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भारत-साउथ अफ्रीका वनडे सीरीज आज से शुरू, टीम इंडिया जीत के इरादे से उतरेगी मैदान में

नई दिल्ली  इंडिया वर्सेस साउथ अफ्रीका तीन मैच की वनडे सीरीज का आगाज रविवार, 30 नवंबर से होने जा रहा है। IND vs SA ODI सीरीज का पहला मैच रांची के JCSA इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाना है। टेस्ट सीरीज में 0-2 से क्लीन स्वीप होने के बाद भारत की नजरें वनडे सीरीज में मेहमानों से बदला लेने पर होगी। नियमित कप्तान शुभमन गिल के चोटिल होने की वजह से भारत इस सीरीज में केएल राहुल की अगुवाई में खेलेगा। वहीं फैंस रोहित शर्मा और विराट कोहली की जोड़ी को एक बार फिर मैदान पर देखने के लिए काफी एक्साइटेड है। आईए एक नजर भारत बनाम साउथ अफ्रीका वनडे सीरीज से जुड़ी अहम जानकारियों पर डालते हैं- India vs South Africa ODI सीरीज का पहला मैच कब खेला जाएगा? IND vs SA ODI सीरीज का पहला मैच रविवार, 30 नवंबर को खेला जाएगा। इंडिया वर्सेस साउथ अफ्रीका वनडे सीरीज का पहला मैच कहां खेला जाएगा? India vs South Africa ODI सीरीज का पहला मैच रांची के JCSA इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाएगा। IND vs SA ODI सीरीज का पहला मैच कितने बजे शुरू होगा? इंडिया वर्सेस साउथ अफ्रीका वनडे सीरीज का पहला मैच भारतीय समयानुसार दोपहर 1 बजकर 30 मिनट पर शुरू होगा, जबकि टॉस के लिए दोनों कप्तान आधा घंटा पहले यानी 1 बजे मैदान पर उतरेंगे। इंडिया वर्सेस साउथ अफ्रीका वनडे सीरीज का पहला मैच टीवी पर कैसे देखें लाइव? India vs South Africa ODI सीरीज के पहले मैच का लुत्फ आप स्टार स्पोर्ट्स के विभिन्न चैनलों पर अलग-अलग भाषाओं में उठा सकते हैं। IND vs SA ODI सीरीज का पहले मैच की लाइव स्ट्रीमिंग कहां होगी? इंडिया वर्सेस साउथ अफ्रीका वनडे सीरीज के पहले मैच की ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग आप जियोहॉटस्टार ऐप और वेबसाइट पर देख सकते हैं। India vs South Africa ODI सीरीज के पहले मैच को फ्री में कैसे देखें लाइव? IND vs SA ODI सीरीज का पहले मैच को आप डीडी स्पोर्ट्स पर बिल्कुल फ्री में लाइव देख सकते हैं। IND vs SA ODI Squad इंडिया स्क्वॉड: रोहित शर्मा, यशस्वी जायसवाल, विराट कोहली, तिलक वर्मा, केएल राहुल (C, wk), ऋषभ पंत (wk), वाशिंगटन सुंदर, रवींद्र जडेजा, कुलदीप यादव, नीतीश कुमार रेड्डी, हर्षित राणा, रुतुराज गायकवाड़, प्रसिद्ध कृष्णा, अर्शदीप सिंह, ध्रुव जुरेल साउथ अफ्रीका स्क्वॉड: टेम्बा बावुमा (C), ओटनील बार्टमैन, कॉर्बिन बॉश, मैथ्यू ब्रीट्ज़के, डेवाल्ड ब्रेविस, नंद्रे बर्गर, क्विंटन डी कॉक, टोनी डी ज़ोरज़ी, रुबिन हरमन, केशव महाराज, मार्को जेनसेन, एडेन मार्करम, लुंगी एनगिडी, रयान रिकेल्टन, प्रेनेलन सुब्रयान

मानव नहीं, रोबोट करेंगे चीन बॉर्डर पर ड्यूटी, AI टेक्नोलॉजी ने सीमाओं पर बदल दी तस्वीर

बीजिंग   टेक्नोलॉजी की दुनिया से बड़ी खबर सामने आ रही है. जरा सोचिए दो देशों के सीमा पर जहां अभी तक लंबी लाइनों में इंसानी स्टाफ यात्रियों को गाइड करते हैं वहीं काम अब रोबोट संभालेंगे! पड़ोसी मुल्क चीन ने अपने बॉर्डर क्रॉसिंग पर ऐसे ह्यूमनॉइड रोबोट्स का सफल ट्रायल पूरा कर लिया है और अब दिसंबर से इनकी तैनाती भी शुरू कर देगा. यह कदम न सिर्फ यात्रा प्रक्रिया को तेज बनाएगा बल्कि बार्डर मैनेजमेंट में टेक्नोलॉजी की नई क्रांति का संकेत भी देता है. शेन्जेन स्थित कंपनी यूबीटेक रोबोटिक्स (UBTech Robotics) को इस प्रोजेक्ट के लिए करीब ₹308 करोड़ रुपये मिले हैं. कंपनी के वॉकर नाम के  ह्यूमनॉइड मॉडल्स का इस्तेमाल वियतनाम बॉर्डरके पास एक टेस्टिंग सुविधा में किया जाएगा. रोबोट क्या करेंगे? इस ट्रायल के तहत ये रोबोट्स को दिसंबर में तैनात कर दिया जाएगा. ये रोबोट्स कई बॉर्डर- कंट्रोल कार्यों में मदद करेंगे, जिनमें शामिल हैं- बॉर्डर पार करने वाले यात्रियों को सही दिशा दिखाना. लंबी लाइनों को व्यवस्थित करना. लॉजिस्टिक्स कामों को संभालना ये रोबोट पास की फैक्ट्रियों में गश्त भी कर सकते हैं. इन रोबोट्स की एक सबसे खास बात यह है कि ये अपनी बैटरी खुद बदल सकते हैं जिससे वे बिना रुके काम कर सकते हैं. लेकिन यह साफ नहीं है कि  ये रोबोट ऑनबोर्ड AI पर काम करेंगे या इन्हें रिमोट से कंट्रोल किया जाएगा. चीन का रोबोटिक्स पर जोर चीन का यह कदम सरकार के उस बड़े प्रयास का हिस्सा है जिसके तहत पब्लिक सर्वस में रोबोट्स को तेजी से तैनात किया जा रहा है. चीन ने रोबोटिक्स को एक राष्ट्रीय प्राथमिकता बना दिया है. एक कंसल्टेंसी के मुताबिक चीन का ह्यूमनॉइड बिजनेस 2025 तक CNY 82 बिलियन यानी करीब ₹95,000 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है जो ग्लोबल सेल का लगभग आधा होगा. जानकारों का मानना है कि प्रोडक्शन में वृद्धि हो सकती है लेकिन वास्तविक दुनिया में उनकी तैनाती अभी भी सीमित है. ड्रैगन का यह कदम बताता है कि चीन अपनी सीमाओं पर आधुनिकता लाने के लिए तकनीक का सहारा ले रहा है. 

