बीजापुर, भोपालपटनम, कोटा, अंबागढ़ चौकी, रायगढ़, सराईपाली और नारायणपुर सहित कई क्षेत्रों में सागौन आधारित कृषि वानिकी किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकती है। खेत में सागौन, हर किसान समृद्ध किसानों से अपील कार्यशाला के समापन अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप ने किसानों से बड़े पैमाने पर सागौन रोपण अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि  श्खेत में सागौन, हर किसान समृद्धश् का संकल्प प्रदेश में हरित विकास और ग्रामीण आर्थिक सशक्तिकरण का नया अध्याय लिखेगा।

CM डॉ. यादव से हिंदुस्तान कोका-कोला बेवरेजेस के CEO हेमंत रुपानी की मुलाकात, निवेश और उद्योग पर हुई चर्चा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से हिंदुस्तान कोका-कोला बेवरेजेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हेमंत रुपानी ने की भेंट हिंदुस्तान कोका कोला समूह मध्यप्रदेश में करेगा 300 करोड़ रुपये का निवेश भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से हिंदुस्तान कोका-कोला बेवरेजेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हेमंत रुपानी ने मंत्रालय में सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रूपानी को प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण को प्रोत्साहित करने के लिए संचालित योजनाओं गतिविधियों की जानकारी दी। रूपानी ने राज्य सरकार की उद्योग मित्र नीतियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि हिंदुस्तान कोका कोला समूह मध्यप्रदेश में 300 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बना रहा है। इससे रोजगार के अवसर सृजित होंगे। उल्लेखनीय है कि राजगढ़ जिले के पिलूखेड़ी इंडस्ट्रियल एरिया में हिंदुस्तान कोका-कोला बेवरेजेस की इकाई पहले से ही संचालित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट के दौरान हिंदुस्तान कोका-कोला के नेशनल हेड विवेक झा, राज्य प्रमुख सुअश्विनी यीलेने तथा औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।  

शिक्षा सुधारों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी, उत्कृष्ट अधिकारियों को परख रही योगी सरकार

शिक्षा सुधारों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार हेतु उत्कृष्ट अधिकारियों को परख रही योगी सरकार  भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय से संबद्ध राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए प्रदेश में शुरू हुई चयन प्रक्रिया  अवार्ड फॉर इनोवेशन एंड गुड प्रैक्टिसेज इन एजुकेशनल एडमिनिस्ट्रेशन के लिए 4 बीएसए और 6 बीईओ का होगा चयन  नवाचार, सुशासन, अधिगम सुधार और जनभागीदारी आधारित प्रयासों को मिलेगा राष्ट्रीय मंच  जमीनी स्तर पर शिक्षा में बदलाव लाने वाले अधिकारियों की उपलब्धियों को मिलेगी पहचान लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश शिक्षा सुधारों को केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं रख रहा, बल्कि जमीनी स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में भी सक्रिय कदम उठा रहा है। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय से संबद्ध प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार ‘अवार्ड फॉर इनोवेशन एंड गुड प्रैक्टिसेज इन एजुकेशनल एडमिनिस्ट्रेशन’ के लिए प्रदेश में चयन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।  शिक्षा प्रशासन में नवाचार, सुशासन, अधिगम सुधार, प्रभावी प्रबंधन और जनभागीदारी आधारित उल्लेखनीय कार्य करने वाले अधिकारियों का चयन कर उनके नाम राष्ट्रीय स्तर पर भेजे जाएंगे। यह पहल उत्तर प्रदेश में विकसित हो रहे शिक्षा सुधारों और नवाचारी प्रशासनिक मॉडलों को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। चयनित होंगे चार बीएसए और छ: बीईओ अपर राज्य परियोजना निदेशक प्रेम रंजन सिंह द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार पुरस्कार के लिए उत्तर प्रदेश से 4 जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) तथा 6 खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) का चयन किया जाएगा। इसके लिए सभी जनपदों को निर्देशित किया गया है कि वे शिक्षा प्रशासन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों का विवरण निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध कराएं। चयन के दौरान नवाचार, बेहतर प्रबंधन, सामुदायिक सहभागिता, अधिगम स्तर में सुधार, विद्यालयी व्यवस्थाओं के सुदृढ़ीकरण तथा विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश से चयनित अधिकारी राष्ट्रीय स्तर पर राज्य का प्रतिनिधित्व करेंगे और अपने कार्यों के माध्यम से प्रदेश में लागू शिक्षा सुधारों की प्रभावशीलता को प्रदर्शित करेंगे। क्या है ‘अवार्ड फॉर इनोवेशन एंड गुड प्रैक्टिसेज इन एजुकेशनल एडमिनिस्ट्रेशन’ उल्लेखनीय है कि ‘अवार्ड फॉर इनोवेशन एंड गुड प्रैक्टिसेज इन एजुकेशनल एडमिनिस्ट्रेशन’ भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय से संबद्ध राष्ट्रीय स्तर की पहल है। इसका उद्देश्य शिक्षा प्रशासन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित करना तथा देशभर में सफल प्रशासनिक नवाचारों और प्रभावी कार्यप्रणालियों को पहचान दिलाना है।  यह हैं निर्देश निर्देशों में कहा गया है कि जनपद ऐसे अधिकारियों के नाम प्रस्तावित करें, जिन्होंने शिक्षा प्रशासन में नवाचार आधारित कार्यप्रणाली अपनाकर उल्लेखनीय परिणाम प्राप्त किए हों। विशेष रूप से वे अधिकारी प्राथमिकता में रहेंगे जिनके प्रयासों से विद्यार्थियों के अधिगम स्तर, विद्यालय प्रबंधन, सामुदायिक सहभागिता या शैक्षणिक वातावरण में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला हो। प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और परिणाम आधारित प्रशासनिक संस्कृति को सुदृढ़ करने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए होने वाला यह चयन न केवल उत्कृष्ट अधिकारियों को पहचान दिलाएगा, बल्कि शिक्षा प्रशासन में नवाचार, प्रतिस्पर्धा और बेहतर प्रदर्शन की संस्कृति को भी प्रोत्साहित करेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीते वर्षों में बुनियादी शिक्षा के क्षेत्र में अनेक व्यापक परिवर्तन देखने को मिले हैं। निपुण भारत मिशन, बाल वाटिका, विद्यालय कायाकल्प, स्मार्ट कक्षाएं, डिजिटल शिक्षण संसाधन, मिशन प्रेरणा, शिक्षक प्रशिक्षण और अधिगम गुणवत्ता सुधार जैसे कार्यक्रमों ने विद्यालयी शिक्षा को नई दिशा प्रदान की है। इन पहलों को सफलतापूर्वक धरातल तक पहुंचाने में जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यही कारण है कि अब ऐसे अधिकारियों की पहचान कर उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर अवसर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को गति दी जा रही है।

