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वर्ष 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखकर नगरीय विकास एवं आवास विभाग बना रहा है दीर्घकालिक योजना : मंत्री विजयवर्गीय

नगरीय विकास एवं आवास विभाग वर्ष 2047 को ध्यान में रखकर बना रहा है योजना मंत्री विजयवर्गीय ने पत्रकारों को दी जानकारी भोपाल नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2047 में मध्यप्रदेश की कुल आबादी का लगभग 50 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में निवास करेगी। इस बात को ध्यान रखते हुए शहरी क्षेत्रों में अधोसंरचना कार्यों की योजना तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने स्वच्छता के क्षेत्र में देश में विशिष्ठ स्थान बनाया है। हमारे विभाग की कोशिश होगी कि प्रदेश के शहरी क्षेत्रों का एयर क्वालिटी इंडेक्स अच्छा हो। इस वजह से शहरी क्षेत्रों में बगीचों के विकास के साथ-साथ नगरवन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। मंत्री विजयवर्गीय भोपाल में राज्य सरकार के विकास और सेवा के दो वर्ष पूरा होने पर आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। नर्मदा में नहीं मिलेगा प्रदूषित पानी मंत्री विजयवर्गीय ने बताया कि प्रदेश के जो शहर नर्मदा नदी के किनारे में आते है, वहां शहरों का दूषित पानी नदीं में न मिलें। इस पर विभाग लगातार काम कर रहा है। मेट्रोपॉलिटन सिटी की चर्चा करते हुए मंत्री विजयवर्गीय ने बताया कि विभाग ने इंदौर-उज्जैन और भोपाल मेट्रोपॉलिटन सिटी के विकास का कार्य शुरू कर दिया है। भोपाल मेट्रोपॉलिटन सिटी में भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़ और नर्मदापुरम जिलों की प्रमुख तहसीलों को शामिल किया है। इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन सिटी में इंदौर, उज्जैन, देवास, शाजापुर, रतलाम और धार जिलों की प्रमुख तहसीलों को शामिल किया गया है। प्रदेश की 2 मेट्रोपॉलिटन सिटी इस तरह विकसित की जाएंगी। जहां शहरी आबादी को सभी आवश्यक बुनियादी सुविधाएं मिल सकें। मेट्रोपॉलिटन सिटी में निवेश और रोजगार पर भी ध्यान दिया जाएगा। ग्रीन सिटी मंत्री विजयवर्गीय ने बताया कि विभाग की कोशिश है कि शहरी क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की अधिक से अधिक सेवाओं का डिजिटलीकरण ऑनलाइन हों। इसको ध्यान में रखते हुए हमने ई-नगरपालिका विकसित की है। प्रदेश के शहरों को ग्रीन सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। नगरीय सेवाओं में सोलर एनर्जी का अधिक से अधिक उपयोग किया जाएं। इसको सुनिश्चित किया जा रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि नगरीय निकाय आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो। इसके लिये शहरी क्षेत्रों की सम्पत्तियों का जीआई मेपिंग किया जा रहा है। उल्लेखनीय बिन्दु     प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी में एक लाख 60 हजार से अधिक आवासों का निर्माण पूरा। प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश को बेस्ट परफॉर्मिंग अवार्ड की श्रेणी में दूसरा स्थान।     अमृत 2.0 में 300 परियोजनाओं का कार्य पूर्ण।     जल गंगा संवर्द्धन अभियान में 3 हजार 323 जल संरचनाओं का, 74 जल संग्रहण संरचनाओं का लोकार्पण।     स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में 8 शहरों का राष्ट्रीय पुरस्कार। साथ ही इंदौर ने देश के नम्बर वन शहर का सम्मान लगातार 8 साल बनायें रखा।     कार्बन क्रेडिट से राशि अर्जित करने वाले इंदौर देश का प्रथम शहर     दीनदयाल रसोई योजना में संचालित 56 केन्द्रों को बढ़कर इन्हें 191 केन्द्र किया गया।     पीएम स्वनिधि योजना अंतर्गत 9 लाख से अधिक रहणी पटरी वालों को 14 लाख से अधिक ऋण प्रकरण मबजूत। मध्यप्रदेश को नवाचार और सर्वोत्तम अभ्यास की श्रेणी में पहला स्थान,     आजीविकास मिशन में 3 लाख युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिलाया गया। 1 लाख 70 हजार युवाओं को स्व-रोजगार से जोड़ा गया।     प्रदेश में 65 हजार स्व सहायता समूह का गठन। 6 लाख से अधिक परिवारों को स्व-सहायता समूह में जोड़ा गया।     इंदौर में मेट्रो परिचालन शुरू भोपाल में दिसम्बर 2025 में ही शुरू होगा मेट्रो।     हाउसिंग बोर्ड द्वारा एमपी ऑनलाईन के माध्यम से 532 करोड़ की सम्पत्तियों का विक्रय।     गीता भवन स्थापना योजना 5 महीनों के लिये स्वीकृत।     प्रदेश में इंटीग्रटेड टाउनशिप पॉलिसी-2025 मंजूर। प्रदेश में इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी को भी मंजूरी।  

उद्यमियों ने मुख्यमंत्री को दिए मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी, बायो रिफाइनरी, फार्मा, फूड प्रोसेसिंग और सर्विस सेक्टर से जुड़े ₹6500 करोड़ के निवेश प्रस्ताव