नक्सलियों में हड़कंप: 15 लाख के इनामी धनुष ने पत्नी सहित चुनी शांति की राह, MP में सरेंडर बढ़े

बालाघाट   मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कई जिले, जो कभी लाल आतंक के खौफ से दहल जाते थे, जहां माओवादियों बंदूक की दम पर अपना एकाधिकार स्थापित करना चाहते थे, अब वहां परिस्थितियां बदलती नजर आ रही हैं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा जारी की गई डेडलाइन के बाद नक्सली पूरी तरह बैकफुट पर आ गए है. इसके अलावा हॉक फोर्स द्वारा चलाए जा रहे नक्सल उन्मूलन ऑपरेशन का भी असर दिखने लगा है. बालाघाट और आसपास नक्सलियों का सरेंडर हाल ही में मध्य प्रदेश के बालाघाट में नक्सली सुनीता ने आत्मसर्पण किया था. अब बालाघाट में सक्रिय रहे धनुष और उसकी पत्नी ने छत्तीसगढ़ में सरेंडर किया है. इस प्रकार नक्सली अब सरेंडर की राह पर चल पड़े हैं. माओवादियों के सेंट्रल कमेटी के मेंबर रामदेर के साथ 15 नक्सली बालाघाट आए थे, जिनकी आधी टीम अब खाली हो चुकी है. इसके बाद इसी टीम में सक्रिय रहे नक्सली कपल ने भी अब समर्पण की राह चुनी है. दोनों ने छत्तीसगढ़ में खैरागढ़ के बकरकट्टा थाने में सरेंडर किया है. नक्सली धनुष पर 14 लाख इनाम घोषित था सरेंडर करने वाले धनुष और उसकी पत्नी रोनी उर्फ तुले दोनों 25 वर्ष के हैं. धनुष पर सरकार ने 14 लाख का इनाम रखा था. ये नक्सली कपल जीआरबी डिवीजन के टांडा मलाजखण्ड दलम के सदस्य थे, जो कई नक्सली गतिविधियों में शामिल थे. विगत 20 मई को बिलालकसा के जंगल में हुई मुठभेड़ मे धनुष भी शामिल था. नक्सली कपल ने सरेंडर करते हुए कहा है "अब वे सम्मानजनक और शांतिपूर्ण जीवन जीना चाहते हैं. दोनों नक्सली सीसी मेंबर रामदेर के साथ बालाघाट आए थे. जो जनवरी 2025 से एमएमसी जोन में सक्रिय थे." फर्राटेदार अंग्रेजी बोलता है नक्सली धनुष सरेंडर करने वाला नक्सली धनुष संगठन में टेक्नीकल काम संभालता था. उसे हिंदी और अंग्रेजी भाषा की अच्छी जानकारी है और वह कंम्प्यूटर सहित अन्य दूसरी चीजों की भी गहरी जानकारी रखता है. नक्सली धनुष न केवल फर्राटेदार अंग्रेजी बोलता है बल्कि जबरदस्त स्पीड के साथ वह टायपिंग भी करता है. धनुष के सरेंडर के बाद बालाघाट में एंटी नक्सल ऑपरेशन के एडिशनल एसपी आदर्शकान्त शुक्ला ने बताया "धनुष नक्सल साहित्य, प्रेस नोट, और मैगजीन प्रभात के लिए कंटेट राईटिंग का काम करता था."  सरकार ने तय की है मार्च 2026 तक डेडलाइन धनुष की पत्नी रोनी उर्फ तुले सीसी मेंबर रामदेर के साथ काम कर चुकी है. वहीं, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में नक्सलियों के बड़े नेताओं द्वारा बड़ी संख्या में नक्सलियों के साथ सरेंडर किया जा रहा है. मार्च 2026 नक्सलवाद के पूरी तरह से खात्मे की तारीख पहले ही गृह मंत्री अमित शाह द्वारा घोषित कर दी गई है. लगता है इस तारीख से पहले ही नक्सलवाद देश से पूरी तरह समाप्त हो जाएगा. एमएमसी जोन (मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़) में तीनों राज्यों का संयुक्त ऑपरेशन जारी है. ऐसे में नक्सलियों पर काफी दबाव बढ़ गया है. नक्सलियों ने सरेंडर की डेडलाइन बढ़ाने की लगाई गुहार नक्सलियों ने पहले एक प्रेस नोट जारी कर समय मांगते हुए जवानों द्वारा चलाये जा रहे ऑपरेशन को रोकने की मांग की थी, उसके बाद फिर नक्सलियों की तरफ से समय दिये जाने की अपील की गई है. लेकिन सरकार की तरफ से फिलहाल नक्सलियों द्वारा मांगी गई मोहलत पर कोई विचार नहीं किया गया है और न ही किसी तरह का जवाब दिया गया है. मध्य प्रदेश के बालाघाट में सरकार ने एक होनहार हॉक फोर्स निरीक्षक को खोया है. ऐसे में प्रदेश सरकार किसी तरह से नक्सलियों से बातचीत के मूड में फिलहाल नजर नहीं आ रही है. 

