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सीएम योगी ने किया महानगर में दो रैन बसेरों का निरीक्षण, ठहरे जरुरतमंदों में वितरित किया कंबल और भोजन

हर जरूरतमंद को शीतलहर से बचाने को सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सीएम योगी ने किया महानगर में दो रैन बसेरों का निरीक्षण, ठहरे जरुरतमंदों में वितरित किया कंबल और भोजन पूरी क्षमता से संचालित होंगे रैन बसेरे, तहसीलों व निकायों ऊनी वस्त्र-कंबल वितरण के लिए पर्याप्त धन जारी : मुख्यमंत्री गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि हर जरूरतमंद को शीतलहर से बचाने और सम्मानजनक आश्रय देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। इसके लिए जहां रैन बसेरों को पूरी क्षमता के साथ संचालित किया जा रहा है, वहीं तहसीलों और नगर निकायों को जरूरतमंदों में ऊनी वस्त्र एवं कंबल वितरण और अलाव की व्यवस्था के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार देर शाम/रात गोरखपुर महानगर में दो रैन बसेरों का निरीक्षण करने के बाद मीडियाकर्मियों से बातचीत कर रहे थे। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर जरूरतमंद को रैन बसेरों में अच्छी सुविधा दी जाए। प्रशासन को इसे प्राथमिकता पर लेते हुए यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी रैन बसेरों में पर्याप्त संख्या में बिस्तर व कंबल का इंतजाम हो। साफ-सफाई का भी पूरा ध्यान रखा जाए। साथ ही यदि किसी के पास भोजन की व्यवस्था नहीं है तो उसे भोजन भी उपलब्ध कराया जाए।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रेलवे स्टेशन के पास, तथा झूलेलाल मंदिर के पास बने रैन बसेरों का निरीक्षण कर तथा वहां ठहरे लोगों से बातचीत कर उपलब्ध सुविधाओं की पड़ताल की। रैन बसेरों में मुख्यमंत्री ने अपने हाथों से जरूरतमंदों में कंबल व भोजन का वितरण भी किया। मुख्यमंत्री ने रेलवे स्टेशन के पास रैन बसेरे के बाहर भी सैकड़ो जरूरतमंद लोगों में कंबल व भोजन का वितरण कर उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार उनकी सेवा को प्रतिबद्ध है।  रैन बसेरों में ठहरे लोगों से मुख्यमंत्री ने किया आत्मीय संवाद सीएम योगी ने रैन बसेरों में ठहरे सभी लोगों से कुशलक्षेम जानने के साथ उनसे आत्मीय संवाद भी किया। रैन बसेरों में देवरिया, कुशीनगर, बलिया, गगहा, चौरीचौरा समेत पूर्वांचल के अलग अलग क्षेत्रों के नागरिकों के अलावा बिहार से आए लोग भी ठहरे थे। कोई परीक्षा के सिलसिले में आया था, कोई डॉक्टर को दिखाने के लिए तो कोई काम की तलाश या फिर किसी अन्य कार्य से गोरखपुर आया था। मुख्यमंत्री ने उनसे पूछा कि यहां रैन बसेरों में कोई परेशानी तो नहीं। सबने व्यवस्था को लेकर संतोषजनक जवाब दिया। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा कुशलक्षेम और जरूरतों के बारे में पूछे जाने पर रैन बसेरों में ठहरे लोग भाव विह्वल हो गए। उन्हें सहसा यकीन नहीं हो रहा था कि उनके ठहरने और भोजन की जानकारी लेने खुद मुख्यमंत्री उनके पास आए हैं। हर व्यक्ति का जीवन अमूल्य, कोई भी खुले में न लेटे : मुख्यमंत्री रैन बसेरों का निरीक्षण करने के बाद मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भीषण शीतलहर से आमजनमानस के बचाव के लिए शासन और प्रशासन संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति का जीवन अमूल्य है। सरकार की तरफ से अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी व्यक्ति फुटपाथ, प्लेटफार्म या सड़क पर खुले में न लेटे। यदि कोई ऐसा पाया जाता है उसे रैन बसेरों में पहुंचाया जाए और इसकी निरंतर निगरानी भी की जाए। सभी रैन बसेरों को पूरी क्षमता के साथ संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा तहसीलों और निकायों को अपने-अपने क्षेत्र में जरूरतमंदों को शीतलहर से बचाने के लिए ऊनी वस्त्र और कंबल वितरण के लिए धनराशि उपलब्ध कराई गई है। निकायों और पंचायत को यह निर्देश भी दिए गए हैं कि वे भीषण शीतलहर में जहां भी आवश्यकता हो, पर्याप्त अलाव की व्यवस्था भी सुनिश्चित करें। यह सभी व्यवस्था प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाई जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि महानगर गोरखपुर में नगर निगम द्वारा 14 रैन बसेरों का संचालन किया जा रहा है, जहां 700 से 1000 तक जरूरतमंद आश्रय ले सकते हैं।  रैन बसेरों के निरीक्षण के दौरान महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक विपिन सिंह, कालीबाड़ी के महंत रवींद्रदास, नगर निगम बोर्ड के उपसभापति पवन त्रिपाठी, पार्षद ऋषिमोहन वर्मा, धर्मदेव चौहान समेत प्रशासन, पुलिस व नगर निगम के अधिकारी उपस्थित रहे।

मतदाता सूची में बड़ा बदलाव: SIR प्रक्रिया अंतिम चरण में, लाखों नाम हो सकते हैं डिलीट

