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मनरेगा लाभार्थियों को राहत, पंजाब सरकार ने कहा—घर पर किए काम की भी मिलेगी पूरी मज़दूरी

चंडीगढ़ पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मनरेगा योजना में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए एक क्रांतिकारी फैसला लिया है। अब मजदूरों को सिर्फ सरकारी प्रोजेक्ट्स पर ही नहीं, बल्कि अपने घर पर काम करने पर भी पूरी मज़दूरी मिलेगी। ओएसडी टू सीएम अमनजोत सिंह ने बताया कि जिन मज़दूरों ने नरेगा के तहत रजिस्ट्रेशन करवाया है और जिनके पास नरेगा कार्ड है, उन्हें अब अपने घर में काम करने का भी पूरा लाभ मिलेगा। यह योजना गरीब परिवारों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगी। अगर कोई मज़दूर अपने घर पर 90 दिन काम करता है, तो उसका पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा और उसे 31,140 रुपये की राशि सीधे खाते में ट्रांसफर की जाएगी। ओएसडी टू सीएम अमनजोत सिंह ने बताया कि नरेगा योजना के तहत अब कई सुविधाएं शामिल की गई है।  इस योजना में ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण, तालाब निर्माण, नहर की सफाई, वृक्षारोपण और जल संरक्षण के काम शामिल है। इसके अलावा किसानों को अपने खेतों में मेड़बंदी, कुआं खुदाई और सिंचाई की सुविधाएं बनाने के लिए भी मज़दूरी मिलेगी। ओएसडी टू सीएम अमनजोत सिंह ने बताया कि योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब मज़दूर अपने घर पर शौचालय निर्माण, पक्का फर्श बनाना, छत की मरम्मत और अन्य घरेलू निर्माण कार्य करके भी मज़दूरी प्राप्त कर सकेंगे। इससे गरीब परिवारों को दोहरा फायदा होगा – एक तरफ उनके घर का विकास होगा, दूसरी तरफ उन्हें रोज़गार भी मिलेगा। ओएसडी टू सीएम अमनजोत सिंह ने बताया कि नरेगा के तहत प्रत्येक मज़दूर को 346 रुपये प्रति दिन की दर से मज़दूरी दी जाती है। एक वित्तीय वर्ष में हर परिवार को कम से कम 100 दिन का रोजगार की गारंटी दी जाती है। अगर किसी मजदूर को 15 दिन के अंदर काम नहीं मिलता है, तो उसे बेरोज़गारी भत्ता भी दिया जाता है। ओएसडी टू सीएम अमनजोत सिंह ने बताया कि योजना के तहत महिलाओं को विशेष प्राथमिकता दी गई है। कुल कार्यबल का कम से कम 33 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं के लिए आरक्षित है। काम के दौरान कार्यस्थल पर पीने के पानी, छाया और प्राथमिक चिकित्सा की सुविधा भी अनिवार्य है। छोटे बच्चों वाली महिलाओं के लिए क्रेच की व्यवस्था भी की जाती है। ओएसडी टू सीएम अमनजोत सिंह ने बताया कि मजदूरों का भुगतान सीधे उनके बैंक खाते या डाकघर खाते में किया जाता है, जिससे बिचौलियों का खात्मा होता है। काम शुरू होने के 15 दिनों के अंदर मजदूरी का भुगतान करना जरूरी है। अगर देरी होती है तो मजदूर को मुआवजे के रूप में अतिरिक्त राशि भी दी जाती है। ओएसडी टू सीएम अमनजोत सिंह ने बताया कि नरेगा योजना में रजिस्ट्रेशन बिल्कुल मुफ्त है। कोई भी 18 वर्ष से अधिक उम्र का व्यक्ति जो ग्रामीण क्षेत्र में रहता है और अकुशल शारीरिक श्रम करने को तैयार है, वह इस योजना के लिए आवेदन कर सकता है। रजिस्ट्रेशन के 15 दिनों के अंदर जॉब कार्ड जारी किया जाता है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि यह फैसला गरीब मज़दूरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा। उन्होंने सभी पात्र मज़दूरों से अपील की है कि वे जल्द से जल्द नरेगा के तहत रजिस्ट्रेशन करवाएं और इस योजना का पूरा लाभ उठाएं। इस योजना से न केवल रोज़गार मिलेगा बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों का समग्र विकास भी होगा।

बाबरी मस्जिद पर TMC विधायक का बड़ा दावा, 6 दिसंबर को नींव रखने की बात पर BJP आक्रामक

