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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की लोक निर्माण विभाग की समीक्षा

विभागीय न्यूज़ लेटर और पर्यावरण से समन्वय ब्रोशर का विमोचन किया एमपीआरडीसी और एमपीबीडीसी के संचालक मंडल की बैठक संपन्न भोपाल मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा है कि सड़कें केवल यातायात का माध्यम नहीं, बल्कि विकास, रोज़गार, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और सामाजिक-सांस्कृतिक प्रगति का आधार हैं। विभाग का उद्देश्य प्रत्येक निर्माण कार्य को सिर्फ एक तकनीकी परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि जनता के जीवन स्तर को सुधारने वाले साधन के रूप में देखना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गुणवत्ता, पारदर्शिता और नवाचार के साथ प्रत्येक परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, यही प्रयास "लोक निर्माण से लोक कल्याण" की भावना को साकार करते हैं। यह निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान दिये। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने विभाग द्वारा "लोक निर्माण से लोक कल्याण" की भावना को धरातल पर उतारने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश की आधारभूत संरचना का विकास ही जनकल्याण का आधार है और विभाग ने इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि हर सड़क, हर पुल, हर परियोजना जनता के जीवन को सरल और सुरक्षित बनाने की हमारी संकल्पना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि मेट्रोपॉलिटन एरिया और समीपवर्ती क्षेत्रों में राजमार्गों का घनत्व बढ़ायें। पूरे प्रदेश को समावेशित कर समग्र विकास पर कार्य करें। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही जबलपुर और ग्वालियर को भी मेट्रोपोलिटन क्षेत्र घोषित किया जाएगा। शहरी, ग्रामीण एवं औद्योगिक क्षेत्रों सभी को अधोसंरचना विकास का लाभ प्राप्त हो इस आधार पर प्रस्ताव की परिकल्पना की जाये। उन्होंने कहा कि राजमार्गों का घनत्व राष्ट्रीय स्तर के समीप ले जाने के लिए विज़न डॉक्यूमेंट के आधार पर प्रस्ताव तैयार करें। प्रस्ताव में स्थानीय मांगों और सुझावों को यथोचित स्थान दिया जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अपर मुख्य सचिव क्षेत्रों के समग्र विकास अनुसार कार्ययोजना का निर्धारण करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि शहरी विकास की इंटीग्रेटेड पॉलिसी के निर्माण में लोक निर्माण विभाग को भी शामिल किया जाये। उन्होंने कहा कि अधोसंरचना विकास में पर्यावरण समन्वय का विशेष ध्यान रखा जाये। सतत संवहनीय विकास के लिए सूरत के डायमंड पार्क की तर्ज में भवनों का निर्माण ग्रीन बिल्डिंग संकल्पना पर किया जाये। बिजली और पानी की बचत सुनिश्चित की जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भवन निर्माण में वास्तु-विज्ञान का ध्यान रखा जाये। ताकि सूर्य की रोशनी, हवा अन्य प्राकृतिक संसाधनों का उचित उपयोग सुनिश्चित हो और ऊर्जा की बचत की जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एक्सप्रेस-वे आधुनिक समय की मांग है। इन अधोसंरचनाओं के विकास में ग्रामीण क्षेत्र की सुविधाओं का ध्यान रखा जाये। आवश्यकतानुसार फ्लाई-ओवर, अंडर-पास, सर्विस लेन को प्रस्ताव में शामिल करें। बैठक में बताया गया कि सिंहस्थ-2028 के कार्य प्राथमिकता से किए जा रहे हैं। प्रस्तावित कार्यों की प्रशासनिक स्वीकृति जारी की जा चुकी है। दिसम्बर माह के अंत तक कार्य प्रारंभ हो जायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि कार्यों को जून-2027 तक पूर्ण किया जाये। बैठक में बताया गया कि लोकपथ ऐप में प्राप्त 12 हज़ार 212 शिकायतों में से 12 हज़ार 166 का निराकरण किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोकपथ ऐप के उत्कृष्ट उपयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि लोकपथ ऐप में रियल टाइम सड़क की स्थिति को भी अपडेट किया जाये। साथ ही इसका प्रचार प्रसार सुनिश्चित किया जाये ताकि अधिक से अधिक लोग इससे लाभान्वित हो सकें। लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने बताया कि लोकपथ ऐप में आगे स्थलों के बीच की दूरी, समस्त वैकल्पिक मार्ग, पर्यटन स्थल, चिकित्सा सेवाएं, ब्लैक स्पॉट, टोल का शुल्क अन्य सुविधाओं को भी मैप किया जाएगा। यह स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ आगंतुकों के लिए भी उपयोगी होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि राष्ट्रीय एवं राज्य के राजमार्गों में सतत संधारण सुनिश्चित किए जाये। प्रकाश, ग्रीनरी और सावधानी मार्कर्स मानक अनुसार रहें यह भी सुनिश्चित किया जाये। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) और मध्यप्रदेश भवन विकास निगम (बीडीसी) के संचालक मंडल की बैठक हुई। एमडी एमपीआरडीसी श्री भरत यादव ने एमपीआरडीसी के चल रहे कार्यों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी प्रस्तुत की। इसी प्रकार एमडी बीडीसी श्री सिवी चक्रवर्ती ने भवन विकास निगम के कार्यों और आगामी कार्ययोजना का विवरण दिया। बैठक में प्रमुख सचिव पीडब्ल्यूडी श्री सुखवीर सिंह ने कहा कि विभाग द्वारा किए जा रहे नवाचारों, पीएम गतिशक्ति पोर्टल के उपयोग से रोड प्लानिंग, BISAG-N के माध्यम से समय सीमा का निर्धारण और प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग के कार्य किए जा रहे हैं। इसके साथ पर्यावरण से समन्वय, वृक्षारोपण, ट्री-शिफ्टिंग, लोक सरोवर, सौर ऊर्जा के कार्य भी विकास कार्यों में शामिल किए गए हैं। उन्होंने बताया कि पीएम गतिशक्ति के उत्कृष्ट उपयोग पर विभाग को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, एसीएस श्री नीरज मंडलोई, एसीएस श्री मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव लोकनिर्माण श्री सुखवीर सिंह, एमडी एमपीआरडीसी श्री भरत यादव, एमडी बीडीसी श्री एमसीबी चक्रवर्ती सहित विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। दो वर्ष की उपलब्धियाँ              दो वर्षों में मध्यप्रदेश ने 12 हजार किमी सड़क निर्माण, उन्नयन और सुदृढ़ीकरण कर अभूतपूर्व रिकॉर्ड स्थापित किया है, जिससे राज्य का 77 हजार 268 किमी का सड़क नेटवर्क देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ है।              वित्तीय वर्ष 2024–25 में विभाग ने 99% तक वित्तीय लक्ष्य हासिल कर समयबद्ध क्रियान्वयन और संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।              "लोक पथ" मोबाइल ऐप के माध्यम से 12,212 शिकायतों में से 12,166 शिकायतों का निवारण कर 99.6% समाधान दर प्राप्त की, जिससे विभाग की पारदर्शिता और जनसहभागिता मजबूत हुई।              जबलपुर में प्रदेश के सबसे लंबे 6.9 किमी के दमोह नाका–मदनमहल–मेडिकल रोड एलिवेटेड कॉरिडोर ,राजधानी भोपाल में डॉ. अम्बेडकर फ्लाईओवर (2.73 किमी) और 15.1 किमी लंबा श्यामा प्रसाद मुखर्जी नगर मार्ग जैसे बड़े शहरी कॉरिडोर के कार्य पूरे किए गए।              प्रदेश में … Read more