भोपाल प्रदेश में मतदाताओं के गणना पत्रक का डिजिटाइजेशन शत-प्रतिशत हो गया है। गुरुवार रात 12 बजे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूरी हो जाएगी। 16 दिसंबर को मतदाता सूची के प्रारूप का प्रकाशन होगा। इसमें प्रदेश भर के 30 से 35 लाख मतदाताओं के नाम कट सकते हैं। इनमें मृत, स्थानांतरित, दो स्थान पर नाम वाले मतदाता शामिल हैं। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर जिले के विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूची से नाम अधिक कटने की संभावना है।   वहीं, जिनके गणना पत्रक तो जमा हो गए लेकिन आवश्यक जानकारी नहीं दी गई है, उन्हें रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा नोटिस देकर दस्तावेज मांगे जाएंगे। एसआईआर में जो गणना पत्रक दिए गए, वे मतदाताओं को भरकर देने थे। इसमें वर्ष 2003 की मतदाता सूची में उनका या उनके माता-पिता, दादा-दादी में से किसी एक के नाम की जानकारी भी देनी थी। जिन मतदाताओं ने वर्ष 2003 के एसआईआर के आधार पर जानकारी न देकर केवल हस्ताक्षर करके गणना पत्रक दिए हैं, उनके नाम तो प्रारूप सूची में आएंगे लेकिन उन्हें नोटिस जारी होंगे। ऐसे मतदाताओं की संख्या करीब 12 लाख है। चूंकि, गणना पत्रक सभी मतदाताओं को जारी किए गए हैं इसलिए जिन मतदाताओं ने एक से अधिक स्थान पर गणना पत्रक जमा किए हैं, उनके नाम केवल एक स्थान पर रहेंगे।   इंदौर में 1.94 लाख मतदाताओं का नहीं मिला 2003 का रिकॉर्ड, अब देने होंगे दस्तावेज भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर सहित अन्य शहरी क्षेत्रों में ऐसे मतदाताओं के नाम अधिक कटेंगे क्योंकि यहां अपेक्षाकृत अधिक मतदाता रोजगार, पढ़ाई आदि कारणों से स्थानांतरित होते रहते हैं। मृत, स्थानांतरित और दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाताओं की अलग से सूची बनेगी। यह संख्या 18 से 23 लाख हो सकती है। इनके नाम प्रारूप मतदाता सूची में नहीं आएंगे। प्रदेश कांग्रेस के संगठन महामंत्री संजय कामले का कहना है कि बूथ लेवल एजेंटों से जो जानकारी प्राप्त हो रही है, उसके अनुसार सूची में ऐसे मतदाताओं के नाम बड़ी संख्या में दर्ज हैं, जिनका या तो निधन हो चुका है या फिर दर्शाए पते पर रहते ही नहीं हैं। ऐसे सभी मतदाताओं के नाम सूची से हटेंगे। प्रारूप प्रकाशन के बाद बूथवार मतदाताओं का सत्यापन कराया जाएगा। इसके आधार पर दावा-आपत्ति होंगे। 16 दिसंबर को होगा प्रारंभिक प्रकाशन मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशन 16 दिसंबर को होगा। इसमें जो नाम शामिल नहीं होंगे, उन्हें विलोपित माना जाएगा। सूची के आधार पर 15 जनवरी, 2026 तक दावा-आपत्ति होंगे। सात फरवरी तक इनका निराकरण रजिस्ट्रीकरण अधिकारी करेंगे। प्रारूप सूची में नाम नहीं आया तो भी अवसर यदि किसी भी कारण से प्रारूप मतदाता सूची में नाम नहीं आता है तो भी नाम जुड़वाने का अवसर रहेगा। इसके लिए दावा या आपत्ति की प्रक्रिया में भाग लेना होगा। रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को निर्धारित पहचान पत्र बताने होंगे। इस आधार पर निर्णय होगा। एक नजर में 27 अक्टूबर, 2025 की स्थिति में मतदाता- 5,74,06,143 मतदान केंद्र- 65,014 गणना पत्रक का डिजिटाइजेशन हुआ- 5,74,06,098

