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मुख्यमंत्री डॉ. यादव का निर्देश: संकल्प से समाधान अभियान से हर पात्र हितग्राही को मिले लाभ

प्रत्येक पात्र हितग्राही को संकल्प से समाधान अभियान का मिले लाभ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने प्रदेश में संचालित संकल्प से समाधान अभियान के संबंध में ली बैठक भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि संकल्प से समाधान अभियान जनसामान्य को कल्याणकारी हितग्राही मूलक योजनाओं का सुगमता से लाभ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आरंभ किया गया है। अभियान के अंतर्गत समय-सीमा में पारदर्शी तरीके से गतिविधियां सुनिश्चित की जाएं। किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार को बरदार्शत नहीं किया जाएगा, दोषियों के विरूद्ध कठोर कार्यवाही की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में संकल्प से समाधान अभियान की बुधवार को समीक्षा के लिए आयोजित संभागायुक्तों की बैठक में दिए। मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई सहित संभागायुक्त बैठक में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अभियान के अंतर्गत योजनाओं के प्रचार-प्रसार पर विशेष ध्यान दिया जाए। हमारा प्रयास है कि सभी हितग्राहियों को योजनाओं की आवश्यक जानकारी हो। संभागीय अधिकारी जिला, विकासखण्ड और ग्राम स्तर तक भ्रमण कर अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अभियान के अंतर्गत स्वास्थ्य परीक्षण, स्वच्छता तथा शिक्षा के लिए प्रेरित करने पर केंद्रित गतिविधियां भी संचालित की जाएं। संकल्प से समाधान अभियान के क्रियान्वयन में सामाजिक और स्वयं सेवी संस्थाओं का भी सहयोग लिया जाए।  

भजनलाल सरकार का बड़ा कदम, 3 बच्चों के माता-पिता को निकाय-पंचायत चुनाव में उम्मीदवार बनने का मिलेगा मौका

जयपुर राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव होने के संकेत मिल रहे हैं. भजनलाल सरकार दो संतान बाध्यता वाले पुराने कानून में संशोधन की दिशा में आगे बढ़ रही है. सूत्रों के मुताबिक करीब 30 साल पुराने इस प्रावधान में बदलाव के लिए आगामी विधानसभा बजट सत्र में विधेयक पेश किया जा सकता है. संशोधन के बाद तीन संतान होने पर भी पंचायत और निकाय चुनाव लड़ने की पात्रता मिल सकती है. जानकारी के अनुसार पहले 1994 के पंचायती राज अधिनियम और 2009 के नगरपालिका अधिनियम में अध्यादेश के जरिए संशोधन की योजना थी, लेकिन वह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी. अब सरकार सीधे विधानसभा में विधेयक लाकर बदलाव करने की तैयारी में है. पंचायती राज विभाग और नगरीय विकास विभाग अपने-अपने स्तर पर ड्राफ्ट तैयार कर विधि विभाग को भेज चुके हैं, जिन्हें जल्द अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है. क्या है वर्तमान प्रावधान राज्य में 27 नवंबर 1995 से लागू कानून के तहत तीन या उससे अधिक संतान वाले माता-पिता पंचायत और निकाय चुनावों में प्रत्याशी नहीं बन सकते. इस नियम के दायरे में पंच, सरपंच, उपसरपंच, पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य, प्रधान, प्रमुख, पार्षद, सभापति और महापौर जैसे पद शामिल हैं. नियम का उल्लंघन कर गलत जानकारी देकर चुनाव जीतने पर प्रत्याशी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और जेल तक का प्रावधान भी है. यह शर्त राजस्थान नगरपालिका अधिनियम की धारा 24 और पंचायती राज अधिनियम में दर्ज है. पहले देश के कई राज्यों में इस तरह की दो संतान नीति लागू थी, लेकिन समय के साथ अधिकतर राज्यों ने इसे खत्म कर दिया है. राजस्थान में हालांकि यह नियम अब तक पंचायत और निकाय चुनावों के लिए जारी है. सरकारी कर्मचारियों के मामले में राज्य सरकार पहले ही दो संतान के नियमों में शिथिलता दे चुकी है. पहले जहां दो से अधिक संतान होने पर वेतनवृद्धि और पदोन्नति पर रोक लगती थी, वहां अब कुछ राहत दी जा चुकी है. लेकिन जनप्रतिनिधियों के लिए पंचायत-निकाय चुनाव लड़ने पर लगी पाबंदी अभी भी लागू है, जिसे हटाने के लिए अब सरकार कानूनी बदलाव की तैयारी कर रही है.

