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दिन में दो बार चिकन राइस: कर्नाटक में स्ट्रीट डॉग्स के लिए नया फीडिंग प्लान

 बेंगलुरु  BBMP के ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) में बदलते ही, राजधानी के आवारा कुत्तों की किस्मत दोगुनी हो गई है। अब उन्हें दिन में एक बार की जगह दो बार 'चिकन राइस' देने की तैयारी चल रही है। BBMP के समय में, बेंगलुरु के आवारा कुत्तों को दिन में एक बार चिकन राइस देने की योजना बनाई गई थी। लेकिन, बड़े पैमाने पर विरोध के बाद इस योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि बस, रेलवे स्टेशन, अस्पताल, स्कूल-कॉलेज, हॉस्टल, यूनिवर्सिटी, ट्रेनिंग सेंटर, मैदान और स्टेडियम जैसे भीड़-भाड़ वाले इलाकों से आवारा कुत्तों को हटाकर उन्हें खास Bडॉग शेल्टर्सB में शिफ्ट किया जाए। साथ ही, कुत्तों के काटने से बचाने के लिए परिसरों में बाड़ लगाने का भी निर्देश दिया गया था। इस आदेश का पालन करने के मौके का फायदा उठाते हुए, ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी के अधिकारियों ने शेल्टर में शिफ्ट किए जाने वाले आवारा कुत्तों को दिन में दो बार चिकन राइस देने का फैसला किया है। 6 महीने में 'चिकन राइस' की कीमत ₹2.58 बढ़ी BBMP के समय में, चिकन राइस की कीमत 22.42 रुपये (17 जून तक) तय की गई थी। अब बाजार में कच्चे माल की कीमतें बढ़ने और समीक्षा के बाद, एक बार के चिकन राइस की कीमत 25 रुपये तय की गई है। इसका मतलब है कि 6 महीने में चिकन राइस की कीमत 2.58 रुपये बढ़ गई है। हर कुत्ते पर दिन में दो बार चिकन राइस के लिए 50 रुपये खर्च करने का फैसला किया गया है। चिकन राइस की रेसिपी चावल-150 ग्राम, चिकन-100 ग्राम, सब्जियां-100 ग्राम, तेल-10 ग्राम, नमक-5 ग्राम, हल्दी-2.5 ग्राम, कुल मिलाकर 367.5 ग्राम होगा। पकाने के बाद यह 600 ग्राम हो जाएगा। BBMP के समय में तैयार की गई रेसिपी की तुलना में, 50 ग्राम चावल बढ़ाया गया है और 50 ग्राम चिकन कम कर दिया गया है। लेकिन, हर चिकन राइस की कीमत 2.58 रुपये बढ़ा दी गई है। बेंगलुरु में हर कुत्ते पर महीने का खर्च 3035 रुपये आवारा कुत्तों को शेल्टर में शिफ्ट करने और उनके रखरखाव का खर्च तय करने के लिए सेंट्रल म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के कमिश्नर राजेंद्र चोलन की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई थी। कमेटी ने खाना, स्टाफ की सैलरी, दवाएं, सफाई का सामान और प्रशासनिक खर्च मिलाकर हर महीने 3035 रुपये खर्च करने का फैसला किया है। पहले महीने में एक कुत्ते को पकड़ने, ट्रांसपोर्टेशन और वैक्सीनेशन के लिए 300 रुपये का अतिरिक्त खर्च जोड़ा गया है। टेंडर बुलाकर स्वयंसेवी संस्थाओं को शेल्टर होम्स के रखरखाव का कॉन्ट्रैक्ट देने के लिए शहरी विकास के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने पहले ही पांच नगर निगम आयुक्तों को निर्देश दे दिया है। फिलहाल 2,206 आवारा BBकुत्तों की पहचान अपनी संस्था के परिसर में मौजूद आवारा कुत्तों की जानकारी देने के लिए जारी किए गए नोटिस के जवाब में, अब तक शहर की अलग-अलग संस्थाओं से मिली जानकारी के मुताबिक, बेंगलुरु नॉर्थ म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के इलाके में 1623, बेंगलुरु साउथ में 131, बेंगलुरु सेंट्रल में 222, बेंगलुरु वेस्ट में 37 और बेंगलुरु ईस्ट म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के इलाके में 193 आवारा कुत्ते हैं। इस संख्या के हिसाब से हर महीने 66.95 लाख रुपये खर्च करने होंगे। सालाना 8.03 करोड़ रुपये की जरूरत होगी, और अगर आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ती है, तो खर्च भी बढ़ेगा। यह खर्च संबंधित नगर निगमों को उठाने का निर्देश दिया गया है। बेंगलुरु में शेल्टर होम्स कहां-कहां? बेंगलुरु नॉर्थ म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के इलाके में अंबेडकर नगर, बेंगलुरु साउथ में एस. बिंगीपुरा, बेंगलुरु सेंट्रल में कैंटोनमेंट के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल परिसर, बेंगलुरु वेस्ट में कोट्टीगेपाल्या की निराश्रित समिति और बेंगलुरु ईस्ट में सादमंगला और वर्थुर में शेल्टर होम के लिए जगह की पहचान की गई है। हर 100 आवारा कुत्तों के लिए शेल्टर होम का मासिक खर्च का ब्यौरा योजना खर्च (रुपये में)     कुत्ते को पकड़ना, ट्रांसपोर्टेशन, वैक्सीनेशन 30,000 (एक बार का खर्च)     खाना 1,50,000 (दिन में 2 बार)     स्टाफ की सैलरी 1,18,483 (एक पैरा-वेट, चार असिस्टेंट)BB     दवाओं का खर्च 15,000     सफाई का सामान 10,000     प्रशासनिक खर्च 10,000     कुल 3,33,483

रायपुर में ऑडिट पखवाड़ा: राज्यपाल रमेन डेका ने कैग की सर्वोच्च भूमिका पर की चर्चा