भारत को IMF का नया लक्ष्य—कुछ साल बाद 5 ट्रिलियन डॉलर क्लब में एंट्री!

 नई दिल्‍ली       इंटरनेशल मोनिटरी फंड (IMF) ने भारत को नया टारगेट दे दिया है. IMF ने 26 नवंबर को अपनी एक नई रिपोर्ट जारी की है, जिसके अनुसार भारत के अब वित्त वर्ष 29 में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के मील के पत्थर तक पहुंचने की उम्मीद है, जो पहले के अनुमान से एक पूरा वर्ष बाद है.  भारत का लंबे समय से 5 ट्रिलियन डॉलर के जीडीपी टारगेट पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है. आईएमएफ की रिपेार्ट में कहा गया है कि लक्ष्य तक पहुंचने में देरी, उम्‍मीद से धीमी ग्रोथ और अनुमान से कहीं ज्‍यादा तेज रुपये में बदलाव को दिखाती है.  आईएमएफ के 2025 के अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 28 में भारत का GDP सिर्फ़ 4.96 ट्रिलियन डॉलर रहेगा, जो इस साल की शुरुआत में अनुमानित 5.15 ट्रिलियन डॉलर से कम है और 2023 के 5.96 ट्रिलियन डॉलर के अनुमान से भी काफी कम है.  जीडीपी अनुमान में क्‍यों कटौती?  आईएमएफ ने कहा कि डॉलर बेस्‍ड GDP पूर्वानुमान में कटौती का मुख्‍य कारण रुपये में गिरावट है. आईएमए ने वित्त वर्ष 2025 के लिए विनिमय दर अनुमान को 82.5 रुपये प्रति डॉलर से संशोधित कर 84.6 रुपये प्रति डॉलर कर दिया है.र्ष 2026 और वित्त वर्ष 2027 के लिए, अब यह क्रमशः 87 रुपये और 87.7 रुपये तक और कमजोर होने का अनुमान है. 21 नवंबर को रुपया 89.49 रुपये प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा था.  नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ का अनुमान इस बदलाव ने IMF को भारत के एक्‍सचेंज रेट व्‍यवस्‍था को 'स्थिर' से 'क्रॉल जैसे' में क्‍लासिफाइड करने के लिए प्रेरित किया है, जो करेंसी में हुए बदलाव के ट्रांसपैरेंसी का संकेत देता है. आईएमएफ ने नॉमिननल जीडीपी ग्रोथ अनुमानों  में भ्‍ली कटौती की है.  आईएमएफ अब वित्त वर्ष 26 में 8.5% की वृद्धि की उम्मीद कर रहा है, जो 2024 के 11% के अनुमान से कम है. डॉलर के संदर्भ में इसका अर्थ है कमजोर ग्रोथ वित्त वर्ष 26 में 5.5% और वित्त वर्ष 27 में 9.2% रहेगा, क्योंकि विनिमय दर संबंधी अनुमान वास्तविक विस्तार को कमज़ोर कर रहे हैं.  इन झटकों के बावजूद, आईएमएफ का मानना ​​है कि भारत सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है, जिसका श्रेय मज़बूत घरेलू मांग और बेहतर होते इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को जाता है. रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि अगर प्रमुख व्यापार समझौते अंतिम रूप ले लेते हैं और सुधारों की गति बनी रहती है, तो भारत का भविष्य बेहतर हो सकता है.  भारत ने कुछ धारणाओं को खारिज कर दिया है, विशेष रूप से इस उम्मीद को कि भारतीय निर्यात पर 50% अमेरिकी टैरिफ जारी रहेगा, मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट में आईएमएफ के नजरिए को अत्यधिक रूढ़िवादी बताया गया है.

डराने वाले आंकड़े! संयुक्त राष्ट्र ने कहा—हर 10 मिनट में एक महिला की होती है हत्या