रायपुर: रक्षक पाठ्यक्रम छात्रों के सुरक्षित भविष्य के लिए सहायक होगा – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर : रक्षक पाठ्यक्रम छात्रों के सुरक्षित भविष्य गढ़ने में सहायक होगा – मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने प्रदेश के 6 विश्वविद्यालयों के साथ किया एमओयू देश का पहला पाठ्यक्रम:छात्रों को मिलेगी बाल अधिकार एवं संरक्षण की  जानकारी रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की उपस्थिति में राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग एवं प्रदेश के छह विश्वविद्यालयों के मध्य “रक्षक पाठ्यक्रम” के लिए एमओयू संपन्न हुआ। बाल अधिकार एवं संरक्षण पर आधारित यह अनूठा पाठ्यक्रम देश में अपनी तरह का पहला शैक्षणिक नवाचार है।  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि “रक्षक पाठ्यक्रम छात्रों के सुरक्षित और जिम्मेदार भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।” उन्होंने कहा कि यह पाठ्यक्रम युवाओं को न केवल रोजगार के अवसर प्रदान करेगा, बल्कि बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में आवश्यक विशेषज्ञता भी विकसित करेगा। उन्होंने कहा कि कई बार बच्चे भूलवश या भ्रमित होकर गलत दिशा में चले जाते हैं क्योंकि वे अबोध होते हैं। ऐसे बच्चों को सही मार्ग पर लाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी की गारंटी के अधिकांश वादों को पूरा कर लिया है। किसानों के बकाया बोनस, महिलाओं के लिए महतारी वंदन योजना और सबके लिए आवास जैसे महत्वपूर्ण संकल्पों को साकार किया गया है। उन्होंने कहा कि 350 से अधिक प्रशासनिक सुधार लागू कर छत्तीसगढ़ सुशासन के मार्ग पर तेजी से अग्रसर है और इसी उद्देश्य से सुशासन एवं अभिसरण विभाग की स्थापना भी की गई है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने रक्षक पाठ्यक्रम को रिकॉर्ड समय में तैयार करने और विश्वविद्यालयों में इसे लागू करने के लिए आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा और उनकी पूरी टीम को बधाई दी। महिला एवं बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी रजवाड़े ने कहा कि बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में व्यापक प्रयासों की आवश्यकता है। बच्चों से भिक्षावृत्ति कराना, परित्यक्त बच्चों का पुनर्वास, और संवेदनशील मामलों का समाधान—ये सभी अत्यंत चुनौतीपूर्ण विषय हैं। उन्होंने कहा कि “यह पाठ्यक्रम संवेदनशील, सजग और सेवा-भावयुक्त युवा तैयार करने में मील का पत्थर साबित होगा।” उन्होंने इसे राष्ट्रीय स्तर का नवाचार बताते हुए कहा कि भविष्य में छत्तीसगढ़ इस क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में पहचाना जाएगा। उच्च शिक्षा मंत्री  टंक राम वर्मा ने पाठ्यक्रम को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने आयोग और सभी छह विश्वविद्यालयों को पाठ्यक्रम लागू करने हेतु बधाई दी। यह एक वर्षीय स्नातकोत्तर “पीजी डिप्लोमा इन चाइल्ड राइट्स एंड प्रोटेक्शन”  पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर, आंजनेय विश्वविद्यालय, रायपुर, एमिटी विश्वविद्यालय, रायपुर और  शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, भिलाई-दुर्ग में प्रारम्भ होगा। क्या है रक्षक पाठ्यक्रम प्रदेश के किसी भी विश्वविद्यालय में अब तक ऐसा पाठ्यक्रम उपलब्ध नहीं था, जो युवाओं को बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में प्रशिक्षित करते हुए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए। इस आवश्यकता को देखते हुए आयोग द्वारा “रक्षक – बाल अधिकार संरक्षण पर एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम” को विकसित किया गया है। इस पाठ्यक्रम से युवाओं को सैद्धांतिक एवं विधिक ज्ञान, विभागीय योजनाओं, संस्थाओं और प्रायोगिक प्रक्रियाओं की गहरी समझ, बाल संरक्षण इकाइयों आदि के सम्बन्ध में जानकारी उपलब्ध होगी।संवेदनशीलता, जागरूकता और बाल-अधिकारों की आत्मिक समझ विकसित करने वाला यह पाठ्यक्रम युवाओं को इस क्षेत्र में कुशल, समर्पित और प्रभावी मानव संसाधन के रूप में तैयार करेगा। आयोग द्वारा पाठ्यक्रम के संचालन, प्रशिक्षण, परामर्श और मार्गदर्शन की संपूर्ण सुविधा विश्वविद्यालयों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा, ,पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर से कुलसचिव प्रो शैलेंद्र पटेल,प्रो ए के वास्तव,संत गहिरा गुरु विश्विद्यालय सरगुजा कुलपति  प्रो राजेंद्र लाकपाले, कुलसचिव  शारदा प्रसाद त्रिपाठी, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति एवं रायपुर संभाग आयुक्त  महादेव कावरे, कुलसचिव  सुनील कुमार शर्मा,आंजनेय विश्वविद्यालय रायपुर कुलपति डॉ. टी.रामाराव कुलसचिव डॉ. रूपाली चौधरी, एमिटी विश्वविद्यालय रायपुर कुलपति डॉ. पीयूष कांत पाण्डेय, कुलसचिव डॉ. सुरेश ध्यानी, शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी भिलाई दुर्ग चांसलर डॉ.आई.पी. मिश्रा, कुलपति डॉ ए. के झा एवं डॉ जया मिश्रा, आयोग के सचिव प्रतीक खरे सहित अन्य विभागीय अधिकारीगण उपस्थित थे।