रायपुर : लोकतांत्रिक ढांचे में कैग की सर्वाेच्च भूमिका – रमेन डेका राज्यपाल  रमेन डेका ऑडिट पखवाड़ा के समापन समारोह में शामिल हुए राज्यपाल रायपुर महालेखाकार कार्यालय के आवासीय परिसर स्थित सामुदायिक भवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि  डेका ने अपने उद्बोधन में कहा कि लेखा परीक्षा केवल सरकारी व्यय और राजस्व की जांच तक सीमित नहीं है, यह प्रशासनिक पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन, और जनसेवा में उत्तरदायित्व का एक सशक्त माध्यम है। हमारे लोकतांत्रिक ढांचे मेें भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की सर्वाेच्च भूमिका है।  ऑडिट पखवाड़ा के समापन समारोह में शामिल हुए राज्यपाल लेखा परीक्षा को संवैधानिक प्राधिकरण का दर्जा राज्यपाल  रमेन डेका आज प्रधान महालेखाकार कार्यालय में ऑडिट पखवाड़ा 2025 के समापन समारोह में शामिल हुए। लेखा परीक्षा दिवस के अवसर पर 20 नवम्बर से 8 दिसंबर 2025 तक यह सप्ताह आयोजित किया गया।  राज्यपाल  डेका ने कहा कि भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा विभाग का इतिहास गौरवशाली रहा है। इसकी नीव ब्रिटिश शासन के दौरान 1858 में प्रारंभ हुई लेखा परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी हुई है। स्वतंत्रता के बाद हमारे संविधान निर्माताओं ने इस संस्था की महत्ता को समझते हुए इसे संवैधानिक प्राधिकरण का दर्जा प्रदान किया।  कैग की भूमिका प्रशासनिक सुधार, नवाचार एवं पारदर्शिता को प्रोत्साहित करना है  ऑडिट पखवाड़ा के समापन समारोह में शामिल हुए राज्यपाल  डेका ने कहा कि तेजी से बढ़ते डिजिटल प्रशासन के दौर में कैग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। यह संस्था केवल कमियों को उजागर नहीं करती, बल्कि प्रशासनिक सुधार, नवाचार एवं पारदर्शिता को प्रोत्साहित करती है।  यह न केवल सरकारी कार्यों में वित्तीय अनुशासन लाने का कार्य करता है, बल्कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को रोकने का महत्वपूर्ण दायित्व भी निभाता है। इस विभाग के अधिकारियों की निष्पक्षता और कर्मठता ने इसे एक सशक्त संस्थान के रूप में स्थापित किया है। अधिकारियों की मेहनत और ईमानदारी से जनता का भरोसा मजबूत होगा राज्यपाल ने  विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे इस प्रतिष्ठित संस्था की परंपराओं को बनाए रखते हुए निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करें। उनकी मेहनत और ईमानदारी से ही जनता का भरोसा और मजबूत होगा। जीवन में एक कार्य ऐसा करें जिसमें लेने का नहीं बल्कि देने का हो, जिससे हमारा देश 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को प्राप्त करेगा।           कार्यक्रम में स्वागत भाषण प्रधान महालेखाकार  यशवंत कुमार ने दिया। कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन महालेखाकार (लेखा परीक्षा)  मोहम्मद फैजान ने किया। इस अवसर पर राज्यपाल  डेका ने सामुदायिक भवन परिसर में वृक्षारोपण किया। कार्यक्रम में महालेखाकार कार्यालय के सभी अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे।

भोपाल में नया स्टेशन निशातपुरा, यात्री सुविधाओं के लिए जनवरी 2026 से शुरू होगा संचालन

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को जल्द ही एक और रेलवे स्टेशन की सौगात मिलने वाली है. नए साल यानी जनवरी 2026 में निशातपुरा रेलवे स्टेशन आम लोगों के लिए खुलने जा रहा है. भारतीय रेलवे ने इसके लिए आधिकारिक घोषणा कर दी है. इस स्टेशन का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. इस स्टेशन के शुरू होने के बाद भोपाल जंक्शन और रानी कमलापति स्टेशन पर यात्रियों का दबाव कम होगा | लाखों यात्रियों को मिलेगी सुविधा निशातपुरा रेलवे स्टेशन के चालू होने के बाद से करोंद, भानपुर, मिनाल रेसीडेंसी, हाउसिंग बोर्ड, लांबाखेड़ा, बैरसिया रोड समेत आसपास रहने वाले लाखों यात्रियों को इससे राहत मिलेगी. अक्सर इन इलाकों में रहने वाले लोगों को ट्रेन पकड़ने के लिए ट्रैफिक का सामना भी करना पड़ता था, अब पुराने भोपाल समेत होशंगाबाद रोड पर यातायात का दबाव कम होगा. स्टेशन परिसर में पार्किंग, टिकट व्यवस्था, यात्री सुविधाएं और सुरक्षा व्यवस्था का कार्य लगभग पूरा हो गया है| स्टेशन शुरू होते ही भोपाल रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों का दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा। इससे प्लेटफार्म पर भीड़ घटेगी और ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार आएगा। इससे करोंद, लालघाटी, गांधी नगर, अयोध्या नगर, आनंद नगर, भीमनगर व आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। इंजन रिवर्सल की झंझट होगी खत्म रेलवे अधिकारियों के अनुसार, अगर भोपाल स्टेशन पर समाप्त होने वाली कुछ ट्रेनों का टर्मिनेशन निशातपुरा तक बढ़ाया जाता है, तो इंजन रिवर्सल की जरूरत खत्म हो जाएगी। अभी भोपाल स्टेशन पर इंजन की दिशा बदलने में 30 से 45 मिनट तक का समय लग जाता है, जिससे ट्रेनें देरी का शिकार होती हैं। निशातपुरा से यह समय बचेगा और ट्रेनों को सीधे इंदौर, उज्जैन और रतलाम की ओर रवाना करना आसान होगा। निशातपुरा पर इन ट्रेनों को मिलेगा स्टॉपेज पहले निशातपुरा रेलवे स्टेशन का उपयोग माल ढुलाई और दूसरे कमर्शियल कामों के लिए इस्तेमाल किया जाता था. फिलहाल भोपाल में तीन रेलवे स्टेशन हैं, इनमें भोपाल जंक्शन, रानी कमलापति और संत हिरदाराम नगर शामिल हैं | रिपोर्ट के अनुसार शुरुआत में मालवा एक्सप्रेस और जबलपुर-वेरावल (सोमनाथ एक्सप्रेस) को स्टॉपेज की मंजूरी दी गई है | इसके बाद कुछ और ट्रेनों के स्टॉपेज को हरी झंडी मिल जाएगी. इनमें जयपुर-चेन्नई एक्सप्रेस, अजमेर-हैदराबाद एक्सप्रेस, इंदौर-हावड़ा, इंदौर-राजेंद्र नगर, विंध्याचल, राज्यरानी, भोपाल-बीना मेमू, बिलासपुर एक्सप्रेस, झांसी-इटारसी पैसेंजर जैसी ट्रेनें शामिल हैं | नहीं बदलने होगी इंजन की दिशा रेलवे स्टेशन के उपयोग के लिए निशातपुरा को एनएसजी-3 कैटेगरी में शामिल किया गया है. वर्तमान की बात करें तो कुछ ट्रेन ऐसी हैं जिनका स्टॉपेज भोपाल जंक्शन में होता है और फिर इन्हें उज्जैन और इंदौर की ओर जाना जाता है. इस वजह से ट्रेन का इंजन बदलना पड़ता है. इस वजह से फिजूल समय जाता है, अब इससे मुक्ति मिलेगी और इंजन की दिशा नहीं बदलनी पड़ेगी | सुविधाएं लगभग तैयार स्टेशन परिसर में प्लेटफार्म विस्तार, टिकट घर, प्रतीक्षालय, पार्किंग, सीसीटीवी और सुरक्षा व्यवस्था का काम अंतिम चरण में है। साथ ही भोपाल आउटर पर ट्रेनों को खड़ा रखने की समस्या को भी इस स्टेशन के जरिए काफी हद तक दूर करने की योजना बनाई गई है। इन ट्रेनों को मिल सकता है नया ठहराव     निशातपुरा स्टेशन से हाल्ट देने की प्रक्रिया अब अगले चरण में पहुंच गई है। पहले ही मालवा एक्सप्रेस और जबलपुर-वेरावल (सोमनाथ) एक्सप्रेस का यहां ठहराव नोटिफाई किया जा चुका है। इसके साथ-साथ जिन ट्रेनों को यहां रोकने की तैयारी चल रही है, उनमें जयपुर-चेन्नई एक्सप्रेस, अजमेर-हैदराबाद एक्सप्रेस, इंदौर-हावड़ा एक्सप्रेस, इंदौर-राजेंद्र नगर एक्सप्रेस, विंध्याचल राज्यरानी, भोपाल-बीना मेमू, बिलासपुर एक्सप्रेस और झांसी-इटारसी पैसेंजर शामिल हैं। – नवल अग्रवाल, पीआरओ, भोपाल मंडल  