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से 25 कंपनियों के 45 शीर्ष प्रोफेशनल्स की महत्वपूर्ण भेंट उद्यमियों ने मुख्यमंत्री को दिए मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी, बायो रिफाइनरी, फार्मा, फूड प्रोसेसिंग और सर्विस सेक्टर से जुड़े ₹6500 करोड़ के निवेश प्रस्ताव 2017 के पहले के दुःस्वप्न को भूल नए भारत के नए यूपी को का करें अनुभव: मुख्यमंत्री हर निवेशक की पाई-पाई सुरक्षित, विकास और ग्रोथ की गारंटी वाला नया उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री बोले उद्यमी, यूपी के साथ मिलकर काम करने की है इच्छा, अब सब खच है अनुकूल नए उत्तर प्रदेश को समझने और निवेश की संभावनाएं जानने का मुख्यमंत्री ने किया आह्वान विकसित भारत के संकल्प में सहभागी बनने के लिए निवेशकों को मुख्यमंत्री का आमंत्रण कानून व्यवस्था में ऐतिहासिक सुधार से उत्तर प्रदेश बना सुरक्षित निवेश गंतव्य इन्वेस्टर समिट से बदली प्रदेश की छवि, 40 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचे निवेश प्रस्ताव एमएसएमई, ओडीओपी और डिफेंस कॉरिडोर से औद्योगिक विकास को नई गति लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सेएक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक में देश और विदेश की 25 प्रतिष्ठित कंपनियों से जुड़े 45 प्रोफेशनल्स ने भेंट की। डब्ल्यूएमजी ग्रुप के तत्वावधान में आए इस प्रतिनिधिमंडल में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स, फाइनेंस, ऑटोमोबाइल, बैंकिंग, बेवरेज, फार्मा सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े सीईओ, सीएफओ, डायरेक्टर्स और शीर्ष प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। बैठक का उद्देश्य उत्तर प्रदेश में निवेश की संभावनाओं, औद्योगिक वातावरण और भविष्य की विकास योजनाओं पर विस्तृत संवाद करना था। मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व और उत्तर प्रदेश में स्थिर, सुरक्षित एवं उद्योग-अनुकूल वातावरण से प्रभावित होकर बैठक में उपस्थित उद्यमियों और निवेशकों ने प्रदेश में निवेश के प्रति गहरा विश्वास व्यक्त किया। विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े इन उद्यमियों ने उत्तर प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और विस्तार के लिए कुल लगभग 6,500 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किए। इन प्रस्तावों में मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी, बायो रिफाइनरी, फार्मा, फूड प्रोसेसिंग और सर्विस सेक्टर से संबंधित परियोजनाएं शामिल हैं, जिनसे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के साथ प्रदेश की आर्थिक गति को और मजबूती मिलने की संभावना है। निवेशकों ने भरोसा जताया कि उत्तर प्रदेश की मजबूत कानून व्यवस्था, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकार की प्रो-एक्टिव अप्रोच उनके दीर्घकालिक निवेश के लिए सबसे उपयुक्त आधार प्रदान करती है। इससे पहले, मुख्यमंत्री ने सभी उद्योग प्रतिनिधियों का उत्तर प्रदेश में स्वागत करते हुए कहा कि बीते कई दशकों तक राजनीतिक अस्थिरता और गलत धारणाओं के कारण प्रदेश की छवि पूरे देश में नकारात्मक बनी रही। उन्होंने कहा कि अब उन पुरानी धारणाओं को पीछे छोड़कर नए उत्तर प्रदेश को जानने और समझने की आवश्यकता है। अतीत पीड़ादायक और अव्यवस्थित रहा, किंतु वर्तमान सुरक्षित, स्थिर और अवसरों से भरा है तथा भविष्य उज्ज्वल है। मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य रखते हुए बताया कि स्वतंत्रता के समय देश की अर्थव्यवस्था में उत्तर प्रदेश का योगदान लगभग 14 से 15 प्रतिशत था, जो समय के साथ घटकर 7.5 से 8 प्रतिशत के आसपास रह गया और प्रदेश को बीमारू राज्य के रूप में देखा जाने लगा। बीते साढ़े आठ वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में किए गए व्यापक सुधारों और नीतिगत बदलावों का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश आत्मविश्वास के साथ अपने आर्थिक पुनरुत्थान की बात कर सकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पूंजी तभी सुरक्षित रह सकती है जब समाज और राज्य सुरक्षित हों। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले की स्थिति यह थी कि हर तीसरे दिन दंगे होते थे, महीनों तक कर्फ्यू लगता था और लगभग 50 ऐसे जिले थे जहां सूर्यास्त के बाद बेटियों का सुरक्षित घर लौटना मुश्किल था। रंगदारी और गुंडा टैक्स जैसी अव्यवस्थाएं अघोषित प्रणाली का हिस्सा बन चुकी थीं। सरकार बनने के पहले दिन ही यह संकल्प लिया गया कि इस अराजकता को समाप्त करना है। परिणामस्वरूप आज लगभग नौ वर्षों में एक भी दंगा नहीं हुआ, एक दिन का भी कर्फ्यू नहीं लगा और प्रदेश माफिया मुक्त हुआ है। इंफ्रास्ट्रक्चर में आए व्यापक परिवर्तन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में केवल डेढ़ एक्सप्रेसवे थे, जबकि आज देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का लगभग 55 प्रतिशत अकेले उत्तर प्रदेश के पास है। देश का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क, पांच अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, इनलैंड वॉटरवे, रैपिड रेल परियोजनाएं और शहरी परिवहन में रोपवे जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं प्रदेश में विकसित की जा रही हैं। यह परिवर्तन योजनाबद्ध और दूरदर्शी निवेश का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने निवेश यात्रा का अनुभव साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2018 में जब पहली इन्वेस्टर समिट आयोजित की गई थी, तब अधिकारियों को भी केवल 20 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिलने की उम्मीद थी। सरकार ने देशभर में रोड शो किए, उद्योग जगत से सीधा संवाद किया और स्वयं मुख्यमंत्री ने प्रमुख औद्योगिक केंद्रों का दौरा कर उत्तर प्रदेश की नई पहचान प्रस्तुत की। इसका परिणाम यह रहा कि 2018 की समिट में 4.67 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। इसके बाद वर्ष 2023 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में 40 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले, जो उत्तर प्रदेश के परिवर्तन की सशक्त कहानी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, उद्योग अनुकूल वातावरण, भूमि और बिजली की उपलब्धता तथा कुशल मानव संसाधन के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। प्रदेश में आईआईएम, आईआईटी, एनआईटी, इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय और तकनीकी संस्थान मौजूद हैं। 96 लाख से अधिक इकाइयों के साथ यह देश का सबसे बड़ा एमएसएमई बेस है। ओडीओपी योजना को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर के छह नोड विकसित किए जा रहे हैं और लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण इसका सशक्त उदाहरण है। बुंदेलखंड क्षेत्र में झांसी में बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण को विकसित किया जा रहा है, जहां निवेश के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास दिलाया कि नए उत्तर प्रदेश में प्रत्येक निवेशक की पूंजी पूरी तरह सुरक्षित है और यहां विकास की स्पष्ट गारंटी है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करना है, जिसके लिए विकसित उत्तर प्रदेश आवश्यक है। इसी उद्देश्य से हर जिले, हर नगरीय निकाय, … Read more