MP पुलिस में बदलाव, वर्दी पहनकर सोशल मीडिया पर ‘हीरो’ बनने पर रोक, DGP ने जारी की नई SOP

भोपाल मध्य प्रदेश में अब पुलिसकर्मियों का वर्दी पहनकर सोशल मीडिया पर रील्स, वीडियो या फोटो डालकर ‘हीरो’ बनने का दौर खत्म हो गया है। पुलिस महानिदेशक (DGP) ने सख्त रुख अपनाते हुए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी कर दी है, जिसके बाद वर्दी में कोई भी निजी कंटेंट सोशल मीडिया पर पोस्ट करना पूरी तरह बैन कर दिया गया है। नई SOP के अनुसार, पुलिस कर्मी फेसबुक, इंस्टाग्राम, X (ट्विटर), यूट्यूब या व्हाट्सएप पर वर्दी में रहते हुए केवल आधिकारिक कामों से जुड़े पोस्ट ही कर सकेंगे। निजी फोटोशूट, डांस रील्स, ड्यूटी के वीडियो, संवेदनशील जगहों की तस्वीरें या ऐसा कोई भी कंटेंट जो पुलिस विभाग की छवि को चोट पहुंचाए—अब सख्त रूप से प्रतिबंधित है। नई SOP के अहम नियम वर्दी में कोई भी फोटो, वीडियो, रील, स्टोरी पोस्ट करना पूरी तरह प्रतिबंधित। ड्यूटी से जुड़ी संवेदनशील जानकारी/फोटो शेयर करना वर्जित। विभाग की छवि, अनुशासन और जनता का विश्वास बनाए रखने पर जोर। केंद्रीय सिविल सेवा आचरण नियम और संबंधित पुलिस अधिनियमों का पालन अनिवार्य। नियम तोड़े तो होगी कड़ी कार्रवाई विभागीय जांच निलंबन वेतन वृद्धि रोकना पदावनति सेवा से बर्खास्तगी तक पुलिस मुख्यालय का कहना है कि हाल के समय में कुछ पुलिसकर्मी सोशल मीडिया पर वर्दी का दुरुपयोग कर अनचाही चर्चा बटोर रहे थे। इससे विभाग की गरिमा प्रभावित हो रही थी। नई SOP का उद्देश्य पुलिस की छवि को मजबूत करना और बल में अनुशासन कायम रखना है। अब देखने वाली बात यह है कि सोशल मीडिया पर ‘हीरो’ बनने के शौकीन पुलिसकर्मी इस नए नियम का कितनी ईमानदारी से पालन करते हैं।