कलकत्ता पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायक हुमायूं कबीर ने 'बाबरी मस्जिद' के निर्माण का ऐलान किया है। इससे बीजेपी भड़क गई और टीएमसी पर जमकर निशाना साधा। टीएमसी विधायक हुमायूं के अनुसार, छह दिसंबर को इस मस्जिद की नींव रखी जाएगी। उन्होंने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा कि 464 साल पहले, बाबर के मिलिट्री कमांडर ने यह मस्जिद (बाबरी मस्जिद) बनाई थी। उन्होंने मस्जिद तोड़कर राम मंदिर बनाया, और किसी ने इसका विरोध नहीं किया। जब मैं बाबर के नाम पर मस्जिद बनाना चाहता हूं तो वे इसका विरोध क्यों कर रहे हैं? उन्होंने आगे कहा, ''अगर सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद बनाने के खिलाफ कोई निर्देश दिया है, तो मुझे बताएं। अगर होम मिनिस्ट्री ने ऐसा कोई निर्देश जारी किया है कि बाबर के नाम पर कोई मस्जिद नहीं बनाई जा सकती, तो मैं आगे नहीं बढ़ूंगा। तब मैं मस्जिद के लिए कोई दूसरा नाम सोचूंगा। अगर वे मेरा सिर काटना चाहते हैं, तो वे नींव रखने के कार्यक्रम के दौरान आ सकते हैं। मैं इसके लिए तैयार हूं। मैं उन्हें मुर्शिदाबाद आकर मेरा सिर काटने की चुनौती देता हूं। मैं खुद को शहीद करने के लिए तैयार हूं… हम बाबरी मस्जिद बनाएंगे।'' हालांकि, हुमांयू कबीर के इस इस ऐलान के बाद तृणमूल कांग्रेस ने खुद को इससे दूर कर लिया और भाजपा ने आरोप लगाया कि लोगों को बांटने की कोशिश की जा रही है। छह दिसंबर को अयोध्या में 16वीं सदी की बाबरी मस्जिद गिराए जाने के 33 साल पूरे होने वाले हैं, ऐसे में इस प्लान किए गए समारोह ने अल्पसंख्यकों की ज्यादा संख्या वाले मुर्शिदाबाद जिले में राजनीतिक माहौल को और गरम कर दिया है, जहां इस साल अप्रैल में वक्फ (अमेंडमेंट) एक्ट, 2025 को लेकर विरोध प्रदर्शनों के दौरान झड़पें हुई थीं। कबीर ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए हाल ही में कहा, "हां, मैं 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद के मॉडल पर बनी मस्जिद का शिलान्यास करूंगा। यह मस्जिद बहुत बड़ी होगी और असली ढांचे से प्रेरित होगी।" उन्होंने आगे कहा, "यह मेरा धार्मिक अधिकार है और स्थानीय लोगों की मांग है।" उन्होंने कहा कि यह मुद्दा इमोशनल है और ज़ोर देकर कहा कि उनका प्लान एक पर्सनल संकल्प है, चुनावी गणित से जुड़ा नहीं है। पश्चिम बंगाल असेंबली में टीएमसी के चीफ व्हिप, निर्मल घोष ने पीटीआई को बताया, "पार्टी हुमायूं कबीर के टच में नहीं है। उनकी बातों या कामों का पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है। वह जो कुछ भी कह रहे हैं या कर रहे हैं, वह अपनी पर्सनल हैसियत से कर रहे हैं। पार्टी उनका सपोर्ट नहीं करती है और मामले को देख रही है।" मस्जिद के ऐलान से भड़के बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी वहीं, पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने  आरोप लगाया कि हुमायूं कबीर 'बाबरी मस्जिद' बनाने के वादे के साथ मुर्शिदाबाद में शांति भंग करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने सेंट्रल एजेंसियों से जांच करने को कहा कि क्या वह हाल ही में बांग्लादेश गए हैं। पूर्व मेदिनीपुर जिले में अपने नंदीग्राम चुनाव क्षेत्र में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, अधिकारी ने कहा कि मुर्शिदाबाद, जो बांग्लादेश की सीमा से लगा है, पहले से ही इस साल की शुरुआत में वक्फ (अमेंडमेंट) एक्ट के विरोध के दौरान हुई सांप्रदायिक हिंसा के सदमे से जूझ रहा है, और कबीर स्थिति को फिर से भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया, "वह जिले में शांति भंग करने की कोशिश कर रहे हैं, जो अभी भी दंगों के सदमे से उबर रहा है, जिसमें जिहादी तत्वों ने दो हिंदुओं को मार डाला था। हिंदू मंदिर बना सकते हैं, मुसलमान मस्जिद बना सकते हैं, और ईसाई चर्च बना सकते हैं। लेकिन यह घोषणा करना कि 6 दिसंबर को एक मस्जिद की नींव रखी जाएगी और उसका नाम 'बाबरी मस्जिद' रखा जाएगा, यह संविधान और सुप्रीम कोर्ट की पूरी तरह से अवहेलना है।"

‘अलग होना है तो कोई रोक नहीं’—बयान से बढ़ी हलचल, क्या महागठबंधन बिखरने वाला है?