CM विष्णु देव साय के निर्देश पर अवैध खनन पर बड़ा एक्शन, 7 वाहन जब्त

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर अवैध खनन के खिलाफ सख्त अभियान, 7 वाहन जप्त अवैध खनन और परिवहन पर सरकार का शिकंजा, अधिकारियों से अभद्रता करने वालों पर भी एफआईआर रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध कार्रवाई लगातार तेज की जा रही है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि खनिज संपदा के अवैध दोहन तथा शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने जैसी गतिविधियों को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी कड़ी में संचालक भौमिकी एवं खनिकर्म तथा केंद्रीय खनि उड़नदस्ता प्रभारी रजत बंसल के निर्देशन में केंद्रीय खनि उड़नदस्ता और संबंधित जिला प्रशासन की संयुक्त टीमों ने 22 जून को मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, सूरजपुर और सरगुजा जिलों में व्यापक जांच अभियान चलाया। शिकायतों के आधार पर की गई इस कार्रवाई में विभिन्न स्थानों पर खनिजों के अवैध परिवहन में संलिप्त कुल सात वाहनों को जप्त किया गया। जांच के दौरान मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के बरबसपुर क्षेत्र में निम्न श्रेणी चूना पत्थर से लदे दो हाइवा, सूरजपुर जिले के लटोरी में रेत से भरा एक हाइवा तथा खड़गवां में एक टिप्पर पकड़ा गया। वहीं सरगुजा जिले के सकालो और अंबिकापुर क्षेत्र में रेत परिवहन कर रहे तीन टिप्परों पर कार्रवाई की गई। सभी वाहनों को खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 के प्रावधानों के तहत जप्त कर संबंधित थानों में सुरक्षित रखा गया है। कार्रवाई के दौरान अंबिकापुर के गांधी चौक क्षेत्र में एक गंभीर घटना भी सामने आई। जांच कर रही टीम के साथ वाहन मालिक, चालक और उनके सहयोगियों द्वारा कथित रूप से अभद्र व्यवहार, गाली-गलौच और धमकी दी गई तथा शासकीय कार्य में व्यवधान उत्पन्न किया गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत थाना गांधीनगर में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। खनिज विभाग ने दोहराया है कि अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। विभाग ने चेतावनी दी है कि कानून का उल्लंघन करने, अधिकारियों को धमकाने अथवा अवैध गतिविधियों को संरक्षण देने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। राज्य शासन का मानना है कि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और राजस्व हितों की रक्षा के लिए प्रभावी प्रवर्तन आवश्यक है। इसी उद्देश्य से प्रदेशभर में संयुक्त निरीक्षण, निगरानी और कार्रवाई की प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि अवैध खनन गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