ईरान का आरोप: ट्रंप और नेतन्याहू को किलर बताया, 2500 मौतों का जिम्मेदार बना अमेरिका और इज़राइल

तेहरान  ईरान की सड़कों पर हंगामा जारी है. कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच भिडंत हो रही है. इस बीच ईरान में चल रहे प्रदर्शनों और टकराव की वजह से मरने वालों की संख्या 2500 को पार कर गई है. कई दिनों के बाद ईरान के लोग दूसरे देशों में अपने रिश्तेदारों को फोन कर पाने में सक्षम हो पा रहे हैं. इसके साथ ही वहीं की खौफनाक हकीकत सामने आ रही है.  ईरान में अबतक मरने वालों की संख्या 2571 हो गई है. अमेरिका की मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार बुधवार सुबह तक मरने वालों की संख्या कम से कम 2,571 हो गई थी. यह आंकड़ा कई दशकों में ईरान में किसी भी दूसरे विरोध प्रदर्शन या अशांति में हुई मौतों की संख्या से कहीं ज़्यादा है. और  देश की 1979 की इस्लामिक क्रांति के दौरान फैली अराजकता की याद दिलाता है. पहला हत्यारा ट्रंप है… हालांकि ईरान का प्रशासन किसी भी कीमत पर झुकने को तैयार नहीं दिखता है. ईरानी अधिकारियों ने एक बार फिर से अमेरिकी ट्रंप को कार्रवाई न करने की चेतावनी दी है. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी अली लारीजानी ने अमेरिकी रवैये पर जवाब देते हुए लिखा, 'हम ईरान के लोगों के मुख्य हत्यारों के नाम बताते हैं: 1- ट्रंप 2- इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू." समाचार एजेंसी एपी के अनुसार ईरान के सरकारी टेलीविजन ने पहली बार आधिकारिक तौर पर मौतों की पुष्टि की. एक अधिकारी के हवाले से सरकारी टीवी ने कहा कि मुल्क में "बहुत सारे लोग शहीद" हुए हैं. विद्रोहियों ने खामेनेई के लिए मौत की सजा मांगी ये प्रदर्शन दिसंबर के आखिर में ईरान की खराब अर्थव्यवस्था के गुस्से में शुरू हुए और जल्द ही यहां की मजहबी शासन प्रणाली इसके निशाने पर आ गई. राजधानी में लोग सर्वोच्च धार्मिक नेता खामेनेई की मौत की मांग करने नारे लगा रहे हैं और तस्वीरें बना रहे हैं. ईरान में इस कथित 'अपराध' के लिए मौत की सजा मुकर्रर की जाती है. इस बीच अमेरिका लगातार प्रदर्शनकारियों के साथ अपना सपोर्ट जता रहा है. मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर लिखा, "ईरानी देशभक्तों, विरोध करते रहो- अपनी संस्थाओं पर कब्जा करो." ट्रंप ने कहा कि था कि उन्होंने सभी ईरानी अधिकारियों के साथ तबतक के लिए बातचीत रोक दी है जबतक इन हत्याओं को रोका नहीं जाता है. उन्होंने कहा कि ईरान को जल्द मदद मिलने वाली है. हालांकि घंटों बाद ट्रंप ने रिपोर्टर्स से कहा कि उनकी सरकार "उसी हिसाब से" कार्रवाई करने से पहले मारे गए प्रदर्शनकारियों की संख्या पर एक सही रिपोर्ट का इंतज़ार कर रही है. ट्रंप की मदद आ रही है ट्रंप ने ईरानी सुरक्षा बलों के बारे में कहा, "मुझे लगता है कि वे बहुत बुरा बर्ताव कर रहे हैं, लेकिन यह कन्फर्म नहीं है." इस बीच ईरानी सत्ता के रुख में कोई नरमी नहीं दिख रही है. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी अली लारीजानी ने अमेरिका के रवैये पर जवाब देते हुए लिखा: "हम ईरान के लोगों के मुख्य हत्यारों के नाम बताते हैं: 1- ट्रंप 2- इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू." ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल देश की सबसे शक्तिशाली और महत्वपूर्ण संस्था है जो राष्ट्रीय सुरक्षा एवं रक्षा नीतियों का निर्धारण करती है. यह 1989 में संविधान के अनुच्छेद 176 के तहत स्थापित हुई. इसके अध्यक्ष ईरान के राष्ट्रपति होते हैं, लेकिन इसके सभी निर्णय सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई लेते हैं. तेहरान के फोन लाइन खुले समाचार एजेंसी एपी के अनुसार लगभग 5 दिनों के बाद फोन लाइन खुलने के बाद तेहरान के लोग मुल्क से बाहर कॉल कर रहे हैं. एक ईरानी चश्मदीद ने सेंट्रल तेहरान में भारी सुरक्षा, जले हुए सरकारी भवन, टूटे हुए ATM और कम राहगीरों के बारे में बताया. इस बीच लोग इस बात को लेकर चिंतित थे कि आगे क्या होगा जिसमें अमेरिका के हमले की संभावना भी शामिल थी. अपनी सुरक्षा की चिंता के कारण सिर्फ़ अपना पहला नाम बताने वाले दुकानदार महमूद ने कहा, "मेरे ग्राहक ट्रंप की प्रतिक्रिया के बारे में बात करते हैं और सोचते हैं कि क्या वह इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ़ मिलिट्री हमला करने की योजना बना रहे हैं." "मुझे नहीं लगता कि ट्रंप या कोई दूसरा विदेशी देश ईरानियों के हितों की परवाह करता है." रेजा एक टैक्सी ड्राइवर जिसने सिर्फ़ अपना पहला नाम बताया, ने कहा कि कई लोगों के मन में विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं. उन्होंने कहा, "लोग – खासकर युवा निराश हैं, लेकिन वे विरोध प्रदर्शन जारी रखने की बात कर रहे हैं."