पटना. बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महागठबंधन (MGB) को करारी हार का सामना करना पड़ा. राजद, कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों को जनता ने फर्श पर ला दिया. नतीजों के बाद जहां विपक्षी खेमे में समीक्षा का दौर चल रहा है, वहीं गठबंधन के घटक दलों के बीच कलह की आग भड़क उठी है. दिल्ली में कांग्रेस की हार समीक्षा बैठक में राजद को जिम्मेदार ठहराने के आरोपों ने विवाद को भड़का दिया. अब राजद के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने कांग्रेस को खरी-खरी सुना दी है, जिससे सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह गठबंधन टूट की कगार पर पहुंच गया है? मंगनी लाल का तीखा तंज, ‘सब राजद की बदौलत’ शनिवार को राजद प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोला. उन्होंने कहा, कांग्रेस को जितनी भी सीटों पर विधानसभा चुनाव में जीत और वोट मिले हैं, वह राजद के कारण. कांग्रेस पार्टी अलग राजनीति करना चाहती है तो कर ले, उनको अपनी ताकत का पता चल जाएगा. मंडल ने आगे जोर देकर कहा कि बिहार में राजद का मजबूत जनाधार है जो सहयोगी दलों को फायदा पहुंचाता है. उन्होंने 2020 के चुनाव का जिक्र करते हुए तंज कसा और कहा कि- 2020 में कांग्रेस ने 72 सीटें मांगी थीं, लेकिन 19 पर जीत हुई वह भी राजद की बदौलत. मंडल का यह बयान साफ संकेत देता है कि राजद खुद को गठबंधन का ‘बड़ा भाई’ मान रहा है और कांग्रेस को ‘हिसाब’ सिखाने का मूड में है. कांग्रेस का कड़ा पलटवार, ‘ताकत न होती तो साथ क्यों? मंगनी लाल मंडल के बयान पर कांग्रेस ने तुरंत पलटवार किया. प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता असितनाथ तिवारी ने कहा, अगर कांग्रेस की कोई ताकत नहीं है तो राजद गठबंधन में साथ क्यों है? तिवारी ने राजद के दावों को खारिज करते हुए कहा कि हार की जिम्मेदारी सबकी है, न कि सिर्फ एक दल की. वहीं, कांग्रेस के एक अन्य प्रवक्ता ज्ञान रंजन ने मंडल को निशाने पर लेते हुए कहा, मंडल जी को कुछ कहना है तो महागठबंधन की ऑर्डिनेशन कमेटी के अध्यक्ष तेजस्वी यादव से कहें. मीडिया में बयान देने का क्या मतलब है?. साफ है कि कांग्रेस खेमे में गुस्सा साफ दिख रहा है और नेता इसे ‘अपमानजनक’ बता रहे हैं. बीजेपी का मौका- ‘चुनाव से पहले भी लड़ते थे, अब भी लड़ रहे’ इस बीच, सत्ताधारी बीजेपी ने महागठबंधन की कलह को हथियार बनाया है. बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ने तंज कसते हुए कहा, दोनों दल चुनाव से पहले भी आपस में लड़ रहे थे, चुनाव बाद भी लड़ रहे हैं. बीजेपी इसे विपक्ष की कमजोरी के रूप में पेश कर रही है, जबकि सियासी जानकार मानते हैं कि यह तकरार NDA के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है. बिहार की सियासत में अब सवाल उठ रहा है कि क्या यह छोटी-मोटी नोंकझोंक है या गठबंधन टूटने का संकेत? टूट की आशंका- तेजस्वी याद की बैठक की चर्चा महागठबंधन के भविष्य पर सस्पेंस बरकरार है. राजद ने शनिवार को तेजस्वी यादव के आवास पर विधायकों की बैठक बुलाई है, जिसमें विधानमंडल सत्र की विपक्षी रणनीति पर चर्चा हो रही है. लेकिन, जानकारों का कहना है कि इस बैठक में गठबंधन के आंतरिक विवाद भी प्रमुखता से उठ सकते हैं. अब सवाल है कि मंगनी लाल मंडल का यह बयान कि कोई किसी को बांधकर नहीं रख सकता, महागठबंधन के अंत का आगाज है? बिहार की राजनीति में आगामी दिनों में बड़े उलटफेर की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता.

भागवत का संदेश: राष्ट्रवाद की अवधारणा भारत में पश्चिमी सोच से अलग, भाईचारा हमारी पहचान

नागपुर   राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि विवादों में पड़ना भारत के स्वभाव में नहीं है और देश की परंपरा ने हमेशा भाईचारे और सामूहिक सद्भाव पर जोर दिया है. नागपुर में एक कार्यक्रम में संघ प्रमुख ने कहा कि भारत की राष्ट्रवाद की अवधारणा पश्चिमी सोच से पूरी तरह अलग है. नागपुर में एक कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा कि भारत की राष्ट्रवाद की अवधारणा पश्चिमी सोच से पूरी तरह अलग है. उन्होंने कहा, 'हमारी किसी से कोई बहस नहीं होती. हम झगड़ों से दूर रहते हैं. झगड़ा करना हमारे देश के स्वभाव में नहीं है. साथ रहना और भाईचारा बढ़ाना हमारी परंपरा है.' उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया के दूसरे हिस्से टकराव वाले हालात में ही बने हैं.' उन्होंने कहा, 'एक बार कोई राय बन जाने के बाद उस विचार के अलावा कुछ भी मंजूर नहीं होता. वे दूसरे विचारों के लिए दरवाजे बंद कर देते हैं और उसे इज्म कहना शुरू कर देते हैं.' भागवत ने यह भी कहा कि भारत की राष्ट्र की अवधारणा पश्चिमी व्याख्याओं से मूल रूप से अलग है.' उन्होंने जोर देकर कहा, 'वे राष्ट्र के बारे में हमारे विचार नहीं समझते, इसलिए उन्होंने इसे 'राष्ट्रवाद' कहना शुरू कर दिया.' 'राष्ट्र' का हमारा कॉन्सेप्ट, राष्ट्र के पश्चिमी विचार से अलग है. हमारे बीच इस बारे में कोई मतभेद नहीं है कि यह राष्ट्र है या नहीं — यह एक 'राष्ट्र' है और यह पुराने समय से मौजूद है.' उन्होंने दावा किया, 'हम राष्ट्रीयता शब्द का इस्तेमाल करते हैं, राष्ट्रवाद का नहीं. देश पर बहुत ज्यादा गर्व की वजह से दो वर्ल्ड वॉर हुए. इसीलिए कुछ लोग राष्ट्रवाद शब्द से डरते हैं.' आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारत का राष्ट्रवाद घमंड या गर्व से पैदा नहीं हुआ है, बल्कि लोगों के बीच गहरे जुड़ाव और प्रकृति के साथ उनके सह-अस्तित्व से पैदा हुआ है. उन्होंने ज्ञान के महत्व पर भी जोर दिया जिससे समझदारी आती है और इस बात पर जोर दिया कि सिर्फ जानकारी से ज्यादा व्यावहारिक समझ और एक सार्थक जीवन जीना जरूरी है. उन्होंने कहा कि सच्ची संतुष्टि दूसरों की मदद करने से मिलती है. यह एक ऐसी भावना है जो अस्थायी सफलता के विपरीत, जीवन भर बनी रहती है.