Tata Electronics में हड़कंप: 630GB डेटा लीक की खबर, Apple-Tesla के दस्तावेज भी बताए जा रहे शामिल

नई दिल्ली भारत की कंपनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, जो चिपसेट, स्मार्टफोन पार्ट्स और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स बनाती है. रिपोर्ट के मुताबिक, हैकर्स ने कंपनी के सिस्टम डेटा को हैक कर लिया और कई सीक्रेट फाइल्स चुरा ली है. इसके बाद हैकर्स की तरफ से पैसे की मांग की जा रही है।  बताया जा रहा है कि इस डेटा लीक में कई ऐसी सीक्रेट फाइल्स शामिल हैं, जिनसे कंपनी की जरुरी जानकारियां दुनिया के सामने आ सकती हैं. रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ऐपल और टेस्ला जैसी कंपनियों को टेक्नोलॉजी और पार्ट्स की सप्लाई कर रही थी।  जानिए कौन-सा डेटा हुआ चोरी, जिसके बाद मचा हड़कंप रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के सिस्टम में हैकर्स ने रैनसमवेयर नाम का वायरस डाला था. यह वायरस सिस्टम की फाइल्स और डेटा को लॉक कर देता है. इसके बाद हैकर्स डेटा वापस देने के बदले फिरौती की मांग करते हैं।  डेटा लीक के बाद डार्क वेब पर करीब 630GB का डेटा पोस्ट किया गया है. इसमें कंपनी की सीक्रेट जानकारी, ईमेल्स, कर्मचारियों की डिटेल्स और ऐपल से जुड़े डिजाइन डॉक्यूमेंट्स शामिल बताए जा रहे हैं. ऐपल और टेस्ला दोनों ही टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के बड़े कस्टम में शामिल हैं।  कैसे लगी सेंध, क्या-कुछ हुआ लीक? रिपोर्ट्स में पता चला है कि डेटा लीक होने की वजह एक मिडिलवेयर फर्म के पुराने क्रेडेंशियल्स यानी कि आईडी-पासवर्ड थे। हैकर्स ने उनका इस्तेमाल करके डेटा लीक किया। बता दें कि लीक हुए डेटा में एप्पल के सप्लायर स्पेसिफिकेशन्स और टेस्ला के मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े बेहद प्राइवेट डॉक्यूमेंट्स देखने को मिले हैं। इतना ही नहीं चोरी हुए डेटा में कंपनियों के ग्राहकों की बिजनेस संबंधी जानकारी जैसे कि नाम, ईमेल आईडी, फोन नंबर और जॉब प्रोफाइल आदि भी शामिल है।(REF.) कंपनियों को मिली फिरौती की धमकी इस साइबर हमले की जिम्मेदारी एक कुख्यात साइबरक्राइम ग्रुप इकारस ने ली है। हैकर्स ने चेतावनी तक दी है कि अगर टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और संबंधित कंपनियां उन्हें समय पर फिरौती की रकम नहीं देती, तो वे पूरे डेटा को पब्लिक कर देंगे। इसे लेकर सुरक्षा कंपनी हंट्रेस ने खुलासा किया है कि हैकर्स ने उन्हें एक ऑस्ट्रेलियाई कंपनी के सर्वर का इस्तेमाल करके फिरौती का ईमेल भेजा था। डेटा लीक की पुष्टि होने के बाद क्लू ने सुरक्षा फर्म क्राउडस्ट्राइक को जांच के लिए बुलाया है। बाकी का डेटा सुरक्षित रखने के लिए सुरक्षा फर्म ने सभी लिंक्स को तोड़ दिया है। क्यों हुई सुरक्षा में चूक? यह साइबर हमला इस तरह का था जिसमें हैकर्स एक कंपनी को निशाना बनाकर उससे जुड़ी सैकड़ों कंपनियों का डेटा चुरा लेते हैं। रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि क्लू के किसी कर्मचारी द्वारा अनजाने में पासवर्ड चुराने वाला मैलवेयर डाउनलोड करने की वजह से पुराने क्रेडेंशियल लीक हुए। यह भी बताया जा रहा है कि पिछले साल क्लू ने AI में निवेश करने के लिए आधे कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था। इसकी वजह से कंपनी की सुरक्षा कमजोर होती गई। जानिए साइबर अटैक के बाद टाटा का क्या था जवाब रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने कहा कि उन्हें इस साइबर अटैक की जानकारी कुछ हफ्ते पहले ही मिल गई थी. हालांकि, इस हमले की वजह से कंपनी की फैक्ट्री या बिजनेस ऑपरेशन पर किसी तरह का असर नहीं पड़ा है।  हैकर्स की तरफ से डेटा लीक के बाद फिरौती की मांग की गई है. वहीं, इस पूरे मामले में ऐपल भी अपनी तरफ से जांच कर रहा है।  टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स टाटा ग्रुप की तेजी से बढ़ने वाली कंपनियों में से एक है. कंपनी ने 2023 में आईफोन मैन्युफैक्चरिंग शुरू की थी. वहीं, टेस्ला ने 2024 में सेमीकंडक्टर सप्लाई को लेकर टाटा के साथ डील की थी।  टाटा ने कर्मचारियों को दी थी जानकारी रिपोर्ट में बताया गया है फाइलों में 52 पेज का एक डॉक्यूमेंट भी था, जिस पर Apple के खास निशान थे और जिसमें कथित तौर पर iPhone सर्किट बोर्ड के पार्ट्स के लिए क्वालिटी जांच के स्टैंडर्ड्स की जानकारी थी। इसमें Hosur सर्च टर्म के लिए 33 फाइलें और फोल्डर भी थे। यह तमिलनाडु राज्य में टाटा के मुख्य iPhone असेंबली प्लांट की जगह है। मामले की जानकारी रखने वाले इंडस्ट्री के एक दूसरे सूत्र ने बताया कि टाटा ने पिछले हफ्ते अपने iPhone असेंबली ऑपरेशन्स में काम करने वाले कुछ कर्मचारियों को डेटा लीक के बारे में जानकारी दी थी।  रिपोर्ट में बताया गया है फाइलों में 52 पेज का एक डॉक्यूमेंट भी था, जिस पर Apple के खास निशान थे और जिसमें कथित तौर पर iPhone सर्किट बोर्ड के पार्ट्स के लिए क्वालिटी जांच के स्टैंडर्ड्स की जानकारी थी। इसमें Hosur सर्च टर्म के लिए 33 फाइलें और फोल्डर भी थे। यह तमिलनाडु राज्य में टाटा के मुख्य iPhone असेंबली प्लांट की जगह है। मामले की जानकारी रखने वाले इंडस्ट्री के एक दूसरे सूत्र ने बताया कि टाटा ने पिछले हफ्ते अपने iPhone असेंबली ऑपरेशन्स में काम करने वाले कुछ कर्मचारियों को डेटा लीक के बारे में जानकारी दी थी।  इस साइबर अटैक के बाद कंपनियों की सीक्रेट जानकारी और डेटा सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। 