मोदी सरकार की नेम चेंज पॉलिसी: PMO को ‘सेवा तीर्थ’, राजपथ को ‘कर्तव्य पथ’ बनाने की घोषणा

नई दिल्ली पिछले कुछ सालों में भारत में कई सड़कों, सरकारी इमारतों, संस्थानों और शहरों के नाम बदले गए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने इन बदलावों को भारतीय संस्कृति, लोक भावना और कर्तव्य और सेवा की सोच को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम बताया है. राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ करने से लेकर योजना आयोग को नीति आयोग बनाने तक, देशभर में नाम परिवर्तन की यह प्रक्रिया लगातार चर्चा का विषय रही है. अब इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक बदलाव यह हुआ है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और उसके आसपास के प्रशासनिक ब्लॉक का नाम ‘सेवा तीर्थ’ रखा गया है.  यह नया परिसर पहले Executive Enclave के नाम से जाना जाता था और सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत बनाया गया है. इसी नए भवन परिसर में प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय स्थित होंगे. नया नाम सेवा तीर्थ इसलिए चुना गया है क्योंकि यह सरकार के कामकाज में 'सेवा की भावना' को प्राथमिकता देने का प्रतीक है. यानी शासन केवल सत्ता और अधिकार के लिए नहीं, बल्कि जनता की सेवा और कल्याण के लिए है. चर्चा में रहा नाम परिवर्तन पिछले कुछ वर्षों में भारत में कई सड़कों, सरकारी इमारतों, संस्थानों और शहरों के नाम बदले गए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने इन बदलावों को गुलामी के दौर की पहचान से बाहर निकलने और भारतीय संस्कृति, लोक भावना और कर्तव्य की सोच को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम बताया है. राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ करने से लेकर योजना आयोग को नीति आयोग बनाने तक, देशभर में नाम परिवर्तन की यह प्रक्रिया लगातार चर्चा में रही है. सड़कें, सरकारी इमारतें, शहर या संस्थान कई जगहों पर पुराने नामों की जगह नए नाम रखे गए हैं. 1. राजपथ- कर्तव्य पथ (2022) दिल्ली का ऐतिहासिक राजपथ अब कर्तव्य पथ कहलाता है. यह बदलाव जनसेवा और कर्तव्य को प्राथमिकता देने के विचार से किया गया. 2. 7 रेस कोर्स रोड – लोक कल्याण मार्ग (2016) प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास अब लोक कल्याण मार्ग के नाम से जाना जाता है. यह नाम जनता के कल्याण का प्रतीक माना गया. 3. योजना आयोग – नीति आयोग (2015) आजादी के बाद बना योजना आयोग समाप्त कर नीति आयोग बनाया गया. इसका उद्देश्य राज्यों को साथ लेकर नीति बनाना है. 4. प्रधानमंत्री कार्यालय परिसर- सेवातीर्थ (2025–26) पीएमओ के नए कॉम्प्लेक्स का नाम सेवातीर्थ (Seva Teerth) रखा गया. यह नाम सेवा भावना और सार्वजनिक जिम्मेदारी को दर्शाता है. 5. केंद्रीय सचिवालय- कर्तव्य भवन सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत नए सचिवालय भवनों को कर्तव्य भवन कहा गया. यह बदलाव सरकारी कर्मचारियों के कर्तव्य बोध को दर्शाने के लिए किया गया. 6. दलहौजी रोड- दारा शिकोह रोड ब्रिटिश गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौजी के नाम पर बनी सड़क का नाम बदलकर मुगल राजकुमार दारा शिकोह के नाम पर रखा गया. दारा शिकोह को भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक माना जाता है. 