PF पर संकट? बड़े खर्चों में अब किस पर भरोसा करेंगे लोग

 नई दिल्ली हमारे देश में अधिकतर लोग रिटायरमेंट फंड को लेकर गंभीर नहीं हैं. पेंशन की व्यवस्था पर ज्यादातर नौकरी-पेशा लोग तो चर्चा ही नहीं करते, क्योंकि वो इसके प्रत‍ि न तो जागरुक है और न ही उन्हें इसकी पूरी जानकारी है. इसे आप पढ़े-लिखे लोगों की समस्या कहें या मजबूरी, लेकिन सच यही है. रिटायरमेंट फंड और पेंशन को लेकर सबसे ज्यादा उदासीनता तो प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों में है. दरअसल, प्राइवेट नौकरी वालों के लिए PF का अमाउंट एक बड़ा सहारा होता है. छोटी-छोटी राशि हर महीने जुड़कर एक बड़ा फंड बन जाता है. प्राइवेट जॉब करने वालों के ल‍िए तो उनके लिए PF का पैसा मुसीबत का साथी होता है. नौकरी छूट गई तो PF के पैसे से आर्थिक चुनौतियां थोड़ी कम हो जाती हैं. परिवार में कोई बीमार है, कर्ज लेने से अच्छा है कि PF का पैसा निकालकर इलाज करवा लेते हैं. बच्चों की पढ़ाई या शादी में पैसे कम पड़ रहे हैं, तो PF अकाउंट से निकाल लेते हैं. घर खरीदना है, पीएफ खाते में वर्षों से पड़ी जमापूंजी को निकाल लेते हैं. देश में अधिकतर मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए PF के पैसे मौजूदा दौर में सबसे ज्यादा इन्हीं कामों में इस्तेमाल हो रहे हैं. यहां गौरतलब है क‍ि देश में जब सबसे अधिक लोग प्राइवेट जॉब करते हैं. PF में बड़े बदलाव की तैयारी आज PF राशि पर चर्चा का मूल कारण सरकार का नया कदम है. सरकार कह रही है कि चंद महीने के बाद से आप चुटकी में पीएफ फंड को निकाल सकते हैं, प्रक्रिया आसान हो जाएगी. EPFO खातों को UPI और ATM से लिंक कर दिया जाएगा. ये सबकुछ मार्च-2026 तक पूरा होने का दावा किया जा रहा है. PF निकासी प्रक्रिया को आसान बनाना अच्छी बात है. क्योंकि लोगों को अभी भी PF अमाउंट निकालने में परेशानी होती है. सरकार का कहना है कि जिस तरह से लोग अपने बैंक खाते से पैसे निकाले हैं, ठीक उसी तरह की व्यवस्था PF फंड को निकालने के लिए कर दी जाएगी, इसपर काम तेजी से चल रहा है.  यानी डिजिटल युग में PF खाते से पैसे निकालना तो बेहद आसान हो जाएगा, लेकिन इसका एक बड़ा साइड इफेक्ट भी द‍िखना तय है. लोगों की बचत पर ग्रहण लगने वाला है. जब मन करे PF अकाउंट से फंड निकालने की सुविधा मिल जाएगी तो जरा सोचिए- फिर कितने और कौन लोग होंगे, जो PF खातों में वर्षों तक राशि बचाकर रखेंगे. छोटी-छोटी जरूरतों पर लोग ATM पहुंच जाएंगे. ऐसे में PF अमाउंट कितने दिन तक अकाउंट में टिका रहेगा, ये बड़ा सवाल है? घर खरीदना, बीमारी, पढ़ाई या शादी जैसे मौकों पर जो PF फंड आज सहारा बन जाता है, भविष्य में ये व‍िकल्प आपके पास नहीं रहेगा.  फिर सेविंग को लेकर क्या विकल्प? तुरंत PF निकासी की सुविधा लागू होते ही कोई भी अपने आपको PF अमाउंट निकालने में सहज पाएगा. चाहे, जिनके पीएफ अकाउंट में 10 लाख रुपये जमा हो या फिर 10 हजार. मोबाइल खरीदना और शॉपिंग जैसे काम के लिए भी लोग बेधड़क PF से पैसे निकालने लग जाएंगे. आदत इतनी बिगड़ सकती है कि सैलरी की तरह ही जैसे ही हर महीने PF अकाउंट में अमाउंट डिपॉजिट होगी, चंद दिन के बाद खुद जाकर निकाल लिया करेंगे.  वैसे ही देश में रिटायरमेंट फंड को लेकर लोग जागरूक नहीं हैं. भले ही आज निकासी प्रोसेस में समस्या की वजह से लोग PF फंड नहीं निकाल पा रहे हैं, लेकिन इसी आड़ में मोटा अमाउंट जमा हो जा रहा है. तुरंत PF फंड निकासी की सुविधा से भले ही कोई 20 साल तक नौकरी कर लेगा, परंतु अधिकतर लोगों के EPFO खाते में जमापूंजी के नाम पर चंद रुपये बचेंगे, क्योंकि वो तो समय-समय पर UPI और ATM का लाभ लेकर PF के पैसे को निकाले जा चुके होंगे. अब कुछ आंकड़ों को देखते हैं, जिससे आपको पता चल जाएगा कि कैसे बचत पर ग्रहण लगने वाला है. नियम के मुताबिक, कर्मचारी और नियोक्ता, दोनों ही कर्मचारी के मूल वेतन का 12% पीएफ में योगदान करते हैं. जिसमें कुछ कुछ हिस्सा पेंशन फंड (EPS) में जाता है. वित्त वर्ष 2023-24 में EPFO के सदस्य 7.37 करोड़ थे, यानी मौजूदा समय में 8 करोड़ के आसपास लोग EPFO से जुड़े हैं. EPFO का कुल PF कॉर्पस (FY25) में करीब 25 लाख करोड़ रुपये है, जो कि भारत की सबसे बड़ी रिटायरमेंट सेविंग फंड में से एक है. यह राशि साल-दर-साल बढ़ रही है. लेकिन नई व्यवस्था लागू होते ही ये राशि घटने लगेगी, फिर ये पैसा कहां जाएगा?  PF की आड़ में जोखिम लेने से नहीं हिचकेंगे लोग ये भी हो सकता है कि लोग PF का पैसा शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में लगाना शुरू कर दे, क्योंकि PF पर फिलहाल 8.25 फीसदी ब्याज दर निर्धारित है. जबकि म्यूचुअल फंड में इससे ज्यादा की संभावना रहती है. शेयर बाजार से तो लोग PF के मुकाबले दोगुने-तिगुने ब्याज की कल्पना कर लेते हैं. ऐसे में एक सुरक्षित निवेश से पैसे निकालकर लोग जोखिम लेने से नहीं हिचकेंगे. अब PF की तुलना में म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार से कितना फायदा होगा, वो तो समय ही बताएगा. सच्चाई ये भी है कि भारत में कुल सकल बचत दर करीब 31 फीसदी है. वहीं सेबी के हालिया सर्वे के मुताबिक केवल 10% भारतीय परिवार ही म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार और बॉन्ड जैसे वित्तीय उत्पादों में निवेश करते हैं. शहरी इलाकों में यह आंकड़ा 15% का है, जबकि ग्रामीण इलाकों में महज 6% है. हालांकि युवा पीढ़ी में अब बचत का रुझान बढ़ा है. लेकिन वो तेजी से जोखिम भरे शेयर बाजार की ओर आकर्षित हो रहे हैं.  सरकारी आंकड़े बताते हैं कि अब भी करीब 69% भारतीय हाउसहोल्ड बैंक में डिपॉजिट या FD में पैसा रखना पसंद करते हैं. वहीं एक रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 40% शहरी लोगों ने रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए अब तक कोई निवेश नहीं किया है. ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी खराब है. यानी देश में आधी से ज्यादा आबादी के पास रिटायरमेंट फंड को लेकर कोई प्लान नहीं है. पेंशन की बात करें तो देश की आबादी 140 करोड़ से ज्यादा है, लेकिन अधिकतम … Read more

उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सपा सुप्रीमो पर किया कड़ा प्रहार

