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14 जनवरी के स्नान पर्व में 85 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किया पुण्य स्नान – ऋषिराज, माघ मेला अधिकारी

षटतिला एकादशी, मकर संक्रांति स्नान के लिए संगम में उमड़ा आस्था का ज्वार 14 जनवरी के स्नान पर्व में 85 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किया पुण्य स्नान – ऋषिराज, माघ मेला अधिकारी श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते प्रशासन ने बढ़ाई चौकसी, निगरानी के लिए पहली बार तीन कंट्रोल सेंटर रोडवेज की तरफ से 1800 बसों का संचालन, एक्शन में क्यूआरटी टीमें मेला प्रशासन के साथ रेलवे का समन्वय, आवागमन के लिए रेलवे की 8 रिंग रेल सेवा व 16 ट्रेनों के ठहराव का विस्तार, 1.20 लाख क्षमता के 18 यात्री आश्रय स्थल तैयार प्रयागराज  प्रयागराज के संगम तट पर आयोजित माघ मेले का दूसरा बड़ा स्नान पर्व 'मकर संक्रांति' माघ मेला प्रशासन की दृष्टि में भले ही 15  जनवरी को है, लेकिन 14 जनवरी को संगम के विभिन्न घाटों में आस्था का ज्वार उमड़ पड़ा। बुधवार को षटतिला एकादशी और अपराह्न बाद मकर संक्रांति स्नान का मुहूर्त शुरू हो जाने की वजह से बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगम में पुण्य की डुबकी लगाने के लिए भोर से ही घाटों पर पहुंचने लगे। मेला अधिकारी ऋषिराज के मुताबिक, दोपहर 12 बजे तक ही श्रद्धालुओं की संख्या 50 लाख पहुंच गई। परंपरागत रूप में 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति मानकर पुण्य की डुबकी लगाने वालों का आंकड़ा बुधवार शाम तक ही 85 लाख को पार कर चुका था। व्यवस्था और जनसुविधाओं का किया गया विस्तार माघ मेला क्षेत्र में आ रही श्रद्धालुओं की विशाल संख्या को देखते पहले से सजग मेला प्रशासन ने भी अपनी जन सुविधाओं का विस्तार कर दिया है। मेला अधिकारी प्रयागराज के मुताबिक, श्रद्धालुओं के लिए 24 स्नान घाटों का निर्माण किया गया है। घाटों की लंबाई  बढ़ाकर 3.69 किमी कर दी गई है। महाकुंभ में घाटों के किनारे ड्रेजिंग से भी एरिया में बढ़ोतरी हुई है। घाटों के किनारे महिलाओं के लिए 1200 से अधिक चेंजिंग रूम बनाए गए हैं। पहली बार पक्के घाटों के पास कैनोपी आकार के अस्थायी फोल्ड करने वाले चेंजिंग रूम भी बनाए गए हैं। श्रद्धालुओं की नियमित रूप से निगरानी के लिए तीन कंट्रोल सेंटर बनाए गए हैं। इनमें एक आई ट्रिपल सी में, दूसरा पुलिस लाइन में और तीसरा जिला कलेक्ट्रेट में है।  सुगम आवागमन और भीड़ प्रबंधन के लिए एक्शन मोड में रोडवेज और रेलवे श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम बनाने के लिए रोडवेज और रेलवे दोनों मेला प्रशासन के साथ रणनीति बनाकर कार्य कर रहे हैं। डीएम प्रयागराज मनीष कुमार वर्मा ने बताया कि रोडवेज की 1800 बसें इसके लिए तैयार हैं। रोडवेज की क्यूआरटी टीमें भी हर आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।  रेलवे की तरफ से रिंग रेल सेवा के अंतर्गत 8 ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है, जो पूरी मेला अवधि तक होगा। श्रद्धालु यात्रियों की अतिरिक्त सुविधा के लिए 16 ट्रेनों का 02 मिनट का अतिरिक्त अस्थायी ठहराव प्रयागराज रामबाग एवं झूसी स्टेशनों पर दिया गया है। भीड़ प्रबंधन के लिए स्टेशन में एंट्री पॉइंट्स में एकल व्यवस्था रखी गई है। जंक्शन रेलवे स्टेशन में 18 यात्री आश्रय बनाए गए हैं, जिनकी क्षमता 1.20 लाख यात्रियों की है। रेलवे स्टेशन परिसर में 1186 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।

देश में अग्रणी राज्यों में, उत्तर प्रदेश में 2316 ईवी चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना

इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग में यूपी की मजबूत छलांग, हरित परिवहन में निर्णायक कदम देश में अग्रणी राज्यों में, उत्तर प्रदेश में 2316 ईवी चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना योगी सरकार की नीति से पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक अवसर लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश स्वच्छ ऊर्जा और हरित परिवहन की दिशा में लगातार ठोस कदम उठा रहा है। देश में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग अवसंरचना के विकास और विस्तार के बीच उत्तर प्रदेश अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रहा है। प्रदेश में पिछले पांच सालों में 2,316  इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं। यह उपलब्धि प्रदेश के बढ़ते शहरीकरण और औद्योगिक विकास को दर्शानें के साथ-साथ योगी सरकार की दूरदर्शी नीतियों का भी स्पष्ट प्रमाण हैं। याहवी ग्रुप के सीईओ संदीप यादव का कहना है कि उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन को स्थापित करने की दिशा में तेजी आगे बढ़ रहा है। याहवी ग्रुप की ओर से उत्तर प्रदेश के मथुरा और वृंदावन में ईवी चार्जिंग स्टेशन (ट्रकों के लिए)  स्थापित किये गए हैं।   चार्जिंग नेटवर्क में उत्तर प्रदेश की मजबूत हिस्सेदारी देश भर में स्थापित कुल 29,151 इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशनों में उत्तर प्रदेश का उल्लेखनीय योगदान है। प्रदेश में स्थापित 2,316 चार्जिंग स्टेशनों में 540 फास्ट चार्जर और 1,776 स्लो चार्जर शामिल हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि प्रदेश सरकार ने शहरी और अर्ध शहरी दोनों क्षेत्रों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए संतुलित चार्जिंग नेटवर्क विकसित किया है। लखनऊ,  नोएडा,  ग्रेटर नोएडा,  गाजियाबाद,  कानपुर, वाराणसी,  प्रयागराज और आगरा जैसे प्रमुख शहरों में ईवी चार्जिंग सुविधाओं का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। योगी सरकार की स्पष्ट नीति और विजन उत्तर प्रदेश को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश को अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करना सरकार की प्राथमिकता में सम्मिलित है। इसी उद्देश्य से प्रदेश में निवेश अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए निजी कंपनियों और निवेशकों को लगातार प्रोत्साहन मिल रहा है।  पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास का संतुलन योगी सरकार का फोकस विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी है। इलेक्ट्रिक वाहनों और चार्जिंग अवसंरचना के विस्तार से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और प्रदूषण नियंत्रण को मजबूती मिलेगी। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और घनी आबादी वाले प्रदेश में यह पहल वायु गुणवत्ता सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है। इसके साथ ही पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम होने से अर्थव्यवस्था को भी दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। केंद्र सरकार के साथ प्रभावी समन्वय केंद्र सरकार की फेम-1 और फेम-2 योजनाओं के अंतर्गत देश भर में 9,576 ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं, जिनका लाभ उत्तर प्रदेश को भी मिला है। इसके अतिरिक्त पीएम ई-ड्राइव योजना के अंतर्गत ईवी चार्जिंग विस्तार के लिए 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।  भविष्य की दिशा और तैयारी विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले कुछ साल में उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में तेज वृद्धि होगी। इसे ध्यान में रखते हुए योगी सरकार एक्सप्रेस-वे,  औद्योगिक क्षेत्रों,  बस अड्डों,  रेलवे स्टेशनों और पर्यटन स्थलों पर चार्जिंग स्टेशन विकसित करने की रणनीति पर काम कर रही है।

CM मोहन यादव की अहम भूमिका, भाजपा अध्यक्ष चुनाव और MP में 8 लाख करोड़ के 209 कामों की शुरुआत

भोपाल  मध्य प्रदेश में 8 लाख करोड़ की 209 केंद्रीय परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें से कुछ कामों के लिए जमीन समय पर नहीं मिलने, समय रहते पेड़ों की कटाई नहीं होने, गांव खाली नहीं होने, एजेंसियां तय करने में समय लगने जैसे 423 अड़गे आए, जिनकी वजह से काम रोकना पड़ा। इसे देखते हुए केंद्र ने राज्य के साथ मिलकर ऐसी परियोजनाओं को प्रोजेक्ट मॉनीटरिंग ग्रुप व प्रोएक्टिव गवर्नेस एंड टाइमली इंप्लीमेंटेशन (प्रगति) के जरिए दोबारा सक्रिय किया और हाईटेक निगरानी भी की। इस आधार पर मप्र ने समय रहते इनमें से 97 फीसद अड़ंगों को दूर कर लिया है। कम समय में तेजी से बाधाओं को दूर कर केंद्रीय परियोजनाओं (Central Projects) पर तेजी से काम करने वाले राज्यों में मप्र टॉप-10 में शामिल हो गया है। अब कामों में और तेजी आई है। यह बात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को सीएम निवास पर पत्रकारों से रूबरू होते हुए कही। ऐसे पकड़ में आईं बाधाएं सीएस अनुराग जैन ने बताया, पीएमजी समीक्षा में 322 बाधाओं को पहचाना गया और 312 को दूर किया। जबकि प्रगति पोर्टल से 39 परियोजनाओं की समीक्षा में 124 बांधाएं मिली, 120 का समाधान कर चुके। इस तरह राज्य ने पीएमजी और प्रगति दोनों के 97% बाधाओं को दूर कर दिया। हाईटेक होगी निगरानी केंद्रीय योजनाओं की निगरानी के लिए पीएमजी, प्रगति, पीएम गति शक्ति समेत कई अहम पोर्टल हैं। इसी की तर्ज पर राज्य सरकार की योजनाओं की हाईटेक निगरानी के लिए सीएम प्रगति पोर्टल डिजाइन कराया गया है। मुख्यमंत्री जल्द ही इसे लॉन्च करेंगे। पीएम भी इनकी समीक्षा करेंगे और विलंब पर सीएस जिम्मेदार होंगे। भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव में सीएम का रोल अहम भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव (BJP national president election) की तारीख लगभग तय हो गई है। 19 जनवरी को प्रक्रिया शुरू होगी और 20 की शाम तक नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की घोषणा हो जाएगी। सीएम डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav) का उक्त चुनावी प्रक्रिया में अहम रोल हो सकता है। वे प्रस्तावक या समर्थक बनाए जा सकते हैं, साथ ही चुनाव की अन्य प्रक्रियाओं में भी शामिल हो सकते हैं। इस चुनाव प्रक्रिया में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, सावित्री ठाकुर, डीडी उड़के, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी शामिल हो सकते हैं। वहीं दिल्ली से इसके संकेत मिलने के बाद सीएम ने अपना स्विट्जरलैंड दौरा आगे बढ़ा दिया है। उनके स्थान पर दावोस के लिए एसीएस नीरज मंडलोई के नेतृत्व टीम रवाना होगी। वहीं सीएम 19 व 20 को दिल्ली में रहेंगे। सूत्रों के अनुसार, वे दिल्ली प्रवास के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर प्रदेश की दो साल के कार्यकाल से अवगत करा सकते हैं। केंद्र से मिली परियोजनाओं की प्रगति 261,340 करोड़ निवेश वाली 108 परियोजनाओं की बाधाएं दूर। अभी 5,24,471 करोड़ के 101 परियोजनाओं पर काम चल रहा। रेल की 14, सड़‌क परिवहन की 13, विद्युत की 5 और नवकरणीय ऊर्जा की परियोजनाएं शामिल हैं। कूनो नेशनल पार्क में चीते बसाए हैं जबकि धार के पीएम मित्र पार्क में काम शुरू हो चुका है। 