छत्तीसगढ़ कैबिनेट की बैठक में अहम प्रस्तावों पर मंजूरी, नक्सल मामलों की वापसी और 14 अधिनियमों में संशोधन

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में बुधवार को सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री निवास में मंत्रिपरिषद की महत्वपूर्ण बैठक में नक्सल उन्मूलन, प्रशासनिक सुधार और बजटीय प्रबंधन से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक के बाद उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने पत्रकारों को कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी। बैठक में नक्सल उन्मूलन, प्रशासनिक सुधार और बजटीय प्रबंधन से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने आत्मसमर्पित नक्सलियों के विरुद्ध दर्ज आपराधिक प्रकरणों की समीक्षा और परीक्षण के बाद उन्हें न्यायालय से वापस लेने की प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी। इसके लिए मंत्रिपरिषद उप समिति का गठन किया जाएगा, जो प्रत्येक प्रकरण का परीक्षण कर कैबिनेट के समक्ष अनुशंसा प्रस्तुत करेगी। यह प्रक्रिया छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ति राहत पुनर्वास नीति-2025 के अनुरूप होगी, जिसमें आत्मसमर्पित नक्सलियों के अच्छे आचरण और उनके योगदान को देखते हुए उनके विरुद्ध दर्ज प्रकरणों के निराकरण का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त, जिला स्तरीय समिति भी प्रकरणों की रिपोटर् तैयार कर पुलिस मुख्यालय को भेजेगी। विधि विभाग की राय के बाद मामलों को मंजूरी के लिए कैबिनेट उप समिति के समक्ष भेजा जाएगा। केंद्र सरकार से जुड़े मामलों में आवश्यक अनुमति ली जाएगी। कैबिनेट ने 11 विभागों के 14 अधिनियमों में संशोधन के लिए जन विश्वास विधेयक-2025 (द्वितीय संस्करण) के प्रारूप को मंजूरी दी। इसका उद्देश्य पुराने और जटिल दंडात्मक प्रावधानों को सरल बनाना, छोटे उल्लंघनों पर प्रशासकीय दंड का प्रावधान लाना, न्यायालयों पर भार कम करनाऔर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस तथा ईज ऑफ लिविंग को बढ़ावा देना है। यह निर्णय सुशासन की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है जो जन विश्वास विधेयक का दूसरा संस्करण ला रहा है। बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के प्रथम अनुपूरक अनुमान को विधानसभा में प्रस्तुत करने के लिए छत्तीसगढ़ विनियोग विधेयक, 2025 को भी कैबिनेट से मंजूरी मिल गई।  

अमित शाह का विपक्ष पर वार: SIR मुद्दे पर झूठ की राजनीति बंद करें

नई दिल्ली  सांसद में शीतकालीन सत्र के दौरान केंद्रीय मंत्री अमित शाह विपक्ष पर गरजे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष SIR को लेकर झूठ फैला रहा है। EC एक संवैधानिक संस्था है और यह तब बनी थी, जब BJP नहीं बनी थी। अपनी बात को जारी रखते हुए शाह ने कहा कि विपक्ष के सदस्य बार- बार इस मुद्दे पर अपने विचार रख रहे थे, इसलिए उन्हें जवाब देना था। उन्होंने पहले के सभी एसआईआर (SIR) का गहन अध्ययन किया है और कांग्रेस की ओर से फैलाए गए "झूठ" का अपने तर्कों के आधार पर जवाब देना चाहते हैं। SIR पर चर्चा से इनकार का कारण अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि बीते दो दिनों तक संसद की कार्यवाही ठीक से नहीं चल सकी और विपक्ष ने यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकार चर्चा नहीं चाहती। इस पर उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट की। गृह मंत्री ने कहा, "हमने चर्चा के लिए 'ना' कहा, इसके पीछे कारण थे। विपक्ष की मांग थी SIR पर चर्चा की।" उन्होंने तर्क दिया, "यह (एसआईआर) चुनाव आयोग का काम है। अगर इस पर चर्चा होगी, तो जवाब कौन देगा?" शाह ने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है।   इसके अलावा शाह ने  बुधवार को लोकसभा में चुनाव सुधारों पर हो रही चर्चा का जवाब देते हुए, सदन की कार्यवाही बाधित होने और चर्चा से इनकार करने के आरोपों पर विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने साफ किया कि बीजेपी और एनडीए के लोग कभी भी बहस से पीछे नहीं हटते। उन्होंने बताया कि उन्होंने SIR पर चर्चा करने से मना क्यों किया था। चुनाव सुधार पर चर्चा को मिली सहमति गृह मंत्री ने बताया कि जब विपक्ष चुनाव सुधार के व्यापक मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हुआ, तब सरकार ने सहमति दी। अमित शाह ने कहा कि चर्चा चुनाव सुधार पर तय हुई थी, लेकिन विपक्ष के सदस्यों ने बार-बार SIR पर ही अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जवाब तो उन्हें देना ही था।  अमित शाह ने यह स्पष्ट किया कि सरकार संसद को देश की सबसे बड़ी पंचायत मानती है और चर्चा के लिए हमेशा तैयार है, लेकिन विषय संवैधानिक सीमाओं के भीतर होना चाहिए।  

इंदौर में गुटखा कारोबारी किशोर वाधवानी समेत कई फर्म पर 2002 करोड़ टैक्स डिमांड, 1784 करोड़ का सेस