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पूरी तरह से दिग्भ्रमितः ब्रजेश पाठक उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सपा सुप्रीमो पर किया कड़ा प्रहार पीडीए सच में है पर्सनल डेवलपमेंट एसोसिएशनः उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक बोलेः कुर्सी की भूख अखिलेश को झूठ बोलने पर करती है मजबूर लखनऊ  उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर कड़ा प्रहार किया है। गुरुवार को उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव जिस पीडीए की चर्चा करते हैं, वह वास्तव में पर्सनल डेवलपमेंट एसोसिएशन है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के मुखिया पूरी तरह दिग्भ्रमित हो चुके हैं। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि अखिलेश यादव सच्चाई को देखकर भी सच नहीं कह सकते, क्योंकि कुर्सी की भूख उन्हें झूठ बोलने पर मजबूर करती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार जनता को गुणवत्तापूर्ण जीवन देने के लिए प्रतिबद्ध है और उसी दिशा में लगातार तेजी से काम किया जा रहा है। डेवलप्ड स्टेट के रूप में तेजी से परिवर्तित हो रहा उत्तर प्रदेश ब्रजेश पाठक ने कहा कि अखिलेश यादव जब उत्तर प्रदेश के वर्तमान आंकड़ों को देखते होंगे, राउंड द क्लॉक बिजली आपूर्ति, बेहतर कनेक्टिविटी, जीवन स्तर में सुधार और सुदृढ़ स्वास्थ्य सेवाएं, तो उन्हें निश्चित रूप से आश्चर्य होता होगा। स्वाभाविक है कि वे इन उपलब्धियों की तुलना अपने शासनकाल से करते होंगे, जब प्रदेश में टूटी सड़कें थीं, रात में अंधेरा रहता था, अस्पतालों को तबेला बना दिया गया था और स्कूलों में न बाउंड्री वॉल थी और न ही पढ़ाई का माहौल।उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश पूरी तरह बदल चुका है और एक डेवलप्ड स्टेट के रूप में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रदूषण के आंकड़ों पर उठाए जा रहे सवालों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और आईआईटी द्वारा लगाए गए सेंसर से ही रीडिंग ली जाती है, जिनमें सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होता। पुलिस और एसटीएफ ने सभी घटनाओं का किया निष्पक्ष अनावरण उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि प्रदेश की जनता भली-भांति जानती है कि उत्तर प्रदेश पुलिस और एसटीएफ ने हर घटना का निष्पक्ष और प्रभावी अनावरण किया है। एसटीएफ द्वारा कुख्यात अपराधियों को ढेर किया जा चुका है, जो संगठित माफिया गिरोह के रूप में प्रदेश में सक्रिय थे।उन्होंने कहा कि चाहे अतीक अहमद हो, मुख्तार अंसारी हो या बद्दो जैसे कुख्यात अपराधी, अंतरराज्यीय गैंग चलाने वाले माफियाओं का उत्तर प्रदेश से पूरी तरह सफाया हो चुका है। अब प्रदेश में कोई माफिया नहीं है। माफिया दुम दबाकर प्रदेश से भाग चुके हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि आप इसलिए पीड़ित हैं क्योंकि आप उन्हीं माफियाओं के समर्थक थे और उन्हीं के सहारे सत्ता चला रहे थे। आज उत्तर प्रदेश की जनता जागरूक है और उसने समाजवादी पार्टी के खाते को बंद कर दिया है। समाजवादी पार्टी को नहीं है कुछ भी कहने का अधिकार ब्रजेश पाठक ने पुलिस भर्ती और लेखपाल भर्ती का उल्लेख करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी को इन विषयों पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है। उन्हें पहले अपने गिरेबान में झांककर देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि सपा सरकार के कार्यकाल में भर्तियों में जातिवाद और भाई-भतीजावाद के गंभीर आरोप लगते थे। एसडीएम जैसे 86 पदों में से 56 नियुक्तियां एक ही जाति की थीं। उन्होंने कहा कि उनके शासनकाल में लेखपाल भर्ती के दौरान पर्ची सिस्टम चलता था, जबकि वर्तमान सरकार में 8,085 पदों पर पूरी तरह मेरिट और बुद्धि कौशल के आधार पर नियुक्तियां की गई हैं। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि इन भर्तियों पर सवाल उठाना उन हजारों युवाओं की मेधा और प्रतिभा पर सवाल उठाने जैसा है। केवल बयानवीर बनना है लक्ष्य ब्रजेश पाठक ने कहा कि वर्तमान सरकार ने अपने कार्यकाल में लाखों नौकरियों में निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती की है। एक भी भर्ती में गड़बड़ी नहीं हुई है और आरक्षण के सभी नियमों का पूर्ण पालन किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने 68 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को भू माफियाओं से मुक्त कराया है। अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य केवल बयानबाजी करना रह गया है। एयर क्वालिटी इंडेक्स को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार इसे निर्धारित नहीं करती। यह मौसम विभाग और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा तय किया जाता है। सरकार सभी मानकों के अनुरूप कार्य कर रही है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी मुख्यालयों पर 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। सभी जिलों को फोरलेन से जोड़ने का कार्य किया गया है। सर्वाधिक एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश में हैं और निवेश के मामले में भी यूपी देश में अग्रणी है।

सऊदी अरब ने पाकिस्तानी भिखारियों पर कसा शिकंजा, शहबाज शरीफ की छवि पर सवाल

दुबई  पाकिस्तान अमेरिका और चीन के बल पर चाहे कितनी भी डींगें हांक ले लेकिन आए दिन अंतरराष्ट्रीय बेइज्जती का शिकार होता रहता है. आर्थिक बदहाली झेल रहे पाकिस्तान के लोग सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे मध्य-पूर्व के अमीर इस्लामिक देशों में जाकर भीख मांग रहे हैं. इन देशों की चेतावनियों के बावजूद, पाकिस्तान अपने भिखारियों पर लगाम लगाने में नाकाम रहा है. हाल ही में सऊदी अरब ने भीख मांगने के आरोप में करीब 56,000 पाकिस्तानियों को देश से निर्वासित किया है. सऊदी, यूएई ने पाकिस्तान को बार-बार वॉर्निंग दी है कि वो अपने भिखारियों पर लगाम कसे. दबाव के बीच पाकिस्तान ने हजारों पाकिस्तानियों को नो-फ्लाई लिस्ट में डाल दिया है यानी अब ये पाकिस्तानी देश से बाहर नहीं जा सकेंगे. रिपोर्टों के मुताबिक, संगठित भीख मांगने वाले गिरोहों को विदेश जाने से रोकने के लिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी, फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) ने 2025 में 66,154 यात्रियों को उड़ान भरने से रोक दिया. पिछले महीने ही यूएई ने अधिकांश पाकिस्तानी नागरिकों को वीजा जारी करना रोक दिया था. बताया गया था कि पाकिस्तानी खाड़ी देशों में जाकर आपराधिक गतिविधियों में लिप्त होते हैं और भीख मांगते हैं जिसे देखते हुए यूएई ने यह फैसला लिया. पाकिस्तान ने हजारों नागरिकों को नो-फ्लाई लिस्ट में डाला ये आंकड़े पाकिस्तानी संसद की नेशनल असेंबली की एक समिति ने तब जारी किए, जब पाकिस्तान ने हजारों नागरिकों को एग्जिट कंट्रोल लिस्ट (ECL) या नो-फ्लाई लिस्ट में डाल दिया था. पिछले साल सऊदी अरब ने पाकिस्तान से कहा था कि वो उमराह वीजा का दुरुपयोग कर मक्का और मदीना पहुंचकर भीख मांगने वालों पर रोक लगाए. पाकिस्तान में कई गिरोह उमराह वीजा पर भिखारियों को सऊदी, यूएई जैसे देशों में भेजकर भीख मंगवाते हैं. पाकिस्तानी खाड़ी देशों में जाकर आपराधिक गतिविधियां भी करते पाए गए हैं. इससे पाकिस्तान के तीर्थयात्रियों, कामगारों और छात्रों के लिए मुश्किलें बढ़ी हैं क्योंकि सऊदी, यूएई जैसे देश पाकिस्तानियों को वीजा जारी करने में आनाकानी करने लगे हैं. पाकिस्तान को लगातार मिल रही सऊदी, यूएई जैसे देशों से चेतावनी पाकिस्तान की एजेंसी FIA के प्रमुख रिफ्फत मुख्तार ने कराची स्थित अखबार 'The News International' के हवाले से बताया कि 'हाल ही में सऊदी अरब से संगठित भीख मांगने में शामिल 56,000 पाकिस्तानियों को निर्वासित किया गया.'  वहीं, The Express Tribune के अनुसार, FIA ने इस साल 66,154 यात्रियों को विमान से उतारा है ताकि भीख मांगने वाले गिरोहों और अवैध प्रवासियों को विदेश जाने से रोका जा सके. मुख्तार ने कहा कि अवैध प्रवासन और भीख मांगने के नेटवर्क ने वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचाया है. सालों से पाकिस्तानी भिखारी तीर्थयात्रा और टूरिस्ट वीजा का दुरुपयोग कर पश्चिम एशिया के शहरों में सड़कों पर भीख मांगते देखे जा रहे हैं. इससे मेजबान देशों में चिंता बढ़ी है और वैध पाकिस्तानी यात्रियों के लिए वीजा जांच सख्त हुई है. मक्का-मदीना में पाकिस्तानी भिखारियों को देख शर्मिंदा हो रहे पाकिस्तानी 2024 में सऊदी अरब के धार्मिक मामलों के मंत्रालय ने चेतावनी दी थी कि हालात काबू में नहीं आए तो इसका असर पाकिस्तानी उमराह और हज यात्रियों पर पड़ सकता है. सऊदी अरब की सड़कों पर पाकिस्तानी भिखारियों की मौजूदगी सबको दिखती है. 2024 में इस्लामाबाद के एक निवासी उस्मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, 'मैं अभी उमराह करके लौटा हूं और पाकिस्तानी होने पर शर्म महसूस कर रहा हूं. वो (पाकिस्तानी भिखारी) बिन दाऊद स्टोर के अंदर, उमराह के दौरान और सड़कों पर भीख मांग रहे हैं.' खास बात यह है कि इनमें से कई भिखारी पेशेवर तौर पर काम करते हैं. वे वीजा हासिल करने के बाद पाकिस्तान से बाहर चले जाते हैं. पाकिस्तानी अखबार डॉन में लिखे एक लेख में कानूनी विशेषज्ञ राफिया जकारिया ने पहले ही लिखा था कि पाकिस्तानी अपने ही देशवासियों को 'मक्का और मदीना के पवित्र स्थलों के बाहर डेरा जमाए हुए, विदेशी तीर्थयात्रियों को पैसों के लिए परेशान करते' देखते रहे हैं. उन्होंने इन भिखारियों को मास्टर मैनिपुलेटर्स बताया, जो लोगों की अपराधबोध की भावना से खेलकर उनसे पैसे निकलवाते हैं. विदेशों में पकड़े जाने वाले 90% भिखारी पाकिस्तानी यह समस्या सिर्फ इस्लाम के दो सबसे पवित्र स्थलों मक्का और मदीना के देश सऊदी अरब तक सीमित नहीं है. यूएई, कुवैत, अजरबैजान और बहरीन समेत कई पश्चिम एशियाई देशों में पाकिस्तानी भिखारी दिख जाते हैं. 2024 में ओवरसीज पाकिस्तानियों के सचिव जीशान खानजादा ने कहा था कि पश्चिम एशियाई देशों में हिरासत में लिए गए 90% भिखारी पाकिस्तान से थे. जहां इससे विदेशों में पाकिस्तानियों की छवि प्रभावित हुई है, वहीं देश में नौकरी तलाशने वालों को भी नुकसान झेलना पड़ा है. भिखारियों का यह 'निर्यात' न केवल सऊदी अरब जैसे देशों को परेशान कर रहा है, बल्कि कानून का पालन करने वाले पाकिस्तानियों पर भी उल्टा असर डाल रहा है. उन्हें अब सख्त वीजा जांच और वीजा रिजेक्शन का सामना करना पड़ रहा है.