SC में ED की बड़ी डिमांड: ‘कोलकाता कमिश्नर और बंगाल DGP को हटाया जाए’

कलकत्ता / नई दिल्ली I-PAC रेड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में एक नई अर्जी दाखिल करते हुए पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कुमार और कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज कुमार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. ईडी ने अपनी याचिका में इन अधिकारियों को तुरंत निलंबित करने, उनके खिलाफ FIR दर्ज करने और अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की मांग की है.  जांच एजेंसी का आरोप है कि इन अधिकारियों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मिलकर जांच में बाधा डाली और सबूतों की कथित चोरी में मदद की. ईडी ने सुप्रीम कोर्ट से गृह मंत्रालय (MHA) और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को निर्देश देने का अनुरोध किया है कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाए.  अर्जी में विशेष रूप से डीजीपी राजीव कुमार के पिछले आचरण का जिक्र करते हुए कहा गया है कि वे कोलकाता पुलिस कमिश्नर रहते हुए मुख्यमंत्री के साथ धरने पर बैठे थे, जो एक टॉप पुलिस अधिकारी के लिए सही नहीं है. डीजीपी और पुलिस कमिश्नर पर गंभीर आरोप प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी अर्जी में पश्चिम बंगाल पुलिस के टॉप अधिकारियों पर तीखा हमला बोला है. एजेंसी के मुताबिक, डीजीपी राजीव कुमार और कोलकाता पुलिस कमिश्नर ने न केवल जांच की प्रक्रिया को प्रभावित किया, बल्कि साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने में भी कथित तौर पर भूमिका निभाई. ईडी ने तर्क दिया है कि इन अधिकारियों की मौजूदगी में निष्पक्ष जांच संभव नहीं है, इसलिए इनका निलंबन और विभागीय जांच जरूरी है.

आईसीसी अंडर-19 वर्ल्ड कप में आज वैभव सूर्यवंशी की धूम, मैच कब और कहां देखें

मुंबई  आईसीसी मेंस अंडर-19 वर्ल्ड वर्ल्ड का आगाज आज यानी 15 जनवरी, 2026 से होने जा रहा है. इस टूर्नामेंट के पहले ही दिन तीन मुकाबले खेले जाएंगे. पहला मैच भारत और अमेरिका के बीच खेला जाएगा, अन्य दो मैचों में जिम्बाब्वे का सामना स्कॉटलैंड से और वेस्टइंडीज का मुकाबला तंजानिया से होगा. भारतीय टीम का कमान आयुष म्हात्रे संभालेंगे, वहीं आज सबकी नजरें वैभव सूर्यवंशी पर रहेंगी, जिन्होंने पिछले 12 महीनों में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से अंडर-19 और सीनियर लेवल क्रिकेट में खूब सुर्खियां बटोरी हैं. वैभव-आयुष के पास सीनियर खिलाड़ियों के साथ खेलने का अनुभव  इंडियन प्रीमियर लीग में वैभव सूर्यवंशी और कप्तान आयुष म्हात्रे की जोड़ी के पास सीनियर खिलाड़ियों के साथ खेलने का अनुभव है. दोनों ही आईपीएल में अलग-अलग टीम की तरफ से खेले हैं और टूर्नामेंट में अपनी बल्लेबाजी का लोहा मनवा चुके हैं. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 3-0 की जीत के साथ भारतीय टीम इस टूर्नामेंट में उतर रही है. म्हात्रे चोट के कारण उस सीरीज में नहीं खेल पाए थे, लेकिन अब वो पूरी तरह फिट हैं और टीम की कमान संभालने के लिए तैयार हैं. भारत में अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 के मैच कब और कहां देखें लाइव? आईसीसी अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 के सभी मैच स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर लाइव टेलीकास्ट किए जाएंगे, जबकि लाइव स्ट्रीमिंग जियोहॉटस्टार पर उपलब्ध होगी. भारत के सभी मैच टीवी पर जरूर दिखाए जाएंगे और बाकी मैच ऑनलाइन स्ट्रीम किए जाएंगे. एक ही दिन में तीन मैच होने के कारण कुछ चुनिंदा मैच ही टीवी पर दिखाए जा सकते हैं. वहीं, भारतीय समयानुसार सभी मैच दोपहर 1 बजे से शुरू होंगे. सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले 4 खिलाड़ी, देखें लिस्ट आईसीसी अंडर 19 वर्ल्ड कप आज यानी 15 जनवरी से शुरू होने वाला है। इस बार अंडर 19 वर्ल्ड कप मेजबानी जिम्बाब्वे और नामीबिया कर रहे हैं। टूर्नामेंट का पहला मुकाबला बुलवायो में भारत और अमेरिका के बीच खेला जाएगा। हालांकि, टूर्नामेंट शुरू होने से पहले हम आपको बताने वाले हैं उन 4 खिलाड़ियों के बारे में जिन्होंने अंडर 19 वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा विकेट झटके हैं। क्वेना मफाका साउथ अफ्रीका के तेज गेंदबाज क्वेना मफाका ने अंडर 19 वर्ल्ड कप के इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट लिए हैं। उन्होंने 9 मैचों में 28 विकेट झटके हैं। वेस्ली मधेवेरे जिम्बाब्वे के वेस्ली मधेवेरे इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर हैं। उन्होंने अंडर 19 वर्ल्ड कप के इतिहास में 18 मैच में 28 विकेट लिए हैं। मोइसेस हेनरिक्स ऑस्ट्रेलिया के मोइसेस हेनरिक्स इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर हैं। उन्होंने 13 अंडर 19 वर्ल्ड कप मैचों में 27 विकेट झटके हैं। ग्रेग थॉम्पसन आयरलैंड के ग्रेग थॉम्पसन ने 19 अंडर 19 वर्ल्ड कप मुकाबलों में 27 विकेट झटके हैं। भारत-अमेरिका की अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 के लिए टीमें: भारत की अंडर-19 टीम: आयुष म्हात्रे (कप्तान), वैभव सूर्यवंशी, आरोन जॉर्ज, विहान मल्होत्रा, वेदांत त्रिवेदी, अभिज्ञान कुंडू (विकेटकीपर), कनिष्क चौहान, खिलन पटेल, दीपेश देवेंद्रन, किशन कुमार सिंह, हेनिल पटेल, उद्धव मोहन, आरएस अम्बरीश, मोहम्मद इनान, हरवंश पंगालिया. अमेरिका की अंडर-19 टीम: अमरिंदर गिल, साहिल गर्ग, अर्जुन महेश (विकेटकीपर), उत्कर्ष श्रीवास्तव (कप्तान), अदनित झाम्ब, अमोघ अरेपल्ली, नितीश सुदिनी, शिव शनि, अदित कप्पा, साहिर भाटिया, रायान ताज, अद्वैत कृष्णा, सबरीश प्रसाद, ऋत्विक अप्पिडी, ऋषभ शिम्पी. 

ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव से युद्ध की आशंका, ट्रंप के पास 50 संभावित ठिकानों की जानकारी

तेहरान क्या अमेरिका और ईरान के बीच जंग होने वाली है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि पश्चिम एशिया में फिलहाल हालात ऐसे ही बनते दिख रहे हैं। अमेरिका और ब्रिटेन की ओर से अपने नागरिकों को ईरान न जाने की सलाह दी गई है। इसके अलावा ईरान ने अपना एयरस्पेस कमर्शल फ्लाइट्स के लिए बंद कर दिया है। इससे साफ है कि दोनों तरफ से सतर्कता बरती जा रही है और तनाव को देखते हुए जंग की आशंका बढ़ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तो लगातार ईरान को जंग और सैन्य कार्रवाई की धमकी दे रहे हैं। वहीं ईरान का कहना है कि ऐसी किसी भी स्थिति में जो आग भड़केगी वह पूरे इलाके को चपेट में लेगी। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति के हवाले से एनसीबी न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि ट्रंप लंबी जंग नहीं चाहते हैं। उन्होंने अपने सुरक्षा सलाहकारों से ईरान के खिलाफ ऐसे ऐक्शन पर विचार करने को कहा है, जिससे एक निर्णायक कदम उठाया जा सके। वह नहीं चाहते कि ईरान के खिलाफ महीनों लंबी जंग चले। ऐसे में संभावना है कि अचानक ही ईरान पर कोई बड़ा अटैक हो सकता है। अमेरिकी नहीं चाहता कि वह ईरान के खिलाफ किसी भी तरह के जमीनी संघर्ष में शामिल हो। हालांकि अमेरिकी सलाहकार इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं हैं कि किसी एक हमले से ईरान की कमर तोड़ी जा सकती है। उनकी चिंता यह है कि ईरान भी हमले का जवाब देगा और मिडल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों को नुकसान पहुंच सकता है। इराक, सीरिया समेत कई देशों में अमेरिका के ठिकाने हैं, जो ईरान के टारगेट में आ सकते हैं। इसके अलावा ईरान को जवाब देने के लिए इस इलाके में अमेरिका के पास बहुत ज्यादा एसेट्स भी नहीं हैं। इस बीच खबर है कि ट्रंप प्रशासन की ओर से छोटे और टारगेट अटैक किए जा सकते हैं। इसके बाद यदि ईरान की प्रतिक्रिया आती है तो फिर जवाबी कार्रवाई की जाएगी। अमेरिका यह नहीं चाहता कि वह खुद बड़ा अटैक करे। ऐसी स्थिति में ईरान को थोड़ा उकसाने के बाद ही संघर्ष शुरू करने की तैयारी है। ट्रंप के पास मौजूद 50 टारगेट वाली ‘हिट लिस्ट’ में ईरान के कौन से ठिकाने शामिल हैं? डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, एक अमेरिकी थिंक टैंक (UANI) ने राष्ट्रपति ट्रंप को 50 ठिकानों की एक गोपनीय लिस्ट सौंपी है. इस ‘हिट लिस्ट’ में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के सबसे अहम हेडक्वार्टर शामिल हैं. तेहरान का ‘थारुल्लाह हेडक्वार्टर’ इस लिस्ट में सबसे ऊपर बताया जा रहा है. यह जगह प्रदर्शनकारियों के खिलाफ होने वाली दमनकारी कार्रवाइयों का मुख्य केंद्र है.     लिस्ट में तेहरान के चार मुख्य उप-मुख्यालय भी शामिल हैं.     उत्तर और उत्तर-पश्चिम तेहरान के लिए ‘कुद्स सब-हेडक्वार्टर’ टारगेट पर है.     दक्षिण-पश्चिम तेहरान के लिए ‘फतह सब-हेडक्वार्टर’ को चुना गया है.     पूर्वोत्तर के लिए ‘नस्र’ और दक्षिण-पूर्व के लिए ‘गदर’ मुख्यालय लिस्ट में हैं.     इसके अलावा 23 क्षेत्रीय बासिज बेस भी अमेरिकी रडार पर आ चुके हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरानी प्रदर्शनकारियों से कहा है कि ‘मदद रास्ते में है‘. ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि लोगों की हत्या करने वाले अपनी खैर मनाएं. सीनेटर टॉम कॉटन ने भी ईरानी शासन की तुलना गंभीर बीमारियों से की है. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि कूटनीतिक धैर्य अब पूरी तरह खत्म हो चुका है. भारत की एडवाइजरी- तुरंत ईरान से निकलें हमारे नागरिक इस बीच भारत ने भी अपने सभी नागरिकों को सलाह दी है कि वे तत्काल ईरान से निकल जाएं। करीब 10 हजार भारतीय नागरिक ईरान में हैं। इनकी सुरक्षा चिंताओं को लेकर भारत ने यह आदेश दिया है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास की ओर से यह एडवाइजरी जारी की गई है। फिलहाल दुनिया भर की नजरें इस हालात पर हैं। चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि इजरायल भी इस जंग में कूदने की बात कर रहा है। वहीं ईरान का कहना है कि अमेरिकी हमले के जवाब में हम इजरायल को टारगेट करेंगे।