ग्वालियर में लगभग 2 लाख करोड़ निवेश वाली इकाइयों का इस माह के अंत तक होगा भूमिपूजन और शुभारंभ

मेट्रोपॉलिटन सिटी के दृष्टिगत विकसित औद्योगिक क्षेत्रों को उद्योग जगत के बीच करें प्रचारित : मुख्यमंत्री डॉ.यादव ग्वालियर में लगभग 2 लाख करोड़ निवेश वाली इकाइयों का इस माह के अंत तक होगा भूमिपूजन और शुभारंभ मुख्यमंत्री ने पिछले दो वर्ष में एमएसएमई की 31प्रतिशत ग्रोथ पर दी बधाई फूड पार्क सहित अन्य ग्रामीण और कुटीर उद्योगों को एमएसएमई से जोड़ें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एमएसएमई विभाग के दो वर्ष के कार्यों की समीक्षा की भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एमएसएमई विभाग के अधिकारियों से कहा है कि वे इंदौर और भोपाल मेट्रोपॉलिटन सिटी के दृष्टिगत विकसित औद्योगिक क्षेत्रों को उद्योग जगत के बीच इस तरह से प्रचारित और प्रस्तुत करें, जिससे अधिक से अधिक औद्योगिक इकाइयां स्थापित हों तथा व्यापक निवेश और रोजगार सृजित हो सकें। उन्होंने उद्योग वर्ष के समापन पर इस माह के अंत तक ग्वालियर में लगभग 2 लाख करोड़ निवेश वाली इकाइयों के भूमिपूजन औद्योगिक भूखंड आवंटन, शुभारंभ आदि का व्यापक कार्यक्रम आयोजित करने के लिए कहा है। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने एमएसएमई के पंजीकरण में जबरदस्त 31प्रतिशत की ग्रोथ पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे पिछले दो वर्ष में छोटे उद्योगों के लिए राज्य शासन द्वारा उपलब्ध कराए गए शानदार वातावरण का उदाहरण बताया। उन्होंने फूड पार्क सहित अन्य ग्रामीण और कुटीर उद्योगों को भी एमएसएमई से जोड़ने के लिए कहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को खजुराहो में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग के गत 2 वर्ष के कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। एमएसएमई मंत्री  चेतन्य कुमार काश्यप, मुख्य सचिव  अनुराग जैन, मुख्यमंत्री कार्यालय के अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विगत दो वर्ष में मध्यप्रदेश में एमएसएमई और स्टार्टअप के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य हुए हैं। प्रदेश में इस अवधि में कई लाख करोड़ का निवेश आया है और नवीन औद्योगिक इकाइयों का भूमिपूजन और शुभारंभ हुआ है। एमएसएमई इकाइयों को 2780 करोड़ की प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराई गई है।मुख्यमंत्री ने 2019 से उद्यमों के लिए लंबित प्रोत्साहन राशि के संपूर्ण भुगतान को ऐतिहासिक बताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योग वर्ष के समापन पर यह विभाग की जिम्मेदारी है कि पक्ष और विपक्ष के जनप्रतिनिधियों के साथ इन उपलब्धियों का मीडिया को भी मौके पर निरीक्षण कराए, जिससे निवेश और रोजगार में हुए कार्य पूरे देश में प्रचारित हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल सहित बड़े शहरों में फ्लैटेड इंडस्ट्रियल पार्क के विकास कार्यों में प्रदेश के विकास प्राधिकरणों को जोड़ें, जिससे मितव्ययता बनी रहे। प्रदेश में एमएसएमई एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम के विस्तार, औद्योगिक संरचना के विकास तथा आगामी कार्ययोजनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई।  बैठक में बताया गया कि वर्तमान में प्रदेश में 4.51 लाख विनिर्माण उद्यम, 6,340 से अधिक स्टार्टअप और 3,023 से अधिक महिला स्टार्टअप सक्रिय हैं। प्रदेश में 102 से अधिक इन्क्यूबेटर कार्यरत हैं। विनिर्माण क्षेत्र में ₹39,600 करोड़ रूपये का निवेश प्राप्त हुआ है। नीतिगत सुधार एवं विभागीय उपलब्धियाँ विगत दो वर्षों में विभाग ने नीतिगत सुधार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। एमएसएमई एवं स्टार्टअप के लिए नई नीतियाँ लागू की गईं। प्रदेश में 116 से अधिक कार्यशालाओं के माध्यम से जागरूकता एवं प्रशिक्षण दिया गया। भू-आवंटन एवं अन्य प्रक्रियाओं को फेसलेस ऑनलाइन माध्यम से समयबद्ध सेवा के रूप में लागू किया गया। वित्तीय सहायता के अंतर्गत 4,065 इकाइयों को 2,780.44 करोड़ रूपये की सहायता प्रदान की गई और  220 सहायता प्रकरणों का राज्य स्तरीय साधिकार समिति द्वारा निराकरण किया गया। औद्योगिक अधोसंरचना का विस्तार समीक्षा बैठक में बताया गया कि औद्योगिक क्षेत्रों के विकास में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। कुल 1,240 भूखंड उद्यमियों को उपलब्ध कराए गए, 13 औद्योगिक क्षेत्रों का निर्माण कार्य पूर्ण हुआ और 14 नए औद्योगिक क्षेत्रों को स्वीकृति प्रदान की गई। वर्तमान में 31 औद्योगिक क्षेत्रों का विकास कार्य प्रगति पर है। निजी भूमि पर स्वीकृत 30 औद्योगिक क्षेत्रों में से 12 का विकास कार्य पूर्ण हुआ है। विभाग द्वारा पहली बार गोविंदपुरा, भोपाल में फ्लैटेड इंडस्ट्रियल पार्क का विकास कर नवाचार को प्रोत्साहन दिया गया है। वित्तीय समावेशन एवं उद्यम क्रांति योजना मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत 15,838 युवाओं को लाभान्वित किया गया और 1,087.27 करोड़ रूपये की ऋण राशि वितरित की गई। प्रदेश की साख योजना के अंतर्गत निर्धारित लक्ष्य 2,45,038 करोड़ रूपये के विरुद्ध सितम्बर 2025 तक 1,93,872 करोड़ रूपये वितरित किए गए, जो पिछले दो वर्ष की तुलना में महत्वपूर्ण वृद्धि है। इससे एमएसएमई क्षेत्र में वित्तीय उपलब्धता और उद्यमिता को मजबूती मिली है। फेसिलिटेशन कॉउंसिल की उपलब्धियाँ एमएसएमई फेसिलिटेशन काउंसिल द्वारा विलंबित भुगतान के 439 प्रकरणों का निराकरण किया गया और काउंसिल की सुनवाई पूरी तरह डिजिटल माध्यम से सुनिश्चित की गई। ODR पोर्टल के प्रभावी उपयोग के लिए काउंसिल को वर्ष 2025 में राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुआ है। निवेश संवर्धन एवं राष्ट्रीय उपलब्धियाँ समीक्षा बैठक में बताया गया कि जीआईएस- 2025 के दौरान प्रदेश को 2,279 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनकी कुल राशि 21,000 करोड़ रूपये है। इनमें से 729 प्रस्ताव क्रियान्वित हुए हैं, जिनके माध्यम से 5,075 करोड़ रूपये का वास्तविक निवेश और 21,599 रोजगार सृजित हुए हैं। नई दिल्ली में इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में मध्यप्रदेश मंडप को वर्ष 2024 में स्वर्ण पदक तथा 2025 में रजत पदक प्राप्त हुआ। विनिर्माण एवं प्रमाणन में प्रगति बैठक में बताया गया कि विगत दो वर्षों में 2 लाख से अधिक विनिर्माण इकाइयाँ पंजीकृत हुई हैं, जो 31 प्रतिशत की वृद्धि है। आरएएमपी योजना के अंतर्गत प्रदेश के 5 SME को स्टॉक एक्सचेंज में शामिल कराया गया है। जेडईडी प्रमाणन के क्षेत्र में 16,428 इकाइयाँ प्रमाणित हुई हैं, जबकि पूर्व में यह संख्या मात्र 437 थी। प्रतिदिन अवधि में 30 हजार से अधिक एमएसएमई एवं स्टार्टअप का क्षमता निर्माण किया गया तथा iGOT पोर्टल पर 834 शासकीय सेवक ऑनबोर्ड हुए। ग्वालियर स्टोन एवं छतरपुर वुडन फर्नीचर को दिसंबर 2025 में जीआई टैग प्राप्त हुआ है। क्लस्टर विकास एवं भविष्य की औद्योगिक तैयारी मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बैठक के दौरान जानकारी दी गई कि आगामी तीन वर्ष में 5 हजार से अधिक करोड़ की प्रोत्साहन राशि एमएसएमई इकाइयों को दी जाएगी। इसी तरह क्लस्टर विकास के लिए 30 नए निजी क्लस्टरों और 22 सामान्य सुविधा केंद्रों … Read more

