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IndiGo में बढ़ी सख्ती, पायलट से लेकर विमान तक, अब रोज़ जांचेंगी 8 सदस्यीय टीम

 नई दिल्ली इंडिगो संकट अभी भी जस का तस बना हुआ है. इस संकट पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार को फटकार लगाई है. ऐसे में अब इंडिगो पर सख्ती बढ़ती जा रही है. डीजीसीए ने इंडिगो के कॉर्पोरेट दफ्तर में अपने अधिकारियों को तैनात कर दिया है.  ऐसे में खबर है कि डीजीसीए की ओर से बनी आठ सदस्यों की ओवरसाइट टीम इंडिगो के कामकाज पर नजर रखेगी. इस ओवरसाइट टीम में से दो सदस्य इंडिगो के कॉर्पोरेट दफ्तर में रोजाना तैनात होंगे. डीजीसीए के अधिकारी अब निजी तौर पर इंडिगो के कामकाज को मॉनिटर करेंगे. डीजीसीए के अधिकारी इंडिगो के कॉर्पोरेट ऑफिस में मौजूद रहकर हर चीज की सीधी निगरानी करेंगे, जिसमें विमानों की संख्या और स्थिति से लेकर पायलटों की संख्या और उनकी उपलब्धता, क्रू के कामकाजी घंटे और स्टैंडबाय क्रू की पूरी डिटेल शामिल है. इसके अलावा, इंडिगो के गुरुग्राम स्थित कॉर्पोरेट ऑफिस में पहले से बनी डीजीसीए की निगरानी टीम के साथ-साथ दो और डीजीसीए अधिकारियों को भी तैनात कर दिया गया है. इन तैनात किए गए डीजीसीए अधिकारियो के नाम ऐश्वीर सिंह- डिप्टी डायरेक्टर और मणि भूषण- सीनियर स्टैटिस्टिकल ऑफिसर है. ये अधिकारी कई चीजों की रोजाना निगरानी करेंगे.  – उड़ानों का कैंसिलेशन स्टेटस (घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय)   – रिफंड की स्थिति: एयरलाइन, ओटीए प्लेटफॉर्म और ट्रैवल एजेंट्स के जरिए   – ऑन-टाइम परफॉर्मेंस (समय पर उड़ान भरने का रिकॉर्ड)   – यात्रियों को मुआवजा (CAR नियमों के अनुसार)   – सामान लौटाने की स्थिति बता दें कि दोनों टीमें रोजाना शाम छह बजे तक अपनी रिपोर्ट अनिवार्य रूप से डीजीसीए के समक्ष पेश करेंगी.  वहीं, आठ सदस्यीय ओवरसाइट टीम में कौन-कौन हैं?     कैप्टन कपिल मंगलिक – सीनियर फ्लाइट ऑपरेशंस इंस्पेक्टर (ए)     कैप्टन वी.पी. सिंह – सीनियर फ्लाइट ऑपरेशंस इंस्पेक्टर (ए)     कैप्टन अपूर्वा अग्रवाल – सीनियर फ्लाइट ऑपरेशंस इंस्पेक्टर (ए)     कैप्टन स्वाति लूम्बा – सीनियर फ्लाइट ऑपरेशंस इंस्पेक्टर (ए)     कैप्टन अमन सुहाग – सीनियर फ्लाइट ऑपरेशंस इंस्पेक्टर (ए)     कैप्टन नित्या जैन – फ्लाइट ऑपरेशंस इंस्पेक्टर (ए)     कैप्टन एन.जे. सिंह – फ्लाइट ऑपरेशंस इंस्पेक्टर (ए) इनमें से दो सदस्यों को गुड़गांव स्थित इंडिगो के कॉरपोरेट ऑफिस में रोजाना तैनात किया जाएगा. ये अधिकारी निम्न क्षेत्रों की गहन जांच और निगरानी करेंगे. – कुल फ्लीट (कंपनी के पास कुल कितने विमान हैं)   – औसत स्टेज लेंथ (प्रति उड़ान औसत दूरी)   – कुल पायलटों की संख्या   – नेटवर्क डिटेल्स (किन-किन रूट्स पर उड़ानें हैं)   – क्रू के कामकाजी घंटे    – मासिक/दैनिक डेड हेडिंग (बिना यात्रियों के क्रू को दूसरे शहर भेजना)   – ट्रेनिंग में लगे क्रू की संख्या   – स्प्लिट ड्यूटी (एक दिन में दो हिस्सों में ड्यूटी)   – प्रतिदिन सभी अनप्लांड लीव्स (बीमारी, आकस्मिक अवकाश, इमरजेंसी लीव आदि)   – प्रतिदिन कुल उड़ानें और उपलब्ध क्रू की संख्या – क्रू की कमी के कारण प्रभावित हुए सेक्टर्स की कुल संख्या   – प्रतिदिन और प्रति बेस (कॉकपिट एवं केबिन) स्टैंडबाय क्रू की संख्या ये सभी डेटा रोजाना चेक किया जाएगा और रिपोर्ट शाम 6 बजे तक जमा की जाएगी. बता दें कि इससे पहले इंडिगो संकट पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार को फटकार लगाई थी. अदालत ने केंद्र से पूछा कि जब एयरलाइन फेल हो गई थी, तब सरकार ने क्या किया.

थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा पर भारी लड़ाई, 6 लाख शरणार्थी, ड्रोन, रॉकेट और टैंक से हमला

ओड्डार मान्छे  थाईलैंड और कंबोडिया की ताजा लड़ाई तीसरे दिन में पहुंच चुकी है. दो ताकतवर एशियाई देशों की ये लड़ाई नाजुक मोड़ में पहुंच गई है. यहां रॉकेट, ड्रोन, F-16 जेट्स, आर्टिलरी, एंटी एयर मिसाइल का इस्तेमाल किया जा रहा है. जंग की वजह से मात्र तीन दिन में ही दोनों देशों में 6 लाख से ज्यादा लोगो को अपना घर छोड़ना पड़ा है. जंग में अबतक 13 सैनिकों की मौत हो चुकी है.  दक्षिण-पूर्व एशिया के दोनों पड़ोसी देशों के अधिकारियों ने बुधवार को एक-दूसरे पर उकसावे की कार्रवाई का आरोप लगाया है. थाईलैंड के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता सुरसंत कोंगसिरी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों को बताया कि सात प्रांतों में 400,000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है. उन्होंने कहा, "हमने सुरक्षा के लिए एक बड़े खतरे का अंदाजा लगाया था, जिसकी वजह से आम लोगों को बड़ी संख्या में सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ा." थाई सेना ने यह भी बताया कि बुधवार सुबह कंबोडिया से दागे गए रॉकेट सुरिन में फानोम डोंग राक अस्पताल के पास गिरे, जिसके बाद मरीजों और अस्पताल के कर्मचारियों को बंकर में छिपना पड़ा.  थाईलैंड के अखबार द नेशन की रिपोर्ट के मुताबिक कंबोडिया ने चोंग बोक-चोंग आन मा पर 80 से ज़्यादा ड्रोन हमले किए. BM-21 रॉकेट और टैंक से फायरिंग की. यहां 171,000 लोगों ने चार सीमावर्ती प्रांतों में शरण ली है.  थाई सेना ने थाई-कंबोडियाई सीमा पर भारी लड़ाई वाली रात का ब्यौरा दिया है, जिसमें बताया गया है कि कंबोडियाई सेना ने चोंग बोक और चोंग आन मा में थाई ठिकानों पर 80 से ज़्यादा ड्रोन हमले, BM-21 रॉकेट और टैंक से फायरिंग की.  10 दिसंबर, 2025 को सुबह 9 बजे के अपडेट में थाईलैंड की सेना ने कहा है कि कंबोडिया ने  हिल 677 की ओर 80 से ज़्यादा ड्रोन भेजे. फू मकुआ इलाके पर कब्ज़ा करने की कोशिश में BM-21 मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर से फायरिंग की. इसके अलावा थाई सेना का दावा है कि कंबोडिया ने  प्रीह विहार पर अपनी पोजीशन से टैंक और सीधे फायरिंग वाले हथियारों का इस्तेमाल करके कंथारालक जिले पर भी हमला किया.  थाई सेना ने चोंग चोम के दक्षिण में एक एंटी-ड्रोन साइट को नष्ट कर दिया.  वहीं पड़ोसी देश कंबोडिया के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय की प्रवक्ता मैली सोचियाटा ने कहा, "पांच प्रांतों में 101,229 लोगों को सुरक्षित ठिकानों और रिश्तेदारों के घरों में पहुंचाया गया है." कंबोडियन मीडिया ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन द्वारा चलाई जाने वाली वेबसाइट कंबोडियननेस ने बताया कि थाई F-16 जेट्स ने देश के दो इलाकों पर हमला किया, जबकि तीन अन्य इलाकों में थाई गोलाबारी जारी रही.  दक्षिण-पूर्वी एशिया के ये पड़ोसी देश अपनी 800 किलोमीटर लंबी सीमा पर कई जगहों पर भिड़ते रहते हैं. इसमें कई एतिहासिक मंदिर शामिल हैं.  इससे पहले जुलाई में दोनों देशों के बीच पांच दिनों तक चली लड़ाई चली थी. जिसमें दर्जनों लोग मारे गए थे और सीमा के दोनों ओर लगभग 300,000 लोग विस्थापित हो गए थे. इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और मलेशिया के सहयोग से दोनों के बीच सीजफायर पर सहमति बनी थी. अब ट्रंप ने एक बार फिर से दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की बात कही है. 

VHP की बड़ी मांग: जनगणना में सभी लोग खुद को हिंदू के रूप में रजिस्टर कराएं

बेंगलुरु  VHP यानी विश्व हिंदू परिषद ने आगामी जनगणना में सभी से खुद को हिंदू के तौर पर दर्ज कराने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इसके जरिए हिंदू समाज में बंटवारे की कोशिश को रोकना है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को बांटने की प्रयासों को रोकना है और एकजुट रहना है। इस दौरान उन्होंने कहा कि देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की पहचान के लिए मापदंड होना चाहिए।  अध्यक्ष अरुण कुमार ने जनगणना में सभी को हिंदू के तौर पर दर्ज कराने की यह वजह बताई है। उन्होंने कहा, 'कर्नाटक में लिंगायतों के कुछ वर्ग, आदिवासी इलाकों में सारणा और जाटवों के कुछ वर्ग और सामान्य में कुछ एससी एसटी में खुद को हिंदू पक्ष बताने के लिए अभियान चला रहे हैं। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हिंदू समाज को बांटने वाले ऐसे प्रयास असफल हों और हम एकजुट रहें।' दिल्ली में आयोजित बैठक में उन्होंने कहा कि धार्मिक अल्पसंख्यकों को तय करने के लिए जो नियम हैं, उनपर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'अल्पसंख्यकों को सिर्फ आबादी के आधार पर तय नहीं किया जा सकता। इसमें यह भी देखा जाना चाहिए कि किसी विशेष धर्म का पालन करने वालों ने पिछड़ेपन या दबाव का सामना किया है, जिसके चलते उन्हें विशेष अधिकार दिए जाएं।' कुमार ने फ्रीडम ऑफ रिलीजन एक्ट लागू किए जाने की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि हिंदू मंदिरों को सरकार के नियंत्रण से आजाद किया जाए और हिंदू समुदाय को तत्काल सौंप दिया जाए। उन्होंने ड्रग्स के खिलाफ भी अभियान तेज करने की अपील की है। जनगणना की क्या तैयारी भारत के रजिस्ट्रार जनरल (RGI) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आगामी जनगणना के लिए जनगणना अधिकारियों की नियुक्ति 15 जनवरी 2026 तक पूरी करने का निर्देश दिया है। परिपत्र के अनुसार, इस डेटा संग्रह कवायद के लिए प्रगणक और पर्यवेक्षक मुख्य जनगणना अधिकारी होंगे। इसमें कहा गया है कि लगभग 700-800 की आबादी के लिए एक प्रगणक को नियुक्त किया जाएगा और प्रत्येक छह प्रगणकों पर एक पर्यवेक्षक होगा। आपात स्थितियों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षित प्रगणक और पर्यवेक्षक भी रखे जाएंगे। आगामी जनगणना 2027 में देश भर में जनगणना के कार्य को समय पर पूरा करने के लिए लगभग 30 लाख फील्ड अधिकारी तैनात किए जाएंगे। आरजीआई ने इन सभी गतिविधियों की निगरानी और प्रबंधन के लिए 'जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली (CMS) नामक एक वेब पोर्टल भी विकसित किया है। दो चरणों में होगी जनगणना जनगणना 2027 दो चरणों में होगी। इसमें पहला चरण, मकान सूचीकरण और आवास गणना अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच होगा और दूसरा चरण जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में होगा। यह कवायद डिजिटल होगी और इसमें 30 अप्रैल को राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति के निर्णय के अनुसार, जाति गणना को भी शामिल किया जाएगा।

अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है दीपावली का त्योहार : मुख्यमंत्री

दीपावली का यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल होना गर्व की बात : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है दीपावली का त्योहार : मुख्यमंत्री दीपावली की वैश्विक मान्यता अयोध्या की सांस्कृतिक शक्ति का प्रमाणः सीएम योगी यूनेस्को सूची में शामिल होने से उत्तर प्रदेश की परंपरा को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचानः सीएम लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपावली को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में सम्मिलित किए जाने को गर्व का पल बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय उस उत्सव की वैश्विक पहचान है, जो अंधकार पर प्रकाश की विजय और नए आरंभ के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। यह उपलब्धि भारत की सांस्कृतिक शक्ति व परंपरा की महत्ता को विश्वपटल पर और अधिक मजबूती प्रदान करती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सोशल मीडिया हैंडल 'एक्स' के माध्यम से विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के दृष्टिकोण से इस उपलब्धि के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उत्तर प्रदेश के लिए इसलिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि अयोध्या प्रभु श्रीराम की पावन भूमि है। यहीं पर दीपावली की पहली ऐतिहासिक उत्सव परंपरा की शुरुआत हुई थी। उन्होंने कहाकि अयोध्या केवल सांस्कृतिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि भारतीय परंपराओं की आत्मा है। ऐसे में इस पर्व की वैश्विक मान्यता अयोध्या के आध्यात्मिक महत्व को और भी प्रखर बनाती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान भारत की बढ़ती सांस्कृतिक प्रतिष्ठा का प्रतिबिंब है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने विश्व स्तर पर अपनी सांस्कृतिक उपस्थिति को व्यापक रूप से स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि भारत की परंपराओं और उत्सवों को विश्व समुदाय द्वारा अपनाया जाना सकारात्मक संकेत है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आशा व्यक्त की कि अयोध्या का शाश्वत प्रकाश मानवता को सत्य और सद्भाव के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा। उनके अनुसार यह पर्व केवल उत्सव नहीं बल्कि जीवन दर्शन है, जो समाज को एकता और संस्कारों की दिशा में अग्रसर करता है।

मुजफ्फरनगर के यहियापुर गांव में बुधवार को लगी ‘कृषि चौपाल’