नई दिल्ली संयुक्त राष्ट्र के ड्रग्स और अपराध निरोधक कार्यालय (UNODC) और महिला सशक्तिकरण के लिए संस्था (UN Women) ने एक साझा रिपार्ट प्रकाशित की है, जो बताती है कि वर्ष 2024 में, 50 हज़ार लड़कियों और महिलाओं को, उन्हीं के अंतरंग साथी या परिवार के सदस्यों के हाथों मार डाला गया. रिपोर्ट के अनुसार, हर 10 मिनट में 1 लड़की या महिला की हत्या होना यह दर्शाता है कि वैश्विक प्रतिबद्धताओं के बावजूद, आज भी कुछ विशेष परिवर्तन नहीं आया है.हर दिन औसतन 137 लड़कियों और महिलाओं की हत्या कर दी जाती है.  83 हज़ार इरादतन हत्या के मामले महिलाओं की हत्या – 2025 नामक यह रिपोर्ट, महिलाओं के प्रति हिंसा उन्मूलन के अन्तरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर प्रकाशित की गई है.2024 में, 83 हज़ार लड़कियों और महिलाओं की इरादतन हत्या कर दी गई, जिनमें से 50 हज़ार यानि 60 प्रतिशत हत्याएँ अंतरंग साथी या परिवार के किसी सदस्य के हाथों की गई.  रिपोर्ट के अनुमानों के अनुसार, इस तरह की हत्याएँ सबसे अधिक अफ़्रीका में – हर 1 लाख में से 3 लड़की या महिला, और योरोप में सबसे कम दर्ज की गई हैं.जबकि, इसके उलट अपने किसी अंतरंग साथी या पारिवारिक सदस्य के हाथों हत्या के शिकार होने वाले पुरुषों का आँकड़ा 11 प्रतिशत है. संयुक्त राष्ट्र के 'इंटरनेशनल डे फॉर द एलिमिनेशन ऑफ वॉयलेंस अगेंस्ट विमेन' के मौके पर जारी 2025 फेमिसाइड रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनियाभर में महिलाओं और लड़कियों की हत्या के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और इनमें कोई वास्तविक सुधार नहीं दिख रहा. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष 83,000 महिलाओं और लड़कियों की हत्या की गई, जिनमें से 60% यानी 50,000 महिलाएं और लड़कियां अपने करीबी साथी या परिवार के सदस्यों के हाथों मारी गईं. इसका मतलब है कि हर दस मिनट में एक महिला या लड़की घर के अंदर या परिवार के हाथों जान गंवा रही है. इसके उलट पुरुषों की हत्याओं में केवल 11% मामलों में साथी या परिवार जिम्मेदार थे. यह अंतर हिंसा की प्रकृति और खतरे की गंभीरता को उजागर करता है. यूएन विमेन की नीति विभाग की निदेशक सारा हेंड्रिक्स ने कहा कि फेमिसाइड अकेले नहीं होता. यह अक्सर नियंत्रण, डराने-धमकाने, ऑनलाइन उत्पीड़न या डिजिटल हिंसा की शुरुआत से लेकर बढ़ते-बढ़ते जानलेवा रूप ले लेता है. उन्होंने चेतावनी दी कि डिजिटल हिंसा अक्सर ऑफलाइन भी फैलती है और कई बार महिलाओं की हत्या तक पहुंच जाती है. यूएनओडीसी के कार्यकारी निदेशक जॉन ब्रांडोलिनो ने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में ‘घर’ महिलाओं और लड़कियों के लिए सबसे खतरनाक जगह बन चुका है. उन्होंने महिलाओं की हत्या को रोकने के लिए बेहतर रणनीतियों, मजबूत कानूनों और प्रभावी आपराधिक न्याय व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया.2025 की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यह हिंसा दुनिया के लगभग हर क्षेत्र में मौजूद है. सबसे ज्यादा फेमिसाइड दर अफ्रीका (3 प्रति 1 लाख महिलाएं) में दर्ज की गई, जिसके बाद अमेरिका (1.5), ओशिआनिया (1.4), एशिया (0.7) और यूरोप (0.5) का स्थान आता है. रिपोर्ट बताती है कि घर के बाहर यानी सार्वजनिक स्थानों पर होने वाली फेमिसाइड का डेटा अभी भी सीमित है, जिसकी वजह से वास्तविक स्थिति का पूरा आकलन करना मुश्किल है. डेटा की कमी दूर करने के लिए यूएन विमेन और यूएनओडीसी 2022 के सांख्यिकीय फ्रेमवर्क के आधार पर देशों के साथ काम कर रहे हैं ताकि ऐसी हत्याओं की बेहतर पहचान, रिकॉर्डिंग और वर्गीकरण किया जा सके. रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि 2024 में परिवार/साथी के हाथों मारी गई महिलाओं की संख्या (50,000) पिछली रिपोर्ट (51,100) से थोड़ी कम जरूर है, लेकिन यह गिरावट वास्तविक कमी का संकेत नहीं है, बल्कि कई देशों में डेटा उपलब्धता में बदलाव की वजह से ऐसा दिख रहा है. 16 Days Campaign क्या है?  हर साल 25 नवंबर से 10 दिसंबर तक चलने वाला 16 Days of Activism अभियान महिलाओं के खिलाफ हिंसा को खत्म करने के लिए UN Women की पहल है. 2025 में यह अभियान डिजिटल हिंसा को खत्म करने पर केंद्रित है, जिसमें ऑनलाइन उत्पीड़न, स्टॉकिंग, जेंडर्ड डिसइन्फॉर्मेशन, डीपफेक्स और बिना अनुमति निजी तस्वीरें शेयर करने जैसी समस्याएं शामिल हैं. यह सभी तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ तेजी से बढ़ रही हैं. UN Women ने सरकारों, टेक कंपनियों और समुदायों से अपील की है कि कानूनों को मजबूत बनाया जाए, डिजिटल हिंसा पर सख्त कार्रवाई हो, और पीड़ितों के लिए सुरक्षित व सहायक वातावरण तैयार किया जाए. सुरक्षित रहने का अधिकार यूएन वीमैन की नीति विभाग की निदेशक सारा हैंड्रिक्स का कहना है कि महिलाओं की हत्या, किसी एकाकी घटना का परिणाम नहीं होती. यह अक्सर हिंसा की निरन्तर श्रृंखला का हिस्सा होती है, जो नियंत्रण करने वाले व्यवहार, धमकियों और उत्पीड़न से भी शुरू हो सकती है. उन्होंने कहा कि इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र का 16 दिनों तक चला अभियान, यह उजागर करता है कि डिजिटल हिंसा, सिर्फ़ ऑनलाइन ही सीमित नहीं है. यह ऑनलाइन मंचों से हटकर वास्तविकता में भी गम्भीर रूप ले सकती है, और ये हिंसा, अत्यंत भयावह मामलों में हत्या का रूप भी ले सकती है.निदेशक सारा हैंड्रिक्स ने कहा कि हर लड़की और महिला को अपने जीवन के हर पहलू में, सुरक्षित रहने का अधिकार है.  इन हत्याओं से बचने के लिए ज़रूरत है ऐसे क़ानूनों को कड़ाई से लागू किए जाने की, जो महिलाओं और लड़कियों के जीवन में हिंसा के ऑनलाइन और ऑफ़लाइन रूपों को समझें और अपराधियों की कठोर जवाबदेही तय करें.UNODC के कार्यवाहक कार्यकारी निदेशक जॉन ब्रांडोलिनो ने कहा कि दुनिया भर में बहुत-सी महिलाओं और लड़कियों के लिए घर, आज भी एक ख़तरनाक और कई बार जानलेवा जगह बने हुए हैं.  महिलाओं की हत्याएँ घर के बाहर भी होती हैं, पर इनके आँकड़े बेहद सीमित हैं.  इन कमियों को दूर करने के लिए यूएन वीमैन और UNODC, वर्ष 2022 के सांख्यिकीय ढाँचे के ज़रिए, बेहतर पहचान और आलेखन पर काम कर रहे हैं. सटीक डेटा बेहद महत्वपूर्ण है, ताकि समस्या की वास्तविक गम्भीरता समझी जा सके, प्रभावी क़दम उठाए जा सकें और पीड़ितों को न्याय मिल सके.