मध्यप्रदेश ने बनाया रिकॉर्ड, वाहनों की डिडुप्लीकेशन की सभी लंबित प्रविष्टियाँ कीं शून्य; EV पर मोटरयान कर पूरी तरह माफ

मध्यप्रदेश बना वाहनों की डिडुप्लीकेशन की लंबित प्रविष्टियों को शून्य करने वाला राज्य इलेक्ट्रिक वाहनों में मोटरयान कर में पूर्ण छूट भोपाल परिवहन विभाग के प्रयासों से मध्यप्रदेश डिडुप्लीकेशन की लंबित प्रविष्टियों को शून्य करने वाला राज्य बन गया है। इस कार्यवाही का फायदा उन समस्त 2 लाख 50 हजार वाहन स्वामियों को मिला है, जो अब परिवहन विभाग की ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग कर पा रहे हैं। देश में समस्त राज्यों के परिवहन विभाग द्वारा वाहनों के पंजीयन एवं उनके स्थानान्तरण के संबंध में विभिन्न परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) में समय-समय पर प्रविष्टियां की जाती हैं। पूर्व में कागजों पर संधारित रिकार्ड को डिजिटाइज करने के दौरान दूसरे आरटीओ के अधिकार क्षेत्र में वाहन के स्थानांतरित होने पर पूर्व के आरटीओ द्वारा एंट्री को डिलीट न किये जाने के कारण देश में 35 लाख वाहन ऐसे थे, जिनकी प्रविष्टि एक से अधिक आरटीओ में होने से उन वाहन स्वामियों को परिवहन सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा था। इस वर्ष जुलाई 2025 के अंत तक मध्यप्रदेश में करीब 2 लाख 50 हजार ऐसी प्रविष्टियां थीं। परिवहन विभाग द्वारा एक विशेष मुहिम चलाई गई। मुहिम की समीक्षा प्रत्येक पखवाड़े में परिवहन विभाग में वरिष्ठ स्तर पर किये जाने से मध्यप्रदेश में डुप्लीकेट एंट्रियों को सही कर दिया गया है। इलेक्ट्रिक वाहनों पर मोटरयान कर में पूर्ण छूट पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को प्रदेश में प्रोत्साहित किया जा रहा है। मध्यप्रदेश राज्य में पंजीकृत होने वाले समस्त श्रेणी के इलेक्ट्रिक वाहनों पर मोटरयान कर में पूर्णत: छूट प्रदान किये जाने के प्रावधान किये गये हैं। इसके साथ ही प्रदेश में कम्प्रेस्ड् नेचुरल गैस (सीएनजी) वाहनों पर भी राज्य सरकार द्वारा मोटरयान कर में एक प्रतिशत की छूट प्रदान की गई है। इस प्रावधान से प्रदेश में इलेक्ट्रिक और सीएनजी वाहनों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।  