उत्तर प्रदेश की शान बने ‘खुशहाल किसान’ मुजफ्फरनगर के यहियापुर गांव में बुधवार को लगी ‘कृषि चौपाल’ चौपाल में शामिल हुए 500 से अधिक किसान, कहा- हमें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार ने उठाया अभूतपूर्व कदम  सभी जनपदों को समान रूप से बिजली-पानी उपलब्ध करा रही योगी सरकार  अन्नदाताओं ने योजनाओं के क्रियान्वयन, एमएसपी, समय से भुगतान और गन्ना मूल्य में वृद्धि के लिए योगी सरकार के प्रति जताया आभार   मुजफ्फरनगर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में अन्नदाता किसानों के जीवन में खुशहाली लाई। किसान अब आत्महत्या नहीं करते, बल्कि खुशहाली का जीवन व्यतीत कर परिवार की तरक्की और उत्तर प्रदेश की समृद्धि में योगदान दे रहे हैं। किसानों को फसल का उचित दाम मिल रहा, उन्हें किसान सम्मान निधि, पीएम कुसुम योजना, एमएसपी के साथ ही समान रूप से हर जनपद को बिजली, सड़क, पानी की सुविधाएं मिल रही हैं। इससे खेती करने और फसल को बाजार तक पहुंचाने में आसानी हो रही है। यहियापुर गांव में बुधवार को लगी कृषि चौपाल में उपस्थित 500 से अधिक किसानों ने यह विचार रखे। सभी ने साढ़े आठ वर्ष में सरकार के सकारात्मक कदम के कारण किसानों के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव का भी जिक्र किया।  विकसित कृषि संकल्प अभियान बना कारगर, सरकार ने सीधे किसानों से किया संवाद  विकसित कृषि संकल्प अभियान के जरिए मुख्यमंत्री, केंद्र-राज्य सरकार के मंत्रियों समेत जनप्रतिनिधियों ने किसानों से संवाद किया। 15 दिन में प्रदेश के 14,170 गांवों में हुए कार्यक्रमों में 23 लाख से अधिक किसानों ने प्रतिभाग किया। किसान बिराम सिंह ने कहा कि मेरे सहित कई किसान इस अभियान में शामिल हुए। यहां हमने स्वायल कॉर्ड, भूमि सुधार, सिंचन क्षमता आदि से लेकर खेतीबाड़ी में सुधार को लेकर नई-नई जानकारी ली। इसके बाद विशेषज्ञों/अधिकारियों से संपर्क कर अपनी खेती में और सुधार किया।  तिलहन-दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए निःशुल्क मिनीकिट का वितरण  किसान अमरीश वालिया ने कहा कि सरकार कृषि विभाग के माध्यम से तिलहन-दहलन के क्षेत्र में किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निःशुल्क मिनीकिट भी वितरित कर रही है। गेहूं, जौ, चना, मटर, मसूर, तोरिया, राई-सरसो, अलसी फसलों के लिए अनुदान पर बीज भी उपलब्ध कराए जाते हैं। इससे एक तरफ हमें आसानी से बीज भी मिलते हैं तो दूसरी तरफ खेती में इसका प्रयोग कर उत्पादकता बढ़ाने और विषमुक्त खेती की तरफ भी किसान कदम बढ़ाते हैं।  खेती में सहायक हो रहे अनुदान पर मिल रहे कृषि यंत्र किसान गंगाशरण कहते हैं कि खेती में सहायता के लिए किसानों को कृषि यंत्र की आवश्यकता पड़ती है। कृषि विभाग अनुदान पर किसानों को विभिन्न कृषि यंत्र उपलब्ध भी कराता है। कृषि यंत्र खेती में सहायक हो रहे हैं। योगी सरकार की मंशा से 5000 से अधिक कृषि यंत्र बैंक भी स्थापित किए गए हैं, जिससे मेरे जैसे हजारों-लाखों किसान लाभान्वित हो रहे हैं। जनपदों में निष्पक्ष प्रक्रिया के जरिए ई-लॉटरी निकलती है और किसानों को अनुदान पर कृषि यंत्र मिलता है।  किसान पाठशाला के जरिए नवीन जानकारियों से किया जा रहा अपडेट  किसान वेदपाल ने किसान पाठशाला की सकारात्मकता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इसके जरिए खेती से अलग किसानों में तकनीकी क्षमता भी विकसित की जा रही है। किसान फसलों के उत्पादन व उत्पादकता में वृद्धि के लिए नवीनतम तकनीकों को जान रहे हैं। हम कृषि विशेषज्ञों से संवाद कर कई समाधान भी पा जाते हैं। उन्नत कृषि से संबंधित व्यावहारिक व व्यापारिक समझ का विकास कर रहे हैं। कृषि विभाग की संचालित योजनाओं के बारे में भी जानकारी मिलती है।     गन्ना मूल्य में 30 रुपये प्रति कुंतल की बढ़ोतरी किसानों के लिए वरदान  किसान कंवर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपावली से पहले 30 रुपये प्रति कुंतल की वृद्धि कर गन्ना किसानों को बड़ा तोहफा दिया था। योगी सरकार ने पेराई सत्र 2025-26 में गन्ने की अगेती प्रजाति का मूल्य 370 से बढ़ाकर 400 रुपये और सामान्य प्रजाति का 360 रुपये से 390 रुपये प्रति क्विंटल किया। इस वृद्धि से गन्ना किसानों को 3000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान भी हो रहा है। योगी सरकार के कार्यकाल में यह वृद्धि किसानों को मिला सम्मान है।  कृषि चौपाल में सुनील प्रधान, कंवरपाल सिंह, मो. फसी, निर्दोष त्यागी, मनोज चौधरी, नूर मोहम्मद, शिवेश कुमार, कंवर सिंह, सुभाष राठी, शेर सिंह, जगमेर सैनी, पद्म सिंह, देवेंद्र कुमार, हरपाल, जयप्रकाश, नरेश पाल आदि किसान मौजूद रहे।  बृहस्पतिवार को दाहोद गांव में लगेगी ‘कृषि चौपाल’  1 से 11 दिसंबर तक पश्चिम उत्तर प्रदेश के चार जनपदों में ‘कृषि चौपाल’ का आयोजन हो रहा है। बागपत, हापुड़ और शामली में ‘कृषि चौपाल’ हो चुकी है। बुधवार को मुजफ्फरनगर के यहियापुर गांव में किसानों ने संवाद किया। 11 दिसंबर (गुरुवार) को दाहोद गांव में ‘कृषि चौपाल’ लगाई जाएगी।

ICC रैंकिंग में ROKO का दबदबा, बुमराह-अभिषेक की शानदार जगह, नंबर 1 और 2 पर है कब्जा

 दुबई ICC (इंटरनेशनल क्रिकेट काउंस‍िल) की बुधवार (12 द‍िसंबर) को ताजा रैकिंग सामने आई. जिसमें 38 साल के रोहित शर्मा और 37 साल के विराट कोहली क्रमश: नंबर 1 और नंबर 2 बल्लेबाज बने हुए हैं. वहीं म‍िचेल स्टार्क टेस्ट क्रिकेट में नंबर 3 गेंदबाज बन गए हैं. एशेज के दो शुरुआती टेस्ट में उनका प्रदर्शन शानदार रहा है. नंबर 1 टेस्ट गेंदबाज जसप्रीत बुमराह हैं.  विराट कोहली अप्रैल 2021 से ODI बल्लेबाजों की नंबर 1 रैंकिंग पर नहीं हैं, तब उनको पाकिस्तान के बाबर आजम ने उन्हें पीछे छोड़ा था. लेकिन अब कोहली फिर से टॉप स्थान के बेहद करीब पहुंच गए हैं, क्योंकि साउथ अफ्रीका के खिलाफ हाल ही में हुई तीन मैचों की ODI सीरीज में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया.  37 साल के कोहली को तीनों मैचों में कुल 302 रन बनाने के लिए ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ चुना गया था. उनकी इस शानदार प्रदर्शन का असर ICC की ताजा रैंकिंग में भी दिखा, जहां वह दो पायदान ऊपर चढ़कर दूसरे नंबर पर पहुंच गए. उनके आगे सिर्फ रोहित शर्मा हैं.  रोहित ने इस सीरीज में 146 रन बनाए और नंबर 1 की अपनी पोजीशन बरकरार रखी. वहीं विशाखापट्टनम में खेले गए आखिरी मैच में कोहली की नाबाद 65 रनों की पारी की बदौलत वह अब रोहित से सिर्फ 8 रेटिंग पॉइंट पीछे रह गए हैं.  भारत अब अगला वनडे मुकाबला 11 जनवरी से न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन मैचों की घरेलू सीरीज में खेलेगा. इस दौरान सभी की नजरें रोहित शर्मा और विराट कोहली पर होंगी, क्योंकि दोनों के बीच ODI बल्लेबाजों की नंबर 1 रैंकिंग की दौड़ और तेज है.  कोहली ही नहीं, इस हफ्ते जारी नई रैंकिंग में कई और भारतीय खिलाड़ियों ने भी बड़ी छलांग लगाई है. विकेटकीपर-बल्लेबाज केएल राहुल दो पायदान ऊपर चढ़कर 12वें नंबर पर पहुंच गए हैं. वहीं गेंदबाज़ों की रैंकिंग में बाएं हाथ के स्पिनर कुलदीप यादव बड़ा फायदा पाते हुए तीन स्थान ऊपर चढ़कर तीसरे नंबर पर पहुंच गए हैं.  कटक टी20 के बाद बदली टी20 रैकिंग  कटक में भारत की 101 रन की धमाकेदार जीत के बाद T20I गेंदबाजों की नई रैंकिंग में तीन भारतीय खिलाड़ियों को फायदा मिला है. अक्षर पटेल दो स्थान चढ़कर 13वें नंबर पर, अर्शदीप सिंह तीन पायदान बढ़कर 20वें नंबर पर और जसप्रीत बुमराह छह स्थान ऊपर उठकर 25वें नंबर पर पहुंच गए हैं.  म‍िचेल स्टार्क बने नंबर 3 टेस्ट गेंदबाज  इधर टेस्ट गेंदबाजों की रैंकिंग में ऑस्ट्रेलिया के मिचेल स्टार्क की बड़ी छलांग कोई हैरानी की बात नहीं है. इंग्लैंड के खिलाफ पहले दो एशेज टेस्ट में लगातार ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ बनने के बाद स्टार्क तीन स्थान ऊपर चढ़कर तीसरे नंबर पर पहुंच गए हैं. इंग्लैंड के बल्लेबाज़ों के खराब प्रदर्शन का असर टेस्ट रैंकिंग पर भी पड़ा है. हैरी ब्रूक दो स्थान गिरकर चौथे नंबर पर आ गए हैं. वहीं केन विलियमसन और स्टीव स्मिथ, दोनों एक-एक स्थान ऊपर बढ़े हैं और अब टॉप पर मौजूद जो रूट के पीछे क्रमशः दूसरे और तीसरे नंबर पर हैं.  कौन से भारतीय ICC रैकिंग में नंबर 1 पर कायम?  टी20 बल्लेबाजी रैंकिंग में अभिषेक शर्मा (913)  टॉप पर हैं. टी20 की ही गेंदबाजी रैंकिंग की बात करें तो वरुण चक्रवर्ती (782) टॉप पर हैं. टेस्ट ऑलराउंडर की श्रेणी में रवींद्र जडेजा का जादू चल रहा है. वह 455 अंक के साथ शीर्ष पर हैं.

IndiGo की मुश्किलें बढ़ीं, 10% के एक्शन से मार्केट शेयर में गिरावट, दूसरी एयरलाइंस को मिलेगा लाभ

 नई दिल्ली इंडिगो संकट (IndiGo Crisis) जारी है और तमाम कोशिशों व दावों के बाद भी एयरलाइन का संचालन ठीक तरह से सुचारू नहीं हो सका है. बीते आठ दिनों से इस IndiGo Airline के यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इस बीच सरकार ने सख्ती दिखाते हुए इंडिगो की 10% फ्लाइट में कटौती का निर्देश जारी किया था, तो अब एक और बड़ा फैसला लिया गया है. सरकारी सूत्रों के हवाले से खबर आई है कि IndiGo की कम की गई इन उड़ानों को दूसरे एयर ऑपरेटर्स को रीडिस्ट्रिब्यूट किया जाएगा, जो संकट में फंस इंडिगो के लिए एक और बड़ा झटका होगा और सीधा असर इसके मार्केट शेयर पर देखने को मिलेगा.   सरकार की सख्ती से मिलेगा सबक सरकार द्वारा 10% कटौती वाले निर्देश के बाद अब सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इंडिगो की कम की गई उड़ानों को दूसरी एयरलाइंस को दिया जाएगा, यानी अन्य एयर ऑपरेटर्स को स्पेस मिलेगा. सरकार के इस रीडिस्ट्रिब्यूशन के फैसले से दरअसल, सभी एयरलाइन को एक कड़ा मैसेज जाएगा कि यात्रियों को हल्के में नहीं लिया जा सकता है और इंडिगो जैसी स्थिति में सीधे उस एयरलाइन के मार्केट शेयर पर भी असर पड़ सकता है.  उड़ानें री-डिस्ट्रिब्यूट क्यों? इंडिगो की काटी गई उड़ानों को री-डिस्ट्रिब्यूट करने से यह असर होगा, कि यात्कियों के पास हवाई यात्रा करने के अधिक ऑप्शन होंगे और IndiGo के कैंसिलेशन के सिलसिले पर भी ब्रेक लगेगा. तरीके की बात करें, तो इंडिगो का 10% ऑप्स शेयर एयर इंडिया, स्पाइसजेट, अकासा और दूसरे भरोसेमंद ऑपरेटर्स को उनकी कैपेसिटी, फ्लीट कैपेसिटी और मौजूदा रिसोर्स के आधार पर दिया जा सकता है. सरकार के इस फैसले से एयरलाइन को 4 बड़े झटके लगेंगे. पहला झटका- रोज 220 फ्लाइट्स कट  विमानन मंत्रालय ने मंगलवार की शाम हुई बैठक में इंडिगो एयरलाइन की 10% फ्लाइट्स में कटौती का निर्देश जारी किया था. इसमें IndiGo CEO पीटर एल्बर्स को तलब किया गया था. सरकार के इस फैसले से पड़ने वाले पहले बुरे असर की बात करें, तो मंत्रालय के इस फैसले का सीधा असर इंडिगो की रोजना उड़ने वाली करीब 2200 फ्लाइट्स पर पड़ेगा. यानी लगभग 220 फ्लाइट्स घट जाएंगी. दूसरा झटका- मार्केट शेयर पर होगा असर बीते आठ दिनों से जारी IndiGo संकट ने पहले ही एयरलाइन की साख को कमजोर करने का काम किया है, वहीं दूसरी ओर सरकार के सख्त फैसलों का सीधा असर उसके मार्केट शेयर पर भी देखने को मिल सकता है. दरअसल, इंडिगो एयरलाइन भारतीय एविएशन मार्केट में 65 फीसदी की हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा प्लेयर है, लेकिन MoCA के फ्लाइट कट और री-डिस्ट्रिब्यूशन के फैसले से इंडिगो ऑपरेशस का 55-57% मार्केट शेयर प्रभावित होगा या करें घट जाएगा.  तीसरा असर- एयरलाइन की इनकम पर असर  सबसे ज्यादा मार्केट हिस्सेदारी के साथ भारतीय एविएशन सेक्टर की सबसे बड़ी कंपनी इंडिगो एयरलाइन कमाई के मामले में भी हमेशा से आगे रही है, लेकिन हालिया संकट और फ्लाइट कटौती के सरकार के फैसले से सीधे इसकी कमाई पर असर देखने को मिलेगा. हर दिन 220 फ्लाइट्स कट और इन उड़ानों को दूसरे एयरलाइंस को दिया जाना IndiGo के लिए बड़ा झटका है.  चौथा असर- शेयर में आ सकती है और गिरावट इंडिगो में आठ दिन से जारी संकट का असर पहले से ही इसकी पेरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड के शेयर पर देखने को मिल रहा है और बीते 5 कारोबारी दिनों में ही ये 12 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है और इसका मार्केट कैप 1.89 लाख करोड़ रुपये तक आ गया. अब सरकार की सख्ती बढ़ने से इसमें और गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, जिससे IndiGo Share में पैसे लगाने वाले भी प्रभावित होंगे.