भारत ने 5th जेन फाइटर जेट से किया अमेरिका को चौंका, DRDO ने तोड़ा अहम कारनामा

बेंगलुरु  यह बात सभी को पता है कि भारत लड़ाकू विमानों की कमी से जूझ रहा है. उसके पास मौजूदा समय में स्क्वाड्रन की संख्या 42 से घटकर 30 पर आ गई है. लेकिन, सबसे बड़ी चुनौती नए फाइटर जेट्स हासिल करने की है. दरअसल, फाइटर जेट्स कोई वाशिंग मशीन या रेफ्रिजरेटर नहीं होते हैं कि कोई व्यक्ति मार्केट गया और उसे खरीदकर लेते आया. बल्कि, ये बेहद जटिल तकनीक वाले विमान हैं और भारत की कोशिश है कि वह अब भविष्य में स्वदेशी फाइटर जेट्स का इस्तेमाल करे. इस दिशा में भारत अपने तेजस प्रोग्राम के साथ पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान AMCA यानी एम्का प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. अब इस एम्का प्रोजेक्ट में देसी वैज्ञानिकों को एक बड़ी सफलता मिली है. दरअसल, डीआरडीओ ने मॉर्फिंग विंग टेक्नोलॉजी का सफल परीक्षण किया है. यह एक ऐसी टेक्नोलॉजी है जो दुनिया के कुछ चुनिंदा कंपनियों जैसे एयरबस और नासा के पास है. एक तरह से इस तकनीक पर अमेरिका और यूरोप का कब्जा है. चीन और रूस जैसे देश भी पांचवी पीढ़ी के फाइटर जेट्स बना चुके हैं लेकिन, उनके पास भी ऐसी सटीक तकनीक होने को लेकर सवाल किए जाते हैं. पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स के लिए क्यों जरूरी है ये तकनीक? फिफ्थ जेन फाइटर जेट के लिए यह एक बहुत बड़ी टेक्नोलॉजी है. इस टेक्नोलॉजी में फाइटर जेट अपने फंख पक्षियों की तरह समेट सकते है. उसको छोटा-बड़ा कर सकते हैं. जरूरत पड़ने पर उसे छिपा सकते हैं. वह आसमान में संतुलित स्थित पाने लेने के बाद अपने फंख को पूरी तरह छिपा सकते हैं. यह सब कुछ सेकेंडों के भीतर होता है. ऐसे में ये विमान आसानी से दुश्मन के राडार से बच जाएंगे. पंख समेटने के कारण उनका आकार भी काफी सिमट जाएगा. पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट के लिए यह एक बहुत बड़ी तकनीकी जरूरत है. दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों की चुनिंदा कंपनियों के पास ही यह तकनीक उपलब्ध है. डीआरडी ने बनाया अपना तकनीक इस तकनीक को डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है. इसका सफल परीक्षण किया जा चुका है. आने वाले वक्त में इसे फाइटर जेट्स के साथ जोड़ा जाएगा. जानकारों का कहना है कि इस तकनीक का सीधा फायदा एम्का प्रोजेक्ट के साथ-साथ मानव रहित विमानों के विकास में मिलेगा. क्या है यह तकनीक दरअसल, यह एक बेहद खास तकनीक है. इसमें फंख एक खास धातु से बने होते है. जो एक विशेष तापमान पर गर्म होने के बाद फैल जाते हैं और ठंडा होने पर सिकुड़ जाते हैं. लेकिन, गर्म या ठंडा होने की यह पूरी प्रक्रिया सेकेंडों में पूरी होती है. यानी ये फंस फैलने के कुछ ही सेकेंड के भी अपने मूल आकार में आ जाते हैं. फाइटर जेट को जब उड़ान भरना होते हैं या उसको हवा के दबाव को मैनेज करना होता है तो वह हीट बढ़ाकर इन फंखों की साइज बढ़ा देते हैं. इस तकनीक को शेप मेमोरी अलॉय कहा जाता है. इस तकनीक की एक और बड़ी खासियत है कि इसमें पारंपरिक पंखों की तहत कोई कट या जोड़ नहीं होते. इस कारण इनके राडार की नजर में आना और मुश्किल हो जाता है. इस तकनीक में फंखे प्रति सेकेंड 35 डिग्री की रफ्तार से अपना आकार बदलते हैं. ये मात्र 0.17 सेकेंड में पूरे शेप चेंज कर लेते है. इसका मतलब यह है कि एक ही मिशन में विमान टेकऑफ पर ज्यादा वजन लिफ्ट करने के लिए कैंबर बढ़ा सकेगा. क्रूज में ड्रैग कम करने लिए रेंज बढ़ा सकेगा. डॉगफाइट यानी फाइटर जेट्स के बीच सीधी भिड़ंत के वक्त तेजी से अपना आकार बदलकर दुश्मन को चमका दे सकेगा. क्या थी सबसे बड़ी चिंता? इस तकनीक को लेकर सबसे बड़ी बात यह कही जाती है कि इसमें बहुत अधिक ऊर्जा की खपत होती है. ये ऊर्जा पंखों को गर्म या ठंडा करने में इस्तेमाल होती है. ऐसे में विमान पर बोझ बढ़ जाता था. इस समस्या के समाधान के लिए एक एडाप्टिव पावर अलोकेशन एल्गोरिदम तैयार किया गया है जो जरूरत के हिसाब से बिजली को इंटेलिजेंटली बांटता है. इसका नतीजा यह हुआ कि विमान के एक्टिव सेगमेंट को ही पावर मिलती है. बाकी सेगमेंट्स पर भार नहीं पड़ता है. इस तरह इस पूरे टेस्ट में महज 5.6 फीसदी अतिरिक्त ऊर्जा की खपत हुई.

मध्यप्रदेश में नए साल में बिजली की दरें बढ़ सकती हैं, पावर जनरेशन कंपनी ने प्रस्तावित की 10% वृद्धि

भोपाल  मध्यप्रदेश में नए साल की शुरुआत बिजली उपभोक्ताओं को बिजली का करंट लग सकता है। राज्य की पावर जनरेशन कंपनी ने मप्र विद्युत नियामक आयोग के समक्ष बिजली दरों में 10 प्रतिशत तक इजाफे का प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। आयोग इस प्रस्ताव पर सुझाव और आपत्तियां लेने के लिए जन सुनवाई आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। नियामक आयोग जन सुनवाई के दौरान आम जनता और हितधारकों की आपत्तियाँ सुनने के बाद ही अंतिम निर्णय देगा। फिलहाल प्रस्ताव ने उपभोक्ताओं में नए साल के बिलों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। कंपनी ने बढ़ोतरी को बताया अनिवार्य नियामक आयोग मुख्यालय में दायर याचिका में कंपनी ने दावा किया कि लगातार बढ़ रहे लाइन लॉस और वित्तीय दबाव के कारण दरों में संशोधन आवश्यक हो गया है। सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्तावित बढ़ोतरी की सीमा 10% तक हो सकती है, हालांकि अंतिम निर्णय जन सुनवाई के बाद ही होगा। 15 दिसंबर से हो सकती है सुनवाई  आयोग के सूत्रों का कहना है कि कंपनी के प्रस्ताव पर प्रारंभिक अध्ययन के बाद आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। पहली सुनवाई 15 दिसंबर को होने की संभावना है, हालांकि आयोग की ओर से इसका औपचारिक कार्यक्रम अभी जारी नहीं हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। आठ महीने पहले ही बढ़े थे बिजली के दाम इस साल अप्रैल से ही उपभोक्ता पहले से बढ़े हुए टैरिफ का भुगतान कर रहे हैं। बीते वित्तीय वर्ष में कंपनियों ने 7.52% बढ़ोतरी की मांग की थी, लेकिन आयोग ने केवल 3.46% वृद्धि की मंजूरी दी थी। यही कारण है कि घरेलू, गैर-घरेलू और कृषि श्रेणियों में प्रति यूनिट दरें कुछ पैसों की वृद्धि के साथ लागू हुईं और फिक्स चार्ज भी बढ़ाए गए। चुनावी वर्षों में मिली थी राहत पिछले दो वर्ष 2024 में लोकसभा और 2023 में विधानसभा चुनाव हुए, जिसके चलते आयोग ने दर बढ़ोतरी पर सख्ती दिखाई थी। 2024 में 3.86% बढ़ोतरी की मांग के मुकाबले मात्र 0.7% और 2023 में 3.20% की तुलना में केवल 1.65% बढ़ोतरी को मंजूरी मिली थी।  प्रदेश में सहकारिता चुनाव भी प्रस्तावित हैं, ऐसे में राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए आयोग बड़ी राहत देने की संभावना कम लग रही है। सूत्रों का अनुमान है कि नई दरें 4 से 6% की सीमा में तय की जा सकती हैं। इसके बाद भी उपभोक्ताओं के लिए नए साल में बिजली बिल बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है। 

रणजीत लोक का निर्माण इंदौर में, महाकाल लोक जैसी भव्यता, 6 करोड़ से ज्यादा खर्च, सिंहस्थ से पहले होगा पूरा

इंदौर इंदौर में रणजीत हनुमान मंदिर का कायापलट होने जा रहा है। यहां रणजीत लोक बनाकर मंदिर का जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण किया जाएगा। इस पर कुल 6  करोड़ रुपए खर्च होंगे। प्लान तैयार हो चुका है, टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी हो गई है। मंदिर के पुजारी पं. दीपेश व्यास ने कहा- रणजीत हनुमान मंदिर 135 साल से भी ज्यादा पुराना है। यहां इंदौर ही नहीं, आस-पास के जिलों से भी श्रद्धालु आते हैं। मंगलवार और शनिवार को यहां भक्तों की संख्या हजारों में पहुंच जाती है। मंदिर प्रशासक एनएस राजपूत ने बताया कि रणजीत लोक तैयार होने के बाद श्रद्धालु मंदिर के पास बने बड़े मैदान से प्रवेश करेंगे। वहां से एक पाथ-वे के माध्यम से छोटी पार्किंग तक पहुंचेंगे। पाथ-वे में जिग-जैग पैटर्न पर रेलिंग लगाई जाएंगी। इनकी संख्या भीड़ के अनुसार घटाई या बढ़ाई जा सकेगी।इसके बाद श्रद्धालु दत्त मंदिर से होते हुए दर्शन की मुख्य लाइन में पहुंचेंगे। भगवान के दर्शन कर वहीं से वापस बाहर निकलेंगे। पाथ-वे की दीवारों पर रामायण और सुंदरकांड की झलक मंदिर प्रशासक राजपूत ने बताया- यहां सभी तरह के मौसम के मुताबिक व्यवस्थाएं जुटाई जाएंगी ताकि सर्दी, गर्मी और बारिश में भक्तों को परेशानी न हो। बैठने के लिए नई बेंच लगेंगी। बाउंड्रीवाल भी बनाई जाएगी।25 फीट का पाथ-वे बनेगा, इसकी दीवारों पर पत्थरों से भगवान हनुमान से जुड़े दृश्य उकेरे जाएंगे। रामायण और सुंदरकांड को तस्वीरों में दर्शाया जाएगा। छत पर कशीदाकारी, बाउंड्रीवॉल पर रंगबिरंगी रोशनी रणजीत लोक की छत पर भी कशीदाकारी की जाएगी। बाउंड्रीवॉल पर रंगबिरंगी लाइटिंग लगेगी। यहां भी सुंदरकांड का चित्रण होगा। मंदिर का एक्सटेंशन 40 फीट आगे तक होगा। नया मुख्य द्वार बनेगा। शेड तैयार किए जाएंगे।मंदिर परिसर में ही पुलिस चौकी बनाई जाएगी। नया जूता स्टैंड, पेय जल की व्यवस्था की जाएगी। बेबी फीडिंग रूम और बुजुर्गों के लिए अन्य सुविधाएं जुटाई जाएंगी। भक्त पाथ-वे के जरिए दर्शन करने जाएंगे। यहां एलईडी पर भगवान के लाइव दर्शन होंगे।स्मार्ट सिटी संभाल रहा निर्माण की जिम्मेदारी मंदिर प्रशासक राजपूत ने बताया- रणजीत लोक निर्माण की जिम्मेदारी नोडल एजेंसी इंदौर स्मार्ट सिटी को दी गई है। इसके लिए मंदिर के फंड और दान की राशि का उपयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगले हफ्ते इसका काम शुरू किया जा चुका है। पांचवीं पीढ़ी संभाल रही पूजा-अर्चना का काम वर्तमान पुजारी पं. दीपेश व्यास के परदादा स्व. पं. भोलाराम व्यास इस मंदिर के संस्थापक पुजारी थे। उनकी पांचवीं पीढ़ी मंदिर में पूजा-अर्चना कर रही है। व्यास ने कहा- शुरुआत में बाबा रणजीत टीन से बने शेड में विराजमान थे। 1960 में गार्डर-फर्शी से पक्का निर्माण किया गया। 1992 में आरसीसी छत डाली गई। इंदौर स्मार्ट सिटी के पास जिम्मेदारी मंदिर प्रशासक एनएस राजपूत ने बताया- रणजीत लोक निर्माण की जिम्मेदारी नोडल एजेंसी इंदौर स्मार्ट सिटी को दी गई है। इसके लिए मंदिर के फंड और दान की राशि का उपयोग किया जाएगा। परिसर में पुलिस चौकी, बेबी फीडिंग रूम बनेगा रणजीत लोक की छत पर भी कशीदाकारी की जाएगी। बाउंड्रीवॉल पर रंगबिरंगी लाइटिंग लगेगी। यहां भी सुंदरकांड का चित्रण होगा। मंदिर का एक्सटेंशन 40 फीट आगे तक होगा। नया मुख्य द्वार बनेगा। शेड तैयार किए जाएंगे।मंदिर परिसर में ही पुलिस चौकी बनाई जाएगी। नया जूता स्टैंड, पेय जल की व्यवस्था की जाएगी। बेबी फीडिंग रूम और बुजुर्गों के लिए अन्य सुविधाएं जुटाई जाएंगी। 1960 में गर्डर-फर्शी से पक्का बनाया, 1992 में छत डाली मंदिर के पुजारी पं. दीपेश व्यास के परदादा पं. भोलाराम व्यास इस मंदिर के संस्थापक पुजारी थे। उनकी पांचवीं पीढ़ी मंदिर में पूजा-अर्चना कर रही है। पं. व्यास ने कहा- शुरुआत में बाबा रणजीत टीन से बने शेड में विराजमान थे। 1960 में गार्डर-फर्शी से पक्का निर्माण किया गया। 1992 में आरसीसी छत डाली गई। व्यास के अनुसार, होलकर राजा जब भी युद्ध के लिए जाते थे तो यहां पूजा-हवन करते थे। विजय की कामना के साथ यहां आते और फिर युद्ध के लिए जाते थे इसलिए मंदिर का नाम रणजीत हनुमान पड़ा। उन्होंने कहा- पौष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर यहां रणजीत अष्टमी मनाई जाती है। सुबह 5 बजे प्रभात फेरी निकाली जाती है। दिनभर पूजा-अर्चना और विशेष आरती की जाती है। 21 लाख रुपए के रथ पर सवार होकर रणजीत हनुमान नगर भ्रमण करते हैं। महाकाल लोक के बाद अब मध्यप्रदेश में हनुमान लोक नजर आएगा। इसका निर्माण सौंसर के जाम सांवली में होगा। मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड 314 करोड़ की लागत से करीब 30 एकड़ में इसका निर्माण करवा रहा है। उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर 6 फेज में हनुमान लोक कॉरिडोर का काम होगा। फर्स्ट फेज में 35 करोड़ की लागत से एंट्रेंस प्लाजा से हनुमान लोक तक का काम किया जाएगा। हर साल इसलिए निकलती है प्रभात फेरी पुजारी पं. दीपेश व्यास का कहना है कि सीताजी के हरण के बाद वानर राज सुग्रीव के आदेश पर वानर सेना उनका पता लगाने गई थी। हनुमान जी उनका पता लगाकर लौटे थे। यह खबर जब भगवान राम ने सुनी तो उन्होंने कहा कि हनुमान तुम रण को जीतकर आए हो। लंका को जलाकर आए हो इसलिए आज से मैं तुम्हें रणजीत नाम प्रदान करता हूं। इसके बाद वहां लाखों वानरों ने हनुमान जी को कंधे पर बैठाकर पूरे जंगल में परिभ्रमण कराया था। इसी के प्रतीकात्मक स्वरूप पौष अष्टमी पर यह यात्रा निकलती है।  

जम्मू में ‘बर्मा कॉलोनी’ की स्थापना और रोहिंग्याओं का असर, CJI की चेतावनी हुई सच

श्रीनगर  सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कड़ी टिप्‍पणी करते हुए कहा था कि भारत में घुसपैठियों के लिए किसी तरह का ‘रेड कार्पेट वेलकम’ नहीं होना चाहिए.” यह टिप्पणी भारत की सुरक्षा और अवैध घुसपैठ के प्रति उसके सख्त रुख को दर्शाती है. लेकिन, जम्मू की जमीन पर तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही है. म्यांमार से आए रोहिंग्या मुस्लिम समुदाय के लोग न सिर्फ यहा आकर बसे हैं बल्कि अब कई इलाकों में उनकी स्थायी बसावट, कारोबार और यहां तक कि समानांतर ढांचे तक बनते दिखाई दे रहे हैं. यह स्थिति सुप्रीम कोर्ट के संदेश और जमीनी हकीकत के बीच एक बड़ी खाई पैदा करती है.  कासिम नगर बना बर्मा बस्ती पहले रोहिंग्या समुदाय के लोग जम्मू शहर और आसपास के इलाकों में अस्थायी कैम्पों तक सीमित थे. लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है. कई क्षेत्रों में इनकी परमानेंट बस्तियां बस गई हैं. झुग्गियों का विस्तार हुआ है और यहां तक कि छोटी-छोटी दुकानें व बाजार भी खड़े हो चुके हैं. ये अब सिर्फ अस्थायी रूप से रहने के मकसद से नहीं आए हैं बल्कि उनका इरादा यहीं बस जाने का लगता है. सरकारी और सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, जम्मू के नरवाल, सुंजवां, भठिंडी और अन्य इलाकों में रोहिंग्या परिवारों ने ढांचों का स्थायी रूप लेती बस्तियां खड़ी कर ली हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक, 1994 में दो बच्चों समेत एक रोहिंग्या परिवार जम्मू पहुंचा था. इसके बाद 2009 के बाद इनकी उपस्थिति में तेज उछाल आया. 2007 से 2015 के बीच बड़ी संख्या में रोहिंग्या भारत आए और जम्मू में बसने लगे. पहले इस जगह का नाम कासिम नगर हुआ करता था. 2007 में इसे रोहिंग्या बस्ती के नाम से जाना जाने लगा. 2020 के बाद रोहिंग्या मुस्लिम समुदाय ने अपने संगठन को इतना मजबूत कर लिया कि स्थायी रूप से बसने की चाह में इस जगह को ‘बर्मा बस्ती’ का नाम भी दे दिया गया है. यह नामकरण अपने आप में उनकी बढ़ती पकड़ और स्थायी पहचान की तलाश को दर्शाता है. टीचर तक बन गए रोहिंग्या घुसपैठी रोहिंग्या समुदाय अब सिर्फ़ रहने तक सीमित नहीं है. आधिकारिक रिपोर्टों के मुताबिक, रोहिंग्या परिवारों के बच्चे स्थानीय स्कूलों में दाख़िल हैं. कुछ संस्थानों में रोहिंग्या मूल का शिक्षक सादिक बच्चों को पढ़ाने तक पहुंचाहुआ है. यही नहीं, रोहिंग्या बच्चों के लिए अलग से मदरसे भी चल रहे हैं. इन मदरसों के संचालन पर सुरक्षा एजेंसियां समय-समय पर निगरानी बढ़ाती रही हैं. यह उनके समुदाय के भीतर एक समानांतर ढाँचा विकसित होने का संकेत है. आर्थिक मोर्चे पर भी ये सक्रिय हो रहे हैं. कुछ लोग कबाड़ इकट्ठा करने, मजदूरी और रेहड़ी-फड़ी का काम करते हैं. वहीं, कुछ छोटी-बड़ी कपड़ों की दुकानों से कमाई करते नज़र आ रहे हैं. यह सब उनकी अस्थायी नहीं, बल्कि स्थायी रूप से यहीं बसने की मंशा को दर्शाता है. जनसांख्यिकीय बदलाव की चिंता पिछले कुछ सालों में इनकी आबादी में लगातार वृद्धि देखी गई है. इसने क्षेत्रीय सुरक्षा और जनसांख्यिकीय बदलावों पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं. सुरक्षा एजेंसियों ने कई बार पहचान सत्यापन अभियान चलाए हैं. इन अभियानों में दस्तावेजों की कमी, संदेहास्पद पहचान और अवैध बसावट के मामले सामने आए. 2021 में महिलाएं और बच्चे सहित कई रोहिंग्या हिरासत में लिए गए थे. जम्मू में रोहिंग्या की बढ़ती और अब लगभग स्थायी होती मौजूदगी, सुरक्षा, कानून और स्थानीय प्रशासन के सामने एक गंभीर चुनौती बन चुकी है. संवेदनशील बॉर्डर जोन में ऐसी बिना अनुमति और बिना दस्तावेज वाली बसावट को जारी रहने दिया जा सकता है या नहीं, यह सबसे बड़ा सवाल है. सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट संदेश और जमीनी हालात के बीच का यह विरोधाभास राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ी चिंता का विषय है.

उज्जैन महाकाल महोत्सव 2026: श्री महाकालेश्वर मंदिर में देशभर के कलाकारों की 5 दिन लंबी भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुति

उज्जैन  दुनिया के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में इस वर्ष एक अनोखी सांस्कृतिक शुरुआत होने जा रही है। मंदिर परिसर के शक्ति पथ पर 14 से 18 जनवरी 2026 तक भव्य महाकाल महोत्सव आयोजित किया जाएगा। पाँच दिनों का यह आयोजन पूरी तरह भगवान शिव और शैव परंपरा को समर्पित होगा, जिसमें देशभर से चुनिंदा कलाकार अपनी कला के माध्यम से शिव दर्शन का अलौकिक अनुभव कराएंगे। महोत्सव को लेकर मंगलवार को हुई तैयारी बैठक में कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा, नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा, महाकाल महोत्सव समिति सदस्य पद्मश्री भगवतीलाल राजपुरोहित तथा श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति के प्रशासक प्रथम कौशिक मौजूद रहे। बैठक में कार्यक्रम की रूपरेखा और सुरक्षा व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा हुई। महोत्सव के दौरान नृत्य, संगीत, नाट्य और विभिन्न कला विधाओं की प्रस्तुतियाँ होंगी, जो भगवान शिव की महिमा, शैव इतिहास और आध्यात्मिक परंपरा को दर्शाएंगी। साथ ही एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी जिसमें शिव के विविध स्वरूप, प्रमुख शैव तीर्थों और शैव संतों के जीवन से जुड़ी झलकियाँ प्रस्तुत की जाएंगी। आयोजन समिति के अनुसार, देश के बड़े कलाकारों के साथ स्थानीय प्रतिभाओं को भी मंच प्रदान किया जाएगा, ताकि उज्जैन की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित किया जा सके। महाकाल महोत्सव 2026 को शहर की सांस्कृतिक पहचान को नई दिशा देने वाला आयोजन माना जा रहा है।

दिल्ली-NCR में तैयार हुआ देसी ‘आयरन डोम’, इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सिस्टम से दुश्मन को मिलेगी कड़ी चुनौती

नई दिल्ली देश की राजधानी दिल्ली को दुश्मन के हवाई खतरों से बचाने के लिए एक अभेद्य सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है. दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) को मिसाइलों, ड्रोनों और तेज गति वाले विमानों से सुरक्षित करने के लिए स्वदेशी इंटीग्रेटिड एयर डिफेंस वेपन सिस्‍टम (IADWS) की तैनाती की जा रही है. IADWS एक मल्‍टी-लेयर एयर डिफेंस सिस्‍टम है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO ने इसके तहत कुल तीन प्रमुख सिस्‍टम विकसित किए हैं। पहला- क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल (QRSAM), दूसरा- एडवांस्ड वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (VSHORADS) और तीसरा- डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (DEW)। यह कदम तब उठाया जा रहा है जब पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर (मई 2025) के दौरान देश को कथित तौर पर निशाना बनाने की कोशिश की थी. एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार पहले भारत अमेरिकी NASAMS-II खरीदने की योजना बना रहा था, लेकिन कीमत काफी ज्‍यादा होने के कारण स्वदेशी प्रणाली को प्राथमिकता दी गई. 1. क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल (QRSAM) • खासियत: यह एक कैनिस्टर-आधारित मिसाइल प्रणाली है. यह एक मोबाइल सिस्‍टम है, जिसका मतलब है कि इसे तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है. यह प्रणाली पहला निशाना दागने में बहुत कम समय लेती है. • रेंज: QRSAM की मारक क्षमता लगभग 25 से 30 किलोमीटर तक है. यह कम दूरी पर मौजूद विमानों और ड्रोनों के लिए एक घातक हथियार है. • फायदे: यह दुश्मन के कम-ऊंचाई वाले विमानों और क्रूज मिसाइलों को तुरंत नष्ट कर सकती है. इसकी त्वरित प्रतिक्रिया इसे अचानक हमले से बचाव के लिए आदर्श बनाती है. 2. एडवांस्ड वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (VSHORADS) • खासियत: VSHORADS एक पोर्टेबल (Portable) मिसाइल प्रणाली है. इसे एक व्यक्ति या छोटे समूह द्वारा कंधे पर रखकर भी संचालित किया जा सकता है. यह पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में सैन्य टुकड़ियों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए डिज़ाइन की गई है. • रेंज: इसकी मारक क्षमता बहुत कम दूरी की होती है, आमतौर पर 6 से 8 किलोमीटर तक. यह कम ऊंचाई पर उड़ने वाले खतरों के लिए सटीक है. इसे रिसर्च सेंटर इमारात (RCI) द्वारा विकसित किया गया है. • फायदे: यह दुश्मन के हेलिकॉप्टरों और छोटे यूएवी (ड्रोन) को नजदीक आने से पहले ही मार गिराती है. इसकी स्वदेशी इन्फ्रारेड होमिंग तकनीक इसे अत्यधिक प्रभावी बनाती है. 3. डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (DEW) – लेजर तकनीक • खासियत: यह हाई-पावर वाली लेजर-आधारित प्रणाली है. इसे सेंटर फॉर हाई एनर्जी सिस्टम्स एंड साइंसेज (CHESS) द्वारा विकसित किया गया है. यह प्रणाली परंपरागत मिसाइलों के विपरीत, किरणों का उपयोग करके लक्ष्य को नष्ट करती है. • रेंज: DEW की रेंज लक्ष्य और लेजर की शक्ति पर निर्भर करती है, लेकिन यह ड्रोन जैसे खतरों को करीबी से मध्यम दूरी पर निष्क्रिय कर सकती है. • फायदे और कीमत: यह प्रणाली गोला-बारूद पर निर्भर नहीं करती. इसका मुख्य लाभ यह है कि प्रति-शॉट लागत बहुत कम होती है. ऐसा इसलिए क्योंकि यह बिजली का उपयोग करती है. यह सैकड़ों ड्रोनों को तेजी से बेअसर कर सकती है, जिससे पारंपरिक मिसाइलों की हाई-कॉस्‍ट बचती है. IADWS की शक्ति और सफल परीक्षण IADWS का नियंत्रण एक केंद्रीय कमांड और नियंत्रण केंद्र द्वारा किया जाता है. 23 अगस्त 2025 को ओडिशा के तट पर इसका सफल परीक्षण किया गया था. परीक्षण के दौरान, QRSAM, VSHORADS और हाई एनर्जी लेजर ने एक साथ तीन अलग-अलग लक्ष्यों (दो तेज गति वाले यूएवी और एक मल्टी-कॉप्टर ड्रोन) को अलग-अलग रेंज और ऊंचाई पर नष्ट कर दिया था. भारतीय वायु सेना (IAF) को इस महत्वपूर्ण परियोजना की जिम्‍मेदारी दी गई है. यह प्रणाली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की रक्षा करेगी. DRDO उत्पादन एजेंसियों के साथ मिलकर नेटवर्किंग और कमांड एवं नियंत्रण प्रणालियों पर काम कर रहा है.

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- जल जीवन मिशन का कार्य निर्धारित लक्ष्य वर्ष 2028 के पहले मार्च-2027 में होगा पूर्ण

प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता जल स्रोतों में सीवरेज का दूषित जल मिलने से रोकने की बनायें कार्य-योजना एकल नल-जल योजना में 93 प्रतिशत कार्य पूर्ण योजनाओं के संचालन एवं संधारण की करें समुचित व्यवस्था मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोक स्वास्थ्य एवं यांत्रिकी विभाग की समीक्षा में दिये निर्देश भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जल स्रोतों में सीवरेज का दूषित जल किसी भी स्थिति में नहीं मिले और इसके लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन मध्यप्रदेश इस कार्य को मार्च 2027 तक पूर्ण कर राष्ट्रीय स्तर पर मिसाल पेश करेगा। उन्होंने कहा कि मिशन के संचालन-संधारण के लिए मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी परिस्थिति में जल आपूर्ति प्रभावित न हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी कहा कि जल जीवन मिशन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सरपंचों और महिला समूहों को राज्य, संभाग, जिला और ग्राम स्तर पर सम्मानित किया जाए। विगत 10 वर्षों में जिन ग्रामों को जल संकट का सामना करना पड़ा है, उनकी रिपोर्ट तैयार कर उन क्षेत्रों में जल प्रदाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल की उपलब्धता के अनुसार जल वितरण का समय तय किया जाए, जिससे नियमित आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। मिशन के प्रभाव का विश्लेषण अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के माध्यम से कराए जाने की बात भी कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गाँव के ऐसे ट्यूबवेल की सूची बनवाएं, जिनमें हमेशा पानी रहता हो और ट्यूबवेल मालिक सेवाभावी हों। जरूरत पड़ने पर इनके ट्यूबवेल से पानी की आपूर्ति कराने का प्रयास करें। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने जल जीवन मिशन के कार्यों के समुचित संचालन-संधारण के लिये प्रभावी योजना बनाने की बात कही। बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री श्री नीरज मण्डलोई, अपर मुख्य सचिव वित्त श्री मनीष रस्तोगी और प्रबंध संचालक जल निगम श्री के.वी.एस. चौधरी भी उपस्थित थे। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी श्री पी. नरहरि ने बताया कि अब तक प्रदेश में 80 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं और मिशन की कुल प्रगति 72.54 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024-25 में 8.19 लाख कनेक्शन का लक्ष्य शत-प्रतिशत पूरा किया गया है और वर्ष 2025-26 में अब तक 5.50 लाख कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। बोरवेल दुर्घटना रोकने कानून बनाने वाला पहला राज्य बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश बोरवेल दुर्घटना रोकने के लिए कानून बनाने वाला देश का पहला राज्य है। साथ ही “स्वच्छ जल से सुरक्षा अभियान” में प्रदेश को पूरे देश में प्रथम स्थान मिला है। वर्ष 2024-25 में 12,990 करोड़ रु. का व्यय कर 92.89 प्रतिशत वित्तीय लक्ष्य हासिल किया गया है। वर्ष 2025-26 में 6,016 करोड़ रु. का व्यय किया गया है, जो 30 सितंबर 2025 तक 35.11 प्रतिशत की प्रगति दर्शाता है। प्रदेश में 21,552 ग्राम “हर घर जल” घोषित किए जा चुके हैं तथा 15,026 ग्रामों को प्रमाणित किया जा चुका है। समूह नल जल योजनाओं के माध्यम से 3,890 ग्रामों में नियमित जल आपूर्ति प्रारंभ हो चुकी है और एकल नल जल योजनाएँ 93 प्रतिशत प्रगति के साथ तेजी से पूर्णता की ओर अग्रसर हैं। विभाग द्वारा तकनीकी और डिजिटल मॉनिटरिंग को प्राथमिकता दी जा रही है। जल रेखा मोबाइल ऐप के माध्यम से योजनाओं की सतत निगरानी की जा रही है। राज्य की सभी 155 प्रयोगशालाओं को एनएबीएल मान्यता प्राप्त हो चुकी है। ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए पंचायत दर्पण पोर्टल के माध्यम से डिजिटल जल कर संग्रह व्यवस्था लागू की गई है। इंदौर में IoT (इंटरनेट ऑफ थिंक्स) आधारित जल आपूर्ति मॉडल सफलतापूर्वक लागू किया गया है और इसे अन्य जिलों में भी विस्तार दिया जा रहा है। ऊर्जा प्रबंधन को देखते हुए 100 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजना PPP मॉडल पर स्वीकृत की गई है, जिससे आने वाले 25 वर्षों तक सस्ती और स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इसके अतिरिक्त 60 मेगावाट पवन ऊर्जा परियोजना पर भी कार्ययोजना तैयार की गई है। नागरिकों की सुविधा के लिए जलदर्पण पोर्टल संचालित है तथा शिकायत निवारण हेतु कॉल सेंटर स्थापित किए गए हैं। अभी 64 ग्रामों में 24×7 जल आपूर्ति पायलट रूप में सफल रही है, जिसे आगे और विस्तृत किया जाएगा। बैठक में भविष्य के विजन पर जानकारी देते हुए बताया गया कि आगामी तीन वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक सुरक्षित नल-जल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। जल स्रोतों के संरक्षण, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, डिजिटल प्रबंधन, तकनीकी क्षमता संवर्धन और ऊर्जा सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। नए ग्राम, बसाहट, विद्यालय, आंगनवाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य संस्थान और महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थानों में पेयजल सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, ताकि मध्यप्रदेश जल प्रदाय व्यवस्था में देश का अग्रणी राज्य बन सके। महत्वपूर्ण बिन्दु     जल स्रोतों में सीवरेज का प्रदूषित जल मिलने से रोकने के लिये समुचित कार्य योजना बनाये।     जल जीवन मिशन के कार्य पूरा करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा दिसंबर 2028 तक का लक्ष्य दिया गया है।     प्रदेश में तय समय सीमा से पहले मार्च 2027 में ही जल जीवन मिशन के कार्यों को पूर्ण कर लिया जाएगा।     जल जीवन मिशन में किए गए कार्यों की अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान द्वारा इंपैक्ट एनालिसिस कराएं।     प्रत्येक नागरिक को गुणवत्ता युक्त जल उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है ।     जल जीवन मिशन के तहत सरपंच, महिला समूह द्वारा किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यो के लिए उन्हें राज्य स्तर, संभाग, जिला एवं ग्राम स्तर पर पुरस्कृत किया जाए।     जल जीवन मिशन के कार्यों के संचालन एवं संधारण की समुचित योजनाएं बनाएं ताकि किसी भी स्थिति में जल की नियमित आपूर्ति हो सके।     विगत 10 सालों में जिन गांवों में जल संकट रहा है, उनकी रिपोर्ट तैयार कर उनमें … Read more

शासकीय स्कूलों की ई-अटेंडेंस नीति पर विवाद थमा, शिक्षकों ने याचिका क्यों लौटाई?

जबलपुर प्रदेश के शासकीय स्कूलों में ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता को लेकर दायर की गई याचिका बुधवार को वापस ले ली गई। याचिकाकर्ता शिक्षकों की ओर से कोर्ट में निवेदन किया गया कि वे नए तथ्यों के साथ नई याचिका दायर करना चाहते हैं। न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने याचिका वापस लेने की अनुमति प्रदान करते हुए मामले का पटाक्षेप कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिका में जिस नियम को हवाला दिया जा रहा है, वह नई याचिका में ही दिया जा सकता है। पुरानी याचिका में जो आधार दिए गए थे, उन आधारों पर दूसरे मुकदमों के फैसले हो चुके है। दरअसल, प्रदेश सरकार के हमारे शिक्षक ई ऐप को चुनौती देते हुए प्रदेश के 27 शिक्षकों की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसमें कहा गया था कि हमारे शिक्षक ई-एप सुरक्षित नहीं है, इससे डेटा लीक होने और साइबर फ्राड की घटनाएं सामने आई हैं।   जबलपुर निवासी शिक्षक मुकेश सिंह बरकड़े सहित विभिन्न जिलों के 27 शिक्षकों ने ई-अटेंडेंस के विरुद्ध हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि हमारे शिक्षक ऐप से प्रतिदिन उपस्थिति दर्ज कराने में गंभीर तकनीकी और व्यावहारिक कठिनाइयां आ रही हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने दलील दी कि सरकार यह ऐप एक निजी संस्था से चलवा रही है और वही संस्था शिक्षकों का डेटा कलेक्ट कर रही है। केंद्र सरकार के निजी डेटा कलेक्शन नियम इस पर लागू होते हैं, पर ऐप में सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। शिक्षकों ने कोर्ट को यह भी बताया था कि प्रदेश में पांच-छह शिक्षकों के खातों से रुपए निकाल लिए गए और उनकी निजी जानकारी लीक हुई। कई जिलों के शिक्षा अधिकारियों ने इसकी शिकायत करते हुए पत्र भी लिखे। डीपीआई ने इन शिकायतों को स्वीकार करते हुए माना कि कुछ शिक्षकों के साथ फ्रॉड की घटनाएं हुई हैं और अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। वहीं राज्य सरकार ने कोर्ट में कहा था कि ई-अटेंडेंस सिस्टम पहले भी सही साबित किया गया है। सरकार का कहना है कि ऐप के लिए डेटा सेफ्टी सर्टिफिकेट लिया गया है और न तो सर्वर की समस्या है, न नेटवर्क की।