प्रशासनिक हलचल: छत्तीसगढ़ के 38 अफसरों का तबादला, आदेश जारी

रायपुर छत्तीसगढ़ में एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। राज्य सरकार ने राज्य प्रशासनिक सेवा के एक साथ अधिकारियों का एक साथ तबादला किया है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश जारी किया है। जारी आदेश में कुल 38 अधिकारियों का नाम शामिल है। यह आदेश छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग (General Administration Department) द्वारा जारी किया गया है और इसमें राज्य प्रशासनिक सेवा (State Administrative Service) एवं सचिवालय सेवा (Secretariat Service) के अधिकारियों का बड़े पैमाने पर तबादला किया गया है। छत्तीसगढ़ में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 38 अधिकारियों का तबादला छत्तीसगढ़ शासन ने एक बार फिर बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल किया है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने आज, 08 दिसंबर 2025 को जारी आदेश में राज्य प्रशासनिक सेवा एवं सचिवालय सेवा के 38 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अस्थायी रूप से नवीन विभागों में पदस्थ किया है। प्रमुख अधिकारियों की नवीन पदस्थापनाएं तबादला सूची में शामिल कुछ महत्वपूर्ण अधिकारियों और उनके नए प्रभार निम्नलिखित हैं: राजीव अहिरे (संयुक्त सचिव) वर्तमान: आवास एवं पर्यावरण विभाग (अतिरिक्त प्रभार- योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग) नवीन: कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग सूर्यकिरण तिवारी (रा.प्र.से., उप सचिव) वर्तमान: कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग (अतिरिक्त प्रभार- पशुधन विकास एवं मछली पालन विभाग) नवीन: पशुधन विकास एवं मछली पालन विभाग दुर्गेश कुमार वर्मा (रा.प्र.से., उप सचिव) वर्तमान: सामान्य प्रशासन विभाग (पूल) नवीन: योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग लवीना पाण्डेय (रा.प्र.से., उप सचिव) वर्तमान: आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग एवं पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक विकास विभाग (अति. प्रभार- चिकित्सा शिक्षा विभाग) नवीन: चिकित्सा शिक्षा विभाग कुसुम एक्का (उप सचिव) वर्तमान: योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग नवीन: गृह विभाग श्रीमती विजया खेस्स (उप सचिव) वर्तमान: विमानन विभाग नवीन: ग्रामोद्योग विभाग अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किए गए अधिकारी तबादला सूची में कई अधिकारियों को उनके मौजूदा अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है, जबकि उनका मूल प्रभार यथावत रहेगा- अरूण कुमार मरकाम (रा.प्र.से., उप सचिव) को ग्रामोद्योग विभाग के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है। रामप्रसाद चौहान (रा.प्र.से., उप सचिव) को समाज कल्याण विभाग के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है। श्रीकांत वर्मा (रा.प्र.से., उप सचिव) को गृह विभाग के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है। अंकिता गर्ग (रा.प्र.से., उप सचिव) को श्रम विभाग के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है। विभोर अग्रवाल (रा.प्र.से., उप सचिव) को उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है। अन्वेष धृतलहरे (रा.प्र.से., उप सचिव) को राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है। सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे तत्काल नवीन पदस्थापना में कार्यभार ग्रहण करें और पालन प्रतिवेदन सामान्य प्रशासन विभाग को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।