7. राजभवन- लोकभवन (कई राज्य) कई राज्यों में राज्यपाल के आवास राजभवन को लोकभवन कहा जाने लगा. यह बदलाव पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम जैसे राज्यों में लागू हुआ. 8. राज निवास- लोक निवास लद्दाख जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में राज निवास का नाम बदलकर लोक निवास किया गया. शहरों और स्थानों के बड़े नाम परिवर्तन 9. इलाहाबाद- प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान को ध्यान में रखते हुए नाम बदला गया. 10. फैजाबाद जिला- अयोध्या जिला राम जन्मभूमि से जुड़ी धार्मिक पहचान को प्रमुखता दी गई. 11. मुगलसराय स्टेशन- पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन एक प्रमुख रेलवे स्टेशन का नाम बदला गया. 12. औरंगाबाद- संभाजीनगर (महाराष्ट्र) छत्रपति संभाजी महाराज के सम्मान में नाम बदला गया. 13. उस्मानाबाद- धाराशिव (महाराष्ट्र) प्राचीन भारतीय नाम को फिर से अपनाया गया. Indian Penal Code का भी बदला नाम भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) का नाम बदल चुका है, लेकिन यह सिर्फ नाम नहीं बदलकर पूरी तरह नई संहिता में बदल गया है. पुरानी Indian Penal Code (IPC), 1860 जिसे ब्रिटिश शासन के समय बनाया गया था और आजादी के बाद भी लागू रहा. अब 1 जुलाई 2024 से यह हटकर नई संहिता में बदल गया है. नया नाम क्या है? Indian Penal Code (IPC) की जगह अब Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS), 2023 लागू हो गया है. New criminal law (Bharatiya Nyaya Sanhita) 1 जुलाई 2024 से लागू हो गया है और इससे IPC पूरी तरह बदल गया है. सरकार का कहना है कि पुराने IPC को आधुनिक समय के अनुसार बदलने और भारत की पहचान के हिसाब से नया नाम देने की जरूरत थी.  सरकार का तर्क क्या है? केंद्र सरकार का कहना है कि देश में सड़कों, शहरों, सरकारी इमारतों और संस्थानों के नाम बदलने का निर्णय सिर्फ एक नाम बदलने तक सीमित नहीं है. इसके पीछे तीन बड़े उद्देश्य हैं.  1.  गुलामी के प्रतीकों से मुक्ति कई पुरानी सड़कों, भवनों और संस्थानों के नाम ब्रिटिश शास अधिकारी के नाम पर थे. जैसे राजपथ, डलहौजी रोड, कुछ रेलवे स्टेशन आदि. सरकार का कहना है कि इन नामों से भारत की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय पहचान को ठीक तरह से नहीं दिखाया जाता था. नाम बदलकर अब ये स्वदेशी और भारतीय प्रतीकों से जुड़े हुए हैं. जैसे- राजपथ का नाम कर्तव्य पथ, डलहौजी रोड का नाम दारा शिकोह रोड. 2. भारतीय इतिहास और संस्कृति का सम्मान नाम बदलने का दूसरा उद्देश्य यह है कि इतिहास और संस्कृति को सही सम्मान मिले. पुराने नाम अक्सर उपनिवेशिक काल या विदेशी प्रभाव को दर्शाते थे. नए नाम ऐसे चुने गए हैं जो भारतीय संस्कृति, वीरता, लोककथा और राष्ट्रीय नेताओं को समर्पित हैं. जैसे-औरंगाबाद- छत्रपति संभाजीनगर, इलाहाबाद-प्रयागराज. 3. लोककल्याण और सेवा की भावना को बढ़ावा देना सिर्फ जगह का नाम बदलना ही नहीं, बल्कि सरकारी संस्थानों और भवनों के नाम बदलकर कर्तव्य और सेवा का संदेश दिया गया. जैसे 7 रेस कोर्स रोड का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग, राजभवन  का नाम बदलकर लोक भवन, राज निवास का नाम बदलकर लोक निवास हो गया.