इंदौर  गुटखा कारोबारी किशोर वाधवानी और उससे जुड़े विभिन्न प्रतिष्ठानों पर सेंट्रल जीएसटी एंड एक्साइज कमिश्नरेट इंदौर ने बड़ी कार्रवाई की। विभाग ने इन्हें 2002 करोड़ रुपए की टैक्स डिमांड वाला नोटिस जारी किया है। माना जा रहा है कि यह प्रदेश में अब तक जारी की गई सबसे बड़ी टैक्स डिमांड है। यह कार्रवाई साल 2020 में तलाशी और जांच कार्रवाई के आधार पर की गई है। नोटिस वाधवानी तक सीमित नहीं है, टैक्स डिमांड एलोरा टोबेको, दबंग दुनिया पब्लिकेशन, श्याम खेमानी, अनमोल मिश्रा, धर्मेन्द्र पीठादिया, राजू गर्ग, शिमला इंडस्ट्रीज प्रालि, देवेंद्र द्विवेदी, विनायका फिल्टर्ड प्रालि और विनोद बिदासरिया सहित कई अन्य संस्थानों और व्यक्तियों को भी जारी किया गया है। इसके अलावा टीएएन इंटरप्राइजेज, एसआर ट्रेडिंग, निश्का इंटरप्राइजेज, इंक फ्रूट, एमएन इंटरप्राइजेस, रानी प्रेस प्रालि, जौहर हसन, एनजी ग्राफिक्स एंड क्लॉक मेकर्स के नाम भी इसमें शामिल हैं। टैक्स डिमांड नोटिस जारी होने में देरी का मुख्य कारण वाधवानी समूह द्वारा की गई लंबी कानूनी लड़ाई रही। मामला पहले इंदौरहाईकोर्ट में पहुंचा, जहां अदालत ने समूह की याचिका को न केवल निराधार बताया, बल्कि उन पर दो लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया था। अदालत ने स्पष्ट कहा था कि याचिका का उद्देश्य सिर्फ जांच और टैक्स प्रक्रिया को लटकाने का प्रयास है। इसके बाद समूह ने इस फैसले को चुनौती देते हुए मामला सुप्रीम कोर्ट में दायर किया।  2 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए याचिका खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद प्रशासन को टैक्स डिमांड नोटिस जारी करने का रास्ता साफ हो गया और लंबे समय से लंबित यह कार्रवाई अब पूरी हो गई है। अब संबंधित फर्मों और व्यक्तियों को तय समय सीमा में विभाग को अपना जवाब देना होगा। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर विभाग आगे वसूली की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।

ग्रामीण परिवहन को नई रफ्तार: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया योजना के द्वितीय चरण का शुभारंभ