डॉ. यादव: सभी पात्र हितग्राही तक खाद्यान्न योजनाओं का लाभ पहुंचे समय पर

हर पात्र हितग्राही तक खाद्यान्न योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचना सुनिश्चित हो : मुख्यमंत्री डॉ. यादव ई केवाइसी एवं राइट फुल टारगेटिंग के बेहतर कार्य पर दी बधाई मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की समीक्षा  भोपाल   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को खजुराहो स्थित कन्वेंशन सेंटर में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने निर्देश दिए कि हर पात्र हितग्राही तक खाद्यान्न वितरण का लाभ सुगमता से पहुंचे। जरूरतमंद गरीबों, श्रमिकों, किसानों और महिलाओं का कल्याण हमारी प्राथमिकता है। बैठक में मुख्य रूप से लक्षित सार्वजनिक प्रणाली, उपार्जन प्रक्रिया, तकनीकी नवाचार, सिंहस्थ 2028 की तैयारियों सहित विभिन्न विषयों पर रिव्यू किया गया। इस दौरान डॉ. यादव ने विभाग द्वारा किए गए नवाचारी प्रयासों की सराहना की, वहीं अन्य विषयों पर आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए।  बैठक में विभाग द्वारा पात्र हितग्राहियों के ई-केवाइसी एवं राइट फुल टारगेटिंग कार्य की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि यह प्रक्रिया नियमित अंतराल में दोहराई जाए, ताकि प्रत्येक पात्र हितग्राही को नि:शुल्क खाद्यान प्राप्त हो सके। उल्लेखनीय है कि खाद्य संचालनालय द्वारा वृहद स्तर पर कैंपेन मोड में ई केवाइसी एवं राइट फुल टारगेटिंग का कार्य किया गया था। जिसमें चरण वार हितग्राहियों के वेरीफिकेशन के बाद 34 लाख से अधिक हितग्राहियों का पोर्टल से विलोपन किया गया। वहीं इस प्रक्रिया से प्रतीक्षा सूची से लगभग 14 लाख हितग्राहियों को नवीन पात्रता पर्ची जारी कर नि:शुल्क खाद्यान का वितरण किया जा रहा है।  समीक्षा बैठक में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत, मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई एवं मती रश्मि अरुण शमी सहित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। प्राथमिकता श्रेणी बनाकर 25.18 लाख नवीन श्रमिकों को नि:शुल्क वितरण बैठक में बताया गया कि ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत श्रमिकों को निःशुल्क राशन का लाभ मिल सके, इसके लिए असंगठित एवं प्रवासी श्रमिकों की 29वीं प्राथमिकता श्रेणी बनाकर 7.25 लाख परिवारों के 25.18 लाख नवीन श्रमिकों को पात्रता पर्ची के माध्यम से निःशुल्क राशन वितरित किया जा रहा है। दो वर्ष में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना में 5.25 करोड़ से अधिक पात्र हितग्राहियों को 19,935 करोड़ रुपये का 66.37 लाख मीट्रिक टन निःशुल्क खाद्यान्न वितरण किया गया। पीडीएस प्रदाय केंद्रों की संख्या में भी बढ़ोतरी की गई।  प्रदेश में खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 में शामिल 536.23 लाख पात्र हितग्राहियों में से 93% यानी 497.08 लाख हितग्राहियों का ई-केवाईसी पूर्ण किया जा चुका है। वहीं, प्रतीक्षारत 14 लाख नवीन पात्र हितग्राहियों को पात्रता पर्चियां जारी कर नि:शुल्क खाद्यान्न दिया जा रहा है। किसानों को एमएसपी के लाभ के साथ बोनस और प्रोत्साहन राशि भी मिली किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिले इसके लिए प्रदेश सरकारी द्वारा रबी विपणन वर्ष 2024-25 और 2025-26 में एमएसपी पर गेंहू बेचने वाले किसानों को 29558.40 करोड़ रुपये की एमएसपी राशि और 1965 करोड़ रुपये के बोनस का भुगतान किया गया है। वहीं खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 में समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसानों को 19208.76 करोड़ रुपये की एमएसपी राशि एवं 337.11 करोड़ की प्रोत्साहन राशि का भुगतान मुख्यमंत्री कृषि उन्नति योजना के अंतर्गत किया गया है। चावल उत्पादक किसानों को लाभ पहुंचाते हुए वर्ष 2024-25 में 9.64 लाख मीट्रिक टन चावल का केन्द्रीय पूल में रिकार्ड परिदान किया गया। सरकार द्वारा भंडारण क्षमता को भी बढ़ाया गया है। लाडली बहनों को भी मिल रहा उज्जवला योजना का लाभ मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना अंतर्गत सम्मिलित महिलाओं और प्रधानमंत्री उज्जवला योजना की कनेक्शनधारी महिलाओं को दो साल में 616.97 लाख रिफिल प्रदाय कर 911.32 करोड़ रुपये के अनुदान का भुगतान किया गया है।  सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूसन नेटवर्क के कार्य को अभियान के रूप में लें समीक्षा बैठक में बताया गया कि शहरी गैस वितरण को मजबूत बनाने के लिए मध्यप्रदेश शहरी गैस वितरण (सीजीडी) नेटवर्क विकास एवं विस्तार नीति 2025 इस वर्ष 14 फरवरी को लागू की गई। साथ ही एनओसी जारी करने के लिए सिंगल विण्डो पोर्टल शुरू किया गया। इस पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूसन नेटवर्क के कार्य को अभियान के रूप में चलाने की बात कहीं। उन्होंने कहा कि इससे उपभोक्ताओं को लाभ होगा। इससे अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने का कार्य करें।  नवाचार-एसएमएस मॉनिटरिंग से राशन प्रदाय व्यवस्था को बनाया और पारदर्शी विभाग द्वारा बीते दो वर्ष में नवाचार के कई कदम उठाए गए। इसके तहत राशन प्रदाय व्यवस्था को पारदर्शी बनाते हुए हितग्राहियों तक राशन पहुंचने और वितरण संबंधी हर कदम की सूचना एसएमएस द्वारा दी जा रही है। इसके अलावा 26 जनवरी और 2 अक्टूबर को ग्राम सभाओं में राशन वितरण का सार्वजनिक वाचन अनिवार्य किया गया है। जन पोषण केंद्र की शुरुआत सार्वजनिक प्रदाय में नवाचार करते हुए इंदौर जिले की 30 उचित मूल्य की दुकानों को जन पोषण केंद्र के रूप में बदला गया है, जिसके माध्यम से दुकानदारों की मासिक आय में भी 10 से 15 हजार रुपये तक की वृद्धि हुई। जल्द ही प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसका विस्तार किया जाएगा।  मॉनिटरिंग में तकनीक का उपयोग मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना के वाहनों में जीपीएस के माध्यम से स्टेट लेवल कमाण्ड कन्ट्रोल सेंटर से मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई।  इसके अलावा मध्यप्रदेश वेयर हाउसिंग एण्ड लॉजिस्टिक कार्पोरेशन की गतिविधिर्या की रियल टाईम मानिटरिंग के लिए माईश्चर एप, फ्यूमिगेशन एप तथा इंस्पेक्शन एप विकसित किए गए हैं।  उचित मूल्य की दुकानों पर लगेंगी आधुनिक पीओएस मशीनें समीक्षा बैठक में विभाग द्वारा आगामी तीन वर्ष की कार्ययोजना के बारे में बताया गया कि राशन वितरण व्यवस्था को अधिक तेज और पारदर्शी बनाते हुए उचित मूल्य दुकानों पर आधुनिक पीओएस मशीन लगाई जाएगी, जिसमें पीओएस मशीन से तौल कांटे का इंटिग्रेशन एवं आईरिस स्केनर का प्रावधान है।  लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत स्मार्ट पीडीएस योजना का क्रियान्वयन किया जाएगा। इसके अलावा शासकीय गोदामों की छत पर सोलर पैनल लगाने, भण्डारण प्रक्रिया का मॉर्डनाइजेशन और गोदामों का अपग्रेडेशन करने के साथ उन्न्त तकनीकी की सहायता से विभिन्न स्तरों पर डेटा सिंक्रोनाइजेशन के कार्य भी किए जाएंगे।  सिंहस्थ-2028 में अखाड़ों के लिए जारी होंगे अस्थायी राशन कार्ड सिंहस्थ-2028 के लिए खाद्यान्न सामग्री के वितरण के लिए तैयार की गई … Read more

प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार अधिक समावेशी आवासीय क्षेत्रों के विकास का रोडमैप कर रही तैयार