डिजिटल फ्रॉड रोकने का प्रयास, लेकिन सिम बाइंडिंग से यूजर्स पर बढ़ सकती है मुश्किलें

 नई दिल्ली भारत इस वक्त डिजिटल फ्रॉड के ऐसे दौर से गुजर रहा है जहां हर फोन कॉल, हर मैसेज और हर लिंक शक के घेरे में आ चुका है. डिजिटल अरेस्ट, फर्जी पुलिस कॉल, बैंक इम्पर्सोनेशन और फिशिंग ने टेक्नोलॉजी को सहूलियत से डर में बदल दिया है. ऐसे माहौल में सरकार जब सिम बाइंडिंग जैसे कदम की बात करती है, तो पहली नज़र में ये एक सख्त लेकिन ज़रूरी फैसला लगता है. लेकिन टेक्नोलॉजी की दुनिया में अक्सर वही फैसले सबसे ज़्यादा नुकसान करते हैं जो देखने में बहुत आसान लगते हैं. सिम बाइंडिंग क्या है और क्यों इसकी चर्चा चल रही है. एक तरफ जहां टेलीकॉम कंपनियां सिम बाइंडिंग के सपोर्ट में दिख रही हैं वहीं दूसरी तरफ यूजर्स, एक्सपर्ट्स और बड़ी कंपनियां इससे अलग राय रख रही हैं.  ज्यादातर एक्सपर्ट्स की राय यही है कि सिम बाइंडिग के फायदे तो हैं, लेकिन यूजर्स के लिए डेली ऐप यूज में मुश्किल खड़ा कर सकता है और ये महंगा अफेयर भी हो सकता है.  एक टेक एडिटर के तौर पर, जिसने टेलिकॉम पॉलिसी, साइबर फ्रॉड और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स 10 साल तक करीब से कवर किया है, यह कहना ज़रूरी है कि सिम बाइंडिंग फ्रॉड का इलाज कम और सिस्टम की गलत समझ ज़्यादा दिखाता है. इरादा सही हो सकता है, लेकिन तरीका न तो पूरा है और न ही भविष्य के लिए सुरक्षित. सिम बाइंडिंग और लिमिट्स सिम बाइंडिंग का कॉन्सेप्ट सीधा है. जिस मोबाइल नंबर से WhatsApp, Telegram या कोई भी मैसेजिंग ऐप रजिस्टर हुआ है, वही सिम कार्ड फोन में होना चाहिए. सिम निकली, बदली या डीऐक्टिवेट हुई तो ऐप काम करना बंद. कई बार लोग इंडिया से बाहर जाते हैं और रोमिंग प्लान नहीं लेते हैं और वहां होटल के वाईफाई पर डिपेंडेंट रहते हैं. ऐसी स्थिति में अगर सिम बाइंडिंग आ गया तो वो वॉट्सऐप या कोई दूसरा ऐप जो उस फ़ोन से लिंक है यूज़ नहीं कर पाएंगे. वॉट्सऐप चलाने के लिए भी उन्हें महंगे रोमिंग प्लान की ज़रूरत होगी जो 3000-4000 रुपये से स्टार्ट होता है.  थ्योरी में यह एक मजबूत सिक्योरिटी लेयर लगती है. लेकिन असल दुनिया में फ्रॉड जिस तरह काम करता है, वहां यह थ्योरी जल्दी टूट जाती है. आज के साइबर अपराधी एक फोन, एक सिम या एक अकाउंट पर निर्भर नहीं रहते. वे पूरे नेटवर्क पर काम करते हैं. केवाईसी, सिम, बैंक अकाउंट और कॉल सेंटर सब कुछ अलग-अलग लोगों के नाम पर. ऐसे में सिम को ऐप से बांध देने से अपराधी नहीं रुकते, सिर्फ रास्ता बदलते हैं. फ्रॉड की जड़ कहां है, और सरकार क्या पकड़ रही है डिजिटल फ्रॉड की सबसे बड़ी समस्या सिम नहीं है. असली समस्या है फर्जी या किराए की पहचान. भारत में आज भी सिम म्यूलिंग एक बड़ा नेटवर्क बन चुका है, जहां वैलिड केवाईसी पर सिम लेकर उन्हें अपराधी नेटवर्क को सौंप दिया जाता है.  ये सिम पूरी तरह लीगल होते हैं, नंबर भी एक्टिव होते हैं और ट्रैकिंग भी संभव होती है. बावजूद इसके फिर भी फ्रॉड चलता रहता है. सिम बाइंडिंग इन नेटवर्क्स को तोड़ने की बजाय यह मान लेती है कि अपराधी टेक्नोलॉजी की बेसिक लेयर पर अटके हुए हैं. जबकि हकीकत यह है कि वे सिस्टम की कमजोरियों को बहुत गहराई से समझते हैं. यानी सरकार जिस समस्या का इलाज कर रही है, वो बीमारी की जड़ नहीं है. टेक्निकल हकीकत जिसे नीति से बाहर रखा गया यहां एक और अहम पहलू है जिस पर बहुत कम बात हो रही है. जिस तरह की सिम बाइंडिंग की कल्पना की जा रही है, वह मौजूदा मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम्स पर पूरी तरह संभव ही नहीं है. Android और iOS दोनों ही ऐप्स को लगातार सिम डिटेल्स या हार्डवेयर आइडेंटिफायर एक्सेस करने की परमिशन नहीं देते. यह कोई कमी नहीं, बल्कि यूज़र प्राइवेसी की बुनियाद है. इसी वजह से आज तक कोई भी मैसेजिंग ऐप ‘हर समय सिम मौजूद है या नहीं’ जैसी जांच नहीं करता. बैंकिंग ऐप्स यूज़ करते हैं सिम बाइंडिंग बैंकिंग ऐप्स भी जिसे सिम बाइंडिंग कहा जाता है, वह एक सीमित और टाइमली वेरिफिकेशन होता है, न कि स्थायी निगरानी.  सरकार जिस मॉडल को लागू करना चाहती है, वह या तो अधूरा रहेगा या फिर यूज़र एक्सपीरियंस को नुकसान पहुंचाएगा. अगर आप भी किसी बैंक का ऐप यूज़ करते हैं तो आपने ध्यान दिया होगा वो ऐप बिना रजिस्टर्ड सिम के काम नहीं करता. जिस फ़ोन में अकाउंट से लिंक्ड सिम डला है उस फ़ोन में ही बैंक का ऐप काम करता है. अगर सिम बाइंडिंग हुआ तो दूसरे मैसेजिंग ऐप के साथ भी ऐसा ही होगा.  आम यूज़र के लिए बढ़ता डिजिटल फ्रिक्शन अगर सिम बाइंडिंग को सख्ती से लागू किया जाता है, तो इसका सीधा असर आम यूज़र की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा. आज लोग एक ही अकाउंट को फोन, लैपटॉप और टैबलेट पर इस्तेमाल करते हैं. मल्टी-डिवाइस एक्सपीरियंस मॉडर्न डिजिटल जीवन का हिस्सा बन चुका है. सिम बाइंडिंग इस सुविधा को कमजोर कर देगी. बार-बार लॉगआउट, री-वेरिफिकेशन, सिम बदलने पर ऐप बंद होना. ये सब उन लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनेंगे जो टेक्नोलॉजी को काम के लिए इस्तेमाल करते हैं.  इंटरनेशनल ट्रैवल करने वाले, ई-सिम यूज़र और फ्रीलांसर सबसे पहले इसकी कीमत चुकाएंगे. फ्रॉड रोकने की कोशिश में सिस्टम ईमानदार यूज़र को सजा देने लगे, तो उस नीति पर सवाल उठना लाज़मी है. प्राइवेसी और भरोसे का बड़ा सवाल सिम बाइंडिंग सिर्फ सुविधा या टेक्नोलॉजी का मामला नहीं है. यह डिजिटल प्राइवेसी और भरोसे का भी सवाल है. हर अकाउंट को स्थायी रूप से एक सिम और पहचान से जोड़ देना अनॉनिमिटी को सीमित करता है. जर्नलिस्ट, व्हिसलब्लोअर्स और संवेदनशील वर्गों के लिए यह जोखिम भरा हो सकता है. हर यूज़र अपराधी नहीं होता, लेकिन सिम बाइंडिंग हर यूज़र को संदिग्ध मानकर सिस्टम डिजाइन करती है. यह सोच लोकतांत्रिक डिजिटल स्पेस के लिए खतरनाक हो सकती है. टेलिकॉम कंपनियां और पावर का बैलेंस यह भी संयोग नहीं है कि सिम बाइंडिंग को टेलिकॉम कंपनियों का समर्थन मिल रहा है. इससे नंबर-सेंट्रिक कंट्रोल मजबूत होता है और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर दबाव बढ़ता है.  सवाल यह है कि क्या यह फ्रॉड रोकने का प्रयास है या फिर डिजिटल इकोसिस्टम में … Read more