एकाधिक वोटर ID मामले में अभिनेता प्रकाश राज पर शिकंजा, कोर्ट ने जारी किया NBW

मुंबई  बॉलीवुड-साउथ एक्टर प्रकाश राज को लेकर चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है. बेंगलुरु की एक अदालत ने एक्टर प्रकाश राज के खिलाफ एक गैर-जमानती वॉरंट (एनबीडब्ल्यू) जारी किया है. ये मामला उन आरोपों से जुड़ा है कि उनके पास कई राज्यों के मतदाता पहचान पत्र हैं।  प्रकाश राज के खिलाफ वॉरंट जारी ये शिकायत 2019 में वकील दिलीप कुमार ने हलासूरू गेट पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई थी. शिकायतकर्ता का कहना है कि राज के पास चार राज्यों के मतदाता पहचान पत्र हैं, जिनमें कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना शामिल हैं और अगर ये साबित हुआ, तो यह चुनाव संबंधी नियमों का उल्लंघन होगा।  दिलीप कुमार ने कहा कि पुलिस ने शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की. उन्होंने बाद में बेंगलुरु सिटी पुलिस कमिश्नर और चुनाव आयोग से भी संपर्क किया, लेकिन वहां से भी कोई जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया. चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार किसी भी नागरिक को देश में केवल एक ही जगह मतदाता के रूप में पंजीकृत किया जा सकता है. शिकायत में आरोप है कि प्रकाश राज ने कई मतदाता पहचान पत्र रखकर इन नियमों का उल्लंघन किया।  विवादों में प्रकाश राज 48वें अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) की अदालत ने कथित तौर पर दो मौकों पर एक्टर को समन भेजे थे और अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए थे. हालांकि, प्रकाश राज दोनों तारीखों पर पेश नहीं हुए. बार-बार समन के बावजूद उनकी गैरहाजिर होने को देखते हुए अदालत ने अब उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया है, जिससे इस मामले में उनकी गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई है।  प्रकाश राज के वर्कफ्रंट की बात करें, तो वो जल्द ही दृश्यम 3 में नजर आने वाले हैं. फिल्म के 2 सीक्वल बॉक्स ऑफिस हिट रहे हैं. फैन्स को उम्मीद है कि फिल्म का तीसरा पार्ट भी सुपरहिट होगा।  

शेयर बाजार में भारी तबाही, 23 लाख करोड़ स्वाहा; हालात ऐसे कि ट्रेडिंग तक करनी पड़ी बंद