रायपुर : मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का दूसरा चरण शुरू, 180 नए गांव जुड़े बस सुविधा से ग्रामीण परिवहन को नई रफ्तार: मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने किया योजना के द्वितीय चरण का शुभारंभ बस्तर और सरगुजा में परिवहन क्रांति, ग्रामीण बस योजना का विस्तार रायपुर छत्तीसगढ़ के बस्तर और सरगुजा अंचल के सुदूर वनांचलों में ग्रामीण परिवहन को नई दिशा देने वाली मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना ने आज एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की।  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय से योजना के द्वितीय चरण का औपचारिक शुभारंभ किया तथा वर्चुअली हरी झंडी दिखाकर बसों को रवाना किया। दूसरे चरण में बस्तर और सरगुजा संभाग के 10 जिलों के 23 मार्गों पर 24 नई बसों का संचालन प्रारंभ हुआ है, जिससे 180 गांव सीधे बस सुविधा से जुड़ गए हैं। कार्यक्रम के द्वितीय चरण में शामिल अनेक ग्रामीण उसी बस में सवार होकर पहुंचे, जिसे योजना के प्रथम चरण में प्रारंभ किया गया था। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से आत्मीय चर्चा करते हुए बताया कि अब दूरस्थ इलाकों से ब्लॉक मुख्यालयों तक पहुंचना पहले की तुलना में काफी सहज और सुगम हो गया है।  सुकमा–दोरनापाल–कोंटा मार्ग से पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि वे लगभग 110 किलोमीटर की यात्रा बस से कर कार्यक्रम तक पहुंचे, जबकि पूर्व में यह यात्रा बेहद कठिन और समयसाध्य थी। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि छत्तीसगढ़ का कोई भी गांव विकास की मुख्यधारा से अलग न रहे। यह योजना न केवल परिवहन सुविधा बढ़ा रही है, बल्कि ग्रामीणों को शहरों और सेवा संस्थानों से जोड़ते हुए सामाजिक एवं आर्थिक समानता को भी मजबूती प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन की सुदृढ़ व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में यह योजना एक मील का पत्थर सिद्ध हो रही है, जिससे लोगों को सुरक्षित, समयबद्ध और सुविधाजनक यात्रा का अवसर मिल रहा है।  मुख्यमंत्री  साय ने योजना से लाभान्वित होने वाले 180 गांवों के सभी ग्रामीणों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बेहतर यातायात सुविधाएँ अब उनके जीवन को पहले से अधिक सुगम बनाएंगी और तरक्की के नए मार्ग खोलेंगी। परिवहन मंत्री  केदार कश्यप ने बताया कि जिन दुर्गम और वनांचल क्षेत्रों तक कभी यातायात की सुविधा नहीं पहुंची थी, वहाँ भी अब बस सेवाएँ प्रारंभ हो रही हैं। यह योजना विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा के जनजातीय बहुल इलाकों के लिए एक वरदान के रूप में उभर रही है।  उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के प्रथम चरण की शुरुआत 04 अक्टूबर 2025 को केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह द्वारा की गई थी, जिसके अंतर्गत 250 गांवों को बस सेवाओं से जोड़ा गया था। अब द्वितीय चरण की शुरुआत के साथ इस संख्या में और वृद्धि हुई है तथा 180 गांव और जुड़ गए हैं। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा, उप मुख्यमंत्री  अरुण साव सहित मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य, मुख्यमंत्री के सचिव  राहुल भगत, परिवहन विभाग के सचिव  एस. प्रकाश सहित वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक, महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां सिविल लाईन स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए –  1. मंत्रिपरिषद ने आत्मसमर्पित नक्सलियों के विरुद्ध पंजीबद्ध आपराधिक प्रकरणों के निराकरण/वापसी संबंधी प्रक्रिया को अनुमोदित किया है।           मंत्रिपरिषद ने आत्मसमर्पित नक्सलियों के विरुद्ध दर्ज प्रकरणों की समीक्षा एवं परीक्षण के लिए, जिन्हें न्यायालय से वापस लिया जाना है, मंत्रिपरिषद उप समिति के गठन को स्वीकृति दी है। यह समिति परीक्षण उपरांत प्रकरणों को मंत्रिपरिषद के समक्ष प्रस्तुत करेगी। यह निर्णय छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जारी छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत पुनर्वास नीति-2025 के प्रावधानों के अनुरूप है, जिसके अंतर्गत आत्मसमर्पित नक्सलियों के अच्छे आचरण तथा नक्सलवाद उन्मूलन में दिए गए योगदान को ध्यान में रखकर उनके विरुद्ध दर्ज प्रकरणों के निराकरण पर विचार का प्रावधान है।         आत्मसमर्पित नक्सलियों के प्रकरण वापसी की प्रक्रिया के लिए जिला स्तरीय समिति के गठन का प्रावधान किया गया है। यह समिति आत्मसमर्पित नक्सली के अपराधिक प्रकरणों की वापसी के लिए रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को प्रस्तुत करेगी। पुलिस मुख्यालय अभिमत सहित प्रस्ताव भेजेगा। शासन द्वारा विधि विभाग का अभिमत प्राप्त कर मामलों को मंत्रिपरिषद उप समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। उपसमिति द्वारा अनुशंसित प्रकरणों को अंतिम अनुमोदन हेतु मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा जाएगा। केंद्रीय अधिनियम अथवा केंद्र सरकार से संबंधित प्रकरणों के लिए भारत सरकार से आवश्यक अनुज्ञा प्राप्त की जाएगी। अन्य प्रकरणों को न्यायालय में लोक अभियोजन अधिकारी के माध्यम से वापसी की प्रक्रिया हेतु जिला दण्डाधिकारी को प्रेषित किया जाएगा। 2. मंत्रिपरिषद द्वारा राज्य के विभिन्न कानूनों को समयानुकूल और नागरिकों के अनुकूल बनाने के उद्देश्य से 14 अधिनियमों में संशोधन हेतु छत्तीसगढ़ जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) (द्वितीय) विधेयक, 2025 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।         उल्लेखनीय है कि कई अधिनियमों में उल्लंघन पर जुर्माना या कारावास के प्रावधान होने से न्यायिक प्रक्रिया लंबी हो जाती है, जिससे आम नागरिक और व्यवसाय दोनों अनावश्यक रूप से प्रभावित होते हैं। ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस और ईज ऑफ लिविंग को बढ़ावा देने के लिए इन प्रावधानों का सरलीकरण आवश्यक है। इससे पहले, राज्य सरकार द्वारा 8 अधिनियमों के 163 प्रावधानों में संशोधन करते हुए छत्तीसगढ़ जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) अधिनियम, 2025 अधिसूचित किया गया है। अब 11 विभागों के 14 अधिनियमों के 116 प्रावधानों को भी सरल और अधिक प्रभावी बनाने के लिए यह विधेयक लाया जाएगा।          इस विधेयक में छोटे उल्लंघनों के लिए प्रशासकीय शास्ति का प्रावधान रखा गया है, जिससे मामलों का त्वरित निपटारा होगा, न्यायालयों का बोझ कम होगा और नागरिकों को तेजी से राहत मिल सकेगी। साथ ही, कई अधिनियमों में दंड राशि लंबे समय से अपरिवर्तित होने के कारण प्रभावी कार्यवाही बाधित होती थी, इस विधेयक से वह कमी भी दूर होगी। इन संशोधनों से सुशासन को बढ़ावा मिलेगा।          उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जहां जन विश्वास विधेयक का द्वितीय संस्करण लाया जा रहा है।  3. मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रथम अनुपूरक अनुमान वर्ष 2025-2026 का विधानसभा में उपस्थापन बावत् छत्तीसगढ़ विनियोग विधेयक, 2025 का अनुमोदन किया गया। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की लोक निर्माण विभाग की समीक्षा