मध्य प्रदेश विधानसभा में चर्चा: मेडिकल कॉलेज और शिक्षकों की भर्ती, 903 लोगों पर एक डॉक्टर की स्थिति

भोपाल  विधानसभा के विशेष सत्र में बुधवार को बैतूल विधायक और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने बताया कि 2003 में मात्र पांच शासकीय और दो निजी मेडिकल कॉलेज थे। आज 19 सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं, छह केंद्र सरकार की मदद से बन रहे हैं। 14 निजी मेडिकल कॉलेज हैं और 13 पीपीपी मोड पर बनाए जा रहे हैं। कुछ सालों में 52 मेडिकल कॉलेज दिखेंगे हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि कुछ सालों में 52 मेडिकल कॉलेज दिखेंगे। पीपीपी मोड पर बनने वाले चार मेडिकल कॉलेज का भूमिपूजन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा 23 दिसंबर को करेंगे। उन्होंने कहा कि अमेरिका में 320 लोगों पर एक, चीन में साढ़े चार सौ लोगों पर एक, जापान में 400 लोगों पर एक और मध्य प्रदेश में 903 लोगों पर एक डॉक्टर है। जब 52 मेडिकल कॉलेज धरातल पर आएंगे तो लगभग 10 हजार सीटें हो जाएंगी और हम देश के अग्रणी मेडिकल स्टेट में हो जाएंगे। जहां डॉक्टर और मरीज व्यक्तियों का अनुपात बराबर हो जाएगा। उन्होंने बताया कि पूरे देश में सर्वाधिक 34 लाख मरीजों का इलाज आयुष्मान योजना में प्रदेश सरकार ने कराया है। प्रदेश में 30 हजार शिक्षकों की भर्ती होगी स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने विभागीय उपलब्धियां गिनाते हुए आगामी कार्य योजना भी बताई। उन्होंने कहा कि 30 हजार 281 शिक्षक पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। 75 हजार के अतिरिक्त शिक्षकों की नियुक्ति की है। अतिथि शिक्षक को अप्रैल से लगाएंगे। पहले शिक्षक की छुट्टी पर क्लास खाली रहती थी, लेकिन अब एक दिन के लिए भी प्रधानाध्यापक अतिथि शिक्षक नियुक्त कर सकेंगे। तीन साल में 1,390 स्कूल भवन बनाए जाएंगे 20 हजार से अधिक अतिशेष शिक्षकों का युक्तियुक्तिकरण किया है। अधोसंरचना विकास के काम सभी स्कूलों में चल रहे हैं। आगामी तीन साल में 1,390 स्कूल भवन बनाए जाएंगे। 39 हजार स्कूल भवनों की मरम्मत होगी। निजी विद्यालयों में सिलेबस यूनीफॉर्म में आर्थिक शोषण की शिकायतें आती हैं। आगामी सत्र से हम शासकीय प्रेस से छपवाकर निजी स्कूल के लिए जनपद मुख्यालय स्तर पर बुक शिविर लगाए जाएंगे। बदतर स्थिति में है कानून व्यवस्था कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने कानून व्यवस्था का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के मामले में पूरा थाना जेल चला गया। मप्र के इतिहास में पहले ऐसा कभी नहीं हुआ। भोपाल में एमडी ड्रग की फैक्ट्री पकड़ाई। जनवरी 2024 से 30 जून 2025 तक 10,840 महिलाएं दुष्कर्म का शिकार हुईं। 21,175 महिलाएं और 1,954 कन्याएं एक माह से अधिक समय तक लापता रही हैं। जून 2025 तक 34 हजार साइबर अपराध के दर्ज हुए। सरकार इन सभी विषयों पर ध्यान दें। सरकारी स्कूलों में नेता-अधिकारियों के बच्चे अवश्य पढ़ें उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने कहा कि हर स्कूल के पाठ्यक्रम में अनिवार्य रूप से कृषि से संबंधित एक कोर्स जोड़ जाए। कानून बनाकर यह अनिवार्य किया जाए कि जनप्रतिनिधि और अधिकारी कम से कम दो से पांच वर्ष तक अपने बच्चों का सरकारी स्कूलों में दाखिला कराएं। इससे अपने आप शिक्षण संस्थानों का सुधार हो जाएगा। 30,900 किमी सड़क बनाएंगे पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि आने वाले तीन साल में 30,900 किलोमीटर सड़क और 1,767 क्षतिग्रस्त पुल बनाएंगे। एक हजार से ज्यादा पंचायतों में किसी भी प्रकार का नेटवर्क नहीं है। वहां काम शुरू करने जा रहे हैं। दिसंबर 2026 तक प्रदेश में कोई भी गांव या पंचायत ऐसी नहीं है जहां श्मशान घाट में कनेक्टिविटी न हो। दुकान के अंदर श्रम अधिकारी बिना आयुक्त की अनुमति नहीं जाएगा। सॉफ्टवेयर बताएगा परियोजना की समय-सीमा लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि देश में पहली बार मध्य प्रदेश में हम वैज्ञानिक और सॉफ्टवेयर आधारित किसी भी परियोजना की समय-सीमा तय को कर रहे हैं। सॉफ्टवेयर बताएगा कि परियोजना की समय-सीमा कितनी होनी चाहिए। एक टाइगर कारिडोर निर्माण की योजना पहली बार देश में एक टाइगर कारिडोर निर्माण की योजना बनाई गई है। इसके लिए पांच नेशनल पार्क का चयन किया है। यह देश और विदेश के सभी पर्यटकों को आकर्षित करेगा। वहीं, भावांतर सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने हुए कहा कि भावांतर योजना में सरसों और मूंगफली का लाभ भी देने की कार्य योजना बनाई जा रही है। मौसम आधारित बीमा योजना भी शीघ्र प्रारंभ की जाएगी। उर्वरक की होम डिलेवरी सेवा भी शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है। वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। सीएम केयर योजना लाने जा रहे हैं उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि हम सीएम केयर योजना लाने जा रहे हैं। इसमें कॉर्डियोलाजी, कैंसर, आर्गन ट्रांसप्लांट, क्रिटिकल केयर जैसे विभाग मेडिकल कॉलेज में खोले जाएंगे। भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, इंदौर और रीवा मेडिकल कॉलेज को एम्स (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) की तर्ज पर तैयार करेंगे। दो साल में एक लाख माताओं में 173 मृत्यु हो जाया करती थी। वह घटकर 137 हो गई है। शिशु मृत्यु दर भी 48 से घटकर 37 हुई है। मध्य प्रदेश में साढ़े चार करोड़ लोगों का आयुष्मान योजना में पंजीयन हैं। गरीबों के उपचार के लिए 11 हजार करोड़ का भुगतान किया गया है। एयर एम्बुलेंस और शव वाहन योजना लागू की है।  