दयानिधि मारन का विवादित बयान: ‘साउथ में लड़कियां शिक्षित, नॉर्थ में गुलाम की तरह रहती हैं’

 चेन्नई DMK सांसद दयानिधि मारन ने उन राज्यों की कड़ी आलोचना की है, जो छात्रों को सिर्फ़ हिंदी पढ़ने के लिए बढ़ावा देते हैं और इंग्लिश एजुकेशन को सेकेंडरी मान रहे हैं. उन्होंने ऐसी नीतियों को खराब रोज़गार के अवसरों और दक्षिणी राज्यों में पलायन से जोड़ा है. एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, दयानिधि मारन ने आरोप लगाया कि कुछ राज्यों में छात्रों को पढ़ाई करने से रोका जा रहा है और उन्हें सिर्फ़ हिंदी पर ध्यान देने के लिए कहा जा रहा है. उन्होंने कहा, "आपसे कहा जाता है कि इंग्लिश मत पढ़ो और अगर पढ़ोगे तो बर्बाद हो जाओगे. आपको गुलाम बनाकर रखा जाएगा."  सांसद का ये बयान हिंदी थोपने को लेकर बहस को फिर से भड़का सकती हैं. उन्होंने उत्तरी राज्यों से दक्षिण की ओर लोगों के पलायन का कारण इन एजुकेशनल तरीकों को बताया, और तर्क दिया कि तमिलनाडु द्वारा शिक्षा पर ज़ोर देने से ही उसकी आर्थिक ग्रोथ हुई है. 'टॉप ग्लोबल कंपनियां पढ़े-लिखे…' दयानिधि ने कहा, "आज, सभी टॉप ग्लोबल कंपनियां पढ़े-लिखे लोगों की वजह से तमिलनाडु आ रही हैं." उन्होंने कहा कि एजुकेशन को सिर्फ़ हिंदी तक सीमित रखने से दूसरे क्षेत्रों में बेरोज़गारी बढ़ती है, जबकि तमिलनाडु का द्रविड़ मॉडल लड़कियों और लड़कों दोनों के लिए शिक्षा तक समान पहुँच को बढ़ावा देता है. डीएमके सांसद ने कहा कि इससे राज्य में साक्षरता का स्तर बढ़ा है और महिलाओं की वर्कफोर्स में भागीदारी भी बढ़ी है. उन्होंने आगे तर्क दिया कि इंग्लिश एजुकेशन को हतोत्साहित करने से छात्रों के अवसरों और भविष्य की संभावनाएं सीमित होती हैं, भाषा-आधारित प्रतिबंध विकास और रोज़गार में बाधा बनते हैं. बीजेपी ने DMK सांसद दयानिधि मारन की टिप्पणियों पर पलटवार करते हुए कहा कि उनमें 'कॉमन सेंस' की कमी है और देश से, खासकर हिंदी भाषी समुदायों से माफ़ी मांगने की मांग की. बीजेपी नेता तिरुपति नारायणन ने न्यूज़ एजेंसी ANI से कहा, "मुझे नहीं लगता कि दयानिधि मारन में कोई कॉमन सेंस है. यही समस्या है. मैं उनके बयानों की कड़ी निंदा करता हूं, और उन्हें भारत के लोगों से, खासकर हिंदी बोलने वालों से माफ़ी मांगनी चाहिए, जिन्हें उन्होंने अनपढ़ और असभ्य बताया है." मारन के बचाव में आते हुए, DMK नेता टी.के.एस. एलंगोवन ने इस मुद्दे पर कहा, "उत्तर में महिलाओं के लिए लड़ने वाला कोई नहीं है." उन्होंने आगे कहा, "यह उस पार्टी पर निर्भर करता है, जो राज्य में शासन कर रही है. अब कांग्रेस महिलाओं को सशक्त बना रही है. इसमें कोई शक नहीं कि जहां भी कांग्रेस शासन कर रही है, वे महिलाओं की शिक्षा के लिए अच्छा काम कर रहे हैं. तमिलनाडु में, हमने महिलाओं के लिए लड़ाई लड़ी और उन्हें सशक्त बनाया. हमने उन्हें शिक्षा और रोज़गार दिया और सरकारी नौकरियों में सीटें भी रिजर्व कीं. हम शुरू से ही महिलाओं के अधिकारों की उन्नति के लिए काम कर रहे हैं."

मंत्री सिलावट ने निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाओं को समय-सीमा में पूरा करने का निर्देश दिया

निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाओं का कार्य समय-सीमा में करें पूर्ण: जल संसाधन मंत्री सिलावट विभागीय कार्यों की समीक्षा की भोपाल जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कहा है की प्रदेश में विभिन्न निर्माणाधीन वृहद एवं मध्यम परियोजनाओं का कार्य समय से पूरा किया जाए। वरिष्ठ अधिकारी परियोजनाओं के कार्य का निरंतर निरीक्षण करें और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करें। कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही न हो। मंत्री सिलावट ने मंत्रालय स्थित अपने प्रतिकक्ष में बुधवार को विभाग के अंतर्गत धसान केन कछार सागर में निर्माणाधीन वृहद एवं मध्यम परियोजनाओं की समीक्षा की। बैठक में अपर मुख्य सचिव जल संसाधन डॉ. राजेश राजौरा, प्रमुख अभियंता विनोद कुमार देवड़ा, मुख्य अभियंता सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं कार्य से संबंधित निर्माण ऐजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। मंत्री सिलावट ने निर्देश दिए कि वरिष्ठ अधिकारी स्वीकृत परियोजनाओं को समय-सीमा में पूर्ण करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करें और प्रति 15 दिन में कार्य की समीक्षा करें। बैठक में बताया गया कि परियोजनाओं के पूर्ण होने पर सागर, पन्ना, दमोह एवं छतरपुर जिले की लगभग 81 हजार हैक्टेयर में अतिरिक्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। मंत्री सिलावट द्वारा कछार के अंतर्गत आपचंद, मंझगाय, सतधारू, पवई, रूंज एवं काठन सिंचाई परियोजनाओं से सिंचाई सम्बन्धी व्यवस्थाओं के निर्देश दिये गये।  

बीजेपी अध्यक्ष चुनाव में नितिन नबीन के प्रस्तावक बनेंगे पीएम मोदी, निर्विरोध जीत की संभावना