YouTube पर भारत का रिकॉर्ड तोड़ा ‘श्री हनुमान चालीसा’, 5 अरब व्यूज पार, सेकंड नंबर भी रोचक

मुंबई  'श्री हनुमान चालीसा' YouTube पर 5 अरब से भी ज्यादा बार देखा जाने वाला भारत का पहला वीडियो बन गया है। भारत में सबसे ज्यादा देखे जाने वाले वीडियो की लिस्ट में यह सबसे ऊपर है। दूसरे नंबर आए वीडियो ने 2 अरब व्यूज का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाया है। वहीं, 'श्री हनुमान चालीसा' को 5 अरब से भी ज्यादा बार देखा जा चुका है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह वीडियो 10 मई, 2011 को रिलीज हुआ था और इसमें टी-सीरीज के दिवंगत गुलशन कुमार नजर आते हैं। 14 साल पुराने इस वीडियो को आज भी काफी पसंद किया जाता है। इस वीडियो में हरिहरन की आवाज और ललित सेन का म्यूजिक दिया गया है। इसने कई बॉलीवुड गानों को पीछे छोड़ दिया है। आप जानकर हैरान होंगे कि दूसरे नंबर पर बॉलीवुड का कोई हिंदी गाना नहीं है। दूसरे नंबर पर कौन सा वीडियो? भारत में यूट्यूब पर सबसे ज्यादा देखे जाने वाले वीडियोज की लिस्ट में 'श्री हनुमान चालीसा' केबाद कोई हिंदी नहीं बल्कि पंजाबी गाना है। जी हां, दूसरे नंबर पर पंजाबी गाना 'लहंगा' है, जिसे 1.8 अरब व्यूज मिले हैं। इसके बाद हरियाणवी गाना '52 गज का दामन' और तमिल गाना 'रॉडी बेबी' हैं। इन दोनों वीडियोज को 1.7 अरब व्यूज मिले हैं। इनके अलावा, टॉप लिस्ट में 'जरुरी था', 'वास्ते', 'लॉन्ग लाची', 'लुट गए', 'दिलबर' और 'बम बम बोले' जैसे दूसरे लोकप्रिय भारतीय वीडियो भी शामिल हैं। दुनिया भर में सबसे ज्यादा देखे गए ये वीडियो भारत के अलावा, हम अगर दुनिया भर में यूट्यूब पर सबसे ज्यादा देखे जाने वाले वीडियो की बात करें तो इस लिस्ट में 16.38 अरब व्यूज के साथ 'बेबी शार्क डांस', 8.85 अरब व्यूज के साथ 'डेस्पैसिटो', 8.16 अरब व्यूज के साथ 'व्हील्स ऑन द बस', 7.28 अरब व्यूज के साथ 'बाथ सॉन्ग' और 7.12 अरब व्यूज के साथ 'जॉनी जॉनी यस पापा' जैसे वीडियो टॉप में हैं। इन चुनिंदा ग्लोबल वीडियो की लीग में 'श्री हनुमान चालीसा' भी शामिल हो गया है। पहले भी बना चुका है रिकॉर्ड इस वीडियो ने पहली बार कोई रिकॉर्ड नहीं बनाया है। साल 2023 में भी इसने इतिहास रचा था। तब यह 3 बिलियन व्यूज वाला भारत का पहला वीडियो बना था। हनुमान चालीसा के रिकॉर्ड तोड़ वीडियो में गुलशन कुमार भगवान हनुमान जी की मूर्ति के सामने गाते हुए दिख रहे हैं। वीडियो की लम्बाई 9.42 मिनट की है। वीडियो टी-सीरीज ने 2011 में बनाया था जिसको अब 14 साल से ज्यादा का समय बीत चुका है। वीडियो को 2 करोड़ लाइक्स भी मिल चुके हैं। इस पर 30 लाख के करीब कमेंट्स भी किए गए हैं। साथ ही यूजर्स ने इस वीडियो के 5 अरब व्यूज पार करने पर खुशी भी जाहिर की है। यह यू-ट्यूब पर अबतक देखे गए टॉप 10 वीडियोज में से एक है।  श्री हनुमान चालीसा को ललित सेन ने रचा है। इस वीडियो का निर्देशन शंभू गोपाल ने किया है। हरिहरन की मखमली आवाज में उपलब्ध यह वीडियो दुनियाभर में श्रद्धालुओं के लिए आस्था, विश्वास और शक्ति का एक स्रोत बनी हुई है जिसे लाखों लोग रोज देखते और सुनते हैं।  लेटेस्ट टेक न्यूज़, स्मार्टफोन रिव्यू और लोकप्रिय मोबाइल पर मिलने वाले एक्सक्लूसिव ऑफर के लिए गैजेट्स 360 एंड्रॉयड ऐप डाउनलोड करें और हमें गूगल समाचार पर फॉलो करें। गुलशन कुमार ने बेटे ने जाहिर की खुशी इस मौके पर टी-सीरीज के मैनेजिंग डायरेक्टर और गुलशन कुमार के बेटे भूषण कुमार ने खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा है कि हनुमान चालीसा करोड़ों लोगों के दिलों में एक खास जगह रखता है, मेरे दिल में भी। मेरे पिता, श्री गुलशन कुमार जी ने अपना जीवन आध्यात्मिक संगीत को हर घर तक पहुंचाने में लगा दिया था। 5 अरब व्यूज पार करना और यूट्यूब के अब तक के टॉप 10 सबसे ज्यादा देखे जाने वाले वीडियो में शामिल होना सिर्फ एक डिजिटल उपलब्धि नहीं है। यह इस देश में लोगों की अटूट भक्ति को दिखाता है। 'हनुमान चालीसा' के कई वर्जन को छोड़ा पीछे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यूट्यूब पर 'हनुमान चालीसा' के कई वर्जन हैं। इन सब के बीच सबसे ज्यादा ट्रेंडिंग और व्यूज के मामले में टी-सीरीज के संस्थापक गुलशन कुमार के इस वीडियो के बाजी मार ली है। इस वीडियो को शंभू गोपाल ने डायरेक्ट किया है।