मुंबई  नई दिल्‍ली. अमेरिका में टेक शेयरों की जोरदार बिकवाली के कारण बाजार में आई गिरावट एशियाई बाजारों तक पहुंच गई है. भारतीय शेयर बाजार आज लाल निशान में कारोबार कर रहा है. समाचार लिखे जाने तक सेंसेक्‍स 574 अंक टूटकर तो 168 अंक गिरकर कारोबार कर रहा था. एशियाई बाजारों में सबसे बड़ा झटका दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार को लगा. मेन इंडेक्‍स कोस्पी 9% से ज्यादा टूट गया. भारतीय समयानुसार दिन के 11 बजकर 34 मिनट पर सर्किट लगने के बाद कोस्‍पी में ट्रेडिंग रोक दी गई. तीन घंटे में ही निवेशकों के ₹23 लाख करोड़ डूब गए।  दक्षिण कोरिया के अलावा जापान, चीन, हांगकांग और ऑस्ट्रेलिया के बाजार भी दबाव में दिखाई दिए. जापान का निक्केई 225 इंडेक्स करीब 1.5% गिर गया. चीन का सीएसआई 300 इंडेक्स लगभग 1% नीचे आ गया. हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स भी लाल निशान में कारोबार करता दिखाई दिया. ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 इंडेक्स भी फिसल गया।  अमेरिका में एआई शेयरों में गिरावट सोमवार के कारोबारी सत्र के दौरान अमेरिकी शेयर बाजार में टेक्नोलॉजी शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली. इसका असर एसएंडपी 500 और नैस्डैक जैसे प्रमुख इंडेक्स के फ्यूचर्स पर भी पड़ा है. एसएंडपी 500 फ्यूचर्स 0.53% नीचे और नैस्डैक 100 फ्यूचर्स लगभग 1% तक फिसल गए. सबसे ज्यादा दबाव उन कंपनियों पर दिखा, जिन्हें AI क्रांति का सबसे बड़ा फायदा मिलने वाला माना जा रहा था. अमेरिका की इस कमजोरी का असर दक्षिण कोरिया में दिखाई दिया. दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था और उसका शेयर बाजार एआई और सेमीकंडक्टर सेक्टर से काफी हद तक जुड़ा हुआ है।  तेजी पर सवार था कोरियाई शेयर बाजार सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स जैसी कंपनियां AI सर्वर और डेटा सेंटर में इस्तेमाल होने वाली मेमोरी चिप्स की दुनिया की सबसे बड़ी सप्लायर हैं. पिछले कई महीनों से AI की मांग बढ़ने के कारण इन कंपनियों के शेयरों में तूफानी तेजी आई थी. इस वजह से कोस्‍पी में भी जोरदार बढ़त दर्ज की गई. लेकिन आज, 23 जून को अचानक निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। 

मध्य प्रदेश में UCC बिल की तैयारी, क्या इंटरकास्ट मैरिज से प्रभावित होंगे आदिवासी अधिकार?