ईरान में युद्ध की संभावना, 10 हजार भारतीयों की जान पर बन आई, कश्मीरी छात्रों के माता-पिता का भावुक निवेदन

 नई दिल्ली ईरान में बीते दो हफ्तों से जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों ने वहां की आंतरिक स्थिति को बेहद अस्थिर बना दिया है. हर दिन हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं. 28 दिसंबर 2025 से शुरू हुए इन प्रदर्शनों में हजारों लोगों की मौत की खबरें सामने आ रही हैं. मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, मृतकों की संख्या 2,000 से अधिक हो चुकी है, जबकि कुछ रिपोर्ट्स इसे 3,000 से भी ज्यादा बता रही हैं. इस संकट का सीधा असर भारत पर भी पड़ा है. बुधवार को ईरान ने अचानक अपना एयरस्पेस बंद कर दिया, जिससे भारत, यूरोप समेत उत्तरी अमेरिका के बीच उड़ानें बाधित हो गईं.  एयर इंडिया और इंडिगो जैसी एयरलाइंस को रूट बदलने पड़े हैं, जिससे यात्रियों को देरी और असुविधा का सामना करना पड़ रहा है. दोनों विमान कंपनियों ने एडवाइजरी जारी करते हुए बताया कि कि रूट में बदलाव करना पड़ा है और कई फ्लाइट्स को कैंसिल करना पड़ा है. कश्मीरी छात्रों समेत 10 हजार भारतीय संकट में ईरान में इस समय करीब 10,000 से 12,000 भारतीय मूल के लोग मौजूद हैं. इनमें बड़ी संख्या छात्रों की है, जिनमें लगभग दो से तीन हजार कश्मीरी छात्र मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं.  जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) ने इन छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है. बार-बार इंटरनेट बंद होने और हिंसक प्रदर्शनों के चलते इन छात्रों से संपर्क करना मुश्किल हो गया है, जिससे उनके परिवारों की चिंता बढ़ गई है. भारतीय दूतावास ने सभी भारतीय नागरिकों को जल्द से जल्द ईरान छोड़ने की सलाह दी है. हालांकि छात्रों और उनके संगठनों का कहना है कि अब तक किसी निकासी योजना की घोषणा नहीं की गई है, जिससे असमंजस की स्थिति बनी हुई है. वहीं, पैरेंट्स सरकार से उनके बच्चों को निष्कासन में मदद की अपील कर रहे हैं. इस अशांति का असर व्यापार पर भी दिख रहा है. पहले ही अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते भारत-ईरान व्यापार में भारी गिरावट आ चुकी है. मौजूदा हालात में शिपिंग रूट्स और तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका से भारत के व्यापार घाटे पर और दबाव पड़ सकता है. आंकड़ों के अनुसार, 2019 में ईरान और भारत के बीच $17.6 बिलियन का व्यापार हुआ करता था, जो कि 2024 में घटाकर महज़ $2.3 बिलियन रह गया है. ख़ास बात ये है कि भारत के कुल व्यापार का महज़ 0.2 फीसदी व्यापार ईरान के साथ होता है. हालांकि, शिपिंग रूट बाधित होने की वजह से व्यापार घाटे पर असर पड़ सकता है. चाबहार पोर्ट परियोजना खतरे में: भारत की सामरिक योजना पर बड़ा संकट भारत की सामरिक महत्व की चाबहार बंदरगाह परियोजना, जिसमें लगभग 500 मिलियन डॉलर का निवेश हुआ है, अब गंभीर खतरे में दिखाई दे रही है. यह बंदरगाह भारत के लिए पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान, मध्य एशिया और यूरोप तक पहुंचने का एक अहम गेटवे है. चाबहार बंदरगाह भारत की रणनीतिक कोशिशों में केंद्रीय स्थान रखता है, लेकिन वहां की वर्तमान अस्थिर राजनीतिक और आर्थिक स्थिति इस परियोजना को प्रभावित कर रही है. बासमती चावल निर्यात में भारी गिरावट एक प्रमुख चिंता का विषय भारत के बासमती चावल निर्यात में भारी गिरावट है. ईरान, जो भारतीय बासमती चावल का सबसे बड़ा विदेशी बाजार रहा है, ने इस व्यापार में भी ठहराव देखा है. 2018-19 में भारत का ईरान को निर्यात लगभग 3.51 बिलियन डॉलर था, जो अब 2024-25 में घटकर केवल 1.24 बिलियन डॉलर रह गया है. इससे भारतीय किसानों और निर्यातकों को भारी नुकसान हो रहा है. क्षेत्रीय संतुलन और स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी पर असर क्षेत्रीय राजनीतिक स्थिति की अनिश्चिता भारत की पश्चिम एशिया नीति के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. भारत ने हमेशा ईरान, सऊदी अरब और अमेरिका के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है, ताकि क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित हो सके.  चाबहार बंदरगाह पाकिस्तान के चीनी-प्रायोजित ग्वादर बंदरगाह से मात्र 92 समुद्री मील की दूरी पर है और भारत की रणनीतिक उपस्थिति का प्रतीक है. अगर इस क्षेत्र में अशांति बनी रहती है, तो भारत की स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी कमजोर हो सकती है और चीन-पाकिस्तान के प्रभाव में वृद्धि हो सकती है. इसलिए, भारत के लिए यह जरूरी है कि वह चाबहार परियोजना को स्थिर बनाए रखने के लिए अपनी कूटनीतिक और आर्थिक रणनीतियों को और मज़बूत करे, ताकि क्षेत्रीय संतुलन और अपनी स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी को कायम रखा जा सके.