पेट की फैट और किडनी स्वास्थ्य का कनेक्शन: स्टडी में बताया गया सही कमर माप

मुंबई   मोटापा की स्थिति तब मानी जाती है, जब शरीर में फैट इस सीमा तक बढ़ जाता है कि वह स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने लगता है और उसके कारण आप अपनी डेली लाइफस्टाइल के काम नहीं कर पाएं. एक्सपर्ट के मुताबिक, बॉडी मास इंडेक्स (BMI) अगर 30 या इससे अधिक है, तो इसे मोटापा माना जाता है. वैसे तो मोटापे के कारण कई बीमारियां हो सकती हैं लेकिन हाल ही में BMC Nephrology जर्नल में पब्लिश स्टडी में दावा किया गया है कि सिर्फ वजन बढ़ना या मोटापे तक सीमित नहीं है बल्कि आपके कमर की चर्बी आपकी किडनी को भी नुकसान पहुंचा सकती है. क्या कहती है स्टडी? स्टडी में वैज्ञानिकों ने इस बात को जानने की कोशिश की कि कमर और ऊंचाई का अनुपात (Waist-to-Height Ratio, WHtR), किडनी की कार्यक्षमता में तेजी से गिरावट (Rapid Kidney Function Decline, RKFD) और गुर्दे की दीर्घकालीन बीमारी (Chronic Kidney Disease, CKD) के बीच क्या संबंध है. इस स्टडी में 4374 लोगों को शामिल किया गया था जिनकी किडनी की स्थिति स्टडी से पहले नॉर्मल थी. फिर हर इंसान की कमर और ऊंचाई का अनुपात निकाला गया और उन्हें लगभग चार साल तक फॉलो किया गया. स्टडी के दौरान देखा गया कि किन लोगों की किडनी की प्रोडक्टिविटी में गिरावट (RKFD) आई है और किन लोगों को क्रोनिक किडनी डिसीज (CKD) की समस्या हुई है. रिसर्च के रिजल्ट में सामने आया कि जिन लोगों का कमर और ऊंचाई का अनुपात अधिक था, उनमें किडनी फंक्शन गिरने का खतरा 30% तक बढ़ गया और CKD का खतरा लगभग 50% अधिक था. वहीं जिन लोगों की कमर का अनुपात सबसे अधिक था, उनमें CKD का रिस्क कमर के सबसे कम कमर वाले ग्रुप के मुकाबले करीब 4 गुना अधिक पाया गया था. रिसर्चर्स ने यह भी बताया कि कमर और ऊंचाई का अनुपात, किसी व्यक्ति में किडनी डिजीज का खतरा जानने के लिए बीएमआई से कहीं ज्यादा सटीक है. क्या पाया वैज्ञानिकों ने वैज्ञानिकों को पता चला कि पेट की चर्बी सिर्फ मोटापे का नहीं बल्कि किडनी डिजीज का भी बड़ा कारण बन सकती है. चीन में की गई इस रिसर्च के नतीजे बताते हैं कि अगर आपकी कमर आपकी ऊंचाई के मुकाबले ज्यादा है तो आपकी किडनी की प्रोडक्टिविटी धीरे-धीरे घट सकती है और आगे चलकर CKD जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ सकता है. बीएमआई नहीं है सटीक पैमाना वैज्ञानिकों के मुताबिक, आम तौर पर लोग अपने स्वास्थ्य का आकलन BMI से करते हैं लेकिन बीएमआई केवल वजन और लंबाई के हिसाब से मोटापा बताता है, वह यह नहीं बताता कि शरीर में फैट कहां जमा है. अब ऐसे में यदि किसी के पेट के चारों ओर अधिक चर्बी जमा है तो वह सबसे नुकसान पहुंचाती है क्योंकि इसके कारण हाई ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर को बढ़ाने की क्षमता होती है और यह मेटाबॉलिक सिस्टम को बिगाड़ देती है. कितना होना चाहिए कमर का साइज? स्टडी में यह भी देखा गया कमर और ऊंचाई का अनुपात और किडनी की प्रोडक्टिविटी में कमी के बीच सीधा-सीधा संबंध है. यानी जैसे-जैसे पेट की चर्बी बढ़ेगी, वैसे-वैसे किडनी की सेहत गिरती जाएगी. वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया कि अगर किसी व्यक्ति का कमर और ऊंचाई का अनुपात 0.50 से ज्यादा है यानी आपकी कमर आपकी ऊंचाई के आधे से अधिक तो उसे अपनी लाइफस्टाइल और डाइट पर तुरंत ध्यान देना चाहिए. उदाहरण के लिए यदि आपकी ऊंचाई 170 सेमी है तो आपकी कमर 85 सेमी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. यह छोटा-सा पैमाना आपकी किडनी की उम्र बढ़ा सकता है. हालांकि यह रिसर्च केवल चीन की आबादी पर आधारित थी और इसकी अवधि करीब चार साल की थी इसलिए इसे पूरी दुनिया की जनसंख्या पर लागू नहीं किया जा सकता. इसके बावजूद, यह एक मजबूत सबूत देता है कि पेट की चर्बी से शरीर के अंदर की हेल्थ पर भी लागू होती है.