भोपाल   मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का ड्राफ्ट अगले 10 दिनों में तैयार हो जाएगा. देश की सबसे बड़ी आदिवासी आबादी वाले राज्य मध्यप्रदेश में यूसीसी के दायरे में आदिवासी समाज को कुछ मामलों में लाने की तैयार की जा रही है. आदिवासी समाज में अंतरजातीय विवाह करने पर उन्हें मिलने वाले आदिवासी अधिकारों को खत्म किया जा सकता है. इसे लेकर आए सुझावों पर गठित की गई उच्च स्तरीय कमेटी विचार कर ही है. उधर आदिवासियों के लिए भी विवाह का रजिस्ट्रेशन का विकल्प खुला रखा जा सकता है।  आदिवासियों की संपत्ति बंटवारे पर भी विचार समान नागरिक संहिता के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने भोपाल में अलग-अलग वर्गों से सुझाव लिए हैं. समिति सभी जिलों से सुझाव प्राप्त कर चुकी है. उच्च स्तरीय समिति की अध्यक्षता कर रहे उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह के मुताबिक, '' उम्मीद है कि अगले दस दिनों में समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट तय कर लिया जाएगा. यूसीसी के दायरे में अंतरजातीय विवाह करने वाले आदिवासी युवक-युवतियों को भी लाया जा सकता है. ऐसे मामलों में उनके संपत्ति बंटवारे को भी यूसीसी के दायरे में लाए जाने पर विचार किया जा रहा है. यूसीसी में बहु विवाह पर रोक लगाने, विवाह के रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने के साथ आदिवासियों के लिए विवाह रजिस्ट्रेशन का विकल्प रखा जाएगा।  आदिवासियों का मिल सकती है ये राहत यूसीसी के दायरे में आदिवासियों को भी लाए जाने पर सुझाव आए हैं. समिति सदस्य और उत्तरखंड के पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने कहा, '' एक विचार बिलकुल साफ है कि संविधान में अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं. उनकी परंपराओं, संस्कृति को संरक्षित रखने के लिए संविधान में अलग से व्यवस्था की गई है, इस व्यवस्था को हम नजरअंदाज नहीं कर सकते. लेकिन क्या उसके अंतर्गत रहते हुए यूसीसी के प्रावधानों का लाभ उनको दिया जाय या न दिया जाए इसको लेकर चर्चा हुई है. यदि कोई स्वैच्छिक रूप से वैवाहिक पंजीयन कराना चाहे तो करें और यदि कोई न चाहे कि उनकी संपत्ति का अधिकार यूसीसी के नियमों के तहत मिलना चाहिए, इस प्रावधान को शामिल किया जाए या न किया जाए इसको लेकर विचार चल रहा है।   गैर आदिवासी समुदाय में विवाह करने पर छिनेंगे अधिकार अनुसूचित समुदाय का कोई व्यक्ति गैर अनुसूचित समुदाय में विवाह करता है, तो उसे फैमिली लाॅ में जो अधिकार मिलते हैं वह यूसीसी से तय होंगे या उनकी पारंपरिक नियमों से तय होंगे इसको लेकर कुछ विचार आए हैं. यदि आदिवासी समाज की महिला गैर अनुसूचित जनजाति में विवाह करती है तो ऐसे में आदिवासी को मिलने वाले अधिकार को समाप्त माना जाए, क्योंकि विवाह के बाद महिला आदिवासी कल्चर को फाॅलो नहीं करेगी. इसी तरह यदि कोई आदिवासी पुरुष गैर आदिवासी महिला से विवाह करता है तो क्या उस पर भी यह नियम लागू किया जाए? इस पर समिति विचार करेगी।  मानूसन सत्र में आ सकता है विधेयक शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि यूसीसी के फाइनल ड्राफ्ट के साथ दो रिपोर्ट तैयार होंगी, इसमें एक में व्यक्तियों, विशेषज्ञों और समूहों से लिए गए सुझावों को रखा जाएगा, जबकि दूसरे में इन सुझावों का निचोड़ होंगे, जिसे ड्राफ्ट में शामिल किया जाएगा। माना जा रहा है कि सरकार यूसीसी के इस विधेयक को आगामी मानसून सत्र में पेश कर सकती है. मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव इसे लेकर पहले ही इशारा कर चुके हैं।  लिव इन रिलेशनशिप गुजरात और उत्तराखंड दोनों राज्यों में लिव इन रिलेशनशिप में रजिस्ट्रेषन अनिवार्य किया गया है.गुजरात में प्रावधान किया गया है कि 21 साल से कम आयु की स्थिति में अभिभावक को सूचित किया जाएगा. 30 दिन के अंदर रजिस्ट्रेशन कराना होगा. बिना रजिस्ट्रेशन एक माह से अधिक समय तक लिव इन में रहने पर 3 माह की कैद या 10 हजार रुपए का जुर्माने का प्रावधान है. दोनों राज्यों में लिव इन रिलेशनशिप में जन्मे बच्चे को वैध माना जाएगा और दोनों को बच्चे को अपना नाम देना होगा।  संपत्ति का अधिकार गुजरात में संपत्ति के अधिकार में प्रावधान किया गया है कि वसीयत न करने की स्थिति में पति-पत्नी और बच्चों को संपत्ति समान रूप से बांटी जाएगी. उत्तराखंड में संपत्ति पर पति या पत्नी (जो भी जीवित हो) के अलावा पुत्र के साथ पुत्री का भी समान अधिकार दिया गया है. मृतक की संपत्ति में भी दोनों के समान अधिकार दिए गए हैं. पहले उत्तराखंड में प्रावधान था कि मृतक की पत्नी को ही संपत्ति दी जाएगी। 

नौकरी के साथ कमाई के नए रास्ते! मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सबसे ज्यादा रोजगार, PG-टिफिन बिजनेस भी चमका