 नई दिल्ली बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है. बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन अब पार्टी के स्थायी अध्यक्ष बनने जा रहे हैं. वो बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की जगह कार्यकार संभालेंगे. मकर संक्रांति के बाद बीजेपी के नए अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. नितिन नबीन बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे. नितिन नबीन के नामांकन में प्रस्तावकों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, गृहमंत्री अमित शाह समेत कई केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री भी नितिन नबीन के नामांकन में प्रस्तावक होंगे. सूत्रों की माने तो बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए सिर्फ नितिन नबीन ही अपना नामांकन दाखिल करेंगे और उनके के खिलाफ कोई भी नेता नामांकन नहीं भरेगा. ऐसे में नितिन नबीन का निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना तय माना जा रहा है. मकर संक्रांति के बाद अध्यक्ष का चुनाव मकर संक्रांति गुरुवार को है, उसके बाद बीजेपी अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. माना जा रहा है कि मकर संक्रांति के दो-तीन के बाद बीजेपी अध्यक्ष के चुनाव का औपचारिक ऐलान कर दिया जाएगा. इसके बाद नितिन नबीन बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे. इस दौरान पीएम मोदी से लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और राजनाथ सिंह सहित बीजेपी के तमाम बड़े नेता उनके प्रस्तावक होंगे. केंद्रीय मंत्री, बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, पार्टी के वरिष्ठ राष्ट्रीय पदाधिकारी, प्रदेश इकाइयों के अध्यक्ष और पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी चुनाव नतीजे की घोषणा के दौरान अध्यक्ष पद का चुनाव होगा. नितिन नबीन के लिए प्रस्तावकों और उसका समर्थन करने वाले लोगों के हस्ताक्षरों के साथ नामांकन पत्र के कई सेट बनाने की तैयारियां चल रही हैं.

कुबेरेश्वर धाम में रुद्राक्ष वितरण 15 जनवरी से 15 मार्च तक बंद, जानिए कारण

सीहोर  प्रदीप मिश्रा के सीहोर स्थित कुबेरेश्वर धाम में 14 से 20 फरवरी तक होने वाले रुद्राक्ष महोत्सव की तैयारियों को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों और आयोजन समिति के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में फैसला लिया गया कि भारी भीड़ के चलते सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुबेरेश्वर धाम में 15 जनवरी से 15 मार्च तक रुद्राक्ष वितरण पूरी तरह बंद रहेगा। आपात स्थिति के लिए मिनी आईसीयू और एम्बुलेंस की तैनाती भी की जाएगी। 15 जनवरी से 15 मार्च तक नहीं बांटे जाएंगे रुद्राक्ष बैठक में फैसला लिया गया कि कुबेरेश्वर धाम में अगले दो महीनों तक रुद्राक्ष नहीं बांटे जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार, श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए 15 जनवरी से 15 मार्च तक रुद्राक्ष वितरण पर पूरी तरह रोक रहेगी। इस महत्वपूर्ण बैठक में भोपाल संभागायुक्त संजीव सिंहए आईजी अभय सिंह, कलेक्टर बालागुरू के. और पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार शुक्ला के साथ कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा और अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। लाखों लोगों के आने की संभावना अधिकारियों ने कहा कि रुद्राक्ष महोत्सव में देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन और समिति को मिलकर सभी व्यवस्थाएं समय पर पूरी करनी होंगी। किसी भी तरह की लापरवाही भक्तों की सुरक्षा में बड़ी बाधा बन सकती है। अतः सभी विभाग अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से निभाएं। बैठक में एक प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रस्तावित सुविधाओं, सेवाओं और पूरी कार्ययोजना का खाका भी पेश किया गया। बड़ी संख्या में वॉलेंटियर्स तैनात करने के निर्देश बैठक में आयोजन समिति को निर्देश दिए गए कि वे पर्याप्त पार्किंग, रास्तों पर दिशा सूचक बोर्ड, भोजन का उचित प्रबंध और बड़ी संख्या में वॉलेंटियर्स की तैनाती सुनिश्चित करें। मुख्य सड़कों और हाईवे पर जाम से बचने के लिए प्रभावी डायवर्जन प्लान लागू करने, पार्किंग क्षेत्रों को अलग-अलग जोन में बांटने और वहां से कथा स्थल तक श्रद्धालुओं के सुरक्षित आने-जाने की व्यवस्था पर विशेष जोर दिया गया ताकि अव्यवस्था न फैले। जगह-जगह बोर्ड लगाने के निर्देश प्रशासन ने भीड़ पर काबू पाने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ पीने के पानी, साफ-सफाई और बिजली की निर्बाध आपूर्ति के कड़े निर्देश दिए हैं। मोबाइल नेटवर्क, सूचना प्रसारण सिस्टम और एलईडी स्क्रीन को दुरुस्त रखने को कहा गया है ताकि श्रद्धालुओं को कथा सुनने और जरूरी जानकारी पाने में कोई दिक्कत न हो। यही नहीं रुद्राक्ष वितरण बंद रहने की जानकारी प्रमुख जगहों पर बोर्ड लगाकर और मीडिया के जरिए पहुंचाई जाए ताकि लोग परेशान न हों। एम्बुलेंस, डॉक्टर और उपचार केंद्र लगाने के निर्देश आयोजन स्थल पर पर्याप्त एम्बुलेंस, डॉक्टर और जरूरी दवाओं के साथ प्राथमिक उपचार केंद्र लगाने के निर्देश दिए गए। इमरजेंसी से निपटने के लिए मिनी आईसीयू तैयार रखने और मरीजों को बड़े अस्पताल भेजने की व्यवस्था करने को कहा गया है।अधिकारियों ने पंडित प्रदीप मिश्रा के साथ कथा स्थल, पंडाल प्रवेश और निकास द्वारों का निरीक्षण किया। उन्होंने पार्किंग, भोजनशाला और कंट्रोल रूम का भी जायजा लिया गया। जरूरी सुधार के निर्देश दिए गए।