श्रीमहाकाल महोत्सव श्रद्धालुओं को आध्यात्म, धर्म और प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक परम्परा से जोड़ने का माध्यम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

महाकाल महोत्सव का हुआ शुभारंभ श्रीमहाकाल महोत्सव श्रद्धालुओं को आध्यात्म, धर्म और प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक परम्परा से जोड़ने का माध्यम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन में हुआ महाकाल महोत्सव का भव्य आयोजन शुरू मुख्यमंत्री ने महाकालेश्वर मंदिर की नवीन आधिकारिक वेबसाइट पोर्टल का किया शुभारंभ 600 करोड़ की लागत से निर्मित होने वाले महाकालेश्वर भक्त निवास के दान एवं सीआरएस पोर्टल का शुभारंभ पार्श्व गायक शंकर महादेवन के भजनों की सुमधुर प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं का मन मोहा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया महाकाल महोत्सव का शुभारंभ उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि महाकाल महोत्सव से उज्जैन की सुंदरता को स्वर्ग के समान बना दिया है। आज की उज्जैन नगरी महाकवि कालिदास की रचनाओं की अवंतिका के समान हो गई है। सम्राट विक्रमादित्य  और राजा भोज के काल से अवंतिका नगरी न्याय और प्रशासनिक दक्षता की वाहक है। सम्राट विक्रमादित्य, राजा भोज और अवंतिका नगरी की अन्य महान विभूतियों और प्रेरक कहानियों को महाकाल महालोक में मूर्ति कला और दीवारों पर चित्रों के माध्यम से बड़ी सुंदर तरीके से दर्शाया गया है। महाकाल की नगरी काल की नगरी है। महाकाल की कृपा से हमारी प्रत्येक सांस है और प्रेरणा से यह जीवन मानव सेवा के लिए समर्पित है। प्रदेश ने धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर अपनी नवीन पहचान स्थापित की है । महाकाल महोत्सव  श्रद्धालुओं को आध्यात्म, धर्म  और प्रदेश  की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा से जोड़ने का माध्यम है। इससे श्रद्धालुओं को बाबा का आशीर्वाद भी मिलेगा, और उज्जैन की जानकारी भी मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मकर संक्रांति पर्व की पावन संध्या पर पूजन अर्चन कर महाकाल महोत्सव का शुभारंभ किया। इस अवसर पर  प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल,राज्य सभा सांसद बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, सत्य नारायण जटिया,संजय अग्रवाल, राजेश धाकड़, रवि सोलंकी, नरेश शर्मा, श्रीराम तिवारी,रूप पमनानी  आदि जनप्रतिनिधि और हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में दो ज्योतिर्लिंग है ,दोनों ज्योतिर्लिंग की कनेक्टविटी सड़क ,वायु और रेल मार्ग से बढ़ाकर श्रद्धालुओं को सुविधा प्रदान की जा रही है। उज्जैन में तो शक्ति पीठ माता गढ़ कालिका भी है साथ ही यहाँ शिप्रा के किनारे गुरुद्वारा  है जहां गुरु नानक जी आए और उज्जैन का उल्लेख अपने पदों में किया है। उज्जैन की विविधता और समरसता निराली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन में सावन महोत्सव 2003 के बाद शुरू किया गया।  अब शिवरात्रि से लेकर गुड़ी पड़वा तक उज्जैन में मेला आयोजित हो रहे हैं। उज्जैन में आयोजित विविध कार्यक्रमों और मेलों के माध्यम से पर्यटनों  को इतिहास और संस्कृत से जोड़ रहे है और सभी का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन और ग्वालियर में आयोजित व्यापार मेले में वाहनों में कर की छूट भी सरकार द्वारा प्रदान की जा रही है। इस परम्परा को ओर समृद्ध बनाकर अब भोपाल के साथ उज्जैन में भी 5 दिवसीय वन मेला दशहरा मैदान पर आयोजित किया जाएगा। इसमें विभिन्न वन उत्पाद नागरिक प्राप्त कर सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संगीत की समृद्ध परंपरा में डमरू सबसे पहला वाद्य यंत्र है। संगीत की समृद्ध परंपरा में अन्य यंत्र इसके बाद बने है। शंकर महादेवन द्वारा दी जाने वाली डमरू वाद्य यंत्र पर प्रस्तुति अद्भुत होती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल्द ही जिले को इंदौर उज्जैन सिक्स लेन,  हरिफटक पुल सिक्स लेन, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स आदि की सौगात मिलेगी। साथ ही जिले में अन्य विकास के कार्य भी किए जा रहे है। जिले में 25 जनवरी को राहगीरी का आनंद उत्सव भी आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महाकालेश्वर मंदिर की नवीन आधिकारिक वेबसाइट पोर्टल www.shrimahakaleshwar.mp.gov.in का शुभारंभ किया। साथ ही 600 करोड़ की लागत से निर्मित होने वाले महाकालेश्वर भक्त निवास के दानदाताओं के लिए वेबसाइट www.shrimahakaleshwar.mp.gov.in/bhaktniwas का भी शुभारंभ किया। महाकाल महोत्सव में पार्श्व गायक शंकर महादेवन की आकर्षक प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। वीर भारत न्यास, विक्रमादित्य शोध पीठ तथा महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह महोत्सव 18 जनवरी 2026 (विक्रम संवत 2082) तक चलेगा।  

भारतीय रेलवे में हलाल मीट पर विवाद, सिख संगठन की याचिका पर NHRC ने जारी किया नोटिस

  नई दिल्ली     भारतीय रेलवे की थाली में परोसे जाने वाले नॉनवेज भोजन को लेकर झटका बनाम हलाल विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है. सिख संगठनों की ओर से दायर याचिका पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने रेलवे बोर्ड, FSSAI और संस्कृति मंत्रालय के सचिव को नोटिस जारी किया है. NHRC ने अपने नोटिस में कहा है कि अगर रेलवे में केवल हलाल मांस परोसा जा रहा है, तो यह उपभोक्ताओं के भोजन के विकल्प के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है. साथ ही, इसे सिख धर्म की आचार संहिता यानी सिख रहत मर्यादा के खिलाफ भी बताया गया है. NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो ने इस मुद्दे पर कहा, "सिख रहत मर्यादा सिखों को हलाल मांस के सेवन से रोकती है. अगर सिख उपभोक्ताओं को यह जानकारी नहीं दी जा रही कि उन्हें किस तरह का मांस परोसा जा रहा है, तो यह उनके अधिकारों का सीधा उल्लंघन है." आयोग ने संस्कृति मंत्रालय से यह भी कहा है कि वह सभी खाने-पीने की दुकानों और संस्थानों को निर्देश दे कि वे स्पष्ट रूप से यह दिखाएं कि परोसा जाने वाला मीट हलाल है या झटका. NHRC का मानना है कि पारदर्शिता न होना धार्मिक स्वतंत्रता और उपभोक्ता अधिकारों के खिलाफ है. FSSAI को भेजे गए नोटिस में आयोग ने कहा है कि नॉनवेज फूड के सर्टिफिकेशन में इसका साफ तौर पर जिक्र होना चाहिए कि मीट झटका है या हलाल. इससे उपभोक्ता अपनी धार्मिक और व्यक्तिगत मान्यताओं के अनुसार निर्णय ले सकेंगे. प्रियंक कानूनगो ने रोजगार से जुड़े पहलू पर भी गंभीर चिंता जताई. उन्होंने कहा, "दारुल उलूम देवबंद के अनुसार हलाल वही माना जाता है जिसमें पशु बलि केवल मुसलमान द्वारा दी गई हो. इससे हिंदू दलित समुदायों को रोजगार के अवसरों से वंचित किया जाता है, जो परंपरागत रूप से पशु बलि और मांस बिक्री से जुड़े रहे हैं." उन्होंने यह भी कहा कि ग्राहकों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उन्हें किस तरह का नॉनवेज परोसा जा रहा है. अपने बयान में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय उदाहरण देते हुए कहा, "यहां तक कि मुस्लिम देश की एविएशन कंपनी एतिहाद एयरलाइंस भी यात्रियों को हलाल और हिंदू झटका भोजन का विकल्प देती है." क्यों है विवाद? कानूनगो ने बताया कि हमने उन्हें एक नोटिस के माध्यम से पूछा है कि रेलवे में जो ठेकेदार भोजन बेचते हैं या सप्लायर मांस की सप्लाई करते हैं, वह हलाल पद्धति से है या झटका पद्धति से. यह इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि दारुल उलूम देवबंद के अनुसार हलाल पद्धति से जानवर का वध सिर्फ मुसलमान ही कर सकते हैं. उन्होंने कहा, सरकारी एजेंसी होने के नाते रेलवे जो खाना बेच रही है, उसमें मांस किस पद्धति से तैयार किया जा रहा है, यह स्पष्ट होना चाहिए. झटका पद्धति से मांस का वध हिंदू तथा अन्य दलित समुदाय करते हैं. सभी वर्गों के लोगों के जीविका के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रकार के मांस की बिक्री होनी चाहिए. ट्रेन के खाने पर लगेगा स्टिकर? प्रियंक कानूनगो ने आगे कहा कि रेलवे के साथ-साथ FSSAI को भी नोटिस जारी कर पूछा गया है कि ऐसी संभावनाओं पर विचार किया जाए, जहां भारत में बिकने वाली मांसाहारी सामग्री पर यह स्पष्ट रूप से निर्दिष्ट किया जाए कि यह सभी धर्मों के लोग खा सकते हैं या नहीं. किसी के लिए प्रतिबंध है तो उसे स्पष्ट रूप से बता दिया जाए. उन्होंने कहा कि भारत में एक अन्य अल्पसंख्यक समुदाय सिख समुदाय है. सिख धर्म मानने वालों के लिए पवित्र नियम पुस्तिका है, जिसमें आर्टिकल 24 में स्पष्ट लिखा है कि सिखों को इस्लामी हलाल पद्धति से तैयार किया गया मीट नहीं खाना चाहिए. यह उनके लिए प्रतिबंधित है. यदि एक विशेष पद्धति से तैयार मीट सिख समुदाय के लिए प्रतिबंधित है, तो अंजाने में उन्हें वही भोजन देना धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ है और मानवाधिकार का उल्लंघन है.