ब्रेकफास्ट मीटिंग में सिद्धारमैया से मिले शिवकुमार, कहा—संदेश स्पष्ट रूप से दिया गया

बेंगलुरु कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शनिवार को प्रदेश कांग्रेस में दरार के विपक्ष के दावों को खारिज करने की कोशिश की. सीएम आवास पर डीके शिवकुमार के साथ नाश्ते पर हुई बैठक के बाद, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा, 'उपमुख्यमंत्री और मेरे बीच कोई मतभेद नहीं हैं. हम साथ-साथ हैं. वे (भाजपा और जेडीएस) कह रहे हैं कि अविश्वास प्रस्ताव लाएंगे. हम उसका सामना करेंगे.' सिद्धारमैया ने ये बातें मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुई कहीं, उनके बगल में शिवकुमार बैठे थे और मुस्कुरा रहे थे. डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री संगठ ब्रेकफास्ट मीटिंग के बाद मीडियाकर्मियों से बातचीत में किसी भी बगावत की संभावना को खारिज किया. कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री ने कहा, 'हमें जो भी संदेश देना था, मुख्यमंत्री और मैंने सभी कांग्रेस सदस्यों को दे दिया है. हम कांग्रेस के साथ खड़े हैं और पार्टी के ​लिए प्रतिबद्ध हैं. बहुत सारे मुद्दे हैं, खासकर सिंचाई और शहरी विकास के. मुझे दिल्ली जाना है. मुझे केंद्रीय मंत्रियों से भी मुलाकात का समय लेना है. मैं अचानक दिल्ली नहीं जा सकता. मुख्यमंत्री और मैं एक सर्वदलीय बैठक चाहते थे. क्योंकि हम गन्ना, मक्का और राज्य में वर्तमान में मौजूद कुछ अन्य मुद्दों पर एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल दिल्ली ले जाना चाहते थे.' अब शिवकुमार के घर डिनर करेंगे सिद्धारमैया डीके शिवकुमार ने कहा कि सीएम आवास पर नाश्ते पर हुई बैठक के बाद, सिद्धारमैया दोपहर या रात के भोजन के लिए उनके घर आएंगे. उन्होंने कहा, 'पार्टी आलाकमान जो भी कहेगा, वही हमारा भी फैसला होगा. हम पार्टी के वफादार सिपाही रहे हैं. हम जानते हैं कि पार्टी देश में मुश्किल दौर से गुजर रही है. लेकिन हमें पूरा विश्वास है कि कर्नाटक एक बड़ी भूमिका निभाएगा; हम 2028 में दोबारा सरकार बनाएंगे और मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के नेतृत्व में 2029 में भी आगे बढ़ेंगे. आज हमने 2028 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति और विपक्ष से निपटने के तरीकों पर चर्चा की. वे कई मुद्दे उठाने की कोशिश कर सकते हैं. हम जवाब देने के लिए तैयार हैं.' राज्य में कांग्रेस सरकार के ढाई साल पूरे होने पर 20 नवंबर को शिवकुमार द्वारा सीएम बदलने का मुद्दा उठाया गया था. यह मुद्दा एक सप्ताह से भी अधिक समय से चल रहा है और राज्य विधानमंडल का सत्र 8 दिसंबर को होना है. कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने दोनों नेताओं से आपस में ही इस मुद्दे को जल्द से जल्द सुलझाने को कहा है. अब शिवकुमार का कहना है कि उन्हें कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनने की कोई जल्दी नहीं है. उन्होंने कहा, 'पार्टी कार्यकर्ता उत्सुक हो सकते हैं, लेकिन मुझे कोई जल्दी नहीं है. पार्टी ही सारे फैसले लेगी.' विपक्ष का कर्नाटक कांग्रेस में अंतर्कलह का दावा  सिद्धारमैया और शिवकुमार के 'ऑल इज वेल' के दावों के बावजूद विपक्षी दल भाजपा और जनता दल सेक्युलर का कहना है कि कर्नाटक कांग्रेस में दरार अब भी बनी हुई है. सिद्धारमैया-शिवकुमार की मुलाकात के बाद, जेडीयू विधायक निखिल कुमारस्वामी ने कहा, 'आज कांग्रेस इडली परोस रही है. वे सिर्फ नाश्ते के लिए एकजुट हैं, लेकिन कांग्रेस पार्टी बंटी हुई है. हमें इससे कोई उम्मीद नहीं है; कर्नाटक की जनता इसका खामियाजा भुगत रही है.'