हर सड़क, हर पुल, हर परियोजना—जनता के जीवन को सरल और सुरक्षित बनाने की हमारी संकल्पना : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की लोक निर्माण विभाग की समीक्षा दो वर्षों में विभाग ने गति, गुणवत्ता, पारदर्शिता और तकनीकी नवाचार के नए आयाम स्थापित किए विभागीय न्यूज़ लेटर और पर्यावरण से समन्वय ब्रोशर का विमोचन किया एमपीआरडीसी और एमपीबीडीसी के संचालक मंडल की बैठक संपन्न भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा है कि सड़कें केवल यातायात का माध्यम नहीं, बल्कि विकास, रोज़गार, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और सामाजिक-सांस्कृतिक प्रगति का आधार हैं। विभाग का उद्देश्य प्रत्येक निर्माण कार्य को सिर्फ एक तकनीकी परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि जनता के जीवन स्तर को सुधारने वाले साधन के रूप में देखना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गुणवत्ता, पारदर्शिता और नवाचार के साथ प्रत्येक परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, यही प्रयास "लोक निर्माण से लोक कल्याण" की भावना को साकार करते हैं। यह निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान दिये। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने विभाग द्वारा "लोक निर्माण से लोक कल्याण" की भावना को धरातल पर उतारने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश की आधारभूत संरचना का विकास ही जनकल्याण का आधार है और विभाग ने इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि हर सड़क, हर पुल, हर परियोजना जनता के जीवन को सरल और सुरक्षित बनाने की हमारी संकल्पना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि मेट्रोपॉलिटन एरिया और समीपवर्ती क्षेत्रों में राजमार्गों का घनत्व बढ़ायें। पूरे प्रदेश को समावेशित कर समग्र विकास पर कार्य करें। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही जबलपुर और ग्वालियर को भी मेट्रोपोलिटन क्षेत्र घोषित किया जाएगा। शहरी, ग्रामीण एवं औद्योगिक क्षेत्रों सभी को अधोसंरचना विकास का लाभ प्राप्त हो इस आधार पर प्रस्ताव की परिकल्पना की जाये। उन्होंने कहा कि राजमार्गों का घनत्व राष्ट्रीय स्तर के समीप ले जाने के लिए विज़न डॉक्यूमेंट के आधार पर प्रस्ताव तैयार करें। प्रस्ताव में स्थानीय मांगों और सुझावों को यथोचित स्थान दिया जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अपर मुख्य सचिव क्षेत्रों के समग्र विकास अनुसार कार्ययोजना का निर्धारण करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि शहरी विकास की इंटीग्रेटेड पॉलिसी के निर्माण में लोक निर्माण विभाग को भी शामिल किया जाये। उन्होंने कहा कि अधोसंरचना विकास में पर्यावरण समन्वय का विशेष ध्यान रखा जाये। सतत संवहनीय विकास के लिए सूरत के डायमंड पार्क की तर्ज में भवनों का निर्माण ग्रीन बिल्डिंग संकल्पना पर किया जाये। बिजली और पानी की बचत सुनिश्चित की जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भवन निर्माण में वास्तु-विज्ञान का ध्यान रखा जाये। ताकि सूर्य की रोशनी, हवा अन्य प्राकृतिक संसाधनों का उचित उपयोग सुनिश्चित हो और ऊर्जा की बचत की जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एक्सप्रेस-वे आधुनिक समय की मांग है। इन अधोसंरचनाओं के विकास में ग्रामीण क्षेत्र की सुविधाओं का ध्यान रखा जाये। आवश्यकतानुसार फ्लाई-ओवर, अंडर-पास, सर्विस लेन को प्रस्ताव में शामिल करें। बैठक में बताया गया कि सिंहस्थ-2028 के कार्य प्राथमिकता से किए जा रहे हैं। प्रस्तावित कार्यों की प्रशासनिक स्वीकृति जारी की जा चुकी है। दिसम्बर माह के अंत तक कार्य प्रारंभ हो जायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि कार्यों को जून-2027 तक पूर्ण किया जाये। बैठक में बताया गया कि लोकपथ ऐप में प्राप्त 12 हज़ार 212 शिकायतों में से 12 हज़ार 166 का निराकरण किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोकपथ ऐप के उत्कृष्ट उपयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि लोकपथ ऐप में रियल टाइम सड़क की स्थिति को भी अपडेट किया जाये। साथ ही इसका प्रचार प्रसार सुनिश्चित किया जाये ताकि अधिक से अधिक लोग इससे लाभान्वित हो सकें। लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने बताया कि लोकपथ ऐप में आगे स्थलों के बीच की दूरी, समस्त वैकल्पिक मार्ग, पर्यटन स्थल, चिकित्सा सेवाएं, ब्लैक स्पॉट, टोल का शुल्क अन्य सुविधाओं को भी मैप किया जाएगा। यह स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ आगंतुकों के लिए भी उपयोगी होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि राष्ट्रीय एवं राज्य के राजमार्गों में सतत संधारण सुनिश्चित किए जाये। प्रकाश, ग्रीनरी और सावधानी मार्कर्स मानक अनुसार रहें यह भी सुनिश्चित किया जाये। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) और मध्यप्रदेश भवन विकास निगम (बीडीसी) के संचालक मंडल की बैठक हुई। एमडी एमपीआरडीसी  भरत यादव ने एमपीआरडीसी के चल रहे कार्यों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी प्रस्तुत की। इसी प्रकार एमडी बीडीसी  सिवी चक्रवर्ती ने भवन विकास निगम के कार्यों और आगामी कार्ययोजना का विवरण दिया। बैठक में प्रमुख सचिव पीडब्ल्यूडी  सुखवीर सिंह ने कहा कि विभाग द्वारा किए जा रहे नवाचारों, पीएम गतिशक्ति पोर्टल के उपयोग से रोड प्लानिंग, BISAG-N के माध्यम से समय सीमा का निर्धारण और प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग के कार्य किए जा रहे हैं। इसके साथ पर्यावरण से समन्वय, वृक्षारोपण, ट्री-शिफ्टिंग, लोक सरोवर, सौर ऊर्जा के कार्य भी विकास कार्यों में शामिल किए गए हैं। उन्होंने बताया कि पीएम गतिशक्ति के उत्कृष्ट उपयोग पर विभाग को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह, मुख्य सचिव  अनुराग जैन, एसीएस  नीरज मंडलोई, एसीएस  मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव लोकनिर्माण  सुखवीर सिंह, एमडी एमपीआरडीसी  भरत यादव, एमडी बीडीसी  एमसीबी चक्रवर्ती सहित विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। दो वर्ष की उपलब्धियाँ              दो वर्षों में मध्यप्रदेश ने 12 हजार किमी सड़क निर्माण, उन्नयन और सुदृढ़ीकरण कर अभूतपूर्व रिकॉर्ड स्थापित किया है, जिससे राज्य का 77 हजार 268 किमी का सड़क नेटवर्क देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ है।              वित्तीय वर्ष 2024–25 में विभाग ने 99% तक वित्तीय लक्ष्य हासिल कर समयबद्ध क्रियान्वयन और संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।              "लोक पथ" मोबाइल ऐप के माध्यम से 12,212 शिकायतों में से 12,166 शिकायतों का निवारण कर 99.6% समाधान दर प्राप्त की, जिससे विभाग की पारदर्शिता और जनसहभागिता मजबूत हुई।              जबलपुर में प्रदेश के सबसे लंबे 6.9 किमी के दमोह नाका–मदनमहल–मेडिकल रोड एलिवेटेड … Read more

प्रदेश के 799 पीएमश्री स्कूलों में 4.80 लाख छात्रों को मिली अध्ययन की सुविधा

प्रदेश के 799 पीएमश्री स्कूलों में 4.80 लाख विद्यार्थियों को मिली अध्ययन की सुविधा पीएमश्री स्कूल अपने क्षेत्र के स्कूलों का कर रहे हैं नेतृत्व भोपाल  प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति वर्ष-2020 के अनुरूप 799 स्कूलों को पीएमश्री विद्यालय के रूप में संचालित किया जा रहा है। इन पीएमश्री विद्यालयों में 4 लाख 80 हजार विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा पीएमश्री स्कूलों में स्मार्ट कक्षाएँ, लायब्रेरी, खेल उपकरण और कला कक्ष जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित कराकर इनको आधुनिक रूप दिया गया है। ये पीएमश्री स्कूल अपने क्षेत्र के अन्य स्कूलों की शिक्षा गुणवत्ता सुधार के लिये नेतृत्व कर रहे हैं। व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास पीएमश्री स्कूलों में अध्ययन करने वाले छात्रों को व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास में दक्ष किया जा रहा है। उन्हें कॅरियर काउंसिलिंग से भविष्य में रोजगार के अवसरों की जानकारी दी जा रही है। शैक्षणिक सत्र 2024-25 में पीएमश्री योजना में 124 स्कूलों में कॅरियर काउंसलर और 137 स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य काउंसलर नियुक्त किये गये हैं। कक्षा 9 से 12 तक के करीब 2 लाख 41 हजार बच्चों को कॅरियर विकल्प का मार्गदर्शन दिया गया है। पीएमश्री स्कूलों में सोलर पैनल, एलईडी लाइट, प्राकृतिक खेती, पोषण उद्यान, अपशिष्ट प्रबंधन, प्लास्टिक मुक्त परिसर, जल और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित परम्पराओं की जानकारी देते हुए हरित स्कूल के रूप में विकसित किया जा रहा है। पीएमश्री स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को आईआईएम इंदौर, रायपुर और टीआईएसएस मुम्बई में शिक्षण कला की विधाओं का प्रशिक्षण भी दिलाया गया है। कक्षा 5 तक के विद्यार्थियों के लिये टीचिंग, लर्निंग मटेरियल (टीएलएम) तैयार करने के लिये 544 पीएमश्री स्कूलों का चयन किया गया है। समस्त पीएमश्री स्कूलों में मैथ्स और साइंस सर्किल गतिविधियाँ नियमित रूप से संचालित की जा रही हैं, जिससे विद्यार्थियों में 21वीं सदी के कौशल, रचनात्मक सोच और टीम वर्क को प्रोत्साहित किया जा सके। कक्षा 6 से 12 तक के करीब एक लाख 27 हजार 300 से अधिक छात्रों के लिये एक्सपोजर विजिट आयोजित की गई। इन एक्सपोजर विजिट से बच्चों को शिक्षण से जुड़ी उन्नत तकनीकों की जानकारी दी गयी है।