चंडीगढ़  पंजाब में विनिर्माण क्षेत्र सबसे अधिक रोजगार प्रदान कर रहा है। प्रदेश में कुल 3.05 लाख प्रतिष्ठान काम कर रहे हैं। इनमें से 1.27 लाख प्रतिष्ठानों में एक से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। लोग अब पेइंग गेस्ट और टिफिन सर्विस से भी कमाई कर रहे हैं। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अखिल भारतीय छठे आर्थिक सर्वे में यह जानकारी सामने आई है। सर्वे के अनुसार, सभी कृषि और गैर-कृषि गतिविधियों में बड़े प्रतिष्ठानों की भागीदारी अभी भी कम है। केवल 2.69 फीसदी प्रतिष्ठानों में ही 10 से अधिक कर्मी कार्यरत हैं। मंत्रालय ने संगठित और असंगठित क्षेत्र पर यह सर्वे किया है।  रिपोर्ट बताती है कि घरों से छोटी-मोटी गतिविधियों से कमाई की प्रवृत्ति बढ़ी है। प्रदेश में कुल 36.46 लाख प्रतिष्ठान काम कर रहे हैं। इनमें से 23.63 लाख प्रतिष्ठानों पर एक या उससे अधिक कर्मी लगे हुए हैं। खुदरा व्यापार और सेवा क्षेत्र   खुदरा व्यापार में इस समय 3.64 लाख इकाइयां कार्यरत हैं। इनमें से 91835 इकाइयों पर एक या उससे अधिक कर्मी हैं। आवास और खाद्य सेवा गतिविधियों में कुल 56,448 प्रतिष्ठान शामिल हैं। इनमें से 20,821 प्रतिष्ठानों पर एक से अधिक कर्मी काम कर रहे हैं। शहरों में अधिकतर लोग पेइंग गेस्ट चला रहे हैं। किराए पर मकान देकर और टिफिन सर्विस से भी लोग आय अर्जित कर रहे हैं। पिछले कुछ  समय से इनका चलन बढ़ा है। यह काम भी असंगठित क्षेत्र का प्रमुख हिस्सा बनता जा रहा है। पशुपालन और शिक्षा क्षेत्र प्रदेश में पशुपालन क्षेत्र में 2.61 लाख प्रतिष्ठान हैं। इनमें से 49,187 प्रतिष्ठान एक या उससे अधिक कर्मियों के साथ चल रहे हैं। पिछले कुछ समय से प्रदेश में डेयरी का चलन भी बढ़ा है। काफी संख्या में किसान परिवार कृषि के साथ ही डेयरी भी चला रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में कुल 44,325 संस्थान इस समय चल रहे हैं। इनमें से 36,763 प्रतिष्ठानों पर एक से अधिक कर्मी हैं। शिक्षा में बढ़ती प्रतियोगिता के कारण कोचिंग संस्थानों की संख्या पहले से बढ़ रही है। निर्माण और अन्य सेवाएं निर्माण कार्य में कुल 31,654 प्रतिष्ठान चल रहे हैं। इनमें से 8849 संस्थान अन्य लोगों के लिए भी रोजगार का साधन बन रहे हैं। मछली पालन के कुल 291 प्रतिष्ठान हैं। इनमें से 74 प्रतिष्ठान एक और अधिक कर्मियों से चल रहे हैं। बिजली, गैस और एयर कंडीशनिंग की आपूर्ति में लगे प्रतिष्ठानों की कुल संख्या 1350 है। इनमें 1277 प्रतिष्ठानों पर एक से ज्यादा कर्मी काम कर रहे हैं। पानी की आपूर्ति, सीवरेज और कचरा प्रबंधन में 16,097 प्रतिष्ठान शामिल हैं। इनमें से 6409 संस्थान और लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं। मोटर वाहनों व मोटरसाइकिलों की मरम्मत के काम में कुल 47,167 प्रतिष्ठान हैं। इनमें से 21,146 प्रतिष्ठानों में एक या ज्यादा कर्मी काम कर रहे हैं। कला, मनोरंजन और खेल में भी कुल 10,013 संस्थान कार्यरत हैं।

अलीगढ़ से सीधे घटनास्थल और अस्पताल पहुंचे CM योगी, हाईलेवल बैठक के बाद ताबड़तोड़ एक्शन