नया AI टोल सिस्टम क्या है? FASTag और GPS टोल से जानिए पूरा फर्क

 नई दिल्ली आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) अब टोल गेट पर भी एंट्री करने जा रहा है. अब भारत के हाइवे और टोल गेट पर टोल चार्जेस काटने का काम AI बेस्ड सिस्टम से होगा. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को राज्यसभा में बताया है कि सेटेलाइट बेस्ड टोल कलेक्शन सिस्टम साल 2026 के अंत तक लागू हो जाएगा.  दरअसल, प्रश्नकाल के दौरान सवालों के जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि न्यू टोल बेस्ड सिस्टम टेक्नोलॉजी सेटेलाइट और AI बेस्ड होगा. इसके लिए कार या अन्य व्हीकल मालिक को टोल गेट पर रुकने की जरूरत नहीं होगी. वह 80 किलोमीटर की स्पीड से भी टोल गेट पार कर सकेंगे.  सरकारी रेवेन्यू को होगा फायदा  मंत्री ने कहा कि AI Toll सिस्टम से 1500 करोड़ रुपये के फ्यूल सेविंग होगी और सरकारी रेवेन्यू में 6,000 करोड़ शामिल होंगे. AI बेस्ड टोल कलेक्शन सिस्टम फास्टैग और जीपीएस बेस्ड टोल सिस्टम से अलग होगा.  AI टोल सिस्टम कैसे काम करेगा? AI बेस्ड टोल कलेक्शन सिस्टम, असल में MLFF (Multi-Lane Free Flow) सिस्टम है. इस सिस्टम के तहत हाइवे पर टोल बूथ नहीं होंगे. इसके लिए एक लोहे का स्ट्रक्चर तैयार होगा, जिसको गैन्ट्री कहा जाता है. गैन्ट्री पर हाई रेजोल्यूशन कैमरा और सेंसर होंगे, जो कार की नंबर प्लेट को डिटेक्ट करेंगे और एनालाइज करेंगे. यह सिस्टम एंट्री और एग्जीट दोनों पर होगा, इसके बाद टोल चार्ज वसूला जाएगा. यह पूरा काम ऑटोमैटिक होगा और कार को टोल टैक्स के लिए कहीं रोकने की जरूरत नहीं होगी.  AI बेस्ड टोल फास्टैग और GPS बेस्ड सिस्टम से कितना अलग है?  सर्विस का नाम               FASTag (मौजूदा)           GPS/GNSS (सैटेलाइट)               AI आधारित (MLFF) टेक्नोलॉजी                  RFID (रेडियो फ्रीक्वेंसी)          सैटेलाइट ट्रैकिंग                           कैमरा और AI विजन रुकने की जरूर             थोड़ा रुकना पड़ता है      नहीं रुकना पड़ेगा                               नहीं रुकना पड़ेगा  डिवाइस                        विंडशील्ड पर स्टिकर     व्हीकल में OBU (डिवाइस)                   सिर्फ नंबर प्लेट हो  टोल रेट                          फिक्स्ड रेट                     जितनी दूरी उतना चार्ज                    जितनी दूरी उतना चार्ज  बैरियर                        टोल गेट लगे होते हैं              गेट फ्री टेक्नोलॉजी                             गेट फ्री टेक्नोलॉजी  मौजूदा FASTag सिस्टम का क्या होगा?  मौजूदा टोल कलेक्शन सिस्टम FASTag बेस्ड है, जिसमें व्हीकल के विंड स्क्रीन पर एक रेडियो फ्रिक्वेंसी (RFID) टैग लगाना होता है. इस सिस्टम के तहत एक छोटी चिप होती है. यह स्टिकर चिप प्रीपेड वॉलेट या बैंक अकाउंट से लिंक होता है.  FASTag बेस्ड स्टिकर वाली कार जैसे ही टोल गेट पर पहुंचती है, गेट के ऊपर लगे सेंसर RFID चिप को डिटेक्ट करते हैं. इसके बाद गेट ओपन हो जाते हैं. हालांकि फास्टैग में बैलेंस माइनस में है तो वह ब्लैक लिस्ट हो जाता है. इसकी वजह से टोल गेट ओपन नहीं होता है. ऐसे में आपको टोल चार्ज कैश में पेमेंट करनी पड़ती है.  AI और GPS टोल अलग-अलग सिस्टम हैं.  GPS आधारित सिस्टम (GNSS) के लिए व्हीकल में एक विशेष ट्रैकिंग डिवाइस (OBU) की जरूरत होगी. वहीं, AI सिस्टम मुख्य रूप से बाहरी कैमरों और आपकी गाड़ी की मौजूदा नंबर प्लेट की मदद से काम करता है. यह AI सिस्टम उन गाड़ियों के लिए भी यूजफुल होगा, जिनके अंदर GPS नहीं लगा है. 