प्रयागराज में बदलाव का संकेत: गंगा पर बन रहा 10 किलोमीटर लंबा सुपर पुल

प्रयागराज  संगम नगरी की सुबहें हमेशा से लोगों के लिए खास रही हैं- लेकिन आने वाले दिनों में शहर की पहचान में एक और नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। गंगा की विशाल धारा के ऊपर बीते तीन वर्षों से तैयार हो रहा सिक्स लेन पुल अब लगभग अपने आखिरी पड़ाव पर है। लंबे समय से इस परियोजना का इंतज़ार कर रहे शहरवासियों के लिए यह खबर बड़ी राहत की है, क्योंकि यह पुल प्रयागराज के ट्रैफिक सिस्टम में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाला है। 200 टन का सेगमेंट लगते ही निर्माण स्पीड में उछाल स्टेनली रोड से मलाक हरहर तक फैले करीब 9.9 किलोमीटर लंबे इस पुल का निर्माण अब तेज़ रफ़्तार पकड़ चुका है। हाल ही में 200 टन का भारी सेगमेंट स्थापित किया गया, जिसके बाद तकनीकी रूप से सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्से अब लगभग पूरे हो चुके हैं। पुल में कुल 288 सेगमेंट लगाए जाने हैं, जिनमें से 120 से अधिक पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं। निर्माण कंपनी ने श्रमिकों और भारी मशीनरी की संख्या बढ़ाकर काम को और तेज़ कर दिया है। गंगा की तेज धारा के बीच अस्थायी रास्ता बनाकर सेगमेंट रखने की प्रक्रिया लगातार जारी है। 1947 करोड़ रुपये की लागत, 67 पिलरों पर खड़ी हो रही विशाल संरचना सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की निगरानी में बन रहे इस सिक्स लेन पुल की लागत 1947 करोड़ रुपये है। पुल की नींव 67 मजबूत पिलरोंपर तैयार की जा रही है, जो उच्च तकनीक और सटीकता का उदाहरण है। परियोजना की शुरुआत फरवरी 2021 में की गई थी। मूल समयसीमा 2024 थी, लेकिन तकनीकी व प्रशासनिक कारणों से इसे बढ़ाकर अब 2026 किया गया है। ट्रैफिक को मिलेगा बड़ा राहत कॉरिडोर इस पुल के तैयार होते ही प्रयागराज का यातायात तंत्र पूरी तरह बदल जाएगा। वर्तमान में पुराने पुल पर रोजाना लगने वाले भीषण जाम से लोगों को निजात मिलेगी। इसके अलावा:     लखनऊ     कानपुर     आगरा     दिल्ली जैसे बड़े शहरों की ओर जाने वाले यात्रियों को भी समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। निर्माण एजेंसी को मिल रहे हैं तारीफ के संकेत हरियाणा की सिंगला कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड इस परियोजना को अंजाम दे रही है। अधिकारी बताते हैं कि सेगमेंट टेक्नोलॉजी हाई-कॉस्ट और हाई-प्रिसीजन होती है, इसलिए समय लगता है। लेकिन अब प्रोजेक्ट एक फाइनल रिदम में आ चुका है और आने वाले महीनों में इसका अंतिम रूप सामने आने की उम्मीद है। जल्द मिलेगी नई सौगात यदि सब कुछ निर्धारित गति से आगे बढ़ता रहा, तो आने वाले महीनों में प्रयागराज के लोगों को गंगा के ऊपर एक आधुनिक, मजबूत और हाई-टेक सिक्स लेन पुल की सौगात मिलेगी। यह न सिर्फ शहर की कनेक्टिविटी को नया आयाम देगा, बल्कि उत्तर प्रदेश की सड़क संरचना को भी और मजबूत करेगा।

सिम लिमिट और डिजिटल सेफ्टी पर राजस्थान हाई कोर्ट सख्त: 3 से ज्यादा सिम नहीं मिलेंगे, बच्चों के फोन और नेट बैंकिंग पर भी निर्देश

जोधपुर साइबर ठगी और ऑनलाइन अपराध के मामले इन दिनों बढ़ते जा रहे हैं। साइबर अपराध इन दिनों देश की सबसे बड़ी समस्या बन गया है। सारबर ठगी और अपराधों पर नियंत्रण के लिए राजस्थान हाई कोर्ट की ओर से एक बहुत ही महत्वपूर्ण फैसला सुनाया गया है। अपने इस फैसले में राजस्थान हाई कोर्ट ने कई निर्देश दिए हैं। जैसे कि किसी व्यक्ति के नाम पर 3 से अधिक सिम जारी नहीं करना, बच्चों के सोशल-मीडिया इस्तेमाल करने के गाइडलाइन आदि। बता दें कि राजस्थान के जोधपुर हाई कोर्ट ने 84 साल के एक बुजुर्ग दंपती से 2 करोड़ की साइबर ठगी करने वाले दो आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए ये सभी निर्रेश जारी किए हैं। साथ ही कोर्ट ने आरोपियों की याचिका भी खारिज कर दी है। जोधपुर हाई कोर्ट के जस्टिस रवि चिरानिया ने सरकार, पुलिस और बैंकों के लिए यह निर्देश जारी किए हैं। इंटरनेट और मोबाइल चलाने को लेकर गाइडलाइन बनाने के निर्देश जोधपुर हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को निर्देश दिया। जिसमें कहा कि वे भारतीय साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) की तर्ज पर राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर (R4C) की स्थापना करें। 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए स्कूल में मोबाइल, ऑनलाइन गेम्स और सोशल मीडिया के इस्तेमाल लेकर एसओपी बनाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कोर्ट ने किसी भी व्यक्ति के नाम पर 3 से अधिक सिम कार्ड जारी नहीं करने का आदेश दिया।     जोधपुर हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि (I4C) की तर्ज पर राजस्थान में (R4C) की स्थापना की जाए।     गृह विभाग और कार्मिक विभाग को मिलकर DG साइबर के अधीन स्पेशल IT इंस्पेक्टर की भर्ती की जाएगी।     ये इंस्पेक्टर सिर्फ साइबर मामलों की जांच करेंगे। साथ ही इनका दूसरे विभाग में ट्रांसफर नहीं किया जाएगा।     कोर्ट ने आदेश दिया कि सभी बैंक और फिनटेक कंपनियां ‘म्यूल अकाउंट’ और संदिग्ध ट्रांजैक्शन पकड़ने के लिए RBI की ओर से डवलप किए गए ‘Mule Hunter’ जैसे AI टूल्स का उपयोग अवश्य करें। इंटरनेट बैंकिंग और यूपीआई को नियंत्रित करने के निर्देश इसके साथ ही हाई कोर्ट ने इंटरनेट बैंकिंग को लेकर भी आदेश जारी किया है। कोर्ट ने कहा जिन खाताधारकों का सालाना ट्रांजैक्शन 50 हजार रुपए से कम है या जिनकी डिजिटल साक्षरता कम है, ऐसे ग्राहकों की इंटरनेट बैंकिंग और यूपीआई लीमिट को नियंत्रित किया जाए।