अलीगढ़ से सीधे घटनास्थल और अस्पताल पहुंचे सीएम योगी, हाईलेवल मीटिंग के बाद ताबड़तोड़ एक्शन -4 अभियुक्त गिरफ्तार, 4 अफसर तत्काल प्रभाव से सस्पेंड -अब SIT के निशाने पर बड़े अफसर, जांच में तय होगी बड़े अफसरों की जवाबदेही    लखनऊ  अलीगंज अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ताबड़तोड़ एक्शन के मूड में दिख रही है। इमारत में जिस वक्त हादसा हुआ, मुख्यमंत्री अलीगढ़ के दौरे पर लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने मंच से घटना की जानकारी मिलने की बात बताई और सभी कार्यक्रमों को रद्द करने की घोषणा के बाद लखनऊ ने लिए निकल पड़े। इससे पहले उन्होंने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक समेत तमाम अफसरों को मौके पर पहुंच कर राहत बचाव कार्य के निर्देश जारी कर चुके थे।  कार्यक्रम से निकलने के बाद लखनऊ पहुंचते ही मुख्यमंत्री सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचे और राहत बचाव कार्य का जायजा लिया। घटना के बाद किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज में घायलों की व्यवस्था का निरीक्षण करते हुए हाल चाल जाना। मौके पर मौजूद चिकित्सकों से घायलों का हाल चाल जाना और बेहतर इलाज के लिए चिकित्सकों को निर्देशित किया।  दुर्घटना के शिकार बने मृतकों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट करते हुए मुख्यमंत्री ने तत्काल 5-5 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की। घायलों को 50-50 हजार रुपये मदद का ऐलान किया गया।  मुख्यमंत्री के निर्देश पर चार लोगों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया गया।  1)    गौरव कुमार, एक्सेन कलेक्शन (बिजली विभाग) जानकीपुरम  2)    कमलेन्द्र कुमार सिंह, FSSO (फायर विभाग) इंदिरा नगर  3)    अनिल कुमार, AE (LDA) 4)    प्रमोद पांडे, JE (LDA) हाई लेवल मीटिंग और ताबड़तोड़ एक्शन किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज से निकलने के बाद मुख्यमंत्री ने पाँच कालीदास मार्ग स्थित अपने आवास पर हाईलेवल मीटिंग आयोजित की जिसमें सभी बड़े और प्रमुख अफसर शामिल हुए। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अमृत अभिजात, अपर मुख्य सचिव, पर्यटन, धर्मार्थ और संस्कृति विभाग व प्रवीण कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक लखनऊ जोन के नेतृत्व में दो सदस्यीय विशेष जांच दल के गठन का निर्देश दिया।  ताबड़तोड़, बड़े अफसरों पर भी कसेगा शिकंजा अग्निकांड के तीन अभियुक्तों- रामकृष्ण उपाध्याय (निवासी अलीगंज), वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (निवासी बड़ा दुर्गा मंदिर सीतापुर रोड लखनऊ), तूशॉक कृष्णा जायसवाल (निवासी बालागंज, लखनऊ) और सुरेश कुमार साहू (निवासी मड़ियांव) को गिरफ्तार किया गया।  गिरफ़्तारी की कार्रवाई के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर चार अफसरों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया गया। ये अफसर हैं बिजली विभाग के जानकीपुरम एक्सेन कलेक्शन गौरव कुमार, FSSO (फायर विभाग) इंदिरा नगर के प्रभारी कमलेन्द्र कुमार सिंह, लखनऊ विकास प्राधिकरण के AE अनिल कुमार और लखनऊ विकास प्राधिकरण के JE प्रमोद पांडे।  विशेष जांच दल को सात दिनों के अंदर अपनी जांच पूरी करके मुख्यमंत्री को सौंपना है। जांच के दायरे में कई बड़े अफसरों के आने की आशंका है। 2016 में निरस्त किया गया था बिल्डिंग के खिलाफ ध्वस्तीकरण का आदेश अवैध निर्माण पर हुआ था ध्वस्तीकरण का आदेश, दो माह से कम समय में पलट गया था फैसला लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड के बाद अब भवन से जुड़े पुराने दस्तावेज और प्राधिकरण की कार्रवाई गंभीर सवालों के घेरे में हैं। सोमवार को जिस भवन में आग लगने की यह दुःखद घटना हुई, उसके खिलाफ वर्ष 2016 में अवैध निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया था, लेकिन दो माह से कम समय में ही उस आदेश को निरस्त भी कर दिया गया। 1980 में हुआ था आवंटन अलीगंज योजना के सेक्टर-डी स्थित भवन संख्या एमएस/102/डी मूल रूप से 11 जुलाई 1980 को लॉटरी प्रणाली के तहत विजय कुमार पुत्र रामेश्वर सहाय को किराया-क्रय पद्धति पर आवंटित किया गया था। 4 नवंबर 1980 को अनुबंध निष्पादित होने के बाद भवन का कब्जा आवंटी को सौंप दिया गया। 2005 में यह भवन विक्रय विलेख के जरिए विजय कुमार और उनकी पत्नी उषा के नाम दर्ज हुआ। वहीं 19 जनवरी 2013 को इन लोगों ने यह भवन वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला और सुरेन्द्र प्रताप शुक्ला के नाम बेच दिया। 7 अगस्त 2014 को लखनऊ विकास प्राधिकरण ने वीरेन्द्र व सुरेन्द्र के पक्ष में नामांतरण की प्रक्रिया पूरी की। करीब 1992 वर्गफीट क्षेत्रफल वाले इस भवन का मानचित्र 20 अगस्त 2014 को स्वतः मानचित्र योजना के तहत आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया था। ध्वस्तीकरण आदेश निरस्त होने पर उठे सवाल हालांकि, बाद में भवन में अनधिकृत निर्माण की बात सामने आई। इसके बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण ने वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला के खिलाफ मुकदमा संख्या-08/2016 दर्ज कराया। जांच के बाद विहित प्राधिकारी ने 10 मई 2016 को अनधिकृत निर्माण के विरुद्ध ध्वस्तीकरण आदेश पारित कर दिया। लेकिन, ध्वस्तीकरण आदेश जारी होने के दो माह के अंदर ही 5 जुलाई 2016 को इस आदेश को निरस्त भी कर दिया गया।