अब सरकारी कर्मचारियों को अपनी सैलरी का 15% बुजुर्ग माता-पिता के लिए देना होगा, अनदेखी पर कटौती

हैदराबाद  कलयुग के इस दौर में जहां आधुनिकता की चकाचौंध में अक्सर बूढ़े माता-पिता को उनके ही घर में बेगाना कर दिया जाता है, वहां तेलंगाना सरकार ने एक ‘श्रावण कुमार’ वाली भूमिका अपनाई है. मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने सोमवार को एक ऐसी घोषणा की, जिसने उन संतानों की नींद उड़ा दी है जो अपने माता-पिता को बेसहारा छोड़ देते हैं. अब गुहार और मिन्नतों का दौर खत्म हुआ क्योंकि सरकार ने सीधा प्रहार जेब पर किया है. यह महज एक प्रशासनिक आदेश नहीं बल्कि उन थकी हुई आंखों को इंसाफ दिलाने की कोशिश है जो उम्र के आखिरी पड़ाव पर अपनों का साथ तलाशती हैं. तेलंगाना की धरती से उठी यह गूंज अब पूरे देश के लिए एक नजीर बनने जा रही है.  बुजुर्गों की अनदेखी करने वाले सरकारी कर्मचारियों पर नकेल कसने के लिए तेलंगाना सरकार एक ऐतिहासिक और मानवीय फैसला लेने जा रही है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने स्पष्ट कर दिया है कि जो कर्मचारी अपने माता-पिता की देखभाल नहीं करेंगे, उनके वेतन से सीधे तौर पर कटौती की जाएगी। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने इस प्रस्तावित कानून की रूपरेखा साझा की। उन्होंने कहा कि यह कदम समाज में बुजुर्गों के प्रति गिरती जिम्मेदारी और उनके सम्मान को बचाने के लिए उठाया जा रहा है। तेलंगाना सरकार के नए फैसलों से जुड़े सवाल 1. क्या निजी क्षेत्र के कर्मचारियों पर भी यह 10% सैलरी वाला नियम लागू होगा? फिलहाल यह घोषणा सरकारी कर्मचारियों के लिए की गई है. सरकार इसके लिए जल्द ही एक विस्तृत कानून (Act) लाने वाली है. 2. सैलरी कटवाने के लिए माता-पिता को कहाँ शिकायत करनी होगी? इसके लिए सरकार एक विशेष शिकायत तंत्र विकसित कर रही है, जिसकी जानकारी कानून बनने के साथ साझा की जाएगी. 3. ‘प्रणाम’ केंद्र क्या हैं? ये वरिष्ठ नागरिकों के लिए बनाए गए विशेष डे-केयर सेंटर हैं, जहाँ उनके मनोरंजन, स्वास्थ्य और सामाजिक मेलजोल का ध्यान रखा जाएगा. 4. ट्रांसजेंडर को-ऑप्शन सदस्य का क्या लाभ होगा? इससे ट्रांसजेंडर समुदाय को स्थानीय शासन में अपनी आवाज उठाने और अपनी समस्याओं को सीधे सरकार तक पहुँचाने का मौका मिलेगा. 5. क्या दिव्यांगों के लिए रोजगार में कोई विशेष आरक्षण है? हाँ, मुख्यमंत्री ने शिक्षा और रोजगार में दिव्यांगों के लिए विशेष कोटा प्रदान करने की प्रतिबद्धता दोहराई है. वेतन से होगी 15% तक कटौती मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार आगामी बजट सत्र में एक विशेष विधेयक (Bill) पेश करने की तैयारी में है। इस कानून के लागू होने के बाद:     जो कर्मचारी अपने माता-पिता की उपेक्षा करेंगे, उनके वेतन से 10 से 15 फीसदी की कटौती की जाएगी।     काटी गई यह राशि बिना किसी देरी के सीधे माता-पिता के बैंक खाते में हस्तांतरित (Transfer) कर दी जाएगी।     सीएम ने कड़े शब्दों में कहा, "जो लोग अपने जन्मदाताओं की देखभाल नहीं कर सकते, वे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी कभी नहीं निभा पाएंगे।" 'प्रणाम' डे केयर सेंटर और सख्त कार्रवाई सरकार केवल वेतन कटौती तक ही सीमित नहीं रहेगी। वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान के लिए अन्य घोषणाएं भी की गईं:     प्रणाम सेंटर: बुजुर्गों के लिए 'प्रणाम' नाम से अत्याधुनिक डे केयर सेंटर बनाए जाएंगे।     त्वरित शिकायत निवारण: बुजुर्ग माता-पिता द्वारा अपने बच्चों के खिलाफ की गई शिकायतों पर त्वरित और कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।     सम्मानजनक जीवन: सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का हर बुजुर्ग गरिमापूर्ण जीवन जी सके। ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए भी बड़ी घोषणा सामाजिक न्याय की दिशा में कदम बढ़ाते हुए सीएम रेड्डी ने ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए भी एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने घोषणा की कि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में प्रत्येक नगर निगम में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए एक सह-सदस्य पद (Co-option member post) आरक्षित किया जाएगा।