मौलाना मदनी का बयान विवादित: जमीयत उलेमा-ए-हिंद की गवर्निंग बॉडी मीटिंग में सुप्रीम कोर्ट पर उठाए सवाल

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की गवर्निंग बॉडी काउंसिल की मीटिंग में मौलाना महमूद मदनी ने सुप्रीम कोर्ट पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मदनी ने कहा कि अदालतें सरकार के दबाव में काम कर रही हैं। मदनी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट उसी समय ‘सुप्रीम’ कहलाने का हकदार है जब वह संविधान की पाबंदी करे। मदनी ने कहा कि जब जब जुल्म होगा तब तब जिहाद होगा। जिहाद शब्द हिंसा का हमनाम बना दिया जिहाद पर मौलाना महमूद असद मदनी ने कहा- इस्लाम के दुश्मनों में जिहाद शब्द हिंसा का हमनाम बना दिया है। लव जिहाद, लैंड जिहाद, थूक जिहाद जैसे शब्द इस्तेमाल करके मुसलमानों की तौहीन की जा रही है। ये साफ होना चाहिए इस्लाम में जिहाद एक पवित्र कर्तव्य है। कुरान में जिहाद के कई अर्थ है। समाज और इंसानियत के बुलंदी के लिए हुआ है, जहां जंग के मायने में इस्तेमाल हुआ है तो जुल्म के खात्मे के लिए हुआ है। जब जब जुल्म तब तब जिहाद होगा। जिहाद’ को लेकर मौलाना मदनी ने कहा, 'आज सरकार और मीडिया एक पवित्र शब्द को पूरी तरह गलत तरीके से दुनिया के सामने पेश कर रहे हैं.' उन्होंने कहा कि जिहाद को लव जिहाद, थूक जिहाद, जमीन जिहाद जैसे शब्दों के साथ जोड़कर बदनाम किया जा रहा है, जबकि जिहाद हमेशा पवित्र रहा है और दूसरों की भलाई और बेहतरी के लिए बताया गया है. उन्होंने कहा, 'जहां जुल्म होगा, वहां जिहाद होगा.' उन्होंने इस बात को दोहराया भी- 'जहां जुल्म होगा, वहां जिहाद होगा.' उन्होंने कहा कि एक धर्मनिरपेक्ष देश भारत में, जहां लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था है, वहां जिहाद की कोई बहस नहीं है. यहां मुसलमान संविधान के प्रति वफादारी दिखाते हैं. नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है. अगर सरकार ऐसा नहीं करती है तो इसके लिए सरकार ही जिम्मेदार होगी. ‘जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा’ वहीं जिहाद पर बोलते हुए मौलाना मदनी ने कहा कि इस्लाम के विरोधियों ने जिहाद को हिंसा का पर्याय बनाकर पेश किया है. उन्होंने कहा, ‘लव जिहाद, लैंड जिहाद, थूक जिहाद जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर मुसलमानों का अपमान किया जा रहा है. जबकि इस्लाम में जिहाद एक पवित्र कर्तव्य है. कुरान में इसके अलग-अलग अर्थ हैं… इंसानियत और समाज की बेहतरी के लिए.’ उन्होंने जोर देकर कहा, ‘जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा… मैं इसे दोहराता हूं, जुल्म के खिलाफ खड़े होना हर आसमानी मजहब की नैतिक जिम्मेदारी है.’ इस बयान के बाद सभा में ‘नारा-ए-तकबीर, अल्लाहु अकबर’ के नारे भी लगे. मदनी ने यह भी स्पष्ट किया कि जिहाद कोई व्यक्तिगत बदले की कार्रवाई नहीं है, बल्कि इसका फैसला केवल शरीयत के तहत चलने वाली सरकार ही कर सकती है. उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यहां इस्लामी शासन की अवधारणा नहीं है, इसलिए जिहाद बहस का विषय बनाना ही गैर-जरूरी है. वंदे मातरम विवाद पर क्या बोले मदनी? इसके अलावा वंदे मातरम को लेकर विवाद पर मदनी ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा, ‘मुर्दा कौमें सरेंडर करती हैं. अगर कहा जाएगा ‘वंदे मातरम’ बोलो, तो वे बोलना शुरू कर देंगी. जिंदा कौम हालात का मुकाबला करती है.’ हालांकि मौलाना मदनी के इस बयान पर अन्य मुस्लिम संगठनों ने दूरी बना ली है. जमात-ए-इस्लामी हिंद के अध्यक्ष मौलाना सादातुल्लाह हुसैनी ने कहा कि वंदे मातरम जैसे मुद्दे को लेकर विवाद पैदा करना तर्कहीन है. उन्होंने कहा, ‘हर व्यक्ति को अपने विश्वास के अनुसार जीने और अपने तरीके से देशप्रेम व्यक्त करने का अधिकार है. किसी एक नारे या गीत को पूरे देश पर थोपना तार्किक नहीं है. जो लोग वंदे मातरम के जरिए अपने प्रेम का इजहार करना चाहें, करें. बाकी लोग अपने तरीके से देश से मुहब्बत जताएं… यह उनका हक है.’ 'मुर्दा कौमें डरकर बोलने लगती हैं वंदे मातरम' वंदेमातरम के मुद्दे पर मौलाना मदनी ने कहा, 'मुर्दा कौमें सरेंडर कर दिया करती हैं. वो कहेंगे वंदे मातरम बोलो तो पढ़ना शुरू कर देंगे. ये पहचान है मुर्दा कौम होने की. अगर जिंदा कौम है तो हालात का मुकाबला करना पड़ेगा. सुप्रीम कहलाने का हक नहीं मौलाना महमूद मदनी ने सुप्रीम कोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा- बाबरी मस्जिद और तलाक के जुड़े मामले में प्रभाव आम है अदालतें सरकार के दबाव में काम कर रही है। इबादतगाह कानून को नजरअंदाज करके ज्ञानवापी और मथुरा का मामला कोर्ट में सुना गया। सुप्रीम कोर्ट उस वक्त ही सुप्रीम कहलाने का हकदार है जब तक संविधान की पाबंदी करे और अगर ऐसा ना करे तो सुप्रीम कहलाने का हक नहीं है।