संजय पाठक पर राष्ट्रीय जनजाति आयोग करेगा जांच, कलेक्टर से आदिवासी जमीन खरीदी की रिपोर्ट की मांग

भोपाल  विधायक संजय पाठक से जुड़ा आदिवासी भूमि खरीद का विवाद गहराता जा रहा है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने उनके विरुद्ध दर्ज शिकायत को गंभीर मानते हुए मध्यप्रदेश के पांच जिलों कटनी, जबलपुर, उमरिया, डिंडौरी और सिवनी के कलेक्टरों को जांच के आदेश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि सभी कलेक्टर एक माह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करें, अन्यथा समन जारी कर व्यक्तिगत रूप से तलब किया जाएगा। आयोग ने यह भी चेताया है कि समय सीमा के भीतर जवाब नहीं मिलने की स्थिति में वह संविधान के अनुच्छेद 338(क) के तहत सिविल कोर्ट जैसी शक्तियों का उपयोग करेगा।  कर्मचारियों के नाम पर खरीदी गई जमीन होने का आरोप आयोग को मिली शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संजय पाठक ने अपने कुछ अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारियों के नाम पर आदिवासी क्षेत्रों में जमीन खरीदी है। आयोग ने 5 दिसंबर को सभी संबंधित जिलों के कलेक्टरों को पत्र भेजते हुए इस पूरे मामले की तथ्यात्मक जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे। शिकायतकर्ता दिव्यांशु मिश्रा का आरोप है कि डिंडौरी, कटनी, जबलपुर, उमरिया और सिवनी जिलों में बैगा जनजाति के लोगों के नाम पर बड़े पैमाने पर बेनामी भूमि खरीदी गई है, जिसकी अनुमानित कीमत अरबों रुपये बताई जा रही है। NCST ने लिया संज्ञान इस पर संज्ञान में लेते हुए आयोग ने इन जिलों के कलेक्टरों से कहा है कि सभी कलेक्टर पत्र मिलने के बाद एक माह के अंदर प्रकरण में तथ्य और टिप्पणियां राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को व्यक्तिगत रूप से या अन्य संचार माध्यमों से उपलब्ध कराएंगे। आयोग के निर्देश पर डिंडोरी कलेक्टर ने जांच कर जानकारी भेज दी है, लेकिन चार कलेक्टरों जबलपुर, सिवनी, कटनी और उमरिया के कलेक्टर ने जानकारी नहीं दी है। इस पर आयोग ने उन्हें अंतिम चेतावनी दी है। शिकायत के बाद आयोग की सख्ती कटनी निवासी दिव्यांशु मिश्रा अंशु द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में दावा किया गया कि विजय राघवगढ़ से विधायक संजय पाठक ने अनुसूचित जनजाति के अपने कर्मचारियों के नाम पर जमीन खरीदी। आयोग ने 5 दिसंबर को कटनी, जबलपुर, उमरिया, डिंडौरी और सिवनी के कलेक्टरों को पत्र भेजकर कहा कि वे बैगा जनजाति के साथ धोखाधड़ी कर की गई भूमि खरीद के पूरे मामले की जांच कर तथ्य आयोग को उपलब्ध कराएं। आयोग ने पत्र में उल्लेख किया कि अरबों रुपए की बेनामी खरीद इन जिलों में बताई जा रही है, इसलिए प्रत्येक कलेक्टर एक माह के भीतर पूरे प्रकरण पर अपनी टिप्पणियां और दस्तावेज व्यक्तिगत रूप से या आवश्यक संचार माध्यमों से आयोग को भेजें। कलेक्टरों को आयोग की चेतावनी आयोग के अनुसार पांच में से सिर्फ डिंडौरी कलेक्टर ने अपनी रिपोर्ट भेजी है, जबकि सिवनी, जबलपुर, कटनी और उमरिया कलेक्टरों ने अब तक कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। इस पर आयोग ने चारों को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि समय पर रिपोर्ट नहीं आई तो संविधान के अनुच्छेद 338 क के तहत उपलब्ध सिविल कोर्ट की शक्तियों का उपयोग कर उन्हें या उनके प्रतिनिधियों को आयोग के समक्ष बुलाया जाएगा। आयोग ने माना कि यह मामला जनजातीय अधिकारों और भूमि सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए इसे टालना स्वीकार्य नहीं होगा। 795 एकड़ जमीन पर खनन की तैयारी का दावा शिकायत में यह भी कहा गया है कि कटनी जिले के चार आदिवासी कर्मचारियों के नाम पर डिंडौरी जिले में करीब 795 एकड़ जमीन खरीदी गई है। यह जमीन बजाग तहसील के पिपरिया माल, बघरेली सानी, सरई टोला और हर्रा टोला क्षेत्रों में स्थित है। जमीन खरीद वर्ष 2025 के बाद से होना बताया गया है। शिकायत के अनुसार यह भूमि रघुराज सिंह गौड़, नत्थू कोल, राकेश सिंह गौड़ और प्रहलाद कोल के नाम दर्ज है तथा यहां बाक्साइट खनन की तैयारी की जा रही है। उन्होंने सभी संबंधित खातों की वित्तीय जांच की भी मांग की है। कलेक्टरों को आयोग ने अंतिम चेतावनी जारी की  शिकायतकर्ता ने बताया कि 15 सितंबर को आयोग को शिकायत सौंपी गई थी। इसके बाद आयोग के निर्देश पर केवल डिंडौरी कलेक्टर ने जांच कर रिपोर्ट भेजी है। जबकि कटनी, जबलपुर, उमरिया और सिवनी के कलेक्टरों से अब तक जानकारी नहीं मिली है। इस पर आयोग ने चारों जिलों को अंतिम चेतावनी जारी कर दी है। विधायक अलावा ने सीएम सचिवालय को दी शिकायत  इस प्रकरण में कांग्रेस विधायक हीरालाल अलावा ने भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लिखित शिकायत दी है। उनके पत्र के बाद मुख्यमंत्री सचिवालय ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। इसके क्रम में जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त ने डिंडौरी कलेक्टर को पत्र भेजकर उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने को कहा है। अपर आयुक्त द्वारा जारी पत्र में उल्लेख है कि बजाग तहसील के संरक्षित बैगा बहुल क्षेत्र में करीब 1200 एकड़ आदिवासी भूमि के कथित बेनामी सौदों की विस्तृत जांच आवश्यक है।  बैगा आदिवासियों की 795 एकड़ जमीन खरीदी गई शिकायतकर्ता के अनुसार बैगा आदिवासियों को धोखे में रखकर लगभग 795 एकड़ जमीन खरीदी गई और इस भूमि का उपयोग आगे चलकर बॉक्साइट खदानों के लिए किया जाना प्रस्तावित है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि इन कर्मचारियों के खातों में हुए लेन-देन और वित्तीय गतिविधियों की भी जांच होनी चाहिए, क्योंकि इतनी बड़ी मात्रा में भूमि खरीद उनकी वास्तविक आर्थिक क्षमता से मेल नहीं खाती। यह संदेह पैदा करता है कि जमीन वास्तव में बेनामी तरीके से खरीदी गई हो सकती है। आयोग को सितंबर में की गई इस शिकायत पर केवल डिंडौरी कलेक्टर ने ही अपनी रिपोर्ट भेजी है, जबकि सिवनी, जबलपुर, कटनी और उमरिया के कलेक्टरों ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया है। आयोग ने इसे अत्यंत गंभीर माना है और चारों जिलों के कलेक्टरों को अंतिम चेतावनी जारी की है। आयोग की इस कड़ी प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि आदिवासी जमीन से संबंधित मामलों में लापरवाही को वह किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं करेगा, खासकर तब जब मामला बैगा जैसे विशेष पिछड़ी जनजाति की जमीन से जुड़ा हो, जिनकी सुरक्षा के लिए कानून में विशेष प्रावधान मौजूद हैं। इस प्रकरण को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज है। कांग्रेस विधायक डॉ. हीरालाल अलावा पहले ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को इस … Read more

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में एक बार फिर भव्य, सुरक्षित और सुव्यवस्थित माघ मेला संपन्न कराने की तैयारी

महाकुंभ के भव्य आयोजन के बाद माघ मेला-2026 की तैयारियां अंतिम चरण में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में एक बार फिर भव्य, सुरक्षित और सुव्यवस्थित माघ मेला संपन्न कराने की तैयारी मुख्य सचिव ने प्रतीक चिन्ह के अनावरण, सेक्टरवार रंग योजना और अवसंरचनात्मक सुधारों पर बैठक में की चर्चा 7 सेक्टर्स और 7 पॉन्टून पुलों को 7 ऊर्जा चक्रों के रंगों से सजाया जाएगा हर क्षेत्र में माघ मेला का प्रतीक चिन्ह किया जाएगा अंकित लखनऊ  महाकुंभ-2025 के सफल आयोजन के बाद अब राज्य सरकार माघ मेला-2026 को भी अभूतपूर्व, व्यवस्थित और सौंदर्यपूर्ण स्वरूप देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में माघ मेले की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। अभी हाल ही में मुख्य सचिव के समक्ष प्रतीक चिन्ह का अनावरण, सेक्टरवार रंग योजना और अवसंरचनात्मक सुधारों पर विशेष चर्चा हुई थी। इस बार अनुमानित है कि प्रयागराज में 12 से 15 करोड़ श्रद्धालु संगम पर पवित्र स्नान करेंगे, जिनमें प्रतिदिन आने वाले लाखों कल्पवासी भी शामिल होंगे। 7 सेक्टर्स – 7 ऊर्जा चक्रों के रंग पूरा मेला क्षेत्र रंग-समन्वित थीम पर आधारित होगा। हर सेक्टर एकरूपता का अनुभव कराएगा। मेले को सुसंगत और आकर्षक रूप देने के लिए सातों सेक्टर्स और सात पॉन्टून पुलों को "सात ऊर्जा चक्रों" के अनुरूप रंगों से सजाया जाएगा। हर सेक्टर की चहारदीवारी पर 3 फुट चौड़ी सीमांकन पट्टी बनाई जाएगी, जिससे मेले का आकार दृष्टिगत रूप से स्पष्ट, व्यवस्थित और सुंदर दिखाई देगा। सभी सेक्टर्स में उत्तर प्रदेश सरकार और माघ मेला-2026 का प्रतीक चिन्ह अंकित होगा। चेंजिंग रूम होंगे अधिक सुविधाजनक विभिन्न घाटों पर उपलब्ध चेंजिंग रूम भी सेक्टरवार रंग योजना के अनुरूप तैयार किए जाएंगे। पहले की तुलना में दोगुनी क्षमता, रंग योजनाओं से मेल खाते हुए होंगे। अब 2 यूनिट में 2 के स्थान पर 4 लोग एक साथ सुविधा का उपयोग कर सकेंगे। इससे भीड़ प्रबंधन अधिक सुचारू और सुविधाजनक होगा तथा मेले की एकरूपता कायम रहेगी। पॉन्टून पुलों पर बढ़ेगी सौंदर्य और सुरक्षा दोनों सातों पॉन्टून पुलों को इंद्रधनुषी सात रंगों से सजाया जाएगा। पुलों पर लगे लाइट, पोलों पर एलईडी लाइटें धार्मिक चिन्हों के साथ प्रदर्शित होंगी, जो दिन और रात दोनों समय आकर्षण का केंद्र रहेंगी। हर पुल पर रंग अनुरूप झंडे लगाए जाएंगे।यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलों पर कैनोपी का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विश्वस्तरीय अनुभव देने पर फोकस मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं कि माघ मेला-2026 न केवल धार्मिक भावना का प्रतीक हो, बल्कि साफ-सफाई, सुरक्षा, यातायात, चिकित्सा सुविधाओं और आधुनिक अवसंरचना के मामले में भी देशभर के मेले आयोजनों के लिए एक आदर्श बने। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में मेला प्रशासन श्रद्धालुओं को एक सुरक्षित, व्यवस्थित, आध्यात्मिक और विश्वस्तरीय अनुभव प्रदान करने में जुट गया है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा- ‘रक्षक पाठ्यक्रम’ से छात्रों के भविष्य की सुरक्षा और जिम्मेदारी में होगा सुधार

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग एवं प्रदेश के छह विश्वविद्यालयों के मध्य “रक्षक पाठ्यक्रम” के लिए एमओयू संपन्न हुआ। बाल अधिकार एवं संरक्षण पर आधारित यह अनूठा पाठ्यक्रम देश में अपनी तरह का पहला शैक्षणिक नवाचार है।  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि “रक्षक पाठ्यक्रम छात्रों के सुरक्षित और जिम्मेदार भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।” उन्होंने कहा कि यह पाठ्यक्रम युवाओं को न केवल रोजगार के अवसर प्रदान करेगा, बल्कि बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में आवश्यक विशेषज्ञता भी विकसित करेगा। उन्होंने कहा कि कई बार बच्चे भूलवश या भ्रमित होकर गलत दिशा में चले जाते हैं क्योंकि वे अबोध होते हैं। ऐसे बच्चों को सही मार्ग पर लाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की गारंटी के अधिकांश वादों को पूरा कर लिया है। किसानों के बकाया बोनस, महिलाओं के लिए महतारी वंदन योजना और सबके लिए आवास जैसे महत्वपूर्ण संकल्पों को साकार किया गया है। उन्होंने कहा कि 350 से अधिक प्रशासनिक सुधार लागू कर छत्तीसगढ़ सुशासन के मार्ग पर तेजी से अग्रसर है और इसी उद्देश्य से सुशासन एवं अभिसरण विभाग की स्थापना भी की गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रक्षक पाठ्यक्रम को रिकॉर्ड समय में तैयार करने और विश्वविद्यालयों में इसे लागू करने के लिए आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा और उनकी पूरी टीम को बधाई दी। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी रजवाड़े ने कहा कि बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में व्यापक प्रयासों की आवश्यकता है। बच्चों से भिक्षावृत्ति कराना, परित्यक्त बच्चों का पुनर्वास, और संवेदनशील मामलों का समाधान—ये सभी अत्यंत चुनौतीपूर्ण विषय हैं। उन्होंने कहा कि “यह पाठ्यक्रम संवेदनशील, सजग और सेवा-भावयुक्त युवा तैयार करने में मील का पत्थर साबित होगा।” उन्होंने इसे राष्ट्रीय स्तर का नवाचार बताते हुए कहा कि भविष्य में छत्तीसगढ़ इस क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में पहचाना जाएगा। उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने पाठ्यक्रम को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने आयोग और सभी छह विश्वविद्यालयों को पाठ्यक्रम लागू करने हेतु बधाई दी। यह एक वर्षीय स्नातकोत्तर “पीजी डिप्लोमा इन चाइल्ड राइट्स एंड प्रोटेक्शन पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर, आंजनेय विश्वविद्यालय, रायपुर, एमिटी विश्वविद्यालय, रायपुर और श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, भिलाई-दुर्ग में प्रारम्भ होगा। क्या है रक्षक पाठ्यक्रम प्रदेश के किसी भी विश्वविद्यालय में अब तक ऐसा पाठ्यक्रम उपलब्ध नहीं था, जो युवाओं को बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में प्रशिक्षित करते हुए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए। इस आवश्यकता को देखते हुए आयोग द्वारा “रक्षक – बाल अधिकार संरक्षण पर एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम” को विकसित किया गया है। इस पाठ्यक्रम से युवाओं को सैद्धांतिक एवं विधिक ज्ञान, विभागीय योजनाओं, संस्थाओं और प्रायोगिक प्रक्रियाओं की गहरी समझ, बाल संरक्षण इकाइयों आदि के सम्बन्ध में जानकारी उपलब्ध होगी।संवेदनशीलता, जागरूकता और बाल-अधिकारों की आत्मिक समझ विकसित करने वाला यह पाठ्यक्रम युवाओं को इस क्षेत्र में कुशल, समर्पित और प्रभावी मानव संसाधन के रूप में तैयार करेगा। आयोग द्वारा पाठ्यक्रम के संचालन, प्रशिक्षण, परामर्श और मार्गदर्शन की संपूर्ण सुविधा विश्वविद्यालयों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा, ,पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर से कुलसचिव प्रो शैलेंद्र पटेल,प्रो ए के श्रीवास्तव,संत गहिरा गुरु विश्विद्यालय सरगुजा कुलपति  प्रो राजेंद्र लाकपाले, कुलसचिव शारदा प्रसाद त्रिपाठी, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति एवं रायपुर संभाग आयुक्त श्री महादेव कावरे, कुलसचिव सुनील कुमार शर्मा,आंजनेय विश्वविद्यालय रायपुर कुलपति डॉ. टी.रामाराव कुलसचिव डॉ. रूपाली चौधरी, एमिटी विश्वविद्यालय रायपुर कुलपति डॉ. पीयूष कांत पाण्डेय, कुलसचिव डॉ. सुरेश ध्यानी, शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी भिलाई दुर्ग चांसलर डॉ.आई.पी. मिश्रा, कुलपति डॉ ए. के झा एवं डॉ जया मिश्रा, आयोग के सचिव प्रतीक खरे सहित अन्य विभागीय अधिकारीगण उपस्थित थे।