लखनऊ  उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के लिए प्रयासरत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार विजन 2047 के अंतर्गत एक व्यापक कार्ययोजना पर काम कर रही है। प्रदेश के नगरीय आवासीय क्षेत्रों को स्वच्छ, सुरक्षित, हरित तथा जलवायु के अनुकूल बनाने की दिशा में रोडमैप का निर्माण किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों के मोहल्लों को जलवायु तथा पर्यावरण समावेशी स्वरूप देने की रणनीति पर काम किया जा रहा है, ताकि आम नागरिकों को बेहतर जीवन स्तर, शुद्ध हवा, सुरक्षित जलापूर्ति तथा स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराया जा सके। प्रदेश सरकार का उद्देश्य शहरी विकास को केवल सड़कों व भवनों तक सीमित न रखते हुए उसे पर्यावरण संतुलन तथा जनस्वास्थ्य से भी जोड़ना है। यह पूरी कार्ययोजना दो प्रमुख आधारों पर केंद्रित है- पहला, जलवायु सहिष्णु हरित अवसंरचना का विस्तार, वहीं दूसरे घटक के तौर पर जल सुरक्षा एवं पारिस्थितिकीय संतुलन को मजबूत बनाने पर जोर है। इन्हीं दोनों स्तंभों के माध्यम से प्रदेश के शहरी आवासीय क्षेत्रों का व्यापक कायाकल्प किया जाएगा। हरित अवसंरचना से सुरक्षित व स्वस्थ आवासीय क्षेत्र का विकास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने पर फोकस कर रही है। योजना के अनुसार, प्रत्येक नगरी क्षेत्र के लिए सिटी सेंट्रिक क्लाइमेट एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है। इसके माध्यम से वर्षा, तापमान, जलभराव, वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन जैसी स्थानीय जलवायु संकटों का आकलन कर उनके समाधान लागू किए जाएंगे।  कई योजनाओं को बड़े पैमाने पर लागू करने की तैयारी  कार्ययोजना के अनुसार, नगरीय हरित आवरण को लेकर कई पहलों को बड़े पैमाने पर जमीन पर उतारा जाएगा। इसके अंतर्गत, नगरों में पार्क, हरित पट्टियां, हरित गलियारे व खुले हरित क्षेत्र विकसित किए जाएंगे, जिससे आवासीय इलाकों में शुद्ध हवा, तापमान संतुलन और पर्यावरणीय स्वास्थ्य बेहतर हो सके। साथ ही, मोहल्ला स्तर पर जलवायु नियोजन को लागू किया जाएगा, ताकि स्थानीय समस्याओं जैसे जलभराव, बाढ़, अत्यधिक गर्मी और प्रदूषण जैसी समस्याओं की रेगुलकर मॉनिटरिंग कर रियल टाइम में कार्ययोजना क्रियान्वित कर सीधा नियंत्रण स्थापित किया जा सके। जल सुरक्षा और स्वच्छता को मिलेगा स्थायी आधार इस योजना का दूसरा मुख्य उद्देश्य जल सुरक्षा व इकोलॉजिकल सस्टेनेबिलिटी यानी पारिस्थितिकीय सततता को सुदृढ़ करना है। इसके तहत शहरों के तालाबों, झीलों और जलाशयों के पुनरुद्धार की योजनाएं लागू की जाएंगी, जिससे वर्ष भर जल की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी। वर्षा जल संचयन को प्रत्येक आवासीय क्षेत्र में विशेष रूप से बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि भूजल स्तर में सुधार लाया जा सके।  विकेंद्रीकृत अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली होगी विकसित प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में कूड़ा निस्तारण के लिए विकेंद्रीकृत अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली विकसित करने पर फोकस है। कार्ययोजना के अनुसार, मोहल्ला स्तर पर कचरे के पृथक्करण, प्रसंस्करण तथा निस्तारण की व्यवस्था लागू होगी, जिससे स्वच्छता को स्थायी आधार मिलेगा, पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा तथा प्रदूषण में व्यापक स्तर पर कमी आएगी। प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार का मानना है कि इन सभी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से उत्तर प्रदेश के नगरीय आवासीय क्षेत्र न केवल पर्यावरण के अनुकूल बनेंगे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ, सुरक्षित व स्वच्छ जीवन की मजबूत नींव तैयार करेंगे जो देश के अन्य राज्यों के लिए भी रोलमॉडल बनेगा।

लाड़ली बहना योजना में 31वीं किस्त की घोषणा, 1.26 करोड़ महिलाओं के खाते में 1500 रुपये आएंगे