सिर्फ एक साधारण ब्लड टेस्ट से पता चलेगा आप कितने दिन जिएंगे

नई दिल्ली ब्लड टेस्ट भले सुनने में साधारण लग सकता है लेकिन यह बहुत ही असरदार होता है. एक ब्लड टेस्ट सिर्फ आपके हेल्थ की अपडेट्स नहीं देता बल्कि यह भी बताता है कि आप कितना और जीने वाले हैं. हाल ही में इस संबंध में ब्रिटेन स्थित सरे यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने एक स्टडी की है. अब तक डॉक्टर किसी की उम्र, वजन, ब्लड प्रेशर, स्मोकिंग की आदत और कुछ सामान्य ब्लड टेस्ट के आधार पर ही खतरे का अनुमान लगाते रहे हैं. ये तरीके अक्सर बहुत ही सामान्य होते हैं और सही जानकारी नहीं दे पाते.  नई स्टडी में क्या खास है? इस समस्या को ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञों ने यह जानने की कोशिश की कि क्या हमारे खून में पहले से ऐसे संकेत मौजूद हैं जो भविष्य की सेहत के बारे में बता सकें. इस स्टडी में खून में मौजूद प्रोटीन पर फोकस किया गया क्योंकि यह शरीर के अंदर चल रहे प्रोसेस की जानकारी देता है. अध्ययन में उम्र, BMI और स्मोकिंग जैसी आदतों को ध्यान में रखा जिससे सटीक नतीजे निकले. प्रोटीन पैनल और मौत का जोखिम इसके बाद वैज्ञानिकों ने सैकड़ों ऐसे प्रोटीन की पहचान की जिनका संबंध कैंसर, दिल की बीमारी और किसी भी वजह से होने वाली मौत के जोखिम से जुड़ा पाया गया. एक पैनल में 10 ऐसे प्रोटीन थे जो अगले 10 साल में मौत के कुल जोखिम से जुड़े थे. वहीं, दूसरे पैनल में 6 प्रोटीन रखे गए थे जो पांच साल के जोखिम का संकेत देते थे. यह मॉडल सिर्फ उम्र और लाइफस्टाइल पर आधारित पुराने तरीकों से बेहतर निकले.  कौन देता है शरीर में बदलाव की जानकारी? खून में मौजूद प्रोटीन शरीर के अंदर हो रहे बदलावों की रियल-टाइम जानकारी देते हैं. ये सूजन, अंगों पर दबाव या ऊतकों (Tissue) के खराब होने जैसे बदलावों को दिखा सकते हैं जो लक्षण के तौर पर सामने नहीं आते. लेकिन, वैज्ञानिकों ने यह भी साफ किया कि इस स्टडी का ये मतलब नहीं है कि कोई ब्लड टेस्ट मौत की तारीख बता देगा. यह भविष्यवाणी नहीं बल्कि एक चेतावनी की तरह है. इस टेस्ट में 39 से 70 साल के करीब 38 हजार लोगों को शामिल किया गया था.  

SBI रिपोर्ट: डॉलर मजबूती के बावजूद रुपये में अगले 6 महीनों में होगा बदलाव

नई दिल्‍ली भारतीय रुपये की लगातार गिरावट ने एक्‍सपर्ट्स के बीच एक बहस छेड़ दी है कि आखिर ये कितना गिरेगा. SBI रिसर्च ने अपनी नई रिपोर्ट में एक बड़ा दावा किया है. एसबीआई ने 'इन रूपी वी ट्रस्‍ट' में कहा है कि भारतीय रुपया अभी डीवैल्‍यूवेशन के तीसरे चरण से गुजर रही है, जो रुपया और अमेरिकी डॉलर दोनों में एक साथ कमजोरी का दौर है.  एसबीआई ने कहा कि रुपये में गिरावट घरेलू व्यापक आर्थिक तनाव और वैश्विक अनिश्चितता, विशेष रूप से भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार व्यवधानों के कारण हो रही है. रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्कोव रिजीम-स्विचिंग मॉडल का उपयोग करते हुए, एसबीआई रिसर्च का अनुमान है कि रुपया लगभग छह महीने तक दबाव में रह सकता है. लेकिन इसके बाद इसमें शानदार तेजी आएगी. इसके बाद इसमें करीब 6.5 फीसदी की उछाल आ सकती है और संभावित तौर से  2026 में यह वापस 87 रुपये प्रति डॉलर की ओर बढ़ सकता है.  आरबीआई के एक्‍शन से उछला रुपया भारतीय रुपया मंगलवार को 91 प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया और सर्वकालिक निम्न स्तर पर पहुंच गया, लेकिन अगले दिन इसमें तेजी से सुधार हुआ.  बुधवार को मुद्रा 90.3475 प्रति अमेरिकी डॉलर पर कारोबार कर रही थी, जो इसके पिछले बंद भाव 91.0275 से 1 फीसदी  से ज्‍यादा की उछाल है. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के मजबूत हस्तक्षेप ने 17 दिसंबर को रुपये में सात महीनों में सबसे मजबूत तेजी आई, जिससे अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लंबे समय से चली आ लगातार गिरावट पर ब्रेक लग गई.  सरकारी बैंकों द्वारा डॉलर की लगातार बिक्री के बाद शुरुआती कारोबार में घरेलू मुद्रा में उछाल आया है. माना जा रहा है कि सरकारी बैंक ने केंद्रीय बैंक के हस्‍तक्षेप के बाद ऐसा फैसला किया है. इस हस्तक्षेप से अस्थिरता को कम करने और बाजार की भावना को स्थिर करने में मदद मिली. रुपये में 1.03% की वृद्धि हुई, जो 23 मई, 2025 के बाद से एक दिन में सबसे बड़ी तेजी है.  रुपये में गिरावट क्यों? एक्‍सपर्ट्स के अनुसार रुपये को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा संरचनात्मक परिवर्तन 2014 से पहले की अवधि की तुलना में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश में आई भारी गिरावट है. 2007 से 2014 के बीच, नेट पोर्टफोलियो निवेश औसतन 162.8 अरब डॉलर प्रति वर्ष था, जिससे करेंसी को मजबूती मिली थी. हालांकि, 2015 से 2025 तक, औसत निवेश घटकर 87.7 अरब डॉलर रह गया है, जिससे वैश्विक झटकों को झेलने की क्षमता कम हो गई है. अकेले 2025 में, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) का निवेश 10 अरब डॉलर से अधिक हो गया, जिससे रुपये पर लगातार दबाव बना रहा.  एसबीआई रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में भू-राजनीतिक तनाव और टैरिफ को भी रुपये में गिरावट की वजह बताई है.रिपोर्ट के मुताबिक, टैरिफ ऐलान के बाद से ही रुपये में 5.7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है.   डॉलर की डिमांड रिपोर्ट में विदेशी मुद्रा बाजार के व्‍यापारी क्षेत्र में डॉलर की बढ़ती मांग पर भी प्रकाश डाला गया है. जुलाई 2025 से, अनिश्चितता के बीच आयातकों और निर्यातकों द्वारा हेजिंग बढ़ाने के कारण फॉरवर्ड बाजार में अतिरिक्त मांग में तेजी से वृद्धि हुई है. व्यापारी बाजार में कुल अतिरिक्त मांग 145 अरब डॉलर तक पहुंच गई, जिसके चलते भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को हस्तक्षेप करना पड़ा. क्या 2026 में रुपया 87 पर होगा? इस गिरावट के बाद भी एसबीआई रिसर्च रुपया पर पॉजिटिव बना हुआ है. इसके मार्कोव-स्विचिंग विश्लेषण से पता चलता है कि रुपया लगभग छह महीने बाद मौजूदा गिरावट के दौर से बाहर निकल सकता है. ऐतिहासिक रुझान बताते हैं कि एक बार ऐसा होने पर मुद्रा में उल्लेखनीय सुधार होता है. इसी आधार पर, रिपोर्ट भू-राजनीतिक जोखिमों में कमी और पूंजी प्रवाह में स्थिरता आने की स्थिति में, 2026 में लगभग 6.5% की संभावित वृद्धि का अनुमान है, जो 87 लेवल पर रुपया को पहुंचा देगा.