Meta बनने का सपना चुराया, फेसबुक के 1000 कर्मचारियों को जकरबर्ग ने किया नौकरी से बाहर

कैलिफोर्निया अमेरिकी टेक कंपनी Meta ने 2026 की शुरुआत में अपने Reality Labs डिविज़न में 1,000 से ज़्यादा कर्मचारियों को निकाल दिया है. यह खबर सिर्फ नौकरी छंटनी नहीं है, बल्कि एक बड़ा इशारा है कि Meta किस दिशा में जा रहा है. Reality Labs वही यूनिट है जो Virtual Reality (VR), Metaverse और XR (Extended Reality) जैसी टेक पर काम करती थी. अगर आपको याद हो तो कंपनी के को-फाउंडर और सीईओ मार्क जकरबर्ग ने पूरी कंपनी का नाम फेसबुक से Meta कर दिया था और Metaverse पर बिलियन डॉलर्स निवेश किए थे. हालांकि एक्सपर्ट्स मानते हैं कि मेटावर्स एक बबल की तरह था जो फूट रहा है और कंपनी अब दूसरे डायरेक्शन में शिफ्ट हो रही है.  Metaverse पर लगाया था बड़ा दांव, लेकिन टूटा सपना   Meta ने Reality Labs में करीब 10% से ज़्यादा स्टाफ को निकालने का फैसला लिया है, जिससे यह साफ़ होता है कि कंपनी अब Metaverse प्रोजेक्ट पर उतना बड़ा भरोसा नहीं कर रही जितना पहले कर रही थी. यह बदलाव अलग अलग टीमों और प्रोडक्ट्स को प्रभावित कर रहा है, खासकर उन लोगों को जो Meta के VR हेडसेट्स, Horizon Worlds जैसे Metaverse प्लेटफ़ॉर्म और कुछ अन्य इमर्सिव गेमिंग स्टूडियोज़ पर काम करते थे. यह छंटनी बुधवार सुबह से शुरू हुई और इसके बारे में कंपनी ने अपने इनसाइड मैसेज में भी बताया. Meta के Chief Technology Officer एंड्रयू बोस्वर्थ ने इंटर्नली स्टाफ को बताया कि यह कदम कंपनी की सबसे महत्वपूर्ण बैठक से ठीक पहले लिया गया है, जो इस साल की रणनीति को तय करेगा. Meta के एक प्रवक्ता ने कहा है कि यह बदलाव Metaverse में भारी खर्च और कम उपयोग के कारण ज़रूरी था, और कंपनी अब अपने संसाधनों को AI-ड्राइव्ड प्रोडक्ट्स और वियरेबल टेक की तरफ़ ज़्यादा फोकस कर रही है.  LinkedIn पर Open to Work की भरमार इस बदलाव के बाद LinkedIn जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर Meta के पूर्व कर्मचारियों की तरफ़ से 'Open to Work' पोस्ट्स की भरमार देखी जा रही है, जिससे यह साफ़ होता है कि कई अनुभवी टेक प्रोफेशनल अब नई नौकरी की तलाश में हैं. इस हफ्ते से LinkedIn पर हजारों Open to Work पोस्ट्स वायरल हो रही हैं, जो दिखाती हैं कि यह सिर्फ एक कंपनी की नौकरी छंटनी नहीं, बल्कि पूरे टेक सेक्टर में बदलाव की हवा है. Meta के Reality Labs ने पिछले कुछ सालों में Metaverse और XR टेक पर अरबों डॉलर खर्च किए, लेकिन इन प्रोडक्ट्स को Mainstream यूज़र्स द्वारा उतना अपनाया नहीं गया जितना कंपनी ने सोचा था. कई रिपोर्ट्स के अनुसार Reality Labs ने पिछले कुछ वर्षों में भारी वित्तीय नुकसान भी झेला है, जिससे Meta को अपनी रणनीति पर फिर से विचार करना पड़ा. अब Meta को लगता है कि दुनिया अभी मेटावर्स के लिए तैयार नहीं है, बल्कि AI और Wearables जैसे प्रोडक्ट्स ज़्यादा प्रैक्टिकल हैं और कंपनियों को वहीं ज़्यादा फायदा मिलेगा. Meta स्मार्ट AI ग्लासेस पर पूरा फोकस इसी वजह से Ray-Ban Smart Glasses जैसे AI वाले डिवाइसेज़ पर ज़्यादा निवेश कर रही है, जिनकी मांग बढ़ रही है, वहीं VR हेडसेट्स और Metaverse प्लेटफ़ॉर्म की दिशा थोड़ी धीमी पड़ रही है. स्मार्ट ग्लासेज अपने कॉम्पैक्ट साइज और प्रैक्टिकल होने की वजह से दुनिया भर में काफी पॉपुुलर हुए और इनकी बिक्री भी खूब हुई. हाल ही में Meta ने डिस्प्ले वाले स्मार्ट ग्लासेज भी लॉन्च किए हैं जो अमेरिका में Out Of Stock हो रहा है. इतना  ही नहीं, कंपनी Orion ग्लासेज पर भी काम कर रही है जो चश्मा की तरह ही है, लेकिन उसमें मिक्स्ड रिएलिटी के तमाम फीचर्स मिलेंगे जैसे Apple Vision Pro में देखने को मिलते हैं. Meta के इस बड़े बदलाव से यह भी पता चलता है कि Tech इंडस्ट्री में जो भी प्रोडक्ट तेजी से पैसा नहीं कमा रहे, उनसे कंपनियां जल्दी दूरी बना रही हैं. पिछले साल भी कई बड़ी टेक कंपनियों ने Job Cuts का दौर देखा है, जिसमें Meta, Microsoft, Google जैसे बड़े नाम शामिल रहे. इस साल की शुरुआत में Meta ने Reality Labs में छंटनी कर यह संदेश दिया है कि अब कंपनी का ध्यान भविष्य की AI फर्स्ट तकनीकों पर है न कि सिर्फ़ हॉलीवुड-ज़्यादा फ्यूचरिस्टिक Metaverse पर.  