मध्यप्रदेश में मतदाता सूची पुनरीक्षण की समीक्षा, संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने वर्चुअल बैठक में दिए निर्देश

मध्यप्रदेश में मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य की समीक्षा संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने वर्चुअल बैठक में दिए निर्देश भोपाल मध्यप्रदेश के संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी  राम प्रताप सिंह जादौन ने शनिवार, 29 नवंबर को प्रदेश के सभी जिलों के उप जिला निर्वाचन अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक कर मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्य की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मती सुरभि तिवारी,  राजेश यादव सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान  जादौन ने अशोकनगर, बैतूल और नीमच जिलों में 100 प्रतिशत डिजिटाइजेशन कार्य पूर्ण होने पर संबंधित टीमों को बधाई दी। इसके साथ ही प्रदेश के अन्य 44 जिलों में 90 प्रतिशत से अधिक कार्य पूर्ण होने पर सभी अधिकारियों की सराहना की। उन्होंने निर्देशित किया कि जिन मतदाताओं का निवास परिवर्तन हुआ है या जिनके मतदाता परिचय-पत्र में संशोधन की आवश्यकता है, वे संबंधित बीएलओ से संपर्क कर एन्युमरेशन फॉर्म के साथ फॉर्म-8 भरकर जमा करें। मतदाता यह प्रक्रिया स्वयं भी ऑनलाइन Voters.eci.gov.in अथवा ceoelection.mp.gov.in पर पूरी कर सकते हैं। साथ ही नये मतदाता अपना फार्म 6 भरकर भी दे सकते हैं।  जादौन ने कहा कि पुनरीक्षण कार्य के दौरान यदि किसी बीएलओ की मृत्यु हुई है, तो उनके दावे, पारिश्रमिक तथा परिजन की अनुकंपा नियुक्ति की कार्रवाई शीघ्रता से पूरी की जाए। उन्होंने ग्वालियर, इंदौर और भोपाल जिलों के उप जिला निर्वाचन अधिकारियों को कार्य की गति और बढ़ाने के निर्देश दिए, जिससे निर्धारित समय सीमा में प्रदेश में शत-प्रतिशत पुनरीक्षण कार्य पूरा किया जा सके।  

एनकाउंटर के डर से चैतू का समर्पण: पढ़ाई से नक्सलवाद तक कैसे पहुंचा खूंखार नक्सली

जगदलपुर छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में लंबे समय से सक्रिय 25 लाख रुपए के इनामी नक्सली चैतू उर्फ श्याम दादा ने जवानों के सामने सरेंडर कर दिया। श्याम दादा के सरेंडर से नक्सली संगठन को बड़ा झटका लगा है। चैतू उर्फ दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का सदस्य था। उसके ऊपर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था। उसके साथ 9 अन्य माओवादियों ने भी हथियार डाल दिए। इन सभी पर कुल 65 लाख रुपए का इनाम घोषित था। चैतू को 2013 के झीरम घाटी नक्सली हमले का मुख्य मास्टरमाइंड माना जाता है। उस हमले में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कई बड़े नेता मारे गए थे। लंबे समय तक वह दरभा डिवीजन का प्रभारी भी रहा। चैतू उर्फ श्याम दादा वर्तमान में DKSZCM कैडर का है। बस्तर के जंगलों में कई बार सुरक्षाबलों की गोलियों से बच निकला था। बस्तर इलाके में फोर्स की बढ़ते दबदबे के बाद चैतू ने अपने साथियों के साथ सरेंडर करने का फैसला किया। वह करीब 45 साल तक नक्सली संगठन से जुड़ा रहा। जानिए चैतू दादा के बारे में चैतू उर्फ श्याम दादा मूल रूप से तेलंगाना का रहने वाला है। वह 1980 में कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ही नक्सल संगठन में शामिल हो गया था। नक्सली संगठन में शामिल होने के बाद वह शुरुआत में हिंसात्मक गतिविधियों में शामिल था। उसके बाद 1990 में वह बस्तर इलाके में आकर संगठन के विस्तार के काम में लग गया। इस दौरान इस इलाके में वह करीब 35 साल तक काम किया। उसका मुख्य काम नक्सली संगठन में युवाओं को जोड़ना और भर्ती करना था। सुरक्षाबल के जवानों ने उसे कई बार घेर लिया था लेकिन हर बार वह बचकर निकल जाता था। क्यों किया सरेंडर जवानों के सामने सरेंडर करने पहुंचे चैतू ने मीडिया को बताया कि रूपेश और सोनू दादा ने भी हथियार डाल दिए हैं। नक्सल संगठन में अब कुछ नहीं रखा है। मैं करीब 63 साल हूं लेकिन वर्तमान में परिस्थितियों बदल गई हैं। बदली हुई परिस्थति को देखने के बाद ही मैंने अपने साथियों और हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। झीरम घाटी हमले का मास्टरमाइंड चैतू उर्फ श्याम दादा उन नक्सलियों में शामिल है जिन्होंने झीरम घाटी हमले की योजना बनाई थी। 25 मई 2013 में दरभा घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हमला करवाने में इसका हाथ था। इस हमले में विद्याचरण शुक्ल, महेंद्र कर्मा, नंदकुमार पटेल समेत कई करीब 24 नेताओं को का एनकाउंटर किया था।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा व सहूलियत शीर्ष प्राथमिकता हो : सीएम योगी

20 दिसंबर तक पूर्ण कर लें खिचड़ी मेले से जुड़े सभी कार्य : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा व सहूलियत शीर्ष प्राथमिकता हो : सीएम योगी गोरखनाथ मंदिर में लगने वाले विश्व प्रसिद्ध खिचड़ी मेला की तैयारियों की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की समीक्षा गोरखपुर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि गोरखनाथ मंदिर में मकर संक्रांति पर लगने वाले विश्व प्रसिद्ध खिचड़ी मेले से जुड़े सभी कार्य 20 दिसंबर तक हर हाल में पूर्ण कर लिए जाएं। खिचड़ी मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा व सहूलियत प्राथमिकता होनी चाहिए। यह ध्यान रखा जाए कि श्रद्धालुओं को कहीं कोई दिक्कत न हो। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार पूर्वाह्न गोरखनाथ मंदिर के सभाकक्ष में खिचड़ी मेला की तैयारियों को लेकर महापौर और अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखनाथ मंदिर के खिचड़ी मेले से न सिर्फ पूर्वी उत्तर प्रदेश वरन बिहार, नेपाल से लगायत देश-दुनिया के सनातन मतावलंबियों की आस्था जुड़ी है। इसके दृष्टिगत मेले में सभी बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था की जाये जिससे मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। दूरदर्शन व आकाशवाणी के जरिए मेले का सजीव प्रसारण किया जाएगा ताकि वे लोग भी मेले में वर्चुअल सहभागी हो सकें जो किंचित कारणों से इसमें शामिल नहीं हो पा रहे हों। समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों की तरफ से खिचड़ी मेला को लेकर की जा रही तैयारियों की जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने कहा कि जो भी कार्य शेष रह गए हैं, उन्हें शीघ्रता से पूरा कर लिया जाए। ध्यान रहे सभी कार्य 20 दिसंबर तक पूरे हो जाने चाहिए। सभी श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और सहूलियत में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने खिचड़ी मेला में स्वच्छता और सफाई पर खास ध्यान देने के साथ इस मेले को जीरो वेस्ट इवेंट बनाने के लिए नगर निगम को निर्देशित किया। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मेला क्षेत्र मे पर्याप्त स्थायी एंव अस्थायी प्रकाश व्यवस्था भी कराएं। उन्होंने कहा कि समय रहते मंदिर मार्ग की सभी स्ट्रीट लाइट का परीक्षण कर कोई दिक्कत मिलने पर उसे दुरुस्त कर लिया जाए। खिचड़ी मेला स्पेशल ट्रेनों का भी होगा संचलन बैठक में सीएम योगी ने कहा कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए खिचड़ी मेला स्पेशल ट्रेनों का संचलन किया जाएगा। इसके लिए रेलवे प्रशासन से संवाद कर अलग-अलग स्टेशनों से मेला स्पेशल ट्रेनों का संचलन कराने की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाएगी। स्पेशल ट्रेनों के संबंध में व्यापक प्रचार, प्रसार भी किया जाए। शहर के ठहराव वाले स्टेशनों से इलेक्ट्रिक सिटी बसों की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। खिचड़ी मेला को लेकर विशेष तैयारी करे परिवहन विभाग बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गोरखनाथ मंदिर के खिचड़ी मेला में आने के लिए श्रद्धालुओं को सुदूर ग्रामीण क्षेत्र तक परिवहन की सुविधा मिलनी चाहिए। परिवहन विभाग इसके लिए अभी से बसों के इंतजाम की तैयारी शुरू कर दे। किन स्थानों से खिचड़ी मेला स्पेशल बसों का संचलन किया जाएगा, इसका व्यापक प्रचार प्रसार भी किया जाए। पर्याप्त अलाव जलवाने के हों इंतजाम मुख्यमंत्री ने कहा कि खिचड़ी मेला के समय शीतलहर का भी दौर रहता है। इस दौरान आमजन की सुविधा के लिए पर्याप्त संख्या में अलाव जलवाने के पर्याप्त इंतजाम होने चाहिए। अलाव के लिए लकड़ी की व्यवस्था के लिए उन्होंने वन विभाग को निर्देशित किया। चुस्त दुरुस्त रहे सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण पर हो पूरा फोकस सीएम योगी ने खिचड़ी मेला में सतर्कता और सुरक्षा व्यवस्था को शीर्ष प्राथमिकता देने के निर्देश देते हुए कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा चुस्त दुरुस्त होनी चाहिए। महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए महिला पुलिस की पर्याप्त संख्या में तैनाती और महिला हेल्प डेस्क की स्थापना सुनिश्चित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था की कंट्रोल रूम से एकीकृत निगरानी करने के साथ ही पर्याप्त संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस मेले के दौरान पीए सिस्टम के माध्यम से श्रद्धालुओं को लगातार जरूरी जानकारी भी देती रहे। इसके साथ ही मुख्य मेला दिन और भीड़ होने के अन्य दिनों पर भीड़ नियंत्रण पर पूरा फोकस होना चाहिए। उन्होंने भीड़ नियंत्रण के लिए एनसीसी और सिविल डिफेंस की सेवा लेने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुलिस को सुरक्षा और सतर्कता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। यातायात प्रबंधन पर भी दें ध्यान सीएम योगी ने कहा कि यातायात प्रबंधन के लिए पर्याप्त यातयात पुलिस और होमगार्ड्स की तैनाती के साथ लगातार सीसीटीवी मॉनिटरिंग की जाए। वाहनों की पार्किंग और डायवर्जन की तैयारी अभी से होनी चाहिए। ठीक कर लें सड़कें, स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट रहे बैठक में सीएम योगी ने निर्देश दिया कि नगर निगम, गोरखपुर विकास प्राधिकरण तथा लोक निर्माण विभाग की जिम्मेदारी है कि वे सभी सड़कों को भी समयबद्ध ढंग से ठीक करायें जिससेे किसी को भी आवगमन में असुविधा न हो। सीएम योगी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग को मेला के दौरान विशेष तौर पर अलर्ट रहना होगा। मेला परिसर में हेल्थ कैम्प भी लगाया जाए। अस्पतालों को भी एलर्ट मोड पर रखने की आवश्यकता होगी ताकि आकस्मिक जरूरत पर किसी तरह की परेशानी न हो। रैन बसेरों में हों सभी जरूरी इंतजाम मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भी ध्यान रखा जाए कि खिचड़ी मेले में आने वाला कोई भी श्रद्धालु खुले में न सोये, उसे निकट के रैन बसेरों में सम्मानपूर्वक आवासित कराया जाए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सभी रैन बसेरों में पर्याप्त बिस्तर, कंबल तथा सफाई आदि की व्यवस्था बेहतर हो। सभी रैन बसेरों में जरूरी इंतजाम अभी से सुनिश्चित किए जाएं। श्रद्धालुओं के भोजन संबंधी सुविधा के लिए सीएम योगी ने कम्युनिटी किचन और भंडारों के आयोजन के लिए लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता भी जताई। दुकानों की इलेक्ट्रिक सेफ्टी की हो जांच, खाद्य सुरक्षा भी सुनिश्चित हो मुख्यमंत्री ने कहा कि खिचड़ी मेले में बहुत सी अस्थायी दुकानें भी लगती हैं। इन सभी दुकानों की समय रहते इलेक्ट्रिक सेफ्टी जांच हो जानी चाहिए। मेले में लग रहे झूलों की सुरक्षा की समय रहते परख कर ली जाए। इसके साथ … Read more

अंतरराष्ट्रीय मंच पर आगरा के सर्वोदय विद्यालय ने किया शानदार प्रदर्शन, वर्ल्ड पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप 2025 में रचा इतिहास

योगी सरकार की खेल नीति का कमाल: उत्तर प्रदेश के गुरु-शिष्य की जोड़ी ने कोलंबो में जीता गोल्ड-सिल्वर मेडल , देश का नाम किया रोशन अंतरराष्ट्रीय मंच पर आगरा के सर्वोदय विद्यालय ने किया शानदार प्रदर्शन, वर्ल्ड पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप 2025 में रचा इतिहास व्यायाम शिक्षक हरीश चंद्र 77 किग्रा भार वर्ग में गोल्ड मेडल जीत बने विश्व चैंपियन छात्र रमन कुमार ने 56 किग्रा भार वर्ग में सिल्वर मेडल जीतकर तिरंगे का बढ़ाया मान कोलंबो में मिली यह ऐतिहासिक उपलब्धि पूरे प्रदेश और देश के लिए गर्व का विषय लखनऊ   उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की खेल और युवा कल्याण नीति अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर परिणाम दे रही है। इसी का प्रमाण है श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में आयोजित वर्ल्ड पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप 2025 में आगरा जनपद के इटौरा स्थित जयप्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय के व्यायाम शिक्षक हरीश चंद्र और कक्षा 11 के छात्र रमन कुमार ने शानदार प्रदर्शन किया है। हरीश चंद्र ने 77 किग्रा भार वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर विश्व चैंपियन का खिताब हासिल किया, जबकि युवा छात्र रमन कुमार ने 56 किग्रा भार वर्ग में सिल्वर मेडल जीतकर देश का मान बढ़ाया। वर्ल्ड चैंपियनशिप में लहराया यूपी का परचम श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में आयोजित वर्ल्ड पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप 2025 में 40 से अधिक देशों के एथलीट हिस्सा ले रहे हैं। इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर, गुरु और शिष्य की जोड़ी ने देश के लिए गौरव के पल लाए। शिक्षक हरीश चंद्र ने 77 किग्रा भार वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर विश्व चैंपियन का खिताब हासिल किया। वहीं छात्र रमन कुमार ने 56 किग्रा भार वर्ग में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीता। राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक हैं हरीश और रमन योगी सरकार प्रदेश में खेल और खिलाड़ियों को लगातार प्रोत्साहित कर रही है। सरकार की खेल नीतियों के कारण दोनों खिलाड़ियों का चयन हाल ही में गुजरात में आयोजित राष्ट्रीय पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में उनके दमदार प्रदर्शन के आधार पर हुआ था। हरीश चंद्र ने सीनियर 77 किग्रा वर्ग में गोल्ड जीतने के साथ ही डेडलिफ्ट में राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बनाया था, जबकि रमन कुमार ने सब-जूनियर 56 किग्रा वर्ग में गोल्ड जीता था। यह सफलता यह दर्शाती है कि सरकारी संस्थानों में भी गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण दिया जा रहा है। समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने इस उपलब्धि पर दोनों खिलाड़ियों को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि कोलंबो में मिली यह ऐतिहासिक उपलब्धि पूरे प्रदेश और देश के लिए गर्व का विषय है। सर्वोदय विद्यालय इटौरा के छात्र और शिक्षक ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर जो प्रदर्शन किया है, वह आने वाले खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा। योगी सरकार हमेशा खेल और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। ₹10 लाख से बनेगी अत्याधुनिक लैब समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित सर्वोदय विद्यालय इटौरा लगातार खिलाड़ियों की प्रतिभा निखारने में अग्रणी रहा है। विभाग अब इस सफलता को आगे बढ़ाने के लिए सुविधाओं को और मजबूत कर रहा है। जिला समाज कल्याण अधिकारी घासीराम प्रजापति ने बताया कि जल्द ही विद्यालय में अत्याधुनिक पावर लिफ्टिंग लैब बनकर तैयार हो जाएगी। इसके लिए समाज कल्याण विभाग द्वारा 10 लाख रुपए की धनराशि भी दी गई है। यह राशि लैब में पावर लिफ्टिंग के अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने में खर्च होगी। उन्होंने कहा इससे विद्यालय में अन्य विद्यार्थियों को भी सही प्रशिक्षण के साथ आगे आने का मौका मिलेगा। ग्रामीण प्रतिभाओं को मिला सही मंच समाज कल्याण विभाग के उप निदेशक एवं योजनाधिकारी जे. राम ने कहा कि इस जीत से भविष्य में विद्यालय से और भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के चैंपियन निकलने की उम्मीद और मजबूत हुई है। हरीश चंद्र और रमन कुमार की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश सरकार की नीतियां ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाओं को सही मंच और संसाधन उपलब्ध करा रही हैं, ताकि वे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी चमक बिखेर सकें।

स्टॉक ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म पर SEBI की कार्रवाई, 7 दिन के लिए लगाया प्रतिबंध

 नई दिल्‍ली शेयर मार्केट रेग्‍युलेटरी सेबी ने स्टॉक ब्रोकर प्रभुदास लीलाधर प्राइवेट लिमिटेड पर तगड़ा एक्‍शन लिया है. सेबी-रजिस्‍टर्ड स्टॉक ब्रोकर प्रभुदास लीलाधर प्राइवेट लिमिटेड पर 15 दिसंबर, 2025 से सात दिनों के लिए नए ग्राहकों को जोड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया है. यह बैन सेबी और एक्‍सचेंजों के संयुक्‍त न‍िरीक्षण के बाद लगाया गया है, जिसमें जांच के समय क्‍लाइंट फंड मैनेज, सेटलमेंट और मार्जिन रिपोर्टिंग में कई खामियां पाई गई थीं.  यह मामला 2 नवंबर से 8 नवंबर, 2022 के बीच की गई जांच में 1 अप्रैल, 2021 से 31 अक्टूबर, 2022 तक के संचालन में पाया गया.जांच अधिकारियों ने पाया कि तीन नमूना डेट पर ब्रोकर का कैलकुलेशन किया गया, जिसमें कुल वैल्‍यू निगेटिव थी. इसमें कुल 2.70 करोड़ रुपये की कमी थी. सेबी ने कहा कि यह कमी क्लाइंट फंड के दुरुपयोग का संकेत है.  नियामक ने स्टॉक ब्रोकर को कस्‍टमर्स के अकाउंट का निपटान न करने के लिए भी फटकार लगाई. आदेश में विस्तार से बताया गया है कि 1,200 से ज्‍यादा कस्‍टमर्स के फंड सेटलमेंट अनिवार्य तिमाही या मासिक समय-सीमा के भीतर नहीं किया गया. जांच में क्‍या-क्‍या निकला?  सेबी का आदेश ग्रॉस-वैल्‍यू के निष्कर्षों से कहीं आगे जाता है. नियामक ने पाया कि ग्राहकों के चालू खातों का निपटान नहीं हुआ, 1283 नॉन-ट्रेडिंग कस्‍टमर्स (तिमाही) के कुल 36 लाख रुपये के फंड का समय पर निपटान नहीं किया गया,  677 मासिक गैर-व्यापारिक मामलों की राशि 2.85 करोड़ रुपये थी और तीन ट्रेडिंग कस्‍टमर्स तिमाही मामलों में 39 लाख रुपये शामिल थे.     इसके अलावा, ऑपरेशन संबंधी कमियों में दिन के अंत (EOD) और पीक मार्जिन की गलत रिपोर्टिंग भी शामिल थी. निरीक्षण में पाया गया कि ब्रोकर ने एक्सचेंज को ऐसे मार्जिन की जानकारी दी थी, जो वास्तव में वसूले ही नहीं गए थे और एक मामले में पीक मार्जिन का कलेक्‍शन कम हुआ था. कस्‍टमर्स पर जुर्माने का बोझ डाला साथ ही ब्रोकर को क्लियरिंग कॉर्पोरेशन द्वारा एडवांस मार्जिन की कम वसूली के लिए लगाए गए जुर्माने का बोझ अपने कस्‍टमर्स पर डालने का दोषी पाया गया. सेबी ने दोहराया कि सदस्यों को 'किसी भी परिस्थिति में' अपफ्रंट मार्जिन की कम वसूली के कारण क्लियरिंग कॉर्पोरेशन द्वारा लगाए गए जुर्माने का बोझ ग्राहकों पर डालने की अनुमति नहीं है.  ब्रोकर प्‍लेटफॉर्म ने क्‍या कहा?  प्रभुदास लीलाधर ने अपनी दलील में कहा कि कथित खामियां 'तकनीकी और प्रक्रियात्मक थीं, जानबूझकर नहीं' और कई गलतियों के लिए मैनुअल या लिपिकीय गलतियां जिम्मेदार हैं. ब्रोकर ने यह भी तर्क दिया कि वह अलग-अलग न्यायिक कार्यवाही में पहले ही 11 लाख रुपये का जुर्माना भर चुका है और नए कारोबार पर प्रतिबंध से उसकी प्रतिष्ठा और कर्मचारियों के मनोबल को स्‍थायी नुकसान होगा.  हालांकि सेबी के चीफ जनरल मैनेजर एन. मुरुगन ने कहा कि अतिरिक्त ब्रोकरेज की छोटी मात्रा और निरीक्षण के बाद सुधारात्मक कदम जैसे कारकों पर विचार किया गया, लेकिन उन्होंने ब्रोकर को दायित्व से मुक्त नहीं किया है.