भोपाल  दिसंबर का महीना दस्तक दे चुका है। इसी के साथ मध्य प्रदेश की लाखों महिलाओं की निगाहें एक बार फिर से लाड़ली बहना योजना (Ladli Behna Yojana) की अगली किस्त पर टिक गई हैं। इस बार इस योजना की 31वीं किस्त जारी की जाएगी। इसके तहत 1.26 करोड़ महिलाओं के बैंक खातों में 1250 की राशि डाली जाती थी। वहीं 30वीं किस्त से बहनों के खाते में 1500 रुपए भेजे जा रहे हैं। इससे राज्य सरकार हर महीने योजना पर 1859 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च कर रही है। आपको बता दें कि ये महीना बहनों के लिए खास होने वाला है। चलिए आपको बताते हैं हम ऐसा क्यों कह रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो 9 दिसंबर को छतरपुर जिले के राजनगर से सीएम मोहन यादव किस्त जारी कर सकते है।हालांकि अभी तक अधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। इससे पहले 12 नवंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिवनी से लाड़ली बहनों के खाते में 30वीं किस्त (1250+250= 1500 रू) के रूप में कुल 1857 करोड़ रूपये सिंगल क्लिक के माध्यम से अंतरित किए गए थे। इस योजना की शुरुआत जून 2023 में हुई थी, तब से अक्टूबर 2025 तक बैंक खातों में 44 हजार 917 करोड़ 92 लाख रू का अंतरण कर चुके हैं। जानिए किस जिले में कितनी लाड़ली बहनें     लाड़ली बहना योजना में सबसे अधिक लाभार्थी इंदौर जिले में हैं, जहाँ 4 लाख 40 हजार 723 महिलाओं को योजना का लाभ मिला है। इसके बाद सागर में 4 लाख 19 हजार 903, रीवा में 4 लाख 3 हजार 182, छिंदवाड़ा में 3 लाख 90 हजार 311, धार में 3 लाख 82 हजार 417, जबलपुर 3 लाख 81 हजार 848 ,बालाघाट जिले में 3 लाख 47 हजार 816, उज्जैन में 3 लाख 40 हजार 203, मुरैना में 3 लाख 33 हजार 821 ,छतरपुर में 3 लाख 24 हजार 454, खरगोन में 3 लाख 13 हजार 741, भोपाल में 3 लाख 9 हजार 20 तथा ग्वालियर जिले में 3 लाख 5 हजार 969 महिलाओं को योजना का लाभ प्राप्त हुआ है।     राजगढ़ में 2 लाख 95 हजार 459, शिवपुरी में 2 लाख 87 हजार 943, देवास में 2 लाख 85 हजार 496, विदिशा में 2 लाख 74 हजार 946, भिंड में 2 लाख 72 हजार 343, बेतूल में 2 लाख 71 हजार 474 ,सिवनी जिले में 2 लाख 68 हजार 187, मंदसौर में 2 लाख 62 हजार 827, रतलाम में 2 लाख 50 हजार 176, रायसेन में 2 लाख 46 हजार 390, दमोह में 2 लाख 45 हजार 143, सीहोर में 2 लाख 42 हजार 717, और कटनी में 2 लाख 41 हजार 302 बहनों को राशि का लाभ मिला है।     बड़वानी में 2 लाख 37 हजार 60, गुना में 2 लाख 28 हजार 604, खंडवा में 2 लाख 16 हजार 372, नर्मदापुरम में 2 लाख 9 हजार 837, सिद्धी में 2 लाख 9 हजार 706, टीकमगढ़ में 2 लाख 7 हजार 79, नरसिंहपुर में 2 लाख 8 हजार 734 ,सिंगरौली जिले में 1 लाख 97 हजार 4, मंडला में 1 लाख 95 हजार 153, झाबुआ में 1 लाख 92 हजार 511, शहडोल में 1 लाख 88 हजार 729, पन्ना में 1 लाख 82 हजार 220, शाजापुर में 1 लाख 73 हजार 900, नीमच में 1 लाख 57 हजार 658, तथा अशोक नगर में 1 लाख 55 हजार 387 महिलाएँ इस योजना से लाभान्वित हुई हैं।     दतिया में 1 लाख 44 हजार 239, अनूपपुर में 1 लाख 26 हजार 54, अलीराजपुर में 1 लाख 23 हजार 492, आगर मालवा में 1 लाख 17 हजार 255, उमरिया में 1 लाख 9 हजार 113, श्योपुर में 1 लाख 8 हजार 673, और हरदा जिले में 93 हजार 516 बहनों को योजना की राशि का लाभ मिला है। निवाड़ी जिले में 80 हजार 157 महिलाओं को योजना का लाभ प्राप्त हुआ है। 2023 में शुरू हुई थी लाड़ली बहना योजना     मध्य प्रदेश सरकार द्वारा मई 2023 में लाड़ली बहना योजना शुरू की गई थी।इस योजना के तहत 21 से 60 वर्ष की विवाहित महिलाओं को 1000 रुपए देने का फैसला किया गया था और फिर इसकी पहली किस्त 10 जून को जारी की गई थी।     लाड़ली बहना योजना का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनके जीवन को बेहतर बनाना है।     इसमें रक्षा बंधन पर अगस्त 2023, अगस्त 2024 और अगस्त 2025 में लाभार्थी महिलाओं को 250 रूपये की विशेष सहायता राशि तीन बार प्रदान की गई। 2023 अगस्त में राशि को 1000 से बढ़ाकर 1250 रुपए कर दिया गया ।     नवंबर 2025 में राशि में 250 की फिर वृद्धि की गई है और अब इस योजना के तहत 1500 रुपए महीना के हिसाब से महिलाओं को सालाना 18,000 रुपये मिलते हैं।लाड़ली बहनों को जून 2023 से नवंबर 2025 तक मासिक आर्थिक सहायता राशि की कुल 30 किश्तों का अंतरण किया गया है।     इस प्रकार योजना के आरंभ से अब तक 44,917.92 करोड़ रूपये की राशि का सीधा अंतरण लाभार्थी महिलाओं के खातों में किया जा चुका है।प्रदेश के सभी 52 जिलों में कुल 1,26,36,250 (एक करोड़ 26 लाख 36 हजार 250) महिलाओं को योजना का लाभ प्राप्त हुआ है। लाड़ली बहना योजना में ये अपात्र     महिलाएं, खुद या उनके परिवार में कोई टैक्सपेयर नहीं होना चाहिए ।परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये होना चाहिए।जिनके या उनके परिवार के कोई सदस्य इनकम टैक्स देते हैं।     अगर संयुक्त परिवार है तो 5 एकड़ से ज्यादा जमीन न हो, परिवार में कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी न करता हो।     घर पर ट्रैक्टर, चारपहिया वाहन न हो।जो खुद किसी और सरकारी योजना से हर महीने1250 रुपये या उससे ज्यादा की राशि पा रही हैं जिनके परिवार में कोई वर्तमान या पूर्व सांसद या विधायक हो।     जिनके परिवार का कोई सदस्य सरकारी बोर्ड, निगम, मण्डल आदि का अध्यक्ष, संचालक या सदस्य हो।जिनके परिवार में कोई स्थानीय निकाय का चुना हुआ जनप्रतिनिधि हो (पंच और उपसरपंच को छोड़कर)।     जिनके परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी में … Read more

नीतीश कुमार का बक्सर में घोषणा: बिहार में इंडस्ट्रीज के विकास की गति बढ़ेगी

बक्सर मुख्यमंत्री लगातार ऐसे कदम उठा रहे हैं, जिनसे बिहार में उद्योगों को बढ़ावा मिल सके. नावानगर में चल रही इकाइयों का निरीक्षण करने के बाद उन्होंने उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों, उद्योगों के विस्तार की संभावनाओं और रोजगार बढ़ाने जैसे मुद्दों पर अधिकारियों से विस्तार से बातचीत की.  नीतीश कुमार ने क्या कहा ?  उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास को और तेज किया जाएगा ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल सके.  सीएम ने यहां प्लांट, बॉटलिंग प्लांट और एथेनॉल यूनिट का भी निरीक्षण किया. सबसे पहले उन्होंने वरुण बेवरेजेस लिमिटेड का दौरा किया और पेय पदार्थ बनने की प्रक्रिया को ध्यान से देखा और समझा.  नए गंगा पूल का किया सर्वेक्षण  इस दौरान उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी भी उनके साथ मौजूद थे. इस क्षेत्र में बियाडा ने करीब डेढ़ सौ एकड़ जमीन चिन्हित की है, जिसमें से तीन कंपनियों को जमीन दी जा चुकी है और कुछ इकाइयों में काम भी शुरू हो गया है. बताया गया कि जल्द ही और कंपनियां भी यहां आएंगी. मुख्यमंत्री ने बक्सर में बने नए गंगा पुल का हवाई सर्वेक्षण भी किया.  CM नीतीश ने हाजीपुर में भी किया था दौरा  नीतीश कुमार ने हाजीपुर के औद्योगिक क्षेत्र का भी दौरा किया था.  वहां उन्होंने न्यू जील सीजनल वियर प्राइवेट लिमिटेड, कॉम्पीटेंस एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड और ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड जैसी बड़ी कंपनियों का निरीक्षण कर उत्पादन, बाजार, रोजगार और विस्तार की संभावनाओं पर अधिकारियों और प्रबंधन से चर्चा की थी.