पर्यावरण से कमाई तक: दिल्ली सरकार का नया कार्बन क्रेडिट प्लान, कैसे होगी बंपर आमदनी?

नई दिल्ली दिल्ली कैबिनेट ने मंगलवार को कार्बन क्रेडिट मोनेटाइजेशन फ्रेमवर्क को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से दिल्ली की हरित परियोजनाओं से होने वाली कार्बन उत्सर्जन में कमी को मापकर कार्बन क्रेडिट में बदला जाएगा और इन्हें राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचा जाएगा। इससे पर्यावरण संरक्षण के लिए बिना सरकारी खजाने पर कोई अतिरिक्त बोझ डाले नया राजस्व स्रोत बनेगा।   दिल्ली अब हरित प्रयासों से कमाएगी राजस्व मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, 'दिल्ली सरकार जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस फ्रेमवर्क से अतिरिक्त राजस्व मिलेगा, जिससे विकास कार्य तेज होंगे। यह पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देगा और राजस्व को राज्य के कंसॉलिडेटेड फंड में जमा कर सार्वजनिक कल्याण योजनाओं में लगाया जाएगा। दिल्ली कार्बन बाजार में अग्रणी राज्य बनेगी।' पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि दिल्ली पहले से ही बड़े पैमाने पर हरित बदलाव ला रही है। इसमें इलेक्ट्रिक वाहनों का विस्तार, इलेक्ट्रिक बसें, शहरी वानिकी, यमुना की सफाई, सोलर ऊर्जा का बढ़ता उपयोग, वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट और लैंडफिल से बायोगैस उत्पादन शामिल हैं। इन प्रयासों से होने वाली उत्सर्जन कटौती को वैज्ञानिक तरीके से मापा जाएगा। कैसे काम करेगा फ्रेमवर्क? एक मीट्रिक टन CO₂ (या समकक्ष ग्रीनहाउस गैस) कम होने पर एक कार्बन क्रेडिट मिलेगा। क्रेडिट को वीरा, गोल्ड सेटेंडर्ड या भारत के उभरते कार्बन मार्केट जैसे प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर किया जाएगा। इन्हें बेचकर मिलने वाली कमाई सीधे राज्य के फंड में जाएगी। ये पूरी प्रक्रिया राजस्व-साझेदारी मॉडल पर आधारित है। सरकार को कोई शुरुआती खर्च नहीं करना पड़ेगा। विशेष एजेंसियां सफलता के बाद ही फीस लेंगी। पर्यावरण विभाग तीन विशेषज्ञ एजेंसियों को पैनल में शामिल करेगा, जो प्रोजेक्ट की पहचान, दस्तावेजीकरण, सत्यापन, क्रेडिट जारी करना और ट्रेडिंग में मदद करेंगी। मॉनिटरिंग, रिपोर्टिंग और वेरिफिकेशन (MRV) सिस्टम अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होगा। अन्य राज्यों से प्रेरणा दिल्ली ने सफल मॉडलों से सीख ली है। इंदौर ने कंपोस्टिंग और सोलर प्रोजेक्ट्स से 50 लाख रुपये कमाए। मेघालय में किसानों को प्रति टन 40 यूरो मिले, जबकि अरुणाचल प्रदेश के छोटे हाइड्रो प्रोजेक्ट से 16,000 से ज्यादा टन क्रेडिट बने। दिल्ली अब इनसे आगे बढ़कर शहरी स्तर पर मिसाल कायम करेगी। दिल्ली फाइनेंशियल कॉर्पोरेशन बंद कैबिनेट ने दिल्ली फाइनेंशियल कॉर्पोरेशन (DFC) को बंद करने का भी फैसला लिया। यह संस्था लगातार घाटे में चल रही थी। इसकी नेट वर्थ माइनस 15.45 करोड़ रुपये हो गई और बैड लोन 55.8% तक पहुंच गए। रिकवरी की कोई संभावना नहीं बची थी। अब इन संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा।